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00:00:00:24 सभी को जय श्री राम। कुतर्कों से ओतप्रोत एक वीडियो मैंने देखा इस विषय में उसमें वैसे वीडियो का टाइटल इस व्यक्ति ने डाला है कि क्या शक्ति संगम तंत्र में अ निग्रह तंत्र को पाखंड कहा गया है हम तो इस व्यक्ति ने यह टाइटल डालते हुए वीडियो बनाया मगर मैंने देखा कि उसमें आधे से ज्यादा भाग में इस व्यक्ति ने प्रलाप किया है। किस विषय में जो रामभद्राचार्य जी द्वारा नोटिस भेजा गया राघवाचार्य जी महाराज को कि नहीं या ज्योति पीठ वाले महाराज को कि नहीं इन सब विषयों में जो हमने जो अपना कुछ वक्तव्य निर्गत किया था इसने उसको लेकर के बहुत सारी नीचता बहुत सारी धूर्तता बहुत सारे प्रलाप कुतर्क प्रस्तुत किए हैं और इनके कुछ लोग होते हैं जो कहते हैं कि भागवतानंद जो है जो भी बात बोलता है शास्त्र सम्मत बोलता है। जबकि हमारे और उसके बीच की जितनी भी जितना भी जो संघर्ष है उसमें ऐसी कोई बात नहीं है जो उसने शास्त्र सम्मत शास्त्रों के द्वारा सिद्ध
00:01:15:27 की हो। वह अपने कुतर्क जो देता है उन कुतर्कों को लेकर के दिक्कत है। वह जो अपने मन से बात कहता है जैसे कि अगर उसके जो परंपरा जो उसने तथाकथित बताई है निगमानंद वो अगर अपने देश किसी देश काल परिस्थिति में एनीबिसेंट से जुड़े हुए थे या थियोसफिकल सोसाइटी से जुड़े हुए थे तो वह साधना मार्ग में आने के बाद जो है अगर आ गए तो वह दोष मुक्त हो गए। थियोसफिकल सोसाइटी से जुड़े होने वाला दोष मुक्त हो गए उससे। परंतु वही पर दूसरा कोई व्यक्ति यदि शंकराचार्य की शरण में आ गया और वह थियोसफिकल सोसाइटी केवल एक दिन के लिए थियोसफिकल सोसाइटी में जुड़े हुए व्यक्ति के द्वारा स्टार्ट की गई कोई और संस्था के साथ जुड़ा हुआ मिल गया तो वो दोषी है वो फ्री मिशन का एजेंट है ये सब तर्क है और ये सब तर्क उसके शास्त्र सम्मत है इनहीं सब चीजों को लेकर के तो लड़ाई है ये सब चीजें उसकी शास्त्र सम्मत है क्या तो इनके जो इसके जो अंधे फॉलोअर्स हैं कुछ दो दो चार नाम है। एक कुर्मी है, एक कोई दीपम है, एक कोई शर्मा है, एक कोई चरवा की
00:02:30:28 आवाज है। ये सब घुमा फिरा करके कुर्मी तो ऐसा है जो मुझको बोला था कि मैं आऊंगा आपसे चर्चा करने के लिए और वो कहते हैं ना कि शिवश की मार की बात ही निराली गूंगा भी गाए कबवाली। तो दूर से ही कब वाली अब गा रहा है। सामने आने की हिम्मत नहीं है। खैर कम टू द पॉइंट क्विकली। तो इस धूर्त व्यक्ति ने इतनी धूर्तता की है अपने वीडियो में और क्या है? इसके पास सबसे इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट क्या है? मैंने आप लोगों को कई बार बताया है। इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है कि ये हर बात पे बोलेगा जो इसकी मतलब की होगी या नहीं भी होगी। और अगर वो बात ट्रेंडिंग होगी तो भी बोलेगा। अगर इससे जुड़ा हुआ कोई मसाला इसको मिलने मिलना होगा तो भी बोलेगा। वहां इसके बोलने की भूमिका होगी या नहीं होगी तो भी बोलेगा। बस वो मामला किसी तरीके से ऐसा होना चाहिए जो कि मसालेदार बन सके। धार्मिक जगत का कैरी मिनाटी बन सके। तो निकालते हैं इसका कैरी मिनाटीपन। तो हम लोग इसकी बात सुन सुन कर ही इसको जवाब देंगे। शंकराचार्य सरस्वती जी के शिष्या है ज तक मुझे जानकारी है क्योंकि उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर इस प्रकार से मेरे गुरुदेव मेरे गुरुदेव ऐसा करते हुए लिखा है
00:03:46:02 तो मुझे लगता है कि वो सरस्वती जी की शिक्षा है और लोगों ने भी इस बात की पुष्टि की लेकिन शिवश के चैनल पर वो ससुती जी की शिक्षा बनकर नहीं आई थी या उनके उत्तराधिकारियों की शिक्षा या वकील बनकर नहीं आई थी वो क्या बनकर आई थी की पक्ष होकर आई थी के वकील की हैसियत से वो बात कर रही थी तो अब यहां पर ये रंजना अग्निहोत्री जी के बारे में बात कर रहा है जिन्होंने रामपाल के विरुद्ध हमारी ओर से याचिका लगाई है जिस पर शासन ने संज्ञान लिया है। उचित कारवाईयां हो रही हैं। रामपाल का तंत्र नष्ट होने के कगार पर है। रामपाल का जो यहां का जो फील्ड वर्क है वो नष्ट हो चुका है। यहां के उसके सेंटर्स क्लोज हो चुके हैं। यहां पर पुस्तक वितरण बंद हो चुका है। यहां से जो इस अभियान का केंद्र केंद्र में रहने वाली जो भूमि है यानी लखनऊ उत्तर प्रदेश लक्ष्मणपुरी वहां से रामपाल के पैर उखड़ चुके हैं और बहुत जल्द भगवान ने चाहा तो पूरे राष्ट्र में इस युद्ध की गूंज पहुंचे। ऐसे केस में निशुल्क रूप से हमारी ओर से हमारी अगवाई करने वाली रंजना अग्निहोत्री जी के बारे में बात कर रहा है। और क्या कह रहा है कि शिवश के चैनल पर वो रामभद्राचार्य की वो
00:05:02:09 स्वरूपानंद जी की महाराज जी की अधिवक्ता बन के नहीं आई थी। वो रामभद्राचार्य की अधिवक्ता बन के आई थी। मगर रामभद्राचार्य की अधिवक्ता बन के आई थी। तो किस किस प्रकरण क्या रामभद्राचार्य की और ज्योतिष पीठ के बीच में चलने वाला कोई संघर्ष है क्या उस संघर्ष में वो रामभद्राचार्य जी की ओर से बोलने आई थी हम या फिर किसी और संघर्ष में जिस संघर्ष में रामभद्राचार्य जी के विरुद्ध कोई ऐसा व्यक्ति है जो सनातन से निकटता की बजाय या सनातन के मौलिक सिद्धांतों से निकटता की बजाय दूरी रखता है या कोई राजनीतिक पार्टी है या कोई राजनीतिक पार्टी से जुड़ा हुआ गिरोह है जो कि हमारे संतों हमारे धर्म ग्रंथों के बारे में बोलने से पहले एक मिनट नहीं सोचता है या फिर जो मर्यादा का ध्यान नहीं रखता है किसके विरोध में खड़ी हुई थी रामभद्राचार्य जी के पक्ष में अब जब उसको ऐसे कहा जा सकता है कि रामभद्राचार्य जी की वकील बन के आई थी तो क्या उसको ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि वो जो अधर्मी लोग हैं जो रामभद्राचार्य की टिप्पणी के कारण जो विप्लव फैला हुआ वातावरण था उसके बीच में
00:06:17:13 जिन्होंने रामभद्राचार्य के ऊपर ऐसे अश्लील आरोप लगाए थे जो कि कहीं से भी मर्यादा के सीमा में नहीं आते क्या तुम जिन लोगों के साथ बैठते हो मंच साझा करते हो जिन आचार्यों के साथ जो आचार्य तुम्हें प्रश्रय देते हैं विद्या भास्कर जी महाराज क्या विद्या भास्कर जी महाराज उन अश्लील आरोपों की पुष्टि करते हैं और यदि करते हैं तो क्या उन्होंने रामभद्राचार्य जी के साथ मंच साझा नहीं किया है। क्या राघवाचार्य जी महाराज ने मंच साझा नहीं किया है? क्या वो रामभद्राचार्य जी पर इस बात की पुष्टि करते हैं जो बेधड़क खबर वाले चैनल ने अपने उस आपत्तिजनक वीडियो में सब आरोप लगाए हैं। अश्लील आरोप चारित्रिक आरोप यह सब तुम्हारी प्रज्ञा शक्ति में घुसने वाला तो है नहीं। तुम्हारा तो सब मुंह लिया गया है परी के द्वारा है ना परी चाहिए तुमको तो उस परी के मुंह में वो सब मोह लिया गया है इसलिए तुम्हें ये सब नहीं समझ में आएगा कि रामभद्राचार्य की ओर से अगर वो आई थी तो कब आई थी किस प्रकरण में आई थी क्या रामभद्राचार्य जी और ज्योतिष पीठ वालों के बीच में चल रहे संघर्ष में वो रामभद्राचार्य जी की ओर से खड़ी थी या किसी और संघर्ष में वो रामद्राचार्य
00:07:32:24 जी की ओर से खड़ी अच्छा अभी इस व्यक्ति ने एक वीडियो बनाया था जिसमें वो जो गवई है जिसमें कि विष्णु भगवान की मूर्ति को पुन स्थापना करनी थी उसका जो है जीर्णोद्धार करना करने की याचिका लगाई थी जिसमें कि गवई ने अपने आदेश में यह कह दिया कि भैया विष्णु भगवान से ही जाकर प्रार्थना करो हम नहीं कुछ कर पाएंगे। ठीक है? उस संबंध में जो इस व्यक्ति ने वीडियो बनाया था उस वीडियो में इसने अजीत भारती या हर उस व्यक्ति का अभिनंदन किया था जो इस विषय में बोला है सुप्रीम कोर्ट के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के विरुद्ध जिसज व्यक्ति जो जो व्यक्ति खड़ा हुआ है वो भले ही ये उसकी विचारधाराओं से सहमत होता हो या ना होता हो इसने अजीत भारती की ओर से अजीत भारती और इस तरीके के कई अन्य तत्वों को अभिनंदन किया जो कि बिल्कुल उचित है। हमारी दृष्टि में भी उचित है। मगर अगर मैं यह कहूं कि ये अजीत भारती का पक्षधर बन के आया था उस दिन तो कैसा रहे? अजीत भारती का वक्ता बन के आया था उस दिन तो कैसा रहे? अजीत भारती का चापलूस बनकर आया था तो कैसा रहे? अजीत भारती का पालतू बनकर आया था उस दिन तो कैसा रहे? तो यदि
00:08:47:27 आप किसी के बारे में बात कर रहे हैं कि रामभद्राचार्य जी की वकील बनकर आई थी तो आपको ये देखना होगा ना किस प्रकरण में वो वकील है। करपात्री जी महाराज ने आर्य समाजियों का जब विधर्मी इस्लाम को मानने वाले लोग आर्य समाजियों का खंडन कर रहे थे। परेशान कर रहे थे। आर्य समाजियों के पास कहीं निस्तारण नहीं था। उस समय करपात्री जी ने आर्य समाजियों का साथ दिया था। तो करपात्री जी आर समाज के पक्षधर हो गए तुम्हारे हिसाब से उनके वकील हो गए तुम्हारे हिसाब से उनके वक्ता हो गए तुम्हारे हिसाब से यह तो इनके कुतर्क है और इन कुतर्कों पर यदि हम प्रतिकार करते हैं तो इनके अंधे अनुयाई अंधे वो कहते हैं कि अरे भागवतानंद जो भी बोलते हैं शास्त्र से बोल अरे भाई भागवतानंद ने शास्त्र से बोला है बोला है मगर शास्त्र से बोलने वाले विषय में हमारी उससे कोई कोई संघर्ष नहीं है और जो एक दो बातों को लेकर है हमारा कोई अडी की बात नहीं थी कि उसने अगर सबरी में करपात्री जी का विरोध कर दिया मर्यादा में रह के अगर किया होता तो कोई अडी की बात नहीं थी अगर मर्यादा में रह के बुद्ध का विरोध भी किया था तो कोई अडी की बात नहीं थी कर दिया भाई ठीक है वर्णाश्रमी तो हो परंपरा को तो मानते हो परंतु तुमने मर्यादा को लागा तू तड़ाक की उपास बनाया
00:10:03:01 और असिद्ध अश्लील आरोप लगाए तब हमने तुम्हारे हर वीरों से लेकर के हर चीज पर कुछ बात की समीक्षा की तुम्हारी सभी चीजों क्योंकि तुम समीक्षा सभी चीजों की कर रहे हो। तो खैर बैक टू द पॉइंट। तो यह कहना गलत है कि वो रामभद्राचार्य जी की वकील है। इस तरह से प्रस्तुत करना कि वो उनके हर मामले में उनके समर्थन में खड़ी है। चाहे वो कुछ भी बोल रहे हो। ये तो उन्होंने नहीं कहा था। किस मामले में उनकी ओर से खड़ी थी? हमें भी अच्छा लगा था। क्योंकि हाई कोर्ट ने उसमें एक आदेश दिया था। जब हमें पता चला कि रामभद्राचार्य जी की ओर से रंजना अग्निहोत्री जी के द्वारा एक याचिका लगाई गई है। उस याचिका में हाई कोर्ट ने आदेश दिया है। क्या आदेश दिया है कि भाई YouTube और सोशल मीडिया जैसी जैसे प्लेटफॉर्म्स है जिस पर व्यक्ति कुछ भी हो के निर्भीक रूप से बोल रहा है। शासन इसमें संज्ञान ले और कानून बनाए और उन कानूनों का कड़ाई से पालन करवाए और यदि YouTube सोशल मीडिया इसमें कोपरेट नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ भी आप याचिका लगाइए। उनके खिलाफ केस दर्ज करिए। क्या ये हमारे सनातन के लिए अच्छी न्यूज़ नहीं है? भाई उसमें मामला जो प्रकरण है वो पर्टिकुलर किसी वस्तुनिष्ठता
00:11:18:19 है। उसमें कि रामभद्राचार्य जी ने किसी के विरुद्ध याचिका लगाई और उस पर यह मामला आया। एक व्यक्ति या एक गिरोह के विरुद्ध कारवाई हो गई वो तो कर दी उसका चैनल जो उसके चैनल पर कारवाई हो गई उसके विरुद्ध सरकारी जो अन्य कानूनी कारवाईया होती है वो भी होने वाली है 8 अक्टूबर को अगली सुनवाई है मगर इसमें ये जो पैराग्राफ आया कि सोशल मीडिया का सहारा लेकर के लोग कुछ भी बोल रहे हैं अभी वो दुर्गा दुर्गा माता के लिए बोलने वाली वो कितना गलत सलत बोल रही थी वो गायिका कुछ भी बोल रही थी तो यह जो पैराग्राफ उसमें लिखा गया उस आर्डर में कि भाई हाई कोर्ट ने ऐसा आदेश दिया है जिसमें उसने शासन को कहा है कि वह कानून बनाए और जब हाई कोर्ट आदेश देती है ना तो उस पर कारवाई होती है तो क्या ये हमारे लिए एक अच्छा संदेश नहीं है अच्छा आदेश नहीं है अच्छा अब इस आदेश को मैं कैसे बताऊं आप लोगों को बताइए जरा कैसे बताऊं बताना पड़ेगा ना कि हम इस समय रंजना अग्नि जी के पास बैठे हैं जिन्होंने अमुक केस इसमें रामभद्राचार्य जी की ओर से याचिका लगाई थी। उस याचिका में हाई कोर्ट ने इतना अच्छा आर्डर दिया है। इसमें कहां से आ गया कि हम राघवाचार्य जी महाराज
00:12:34:00 के या ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी के या भागवतानंद के ही सही विरोधी हैं। इस वीडियो को बनाते समय अरे हमें तो एक खुशखबरी देनी थी भाई कि भैया ऐसा ऐसा हो रहा है। इस कारण से यह आदेश हमें प्राप्त हुआ है और आगे इसमें हम और कुछ कारवाई भी करने वाले हैं क्योंकि रामपाल जैसे लोग उसके समर्थक बौद्धों के लोग उनके समर्थक या आर्य समाजियों को ही मान लो ये लोग कितना अनर्गल प्रलाप करते हैं वृंदावन को वैश्यावन बोलते हैं तब नहीं इसको याद आता है जब वो लोग ऐसा बोल रहे होते हैं तब नहीं इसके पास वीडियो बनाने का टाइम होता है आगे इसमें बात करूंगा तो वहां पर वह रामभद्राचार्य जी के वकील बन के नहीं आई वो न्याय की वकील बन के आई थी। धर्म की वकील बन के आई थी और सत्य की वकील बन के आई थी। सत्य का बल क्या था वहां पर? कि जिन लोगों ने वो चारित्रिक आरोप लगाए थे। चारित्रिक खंडन करने का प्रयास प्रयास किया था। अरे भाई कुछ तो शर्म कर लो। रामभद्राचार्य जी का हमारे ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी के साथ है। मानता हूं पूरी वाले शंकराचार्य जी के लिए मानना किया है और उस विषय में हमारे आचार्यों ने रामभद्राचार्य जी को तरह-तरह से अनेक प्रकार से उत्तर भी दिया है। प्रतिकार भी किया है और
00:13:49:10 उस उस प्रतिकार में मैं उनकी तरफ खड़ा हूं। मगर रामभद्राचार्य जी ऐसे व्यक्ति थोड़ी ना है कि उनको हरा नूरा आ के तू तड़ाक बोले और फिर चारित्रिक गालियां दे उल्टे सीधे एडिट करके फोटो बनाए और उन फोटो को रिलीज करे कुछ भी बोलता रहे क्योंकि हमारी उनसे लड़ाई है इसलिए उनके बारे में कोई कुछ भी बोलता रहे हम ये होने दें अगर आपके पड़ोसी के साथ आपका मनमुटाव है और आपका विचार नहीं मिल रहा है इसका मतलब यह है कि अराजक तत्व आकर के पड़ोसी के घर में घुसकर उसके पत्नी के साथ उसके घर की महिलाओं के साथ अश्लीलता कर रहे होंगे। उनका चीर हरण कर रहे होंगे। उनकी गरिमा भंग कर रहे होंगे। आप वहां खड़े होंगे और आप कुछ कर सकते होंगे तो नहीं करेंगे। इतने निर्लज्ज है हम लोग। दुर्भाग्य से जो ये बोल रहा है ना दुर्भाग्य से हम दोनों नहीं है। तो सौभाग्य से मैं ऐसा निर्लज्ज नहीं हूं। मेरे सामने तो अगर भागवतानंद से मेरी बहुत दुश्मनी है ना सामान्य जनों की नजरों में मेरे समक्ष मेरे संज्ञान में अगर इसके घर की स्त्रियों पर भी कोई हमला कर रहा होगा कुछ कर रहा होगा मैं तो यहां तक कहता हूं कि इसके विरुद्ध भी
00:15:04:19 कोई मर्यादा को लांगते हुए कोई कारवाई अगर हो रही होगी मुसलमान ही अब अगर इस पर हमला कर देंगे या और कोई ऐसा विरोधी तत्व इस पर हमला कर देगा तो वहां तो मैं खड़ा हऊंगा ना क्या करूंगा छोड़ इसको अकेला ये सिखाया है करपात्री जी ने यह सिखाया है जगतगुरु शंकराचार्य ने कि आपका धर्म क्या होना चाहिए आपका कर्तव्य क्या होना चाहिए जो विरोधी है उसको पूर्ण रूप से विरोधी मान लो चाहे वो कोई भी विषय हो चाहे वो कोई भी प्रकरण हो
00:15:41:10 नेवाचार्य को पुलिस नहीं दी जो कि एक अंश सत्य भी है कि यह सत्य वैसा नहीं जैसा होना चाहिए राम राम भद्राचार्य अपने नाम से नोटिस नहीं भेजते हैं। रामभद्राचार्य अपने चेलों के माध्यम से नोटिस भिजवाते हैं। और अगर तुम इस बात को नहीं समझ पाओगे तो या तो तुमको या फिर उन्हीं के समर्थक हो दोनों रामभद्राचार्य जी स्वयं नोटिस नहीं भेजते हैं। अपने चेलों के माध्यम से नोटिस भिजवाते हैं। तो इसका अर्थ यह है कि अगर वह ऐसा करते हैं कि तो दुनिया के अगर हजार लोग उनके नाम से नोटिस भिजवा देंगे और हमें ज्ञात भी हो जाए कि भैया रामभद्राचार्य से जुड़े हुए प्रामाणिक लोग ये कहने लगे कि भैया नोटिस उन्होंने नहीं भिजवाया है तब भी हम ये कहे क्योंकि नोटिस वो भिजवाते हैं चेलों के नाम से तो अभी भी भिजवाया। ये कहां का सनातन सिद्धांत है? अगर किसी व्यक्ति ने 10 बार कोई कार्य किया है तो 12वीं बार स्पष्ट होने पर भी उसने नहीं किया है 11वीं बार हम ये बिना सोचे समझे मान ले कि उसी ने किया है। अरे भैया रामभद्राचार्य जी अपने चेलों के माध्यम से लगवा करवाते हैं। नोटिस भिजवाते हैं। ठीक है। रामभद्राचार्य जी रंजना अग्निहोत्री के द्वारा भी तो केस लगवाते हैं। का सबूत है हमारे पास। प्रमाण है। तो
00:16:56:14 फिर यहां तो राम राम भद्राचार्य जी ने इनके द्वारा नहीं भिजवाया। फिर क्या करोगे? हो गया तर्क खंडित रामभद्राचार्य जी जो सदैव करते हैं तुम्हारे हिसाब से वही सदैव करते हैं बदल के नहीं करते तो रामभद्राचार्य जी ये भी तो सदैव करते हैं कि अपने कानूनी मामले रंजना अग्निहोत्री जी के द्वारा करते है यहां तो नहीं किया इसका मतलब परिवर्तन को तुम स्वीकार कर रहे हो ना तो तुम्हारे ही तर्क से तुम्हारी बात गलत हो रही है क्या है यहां पर शास्त्र प्रमाण बताओ बेवकूफी और कुछ नहीं है केवल प्रलाप
00:17:35:10 और सुनो यदि तुम इन बातों को समझ नहीं पा रहे हो तो या तो तुम मूर्ख हो और यदि समझना नहीं चाहते हो तो फिर तुम द्वेषी हो धूर्त हो सौभाग्य से हम दोनों नहीं है। ठीक है? तो वहां पक्षकार बन जाएंगे। वहां उनकी व्यक्तिगत थाने लाभ रुचि इत्यादि का दर्शन होने लगेगा। वो बिना सामने स्वयं को रखे अपने राजनीतिक और न्यायिक परिचयों का प्रयोग करते हुए अपने विपक्षी को कागजनी पत्रों में फसाना चाहते हैं। जानते हैं और यही उनकी पुरानी प्रवृत्ति रही चाहे वर्तमान का प्रकरण देखो चाहे इससे पहले का प्रकरण देखो तो जो बात हमने अपने मुझसे कही हमने अपने वीडियो में ये तो नहीं कहा था कि रामद्राचार्य ने भेजी रामभद्राचार्य के शिष्य कथित शिष्य समर्थक इत्यादि ने भेजी इस प्रकार से भी हमने कहा था रामभद्राचार्य के लिए तुमने नहीं कहा था कि भाई रामभद्राचार्य ने भेजी है रामभद्राचार्य के कथित शिष्य ने भेजी है परंतु इस बात को आधार बना करके आधे घंटे तक एक घंटे तक वहां पर रामभद्राचार्य को पॉइंट आउट कौन कर रहा था। रामभद्राचार्य के लिए नकारात्मक बातें कौन बोल रहा था? तुम बोल रहे थे। अब तुम कहोगे कि रामभद्राचार्य के लिए नकारात्मक बातें क्यों नहीं बोली जा सकती? मतलब अगर किसी ने कोई कार्य किया है तो अगली बार जब उसका कोई दोष सिद्ध हो या ना हो मगर उसको
00:18:50:16 बार-बार वही प्रताड़ना देते रहना चाहिए। तुम्हारे हिसाब से यदि उसका कहीं पर एक बार दोष सिद्ध हुआ है तो क्योंकि तुम तो यह कह रहे हो कि रामभद्राचार्य ने तुम स्वयं मानते हो कि उन्होंने नहीं भिजवाया हमने तो खुद कहा कि उसके शिष्य ने भिजवाया तो शिष्य को पॉइंट आउट करो वहां तुम जो नकारात्मक भाषण दे रहे हो प्रज्वलनशील कैरी मिनाटी वाला वो किसके विरुद्ध दे रहे हो के ये किया था वो किया था इसके लिए ये कहा था वो कहा था किसके लिए दे रहे हो रामभद्राचार्य के विरुद्ध तो तुमने भले ही नहीं कहा कि रामभद्राचार्य ने नोटिस भिजवाया है। तुमने यह कहा उनके कथित शिष्य ने भिजवाया। मगर उसका जो दोष के अनुसार परिणाम स्वरूप प्रतिकार स्वरूप तुम बोल किसके विरुद्ध रहे हो? रामभद्राचार्य जी के विरुद्ध और लोग ये कहते हैं कि जी हो गए। जी हो गए। रामभद्राचार्य जी हो गए। जिनका प्रशय इनको प्राप्त है क्या वो जी नहीं लगाएंगे? वो अभी फिर मिलेंगे। वो फिर मंच पर आएंगे। वो जी लगाएंगे। वो क्यों लगाएंगे और हम क्यों ना लगाएं
00:19:57:13 तो उनहीं से सीखा है ना भाई आचार्य है ना वो उन्होंने ही सिखाया है मर्यादा सिखाई है ना तुम्हारा तो कोई तुम्हारा तो कोई बाप है नहीं तुम तो अनाथ हो बिन बाप के हो तुम्हारे बाप का तो पता ही नहीं है धार्मिक जगत में धार्मिक जगत में गुरु जो होता है वो पिता होता है तो इनके गुरु का तो पता ही नहीं है कौन तो इसलिए ये तो किसी के लिए भी तूत करने के लिए स्वतंत्र घूम रहे हैं। हमारे तो पिता है ना कौन पिता है? श्रीमद् जगतुगुरु शंकराचार्य हमारे पिता है वो धार्मिक जगत तो हमें तो मर्यादा मालूम है ना कि किसके लिए तू तड़ा करना करना है कि करना नहीं है। और हम ज्यादातर तो कोशिश यही करते हैं कि तुम्हारे जैसों के लिए भी ना करते। मगर तुमने खुद आगे से कहा भाई तेरे जैसे से हम यही ऐसे ही बात करेंगे तू तड़ाक से तो हम करेंगे मगर इसमें तुम्हारे समर्थक जो अज्ञानी है अंधे हैं जिनको कुछ मालूम नहीं है वो आधी रोटी विदाल लेने आते हैं शिवश नारायण द्विवेदी भागवत आनंद के लिए कठोर शब्द बोलता है अरे भैया तुम्हारा व्यक्ति बना ही कठोर शब्द बोल बोल कर है उसका अस्तित्व ही कठोर शब्दों के लिए तो अब जब उस पर कठोर शब्दों की बरसात हो रही तो तुम्हें क्यों होना चाहिए
00:21:12:19 दुखी तुम्हें तो कष्ट नहीं होना चाहिए तुम्हारे हिसाब से तो कठोर शब्द बोलना सामान्य है। हां जो बात कठोर शब्दों के अंतर्गत बोली जा रही है वो गलत है अथवा सही है उस पर आप बात करो। खैर चलो प्रेरणा स्वीकृति सब है। इतनी समय जिन लोगों को नहीं वो भी इस विषय में काम के लिए आ गए। अब इसका जवाब मैंने दे ही दिया है। सबसे बड़ी बात है कि अभी अभी मेरे सामने एक मामला आया है कि भैया यह कार्य रामभद्राचार्य जी का इन्होंने किया और उस पर ये रिजल्ट आया। जब वही वकील ये कहेगा जब वो मुझे बताएगा और हम लोग साथ में मिलकर के और रामभद्राचार्य जी की ओर से भी उसकी कोई पुष्टि नहीं की गई है। अभी तक मुझे तो नहीं मालूम है कोई पुष्टि कर दी गई हो कि नोटिस उनके ही द्वारा भिजवाए गए। मगर तो मगर उनका जो अधिवक्ता है वह जब यह कह रहा है कि नहीं भिजवाए गए उनके माध्यम से नहीं भिजवाए गए तो फिर हम क्यों जबरदस्ती उनको रगड़े उनको क्यों घसीटे उस मामले में अच्छा घसीटना क्यों नहीं चाहता हूं इसमें भी प्रकाश डालूंगा मैं आगे बात आएगी क्योंकि ये मुझे अवसर देगा ये बातें बताने का भी तो अभी भी बता सकते हैं मगर आगे प्रश्न के उत्तर में बताएंगे तो थोड़ा मेहनत बच जाएगी
00:22:26:26 रामक्राचार्य का अगर मान इसमें समति समर्थन स्वीकृति का भाग नहीं है तो उनको अपने शिक्षा को रोकना चाहिए था कि तुम ऐसा क्यों देखो कितना बेवकूफ व्यक्ति है रामभद्राचार्य का अगर अपना कोई स्वीकृति समर्थन नहीं है तो उनको रोकना चाहिए यह व्यक्ति के लिए व्यक्ति के समर्थन से इसके अनुयाई वैश्या व्यभचारिणी और कितनी गंदी गंदी गालियां विजय श्री के लिए मुझे उनसे जोड़ करके कितनी गंदी गंदी गालियां बकते जब इससे पूछा जाता है कि ऐसा क्यों कर रहे हैं तो यह हाथ खड़े कर देता है। भाई मैंने किसी को नहीं कहा है। वह अपनी स्वतंत्र रूप से कह रहे हैं। मतलब अगर इसके अनुयाई इसका इसको स्वयं को इसका समर्थक कहने वाले किसी को कुछ कहे तो वहां पर ये कहेगा मैंने थोड़ी ना उनसे कहा है। वो मुझसे जुड़े ही नहीं है। वो अपने स्वतंत्र रूप से कह रहे हैं। मगर दूसरा कोई अज्ञात व्यक्ति या अज्ञात व्यक्ति स्वयं को इसके विरोधी जिसका यह विरोध करता है उसकी ओर से उसका समर्थक स्वयं को कहते हुए किसी को कुछ भी कह दे तो वो हो गया कि उसने रोका क्यों नहीं तुमने क्यों नहीं रोका? तुमने क्यों नहीं रोका गाली गलौज देने से जो तुमने पुलिस में बयान दिए हैं दिए हैं ना तुमने गाली गलौज देने से अपने समर्थकों
00:23:42:09 को क्यों नहीं रोका? वास्तविकता यही है कि भैया समर्थकों को कहां तक रोक सकते हैं? हां एक एक स्टेटमेंट दे सकते हैं और यह कैसे पता है कि नहीं दिया भाई उनका काम करने का तरीका कैसा है कैसा नहीं है इस पर आप लगाम लगा सकते हो कि तुमने अगर सोच लिया कि वीडियो बनाना चाहिए कि नहीं गवाही के विरोध में वीडियो पूरी पीठ ने नहीं बनाया अरे भैया पूरी पीठ जब ये कह रही है हिंदू राष्ट्र तो उसमें तो सबका विरोध हो गया जब संविधान लोकतांत्रिक है और पूरी पीठ वाले बार-बार हिंदू राष्ट्र कह रहे हैं तो उसमें सबका विरोध नहीं हो गया। मगर तुम्हारे ही अनुसार जब वो गवाई का नाम लेकर के वह वीडियो बनाएंगे तुम्हारे अनुसार जब चलेंगे पूरी पीठ वाले तभी तुमको ये होगा कि वो भी धर्म का अनुसरण वहां पर उस विषय में कर रहे हैं अन्यथा नहीं कर रहे तुम सिखाओगे तुम सिखाओगे
00:24:33:27 तो वो कहते हैं ना बरसात से बचने की हैसियत नहीं गोलीबारी की बात करते हैं आप लोग वो वाली बात है शंकराचार्यों को यही मार्गदर्शन देंगे जो प्रशय दिया है वो उसी का नतीजा है जो ये व्यक्ति इतना बोलता है आचार्यों को अभी मार्गदर्शन देगा कि भैया गवाही के मामले में तुम्हें बोलना है और वीडियो बना के बोलना है कि मैंने तय किया है ना प्रशय देना है गवाही का विरोध करना है भाई मैंने स्टेटमेंट जारी कर दिया है मैं फतवा जारी कर रहा हूं सारे आचार्य वीडियो बना दो गवाही के विरोध में नहीं बनाओगे तो तुमने बोला क्यों नहीं अरे भैया सब लोग अपनेप तरीके से काम कर रहे तुम होते कौन हो ये बताने वाले कि वीडियो बना के विरोध करो। शास्त्र में लिखी है बात कि वीडियो बना करके विरोध किया जाएगा
00:25:26:00 और फिर लोग कहते हैं कि शास्त्र सम्मत बात करता है। जितनी बातें इसने मेरे विरोध में बोली है एक बात इसने नहीं कोई शास्त्रों से बोली कोई बात नहीं। और जहां शास्त्रों की बात मैं लेकर के आया वहां इसने उत्तर में कुतर्क किए। मत या करना होगा तो हम अपने तरीके से करवाएंगे लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। अच्छा ये कह रहा है कि भाई इन्होंने रोका क्यों नहीं करना हो तो मत करो या तो या फिर हम अपने तरीके से करवाएंगे। अरे पहले सिद्ध तो हो जाए कि वो व्यक्ति उस व्यक्ति ने जो कारवाई की है वो उनके संज्ञान में की है और तू इतना परेशान क्यों है? तू इतना परेशान क्यों है? यदि राघ रामभद्राचार्य जी की जो अधिवक्ता है वह यह कह रही हैं कि भाई उन्होंने नहीं करवाया तो एट द एंड उनकी उनके स्टेटमेंट के बिना उनके सपोर्ट के बिना क्या कोर्ट कौन सी कोर्ट और कौन सी अदालत इस प्रकरण को एक्सेप्ट करेगी ये भी बता दे भाई तू उनके स्टेटमेंट के बिना एक्सेप्ट हो जाएगा हां जितना लॉ मैं जानता हूं जितना कानून मैं जानता हूं यदि कोई ऐसे ऐसा व्यक्तित्व विभूति है जो अब इस संसार में ना हो और यदि उसके प्रति कोई ऐसी बात
00:26:41:03 बोल दे तो स्वतंत्र रूप से उसमें आस्था रखने वाला कोर्ट की कारवाई कर सकता है। परंतु यदि वो जीवित है तो कोर्ट के पास जाते समय कोर्ट का पहला मतलब होता है कि भैया यदि वो जीवित है और जिनके विरोध में किया गया है उन्हें आना होगा कोर्ट स्वतंत्र रूप से कर ही नहीं सकते। तो जब उनकी प्रामाणिक वकील जो है अधिवक्ता जो है वो यह कह रही है जिन्होंने उनका अभी अभी एक मुकदमा लड़ा है वो यह कह रही है उनकी ओर से कानून कानूनी प्रक्रिया देखने वाली वह यह कह रही है कि नहीं किया गया है तो फिर यह क्यों ना माना जाए कि उन्होंने नहीं किया है। फिर क्यों इस बात को हवा दी जाए कि उन्होंने ही करवाया है। नहीं यह सब नहीं सोचना है। मगर जब बात इसकी आ जाएगी कि उसने फलाने ने तेरे अनुयाई ने गाली क्यों दे दी? उसने ऐसा क्यों कर दिया? या तेरे वो निगमंद वालों ने ऐसा क्यों कह रहे हैं? तो भाई मैं मेरा उससे इतना सा संबंध है मेरा उस बाकी का क्या संबंध है? वो क्या बोलते? मुझे क्या करना है? जबकि तेरी तेरा मंत्र तेरी परंपरा प्रमाण एक वही से होनी है। तो यह होता है त्रयाचरित्र दोगलापन। चलिए जिनको नोटिस प्राप्त हुई उनसे हमने दो बार निजी संवाद किया और आज भी दो बार माइक फोन में इस वीडियो को रिकॉर्ड करने से पहले बात करी हमसे कुछ इन विषयों पर भी कुछ अन्य धार्मिक विषयों पर भी तो राघवाचार्य जी से निजी रूप से जुड़ा हुआ है वो राघवाचार्य जी से जाकर क्यों नहीं पूछा क्या राघवाचार्य जी के वकील से क्यों
00:27:56:04 नहीं पूछा वो रामचार्य से पूछ रहा है कि भैया तुमने कराया कि नहीं कराया नोटिस ये बता दो और वो भी बेवकूफ व्यक्ति है क्या राघवाचार्य जी से हमें क्या पूछना है? हमें जब हम इस बात को मान के चल रहे हैं कि उनके पास हालांकि तुम नहीं पूछा यह भी तेरी बेवकूफी है। सनातन के कौन से सिद्धांत के अनुसार तूने मान लिया बिना सोचे समझे कि हमने उनसे पूछा नहीं। बता है बेवकूफ ये व्यक्ति। हमने उनसे पूछा है बेवकूफ। अब वो पूछना भी क्या रिकॉर्ड करूं क्या मैं? हमने उनके जो मुख्य परिकर हैं जो उनके साथ सदैव रहते हैं उनसे पूछा। उन्होंने कहा हां प्राप्त हुआ है। हमने इस बात को ग्रहण किया। प्राप्त हुआ है। अब हमारा अगला कार्य क्या होना चाहिए? अगला कार्य ये होना चाहिए कि जहां से वो आने की बात कही जा रही है वहां जाकर पूछे करवाया है कि नहीं? अब हमारा इसमें इंटरेस्ट क्यों आया? इंटरेस्ट इसीलिए आया कि सबसे पहली बात हम यह बात सामने लाने वाले थे कि रामभद्राचार्य जी की ओर से एक ऐसी कारवाई हुई जो सभी हिंदुओं के लिए अच्छी है जिसके परिणाम स्वरूप जो आदेश आया है हाई कोर्ट का वो सभी हिंदुओं के लिए अच्छा है आए दिन राम भगवान सीता माता को गालियां दे रहे हैं अश्लील वीडियो बना रहे हैं बद्ध बौद्ध वाले लोग विधर्मी लोग तो इन विषयों में अगर ऐसा ऑर्डर आता है और इस पर क्रियान्वित होता है सुचारू रूप से
00:29:11:18 तो यह हम हिंदुओं के लिए अच्छी बात नहीं है। कोई भी व्यक्ति किसी के बारे में अश्लील बातें बोल देता है। किसी भी देवी देवता का अपमान कर देता है। इसीलिए हम इस चीज को बाहर लाना चाह रहे थे। और जो इसमें आधार बना है जिस पर कारवाई कोर्ट ने वस्तुनिष्ठता के साथ की है। वो गिरोह जिसने चारित्रिक दोष लगाए थे, अश्लील आरोप लगाए थे रामभद्राचार्य जी पर उस गिरोह पर कारवाई होके रहे। वो एक उदाहरण बने। इसलिए भी हमको यह बात इस बात में हमारी रुचि आई कि भैया हम इसको होने से रोके। क्यों? क्योंकि यदि रामभद्राचार्य जी ने ये नोटिस नहीं भिजवाए अपने द्वारा नहीं। उनका समर्थन प्राप्त नहीं है। उनका ही शिष्य है। मगर स्वतंत्र रूप से उसने कर दिया। बिना पूछे बिना आज्ञा लिए कर दिया। अब वो तो बाद में करेंगे ना। अगर बिना आज्ञा लिए कर देगा कोई। तू कह रहा है कि भाई रोका क्यों नहीं? तो क्या उनके साथ रहते हैं। जो रोका नहीं कि बिल्कुल 24ों घंटा साथ में भैया तू क्या कर रहा तुल ले हाथ पकड़ लूंगा तेरा। अरे भैया जब वो भेज देगा अगर उसने बिना संज्ञान के किया है वो नोटिस को भेज देगा उसके बाद ही तो वो कुछ करेंगे। हां यह कहा जा सकता है कि रामभद्राचार्य जिस दिन इस नोटिस के समर्थन में आकर के कोर्ट में गवाही दे दे तो माना जा सकता है। या फिर उनकी
00:30:26:19 उनका जो प्रामाणिक वकील है जो उनकी ओर से वहां कोर्ट में खड़े होने वाला है वो ये कह दे हां इसमें रामचार्य जी का स्टेटमेंट है हमारे पास तो माना जा सकता है। हम इसमें रुचि क्यों ले रहे हैं? क्योंकि यह भी हो सकता है हमने ये बात बताई भी थी। हमने इसमें इस मामले में रुचि इसलिए ली थी। हमें मालूम है कि रामभद्राचार्य जी ने पूरी के शंकराचार्य जी के लिए क्या बोला, शंकराचार्यों के लिए क्या बोला, आदि शंकराचार्य जी के लिए क्या बोला? मगर उसमें कोई अश्लीलता नहीं थी। और जो उन्होंने बोला उसके परिणाम स्वरूप यथोचित रूप से पूज्य राघवाचार्य जी महाराज ने कितना अच्छा उत्तर दिया। जब वह दे रहे हैं उत्तर जहां हमसे श्रेष्ठ जन खड़े हुए हैं निर्णय करने के लिए बोलने के लिए वहां क्या अपनी केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए हम बोले कि देखो देखो हम भी विरोध करते हैं। खैर तो हम इसमें रुचि इसलिए ले रहे थे कि यह जो कारवाई हुई थी हाई कोर्ट से और जो सिंधुओं के लिए अच्छी थी यह प्रकाश में आए और जो व्यक्ति उसमें दोषी बना है उसको सजा मिले वो इस आधार पर कि भैया रामभद्राचार्य जी ने भेजा हो या ना भेजा हो नोटिस आधी अधूरी बात पर ही तुम्हारे जैसे लोगों के आग लगा देने पर जो अन्य आचार्य गण है वो रामभद्राचार्य जी के विरोध में
00:31:41:27 ऐसे स्टेटमेंट निर्गत करना चालू ना कर दे जिसकी वजह से एक माहौल क्रिएट हो जाए और रामभद्राचार्य जी के विरोध में अच्छा खासा एक संतों की चीजें आने लगे और कुछ ऐसा हो जाए जिसका समर्थन जिसका जिससे कि उस व्यक्ति को थोड़ी सुरक्षा प्रदान हो जाए। कोर्ट में जाकर के वो इस तरीके की चीजें दिखाए। देखिए सभी संत प्रताड़ित है इनसे तो यह सब बुद्धि तुझे नहीं सोचनी है। यही तो मूर्खता है इसकी। आयु कम है। अभी मैच्योरिटी नहीं है इसके अंदर। बलबरी सवार आ रहा है। और इसको जो है इसके जो लोग हैं वह फकों पर चढ़ाते रहते हैं। आ वाह वाह वाह वाह ये चढ़ता रहता है। और उसी के कारण यह एक ना एक दिन मुकी खाएगा खा गया। उसी के कारण उसी वाही के कारण ये मुक्की खा गया। गलत व्यक्ति से टकरा गया। हमसे टकरा गया। हम अपनी ती चाल चल रहे थे। मगर इसने कुछ ऐसा कर दिया कि उस युद्ध में हम कूद गए। इसके समक्ष आ गए। हम जानते थे कि ये व्यक्ति तूत करता है आचार्यों के लिए। हम जानते थे कि अमुक अमुक विषय में करपाती जी का खंडन करता है। हम जानते थे कि अमुक अमुक विषय में पूरी शंकराचार्य जी का भी खंडन करता है। इसके कुछ ऐसे वक्तव्य भी सुने थे जिससे कि ये विश्वास पात्र भी नहीं सिद्ध हुआ। परंतु उस समय की बात जब हम इसे जानते दूरूर दूर तो हम
00:32:57:03 यह सोचते थे भाई जब तक जब तक हम पूरे समूचे बौद्धों का बौद्धों के लिए नहीं बोल देते हैं समूचे रूप से आर्य समाजियों से नहीं निपट लेते हैं समूचे रूप से इस से नहीं निपट लेते हैं तो उस उससे पहले ये जो एक मैद्धांतिक खंडन का प्रयास कर भी रहा है तो करने दो बोल लोगे मर्यादा में रहकर के कुछ ऐसी बातें बोल भी रहा है जो विरोध में है तो बोलने दो भाई उससे पहले बहुत से लोग बोल रहे हैं। आचार्य प्रशांत बोल रहा है। तमाम सारे लोग वीडियो बना करके बोल रहे हैं। तो इसलिए हमने छोड़ा नहीं ध्यान दिया। खैर तो हम इसीलिए कूदे थे कि जो व्यक्ति जिस पर कारवाई हो रही है हमारा मोटिव रामभद्राचार्य जी का पक्ष लेना नहीं था। पहली बात हमारा मोटिव था रामभद्राचार्य जी का विरोध करने के संबंध में जो शक्ति जो गिरोह जो सामने खड़ा हुआ व्यक्ति है वो एक माध्यम है एक सामाजिक संरचना बनाने का कि हमारे देवी देवताओं के लिए हमारे आचार्यों के लिए हमारे ग्रंथों के लिए कोई भी व्यक्ति बोलने से पहले ठिटके आज बच्चा-बच्चा भी अपमान कर दे रहा है ठीक है
00:34:12:26 चलो इसकी और सुनते हैं बकवास असामाजिक तत्व जो है ये दुख प्रचार कर रहे हैं रामचार्य के रामद्राचार्य जी के लोगों ने प्रश्न किया भाई रामचार्य तुम्हारे गुरु को गाली देते हैं तुम कैसे करोगे गाली दी तुम्हारे गुरु को गाली देते हैं या विरोध करते हैं विरोध करते हैं या गाली देते हैं पहले तू ये समझ ले विरोध करते हैं ऐसी बातें बोलते हैं ऐसे आक्षेप लगाते हैं जिनमें कोई सत्यता भी नहीं है मगर मर्यादा नहींते हैं तेरी तरह ऊपर ऊपर और नीचे ऐसा बहुत कुछ है जो मेरे पास नहीं है। सब नहीं बोलते हैं। भाई बहन के संबंधों में वो नहीं लगाते हैं अनैतिकता का आरोप। कितने चारित्र खंडन वाले स्टेटमेंट दे दिए रामभद्राचार्य जी ने शंकराचार्यों पर केवल इस व्यक्ति को बड़ी-बड़ी बातें करके और जो है लोगों का समर्थन प्राप्त करना है। कोई सिर पैर है इन बातों का गाली देते हैं। स्वयं के द्वारा कही गई गालियों को भी यह व्यक्ति कहता है कि हम हमारी वाणी थोड़ी कठोर है। देख रहे हो गालियों को कहेगा हम तो कठोर वाणी बोलते हैं तो उनसे आपत्ति हो जाती है। दूसरा व्यक्ति कठोर वाणी है। कठोर वाणी बोल रहा है गाली नहीं दे रहा है उसको कहेगा वो गाली देते हैं। ये है इसका दोबलापन। चलो फिर
00:35:29:13 और अगर गाली देते हैं या कठोर वाणी बोलते हैं तो क्या हम उस विषय में समर्थन करते हैं? हमने वीडियो नहीं बनाया संस्कृत वाली बात पे आज जब वो राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाला मामला चल रहा था तभी वीडियो बना दिया था। जो अपने सामर्थ अनुसार कर सकते हैं करते हैं और आगे भी करेंगे और इस बार भी करते अगर राघवाचार्य जी महाराज का वो बिल्कुल एक संतुष्टि जनक वीडियो में प्राप्त ना होता हो गया और उसी को हमने खुद भी इधर उधर काफी प्रचारित प्रसारित किया हमारे अपने चैनल पर भी डालते हम लोग मगर इसलिए नहीं डाल पाए क्योंकि वो उससे पहले कई चैनल से हो गया था तो फिर वह एक री रीयज कंटेंट का एक होता है YouTube में वो आ जाता है। बहुत एक ही वीडियो अगर बहुत बार लोग अपने अपने YouTube से डाल ले तो उसमें आपत्ति आ जाती है YouTube की तरफ से और इसके साथ ही साथ क्या रामभद्राचार्य जी के विषय में हमने जो रामचरितमानस वाला जो खंडन जो पूरी के शंकराचार्य जी ने किया था वो किया नहीं उला अपने से रामभद्राचार्य जी ने अपनी बुक में लिखा था कि क्या कहते हैं मुझे अपने संस्कृत होने पर बड़ा वो था पर मैंने जब करपात्री जी महाराज की हिंदी पढ़ी तो मुझे अपने
00:36:44:14 संस्कृतज्ञता पर भी वो आ गया। मतलब ऐसा कुछ भाव था वहां पर लिखा है उन्होंने बुक में उसको दिखाया भाई शंकराचार्यों की आप जो है संस्कृत के ऊपर आप वो उठा रहे हो। जबकि आप खुद मानते हो कि करपात्री जी महाराज की हिंदी कैसी अब वो बात अलग है कि भाई तूने कैरी मिनाटी बनने की सोची तो तेरे अनुसार तेरे तरीके से हम बात ना करें। इससे क्या मतलब है? तेरा तुझे अगर कॉपी नहीं कर रहा है कोई तेरा अनुकरण अनुसरण नहीं कर रहा है कोई तो बस वो हो गया रामभद्राचार्य का विरोध ना करने वाला या रामभद्राचार्य जी का समर्थन हो गया उन विषयों में जो जिन विषयों में वो हमारे गुरुदेव का विरोध करते हैं ऐसा नहीं होता है ना इन सब विषयों में सनातन सिद्धांत बोलते जाओ फटाफट फटाफट यहां ये लिखा है तुमने ये नहीं किया यहां ये लिखा है इससे सिद्ध होता है रामभद्राचार्य जी इस दंड के इस दंड इस दंड के वो है उपयुक्त इस दंड के लिए बोलते जाओ फिर लोग कहेंगे शास्त्र से बोल बोलते हो कहां शास्त्र है इसमें बेवकूफी है और कुछ नहीं है रोता चना बाजे घनाचार्य
00:37:47:03 इस व्यक्ति के लिए आंतरिक हो गए और हो गए आज तक हमने आदि शंकराचार्य को गाली दी कभी नहीं अपने लिखने में आदि शंकराचार्य जी का अपमान किया कभी नहीं क्या हमने आदि शंकराचार्य के सिद्धांत को शास्त्रीय कहा कभी नहीं ये सब काम किसने किया रामद्राचार्य ने किया क्या हमने स्वयं को कभी एकमात्र धर्म गुरु बताया नहीं ये काम किस आदि शंकराचार्य को गाली नहीं दी आदि शंकराचार्य को गाली मैंने बताई दिया गाली नहीं दी। फिर इसने बोला कि सिद्धांत को अशास्त्रीय बताया। तो भाई सिद्धांत को अशास्त्रीय बताने वाली बात है। तो वो तो सभी आचार्यों ने एक दूसरे के सिद्धांत को कहा ही है। सब परंपरा के अनुसार तो सबका सिद्धांत अशास्त्रीय एक दूसरे के अनुसार। अगर नहीं कहेंगे अशास्त्रीय तो अपने मत की पुष्टि कैसे होगी? क्या रामानुजाचार्य जी ने अपने श्री भाष्य में ज्ञान मार्गियों को प्र नहीं कहा क्या और क्या विद्या भास्कर जी महाराज श्री वास को नहीं मानते एस इट इज तुम हो तुम हो ऐसे दोगले जो निगमानंद से परंपरा निगमानंद को परम अपने परंपरा वाले गुरु बताते हुए भी कह सकते हो कि भाई निगमंद जी का लिखा हुआ मैं जो है इतना मानूंगा इतना नहीं मानूंगा तुम ऐसे दोगले हो ना प्रामाणिक आचार्य ऐसे
00:39:02:04 नहीं होते श्री वास की वो लाइन नहीं मानते क्या वो प्रचन्न तो ये जो परंपराएं हैं जो अलग-अलग संप्रदाय हैं तो कहीं ना कहीं किसी ना किसी एक पॉइंट पर जाकर के ये कहते ही है कि भैया वो अशास्त्रीय है संप्रदाय तभी तो संप्रदाय अलग है बेवकूफ इसीलिए मूर्खता है और कुछ नहीं तो सिद्धांत को शास्त्री तो सब कहते हैं एक दूसरे के तू भी कह ले हमने तो तुझे भी कहा है ना चल रामचार्य ने किया क्या हमने स्वयं को स्वर्ग के गुरु बताया सर्वज्ञ गुरु इसी वीडियो में ये बोल रहा है कि क्या मैंने स्वयं को सर्वज्ञ गुरु बताया? इसी वीडियो में ये आगे कहेगा कि भैया मैं तो वैष्णवाचार्यों के पैरों में गिरने को तैयार हूं। उनकी शरण में लेट जाने को तैयार हूं। पर पहले कोई वैष्णव हो वैसा आज तक इसको कोई वैष्णव नहीं मिला। ऐसा यह बोलता है कि मुझसे मिलने बड़े-बड़े लोग आए मगर मैंने वह चीजें निर्गत नहीं की अपने चैनल से। हां, मैंने उनके साथ सत्संग किया विद्या भास्कर जी महाराज के साथ। तो मैंने वह लोगों को बताया क्योंकि मुझे उनके साथ सत्संग करना अच्छा लगा। सत्संग किया इसने सानिध्य दिन में नहीं आया विद्या भास्कर जी महाराज के राघवाचार्य जी महाराज इसके अनुसार जो
00:40:17:13 जटिल मुद्दे होते हैं प्रासंगिक उनमें लीपापोती करके निकल जाएंगे। रामभद्राचार राघवाचार्य जी महाराज ने जो स्टेटमेंट दिया रामभद्राचार्य जी को लेकर के इतना ठोस उसकी हमें अपेक्षा नहीं थी मगर फिर भी उन्होंने दिया तो उनका अभिनंदन है ये ये समीक्षक बैठे हुए भाई हमारे जो बड़े-बड़े आचार्य गण है ना उनके जनाब समीक्षक बैठे हुए हैं उनकी समीक्षा करने वाले है ये किसी के अनुगत नहीं हो सकते और कहते क्या है क्या मैंने अपने आप को सर्वज्ञ गुरु बताया अरे भाई जब तू ये कह रहा है कि मैं सबका निग्रह करने आया हूं हूं। जब तू यह कह रहा है कि ऐसा कोई है ही नहीं। तेरे अनुसार कोई परफेक्ट है ही नहीं। और क्या तूने अपना दोष बताया? तो जब तू अपने आप को दोष रहित बता रहा है। जब तू अन्यों को दोष युक्त बता रहा है तो तू बिना कहे बिना कहे यही तो कह रहा है कि एक मात्र मैं ही हूं। सबसे प्रमाणिक सबसे शास्त्रोक्त बात बोलने वाला।
00:41:16:12 स्वयं कोई तो सबसे बड़ा बता रहा है तू। फिर कह रहा है क्या मैंने अपने आप को एकमात्र गुरु बताया? बताया तूने यह ठीक ऐसे है जैसे इस्लाम वाले कहते हैं कि भैया हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है। आर्य समाज जी कहते हैं हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है। मगर आगे जाकर के कहते थे कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। मूर्ति पूजा नहीं हो सकती। उसी प्रकार से तू ये कह रहा है कि भैया मैंने अपने आप को सर्वज्ञ नहीं बताया। एक मात्र गुरु नहीं बताया। मगर आगे जाकर के तू जितने प्राप्त गुरु हैं प्रामाणिक आचार्य हैं उनका खंडन कर दे रहा है। अपना खंडन तो नहीं किया उनका खंडन तू कर दे रहा है।
00:41:54:16 तो बिना कहे जिस प्रकार से उनका ईश्वर शक्ति उनका जो सर्व विशेषण है वो हट जाएगा ना। अगर वो जन्म नहीं लेगा अवतार नहीं लेगा तो तो सर्व विशेषण हट जाएगा। उसी प्रकार से जब तू ऐसा करता है कि कोई भी वैष्णवाचार्य है ही नहीं जिसके तू अधीन हो सके। कोई है ही नहीं जो तेरा गुरु गुरु बन सके। जिसके प्रति तेरा गुरु भाव हो। सब बड़े-बड़े आचार्यों के साथ तू सत्संग करता है। भाई और समीक्षा करता है उनके शिष्यों की। विद्या भास्कर जी महाराज ने इस व्यक्ति को कह दिया कि भैया वो हमारे मित्रवत है। तो वो उनके शिष्यों को उसी दृष्टि से देखने लगा। यह व्यक्ति उन्होंने तो बड़प्पन में कहा इसने मान लिया राघवाचार्य जी मेरे शिष्य के समान है तो उनकी समीक्षा ऐसे ही करवा लो इससे और फिर कहता है कि मैंने क्या मैंने अपने आप को एक मात्र गुरु बताया हां बताया तूने निग्रह करने वाला होने के रूप में ही तूने अपने आप को बता दिया तू कौन होता है शंकर परंपरा में पिछले गुरुओं ने क्या बताया क्या नहीं बताया वो वैसा का वैसा ही बता रहे हैं बता जब तूने परंपरा से उनके अध्ययन नहीं किया तो उनके गुरु ने क्या कहा था पीछे वालों ने ये वो बताएंगे आएंगे तू वहां निर्णायक कैसे हो जाएगा? और अगर निर्णायक हो जाएगा तो परंपरा का मतलब क्या है? बता क्या मतलब
00:43:09:18 है परंपरा का? परंपरा का मतलब ये है कि शिष्य वो ज्ञान देगा जो उसके गुरु ने दिया था। वो वो ज्ञान देगा जो उसके गुरु ने दिया था। ये होती है परंपरा। ये है उपयोगिता परंपरा। जब तू अपने मन से ज्ञान दे रहा है तो फिर परंपरा के मतलब क्या रह गया? प्रमाणिक गुरु बनाया। ये सब काम किसने किया? रामद्राचार्य की तो हमारी दृष्टि में शंकराचार्य का सम्मान है किंतु रामद्राचार्य की दृष्टि में नहीं हमारी दृष्टि में शंकराचार्य जी का सिद्धांत शास्त्र सम्मत है किंतु राम भद्राचार्य की दृष्टि में नहीं हमारी दृष्टि में आदि शंकराचार्य जी का मार्ग अनुकूल है कल्याणकारी है किंतु रामद्राचार्य की दृष्टि में वह उपत है तापस है तो ये स्थिति हो गई हमने कभी कहा की कोई शंकराचार्य मेरे मेरे सामने का संस्कृत नहीं बोल सकता नहीं ये रामद्राचार्य ने कहा क्या हमने कहा की मैं एक मात्र जगत गुरु हूं और बाकी सारे नकली आचार्य है नहीं ये रामद्राचार्य ने कहा तो हमारी दृष्टि में तुम्हारे गुरु प्रामाणिक है और हम हो गए रामद्राचार्य की दृष्टि में तुम्हारे गुरु नकली है और तुम्हारे गुरु नहीं है तुम्हारी पूरी परंपरा नकली और वो हो गए आंतरिक। चलो ये समझो ये व्यक्ति निष्ठा नहीं है। ये निर्लता है ये हो सकता है। ये मूर्खता है। अब समझना आगे पुत्र की हालत और अब देखिए भाई अब प्रमाणिकता की बात आ जाते हैं। इसकी दृष्टि में क्या शंकराचार्य प्रामाणिक है। अच्छा इसने कहा प्रामाणिकता की
00:44:24:21 परिभाषा वैसे इसको आती नहीं है। प्रामाणिक कहते किसे? जो शास्त्र में लिखा है वही जो आचरण है उसकी स्थापना जो अपने शिष्यों में करता है वह आचार्य कहलाता है। शास्त्र की वाणी है ना ये तो इसने भी अपनी बुक में मानी है इस बात माना है इस बात को आचार्य तो हो गया। अब जब ये कह रहा है कि अमुक अमुक जगह पर जो शंकराचार्य हैं वर्तमान पूरी पीठाधीश्वर इत्यादि या अमुक आचार्य अमुक आचार्य उनका आचरण शास्त्र सम्मत नहीं है। तो उनके आचार्यत्व पर इसने प्रश्न चिन्ह उठा दिया ना। प्रामाणिकता पर अगर बात की जाए तो तूने उनकी प्रामाणिकता पर खूब प्रश्न चिन्ह उठाया है। दिव्याभूति पढ़ के उनका उपस उड़ा रहा है। उनकी बातों को उनको तू झूठा कहने वाला सिद्ध करने का प्रयास कर रहा है। उनको तू अपने परिकरों के मुंह में आसक्त होने वाला सिद्ध करने का प्रयास कर रहा है। तो तू अनेकानेक सिर्फ मुंह से ये नहीं कह रहा है कि तुम प्रामाणिक नहीं हो। बाकी सब तो तू कर रहा है। जब तुझसे कहा जाएगा तूने कालिया जिन का मंत्र क्यों दिया तो तू कहेगा भैया शंकराचार्य तो मुसलमानों के हित का ध्यान रखते हैं। ये सब आरोप लगाएगा या शंकराचार्य ने उनको वैष्णव वैष्णव क्यों कह दिया जीसस को? है ना? तो जब ये सब तू आरोप
00:45:39:27 लगा रहा है तो यहां यहां पर अब जीसस को किस रूप में वैष्णव कहा? बाइबल ना लिखने वाले जीसस को उन्होंने वैष्णव कहा। बाइबल लिखने वाले बाइबल देने वाले जो बाइबल आज प्रासंगिक है वो बाइबल जो सनातन विरोधी है उस बाइबल को देने वाले जो जीसस है उनको उसने उन्होंने वैष्णव नहीं कहा मगर तूने क्या मिर्च मसाला लगा के प्रस्तुत किया कि भैया वो वैष्णव कह रहे हैं। है ना? तो उन्होंने ये माना कि ये जो बाइबल जीसस के नाम से प्रसारित की जा रही है। ये बाइबल जीसस ने नहीं लिखी है। जीसस तो वैष्णवों के अनुगामी थे। उन्होंने तो यह कहा वास्तविक जीसस जो थे मगर जीसस के नाम पर जो प्रचार किया जा रहा है वो गलत किया जा रहा है अगर वास्तव में जीसस के प्रति निष्ठा है तो ईसाइयों हिंदू हो जाओगे ये उन्होंने कहा ना मगर इसने क्या कहा जीसस वैष्णव कैसे हो गए ये है वो है तो यानी कि तुम्हें उनकी अच्छा अगर बात की जाए क्या वो परंपरा से प्रामाणिक है कि नहीं तो इसने उनकी परंपरा वाली बात पर भी उंगली उठाई उन्होंने कहा कि तुम इसका मान इसका ये कहना है हालांकि वो बात मान्य नहीं है क्योंकि किसकी परंपरा में पीछे वाले गुरुओं ने क्या बताया है वो उस परंपरा का जो प्रामाणिक उत्तराधिकारी है वही कहेगा
00:46:55:03 वही बता सकता है ना तो इसने बौद्ध और शबरी के विषय में पूरी के शंकराचार्य जी को अपने पूर्व जो पूर्वाचार्य है उनका विरोध करने वाले बता दिया यानी परंपरा से प्रमाणिक नहीं आचरण से आचार्य नहीं और जो यह झूठ बोलने वाले या आसक्त है ना गप्पे मारने वाले सब बोला इसने मुसलमानों का पक्ष लेने वाले इन सब रूपों में इसने उनके सन्यासी होने पर भी आरोप प्रश्न उठा दिया तो तूने कहा नहीं मुंह से कि वो अप्रामाणिक है मगर तूने वो सारी चीजें कर दी जिससे कि उनकी अप्रामाणिकता सिद्ध हो प्रयास वो सारे प्रयास तूने कर लिए और तेरे अनुसार अगर बात आए प्रामाणिकता की तो मेरे मेरे संज्ञान में तो आज तक नहीं है कि शब्द अगर यूज़ करने की बात है कि यूज़ किया है कि नहीं ये शब्द प्रामाणिक अप्रामाणिक वाला तो रामभद्राचार्य जी ने कहा पे किया मेरे संज्ञान में तो नहीं है अगर हो तो बता देना तू भाई तूने एक अलग तरीके से उनको अप्रामाणिक सिद्ध करने का प्रयास किया बस आज तू चिल्ला रहा है कि नहीं मैं तो प्रामाणिक मानता हूं बस इतना है और उसी तरीके से अप्रामाणिक अलग तरीके से उन्होंने सिद्ध करने का प्रयास किया और अगर बात रही छोड़ने की
00:48:10:04 तो तो जैसे कहीं पहले उनके विरोध में हम वीडियो बना चुके तो फिर इसको व्यक्ति निष्ठता नहीं कहते हैं। इसको कहते हैं तेरा दोगलापन कायरता कि औरों के लिए कोई और नियम मेरे लिए अलग नियम। अरे भैया पहले बात बोलने से पहले थोड़ी जांच पड़ताल की। तुझसे कहीं साल कई समय बहुत समय पहले हम रामभद्राचार्य जी के विरोध में वीडियो बना चुके हैं। बेवकूफ पहले देख जाकर के रिसर्च कर थोड़ी जैसे वो की थी ना अपने सपनों की दुनिया में परी कालिया जिन मलिच्छराज की ऐसे रिसर्च कर थोड़ी वास्तविक धरातल तो हां
00:48:56:09 पूरी शंकराचार्य जी का या प्रामाणिक आचार्यों का मर्यादा में रहकर विरोध करने वालों का हम बहुत जल्दी विरोध नहीं करते हैं। कब तक? जब तक वह आवश्यक ना हो। एक जब तक वह करने पर ही उस पर प्रभाव पड़ना हो। दो ऐसा भी नहीं है कि अगर पूरी शंकराचार्य जी स्वयं बोल रहे हैं तो हम उसमें कूद पड़े। राघवाचार्य जी स्वयं बोल रहे हैं तो हम उस कूद पड़े। विद्या भास्कर जी स्वयं बोल रहे हैं तो हम उस कूद पड़े। ऐसा भी नहीं है। और तीसरा कि वो वर्णाश्रमी हो, मूर्ति पूजक हो। तुझको भी तो छोड़ा हुआ है। मूर्ख तू अपने को क्यों नहीं देखता है? तुझको नहीं छोड़ा था। तूने ये सब आज किया क्या? यह असिद्ध व्यक्तिगत अमर्यादित आरोप तूने अब लगाए हैं। तुझको भी तो छोड़े हुए थे। यही सब चीजें थी तुझ में भी। तो इससे तू क्यों नहीं सीख लेता है कि हमें क्यों छोड़ा था? क्यों नहीं सवाल करता है? मुझे क्यों छोड़ा था? तो आंसर आ जाएगा। तूने जब मर्यादा को लागा जब सीधे तौर पर तूने कुछ ऐसा किया जो मुझसे जुड़ा हुआ था तो मैंने तुझ पर संज्ञान लेना चालू किया कि सीधे तौर पर तो मुझे वो बातें भी पता चली तेरे बारे में जो मुझे नहीं ज्ञात बड़ी-बड़ी मोटी मोटी बातें तेरे बारे में ज्ञात थी और उस पर भी मैं चुप इसलिए था कि भैया जैसे और सारे लोग विरोध करते हैं तो ये भी कर ले
00:50:11:18 अपना भाई है वर्णाश्रमी है मूर्ति पूजक है परंपरावादी है मुझे नहीं पता था तेरी परंपरा काल्पनिक है कपोल है ये सब है वो तो आज तक तेरे लोगों को नहीं पता तुझे नहीं पता अभी तो तू कहानियां गढ़ रहा होगा वो ला कहानियां तब बात पता चलेगी तो ठीक अब आगे चलते हैं पक्षी मानसिकता है जो देखने को मिलता है ज्योति का अधिकारी अब देखिए नीच कितना व्यक्ति है जिसने इसके बारे में कोई तू तड़ाक करके बात नहीं की मगर ये कैसे बात कर रहा है उनके लिए इससे डबल उम्र की है वो हां कैसे बात कर रहा है उनके बारे में ये स्त्री ऐसी लगती है वैसी लगती है ये इसकी तमीज है यही इसके संस्कार है सुन ले लिखता है किंतु जी के पत्र लड़की है बताता है और रंजना पुत्र के साक्षात्कार से लगता है कि आचार्य के वकील है। मुझे नहीं पता कि रंजना अग्नि की पुत्र की उम्र कितनी है। लेकिन मुझे इनके शरीर को या इनके मानसिकता को या इनके व्यक्तित्व को देखकर विश्वास है कि इनकी अवस्था साल से अधिक कितनी होगी। मुझे लगता है 204 में ही 25 में जन्म लिया होगा और इन्हें अब देखो ये क्या किस चीज पे बात कर रहा है? इसके पास एक तो बात का पतंगड़ बनाने का समय कितना है? क्या एक व्यक्ति एक जो अधिवक्ता
00:51:26:19 है वह क्या एकमात्र व्यक्ति का ही वकील होता है पैरवी करता है उसी की क्या दो लोगों की एक से ज्यादा लोगों की पैरवी नहीं कर सकता है क्या उन्होंने अगर वो हिंदुओं की ओर से लड़ने वाली वकील है तो क्या वो अगर वो हिंदुओं की ओर से लड़ने वाली अधिवक्ता है हाई कोर्ट इत्यादि में या सर्वोच्च न्यायालय में उच्च न्यायालय में तो क्या वो किसी मामले में मुक्तेश्वर जी का केस या किसी मामले में रामभद्राचार्य जी का केस या किसी मामले में पूरी के शंकराचार्य जी का केस नहीं लड़ सकती और अगर लड़ेंग तो तुम ये कहोगे अरे भाई ये लोग तो तीनों एक दूसरे के विरोधी है हां हां ये हो सकता है कि संभवत तेरे संपर्क में जितने भी वकील हो वो निठल्ले टाइप के हो संभवत ऐसा हो सकता है जिनके पास एकमात्र तू जो कालिया जिनका पुजारी है वही क्लाइंट हो इसीलिए तेरे को यह सब दिखता कि भैया सामने वाले के सामने वाले का भी एक ही क्लाइंट होना चाहिए। कि उनका जो मुवकील कहते हैं क्या क्लाइंट कहते हैं वो होना चाहिए जिनकी वो पैरवी करता है जिनकी ओर से वो पक्ष को रखता है ये बेवकूफी है कि नहीं कि शिवश कहता है वो रामभद्राचार्य अरे भैया किसी
00:52:41:22 केस में वो रामभद्राचार्य की वकील है किसी केस में वो मुक्ति जी हां तू तब आपत्ति उठा सकता है कर सकता है धर्मनिष्ठता पर आरोप लगा सकता है जब किसी एक प्रकरण में वो अपने वो जो पहले दोनों की पैरवी कर चुकी है किसी एक प्रकरण में वो किसी एक की तरफ से खड़ी हो जाए और जिसमें दोनों पक्ष एक दूसरे के विरोधी हो तो ये कह सकता है कि हां भैया यहां इन्होंने क्या किया पहले तो ये एक एक करके धर्म की बात को रख रही थी वो भले ही रामभद्राचार्य जी की ओर से कही जा रही हो या वो भले ही जी की बात से कही जा रही हो मगर जब दोनों लोग आपस में एक दूसरे के सामने खड़े हैं तब वो किस पक्ष में खड़ी हो गई तो तुझे वहां पर सवाल हो सकता था कि भैया ये तो अजीब और या फिर तेरी जो एक तेरा जो प्रश्न उठ रहा है ये दोनों दोनों तरफ है तो दोनों तरफ है एक ही केस में यदि वो दोनों तरफ खड़ी हो जाती तब तू कर सकता था तब ये सब तब कन्फ्यूजन अपनी दिखा सकता था बात का भतंगड़ बनाना है इस व्यक्ति को
00:53:39:25 होने के कारण इतनी अच्छी बात कर ली अब देखो ये क्या कह रहा है कि शरीर से एक मिनट इसकी गिद्ध जैसी नजरें देखो स्त्री के शरीर पर कैसे जाती है चाहे वो अधे उम्र की हो प्रौढ़ अवस्था में हो युवा में हो किशोर हो इसकी जो इसकी नजरें है ना जो इसने बाइपोलर इत्यादि में कहा था ना वो देखिए किस प्रकार से सिद्ध होता है जो इसकी कामुकता है इसके अंदर जो लष्ट है स्त्री के शरीर के लिए और जो इसकी बेशर्माई है स्त्री के शरीर को लेकर के क्यों क्योंकि जो विजय श्री साड़ी पहन कर के वीडियो बना रही है ये उसको वो नहीं दिख रहे हैं। शंकराचार्य के शरण में आने से पहले उसने कुछ अज्ञानता वश जो फोटो खिचा ली उसको वही दिखते हैं और फिर वहां पर स्त्रियों के अंतर वस्त्रों का नाम सार्वजनिक रूप से लेने में तो रस आता है ना मुख में रस आता होगा कि उसने ये पहन करके फोटो खिं रखी है पहन करके और यही नहीं फिर और रस आता है कि विजयश्री के पास ऊपर और नीचे ऐसा बहुत कुछ है जो मेरे पास नहीं है ये सब रस आता है मन करता है व्यक्ति का इन सब बातों पर चर्चा करने का और वो किसी ना किसी माध्यम से अपनी जो प्रवृत्ति है वो बाहर निकालता है। वो दिखाता है लोगों को किसी तरीके से मैं वो बातें कर पाऊं इन सब से जो मैं
00:54:54:28 अंदर से करना चाहता हूं। ऊपर और नीचे ये अंग वस्त्र ये अंतर्वस्त्र इसका शरीर ये सब रस फूटता है ना जो कामुक जो वो होता है ना क्या कहते हैं स्त्री लोलुपता होती है जो उसका वो रस फूटता है जब वो इन सब बातों को करता है बड़ा सुख मिलता है तो शरीर की बात करेगा गद की तरह अब आप बोलेंगे ये क्या बात हुई रंजना तो प्राउड स्त्री है वो एक साल की कैसे हो सकती है अच्छा नहीं है क्या मतलब 2024 में वो धरती पर थी 2023 में वो धरती पर थी जीवित थी या अपनी स्वस्थ शारीरिक मानसिक स्त्री में थी रामद्राचार्य ने कहा था रामद्राचार्य के शब्दों में मैं ये नहीं कह रहा ये रामचार्य का बयान है बिंदु में अवक्तानंद ने अपने गुरु की हत्या करके गद्दी कब्जा कर ली इस तरह का भाव रामचार्य का था मतलब रामद्राचार्य दृष्ट अवक्तानंद सरस्वती ना केवल नकली शंकराचार्य तो अपने गुरु के हत्या आर्य भी है लज्जा नहीं आई रंजना अच्छा अब पहली बात यह है कि धूर्त व्यक्ति एक वर्ष पूर्व या जितने भी वर्ष पूर्व जिसने बताया तू उस समय पृथ्वी पर था धरती पर था मुक्तेश्वर जी से धार्मिक संसर्ग में जुड़ा हुआ था ना बहिष्कार तो तूने अभी किया है ना तू तो बड़ा हो गया है विद्या भास्कर जी के साथ हम सत्संग करते हैं। विद्या भास्कर जी
00:56:10:04 ने अगर तुम्हें मित्रवत बता दिया है तो उनके शिष्यों को अपने शिष्य के रूप में देखते हुए उनकी समीक्षा करते हैं। उनके लिए अनग प्रलाप करते हैं। वो लीपापोती करके निकल जाएंगे। और एक वर्ष पूर्व तू भी था ना पृथ्वी पर धरती पर था। अच्छा उस समय तू मुक्तेश्वर जी से जुड़ा हुआ था कि नहीं जुड़ा हुआ था? तब जब रामभद्राचार्य जी ने उनके विरोध में कह दिया था ऐसी बात तो तेरे हिसाब से क्या होना चाहिए था? अब मुक्तेश्वर जी को केस कर देना चाहिए था न्यायालय में। क्यों नहीं कर दिया? अच्छा वही वाली बात कि तुमने जापान नहीं देखा है तो इसका मतलब यह है कि इस दुनिया में कोई जापान नहीं है। रंजना अग्निहोत्री जी ने इस बात को लेकर के रामभद्राचार्य जी का विरोध किया था कि नहीं किया था? इस बात को तूने कैसे सिद्ध किया? जो तू विरोध कर रहा है कैसे सिद्ध किया? तेरे सीसीटीवी कैमरे लगे हैं क्या? भाई अपनी विद वाली आंखों से लगातार देखता है क्या तू? स्त्रियों को कल्पनाओं में देखता होगा। यही काम है तेरा वो परी इत्यादि में तो कल्पना कर ही रखी है वो निगनंद तो दे ही गए हैं कि वो भगवती जो पत्नी के रूप में वही कल्पना तेरी चलती रहती होंगी सदैव स्त्रियों पर थर्ड आई रखना गिद्ध के जैसी नीच
00:57:25:27 अरे भैया उन्होंने किया था कि नहीं किया था ये तू पहले देख तो ले दूसरों को तू नपुंसक कह रहा है स्त्री के शरीर की बात कर रहा है उन्होंने अगर क्या उन्होंने एक स्टेटमेंट दिया है रंजना अग्निहोत्री जी के इस बार इस मामले में मैं रामद्राचार्य जी के साथ खड़ी हूं। तू तू खुद कहता है मूर्ख व्यक्ति कि हम जो है व्यक्ति का नहीं उसके द्वारा किए जा रहे गलत कृत का विरोध करते हैं तो फिर तू यहां पर क्यों नहीं ध्यान देता है कि रंजना अग्निहोत्री जी किस मामले में रामभद्राचार्य की ओर से खड़ी हुई है यही है तेरी मूर्खता और धूर्तता तुझे केवल तुझे धर्म से कोई मतलब नहीं है और मैं तुझे फिर बता रहा हूं मैं तुझे फिर बता रहा हूं प्रलय आने से पहले तक अगर मैं जीवित रहा तो तेरा इंतजाम मैं जरूर कर दूंगा मैं तुझे फिर बता रहा हूं तू मेरे शब्दों को अभी तुझे वो प्रभाव नहीं डाल पा रहे होंगे होता है जो रावण होता रावण था ना उसको भी अहंकार था कोई कुछ नहीं कर पाएगा ध्वस्त कर दी थी लंका श्री राम जी ने उसकी तो ऐसे ही तुझे भी इस समय अपने अहंकार में कुछ समझ में नहीं आ रहा होगा मगर इतना निग्रह तो तेरा कर ही दिया तेरी भाषा शैली बहुत हद तक बदल गई अब तुझे वो स्त्रियों का ऊपर नीचे वाला बातें अब
00:58:41:01 याद नहीं आती आजकल तुझे है ना उतना निग्रह तो हमने तेरा कर दिया। मगर मैं तुझे फिर बता रहा हूं कि प्रलय आने से पहले तक यदि मैं जीवित रहा तो मैं तेरा इंतजाम जरूर कर दूंगा। तेरी ये जो पाप की लंका तूने बनाई है ना ये जो ये जो गप्प सड़ाके मार मार के मलेचराज ये सब तूने जो दुनिया अपनी बनाई है ये सारी फेंटसी तेरी नष्ट कर दूंगा। जला दूंगा सब कुछ। बस करता रहे तू आगे बढ़ अपने वो पुख्को पर चढ़ता रहे वो जो तुझे वाह वाह वाह वाह वाले हैं कोई काम नहीं आएगा जो तुझे वाह वाह वाह वाहवा कर रहे हैं ना जो कमेंट में आ के कर रहे हैं वाह वाह वाह वाह वो कोई काम नहीं आएगा तेरा जो तेरा अंत निश्चित है तूने इतना सब करके रख दिया अपने लिए तेरा अंत निश्चित है तूने जो पाप की पाप का साम्राज्य अपना बनाने की कोशिश की तटपुंजिया वो भी कोई साम्राज्य साम्राज्य नहीं मगर तूने जो अपना Facebook या यूबरिया अपना बनाया ना छोटा सा दुनिया वो नष्ट होने पे है नष्ट होगा वो ठीक है कर तू अपनी गिद्ध वाली हरकतें
00:59:52:21 स्त्री का शरीर तब ये धरती पर थी अरे विरोध किया था कि नहीं किया था तूने कैसे तय कर लिया भाई अच्छा तूने क्यों नहीं मुक्तेश्वर जी का धार्मिक संसर्ग छोड़ दिया कि तुम क्यों नहीं इन पर केस कर रहे हो और तो और चलो लोग केस नहीं कर रहे हो जो जो मातृ शक्ति तुम्हारी गुरु बहन है रामभद्राचार्य जी से पूछ उनसे जाकर के उस समय तो तू साथ में था ना जो मातृ शक्ति इनसे जुड़ी हुई है रामभद्राचार्य जी से भी जुड़ी हुई है तेरे तेरी जानकारी में और समर्थन करती रामभद्राचार्य जी का तो तुम क्यों उसको अभी भी अपने गुरु बहन मान रहे हो क्यों अभी अभी भी बात हो रही है ज्योतिष पीढ़ वाले महाराज जी से कोई क्या बैर है क्या बेवकूफ व्यक्ति कहीं ना कहीं तू और मैं भी आपस में एक दूसरे की मदद करते मिल जाएंगे बहुत ज्यादा ज्यादा दूर है तो अप्रत्यक्ष रूप से और बहुत पास है तो प्रत्यक्ष रूप से ये क्यों नहीं तू समझता है क्योंकि तू समझ अब वही वाली बात है कि नहीं समझ पा रहा है तो या तो तू मूर्ख है और या फिर तू समझना ही नहीं चाहता है अब प्रत्यक्ष रूप से सब लोग एक दूसरे से कहीं ना कहीं कनेक्टेड मिल जाएंगे देखा जाएगा कि प्राथमिकता से क्या है और गौण रूप से क्या है गुरुजनों के लिए माता माता-पिता के लिए भी भगवान शब्द आ जाता
01:01:07:22 है उपयोग में मगर गौण रूप से प्राथमिकता से तो भगवान के लिए ही उपयोग है विष्णु पुराण उसी प्रकार से तेरा और मेरा भी कहीं ना कहीं एक दूसरे का सहयोग निकल आएगा मगर गौण रूप से प्राथमिकता से तो विरोध ही है तो ये गौण और विरोध की परिभाषा को समझ थोड़ा परिस्थिति होंगी शारीरिक मानसिक स्वस्थ स्त्री होगी आई थी जब उनके ही गुरु और गुरु भाई उस प्रकार से कहा जा रहा था और रामचार्य की वकील बनकर बैठी है और वहीद्राचार्य नोटिस भिजवा रहा है अपने चेलों के द्वारा किसको जी को और पेट प्रसारित कर रहा है कि रंजना के वकील हमारी वकील बता रहा है रामद्राचार्य के वकील ये क्या रिश्ता है भाई ये रिश्ता क्या बताता है बस यही इसकी ओछी गिरी है इसी के कारण ये देखो ऐसा नहीं है जनता होती है सबके सबके श्रोता मिल जाते हैं रामभद्राचार्य जी को भी अपने श्रोता मिल जाते हैं तात्विक व्याख्यान करने वाले पूरी शंकराचार्य जी को भी अपने श्रोता मिल जाते हैं। भागवत कथा कहने वाले जो कथाकार आचार्य गण है उनको भी अपने श्रोता मिल जाते हैं। और इस प्रकार की जो छिछाई करता है ना है ना छिछलाई गिरी जो करता है Facebookिया गिरी जो करता है ऐसे लोगों को भी उसके स्तर के श्रोता मिल ही जाते हैं। तो क्या है
01:02:22:24 इसको हर जगह यही सब दिखाई देता है। रिश्ता क्या कहलाता है? है ना? वो उसके पास ऐसा बहुत कुछ है जो मेरे पास यही सब इसको दिखता है तो इसको इसके तरीके के वो जो श्रोता है मिल जाते हैं तो स्वामी दत्तात्रेय जी को नकली शंकराचार्य बताने वाले पीएम का विरोध करेगा कि नहीं करेगा इसका भी मान इतनी बार इन बातों का मैं जवाब दे चुका हूं मेरे भाई हमें चुनना पड़ता है कि 2000 लोग अगर करपात्री जी के विरुद्ध कोई बात कह रहे हैं तो उनमें से कौन सी बात पर हमको प्रतिक्रिया देनी क्यों नहीं समझ पाता उसी बात का रट्टा लगाए हुए है तू हर दिन करपात्री जी पूरी के शंकराचार्य शंकराचार्य का विरोध होता है हर दिन कितने लोग कर रहे हैं देखना पड़ता है कि किस पर बात करें किस पर ना करें किस पर मौन रह के कार्य कर दे किसका शोधन बिना बोले कर दे किसका शोधन बोल करके करें मगर तूने अगर निर्णय लिया है कि इसमें जो है वीडियो बना करके ही बोले तो यह सनातन सिद्धांत दिखा और मैं तुझे दिखाता हूं कि जिनको तू प्रणम में मान रहा है जिनको जिनका प्रश तुझे प्राप्त है जो तेरे अनुसार प्रामाणिक है उनका कितना खंडन हो रहा है तूने सब पर वीडियो बना
01:03:38:00 दिया क्यों बनाया भाई तेरे अनुसार वीडियो कौन है तू अब तू कहेगा मेरे ऊपर क्यों बनाया तेरे ऊपर भी नहीं बना रहे थे ऐसे ही तू भी विरोध कर रहा था करपात्री जी का पूरी के शंकराचार्य जी का कि चारों शंकराचार्यों को उसमें बुला बुला लो चार करोड़ देकर के करा था ना तूने भी बकवास किया था तेरा विरोध नहीं किया जब तूने मर्यादा लांग दी जब तूने मर्यादा लांग दी अश्लील असिद्ध अमर्यादित आरोप लगाए तूने चारित्रिक दोष वाले आचार्यों पर या फिर उनसे जुड़े हुए उनके परिकरों पर उनके परिकों के कंधे पर बंदूक रखकर के तूने क्या-क्या बातें नहीं बोली वैश्याओं को पूरी के शंकराचार्य से मिलवाया जा रहा है किसी और स्त्री की फोटो दिखा के तू बोल रहा है कि वो विजयश्री देखो पूरी के शंकराचार्य जी के साथ मंच साझा कर रही है जो कुत्ते के साथ मुख से मुख लगा के चुम्मा करती है। कितनी घटिया बातें बोली तूने तब तेरा विरोध किया है। अगर तू उतने पे भी रहता तो तेरा विरोध नहीं किया था। समय नहीं था तेरा विरोध करने का। और नीचता करवा लो बस
01:04:49:18 हुआ। तो मेरा अधिकार अब सुनाधिकार के विषय में का विरोध करेगा कि नहीं करेगा। लेकिन सिवांश जैसे लोग नहीं हो पाए। अरे भैया अगर हमने वर्णाश्रम का विरोध पक्ष ले लिया तो उसमें अगर वर्णाश्रम का कोई विरोध कर रहा है तो उसका विरोध नहीं हो गया। अगर हमने जवाला वाले मामले में बहुत बड़ा धूत आचार्य प्रशांत जो अपने आप को कहता है स्वषित आचार्य उसका हमने विरोध किया जवाला वाले मामले में उसको जो है मुंह तोड़ उत्तर दिया तो यदि कोई जवाला वाले मामले में उस आचार प्रशांत वाली बात ही बोल रहा है तो क्या उसको उत्तर नहीं मिल गया तेरे अनुसार क्योंकि तुझसे उस व्यक्ति का झगड़ा चल रहा है तो हम उत्तर दें ये आवश्यक नहीं है अभी 10 चूर्ण चाटने वाले बच्चे बाहर से निकलेंगे और कुछ ना कुछ कहते हुए चले जाए तो हम सबके ऊपर वीडियो बनाए क्या हमें जब आवश्यक लगेगा तो हम वीडियो बनाएंगे करपात्री अब तेरे विरोध में तेरा पता नहीं तेरा समर्थन करते हुए एक व्यक्ति है वो लड़का कौन है
01:05:57:18 धर्मादीपम वाला हम तेरा समर्थन करते हुए उसने हमारे डायरेक्टली हमारे विरोध में बहुत वीडियो बनाए हमने तो उसके विरोध में वीडियो नहीं बनाए। फिर तो क्यों नहीं बनाए? क्योंकि हमें चयन करना पड़ता है कि किसको प्राथमिकता देनी है, किसको नहीं देनी है और यह स्वतंत्र रूप से हमारा निर्णय है। या फिर इसमें कोई हस्तक्षेप कर सकता है तो वो कर सकता है जिनके जिनकी अधीनता हमने स्वीकार कर रखी है। जिनके हम अनुगत है वो इसमें हस्तक्षेप कर सकता है। हमारे निर्णयों में तू दिखा सनातन सिद्धांत कि तूने 10 लोगों को क्यों छोड़ा? और जब तूने भी 10 लोगों को छोड़ा तो हमसे क्यों चाहता है कि जिसका विरोध तेरे से चल रहा है उसका विरोध हम भी वैसे ही करें जैसे तू कर रहा है। सा द्वीपीय वाले मामले में जब पूरी के शंकराचार्य जी का वक्तव्य आया तो क्या हमने उसको अपने वीडियो अपने चैनल से निर्गत नहीं किया
01:06:54:07 गोपाल आज अगर मैं स्वामी को शुक्राचार्य की पत्र या आप सारे लोग आपको धर्म घोषित करने आ जाएंगे तो अगर आप तुम प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से उनके विरोध में बहुत सी बातें कह चुके हो और हमने तुम्हारा विरोध जो यथोचित हो सकता है वह किया भी है। हां मैं तुम्हारी तुम्हारी तरह नीचता करने की आदत नहीं है कि स्त्रियों के ऊपर नीचे की बात करें। अंतर वस्त्रों की बात करें। ठीक है? वो आदत नहीं है। फिर हम फिर अपना दूसरा इंतजाम करते हैं कि ठीक है अब मर्यादा को लांग ही रहा है। मान ही नहीं रहा है। तो ठीक है भाई दूसरे तरीके से कार्य करते हैं।
01:07:30:26 ऐसा है ये लोग आपको अपना पिता मानकर प्रणाम करेंगे। आप विरोध नहीं जाने पर क्यों लगाते स्वामी इसको जाना था? ये कार्य तू करता है। इसलिए तुझे औरों से उम्मीद रहती है कि पिता मानकर कौन कार्य करेगा कौन नहीं करेगा? किस स्थिति में करेगा? क्योंकि तूने किया है लोगों को अपना पिता बना बना करके चापलूसी कर करके पत्ते चाटी करके तूने अपना ये जो जो भी थोड़ा बहुत जो धार्मिक दुनिया का जो अंदर का बिना किसी से सामना किए हुए जो कैरी मिनाटी तू बना है वो तूने पिता बना बना करके किया होगा इसीलिए तू हमारे लिए ऐसी भविष्यवाणिया कर रहा है
01:08:04:02 आने वाले करने के लिए ये सिद्धांत नहीं देखने का फूफा मानते है ये लोग रंजना ने बहुत सहायता की है किसकी शिवम देख रहे हो सीनियर पीएम मिश्रा ने बहुत सहायता की किसकी और देख रहे हो अब देखो धूर्तता क्या है ये व्यक्ति जब जाएगा कोर्ट तो क्या दिखाएगा कि भाई मैंने जो है शाक द्वीपीय ब्राह्मणों के लिए वहां केस लगाया ठीक है ये नहीं दिखाया लगाया कि मैंने अपना केस लगाया किसका केस लगाया शाक द्वीपीय ब्राह्मण की प्रतिष्ठा के लिए जो कि जितने लोग इस मैटर से जुड़े हुए हैं सबको मालूम है अपनी लड़ाई लड़ रहा है। इसने अगर अपेक्षा की कि सब लोग बोले तो इसलिए की कि मेरा पआ हाई हो जाए जबकि पीएन मिश्र के टाक रूपीय ब्राह्मणों को ब्राह्मण ना मानने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर कोई व्यक्ति वर्णाश्रमी नहीं है तो वह उनको मानता है उनकी बात मानेगा जिन संस्थाओं से आर्य समाज इस इत्यादि से वो जुड़ा हुआ है और यदि कोई व्यक्ति वर्णाश्रमी है गुरु निष्ठ है परंपरा निष्ठ है तो वो उन गुरुओं को जाकर के सुनेगा जिनसे पीएन मिश्र भी जुड़े हुए हैं और जब वो वहां जाकर के सुनेगा तो उनकी वो
01:09:19:03 चीज क्लियर हो जाएगी शाकपियों के विषय में जो भी बात मगर इसका एक अपना एक वर्चस्व की दुनिया दुनिया कि भैया मेरे से सीधा-सीधा सामना है पीएन मिश्र का तो अब मैं क्या करूं अपने पक्ष में क्योंकि पीएन मिश्र ने यहां पर ऐसी कोई बात बोली है जो अशास्त्रीय है और अब मैं जो है पीएन मिश्र जिन जिन लोगों से जुड़ा हुआ है उन्हीं से बुलवा दूं कि वो अशास्त्रीय है और सब लोग ये चूर्ण चटनी की लड़ाई में अपना कामधाम सारा छोड़ के आ के इनको जीत दिलाए भाई फिर ये मूछे ताने देखा शंकराचार्य ने बोल दिया तेरे पक्ष में ये ये चाहता है अब दूसरी बात आती है कहता है कि रंजना जी किसकी लड़ाई लड़ रही है? शिवश की। तो घोर निर्लज्ज व्यक्ति शिवश का कौन सा केस लड़ रही है? रंजना अग्निहोत्री जी कोर्ट में वर्तमान में तो रामपाल के विरुद्ध शिवांश का केस लड़ रही है। वो मेरा अकेले का केस है। यही है दूरता। ये ये है तेरी सिद्धांत निष्ठता कि मेरी मेरा विरोध करने के चक्कर में मेरा जो रामपाल के विरोध में जो केस लड़ रही है रजनागिनीत्री जी उसको लेकर के तू कह रहा है कि वो मेरा केस लड़ रही है।
01:10:34:12 धर्म का केस नहीं लड़ रही है। मां दुर्गा का केस नहीं लड़ रही है। सनातन धर्म ग्रंथों का केस नहीं लड़ रही है। वो वो किसका केस लड़ रही है? शिवश। और अगर कोई व्यक्ति अपमान कर रहा है किसी आचार पीठ पर बैठने वाले व्यक्ति का या गलत तरीके से अमर्यादित रूप से कार्य कर रहा है विरोध है मर्यादा गुलाम करके कर रहा है तो इसमें वो धर्म के पक्ष से नहीं खड़े हो रहे हैं पीएन मिश्र राम मंदिर का केस पीएन मिश्र धर्म के लिए नहीं लड़ने जा रहे हैं। स्वरूपानंद जी के लिए लड़ने जा रहे हैं। कितना नीच व्यक्ति है ये। देख रहे उसकी नीचता कौन सा ऐसा वर्णाश्रमी हिंदू होगा जो रामपाल के विरुद्ध जो हमने जो लड़ाई लड़ी है उसको कह देगा कि वो हमारी व्यक्तिगत लड़ाई है। उन कुछ नीचों में से नीच यही नीच जो भाई और बहन के ऊपर कहता है कि इनमें अनैतिक संबंध है।
01:11:33:08 उसके लीजिए इतने दुबे हुए हैं कि अपने गुरु की निंदा सुना स्वीकार है। अपने परम गुरु की निंदा सुनना स्वीकार है। अबे बेवकूफ व्यक्ति अपने गुरु की निंदा स्वीकार तब है जब हमारे पास तुझसे बड़े-बड़े और 30 मार खान बैठे हुए हैं। तू कुछ नहीं है। नगण्य व्यक्ति है। इसलिए तेरे मुख से भी गुरु की निंदा सुनकर के शांत थे। नहीं बनाया था उस दिन वीडियो जिस दिन सुना था चारों शंकराचार्य चार करोड़ नहीं बनाया था उस दिन वीडियो जिस दिन सुना था कि शंकराचार्य जो है वो मैं पहले उनहीं के मठ में रहता था। फिर जो है शंकराचार्य की ओर से मैं ही उत्तर देता था। लोगों को पता नहीं होता था। मैं मैं शंकराचार्य जी की ओर से उत्तर दे रहा हूं। जब ये सब धूर्तता पूर्ण तूने निर्गत किए थे ना उस समय नहीं बोला था। तो हां गुरु की निंदा भी हम सुन रहे हैं। मगर समष्टि के लिए अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए नहीं। अन्यथा हर एक व्यक्ति एक लाख मुख से गुरु की निंदा हो रही है। एक लाख मुख का खंडन करने के लिए व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से हम सामर्थवान नहीं है। तू अवश्य होगा क्योंकि तेरे पास कालिया जिन और परी की ताकत है। कालिया जिन दिन में देता होगा ताकत और परी परी साधना से रात को ताकत मिलती होगी तुझे।
01:12:48:24 मानना स्वीकार है। किंतु ये उन एहसासान्ताओं के उपकर्ताओं के विरुद्ध जाने का साहस नहीं रख सकते। इतना खोखला व्यक्तित्व लोगों को ये शंकराचार्य जी उनके भी शब्दों के अनुसार उनके अनुय के शब्दों में और पूरी शंकराचार्य जी के उन वकीलों ने जो पीएन मिश्र का खंडन करेंगे अवक्तेश्वर आनंद जी का पक्ष कौन रखा है पीएन मिश्र और पीएन मिश्र के खिलाफ पूरी के वकील वहां लगे हैं कि नहीं लगे हैं और पूरी शंकराचार्य जी के उन वकीलों ने जो पीएन मिश्र का खंडन करेंगे अंतेश्वरंद सरस्वती का प्रकरण पीएन मिश्र की जूनियर रंजना अग्निपुत्री क्या शिवांश के साथ मिलकर ये कार्य नहीं कर रही है कर रही है सबका आपस बन रहा है विश्व हिंदू एकता क्या चाहिए तुमको तो तूने क्यों अजीत भारती का नाम लिया था? मैं उनके उनका अभिनंदन करता हूं। मान के चल कि पहली बात तो ये सिद्ध करके पूरी के शंकराचार्य जी के वकील लगे हुए हैं। अब मुक्तेश्वर जी के खंडन में अगर इस तरीके से वकीलों का उपयोग करना होता ना तो अब तक तुझे जूतों से मार मार कर भगाया जा रहा होता। जो तूने न्यायाधीशों के लिए बताया था ना अपने एक वीडियो में कहा था ना कि जूतों से मार मार करके अपान से लेकर मुख तक मुखल तक लाल हो जाएगा। ऐसी मार पड़ती तेरी। भगा भगा कर जूतों से तूने अपने एक वीडियो में बोला है ना न्यायाधीशों के लिए न्यायपालिका के लिए कि अपान से लेकर ऐसा न्यायाधीशों को ऐसा भगा
01:14:03:27 भगा के जनता मारेगी कि अपान से लेकर मुखमंडल तक लाल हो जाएगा वही हाल होता तेरा अगर पूरी के शंकराचार्य जी वकीलों का उपयोग कर रहे होते पहले तो सिद्ध कर दूसरी बात अगर कर भी रहे हैं तो इसलिए क्योंकि वहां पर दो पक्ष हैं जो आपस में एक दूसरे के विरोध में इसलिए माता को गाली देने वाली बात आ जाए किसी एक पक्ष के व्यक्ति के सामने और उसमें लड़ने वाला व्यक्ति इधर का हो तो इसलिए वो ना लड़े। अरे भैया तू पहले सिद्धांत तय तो कर ले। अधर्मी की सबसे बड़ी पहचान यही होती है। उसका कोई सिद्धांत ही नहीं होता है। अपना सिद्धांत तय कर ले। पहले तो खुद भी कहेगा कि हालांकि तू व्यक्ति विरोधी है। तू व्यक्ति निष्ठ है। मगर कम से कम कहता तो है ना यह बात कि भैया मैं व्यक्ति का विरोध नहीं करता हूं। उसके द्वारा अमुक कार्य का विरोध करता हूं। तो जब तू ऐसा मान रहा है, जब तू ऐसी शिक्षा दे रहा है, तो किसी एक कार्य में विरोधी होने के बावजूद भी किसी अच्छे कार्य में जब कोई व्यक्ति सहयोगी हो रहा है तो उस पर प्रश्न क्यों उठा रहा है तू? नीच व्यक्ति
01:15:09:20 और क्यों उठा रहा है? क्योंकि तुझे ये सब अपशब्दों से भरी हुई जब तेरी जो चीजें हैं उस पर कोई अंकुश जिसने लगा दिया जिसने तेरा निग्रह कर दिया तो तेरे अंदर का ये ईगो हर्ट हो गया जयकांत सिगरेट तमाशा धर्म का नाम है गांधी देवता लेकिन बी आर ग्रुप कुछ नहीं बोल पाए पूरी ना पूरी बोल पाए और छोड़ो जी ने लिखा भी विरोध में तो उनके वकील कुछ नहीं कर पाए ब्रह्म हम जैसे कोर्ट के अधिवक्ता हो आप कुछ नहीं बोल देखने को मिल रही है प्रकरणों में सबसे अधिक प्रभाव एक नास्तिक जल का और उस नास्तिक जल के विरुद्ध टकराने का साहस एक ऐसा सामान्य हिंदू रखता है जिसको भले धर्म का ज्ञान नहीं हो लेकिन धर्म के गौरव का अनुभव करता है देख रहे हो ये टकरा रहे हैं नास्तिक जज से और वो भाई वो पूरी वो संरचना हिल गई है इनके वक्तव्य से
01:16:04:24 तत्व के विषय में शास्त्री बोल सकता हो लेकिन हमारे आराध्य तो रामभद्राचार्य के रचना भी इसी बिंदु देखने को मिलती है तो रामभद्राचार्य के वो चीजें रजना क्यों नहीं गई थी बिहार के विरुद्ध या पीएम मिस्टर क्यों नहीं गए विरुद्ध या ये जो ये सब जो है पूरी पीठ के जो है अधिवक्ता गए ये सब द्विवेदी और पांडे जी ये सब क्यों नहीं गए वहां पर सुप्रीम कोर्ट के विरुद्ध क्यों क्योंकि पूरी पीठ की ओर से अरे तू बेवकूफ व्यक्ति है क्या अगर कोई व्यक्ति एक अगर कोई टिकट काटने टिकट चेक करने वाला किसी एक को नहीं पकड़ पा रहा है तो जिसको पकड़ा है वो भी ना पकड़े ये क्या बेवकूफ है क्या तू फिर वो तेरा कहां गया मतानुज्ञान एक स्थान अगर गवाही का विरोध नहीं किया इसलिए तेरा विरोध ना किया जाए तेरा विरोध किया है तो सबका विरोध होना चाहिए एट ए टाइम सेम टाइम तू कर रहा है क्या सेम टाइम सबका विरोध कितने वीडियोस पड़े हैं साइंस जर्नी का विरोध कितनी बार किया तूने बता
01:17:06:12 खुद व्यक्ति निष्ठ है खुद जो है सिद्धांत निष्ठ नहीं और दूसरा सिद्धांत निष्ट है तो उसको व्यक्ति निष् सिद्ध कर रहा है। एक साथ सबके खिलाफ मोर्चा खोल दे क्या एक व्यक्ति क्या पागल व्यक्ति से है सामना हुआ है पगला कहीं का और इसके वो समर्थक भी पगले की सरस्वती के खिलाफ उसने भी हम सारा कंट्रोल तो गाली भगवान सुन रहे हैं गाली का स्वामी सुन रहे हैं अपनी गलती तो बच रही है हमारी अपने शत्रु को नीचा दिखा रहे हैं इतनी नीच और इतनी तुच्छ मानसिकता से युक्त होता धर्म का देख रहे हो नीच और तुच्छ मानसिकता हम तेरे ऊपर नहीं बोल सकते दुर्गा माता के साथ बलात्कार वो जो है बेशर्म पूजा हिंदुओं की खोल के दिखाऊं तुझे रामपाल के वक्तव्य तू क्यों नहीं कर रहा जाकर के विरोध हमने तो किया है तू नहीं कर रहा है तो तेरे ऊपर दोष हो गया क्योंकि तूने गवई का विरोध किया हमने नहीं किया इसलिए हमारे ऊपर हम दोष युक्त हो गए क्या बेवकूफ व्यक्ति है क्या तू कोई तर्क है तेरी बातों का
01:18:12:21 और विरोध नहीं किया ये पहले सिद्ध कर कैसे नहीं किया क्या अच्छा और किस किस ने विरोध नहीं किया बहुत लोगों ने नहीं किया तो सब लोग क्या अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए विरोध करते हैं उसकी आवश्यकता उसकी उपयोगिता उसका प्रभाव भी तो देखना है तेरी तरह थोड़ी ना है हमें तो वीडियो बनाना है वीडियो जिंदाबाद हो गया विरोध भाड़ में जाए प्रभाव होना है कि नहीं होना है आउटपुट कुछ निकलना है कि नहीं निकलना है तेरी तरह कार्य करें तो सही माना जाए। हां तो यह बताओ कब आए उंगली ना उठाए तो इस स्थिति में इस प्रकार की मानसिकता से आप सत्य का साथ कैसे दे पाएंगे? और जब रंजना की शक्ति है कि पूरे विश्व में सत्य बोलने का साहसानंद सरस्वती जी का जैसा कि Facebook पर रंजना ने लिखा था तो यह बताओ कि जिस मामले में स्वामी जी को नोटिस मिली है जब से उस मामले में उन्होंने सत्य बोलने का साहस किया था या तिरस्कार दुर्भावना और असत्य बोला रामद्राचार्य का पक्ष सही माना जाएगा कि उनका पक्ष सही माना जाएगा कोई कहीं के तो अच्छा
01:19:10:16 रामभद्राचार्य जी ने नोटिस भेजा कि नहीं भेजा इस बात से अगर रंजना अग्निहोत्री जी किसी अमुक विषय में अब मुक्तेश्वर जी के लिए बात कह रही हैं कि भैया पूरे विश्व में सत्य बोलने का जो सामर्थ्य है वो उनको प्राप्त है तो वो बात गलत हो गई क्योंकि रामभद्राचार्य जी ने नोटिस भेजा है तुम्हारी जानकारी में अब मुक्तेश्वर जी को और मुक्तेश्वर जी क्या गलत बोल रहे हैं उसमें रामभद्राचार्य जी की ओर से नोटिस अगर मिला है तो क्या गलत बोल रहे हैं भैया रामभद्राचार्य जी का नाम लेकर के किसी ने नोटिस भेजा है तो भेजा है और क्या बोले इसमें इसमें कौन सी झूठ बात हो गई जिसका कि विरोध करना है रामभद्राचार्य जी का या फिर मुक्तेश्वर जी का हां इतना अवश्य है कि रामभद्राचार्य जी से इस इस बात की स्पष्टता लेनी है स्पष्टीकरण लेना है कि उन्होंने भिजवाया कि नहीं भिजवाया अभी तक तो मेरे जानकारी में ऐसी कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है कि भिजवाया है और जब तक रामभद्राचार्य जी का लीगल रूप से बयान स्टेटमेंट उस नोटिस भेजने वाले को नहीं मिलेगा तब तक वो क्या कर कोर्ट में अगर पहुंचेगा भी पहुंच गया तो पहुंच जाए तो बड़ी बात है तो क्या तेरे सवाल होते हैं
01:20:26:09 कि राघवाचार्य जी को फोन करके क्यों नहीं पूछा क्यों पूछू भाई जब मैं इस बात को मान रहा हूं कि उन्हें कोई पत्र मिला है हां नोटिस मिला है उनको नोटिस के नाम से एक पत्र मिला है तो मैं उनको क्या करने के लिए पूछू अब पूछा कि नहीं पूछा कैसे सिद्ध हुआ और अब बात यही आ जाती है क्या वैष्णव संप्रदाय वाले कॉल संप्रदाय को प्रामाणिक मानते हैं। राघवाचार्य जी का वीडियो है। कौन संप्रदाय को आप प्रामाणिक बता रहे हैं। तो पहले तुम भी तो डिसाइड कर लो। अब तुम तो शिष्य के रूप में देखते हो राघवाचार्य जी महाराज को। इतने वरिष्ठ जो हमारे आचार्य हैं उन्हें तो तू भैया उनसे डिसाइड कर ले कि तेरा कॉल संप्रदाय प्रामाणिक है कि नहीं? तू क्यों नहीं डिसाइड कर लेता?
01:21:14:00 शब्द होता है लजा। कहीं तो लिखो लिखो उसे अब अपने लिए अच्छी बात बोल रहा है। लज्जा शील शील हां कहीं तो टिक जा अपनी कही हुई बात पर हर तर्क का हर बात का तेरी का खंडन तुझसे ही होता है। कहीं और जाने की आवश्यकता ही नहीं है। व्यक्ति को हम शुक्राचार कर इसके चक्कर में नास्तिक जजों की चापलूसी चल रही है। अमृत व्यक्ति को हम नीचा हे भगवान अब इसकी बोली कहां तक चली जाती है? नास्तिक जजों की चापलूसी हो गई। अगर कोई व्यक्ति किसी मामले में इसके अनुसार नहीं बोला तो चापलूस हो गया। कहां सनातन सिद्धांत है इसमें कि गवाही के मामले गवाही जैसे मामले में अगर कोई व्यक्ति नहीं बोला है तो उसका चापलूस है। अगर वो अपना और कोई रण संभाल रहा है तो वो जिसका जिसका सामना नहीं कर रहा तो चापलूस है। अगर राम जी अगर रावण को मार रहे हैं और लक्ष्मण जी अगर मेघनाथ को मार रहे हैं तो वहां पर वो मेघनाथ को मारने वाले तो हैं बल्कि मेघनाथ को भी नहीं मार रहे हैं। वो तो सीता माता का युद्ध लड़ रहे हैं। अपने भाई का युद्ध लड़ रहे हैं। वहां पर जो है धर्म का युद्ध नहीं लड़ रहे हैं और तो और वो उसी समय रावण के चापलूस सिद्ध हो जाएंगे क्योंकि वो रावण को नहीं मार रहे हैं। रावण
01:22:29:10 वाले मामले में वो शांत है। क्या बेवकूफ घटिया व्यक्ति है एक। पता नहीं इसके घर वाले कैसे झेलते होंगे इसको। कोई तर्क ना बार-ब मुंह चलाना है। सूखा हुआ खा लिया जिनका मुंह है उसको चलाते रहना है। चक्कर में अपने वकील और पत्रकार का व्यक्ति जो है हमको तकलीफ नहीं देगा। इस चक्कर में अपने ही गुरु इससे अधिक सम्मानित नहीं तो होता है। उन्हें अधिक गौरव होता है। ये क्या है लोगों का भाई? हिंदू एकता का नाम लेते हो बना दिया का सम्मान कर रहा है और सम्मानित करने के लिए जाता है उस श्रद्धा के कारण कर रहा है क्या प्लानिंग के कारण कर रहा है सुप्रीम कोर्ट का संरक्षण पाकर मुख्य अतिथि बन कर आएगा और नहीं होगा तो घर वापसी के नाम पर हिंदू बनकर तुम्हारे यहां नहीं आएगी हिंदुओं को एक मुसलमान शाही ने बहुत पैसा बटवा हिंदुओं से क्या हुआ कल वापस इस्लाम अपना लिया उसने जिंदा पकड़ के नाचते रहो तुम अरे भैया अपने मौलिक परंपरा को ना कि यार तुम लोग को अलग से सुख प्राप्त हो जाता है जैसे अरे ये मुसलमान ने प्रशंसा कर दी इस ईसाई ने प्रशंसा कर दी उस फ्रांसीसी ने कर दी उस अमेरिका ने कर दी उस ब्रिटिश ने कर दी उस जर्मन ने कर दी यहां पर वापसी के नाम पर गुप्तचारी भी करेगा और उसकी मूर्खता पूर्ण अनुमति तुमने ही दी है जिनको तुम हिंदू चेतना और पुनर्जागरण बता रहे हो। अभी एक कोई व्यक्ति था ना वो प्राण गोपाचार्य का लड़का क्या नाम है उसका संजय सलीम वाले मन में जाकर क्या कहा था भगवान कृष्ण जी रोड़ के लड़की बुला रहे उसको शब्दावली देख रहे हो उसकी और अगर इसको तो कहीं हिंदू एकता तोड़ रहे हो तो देखता
01:23:44:12 है तुम्हारी ऐसीता को हां ये तूने अच्छी बात कही ये तूने अच्छी बात कही विद्या भास्कर जी महाराज का तूने जो है क्या कहा था इस व्यक्ति ने पूरी पीठ के जो परिकर हैं उनकी मां समान माता के समान जो मातृ शक्तियां थी। यह बैठे हुए थे पूरी पीठ जो उनके निजी सचिव हैं पूरी पीठ के शंकराचार्य के ये बैठे हुए थे और वो इन इन पर इनके साथ होली खेल रही है। ये कुछ नहीं कर रहे बैठे हुए हैं। वो जो है इनको रंग गुलाल जो भी है लगा रहे हैं। और यह वीडियो दो-ती साल पहले का और ये व्यक्ति बार-बार अपने वीडियोस में बोला कि सन्यासी होते हुए कैसे होली खेल ली? कैसे स्पर्श हो गया? रगड़ रगड़ के अंग मर्दन करके होली खेली जा रही है। अब अभी दो तीन दिन पूर्व मैंने पूज्य विद्या भास्कर जी महाराज का वीडियो देखा जिसमें कि कोई मात शक्ति है वो उन्हें माला पहना रही है और इसमें उसमें स्पर्श भी हो रहा है विद्या भास्कर जी महाराज को। अब इसकी भाषा में अगर यह व्यक्ति अगर विद्या भास्कर जी महाराज का प्रश्र इसको प्राप्त नहीं होता तो ये कैसे बोलता ना पता है ना आप लोगों को ये दोगला व्यक्ति कैसे बोलता कि अंग मर्दन करके रगड़ रगड़ के मालाएं पहनाई
01:24:59:20 जा रही है किसी भी बात को बोलने का बस तरीका है शैली बदल दो अंग मर्दन कर करके मालाएं पहनाई जा रही है और इसने क्या बात कही एक व्यक्ति है जो कृष्ण भगवान जो है कृष्ण भगवान के लिए जो है ऐसा बोला जीवी रोड पे ये करो वो करो हां गलत बोला बिल्कुल गलत बोला और तुम मर्यादा में रह के उसका खंडन करो अगर कोई और मर्यादा का मर्यादा को लांग कर कार्य कर रहा है तो इससे तुम्हें मर्यादा को लांगने का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता यही है धर्म यही है सनातन मुसलमानों से कहा जाता है कि भैया तुमको स्त्रियों को किडनैप करने की बात की गई है तुम्हारे यहां तो मुसलमानों से कहा जाता है मुसलमान जवाब देते हैं भैया जंग है जंग में जब तुम्हारे यहां तुम्हारे यहां की स्त्रियों को वो लोग ले जाते तो हम ना ले जाए तो उनके यहां पर कानून किस हिसाब से बनता है? संविधान स्थितियों के हिसाब से हमारे यहां पर राम नहीं सिखाते कि तुम जब रावण से जीत जाना तो वहां की स्त्रियों को ले आना। कब्जा कर लेना उस पर। ठीक है? ये राम नहीं सिखाते। विद्या भास्कर जी महाराज के एक शिष्य हैं। मैं नाम नहीं लूंगा। अजीब तरह की आकृतियां, कलाकृतियां बनाते हुए स्टेज पर आते हैं। स्टेज पर बैठकर के फिल्मी धुन बजा बजा के कथा करते हैं। कथा में
01:26:15:10 इस तरह से रोते भी हैं। स्त्रियों वाला रोल भी निभाते हैं। चूड़ियां वगैरह भी पहन दिखाते हैं कि तोड़ रहे हैं। सब करते हैं। और इसका जो है ऐसे आचार्यों ने मर्यादा में रह के जो है अपने अनुसार प्रतिकार भी किया उनका। उस व्यक्ति को हमने भी फोन किया क्योंकि उनसे उनके परिों से वहां जो उनके साथ वाले थे उनसे बात हुई तो उन्होंने बताया कि क्या अ क्यों कर रहे हैं हम ऐसा हमने सवाल किया उससे फोन करके तो उन्होंने बोला कि भाई उनको जो है अमुक अमुक जो कला है उसमें जो है सर्टिफिकेट मिला है राष्ट्रीय स्तर का तो मैंने कहा कि कला तो ये निशानेबाजी भी होती है अगर आपको सर्टिफिकेट मिला है किसी चीज में बहुत पारंगत है योग्यता है तो ऐसा थोड़ी ना है कि बिना सोचे समझे उस योग्यता का उपयोग कहीं भी करने लगे क्या आप अगर बहुत अच्छे निशानेबाज होंगे तो क्या आप वहां भागवत में बैठकर के गोलियां चलाने लगेंगे क्या तो अगर आप अमुक अमुक कला में बहुत अच्छे पारंगत है तो इसका अर्थ ये थोड़ी ना कि भागवत के मंच पर आओगे तो वो सब करोगे पहली बात फिर उन्होंने कहा कि विद्या भास्कर जी महाराज का भी फोन आया था कहा
01:27:30:14 था कि आगे से ना करना तो उन्होंने आश्वासन दिया कि आगे ऐसे नहीं करेंगे। मैंने कहा मैंने भी इसीलिए फोन किया है कि आप ना करें ऐसा। इससे हमारी बात हमारे जो कथा का मंच है उसका अपमान होता है और इस बात का फायदा विरोधी तत्व भी उठाते हैं और वो फिर उपहास उड़ाते हैं इन सब चीजों का। मैंने इस व्यक्ति ने उस पर वीडियो क्यों नहीं बनाया? पर नहीं जिनसे इसको प्रश्रय प्राप्त है उनके लिए कैसे बात करेगा कि संभवत वो इसलिए मौन रहे होंगे। उनको ऐसा करना चाहिए था। पूर्ण बहिष्कार होना चाहिए था मुरारी का। जिनसे प्रश्र प्राप्त है उसके लिए इसकी शैली रहेगी और जो विरोधी है जिनसे इसको प्रशय प्राप्त नहीं है उनहीं विषयों में जिन विषयों में इसने बहुत ही आदर पूर्वक और मर्यादा पूर्वक बात की है उनहीं विषयों में दूसरों के लिए लथोर तू तड़ाक आत्म मुग्ध मुझे लज्जा आती है कि मैं ऐसे व्यक्ति के मैंने कभी अपना समय व्यर्थ किया ऐसे व्यक्ति के लिए इस तरह की भाषा उपयोग करेगा के चार दे के चारों शंकराचार्य को बुला लो या फिर वह जो है ढेर सारी वैश्याएं मिल रही है पूरी के शंकराचार्य जी से पूरी के शंकराचार्य जी के मठ में वैश्याओं का आना जाना है। वैश्या भक्ति हो रही है। ये सब नीचता नीच हरकतों पर उतर
01:28:45:20 आएगा। हम विद्या भास्कर जी महाराज अभी कुछ ही दिनों पहले अभी अभी की बात है आदित्यनाथ योगी जी के साथ मंच साझा उन्होंने किया है और जब मंच साझा किया है तो जाहिर सी बात है वहां पर उन्होंने उनका एक दूसरे के साथ जो सामंजस्यपूर्ण व्यवहार होता है वो भी किया हम इस बात को समझते हैं कि हां भैया ये उनकी मर्यादा उनके अधिकार क्षेत्र में आता है कि वो मंच पर साझा हो रहे हैं पर तेरे हिसाब से तो भाजपा के जो समर्थक हैं वो तूने गुप्तांग अपना गुप्तांग का नाम दिया था ना भाजपा के समर्थकों को तो तेरे अनुसार तो विद्या भास्कर जी महाराज पर भी वही बात लागू हो रही तो तू कब वीडियो बनाएगा इस विषय में कि विद्या भास्कर जी महाराज आदित्यनाथ योगी जी के साथ क्या कर रहे हैं यह है दोगलापन यह व्यक्ति विद्या भास्कर जी महाराज के बारे में कब बोलने वाला है अंग मर्दन कर करके रगड़ रगड़ करके जो है वह माला पहनाई जा रही कब बोले हमारे अनुसार तो भैया यदि आप किसी में देवी स्वरूप होती है माता बहन ये सब देवी स्वरूप होती है और जो ये मर्यादा लागू है शास्त्रों के अनुसार वो उन स्त्रियों के लिए
01:30:00:24 लागू है जिनको हम भोग की दृष्टि से देख सकते हैं। खैर कुल मिलाकर के इसने पूरी पीठ के उस वीडियो के रिगार्डिंग बहुत प्रलाप किया। तो विद्या भास्कर जी महाराज के लिए कब करने वाला है? उनके शिष्य के लिए कब करने वाला है? या फिर उनहीं के विरोध में करता है या उसी उसी ओर इसकी निगाह जाती है जहां से इसको प्रश्रय प्राप्त नहीं होता। जहां ये मंचस्थ नहीं होता है। जिनके साथ जो इसकी हुकूमत को स्वीकार करने से मना कर देते हैं। जो इसके ढोंग को स्वीकार करने से मना कर देते हैं। अथवा जो मौन रह जाते हैं अथवा जो दूर रह जाते हैं। ये क्या उनहीं का ये निग्रह करने के लिए इसने जन्म लिया है। दूसरों की जो कठोर वाणी है वह तेरे लिए गाली है और तेरी जो गाली है वह अन्यों के लिए कठोर वाणी है। क्या बात है। बहुत बढ़िया।
01:30:58:12 बताओ कितना बना? मंदिर के बारे में बोल नहीं सकता। बहुत ज्यादा चिंता होता है। कभी गिर जाए कभी लोग बात कहते भी है कि बाबा इसमें मत रहो। मत भरो। ऐसे टीका माफी वाले ने क्या करवा दिया मुसलमान लड़के को एक घंटा बुलाकर हिंदू से विवाह करवा दिया उसके नहीं लेकिन अगर सोचना चाहिए तो फिर इस मामले एक बात और है ये जीबी रोड में कह दिया और ये मुसलमान से विवाह करा दिया ये सब इस तरह से क्यों प्रस्तुत कर रहा है भैया कि इन सब चीजों को हमसे प्रश्र प्राप्त है शंकराचार्य से प्रशय प्राप्त है क्यों कर रहा है हम भी तो ऐसी चीजों का विरोध करते हैं क्यों कर रहा है ये सब प्रस्तुतीकरण है किस चीज का उपयोग कैसे किया जाए। प्रस्तुतीकरण है। चलो कोई तार्किक बात होगी कुछ तर्क तर्क से जिसका उत्तर देना आवश्यक होगा उस पर बात करेंगे।
01:31:51:15 लेकिन ऐसा भी वो आपस में नहीं लड़ना चाहिए। सही बात है। संत है कि नहीं ये तो देखो तीन चैतन्य भी तो संत ही थन और करोली सकार पिट जाता है तो ज्योतिष पीठ के मुंह पर बैठकर आज कुर बना घूम रहा है। और पूर्ण तीन चैतन्य भी तो संत ही था। और सरकार संत ही बना घूम रहा है। संत पूर्ण बना घूम रहा है। और पूर्ण जब पूरी बन जाता है तो पूरी माला बनाते हैं। अब देखो ये क्या कह रहा है? देखो पॉइंट टू बी नोटेड क्या कह रहा है कि वो भी तो संत ही था ना मतलब इससे जब ये कहा जा रहा है तुम संतों की निंदा करते हो। यानी कि पूरी के शंकराचार्य जी की निंदा करता है या जितने भी आचार्य उनकी निंदा करता है जब ये तो और ये ये भी कहता है जो राजेंद्र दास जी का कोई शिष्य है जो हमारे पास फोन करता है तो हम उसको ये नहीं बताते कि उसका गुरु अप्रामाणिक है। ठीक है? अब ध्यान दीजिए इसकी बात पर। इसको जब यह कहा जा रहा है कि संतों की निंदा करता है तो उसमें उत्तर क्या दे रहा है कि भैया जो चैतन्यनंद जो सरस्वती जो पकड़ा गया है जिस पर जो है बहुत शोषण और शारीरिक शोषण इत्यादि के आरोप इस समय चल रहे हैं। प्रासंगिक है मामला। उनका उदाहरण देते हुए कह रहा है कि वो भी तो संत ही थे ना। इसका मतलब जिनके लिए जिन संतों के लिए इससे कहा जा रहा है कि तुम संतों की निंदा करते हो उन संतों की तुलना किससे कर रहा है? उन्रामाणिक लोगों से जिन्होंने अश्लील चारित्रिक चीजें बहुत
01:33:06:21 सारी की है। गलत कार्य किए उनसे तुलना कर रहा है। फिर क्या कहता है कि मैं जो है पूरी के शंकराचार्य जी को प्रामाणिक मानता हूं। कितना बड़ा दोगला है तू। ज्योति पीठ के मुंह पर बैठकर शंकराचार्य के प्रति रूप में जो शंकराचार्य बैठे हैं उस भाग से बैठे हुए जी के सामने भगवती राधा केश्वरी बातें कहता है और उसके बाद भी शंकराचार्य जी उसका विरोध नहीं उसका संपूर्ण नहीं है पूर्ण वो संतों करो हम संतों का सम्मान करो हम संतों के नित्य श्री वैष्ण हमने तो वैष्णव के चरणों को अपने मस्तक पर रखने की घोषणा की है लेकिन आप उस वैष्णव में दिखे तो इसने क्या कहा क्या मैं अपने आप को एक शुरू में कहा था मैंने कहा था आगे वैष्णव वैष्णव के लिए इसने बात कही सुन लीजिए अच्छी तरीके से सुना देता हूं
01:34:02:19 उस शास्त्री सिद्धांत के अंतर्गत श्री वैष्णवा कहते हैं कि निग्र आचार्य संतों की निंदा कर रहे हैं। निग्रचार संतों का सम्मान नहीं करते। हम संतों का उदाहरण देकर के यह उन संतों की निंदा को सही बताने का प्रयास कर रहा है। जिन संतों के लिए दावा करता है कि मैं उन्हें प्रामाणिक मानता हूं। समझ रहे हो? मतलब की कहने का मतलब यह है जिन संतों को तू प्रमाणिक मानता है। उनकी निंदा तू क्यों करता है? तो ये क्या कह रहा है? वो भी तो संत था। यानी कि जैसे वह संत प्रामाणिक नहीं है जिनको यह कह रहा है उसी तरीके से यह संत भी प्रामाणिक नहीं है जिनकी निंदा कर रहा है। हो गया ये है क्लेरिटी और अभी देखिए वो मैंने बात कही थी ना ये अपने आप को क्या एकमात्र गुरु बताता है जब ये किसी को मानता ही नहीं है। देखिए क्या कह संतो के नित्य श्री वैष्ण पदे कहकर हमने तो वैष्णवों के चरणों को अपने मस्तक पर रखने की घोषणा की है। लेकिन आप पहले उस वैष्णवता में दिखे तो उस लक्षण में इसको वैष्णवता के लक्षण में कोई दिखता ही नहीं है। नहीं दिखता है। बेवकूफों यह अपने आप को एकमात्र निग्रह करने वाला
01:35:17:25 सबके सबका निग्रह करने वाले के रूप में ख्यापित करने का प्रयास करने वाला सब में दोष दिखाने वाला अभियान के कारण धर्म रक्षा के कारण रणनीति का उपयोग करने के चलते उनकी ऐसी बातों का उपयोग करना जिनका उपयोग करते हुए उनमें दोष दृष्टि दिखा सकता उत्पन्न कर सकता है उनके लिए। ठीक है? देख लो मूर्खों जो सोचते हो कि वैष्णवाचार्य मानता है किसी को। पहले वैष्णव बनो तो इसके लिए कोई वैष्णव है ही नहीं। इसलिए इसके अनुसार कोई संत है ही नहीं। इसलिए सबकी निंदा कर सकता है क्योंकि कोई संत किस प्रकार से नहीं जिस प्रकार से चैतन्य सरस्वती नहीं है। तो इसका एक कितना दावा खोखला था कि मैं पूरी के में शिवश के गुरु को प्रमाणिक मानता हूं। इसकी तो बैंड बजेगी अभी। चलो खैर
01:36:17:22 तो शास्त्रीय सिद्धांत के अंतर्गत आपका चरित्र दिखे तो आपका व्यक्तित्व दृढ़ता उसके साथ में आ रहा दर्शन तो हो विचारों से अड्डे भर गए हैं मठों के वहां ध्यान नहीं पॉलिटिकल पैसा छाछ कर बुद्धि कुंठित हो गई है वहां ध्यान नहीं हम सहिष्णता नाम की कोई चीज नहीं और सहिष्णों तो सही मामले में यही लोग पहले खूब गाली दो कभी देवताओं को गाली दो कभी दूसरे संप्रदाय आचार्य को गाली दो फिर हम उस शास्त्रीय सिद्धांत की मर्यादा में तुम्हारा विरोध करने आए तो भागवत तुम्हारे यहां हो जाएगी तो बाहरी तत्व का विरोध करने के लिए अंदर हमको एक पांच होना पड़ेगा कौरव पांडव खड़ा है मतलब कहा जाए बाहरी है भगवान है और ये दोनों अपने अंदर के हैं तो बाहरी तत्व का विरोध करने के लिए अंदर हमको एक पांच होना पड़ेगा कौरव पांडव को कौरव कौन सा पांडव देव हट
01:37:00:14 अगर हम रामभद्राचार्य जी के साथ खड़े हो रहे हैं तो किस मामले में खड़े हो रहे हैं तुझे उस उस मामले में बाहर कहां कर दिया बेवकूफ घिना कहीं का नपुंसक कहता है ना हम लोगों को तू तो सुन तू गिना है किस स्थिति में तुझे बाहर का कह दिया बता केवल सुर्खियां बटोरनी है तुझे नीच कहीं का स्त्रियों का शरीर देखता है लज्जा नहीं आती ऊपर नीचे अंग वस्त्रों का नाम लेता है तेरे घर की स्त्रियों के बारे में बात करे ऐसे ही
01:37:37:20 तब तू कोर्ट पहुंच जाएगा मिल मे लॉर्ड वही में लॉर्ड जो नपुंसक है जो कायर है तेरे अनुसार ना व्यभचारी वैश्यागामी दुराचारी समलैंगिक मानसिक रोगी विक्षिप्त किस विषय में किस विषय में किसको भारी कह रहे हैं बेवकूफ तेरे तेरे ऊपर कोई बाहरी व्यक्ति जब आक्रमण करेगा तो मैं मैंने कहा ना कि मैं तेरे साथ खड़ाऊंगा। मैंने कब कह दिया कि तू बाहरी हो गया।
01:38:23:15 मतलब जो कहावत एज इट इज हम पर लागू हो रही है कि तेरे और मेरे बीच की बात है तो तू 100 में पांच। और कोई बाहर का आ जाएगा तो हम और तू मिलकर के 105 कहां गलत हो गई यह कहावत? रामभद्राचार्य से तेरी लड़ाई चल रही है कोई उसमें मैं रामभद्राचार्य जी के पास साथ में जाकर के खड़ा हुआ हूं तो कैसे कह दिया तूने कि जो है वो बाहरी है और हां तू मर्यादा को लांग करके रामभद्राचार्य जी के विरोध में जाएगा अगर उनसे जोड़ जोड़ करके स्त्रियों इत्यादि को लेकर के चारित्रिक वाले दोष लगाएगा जो कि मुझे दिखाई देंगे नहीं है तो खड़ा हऊंगा उनके साथ क्योंकि तूने तो मर्यादा मांगी होगी किस लड़ाई में रामभद्राचार्य के साथ हूं है जो पार्टीवादी लोगों से लड़ी जा रही है। बेधड़क खबर वाले ने जो चारित्रिक खंडन किया था ना परंपरा से ना वर्णाश्रमी है।
01:39:23:13 आधी रोटी पे डाल लेना बेवकूफ कहीं का। और पांडव जब वापस मार रहा था तो माता पिता को पता चलता है कि मेरी आने वाली बेटी या बेटा कुछ विकलांगता के साथ तो हम श्राचार्य शंकराचार्य को प्रामाणिक मानते नहीं हम मानते हो तुम भी नहीं मानते अगर बात प्रामाणिक मानने की तो तुम भी नहीं मानते शंकराचार्य के सन्यासत्व पर तुम प्रहार करते हो क्योंकि तुम उन्हें झूठा द्वेषी लोभी आसक्त बनाते बताते हो तो उनका उनकी जो विरक्तता है तुम्हारे अनुसार विरक्तता नहीं है आचारत में दोष उठाते हो क्योंकि उनके कई आचरण ऐसे हैं जो शास्त्र सम्मत नहीं है तो आचरण भी नहीं हो गए शिक्षाओं पर तुम दोष हटाते हो तो परंपरा प्राप्तिक भी नहीं हुए तो तुम भी प्रामाणिक नहीं मानते हो ठीक है केवल कह देने से सर्वशक्तिमान नहीं होता है आगे उसको जन्म भी लेना पड़ता है ईश्वर को
01:40:32:19 के बारे में कहा के बारे में कह दिया और वो भी तुम्हारे कम से कम थे इसके बाद इस बात का लेकिन क्या है हमारे गुरु ने नाम लिया था विजय श्री का जब तू बिना नाम लिए अभियुक्तेश्वरानंद जी के लिए कहेगा कि भैया जो इस मामले में बोल नहीं रहे हैं वो अपनी माता का भ्रूण खाने वाले राक्षस है और अभिवुक्तेश्वरानंद जी उसको जब कैच कर लेंगे कि भैया ये मेरे लिए बोल रहा है व्यक्ति तो तू क्या कहेगा मैंने नाम लेकर के बोला था क्या मगर कोई और तेरे विरोधी जिस तुझे अपनी रोटियां सेकनी होंगी पूरी के शंकराचार्य जी बिना नाम लिए वहां आने वाली किसी महिला के लिए बहुत सी महिलाएं आती है। मगर किसी महिला का नाम लिए बिना बोल देंग कि एक योगाचार आती है वो अपने आप को योगाचार्य कहती है।
01:41:17:08 मगर वहां पर बिना नाम लिए तेरे अनुसार चीजें मान लेनी चाहिए। क्योंकि तू नेता है। तेरा नेतापन खत्म करूंगा। और अगर उन्होंने बोल दिया कि योगाचार्य स्त्री है तो उसी से वो मलेच्छराज की एजेंट सिद्ध हो गई। वो वैश्या हो गई। उसके बारे में तुझे अधिकार मिल गया कि उसके अंडर गमेंट के अंडर गमेंट की बात करेगा तू उसके बारे में तुझे अधिकार मिल गया कि तू उसके ऊपर नीचे के अंगों का नाम लेकर के उसका नाम उसके गुरु भाई से तोड़ेगा नीच व्यक्ति और उसे जान होगा कम से कम अभी गंगा मोहम्मद का अभी तो चल रहा है मोहम्मद से आधार क्या है पूरे धरती पर इस्लाम का राज जिस व्यक्ति की विचारधारा के कारण भारत समय पूरे विश्व में इतना से फैला लाखों बच्चे करोड़ों बच्चे अनाथ हुए लाखों करोड़ बलात्कार हुए हत्या हुई और हो रही है और आगे होंगी अगर तुम्हारी मोहब्बत इसका माहौल खराब किया जा सके और अगर ना विरोध करे तब उसके माध्यम से अपने और एक संस्था करो पाओ कि हम अभी तक इतने पहुंचे हैं और हमको डायरेक्ट समझेंगे और अगर मेरी बुद्धिया नहीं होगी तो जान लो तुमको ही समझ में नहीं देंगे तो रामदेव बिस्मिल्लाह करके मंगलाचरण करेंगे भास्कर जी या राघवाचार्य जी या रत्नेश जी कभी मनुष्य करेंगे उसी मंच पर का सम्मान करने पहुंच जाएंगे विद्या भास्कर जी या राघवाचार्य जी या रत्नेश्वरी जबकि इन लोगों का कर्तव्य था कि ऐसे तत्व का पूर्ण किया जाए रामदेव का या बोला या इस प्रकार लोगों का पूर्ण भविष्य अरे भैया देखो देखो इसकी मूर्खता
01:42:32:09 देखो मुरारी जी का मुरारी का पूर्ण बहिष्कार होना चाहिए ठीक है और नहीं किया किसने विद्या भास्कर जी ने तो तू उनका पूर्ण बहिष्कार क्यों नहीं कर रहा है क्यों नहीं कर रहा है अबे कितना बड़ा दोगला है भाई तू कर दे पूर्ण बहिष्कार धार्मिक संसर्गों से मैं हटा रहा हूं आम का या इस प्रकार के लोगों का पूर्ण भविष्य हा खाएंगे हमारे ठाकुर जी हमारी आस्था है आपसे ये हमारा निवेदन है अपने श्रम और वरिष्ठ तीनों भाषा में लगता है लेकिन असंभव नहीं है क्या हो क्या वो आपके शास्त्री वर्ण सिद्धांत जिसके कारण आपके आचार्य जड़े बड़े पटे और अपने सिद्धांत को बचाए उसका आज आप अनकर चिंतन करें कि जहां वर्ण श्रम की बात आएगी आपके पूर्वचार्य के समर्थन की बात आएगी जहां शास्त्री काम के संरक्षण की बात आएगी वहां रामदेव मुरारी मोहन भागवत जैसे लोग साथ देंगे या उसमें आपको संसाधन भौतिक दृष्टि से होने के बाद भी हम ही सम्मान पूर्वक समर्थन करते दिखेंगे तो ये बात अगर तू संत तू अगर भौतिक दृष्टि से समर्थन करते हुए दिखेगा तो तू हमारे घर की स्त्रियों के बारे में वैश्या बोले तो हम सुन ले। अगर तू समर्थन करता दिखेगा तो तू जो है आचार्यों के लिए तू तड़ाक बोले लतखोर बोले तो हम उसको सुन ले। हम तो
01:43:47:27 फिर यहां पर तेरा तू तू भी ऐसा ही करता है क्या? यदि कोई तेरा समर्थन कर रहा है तो उसके लिए तेरी स्त्रियों को लेकर के जो निषेधता होनी चाहिए तेरे घर की वो उसको तू नहीं लागू करता है क्या ऐसा है क्या कितनी नीचता है भाई तेरे अंदर अगर तूने अगर कोई अच्छा कार्य कर दिया तो तुझे हम स्वीकार कर ले एज इट इज चाहे भले ही तू हमारे घर की स्त्रियों को मां बहन की गाली करता रहे हमारे लिए वैश्या गामी बोलता रहे वैश्या वैश्या बोलता रहे हमारी बहनों को ऐसा नहीं होगा ना दमयंती को वो अजगर निगल जाने वाला था रक्षा की उसकी व्याध ने उसको मार दिया अजगर को वो दृष्टि हो गई दोबारा दमती पर तो इसलिए क्योंकि प्राण की रक्षा की इसलिए उसकी गरिमा को भंग कर देने दे
01:44:39:25 या उसकी हत्या कर देने दे दमती की अब्राचार्य ने नोटिस नहीं भेजी तो किसने भेजी वही उनके चेलों ने भेजें तो चेलों ने भेजे तो अपने व्यक्तिगत से भेजे की गुरु जी के कारणों से भेजे और गुरु ने उस कारण का समर्थन किया निवारण किया और अगर नोटिस भेजी तो रामचार्य अरे हम तो केवल ये कह रहे हैं ना कि अगर सम अगर तुझे अभी ये स्थितियां मालूम नहीं है तो शांत रह जब मालूम पड़ जाए कि वो समर्थन दे रहे हैं तो बोल हमने तो केवल इतना कहा ना क्योंकि हम कोई दूसरी अच्छी और दूरगामी दृष्टि रखते हुए कुछ प्राप्त करने वाले हैं। मगर नीच तुझे अपने कैरी मिनाटी बनने और YouTube चलाने के अलावा कुछ दिखाई नहीं देगा। स्त्रियों की बात करता है। ऊपर नीचे यह है वह है। गिद्ध जैसी नजरों वाला स्त्रियों का शरीर दिखता है। शरीर से वो ऐसी दिखती है। रिश्ता क्या कहलाता है? विजय श्री के पास बहुत कुछ ऐसा है जो ऊपर नीचे है जो मेरे पास नहीं है। इसलिए शिवश विजयश्री का सपोर्ट करता है। ये नीचता भरी हुई। कहां गई आजकल तेरी वो नीचता? थोड़ी कम हो गई है। निग्रह कर दिया क्या तेरा? या आजकल परी में बिजी है तू? विरुद्ध जो कथन जी का याचार्य जी का था वो कथन सही था कि गलत या रामद्राचार्य धारण सन्यास पूर्वक
01:45:54:28 धारण करने में शारीरिक और शारीरिक रूप से अवता हो जाती है और वहां पर ये भी नकली नहीं होगा नहीं होगा क्यों नहीं होगा क्योंकि वहां पर पंचायत विकास वाली बात लागू हो जाती है और वहां पर ये भी नकली गठबंधन करने की योजना चल रही है ये बता दो कश्मीर हो जाती नकली गठबंधन की बात करें तो चल तेरी बात कर लेते हैं तेरे अनुसार पट पहनने वाले राक्षस है खड़े होकर के मूत्र त्याग करने वाले जिन जिनका जो तेरा केस लड़ रहे हैं वो नकली गठबंधन नहीं है वहां पर तेरा। अच्छा जिनको तू अनेकानेक पता नहीं कितनी सारी चीजें मैं बताऊं।
01:46:37:06 न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए तूने क्या-क्या लिखा है? वर्तमान में भारत में सनातन धर्म के लिए सबसे बड़ा खतरा जो है सबसे अधिक सनातन धर्म को तोड़ने में जिसका योगदान है उसे हम भारतीय न्यायपालिका के नाम से जानते हैं। भारत को उसका गौरव जिसके माध्यम से वापस दिला मिल सकता है सनातन धर्म उन सभी मान बिंदुओं का हनन करने का संकल्प जिस संस्था ने लिया है उसे हम भारतीय न्यायपालिका के नाम से जानते हैं। न्यायाधीशों के इनके किडनी में लीवर में गुर्दे में एसी लगवा दो फिर भी इनको गर्मी की छुट्टियां चाहिए। न्यायाधीशों न्यायाधीश
01:47:24:14 न्यायाधीश तो इनको मैं स्वीकार नहीं करता। न्यायाधीश शब्द पर भी आपत्ति है मुझे। क्यों आपत्ति है? क्योंकि ये निर्णय करते हैं। न्याय नहीं करते। अब पहले यह बता भाई कि जब तू कोर्ट में गया है साग द्वीप वाले मामले में हमारे विरुद्ध तो तू वहां पर इनको न्यायाधीश कह रहा है कि दूसरा शब्द लिख कह रहा है और अगर कह रहा है न्यायाधीश तो नकली गठबंधन है कौन सा वाला गठबंधन है बता सुप्रीम कोर्ट में भी न्याय हो रहा है क्या कितने विषयों में सुप्रीम कोर्ट न्याय करती है यानी कि न्याय की तो उम्मीद है ही नहीं तो तू अपना प्रकल्प लाना शास्त्रों शस्त्रों को लेकर गया फिर तो जिनका तुझे विरोध करना है क्यों गया भाई तो न्याय मिलता नहीं है क्यों गया है अच्छा पर्याप्त पैसा हो, पर्याप्त पावर हो, जज के सामने हो, जज के सामने ही अपने मन मुताबिक निर्णय हस्तक्षेप व्यक्ति करा सकता है। तो तेरे अनुसार तो भैया तेरे जितने भी विपक्षी हैं वो पर्याप्त पैसे वाले हैं। तो फिर तू वहां क्यों जा रहा है? व्यर्थ जा रहा है। संपूर्ण व्यवस्था की ओर दृष्टिपात करें। संपूर्ण व्यवस्था की ओर दृष्टिपात करूं तो विश्व की सबसे भ्रष्ट निर्लज्य और संवेदनहीन अगर कोई संस्था है तो वह भारतीय न्यायपालिका ही हो सकती है। ठीक है? ये न्यायपालिका के लिए इसके अंदर इसके अंदर का भाव है। तो इसका पूर्ण बहिष्कार
01:48:39:15 नहीं होना चाहिए था इसकी ओर से। फिर ये क्यों पहुंच गया? मिल लॉर्ड मिल मुझे ब्राह्मण शाक दयियों को ब्राह्मण नहीं मान रहे। शिवश नारायण द्विवेदी जो है मेरे ऊपर वो जो है वो जोधपुर वाले डॉक्टर के यहां जाकर के मेरे बारे में इंटरव्यू ले रहा है प्रश्न पूछ रहा है मिलॉर्ड मिल लॉर्ड वहां पर तूने बताया कि आप गर्मियों की छुट्टियों में मत जाना बोला है उनसे तू तूने वहां पर बोला कि न्यायाधीश नहीं हो तुम निर्णय करता हो बताया नकली गठबंधन और क्या है न्यायपालिका के समान क्रूर और संवेदनहीन संस्था दूसरी नहीं उसी क्रूर के पास गया ना तू शरण मांगने। न्यायपालिका के समान स्वार्थी और पक्ष पूर्ण व्यवहार करने वाली संस्था दूसरी नहीं है। पक्षपाती है न्यायपालिका तो न्याय कहां से मिलेगा? अच्छा अब और थोड़ा स्तर बढ़ जाएगा। इनके गुर्दों में खुजली मच जाती है। जब मतलब ऐसी चीजें जो जिनका यह चाहता है एक जगह पे ये भी कहा इनके गुर्दों में खुजली मच जाती है। तो ये सब बातें तूने वहां बताई कि तुम्हारे गुर्दों में खुजली कम मचती है। क्या है? नकली गठबंधन पत्ते चाटी। अच्छा आगे क्या है? जिसका यानी न्यायाधीश का चरित्र सही नहीं है। मतलब एक
01:49:54:16 बोल रहा है न्यायाधीश का चरित्र सही नहीं है। वो और जो व्यभचार का समर्थन करता हो ऐसा व्यक्ति क्या न्याय करेगा? क्यों गया भाई तू न्यायाधीश के पास? पूरे देश को वैश्यालय बनाने में तुम लोग तुल गए हो। तो न्यायाधीश न्यायालय जहां पर तू पहुंचा है वो तो वैश्यालय बना रहा है सनातन धर्म को देश को स्वयं जो व्यक्ति वैश्यागामी हो जाता है स्वयं व्यभचारी हो जाता है स्वयं जिसके अनैतिक संबंध है वह व्यक्ति दूसरे को तो चाहेगा ही कि वो शराबी हो कबाबी हो जुारी बन जाए तुम लोग काला कोट पहनकर जो आते हो उससे अच्छा पेटीकोट क्यों नहीं पहन लेते हो ये सब न्यायाधीशों के लिए बोल रहा है व्यक्ति जो न्यायाधीश स्वयं व्यभचार में डूबा हुआ है। मदिरा पान में डूबा हुआ है। वह दूसरों को क्या नैतिकता की शिक्षा देगा?
01:50:44:00 जो न्यायाधीश स्वयं समलैंगिकता का शिकार है। जो मानसिक रोगी है। वह दूसरों को नैतिकता और न्याय की शिक्षा देगा। जज बनने के लिए या बने रहने के लिए विवेक, बुद्धि, निर्णय, दया, सहनशीलता नहीं चाहिए। अब मर्दाना ताकत की गोली खाकर जज बन रहे हैं। जिसके पास गया है वह मर्दाना ताकत की गोली खाकर के जज बने हैं ना। उनहीं को तू कह रहा है ना मिल मुझे न्याय दिलवा दो व्या पुत्र के समान ही न्यायालय की अवमानना भी मिथ्या है क्योंकि अवमानना होने से पहले सम्मान का होना आवश्यक है। सम्मान है कहां आपका? कोर्ट दो कोर्ट तो कम काला है। जितना काला इन लोगों का चरित्र है। हमारी बहू बेटियों सबको वैश्या बनाने पर तुला हुआ है। न्यायपालिका का संस्थान। यह तो हत्यारे हैं। कसाई भरे पड़े हैं। भाई इनको न्यायाधीश कौन कहता है भाई? यह तो कसाई है। अच्छा आगे क्या है? यहां तो यानी कहां? न्यायालय में केवल शराबी, कबाबी, घूसखोर, वैभचारी, वैश्यामी भरे पड़े हैं। तो भाई तू जहां गया है, तूने जहां पे एप्लीकेशन लगाई है, व्यवहार न्यायालय रांची वहां पे कौन से टाइप के हैं बता दे जरा। और अगर तू इनको
01:51:59:06 ऐसा ही मानता है जो तूने अभी तक लिखा है तो फिर तू उनको मिलो जो कह रहा है वह क्या है नकली गठबंधन है क्या है न्यायपालिका तो गुलाम बनी हुई है न्यायपालिका तो अलग न्यायपालिका तो अलग नशा करके बैठी नशेड़ियों से न्याय मांग रहा है इन लोगों ने इस गिरोह ने न्यायपालिका ने स्वयं को न्याय का ठेकेदार तो बनाया बना दिया लेकिन अन्याय करने पर हमें क्या दंड मिलेगा इसकी कोई व्यवस्था नहीं बताई जिस दिन यह व्यवस्था बनेगी, जिस दिन यह व्यवस्था बनेगी ना, सड़क पर जूते मारकर इनका किनका न्यायाधीशों का अपान से लेकर मुख मंडल तक लाल कर दिया जाएगा। उनहीं के पास गया ना। तुम जिसको अपना रक्षक समझ रहे हो न्यायाधीशों को वो तुम्हारा भक्षक है। तुम्हारा पहला कर्तव्य बनना चाहिए कि जो तुम्हारी शिकायत दर्ज नहीं कर रहा है उस जज को उस प्रशासन को समाप्त कर दो, नष्ट कर दो। मार दो। तो भैया न्यायाधीश को तूने लिखा है ना? नहीं करोगे तो नष्ट कर दूंगा। दोगलापन तो नहीं निभाया ना तूने? नकली गठबंधन तो नहीं किया।
01:53:13:22 यह न्यायाधीश कोई न्याय देने नहीं बैठे हैं। यह दलाल बैठे हैं। दलाल है भाई। वहां तू कहां पहुंच गए? दलालों के दलालों को कहला मिल वैश्यालय के जो दलाल थे ना कोर्टों के वही अब यहां पर बहाल हो के आए हैं। क्या बनकर आए? न्यायाधीश बन के आए। ये सब तूने बताया क्या उनको उनके बारे में? अच्छा तू नहीं बताएगा तो हम बता देंगे। चिंता मत कर। चलिए खरीदने गए। को मिला तो जल भैया एकत्र रामचार्य बाकी सब नग का क्या काम उनके जगह नहीं है या एकमात्र
01:53:53:08 परम तत्व के रूप में विष्णु भगवान है इस पर तेरा क्या कहना है बोल क्या कहना है तेरा और अगर केवल वैष्णव केवल विष्णु भगवान ही भगवान है तो तू क्यों नाव में बैठकर के पांचो तत्वों की दीक्षा दे रहा है इस पर तेरा क्या कहना है? कर असहज असहज असहज प्रश्न क्या केवल तेरे पास ही है? हमारे पास नहीं है क्या? तू ही बंद हो जाएगी। गिग्गी बंध जाएगी मुख की जो तू असहज स्थितियों की सोचता है ना कि भैया असहज प्रश्न कर देंगे। इसमें सामने वाला बोल नहीं पाएगा।
01:54:30:07 भाई अगर वो कुछ कह रहे हैं तो तू भी तूने भी तो बहुत कुछ कहा था। तब हम शांत थे। तू भी तो अपने आप को सबका निग्रह करने वाले के रूप में एकमात्र गुरु के रूप में स्थापित कर रहा है। तो हम शांत थे ना नहीं बोलते थे ना। क्यों? क्योंकि हमें दिख रहा है कि हमें अपना अपनी एनर्जी अपनी ऊर्जा किस विषय में किस व्यक्ति के विरोध में लगानी है। और एकमात्र जगत गुरु एकमात्र जगतगुरु जो है रामभद्राचार्य जी हैं। यह देखो इसका
01:55:06:26 इसको ऐसे देखो सिद्धांत की दृष्टि से देखो शास्त्रों की बात ये तो नहीं करता हम करते श्री राम जी के पास जब वैष्णो माता आई विवाह का प्रस्ताव लेकर के तो श्री राम जी ने क्या कहा मैं एक पत्नी व्रत वाला व्यक्ति हूं और उनको मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया मर्यादा के रूप में जो सर्वश्रेष्ठ मर्यादा तय की वो ठीक है अमुक अमुक स्थितियों में एक से अधिक विवाह हो सकता है ठीक है परंतु जो श्रेष्ठतम मर्यादा हुई वो क्या हुई कि एक नारी सदा ब्रह्मचारी श्री राम जी तो अपने पिता के विषय में क्या वो था उनका उन्होंने खंडन क्यों नहीं किया अपने पिता का खंडन करें तो अगर अच्छा उन्होंने एक पत्नी व्रत को सर्वश्रेष्ठ मर्यादा के रूप में स्थापित करके क्या यह निर्णय नहीं दे दिया कि हां एक पत्नी व्रत सर्वश्रेष्ठ है जो इसको नहीं माने वो जो है कहीं ना कहीं इससे बाहर है इसकी सीमा से उसको मर्यादा पुरुषोत्तम तो नहीं कहा जाएगा। कहा गया क्या किसी को बेवकूफ व्यक्ति अगर उन्होंने रामभद्राचार्य जी के ये कह देने के बाद कि वो वो एकमात्र जगतगुरु है और ये कह देने के बाद भी उन्होंने शंकराचार्यों
01:56:22:12 को जगतगुरु कह दिया तो उन्होंने बिना बोले ही उनका खंडन कर दिया मगर तू एक पुत्र के द्वारा पिता का खंडन चाहता है तू श्री राम जी से भी कह देगा कि अपने पिता का खंडन कर कि तुम मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं हो ऐसा ही निर्लज्ज व्यक्ति है ना तू कोई बात नहीं तेरे को तेरी दुनिया में आके मारेंगे जैसी बातों से तू समझ सकता है उसी से मारेंगे तो बता वैष्णवाचार्यों के बारे में तेरा क्या वो है शिव जी का भक्त का भक्ति करें कि ना करें वो तो बताते शिवजी भगवान नहीं है वैष्णवाचार्य असहज स्थितियां उत्पन्न करेगा ना श्री भाष सही है या शंकर भाष इस विषय में तू क्यों कहता मैं तो सब में एक दृष्टि रखता हूं। अगर सब में एक दृष्टि तू रख सकता है तो वो नहीं रख सकती। अगर कह रहे हैं तो एक सन्यासी दूसरे सन्यासी को कह रहा है। एक परंपरा से व्यक्ति दूसरी परंपरा वाले को कह रहा है। दूसरी बात जहां पर स्वयं बड़े विद्यमान है जिन विषयों में बोलने के लिए और बोल भी रहे हैं। वहां पर हम क्यों बोले? हां। हम उनकी इस बात का समर्थन करने यदि खड़े हो जाए तब तो तू बोल आ करके तू इस बात को कैसे समर्थन कर रहा है भाई? मौन हो गए। वहां बड़े लोग बोल रहे हैं। राघवाचार्य जी ने बोला खूब अच्छा कौन थे हम नहीं बोले हमने समर्थन
01:57:37:15 तो नहीं कर दिया कि रामद्राचार्य जी ने सही स्टेटमेंट दिया है। उल्टा राघवाचार्य जी का ही समर्थन किया और कर रहे हैं। मगर ऐसा बड़ी बात तुझे नहीं घुसेगी। तुझे तभी घुसेगी जब तेरी भाषा में तुझसे सवाल किए जाए। आ जाना। हवेली पे आ जाना हवेली पे। चलो उनके लेकिन अपने गुरु को नीचा निष्ठा गजब अर्थात शंकराचार्य बनाते थे हो गए वो बड़ा हो गया वही सबसे प्रामाणिक आचार्य है वही सबसे बड़ा है ना और वही रजना इनका खोखला है वो रामद्राचार्य वो अपना हो गया हम है ना और वही रजना होते हैं जो स्वरूपानंद जी के शिष्य है वो रामद्राचार्य बने घूम रही और वही गुरु शंकराचार्य का पोषण करताना ये इनका खोखला अवसर मानता की पुष्टि करता है। हो रहा है जितना है उसके अनुसार ये सब उत्तर हमने पहले ही दे दिए। किस विषय में कौन किसका पक्ष ले रहा है कौन किसका वकील है यह देखोगे कि नहीं देखोगे और यदि तुम अजीत भारती जैसे और आरएसएस जैसे जिन जिन्होंने भी गवाही के विरुद्ध बोला और जिनकी विचारधारा से तुम संतुष्ट नहीं हो जब तुम उनका किसी किसी मामले में पक्ष ले सकते हो तो हम अगर किसी मामले में जो कि ना सनातन के विरोध में वर्णाश्रम के विरोध में है किसी मामले में धर्म की रक्षा करने के लिए धर्म की
01:58:52:16 प्रतिष्ठा के लिए किसी मामले में रामद्राचार्य जी के साथ खड़े हो जाएंगे तो तुम सवाल करने वाले कहा से हो गए और की अपेक्षा और कोई आते रहे तो जो है मेरा वर्तमान पीता यह प्रवत्त रहे तो वही बाकी पीठों का भविष्य हो ये बात याद रख आचार्य शास्त्र पर हो जाए शास्त्र विमुख हो जावे और व्यक्ति प्रमुख हो जावे तो बहुत समस्या है तो ये वक्त हुआ आप तो ये सारा तमाशा चल रहा है प्रपंच चल रहा है धर्म कहीं नहीं है इसमें शास्त्र क्या है तमाशा बन गया है क्योंकि इसी वीडियो के आगे आपको एक साथ क्या है इसके विषय में जन समुदाय को पता ही नहीं लोगगी नहीं समझते अब देखो इसने इससे आगे शक्ति संगम तंत्र के बारे में जो बात की है
01:59:35:25 सबसे पहली बात तो मैं ये बता दूं कि निग्रह निकासिका जो हमने लिखी है जिसमें कि ये सिद्ध किया है प्रयास नहीं किया है खंडन किया है उसमें इसकी अप्रामाणिकता को लेकर के मेरे ख्याल से हमने कम से कम कुछ नहीं तो 50 या मतलब 30 से 50 के बीच में मोटे मोटे बहुत सॉलिड प्रश्न किए होंगे उसमें कहीं भी हमने यह नहीं कहा कि शक्ति संगम तंत्र के अनुसार जो ये वाला जो पॉइंट है ना कि 108 वे श्लोक में लिखा है कि अब मैं पाखंड तंत्रों की बात करूंगा। तो शक्ति संगम तंत्र के अनुसार निग्रह तंत्र या निग्रह आगम पाखंड आगम है। यह हमने निग्रह निकासिका में नहीं लिखा। हमने अपनी किसी और विषय में चलती हुई जो लाइव थी विषय इसी का था। उसमें ही अंत में जब वो लाइफ समाप्त हो रही थी तो हमने कहा कि भैया 108 श्लोक में लिखा है कि इसके बाद पाखंड तंत्रों की बात हो रही है। ठीक है? और उसके आने उसके आने के बाद उसके आगे के विषय में पाखंड तंत्रों के रूप में जो अन्य जो आगे तंत्र दिखाए गए हैं वो दिख रहे हैं। प्रतीत हो रहा है। ये आप देख लीजिएगा जब हमने पहली बार यह बात कही थी।
02:00:51:27 और उन्होंने कहा था कि इसके बारे में स्पष्टीकरण आना चाहिए कि यहां पर जो चीज आ रही है उसके बारे में क्या स्पष्टीकरण। इसके बाद इस व्यक्ति से किसी ने वहां लखनऊ जब ये आया था तो किसी ने या तो इसी ने कहा होगा कि पूछना तो मैं बोल दूंगा या किसी ने पूछा। उसने वो सब नहीं पूछा कि जब देवी वरदान दे के गई है तो वाकलन कैसे हो गया? उसने यह नहीं पूछा कि निग्रह जैसे शंकर संप्रदाय के बारे में शंकर परंपरा के बारे में परंपरा या संप्रदाय लिखा है। अन्य प्रमाणिक संप्रदायों के बारे में लिखा है। निग्रह या अन्य प्रमाणिक संप्रदायों के बारे में लिखा है। परंपरा या संप्रदाय तो वैसे ही निग्रह परंपरा के बारे में क्यों नहीं लिखा? निग्रह संप्रदाय के बारे में क्यों नहीं लिखा? क्योंकि वहां पर निग्रह आगम शब्द है। निग्रह आगम एक मिनट खोल लूं जरा।
02:01:48:14 निग्रह आगम शब्द है। संप्रदाय क्यों नहीं है? अच्छा आगम में तो विधि भी आती है। तंत्र भी आते हैं। खैर उसको एक संप्रदाय के रूप में कहां पे लिखा है? शक्ति संगम तंत्र में कि वो एक संप्रदाय है। निग्रह संप्रदाय तो वो तो नहीं लिखा है। इसने ये वाली बात नहीं बोली। अच्छा दूसरी बात यह भी है कि इसमें ना जाने कितने सारे पाखंडी तंत्रों के नाम दिए गए जैन आगम बौद्ध आगम चीन आगम तो ये कैसे समझा जाए कि निग्रह आगम जो है पाखंडी तंत्र नहीं है जबकि एक जगह इसने घोषणा भी की है कि इसमें कई जगह पर पाखंडी तंत्रों का नाम भी दिया गया है ऐसी घोषणा भी अलग से भी की है इस श्लोक के अलावा भी इसमें ये घोषणा की गई है कि पाखंड तंत्रों पाखंड तंत्र भी होते थे बहुत सारे उनका नाम नहीं दिया मगर बताया मतलब इस इस ग्रंथ में वैदिक और अवैदिक दोनों तरह के जो विधियां तंत्र इत्यादि प्रसिद्ध है लोक में उनके बारे में बताया गया है तो फिर ऐसे में बिना किसी अन्य समर्थन के अन्य ग्रंथ के समर्थन के जहां पर स्वतंत्र रूप से निग्रह संप्रदाय को सबसे पहले तो आगम की जगह संप्रदाय लिखा हो परंपरा लिखा हो फिर वहां पर कहा गया हो
02:03:03:25 कि ये जो है वैदिक है। तो इस ग्रंथ के आधार पर इसको इसकी पुष्टि नहीं होती कि ये वैदिक है। पहली बात तो इसकी पुष्टि नहीं होती कि ये संप्रदाय है। आगम नहीं है मात्र ये संप्रदाय परंपरा है और इसकी पुष्टि नहीं होती। फिर उसके बाद ये वैदिक है। इस ग्रंथ से तो नहीं होती। तो ऐसे ऐसे भर भर के जो हमने प्रश्न किए थे पूरे निग्रह निकासिका में वो किसी को नहीं याद आए। मगर हमने जो एक यह कहा कि इसमें इसका स्पष्टीकरण आना चाहिए क्योंकि जो पाखंड तंत्र बताए जा रहे हैं। इसका स्पष्टीकरण आना चाहिए तो इसने उस पर बात नहीं की है। अच्छा दूसरी बात ये है कि जब इसने अब ये जो बात की है इसने कि क्या कहते हैं? इसने अपने वीडियो में यह कहा है कि यहां पर स्वतंत्र रूप से संज्ञात्मक रूप से पाखंड तंत्रों की बात बताई गई है। यहां पर यह नहीं बताया जा रहा है कि भैया अब यहां से आगे पाखंड तंत्रों के नाम बताए जा रहे हैं। तो इसमें तो किसी संस्कृत संस्कृतज्ञ व्यक्ति की बात आवश्यक हो गई कि कोई संस्कृतज्ञ व्यक्ति बैठकर के बताए कि यहां पर जो है अब भाई तू तो हमारा विरोधी है। तुझे और हमारे
02:04:18:26 हमारी जानकारी में तुझे तो अपना मत सिद्ध करना है। तो इसमें किसी तेरे पूर्वाचार्यों का तेरी परंपरा के जो प्रामाणिक आचार्य पहले जिनसे तू संबंध अपने आप को बताता है तो जो जिनसे तू अपने आप को संबद्ध बताता है उनका तो इसमें कोई गति है नहीं मेरी जानकारी अगर है तो वो लोग प्रामाणिक नहीं है अगर निगमन से होते हुए आ रहे हैं तो पहली बात तो इसमें किसी प्रामाणिक संस्कृतज्ञ का जो परंपरा प्राप्त आचार्य हो उसका निर्णय आवश्यक है ये मनवाने के लिए कि यहां पर स्वतंत्र रूप से पाखंड संज्ञात्मक रूप से पाखंड तंत्रों को कहा जा रहा है कि इसके बाद पाखंड तंत्रों में आठ त पांच तंत्र तीन तंत्र और पांच उपतंत्र है। पहली बात तो ये है अगर संस्कृत की बात आ गई प्रामाणिक रूप से संस्कृत है कि नहीं। दूसरी बात यह है कि अगर तूने इस व्यक्ति ने इसी वीडियो में आगे एक बात और कही है कि भाई अगर इसमें पाखंड तंत्रों के नाम भी हैं तो फिर तुम शंकराचार्य को क्यों मानते हो? तुम वैष्ण क्या कुतर्क किए इसने व्यक्ति ने वीडियो में। सोच के देखिए। भैया शंकराचार्य को इसलिए हम शंकराचार्य को शक्ति संगम तंत्र के आधार
02:05:33:27 पर नहीं जानते हैं। स्वतंत्र रूप से शंकराचार्य के बारे में ऐसी बहुत से प्रमाण और तर्क हमें प्राप्त है कि वो प्रामाणिक सिद्ध होते हैं। और अन्य वैष्णवाचार्य भी स्वतंत्र रूप से हां शक्ति संगम तंत्र में भी उनका वो मिल जाता है। मतलब यह नहीं है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अगर शंकराचार्य को हम प्रमाणिक मानते हैं और शंकराचार्य के बारे में कोई ऐसा व्यक्ति बात करने लगे जो कि गलत बातें भी करता हो और सही बातें भी करता हो तो क्योंकि किसी ऐसे व्यक्ति ने बात की है शंकराचार्यों को प्रमाणिक कह दिया है। किसी ऐसे व्यक्ति ने जो गलत और सही दोनों का कहता है तो इसलिए शंकराचार्य अप्रामाणिक सिद्ध हो गए। ये कहां का न्याय है भाई?
02:06:17:03 अब वो वाली बात थी आर्य समाजियों ने एक बार आरोप लगाया कि जो गॉड पाद थे वो किसी राक्षस का अवतार थे या गॉड पाद या गोविंद गोविंद पाद जी आर्य समाजियों की ही किताब उनका कोई आचार्य लिखते हैं पता नहीं नाम नहीं आ रहा है। उसने ये माना कि जो गॉड पाद थे वो राक्षस नहीं थे। यह कहानी किसी और के बारे में यह आर्य समाजियों ने ही माना तो जब हम यह बात उनसे कहने गए तो आर्य समाजी बोले कि इसको तुम पूरा मानते हो अगर पूरा मानते हो तो इसकी ये बात मानो। अरे भैया गड पाद को राक्षस ना मानने के लिए स्वतंत्र रूप से हमारे पास व्याख्याएं और प्रमाण और तर्क हैं। हम तुम्हें तुम्हारे आचार्य का नाम केवल इसलिए बता रहे हैं क्योंकि तुम्हारी इनमें निष्ठा भले ही ना हो मगर उसमें तो निष्ठा होगी ना। इसलिए तुम्हें तुम्हारा उत्तर दे रहे। हमारे पास तो पर्याप्त तर्क प्रमाण है मानने के लिए कि आचार्य गड पाद जो है राक्षस नहीं है। उसी प्रकार से जब तुम अगर ये कह रहे हो कि इसमें शंकराचार्य जो है शंकराचार्यों को भी तो प्रमाणिक कहा गया है। शंकराचार्यों की बात की गई है। तो अगर इसमें कहीं पर भी किसी को भी अवैदिक
02:07:32:07 मत को भी बता दिया गया है। तो फिर शंकराचार्य को तुम क्यों नहीं मानते? क्योंकि स्वतंत्र रूप से हमें शंकराचार्यों के बारे में उनकी प्रामाणिकता भरभर के प्राप्त है। हम इस ग्रंथ के आधार पर शंकराचार्यों को नहीं जानते हैं। अन्य ग्रंथों से जानते हैं। हां इस ग्रंथ से भी पुष्टि हो जाती है और ऐसे ग्रंथों के लिए हमारे यहां देवी भागवत में कहा गया है कि आगम ग्रंथों के केवल उसी अंश को लेना है जो वैदिक हो और वैदिक जो हमारी स्मृतियां है उनके अनुगत हो के जो उसमें बातें कही गई हो वो मान्य है। उनकी बस उनका विरोध ना हो। तो इस व्यक्ति से हमने इतने ढेर सारे सवाल पूछे कि जब गाली शास्त्री है और तू गाली बकता है और गाली बकेगा तो तू आचार्य कैसे हो गया आचार्य तो वो है जो शास्त्र सम्मत आचरण करे भैया हमने तेरे को सारी चीजें तर्क प्रमाण सहित उपस्थित की निग्रह निकास लिख की उस पर तू बात नहीं करेगा उस पर तू वीडियो नहीं बनाएगा जिसमें हमने केवल स्पष्टीकरण मांग लिया हमने एक आक्षेप नहीं लगा दिया हम तेरी तरह नहीं है हमने कहा इस पर स्पष्टीकरण आना चाहिए कि यहां पर ऐसा हो रहा है। फिर भी उसके संबंध में जो तूने बातें कही है वो सब खंडनीय है। खंडन हो सकता है। क्या बात कही है कि भैया इसमें तो शंकराचार्य को भी नाम बताया गया तो शंकराचार्य
02:08:47:13 को तो अप्रामाणिक मानते हो नहीं मानते। क्यों नहीं मानते? क्योंकि शंकराचार्य की स्वतंत्र रूप से व्याख्या हमें प्राप्त है। फिर ही नहीं प्राप्त। तो इसमें सवाल आ गया कि अगर इसमें अवैदिक मतों को व्यापारे में भी बताया गया है तो फिर निग्रह भी तो अवैदिक हो सकता है। निग्र आगम उसको कैसे मान लिया जाए? तो स्वतंत्र व्याख्या कहां है? संप्रदाय क्यों नहीं कहा गया? और अगर तेरे अनुसार वेद का अर्थ तात्विक अर्थ जो है वो अव्यक्ता द्वत है अद्वैत है तो फिर तेरे अनुसार तुझे उन लोगों का निग्रह करना चाहिए जो वेदों जो अद्वैत के विरोधी है। तेरे अनुसार अगर पंचदेव उपासना प्रामाणिक है तो तुझे उन लोगों का विरोध करना चाहिए। उनका निग्रह करना चाहिए। जो पंच देव उपासना नहीं कर रहे हैं। और तूने कहा कि मैं सबके सब लोग अपने अपने जो परंपराएं हैं उसमें सब लोग अपने परंपराओं के अनुसार चल रहे हैं कि नहीं। इस इस आधार पर तुझे पहली बात सबका ज्ञान होना चाहिए सब परंपराओं का। और दूसरी बात यह है कि तू उन परंपराओं का ज्ञान प्रामाणिक रूप से लेने जाएगा तो उनके उत्तराधिकारियों से लेगा। उनके उत्तराधिकारियों से लेगा तो उनके उत्तराधिकारियों में यदि तेरी दोष दृष्टि होगी तो प्रमाण
02:10:02:14 बुद्धि होना सिद्ध नहीं होगी तो तुझे मालूम कैसे पड़ेगा कि उस परंपरा का सिद्धांत क्या है वो एज इट इज बता रहे हैं कि नहीं बता रहे हैं ये सब तार्किक और तात्विक सवाल हमने इतने सारे किए उस पर व्यक्ति ने वीडियो नहीं बनाया मगर एक इस बात पर वीडियो बनाया कि पाखंड तंत्र कहा गया है कि नहीं कहा गया है अभी भी तो सिद्ध नहीं कर पाया क्यों नहीं कर पाया क्योंकि पहली बात तो ये है कि इस पर फिर इसका विवेचना होनी चाहिए। जो तूने यहां पर जो इस संस्कृत की जो हिंदी की है उसकी विवेचना करा किसी आचार्य से प्रामाणिक आचार्य से उसकी विवेचना होगी। हम कराएंगे जाकर कि भैया यहां आगे के सभी तंत्रों की बात हो रही है चैप्टर बदलने तक या फिर पाखंड तंत्रों को अपने आप में पाखंड संज्ञात्मक रूप से कहा गया है। इसके साथ ही साथ यह भी बात आती है कि यदि इसके आगे के हैं तो यहां पांच पंच पांच आगम को भी और इसने क्यों कहा है ये? स्वतंत्र रूप से क्यों कहा है? यह जो इसका जो निग्रह आगम वाला मामला है अगर श्लोक के अनुसार देखें तो आठवा श्लोक निग्रह आगम का श्लोक है। है ना? तो यहां पर यह भी देखा जा सकता है कि एक ही आगम के एक ही आगम में दूसरे आगम को भी अनुगत हो के दिखा रहे हैं। वो फिर भाष्य की बात आ जाएगी। अर्थ करना
02:11:17:18 पड़ेगा। खैर अगर श्लोक के अनुसार देखा जाए तो यहां पर आठवा श्लोक है। अच्छा दूसरी बात यह है कि अगर इसमें यह कहा गया है कि अब जो है पाखंड तंत्रों की बात हो रही है तब तो अगले ही चरण में पंच पांच आगम जो है यानी कि वैष्णवाचार्यों का पांचत्र वो यहां पर पाखंड तंत्र सिद्ध हो रहा है। तो इसलिए भी हो सकता है इस व्यक्ति ने इसको संज्ञात्मक बना दिया हो। भले ही इसका निग्रह जो है वह इसकी जो आठ की संख्या है वो उससे बाहर निकल रहा है भले ही मगर पांच रात्र को सुरक्षित रखने के लिए हो सकता है इसने इसकी संस्कृत में भाई एक ही वाक्य का अर्थ जो है अलग-अलग आचार्यों ने अलग-अलग तरीके से किया कि नहीं किया जैसे कि वो 932 की बात है कि पाप योनि वाली बात जो हुई है उसमें अलग-अलग आचार्यों ने शाब्दिक वेद से अलग-अलग भाष्य किया है, अर्थ किया है, अनुवाद भी किया है। तो अगर तुम्हारा यह कहना है कि ये संस्कृत जो है गलत लिखी है अनुवादक ने तो हम किसी अपने जानकारी के अनुसार प्रामाणिक अनुवादक से इसका अनुवाद करवाएंगे। उसको सामने रखेंगे और यदि यह सिद्ध होता है कि आगे पाखंड तंत्रों की बात की गई है तो पांच आगम भी पाखंड तंत्रों में आएगा। शक्ति संगम
02:12:32:24 तंत्र के अनुसार और यदि कोई ऐसा शक्ति संगम तंत्र के अनुसार कोई ऐसी बात कही जा रही है जो वेदों के विरुद्ध है तो हम उसको वेदों के विरुद्ध मानेंगे। दूसरी बात यह है कि कई विषयों में श्री संप्रदाय वालों ने शंकराचार्य संप्रदाय वालों को और शंकराचार्य संप्रदाय वालों ने श्री संप्रदाय वालों को अशास्त्रीय कहा ही है जो हम शुरू में ही कह आए हैं। किंतु दो बातें निर्वाद रूप से सिद्धों ने पाखंड के ही अंतर्गत रखा है। बात अब देखो यहां पर इसने एक बात कही है कि निर्वाद रूप से सिद्ध है कि जैन आगम को बौद्ध आगम को पाखंड तंत्रों के अंतर्गत ही रखा है। इसका मतलब यह माना जाना चाहिए कि यदि कोई प्रामाणिक आगम होगा या प्रामाणिक संप्रदाय पहले तो वो संप्रदाय सिद्ध नहीं है। बात ध्यान रख के चल। अब आगम की बात करते हैं। दुर्जन न्याय से आगे चलते हैं कि अब आगम वो जो निग्रह आगम है वो प्रामाणिक है कि नहीं? तो प्रामाणिकता के लिए बता रहा है कि सभी शास्त्रों ने निर्विवाद रूप से जैन आगम और बौद्ध आगम को वेद विरुद्ध ही कहा है। तो इसका मतलब उस उस तंत्र को प्रामाणिक रूप से स्वीकारा जा सकता है जिसको किसी शास्त्र ने अगर पाखंड
02:13:47:27 कह भी दिया हो तो दूसरे दूसरे शास्त्र ने उसको प्रामाणिक भी कहा हो। तो फिर यदि यहां पर निग्रह आगम को लेकर के यह शंका उत्पन्न हो रही है कि वह अवैदिक हो सकता है तो किसी शास्त्र ने उसको वैदिक भी तो कहा हो किसने कहा है? निग्रह आगम वैदिक है। किसने कहा है? प्रामाणिक शास्त्र ने परंपरा प्राप्त प्रमाणिक वो वो वाला नहीं वो सावर मंत्र के नाम पर काली जन का मंत्र ले आओ। पर साधना ले आओ। तो ऐसा नहीं चलो अब सुनते हैं आगे जो नवते हैं ब्राह्मण पाखंडी है वो जो स्वयं स्वतंत्रता देखने को मिलती है जिसमें एक होने के बाद भी किसी शब्द को पकड़ कर उसका पूरा का पूरा संदर्भ बिगाड़ते हुए उसको एक नई बात में प्रस्तुत कर देना ये शिवा संदीप जैसे लोगों की दृति है यही परिवार तुम्हारी दुर्बुद्धि नहीं है हमने तो शब्द पकड़ा है तुमने क्या नहीं पकड़ा है दुर्बुद्धि किसी और महिला का चित्र दिखा के वैश्या तक बोल रहे हो तुम किसी को तुम्हारी दुर्बुद्धि नहीं है और तमाम सारी जगह
02:14:57:20 पूज्य जगतुगुरु शंकराचार्य पूरी पीठाधीश्वर जी ने किस संदर्भ में किस तरीके से जीसस को वैष्णव स्वीकार किया तुमने उनकी बात को कैसे तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत किया जैसे वो वैष्णव वो जो है वही इस वाली बातें कर रहे हैं। हम तुम्हारी दुर्बुद्धि नहीं है। और हमने कैसे प्रस्तुत किया इसका स्पष्टीकरण होना चाहिए पहले देख लेना जाकर तुम्हारी यही तो सबसे बड़ी बात है तुम देखते नहीं हो रिसर्च नहीं करते हो क्या कहा गया है तुम्हारे जो कान्हा पूसी करने वाले लोग होंगे वो जो तुम्हारे कान में डाल देते हैं वही तुम सुन लेते हो तो उस शब्द का उसका और कला ये कथा जो है ये सब में नहीं ये तो कदाचित कोई ये तो बात का विषय है उसमें बताए तभी इतनी बड़ी परिभाषा उसको प्राप्त हो कितने तंत्र है कितने तंत्र है इसमें भी प्रकरण बताए तंत्र में जो बताए कला के मंत्र के एक श्लोक याद पहली बात पहले हम आते हैं इस विषय पर की निग्र तंत्रण महाग पर सिद्ध हुआ प्रकाश ये श्लोक सबसे पहले सोशल मीडिया इत्यादि के माध्यम से किसने ग्रंथ में तो पहले से है लेकिन उस ग्रंथ में इसका हमारा पारंपर ये बढ़ता था ये किसने बताया हमने ही बताया और उस समय जब हमने बताया तो हमारे विरोधियों का क्या दावा था पहले तो हमारे विरोधियों का दावा था कि नहीं अरे भाई और विरोधियों का अगर कोई गलत दावा था तो उससे हमारे दावा कमजोर हो जाता है या पुष्ट
02:16:12:24 नहीं है ये कहां से सिद्ध होता है मुद्दे की बात करना भाई तेरे दुनिया में किसी ने भी विरोध किया और वो गलत साबित हो गया इसलिए मैं भी गलत तो उस हिसाब से तो तू भी गलत है फिर क्योंकि रामपाल गलत सिद्ध हो गया इस कौन सिद्ध हो गया तो तू भी अपने आप को गलत मान ले बेवकूफ क्या सुनू मैं इसका ये क्या करेगा कि अपना बात को वजन डालने के लिए चार पांच ऐसी और बातें जरूर बोलेगा अपनी बात का वजन बढ़ाने के लिए जिनका कोई वहां औचित्य नहीं होगा। जैसे अगर मान लीजिए इसके ऊपर आरोप लगा कि भैया तुमने जो है कालिया जिनका मंत्र क्यों जपा? या इसके ऊपर आरोप लगा कि तुमने कालिया जिनका मंत्र क्यों दिया? अब क्यों दिया? इस इस पर बात करने से पहले बताया था कि मेरे लिए एक ने यह भी कहा था कि शिवश ने यह भी कहा था कि जानवी पर मैंने गाना गाया रैप सॉन्ग और उस पर अपनी उल्टी सीधी कुतर्क करेगा और भी कुछ ऐसे मिथ्याजनक कुछ बातें बोलेगा जो इस पर किसी ने कटाक्ष किया हो या आरोप लगाया हो जो सिद्ध नहीं हो पाया हो फिर ये बताएगा कि मैंने जपा नहीं था मैंने तो दिया था
02:17:28:00 हालांकि देना भी अपराध है उस बात को गण कर इतना पहले से प्रीफिक्स तैयार करेगा तब अपने उस अपराध को छुपाएगा बड़ी बारीकी से भाई देना भी तो अपराध है तू क्यों दे रहा है तू तो अवैदिक आचार्य है तू अवैदिक आचार्य क्यों बन रहा है अच्छा कोई मुझसे बहुत मांग रहा था बहुत मांगने पर तू क्या किसी को दारू दे देगा पीने के लिए मदिरापान करा देगा बहुत मांगने पर तू क्या वैशालय खोल देगा उसके लिए नहीं खोलेगा ना तो क्यों दिया हम अगर तूने जितने लोगों पर आरोप लगाया है कि उसने ये कार्य किया गवई के खिलाफ नहीं बोला या शिवश ने ऐसा कर दिया रंजना अग्निहोत्री ने ऐसा कर दिया पीन मिश्र ने ऐसा कर दिया अगर वो यह कह दे कि उसने बहुत पीछे पड़ा हुआ था इसलिए मैंने उसका नहीं सा मैंने उसका आलंबन स्वयं नहीं लिया उसको ये कह दिया बस बहुत पीछे पड़े हुए थे इसलिए तुम गलत चीज उसको दे सकते हो और उसके बाद भी स्वयं को वैदिक कह सकते हो
02:18:31:20 तो ये प्रीफिक्स तैयार करता हां ये गलत होता है। खामखा की बातें बोल रहे हैं कि उसने ये कहा पहले मेरे विरोधियों ने ये कहा भाई सीधी सिंपल सी बात है। हमने निग्रह निकासिका में ये वाली बात नहीं बोली है। 108 में उसमें इसको पाखंड तंत्र कहा गया। ये बात जरूर कही है कि शक्ति संगम तंत्र ये कहता है। शक्ति संगम तंत्र के अनुसार शक्ति संगम तंत्र में पाखंड तंत्रों के बारे में भी बताया गया है। और जैन आगम चीन आगम जैसे तंत्रों के सन्यासियों की रूपरेखा क्या होती है? यह सब बताया गया है। ऐसे में पहली बात तो शक्ति संगम तंत्र में वर्णित निग्रह आगम को स्वतंत्र रूप से प्रामाणिक संप्रदाय कहे जाने के अभाव में यहां से उसको प्रामाणिक क्यों माना जाए? और यदि मान यदि ये भी हल हो जाती है समस्या तो फिर दूसरी समस्या ये है जब जैन आगम और चीन आगम जैसे अप्रामाणिक चीजों के लिए शक्ति संगम तंत्र में उसका वर्णन लिखा हुआ है तो यदि ये भी संप्रदाय है तो इसका क्यों नहीं लिखा है? इससे सिद्ध होता है कि कोई संप्रदाय नहीं है। क्योंकि संप्रदाय शब्द भी नहीं आया है यहां पर परंपरा भी नहीं आई है। तो अगर तुम अपने आप को शक्ति संगम तंत्र से ख्यापित कर रहे हो तो सशक्ति संगम तंत्र से वहां पर संदिग्धता है कि वहां तुम्हें वैदिक के रूप में बताया गया है कि अवैदिक के रूप
02:19:47:13 ये की जिन जिन मतों का बौद्ध आगमन आगम तीन आगम इत्यादि का पाखंड रूप में वर्णन चिंतन कर सकते है कन्यानी ग्रंथों के संदर्भ से भी उनको कहीं भी पाखंड खंड के रूप में नहीं लिखा है सनातन शास्त्र में जैसे की पाथ पांच इत्यादि के लिए वेद समत बाते भी उनके उनके आगमों में वर्णित है वो स्वयं को वेद संस्कृत बताते है शगम में कहा है वैशगम किंतु उनके में ही रखा वहां क्या इसका पुनः परिवर्तन की बात है उस समय तंत्र और सात होता था आठ कोथान तीन हतंत्र को और यहां पर नीलेश्वराम लिखूं पाखंड में आएंगे तो वही कितना होता था आठ कोथान तीन हतंत्र और पांच तंत्र को तो यहां से गणना प्रारंभ करो पाखंड के बाद तीन का वर्णन है पांच रात्र आगम अघोर आगम बंजुघर प्लेस आगम लिया बाद में तीन भी आगम है अब हम ये कहते हैं कि इन आगमों के बाद निघा आगम का नाम है तो कितने संस्थापन यह देख नीलेश्वरागम तो नीगम तक तो हम पहुंच गए आठ अब आगे देखो मंत्र सिद्धागम मृत्युंजयागम माया देखो यहां कन्फ्यूजन की बात ये है कि ये बात सही है अगर एक ही श्लोक में दो तंत्रों के नाम दिए गए हैं तो उस हिसाब से निग्रह आगम उन पाखंड तंत्रों के अंतर्गत नहीं आता है। यदि हमारी यह बात मान भी ली जाए कि अब यहां से आगे पाखंड तंत्रों की बात हो रही है जिनमें तीन तंत्र एवं पांच
02:21:02:16 उपतंत्र हैं। अब यहां पर यह भी तो हो सकता है कि इसके आगे पाखंड तंत्रों की बात हो रही है। जिनमें तीन तंत्र प्रकार के हैं और पांच उपतंत्र प्रकार के हैं। यह भी तो हो सकता है ये क्लियर हो। दूसरी बात यह है कि श्लोक दृष्टि से अगर एक माना जाए कि एक एक श्लोक में एक तंत्र के अंतर्गत ही दूसरे तंत्र की बात हो रही है तो श्लोक दृष्टि से आठवें तंत्र के रूप में वो आ जाएगा। निग्रह आगम और जो पाखंड तंत्रों की बात हो रही है शक्ति संगम तंत्र के अनुसार उसी में पांचगम भी आएगा। ठीक है? तो ये कंफ्यूजन वाली बात है। फिर इसमें परंपरा प्राप्त भाष्य चाहिए होगा इसका। 114 में शंकराचार्य की परंपरा के विषय में कर रहे हैं। फिर वह परंपरा आगे विचिन्न होने वाली है। पुनः शिव जी की कृपा से भविष्य में स्पष्ट हो। तो हमारी परंपरा लुप्त है कि नहीं ये तो छोड़ो तुम्हारी परंपरा का क्या हाल है? ये देखो। अब देखो इस व्यक्ति ने कहा लुप्त होने वाली है तो यह लुप्त होने वाली है वाली बात क्या शक्ति संगम तंत्र अभी कल परसों में तेरे हिसाब से लिखा गया है अच्छा लुप्त होने का मतलब क्या है कि वहां के बाद वो ज्ञान परंपरा से आगे नहीं बढ़ेगा तो परंपरा लुप्त नहीं होती है। परंपरा
02:22:18:07 थोड़ी देर के लिए कहीं कहीं पर कुछ कुछ अंशों में निष्क्रिय सक्रिय ना होने की स्थिति या प्रभाव कम होने की स्थिति को ही लुप्तता कहा जा सकता है। लुप्त होने को यह नहीं लुप्त होने को यह नहीं माना जा सकता है। वहां पर ज्ञान जो परंपरा से आ रहा था वह आगे बढ़ना बंद हो गया। अगर बंद हो गया मान लेंगे तो वो नष्ट हो नष्ट हो गई मान लेंगे। तो लुप्त होने का अर्थ तो यह भी माना जा सकता है कि प्रभाव कम हो गया। सक्रियता कम हो गई। अच्छा मुगल काल में या अब से पहले बीत चुके काल में क्यों ना माना जाए।
02:22:51:08 कि वो सब हो चुका है। अच्छा आज इसे 2000 वर्ष बाद क्यों ना माना जाए कि वो ऐसा होगा। अभी क्यों माना जाए? क्योंकि निग्रह बाबा जी आए हैं निग्रह करने वीडियो बना के रात भर परी परी के साथ साधना करेंगे मिलकर के और फिर दूसरे दिन वीडियो बनाएंगे और फिर वो बताएंगे परंपरा विच्छिन्न होने वाली है। और फिर वो सिद्ध करने का प्रयास देखो वहां लिखा था ना विच्छिन्न होने वाली है। वैसे ही दिख रहा है। भाई तुम्हें ये भी तो शास्त्रों से सिद्ध करना पड़ेगा कि वो विच्छिन्नता क्या है? वो लुप्तता क्या है? और अगर तुम आज के समय को ही उसके लिए सही ठहरा रहे हो कि इसी के बारे में कहा गया है तो फिर तुम्हें प्रमाण लाना पड़ेगा। ठोस ये देखो यहां लिखा है इस ईवी में होना था। ये देखो हो रहा है।
02:23:39:10 चुप ऐसा करते हो तो सुन हमारे जन्म से ही इसका इसका वर्णन गोपीनाथ कविराज जी ने तो नहीं। अब देखो आज ये क्या कह रहा है? इसका वर्णन गोपीनाथ इत्यादि ने भी किया है। वो तो खैर बाद की बात करेंगे। उन्होंने वही वाला वर्णन किया है कि नहीं जो तुम करते हो। पहली बात। दूसरी बात यह है कि यह व्यक्ति क्या कहता था भैया हमारे से ही मालूम पड़ा है। हमको तो स्वप्न में आके कहा ये क्यों ना माना जाए कि तुमको गोपीनाथ से मालूम पड़ा। ये क्यों ना माना जाए जिसका दूसरा नाम तुम ले रहे हो तो उससे मालूम पड़ा। क्योंकि भागवत आनंद ने कहा है। जिसने ना देखी हो निग्रह निकास का वो देख लेना। ऑलरेडी इस पर हमने बहुत मोटे मोटे प्रश्न कर रखे हैं। उस विषय में आज तक नहीं बोला कि वाक स्कलन कैसे हो गया? बनाना वीडियो वाह विसलन कैसे हो गया। अगर शक्ति संगम तंत्र में स्पष्ट रूप से नहीं कहा गया कि निग्रह संप्रदाय वैदिक है तो उसके वैदिक होने के लिए स्वतंत्र प्रमाण की आवश्यकता होगी। निग्रह संप्रदाय की प्रमाणिकता वैदिक होने के संबंध में शक्ति संगम तंत्र से सिद्ध नहीं हो सकती। क्यों? क्योंकि उसमें वैदिक और वैदिक दोनों की जानकारियां दी गई है। यह सब बात थी। सभी को जय श्री राम।
02:24:54:09 [संगीत]
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नोटिस प्रकरण व शक्ति संगम तंत्र पर रोटी सेकता भागवतानंद
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