⬜ Not used yet · 00:00:01:28 – 00:17:42:09 (17:40)
00:00:01:28 [घंटी की आवाज़] दीदी सबसे पहले मैं जानना चाहूंगा कि जो ये हम सुनते हैं मुरली ब्रह्मा कुमारीज जब हम जाते हैं तो ये मुरली क्या है? आपने ना शुरुआत में ही बहुत लास्ट वाला क्वेश्चन पूछ लिया। बहुत अच्छा लगा मुझे कि आप मुरली जानते हैं। जी। हमारे यहां जब भी कोई आता है तो उसका एडमिशन जो होता है वो सेवन डेज मेडिटेशन बेसिक कोर्स होता है। एक जो मेडिटेशन कोर्स होता है सेवन डेज का हम आफ्टर सेवन डेज हम लोग भगवान के महावाक्य सुनते हैं। उसे ही मुरली कहते हैं। सेवन डेज का जो बेसिक कोर्स है वो भी हम लोग में से किसी ने कोई रिसर्च थीसिस नहीं किया। कैसे भगवान आकर के ज्ञान देते हैं? भैया लोगों को लगता है कि जब भगवान आएंगे तो कुछ मिरेकल हो जाएगा। वो कोई जादू की छड़ी लेकर के आएंगे, घुमाएंगे और सब कष्ट दूर हो जाएंगे। हम पर भगवान विधि विधाता है। वो विधि से स्टेप बाय स्टेप चलने वाले हैं। अच्छा। वो हमें जीवन को प्रैक्टिकल जीना सिखाते हैं। तो वो जब आते हैं तो वो आकर के हमें स्टेप बाय स्टेप आप आप कौन हो? आपका सत्य परिचय। अभी आपने कहा कि आप अपना परिचय दीजिए। तो मैंने तो इस कॉस्ट्यूम का परिचय दिया। जी। इसके पहले भी मेरा अस्तित्व
00:01:17:06 है। तो डे बाय डे फर्स्ट चैप्टर, सेकंड चैप्टर नो योर रियल सेल्फ। फिर आपका सोलमेट कौन है? हम तो ये सारा ज्ञान भी ईश्वर ने ही दिया। जी। भगवान ने अर्जुन को पढ़ाया था। हनुमान जी ने श्री राम जी की भक्ति नहीं की थी। आरती नहीं उतारी थी। लेकिन वो जब कहते थे तो वो कहना मानते थे। हम तो ईश्वर आकर के पढ़ाते हैं। भगवान समझ देते हैं। आप देखिएगा भैया घर में अगर हमारे कोई दुखी परेशान होता है ना वो पता है क्या कहते हैं? बार-बार उस तंग करता है। तो हम कहते हैं हमारे घर में कोई एक व्यक्ति समझदार बन जाए ना तो मेरे घर में सुख शांति आ जाए। तो सुख शांति खुशी का आधार क्या है? समझदारी चीजों की प्राप्ति नहीं। तो ज्ञान के सागर परमात्मा जो हमें ज्ञान देते हैं जो हम रोज उनकी वाक्यों को पढ़ते हैं उसी को हम मुरली कहते हैं। आज अगर 9 तारीख है आज 9 तारीख है ना जी तो नाइंथ जनवरी की मुरली हमारे विश्व के जितने सेंटर्स हैं सब पर एक ही चैप्टर और हर व्यक्ति उसी चैप्टर से समझता है कि आज भगवान ने मुझे क्या इशारा दिया है करने के लिए जो मेरी कल की समस्या थी उसका कैसे सॉर्ट आउट करना है उसकी भी तरीका उसमें बताया जाता है तो उसी को मुरली कहते हैं यानी ज्ञान के अस्त्र शस्त्र अच्छा यानी कि एक ईश्वर [गला साफ़ करने की आवाज़] के विषय में
00:02:32:07 ज्ञान ईश्वर के विषय ईश्वर कैसा है क्या है और दूसरा यह कि हमें अब ईश्वर को प्राप्त कैसे करना है? ईश्वर फिर हमसे क्या चाहते हैं? जी भैया अभी हम जब मंदिर गए, हमने भगवान को प्रेयर किया तो मंदिर में भगवान हमसे बात करते हैं। हम भगवान की सुन के आते हैं क्या? हम तो सिर्फ मंदिर में अपना बोल के आते हैं। सुन के तो नहीं आते। और हम कहते यह है कि हम भगवान की मर्जी से चल रहे हैं या सब कुछ भगवान की मर्जी से हो रहा है। हम हमें तो भगवान की मर्जी का पता भी नहीं है ना कि भगवान की मर्जी क्या है? तो मुरली मतलब भगवान की मर्जी। तो एक है भगवान के बारे में जानना। फिर मुरली मतलब भगवान अब कह रहे हैं कि आपको अब डे टू डे लाइफ में करना क्या है? कैसे चलना है? यानी कि भगवान की वाणी ही मुरली है। तो ये मतलब वाणी किसी शास्त्र में लिख के आपके पास है या आकाशवाणी जैसा कुछ है जो होता है। क्या है ये? भगवान जो अपना ज्ञान सुनाते हैं। भैया ये मतलब ऐसा चैप्टर है ना कि हम इसको लास्ट डे बोलते हैं। हमारा जो सिलेबस में है ना सबसे लास्ट चैप्टर आपने पूछ लिया। मुझे मुझे आपने मुरली सुना कहां से? किसके बारे किससे सुना ये वर्ड? मुरली आपके कई सारे YouTube चैनल्स वगैरह उस पर बात होती है। जी एक महावाक्य है भगवान के मुझे अपना रथ नहीं है।
00:03:47:08 कौन सा रथ? घोड़ेगाड़ी वाला रथ नहीं। मुझे अपना शरीर रूपी रथ नहीं है। मैं अजन्मा हूं। अकाया हूं। लेकिन मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए मुझे पर काया प्रवेश करना पड़ता है। पर काया मतलब किसी और की काया में। और जिसकी कथा में प्रवेश करता हूं वह साधारण बुजुर्ग रथ होता है। तो इसी कारण मुझे कोटों में कोई विरला पहचान पाते हैं। तो भगवान ने ये महावाक्य बोले तो जिस शरीर में आकर के भगवान जी ज्ञान सुनाते हैं उस वक्त कुछ नहीं हो रहा होता भैया। आज के समय में प्रिंट मीडिया आ गया तो उधर भगवान वाणी चलाते हैं और इधर हम तुरंत तुरंत प्रिंट मीडिया से सब जगह पहुंच जाते हैं। अच्छा जब पहले के समय में दादियां वगैरह थी तब तो कुछ भी नहीं था। हम तो कार्बन कॉपी उधर भगवान के महावाक्य चल रहे होते थे और दादियां बैठकर के कार्बन लगा के लिख रही होती थी तो मतलब किसी के शरीर में भगवान को प्रादुर्भाव होता है और फिर वो जो बोलते हैं वो हमारा धर्म ब्रह्म का निर्णय होता है जी अच्छा चलिए अब एक उस पे आते हैं कि जो हमने मुरली की जो व्याख्या सुनी अभी
00:04:54:00 ये जैसे हम कहते हैं कि सनातन सिद्धांत धर्म की बात नहीं कर रहा क्योंकि आप आपने जो डेफिनेशन बताई उसमें शायद आप इस्लाम को भी धर्म कहते हैं और उसको भी धर्म कहते ही हैं। सब दैहिक धर्म हो गया। सब धर्म है। तो अभी मैं इसलिए मैं उसको धर्म नहीं कह रहा हूं। तो ये जैसे हमने कहा कि सनातन सिद्धांत हमारे सिद्धांत सनातन है कि नहीं? हम सनातनी है कि नहीं? ये आप मुझे बताइए। सनातन का मतलब एवरलास्टिंग जो कभी खत्म नहीं होने वाला। जो कभी शुरू भी नहीं हुआ है। जी। ठीक है? तो जो कभी शुरू नहीं हुआ और जो कभी खत्म नहीं होने वाला वह सनातन चीज क्या है? सुख, शांति, पवित्रता, खुशी। ये सारी चीजें हमें एवरलास्टिंग चाहिए ही चाहिए। जो नास्तिक जैसे अभी आपने कितना सुंदर कहा आप उनको भी ऐसे काउंटर कर ले तो चाहिए ना। तो ये चीजें कभी खत्म होने वाली नहीं। जी। हमारे देवी देवताएं, देव आत्माएं कभी चैतन्य में थे। आज उनकी जड़ मूर्तियों की भी पूजा हो रही है। यानी उनका यादगार हमेशा रहेगा। क्यों? वैल्यूस के आधार पर, मूल्यों के आधार पर, चरित्र के आधार पर उनका जीवन था। तो सनातन मतलब जो आत्मा से जुड़ा हुआ है, वह हमेशा के लिए हो जाएगा। शरीर से जुड़ा हुआ मेरा पोस्ट, मेरा पोजीशन तो
00:06:09:06 लोगों को याद करना पड़ता है और कुछ समय के बाद हमको भुला भी दिया जाएगा। लेकिन वैल्यूस के आधार पर देव आत्माओं से लेकर के चाहे विवेकानंद जी को तक को देख लीजिए। जिन्होंने अपने जीवन को वैल्यूस पर स्टैंड किया वो एवरस्टिंग हो जाते हैं। नहीं नहीं ये तो आप सही कह रही हैं। मैं एक्चुअली मेरा जो प्रश्न था थोड़ा सा अलग था। जैसे हर हम यह जानते हैं कि आत्मा को कभी मारा नहीं जा सकता। नैन चिंदती शस्त्राण नैन धति पाव ना चैनम क्ले शोष मारता। आत्मा को कभी नहीं मारा जा सकता और ना ही आत्मा कभी जन्म लेती है। और क्या कहते हैं? प्रकृति वह भी सनातन है और परमेश्वर भी सनातन है। तो यह तो हो गया कि हम हम सनातन हैं। मगर आज के टाइम में जैसे हमारे जो सिद्धांत हैं जिनको हम फॉलो कर रहे हैं। यह करना है। यह नहीं करना है। यह सिद्धांत ब्रह्माकुमारीज के सनातन है। यानी कि सनातन सिद्धांत को मानता है या ऐसे सिद्धांतों को मानता मानता है जो बदलते हैं जिनका कहीं पे चालू हो रहा है, कहीं पे खत्म हो रहा है। सनातन सिद्धांत है। ब्रह्माकुमारी के या सनातन सिद्धांत नहीं है। देखिए ये हर जगह दो चीजें होती है। एक होता है जो हमेशा वही चलते हैं और एक होता है टाइम के अकॉर्डिंग हमको फ्लेक्सिबल होना पड़ता है। टाइम के अकॉर्डिंग अब फॉर एग्जांपल अगर
00:07:24:07 आप सनातन सिद्धांत का कह रहे हैं सुबह उठने की इसको सिद्धांत मानते हैं आप? सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। उठना ये सिद्धांत ही है। सिद्धांत अमृतवेला इसे हम लोग अमृतवेला कहते हैं। तो अमृतवेला उठना खानपान की शुद्धता हमारे खानपान की शुद्धता होनी चाहिए। स्पेशली हम लोग जो यहां पर रहने वाले जो हम लोग अनमैरिड हैं सेलबसी की पालना ब्रह्मचर्य व्रत की पालना यह हम लोगों को जो यहां रहते हैं उनके लिए है क्लास में हमारे आने वालों को बताया सब कुछ जाता है जितना जितना कर सकते हैं तो ये कुछ चीजें बाकी गुण शक्तियां है टाइम के अकॉर्डिंग जैसे आप भी कहते हो कि कई बार हमारा झूठ अगर किसी को बचाने के लिए हो रहा है तो सत्संग वो आपातकालीन धर्म वो वो तो ये ये दोनों चीज़ ऐसी उसकी व्यवस्था भी कर दी गई यस तो जैसे आपने भैया ये कहा ना कि आज के यूथ्स क्यों नहीं मानते हैं? भगवान को क्यों नास्तिक है? तो मुझे अभी एक थॉट और आया कि कहीं ना कहीं हम लोगों ने स्पिरिचुअलिटी को बहुत टिपिकल बना दिया। मतलब बहुत ज्यादा हम लोगों ने क्या कर दिया कि एक तो है कि बच्चों को वैल्यूस बताना कि ये नहीं करना नहीं ये नहीं करना तुमने पूजा नहीं किया तो ऐसा हो गया। आज तुमने ये नहीं किया। तो उनको ऐसा लगता है कि एक तो लाइफ ऐसे ही इतनी डिफिकल्ट इतनी टफ है। उसमें से एक चीज यह भी इतनी टफ टफ बता दी जाती है। तो कहीं ना कहीं मुझे ऐसा लगता
00:08:39:10 है कि हम लोगों ने भगवान को बहुत मुश्किल पाना बता दिया है। भगवान तो बहुत ऊंची चीज होती है। उनको पाना ही मुश्किल है और अगर उनको पा लिया तो वो ये ये करना करने के लिए कह देंगे जो शायद तुम कर भी नहीं पाओगे। तो मुझे ऐसा लगता है कि आजकल युवक इसीलिए भाग रहा है कि वो अपने रोज के काम तो कर नहीं पा रहा है। उसको लग रहा है भगवान से जुड़ गए तो मुझे चार काम और एक्स्ट्रा बता दिए जाएंगे। हमें यहां क्यों हमने इसको ज्वाइन किया भैया? अभी आपने देखा एक छोटा भैया वो भी यहां पर कर रहा था। हम हम लोग बचपन से क्यों आ गए यहां पर? बहुत इजी तरीका बताया गया। स्पिरिचुअलिटी को बहुत इजी हमें सुबह कभी उठने के लिए भी फोर्स नहीं किया गया। हमें कहा गया आपको दिन में जब मौका मिले आप 1 मिनट के लिए भगवान जी से बात कर लो। सिर्फ हमको ये आप जब जगे हो तब आप 1 मिनट के लिए भगवान जी से बात कर लो। आप चार्ज हो जाओगे। फिर जो अच्छा होगा वो अपने आप करने लगोगे। और ये हमने फील किया भैया हमने क्या फील किया? हम करते थे एक मैगनेट का मेडिटेशन। आज की डेट में पिछले 25 सालों से एक दिन भी ऐसा नहीं हुआ जब हम सुबह 3:30 बजे नहीं उठते और विलिंगली उठते हैं। जैसे पहले पिक्चर देखने का क्रेज होता था ना। अब ब्रह्म मुहूर्त का क्रेज होता है। तो इजी हो गया। वो एक्चुअली भगवान ने कहा ना कि तू मेरी शरण में आजा। मैं देखूंगा तेरी प्राप्ति और प्राप्ति की चिंता मैं करूंगा। तो
00:09:55:18 एक्चुअली मैं ये कहना चाह रहा था कि आपकी जो ये जो जो मुरली है जो धर्म ब्रह्म की व्याख्या करती है जो डेली आती है ये आ रही है इसका प्रादुर्भाव हो रहा है और ईश्वर आकर के दे रहे हैं तो फिर ये जो आपका जो यह चीज है यह सनातन तो है नहीं भैया मैं ये तो कह रही हूं ना कि आपने प्रश्न ऐसा पूछ लिया ये ऐसे चल रहा है सर्किल में तो हमने एक चक्र तो समझा ही नहीं है एक रेपुटीशन भी है हम इसीलिए इसीलिए हम लोग चैप्टर वन चैप्टर टू डे बाय डे कराते हैं। आपने मतलब क्योंकि आप YouTube पे देख करके आए हो ना तो आपने पहला प्रश्न ही वह वाला पूछा है जो नहीं नहीं ऐसा है वह नाम बड़ा अट्रैक्ट करता है मुरली मुरली और कोई बात नहीं चाहिए भैया मुरली का मतलब है जो मन को हल्का कर दे आज के समय में कौन सा ऐसा एडवाइजर है जो मेरे मन को हल्का करे हम मैं आपको अपना दुखड़ा सुना के शेयरिंग करके मुझे लगता है कि हल्का हो गया लेकिन मेरा गम तो कम नहीं कर दिया ना आपने इवन कई बार तो मुझे ये भी टेंशन हो जाता है कि देखो ये मेरा कहीं फैला ना दे मैंने इसको बता तो दिया अपनी इतनी प्राइवेट बातें एक चार लोगों को सुनाना दे जी मुरली मुरली का मतलब भगवान से बातें भगवान हमें गाइड कर रहे हैं कि आपकी इस प्रॉब्लम का सशन ऐसे हो जाएगा तो मन हल्का हो गया हम तो इसीलिए जो आपने पूछ लिया ना प्रादुर्भाव ये एक्चुअल में सनातन है ये आपको लग रहा है अभी आ रहा है नहीं ये पहले
00:11:10:19 भी आ चुका है अभी फिर आ रहा है हिस्ट्री रिपीट्स इटसेल्फ कहते हैं ना भैया हम तो इसी तरीके का कुछ है कि भगवान ने कहा एक चीज है जो रिपीट हो रही है एक आइडेंटिकली रिपीटीशन अच्छा उस रेपीटीशन के अकॉर्डिंग अभी आपको लग रहा है कि अभी आ रहा यह बार-बार आया और आता रहेगा। तो यह जो पहले आया है मतलब यह जो इसका कोई प्रमाण कि जैसे [गला साफ़ करने की आवाज़] प्रूफ कि जैसे पहले भी आ चुका है। आज आपने पहले ही शो में ऐसा प्रश्न पूछा है तो मैं आपसे यही कहूंगी क्योंकि हम इसको इस प्रश्न का उत्तर जब हमारे क्लास वाले भी जब हमारे कोर्स करने वाले आते हैं ना और वो पूछते हैं तो हम उनसे कहते हैं आज नहीं 7 दिन के बाद आपको अपने आप इसका आंसर मिलेगा। लेकिन क्योंकि आप हमसे पूछ रहे हैं तो मैं सिर्फ आपसे एक प्रश्न का प्रश्न पूछ रही हूं कि क्या आपने कभी ऐसा फील किया है? कई बार आपको ऐसा लगा है कि कोई सीन हमारी लाइफ में ऐसा हो रहा है। बहुत जरूरी नहीं कि बहुत विशिष्ट हो। सिंपल चीजें कुछ ऐसी चीज ऐसा लगता है जैसे पहली बार भी ऐसे हो चुका है। ऐसा पहले भी मेरे साथ हुआ है। पर्टिकुलर कोई कपड़े की ड्रेस, कोई एक डायलॉग मैं मान लेता हूं। हां हुआ होगा। बिल्कुल तो इसीलिए मैं आपको ये बता रही हूं। प्रमाण आपने कहा ना तो इसका पहला प्रमाण अभी के आपके क्वेश्चन के हिसाब से सिर्फ इतना ही है कि अगर मुझे कभी यह लगा है कि
00:12:25:25 नहीं ये वाली चीज तो मैंने पहले भी कभी देखी है कब देखी है मगर मत जाइए वो mp3 घूम गई है ये सॉलिड है इसलिए सॉलिड नहीं है भैया क्योंकि मैंने कहा ना आपने लास्ट क्वेश्चन पहले दिन ही पूछ डाला है इसको फर्स्ट शो में हमने ये पूछ लिया आपने अब अगर हम इसको हम चैप्टर वाइज डे बाय डे शुरू करेंगे ना तो आपको ये प्रश्न पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी इसका आंसर आपको खुद ब खुद मिलेगा जी हम लोग जब बात करते हैं समय की मतलब हम शास्त्रों पर बहुत ज्यादा रिलाई नहीं करते वेद है जो वेद आयते हैं जो वेदों से चला हमारा फिर क्यों नहीं करते हैं शास्त्रों ने ही तो हमको बांध करके रखा तो शास्त्र में तो दिया गया है ये सब पहले रिपीट हो चुका है दोबारा आ रहा है सिंपल बस मगर उसमें ये नहीं दिया है जो मुरली आती है इस तरह से जो आज आ रही है जो इस तरह से ये देखो भैया देखो शास्त्र लिखा किसने भगवान ने नहीं लिखा है लिखा इंसान ने तो इंसान ने और हर व्यक्ति ने अलग-अलग लिख डाला है नहीं कुछ आपने लिखा कुछ मैंने जो वेद है उसको तो श्रुति कहते हैं ना ईश्वर की वाणी वाणी तो है लेकिन लिखा फिर किसने उस समय तो प्रिंट मीडिया नहीं था ना किसी ने तो लिखा होगा ये ऐसे है जैसे आपकी जैसे जिसे आप मुरली कह रहे हैं यहां से हजारों किलोमीटर दूर जहां मतलब यहां पे शायद माउंट आबू में मुरली आती है तो वहां पे जो जिस शरीर में आ रही है जी उसके
00:13:41:03 अलावा किसी व्यक्ति ने उसको नोट किया है जी तो उनके लिए वो ये कह सकते हैं कि ये भगवान की वाणी है कि नहीं जी जी वो भी ये कह सकते हैं कि भगवान की वाणी तो आपने प्रश्न क्या किया कि उसमें लिखा हुआ है वेद में कि ऐसा पहले भी हो चुका है। जब शास्त्र पे हम लोग जाते हैं तो उसमें क्या कहते हैं उसमें ये सब चीजें हैं कि जो हमारी सृष्टि है वो एक बार नहीं कई बार बनी है। इसीलिए कभी सृष्टि का निर्माण देवी तत्व के द्वारा हुआ, कभी विष्णु तत्व के द्वारा हुआ, कभी शिव तत्व के द्वारा हुआ। वो भगवान की अपनी मर्जी कि किस रूप में किस रूप में अपने आप को ख्यापित कर रहे हैं। तो ये तो ये बात हो गई। फिर आपने ये कहा ना कि मगर वो ईश्वर ने नहीं लिखे हैं। वो लिखे तो इंसानों ने ही है। तो ये मुरली भी तो इंसानों ने ही लिखी है। वो मैंने कहा ना कार्बन कॉपी से एज इट इज वहां पर क्या हुआ भैया? वहां पर अमेरिका में जो व्यक्ति नहीं वहां पर समय का डिफरेंस नहीं हुआ। तुरंत तुरंत चल रहा है। इधर आप डिक्टेट करो। इधर मैं लिख रही हूं। कितना भी कर ले। किसी ना किसी को किसी ना किसी पे विश्वास तो करना ही पड़ेगा। बिल्कुल करना पड़ेगा। ये नहीं कह रहे हैं। जैसे आपने कहा ना व्हाट इज द डिफरेंस? नहीं आप कह रहे हो उसमें भी लिखा हुआ है वह भी इंसान ने लिखा और आपके यहां भी जिन्होंने लिखा वह भी इंसान ने लिखा तो फिर वह भी ऐसा कह सकते हैं उसमें यह समय का डिफरेंस है आज से इधर सुनाया जा रहा है और इधर लिखा जा रहा है समय का डिफरेंस ऐसे है
00:14:56:07 कि आज से 10 साल पहले जो मुरली आई होगी वो हो गया समय का डिफरेंस उनके लिए भाई उस समय में तो कई लोग ऐसे होंगे जो हाथ जोड़ रहे हैं मगर वो 10 साल पहले की मुरली भी उनको माननी होगी लेकिन लिखा तो किसी और जिसने जिसने ये हमको पता है कि ये तभी लिखा गया जब सामने बैठा था सामने सामने विश्वास करना पड़ेगा। पड़ेगा। करना विश्वास पड़ेगा। वहां विश्वास करना पड़ेगा। जैसे हम लोग वहां पर क्योंकि क्वेश्चन उठा रहे हैं। ये बात बहुत समय पहले की नहीं है। नहीं नहीं हमारे सामने भी ऐसे लोग हैं जिन्होंने लिखते हुए देखा। मगर उन्होंने बोलते हुए देखा। मगर मैं कह रहा हूं कि अगर इस दुनिया में अगर 10 लाख लोग भी ब्रह्माकुमारी से जुड़े हैं। उन 10 लाख ने नहीं देखा तो जो बाकी रह जाएंगे जिन्होंने नहीं देखा है वो ये क्वेश्चन कर सकते हैं कि भाई देखा तो वो जो है वहां पर ट्रस्ट ही आएगा। आस्था ही आएगी। तो तो जैसे हम ये काउंटर कर रहे हैं कि वो लिखा तो इंसानों ने। देखिए भैया अगर मैं आपसे कहूं कि वेदों को आपने किसी को लिखते हुए बोलते हुए नहीं देखा होगा। हम इतना कह सकते हैं कि हमने भगवान को बोलते हुए इन्हीं आंखों से देखा है। तो किसी शरीर में आके ना होता है ना कि मैंने देखा। मैंने देखा। किसी शरीर में आके किसी ने देखा होगा। उन्होंने मुझे बताया था मैंने विश्वास कर लिया। नहीं जैसे आपने मुझे कहा ना मैंने देखा। आप पर मुझे विश्वास होना चाहिए। नहीं तो विश्वास करने की मार्जिन थोड़ी तो बढ़ जाती है ना भैया।
00:16:11:08 एक है कि आपने भी नहीं देखा, मैंने भी नहीं देखा। हमें किसी ने बताया था। नहीं लेकिन अभी मैं सामने बोल रही हूं कि नहीं मैंने जो वेद जो वेद शास्त्र है हमारे वेद या जो भी शास्त्र है वो आते हैं गुरु शिष्य परंपरा से। तो गुरु ने अपने शिष्य को दिए शिष्य ने फिर अपने शिष्य को दिए। तो जो ले रहा है पिछले वाले से उसको इस पर विश्वास है। और ये ले रहा है इससे तो इसको इस पर विश्वास है। ऐसे ही आपकी भी कर रहे हैं। ऐसे ही मुरली भी होती है। भाई जो बहुत सारे ऐसे होंगे जो सिर्फ उनके पास पहुंच रहा है। वो देख नहीं रहे हैं। मगर वो उनको ट्रस्ट अभी जो आ रहे हैं वो ऐसे ही आ रहे हैं। अभी जो आ रहे हैं तो वो तो कुछ नहीं देख रहे हैं। लेकिन ट्रस्ट पे ही आ रहा है और एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं। पहले हम पर ट्रस्ट किया फिर जो सुनाया उसको एक्सपेरिमेंट किया और उनको अच्छा लगा तो समझ में आ गया दिस इज राइट। तो अब यह बात आती है कि हम यह काउंटर नहीं करना चाहिए कि वो किसी भगवान ने नहीं बोले वो तो नोट डाउन किए हैं। अच्छा मैं ये कह रहा था एक क्वेश्चन यहां पे और पुट अप होता है और यह बड़ा इंटरेस्टिंग क्वेश्चन है कि ईश्वर ने ही सब कुछ बनाया है। इस दुनिया में अच्छाई है तो उसका कारण ईश्वर है और इस दुनिया में अगर बुराई है तो उसका कारण भी ईश्वर है। अगर कुछ अच्छा हो रहा है तो उसका कारण भी ईश्वर है। अंततोत्वा बिल्कुल फाइनली जो
00:17:26:12 बेस है तो ईश्वर ने ही सब कुछ बनाया है। अगर बकरी को ईश्वर ने बनाया है तो शेर को भी ईश्वर ने ही बनाया है। तो की रचना प्रकृति की रचना अच्छा मैं मैं इसको बाद में ले लूंगा। ये यहां
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→ Used in: B · Video क्या जो सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान नहीं उस ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध हो सकता है? #bra... at 0:03 ↗
00:17:42:09 से हो जाएगा। जैसे कि हमने ये जाना ना कि व्यक्ति जब अपने जो ये साइंस है विज्ञान है इससे जब वो पार नहीं पा पाता है अपने जीवन में सुख और इसकी तभी उसके जीवन में यहां पर आ रहा है कि भाई ईश्वर है। है ना? तो यहां से हुआ यह कि एक सर्वशक्तिमान सत्ता है। जहां सब कुछ फेल हो जाता है मगर वो सब कुछ भी कर सकती है। उसी के होने के कारण उसको एक संतोष रहता है कि मैं भाई ईश्वर को भज लूंगा तो मेरा जो है कल्याण चाहे बिल्कुल विपदा बिल्कुल खड़ी हो आपने आप प्रलय खड़ी हो सामने मगर उसको वो ईश्वर जो है वो इस प्रलय को भी रोक सकता है। है ना? इसीलिए आपने जैसे कहा कि उसको थैंक गॉड निकला निकल जीतने के बाद जैसे हम जो नास्तिक को संतुष्ट कर पाते तो इससे करते हैं कि तेरे अंदर भी सदा सुखी रहने की चाह विद्यमान है। तो इस अगर तेरे अंदर सतचित आनंद की चाह है तो इसका मतलब कोई दुनिया में सतचित आनंद है। अगर तेरे मन में भी ये आ रहा है कि बारिश थोड़ी कम हो जाए। नास्तिक के मन में भी आता है मुझे जाना है जल्दी तो बारिश थोड़ी कम हो जाए। यानी वो मौसम को भी कंट्रोल करने वाला बनना चाहता है। उसके मन में भी आता है धूप थोड़ी कम हो जाए। यानी वह धूप को भी कंट्रोल करने वाला बन कभी-कभी आता है मैं भविष्य देख लूं। नास्तिक भी सोचता है कल इंडिया पाकिस्तान में कौन जीतेगा? ऐसा
00:18:57:15 नास्तिक भी सोच लेता है। यानी कि वो भविष्य देखने वाला ही बन बनना चाहता है। तो हम जब यह ईश्वर को ईश्वर के एकिस्टेंस को प्रूव ही इससे कर पा रहे हैं कि वो व्यक्ति हर तरह के प्राकृतिक नियमों से परे हो जाने का सोच रहा है। तो उसकी इस चाह का जो सब्जेक्ट है वो वही ईश्वर है जो सर्वशक्तिमान है। सच्चिदानंद स्वरूप
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00:19:18:00 परमेश्वर। जब हम यह कहते हैं कि ईश्वर की वाणी मुरली के रूप में डेली आती है तो जो हमारे वेदादी शास्त्र है वो यह नहीं कहते कि उनको ईश्वर ने रचा है। हमारे वेदादी जो शास्त्र हैं वो यह कहते हैं कि हम अपौरुषय हैं। हमको ईश्वर ने रचा नहीं है। हम ईश्वर की सांस के रूप में सदैव विद्यमान थे। इसका कारण मैं बताऊंगा आपको। क्योंकि जो हम दो तरह के कार्य करते हैं। एक चाहकर और एक बिना चाहकर। तो जब हम चाह के कुछ करते हैं तो उसमें हमारी बुद्धि इन्वॉल्व हो जाती है। तो हम निर्णय ले सकते हैं हम क्या करें? ऐसे करें कि ऐसे करें। जैसे मुझे आपको कुछ बोलना है मेरा नाम तो मैं चाहूं तो सच्चा नाम बताऊं। मैं चाहूं तो झूठा नाम बताऊं। तो इसी तरीके से जो ईश्वर है वो वो यदि चाह करके आपको कुछ कर रहा है। जैसे आपने कहा वो चाहता है अच्छा करना चाहता है और वह आपको आकर के वाणी दे रहा है मुरली के रूप में। तो क्योंकि ईश्वर देखिए ईश्वर सिद्ध ही नहीं होगा। अगर हम उसको सब कुछ करने वाला सब कुछ बनाने वाला नहीं मानेंगे तो वो वो जो मनुष्य की चाह है ना उसका विषय नहीं बनेगा और जब विषय नहीं बनेगा तो उसको नकारना बहुत आसान होगा। नास्तिकता परचम अपना लहराएगी। ये जो आपकी जो ये चीज है ना ये तब तक है जब तक नास्तिकता
00:20:33:01 का खंडन होता रहे। उनको रोका जाता रहे और लोग मानने वाले दुनिया में बनते रहे। भगवान उसके बाद आप भगवान की चीजें उनको दे दो। मतलब उस घेरे के अंदर की नास्तिकता को हरा दिया। उस घेरे के अंदर रहते हुए आप मतलब सर्वाइव कर सकते हो। अगर आप इसी को आपने घेरा बना दिया तो ये सर्वाइव ही नहीं हो पाएगा क्योंकि इम्युनिटी वहां मुझे एक ऐसा आ रहा है जैसे छोटा बच्चा होता है। मैं मैं एक पेट भरा होता है। मैं एक चीज पूरी कर लूं। तो जो यह है कि ईश्वर ने सब कुछ बनाया तभी हम उसको ईश्वर को ईश्वर मान सकते हैं। ईश्वर ही सब कारण है हर चीज का। तो क्या है कि कोई व्यक्ति अगर झूठ भी बोल रहा है उसका भी उसको भी वो भी ईश्वर ही सत्ता से बाहर नहीं है। जैसे मैं अपने यहां पे झूठ बोल रहा हूं। तो यहां पर ईश्वर की शक्ति है ना। वो चाहे तो मुझे रोक सकता है। मेरी जुबान लड़खड़ा जाए, कुछ हो जाए अभी कभी बत्ती बंद हो जाए। कुछ कर सकता है ईश्वर। मगर वह नहीं कर रहा है। इसका मतलब उसकी सत्ता में है। है ना? कहीं पर कुछ भी हो रहा है तो उसकी सत्ता के अंदर ही है। उसकी शक्ति तो हर जगह आपने भी मानी तो उसकी शक्ति की सीमा के अंदर सब कुछ है। इसलिए ईश्वर यदि चाहकर आपको कुछ बताएगा तो उस पर हमारा विश्वास नहीं हो सकता।
00:21:48:19 क्योंकि ईश्वर ने चाहा जब मैं आपको चाह के जब ईश्वर चाह के कुछ बताएंगे तो क्योंकि ईश्वर दूसरी चीजें भी कर रहा है। ऐसी ऐसी चीजें भी हो रही है। तो इसलिए जो सनातन के द्वारा जो माने जाने वाले शास्त्र हैं और वो जो शास्त्र है वो अपौरुष है। उनको कभी ईश्वर ने रचा नहीं। तो इसलिए उस पर बिलीव है। ईश्वर भी स्वयं बुद्ध के रूप में आए। बुद्ध के रूप में ईश्वर आते हैं तो सनातन धर्मी जो होते हैं मना कर देते हैं हम बुद्ध को नहीं क्योंकि वह वेदों को मना करते हैं और वेद कौन से शास्त्र है जिनको ईश्वर ने भी रचा नहीं है जैसे सांस लेना होता है ना हमारा जैसे मैं बोल रहा हूं तो ये मेरी चाह है कि मैं बोलूं तो इस पर मेरा कंट्रोल है मगर सांस शुद्ध है एक बच्चा भी जन्म ले रहा है उसकी कोई चाह नहीं है वो जो है सांस ले रहा है तो इसलिए ये परम प्रमाण जो है श्रुति को कहा गया अपुषय वेद तो अब हम जब वो सारी बातें तो खैर उसमें आपने उसमें आपने गए नहीं है तो मुझे लगा कि शायद आपको मालूम हो 25 साल से आप हैं तो आपने चीजें की
00:23:08:18 [संगीत]
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अंतिम प्रमाण वेद या मुरली ?ब्रह्माकुमारी वाले स्वयं को हिंदू ना समझे
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