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00:00:01:27 तो सभी को जय श्री राम। जैसा कि आप सभी जानते हैं एक हृदय विधारक घटना घटित हुई है। कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा हिंदुओं को मारा गया है। यह पूछकर मारा गया है कि तुम हिंदू हो या नहीं। वैसे यह जो घटना है वह अपने आप में एक अकेली नहीं है। यह इस तरह की कई घटनाओं की जो श्रंखला है उसमें एक उसमें से एक घटना है ये। और मैं यह देख रहा हूं कि ऐसे समय में भी अलग-अलग प्रकार के लोग अपनीपनी रोटियां सेकने में लगे हैं।
00:00:48:02 कुछ राजनीतिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं। अपनी अपने अपने नैरेटिव सिद्ध कर रहे हैं। कुछ सेकुलर अपनी रोटियां सेक रहे हैं। अपने नैरेटिव सिद्ध कर रहे हैं। कुछ कम्युनिस्ट विचारधारा वाले भी लगे हुए हैं। जैसे एक आपको सुनाई देगा कि अरे भाई दंगों में मारे जाने वाले लोग हैं। उसको हिंदू मुस्लिम का चश्मा लगा करके मत देखो। आपको सुनाई दे रहा होगा कि अरे भाई वह पर्यटक थे मरने वाले पर्यटकों को मारा है। जबकि वहां पूछ कर मारा गया है। क्या तुम हिंदू हो? पूछ कर मारा गोली चलाई गई है। मगर नहीं वो हिंदू नहीं मरा है। वो तो पर्यटक मरा है। है ना? और आतंकवादी अटैक है। आतंकवादी तो कोई भी हो सकता है। वो बात और है कि आतंकवादी कोई भी हो सकता है। मगर वह यह पूछ के मारता है कि तुम हिंदू हो या मुस्लिम हो। वो देखता है मारने से पहले। अपनेप नैरेटिव सब लोग सेट कर रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि भाई लाइसेंसी हथियार होना चाहिए। यह जो लोग मारे गए हैं वहां पर क्या इन
00:02:03:10 लोग यह लोग ऐसी फैमिली से थे जिनके पास लाइसेंसी है हथियार नहीं था कुछ लोग कह रहे हैं चाकू चलाना सिखाओ चाकू होना चाहिए क्या बंगाल में जो लोग मारे जा रहे थे उनके घर में चाकू जैसी चाकू और इस तरह के और शास्त्र वो शस्त्र नहीं थे क्या कुछ नहीं है तो सिर्फ एक चीज जिस धर्म और ईश्वर को मानते हो उसका सानिध्य नहीं है और जिसके कारण संघ का बल नहीं है जिसके कारण तुम अकेले हो तुम लाचार हो तुम जहां मिलोगे वहां 9 पांच वाली आयत के अनुसार तुम्हें कत्ल कर दिया जाएगा। कुछ मूर्ख ऐसे भी हैं जो परंपरा प्राप्त आचार्यों के विरोध में अपना जीवन काट रहे हैं। वह इस समय भी इन घटनाओं का दोषी भी परंपरा प्राप्त आचार्यों को बता रहे हैं या फिर उनसे जोड़ करके इन घटनाओं की व्याख्या कर रहे हैं। किसी ना किसी तरीके से हमारा जो एजेंडा है सनातन परंपरा को नष्ट कर देने का वो जिंदा रहना चाहिए। वह चलता रहना चाहिए। भले ही हमें किसी का
00:03:18:14 भी उपयोग करना पड़े। मरने वाले का उपयोग करना पड़े, मरने वाली की बेवा का उपयोग करना पड़े। उसके बच्चों का उपयोग करना पड़े। मगर हमारे एजेंडे जो है चलते रहने चाहिए कि देखो देखो उन्होंने मारने से पहले जाति नहीं पूछी धर्म पूछा क्योंकि वर्ण व्यवस्था से उनको दिक्कत है। वर्ण व्यवस्था के नाम पे या व्यवस्था के लिए उपयोग जाति व्यवस्था के नाम पे घृणा फैलाना सिखाता है। क्या धर्म? अगर कोई घृणा मूलक जातिवाद फैला रहा है वह गलत है। मगर इसमें भी लोग अपनी रोटियां सेक रहे हैं कि इस समय भी किसी तरीके से वर्णाश्रम को नष्ट कर सकते हो तो कर लो भाई। तो वर्णाश्रम को नष्ट करने के लिए यहां पर भी एक स्लोगन देखो। उसने धर्म पूछा जाति नहीं पूछी। जबकि उसने और भी बहुत से सवाल नहीं पूछे थे। मारने वाले ने यह भी नहीं पूछा था कि तुम कितना पढ़े हो। तो पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था भी बंद हो जानी चाहिए। मारने वाले ने यह भी नहीं पूछा था कि तुम किसके पिता हो, पुत्र हो, भाई हो। तो ये पिता, पुत्र, भाई
00:04:33:15 वाली संज्ञा भी बंद हो जानी चाहिए। ये क्या तर्क होते हैं। अपना नैरेटिव सेट करना है। चाहे स्थिति कोई भी हो। कितना भी गंभीर विषय चल रहा हो। और अब बात करते हैं उन मुस्लिमों की जो कैंडल मार्च लेकर के हंसते हुए अपनी हंसी को बांध करके वहां बयानबाजी कर रहे हैं। अब वहां पर सिंपैथी दिखाई जा रही है कि एक मुस्लिम एक कश्मीरी मुस्लिम जो है घोड़े पर लाद करके बचाने ले गया। वही मुस्लिम जब इंटरव्यू दे रहा है तो बोल रहा है कि धर्म के बारे में नहीं पूछा था मारने वाले ने। एक जो विक्टिम की फैमिली थी उन्होंने कहा कि कलमा पढ़ने के लिए हस्बैंड को बोला गया वो नहीं पढ़ पाए कलमा फिर मारा गया। नहीं सर ये सर नहीं ये तो गलत बात है। ये तो ये तो सही नहीं है। ये सही नहीं है। जो आप अभी हम भी देखा था कि कलमा पढ़ा कि ये मतलब गलत बात है सर। ये सही बात नहीं है क्योंकि उसमें कश्मीरी को हम भी जान गए हैं। ये तो हम जबकि धर्म के बारे में जो मृतक हैं उनके जो वहां पर खड़े हुए जो साक्षी हैं उस घटना के वो बोल रहे हैं। छोटा बच्चा बोल रहा है। धर्म के बारे में पूछा
00:05:48:19 था। वो आतंकवादी ज्यादा गोली मारी है। तब सब जब सबको पता चला कि टेररिस्ट गुस्सा है। तो हम छुप गए। एक ने आके बोला मुसलमान मुसलमान अलग हो जाओ और हिंदू अलग हो जाओ। फिर उसने बोला कलाम तो जो मुसलमान थे उसने बोला कि मुस्लिम फिर उसने बोला कलाम फिर मुस्लिम फिर कलाम फिर मुस्लिम। जो उनका होगा कुछ हमें तो वो पता नहीं था क्योंकि मेरे बाजू में जो लेडी थी वो मुस्लिम थी तो मैं सुन रही थी। हिंदुओं के सारे जेंट्स को गोली गोली से मार दिया। जो हिंदू गए थे सबको वहीं खड़े-खड़े सबको गोली मार दी। जब मजाक इंसान जो है वो देख के शायद हो सकता है। इधर ही शूट किया। पेट में गोली मारी। फिर बाद में पूछा कि हिंदू कौन है? मुस्लिम कौन है? ये पहले भी सवाल किया था कि अलग होने के लिए। लेकिन किसी ने कुछ रिप्लाई नहीं किया था। फिर पूछा हिंदू कौन है? खाली हिंदू कौन है? पूछा मेरे जीजा जी ने हाथ ऊपर किया तो उनको डायरेक्ट इधर ही शूट किया। उनका पीछे का हिस्सा ऐसा पूरा खून खून नीचे जैसे हमें पता ही नहीं हम पीछे पकड़ के देखना हो क्या रहा है। हम उसी तरह स्माइल करके बोलते भैया क्या हुआ? मैं हिंदू मुसलमान मैंने कहा हिंदू मार दी मार दिया उसी पे चलाई। अरे क्या ये भी तब से ठीक है कि पहचान देखकर मारा। सर नहीं ये ये तो गलत बात है सर। ये तो गलत बात है। पहचान देखकर मतलब वहां पे भी एक मगर यह महान कश्मीरी मुस्लिम जो घोड़े पर लाद करके रेस्क्यू ऑपरेशन किया जिन्होंने वह ज्यादा सच्चे हैं। वही सच बता रहे हैं कि धर्म के बारे में नहीं पूछा।
00:07:03:25 दूसरी ओर एक दिखावा चल रहा है कैंडल मार्च चल रहा है कि हमें बड़ा दुख है। उसी कैंडल मार्च में लोग आपको हंसते हुए मिल जाएंगे। उसी कम्युनिटी के लोग आपको Instagram अकाउंट्स पर कमेंट कर रहे हैं। हंसने वाले वह जो प्रतीक चिन्ह होते हैं वह दिखा रहे हैं। आईपीएल आईपीएल से संबंधित जोक कर रहे हैं Instagram पर आकर के मगर महान है। से एक स्ट्रेटजी और अपनाई जा रही है। अभी हमने जो एक विरोध में वीडियो बनाया उसमें कमेंट्स किए जा रहे हैं और ऐसे कमेंट्स मैं देख रहा हूं कि कई जगह पर जहां पर इसके प्रति रोष प्रकट किया जा रहा है। वहां पर यह लोग फर्जी आईडी बना के या दूसरे नाम से इस तरह के कमेंट कर रहे हैं कि जब दलित मरे थे तब तुमको याद नहीं आया था। जबकि ऐसा नहीं है। बंगाल में मरने वाले कई दलित थे। हमने तब भी वीडियो बनाए थे। मगर आज यह देखते हुए कि वहां पर जो मरने वाले वह सवर्ण है या फिर वह समृद्ध हैं। यह देखते हुए इस इसको विषयंतर करते हुए वो जातिवाद वगैरह वाला बीज फूट डालने के लिए डालने का प्रयास भी कर रहे हैं ये
00:08:18:28 लोग। तो ये स्ट्रेटजी भी चल रही है। अलग-अलग लोग तरह-तरह के अपने-अपने नैरेटिव लेकर के चल रहे हैं। इस बात की किसी को चिंता नहीं है। इस बात से किसी को सरोकार नहीं है। किसी का जीवन खत्म हो गया। किसी का बेटा मर गया, किसी का भाई मर गया, किसी का पति मर गया, किसी का पिता मर गया। कुछ ही रोज पहले किसी की मांग में सिंदूर आया था। उसकी विदाई हुई
00:08:51:07 थी। उसकी मांग का सिंदूर उजाड़ दिया गया। इन बातों से किसी को कोई सरोकार नहीं। एक नरेटिव और सेट किया जा रहा है कि मारने वालों ने देखो वह इतने सिद्धांतवादी थे कि महिलाओं और बच्चों को नहीं मारा। मतलब मार भी दिया और फिर स्वयं को हीरो भी बनाया जा रहा है। मतलब जैसे नहीं बच्चों को नहीं चॉकलेट दे दी जाती है पिटाई करने के बाद। ये ले बेटा चॉकलेट खा ले। कुछ वैसा ही हिसाब किताब है हिंदुओं का भी। हिंदुओं को मार भी लो धर्म के नाम पर पूछ पूछ करके और उसके बाद यह नरेटिव भी सेट कर दो कितने महान आतंकवादी थे भाई और जो महिलाओं और बच्चों को छोड़ गए क्या करते हो महिलाओं और बच्चों के साथ वो जगत जानता है पूरा और ये जो नरेटिव सेट कर रहे हो ये बहुत अच्छा है वैसे हिंदुओं हिंदुओं के लिए तो बहुत ही अच्छा है क्योंकि हिंदू तो है ही मूर्ख वो इसी तरीके के नरेटिव में फंसता है और भूल जाएगा वास्तविक विषय क्या
00:10:06:15 है बन जाओगे उसकी नजरों में हीरो कि देखो महिलाओं और बच्चों को छोड़ दिया मार भी लिया उनके व्यक्ति को और वो इस ओर ध्यान ना दे के कि मेरे व्यक्ति को मारा वो इस ओर ध्यान दे देखो महिला महिलाओं और बच्चों को छोड़ दिया मुस्लिम भी तो मरे हैं मुस्लिम भी तो मरे मरे हैं। अगर इतने हिंदू मरे हैं तो मुस्लिमों को भी तो मारा। वो तो बिना देखे मार रहे थे। आतंकी थे। उन्होंने तो देखा नहीं। वो बात और है कि उन्होंने देखा। अगर उनके हाथों कोई मुस्लिम मर भी गया तो फिर उन्होंने देखा, समझा, सोचा, परखा और फिर मारा। कि अब हम हिंदू को ही मारे। क्या कश्मीर में एक भी मुस्लिम नहीं मरा था?
00:10:52:24 तो क्योंकि एक मुस्लिम मर गया तो इसलिए हजारों लाखों लोगों का जो संहार किया गया हजारों लाखों लोगों की जो हत्या की गई उसको भूल जाए नरसंहार किया गया उसको भूल जाए क्योंकि मुस्लिम भी मरा है भाई थोड़ा सा भी पुरुषार्थ बचा हो ना अपने घर की महिलाओं को लेकर के थोड़ी बहुत चिंता हो तो व्यवहारिक रूप में यह जो रोष है, यह जो क्रोध है, यह जो ग्लानि है, यह जो चिंता है, उसको अपने शरीर से व्यक्त करो। केवल ये जुबान से नहीं। अपनी जीवा से मत व्यक्त करो। केवल अपने हाथ पैरों से व्यक्त करो। किसी को मारने के लिए नहीं कह रहा हूं। कम से कम एक हो जाओ।
00:11:52:16 संघ बनाओ। पहले के जमाने में देखते थे पंचायत होती थी। लोग मंदिर जाते थे। वहां मिलते थे एक दूसरे से। जितना समृद्ध हो रहा है हिंदू आज के टाइम में उतना ही एक दूसरे से कट रहा है। और मोबाइल और लैपटॉप तक सीमित हो के रह जा रहा है। क्यों नहीं जाते मंदिर? क्यों नहीं बैठते अपने हिंदू भाइयों के साथ? बैठो समय निकालो। अपने आंखों के सामने अपने पत्नी और बच्चों को नशंस रूप से उनकी हत्या होते हुए नहीं देखना चाहते तो समय निकालो थोड़ा वरना समय काटो समय निकालोगे नहीं ना तो समय काटो मोबाइल को देखतेदेखते आ जाएगा जल्दी से
00:12:43:02 समय गोष्टी करो उन हिंदुओं को फिल्टर करो जो हिंदू सेुलर नहीं है जो हिंदू कम्युनिस्ट नहीं है जो हिंदू सक्रिय रूप से तुम्हारा साथ निभा सकता है उनको खोजो कैसे खोजोगे चिन्हित करो और कुछ नहीं समझ में आ रहा है तो यह अभियान चलाया गया है संघास्त्र संघ का अस्त्र इसको इससे जुड़ो अपने घर के बाहर और जो हिंदू तुमसे सहमत है संघ बनाने के निमित्त उनके घर के बाहर लिखो अपने संबंधियों के साथ यहां पर लिखो मेरा घर हिंदू राष्ट्र क्योंकि हिंदू तो सभी हैं मगर उसमें सेुलर भी है कैसे चिन्हित करोगे कौन तुम्हारे साथ है कौन नहीं है लिखो अपने घर के बाहर मेरा घर हिंदू राष्ट्र मंदिरों पर लिखो हर घर हिंदू राष्ट्र और कुछ भी नहीं हो पा रहा है तो कम से कम अपने मित्रों के साथ खड़े होकर के अपने समर्थन वाले लोगों के साथ खड़े होकर के नहीं
00:13:58:07 समर्थन वाले हैं तो अकेले खड़े होकर के स्लेट में लिखो मेरा जीवन हिंदू राष्ट्र और लोगों को बताना शुरू करो कि तुम्हारे साथ कितने लोग खड़े हैं तुम्हारा कितना बड़ा बड़ा संघ है। तुम अकेले नहीं हो। मरने वाले अकेले नहीं है। जिनको बुरी तरीके से मार दिया गया है, वह अकेले नहीं थे। आज से और अभी से तुम उनके साथ खड़े
00:14:33:26 हो। अपने घर के बाहर वैदिक ध्वज लगाओ। घोषित करो अपने घर को हिंदू राष्ट्र अपने जीवन को हिंदू राष्ट्र जिससे कि तुम्हें उन सक्रिय हिंदुओं में गिना जा सके जो समय आने पर अपने घर की अपने गली मोहल्ले नगर देश की रक्षा करने के लिए खड़े होंगे। केवल संग तुम्हें बचा सकता है। ईश्वर के तप का बल एकत्रित करो और संग का बल एकत्रित करो। अपने धर्म को समझो गुरु गोविंद और ग्रंथ का आश्रय लो जिससे कि अपने धर्म को समझ पाओ। अब यहां पर कुछ लोग कहने लगेंगे अरे फिर धर्म समझाने लगा। अरे भाई धर्म को जानोगे नहीं तो उसके प्रति स्वयं के अंदर और अन्यों में निष्ठा कैसे लाओगे? लड़ने मरने वाली निष्ठा कैसे उत्पन्न करोगे? जब धर्म को जानोगे नहीं। कैसे वो प्रेम उत्पन्न होगा धर्म के लिए? जब तक उसकी सौंदर्यता को नहीं जानोगे। फिर तो तुम्हारा वही वाला प्रेम हो सकता है। किसी विचारधारा से जहां पर तुम्हारी भौतिक लालसाओं की पूर्ति हो रही हो। सामने वाले
00:15:48:28 के पास वही है। वह मनुष्य को मानवोचित धर्म नहीं देता है। वो धर्म के रूप में उसकी लालसाओं की पूर्ति कर देता है। उन लालसाओं की पूर्ति करने के चक्कर में उनका संग है। तुम्हारा कैसे बनेगा संघ? क्योंकि धर्म को तुम जानते नहीं हो। उसकी सुंदरता को तुम जानते नहीं हो। अकाट सिद्धांतों को तुम जानते नहीं हो। तुम हिंदू इसीलिए हो ना क्योंकि तुम भौतिक लालसाओं के नाम पर किसी से नहीं जुड़ते। हिंदू का अर्थ क्या है? और हिंदू विरोधी का अर्थ क्या है? हिंदू का अर्थ ही है विरक्तता। जो तुम्हें सिखाए विरक्त होना। और हिंदू विरोधी का अर्थ क्या है? व्यसनी व्यसन जो तुम्हें सिखाएगा व्यसन में लिप्त हो जाना
00:16:51:04 भोगी तो हिंदू तो इसीलिए हो ना क्योंकि तुम भोगी नहीं हो भोगने वाली विचारधारा से दूर हो तुम तो भोगने के नाम पर तो तुम एक कर नहीं सकते लोगों को तो अब तुम्हारे पास बचा क्या वही सनातन के सार्वभौम सिद्धांत गुरु गोविंद और ग्रंथ वही है तुम्हारी शक्ति वही तुम्हें एक कर सकता है। वही तुम्हें संघ का बल प्रदान कर सकता है। उनका सानिध्य प्राप्त करो। और जिसको जुड़ना है वह जुड़ सकता है इस अभियान से। अभियान में कोई विशेष ऐसा नहीं है कार्य जो आपके लिए संभव ना हो उपाय करना। इसकी जो सामग्री है उसको प्राप्त करने के लिए आप संपर्क भी कर सकते हैं। स्वयं से भी कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए जो हमारा नंबर है उस पर आप संपर्क कर सकते हैं। प्रथम चरण अपने घर के बाहर मेरा घर हिंदू राष्ट्र लिखिए। अपने सगे संबंधियों के साथ के घर के बाहर जितने भी समर्थक हो उनके घर के बाहर और अपने आसपास के मुख्य मुख्य मंदिरों के बाहर लिखिए हर घर हिंदू राष्ट्र और यदि भय
00:18:06:20 है कुछ भी नहीं करना चाहते तो कम से कम इतना कर दीजिए कि हाथ में तख्ती लेकर के उसमें लिख दीजिए कि मेरा जीवन हिंदू राष्ट्र अपने जीवन को तो हिंदू राष्ट्र कह सकते हो ना और इन सारी यह जितने भी उद्घोष कर सकते हैं आप अपने मित्रों के साथ खड़े होकर के मेरा घर हिंदू राष्ट्र मेरा जीवन हिंदू राष्ट्र हर घर हिंदू राष्ट्र ये उद्घोष अपने मित्रों के साथ कर सकते हैं और इन सभी गतिविधियों के छोटे-छोटे क्लिप्स बनाइए जो शुरू की दो चरण है मेरा घर हिंदू राष्ट्र हर घर हिंदू राष्ट्र मंदिरों पर उस समय आपको अपना चेहरा दिखाने की आवश्यकता नहीं है आप वो स्लोगन लिखते हुए उसको देखते हुए उस उसको आप बना सकते हैं वीडियो को मगर जब आप मेरा जीवन हिंदू राष्ट्र केवल करेंगे उद्घोष तो उसके लिए आपका चेहरा भी आवश्यक होगा। ठीक है? इसके साथ ही साथ जो यह घर होंगे इनके घर के बाहर आप वैदिक ध्वज लगाइए और वैदिक ध्वज से भी यह भी एक सिंबल होगा कि आप वो सक्रिय हिंदू हैं जो समय आने पर अपने दूसरे हिंदू भाई के साथ खड़ा हुआ है। इतना तो कर सकते
00:19:21:22 हैं। लोगों को बता सकते हैं ना कि हम तुमसे नहीं डरते। आपके उन वीडियोस को हम अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर डालेंगे और उस आपके थोड़े से प्रयास से बहुत बड़ा एक बहुत बड़ी एक क्रांति आएगी क्योंकि बहुत बड़ा जन समुदाय उससे प्रेरित होगा और मेरा अगर हिंदू राष्ट्र इस अ चिन्ह से हम सब हिंदू एक दिखाई देंगे यूनिफार्म होंगे हमारा कोई भय नहीं है हमारे बारे में कुछ भी बोलने से पहले कोई डरता नहीं है हम पर आघात हाथ पहुंचाने से पहले हमसे कोई डरता नहीं है क्योंकि हम एक नहीं है। हमें किसी से लड़ने मरने नहीं जाना है। मगर कम से कम हमें अपने संघ की संघ का बल तो दिखा सकते हैं। देखिए मैं अधिकांशतः समाधान पर बात करने के लिए प्रयत्नशील रहता हूं। समस्या है। समस्या हो गई है। घटना घटित हो गई है। बार-बार उसका विश्लेषण उसका विवेचना उसकी विवेचना करने से कोई लाभ नहीं होगा। करना क्या है? व्हाट टू डू? नेक्स्ट इज व्हाट? समाधान क्या है? तो समाधान है संग। तपोबल एकत्रित करिए।
00:20:37:00 अगर नाम जप कर रहे हैं। अपने अधिकार की सीमा भगवान भगवत भजन करिए। नाम जप करना है तो नामास्त्र हमारा चल रहा है। उससे आप जुड़ सकते हैं। नहीं तो स्वयं से करिए। दिन भर में सवा घंटे की भक्ति का बल अर्जित करिए। ऊपर ईश्वर का बल और नीचे संघ का बल। यही दो चीजें हमारे काम की है। और मैं बार-बार आप लोगों को चेता रहा हूं कि इस तरह के नैरेटिव्स जो बनाने की प्रयास में लगे हुए हैं सेकुलर, कम्युनिस्ट या फिर राजनीतिक पार्टियां। इस प्रकार के जो नैरेटिव्स हैं उनसे स्वयं को बचाइए। अपने धर्म के लिए, अपने ईश्वर के लिए, अपने गुरु गोविंद ग्रंथ के लिए खड़े होइए। क्योंकि आपका आपके पास जो छाया है किसी की तो आपके गुरु गोविंद ग्रंथ की छाया है और कोई आपके कार्य नहीं आने वाला और कोई आपको बचाने नहीं वाला उस भरोसे रहना छोड़
00:21:39:00 दीजिए। सभी को जय श्री राम। [संगीत]
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झूठ बोल रहे हैंधर्म पूछ करनहीं मारा #kafir #jihad #muslim
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