⬜ Not used yet · 00:00:01:18 – 00:20:06:00 (20:04)
00:00:01:18 आप लोग जो भी इस चैनल के रेगुलर फॉलोअर्स हैं जो इसको फॉलो करते हैं चैनल्स को आह्वान को और सर्वशक्तिमान धर्म को तो उसमें उन लोगों को ये मालूम होंगे जो हमारे बुलेट पॉइंट्स हैं। मगर फिर भी क्योंकि आज ये बिगिनिंग है। आज ये प्रारंभ हो रही है श्रंखला तो इसमें आपको बुलेट पॉइंट्स हम बता देते हैं। देखिए जो रामपाल के द्वारा दिया जाने वाला ज्ञान है उसको प्रारंभिक स्तर पर जब आप श्लोकों को ना खोलें जब आप प्रमाण को ना खोलें उससे पहले वो कौन से सवाल हैं जो रामपाल के लोग कभी नहीं दे सकते हम तो वो पहला सवाल तो है क्या रामपाल के द्वारा प्रतिपादित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है यदि वह सर्वशक्तिमान है तो तो क्या वो माता के गर्भ से जन्म ले सकता है? क्या वो अपने रूप को बदल सकता है? यदि माता के गर्भ से जन्म लेगा तो उनका ही एक सिद्धांत खंडित खंडित हो जाएगा जिसमें वो ये प्रचारित करते हैं कि जो ईश्वर है वो माता के गर्भ से जन्म नहीं ले सकता। इसकी व्याख्या किसी और दिन करेंगे। मगर फिलहाल इतना है कि रामपाल के ईश्वर
00:01:16:19 के सामने एक बाधक बंधन है कि वह दुनिया में कुछ कार्य ऐसे हैं जो नहीं कर सकता। जैसे कि माता के गर्भ से जन्म नहीं ले सकता। दूसरा वह अपनी देह का नाश करके नहीं दिखा सकता। नष्ट नहीं कर सकता। क्यों? क्योंकि वो सका शरीर आता है। अगर वो ऐसा हो कि परमार्थ जो एक स्पिरिचुअल वर्ल्ड है स्पिरिचुअल जो दुनिया है उसमें उसका उसकी जो देह है वो अलग है। मगर यहां पे वो आपको देह प्रकट करके दिखाता है इस प्रपंच रूपी संसार में। तो उस प्रकट होने वाली देह को वह आपको नष्ट करके भी दिखा सकता है क्योंकि वह उसके द्वारा सजन किया हुआ है। सजाम में हम है ना तो वो उसको नष्ट करके भी दिखा सकता है लीला पूर्वक क्योंकि यहां पर इस प्रपंच रूपी संसार में भगवान जो भी करते हैं वो उनकी लीला होती है। तो वो उसमें सब कुछ करके दिखा सकता है जो एक व्यक्ति सोच सकता है। मगर रामपाल का ईश्वर क्योंकि सशरीर आता जाता है तो वह तो जैसा वहां था वैसा ही आता है। थोड़ा सा अपने जो ग्लो है वह कहते हैं वह कहता है कि तेज को कम कर लेता है प्रकाश को कम कर लेता है थोड़ा सा ग्लो है उसको वो कम कर लेता है मगर आता है रामपाल का जो ईश्वर मैं कबीर कबीर जी जो संत कबीर दास जी हैं उनकी बात
00:02:31:20 नहीं कर रहा हूं रामपाल के द्वारा बनाया गया गाढ़ा गया एक तथाकथित ईश्वर उसकी बात कर रहा हूं काल्पनिक ईश्वर तो वो अपने शरीर का नाश नहीं कर सकता है तीसरी बात क्या है कि वो अपने शरीर को परिवर्तित भी नहीं कर सकता क्योंकि अगर परिवर्तित कर लेगा तो वो शाश्वत शरीर नहीं रह जाएगा। शाश्वत तो वही है ना जो परिवर्तन जो परिवर्तनीय परिवर्तनशील ना हो। यदि वो शरीर जिस रूप में वो दिखाई दे रहा है और उसको परिवर्तित कर सकता है यदि वो करता है तो वो सर्वशक्तिमान रहेगा। मगर जब जब वो कर लेगा तो वो शाश्वत नहीं रहेगा और अगर वह नहीं कर पाता है तो वह सर्वशक्तिमान नहीं रहेगा। तो इस तरीके से बहुत से
00:03:16:02 कारण है जो उसके रामपाल के ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध नहीं करते हैं। दूसरा क्या है कि जो रामपाल का ईश्वर है वो सर्वव्यापक भी नहीं है। वैसे रामपाल के ही द्वारा बताया गया जो जितनी भी वह है क्या कहेंगे उसको फिलॉसफी तो नहीं कह सकते कूड़ा कूड़ा है वो क्योंकि मगर क्या कहें उसको रामपाल के द्वारा दी गई जो भी जानकारी है जो भी तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं उसके अनुसार जो काल है वो मन भी है और काल जो है वो इस तरीका है कि वो सब जगह मौजूद है और काल को इसने रामपाल ने महाविष्णु भी माना है विष्णु को सर्व्यापक भी माना है इसी भगवत गीता की ट्रांसलेशन तो उस हिसाब से देखा जाए तो काल काल तब भी सर्वव्यापक है जो रामपाल का काल है वो सर्वव्यापक है मगर रामपाल का ईश्वर सर्वव्यापक नहीं है ईश्वर क्या है ईश्वर ईश्वर की जो शक्ति है वो सब जगह है जिसमें रामपाल उदाहरण भी देता है कि भाई जिस प्रकार से सूर्य की जो रोशनी सूर्य की जो किरणें होती हैं सूर्य वही रहता है मगर किरणें सब जगह जाती है और उसमें पूरे जगत में व्यवस्था बनाते हैं।
00:04:31:25 तो उसी प्रकार से जो ईश्वर है रामपाल का रामपाल का पूर्ण ब्रह्म कबीर तो वो जो है एक जगह रहता है और उसके उसके द्वारा प्रकाशित होता है पूरा संसार और उस प्रकाश से उस निराकार शक्ति से व्याप्त है। तो सर्वव्यापक का अर्थ वो ये नहीं लेता कि वो स्वयं सर्वव्यापी है। वो ये लेता है कि वो शक्ति के रूप में उसकी शक्ति सर्वव्यापी है। उसकी शक्ति सब जगह है। वह बात आगे देखेंगे सर्व्यापक का अर्थ क्या होता है? वह सही से अर्थ लेता है कि नहीं लेता। मगर उसका ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं है। फर्स्ट दूसरा उसका ईश्वर सर्वव्यापक भी नहीं है। अच्छा सर्वव्यापक में एक दिक्कत क्या आती है कि जैसे उसने कहा कि जो सूर्य है उसकी जो किरणों के समान ईश्वर एक जगह है और उसकी क्या कहते हैं? शक्ति सब जगह व्याप्त है। प्रॉब्लम यह है कि सूर्य से जितना दूर हम हैं उसके हिसाब से उसकी जो किरणों की जो गर्मी होती है, उसकी जो लपट होती है जो उसका उसकी दाहक क्षमता होती है वो प्रभावित होती है। यानी कि जहां पर सूर्य है वहां उसकी दाहक क्षमता बहुत है। और जहां हम लोग हैं वहां ऐसा नहीं है कि सूर्य की किरण पड़ी और हम जल गए। मगर जहां पर सूर्य स्वयं
00:05:46:28 है वहां हम जाएंगे तो वहां पर उसकी इतनी दाहकता है इतनी दाहक क्षमता है कि हम उससे जल जाएंगे। इसका अर्थ क्या हुआ? यदि सूर्य के समान ईश्वर को माना जाए तो ईश्वर की पकड़ उतनी यहां पर नहीं है जितनी पकड़ वो जहां पर स्वयं बैठा है वहां पर है। इसका मतलब ईश्वर समान रूप से सब जगह पावरफुल नहीं है। जितना पावरफुल वो वहां पर है उतना पावरफुल यहां पर नहीं है। जिस प्रकार से सूरज जितना पावरफुल जहां पर सूरज है वहां पर है उतना उतना पावरफुल सूरज सूरज की किरणों के द्वारा जो जो सूरज अपनी ऊष्मा को भेजता है एनर्जी को भेजता है पृथ्वी पर उतनी ऊर्जा सूरज की नहीं होती है जितनी ऊर्जा जहां पर सूरज स्वयं है वहां पर होती है तो इस नजरिए से सर्वव्यापकता जब हम नहीं स्वीकारते हैं ईश्वर की तो ईश्वर वहां भी बाधित सिद्ध होता है और उसके जो ईश्वर होने में ही दोष आ जाता है ठीक ठीक
00:06:49:14 है। अच्छा अब इसके बाद क्या आता है? कुछ इनके द्वारा जो गढ़ी गई चीजें हैं जो बेची जाने वाली किताबें हैं समाज में उसमें कुछ एक जरूरी प्रश्न है जिनका जवाब उसने कभी दिया ही नहीं है। जैसे कि रामपाल ने कभी भी नास्तिकता का खंडन नहीं किया। रामपाल ने पहले से जो आस्तिक है उनको यह बताया कि तुम जिसे भगवान मान रहे हो वह भगवान नहीं है। मैं बता रहा हूं वास्तविक भगवान। मगर उसने कभी भी यह किसी को नहीं बताया कि भगवान है ये कैसे सिद्ध होता है। भगवान है। ये कभी इसने बात नहीं की। ना ही इसका कोई ग्रंथ है नास्तिकता के खंडन में ना ही इसका कोई लेक्चर है। हां अब हमारे वीडियोस को देख कर के जरूर इनके जो चेले हैं इनके गुरु ने तो इनको वो ज्ञान नहीं दिया। मगर हमारे वीडियोस से वो ज्ञान ले ले के जरूर ये लोग आकर के जवाब दे सकते हैं कि हां ये नास्तिकता का खंडन है। मगर सवाल ये उठता है कि इनके गुरु ने वो इनको सिखाया है कि नहीं सिखाया। है ना? और धर्म की जो वास्तविक परिभाषा है वो भी रामपाल ने अपने लोगों को नहीं सिखाई है। तो ये तो हो गई ये तो हो गए कुछ बुलेट पॉइंट्स। ठीक है? एक और है तात्विक विवेचना में अगर जाए तो यदि कबीर
00:08:04:21 ने सृष्टि को बनाया है पूरी की पूरी तो हमें यह मानना पड़ेगा कि कबीर ने जब सृष्टि बनाई है सूरज चंदा जो भी बनाया है उस समय अगर कबीर को सशरीर मानेंगे तो हमें मानना पड़ेगा कि उसके कंधे के आसपास के बाहर की जगह कंधे के बाहर की जगह वहां स्पेस है जहां कबीर था तो उस स्पेस को किसने बनाया इस तरीके के सवालों का जवाब भी उसने नहीं नहीं दिया है। ठीक है? अब बात आती है कि आगे चलते हैं तो उसने कुछ गपोड़बाजियां भी की हैं रामपाल ने। जैसे सृष्टि रचना की अगर बात करें तो काल का कहना है कि वह काल का कहना है कि वह उसका भी जन्म जन्म मरण होता है। चलो यही बात ले लेते हैं। काल का भी जन्म मरण होता है। मगर प्रॉब्लम यह है कि जब काल मर जाता है तो काल की वजह से ही लोग फंसे हुए हैं। जब काल की वजह से जीवात्माएं फंसी हुई हैं। जब काल मर जाता है तो उन जीवात्माओं को मुक्ति मिल जाती है। मोक्ष मिल जाता है। क्या होता है उन जीवात्माओं को? अगर मोक्ष नहीं मिलता तो फिर उसको उनको फसाने वाला काल नहीं है। और अगर मोक्ष मिल जाता है तो उसके बाद काल का दोबारा जन्म
00:09:19:27 होता है तो वह जो मोक्ष में चली गई थी जीवात्मा उनको उनको ही दोबारा फंसाया जाता है। दोबारा से वो जीवात्माएं उससे अट्रैक्ट होती हैं। एक बात और है कि आत्माओं को अविनाशी तो माना है रामपाल ने मगर आत्माओं को जीवात्मा को रामपाल ने नित्य नहीं माना है मतलब कि जो आत्मा है वह हमेशा से नहीं थी यानी कि वो उसका जन्म हुआ है उसके बाद वह अविनाशी अब उसका नाश नहीं हो सकता ऐसा है अब जब अविनाशी कह दिया आत्मा का तो
00:10:00:00 जब हमने काल जब काल को बनाया था और काल मर जाता है तो काल का अभाव हुआ कि नहीं हुआ या उसमें क्या थ्योरी है ये सब बातें ये नहीं बताते रामपाल के लोग अब उसमें प्रॉब्लम यह है कि आत्मा की कभी आत्मा जो है अविनाशी है उसका उसका जन्म होता है मगर वह अविनाशी उसको मारा नहीं जा सकता मगर उसका जन्म नित्य है नित्य नहीं है शाश्वत नहीं है तो इसमें जब आत्माओं को मुक्ति मिल जाती है। है ना? और यह काल की मृत्यु हो जाती है। आत्माओं को मुक्ति मिल जाती है। काल की मृत्यु हो जाती है। तो दोबारा जब सृष्टि रचनी होती है। है ना? तो वहां पर क्या काल को दोबारा से उत्पन्न करता है? क्या काल भी अविनाशी? वो क्या काल भी शाश्वत था जो पहले से था? है और रहेगा। क्योंकि आत्माएं तो नहीं है। तो यह कुछ खिचड़ी पकाई जाती है जो अभी धीरे-धीरे जब हम इसको इस सफर में आगे चलेंगे इस यात्रा में तो आपको रोचकता के साथ जानने को मिलेंग चीजें। इसके बाद एक बुलेट पॉइंट और है कि हम जो काल है वो बताया जाता है कि काल ने
00:11:15:18 प्रकृति के साथ रमण किया। अपनी भाषा में लोग नीचता के साथ परोसते हैं उस तथ्य को प्रकृति देवी के साथ उसने रमण किया काल ने और जो है ब्रह्मा विष्णु महेश उत्पन्न हुए उनकी संतान है यानी कि ब्रह्मा विष्णु और ब्रह्मा विष्णु महेश को ये कहता है ये गुण है सतराज और तम गुण है ये ये इनका गुण के गुण के बिना इनका कोई अस्तित्व नहीं है ये ये कहता है तो ब्रह्मा विष्णु महेश अगर गुण है तो क्योंकि इसके अनुसार रामपाल के अनुसार काल ने देवी दुर्गा के साथ छोड़ो देवी दुर्गा नहीं प्रकृति के साथ रमण किया वह भी उसकी इच्छा के विरुद्ध जाकर के और उससे ये लोग उत्पन्न हुए हैं तो जब इच्छा के विरुद्ध जाकर के काल ऐसा कार्य कर रहा है तो वहां पर ये मानना पड़ेगा कि काल जो है तमोगुण से प्रभावित है यानी कि शिवजी से प्रभावित है। मगर शिवजी कौन है? शिवजी उत्पन्न कब होते हैं? इसके अनुसार जब काल प्रकृति से रमण करता है तो यदि वह प्रकृति से जोर जबरदस्ती से रमण कर रहा है तो वो शिवजी से प्रभावित मानना उसे शिवजी से प्रभावित मानना पड़ेगा और अन्यथा यदि शिव जी को काल से उत्पन्न मानना माना जा रहा है तो फिर यह मानना पड़ेगा
00:12:30:19 कि वह रमण नहीं था कुछ और था जिसको इसने लोगों को मूर्ख बनाने के लिए कुछ का कुछ बोला है इसके अलावा काल के ऊपर ही और मीमांसा अगर करें तो काल यह कहता है कि काल की भक्ति जो करेगा उसको काल खाएगा। जबकि आत्माओं को कोई खा नहीं सकता है। अच्छा दूसरी बात कहीं-कहीं पर मिलेगा कि उनको तप्तशिला पर भूजा जाएगा। फिर उसकी महक सूंघ तो फिर खाएगा वाली बात कट जाती है। सूंघेगा या खाएगा दोनों अलग-अलग चीजें हैं। तो यह भी कंट्राडिक्शन है। इसके बाद काल को लेकर के यह भी बातें आती है कि काल ने जब अपना रूप दिखा दिया था वैसे वो अपना रूप दिखा। हां उसकी एक प्रतिज्ञा है कि वह अपना रूप किसी को दिखाता नहीं है। काल की एक प्रतिज्ञा है कि वो अपना रूप दिखाता नहीं है। मगर रामपाल के ही अनुसार अर्जुन को उसने अपना रूप दिखा दिया। क्यों दिखाया? दूसरी बात यह है कि जब अर्जुन ने काल का रूप देख लिया। पता चल गया कि कृष्ण नहीं है। गीता बोलने वाला कोई और है। उसके बाद भी अर्जुन ने गीता बोलने वाले को कृष्ण ही कहा। हे कृष्ण हे मधुसूदन ये सब उसमें आगे कहा है। ठीक है? अभी किसी को आप वो ना
00:13:46:13 दीजिएगा। कबीर सागर के कबीर सागर के अनुसार अभी इसमें आपको लिंक दे दिया जाएगा थोड़ी देर बाद। कबीर सागर के अनुसार जो काल को पहले ही शब्द के रूप में उत्पन्न कर दिया गया था। तो बहुत सी चीजें हैं। यदि हम काल से उत्पन्न ब्रह्मा विष्णु महेश को मानेंगे तो हम तो काल का ब्रह्मा विष्णु महेश को अगर गुण मानते हैं तो काल का इस तरह की ऐसी कोई गतिविधि जो जिसको तामस कहा जा सके तो उसमें लिप्त होना नहीं मान सकते और यदि लिप्त मान रहे हैं और ब्रह्मा विष्णु महेश को गुण मान रहे हैं तो हमें मानना पड़ेगा काल से उत्पन्न नहीं हुए ब्रह्मा विष्णु महेश का जो अस्तित्व है वो काल से भी पहले है और काल ब्रह्मा विष्णु महेश के अनुगत है क्योंकि वो वो प्रभावित हो रहा है उनसे। ठीक है? ये भी एक चीज हो गई। अब इसके बाद ये सारी जो खिचड़ी इसने पकाई है रामपाल ने वो हां जी पहाड़ी जी आज ताला लग गया है। तो इसके बाद ये सारी खिचड़ी जो पकाई है रामपाल ने
00:14:58:27 वो यह कहते हुए पकाई है कि मैं तत्वदर्शी हूं। है ना? तो सबसे पहले बोले मैं तत्वदर्शी हूं इसलिए और तत्वदर्शी के पास जाने के लिए भगवत गीता में कहा गया है। इसलिए तुम्हें मेरे से मेरी बात को प्रमाण मानना चाहिए। अब इसमें प्रॉब्लम क्या है कि ये लोग कहते हैं कि काल वो है जो धोखेबाजी भी करता है। अपना काम निकालता है। झूठ भी बोलता है। यहां तक कि ये भी कहते हैं कि भगवत गीता में पांच पांच% जो श्लोक है वो काल ने अपने मन से कह दिए। उनको माना नहीं जा सकता। मानना नहीं है और बाकी 95% जो श्लोक है वह सही है। वह परमेश्वर की वाणी है जो काल ने कही है। तो सबसे पहली बात है कि इन्होंने कहीं पर भी यह नहीं बताया कि एग्जैक्ट वो 5% श्लोकों का अर्थ हो जाता है 35 श्लोक। 700 श्लोक है अगर भगवत गीता में तो 10% हुआ 70 और 35 श्लोक। तो 35 जो श्लोक हैं वो कौन से हैं? ये स्पष्ट नहीं करते। स्पष्ट इसलिए नहीं करते क्योंकि अगर उन 35 श्लोकों को छोड़ के बात की जाएगी तो उसके बाद ये कभी किसी श्लोक के लिए नहीं कह सकते कि ये नहीं माना जाएगा। है ना? तो इसलिए कभी ये क्लियर नहीं करेंगे कि 35 श्लोक कौन से हैं जिनको नहीं मानना है। दूसरी बात ये है
00:16:14:00 कि काल जब झूठ बोल सकता है तो वो यह बात भी तो झूठ बोल सकता है कि तत्वदर्शी के पास जाओ। या वो ये बात भी तो झूठ बोल सकता है कि तत्वदर्शी वो होगा जो उल्टे वृक्ष की व्याख्या करेगा। तो यहां पर भी यह फस जाते हैं कि यह भगवत गीता के अकॉर्डिंगली रामपाल को तत्वदर्शी सिद्ध नहीं कर सकते। और अगर रामपाल भगवत गीता के अनुसार तत्वदर्शी है तो इन्होंने अपने गीता में कई जगह पर ये लिख दिया है कि ज्ञान यज्ञ से भी मुक्ति नहीं मिलेगी। और भगवत गीता में जिस चार 34 की बात करते हैं तत्वदर्शी के पास जाने की तो भगवत गीता में वह तत्वदर्शी उसे किया उसे कहा गया है जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान आपको देगा यानी कि ऐसा ज्ञान देगा जो रामपाल के अनुसार मुक्ति दायक नहीं है तो रामपाल के ही अनुसार वो जो तत्वदर्शी है भगवत गीता का रामपाल के अनुसार वो मोक्ष देने वाला नहीं है मोक्ष का ज्ञान बताने वाला नहीं है तो इसका मतलब मतलब क्या हुआ? रामपाल के ही अनुसार रामपाल मोक्षदायक नहीं है।
00:17:25:26 और तो यहां से इसकी रामपाल की जो तत्वदर्शी होने का वो है वो खत्म हो जाता है। अगर काल को झूठा मान लेंगे अप्रामाणिक मान लेंगे तो अरे हटाओ भाई इनको। अगर काल को हम झूठा मान लेंगे तो हमारा उसकी क्रेडिबिलिटी पर फर्क वो आ जाता है कि भाई क्या कहते हैं कि इसने कहां पे सच बोला है कहां पे झूठ बोला है इसके अलावा एक बात और है ये शास्त्र हमें प्रदान करने वाले ब्रह्मा विष्णु महेश व्यास जी इन सबको इसने अज्ञानी भी बोला है रामपाल ने तो जब ये सब अज्ञानी है तो इसकी इन बातों पर विश्वास कैसे किया जाए कि तत्वदर्शी वही होगा जो उल्टे वृक्ष के रूप में व्याख्या कर देगा संसार की या कोई भी बात जिसके आधार पर अपनी बिल्डिंग खड़ी कर रहा है उस बात को क्यों मान लिया जाए जब वो काल ने बोली है व्यास जी ने कही है ब्रह्मा विष्णु महेश में से किसी एक ने कही
00:18:19:12 क्योंकि तो एक ये भी बात आ जाती है इसके अलावे बहुत से बुलेट पॉइंट्स हैं जरूरी जरूरी जिसमें से ज्यादातर मैंने आपको बता दिए हैं कि इसका कहना है कि भगवत गीता में जो ज्ञान वेदों से मैच खाएगा वेद से मैच खाएगा उस ज्ञान को ही माना जाएगा और जो ज्ञान वेद से मैच नहीं खाएगा उसको नहीं माना जाएगा। अब यह कहता है कि भगवत भगवत गीता को बोलने वाला जो काल ब्रह्म है वो उसने कहा कि तुम मेरी मेरी शरण से किसी और की शरण में जाओ। है ना? यानी कि किसी और के लिए आचरण करो। इसका कहना है ब्रज। किसी और के लिए गति करो। किसी और के लिए जाओ। किसी और की शरण में जाओ। यह इसके अनुसार भगवत गीता कहने वाले ने कहा है। अब यहां पर वेदों में आता है एक ब्रह्मचर्य सूक्त पूरा का पूरा वेदों में पूरा कई जगह ब्रह्मचर्य के बारे में बात हो रही है। ब्रह्मचारी कौन है? ब्रह्म के लिए आचरण करने वाला। ब्रह्म के लिए गति करने वाला। है ना? तो अब वेदों में कहा जा रहा है ब्रह्म के लिए गति करो। ब्रह्म के लिए आचरण करो। और गीता में यदि इनके अनुसार से कहा जा रहा है कि जाओ मेरी शरण से किसी और की शरण में जाओ। ब्रह्म की शरण से पूर्ण
00:19:34:19 ब्रह्म की शरण में जाओ तो वहां कहा जा रहा है ब्रह्म की शरण में जाने के लिए और यहां कहा जा रहा है ब्रह्म की शरण से जाने वहां कहा जा रहा है ब्रह्म की शरण में जाने के लिए और यहां कहा जा रहा है ब्रह्म की शरण से कहीं और जाने के लिए तो भगवत गीता की इस बात को क्यों मान रहे हो हम इसी प्रकार से और भी कई बातें जो अगर इनका अर्थ लेंगे भगवत गीता का तो वह मैच नहीं करती वेदों से तो यह कुछ बुलेट पॉइंट्स हैं और कुछ याद आते रहेंगे तो हम बताते रहेंगे। [संगीत]
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
-
⬜Hindi SRT Required
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
रामपाल का मनमौजी गीता अर्थ #1 अध्याय 2 #gita #gitagyan
🔗 This video is made from parts of these videos
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮