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00:00:02:09 तो एक काम कीजिए हिंदुस्तान वर्ल्ड का नक्शा लीजिए और मार्क कीजिए कि रिलजन कहां-कहां जाता है। कहां-कहां चाहे वह लैटिन अमेरिका हो या मिडिल ईस्ट हो या फार ईस्ट हो या हिंदुस्तान के वह इलाके जहां मजहबी रख दीजिए नक्शा अलग अब दूसरा नक्शा कि कहां-कहां [संगीत] नाइंसाफी रिप्रेशन औरतों के हुकूक की पामाली जुल्म डिक्टेटरशिप कहां है नक्शा यही होगा [प्रशंसा] तो आप मुझे ये बताएं के जो इसका तरकीब इस्तेमाल क्या है पहले आप इसके मूल में जाइए कि दुनिया में लड़ाई किन दो पार्टियों के बीच में लड़ाई किन दो पार्टियों के बीच में एक पार्टी है जो कंजपशन करना चाहती है जो केवल भोग करना चाहती है और वो अपने से आसपास वालों के साथ भी मतलब अत्याचार करना चाहती है और अपने स्वार्थ को देख रही है वो भी भौतिक वादिता के चश्मे से क्योंकि वो ये नहीं मान रही है कि नहीं भैया हमारी आत्मा को भी सुख देना है अंतत तो कतवा हमारा कारण ईश्वर है वो इन सब पर ध्यान नहीं दे रही तो उसने यह बना रखा है कि हमको भोग करना है लस्ट इन सब चीजों को हमें पूर्ति करनी है और उसके कारण हमें अत्याचार करने हैं। अत्याचार करने के बीच

00:01:17:18 में क्या चीजें हैं जो हमारी बाधा बन रही है? ठीक है? यह नास्तिकता है यहां से। सबसे पहला क्या है? नास्तिकता। तो बाधा क्या बन रही है? बाधा बन रही है वह बातें जो ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करती हैं। वह मान्यताएं जो ईश्वर को मानती है जिनके कारण हमें धर्म प्राप्त होता है। जिनके कारण हमें क्या सही है और क्या गलत है यह बातें प्राप्त होती है। डूस एंड डोंट्स। और जब डूस एंड डोंट्स आ जाते हैं ईश्वर के कारण कि अगर हमें ईश्वर को प्राप्त करना है तो हमें यह करना है और यह नहीं करना है। यह डूस एंड डोंट्स। यही धर्म है। यही मर्यादा है। ठीक है? और इसी को आप मोरालिटी भी कह सकते हैं। लड़ाई किन दो पक्षों के बीच में पहले इसको आप समझ लीजिए। एक जो यह मानता है कि ईश्वर है और वो होने के कारण वो डूस एंड डोंट्स अप्लाई कर रहा है। तो जब ये डूस एंड डोंट्स अप्लाई होते हैं ना तो जिन लोगों को भोग में ज्यादा जिनकी वृत्ति है यह व्यवहारिक सत्ता है। सत्य है अब फिर आप मेरे पारमार्थिक सत्य को बीच में मत ले आना। तो जिन लोगों के अंदर भोग की चीजें ज्यादा हैं, वह उनको तकलीफ होती है ईश्वर के अस्तित्व

00:02:32:21 से और ईश्वर को प्राप्त कराने वाली विधा अर्थात धर्म से। तो पहली नंबर बात तो वो सीधे खंडन करते हैं। ईश्वर है ही नहीं तो मुझे धर्म को नहीं मानना पड़ेगा। जब इससे दाल नहीं गलती है तब दूसरे दूसरे धर्म स्थापित किए जाते हैं। जिसे हम कहते हैं धर्माभास। ठीक है? तो जहां पर भी यह धर्म के नाम पर जो युद्ध हो रहा है ना वह युद्ध धर्म के लिए नहीं हो रहा है। वह युद्ध हो रहा है कंजशन के लिए। फॉर एग्जांपल किसी व्यक्ति को अपनी बहन से विवाह करना है। धर्म उसके आड़े आ रहा है। मां से विवाह करना है। धर्म उसके आड़े आ रहा है। क्या करें? मेरे पास तो भैया आ गया। ईश्वर का एक भेजा हुआ मैसेंजर। उसने बता दिया कि भैया फलानी फलानी बहन से विवाह कर सकते हैं। है ना? यह सब चीजें हैं। तो किस में हो रही है लड़ाई? एक जो कंजशन करना चाहता है अत्याचार करके भी किसी भी तरह से एनी हाउ दूसरी जो लिविंग बींग्स है उनको खत्म करके उन पर उनका शोषण करके और दूसरा जो ईश्वर को मानने के कारण धार्मिक बाधाओं में बंधे होने के कारण ये जो शोषण वाली चीजें हैं उनसे वह कम हो रहा है। शोषण तो सभी

00:03:48:00 लोग कर रहे हैं। पेड़ों का शोषण तो शाकाहारी भी कर रहा है। कर रहा है ना? मगर उसमें एक कहीं ना कहीं वो क्या कहते हैं उसको? अनुशासन है जिसके कारण धीरे-धीरे वह शोषण से मुक्त हो रहा है। जैसे हमारे यहां जो सबसे वरिष्ठ जो आश्रम कहा गया वो सन्यास आश्रम सन्यासी इस सृष्टि का सबसे कम शोषण करता है। जो कंजपशन है धर्म के कारण वो कंजशन जो है नियंत्रित होता है, अनुशासित होता है। और क्या है कि अगर हम नियंत्रित और अनुशासित नहीं करेंगे उस कंजशन को तो उससे उसके गर्भ से और कंजशन निकलता जाएगा। तो धर्म उसको क्योंकि अनुशासित करता है तो वह बढ़ने की बजाय कैंसर की तरह वो कम होता है। जैसे कि आध्यात्म मार्ग में आने के बाद मैं अपनी बात करूं तो मेरा जो कंजशन को लेकर के कंजपशन को लेकर के पर्सपेक्टिव था वो कम हुआ है। और हो सकता है आने वाले सालों में और कम होता चला जाए। तो यह हो रहा है। जब धर्म को मानेंगे तो कंजप्शन और जो है नियंत्रित होंगे। हमारे पास धर्म होगा। बहन से विवाह नहीं करना है। माताओं को दृष्टि से नहीं देखना है। और जब हमारे पास धर्म नहीं होगा तो हम लोग इनमें भी हम अपने लिए छूट स्वतंत्र होकर के सबको देखेंगे। और फिर

00:05:03:13 जो ये प्रवृत्ति है नग्न देखने की कामना है जो पुरुष के मन में स्त्री को वो जो प्रवृत्ति है उस प्रवृत्ति से कभी मुक्त नहीं हो पाएंगे। मुक्त नहीं हो पाएंगे तो फिर हमारा अटैचमेंट माया रूपी संसार से बना रहेगा। माया रूपी संसार से बना रहेगा तो सदा दुखी रहेंगे। वह सारे कॉन्सेप्ट आपको मैंने क्लियर किए। तो कहने का मतलब यह है कि अह किन दो लोगों के बीच में लड़ाई है? एक जो भोग करना चाहते हैं। दूसरे जो मुक्त होना चाहते हैं। जो जो इस चीज को स्वीकार कर रहे हैं। भैया इस संसार से हमें अंतिम सुख नहीं मिलेगा। और दूसरे जो इस अंतिम सिख को मना कर रहे हैं वह नास्तिक है। अब क्या होता है? नास्तिक चोला ओढ़ते हैं या उनकी दाल नहीं गलती है। वह नए-नए ईश्वर खड़े करते हैं और उनको कहते हैं धर्माभास। वो रियल धर्म नहीं बनाते बताते। रियल ईश्वर नहीं बताते। ईश्वर जैसा कुछ बताते हैं। तो सनातन के पर्सपेक्टिव से जब हमने पूर्ण ईश्वर को ख्यापित किया, सर्वशक्तिमान को ख्यापित किया, सर्वज्ञ को ख्यापित किया, सर्व्यापक को ख्यापित किया। हां। तो उस पर्सपेक्टिव से जब यहां पर इस्लाम भी उसी कैटेगरी में दिखाई देगा जब आप देखेंगे तो

00:06:18:21 तो फिर क्या होता है कि अब भैया हमने अपना एक नया कांसेप्ट बना लिया कि ईश्वर ये कर सकता है ये नहीं कर सकता पूर्ण नहीं है यहां बैठा वहां नहीं बैठा और ज्यादा गहराई में जाकर बातें मत करो है ना जैसे कि एक जगह बोला गया मुफ्ती जी के द्वारा हमारे यहां सवाल करने के लिए मना नहीं किया गया है किया गया है कुरान 5 101 कहती है कि ज्यादा सवाल मत करो वरना ना जो तुमसे पहले भी कुछ लोगों ने ऐसे ही सवाल किए गए थे तो उनके लिए वो आयतें भी खोल दी गई थी जिनका निर्वाह करना बहुत कठिन होता है तो तुम्हारे लिए भी खोल दी जाएंगी हम इस पर भी आगे बात करेंगे कि अगर लोगों को जो कठिन लग रहा है उसके हिसाब से ईश्वर को प्राप्त होने वाली विधा में परिवर्तन किया जा रहा है

00:07:07:03 तो फिर यह ईश्वर जो है बदल रहा है तो एटरर्नल कैसे उसको प्राप्त कराने वाली जो विधा है वह तो बदल रही है तो पहले वह किसी और विधा से प्राप्त हो सकता था अब वो किसी और विधा से प्राप्त हो रहा है तो तो बदल रही है दो 187 में कहा जा रहा है कि भैया अभी तक जो है रोजे की रात में अपनी स्त्रियों के साथ जो है संग स्त्री संग कर लेना जो है पाप नहीं था पाप था आज से पाप नहीं होगा यह क्या है ऑन द स्पॉट हो रहा है पहले से नहीं था पहले से तो कुछ और था पाप था आज से पाप मुक्त हो गए तो क्या बदल रहा है आपके यहां चीजें चेंज हो रही हैं। तो अगर ईश्वर को प्राप्त कराने वाली चीजें चेंज हो रही हैं तो फिर वह ईश्वर भी तो चेंज हो रहा है जिसको प्राप्त करना है। वो नहीं हो रहा चेंज। भाई पहले कुछ और तत्व था तभी तो उसके लिए विधा दूसरी थी। अब कुछ और तत्व है तभी तो उसके लिए विधा दूसरी है। विधा चेंज हो रही है तो ईश्वर का भी चेंज होना उससे परिलक्षित हो रहा है। अब आप यह समझ गए कि किन दो लोगों के बीच में लड़ाई है। भोग करने वाले और मुक्ति के मार्ग पर चलने वाले जो मुक्ति के मार्ग पर चलने वाले लोग हैं। वही साधु कहलाते हैं। साधु मेरा मतलब अच्छे लोग सज्जन लोग वही साधु कहलाते हैं। और वही जो है धर्म पद पर आगे बढ़ते हैं।

00:08:22:04 तो वही अनुशासित होते हैं। अब आप कहोगे भैया मैं तो धर्म को नहीं मानता मगर मैं भी जो है उन चीजों का पालन करता हूं। तो यह ठीक इस तरीके से है जैसे आप थॉमस अलवा एडिसन को नहीं जानते मगर आपके घर में बल्ब जल रहा है। बल्ब बल्ब के जितने हिस्से में आपके जीवन में बल्ब है ना उतने हिस्से में आप थॉमस अलवा एडिसन से कनेक्टेड हो। उसी प्रकार से जितने हिस्से में आपके यहां पर मर्यादा है नास्तिक के अंदर उतने हिस्से में आप आस्तिकता से कनेक्टेड हो। और उसी प्रकार से जितने हिस्से में जो इस्लाम इत्यादि जो सनातन के विपरीत धर्म है जितने हिस्से में वो सनातन के साथ सामंजस्य देखा जाता है उनमें तो उतने हिस्से में उनका भी कनेक्शन हो जाता है सनातन से। ठीक है? आज हम पहली बात तो आपका एक तर्क था कि आज जो है यह वाली बहस करने का हमें अवसर प्राप्त हो रहा है। तो यह भी बात एक बहुत गलत बात है। हिरण्यकश्यप ने भी यह सब बातें कही थी कि अगर ईश्वर है तो इस खंभे से निकल के दिखाए। तो ये सारे तर्क तो हमारे यहां जाने कब से हैं। बौद्धों ने भी तो नास्तिकता ही फैली। 2 हजार साल पहले तो तर्क था। ईश्वर के ना होने में ऐसेसे भयंकर तर्क किए गए। जाइए पढ़िए बुद्ध दर्शन। मेरे ख्याल से अगर आप बुद्ध

00:09:37:13 को पकड़ लेंगे तो कम से कम इस्लाम को मानने वाले जो यह जो मुफ्ती जी हैं आपके समकक्ष खड़े हुए हैं यह तो आपको परास्त नहीं कर पाएंगे। इतनी बात तो मैं कह रहा हूं। उस नास्तिकता को वो जो बुद्ध की नास्तिकता है ना उसको हराने के लिए सनातनी को आना पड़ेगा। मनुवादी को आना पड़ेगा। शंकर परंपरा के व्यक्ति को आना पड़ेगा। ठीक है? वहां तब काम नहीं चल पाएगा। ये इस्लाम को मानने वाले जो मुफ्ती इत्यादि हैं। खैर तो दो लोगों के बीच में युद्ध है। एक कंजशन भोग वाली पार्टी है और एक जो है मुक्ति पाने की चाह रखने वाली पार्टी जो उसके प्रति क्रिया उसने स्वीकार किया है कि मेरे अंदर वो भूख है वो स्वीकार करके उसके अनुसार वो चल रहे हैं। अब क्या है कि पहली नंबर बात ये जो नास्तिक पार्टी है वो अपना चोला ओढ़ती चोला ओढ़ती है धर्म का दूसरे धर्म का विधर्मी तो वहां युद्ध होता है। ठीक है? युद्ध कैसे होता है कि जो जो जिसने चोला ओा है धर्म का जिसने ईश्वर जैसा ईश्वर आभास फैलाया है तो फिर वहां उसके साथ जो वास्तविक धर्म है और जो कल्पित धर्म है उसके बीच में आपको दिखाई देता है युद्ध और क्यों हो रहा है युद्ध क्योंकि हमें उन सिद्धांतों को बचाना है जहां पर एक मां को मां कहा जाए ईश्वर के अस्तित्व

00:10:52:14 को बचाना है असतो मा सद्गमयात सो ज्योतिर्गमया मृत्युमा मृतम गमया को बचाना है ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध कर सकने वाले इन सिद्धांतों को बचाना है। इसलिए वह युद्ध हो रहा है। मानवता के लिए युद्ध हो रहा है। ठीक है ना? क्योंकि अगर धर्म नहीं है तो मानवता नहीं है। पशुता है। धर्मणी ना पशु भी समाना। अब वो आगे बात करेंगे कि मोरल्टी आपने जो कुतर्क किए वो तो उन कुतर्कों का खंडन तो उन्होंने कर ही दिया मुफ्ती जी ने। तो

00:11:29:13 एक बात अब अब एक चीज और बताता चलूं जब धर्माभास की भी दाल नहीं गलती है तो वह फिर बन जाता है सनातनाभास जिनके शोधन के लिए हम कार्य कर रहे हैं वो सनातनाभास क्या है जो हमारे दर्शक हैं वो जानते हैं इस आर्य समाज रामपाल ब्रह्माकुमारी ये सब सनातनास है। पहले था धर्माभास अब हो गया सनातनाभास और फिर इसके इन इस ये भी और आगे थोड़ा सा एक्सप्लोर हो जाते हैं। तो इनसे वैचारिक युद्ध चलता है। वह युद्ध आपको युद्ध जैसा नहीं दिखेगा। वैचारिक युद्ध चलता है कि भैया तुम सनातन के नाम से जो जो गलत बातें फैला रहे हो मत फैलाओ। वैचारिक युद्ध चलता है। और वहां पर जो है व्यवहारिक युद्ध भी दिख जाता है सीधे-सीधे वालों में। और अंतत गतवा किस किस चीज के लिए लड़ाई हो रही है? आपने कहा ना कि बच्चों को मारा ना जाए। बच्चे ना मरे, बच्चों के साथ अत्याचार ना हो। यह भी एक धर्म है, नैतिकता है। अगर आप ईश्वर के अस्तित्व को हटा देंगे तो लोग आपसे क्वेश्चन करेंगे कि भैया तुम्हारे अंदर इन बच्चों को ना मारने का भाव है। हमारे अंदर तो खाने का भाव है। निठार ही हैं। हम तो क्या कर लोगे? कैसे सिद्ध करोगे वही धर्म? और ये बात मुफ्ती जी ने भी आगे कही है। ज्यादा लोगों के कह देने से वही धर्म हो जाएगा क्या?

00:12:44:26 मुफ्ती यह जो अलवजदी है ना जो इसमें आए हुए हैं इनके ही यहां पर इनहीं की टीम थी वहां पर आया था एक व्यक्ति इन्होंने प्रश्न किया कि भाई फिर बहन को अगर तुम ईश्वर को नहीं मानते धर्म को नहीं मानते तो बहन के साथ बहन के साथ वो जो संबंध बना रहा है उससे आपका आपको आपत्ति है उसने कह दिया नहीं आपत्ति लो अगर हम ईश्वर के अस्तित्व को हटा देंगे भाई साहब तो यह जो धार्मिक मर्यादा आपको दिख रही है ना छिन्नभिन्न हो जाएगी और ऐसा हो भी चुका है। हिस्ट्री पढ़ लीजिएगा। डार्विन ने जब कह दिया था कि वो नहीं है। कोई ईश्वर नहीं है। वहां का वहां की हिस्ट्री जान लीजिए आप। अच्छा दूसरी बात क्या है कि आजकल आपने कहा कि मेजॉरिटी के पीपल तो आजकल जो हां आपने आधुनिक आधुनिकता से जोड़ा कि आधुनिकता हो रही है इसलिए आपको आज ये मंच मिल रहा है। आप बताइए संस्कार कम हुए हैं पहले से या ज्यादा हुए हैं। आप ही के परिवेश में बता दीजिए। संस्कार पहले से कम है या ज्यादा है? फॉरेन इंडस्ट्री जो आज की डेट में है व्यभचार का अड्डा वह पहले ज्यादा सशक्त थी या आज ज्यादा सशक्त है या क्या कहते हैं आज से आने वाले भविष्य में तो जिसको आप आधुनिकता का नाम दे रहे हैं वहां मानवता का गला

00:13:59:27 घोटा जा रहा है। समझ रहे हैं? और यदि हम लोग हम जैसे लोग इतने हिस्से में मुफ्ती जी को भी साथ में लूंगा। वो बात और है फिर उनका ईश्वर सिद्ध नहीं होता। धर्मास सिद्ध होता बात अलग है मगर इतने हिस्से में तो उनको साथ में लूंगा। हम जैसे लोग अगर नास्तिकता को काउंटर नहीं करेंगे तो ये जो रेशियो अभी थोड़ा-थोड़ा दिख रहा है ना आपके घर के बगल में वैश्यालय नहीं है या आपके घर की स्त्रियों को जो है गलत कुदृष्टि से नहीं देख रहा है कोई या आपके घर में ही ऐसी संताने नहीं उत्पन्न हो रही हैं। हमारे आपके घर में ऐसी संताने उत्पन्न नहीं हो रही है जो बहन के ऊपर कुदृष्टि डालें, मां के ऊपर कुदृष्टि डालें। अगर हम जैसे लोग मैं और मुफ्ती जैसे लोग अगर खड़े नहीं होंगे नास्तिकता के विरोध में तो वहां पर आपको यह दृश्य भी देखने को मिल जाएंगे तब सोचोगे कारण दो ना उसको मां को मां मानने का कारण दो बहन को बहन मानने का कारण दो नहीं दे पाओगे आप तो मेजॉरिटी क्या कर रही है सम सेक्स चेंज ऑपरेशन करा रही है तो आपको तो पसंद होंगे आपने कहा था ना फतवे जारी हो गए थे विज्ञान के कारण यह है वो है वो हुए होंगे गलत भी होंगे मगर भाई विज्ञान के नाम पे आप गला घोट रहे हो कि नहीं घोट रहे हो? प्रकृति का हनन कर रहे हो कि नहीं कर रहे हो? विज्ञान के नाम पे

00:15:13:10 अब आप यह कह दोगे कि उसी विज्ञान का सहारा लेकर के क्यों बोल रहे हो? इसके इसमें भी तर्क ले लो। धरती पर गिरा हुआ इंसान धरती का ही सहारा लेकर के उठ खड़ा होता है। जिस वायुजयान को आकाश में उड़ना है वह धरती का ही पहले सहारा लेता है। तब जो है अपने आप को उस योग्य बनाता है कि जो आकाश में धरती को छोड़कर के आकाश में उड़े। तो उसी प्रकार से यह जो विज्ञान के कारण विज्ञान के आधार पर जो मानवता का गला घोटा जा रहा है। इन परिस्थितियों से निकलने के लिए इन्हीं परिस्थितियों का सहारा ले रहे हैं हम लोग। ठीक है? अगर आप कहते कि मोरल्टी अपने अंदर से आती है तो क्या निठारी लोगों की मोरल्टी उनके अंदर से नहीं आई थी? सेट कैसे करेंगे? निठारी कहेगा मुझे कुकर में उबाल करके बच्चों को खाना है। कैसे करोगे मोरल्टी सेट?

00:16:12:20 [संगीत]

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Video 16:14 · 30 Dec 2025

क्या दुनिया में युद्ध का कारण धर्म है? Reply to Javed Akhtar @TheLallantop debate does God exist

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A · Video क्या इस्लाम नास्तिकता का खंडन करने में समर्थ है @TheLallantop Debate o...
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