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00:00:01:09 [संगीत] आवाहन में फॉर्म आया था एक लिंक मेरे पास मैंने भरा था कि मुझे बस देखिए मुझे इतना जो है ना हमारे जो वेद शास्त्र पुराण इसके बारे में उतना जानकारी तो नहीं है तो बस और मुझे बस वही जानना है कि वह कैसे थी कि नहीं ऑथेंटिकेशन उसमें है कैसे है वही जानना है। नहीं नहीं वो जानने की बात अलग हो गई। हमारा जो फॉर्म है वो इस बारे में है कि आइडियोलॉजिकल डिस्कशन ऑन डिसए्रीमेंट हम है ना तो आपका कोई डिसए्रीमेंट है हमारे बातों से कुछ जी जैसे जैसे कि मैंने आपका वीडियो भी देखा हूं। तो जैसे उसमें आप लोग परंपरा की बात करते हैं ना हां तो वो मुझे उसमें मुझे थोड़ा सा समझ में नहीं आया। आप सनातनी है नास्तिक हैं या विधर्मी हैं?

00:01:08:00 जी मैं मतलब सनातनी हूं लेकिन मतलब बिलीव नहीं है। बोल किस पे बिलीव नहीं है? मतलब हमें मुझे देखिए ऑनेस्टली अगर मैं बताऊं तो मुझे अब हमारे जो सनातन धर्म के जो वेद शास्त्र है उस पे उतना मतलब 100% बिलीव नहीं होता है। यानी आप नास्तिक हैं। जी नास्तिक ही है ना? जी। तो भगवान और वेद शास्त्रों का खंडन करने के लिए आप आना चाहते हैं चर्चा में। नहीं मैं मुझे खंडन किसी का नहीं करना है। मुझे बस ज्ञान चाहिए। ज्ञान चाहने के लिए आप समझ नहीं रहे। की पहली बात जो आपने फॉर्म भरा है वह डिसए्रीमेंट के निमित्त है। डिसए्रीमेंट मतलब कि आप आपत्ति आप सहमत नहीं है। आपका कुछ और पक्ष है वो आप रखने के लिए आना चाहते हैं। ज्ञान लेना है। वो इसलिए मैंने फॉर्म भरा दिया एक मिनट एक मिनट ज्ञान लेना है। जानना है जिज्ञासा है तो आप कोर्स का फॉर्म भर सकते हैं। उसमें आप आ सकते हैं। वाले में जब आप आएंगे तो YouTube पर चर्चा होगी। कोर्स का फॉर्म भरेंगे तो Google पर हमारी क्लासेस होती है। वहां पर आप अपना प्रश्न रखेंगे। जी

00:02:23:20 YouTube डिसए्रीमेंट पर जो चर्चा होगी उसमें आपको अपनी आइडेंटिटी के साथ में आना होता है। और Google में जो चर्चा होती है वो जो क्लासेस में होती है उसमें आपको अपनी आइडेंटिटी दिखाते हुए सामने नहीं बैठना है। यद्यपि फॉर्म भरना पड़ेगा तो उसमें आपको आइडेंटिटी जरूर हमें हमारे साथ शेयर करनी होगी। समाज के समक्ष आपकी आइडेंटिटी गुप्त रखी जाएगी। परंतु डिसए्रीमेंट के समय आपको अपनी आइडेंटिटी रिवील करते हुए आना होता है। आप बताइए आपको जिज्ञासा है या डिसए्रीमेंट है? नहीं मुझे डिसए्रीमेंट नहीं है। मुझे जिज्ञासा है। मुझे आप मैंने इसलिए फॉर्म भरा था ताकि आपसे कांटेक्ट हो सके। ताकि इस बहाने आप इसलिए आपने हां इसलिए आपने और मुझे कॉल किया। इतना मोटा कोई डिसएग्रीमेंट अभी आपका दूर कर देता हूं। बताइए कोई बात है? जी बस इतना बता दीजिए कि भगवान को हम कैसे मतलब मान सकते हैं कि वह है जैसे हमारे राम जी हैं श्री कृष्ण है हम यह सब है आप यह बताइए जब आप भगवान को नहीं बिलीव कर रहे हो तो इसका अर्थ यह है ना कि आप जो है जो आधुनिक विज्ञान है उसके द्वारा दिए जाने वाले जो प्रत्यक्ष प्रमाण

00:03:38:21 है उन पर आधारित जो सिद्ध चीजें हैं केवल उन्हीं को आप एक्सेप्ट करते हो। जी हां ठीक है। तो अब मुझे आप ये बताइए कि आप माता बहन और पत्नी में अंतर किस आधार पर करते हैं? जी ये तो ये तो संस्कार है ना जो हमें घर से मिलता है। कहां से आया वो संस्कार? साइंस ने दिया है क्या? नहीं साइंस नहीं यह तो माता-पिता सिखाते ही है। माता-पिता नास्तिक है। नहीं नहीं माता-पिता भी नहीं है। नहीं माता-पिता नास्तिक नहीं है। तो इसका मतलब कि आपके घर में धर्म है। ईश्वर को मानने वाले लोग हैं। हां। उन्होंने ही आपको यह संस्कार दिए हैं ना। जी। हां। तो धर्म से ही आते हैं। दूसरी बात अब यह है कि आपने कहा मैं जो है वैज्ञानिक आधार पर जो प्रत्यक्ष प्रमाण है उनके आधार पर ही किसी भी चीज को अपने जीवन में एक्सेप्ट करता हूं। ठीक है? जी आपने अमरता को अमरता को अभी विज्ञान ने खोज लिया है क्या? नहीं अभी खोजा तो नहीं है। खोजा नहीं। तो फिर

00:04:53:27 आप आज के टाइम में अमरता क्यों ढूंढ रहे हैं? आज के टाइम में आपके माता-पिता किसी के भी आपके नहीं किसी के भी माता-पिता 200 साल की आयु भी हो जाएगी तब भी वह अगर अस्पताल जाएंगे तो हमारी कोशिश रहेगी वो बच जाए। तो अमरता ही तो खोज रहे हैं हम। जी हम ही क्या सिर्फ जितने भी मतलब जीव जंतु हैं वो भी मरना नहीं चाहिए। प्राणी मात्र प्राणी मात्र अमरता खोज रहे हैं। इसका अर्थ क्या हुआ? हमने अपने जीवन में ऐसी चीज को ग्रहण कर रखा है जो विज्ञान ने अभी तक सिद्ध नहीं किया है। हां ठीक है अब बात यह आती है कि यदि हम हमारे मन में ऐसा कोई ऐसी कोई इनबिल्ट प्यास नहीं है जिसका निवारण इस दुनिया में ना हो। हमारे अंदर भूख से ही भोजन का अस्तित्व सिद्ध है। हमारे अंदर प्यास से ही पानी का अस्तित्व सिद्ध है। हमारे अंदर अमरता की प्यास से ही दुनिया में अमरता का अस्तित्व सिद्ध है। ठीक है जी। तो इसी जो इसी गंतव्य स्थान को ही सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर भगवान कहते हैं। जो यात्रा हम लोग ढूंढ रहे है ना जाने अनजाने

00:06:09:10 में। हम लोग तीन चीजें ढूंढ रहे हैं। जाने अनजाने में हम भले ही उस पर उसको टेली करें या ना करें। हम लोग तीन चीजें ढूंढ रहे हैं। सत चित आनंद सत का मतलब मैं सत स्वरूप होकर रहना चाहता हूं। चित का मतलब कि मैं अखंड ज्ञान चाहता हूं। मैं कहीं मूर्ख मूर्खता विहीन जीवन। सत का मतलब मृत्यु विहीन जीवन और आनंद का मतलब दुख विहीन जीवन। इन तीनों चीजों को हम ढूंढ रहे हैं। इसीलिए कोई नास्तिक भी होता है वह भी यह सोचता है कि बारिश ज्यादा हो रही तो कम हो जाए। धूप ज्यादा पड़ रही तो कम हो जाए। क्यों सोच रहा है? अभी तो ऐसा नहीं है। विज्ञान ने प्रत्यक्ष आपको प्रमाण दे दिया कि आपके मन में सोच लेने से केवल बारिश कम हो जाएगी। मगर आप यदि ऐसी इच्छा कर रहे हैं। बार-बार वैज्ञानिक नियमों के विरुद्ध जाकर के उसी से सिद्ध हो रहा है कि इस दुनिया में एक परम तत्व है जिसकी इच्छा मात्र से बारिश कम ज्यादा हो सकती है। हमारे अंदर वो इनबिल्ट इच्छा है। हम चाह के भी उससे अलग नहीं हो पा रहे हैं। ठीक है? जी तो इस इनबिल्ट इच्छा से सिद्ध होता है कि इस दुनिया में क्योंकि हम कोई सच्चिदानंद को ढूंढ रहे हैं तो इसका मतलब इस दुनिया में सच्चिदानंद है। तो

00:07:24:19 यहां से शुरू यहां से हुआ ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध। ठीक है उसके बाद फिर आगे क्रम में है कि अब हमने देखा कि भैया हमें हम किसी ऐसे को ढूंढ रहे हैं जो अबाध्य हो अनंत सर्वशक्तिमान हो। फिर वहां से निकल के आया कि फिर मनुष्य की चाह का जो ईश्वर है विषय है वह कौन हो सकता है कि वह वही हो सकता है जो सर्वशक्तिमान हो अनंत हो अबाध्य हो तो फिर दूसरा कॉलम आ जाएगा कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है सब कुछ कर सकता है इसलिए अवतार भी ले सकता है ठीक है तो ईश्वर का अवतार लेना भी सिद्ध हो गया अवतार नहीं ले पाएगा तो वो नहीं है जिसके कारण हमारी सच्चिदानंद की प्यास बुझ पाए और फिर अगर वो वो नहीं है तो वो ईश्वर नहीं है। ठीक बाकी आप अब फॉर्म भर दीजिए और कोर्स कोर्स में कोर्स का फॉर्म आप भर सकते हैं। हां एक बात पूछना है जैसे आपने सतद आनंद बताया तो सत्य का मतलब तो सदा होता है ना। सत स्वरूप ही तो कह रहा हूं और क्या कहा? सत स्वरूप जो बदला ना जा सके। सनातन सत्य। हां। हां। और चित का मतलब क्या पता है? अखंड

00:08:39:27 ज्ञान ऐसा दुनिया में कुछ ना हो जो हमें ना ज्ञात हो जी अखंड ज्ञान अनंत ज्ञान और चित वो आनंद अनंत सुख यही तीन चीजें खोज रहे हैं हम अपने जीवन के हर घटक में और इन्हीं तीन चीजों का विषय है ईश्वर और ये परंपरा क्या होता है अब परंपरा ये सब चीजें आपको मैं व्यक्तिगत समय नहीं दे सकता आप यदि चर्चा में आते उसमें डिस्कशन में तो मैं आपको समय देता और आप कोर्स में आइए क्लासेस में आइए मतलब समझाया जाएगा हां मुझे कोर्स में ही आना है आप WhatsApp करिएगा मेरा दूसरा नंबर है जिस पर आपने पहले WhatsApp किया होगा हां वहां WhatsApp करिएगा आहान कोर्स का लिंक मिलेगा आपको वो भर दीजिएगा अच्छा ठीक है जय श्री जय श्री राम

00:09:38:12 मतलब मैं एग्नोस्टिक हूं अभी पता नहीं है मुझे। प्रूफ ऑफ गॉड पे बात कर रहे हैं आप। नहीं प्रूफ मिल जाएगा तो मेरे मान लेंगे ना। अच्छा तो उस पर आप डिस्कशन करना चाहते हैं। जी जी ठीक है। तो आपने फोटो दी है अपनी? फोटो फोटो देना जरूरी है क्या? फोटो के बिना तो नहीं करते हम लोग डिस्कशन। आप तो आ चुके हैं शायद एक बार। नहीं नहीं मैं तो नहीं आया।

00:10:10:19 आपने जो फोटो दी है वो तो ऐसा लग रहा है कि आ चुके हैं ये। तो फोटो दी थी क्या मैंने? नहीं नहीं मैं तो नहीं आया अभी डिस्कशन में पहले कभी। वैसे जानना चाहता हूं मैं। ऐसा नहीं है कि थोड़ा नाचिक सीन है। मैं जानना चाहता हूं। देखिए जानना चाहते हैं तो बहस में मत आइए। ठीक है? तो बहस में जानना चाहते हैं तो क्लासेस में आइए। अभी हमारा नया बैच स्टार्ट होने वाला है। दूसरा फॉर्म भर दीजिए आप। और यदि आपको बहस वो इस एग्रीमेंट में वो करनी है डिबेट तो आप आ सकते हैं। अच्छा। वहां पर कोर्स जब आप करते हैं तो उसमें आपको आपकी फोटो आवश्यकता नहीं आवश्यक नहीं होती है। यद्यपि हम लोग वेरीफाई जरूर करेंगे आपको मगर वो सबको दिखाने के लिए नहीं होता है। वो यहां आपको अपनी आइडेंटिटी के साथ ही आना होगा और वो लाइव जरूरी नहीं है कि लाइव जाए या ना जाए पर यह तो लाइव ही होगा।

00:11:22:00 एक बार मैं डिबेट में तो आना चाहता हूं। डिबेट में इस बात को लेकर कि आप भगवान को नहीं मानते। नहीं मुझे नहीं पता कि मैं नहीं मैं मतलब मैं मुझे नहीं पता है कि भगवान है कि नहीं। तो ये डिबेट थोड़ी ना है। डिबेट तो तब होगी ना जब आप आप कुछ आपका अपना कोई मत हो। आप तो अभी जिज्ञासु है बस। नहीं मेरा यह मत है कि भगवान है कि नहीं हमें नहीं पता। यह मेरा [संगीत] मत है। भगवान है कि नहीं हमें नहीं पता। हां यह मेरा मत है।

00:12:00:14 तो जब आपको नहीं पता है कि भगवान है कि नहीं तो जो मान रहा है कि भगवान है उससे आपको क्या दिक्कत है? उसका विरोधी कहां हो गए आप? विरोध इस प्रकार से क्योंकि अगर हम नहीं मान रहे तो फिर तो क्लियर कट हो गया कि आपका क्लेम है कि और फिर आप क्लेम करते हैं कि हम मानते हैं तो उस क्लेम के पीछे आपके पास सपोर्ट भी तो होना चाहिए कि क्यों मान नहीं वो तो इसका मतलब आप ये कहो ना कि मुझे जो है काउंटर करना है क्लेम्स को। नहीं नहीं मतलब आप जो क्लेम कर रहे हैं मैं उसको बोल रहा हूं। देखिए आप जब ये जानते ही नहीं हो कि भगवान है कि नहीं तो जो ये कह रहा है कि भगवान है उसको आप काउंटर किस आधार पे करोगे? नहीं काउंटर ये है कि अगर आप मानते हैं कि भगवान है तो इसका प्रूफ भी होना चाहिए।

00:12:50:24 मैं जो कह रहा हूं उसको आप समझिए। आपको आपके पास आपकी एक धारणा है कि हम नहीं जानते भगवान है कि नहीं। ठीक है? हां। अब कोई दुनिया में है जो यह कह रहा है कि भगवान है। आप उसके विरोधी तब सिद्ध होगे जो जिस आधार पर वो कह रहा है वो आधार गलत हो। तो आप आप ये मानते हैं कि जिस आधार पे वो लोग ये कहते हैं कि भगवान है वो आधार गलत है। हां तो नहीं वो आधार क्या है? मैं यही जानना चाहता हूं। अगर जानना चाहते हैं तो तब आपको क्लास में आना होगा। गलत करना चाहते हैं तो आपको वहां आना होगा डिबेट में। समझ रहे हैं मेरी बात? जब हमारी इस बात को आप गलत कह रहे हो तो आप डिबेट में आओगे। आपके क्वेश्चंस हैं तो आप क्लास में आओगे।

00:13:41:03 तो फिर ये आधार के बारे में क्लास में डिस्कशन होगा सर। आप क्लास में ये पॉइंट रखिएगा कि भाई क्या आधार है ईश्वर को मानने के पीछे? और उससे सेटिस्फाई ना हो तो तब क्वेश्चन करेंगे आगे। हां आगे क्वेश्चन करेंगे और क्या? ठीक है। तो आप क्लास का लिंक दे सकते हैं। आप इसी नंबर पर WhatsApp करिए। आान कोर्स का फॉर्म भर दीजिए। ठीक है। हम जय श्री राम। जय श्री राम। नमस्ते। जी मैं वही हां जी बताइए। जी मेरे को ये मेरे को ये पूछना था। बस ये थोड़ा सा सवाल है। ये ज्यादा बड़ा सवाल नहीं है। मैं कल या सर परसों एक लाइव स्ट्रीम में था। तो उसमें आपका जो है यह मूर्ति पूजा और अवतार के रिगार्डिंग या फिर परमात्मा वगैरह इसके रिगार्डिंग लाइव होने वाला है। तो फिर ये कब होने वाला है?

00:14:39:25 साथ-साथ निर्भय के साथ जो बातचीत हुई थी वो हां हां वही उन्हीं के होने वाला है। उन्होंने बताया था कि मैं हमारे और इनके आपकी वो होगी एक न्यूट्रल चैनल पे। मैंने कहा कि मुझे भी जानना है कि कहां होने वाला है ये। अभी तक कोई डिसाइड नहीं है। मुझसे कोई डिसाइड नहीं है क्योंकि एक्चुअली में मैं भी आना चाहता हूं। मेरा भी यही उद्देश्य है। आपके लिए तो हम बैठे हैं आज ही आ जाऊं। आज नहीं हो पाएगा क्योंकि आज हम बिजी हैं। जब मैंने पहले भी बोल रहा था ना कि दिवाली के बाद कॉल करूंगा बट दिवाली के आज ही मेरे को बस थोड़ा सा ही समय मिला। बाकी मेरे पास तो परिवार का ही तो जब आपको समय हो तब आ जाना। ठीक है जी मैं जरूर करूंगा लेकिन आप मुझे बता दीजिएगा मैं आपको YouTube डिस्कशन अरेंज करके आपको लिंक दे दूंगा आप जुड़ जाना और हमने अपनी ओर से ऐसा कुछ नहीं कहा है कि हम किसी न्यूट्रल चैनल पे जाने वाले हैं हम हम अगर उनको ऐसा लगेगा कि हमारे चैनल पर आने में वो सहज है तो हमारे ही चैनल पर होगी नहीं तो नहीं होगी। ठीक है जी क्योंकि मैं एक्चुअली में मैं उनके साथ भी आना चाह रहा था ना सभी के साथ मैं अकेले आके भी कोई खास इतना कोई फायदा नहीं है जितना सभी के

00:15:54:26 साथ आता है क्योंकि काफी सारे मेरे भी कुछ सवाल है जो उनसे भी नहीं ऐसा होता है ना जब दो लोग जब दो लोग आपस में बात कर रहे होते हैं तो उसमें बहुत सारे लोगों का उसी समय इन्वॉल्वमेंट सही नहीं होता है क्रम से हो जाए कि एक की बात एक से हो गई बात अब अगला करे क्योंकि समझ गए हां जिससे जिससे कि खिचड़ी नहीं पके। एक ही बात को लेकर के कई लोग अलग-अलग तरह की बातें बोलने लगते हैं। उससे खिचड़ी पकने लगेगी। एक ही दो लोगों में ही बात होने में अगर कई पॉइंट्स हो जाते हैं तभी दिक्कत तो भी दिक्कत आने लगती है। हां और फिर कई पॉइंट्स के साथ-साथ कई लोग होंगे। फिर तो और भी ज्यादा खिचड़ी पकेगी। तो इसलिए वन ऑन वन ठीक रहता है। वन बाय वन। ठीक है जी। मैं देखता हूं। जैसे ही टाइम मिल जाएगा क्योंकि मैंने पहले भी बताया था कि मेरे पास परिवार के अब आपने इतने उस समय जब WhatsApp पे हमसे बात की थी तो हमने इतना पूछते रहे कि भाई आपकी सीधी समस्या बताओ तो आप ये नहीं लिखे कि भाई मूर्ति पूजा नहीं मानता मैं और सब लिखते गए आप। वह सब इसलिए लिखा था दीदी देखिए पहली बात हमारे पास आप देखिए हम पहले तय करेंगे ना कि हम किसको पढ़ें

00:17:10:00 बहुत मैसेजेस आते हैं ना बहुत सारे मैसेजेस आते हैं तो हम यह कैसे चूस करें कि हमें यह मैसेज पढ़ना है बात यह है ना कि देखिए तो आप मुख्य बात हमें मूर्ति पूजा को नहीं मानते या हम आर्य समाज ही हैं। इस तरह की बात मेरा मतलब नहीं है। मैं आर्य समाज ही हूं या नहीं मेरा उससे कोई लेना देना नहीं आर्य मूर्ति पूजा को नहीं मानते आप मूर्ति पूजा गलत है यही लिख देते मैं बार-बार पूछा कि आपको हमारी कौन सी चीज पर आपत्ति है तो आपने ये नहीं बोला कि मूर्ति पूजा गलत है आप इधर बहुत सारे बड़े-बड़े लंबे-लंबे मैसेज भेजते रहे आपने जो है वो YouTube वीडियो के लिंक आपको क्या क्या लगता है हम लोग मैंने खोल के भी नहीं देखे आपके वो वीडियोस इसके लिंक क्योंकि मैंने जो लिंक भेजी हैं क्योंकि आपको सुनिए आपको लगता है कि आप आपके एंड से आप देख रहे हो कि मैं और आप बात कर रहे हैं। मगर यहां से मैं देख रहा हूं कि मैं बहुत सारे लोगों से उसी समय बात कर रहा हूं।

00:18:09:18 तो आपको लगता है कि अरे ये तो बहुत आसान सी चीज है। पढ़ लेना मैसेज। आसान नहीं है। तो आप आइए जब आपको ठीक लगे। जी जी खाली देखिए मैंने लिंक वैसे अगर देखिए लिंक मैंने भेज भी दिया है इससे आपका भी एक फायदा रहेगा क्योंकि मैं बार-बार लाइव स्ट्रीम में लिंक नहीं देता फिर रहूंगा पहली बात जो मैंने मतलब लाइव स्ट्रीम में अगर देखिए मैं आ गया हूं हम चर्चा कर रहे हैं लाइव स्ट्रीम में तो वहां पे ले मैं लिंक के माध्यम से ये थोड़ी दिखाऊंगा कि मैंने ये जो प्रैक्टिकल करके रखा है मूर्ति पूजा या जो बलि प्रथा या परमात्मा के रिगार्डिंग जो ये सब मैंने प्रैक्टिकल आप केवल बोल के बताइएगा कि ऐसासा मैंने किया है। आवश्यकता पड़ेगी तो हमारे जो ऑपरेटर होंगे आप जितने लिंक भेजेंगे वो सारे लिंक जो है लिंक वन लिंक टू लिंक थ्री ऐसे करके एक मैसेज बना दीजिए। वो मैसेज मैं अपने ऑपरेटर को दे दूंगा पहले ही तो जब आवश्यकता पड़ेगी आप कहेंगे कि मेरा लिंक नंबर थ्री दिखाइए तो वो लिंक नंबर थ्री में प्रदर्शित कर देंगे ऑन स्क्रीन। अच्छा अच्छा इस तरह से हां यह भी एक आसान रहेगा। पर लेकिन चक्कर ये है ना ये जो प्रैक्टिकिटी मैंने करके रखी हुई है ये कई घंटों की है यानी कि एक एक दोद घंटा आधा घंटा

00:19:24:26 मैंने तभी तो कहा कि ये बहुत ज्यादा टाइम की है इनको थोड़ा ताकि इसमें हम क्या कर सकते हैं वो बताइए बस यही मैं कह रहा हूं कि आपको फ्री टाइम पे जितना हो सके आप थोड़ा थोड़ा करके देखिए जिससे कि ये मेरा ये आसान रहेगा कि आपको समझाना पड़े मतलब देखिए मतलब इस चीज के ऊपर जो चर्चा करेंगे ना पहले बताइएगा आप अपनी बात बताइएगा उससे संबंधित जो आपने बहुत लंबी वह होगी तो उसमें आप आप टाइम स्लॉट बहुत लंबी वो प्रैक्टिकल्टी है ना तो उसमें आप टाइम स्लॉट डाल के मैसेज भेजिएगा इस टाइम अच्छा वो तो पुरानी हो गई पुरानी वीडियो में मुझे चेक करना नहीं आप समझ नहीं रहे मैं क्या कह रहा हूं मैं यह कह रहा हूं कि

00:20:18:12 आप जब वीडियोस की लिस्ट भेजेंगे ना तो हर वीडियो की लिस्ट में अपने अनुसार जो टाइम स्लॉट आपको पसंद आए जैसे कि भाई इस वीडियो में 25 मिनट से लेके मुझे 30 मिनट तक का मेरे लिए महत्वपूर्ण है तो वो आप डाल दीजिएगा। तो जब आप वहां पर कहेंगे कि भाई मेरा वीडियो नंबर थ्री दिखाइए और वीडियो नंबर थ्री में उसका जो मैंने इंपॉर्टेंट टाइम स्लॉट है वो दिखाइए। तो ऑपरेटर क्या करेंगे? वहां 25 पे ही पहुंच जाएंगे सीधे। अच्छा अच्छा वही टाइम स्लॉट मैं वही समझ रहा हूं। मतलब जो इसमें एक्चुअली में मैंने उसमें टाइम स्लॉट कराया नहीं है। आपने अरे कुछ नहीं आप अब दोबारा से देखो और ले लो लिख लो अपने नोटबुक में लिख लो उसको फिर मैसेज करते टाइम मैसेज करते समय हर लिंक के साथ उसके इंपॉर्टेंट टाइम स्लॉट भेज देना मगर मैसेज एक ही भेजिएगा अलग-अलग नहीं एक ही मैसेज वीडियो नंबर वन लिंक ये टाइम स्लॉट ये वीडियो नंबर टू लिंक ये टाइम स्लॉट ये तो वो तो मैं नोट बना करके आपको फोटो ही ना भेज दूं नहीं फोटो में दिक्कत है ना वहां से कॉपी पेस्ट नहीं होगा ना लिंक से लिंक थोड़ी ना ओपन होगा उससे। नहीं टाइम स्लॉट की बात कर रहा हूं ना। टाइम स्लॉट

00:21:33:15 की तो फोटो भेज तो फिर वो अलग से उन्हें पेपर लेके बैठना पड़ेगा ना। आप जो लिख के भेजेंगे फोटो खींच कर वही उसमें टाइप कर दीजिएगा लिंक के नीचे टाइम स्लॉट। अच्छा अच्छा ठीक है जी। मैं समझ गया आपकी बात। हां। जी जी। क्योंकि एक्चुअली में मैंने पता है क्या जब वीडियो बना के जब अपलोड करी थी ना उसमें मैंने टाइम वगैरह वो सब देखा ही नहीं बिल्कुल भी भाई साहब अब आप दोबारा देखिए ना आपने कहां पे क्या किया है जैसे आप हमसे चाह रहे हैं कि हम उसे देख लें थोड़ा-थोड़ा करके आप उसको देखिए थोड़ा-थोड़ा करके उसमें टाइम ढूंढ लीजिए कि कौन से टाइम पे आपकी इंपॉर्टेंट चीजें हैं और उसको नोट कर लीजिए। नोट करने के बाद जब आप मुझे मैसेजेस भेजेंगे कि वीडियो नंबर 1 2 3 4 5 6 तो उसमें वीडियो नंबर 1 2 3 4 5 6 के टाइम स्लॉट्स भी आपने नोट कर रखे होंगे वो भी टाइप करके वहां लिख दीजिएगा तो देखिए फिर टाइम स्लॉट अगर मैंने दे दिया तो वो लाइव स्ट्रीम में तुरंत करेंगे या लाइव स्ट्रीम से पहले ही सारी चीजें देखेंगे नहीं नहीं तुरंत जब आप कहेंगे तभी वो चलेगा अच्छा अच्छा मतलब वो लाइव में आएगा ठीक है वैसे क्या प्रैक्टिकल है एक छोटा सा मुझे बता दीजिए क्या प्रैक्टिकल है देखिए पहली बात तो यह है कि मैं सही बताऊं अगर आसान तरीके जैसे कि परमात्मा की मूर्ति बन सकती

00:22:48:19 नहीं बन सकती। मैंने वहां पर प्रैक्टिकल करके दिखा रखे हैं कि नहीं बन सकती। 100% अरे तो उसमें आपने क्या किया है जो नहीं कर नहीं बन सकती। वो तो देख के ही पता चलेगा। देखिए वो चीजें मेरे शब्दों में नहीं आएगी। वो सीधी सीधी बात है। वो तो देख के ही पता चलेगा। अगर मैंने कॉल पे बता दिया तो आपके एक तो पहली बात तो सर के ऊपर जाएगी। क्योंकि वो प्रैक्टिकल चीज है। पहली बात तो ये वो सर के ऊपर जाएगी। एकदम से समझ नहीं आएगी क्योंकि वो प्रैक्टिकल चीज है। अब प्रैक्टिकल चीज पहली बात तो बुक में चलो ठीक है सामान्य जो नॉर्मल बुक होती है उनमें लिख तो देते हैं लेकिन स्टेप बाय स्टेप क्या सामान्य व्यक्ति को समझ आता है क्या नहीं वो तो किसी एक टीचर के माध्यम से जो होता है तो आपका टीचर कौन है टीचर तो देखिए मेरा टीचर तो नहीं मैं टीचर तो मैं एग्जांपल बता रहा हूं ना मैं नहीं टीचर के माध्यम से समझ में आता है जब जब हम बुक को पढ़ते तो आप आपका टीचर कौन है आपको कैसे समझ में आया मैं मतलब आपका आपका सवाल नहीं समझा थोड़ा आपने अभी ये स्वीकार किया ना कि टीचर से समझ में आती है चीजें खुद से नहीं आती है। हां हां एक तो आपका टीचर कौन है? अरे आप समझे नहीं मैंने अभी एग्जाम ये एग्जांपल है। अरे एग्जांपल में आपने ये कहा ना कि भाई हम एक बुक से सीधे नहीं समझ पाते।

00:24:03:22 हमें टीचर से समझना पड़ता है। तो यानी कि आप ये कह रहे हैं कि हम किसी चीज को अपने से नहीं समझ पाते। हमें बाहरी रूप से किसी ना किसी गुरु की आवश्यकता होती है। तो आपने जो भी कुछ समझा है वो आपने किस गुरु से समझा है? देखिए मेरे तो गुरु अगर मैं अगर असलियत में बताऊं तो मैं मैं अपना गुरु जो है वो यूनिवर्स जो मेरे मेरे आसपास जो प्रकृति है उससे मानता यानी कि दूसरा भी अपने से सीख सकता है अपने अनुभव से प्रकृति के द्वारा ना हां हां वो भी तो आपकी ये लाइन गलत है कि उसको गुरु की आवश्यकता समझना है तो वो प्रकृति से सीख सकता है अपनी बुद्धि लगा करके हां तो यानी वो अपने अनुभव से अपना सीख सकता है ना हां अपने आप भी सीख सकता है पर लेकिन मैं टीचर को अगर यदि रूप में देखा जाए टीचर तो अलग इंसान के रूप में भी दे सकते हैं। वो ठीक है। जैसे आपने कहा ना कि बुक से समझ में नहीं आता है। टीचर से समझना पड़ता है। तो बुक भी तो प्रकृति है। बुक बुक प्रकृति का एक वो है क्या? मतलब तो हम हम जब भी प्रकृति की किसी चीज को समझेंगे किसी भी उसके कार्य से वो प्रकृति का एक अंश होगा। संपूर्ण प्रकृति नहीं होगी। जब भी हम कुछ समझेंगे प्रकृति से तो जैसे मान लीजिए हवा चलने से हमारे बाल हिल रहे हैं। तो हमने समझा कि हवा चलने से मूवमेंट होता है। चीजें खिसकती

00:25:18:26 है उसकी फोर्स लगती है हवा की। तो ये हमने प्रकृति के एक अंश से ही सीखा है। संपूर्ण प्रकृति से नहीं सीखा है। तो फिर अगर प्रकृति की बात है तो प्रकृति तो फिर किताब भी है। तो फिर किताब प्रकृति किताब पूर्णत है नहीं है ना। मैम मेरा प्रकृति का मतलब कुछ और है। आप प्रकृति का मतलब कुछ और ही समझ रहे हैं। मेरा जो प्रकृति का मतलब मतलब हां मेरा प्रकृति का मतलब ये है जो यूनिवर्स कह रहा हूं। ये जो आसपास से मैं रह करके मैं अपनी बुद्धि लगा करके या फिर प्रकृति के जितने भी आसपास पूरी बात सुनिए नहीं पूरी बात तो सुनिए। तो यहां पे आप बीच में बोल देते फिर वो चीज समझने में बहुत ज्यादा परेशानी हो जाती है। मेरा प्रकृति का ये मतलब आसान भाषा में मैं कर रहा हूं। प्रकृति का मतलब ये है कि जो मेरे एनवायरमेंट में जो कुछ भी हो रहा है जितनी मेरी बुद्धि मेरे को मतलब मिली है। मतलब होने वाली गतिविधियों होने वाली गतिविधियों को गतिविधियों को आप प्रकृति कह रहे हैं ना कि पर्टिकुलर ना कि पर्टिकुलर कुछ पड़ी हुई चीजों को। अगर वो गतिमान है कुछ मूवमेंट्स हो रहा है कुछ क्रिया हो रही है तो उससे आप समझते हैं गतिमान भी और साथ के साथ

00:26:33:27 जो लोग इन्हें गतिमान के साथ-साथ और बहुत सारी ऐसी चीजें उनको हम गतिमान कह भी नहीं सकते पर वो प्रकृति का हिस्सा भी है तो फिर प्रकृति का हिस्सा तो बुक भी है ना बुक भी है मैं जानता हूं बुक से भी मैं लिटरली बताऊं अगर यदि आप वैसे गुरु की बात करें जिनसे मैं बुक के माध्यम से समझा भी हूं तो वो आचार्य नहीं ना बता रहा हूं आचार्य एक एक मिनट पहले क्लियर एक चीज क्लियर हो पहले आपने ये कहा है ना कि भाई बुक्स से नहीं समझ में आता है टीचर चाहिए होता है तो आप इस बात पे 100% नहीं समझ आता है टीचर भी कहीं ना कहीं चाहिए होता है तो आप तो मैंने आपसे बार-बार पूछा कि आपका टीचर कौन है तो आपने कहा प्रकृति है फिर आप जब मैं प्रकृति को बुक बुक कहने लगा तो अब आप आए बोले कि मेरा कोई आचार्य गुरु है तो ये तो बात बदल रहे है ना पूरी बात आप पूरी बात समझे ही तो नहीं मैं यही तो कह रहा हूं आप प्रकृति बुक को ही क्यों बता रहे हैं? जब आप प्रकृति बुक को बताएंगे तो फिर वो नहीं है। नहीं ऐसा नहीं है। जैसे हम अब मैंने आपको वो भी बताया ना कि हम जब भी प्रकृति की किसी भी चीज से हम कुछ सीखेंगे तो संपूर्ण प्रकृति से नहीं सीखेंगे। प्रकृति के किसी अंश से ही सीखेंगे। और यदि अंश से हम सीखना स्वीकार कर रहे हैं तो बुक भी प्रकृति

00:27:49:03 का एक अंश है। उससे सीखना स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हैं? यहीं पर मैं आपको बता तो रहा था। आप बीच में बोल दे रहे हैं। मैं लिटरली वही बता रहा हूं कि आप थोड़ा आसानी से थोड़ा ध्यान दीजिएगा। इसमें मेरे कहने का मतलब यह है मैं मेरे जो प्रकृति का मतलब यह है कि मेरे आसपास की जितनी भी चीजें हैं जहां पर मैंने खुद से कुछ भी किया है और प्रकृति अपने इनडायरेक्ट या डायरेक्ट तरीके से समझाती है और बुक जो है यानी कि वेद या वेद के वेदांग वेदांत ये जो है इसको भी समझाने के लिए हमें दीक्षा लेनी तो पड़ती है और मैंने दीक्षा अभी भी मैं ले रहा हूं। बात ये है कि मैं ले रहा हूं। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि मैं ले चुका हूं। मैं अभी भी ले रहा हूं और किनसे ले रहा हूं मैं वो भी बता रहा हूं। मेरा मेरा देखिए आप एक साथ बहुत सारे चैप्टर खोल देंगे तो बात हो नहीं पाएगी क्लियर। अभी अभी आप इस पे मत अभी आप इस पे क्यों जा रहे हैं कि मैं बता रहा हूं मैं किनसे ले रहा हूं। अभी बात ये है कि अगर आप प्रकृति से सीखते हैं आपके आसपास की चीजें तो क्या उसमें बुक नहीं आती है प्रकृति में? प्रकृति के हिस्से में आती है। मैं जानता हूं प्रकृति के अंदर तो फिर आप उसको आपके द्वारा आप जिन चीजों से सीख रहे हैं हम तो उसके लिए आप कह रहे हैं कि मेरे लिए प्रकृति ये है

00:29:05:03 और बुक को उससे अलग कर रहे हैं तो वो किस आधार पे कर रहे हैं? वही तो मैं आपको समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि देखिए प्रकृति का बुक आप आगे बढ़ जा रहे हैं ना कि मैं बता रहा हूं मेरे आचार्य कौन है? तो आप आगे बढ़ जा रहे हैं। वो नहीं समझा रहा। वही तो बता रहा हूं। आचार्य भी कौन है? मैं वो भी बता रहा हूं। मैं कहां पूछ रहा हूं आपसे अभी आचार्य जी कौन है? या तो आपने शुरू में कहा होता कि हां मेरा टीचर है। आपने कहा मेरा टीचर प्रकृति है। हम हमने देखिए मैं बताऊं मेरा जो सबसे मेजर जो है मेजर पॉइंट जिनसे सीखता हूं मैं वो है प्रकृति मतलब पूरा आसपास [संगीत] का एरिया या मेरे प्रैक्टिकल। ठीक है? और जो जो सेकेंडरी है सेकेंडरी मैंने आपको नहीं बताया। सेकेंडरी भी मैं बता ही रहा था। सेकेंडरी मेरे आचार्य अग्निव्रत जी हैं और जो मतलब समझने के लिए और सपोर्टिव के लिए वो भी प्रकृति का हिस्सा ही है। ठीक है। आपने मान लिया कि गुरु गुरु की आवश्यकता पड़ती है। आपका भी कोई गुरु है। है ना? हम ये आपने मान लिया ना जी जी मेरा भी कोई गुरु है मतलब जो आप जो प्रकृति रूपी एक गुरु को कह रहे थे उसके अलावा मानुष मनुष्य रूप में बुद्धिमान एक व्यवहारिक आचार्य गुरु हैं आपके हां दो है

00:30:20:04 उसकी आवश्यकता पड़ती है आपने इतना मान लिया जी जी मैं मानता हूं मैं वही तो मैं पहले से ही बोल रहा था आपने बार ये कहा था ना कोई मेरी प्रकृति गुरु है तब मैं समझ नहीं पाया था प्रकृति मैंने मैंने आपको क्या बोला मैंने अगर सच बताऊं मेरे मेरे जो आपने काफी देखिए आपने काफी देर बाद आपने बोला कि आचार्य हैं मेरे मैं उनका नाम बता देता हूं मगर काफी देर तक आप प्रकृति को वो करते रहे थे एक्सप्लेन जब आप प्रकृति को एक्सप्लेन नहीं कर पा रहे थे बुक से अलग करते हुए तब आपने आचार्य का नाम लिया कि मेरे आचार्य भी हैं। एक मिनट आपकी आवाज कट कट के आ रही थी थोड़ा। अच्छा ठीक है। अब आप जो है दिवाली के बाद समय बताइएगा तब हम लोग बात करेंगे चर्चा करिए। ठीक है जी जी आपने अभी जो बोला था वो थोड़ा सा दोबारा से बता दीजिए दोबारा से यह बोला कि आपने अपने प्रकृति से सीखने को काफी देर तक डिफाइन किया जबकि मैं आपसे पूछता रहा कि जब मैंने आपसे ये पूछा कि बुक प्रकृति से अलग कैसे है तो आपने काफी देर तक प्रकृति को डिफाइन करने की कोशिश की बुक से अलग करते हुए कि भाई बुक बुक एक अलग चीज हो गई प्रकृति अलग चीज हो गई और जब काफी देर तक आपने किया उसके बाद आपने आचार्य का नाम लिया कि भाई मेरे आचार्य भी है। लो तो पहले प्रकृति पे आप डटे रहे, डटे रहे। कुछ देर बाद आपने

00:31:35:13 प्रकृति के साथ-साथ आचार्य का सहारा भी लिया। वो मैं आपको कह रहा हूं। अब आपने ये मान लिया है कि गुरु भी आवश्यक है। है ना? अब हम लोग बात करेंगे आगे वहां पर। चर्चा में जब आपके पास होगा। बस यही समझाना था मुझे। ये थोड़ा सा देखिए प्रकृति का मैंने इसलिए लिया था। उसका बस आप वही समझाइएगा। आप वही समझाइए। ठीक है। ठीक है। जी समझ गया आपकी बात। मैं जरूर बताऊंगा। जी जी धन्यवाद। [संगीत]

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Video 32:24 · 01 Jan 2026

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