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00:00:01:28 [संगीत] जय श्री राम। आपको आपका मिस कॉल आया हुआ था। आपने मुझे फोन किया ना दूसरे नंबर। अच्छा अच्छा हां जी। हां जी। हां जी। अच्छा अच्छा ओके ओके ओके हां जी। आप आर्य समाज से हैं? नहीं नहीं आर्य समाज से नहीं है। फिर नहीं। मैं सनातन धर्म को फॉलो करता हूं। बहुत अच्छे से। आपको हमारी कोई बात गलत लगती है? हां जी उसी पर बात करनी थी मेरे को। कौन सी बात है? हां एक्चुअली क्या है गौरव को शायद मेरी बातें समझ नहीं आई। वो थोड़ा छोटा है थोड़ा इस वजह से शायद उसको समझ नहीं आई मेरी बातें। तो इस वजह से उसने बोला कि आपसे बात कर लो तो हो सकता है आप मेरे उत्तर दे दो। कौन सी बात है? था कि जो ब्रह्मा और सरस्वती वाला जो क्या नाम है प्रसंग है हम ब्रह्मा जी वाला हम तो कल गौरव ने मेरे को उस पे क्या नाम है एक वो भेजा उसमें वो मेरे को मतलब उसने मेरे को बताया कि भाई ब्रह्मा जी जब सरस्वती जी आती हैं मतलब उनके उनके दो भाग हो जाते हैं ब्रह्मा जी के तो वो उन्हें पहले बेटी बोलता है वो मतलब बोलते हैं कि पुत्री मतलब आप आपको ये जो पौराणिक कथाएं हैं। इनको
00:01:17:03 आप स्वीकार नहीं करते। ये कहना है आपका। हां जी। हां जी। बाकी आप मूर्ति पूजा करते हैं? नहीं मूर्ति पूजा नहीं करता मैं। हां। मतलब निराकार को मानते हैं आप। हां जी। निराकार को मानते हैं। हां जी। हां जी। हां जी। हां जी। अच्छा। हां जी। और ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। ये ये भी मानते होंगे। नहीं मेरा देखिए मेरा तो ये भाई मूर्ति नहीं मानते। ईश्वर अवतार ईश्वर ही आ जाए। ईश्वर सब जगह है वो बात अलग है। ईश्वर ही आ गया। ईश्वर ही आ गया। ईश्वर ईश्वर आ गया मतलब इसका इसका जरा मेरे को बताइए। मेरे को ये वाली बात थोड़ा समझ नहीं आई। अरे भाई मूर्ति पूजा नहीं करते तो इसका मतलब ये मानते हैं ना कि ईश्वर प्रकट नहीं हो सकता। नहीं नहीं देखिए मूर्ति पूजा नहीं मानने का। ईश्वर के उससे क्यों मेरे को लगता नहीं क्योंकि मैं मूर्ति पूजा इसलिए नहीं मानता बिकॉज़ मेरे सब हर जगह जगह मतलब परमात्मा का वास है। तो मतलब आप ये नहीं मानते ना कि ईश्वर किसी एक रूप में आ सकता है। हां जी मतलब मेरा मानना है किसी आप ये मानते हैं ना कि ईश्वर किसी एक निश्चित एक रूप में आ सकता है। यहां से उसका कंधा यहां से उसका कंधा चालू हुआ। दूसरी जगह कंधा खत्म हो गया। यहां से उसका सर चालू यहां से उसका कंधा लेफ्ट से
00:02:32:04 चालू हुआ। राइट में खत्म हो गया। इस तरह से आप इस अवतार को नहीं मानते। प्रकट नहीं हो सकता। इस तरह से ईश्वर। हां जी। हां जी। हां जी। मतलब मेरा मेरा एक्चुअली यह मानना है कि वो कोई मैं मैं समझ गया। मैं समझ गया। अब आपने मुझे कहा कि सनातन को आप मानते हैं तो इसमें आप एक लाइव चर्चा करना चाहते हैं हमारे साथ। कर सकते हैं। करना है। हां जी। लाइव चर्चा करेंगे आप? मतलब अभी? अभी नहीं शेड्यूल कर लेते हैं। आने वाले एकद दिन में कर लीजिएगा। आज कर लीजिए। नहीं देखिए एक्चुअली प्रॉब्लम थोड़ा ये होता है कि मैं ना थोड़ा सा मतलब मेरे को ना कहीं पर ऐसे लाइव आना वगैरह मेरे को पसंद नहीं है क्योंकि मैं थोड़ा दुनियादारी से दूर रह जाता हूं। देखो मैं सही बताऊं आपको। हम नहीं तो धर्म धर्म की रक्षा के लिए तो आ सकते हैं ना। दुनियादारी से दूर तो सबको रहना था। मगर द्रोपदी का चीर हरण हो रहा था तो आ गए सब लोग और जो नहीं आए वो दोषी बने। नहीं नहीं वो आपकी बात ठीक है लेकिन एक होता है ना कि क्योंकि आपकी मेरी अगर मान लीजिए वीडियो कॉल पे बात होगी हां तो वीडियो कॉल पे मैं तब आने को तैयार हूं कि उसको फिर कहीं आप लाइव नहीं दिखाएंगे लोग ना आके सिर्फ आपसे मेरी बात होगी देखिए मैं बता रहा हूं आपको देखिए हां जी मैं आपकी चीजों का जवाब दे दूंगा मगर फिर भी मैं आपको अपनी बात
00:03:47:08 बता रहा हूं हमारा कार्य है रोज जो सनातन के मौलिक सिद्धांत हैं उनके विरोध में सनातन के नाम से प्रचारित करने वाले वाले जो लोग हैं, तंत्र है इत्यादि जो ऐसी बातें कर रहे हैं उनकी उस वास्तविकता को कि कितने अंशों में वह सनातन के विरुद्ध है। उस वास्तविकता को समाज के समक्ष लाना और समाज को सही रास्ता दिखाना कि भाई देखो ये इस इस तरह से गलत है। इसलिए हमारा हम कोई भी अगर प्रयत्न करते हैं तो उसका अभीष्ट जो फल है या फिर यथोचित जो फल है उसकी हम कामना करते हैं। कि भैया हम आपको समझाएं हम एक घंटे आधे घंटे आपसे बात करें आपको समझाएं तो आप अकेले नहीं हो ना ऐसे समाज में बहुत सारी लोग हैं जो इस तरह की विकृतियां हमारे अनुसार आप तो सही हो आपकी नजरों में मगर हमारी जानकारी में आप भटके हुए हो तो समाज में ऐसे एक एक बात नहीं पूरा पूरा सुन लो तो समाज में कई लोग हैं तो हमारा आप अकेले को सही करने से हमारा उद्देश्य नहीं है हमारा उद्देश्य सामाजिक परिवर्तन लाना वैचारिक क्रांति लाना उसके लिए समाज के समक्ष वो चर्चा जाना आवश्यक है। तो आप ऐसा अगर
00:05:02:19 कर सके अगर आप ये करना है तो आप मुझसे बात को ना क्या क्या क्या नाम है रिकॉर्ड क्या कर लीजिएगा हम अगर उसमें आपकी बातें सही साबित हो जाती हैं तो फिर आप डाल दीजिएगा नहीं सही साबित नहीं हुई तब भी हम डाल सकते हैं उसमें क्या है नहीं नहीं वो आपका पक्ष विजय रहेगा नहीं वो आपका पक्ष विजय रहेगा नहीं नहीं नहीं वो नहीं होना ना मेरे को नहीं समझिए बात को नहीं नहीं वह हम लोग तय करेंगे ना कि हम डाल सकते हैं कि नहीं दूसरी बात यह भी हम तय करेंगे कॉल पे आपको समय देना है कि नहीं? क्योंकि कॉल की बात ऐसी होती है कि कॉल की रीच कम होती है। जब हम ऑडियो पे बात करते हैं तो उसको ज्यादा लोग नहीं देखते हैं। रुचि नहीं देखते हैं। जब सबसे ज्यादा रीच आमने-सामने चेहरे के साथ इस तरह से जो वार्ता होती है उसकी सबसे ज्यादा रीच होती है। कॉलिंग की उतनी रीच नहीं होती है। तो फिर वो भी हमें हमें डिसाइड करना होगा। हम आपको कॉल पे बात करें कि ना करें। अब मुझे एक बात बता दीजिए। आपने कहा कि आप सनातन से हैं। तो सनातन क्या चीज है? क्या चीज नहीं है? इस बारे में जो सनातन का कौन सा शास्त्र है जो आपके लिए प्रमाण है? नहीं देखिए मैं आपको अब शायद आपको मेरी बातें थोड़ी अजीब सी ना लगे।
00:06:17:20 बस और मेरी बात ना बुरा मत मानिएगा बस। ठीक है प्लीज। हां क्योंकि वो होता है ना अभी थोड़ी देर मैं सुन रहा हूं। आप अगर टू द पॉइंट बात करेंगे ज्यादा अच्छा होगा इधर उधर की बातें करने आप सीधे अपना पक्ष रखिए नहीं मैं इसलिए वाली बात बोल रहा हूं कि अभी अरे भाई अरे भाई तीन चार दिन पहले भी मुझे किसी से बात करवाई थी और उन्होंने फिर वो वो है ना चले गए थे छोड़कर देखिए आप टू द पॉइंट बात करिए हां जी आपका सनातन धर्म कहां से स्टार्ट है देखिए देखिए मेरा सनातन धर्म मेरे हिसाब से जो व्यक्ति खुद जान पाए वो है मेरे मेरे हिसाब से मतलब बाहरी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है हां जी हां जी हां जी अच्छा क्योंकि बाहरी प्रमाण में अगर मैं कुछ बात मानूंगा तो उसमें कुछ ऐसी बातें भी हैं जो जो मानने योग्य नहीं है मेरे हिसाब से क्योंकि हमारे में इस्लाम धर्म भी है बाकी धर्म भी है उनमें भी बहुत सारी ऐसी बातें हैं क्योंकि वो कहते हैं भाई हमारा श्रेष्ठ है। ठीक है मैं आपकी बात समझ गया बाहरी प्रमाण आपके लिए मान्य नहीं है जो आपको अपनी बुद्धि से सही लगेगा वही आपको मान्य है। हां जी। ठीक है। हां जी। हां जी। इसका मतलब यह है कि जो भी धर्म आज आप फॉलो कर रहे हैं, जो भी मानवोचित मानवीय शील आप फॉलो कर रहे हैं, वो सब आपके अंदर से आया है, बाहर से नहीं आया है। हां जी मेरे हिसाब से। हां जी कि मेरे को अंदर से आवाज आ रही है कि भाई ये चीज
00:07:32:21 ये बताइए। अब अब मैं आपसे कुछ प्रश्न कर रहा हूं। ये बताइए कि आप पहली बार जब बिना कपड़ों के बाहर गए थे तो आप स्वयं से रुक गए थे या माता-पिता ने रोका था? वो अंदर वो अंदर से वो अंदर से आया था या माता-पिता ने सिखाया? नहीं मैं कपड़ों के बाहर कपड़े पहनना कपड़े पहनना माता-पिता ने सिखाया है या अपने से पहने हैं? कपड़े माता-पिता ने क्या क्या नाम क्या नाम सिखाए होंगे? ये तो बाहर से आ गया। हां जी। ये तो बाहर से आ गया ना धर्म। अंदर से नहीं आया ना? बाहर से क्या है ऐसे मतलब? अरे भैया धर्म का मतलब है मर्यादा। हां मर्यादा ठीक है। क्या करना है? क्या नहीं करना है जीवन में? यही तो धर्म है। हां। तो मैंने आपको वही तो बोला तो कपड़े पहनने की मर्यादा बाहर से क्यों ले रहे हैं आप? अंदर से क्यों नहीं आई? अंदर से तो अंदर से तो आती है। अच्छा आपके माता-पिता ने आपको मर्यादा नहीं सिखाई। आप अंदर से आइए आपके। नहीं कोई इंसान कुछ गलत कर रहा है, सही कर रहा है। वो अपने भीतर ही तो से तो आती है ना आवाज। अगर मान लीजिए मैं किसी को मार रहा हूं। अरे भाई मैंने आपसे अभी अभी मैंने आपसे क्या पूछा है? हां जी। कपड़े पहनने कपड़े पहनने की मर्यादा माता-पिता ने दी ना नहीं वह तो एक टाइम टाइम पर देंगे ना उसके बाद तो मेरे को पहनने नहीं पहना उसके मतलब सारी सारी
00:08:48:00 मर्यादाएं आपने सीख ली उसके बाद फिर आप उनको अपना नाम दे के कस्टमाइज करेंगे हमारे अंदर से आई है नहीं नहीं नहीं समझे नहीं मेरी बात को मर्यादा आई कहां से उद्भाषित कहां से हुई है वो बताओ सुनिए देखिए एक चीज को ना प्लीज क्रोध क्रोध मत कीजिएगा नहीं ये क्रोध ये क्रोध नहीं है क्रोध नहीं है ये अंपायर आउट दैट वाली फीलिंग है जो चिल्लाते हैं ना हाउ इज दैट वो क्रोध नहीं होता है वो एक्साइटमेंट होता है ठीक है ठीक है हां जी हां तो मेरा कहना ये है कि जब एक टाइम के बाद में व्यक्ति जीना शुरू करता है खुद भाई साहब वो बात बाद की है आपके पास उसी पे आ रहा हूं ना आपको हां तो वो बताइए वो बताइए हां हां उसी पे आ रहा हूं मैं टू द टू द पॉइंट बात करिए बहुत ज्यादा हमें मैंने आपको बताया ना कॉलिंग पे एक तो बात हम करते नहीं है फिर भी क्योंकि गौरव जी ने आपसे बात करने को कहा है इसलिए बात कर रहे हैं तो अब आप टू टू द पॉइंट बात करिए। बहुत इधर-उधर की बात मत करिए। टू देखिए टू द पॉइंट तो मेरे हिसाब से वो वाली बात हो जाएगी ना कि मैं आपको कुछ बोलूंगा तो वो तो फिर वो हो जाएगा ना कि उसका कुछ तो वो वो देना पड़ेगा ना इधर-उधर की बात कि हां भाई मैं जो बात बोल रहा हूं क्यों बोल रहा हूं आपको? हां बताइए बताइए बताइए। हां तो मैं आपसे ये कह रहा हूं कि आप कह रहे हैं कि भाई माता पिता ने मेरे को बोला कि मेरे को कपड़े पहनने हैं। हम आज मैं मैं मान लीजिए 30 साल का हूं। हम अब मैं
00:10:03:03 कपड़े पहनूंगा नहीं पहनूंगा वो तो मैं कर रहा हूं ना साइड। अरे आज आप कर रहे हैं ना शुरुआत कहां से हुई मर्यादा की? नहीं मर्यादा की शुरुआत तो उन्होंने करी मतलब आप ये मान आप यह मानते हैं कि आपको मर्यादाएं तो बाहर से मिली है फिर आप उसमें से जज करते हैं कि इनमें से कौन सी मर्यादा को मुझे आगे पालन करना है किसको पालन नहीं करना है। हां जब इंसान को खुद को पता नहीं होता तो वो क्या नाम है पता ही नहीं था कि मेरे को अपने हां मतलब की हमारे अंदर मर्यादा खुद से नहीं आती है मर्यादा हमको बाहर से ही लेनी पड़ती है नहीं मेरे हिसाब से वो हां हिसाब से होती है वो तो आप कहना क्या चाहते हैं बाहर से बाहर से बाहर से बचपन में मैं कर देता था कहीं हां हां बिल्कुल बिल्कुल ये भी पूछूंगा मैं बाहर से क्यों आ रही है अब थोड़ी करता हूं नहीं तो मैं वही तो कह रहा हूं कि भैया आपने बाहर से कुछ क्यों सीखा कैसे सीखा बाहर से कैसे सीखा हां क्यों सीखा बाहर से आपके अंदर से आनी चाहिए थी वो मर्यादा भी कह सकते हैं मैं कह रहा हूं क्या नाम है मेरी बात आप समझ नहीं रहे हो बड़ा क्यों हुआ ये नहीं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं अगर अगर आपके अंदर धर्म और अधर्म का निर्णय लेने की शक्ति अपने अंदर से आती है तो आपको बाहर से क्यों सीखना
00:11:18:12 पड़ रहा है? अंदर से आनी चाहिए थी वो आवाज। और अगर आपने अगर अगर आप ये कह एक मिनट भाई साहब अगर आप ये कह रहे हैं कि माता-पिता ने जो है माता-पिता ने हमको सिखाया है। अब हम डिसाइड कर रहे हैं कि उसमें से क्या लेना है, क्या नहीं लेना है। तो इनमें से कई विषय अती्द्रिय होते हैं। ठीक है? नहीं लेकिन उसमें चॉइस मेरी बात खत्म नहीं हुई है। मेरी बात खत्म नहीं हुई है। मेरी बात खत्म नहीं हुई है। अच्छा ओके। तो इनमें से कई विषय अती्द्रिय होते हैं। अती्द्रिय मतलब जिन्हें हम इंद्रियों से जान नहीं सकते वो सिर्फ हमें शब्द प्रमाण पे ही रहना पड़ता है। जैसे कि जैसे कि बहन के साथ भोग मत करो। हम्म। ठीक है? ये अती्द्रिय विषय है। अब इसमें आप इसमें आपका अनुभव क्या कहता है? शब्द प्रमाण मानोगे या प्रैक्टिकल मानोगे? क्या करोगे? तो इसमें तो अमेरिका में तो होता ही है सब हम क्या अमेरिका में तो होता सब कुछ ये बहन के साथ भी हो रहा था तो आप आप भी करोगे नहीं नहीं मैं आपसे पूछ रहा हूं आपने बोला ना कि आपका धर्म आपका धर्म क्या है वो मैं पूछ रहा हूं ना आपका धर्म क्या है उनका क्या हुआ फिर धर्म उनका धर्म ये वो नहीं मान रहे इस मर्यादा को हां तो फिर तो ये ये डिसाइड कौन क्या नाम कर रहा है कि मर्यादा हमारे तो शास्त्र करते हैं ना शब्द प्रमाण हमारा तो करते तो इंसान तो वो भी आत्मा तो उनके अंदर भी है
00:12:33:13 कि मतलब आपके हिसाब से अगर वो कर रहे हैं तो वो ठीक है ना? नहीं नहीं नहीं नहीं आप कह रहे हो सुनो सुनो मेरी बात आप समझो एक मिनट आप कह रहे हो कि अंदर से जो आवाज आए उसको मानना चाहिए। उनके अंदर से आवाज आ रही है कि बहन के साथ विवाह करो। तो वो सही कर रहे हैं आपके अकॉर्डिंग। नहीं आप बताइए ना ये वाली बात तो भाई मैं तो कह रहा हूं गलत कर रहे क्योंकि अंदर की आवाज ऐसे कि अंदर से दोनों आवाजें आती है। आत्मा की आवाज भी आती है और जो भोग की आवाज है अरे सुन लो भाई सुन लो। जी अंदर से दोनों सूचनाएं प्राप्त होती है। भोग की सूचना भी प्राप्त होती है और यह जो धर्म की सूचना भी प्राप्त होती है। उसमें से कौन सा धर्म है ये डिसाइड करने के लिए हमें बाह्य प्रमाण होना चाहिए। तृतीय पक्ष अब अब ये मैंने अपनी बात कह दी। अब तुम बताओ कि उनके अंदर की आवाज आ रही है बहन के साथ भोग करने की। तो वो सही कर रहे हैं। नहीं मैं वही तो आपसे ये वाली बात जानना चाह रहा था कि मुझे बात बताई। मेरा एक ना दोस्त था। मैं आपको इसी पे आ रहा हूं। इसी वाली बात पे आ रहा हूं। मेरा एक दोस्त था वो ना बहुत सारी लड़कियों के साथ उस उसने सेट किया हुआ है। हम्म। ठीक है। हम्म। मैंने उससे एक बार पूछी यह वाली बात जो आप बोल रहे हो ना? हम्म। मैंने कहा भाई एक बात बता। तेरे अंदर से आवाज नहीं आती कि यार तू इतनी लड़कियों के साथ कर रहा है अलग-अलग। एक को धोखा दे रहा है। उसको भी धोखा दे रहा है। उसने मेरे को बोला नहीं यार मेरे मेरे को तो
00:13:48:24 नहीं आती कोई आवाज। हम्म। तो अगर उसको वो आवाज नहीं आ रही है। उसका उसका अर्थ आपके हिसाब से क्या है? तो आपने कहा ना अंदर की आवाज को सुनना है। बाहर से कुछ नहीं लेना है। तो आप बताइए ना आप इसको उचित मानते हैं। हां। हां तो इसका मतलब अंदर से जो हमारा हमारा इसका मतलब अंदर से विवेक आना पर्याप्त नहीं है धर्म और धर्म के निर्णय के लिए अगर पर्याप्त है अगर पर्याप्त है तो फिर आप उसको सही मानिए कि उसके अंदर से आवाज यदि नहीं आई तो उसने भोग किया तो सही किया उसको सही कहिए आप बहन के साथ विवाह को सही कहिए मां के साथ विवाह को सही कहिए हां तो फिर मतलब इसका मतलब ये हुआ कि हमारे भीतर से कोई आवाज नहीं आती है आती है पहचान पाना मुश्किल होता है हां तो फिर ये पहचान अंदर अंदर से ही बाहर से शास्त्र शब्द गुरुजन शास्त्र हा ठीक है तो मतलब आप ये कह रहे हैं कि मेरे अंदर से हर तरह की आवाज आती है लेकिन मैं वो वो डिसाइड बाहर से होगा हां दोनों तरह की आवाज आती है किसी को देख के आकर्षण भी होता है अंदर से मगर क्या करना है और क्या नहीं करना है वो डिसाइड शास्त्र करने है शास्त्र अच्छा शास्त्र करते हैं कौन से वाले सनातन शास्त्र सनात सनातन मतलब कौन से आते हैं सर वेद आएंगे या जो वेद वेद उपनिषद गीता सब
00:15:05:03 पुराण भी अब एक एक पहले पहले तो यह बात क्लियर कर लो कि अंदर के ऊपर हम डिपेंड कर सकते हैं कि नहीं निठारी के निठारी के अंदर भावना आई अंदर से कि मैं कुकर में उबाल के खाऊं बच्चों का यौन शोषण करके हां हां हैं तो वो सही कहोगे क्या उसको तुम अच्छा तो इसमें एक तो बात मेरे को पूछनी है आपसे मैंने एक ये ये चीज पहले क्लियर करो अंदर के ऊपर डिपेंड कर सकते हैं कि नहीं हां हां वो क्लियर करो। मैं उसी पे आ रहा हूं। मान लीजिए मैं क्या नाम है? मैं मैं किसी व्यक्ति को पीट रहा हूं। हां। ठीक है। हां। उससे पहले मेरे भीतर से आवाज दे रही। नहीं यार मैं जो कर रहा हूं गलत कर रहा हूं। हम ठीक है। आप ये कह रहे हैं कि जो मेरे अंदर वो भावना आ रही कि मैं गलत कर रहा हूं। ये बाहर से आती है मेरे अंदर। नहीं नहीं बाहर से बाहर से निश्चित होता है कि इन दोनों में से कौन सी चीज मान्य है। अच्छा कौन सी टीम मानने है? क्योंकि क्योंकि हम लोग एक रूप में सच्चिदानंद स्वरूप भगवान के अंशी भी हैं। तो हमारे सच्चिदानंद के आकर्षण के कारण धर्म की भावना भी अंदर से आती है। महाभारत में सिद्धांत लिखा हुआ है। अन्यों के साथ वो व्यवहार ना करो जो अपने लिए उचित ना लगे। ठीक है।
00:16:20:09 तो ये जो भावना आती है अंदर से अपने लिए अच्छी भावना भी आती है। अरे यार अत्याचार नहीं करना चाहिए। मगर यह भी आती है कि चुरा ले, खा ले, पीट ले, शोषण कर ले, कंजशन कर ले। तो उसमें पहचान पाना मुश्किल होता है। इसलिए तृतीय सत्ता चाहिए होती है। ये बताने के लिए इन दोनों में से कौन सा है? अभी हम लोग बात कर रहे हैं क्या हम अंदर की भावना पे डिपेंड कर सकते हैं कि नहीं? ये बताइए। इसको बताइए। डिपेंड कर सकते हैं कि नहीं? हां। तो हां। तो उस पे मेरा जो आपको कहना है वो ये था कि जो आप बोल रहे हैं कि एक सही कह रहा है। एक कहना है, क्या नाम है गलत कह रहा है एक बात को। भाई साहब मैं प्रश्न पूछ रहा हूं। अंदर की भावना पर डिपेंड कर सकते हैं कि नहीं और यदि करना उचित है तो निठारी के अंदर से भावना आई कुकर में उबाल के खाने की वो उचित है। किसी के अंदर भावना आई अपनी मां के साथ विवाह करने की वो उचित है। बहन के साथ विवाह करने की क्या वो उचित है? यह बताइए। अंदर पे रिलाई करे व्यक्ति के ना करे। हां तो वहां तो ये फिर मेरे हिसाब से अंदर से होगा डिसाइड कर लिया जाएगा। ये तो तो मतलब निठारी ने जो किया वो सही किया आपके अनुसार। उसने उसने अंदर से डिसाइड किया ना अरे मैं तुमसे पूछ रहा हूं तुम्हारे अकॉर्डिंग नहीं गलत था कि सही था तबके जो जो जिस जिस व्यक्ति अरे
00:17:35:15 आपने ये कहा है ना कि अंदर से डिसाइड होगा तो तो दुनिया में दुनिया में जो जो व्यक्ति पाप कर रहा है वो सब उसके अंदर से डिसाइड हो रहा है तो वो सब पाप नहीं है पुण्य है आपके हिसाब से और जो अच्छा कर रहा है वो जो अच्छा कर रहा है वो तो शास्त्र की मर्यादा में रह कर रहा है। अच्छा अच्छा मतलब आप ये कह रहे हैं कि शास्त्र में जो कुछ लिखा है वो सब अच्छा है। देखो विषय मत बदलो। पहले तो ये क्लियर विषय बदल रहे हो। विषय बदल रहे हो। विषय ये है विषय बोला था स्टार्टिंग में क्योंकि मैं क्वेश्चन पूछूंगा आपसे। आप क्वेश्चन आप पूछिए। पहले जो क्वेश्चन चल रहा है उसको खत्म करिए। अंदर पे डिपेंड हो सकते हैं या नहीं? ये बताइए। अंदर पे डिपेंड हो सकते हैं। हो सकते तो ठीक किया। तो उन्होंने उसने किया अरे ने ठीक किया कि गलत किया ये बताओ ना मेरे भाई हां हां तो उसने किया तो ठीक क्या होगा उसी को होगा नहीं तुम क्या मानते हो वहां बच्चों का बच्चों का मांस कुकर में उबाल के खाया गया वो सही हुआ था वो धर्म है हां क्या वो धर्म है सही हुआ था वो भाई जी मेरे कहने से क्या होता है अरे भाई तुम बता रहे हो ना कि धर्म अंदर से आता है धर्म की परिभाषा तुमने दी है ना आप आप समझे नहीं मेरी बात को मेरे मैं सब समझ रहा
00:18:50:16 हूं भाई आप अब क्विट कर रहे हैं विषय से। मैं आपसे पूछ रहा हूं जिस व्यक्ति ने माता पे कुदृष्टि डाली, बहन पे कुदृष्टि डाली वो अच्छे कार्य हैं। धर्म है वो आपका आपके अनुसार तो भाई जी ये जो ये डिसाइड या फिर या फिर ये या फिर ये कह दीजिए सबका धर्म अलग-अलग होता है। मेरा धर्म ये है। हां तो ये कह दीजिए कि मेरे अंदर से आवाज आएगी कि क्या कहते हैं? बहन के साथ विवाह नहीं करना है वो भी धर्म है और जिसके अंदर से आवाज आएगी कि बहन के साथ विवाह करना है वो भी धर्म है तो भाई कर ही रहे ना इस्लाम अरे वो कर रहे हैं तो हम आप उसको पापी क्यों कह रहे हो बुरा क्यों कह रहे हो नहीं मैं कह रहा हूं बुरा तो तो आपके हिसाब से बहन के साथ विवाह करना बुरा नहीं है हां तो इस्लाम वाले कर तो रहे हैं मैं पूछ रहा हूं बुरा है कि नहीं यार नहीं भाई जी आपके हिसाब से दुनिया में कुछ आपके हिसाब से कुछ बुरा है दुनिया में हैं हां नहीं भाई मैं दुनिया में मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं दुनिया में कोई चीज अन्याय है क्या आपके हिसाब से अन्याय अन्याय है ही नहीं अन्याय एक्सिस्ट करता है क्या दुनिया में नहीं नहीं नहीं होता ना दुनिया में अन्याय एक्सिस्ट नहीं करता दुनिया में अन्याय एक्सिस्ट नहीं करता दुनिया में दुनिया में अन्याय एक्सिस्ट करता है कि नहीं करता मैं ये पूछ रहा हूं अन्याय नहीं नहीं नहीं
00:20:06:00 करता नहीं करता नहीं करता ठीक है अब ये बताइए आपका धर्म है कि आपकी पत्नी के साथ कोई व्यभिचार ना करे करे। ठीक? दूसरे के अंदर से आवाज आ रही। सुनिए दूसरे के अंदर से आवाज आ रही है कि वो आपकी पत्नी के साथ व्यभचार करे। अब इसमें से किसका धर्म मान्य होगा? नहीं आप नहीं मेरे को आपकी सॉरी आवाज नहीं आई। फिर से बोलो। मैं बोल रहा हूं आप शादीशुदा है क्या? नहीं नहीं अनमैरिड हूं मैं। नहीं है। आपकी माताजी है? नहीं है। अच्छा। देहांत हो गया उनका। अच्छा आपकी घर में कोई और अन्य स्त्री? नहीं स्त्री तो नहीं है भैया कोई। अच्छा नहीं है। ठीक है। हां जी। अगर आपका धर्म यह है आप क्या मानते हैं कि माता जी के साथ या घर की स्त्री के साथ किसी का कोई और व्यक्ति बलात्कार इत्यादि जैसी हरकत करे या ना करे इस इस संबंध में आपके अंदर की आवाज क्या है? नहीं अगर उनकी मर्जी है तो तो कोई इशू नहीं है। मर्जी नहीं है तो तो भाई उनके अंदर की आवाज क्या है भाई साहब? मैंने वही आपसे कहा ना अगर वो उनकी मर्जी है तो मैं कह रहा हूं उनकी मर्जी है। आप आप देखना पसंद करोगे, सुनना पसंद करोगे। आपके घर की स्त्री के साथ किसी और ने बलात्कार किया और मैं बलात्कार नहीं कह रहा हूं। और सुनो मैंने बलात्कार कहा है। इसमें मर्जी तो है ही नहीं। अब मैं बलात्कार की बात कर रहा हूं। हां तो भैया बलात्कार तो
00:21:21:01 गलत है ना। हां क्यों गलत है? तुमने तो अभी कहा कि दुनिया में कुछ भी अन्याय है ही नहीं। हां तो भैया अन्याय अब देखिए भैया वही बात आ गई ना ऐसे ही वाइफ होती है सुनिए मेरी बात। एक वाइफ होती है। हां एक वाइफ हस्बैंड वाइफ होते हैं। हां अभी कोर्ट का एक ना थोड़े दिन पहले अरे भाई तुम इतनी लंबी मुझे मैं लेक्चर सुनने नहीं बैठा हूं आपका। मेरे पास इतना टाइम नहीं है। मैंने बहुत बात कर ली आपसे। आप ये बताइए आपने आपने अभी क्या कहा? अन्याय है ही नहीं। आप कह रहे हो वो तो गलत है। चलो तो वो गलत हो। अन्याय होना मैं उसी देखो भैया आप क्या कर रहे हो ना देखो सुनो भैया आप क्या कर रहे हो अन्याय उठाए वो जो बलात्कार होना है वो अन्याय नहीं है नहीं नहीं भैया देखो आप क्या कर रहे हो ना आप कह रहे हो मेरे मेरे पास टाइम नहीं है पहली बात तो आपने वही मेरे को ना बांध दिया अरे तो क्या करूं पूरे दिन आपके साथ मगजमारी करूंगा आपने आप अपनी बातों से पलट रहे आप अपनी बातों से पलट रहे हो नहीं नहीं भैया बात बोलिए हेलो हां बोलिए आपने भैया फोन काट दिया क्या? फ़ोन इसलिए काट दिया क्योंकि आप अपनी बातों से पलट रहे हैं। अरे भैया जी मैं तो बात करने में शुरू शुरू भी नहीं हुआ हूं भैया। नहीं शुरू होइए मगर बातों से मत पलटिए। आपने एक्चुअली क्या है ना देखिए बातों से मत पलटिए।
00:22:36:09 बातों से बातों से मत पलटिए। आपने कहा कुछ भी अन्याय नहीं है। फिर कह रहे हो गलत है। नहीं नहीं। चलो मैं दोबारा पूछ ले रहा हूं। गलत एक्सिस्ट करता है क्या दुनिया में? भैया मैंने वही तो आपसे बोला ना। मैं मैं पूछ क्या रहा हूं? देखो ना आप यह बात आप जब मैंने पहली बार प्रश्न किया था तो आप कह रहे थे आप अपनी बात मत करो आप उस बात को आगे बढ़ाया ना तो अब जब आगे बढ़ी है आगे बढ़ी है तो उसको छोड़ो मत नहीं आपने क्या कहा आपने क्या कहा दुनिया में गलत एक्सिस्ट करता है कि नहीं देखो आप सुनो भैया एक बात आ रही है देखो आप तो आप विषय पे सब बदल रहे हो नहीं भैया मैं जो मैं आपसे कह रहा हूं मैं जब मेरी बात हुई थी
00:23:21:13 वो मान लो मैं मैं
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