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00:00:01:28 [संगीत] सातवा समास कवीश्वर वंदना। अब मैं कवि ईश्वर की वंदना करता हूं जो शब्द सृष्टि के ईश्वर बल्कि स्वयं परमेश्वर और वेदों के अवतार हैं। यह सरस्वती के वास स्थान है अथवा नाना कलाओं के जीवन हैं। यह सचमुच नाना शब्दों के भवन है। यह पुरुषार्थ के वैभव है अथवा जगदीश्वर के महत्व है। देखिए कविश्वर जब कहा जाता है तो कवि जो शब्द आया है। है ना? जिसका रामपाल फायदा उठाते हैं। भाई देखो वहां कवि कह दिया गया। तो वह सर्वज्ञता का द्योतक है। वो शब्द जो है। तो कबीश्वर तो सर्वज्ञों में भी उनका भी ईश्वर है ना सर्वज्ञों का। तो यहां उनकी बात हो रही है। यह पुरुषार्थ के वैभव है अथवा जगदीश्वर के महत्व हैं और अनेक प्रकार की लीलाओं तथा सत कीर्तियों के स्तव का निर्माण करने वाले कवि हैं। यह शब्द रत्नों के सागर अथवा मोतियों के उत्पन्न करने वाले सरोवर अथवा नाना प्रकार के बुद्धि के आगर हैं। या तो यह अध्यात्म संबंधी

00:01:17:08 ग्रंथों की खान या बोलते हुए चिंतामणि है अथवा श्रोताओं के लिए अनेक कामधेनुओं के दूत की धाराएं हैं। या तो यह कल्पना के कल्पत्रु हैं या मोक्ष के मुख्य आधार या सायुज्य मुक्ति का विस्तार करने वाले और उसी के अनेक रूप हैं। या तो यह परलोक के स्वयं स्वार्थ या योगियों के गुप्त पंथ या नाना ज्ञानियों के परमार्थ रूप में प्रकट हुए हैं। या तो यह निरंजन की पहचान निर्गुण के लक्षण या माया से भिन्न परम परमात्मा के चिन्ह है। या तो यह श्रुतियों के भीतरी भाव या परमेश्वर का अलभ्य लाभ है और या स्वयं आत्मबध इनहीं कवियों के रूप में प्रकट हुआ है। कवि लोग सचमुक्ष मोक्ष चाहने वालों के लिए अंजन है। अब यहां पर जो सकारात्मक काव्य रचनाएं करने वाले और मुख्य रूप से जो धर्म से जुड़ी हुई धर्म को प्रोत्साहित करने वाली जो रचनाएं करने वाले कवि हैं उनकी यहां पर वंदना हो रही है और उसी उन्हीं की वंदना करते हुए उनकी तुलना

00:02:32:12 वहां तक जा रही है। कबीश्वर तक साधकों के साधन और सिद्धों के समाधान है। वह स्वधर्म के आश्रय मन का मनोजय और धार्मिकों की विनय तथा उन्हें विनय की शिक्षा देने वाले हैं। वे वैराग्य के संरक्षण भक्ति के भूषण और नाना स्वधर्मों के रक्षण हैं। एक तरीके से कवि जो पीछे हमने जो सज्जनों की व्याख्या सुनी है ना स्तुति सुनी और एक और वंदना सुनी थी सद्गुरुओं की स्तुति सुनी थी है ना सद्गुरु की स्तुति और हमने स्तुति देखी थी सज्जनों की सद्गुरुओं की श्रोताओं की कविश्वर तो लगभग आसपास के ही सभी है ये विनय की शिक्षा देने वाले वैराग्य के संरक्ष लक्षण भक्ति के भूषण और नाना स्वधर्मों के लक्षण है। वह प्रेमियों की प्रेम स्थिति ध्यानस्थों की ध्यान मूर्ति और उपासकों की बढ़ती हुई कीर्ति है। वह अनेक साधनों के मूल और अनेक प्रयत्नों के फल हैं। और केवल उन्हीं की कृपा से अनेक कार्य सिद्ध हो जाते हैं। पहले कवि

00:03:48:07 का वाग विलास होता है और तब कानों में उसका रस प्रविष्ट होता है। कविता में कवि का ही मत प्रकट होता है। कवि लोग ही विद्वानों की विद्वता, समर्थकों की सत्ता और विचक्षणों की कुशलता है। वे सृष्टि के भूषण, लक्ष्मी के श्रृंगार और समस्त सिद्धियों के निर्धार हैं। वे सभा के मंडन, भाग्य के भूषण और अनेक तपों के संरक्षण है। वही देवताओं के रूप बनाते हैं। ऋषियों का महत्व और अनेक शास्त्रों के सामर्थ्य बतलाते हैं। यदि कवि ना होते तो जगत का उद्धार किसी प्रकार ना होता। इसलिए कवि समस्त सृष्टि के आधार हैं। बिना कवियों या कविश्वरों के अनेक प्रकार की विधाओं का ज्ञान हो ही नहीं सकता। सारी सर्वज्ञता कवियों से ही प्राप्त होती है। प्राचीन काल में वाल्मीकि और व्यास आदि अनेक कवि हो गए हैं। जिनसे सब लोगों को विवेक प्राप्त हुआ। पहले काव्यों की रचना हो चुकी थी। इसलिए पंडितों को विद्वता और परम योग्यता प्राप्त हुई। पहले जो ऐसे अनेक बड़े-बड़े कवि हो गए हैं जो इस समय अथवा जो आगे होने वाला है होने वाले हैं उन सबको मैं नमस्कार करता हूं। वह सब प्रकार के चातुर्य

00:05:03:25 की मूर्ति अब देखिए यहां पे सीधे-सीधे उन कवियों को तो बाहर ही निकाल दीजिए इस लिस्ट से जो धर्म विरुद्ध होते हैं। यहां केवल उनकी बात हो रही है जो धर्म के पक्षधर है। और यह बात हमें पता चलती है कि जो मोक्ष सायोज की मुक्ति के पक्षधर और पीछे जो बातें आई तो यहां साधारण कवियों से ना लिया जाए जिन कवियों ने धर्म क्षेत्र में धर्म के पक्ष में अथवा धर्म की व्याख्या करते हुए अपनी रचनाएं की है उनकी बात हो रही है। वे परोपकार के अनेक उपाय बतलाते हैं और अंत में सब संशयों का नाश करते हैं। वह या तो अमृत के मेघ है या नौ रसों के स्त्रोत या अनेक प्रकार के सुखों के उमड़े हुए सरोवर हैं। यह अनेक वस्तुओं के विचार से परिपूर्ण विवेक के भंडार हैं जो मनुष्य के लिए प्रकट हुए हैं। अथवा यह अनेक पदार्थों से कहीं बढ़कर आदि शक्ति के धरोहर हैं। जो पूर्व संचित भाग्य से प्राप्त हुए हैं। अथवा यह अनेक पदार्थों से कहीं बढ़कर या यह अक्षय आनंद से भरी हुई सुखों की नौकाएं

00:06:18:26 हैं जो नाना प्रयोगों के लिए सांसारिक लोगों के अ सांसारिक के काम में आ रही है। यह निरंजन की संपत्ति है या विराट की योग्य स्तुति है या भक्ति की फल श्रुति इनके रूप में फलवती हुई है या यह ईश्वर की ऐसी स्तुति है जो आकाश से भी बढ़कर है क्योंकि कवियों की प्रबंध रचना ब्रह्मांड से भी बड़ी होती है। अब इस विषय को यहीं समाप्त करता हूं। कवीश्वर लोक जगत के आधार हैं। इसलिए उन्हें मेरा साष्टांग नमस्कार है। तो आठवां समास आ गया है। अब इसमें सभा की वंदना हो रही है। आवाज नहीं आ रही। म्यूट है आपका। आठवें समास पर आ गए हैं। सभा वंदना है। उसमें आगे मूर्ख के लक्षण भी है। वो भी पढ़ने में आनंद आएगा। अब मैं सकल सभा की वंदना करता हूं जिससे मुक्ति सुलभ है जिसमें जगदीश्वर स्वयं उपस्थित रहता है। कहा है नाहम

00:07:34:00 वसामि वैुंठे योगिनाम हृदय रव मद भक्ता यत्र गायती तत्र निष्ठामि नारद अर्थात भगवान कहते हैं कि ना तो मैं वैुंठ में ही रहता हूं ना योगियों के हृदय में ही हे नारद जहां मेरे भक्त लोग गान करते हैं मैं वहीं रहता हूं। इसलिए वही सभा और श्रेष्ठ बैकुंठ है जिसमें भक्त लोग गान करते हैं। जिसमें

00:08:00:12 ईश्वर के नाम का घोष और जय जयकार की गर्जना होती है। जहां निरंतर प्रेमी भक्तों के गायन भगवत कथा और वेदों आख्यानों तथा पुराणों का श्रवण होता रहता है। जहां परमेश्वर का गुणानुवाद या अनेक निरूपणों की बातचीत होती है।

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00:08:21:03 अब इससे मैं आप लोगों को एक बात स्मरण में आ रही तो मैं बताता चलूं कि कई बार क्या होता है कि यह बताने के लिए कि मैं माला जपने से नहीं मिलूंगा या मैं वेद अध्ययन करने से नहीं मिलूंगा। मतलब ईश्वर नहीं मिलेंगे या फिर मोक्ष नहीं मिलेगा या फिर फलाना कार्य कर लेने से नहीं मिलेगा। तो कैसे मिलेगा कि अमुक कार्य करने से मिलेगा। इस तरह की पंक्तियां आपने कई बार देखी होंगी और इस प्रकार की पंक्तियों का ही फायदा उठाते हैं जो छ भेषधारी हिंदू होते हैं कि भाई देखो यहां पे तुम्हारे द्वारा चयनित इस सिद्धांत का खंडन हो रहा है हम कि भैया वो जो है माला जपने से नहीं मिलेंगे योगियों से नहीं मिलेंगे ज्ञानियों से नहीं मिलेंगे या फिर जो भी जिस भी बात का उन्हें खंडन करना होगा वो इस तरीके से करने का प्रयास करते हैं रामपाल के द्वारा भी देखो या फिर स्कॉन के द्वारा भी देखिए जो वर्णाश्रम विरोधी तंत्र है इनके द्वारा यह समझाया जाता है अगर हम कहेंगे कि भाई वर्ण व्यवस्था ऐसी है या वर्ण व्यवस्था के अनुसार ऐसा होना चाहिए

00:09:36:09 तो इनकी ओर से एक बहुत कमजोर स्तर के तर्क आते हैं। वो क्या होते हैं? कहते हैं कि अह अरे आजकल के ब्राह्मण तो मांस मछली खा रहे हैं। अरे भाई आजकल के ब्राह्मण ही नहीं बाकी के अन्य समुदाय से आने वाले लोग भी ऐसे कार्य कर रहे हैं जो उन्हें नहीं करने चाहिए। तो इसका अर्थ यह थोड़ी ना है कि हम सिस्टम से चलने का प्रयास छोड़ दें। आजकल रोड में एक्सीडेंट हो रहे हैं। तो इसका मतलब सब लोग लेफ्ट की जगह राइट चलना छोड़ दें। क्योंकि लेफ्ट से चलने वाले का एक्सीडेंट हो गया। तो यह कितना बड़ा कुतर्क होता है। लेफ्ट से चलने वाले का अगर एक्सीडेंट हो गया, गाड़ी पलट गई चार टप्पे खा के हाईवे पर तो अब जो है हम यह बात कहने के अधिकारी नहीं रह गए कि भैया यू शुड ड्राइव ऑन द लेफ्ट साइड ऑफ द रोड। है ना? हमें रोड के लेफ्ट साइड में गाड़ी चलानी चाहिए। ये नियम वो खारिज हो गया। अब जिसका जो मन आएगा वह वहां चलाए क्योंकि एक गाड़ी पलट गई है जो लेफ्ट साइड पर ड्राइव की जा रही थी। अच्छा जो गाड़ी लेफ्ट साइड पर ड्राइव हो रही थी उसका एक्सीडेंट यदि हो गया है तो क्या राइट साइड में रॉन्ग साइड में चलने वाले का एक्सीडेंट नहीं हुआ है क्या? तो उसी प्रकार से यदि किसी ब्राह्मण

00:10:51:20 ने कोई गलती कर दी है तो उसके कारण से जो सिस्टम है उसी को ही नकार दो और फिर जिसका जो मना है वह करो। आप अपनी चीज को सही सिद्ध करने की बजाय जो चीज सिस्टम के अकॉर्डिंगली बताई जा रही है। केवल उस पर आक्षेप लगा रहे हो और उसके कारण उस पूरे के पूरे सिस्टम का गलत होना भी सिद्ध नहीं होता। क्या संसार में एक भी ब्राह्मण नहीं है जो मांस मछली ना खा रहा हो। और जब तक है तब तक आप यह बात कैसे कह सकते हैं? वो ब्राह्मण गलत है जो ऐसा कर रहा है। अनाधिकृत रूप से और जो है मर्यादाओं का अतिक्रमण करते हुए और सेवन कर रहा है। निषेध पदार्थों का तो यह इस तरह के कुतर्क लाते हैं और यह कुतर्क होते हैं। इसको अगर इंग्लिश में देख जाए तो इसे कहते हैं इमोशनल कार्ड एक तो विक्टिम कार्ड होता है और एक होता है इमोशनल कार्ड। इमोशनल कार्ड क्या होता है? ओशो और यह जो तथाकथित स्वषित आचार्य प्रशांत और आजकल ये लोग भी आर्य समाझी भी इसी तरीके से अरे उन लोगों ने तुमको जो है गायत्री मंत्र नहीं पढ़ने दिया।

00:12:06:24 ओशो भी इस तरह की बातें आवाज साउंड करेगा और तुम्हारा यह प्रशांत भी इसी तरीके इसी तरीके की जो नाजुक स्थितियां होती हैं जहां पर व्यक्ति तुरंत आपसे जुड़ सकता है। ऐसे उसके इमोशंस को कुरेदने का प्रयास किया जाता है। बात को व्यवस्थित रूप से अगर करने को करने को बैठ जाए ना हां भैया बताइए इस बात का क्या पैरामीटर है आपने जो कहा है बस केवल बोल दो इमोशंस इमोशनल वाली बात अरे वो तुम्हें ध्वज वहां प्रवेश नहीं करने देते अरे भैया बहुत सी जगह बहुत से लोगों को प्रवेश नहीं करने देते मैं अपने घर के लोगों का इलाज कराने हॉस्पिटल जाता हूं मुझे रोक दिया जाता है आप बाहर रहिए यह पेशेंट अंदर जाएगा तो वहां मैं हो गया नीच वहां मेरे इमोशन इमोशनल कार्ड को नहीं छेड़ा जाता। तो कहीं पर भी आप इमोशनल वाली बातें और थोड़ा सा उसमें अभिनय डालते हुए और लोगों के इमोशंस को छूकर और जो है उनका समर्थन प्राप्त कर लो। क्योंकि लोग तो बिल्कुल बिना सोचे समझे बैठे हुए हैं। अपना खाली करके ऊपर वाला माला और किसी ने जैसे ही इमोशनल कार्ड फेंके तो आ यह तो मेरे हृदय की बात कर रहा है। हां। जो मीनाक्षी

00:13:21:25 हरावत नाम है वह भी इसी तरीके से करती है और मीनाक्षी हरावत यह अभी बात देखी आपने कट्टर मनुवादी करपात्री जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य का पुत्र भी और शिष्य भी अब उसने वो जो दंड क्रम से वेद पाठ किया नवयुवक ने और उनके द्वारा वेद पाठ किए जाने पर अब खूब तालियां पीट रहे हैं। क्यों? क्योंकि क्या कहते हैं? समुद्र की लहरों के साथ अगर नहीं तैरेंगे तो डूब जाएंगे। लहरों को चीर कर तैरने का तो साहस है नहीं। हां बहती है। हां। तो भाई इसका विरोध कैसे करें? वो वही है। आप उससे पूछो मीनाक्षी जी जाकर के। देवव्रत नाम है ना उनका?

00:14:14:16 देवव्रत नाम है ना जिनोंने दंड क्रम से पयण किया है। जी भैया भैया खेरे देवत नहीं नहीं रेखे नाम है भैया रेखे देवव्रत रे तो अबो उनसे जाके पूछो मीनाक्षी जी उनकी उनका महिमा मंडन करने से पहले अपने ऑफिशियल पेजेस पर उनसे जाकर पूछो मीनाक्षी जी कि क्या स्त्रियां गायत्री मंत्र पढ़ सकती हैं और यदि वो कहते कि नहीं पढ़ सकती तो जाकर माइक पर चिल्लाओ उनका महिमा मंडन करना बंद करो, ढोंग करना बंद करो और वही करो जो शंकराचार्यों के साथ किया था। शंकराचार्यों के लिए बोले थे ना। अरे तुम्हें गायत्री मंत्र नहीं पढ़ने देते तो बोलो इसके लिए भी दंड कर्म पयण वाला महिमा बंद करो इनका। अरे भैया तुम अपनी एक बात के क्यों नहीं रहते हो? सबसे बड़ी बात तो यही है ना। अधर्म की एक पहचान होती है। वह हर अगले कदम पर अपने ही सिद्धांत का खंडन करता है। अपने ही सिद्धांत का गला घोट देता है। जैसे समाज एक बात कहता है कि जो आत्मा है वो एक देश है। बहुत से वो कहते हैं दर्शन आत्मा जो है वो एक

00:15:29:20 देश है। अब उनसे पूछा जाए कि भैया आत्मा एक देश है तो क्या ऐसा हो सकता है कि नहीं हो सकता है कि भारत में किसी की मृत्यु हुई और उसी जीवात्मा ने तुरंत एक दो सेकंड में ही अमेरिका में जन्म ले लिया मतलब यहां मृत्यु हुई शरीर छोड़ा और वहां जन्म ले लिया कैसे लिया वो तो सर्वज्ञ है नहीं टाइम लगेगा भैया उसे पहुंचने में और भी मतलब यहां शरीर छोड़ा वहां जन्म हुआ बिल्कुल भी अंतर नहीं अगले ही क्षण वो जो कतरा होगा ना उसमें तो ले सकती है कि नहीं ले तो सकती है तो ले सकती है तो सर्वज्ञ के फिर कैसे लिया उसने यहां शरीर छोड़ा वहां शरीर प्राप्त किया कैसे कर लिया तो फिर वहां पर वो डायमेंशंस में आ जाएंगे फिर ये डायमेंशन जो है अविद्या युक्त हो जाएगी मानना पड़ेगा ना कोई मुक्ति का द्वार तो खुलता नहीं है कहीं कोई गेट तो है नहीं जिसमें प्रवेश करके वो जो अवेंजर्स वाले द्वार है इधर से उधर आने जाने वाले वो सब तो है नहीं ये गेट खुलता है कहीं पर है तो बता दो कितने किलोमीटर पर गेट है तो ये खुद की बातें खुद ही तोड़ते रहते हैं एक जो है सच्चिदानंद स्वामी जी

00:16:45:10 वो बोलेंगे कि नहीं भैया जो हमारा जो समय है वो लीनियर लीनियर नहीं है वो जो है वो सर्कुलर है मानेंगे इस बात को फिर वहीं पर दूसरी और एक सज्जन वो आएंगे भारद्वाज योगेश भारद्वाज योगेश भारद्वाज ये बताएंगे कि हमारा जो कालक्रम है वो लीनियर नहीं है वो सर्कुलर है ठीक है भाई बात बिल्कुल सही है सर्कुलर है उसमें भी वो अपना कुछ कह रहे होंगे फिर वो सच्चिदानंद स्वामी आएंगे बताएंगे कि वेद में जो नाम पहले से वर्णित है उनके आधार पर नाम राम और कृष्ण रखते हैं। मगर नाम वेद के आधार पर रखने के कारण यह नहीं मानना चाहिए कि इन्हीं लोगों का नाम वेद में है। अरे भैया वहां पर भी लीनियर टाइम क्यों देख रहे हो? राम और कृष्ण भी तो वेद से पहले हो सकते हैं। वेद के प्राकट्य से पहले हो सकते हैं। राम और कृष्ण लीनियर नहीं है ना। सर्कुलर है ना? तो इन लोगों के आपस में ही एक दूसरे के ध्यान नहीं देते और खंडन चला करता है। खैर इस बात का ध्यान रखें कि यदि लेफ्ट में गाड़ी चलाने वाला कोई व्यक्ति किसी का एक्सीडेंट हो जाता है तो उससे रॉन्ग

00:18:00:16 साइड गाड़ी चलाना सही सिद्ध नहीं होता है। और पूरी की पूरी लेफ्ट में चलाई जाने वाली जो व्यवस्था है उसको खत्म नहीं कर दिया जाता है। तो इसी तरीके से यदि कोई ब्राह्मण मांस, मछली, मदिरा का सेवन कर रहा है तो वह ब्राह्मण गलत है। ब्राह्मणों का यज्ञ पवित्र संस्कार होना या फिर उन्हें वेदाधिकार होना या ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य को वेदाधिकार होना वो पूरा का पूरा जो सिस्टम है उसको नहीं नकारा जा सकता और उसको जैसे ही नकारोगे तो आपको वैकल्पिक सिस्टम तैयार करना पड़ेगा जो कि काफी विकृत होगा। जब आप वैकल्पिक खड़े करोगे वैकल्पिक ब्राह्मण वैकल्पिक क्षत्रिय जैसे कि पुलिस डिपार्टमेंट आर्मी है ना ये सब वैकल्पिक क्षत्रिय हो गए टीचिंग डिपार्टमेंट तो इनके अंदर जो जन्मज जातीय निष्ठा होनी चाहिए ना अपने दायित्व के प्रति कर्तव्यों के प्रति वो जन्मजातीय निष्ठा अपेक्षा कहीं कठिन होगी डालना जो कि जन्म जाती है जब आप ब्राह्मण पकड़ोगे जन्म जाती है

00:19:09:08 किसी के यहां से आवाज आ रही है बंद कर ठीक है म्यूट कर दिया जी अ भैया कंटिन्यू करें जी जिसमें

00:19:28:21 प्रेमी और भावुक भक्त गंभीर और सात्विक सभ्य रम्य रसाल गायक निष्ठावान कर्मशील आचारशील दानशील धर्मशील पवित्र और पुण्यशील शुद्ध हृदय वाले कृपालु योगी वीतरागी उदास नियम से रहने वाले मुद्रा धारी बाल ब्रह्मचारी योगीश्वर पुर चरण और तपस्या करने वाले तीर्थवासी मनस्वी महायोगी और लोक सेवक जनता के अनुसार चलने वाले सिद्ध साधु और साधक मंत्र यंत्र शोधक एकनिष्ठ उपासक गुण ग्राही ही संत सज्जन विद्वान वेदज्ञ शास्त्रज्ञ महात्मा प्रबुद्ध सर्वज्ञ समाधान और शुद्धि करने वाले आप

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00:20:18:00 सबकी बाई हो रही है भाई यहां पर सभा के लोगों की शुद्धि करने वाले योगी विद्वान ऋषि ईश्वर अब ये सारी संज्ञाएं सबके लिए नहीं है जिसप जो सूट कर रहा हो वो ले ले अपने हिसाब से भैया वो शेयर कर सकते हैं जो साथ ग्रंथ है उसका। हां वो आप कर लीजिए। वैसे भी मेरा तो छोटा ही दिख रहा है स्क्रीन वो शेयर कर लीजिए। योग ज्ञानी उदासी पंडित

00:20:46:21 पौराणिक विद्वान वैदिक भट्ट पाठक यजुर्वेदी उत्तम और बड़े श्रोत्रीय याज्ञ अग्निहोत्री वैद्य और पंचाक्षरी परोपकारी भूत भविष्य तथा वर्तमान तीन तीनों कालों का ज्ञान रखने वाले बहुश्रुत निरभिमान निरपेक्ष शांति दया और क्षमाशील पवित्र तथा सत्वशील शुद्ध हृदय वाले ज्ञानशील और ईश्वर पुरुष आदि सभा नायक उपस्थित हैं। जिनमें नित्य और अनित्य का विवेक है। उस सभा की अलौकिक महिमा का वर्णन कैसे हो सकता है? जहां परमार्थी लोगों के द्वारा कथा श्रवण के उपाय होते रहते हैं। वहां लोगों के तरण का उपाय सहज ही हो जाता है। जहां उत्तम गुणियों की मंडली है। जहां सत्य और धैर्य आदि उत्तम गुण वाले लोग रहते हैं। और जहां सदा सुख ही सुख रहता है। जहां विद्या पात्र कला पात्र विशेष गुणों के सत्पात्र भगवान के प्रति भगवान के प्रीति पात्र एकत्र होते हैं। जहां प्रवृत्ति वाले और निवृत्ति वाले प्रपंची और परमार्थी गृहस्थ और वानप्रस्थ,

00:22:02:12 सन्यासी, वृद्ध, तरुण और बालक, पुरुष और स्त्रियां अब यह सभा हो गई कहां की? जो गुरुदेव की सभा होती है। उस सभा की बात हो रही है। अब हमारे लेवल से ऊपर निकल चुका है ये। ठीक है? तो, अपने ऊपर लागू ना करें। इन उपाधियों को। तरुण और बालक, पुरुष और स्त्रियां सभी मिलकर अखंड रूप से अंतर्यामी भगवान का ध्यान करते हैं। यह जो सब परमेश्वर के भक्त हैं और जिनसे अकस्मात समाधान होता है उन सबका मैं अभिवंदन करता हूं।

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00:22:35:01 वैसे एक तरीके से कर भी सकते हैं। जब हम गुरुदेव को यही उपस्थित माने क्योंकि हम उनके सिद्धांतों की सीमा में ही बात करें तो उस हिसाब से गुरुदेव यहां उपस्थित माने जाएं और तब ये उनकी सभा ऐसी हो सकती है जहां इतने इस स्तर के लोग भी उपलब्ध हो। उन सबका मैं अभिनंदन

00:22:56:28 करता हूं। उस सभा को मेरा नमस्कार है जिसमें नित्य और निरंतर भगवान का कीर्तन होता है। अनेक ग्रंथों में बड़े लोगों ने कहा है कि जहां भगवान की मूर्ति होती है वहीं उत्तम गति मिलती है। कलयुग में कीर्तन ही सबसे बढ़कर होता है और जहां वह कीर्तन हो वही सभा श्रेष्ठ है। वहां कथा सुनने से अनेक प्रकार के कष्ट और संदेह नष्ट होते

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00:23:20:19 हैं। तो थोड़ा सा कीर्तन कर लेते हैं। कीर्तन की बात आ गई तो हां आप लोग दोहराइएगा माइक म्यूट हो तो अनम्यूट कर दीजिए श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय जय राम जय राम श्री राम जय श्री राम जय जय राम श्री राम राम जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय जय राम जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय श्री राम

00:24:27:27 मैं सच कहूं तो मैं भावुक हो जाता हूं कभी-कभी भगवान श्री राम का ध्यान करने का जब मुझे अवसर प्राप्त होता है क्योंकि जब मेरे पास दायित्व कम थे तो मुझे ज्यादा समय मिल जाता था भगवान का ध्यान करने का या भगवान की भक्ति करने का भजन करने का और दायित्व इतने ज्यादा बढ़ते चले जा रहे हैं कि इतने फुर्सत नहीं मिल पाती है कि कर सके। मगर फिर गुरुदेव की एक बात याद आती है कि

00:25:01:10 संक्रमण काल में समाधि नहीं होती। ऐसी कोई बात है ना गुरुदेव ने कही थी जो वो फिर याद आ जाती है। कि भाई जब युद्ध की स्थिति हो तब समाधि समाधि वालों को भी उठकर के आ जाना चाहिए। खैर अराजकता की स्थिति में समाधि शोभा नहीं देती। हां अराजकता की स्थिति में समाधि शोभा नहीं देती। भैया आपकी लय बहुत अच्छी थी। दो बार दो चार बार और कर दीजिए। आपकी लय बहुत अच्छी लगती है। श्री राम जय राम जय जय राम। श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय [संगीत] राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम जय राम जय जय राम श्री राम [संगीत] जय राम जय जय राम

00:26:14:21 जय राम जय जय राम श्री श्री राम जय राम जय जय राम हां क्या कह रहे थे प्रशांत जी भैया हम कह रहे हैं ये रिकॉर्ड हो सकता है वीडियो इतने समय समय का हां रिकॉर्ड आवाज रिकॉर्ड हो रही रिकॉर्ड हो रहा है हां तो भैया हमको हमको हम दे देंगे हां क्यों नहीं क्यों नहीं किया जाएगा अच्छा आवाज वाला यही श्री राम जय जय राम जी ठीक है तो आज का अध्ययन थोड़ा सा यहीं पर रुकते हैं और क्या है श्री राम जय राम जय जय राम हो जाता है मतलब जिस समय हो रहा होता है तो वो जो आत्मा की जो प्यास होती है ना असतो मा सद्गमय तम समाज क्यों आते हैं आंसू? जैसे भगवान गुरुदेव भगवान भी बताते हैं कि आपको आंसू आ जाए तो आंसू आने का मतलब यह है कि आप जो बोल रहे हो उससे कनेक्ट हो जाओ। तो जब वो तो एक अलग बात है कि आंसू आ जाए उस स्तर तक पहुंचना पड़ता है। मगर जैसे भावुक भी होता है व्यक्ति तो क्यों होता है कि उसकी जो आत्मा की मूल इच्छा है ना वो पूर्ति होने लगती है। श्री राम जय राम। अब उतनी देर के लिए सब कुछ भूलना पड़ता है। मतलब भूलना

00:27:30:00 क्या पड़ता है? भूल ही जाते हैं। जितने भी झमेले हैं, सांसारिक प्रपंच है, बहुत सारी चीजें हैं। चल रही है जीवन में। नमक नहीं है, आटा नहीं है, चीनी नहीं है, फोन आ रहे हैं। किसी की गाड़ी खराब डली हुई है। किसी का कोई अस्वस्थ है, परिजन जो है प्रियजन कोई अस्वस्थ है। बहुत सारी तकलीफें हैं। उन तकलीफों के बीच में जब आप कभी कह देते हैं राम श्री राम जय राम। तो ऐसा आत्मसंतोष मिल जाता है। वो जो भूख है असली भूख असतो मा सदगमया तमसो मा ज्योतिर्गमय मृत्युमा मतमया वो भूख आपकी फिर वहां पर समाप्त होने लगती है। वो फुलफिल होने लगती है वो आपकी इसलिए भावुक हो जाते हैं हम। जैसे नहीं बिल्कुल आ बिल्कुल बहुत ज्यादा थकने और हार थकने और चूर थकान से चूरचूर हो जाने के बाद आपको जल मिल जाए। जब आपका कंठ सूख रहा हो तब आपको जल मिल जाए। तो ऐसा ही होता है भगवान का भजन जब आपको अपने जीवन से मिल रही विपरीत स्थितियों में भजन मिल जाए भगवान का नाम ध्यान करने का अवसर मिल जाए तो मुझे मिल गया अभी आप लोगों के बहाने तो कर लिया

00:28:45:08 है ना चित्त को शांति भी मिलती है भजन के बाद बस बस बस वही चित्त को शांति तो अगर किसी के कोई प्रश्न है छोटे-मोटे बहुत बड़े-बड़े प्रश्न नहीं तो देवांश यादव जी बताएं जय सीताराम जय सीताराम भैया ठीक है शायद ये क्वेश्चन बड़ा हो सकता है लेकिन आप सुन लीजिए अगर आपका इच्छा होगी आप अभी लाइव में दे लीजिएगा लेकिन एक बार मेरे पास प्रश्न सुन लीजिए

00:29:25:06 हेलो जी जी बोलिए बोलिए बोलिए आपको मेरी आवाज क्लियर आ रही है? बिल्कुल आ रही है। जी तो मेरा मतलब प्रश्न है अगर आपको ज्यादा बड़ा लगेगा तो आप आंसर मत करिएगा। अगले क्लास में कर लीजिएगा लेकिन एक बार एटलीस्ट सुन लीजिए। जी मेरा प्रश्न ये है कि जैसे जैसे हमारा जो सनातन धर्म है वो साइंटिफिक भी है और लॉजिक लॉजिकली भी है। ठीक है? और आप भी ये भी जानते हैं कि आज के जो लोग हैं वो साइंस को साइंस को अपना मतलब होता है नहीं माई बाप मानते हैं। जो साइंस करेगी उसी को मानेंगे। है ना तो जैसे आपने हमको असतो सद्गमया का वो बताया उपनिषदों से वेद से आपने प्रूफ किया कि भगवान एक्सिस्ट करते हैं लेकिन आजकल के जो लोग हैं वो वेदों को उपनिषद को फिलॉसफी मानते हैं दर्शन शास्त्र मानते हैं तो वो उसका यकीन नहीं करते हैं भले ही वो लॉजिक है तो लोगों का ये कहना है कि अगर मान लीजिए भगवान एक्सिस्ट करते हैं तो इसका साइंटिफिक प्रूफ क्या है मतलब क्वांटम थ्योरी है उसके उसके थ्रू प्रूफ करिए कि भगवान का साइंटिफिक रूप से प्रूफ करिए तो इस पे आप क्या कहना चाहेंगे? क्वांटम थ्योरी एक प्रूफ है। इसका क्या प्रूफ है? नहीं मतलब नहीं साइंटिफिक लेवल से या मैथमेटिकल थ्योरी से

00:30:40:07 प्रूफ करिए कि भगवान ठीक है। देखिए उस तरीके से भी किया जा सकता है। वो बहुत सारी विधाएं मगर क्या है ना कि हम लोग टू द पॉइंट रहते हैं। क्वांटम थ्योरी एक प्रूफ है। इस बात का क्या प्रूफ है? अरे जब हमने आपको बताया कि अगर कोई अमर नहीं है तो आप अमरता को क्यों ढूंढ रहे हो? जब हमने आपको बताया कोई अखंड ज्ञानी नहीं है तो आप अखंड ज्ञान को क्यों ढूंढ रहे हो तो यहां तो आप निरुत्तर हो गए। तो आप ढूंढ तो सच्चिदानंद को ही रहे हो। जिसको आप ढूंढ रहे हो उसको आप सच्चिदानंद कहते हो या फिर आप अलग अलग कहते हो। क्या कहते हैं कि इमोर्टल ऑल नोइंग और एंडलेस जॉय इसको आप अलग-अलग कह देते हो ढूंढ तो आप इन तीन चीजों को ही रहे हो ना और हम इसको ही सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर कहते हैं इतनी सी तो बात है आप भी तो उसको कुछ ना कुछ कह रहे हो ना एक्सिस्ट करता है तभी तो ढूंढ रहे हो ना अच्छा ऐसी कोई चीज है आज तक आज तक दुनिया में कोई ऐसी चीज हुई है जो पहले नहीं थी भाई अगर किसी ने ट्रेन का इन्वेंशन किया तो वह जो ट्रेन का फार्मूला था ज्ञान था वो एक्सिस्ट करता था ना पहले वो फार्मूला था ना दुनिया में कि ऐसा होगा तो ऐसे ट्रेन चलेगी

00:31:55:18 तो वो एक्सिस्ट किया ना ज्ञान के रूप में व्यवहारिक वो कब हो पाया जब किसी ने उद्यम किया इसी प्रकार से भगवान एक्सिस्ट करते हैं व्यवहारिक कब होते हैं जब कोई भक्ति करता है उद्यम करता है संघर्ष करता है उनके लिए तब भगवान व्यवहारिक हो जाते है अब जब इतनी अच्छी व्याख्या के बाद भी आप कह रहे हो कि नहीं इससे नहीं मानेंगे इतने मानेंगे तो फिर हम भी तो क्वेश्चन कर सकते हैं कि क्वांटम ऑफ क्वांटम की थ्योरी जो है वो एक प्रूफ है। यह प्रूफ करो अब आप चलो आप निरुत्तर हो गए आप स्पीचलेस हो गए उसके बाद आप कह रहे हो कि नहीं जब रामपाल ये कह देगा कि ईश्वर है तो हम मानेंगे कि ईश्वर है तो रामपाल तो कभी कहेगा नहीं तो यह जो क्राइटेरिया तय करने वाले आप फिर कौन होते हो इसको सिद्ध करो फिर कि आप क्यों क्राइटेरिया तय करोगे और मुख्य बात यही है कि वो जिस दुनिया में जाकर के उत्तर चाह रहे हैं फिर उनको उस दुनिया को ही सर्वश्रेष्ठ होने का या अकाट्य प्रमाण माने जाने का फिर वो होना चाहिए। उसका भी सबूत होना चाहिए। वो दो। ये क्यों माना जाए? अब वो कहेंगे कि प्रत्यक्ष दिख रहा है तो हमने भी तो प्रत्यक्ष तुमको बताया। उस चीज को तो तुम नकार।

00:33:12:02 खैर ऐसा ऐसे लोग अभी तक मिले नहीं है जो इस हद तक जाने के बाद भी जो है कुतर्क करें। ज्यादातर जब यहां तक ले आते हैं तो फिर वहां पर वो जो है सरेंडर हो जाते हैं और आस्तिक बन जाते हैं। कई आस्तिक बने भी हैं इस आर्गुमेंट पे और कुछ लाइन में लगे भी हुए हैं। उनको आस्तिक बनने का मन है इसलिए सही जगह पहुंच गए हैं। फॉर्म भरे हैं कुछ नास्तिकों ने। इससे जुड़ा हुआ एक छोटा सा प्रश्न था। मन में ऐसे आ गया अगर आप कहे तो पूछ लो।

00:33:46:02 जैसे आपने बताया ना इमोर्टल और एंडलेस जॉय तो कई तर्क ऐसे आ सकते हैं कि मान लीजिए वो इस बात पे बिलीव करने लगे कि इमोर्टल एंडलेस जॉय बिल्कुल सही बात है। सब लोग इसी की सर्च में है। लेकिन वो सनातन विधा को ही क्यों अपनाए? सनातन विधा से ही वो उस चीज की प्राप्ति क्यों करें? कोई अलग मार्ग से वो उस चीज क्यों नहीं जा सकते? मतलब हमारी जो परंपराएं हैं तर्क तो यह है कि जो इसकी बात कर रहा है उसी उसी की विधा मानी जाए। दूसरा व्यक्ति बात ही कहां कर रहा है? सब लोग जो अविष्कारों में लगे हुए हैं वो सीधे-सीधे इमोर्टल और क्या कहते हैं? एंडलेस जॉय और अखंड ज्ञान की बात ही कहां कर रहा है? वो तो इसके अस्तित्व को ही नकार रहा है। पहली बात। और फिर दूसरी बात श्रद्धा भी आ जाती है। इसको इस तरह से ले लो कि आप वेद को हटा दो, वैदिक धर्म को हटा दो, सनातन धर्म को हटा दो और फिर आप जो है सच्चिदानंद तक पहुंचने का अपनी नियमावली लिखना शुरू करो। अगर सही लिख गई जो कि असंभव है। यदि सही लिख गई तो वैदिक धर्म होगी जो पहले से ही ख्यापित है और या फिर आप सही

00:35:01:03 लिख नहीं पाओगे। अगर सही लिख गई पहली बात तो लिख नहीं पाओगे। लिख गई तो वेद की कॉपी होगी। वैदिक धर्म की कॉपी होगी। नहीं तो हम उसको काट देंगे। ले आओ सिद्धांत। भाई आपका कहना है कि आपको ही फॉलो क्यों करें? तो आप अपना ले आओ। हम उसको काट देंगे। आप हमारा काट के दिखा दो। तो भैया ये भारत में ही ऐसी अनुकंपा क्यों हुई ईश्वर की? मतलब यहीं पे ही सभ्यता जहां अनुकंपा हुई उसको भारत कहते हैं। उल्टा बोल रहे हो। [हंसी] ये सब के लिए पले बड़े हम भारत में ही अनुकंपा नहीं हुई। जहां भारत जहां अनुकंपा हुई उसको भारत कहते हैं। ठीक है? जी भैया। संसार के जिस हिस्से को ईश्वर ने चुना पृथ्वी के केंद्र के रूप में उसको भारत कहते हैं। भारत में ही भगवान अवतरित हुए ये लाइन गलत है। भगवान जहां अवतरित हुए उसको भारत कहते हैं। ये लाइन सही है। ठीक है? ये शिवा जी भैया एक प्रश्न था मेरा ये ये प्रश्न मैंने जब पांच छ साल का था तब अपने पिताजी से किया था ये बात भैया मेरा नास्तिक पर ही एक सवाल था हां कुछ नास्तिक ऐसे होते हैं जो मोरालिटी

00:36:16:24 पर बात करते हैं जैसे कि हम लोग मानते हैं ना जैसे कि धर्म है तभी मोरालिटी है नैतिकता है तो वो लोग बोलते हैं कि नहीं ऐसा नहीं है मतलब नास्तिकों का ऐसा कहना है कि मोरालिटी के लिए धर्म की आवश्यकता नहीं है क्योंकि क्योंकि एक नास्तिक था जैसे वो बोल पडकास्ट देख रहा था। मैं वो बोल रहा था कि चोरी करना गलत है। मुझे मैं मैं खुद कहता हूं चोरी करना गलत है लेकिन मैं धर्म को नहीं मानता। तो मुझे यहां धर्म की आवश्यकता नहीं है चोरी करना गलत है को कहने के लिए। ऐसा उन लोग का कहना रहता है। और जैसे कोई भी क्राइम करनाचार करना किसी का मर्डर करना यह गलत है। लेकिन मैं अपने मुझे मुझे मेरी अंतरात्मा कह दिए ना कि कोई धर्म कहता है। ऐसा नास्तिक कह रहा था। तो उसको हम कैसे काउंटर करें? इस बात का प्रूफ क्या है? क्या अंतरात्मा कहती है?

00:37:06:14 जैसे कि भाई तुम्हारी अंतरात्मा कहती है अच्छी बात है। सबकी अंतरात्मा कहती है। मगर धर्म क्या है? जो बाह्य बल आपको लगाया जा रहा है। बाहरी फोर्स बाहरी सीमा सबके अंतर अंतरात्मा यही कहती है कि अच्छा अच्छा करो अच्छा अच्छा करो। मगर कुछ लोग उस अंतरात्मा के जो आवाज है उसको वो मिटा देते हैं या फिर नजरअंदाज करते हैं और यह कहते हैं मेरी अंतरात्मा कह रही है बलात्कार करो तो ऐसे में उस व्यक्ति को सही क्या है और गलत क्या है यह निर्णय कहां से कराया जाएगा वहां पर आपका धरा का धरा रह जाएगा आप कहोगे मेरी अंतरात्मा कह रही है बलात्कार मत करो दूसरे कह रही है बलात्कार करो फिर अगर अंतरात्मा को सुनने के आधार पर नैतिकता का निर्णय होगा तो विप्लव हो जाएगा संसार में

00:37:59:01 और फिर कहीं आप किसी को गलत कह ही नहीं पाओगे क्योंकि आपकी अंतरात्मा कह रही है ना चोरी ना करने को दूसरे अंतरात्मा को सुनना यदि धर्म है तो मेरी अंतरात्मा कह रही है कि चोरी कर करो तो चोरी करना फिर गलत कैसे है सिद्ध करो फिर आपको बाहरी कानून बनाना पड़ेगा और जो कानून पहले से बना हुआ है उसको आप मानते नहीं हो कानून तो बना ही रहे हो ना आप अपनी अंतरात्मा की आवाज को सामने वाले पर थोप नहीं सकते। तो आपने क्या किया? एक पैरेलल लॉ बनाया। पैरेलल जो सनातन नहीं है। जिसमें कई सारी विकृतियां है। और आपने क्या किया? जो पहले से जो सनातन लॉ है उसको नकार दिया। यही तो किया। उसको नकार के आपने एक पैरेलल लॉ बना दिया। अपनी अंतरात्मा की आवाज के अनुसार। अगर अंतरात्मा की आवाज अंतरात्मा की आवाज है अच्छी बात है वह होती सबके अंदर होती है वही धर्म है परंतु उसको व्यवहार में नहीं लाया जा सकता है उसको समाज के साथ एक्सचेंज नहीं किया जा सकता है आप आप कह रहे हो आप सच्चे इंसान हो आप सच्चे मनुष्य हो कि मेरी अंतरात्मा ये कह रही है भाई अच्छी बात है सामने वाले व्यक्ति की तो नहीं कह रही तो तो समाज के उसके लिए

00:39:14:02 भी धर्म की आवश्यकता होती है कि भैया जब अंतरात्मा की आवाज दोनों आवाजें आ रही है कि बलात्कार कर लो यह भी आवाज आ रही है। वो इंद्रियों के कारण आ रही है। बलात्कार मत करो यह भी आवाज आ रही है। यह आत्मा के कारण आ रही है। मगर कौन सी आवाज आत्मा की है और कौन सी इंद्रियों की कई बार नहीं समझ पाता व्यक्ति। तो नहीं समझ पाने के लिए निश्चित बाउंड्री लाइन है बाहर जिसको धर्म कहते हैं। और वो फिर आपको तय करती है। यह आवाज आत्मा की है। आत्मा की आवाज यानी परमात्मा की आवाज। आत्मा की आवाज है क्या? परमात्मा की आवाज परमात्मा तक पहुंचने पहुंचाने वाली आवाज तो वही तो धर्म है परंतु उसको पहचाने कैसे उसके लिए बाहर एक बाउंड्री लाइन है जो व्यक्ति ऐसा कह रहा है कि मेरे अंदर चोरी ना करने की भावना है उससे बस ये पूछो कि तुमने पहली बार शौच के बाद हाथ धोना किसी के कहने से शुरू किया था या अपने से शुरू किया था बाहर नग्न कपड़ों में नग्न अवस्था स्था में ना जाना अपने से शुरू किया था या किसी के कहने से किया था। इसका मतलब अगर किसी के कहने से किया है तो तुम अपनी अंतरात्मा के आधार पर इंसान नहीं बने हो।

00:40:29:06 तुम किसी बाह्य बल के आधार पर इंसान बने हो। क्योंकि अगर बाह्य बल ना होता अगर तुम्हारी माता जी तुमको चांटा ना मारती कि बाहर बिना कपड़ों के मत जाना। सोच करके ऐसे ऐसे करके हाथ धोना अगर तुमको ना किया जाता तो आज तुम भी वही जानवरों की तरह कर रहे होते। फिर तुम यह सब बकवाद ना करते कि भैया मेरी अंतरात्मा की आवाज है। हुआ क्या है? बाहर से तुम्हें धर्म मिला। उसको तुमने अपने अनुसार अब्सॉर्ब कर लिया। अपना वो उसको कहते हैं कस्टमाइज। कस्टमाइज करते हुए अपने अनुसार आपने अब्सॉर्ब कर लिया। आज आप कहते हो कि अंतरात्मा से आती है आवाज। ठीक है? निठारी हत्याकांड वालों को क्यों नहीं आई थी अंतरात्मा से आवाज बच्चों कुकर में उबाल के मत खाओ क्यों नहीं आई थी उन्हें आवाज अगर अंतरात्मा के आधार पर व्यक्ति मनुष्य बन जाए तो फिर दुनिया में हो होगा ही नहीं ना पाप कर्म इत्यादि उसके लिए एक बाउंड्री लाइन है संविधान सनातन संविधान जिसको कोई चैलेंज नहीं कर सकता ठीक है जी भैया बहुत जी शिवा भैया एक बस एक चीज बस पूछनी थी आपसे जैसे की आपने अभी बताया कि

00:41:45:01 आपने जैसे बताया कि दुनिया में कितने सारे साइंटिस्ट मैंने मेरा मतलब प्रश्न जो था मैंने सबसे पहले प्रश्न किया था कि साइंस के थ्रू प्रूव करिए। मेरा ये प्रश्न इसलिए आया क्योंकि जैसे हमारे जो सनातन धर्म के जो आचार्य है वो कहते हैं कि जो लोग ये समझते हैं कि साइंस और सनातन धर्म एक दूसरे के विरोधी है। पर असल में ये एक दूसरे के पैरेलली चलती है। है ना? क्योंकि सनातन धर्म ही एक ऐसा है जो साइंटिफिक तो एक दूसरे के पैरेलल चलती है। तो इसीलिए मैंने आपसे प्रश्न पूछा कि शायद हमारे धर्म ग्रंथ में लिखा हो जो साइंटिफिक प्रूफ कर रहा हो कि भगवान करते हैं। अरे भाई पहली बात आप ये समझो कि साइंस में शब्द प्रमाण नहीं चलता है। ये तो मानना पड़ेगा। जी नहीं चलता है। तो फिर जो बात आप कह रहे हो वह साइंटिफिक बात है और जो मैं कह रहा हूं या मेरी बात छोड़ दो। आप जो बात कह रहे हो जैसे गुरुत्वाकर्षण ये साइंटिफिक बात है। ये कैसे माना जाए? ये विज्ञान फार्मूला से प्रूफ किया है। साइंटिफिक प्रूफ है डेरिवेशन फार्मूला से। मगर ये विज्ञान है इसको विज्ञान कैसे माना जाए? वो तो थ्योरी है ना प्रैक्टिकल रूप से कैसे माने? कैसे माने कि विज्ञान है?

00:43:03:08 देखिए कहीं ना कहीं आपको कहीं ना कहीं आपको शब्द प्रमाण आना पड़ेगा ना। फलाने ने माना, इतने लोगों ने माना, इतनी दुनिया ने माना। हां। शब्द प्रमाण आना पड़ेगा ना। और शब्द प्रमाण को आप नकार रहे हो। तो शब्द प्रमाण को ना मानने की वजह से ही वजह से भी यह वाली बातें होती हैं। अब जिस बात को वेदों में कई जगह नासदकीय ना जो ना कौन सा सूत्र है उस पर ग्रंथ है गुरुदेव भगवान तो जिन बातों को काफी सारी ऐसी बातें हैं जो हमारे वेदों में हमारे ग्रंथों में लिखी हुई है और जिनको जिनको फॉलो किया भी जा रहा है और जिनसे मिलती जुलती चीजों पर ही नए-नए आविष्कार भी हो रहे हैं। बस बात इतनी है कि समय देश काल परिस्थिति के अनुसार वह जो ज्ञान विज्ञान होता है धीरे-धीरे लुप्त होता जाता है और यह माना गया कि हमारे जो जो आज से पहले के युग जो थे वहां पर बैलेंस समाज के अनुसार बहुत अच्छा रखा जाता था मगर विज्ञान का स्तर बहुत ज्यादा उन्नत था और जो चीजें नहीं थी वो इसलिए

00:44:18:14 नहीं थी कि वो बना नहीं सकते थे वो इसलिए नहीं थी क्योंकि उनका ना होना ही पर्यावरण के लिए आवश्यक है। आज विकास के नाम पर विनाश हो रहा है। है ना? ये चीज है। तो भैया भैया एक ही शंकराचार्य गुरुदेव जी की बता दें। जी भैया जो चमत्कार होते हैं उसका जब ज्ञान प्राप्त हो जाता है तो वही साइंस हो जाता है। बस बस। और भैया एक चीज बता दे मैथ से गणित चीजों की गणना होती है। अगणी चीजों की असंख्य चीजों की गणना नहीं होती। जी बिल्कुल सही है। आप भैया छोटा सा सवाल मेरा हल कर दीजिए कि दो से दो को भाग देने पर क्या दो शेष बचता है? ये मैथ कहीं सिद्ध कर सकती है?

00:45:09:27 हम हमारा सनातन धर्म सिद्ध करता है कि दो से दो को भाग दीजिए तो दो शेष बचता है। बताइए कैसे संभव है मैथ से? भाई देखिए एक बात और है कि साइंस आपको बता क्या रही है? जिस अभी वैसे साइंस क्या है क्या नहीं है यह भी चैलेंजिंग है क्योंकि शब्द प्रमाण को कोई मान नहीं रहा है और जब कोई शब्द प्रमाण को मान नहीं रहा है तो फिर किसी के भी शब्द प्रमाण को नहीं माना जाएगा तो साइंस साइंस जैसे मैंने कहा ना कि वो क्वांटम थ्योरी जो है वो भी एक अकाट्य प्रमाण है ये कैसे माना जाए है ना तो जब आप शब्द प्रमाण को ठुकरा देंगे तो आपके शब्द प्रमाण को भी ग्रहण नहीं किया जाएगा तो उस स्थिति में आप ये भी नहीं कह सकते पूरी दुनिया मान रही है फलाना मान रहा है पूरी दुनिया मान रही है तीन भी विरोधी से क्वांटम थ्योरी के आखिरी समय तक हां जैसे आइंस्टीन तो वो तो एक बात अलग हो गई मगर कुल मिलाकर के बात ये है कि साइंस आपको देती है इस दुनिया के संबंध में जो वो देखती है जो परखती है जो अनुभव करती है उसके आधार पे एक कलेक्ट करके एक नॉलेज देती है आपको कलेक्शन कलेक्शन ऑफ एक्सपीरियंसेस है ना प्रैक्टिकल्स एंड इफेक्ट हम और कहीं ना कहीं जो क्या कहते

00:46:25:10 अगर जैसे दार्शनिक वाला भाग छोड़ दे तो कुछ कुछ ऐसी ही बातें कि कलेक्शन बुद्ध के उसमें यह नहीं है कि आपको मोक्ष मिलेगा। बुद्ध के उसमें क्या है कि भैया ऐसा करोगे तो ऐसा होगा। मतलब उसने यह देखा कि चोरी की तो उसके आगे जाकर के चोट लग गई। तो इसने इसको कलेक्ट किया और यह कहा कि चोरी करोगे तो भाई चोट लगेगी। अब इसमें इस तरीके से चले कि यह करोगे तो यह होगा यह करो। तो इसने कलेक्ट करके एक ग्रंथ लिख दिया और यह हो गया भैया फलाना बुद्ध दर्शन। तो वो कलेक्शन ऑफ थ्योरी है। अब बात यह आती है कि जब साइंस बात ही इस दुनिया की कर रहा है। दूसरी डायमेंशन की बात कर ही नहीं रहा है। तो दूसरी डायमेंशन का प्रूफ जो साइंस है उसके क्राइटेरिया में जाकर के कैसे दोगे? भाई आप वह ढूंढ रहे हो जो इस दुनिया से आपको नहीं मिल रहा है। जो संसार है वह दुखप्रद है। आप ढूंढ रहे हो कभी ना अंत होने वाला सुख। जो संसार है वो मूर्खता देता है। आपको मूर्ख बनाता है। आप ढूंढ रहे हो अखंड ज्ञान। और जो संसार है वो आपको देता है क्या कहते हैं? मृत्यु और आप ढूंढ रहे हो मृता। तो आप इस संसार के ठीक विपरीत चीज को ढूंढ रहे हो। ठीक है

00:47:40:24 और जो साइंस है वह इस संसार की चीजें आपको बता रही है तो फिर जिस जहां पर आप इस संसार के विपरीत चीज को ढूंढ रहे हो उसकी नॉलेज आपको साइंस से कैसे मिलेगी साइंस के आधार पर कैसे मिलेगी प्रूफ कैसे मिलेगा ऐसा नहीं है काफी हद तक हम उसके साथ साथ चल सकते हैं मगर एक ना एक वक्त आएगा जहां पर ईश्वर वही है फिर जिसका उदाहरण मौजूद ना हो ये भी तो है अद्वैत जिसके जैसा दूसरा ना हो तो ईश्वर ईश्वर कौन है जिसका उदाहरण मौजूद ना हो अगर उदाहरण मौजूद है तो वो ईश्वर कैसा समझ रहे हो जाएगा उदाहरण से अगर उदाहरण हो गया तो ईश्वर कैसा रह गया जिसके जैसा दूसरा ना हो यहां है नातस प्रतिमास्त जिसका दुरुपयोग करते हैं नातस प्रतिमास्त दुनिया में जब कोई उसके जैसा है ही नहीं तो उसका उदाहरण कैसे दोगे उदाहरण का मतलब ही तो साइंस है कि आपने ईश्वर का उदाहरण दो ऐसे सिद्ध हुआ ईश्वर है उदाहरण दो तो जिस जिसका जिसका कोई उदाहरण है ही नहीं और वो वो ईश्वर भी इसीलिए है तभी तक है वो आपकी चाह का विषय भी तभी तक है वो एक नास्तिक व्यक्ति की चाह का भी विषय तभी तक है जब तक उसका कोई उदाहरण ना हो उदाहरण हो जाए बाधित हो जाएगा तो

00:48:55:27 जिसका उदाहरण है ही नहीं उसका उदाहरण कैसे दोगे तो वहां पे आपको कहीं ना कहीं फिर शब्द प्रमाण आना पड़ेगा कि नहीं भाई कोई शास्त्र है जो इस हद तक बात करता है तर्क की पराकाष्ठा पर जाता है तो फिर उसकी उस पर जो है श्रद्धा रखनी पड़ेगी। कोई गुरु परंपरा है जो तर्क की पराकाष्ठा पर जाती है। साइंटिफिक लोगों को भी आकर्षित कर लेती है। साइंटिस्टों को भी आकर्षित कर लेती है और ऐसी ऐसी गुत्तियां सुलझाती है आपके मन की आपकी आत्मा की जो कोई ना सुलझा पाया तो फिर उसकी बात पर विश्वास करना पड़ेगा। वहां फिर आ जाता है शब्द प्रमाण। और यदि शब्द प्रमाण को बिल्कुल नहीं मानना है तो फिर यह क्यों माना जाए कि आप जो बात कर रहे हैं वह साइंटिफिक है। ठीक है? हो गया आज का। जी बस एक रिक्वेस्ट ये थी कि जो आपका ये वाला जो था क्वेश्चन सॉलिंग वाला जो डाउट सेशन था वो YouTube के प्रसारण होगा मतलब वो लाइव स्ट्रीम संभवता होगा। समय संसाधन का अभाव है। आप लोग सहयोग करें। प्रथम जी वालंटियर्स तो ढूंढ ही रहे हैं। उनसे संपर्क करिए जिससे कि ज्यादा से ज्यादा हम लोग अपने संदेश समाज में पहुंचा सके। ठीक है?

00:50:07:06 अब किसके रह गए हैं क्वेश्चन? बहुत लंबा टाइम हो गया। मैं अनुरोध करूंगा अब प्रश्न ना पूछे सभी लोग। थोड़ा सा विश्राम दिया जाए। अभी संडे को फिर सत्र होगा। अभी कुछ ही दिन है। उस दिन पूछ लीजिएगा आप लोग। है नहीं? कोई एक एक लोग किरण दीक्षित जी का ले लेते हैं। किरण जी किरण जी चले गए क्या उनका स्क रिलेटेड आप आप बोल लीजिए वानखेड़े जी आप आप बोल लीजिए नहीं नहीं मैं बोलिए वानखेड़े जी जी भैया आवाज आ रही है मेरी हम जी भैया मैं आपको पहले ही फोन किया था मैंने तो भैया मेरा प्रश्न ये है कि मुझे यह बता सकते हैं आप कि मतलब मोक्ष है क्या मतलब

00:50:55:08 जिसको पाने के बाद और कुछ पाने की इच्छा बाकी नहीं रह जाती। शेष नहीं रह जाता वो मोक्ष थोड़ा अच्छा मतलब थोड़ा डिटेल में बता सकते हैं। मतलब क्या है वैसे मतलब कुछ जगह है क्या है क्या है स्टेट एक स्टेट जहां तक आपको पहुंचने की आकांक्षा है क्योंकि आप प्राणी मात्र जो है सच्चिदानंद को ढूंढ रहा है। सच्चिदानंद की जो स्टेट है वही मोक्ष है। अच्छा जैसे कि मान लीजिए

00:51:32:24 जब आप भोजन करते हैं तो भोजन करने से आपको एक संतोष प्राप्त होता है। वो क्या है? वो कोई जगह है या क्या है? वो एक स्टेट है। संकोष जनक स्टेट हम ऐसे ही सुखप्रद स्टेट की पराकाष्ठा वो मोक्ष

00:52:04:21 अच्छा ऐसा ठीक है। ठीक है। बाकी सभी लोग जुड़े रहे और आगे हमें लगता है सारे ही किरण जी का ले लेते हैं। किरण जी हैं। गए लगता है। हां हूं हां हूं हां किरण जी कुछ लाइए कुछ कौन से संबंधित होगा आपका? बताइए। नहीं नहीं मैं बस एक प्रश्न था कि शिख जो है वो ब्राह्मणों के लिए ही होता है या फिर क्षत्रिय आदि के लिए होता है सबके लिए सबके लिए है हर कोई रख सकता है अंतज भी रख सकता है शिखा का विचार है कल मैं पोस्ट कर दूंगा ग्रुप में अभी पोस्ट कर दे सब रख सकते हैं जो उसका स्ट्रक्चर होता है उसके अनुपात में अंतर होता है शिखा सबके लिए होती है और जनरल साइज भी होगा तो आप ब्राह्मण के लिए ब्राह्मण के लिए कमर तक क्षत्रिय के लिए हृदय तक वैश्य के लिए कंठ तक और शूद्र के लिए कंठ से ऊपर तक बाकी मैं विचार भेज रहा हूं। सभी लोग ग्रुप में पढ़े उसको और अपने बंधु बांधव को और कोई है अभी

00:53:19:18 किसी ने हाथ नहीं और कोई नहीं है। मेरा भी सिद्धांतिक एक प्रश्न था लेकिन बहुत देर हो गया। मैंने सबसे पहले हैं रेस्ट किया था। आप बताइए बताइए बताइए। नहीं नहीं आज रहने देते हैं। बताइए बताइए बताइए [हंसी] बोल लीजिए भाई मेरा प्रश्न था कि जो जीव है जीव वो है जो अविद्या अभिमानी है और जो जगदीश्वर है वो शुद्ध सतोगुणी अभिमानी है और इन दोनों से पृथक ब्रह्म है तो फिर जो जगदीश्वर है और जो जीव है ये दोनों ही तो मतलब ब्रह्म के ही दो लीलामय रूप हो गए ना हम

00:54:09:25 एक माया से एक माया को ना जानने वाला और एक माया को जानने वाला हम एक अपने स्वरूप को भूल चुका और एक अपने स्वरूप को जानने वाला हां हां जी बिल्कुल ठीक है हां ठीक है। ठीक है। ठीक है। धन्यवाद। और कोई बस मेरे ख्याल से काफी है। किरण जी का रह गया था। मैंने इनका हैंड रे देखा था ना शुरू में ही। मैंने कहा ये कई बार रह जाता है इनका मामला। चलिए ठीक है। आप सभी के साथ भजन करके बहुत अच्छा लगा। आज हृदय को संतोष मिला।

00:54:54:14 नारायण समारंभाम शंकराचार्य मध्यमाम असमदाचार्य परताम वंदे गुरु परंपरा सभी को जय श्री राम

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Video 55:25 · 06 Jan 2026

कलियुग में कीर्तन ही सर्वोत्तम साधन है Dasbodh Lecture #5

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B · Video कंस के शत्रु कृष्ण और काम के शत्रु शिव की भक्ति ही कर्म है
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