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00:00:01:01 अब यह बताइए मुझे कि जिन श्लोकों का अर्थ आप लेते हैं कि हमारे वेदों से मेल खा रही है। यानी वेद आपके लिए प्रमाण है। अच्छा ये वेद आपको मिले कैसे? मिले कैसे? वेद तो मोबाइल में अभी आपके में अरे मोबाइल में कहां से आए? मार्केट में कहां से आए? गोरखपुर से प्रकट कहां से हुए? तो आप तक कैसे आए? आपको सपने में आके दिए। या आपने कहीं किसी पुस्तक में पढ़ा, किसी किताब में देखा कैसे आया? वेद हमने टीवी पे देखे हैं। संत रामपा जी उनको खुल खुल के जो दिखाते उनके पास वो जो खोद के दिखा रहे हैं जो किताबें वो कहां से आई हैं? मार्केट से आई हैं और कहां से आई? मार्केट तो इसका मतलब है आप मार्केट को प्रमाण मानते हैं। मार्केट प्रमाण मानते हैं। मार्केट को प्रमाण नहीं मानते। लेकिन जो वेद आपको मिले। वेद आपको मिल कैसे रहे हैं? जो उन्होंने खोल के दिखाया कि देखो यहां वेद में लिखा हुआ है। वह वेद उन तक कैसे आया? वो श्लोक जिसका अर्थ आप ले रहे हो कि कबीर भगवान है वो श्लोक आप तक कैसे आया? सृष्टि की शुरुआत हुई आज से दो करोड़ साल पहले मान लो या आपके अनुसार

00:01:16:04 कुछ और समय होगा। तो वो शुरुआत से लेकर आप तक वो श्लोक कैसे आया? यह बताइए। तो इसका मतलब अभी जो मार्केट में जो किताबें जो बिक रही है जो वेद है कुरान शरीफ है गीता है ये सब बेकार है नहीं बेकार नहीं है मुझे मालूम है मुझे मालूम है वो कहां से आया मैं आपसे सुनना चाह रहा हूं क्या आपको पता है वो कहां से आया कहां से आया क्या आपको पता है वो कहां से आया वेद हां मुझे पता है कि मार्केट में वो जो किताबें छप रही किस आधार पे छप रही है क्या आपको पता है किस आधार पे छप रही हैं नहीं पता हां वह छप रही हैं गुरु शिष्य परंपरा के आधार पे जब वेद प्रकट होते हैं तो उसके बाद गुरु अपने शिष्य को वेद रटाते हैं और उसका अर्थ भी रटाते हैं। फिर वह अपने शिष्य को रटाता है तो ऐसे शिष्य के शिष्य के शिष्य के शिष्य के शिष्य के द्वारा आज तक वो वेद व्याप्त हैं। रटे हुए ब्राह्मण हैं जो उनको रटते हैं और छपवाते हैं। उस छपवाने के द्वारा आपको वेद प्राप्त होते हैं। ठीक? तो अब यह समझ में आया कि गुरु परंपरा के द्वारा अब तक वेद आया। तो यह जो ज्ञान है उसका अर्थ वह उससे लोगे जो परंपरा से आया जिससे श्लोक आया है उससे उसका अर्थ लोगे या अपने मन से लोगे मन से क्यों लेंगे

00:02:32:02 जो वेद है जो आए हैं कैसे भी आए हो जो वेद हम दोनों कैसे भी नहीं गुरु परंपरा से आया है अगर अगर आज आप उठा के देखें वेदों का सबसे पुराना भाष्य है तो वो सायन भाष्य जो रामपाल अपने उसमें खोलते हैं तो सायन की किताब होती है तो जब सायन के आप श्लोक ले रहे हो तो सायन का अर्थ क्यों नहीं ले रहे हो? वो सायन का अर्थ ले रहे हैं नहीं ले रहे हैं? साइन के स्लो ले रहे हैं। इन चीजों से इन चीजों का हमें कोई ज्ञान नहीं है इन चीजों का। तो आपको कुछ भी जब ज्ञान नहीं है तो आप क्यों लोगों को भ्रमित करते हैं? कबीर भगवान है। अब अब ये जो हमारे जो वेद है आप जैसे जो बता रहे हो कि गुरु प्रणाली के द्वारा आए हुए हैं। मेरा कहने का मतलब यह है। सुनिए मैं जो कहना चाह रहा हूं। मैं वो वही वही मैं कह रहा हूं। देखिए वह जो खोल के दिखा रहे हैं वह जहां से श्लोक आए हैं वहीं से अर्थ भी आया है। अगर आपको किसी व्यक्ति के ऊपर विश्वास नहीं है कि यह भुदू है। मान लो यह बुद्धि बुद्धू है ये तो उसके श्लोक पर भी विश्वास नहीं होना चाहिए। बुद्धू है। गलत श्लोक बता सकता है ना? और अगर उसके अर्थ और अगर उसके श्लोक पर विश्वास है तो यानी कि आपके लिए वह बुद्धिजीवी

00:03:47:06 है और अगर उसके श्लोक पर विश्वास है तो उसके अर्थ पर भी विश्वास होना चाहिए। मगर आप श्लोक उससे ले रहे हो अर्थ अपना दे रहे हो। हां तो रामपाल जी के पास वो वेद के श्लोक कहां से आए हैं? मार्केट से ही तो उठा रहे हैं। और वो कौन सी किताब खोल रहे हैं? सायन भाष्य। आप दोबारा देखना कौन सा भाष्य पढ़ते हैं वो? तो मेरा कहने का अर्थ यह है कि अगर आप जैसे मान लीजिए भाई इधर आना जरा। जैसे मान लीजिए यह मेरा छोटा भाई है। अब अगर मैं इसको बुद्धू मानता हूं तो इसके द्वारा दी जाने वाली श्लोक को भी मैं नहीं मानूंगा कि यह वास्तविक है। ठीक? और अगर मैं इसको यह मानता हूं कि बुद्धिमान है। तो जो यह श्लोक जितना विश्वास मुझे इसके श्लोक पर होगा उतना ही विश्वास मुझे इसके अर्थ पर भी होना चाहिए। मगर आपने क्या किया है कि श्लोक तो इससे ले रहे हो मगर अर्थ अपना दे रहे हो बताओ नहीं संत राम जो दयानंद सरस्वती जी के द्वारा जो वेदों का जो जो वेदों की जो व्याख्या की गई है उस व्याख्या को खोल के दिखा दयानंद सरस्वती जी के पास वेद कहां से आए उन्होंने रटे हुए थे उनके पास सपने में आए थे या फिर पीछे से गुरु परंपरा के द्वारा जो रटंत विद्या आती है आप आपको शायद मालूम नहीं होगा

00:05:02:24 यजुर्वेद में अष्टा विककृति नाम का श्लोक है कि इन वेदों को कैसे-कैसे कौन-कौन याद करेगा। अगर उसको सरल भाषा में आप लोगों को बताऊं तो वेद के मंत्रों को याद करने का तरीका होता है दाएं से मध्य तक एक आदमी रटेगा। मध्य से बा मतलब बाएं से मध्य तक एक आदमी रटेगा। मध्य से दाएं तक एक आदमी रटेगा। ऐसे ही नीचे वाली पंक्ति को रटा जाएगा। इस प्रकार से आठ उल्टे सीधे तरीकों से वह मेद का मंत्र याद किया जाता है। आठ तरीकों से जब वो वेद का मंत्र याद किया जाता है तो उसको आठ परंपराएं वो उल्टे सीधी वाली तरीके से वेदों को रटाती हैं अपने शिष्यों को और वो ऐसे करके प्राचीन काल से आज तक विद्यमान है जिससे कि वेदों में कोई मिलावट ना कर पाए क्योंकि जिस दिन भी कोई एक श्लोक बढ़ाएगा वो आठों आठों परंपराओं के लोग आएंगे वहां पर और वो अपने श्लोकों अपने उल्टे सीधे तरीकों से उस श्लोक को लिखेंगे और उससे जो मैच नहीं खा रहा होगा वो हटा दिया जाएगा ये है वेदों का प्रमाण अब सुनिए मैं यह कह रहा था कि आपके रामपाल जी को वेदों के सारे मंत्र याद हैं क्या? उनको याद नहीं याद है पर वो खोल खोल के दिखाते। हां तो खोल के वो दिखाते किसको हैं? जो पहले से गुरु परंपरा के द्वारा

00:06:17:25 श्लोक आ चुके हैं उनको। अर्थ किसका देते हैं? जो है उसमें उस किताब जिस किताब को वो खोलते हैं उसका अर्थ लेते हैं क्या ना? यह झूठ है। वो अर्थ अपना सुनिए। दयानंद सरस्वती ने कहा क्या कबीर भगवान है? नहीं कहा। अब आगे चलते हैं। अब अंतिम प्रश्न मैं इनसे करूंगा। अब आप मुझे बता दीजिए। आपने कई जगह यह बात कही कि उसमें एक जगह काल अपने मन का ज्ञान दे रहा है। वह तो भगवत गीता का आप हट जाओ। आप हट जाओ। भगवत गीता का जो आपने किताब छापी है गीता तेरा ज्ञान अमृत। उसमें आपने ऊपर लिखा है गीता तेरा ज्ञान अमृत। अंदर 38वें नंबर के पृष्ठ पर आपने लिखा है कि गीता का 95% ज्ञान मानने लायक है। 5% ज्ञान व्यर्थ है क्योंकि वह काल ने अपने मन से दे दिया है। तो आपने अपने मेन पृष्ठ पर यह क्यों नहीं लिखा गीता तेरा 95% ज्ञान अमृत

00:07:20:00 पता नहीं जी। यह तो धोखा है ना। जैसे किसी को अपने पास बुलाना है तो अच्छी बात उसको दिखा दी। बड़ी-बड़ी जब वह आ गया उसके बाद आप उसको बता रहे हो अंदर की चीज कि हम पूरी गीता को नहीं मानते 5% गीता को हम बेकार कहते हैं सिर्फ 95% गीता को हम प्रमाण मानते हैं और ऊपर क्या लिखा है गीता तेरा ज्ञान अमृत तो कोई भी हिंदू होगा तो उसके मन में तुरंत झुकाव आएगा भाई गीता को मानता है ये तो मगर आप मानते नहीं है आप 5% को व्यर्थ मानते हैं अब बात करते हैं आगे क्यों मानते हैं अब मान अब अब मैं उस पर आ रहा हूं आपका वह काल तो आपके अनुसार उसका 5% ज्ञान काल ने अपने मन से दिया है और बाकी 95% परमेश्वर का ज्ञान है। वो भी काल ही दे रहा है। कोई और दे रहा है। अच्छा वो भी काल दे रहा है। हां जी। अब आप ये बताइए कि काल जो 5% ज्ञान गलत दे रहा है। उसके क्या कारण है? क्या कारण है? वो भटकाना चाहता है या तो या फिर वो अज्ञानी है। तो दो में से एक कारण होगा। क्या कारण है? सुनो बैठो बैठो। क्या कारण है भाई साहब? क्या कारण है?

00:08:31:18 वो अज्ञानी भी और भ्रमित भी करना चाहता है। तो जो व्यक्ति भ्रमित करना चाहता है वो सब जगह करेगा ना। हम जो व्यक्ति अज्ञानी है वो अज्ञानता सब जगह देगा ना। फिर 95% क्यों नहीं देगा? उस पर कैसे भरोसा? उस पर कैसे भरोसा? हम्। जो व्यक्ति अज्ञानी है, वह अपनी अज्ञानता हर जगह देगा। जो व्यक्ति भ्रमित करना चाह रहा है, वह हर जगह करेगा। फिर बाकी की चीज पर भरोसा कैसे? लेकिन उसे ऊपर का लेकिन उसको ऊपर की जो जो बातें बताएं, वह तो जो बताएगा ही वो भ्रमित करना चाहता है कि नहीं? बिल्कुल कर रहा है भ्रमित। वो अज्ञानी है कि नहीं? अज्ञानी भी है। तो फिर 95% ज्ञान उसका परफेक्ट है। यह कैसे? 9% परफेक्ट है। चाहे तो चाहे तो परमात्मा ने अपने रिमोट से जो बुलवाया हो उस पे तो परमात्मा का 5% नियंत्रण नहीं था क्या उसके ऊपर पता नहीं बस पता नहीं तो ये है कबीर पंत की सच्चाई ये रामपाल तो यह रामपाल की सच्चाई रामपाल को फॉलो करने वाले लोगों का यह हाल होता

00:09:46:21 है जो अंत में कहते हैं पता नहीं पता नहीं पता नहीं पता नहीं कबीर भगवान है क्यों पता नहीं वह नियमित है बाधित है जन्म नहीं ले सकता क्यों क्यों पता नहीं वो अल्लाह के समान है पर उसकी शिक्षाएं मैच नहीं खाती सनातन की शिक्षाएं उनकी शिक्षाएं अलग है पर क्यों पता नहीं अंत में कहते हैं प्रमाण है 26 की बात कह रहा है यह आपका यह आपका अर्थ है यह सुनिए यह सुनिए चिल सुनिए आपकी आवाज इसमें आएगी नहीं अगर बिना माइक के बोलोगे आप सोच रहे हो कि मैं चिल्ला के कह दूं उसमें नहीं आएगी जी ठीक है। मैं एक मैं माइक दे रहा हूं आपको। देखिए हम तो एक बात आप वेद को प्रमाण मानते हैं तो प्रमाण मानते हैं। वेद आपको कहां से मिले? फिर कहां से मिले? रामपाल से मिले या कहीं और से मिले। आपके पास में जो शास्त्र है वो आपको कहां से मिले? गुरु गुरु शिष्य परंपरा से। गुरु शिष्य परंपरा से। मैं शंकराचार्य जी का शिष्य हूं। मिले होंगे किन्हें? होंगे। वह तो मार्केट से खरीद के ला रहे हैं ना। वह दयानंद सरस्वती के भाष्य को लाकर दिखा रहे हैं ना। तो दयानंद सरस्वती

00:11:01:27 के कितना अर्थ को क्यों नहीं मान रहे? दयानंद सरस्वती ने कहा कि वह ईश्वर साकार है। दयानंद सरस्वती ने कहा है। [हंसी] मैं कह रहा हूं दयानंद सरस्वती ने जो अर्थ दिया है क्या निरा परमात्मा ने अपने भाई? परमात्मा परमात्मा को साकार हम भी मानते हैं। जो जी [संगीत]

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Video 11:47 · 07 Feb 2026

रामपाल की गुरु परंपरा का काला सच: क्या है सतलोक और कबीर साहेब का असली रहस्य? | Rampal Reality Check

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