⬜ Not used yet · 00:00:00:02 – 00:27:33:00 (27:33)
00:00:00:02 जी दरअसल आपका दो बार कॉल आया था 11:00 बजे के लगभग आपने हमें शायद 19 तारीख की शाम को कॉल किया था तो हम बात नहीं कर पाए हां जी हां जी हां जी रात को लगभग मैंने फोन किया था शायद रात के समय था जी आपके पास जी मैंने दरअसल कांफ्रेंस में भी थे वो जो आपने जो YouTube पे काम बनाया है काशी शास्त्रस्थली पे हां हां तो जी तो वो भी कांफ्रेंस में थे तो मैंने उनको कहा था कि बहुत अच्छी मौका थी आपसे प्रत्यक्ष रूप से उनसे बात हो गई थी तो आपको उनको कहना चाहिए था कि आप जगत के जितने भी धुरंधर प्रखंड विद्वान हैं आपके पुरवानी जगत के आप उनको कहिए कि अब तो बहुत बढ़िया मौका है यहां काशी में आने के बाद फिर वो पुनः शास्त्रार्थ हो तभी तो लोगों की लोगों को लेकर मूर्ति पूजा अवतारवाद या कुछ भी जो है उसके शास्त्रार्थ तभी तो कुछ लोगों को अंधविश्वास जो या फिर जो सत्य है जब तक वाद विवाद और शास्त्रार्थ नहीं होगी तब तक सत्य पहुंच नहीं सकते हैं तो लोगों को कम से कम भ्रांतियां तो नहीं रहेगी ना आर्य पुरानी जगत में वैसे बहुत लोग चिपनी टीका टिकटनी कहते हैं कि आर्यनामा जी है ये है वो है तो इसके प्रति भी लोगों की जो भ्रांतियां है ये भी भ्रांतियां
00:01:15:15 कम से कम दूर होगी शास्त्रार्थ से तब तो लोगों को पता चलेगा कि आर्य समाज के पास ये सत्य है ये ग्रंथ है ये नहीं आर्यन नमाजी वो कुछ भटके हुए लोग दिशाहीन लोग कहते हैं हमने कभी नहीं कहा हां हां तो मतलब प्रबुद्ध प्रबुद्ध प्रबुद्ध वर्ग है वो नहीं कहता कुछ दिशाहीन लोग जो लोग हैं वो ऐसा कह सकते हैं कोई नहीं तो शास्त्र हम तो मना करते हैं आपत्तिजनक टिप्पणियां करने से कोई नहीं तो फिर भी शास्त्रास होगी वाद होगी इस तरह का बातें होगी तो भी जो है मूर्ख हमने तो आपको शायद फोन लगाया था उस समय जब हम वहां पर थे काशी में कोई विद्वत जन हो तो उनसे आप हमारी भेंट करवा दीजिए कीजिए। हां बहुत बढ़िया मैं तो मैं तो आपका कॉल मेरे पास आया नहीं थे तो मैं तो आपसे जो सर्वशक्तिमान का जो उनको शायद पूर्ण रूप से उतनी विशेष जानकारी नहीं हालांकि वो मंत्री हैं किसी गुरुकुल के पढ़े हुए आचार्य स्नातक सन्यासी से आप बात करेंगे तो वो तो काफी हद तक आपकी शंकाओं का निर्माण हो सकता है। हमने असल में कहा जिन्होंने उनको भेजा था उन दोनों वो दोनों नंबर वहां पर लिखे हुए थे शास्त्रार्थ स्थल पर जी तो हमने जब फोन मिलाया था
00:02:30:19 हमने वरिष्ठ जो नाम लिखा था जो वरिष्ठ पद वहां पर लिखा होगा शायद मंत्री या एक नाम और था तो हमने उनको मिलाया था तो हमने उनको यह कहा था कि आप किन्ही ऐसे विद्वान को भेजिएगा जो आर्य समाज के सिद्धांतों को यथावत जानते और रख सकने में संपन्न मतलब सामर्थ्यवान तो उन्होंने कहा ठीक है हम भेज रहे हैं तो उन्होंने उनको भेजा तो उन्हीं के साथ हमारी बातचीत हुई इससे ज्यादा हम और क्या कर सकते हैं नहीं आपकी बात आपकी कथन तो ठीक ठीक करती तो उनकी थी कि भाई वो गुरुकुल के पढ़ने वाले कोई बढ़िया जो सिद्धांत वैदिक सिद्धांत को जानता हो बढ़िया स्वामी दानंद के सिद्धांतों को जानता हो ईश्वर के सिद्धांत को जानता हो तो वो व्यक्ति आएंगे तो काफी हद तक जो है बिल्कुल निरत्तर हो सकते थे। यहां तक मुझे उम्मीद थी। अब वह मंत्री जी क्या दरअसल मतलब उस तरह का कोई उन्होंने भी उन्होंने बताया तो था कि उन्होंने आचार्य किया है शास्त्री किया ऐसा कुछ नहीं आचार्य शास्त्री यदि उन्होंने ठीक है किया होगा तो कोई कौन सा विषय से किया है वो तो फिर उन्होंने शायद यह नहीं खोल के बताया ना जो दर्शनों का ज्ञाता हो उपनिषदों का ज्ञाता हो मनुष्य विधि का ज्ञाता हो वाल्मीकि रामायण का ज्ञाता हो विशेष रूप से वेदों का ज्ञाता हो ऋषियों की धरोहर को जो
00:03:45:25 संभाल कर रखकर चलता हो तो आप आप अगर किन्ही विद्वान को जानते हैं तो उनसे हमारी बात करवा दीजिए। हम बात कर लेंगे। हां बिल्कुल बिल्कुल हम तो लेकिन वो अब कहेंगे आपसे कुछ स्थान विशेष का समय यदि वो मांगे आपसे तो क्योंकि देखिए ये जो विषय होती है ये फोन पर मोटा मोटी बात फोन पर नहीं फोन पर नहीं जी हम YouTube पर एक लाइव चर्चा का आयोजन कर लेंगे ऑनलाइन और उसमें वो उधर से अपने मोबाइल के सामने बैठ जाएंगे इधर हम बैठ जाएंगे और वो चर्चा लाइव सबको दिखाई भी देगी। हां ये भी बात नहीं देखिए ये जो आप कौन से विषय उनसे चर्चा करना चाहेंगे? ईश्वर के ऊपर ही कर लेंगे। नहीं तो ईश्वर के ऊपर मतलब क्या पक्ष लेंगे जो आर्य जो वैदिक सिद्धांत का जो पक्ष है उसका खान की दृष्टि से पक्ष की स्थापना करेंगे। वैदिक सिद्धांत का पक्ष क्या है? वह तो विवाद का ही विषय है ना। जी वही तो विवाद का विषय है। आर्य समूह ने उसको स्वीकारा है तो ऐसा ऐसा हम पहले से ही थोड़ी ना कह देंगे कि हम वैदिक सिद्धांत का खंडन
00:05:01:01 कर रहे हैं। हमारा कहना तो यह है कि वैदिक सिद्धांत के अनुसार ईश्वर अवतार ले सकता है। जी तो बात ऐसी है कि वेद का ही अर्थ आर्य समाज भी बताने का दावा कर रहा है। और वेद का ही, वेद का ही अर्थ जो अन्य प्रामाणिक आचार्यों की परंपराएं हैं वो भी बताने का दावा कर रही हैं। तो इसलिए फिर यह आ जाता है कि भाई ठीक है। यदि आपका अर्थ मान भी लिया जाए तो क्या वह ईश्वर उसमें जो ईश्वरत्व है वो घट रहा है? वो फिर वो बात आ जाती है। कि अर्थ आपका मान लिया जाए तो क्या यह ईश्वर वही ईश्वर है जिसकी आवश्यकता है मनुष्य मात्र को। प्राणी मात्र तो फिर उस तरह से बात हो जाती है तो अच्छी बात है आपकी भावना हम आपकी भावना का हम स्वागत करते हैं जहां तक हमें हमें हमारी जहां तक अनुभव और मेरी जहां तक ज्ञान के स्तर है तो मैं तो ये आपसे निवेदन करूंगा कि सबसे बढ़िया रहेगा कहीं कोई स्थान विशेष का आप आयोजन करें वहां पे और वहां पे आपके जगत का या फिर कोई आप ही हो कोई एक चुने आप और वहां शास्त्रार्थ इस विषय पर हो जो जिस विषय के ऐसा
00:06:16:02 होता है का रहेगा क्योंकि YouTube पर YouTube पर क्या विशेष उस तरह का ज्यादा प्रचार प्रसार प्रसार नहीं होता क्योंकि आपकी YouTube का जो व्यू है भी है बहुत कम देखते हैं और शास्त्रार्थ होगी तो वहां मीडिया भी आएगा वहां नियम होगा शास्त्रार्थ का तो उस प्रकार किसी कारण से तो कई किसी कारण से तो बहुत अच्छे-अच्छे जो मसले हैं जो आसानी से सुलझ सकते हैं वो सुलझते नहीं है कि बहुत बड़ा आयोजन कि मीडिया भी आएगी यह भी होगा वह भी होगा उसके चक्कर में जो मुख्य बात है वह गौण हो जाती है अगर गौ नहीं होगी मुख्य बात जैसे मान लीजिए कि अब अब आयोजन जब होगा तब होगा तब तक एक चर्चा कर लीजिए आयोजन भी हो जाएगा आगे चलकर के ऐसा नहीं है आयोजन की चीजें भी हो रही है तो आयोजन जब होगा तब होगा अरे भाई अपने धर्म के बारे में अपने ईश्वर के बारे में बात करने में हमको सदैव एक बहुत बड़ा विशाल एक भव्य वो सब आरंबर ही क्यों चाहिए? हम तो चाहे जब बात कर सकते हैं हमारे ईश्वर के बारे में कि हमारा ईश्वर ऐसा है वैसा है और करते भी हैं। ऐसा नहीं है साधारण
00:07:31:13 रूप से बात नहीं करते हैं। मगर जब है प्रभु जी इसके लिए तो इसके लिए तो ये बिल्कुल हर जगह के जितने भी धुरंधर विद्वान है वो तो चाहते हैं वो तो ढूंढते हैं वो तो वो तो बिल्कुल इस तरह का मतलब चुनौती देते हैं भरी मंच पे सभा पे वो तो चाहते हैं कि कोई आए हमसे शास्त्र भागने का उनको मैंने देखा एक प्रकार से उनके पास भयंकर तर्क होता है और प्रमाणित ग्रंथों का बात करते तो आप उन्हीं से हमारी बात करवा दीजिए हम लोग बहुत बड़ा स्तर का वो आयोजन ना भी कर पाए तो सामान्य चर्चा तो आयोजित कर ही सकते हैं। हां ये तो हो सकता है। अब जैसे की होता क्या है देखिए एक बात ये भी है कि बहुत ज्यादा हमारी आपसी जो दिखाई दे मान लीजिए प्रतिस्पर्धा जी तो उससे भी तो दूसरे दलों को वो मिलती है। क्या कहते है हां ये बात है शक्ति मिलती है कि ये लोग आपस में लड़ रहे है जब हम पर हावी होना होगा तो आपकी आपका नाम लेंगे। जब आप पे हावी होना होगा तो हमारा नाम लेंगे। है ना? मैं यहां रुकना चाहता हूं आपसे थोड़ी देर के लिए। एक बी एक मिनट मैं बात पूरी कर दूं बस एक मिनट तो अब उसी को हमने चर्चा का रूप दिया देखिए वह भाई साहब जो आए थे उनके साथ चर्चा हुई उसमें हमारा कहीं कोई हारजीत का उद्देश्य थोड़ी ना था चर्चा हुई
00:08:47:09 दोनों जहां तक मेरी भावना थी जहां तक मैं समझ पाया था हो सकता है मेरी भ्रांति होगी आपने YouTube ये YouTube पर कुछ इस तरह का कार्य कर रहे हैं ये दृष्टि से कर रहे हैं कि पौराणिक जगत में जो धारणा बनी हुई है आर्य समाज के प्रति थोड़ी बहुत भी यह धारणा बिल्कुल मतलब इस प्रकार से धूमिल हो जाए कि लोग जो है आर्य समाज से कटे। आर्य समाज से नहीं कटे। आप आप देखिए देखिए आपकी जो आपकी जो बात जो जो वक्तव्य जो भी होती थी बात करने की जो शैली होती थी वो खंडन की दृष्टि से नहीं होती थी। जो आर्य समाज का तो सिद्धांत नहीं है वैदिक सिद्धांत है आर्य समाज एक संगठन है वो जो संगठन जिस सिद्धांत को फॉलो करता है उसी में से आप कुछ ना कुछ जो है निकालते निकाल निकाल कर और लोगों के सामने ये स्थापित करते थे ये आपकी मानसा थी वैसे कोई ये नहीं था कि हां चलो मानता हूं नहीं वो देखिए हमारा उद्देश्य जो आप कह रहे हैं वो है वास्तविक धर्म ईश्वर को बाहर बाहर लाना और जहां पर जो कुछ त्रुटि है तो उस कोई संस्था का कोई विरोध नहीं है। जहां पर जो कोई सिद्धांत है जो कि वास्तविक सनातन सिद्धांतों के आड़े आ रहा है
00:10:03:01 वो जो है गौण हो जाए उसका शोधन हो जाए। ऐसा नहीं है कि आर्य समाज से कोई जुड़े नहीं। आर्य समाज से लोग कट जाए। हमारा उद्देश्य है कि आर्य समाज के द्वारा यदि कोई ऐसा सिद्धांत प्रचारित किया जा रहा है जो कि तार्किक और प्रामाणिक नहीं है तो उसको शोधन किया जाए उसकी उसका शोधन हो जाए और वैसे भी आर्य समाज का सिद्धांत देखिए आर्य समाज का आर्य समाज में जो सत्कार प्रकाश इत्यादि है उसको कई लोग कह देते हैं कि वो शोध ग्रंथ है वो तो जब जो सही लगेगा तो उसमें बदल भी दिया जाएगा तो उस दृष्टि से नहीं है नहीं वो तो खुद स्वामी स्वामी दयानंद जी ने तो खुद अंतिम में स्वमंत्र्य मंतव्य में लिखा है कि मेरा अभिप्राय लेष मात्र भी उद्देश्य नहीं है नया मतप चलाना में तो मैंने तो वही कहा है जो ब्रह्मा ऋषि से लेकर जननी ऋषि मुनियों तक कहा है और जो तुमसे कोई पूछे तुम्हारा मत क्या है तो कहना कि वेद मत है और जो वेदों में लिखा है हम उसी को मानते हैं वो नहीं वेदों में वेदों में ईश्वर का साकार स्वरूप भी लेना लिखा है मगर वहां पर आर्य समाज ये मान लेता है कि वो अलंकार हो जहां तक नहीं एक एक बात बताओ मैं जहां तक मेरी जान है एक अच्छा वेद में साकार और निराकार एक ईश्वर के विषय में दो विरोधाभास ऐसा हो सकता है क्या? एक
00:11:18:18 तरफ नहीं एक मिनट मेरी बात पूर्ण होने दीजिए। एक तरफ ईश्वर कह रहा है कि मैं नस नर आदि से बंधन से रहित हूं क्योंकि 40वां अध्याय यजुर्वेद का है। एक तरफ कह रहा है कि मेरे मेरा जैसा कोई पसीना भी नहीं है। एक तरफ ईश्वर कहता है कि मैं अकायम हूं। निर्विकार हूं, अनादि हूं, अनुपम हूं, सर्वधार हूं। एक और एक तरफ कह रहा है कि मैं जन्मा हूं। मैं नहीं पहली बात तो पहली बात तो ये है क्या ईश्वर ने ये नहीं कहा है कि मैं जो है जन्म लेता हूं? नहीं वो वही तो मैं वही तो मैं मानना वही तो अब देखिए अब चर्चा यहीं पे शुरू हो रही है देख बात ऐसी है कि आप वेद की एक बात को रख करके दूसरी बात को काट नहीं सकते ना। अब मैं जैसे आपने मेरी बात पूरी होने दीजिए जैसे आपने तीन उदाहरण दिए कि ईश्वर ने कहा मैं अकाय हूं या जो भी कहा मगर अब दूसरे तरफ कहा मैं जन्म लेता हूं मैं एक होते हुए बहुत सारे उसमें जन्म लेता हूं मैं बहुत सारे रूपों में प्रकट होता हूं मेरे इतने हाथ है इतने पैर हैं ये सब कहा है ना तो इन वो निराकार के लिए कहा है सुन लीजिए सुन लीजिए तो जब हम हम ये मान लेंगे कि एक तरफ इसको ऐसे मान लेंगे ेंगे कि नहीं हमको निराकार के रूप में ही प्रस्तुत
00:12:33:22 करना है तो दूसरी जो श्रुतियां आएंगी जो वेद वैदिक प्रमाण आएंगे उनका हम ऐसा अर्थ निकालेंगे जो निराकार के पक्ष में हो जी बिल्कुल तो तो इसलिए श्रुतियां आ रही है जो साकार के ही पक्ष में मगर हमने क्योंकि मान लिया है कि निराकार का ही समर्थन करना है तो हम उनका भी अर्थ ऐसा निकालेंगे जो निराकार के पक्ष में हो जबकि श्रुतियां आ रही है साकार के पक्ष में पहली बात दूसरी बाद मनुस्मृति क्या कहती है दो 14 में कि जब दो प्रकार के वेदा वेद वैदिक प्रमाण मिल जाए श्रुतियां मिल जाए तो दोनों को धर्म के रूप में स्वीकार करना पड़ेगा और तीसरी बात यह है कि हां जब ईश्वर आपके सत्यार्थ प्रकाश में मुक्ति वाले उसमें 175 नंबर पेज पर शायद लिखा है ठीक है कि ईश्वर तर्क में नहीं आ सकता मतलब तर्क में नहीं एक प्रलय काल में एक स्थिति ऐसी होती है जो तर्क में नहीं आती है ना तो वहां पर वह स्थिति ईश्वर पर भी लागू हो रही है तर्क में नहीं आता ईश्वर तो उसके बाद ईश्वर तर्क में कैसे आ जाएगा तो ये ये दो आपस में विरोधाभास वाली बात नहीं होगी तो हां ईश्वर निराकार है मगर
00:13:48:24 वो व्यवहारिक रूप से साकार भी होता है अब मैं आपको बताता हूं देखिए मनुस्मृति है उसको हम मानते हैं आदि ग्रंथ है उसमें उसका उसमें कोई बुरे तो ये जो ये जो बात है ना यह व्यवहारिक रूप में आने वाली नहीं अब अब मेरी बात ही पूर्ण होने दीजिए। मैं मेरी बात मेरी बात पूरी नहीं हुई थी। मैं पूरी कर लूं। ये जो संक्षिप्त में कह रहे तो ठीक रहेगा। हां संक्षिप्त में कह दूं। व्यवहारिक रूप में आने वाली बात यह है कि जैसे ईश्वर निर्गुण है, एक रस है। जब वह एक रस है तो वह कोई कार्य नहीं करता है। मगर वहीं पर फिर ईश्वर सगुण होता है। वह कार्य करता है। जब सगुण होगा जब कार्य करेगा तो वह सगुण होगा ना। तो फिर अब ये दो आपस की वो चीजें आ गई ना कि निर्गुण भी है, सगुण भी है। तो ये दो विरोधाभासी आ गया। तो ऐसा नहीं कर सकते कि निर्गुण की स्तुति आ गई। तो हमने सगुण को मानना ही स्वीकार अस्वीकार कर दिया कि नहीं सगुण हो ही नहीं सकता। तो जब भगवान जब ईश्वर जो है कार्य कर रहे हैं तो वह सगुण है और वैसे वह एक रस में व्याप्त है और जब वो किसी विशेष देश काल परिस्थिति में सर्वत्र व्याप्त अपने ज्ञान को किसी मनुष्य प्राणी की बुद्धि का मन का विषय बना सकते हैं।
00:15:04:14 उसी प्रकार से वह सर्वत्र व्याप्त होते हुए भी किसी देश काल्प स्थिति में अपने शरीर को अमुक अमुक केवल कुछ मनुष्यों की आंखों का विषय भी बना सकते हैं। उसी को अवतार कहते हैं। नहीं ये तर्कों देखिए हम बहुत लंबित बहस हो जाएगी। आर्गुममेंट हो जाएगी इस विषय पर। जी हम भी हम अब जो आपने कहा है उसके समाधान के लिए हम थोड़ा संक्षेप में यह कहना चाहूंगा क्योंकि यह विषय थोड़ी लंबी है और यह है दरअसल देखिए मनुस्मृति को आदि ग्रंथ हम भी मानते हैं और आप भी मानते हैं मनुस्मृति में जब इस बात की वर्णन आता है श्लोक आता है तो वह तो बाद की बात है हम तो उसको बाद में देखेंगे पहले वेद है हमारा और वेद चारों वेदों में और यदि कोई ईश्वर एक तरफ कह रहा है कि मैं साकार हूं और एक तरफ कह रहा है कि मैं निराकार हूं और दो विरोधाभास एक ईश्वर में हो सकता है तो फिर वो एक प्रकार से ईश्वर में नहीं घट सकता है क्योंकि ऐसा नहीं है आप गलत बात मैंने कहा ईश्वर निर्गुण भी है ईश्वर सगुण भी है तो ये विरोधाभास नहीं है सगुण निर्गुण का देखिए सगुण निर्गुण का परिभाषा कुछ अलग होता है जो गुणों से रहित हो तो जब गुणों से रहित है तो सगुण कैसे हो जाएगा नहीं वही कह रहा हूं मैं कि बहुत ही लंबी विषय हो जाएगी और विषय की आप ऐसा
00:16:19:18 करिए सुनिए मैं बताऊं जब बड़ा आयोजन होगा तब होगा जी मगर तब तक आप जो है किसी सामान्य चर्चा के लिए अगर आना चाहे तो आ सकते हैं। अन्यथा हमें बताएं नहीं मैं मैं दरअसल मैं मैं आपको जरूर ये जो है एक बड़े विद्वान आचार्य जी के आपके जो है संपर्क में मैं जोड़ूंगा और जोड़ने का प्रयास करूंगा। मैं नहीं आता क्योंकि YouTube बनाएंगे तो उसमें दो चार 10 2000 लोग देखेंगे सुनेंगे। नहीं दो चार घंटे 100 नहीं हमारे लोग हज़ारों लोग देखते हैं 20 20 हां तो अब उससे क्या होगा? अब उससे क्या वहां उस यदि उस चैनल पर हजारों लोग देख रहे हैं और उस चैनल पर वीडियो बनाने वाला कोई बढ़िया युथ व्यक्ति हो तो अच्छा प्रभाव बन सकता है। अच्छा प्रभावित हो सकता है। बिल्कुल। सामान्य अब मंत्री जी जैसा है जैसे हम जैसे हम देखिए हम ये दावा नहीं करते हैं कि हम विद्वान है। हम तो गुरुकुल में थोड़ी बहुत पढ़ा है और पढ़ रहा पढ़ रहा हूं मैं। हालांकि मेरी से अगर चर्चा करना है तो मैं तो मैं आपका नंबर सेव करके रखूंगा। मैं स्नातक हो जाऊंगा। मैं पांच-छ वर्ष के बाद आपसे चर्चा करूंगा और मैं खुद मोदी जी को और योगी जी को जहां तक संभव होगा तो मैं चिट्ठी लिखकर भेजूंगा कि एक बार फिर वापस शास्त्रगत कराइए। आपके जगत में जितने भी बड़े बड़े-बड़े धुरंधर विद्वान आपको दिख रहे हैं। ये मेरे ये मेरे अंदर ये मेरे अंदर ड्रीम है। सपना है। ईश्वर के सर्व सामर्थ्य
00:17:35:01 को लेकर के आप पूरी दुनिया के किसी भी व्यक्ति से केवल हमारी ही चर्चा करा दीजिए। उतना पर्याप्त है। हां तो कोई नहीं तो हम पूरे संसार का कोई व्यक्ति ले आइए उससे बात करा दीजिए ईश्वर के सर्व सामर्थ की विषय पर कोई बात नहीं तो मैं एक बार मैं आचार्य जी से संपर्क कर लेता हूं फिर उनसे मैं पूछ लेता हूं कि आपके पास समय जो है अनुकूल कब होती है तो मैं उसके बाद मैं आपको संपर्क करता हूं आपसे बहुत अच्छी बात है बहुत अच्छी बात है ईश्वर आपकी आत्मा में ये सब ज्ञान प्रकाशित करे ताकि आगे जाकर इस तरह का छोटी छोटी बातें हो रही है और आगे जाकर फिर शास्त्रार्थ का ऐसा मौका बन जाए तो बहुत बढ़िया मौका बहुत बढ़िया रिजल्ट मिलेगा हां भाई बड़ा आयोजन जब होगा तब होगा तब तक हम लोग जितने जितना सामर्थ है उतने पर तो बात कर ही सकते हैं ना बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल ठीक है तो मैं आपसे मैं आपसे संपर्क करूंगा जी जी ठीक है नमस्कार जी मैंने उस समय कॉल किया था
00:18:34:22 आप में हमारे कॉन्फ्रेंस में महाराज जी थे स्वामी जी थे उन्होंने उन्होंने अब आपने उठाया नहीं तो फिर उन्होंने कहा कि चलो कोई नहीं वैसे उन्होंने कहा आपके बारे में कि मैं लगभग लगभग थोड़ी बहुत मुझे लगता है कि बातचीत हमारी हुई है। छोटे-मोटे आप जो है आप छोटे-मोटे लोगों को लेकर कुछ विषय छेड़ते हैं और आर्य समाज में भ्रम उत्पन्न करते हैं। इस तरह का उन्होंने और कुछ भी इसमें जो जोड़ा था, हालांकि मैं नहीं कह सकता हूं। तो मैंने उनको कहा कि वो आपसे चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मैं तो उनको कह चूका हूं कितनी मर्तबा कि आप आप आ जाओ आप यह स्वागत है। हम आपसे साक्षात करने कहां आ जाओ। मैं बताता हूं आपको। जयपुर में उनका जो है उनकी आश्रम है। गुरुकुल है। नहीं तो जयपुर जयपुर जाना पड़ेगा ना। मैं भी तो उनसे कह रहा हूं कि अगर वह ऐसा कह रहे हैं तो वो क्यों नहीं आ रहे हैं? वो आ जाएंगे। नहीं वो नहीं वो नहीं वो देखिए वो थोड़ा कथा वाचक हैं और वो चाहते हैं कि आप आप आए उनके आश्रम में आपका स्वागत करते तो ये सब बढ़िया क्या हो सकता है? नहीं। तो उसके लिए हमारे समय
00:19:49:22 की उपलब्धता भी तो होनी चाहिए ना कि हम वहां जाएं जयपुर। तो आपके पास हां। जब समय की उपलब्धता हो तो आप बताओ। तो हमें तो हम और ये बात कह रहे थे कि देखो दो बात हो सकती है। हम भी तो स्वागत कर सकते हैं उनका कि वो आ जाए हम उनका स्वागत कर लेंगे ऐसा उसमें कौन सी बड़ी बात नहीं मैं आपको बताता हूं कि वो आ सकते हैं आप कथा वाचक भी कथावाचक कौन से हैं वो क्या कथाएं वो वाचते हैं वो वो प्रवचन उद्देशक हैं वेद की कथा करते हैं वेद की कथा करते हैं वेद में कथाएं है क्या अब वो आप उनसे बात करना उद्देशक है अच्छा अच्छा और और बहुत अच्छा उपदेशक हैं और रही बात तो आपको देखो को बहुत सारी वीडियो आर्य समाज को लेकर आपने बनाया है तो मैं आपसे निवेदन करूंगा जो गुरुकुल में पढ़ने वाले आचार्य हैं जो स्नातक कर चुके हैं उनसे आप बात करेंगे तो उनसे बहुत अच्छा गुरुकुल में पढ़ने वाले बात करने से पूरा बात होने नहीं देते हैं बोलिए आप छोटे-मोटे लोगों से बात करेंगे तो उससे समाधान नहीं होगा उससे पूरी बात मैंने आपकी समझ गया मैं जब आपकी बात समझ लेता हूं तभी मैं बोलता हूं मैं आपकी बात समझ गया आपने ये कहा कि आप जो है गुरुकुल वाले सही बात करें आप छोटे-मोटे से कर लेंगे बात तो आपका समाधान नहीं होगा।
00:21:05:06 हां अब उसमें मामला यह है कि इसमें मामला यह है। अब इसमें मामला यह है कि कौन व्यक्ति छोटा-मोटा है, कौन व्यक्ति गुरुकुल गया है, कौन व्यक्ति नहीं गया है, किसी के माथे पे नहीं लिखा है। जब बात करते हैं, उसके बाद ही पता चलता है कि वो गया है कि नहीं गया है। और सामने वाले पूछ लेते हैं ना? देखिए अभी मेरी बात खत्म हो गई। मेरी बात खत्म हो गई? खत्म नहीं हुई। ऐसी आप बात कह रहे हैं नहीं तो मुझे अपनी बात पूरी करने दीजिए। ऐसी आप बात कह रहे हैं यह कहके तो मैं भी आपकी बात काट सकता हूं बार-बार। फिर तो बात हो ही नहीं पाएगी क्योंकि आप क्योंकि दूसरा व्यक्ति निर्णय करेगा कि यह बात गलत कह रहा है। इसलिए मैं इसकी बात काटने का अधिकारी हो गया।
00:21:46:04 सही है। हां। तो किसी के माथे पे तो लिखा नहीं होता है। दूसरी बात यह आती है कि हम ज्यादा से ज्यादा उसके उससे पूछ सकते हैं कि भाई आर्य समाज का विद्वान हो। वो आर्य समाज के सिद्धांतों को यथावत रूप से रक्षणा जानता हो उसको आप भेजिए या आप अगर जानते तो आप आइए। अब सामने वाला कह रहा है कि मैं जानता हूं मैं आ रहा हूं। सामने वाला कह रहा है कि मैं गुरुकुल से पढ़ाई की है। मैंने यह शास्त्री किया ये आचार्य किया है। तो इसमें हम क्या करें फिर? ठीक है बात आपकी आर्य समाज इसके कारण देखो मंत्री पद लुलता है या फिर इस तरह का कुछ है जो भी है जो भी है वो जो भी वो जो भी है मगर मगर मगर हम प्रयास करते हैं कि हमारी बात जो है वो किसी सिद्धांत को जानने वाले से विद्वान से ही हो अब नहीं मिला ऐसा नहीं है कि बिल्कुल नहीं मिला मिले भी तो उनसे बात ठीक से नहीं हो पाई या फिर वो भी निरुत्तर हुए बहुत सारे हैं 90% ऐसे हैं 10% एक गुनेच चुने हैं जो अब दूसरी बात यह है अब मामले मुद्दे की बात यह है कि अगर हमें कभी समय मिलेगा तो हम आपका नंबर सेव कर लेते हैं। हम जयपुर जाएंगे तो उनसे मिल लेंगे। अगर उनको वो उनके पास समय है। मेरी बात सुन लीजिए मेरी बात सुन लीजिए। अगर उनके पास समय है तो वह आ जाए यहां पर। यहां उनका स्वागत होगा यहां पर। वो बैठकर के चर्चा करें। कहां पे? कहां? लखनऊ।
00:23:01:25 लखनऊ में कहां पे? आप गोमती गोमती नगर आर्य समाज मंदिर में वहां आ सकते हैं? गोमती नगर आर्य समाज मंदिर किसी बीच के स्थान में करेंगे मिल बैठ के बात कर लेंगे? नहीं वहां भी तो बढ़िया है ना। वहां तो कोई देखो पक्षपात तो वहां होगा नहीं। आपके नहीं ये आपका कहना है पक्षपात देखिए ये आपका कहना है पक्षपात होगा कि नहीं होगा? जब दो ऐसे तत्व है जो एक दूसरे की विचारधारा से सहमत नहीं है तो फिर हम वहां पर यह अपेक्षा करना कि उनका जो है उनकी तरफ से नहीं होगा ऐसा यह सब बातें रखना व्यर्थ है। आप पहले ही नियम बांध दिया जाएगा। हम किसी बीच के स्थान में एकत्रित हो जाएंगे। आप जो है उन्हें बुला लीजिए। अच्छा तो उन्होंने कहा कि मैं आ सकता हूं। यदि आप नहीं मिले और तो फिर आने जाने का व्यय जो होगा खर्चा फिर आपसे वह देखो मैं जो उन्होंने कहा है मैं हम क्यों नहीं मिलेंगे क्यों नहीं मिलेंगे आप नहीं मैं जो उन्होंने कहा मैं आपको बता देता हूं मिलेंगे क्यों नहीं मैं देखिए मैं आप मैं आपकी उनकी बात समझ गया हम मिलेंगे अब ऐसे तो मैं भी कह सकता हूं कि मैं वहां जाऊं जयपुर वो नहीं मिले तो फिर यह कोई बात थोड़ी ना कोर्ट केस कर देना कोर्ट उन्होंने कहा है कि तो तो आप कोर्ट आप कोर्ट केस कर देना आप कोर्ट केस उन्होंने
00:24:16:28 स्वामी जी ने कहा ऐसी बात मैंने मैं समझ गया क्यों बात को खींचने की जरूरत ही नहीं है उन्होंने अगर कहा कोर्ट केस कर देना मैंने भी कह दिया आप कोर्ट केस कर देना अब बताइए ठीक है तो मैं अभी फोन करता हूं उनसे बात करके कल परसों परसों परसों दो चार पांच दिन सात दिन में आपके पास समय है हां आप आप बात करिए आप बात करिए ठीक है मैं बात करके आपके पास कॉल करता हूं मैं अभी ठीक है नमस्ते तो वो कह रहे थे कि देखिए मैं जानता हूं बिकंडा थोड़ा सा ज्यादा उनके अंदर है और आपकी बात भी हुई है। आप मुझे सीधे सुनिए आप मुझे रिजल्ट बता दीजिए। उनके व्यक्तिगत मत मुझे ले ले लेकर के क्या-क्या है वो मत बताइए। अन्यथा फिर एक कार्य करिएगा। मैं यहां से अपशब्द बोलना शुरू करूं। वो भी यथावत उनको बताइएगा। बताएंगे क्या? तो आप उनका निर्णय आप उनका आप उनका निर्णय बताइए। निर्णय मोह मत बताइए। उन मुझे लेकर उनका व्यक्तिगत मत क्या है? ठीक है। उनका निर्णय यह है कि मैं उनके गुरु जो है स्वामी निष्नंद सरस्वती उनसे कहिए कि उनसे अरे क्यों कहे भाई हम देखिए हमने कुछ ऐसा किया जो आपको हमसे फोन करना पड़ा आपको ये कहना पड़ा कि ऐसा ऐसा
00:25:32:00 किया जाए। ठीक है? अब आप कुछ ऐसा करिए कि हमें आपको फोन करना पड़े। जब हम आपको अप्रोच करेंगे तो आप अपनी शर्ते रख दीजिएगा कि ऐसा-ऐसा ऐसा करोगे तो होगा। हम थोड़ी ना आए हैं। हमें नहीं करना जाइए मत करिए। हम फिर ढूंढ लेंगे। हम हर समाज के गलत सिद्धांतों का इसी तरह प्रतिकार करते रहेंगे। आप करते रहिए ना आप बचने का बहाना ढूंढते रहिए। आपने क्या कहा था कि आप विद्वान के साथ क्यों नहीं बैठते हैं? अब जब हमने कहा विद्वान के साथ बैठवाइए तो आपके विद्वान के क्या कह रहे हैं? ये करिए, वो करिए, ऐसा करिए, वैसा करिए। क्यों? इसीलिए इसी तो स्तर है तो फिर ठीक है। आप हमको ये मत कहिए विद्वान के साथ बैठिए। आप उनको जाकर समझाइए या फिर समझिए कि आपके यहां के विद्वानों का यह स्तर है कि वह प्रवचन तो खूब देंगे मगर उन्हीं प्रवचनों में से खड़ा होकर के अगर कोई उनसे क्वेश्चन करने लगेगा तो वो कहेंगे कि तुम जिसके शिष्य हो उसको लेके आओ। क्यों भाई? वो प्रवचन देते समय उन सबके गुरुओं को लेते हैं क्या? सामान्य व्यक्ति कौन वाला वितंडा नहीं होगा ना? वो तो तो वो वो वितंडा है कि नहीं है निर्णय कौन करेगा? कौन कर रहा है? प्रश्न करने वाला उत्तर उत्तर देने वाला नहीं नहीं उत्तर देने वाला करेगा तो इसमें आप मुझे सनातन सिद्धांत दे दीजिए चलिए कि जो प्रश्न कर रहा है और सामने वाला ये कह रहा है कि ये वितंडा है प्रश्न
00:26:47:13 नहीं है तो इस बारे में सिद्धांत क्या है कि कौन करेगा निर्णय तेरे लिए कर्तव्य और कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है भैया फालतू की बातें मत किया करिए फोन लगा लगा करके कि वो करेगा अपने मनमुखी नियम ही तो बना रखे हैं आप लोगों ने तभी तो यह हाल है आप आप शास्त्र का प्रमाण दीजिए कि अगर कोई प्रश्न कर रहा है तो सामने वाला निर्णय करेगा कि वह वितंडा कर रहा है कि प्रश्न कर रहा है। आपने मुझसे प्रश्न किया कि आप विद्वान के पास क्यों नहीं बैठते मैं सीधे कहूं आप विंडा कर रहे हो? आप मानेंगे मेरी बात? क्या ये उचित है? फालतू बातें करने के लिए मेरे पास समय नहीं है। आप अपने विद्वानों को कहिए कि वह अपने सामर्थ्य को एकत्रित करें। बचने का बहाना ढूंढने की बजाय। जय श्री राम।
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
-
⬜Hindi SRT Required
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
काशी शास्त्रार्थ आर्यसमाज #aryasamaj
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮