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00:00:03:15 ब्रह्मा कुमारीज का कंक्लूजन क्या है? धर्म क्या है? वह बता दीजिए। ठीक है? डायरेक्ट पॉइंट की बात करेंगे। [गला साफ़ करने की आवाज़] चलो ठीक है। तो ब्रह्मा कुमारी के संस्था से धर्म का मतलब ये है कि हमारा स्वधर्म ही धर्म है। मैं लक्षण नहीं रूप नहीं। मैं मैं पूछ रहा हूं कि ब्रह्मा कुमारी के अनुसार धर्म की आवश्यकता क्यों है किसी को? वही तो मैं धर्म धर्म के ब्रह्मा कुमारी के ज्ञान के मुझे जो मुझे जितना ज्ञान समझ में आया है उसी अनुसार आपसे बात कह रहा हूं कि मुझे धर्म की व्याख्या यही समझ में आई है कि आत्मा का जो स्वधर्म है वही हमारा सत्य धर्म है।
00:00:52:16 आत्मा का जैसे कोई आपसे पूछ रहा हूं। एक व्यक्ति सामने आपके खड़ा हुआ है। अभी तक तो वो यह भी नहीं जानता है कि मैं आत्मा हूं या क्या हूं। आप जी वो आपकी बातों को या आपके द्वारा आत्मा के अनुसार बताई जाने वाली बातों को क्यों सुने और क्यों माने? उसको क्या फायदा है उससे? वो फायदा क्या है? क्यों? क्या आवश्यकता? फायदा यही है। हां। ये जैसे गीता में जैसे कहा है कि स्वधर्म सुख देता है। पर धर्म दुख देता है।
00:01:24:24 यानी कि धर्म को पालन करने हमारे हां तो हमारे निजी स्वरूप में हम जब टिकते हैं तो हम अपने स्वधर्म में टिकते हैं। तो हमारा जो जो बाकी जो मनुष्य ने जो बनाए धर्म है वो तो अपने लेकिन धर्म का पालन करने धर्म का पालन करने धर्म का पालन करने से सुख की प्राप्ति होती है। ठीक है? जी जी जी सत्य धर्म से वो सत्य का है कि आत्मा का निज गुण में हमें समझ गया मुझे दूसरी बात पूछनी है ब्रह्मा कुमारी के अनुसार जो सत्य धर्म है उसके उसका पालन करने से सुख की प्राप्ति होती है तो प्रश्न यहां पर ये आता है कि सुख की प्राप्ति फिल्म देख के भी होती है सुख की प्राप्ति स्वादिष्ट भोजन करने से भी होती है तो फिर कौन सा अंतर आ रहा है जिस सुख की प्राप्ति होती है ब्रह्मा कुमारी के अनुसार जो धर्म का पालन करने से होती है जी स्वधर्म यानी मैं तो बोल रहा हूं कि जो आत्मा का निजी गुण है उसी के आधार पर हम जो स्थित होंगे उसी के हमें सुख अनुभव होता है। वो भौतिक सुख की बात अलग है कि खाने पीने की बात अलग है? तो अंतर बताइए ना दोनों में क्या अंतर है?
00:02:40:02 दोनों में जैसे कि जी हमारा सत्य सनातन धर्म जो है वो आत्मा से निजी गुणों के आधारित धर्म है जो सनातन धर्म है। आप आप यहां से शुरू करिए कि मैं ब्रह्मा कुमारीज आकर के स्पिरिचुअल सेशन क्यों लूं और उसके बाद उसको फॉलो क्यों करूं जबकि मुझे पहले से ही अमुक अमुक जगह पर सुख की प्राप्ति हो रही है और ब्रह्मा कुमारी भी यही कह रहा है कि हमारे पास भी आओगे तो सुख मिलेगा। तो दोनों सुख में अंतर क्या है वो बताइए। आत्मा की बात जब आप करने लगते हैं आत्मा की बात जब आप करने लगते हैं वो तो तब की बात है जब आप उसको सेशन दे दे और ये सिद्ध कर दे उसको ये बता दें कि आत्मा हो तुम। तुम्हारी ये चीजें हैं। वो तो सेशन की बात है। मगर प्रायोरिटी में हम उसको क्या बताएंगे आने के लिए कि वो आत्मा की वो जो डेफिनेशन है वो सुने। जी जी सर मैं यही इसीलिए बता रहा हूं कि ब्रह्मा कुमार से जुड़ा तब तक तो मुझे धर्म के आयु तो मुझे जैसे भौतिक धर्म है हम जानते हैं कि हिंदू मुस्लिम ये सब इनको हम धर्म ही कहते थे पहले मैं एक आप मेरी बात समझिए तो थोड़ा सा क्या है ना बहुत चर्चा हो भी चुकी है मैं ये
00:03:55:06 पूछ रहा हूं कि एक सामान्य व्यक्ति है अभी वो ब्रह्मा कुमारी आया नहीं है ठीक है उसको मालूम है कि मैं रसगुल्ला खाऊंगा तो मुझे मिठास जो मीठा सुख मीठे का स्वाद मिलेगा सुखी होऊंगा। उसको मालूम है मैं फिल्म देखने जाऊंगा धुरंधर पार्ट टू मैं उसको देख के सुखी हो जाऊंगा। ठीक है? तो उसको सुख मिल रहा है तो ब्रह्मा कुमारी क्यों आए? वहां वहां मिलने वाले सुख में और यहां मिलने वाले सुख में अंतर क्या होगा? हां जी। तो मैं इसीलिए कहूंगा कि ब्रह्मा कुमारी में आके जब हमें सत्य ज्ञान का परिचय मिलता है। सत्य ज्ञान अर्थात हमें स्वयं का परिचय मिलता है। स्वयं के आधार से हमें ईश्वर का परिचय मिलता है। ईश्वर के पूरा ड्रामा का मिलता है। समझ में आता है कि कैसे क्या होता है। अरे भैया सुख सुख में अंतर क्या आया वो तो बताओ। सुख में क्या अंतर आया? यहां मिलने वाले सुख में आप मेरी बात समझिए जो परमेश्वर का परिचय है जो अपना परिचय है इस सबका पर्यावसान इसमें है ना कि मुझे सुख प्राप्त होगा तो सुख तो बाहर भी प्राप्त हो रहा है इन परिचय के बिना तो अंतर क्या है दोनों प्रकार के सुख में हां
00:05:11:01 जी तो मैं इसीलिए वही बात कह रहा हूं कि जब हमें स्वयं का परिचय पता होता है तो हमें सुख का अनुभव समझ में आता आता है और जो हम खुद को देह समझने लगते हैं तो वो भौतिक सुख का अनुभव होता है तो भौतिक सुख का अलग बात है देह का सुख अलग है वो वो अलग आत्मा का सुख अलग है वो अलग है वही निर्भयता हमारे हमारे अंदर वही निर्भयता पैदा होती है कि आत्मा अगर अविनाशी है तो दुख की चिंता तो अलग होती है हर इंसान को सुख की अपेक्षा होती है तो सुख कैसे प्राप्त किया जाता है सच्चा सुख आज हम कोई भी इस दुनिया मुझे लगता है मुझे लगता है आप ये मुझे लगता है आप यह कहना चाहते हैं मैं भी आपकी मदद कर देता हूं शायद आपको वो शब्द एग्जैक्ट नहीं मिल रहा है कि ये जितने भी सुख है ना भौतिक संसार वाले ये इन सभी सुखों का अरे भाई साहब बोलने तो दो बोलने दो मैं आपकी मदद कर रहा हूं फिलहाल [गला साफ़ करने की आवाज़] कि ये जितने भी भौतिक सुख हैं भौतिक संसार वाले ये सभी सुख बाधित हैं इनका अंत हो जाता है। अगर हमने फिल्म अगर हमने फिल्म देखी तो फिल्म खत्म हो जाती है। रसगुल्ला खाया तो एक खाया
00:06:26:02 दो खाया तीसरे रसगुल्ले में खराब लगने लगता है। यहां भौतिक संसार से जितने भी सुख हमें मिल रहे हैं उनका अंत होता है। तो हम आध्यात्मिक विश्वविद्यालय यानी कि आपके आपके अनुसार जो ब्रह्मा कुमारी है वहां इसलिए जाते हैं कि वहां का सुख अनंत सुख होता है। ऐसा है अनंत सुख अनंत सुख होता है। ऐसा है कभी ना खत्म होने वाला हम अनुभव करने हम अनुभव करने लगते हैं। कह रहा हूं जैसे हम ज्ञान के आधार पर मैं कह रहा हूं ब्रह्मा कुमारी जाने पर अनंत सुख मिलेगा ना
00:07:06:09 जी अनुभव होने लगता है। अनंत सुख मिलेगा ना? मैं प्रैक्टिसिंग में अनुभव की बात ही नहीं कर रहा। हां जी। मैं जो मैं जो दूसरा डायमेंशन है जो दूसरा डायमेंशन है पारलौकिक मैं कह रहा हूं ब्रह्मा कुमारी जाने पर वहां की चीजों को फॉलो करने पर उसमें स्थित होने पर अंतत गतत्वा वहां पर अनंत सुख की प्राप्ति होती है। हां जी जी ठीक है तो ये बताइए अनंत सुख की प्राप्ति होती है और जो इसलिए ब्रह्मा कुमारीज के यहां जो जो नियम और अविनाशी सुख अब यहां पहली बात आ जाती है कि ब्रह्मा कुमारीज के यहां जो जो नियम और सिद्धांत है ठीक है ब्रह्मा कुमारीज के यहां पे जो भी नियम और सिद्धांत है यानी कि वो धर्म है जी है ना क्योंकि ब्रह्मा कुमारी अविनाशी सुख अरे भाई आप मेरी बात समझने का प्रयास तो करो हां क्यों क्योंकि ब्रह्मा कुमारी मैं बाद में पढ़ता हूं। क्योंकि ब्रह्मा कुमारीज अनंत सुख प्रोवाइड करवा रहा है। इसलिए
00:08:21:10 ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा बचा बताए जाने वाले जो आचरण है वो धर्म है। वो नियम है। क्योंकि ब्रह्मा कुमारी अनंत सुख दिलवा रहा है। ठीक है। ठीक है। जी। जी। अब यह बताइए कि ब्रह्मा कुमारीज इस्लाम को, बाइबल को, कुरान को इनको धर्म क्यों कहता है? क्योंकि ब्रह्मा कुमारीज का जो आचरण है वो तो अलग है और कुरान का जो आचरण है वो अलग है। बाइबल का जो आचरण है वो अलग है। तो फिर इनको धर्म क्यों कहता है?
00:08:58:12 अगर अगर ब्रह्मा अगर ब्रह्मा कुमारी अगर ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा बताया जाने वाला जो व्यवहारिक आचरण है वो धर्म है तो उसके ठीक विपरीत कुरान के द्वारा बताया जाने वाला या बाइबल के द्वारा बताया जाने वाला वो फिर आचरण धर्म कैसे है उसको धर्म क्यों कहता है ब्रह्मा कुमारी जी बताता हूं [गला साफ़ करने की आवाज़] ब्रह्मा कुमारी में जो हम धर्म स्थापित करने की प्रयत्न में है। समझ में आ रहा है कि हमारे अंदर पहले वो धर्म स्थापित करने का वो प्रयास है। हम प्रयासरत है। तो हम प्रयासरत में जो हमें नियम कुछ धारणाएं उस पर चलने का प्रयत्न करते हैं। तब जाके हमारे अंदर वो धर्म स्थापित होगा। क्योंकि हम बहुत काल का अभ्यास करेंगे। तब आत्मा में वो एक मिनट भाई साहब। भाई साहब मैंने पूछा क्या है? आप मुझे बता रहे हो कि हम ऐसा करेंगे तो ये मिलेगा। ऐसा करेंगे तो ये मिलेगा। मेरा प्रश्न क्या है कि ब्रह्मा कुमारी एक मिनट भाई साहब आप गलत चीजें बोलते हो ना एक्स्ट्रा तो उसमें भी टाइम लगता है थोड़ा ज्यादा मैंने प्रश्न ये पूछा है कि ब्रह्मा कुमारीज की जो नियमावली है डूज एंड डोंट्स वो बिल्कुल ठीक विपरीत है कुरान के डूज
00:10:13:15 एंड डोंट से तो फिर ब्रह्मा कुमारी कुरान को धर्म क्यों कह रहा है इस्लाम को धर्म क्यों कह रहा है ये पूछा है क्या करने से क्या मिलेगा ये मेरा प्रश्न नहीं है ब्रह्मा कुमारी जो भी है जो भी है अगर वो धर्म है तो कुरान के द्वारा मिलने वाला जो आचरण है या बाइबल के द्वारा मिलने वाला जो आचरण है वो धर्म कैसे क्योंकि दोनों चीजें अलग है ब्रह्मा कुमारी की डस एंड डोंट्स अलग है हां अलग है अब बताइए तो अलग इसीलिए है अलग इसीलिए है कि ब्रह्मा कुमारी अलग अलग अलग अलग इसलिए नहीं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं यदि ब्रह्मा कुमारी का डस एंड डोंट है धर्म तो फिर कुरान का एंड डोंट्स है वो धर्म क्यों उसको धर्म क्यों कह रहा है ब्रह्मा कुमारी वही सब जब मुझसे कुछ सुनेंगे मुझे बात करने दोगे तो आपको पता चलेगा ना आपने बताया है आप आप देखिए आपने अभी क्या बोला आपने बोला कि वो अलग इसलिए मैं नहीं पूछ रहा हूं कि वो अलग क्यों है मुस्लिम जो कुरान है वो अलग क्यों मैंने नहीं पूछा मैं पूछ रहा हूं वो अलग है तो फिर उसको आप धर्म क्यों कह रहे हो यह पूछ रहा हूं जैसे कि ईमान
00:11:31:18 एक्स मैं एक एग्जांपल दे दे रहा हूं जो सिविलाइज्ड है जी जो जिसके पास मर्यादा है वो मनुष्य है ठीक है और जिसके पास मर्यादा नहीं है वो पशु है यानी कि मान लो कुत्ता बिल्ली इन सबके पास मर्यादा नहीं है ये ये जानवर है और जिसके पास मर्यादा है वो मनुष्य है ठीक ठीक है? तो अब मैं ये पूछ रहा हूं कि जब उस फलाने किसी के पास मर्यादा नहीं भी है। यहां पे मैं इस्लाम की बात नहीं कर रहा हूं। नहीं बाइबल की बात। अब मैं क्योंकि यहां मैंने उदाहरण दिया तो मैं एक एग्जांपल दे रहा हूं कि जिसके पास मान लीजिए धर्म नहीं भी है। जिसके पास नियम नहीं भी है उसको हम क्यों कह रहे हैं कि वो मनुष्य है। समझ में आया आपको? जिसके पास नियम है वो मनुष्य है। तो जिसके पास नियम नहीं है उसको हम मनुष्य क्यों कह रहे हैं? हां। अब अब आप समझ गए अब मैं आपकी बात और मेरे ख्याल से मैं 14 बज के 14 मिनट की लाइव हो चुकी है। मैं लगभग दो मिनट तक सिर्फ सुनूंगा आप मेरे मेरे सवाल का आप आंसर जी जय श्री राम बाकी जो धर्म है वो देह के आधार पे आधारित धर्म है। देह के गुणों के आधारित धर्म है और
00:12:46:19 हमारा सत्य धर्म जो है वो आत्मा के निजी गुणों के स्थापित किया हुआ धर्म है। यानी अपना स्वरूप में स्थापित है। तो वो बाकी भी धर्म है लेकिन देह के आधार पर धर्म है। इसलिए हम उनको धर्म नहीं कहते हैं। लेकिन उनका स्वरूप अलग है। उनका भष अलग है। हमारा भस अलग है। क्योंकि ईश्वर ने जब ज्ञान देकर जो धर्म आत्मा के निजी धर्म पर जो सनातन धर्म स्थापित किया है। वो आत्मा के ज्ञान के आधार स्थापित किया हुआ है। और उनका जो धर्म है देह में आने के बाद यानी जब त्रेता युग के बाद जो बाकी धर्म स्थापित हुए हैं यानी द्वापर से द्वापर युग से तो पिछले अा हजार साल में हम मनुष्य देहिक बन गए हैं तो उसके आधार पे उनके धर्म जो स्थापित हुए हैं उनके में तो त्रुटियां आएंगी जो स्वधर्म में और उनमें तो अंतर होगा ही जरूर यानी आत्मा के आधार पे जो हमारे में अंदर जो पांच विकारों ने प्रवेश किया उसी के आधार पर उनके धर्म है। हमारा जो धर्म है वो संपूर्ण निर्विकारी धर्म था। यानी हमारे सत्य धर्म में यानी सनातन धर्म में कोई भी विकार नाम की अंश मात्र चीज नहीं थी। यही फर्क
00:14:01:27 है कि वो देह के आधार पर स्थापित धर्म है और हमारे निज गुणों के आधार पर स्थापित धर्म यानी आत्मा स्वधर्म में वही सच्चा स्वधर्म सुख देता है और पर धर्म दुख देता है यानी बाकी में हमारे अंदर जब ये काम क्रोध ये सब पैदा होते हैं वो तो दुखी दायक दुखी संसार हो जाता है यही फर्क है दोनों धर्म में सनातन धर्म में और इस्लाम और बाकी धर्म निर्विवाद रूप से मैंने आपको दो मिनट तक सुना। आपने मुझे मोटी मोटी बातें जो बताई है मैं उनको बताऊं कि जो ब्रह्मा कुमारी जो धर्म बता रहा है वो देह का नहीं आत्मा का धर्म है। ठीक है और धर्म क्या था? धर्म भाई साहब बीच में मत बोलिए। अब ठीक अब बीच में मत बोलिए। मैंने आपको सुना। अब मैं बोल रहा हूं समझिए। अच्छा तो हां ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा बताया जाने वाला जो धर्म है वह आत्मा का धर्म है और बाकी ये सब जो धर्म है ये देह के ऊपर आधारित धर्म है। ठीक है और मेरे ख्याल से आपने ये भी कहा ये भी आपने ये भी कहा है कि देह के ऊपर आधारित धर्म से सुख
00:15:16:28 की प्राप्ति नहीं होती है। पर आत्मा के ऊपर आधारित धर्म से ही सुख की प्राप्ति होती है। ठीक है? ये दो बातें मोटी मोटी आ गई। ठीक? अब पहली बात क्या है? जब हम शुरू से चले थे तो हमने यह देखा था कि धर्म उसे कहते हैं जिसमें कि अनंत सुख प्राप्त हो। तो यह वाली बात तो खारिज ही हो गई। या तो आप यह कहो कि उसको भी धर्म कहते हैं जिसमें अनंत सुख प्राप्त ना हो। फिर तो फिल्म जाना भी धर्म है। फिर तो मीठा रसगुल्ला खाना भी धर्म है। क्योंकि अनंत सुख नहीं मगर सुख तो प्राप्त हो ही रहा है। अनंत सुख की प्राप्ति नहीं हो रही है। उसको हम धर्म नहीं मान रहे थे शुरू में। अब आपने कहा मान रहे हैं। हां उसको दहिक धर्म कह रहे हैं। तो यानी कि फिल्म जाना भी धर्म है। तो दुख तो उसके है नहीं। इसलिए तो मैं बता रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं कि मैं अभी एक चार पांच चीजें लिख दूंगा। शिवशु नारायण द्विवेदी ने ये कहा है और फिल्म जाना है और मीठा खाना है, रसगुल्ला खाना है, छोले भटूरे खाने हैं, नान खानी है, कुलचा खाना है और यह धर्म है। मैंने कह दिया। तो आप इसको धर्म कहने लगोगे क्या?
00:16:24:12 सुख धर्म इसीलिए कहेंगे कि हम नहीं हम बोलचाल व्यवहारिक प्रयोग करने के लिए हम धर्म तो कहेंगे जरूर है नहीं वो ये कहूंगा है नहीं है नहीं वो जब नहीं नहीं नहीं हमें हो या ना हो वो उसका आधार अलग है जैसे कि पानी का गुणधर्म भाई साहब आप भाई साहब आप सत्य बोलने आए ना सत्य बोलने आए ना ये मत बताओ कि हो या ना मैंने पूछा वो अधर्म है कि नहीं कुरान और बाइबल फिर मैं दो थोड़ा सा तो समझा दो समझाने दो थोड़ा सा कि जैसे पानी का गुणधर्म है तो पानी का भी कुछ धर्म है ठंडक देना अग्नि का धर्म है ऊर्जा देना गर्मी देना तो हर अपना अपना हर कुछ धर्म ही होता है वैसे ही पर्सनली उसका गुण होता है जैसे अभी हर कुछ धर्म है हर एक का गुण धर्म है। गुणों के आधारित वो धर्म है। सुनो किसी का स्वभाव क्या है? मैं वो नहीं पूछ रहा हूं। आपके हिसाब से सुनो भैया भैया सुन लो सुन लो। यानी कि स्वभाव के आधार पर धर्म बदल जाता है। ये बात है।
00:17:40:04 जी यानी कि उनका स्वभाव के आधार पर उनका धर्म है और हमारे स्वभाव के आधार पर हमारा धर्म है। जी। उनका धर्म हिंसा सिखाता है। हमारा धर्म हिंसा नहीं सिखाता है। भाई साहब मैं प्रश्न क्या कर रहा हूं आप? मैं प्रश्न कुछ और कर रहा हूं। भाई साहब मुझे करने दो। धर्म की डेफिनेशन यह है कि धर्म का पालन करने से अनंत सुख मिलेगा या धर्म की डेफिनेशन यह है कि जिसके स्वभाव के अनुसार उसने जिन बातों को मान लिया कि मुझे यह करना है, यह नहीं करना है, वह वो धर्म कही जाएंगे। इसमें से धर्म की डेफिनेशन कौन सी है?
00:18:18:16 अपने मूल स्वधर्म से आधारित ही धर्म को स्वधर्म कहेंगे। बाकी तो परधर्म कहेंगे। तो ये बताइए कि शरीर मैंने पूछा ना आपसे कि शरीर के आधार पर शरीर के आधार पर अनंत सुख तो नहीं मिल रहा है। और धर्म तो वो है जिससे अनंत सुख मिले। और यदि थोड़ा सा सुख मिलने वाला भी धर्म है तो फिर गोलगप्पा खाना भी धर्म है। इंसान के लिए वही धर्म है जो इंसान के लिए वही धर्म है ना वो ठीक है ठीक है ठीक है इसका मतलब ब्रह्मा कुमारी का जो धर्म है उसके अलावा भी दुनिया में और भी धर्म हो सकते हैं उसको उससे मुक्ति मिल जाएगी गुणों के धर्म है हां उनके गुणों के उनको मुक्ति उसको मुक्ति अनंत सुख मिलेगा या नहीं मिलेगा उसको
00:19:15:03 अभी अभी उनका धर्म बताएगा। मुझे थोड़ी मालूम है कि उनका तो वो मिलेगा कि नहीं। आप ठीक है। ठीक है। चलो ये भी ले लेते हैं। अनंत तो आप आपको यदि नहीं मालूम है तो ब्रह्मा आप कह क्यों रहे हो? आपको यदि नहीं मालूम है तो उसको धर्म कह क्यों रहे हो? धर्म तो वही है ना जहां अनंत सुख प्राप्त हो। मैंने क्या कहा? एक मिनट भाई साहब। धर्म वो है जहां अनंत सुख प्राप्त हो। तो क्यों कह रहे हो कि कुरान में भी धर्म है। क्यों कह रहे हो? वो आप कहते हो आप यही कह रहे हो कि अनंत सुख की बात अलग है वो तो हम अपने स्वी
00:19:48:24 यानी कि धर्म धर्म की परिभाषा ये नहीं है कि जिसको करने से अनंत सुख प्राप्त हो ये नहीं है ना धर्म की परिभाषा वो परिभाषा नहीं है तो क्या है धर्म के लिए वो व्याख्या नहीं है यानी परिभाषा वही है हम यानी एक मिनट धर्म इसका मतलब मतलब यह हुआ कि आप कुछ भी करो उसको आप धर्म का नाम दे दो तो ब्रह्मा कुमारी कहने लगेगी यह भी धर्म है। यही हुआ ब्रह्मा कुमारी उनके लिए धर्म धर्म इसीलिए क्योंकि व्यवहार में समझने के लिए हम धर्म की बात करते हैं उनको धर्म मानते हैं। अरे उसका आधार क्या है भाई? जब हम धर्म कह रहे हैं वो है जिससे अनंत सुख मिलेगा। अभी आपने शुरू में कहा था अनंत सुख मिलेगा वही धर्म है। अब आप कह रहे हो वो धर्म नहीं है। इसको कहते है झूठ बोलना। नहीं इसको इसको कहते है झूठ जी नहीं जी भाई साहब नहीं सुनिए सुनिए सुनिए हम उसका उनको धर्म कहते इसका मतलब ये नहीं कहते कि हम अपने स्वधर्म छोड़कर अपना धर्म छोड़कर उनके धर्म में जाओ मैंने ये कहा मैंने मैंने मेरा प्रश्न पूछा है मैंने कहा उसको धर्म क्यों कह रहे हो जब वो धर्म नहीं है तो उसको धर्म क्यों कह रहे हो बोलचाल के लिए कहते हैं हम धर्म जब हमारे संविधान भी कहता है धर्म मतलब मतलब यूं ही कहते हो
00:21:04:00 ना तो यूं ही कहते अच्छा संविधान का आपने नाम लिया संविधान संविधान वो सारे रूल्स एंड रेगुलेशन मानता है जो ब्रह्मा कुमारी मानता है नहीं नहीं मैं क्या बता रहा हूं कि वो मानते हैं नहीं मानते तो हर एक अपना तो संविधान तो संविधान को बीच में मत लाइए आप ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो धर्म है एक मिनट भाई साहब ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार जो धर्म है यदि वही धर्म है जो नियम और कानून ब्रह्मा कुमारी ने बनाए यदि वही धर्म है तो कुरान और बाइबल को धर्म कहना बंद करिए ना फिर आप हम धर्म को संवाद मुझसे संवाद करने के लिए धर्म का उच्चार करते हैं। हम उनका धर्म नहीं है ये बात नहीं कि उनका जैसे जैसे आप आप मैं पूछ रहा हूं आप किसी को भी धर्म क्यों कहोगे जब वो धर्म नहीं है तो आप सत्य बोलते हो कि झूठ बोलते हो और चलो कभी मुख से निकल जाए चलो कभी मुख से निकल जाए कभी इधर उधर हो जाए जीभ सिसल गई कुछ हो गया भैया बोलचाल में है इसलिए कहते हैं आप तो उसको सदैव आप आप तो उसको सदैव लगा के रखे हो हां तो और
00:22:19:06 चलो ठीक है चलो ये वाली बात चलो ये वाली बात भी मान ली भैया एक मिनट एक एक मिनट चलो मान लिया कि यूं ही कहते हैं तो यूं ही कहने वाली बात आपकी किसी दीदी ने कही है सार्वजनिक मंच पर कि वो धर्म है नहीं हम यूं ही कहते हैं बोलचाल की भाषा में कही है बोलचाल में यूं ही नहीं कहते यूं ही नहीं कहते हैं हम उनको धर्म मानते हैं लेकिन धर्मों का अंतर बताते हैं अंतर बताते हैं कि उनका धर्म कैसे स्थापित हुआ है। उनके धर्म में कितना सुख मिलता है और हमारे स्वधर् में कितना सुख मिलता है। तो फिर आप ये तो फिर आप इस बात को छोड़ दो कि धर्म वो है जिससे अनंत सुख प्राप्त हो। इस बात को छोड़ दो। फिर आप यह बोलो कि किसी व्यक्ति ने अपने जीने के लिए कुछ सिद्धांत प्रचारित कर दिए तो हम उसको कहने लगते हैं यह भी धर्म है।
00:23:11:25 भाई साहब हम इसीलिए उनको बात करते हैं कि जब हम हमसे उनको बात करना है तो धर्म के ही बात भाषा में ही बात करेंगे ना। साहब आप सत्य बोल धर्म बोलने से हमको नहीं पूछ रहा हूं। सत्य धर्म धर्म बोलने से हमको तकलीफ क्यों होनी चाहिए? इसलिए क्योंकि वो धर्म नहीं है। जो मानता है जो मानता है तो है आप नहीं है वो भी नहीं मानता वो कहां अपने आप को धर्म कहता है वो तो मजहब कहता है अपने आप को दीन कहता है अपने आप को
00:23:48:04 मैं जब गीता में लिखा है गीता में लिखा है कि मैं सत्य धर्म की स्थापना करता हूं बाकी धर्मों का विनाश करता हूं आप दूसरी बात धर्म का विनाश करता हूं बातें मत करिए। इस चीज को प्रश्न पूछिए। यदि ब्रह्मा दीदियों से आप आप दीदी से जाकर के पूछिए। यदि ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा बताई गई नियमावली धर्म है तो फिर जो जो उस चीज को नहीं मान रहे हैं उसको धर्म कहना बंद करें। झूठ है ये। अब अब आ जाते हैं ब्रह्मा कुमारीज के धर्म पर। ठीक है? अब ब्रह्मा कुमारी पर आ जाते।
00:24:32:13 [संगीत]
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क्या गोलगप्पा खाना भी धर्म है? ब्रह्मा कुमारी के ज्ञान की तार्किक समीक्षा
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