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00:00:00:04 ये लाइव यहां से होगा ना? हो गया हो गया हो गया। लाइव हो गया। सभी को जय श्री राम। आपने जैसा कि आज टाइटल देख लिया है। हम लोग एक हमारे चैनल पे अधिकांशतः थोड़ा सा युद्ध का वातावरण सा देखने को मिलता है आप लोगों को। तो सोचा कि थोड़ा सा एक लाइट वातावरण भी प्रस्तुत कर दें। हमेशा बॉर्डर, एलओसी यही सब देखने को मिलती है। कभी-कभी हम साथ-साथ हैं। कुछ कुछ होता है टाइप की
00:00:35:15 या कुछ कुछ होता है तो हटा दो। हम साथ-साथ हैं या हम ये जो पारिवारिक फिल्में आती हैं तो ये भी थोड़ा सा इस तरह का वातावरण भी मिल जाए। है ना? तो ठीक है। मैं हम लोग आज के जो हमारे गेस्ट हैं सब उनको ले लेते हैं। पंडित जी तो हैं ही हमारे सदा के। जी जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जी ठीक है मैं बाकियों को भी लेता हूं स्टेज पर विश्वा जी आपका स्वागत है नमस्कार नमस्कार महादेव स्वागत है राष्ट्रवाद सभी को नमस्कार सभी को हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव जय श्री राम हर हर महादेव हर हर महादेव जय श्री राम जय श्री राम हर और हर हर महादेव यहां पे थोड़ा सा ऐसा लग रहा होगा क्योंकि एक वो फैला हुआ है कि भाई त्रिपुंड तो यह तो शंकर भगवान के ही उपासक हैं। तो मैं क्लियर कर दूं ये त्रिपुंड जो है इस बात का ही देवतक नहीं है केवल कि हम जो है हमारे ईस्ट भगवान शिव ही हैं। ये त्रिपुंड इस बात का देवतक है कि हमारे गुरु भगवान शिव हैं। और भगवान शिव भी क्यों? हमारे जो गुरु हम शंकर संप्रदाय वाले हैं। शंकराचार्य वाले ये इस बात का दक है। मैं अपनी बात करूं तो मैं श्री राम का उपासक हूं और
00:01:52:02 यहां पर सभी मतलब लगभग पांचों देव पंच देवपासना वाले बैठे हुए हैं। सभी में सबका मैं बता देता हूं। मेरे भी इष्ट भगवान श्री राम ही है। परम ब्रह्म परमेश्वर भगवान श्री राम। गुरुदेव से जो दीक्षा मिली है उनकी कृपा से वो भगवती में मिली है। तो मंत्र जो है वो भगवती का चलता है। लेकिन दिमाग में हमेशा भगवान ही रहते हैं। मतलब भगवती में भी राम को ही देखता हूं। जैसा गुरुदेव बताते हैं कि कहीं भी जो आपका इष्ट हो उसमें अनन्यता रख के और सब में उसी को देख लो। बस यही है। तो सात भी हो गए और वैष्णव भी हो गए। इ्वाकु जी आप भी बता दीजिए। इवाकू मेरा नाम इवाकू द क्रिएटर है। आप लोग जानते तो नहीं है मुझे बट मैं आवा जी को तीन साल से देख रहा हूं। वेरी ऑनर्ड टू बी हियर एंड मैं मेरी दीक्षा नहीं हुई है। परंतु मैं श्रीकुल बगलामुखी एक परंपरा है। बगलामुखी वहां की परंपरा श्रीकुल से आती है। जयपुर में ही उनका मठ है। वहां से मैं शिक्षा ग्रहण करता हूं। चंडीधाम से मेरे कुछ अनुयायी हैं जो मेरे को सिखाते हैं थोड़ा-थोड़ा। शंकर परंपरा से मेरे एक भैया है जिन्होंने मेरे को थोड़ा थोड़ी शिक्षा दी है। तो अभी दीक्षा नहीं हुई है परंतु मैं आस्था रखता हूं और सब संप्रदायों की सीख लेने में विश्वास रखता हूं। अभी अगर आप वैसे बोले तो भगवती मेरी इष्ट है सात है ना तो ये ना सोचे कि नहीं नहीं शिवजी वाले
00:03:07:03 ही है ओनली और ओमकार जी भी है हमारे बीच में जो हरिहर में दोनों के प्रति उनका वैसा भाव है हर के द्वारा हरि की प्राप्ति हरि के द्वारा हर की प्राप्ति थोड़ा सा बता दे अपने बारे में ओमकार जी जय श्री राम हर हर महादेव सबको प्रणाम जय श्री राम मेरा नाम ओमकार सुमेर पराडकर है मैं यहां पे कनाडा से जुड़ा हुआ हूं से तो गुरु ग्रंथ गोविंद की कृपा है विदेश में रहते हुए सम
00:03:41:13 तो मेरी शुरुआत अगर थोड़ी सी बता दू तो मैं प्रेमानंद जी महाराज को सुना करता था सुनता हूं तो उनके भग नाम जप की कृपा से धीरे धीरे में जैसे शिव नाम शिव मेरे इष्ट है तो फिर नाम जपता गया और वैसे करते की बात ये है कि श्री राम कृपा से मैं एक्चुअली भगवान शंकराचार्य जो हमारे पूरी के है स्वामी निलानंद सरस्वती जी महाराज तो उनके प्रति मेरा गुरु भाव डेवलप होने लगा अभी भी बढ़ रहा है उनहीं की कृपा से ऐसे करके तो बस मैं आहान से जुड़ा हूं लगभग दो तीन साल से शिवश भैया को बार बार बोदर करता रहता हूं चैट पे तो बहुत धैर्य पूर्वक मेरे प्रश्नों का उत्तर देते हैं हमारी बातचीत बहुत होती है तो बड़ा अच्छा लगता है तो आप सबको बहुत थैंक यू जी जी जी जी बिल्कुल आपका स्वागत है और
00:04:32:24 हमारे बीच में शास्त्रवाद जी भी है उनको तो आपने हमारे चैनल पर कई बार देखा ही है। जी शास्त्रवाद जी आप ही तो मेरे गुरु जैसे हैं। आप ही से जो सीखे हैं जितना भी सीख पाए हैं। ऐसे मेरे इष्ट भगवान श्री कृष्ण है। लेकिन जितना राम जी से लिंक करके कृष्ण जी को देखना होता है। जैसे हमने इतना शास्त्रों से भगवान श्री कृष्ण के जिस चरित्र को किस तरह से समझना है। राम जी को किस तरह समझना है और किस प्रकार सभी को एक देखना है। ये आपसे ही सीखे हैं और आप ही मेरे मार्गदर्शक रहे हैं। ईश्वर की कृपा है कि आप ही मेरे को मिले क्योंकि बहुत पूर्व मैंने इस विषय में भगवान से कहा था कि मुझे ऐसा कोई प्राप्त हो जो मुझे इस चीज का सही मार्गदर्शन दे और आप मुझे प्राप्त हो गए। चलो ठीक है मगर मुझे गुरु के रूप में ना देखें हां ऐसे देख ले कि एक प्रचारक मिला है क्या कहते है सनातन से मैं डायरेक्ट मैं डायरेक्ट उनसे तो नहीं जुड़ा हूं ना डायरेक्ट शंकराचार्य जी से तो नहीं जुड़ा हूं आपसे ही जुड़ा है तो जितना मध्यस्थ में
00:05:47:27 देख सकते है ठीक है सनातन शंकर जी भी आ गए हां सनातन शंकर जी नहीं आए अभी जुड़े थे टोकन ले लीजिए वो यहां पे जो ये जो मीटिंग हो रही है इसका जो मुख्य वो है Instagram पे क्योंकि वो जो अभी महिला आई थी कुछ दिन एक दो दिन पूर्व वो क्या कहते हैं Instagram पे एक्टिव ज्यादा हैं जिनसे हमारी चर्चा हुई थी तो उस वो अभी वहां पर पहले वो क्या कर रही थी और इसके बाद अभी वो क्या कर रही हैं। इन सब विषयों को थोड़ा सा केंद्र में रखते हुए फिर जो व्यापक मैसेज है ना कि यह क्या है इंटरनेट संप्रदाय जो खड़ा हो रहा है हमारे सामने खड़ा हो चुका है ऑलमोस्ट तो इस पर एक दृष्टिकोण तो इसमें विशेष रूप से क्योंकि हम उतना ज्यादा Instagram पे क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा है वो नहीं जानते तो एक शिवाकु जी का आने का मुख्य प्रयोजन है कि वो जो वहां के जो जानकारी सीधे नहीं प्राप्त है इनको प्राप्त है उस रूप में इवाकू जी जुड़े हुए और श्वेतांग जी आहान का एक भाग हैं और पहले से ही ओमकार जी पहले से ही आहान का भाग है। शास्त्रवाद जी
00:07:03:01 आहान का भाग हैं। तो फिर यहां पर जो विभिन्न वैचारिक जो भी विषय वस्तु सामने आएगी मुख्य रूप से इवाकू जी द्वारा अगर वो सेंटर में वो चल रहा है और भी अन्य आस वो जो Instagram वाली बातें हैं वो आएंगी तो इवाकू जी के द्वारा आएंगी तो उस पर हम लोगों का एक दृष्टिकोण आपको प्राप्त होगा और हां जैसे WhatsApp यूनिवर्सिटी ये भी किसी ने अच्छा कमेंट किया है है ना? जैसे WhatsApp यूनिवर्सिटी अब दीदी ने शुरू किया है। दीदी ने नहीं शुरू किया है। यह कुछ ऐसे लोग हैं जो अभी आपको क्रमबद्धता से पता चल जाएगा। थोड़ा सा ऐसा ना सोचिएगा कि आज का बोरियत होने वाला है क्योंकि यहां पे बोरी बोरियत कभी नहीं है। चाहे बॉर्डर हो चाहे हम वो हम साथ-साथ हैं वो या हमेशा सुपरहिट फिल्में ही देते हैं। स्क्रीन अटक गई है। जी। तो अच्छी चीजें मिलने वाली है आपको और बने रहिए लास्ट तक। ठीक है? सनातन शंकर जी की कोई टेक्निकल इशू आ रहा है तो हम लोग शुरू करते हैं कुछ बातें जो मुझे मालूम है पहले मैं वो रख दूं कि अभी एक दो दिन पहले हमारी एक लाइव चर्चा हुई
00:08:18:12 और लाइव चर्चा महिला हैं जो विदेश में रह रही हैं और वहां से वह सनातन को जानने वाली होते हुए धर्म रक्षा के विषय में भी कई सारे ऐसे संदेश निर्गत कर रही हैं जिनसे हिंदुओं को लाभ भी है। पर साथ ही साथ उनके द्वारा कुछ ऐसी चीजें हो रही थी। मैंने मैंने उनको 2022 में देखा था जब राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाला मामला चल रहा था। बड़े ही अभद्र तरीके से जो निर्णायक है हमारे सनातन धर्म के आचार्य परंपराओं को वो उल्टा सीधा तू ततड़ाक और क्या कहते हैं उपमाएं देना हास्यप्रद उपमाएं देना ये सब वो कर रही थी। तो तब मैंने यह सोचकर शांति बनाए रखी थी कि ठीक है बहुत सारे लोग कर रहे हैं। तो हम इनको ही क्यों प्रतिकार करें? इनका ही क्यों प्रतिकार करें? भाई 1 लाख लोग रोज उठकर के सबसे पहले शंकराचार्य को कुछ ना कुछ बोलते हैं। दुनिया में अधर्म भी बहुत है ना। तो दुनिया में अधर्म बहुत है। तो सब सारे अधर्मियों को मालूम है कि भाई हमारा मूल टारगेट क्या है? हम आखिरी प्रहार कर रहे होंगे तो वहां का आखिरी योद्धा कौन होगा? जो हमें धर्म को नाश धर्म का धर्म को नष्ट करने से हमें
00:09:33:18 टारगेट पहले शुरुआत से ही करते हैं। जो भी जितने भी षड्यंत्र आते हैं बाहर से हमारे देश में एन केन प्रकारने उनके ग्रंथ उनके वाक्यों में उनके संदर्भों में शंकराचार्य को लेकर के आपत्ति होती है। उनको शंकराचार्य को पहले टारगेट करना है। अगर सनातन धर्म का कुछ बिगाड़ना है तो शंकराचार्य को पहले टारगेट करना है। फिर वो ईसाई बन के आए। नास्तिकता बन नास्तिकता जो बुद्ध की नास्तिकता है वो आए या ईसाई ईसाई बन के आए या इस्लाम बन के आए या फिर सनातना भाष बन के अगर आए भाषियों में फिर वो अंदर वेदों को मानने वाले होते हुए फिर वेदों के अर्थ में छेड़छाड़ करने वाले फिर सनातना भाष फिर वो रामपाली हो या इस हो या आर्य समाज हो ब्रह्माकुमारीज हो इन सबके आप लिटरेचर देखेंगे इन सबके आप जो इनके जो पथ प्रदर्शक हैं जो इनके लीडर्स हैं उनके अगर आप वक्तव्य देखेंगे तो उसमें किसी का नाम हो या ना हो मगर उसमें एक नाम जरूर मिलेगा जिसका वो विरोध कर रहे होंगे वो नाम शंकराचार्य तो आप समझ सकते हैं जैसे गुरुदेव का एक वचन है पूरी के शंकराचार्य जी का जगुरु शंकराचार्य ने एक बार कहा था जब
00:10:48:24 युद्ध हो रहा था तो आपका सामने वाला कई बार आपको बता गति में कौन है जो जैसे मेरा कोई शत्रु है तो उससे आप पूछ लो तो कौरवों में से शायद दुर्योधन ने ये कहा था कि मैं मानता हूं कि मैं धर्म कर रहा हूं। दम है तो रोक लो। यानी कि यह मान लिया उसने कि पांडव जो है वह न्याय के पक्ष में है। है ना? तो इसी तरीके से यदि शंकराचार्य कौन है यह जानना है ना तो आप यहां जाकर के पढ़े कि जाकिर नायक जब बोलता है हिंदुओं को वो करना होता है उसे टारगेट तो किस आचार्य का नाम उसने लिया टारगेट करने के लिए अगर आचार्यों की बात हो रही है तो और अगर ईसाइयत को टारगेट करना होगा निशाना बनाना होगा सनातन को तो वो किसका नाम लेंगे अगर बौद्धों को सनातन को निशाना बनाना होगा उनके आचर लेकर के वो ये सब नहीं कहेंगे इस के फलाने वो हैं एच एच वो फलाने वाले कुछ नहीं सीधे शंकराचार्य ने और फिर अगर सनातना भाषियों में आ जाए अंदर वाले तंत्रों में तो आप देखो सत्यार्थ प्रकाश में कितने के नाम लिखे
00:12:04:00 हैं पारंपरिक उसमें किसका नाम लेकर के वहां पर दिया गया है टारगेट किया गया है रामपाल की किताब आप पढ़ना शुरू करिए उसमें भी आपको शंकराचार्य और यह तो जानते ही होंगे इसका वाला वो डोंगरीला में ट्रेनिंग दी जाती थी ना पहले डोंगरीला में एक ट्रेनिंग ट्रेनिंग दी जाती थी वो क्या ट्रेनिंग थी जो शोम शोम शोम शामो शाह वो होती है ना अमरीश पुरी करता है तहलका तहलका में करता है वो ट्रेनिंग देता था जनरल डोंग तुम्हारा बॉस है जनरल डोंग तुम्हारा भगवान है वो जो कहेगा वो तुम्हें करना है वो जो बताएगा वही तुम्हें सोचना है तो इस तरह से वहां पर मानव बम बनाने के लिए ट्रेनिंग दी जाती थी वो दिन भर उनको वही तो इसी तरीके से जब किसी बाहरी षड्यंत्र को यहां पर भेजा जाता है तो उन्हें मालूम है कि वहां पर सबसे ज्यादा खतरा किससे है बाहरी षड्यंत्र को तो जब किसी को यहां भेजा जाता है तो उसको एक ट्रेनिंग दी जाती है पहले शंकराचार्य से कैसे बचना है तो शंकराचार्य से बचने के लिए कुछ जुमले आते हैं मायावादी मायावादी मायावादी फिर कहीं पे आएगा जातिवादी जातिवादी ऐसे जुमले हैं इनको लेकर के आप जो है शंकराचार्य से बच सकते हो ऐसा उनको लगता
00:13:19:10 है तो अब यह जो मैंने इतना सब बताया शंकराचार्य की महत्ता के बारे में तो मैंने बताया कि यह जो मातृ शक्ति है जो अभी आपको हमारे चैनल पर दिखाई दी थी यह मातृशक्ति वहां से लेकर के शंकराचार्य के लिए तू तड़ाक और अपने ही जो मूल स्त्रोत है हमारे वैदिक धर्म के मूल स्त्रोत कहां से आ रहे हैं कौन है हमारा शब्द प्राण उसी पर प्रहार कर रहे जिस डाल पर बैठे हैं उसी तो हमने तब इनको इग्नोर किया था और तब से लेकर के अभी अभी हाल में यह मामला सामने आया जब दोबारा से मैंने देखा कि इन्होंने किसी बात को लेकर के अभी मुक्तेश्वर जी का विरोध शुरू किया। अब आप विरोध करो मगर मर्यादा में रह के करो। पहली बात तो आप मर्यादा लांग करके कर रहे हो। फिर उसमें अगर कोई आपको रिटेलिएट कर रहा है तो फिर आप उसमें जो है और अमर्यादित हो मर्यादित ऐसे हो रहे हो कि आपकी आपका जो वार है वो पूरे संप्रदाय पे जा रहा है और तो और आप ऐसा कर रहे हो कि फिर वो संप्रदाय पे नहीं जा रहा है। वो समस्त प्रामाणिक परंपराओं द्वारा स्वीकार सिद्धांतों पे आपने टारगेट कर दिया। जैसे कि विदेश गमन विदेश गमन को लेकर के सारे प्रामाणिक संप्रदाय जितने भी सारे एकमत है कोई इसमें अंतर तो जब आप विदेश गमन निषेध का समर्थन कर रही हो यह सोच कर कि मैं इससे अमक्तेश्वंद
00:14:34:26 औरेश्वरंद जी और उनके समर्थकों को टारगेट कर रही हूं मगर आप जब ये सिद्धांत को टारगेट कर तो पूरी परंपरा फिर आपने वीडियो बनाया वीडियो बना करके आपने जो है शंगेरी मठ के लिए कह दिया कि इतनी डोनेशन आती है फिर फिर भी तुम जैसे झुंझनों को भेजा है कह रही थी कि मैं तो ज्योति फिर वो मुक्तिश जी को टारगेट कर रहे हैं। फिर शंगेरी मठ को भी आपने कुल मिलाकर के आप जो है कहीं ना कहीं से घुमा फिरा संप्रदाय के सामने स्वामी महाग को भी टारगेट कर दिया। उन्होंने करपात्र स्वामी महाग को भी टारगेट कर दिया। सबकी आवाज आ रही है।
00:15:12:16 मैं कह रहा हूं कि उन्होंने करपात्र स्वामी को भी नहीं छोड़ा। उनको भी टारगेट किया ना। वो केवल ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी तक थोड़ी ना सीमित रही। आवाज सबको मेरी साफ सुनाई दे रही है? आवाज आ रही है आपकी? वीडियो बीचबीच में अटक रही है। वीडियो मुझे गड़बड़ हो रहा है। भैया मैं एक बार लीव करके दोबारा आता हूं। मुझे आपकी आवाज दोद बार सुनाई दे रही है। आप सभी की मतलब नहीं तो फिर वो आपके साइड में इशू है। अच्छा अच्छा ओके ठीक। आपके साइड
00:15:46:21 तो ऐसा है कि पता नहीं वो सुन पाए हैं कि नहीं। लेकिन आवाज बराबर है। मेरे बगल में मैंने फोन में चला रखी है। आवाज बराबर आ रही है। वीडियो का इशू है। तो वही बात है। हां उनका वीडियो बीच-बीच में हो रहा है। हां वीडियो फ्रीज हो रहा है। अब यही बात है जब तक आते नहीं हम लोग चर्चा कर लेते हैं। वही बात को आगे बढ़ाते हैं। जी जी तो अवेकनिंग भारत जी ने जितनी टिप्पणियां करी है मेरे पास लिखी हुई है इधर और उनके अनुयायों ने जितनी टिप्पणियां करी है वो भी लिखी हुई है इधर। अच्छा वही है हां वही वही तो थोड़ा पहले चालू करते हैं जो शिवश जी ने कहा आ ही गए शिवश जी आ गए हां हां हां तो अब ठीक चल रहा है तो अब शिवश जी आप अपनी बात पूरी कर लीजिए मैं आप शायद सुन नहीं पाए थे बस मैं बीच में आपको मैंने बोला था कि जब आप ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी की ही बात कर रहे थे तो वो फिर अब श्रृंगरी महास्वामी के पास भी आए थे ये केवल वहां तक नहीं रही ना उन्होंने करपात्र जी भी अपनी उंगली उठा दी उनको भी उन्होंने उन्होंने मतलब बोल दिया है अपने व्यंग बोल दिया उन्होंने ठीक है तो मुझे अच्छा नहीं लगा ये जो उनके शब्दों का चयन था लेकिन ठीक है आप अपनी बात अभी वो वापस अभी वो वापस जब गई है यहां से खाली हाथ है ना
00:17:02:02 जब खाली हाथ वापस गई है तो वो मायावा अब वो इस का सहारा भी ले रही है वहां दिख रहा है तो करपात्री जी के लिए तो बोली अपनी लाइव में बोल दिया करपात्री जी ना होते ना करपात्री जी क्या है पता नहीं है अभी तुम्हें वो भगत सिंह थी ना द लेजेंड ऑफ भगत सिंह उसमें कहता है जाओ बेटा जाओ जिस दिन बर्फ की सिल्ली पर लिटा के चार पांच डंडे पड़ेंगे ना एक क्रांतिकारी होने का जो भूत सवार हुआ है भगत सिंह को कहते हैं वो शायद राम प्रसाद बिश्ल जिस दिन चार डंडे पड़ेंगे ना बर्फ की सिल्लियों पे लिटा करके उस दिन एक क्रांतिकारी बन खेलने का जो शौक चढ़ा है ना वो उतर जाएगा तो खैर ये सब बातें तो अभी उसमें आएंगी तो अब बात ये है कि ये किस तरह के लोग हैं और इनको को सेंटर में रखते हुए हम लोग थोड़ी सी बातें करने वाले हैं। अलग-अलग वो लेंगे। अ क्या कहते हैं कि अब अब आप खड़े कहां पर हो रहे हो कि भाई मैं जो है वेदों को जानता हूं। मैं जो है शास्त्रों को जानता हूं और आप कह क्या रहे हो? जिससे हमारे पास शास्त्र आए हैं। मैं उनको गलत ठहरा रहा हूं। जिससे हमारे पास शास्त्र आए हैं। मैं उनको गलत ठहरा रहा हूं। मेरे पास शास्त्र आ गए। तुमसे मैंने शास्त्र लिया है। मैं तुमको ही कह रहा हूं। तुम गलत अर्थ बता रहे हो। अरे भैया अगर वह अज्ञानी है वह झूठा है तो तुमको शास्त्र क्यों देगा सच्चा
00:18:17:08 बदल देगा शास्त्र ठीक है पहली बात दूसरी बात यह है कि अब एक प्रश्न बहुत जरूरी है जो मैं पहले रख दूं जो मेरे सामने मुझे लगता है मन में आई होगी बात कि भाई इस प्रश्न की आवश्यकता क्या है आवश्यकता इस प्रश्न की यह है कि व्यक्ति यह क्लेम कर रहा है कि भाई मैं विदेश गमन को लेकर के हमारे शास्त्रों ने निषेध नहीं किया है शास्त्रों में फिर वह तर्क से अगर बात है तो वह बाद की बात है। ठीक है? जिस विषय में शास्त्र ही प्रमाण है अती्द्रिय विषय कौन सी धरती अशुद्ध है कौन सी नहीं है? यह अती्द्रिय विषय है। इसको हम विज्ञान से कहां से सिद्ध करेंगे भाई? यह अती्द्रिय विषय है। मोक्ष अती्द्रिय विषय है। बहन भाई में संबंध विवाह का बनना है कि नहीं यह अती्द्रिय विषय है। वो बात अलग है। बाद में वैज्ञानिकों ने अपनीपनी थ्योरीज दे दी। तो व्यक्ति सपोर्ट लेने लगा नहीं। शुरुआत तो अती्द्रिय विषय से ही हो रही है ना और कई वैज्ञानिक ऐसे भी हैं जो उसके पक्ष में थ्योरी दे रहे हैं। तो यह अती्द्रिय विषय जो अती्द्रिय विषय हैं उनमें हमारे लिए शास्त्र शब्द प्रमाण है। हमारे लिए क्या प्रमाण है? शब्द प्रमाण है। जैसे कि कोई हमसे यह कहे कि भाई मेरा जो ये मैंने बगल बंदी पहन धारण की हुई है। इसका कलर क्या है? इस विषय
00:19:32:12 में जो है कान प्रमाण है तो कान प्रमाण नहीं है। इस विषय में आंख प्रमाण है और सुनने के विषय में कान प्रमाण है। तो जिस तरीके से यह रंग के विषय में आंख प्रमाण है। सुनने के विषय में कान प्रमाण है। उसी तरीके से जो अती्द्रिय विषय है ना मोक्ष धर्म मोक्ष को प्राप्त कराने वाला धर्म उसमें शास्त्र प्रमाण है। तो कई ऐसे नियम है जिनके संबंध में आपको तार्किक चीजें मिल जाएंगी। मगर कई ऐसे नियम भी होंगे जहां पर आपको शास्त्र को सर्वोपरि कहना पड़ेगा। और जब तक आप शास्त्र के अधीनता नहीं स्वीकार करेंगे तब तक क्या होगा कि विप्लव आएगा क्योंकि आपका दृष्टिकोण से आपको कुछ और सही लग रहा है और दूसरे के दृष्टिकोण से कुछ और इसी बात का तो युद्ध है भाई वेद में जिसकी प्रमाण्य बुद्धि नहीं है वो बन गया इस्लाम जिसकी वेद में प्रमाण्य बुद्धि नहीं बन गया बुद्ध जिसकी वेद में प्रमाण्य बुद्धि नहीं है ये क्या विप्लव है क्यों तो अब बात आ गई कि विदेश गमन को सिद्ध करना है निषेध या फिर उसका समर्थन करना है तो उसमें शब्द प्रमाण है, शास्त्र प्रमाण है। अब जब शास्त्रों से हमें आपको प्रूफ करना है तो शास्त्रों के कई अर्थ आ गए। अब हम आपको दिखाएंगे कि देखो यहां ब्रदारण्य उपनिषद में लिखा है। अभेद में ये लिखा है। आप कहोगे नहीं आर्य समाज तो यह कह रहे हैं। फलाने तो यह कह रहे हैं। तो आपने तो कोई एक पिलर को पकड़ ही
00:20:47:13 नहीं रखा। यद्यपि अभी वहां तक बात आ नहीं पाई कहां तक? कि आर्य समाज ने क्या-क्या कहा है। नहीं तो आपका वहां पर और मुंह धुआ होता। अभी आपने इन सब विषयों में कभी सोचा ही नहीं होगा ईश्वर सर्वशक्तिमान है कि नहीं। मैं आपको मैं आपकी चीजों को समझ पा रहा हूं। कोई तात्विक व्याख्या अभी मैं पूछता कौन सी तात्विक व्याख्या माना है आपने? भाई ब्रह्मसूत्र के किस भाष्य को मानने वाला होते हुए तुम वो हो सनातनी यही ना बता पाते तुम। अच्छा ईश्वर अवतार ले सकता है तो फिर आर्य समाज को छोड़ना पड़ जाता। विशिष्टाद्वैत को भी मान लो अगर कि तुम्हारे वो जो गुप्त गुरु हैं। हालांकि कोई है नहीं। नाटक था वो लिख लिख के बता रहा था। कोई सपोर्टर आया था जो जिसने बीच में दखल अंदाजी की थी ना तो वो लिख लिख के बता रहा था कि ये जवाब दो तो वो पढ़ रही थी उसको लैपटॉप में स्क्रीन से तो खैर तो इन्होंने कहा मेरे गुरु सामने नहीं आना चाहते यही भागवतानंद भी कहता है मेरे गुरु सामने नहीं आना चाहते हैं जिसके पास परंपरा है नहीं प्रमाणिक वो यही कहता है मेरे गुरु नहीं सामने आना चाहते या कोई कहता है सपने में गुरु आए हैं ये कह देता है तो खैर तो अभी मैं आगे आपसे जब पूछता कि आप मूर्ति पूजा मानते हो कि नहीं मानते हो? नहीं मानते तो आर्य समाज के प्रमाण को मानते हो तो आर्य समाज को प्रमाण कैसे कर सकते हो? तो यह मैं परंपरा पूछने का विषय ये है कि
00:22:02:16 जो मुझे आगे चलके आपसे पूछना ही पड़ेगा। जब मैं आपको सबूत दूंगा आप कहोगे नहीं इसका अर्थ ये वाला है। तो फिर मैं आपसे पूछूंगा कि आप कौन से अर्थ को मानने वाली हैं? कौन से अर्थ को मतलब कौन सी परंपरा के अर्थ को मानने वाली है? मुझे पूछना ही था। तो वो जो मूल विषय है वो सबसे पहले इधर ही आ जाए ना जो आगे चलकर के आना ही है कि किस अर्थ को माना जाए क्योंकि यह सर्वविदित है जितनी भी प्रामाणिक परंपराएं उनके लिए विदेश गमन निषेध है तो आपको तो उसमें हस्तक्षेप करना ही नहीं चाहिए था यदि आप मूर्ति पूजक हो यदि आप प्रामाणिक परंपराओं से जुड़ी हुई हो रामानुज परंपरा से जुड़ी हुई तो इस विषय में आपका फिर हस्तक्षेप होना ही चाहिए था क्योंकि हुआ इससे इस बात का धोतक है कि आप किसी के सगे नहीं हो जो सबका सगा होता है ना सेकुलर वो किसी का सगा नहीं होता है तो वह हो आपकी तो आपकी वह स्थिति क्लियर करने के लिए और आपका वह एक जो भ्रम है कि मैं बहुत बड़ी हिंदू हूं हिंदू धर्म की रक्षा कर हिंदू आप हैं। हिंदू धर्म आप हैं। आपका संप्रदाय विहीन होना हिंदुत्व में बाधक नहीं है। संप्रदाय विहीन होना हिंदुत्व में बाधक नहीं है। वो प्रामाणिक आचार्य में बाधक है। संप्रदाय विहीन होना हिंदुत्व हिंदू होने में बाधक नहीं है। प्रामाणिक आचार्य होने में बाधक है। परंतु संप्रदाय का विरोध होना एक तरफ
00:23:17:18 से सभी संप्रदायों का विरोध होना यह हिंदुत्व वादक आपको किसी ना किसी खंभे को पकड़ना पड़ेगा तब कह सकते हो मैं वैदिक हूं किसी ना किसी जहाज में सवार होना पड़ेगा वो जहाज है परंपरा है ना आज वो रील बनाई है मैंने उसमें कहा है कि वो जो बड़ा वाला जानवर होता है ना एक बड़ा वाला हूं क्या कहते हो उसको हाथी हाथी वो हम है और वो दुख वो होता है ना तो ठीक है तो इसलिए मेरा ये प्रश्न था क्योंकि ये प्रश्न आगे आना ही था क्योंकि आप आर्य समाज भी लिए बैठी हो पता नहीं कौन ब्रह्म मुनि भी लिए बैठी हो अलंकार भी लिए बैठी हो फिर हमको हर हर महादेव भी कह रही हो जो इनसे Instagram पे टेलीफोनिक वार्ता हुई जो उसमें हर हर महादेव भी कह रही है अरे भैया पहले निश्चित तो कर लो कि आप कौन से भाष्य को मान रहे हो वेदों के आप तो भाष्यकार हो नहीं। पहली बात तो फिर आप भाषिकार बन भी जाओगे तो सच्चाई यह है कि शंकराचार्य के विरुद्ध हो के आपका कोई अस्तित्व सिद्धि नहीं होगा। खैर इतना लंबा सब हो गया। थोड़ा सा इस विषय में आप लोग थोड़ा-थोड़ा बोल लें। फिर वीरूपाक्ष जी से हम लोग वो पॉइंट रेज करवा ले लेंगे जो वो बोल रही हैं। है ना? जी श्वेता
00:24:33:01 जी। मैंने तो बोल दिया। आप विश्वाकु जी से सुनते हैं पहले। मैं बोल दूंगा अंत में फिर से। तो शुरुआत करने से पहले ये कहना चलिए अब शुरुआत कर दी तो कर दीजिए। मैंने सोचा था तीनों मैं कह हां मैं मैं मैं बोल देता हूं। मैं कहता हूं कि एक बार सनातन शंकर जी के भी थोड़े दो पॉइंट ले लेते हैं। क्योंकि वो अभी आए हैं और थोड़ा उनका भी सम्मान हो जाएगा। बोलिए अगर आप बोल पा रहे हैं तो जी मेरी आवाज सही आ रही है। माइक सही है। जी जी आ रही है। आ रही है। हां हां नहीं काफी जो डिस्कशन सुना और यह तो काफी दिनों से चल ही रहा था कि लोग ये जो पीडीएफ डाउनलोड करके आका.com को अपना बेस मानकर जो इंटरनेट से किताबें डाउनलोड करके खुद को जो आचार्य घोषित कर रहे हैं ये लोग ज्ञानी घोषित कर रहे हैं बेसिकली और ये सोचते हैं कि हमने जो वहां पे ऑनलाइन जो पढ़ ली बात और उसको जो अपने मनमुखी आधार पर जो समझ लिया मतलब वही सच है और जो आचार्य हैं जो परंपरा से आचार्य हैं वो तो इनके लिए ऐसे हैं जैसे कि ये लोग समझते हैं कि ये तो राजनेताओं के विरोधी हैं। है ना? जबकि इनको यह समझ लेना चाहिए कि
00:25:48:04 भाई जितने भी हमारे जो आचार्य हैं उनको जो ज्ञान मिला है वो परंपरा से ही मिला है। और इवन मैं तो ये भी बोलना चाहता हूं। मैंने पिछली बार भी कहा था शिवा जी के लाइव में कि आज हम जो मॉडर्न आधुनिक पढ़ाई कर रहे हैं उसमें जो हम पढ़ाई करते हैं वो भी तो किसी ऑथराइज इंस्टट्यूट से ही करते हैं या किताबें लाकर घर पे ही सब डिग्रियां ले लेते हैं। ऐसा तो नहीं होता ना। तो जब आप वो डिग्रियां वहां से नहीं ले पा रहे हो इन इंजीनियरिंग की डिग्री कर रहे हो तो आप ऑथराइज इंस्टट्यूट को देख रहे हो। उसमें भी आप देख रहे हो कि ये रिकॉग्नाइज्ड है कि नहीं है। अच्छा यहां से पढ़ाई करने के बाद क्या आपको आगे उसका जो जॉब मिलेगी या नहीं मिलेगी ये भी आप देख रहे हो। लेकिन जैसे ही धर्म शास्त्रों की बात आ रही है तो वहां पर आप क्या कर रहे हो कि ऑनलाइन पीडीएफ पढ़ रहे हो और वहां पर जो आपको समझ में आ रहा है वो समझ ले रहे हो और फिर अगर आचार्यों की बात वहां से भिन्न पाई जा रही है तो आप कह रहे हो कि आचार्य गलत है तो ऐसा तो आप मॉडर्न एजुकेशन में भी नहीं कर रहे हो कि जो आपकी बात टीचर से अगर भी है तो आप टीचर को तो चैलेंज नहीं कर रहे हो। है ना? तो ये लोगों को ये समझ लेना चाहिए कि आप सिद्धांत जो है वो खुद ही तोड़ रहे हो अपना बनाया हुआ सिद्धांत और उनको जो डॉक्टरी की पढ़ाई उन्होंने करी होगी तो डॉक्टरी की पढ़ाई उन्होंने ऐसे तो नहीं है कि खुद से ही किताबें
00:27:03:18 लाकर डॉक्टर बन गई होंगी या जो भी उन्होंने पढ़ाई की होगी वहां पर भी उन्होंने कहीं गई होंगी टेस्ट दिया होगा फिर उसी एमबीबीएस जो इंस्टट्यूट होगा उसके हिसाब से ही उन्होंने पेपर भी लिखा होगा अच्छा नंबर भी उनको दूसरों ने दिए होंगे खुद को तो इन्होंने नंबर भी नहीं दिए होंगे। खुद का पेपर खुद से थोड़ी चेक करे होंगे। तो यह बात इनको यह समझ लेनी चाहिए। अब एक और बात आती है मैं मैं इसमें बस एक एक बात जोड़ देता हूं डॉक्टरी वाली क्योंकि आप दूसरी जगह चली जाएंगे फिर आप देखिए ऐसा है कि आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं ये बात और जब मान लीजिए वो भी अगर इस व्यवहारिक इंस्टट्यूट कॉलेज आदि में जब पढ़ रही होंगी तो भी उन्होंने अपने गुरु पे श्रद्धा तो रखी होगी। उस ग्रंथ पर श्रद्धा रखी होगी ना माना होगा ना मतलब शब्द प्रमाण माना होगा कि नहीं माना होगा उस गुरु का उस समय कि बैठ के बॉडी काट रही थी उस समय रिसर्च कर रही थी हर जैसे ये लाइन समझ में नहीं आई तो मैं अब खुद ही प्रैक्टिकली करूंगी सबका ऐसे तो नहीं हुआ होगा ठीक है तो वही बात जो है यहां पे भी लागू होती है ठीक है आप अपनी पूरी बात कर लीजिए फिर मैं इसको इसमें बाद में जोडूंगा जी नहीं नहीं बिल्कुल बिल्कुल आपने बिल्कुल सही पॉइंट जोड़ा अब ये लोग क्या करते हैं कि सनातन धर्म के अंदर ही आर्य आर्य समाज, रामपाल, इस जैसे अलग-अलग इन विचारधाराओं का नाम लेते हैं। उन्होंने भी आर्य
00:28:18:24 समाज का नाम लिया और फिर परंपरा प्राप्त आचार्यों पर ये लोग अभद्र टिप्पणियां कर रहे हैं। अच्छा जैसे कि आपने बोला कि कृपा जी महाराज का उससे कोई लेना देना नहीं था। उन पे भी उन्होंने टिप्पणी कर दी। तो ये इंटरनेट से जितना भी पढ़ा हुआ ज्ञान जो है वो गुरु परंपरा से बड़ा कैसे हो सकता है? यह सबसे बड़ा जो है प्रश्न है तो हम किसी व्यक्ति को नहीं बोलते हैं। हम तो बोलते हैं कि भैया यह जो पूरा झूठा सिस्टम चला हुआ है इनका जो स्वषित रूप से ज्ञानी बने हुए हैं। इसकी जो शुरुआत है वो सारी की सारी 19वीं 20वीं सदी में ही शुरू हुई है। अब बहुत सारा इस वक्त भ्रम ये फैलाया जा रहा है कि भाई आप बस किताब पढ़ लो और किसी का अनुवाद पढ़ लो तो अनुवादक के ज्ञान से आपने जो चीज समझ ली यानी कि वो चीज आपको अंडरस्टैंड हो गई वो समझ ली तो भैया परंपरा से जो आप समझोगे तो उसका जो गढ़ अर्थ है वो आपको समझ में आएगा जो आप अर्थ समझ रहे हो वो तो आपकी अपनी बुद्धि के अनुसार है लेकिन क्या वो वाकई में सही भी है ये यहां पर बात जी इसमें मैं एक बात और जोड़ दूं एक एक एग्जांपल छोटा सा जोड़ दूं मैं जैसे वह आर्य समाज का वो ले रही हैं बीच में वचन मतलब अपना सहारा डूबते का सहारा अलंकार हमारा
00:29:34:07 तो अगर वो ले रही हैं तो अब बात यह है कि दयानंद जी तो अब है नहीं अभी मैं दयानंद जी की ही बात को तोड़ मरोड़ करके अगर उनकी वह जो कह रहे थे मैं जानता हूं और मैं बदल के कहने लूंगा तो कोई इनकी तरफ से यह नहीं कह सकता है अकाट रूप से कि नहीं दयानंद जी ने यह कहा था यह नहीं कहा बताइए जैसे कि दयानंद जी ने मुक्ति वाला जो इनका चैप्टर है शायद शायद सातवा है कि 11वा समुल्लास उसमें दयानंद जी ने कहा है जो सबसे पहली स्थिति है वो व्यवहार में ना आ सकने वाली है यहां खत्म हो गया आर्य समाज का सिद्धांत दयानंद जी ने ही कह दिया और ऋग्वेद का वचन उद्धत मतलब वहां पर रखते प्रस्तुत करते हुए कहा अब जब व्यवहार में ना आ सकने वाली स्थिति है प्रलय काल में उसके बाद व्यवहार में आ सकने वाली स्थिति हो गई। जब शुरुआत है तो ईश्वर भी व्यवहार में ना आ सकने वाला है। हम मांडक्य उपनिषद तो जब व्यवहार में ना आ सकने वाला ईश्वर का जो प्रारंभिक लक्षण है व्यवहार में ना आ सकने वाला। अब वो उसके बाद व्यवहार में आया। कहीं पर क्रियाशील हुआ, यह हुआ, शक्तिमान हुआ। यह सब व्यवहार में आ गया।
00:30:49:10 व्यवहार में आया ना? व्यवहार में ना आ सकने वाले से व्यवहार में आया। यह क्या है? अवतार। अब इसको वो लोग अगर कुछ कुछ शब्द शब्द वगैरह से जोड़ करके ये कहने का प्रयास करें कि नहीं नहीं यहां पे गलत व्याख्या है। आप गलत व्याख्या कर रहे हो। मैं कहूंगा भाई यही कहा है उन्होंने। कैसे सिद्ध अकाट रूप से सिद्ध नहीं कर। तुमको जो मानना है मानो ये कह के जाए। हम अकाट रूप से सिद्ध करेंगे क्योंकि हम परंपरा को मानते हैं। आपको अंत में कहना होगा जो मानना हो मानो। यह जो मानना हो मानो कह के हम नहीं आएंगे जाकिर नायक के सामने से। हम नहीं आएंगे वहां नास्तिक के सामने से उसको निरुत्तर करके आएंगे तुम आओगे वहां से यह कह जो मानना हो जैसे इस व्यवहार और व्यवहार से अव्यवहारिक से व्यवहार में आने वाले विषय में तुम्हें मानना यही करना पड़ेगा हम कहेंगे भैया दयानंद जी ने तो यह मान लिया बिना व्यवहार में आ सकने वाला तो फिर वही पृथ्वी के लिए व्यवहार में कैसे आ रहा है सूर्य चंद्रमा इत्यादि इन सब के लिए व्यवहार में कैसे आ रहा है व्यवहार का विषय बन रहा है ना इन सबका तभी तो सृष्टि की रचना हो रही है क्रियाशील ईश्वर इक्वल टू व्यवहार इक्वल टू सगुण निराकार व्यवहार चालू हो गया। तो व्यवहार में ना आ सकने वाली स्थिति उन्होंने मान करके अवतार को तो खुद ही मान रखा है। ये अवतार हो गया ईश्वर का। व्यवहार में ना आ सकने वाले ईश्वर ने व्यवहार में आ सकने वाला अवतार ले लिया। तभी उसने अब बात यह है कि अगर ये ये कहेंगे नहीं इन्होंने यह
00:32:04:12 नियम माना है। दयानंद जी ने ये माना है तो यहां पर वो ये क्यों कहेंगे? तो हम ये कहेंगे दयानंद जी ने यहां पे गलती कर दी। हम ये क्यों कहेंगे दयानंद जी ने वहां पे वो नियम माना है तो यहां पे भी सही लिखा होगा। हम यह सिद्ध करेंगे कि देखो दयानंद जी दो तरह की बातें करने वाले हैं। दयानंद जी कोई अंतिम प्रमाण थोड़ी ना है। हम हम यह कहेंगे दयानंद जी अपने ही सिद्धांतों में एक दूसरे के विरोधाभासी सिद्धांत दे दिए। हम क्यों माने कि उन्होंने वो सिद्धांत माना तो उसके आलोक में सिद्धांत देखें। क्यों? हम तो दयानंद जी को गलत सिद्ध करने आए हैं ना। दयानंद जी गलत थे। उन्होंने ये कह दिया यहां पे। लो तो तुम वहां पे अकाट रूप से हमें निरुत्तर नहीं कर पाओगे। तो परंपरा वहां पर भी तुमको माननी पड़ेगी कि दयानंद जी की तरफ से बोलने वाला कौन है? मैं। अब क्या हुआ? यहां तुमने दयानंद जी की ओर से परंपरा मान ली। और जो पहले से परंपरा चली आ रही जिसका विरोध दयानंद जी कर रहे हैं उसको तुम नहीं मानोगे। यही तो इस्लाम है। इस्लाम ने क्या किया कि मेरे से पहले कुरान कहती है मेरे से पहले आई हुई सभी किताबों को मैं सत्यापित करूंगी। यानी कि वह यह मान रही है कि अभी तक वह जो परंपरा से ज्ञान था वह सब नष्ट हो चुका है। मैं सत्यापन करूंगी। अब कुरान को मानने वाले लोग यह दावा नहीं दावा करेंगे हमसे आकर के नहीं कुरान के कुरान के संदर्भ से जो हम बताएंगे वो चैन ऑफ नरेशन से जुड़े हुए
00:33:19:18 वो कुरान का अर्थ होगा। क्यों भाई? जब तुम परंपरा को मानने वाले हो ही नहीं। तुमने अपने से पहले की परंपरा को खुद नष्ट अमान्य कर दिया। तो फिर तुम अब क्यों परंपरा को मान रहे हो अपने विषय में? ये ध्यान रखने वाली बात है। जी मैं कहूंगा थोड़ा सा ओमकार जी आप बोले थोड़ा सा जी प्रणाम मैंने विषय जो है इस वीडियो के मैंने एक जगह लिख के ऐसे अपने पॉइंट्स लिखे हुए हैं तो परंपरा क्यों आवश्यक है ये पहला क्वेश्चन है तो उसप मैं बाद में आऊंगा एक्चुअली में नीचे के पहले अपनी तरफ से मतलब मैं बताता हूं अभी मुझे लगता है और बाद में क्योंकि थोड़ा बड़ा होगा इसलिए वो पहले क्लियर कर तो कौन सी परंपरा वास्तविक है तो श आंसर यही सच्चिदानंद प्राप्ति के लिए धर्म एक ही विधा है। सो ऐसी कोई भी परंपरा जो धर्म का पूर्ण पालन करने में स्वयं सक्षम हो करती आई हो वही पर फिर परंपरा आ जाती है। अभी भी कर रही है और आगे भी करने की प्रामाण्य बुद्धि कम से कम वैसे एफर्ट मतलब प्रयास भी करती है अभ्यास भी करती है। तो उसे मतलब मुझे लगता है कि उसको वास्तविक मानने में कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए। एक बाद में शंकराचार्य परंपरा का महत्व क्या है? तो सार्वभौमिक
00:34:34:26 परंपरा है। जैसे उदाहरण के लिए पंच परमेश्वर मंत्रों की दीक्षा देने में समर्थ है। उदाहरण के लिए जो अन्य दर्शन है विशिष्ट अद्वैत और जितने भी बाकी के जो है उनका वो खंडन नहीं करती बल्कि उसको क्रमिक रूप में देखते अंतिम निर्णय अद्वैत को माना जाता है। तो ऐसा नहीं है कि भाई वो एकदम बिल्कुल है ही नहीं। एक्चुअली उसी का अवलंबन लेते हुए स्टेप बाय स्टेप कोई भी व्यक्ति अद्वैत तक परा भक्ति तक पहुंचेगा। तो यह बात हुई मेरा विशेष अट्रैक्शन अद्वैत की तरफ कदाचित पूर्व संस्कारों की वजह से और इस जन्मों में मैंने ये देखा कि बिना किसी लीफ के केवल तर्क के आधार पर कैसे भगवान को यह सिद्ध कर पा रहे क्योंकि आम तौर पर होता है कोई भी जैसे अन्य परंपराएं होती है। मैं किसी का अपमान नहीं कर रहा हूं। लेकिन टिपिकली क्या होता है कि वो होता है ना कि पहले इस्तेमाल करें फिर विश्वास करें वो वाली बात पहले आप भगवान नाम जप के तो देखो फिर आपको एक एक इफेक्ट आएगा ऐसे करके लेकिन अगर कोई नास्तिक यदि ये कहे कि मैं भाई क्यों क्यों जपू मैं कारण क्या है मुझे करना ही नहीं है उतने एक्सट्रीम में अगर कोई चला जाए तो वहां पर फिर शंकराचार्य जी का फिर वहां के
00:35:50:00 वहां से उनकी पावर समझ में आती है कि बिना किसी प्रायर बिलीफ अगर कोई प्योर प्योर नास्तिक है तो उसको कैसे जवाब देना है कि जैसे भैया बताते कि सच्चिदानंद क्या है पहले बताया फिर धर्म की व्याख्या दी फिर ये कहा कि अच्छा इतनी बढ़िया व्याख्या जहां से आपको मिल रही है तो फिर वो पूरा पैकेज आपको एक्सेप्ट करना पड़ेगा वहां पर फिर आप सिलेक्टिव नहीं हो सकते तो इस तरीके की मतलब ये जो है जैसे मतलब मैं सीख रहा हूं तो मुझे समझ में आने लगी इसलिए फिर मेरा वो और मजबूत हो गया शंकराचार्य परंपरा की और मतलब भक्ति मेरी उससे बल मिल गया। बाद में नेक्स्ट क्वेश्चन है गुरु शिष्य संबंध क्यों अनिवार्य है? अनिवार्य मतलब जहां तक मेरी समझ है बिना गुरु के शिष्य अनाथ है। वहां पर खत्म हो जाती है। अनाथ है। बिल्कुल अनाथ है। कुछ नहीं करता। आज की डेट में कई सारे लोग देहधारी गुरु को अवॉइड करते हैं। क्योंकि कहीं ना कहीं लगता है कि गुरुदेव डांट मार देंगे। हमने अगर कुछ गड़बड़ की गलत कर दिया तो थोड़ा सा नाराज हो जाए। डांट मार देंगे। इसलिए कई बार मतलब जैसे कदाचित दीदी जी विषय में मतलब जिस जिनकी प्रेरणा से ये टॉपिक चल रहा है। कभी कभी कभी ऐसा भी होता है कि अश्रद्धा ना हो जाए
00:37:05:03 या डाउट हो जाए क्योंकि आजकल ऐसा हो भी रहा है तो इस वजह से भी वो देहधारी गुरु में श्रद्धा नहीं रखते। बिल्कुल बिल्कुल तो लेकिन उसमें भी तो जैसे गुरु गीता या कहां पर वहां पर भी गुरु से विषय जितने भी शास्त्र है वहां पर उन्होंने बताया कि अगर मान के चलो कि गुरु गड़बड़ निकल गया तो फिर आप बिना कोई इंसल्ट किए पे आप यू स्टेप बैक आप अपने आप को डिसोसिएट कर लो अपमान करने की जरूरत नहीं है अच्छा मान ले किसी पाखंडी से कोई लेजिटमेट मंत्र मिल जाता है किसी को अब जैसे इस वालों का हरे कृष्ण महामंत्र तो मैंने गुरुदेव से ही किसी प्रवचन में सुना था कि हो सकता है कि गुरुदेव आपके जो बाबा जी थे वो फेक निकले लेकिन जो मंत्र आपको दिया गया वो सही निकला तो आप उसी को कैरी करिए और जो आपके सही वाले गुरुदेव है वो प्रकट हो जाएंगे आज नहीं तो ऐसे मतलब तो जितनी चीजें है तो वहां पर शास्त्र सम्मत सोलशन भी दिया गया है क्योंकि पाखंड तो है ही आज की डेट में तो हां तो उसके लिए सोशल भी है लेकिन कई बार मुझे ऐसा लगता है कि लोग जानबूझ के देहधारी गुरु को अवॉयड करते जैसे दीदी का भी बोल रहे थे कि आदि शंकराचार्य जी मेरे बस ऑलमोस्ट मेरा डन हो गया कि जैसे जी मेरे गुरु है या शिव मेरे गुरु है तो गुरुदेव
00:38:20:09 ने ये कहा कि भाई आपका भगवान भी आपको ट्रांजक्शनबल नहीं है हमारी उतनी तो औकात है नहीं कि सीधा सीधा बात करे उनसे और आपने गुरुदेव को भी वहां बिठा दिया तो अब बात किससे तो व्यवहारिक धरातल पे हमें इसलिए देहधारी गुरु चाहिए ताकि अगर गलती हमारी हो गई गड़बड़ हो गई तो हमें वो रस्ते पर लाए कि भाई ऐसा नहीं ऐसे करना है। ये लास्ट पॉइंट ये कि समाज क्यों भटक रहा है कि यही बेसिकली गुरु ग्रंथ गोविंद से वंचित रहने के कारण भटक रहा है। तो शिवा जी आप अपना दीजिए। फिर मैं पहले वाले पे आता हूं। परंपरा आवश्यक थी। आप बोलिए। मैं मैं एक चीज बताऊं। यह जो व्यवहारिक गुरु को स्वीकार ना करने की जो चीज है यह आज की नहीं है। बहुत पहले की है और व्यवहारिक गुरु को स्वीकार ना करना ही मोहम्मद है। क्योंकि भाई आपको व्यवहार में मिल रहा है कुछ बताने वाला। अब हम उस व्यवहारिक को नहीं मानेंगे। अपना कोई जिब्राइल आया या जो भी है वो इस्लाम बन गया। व्यवहारिक गुरु को ठुकराना कोई नई बात नहीं है। जिसको भी अपने मन की चलानी होती है धर्म के नाम पर वह व्यवहारिक गुरु को ठुकराने का प्रयास करता है। पहली बात अब इसमें तर्क क्या है कि व्यवहारिक गुरु को
00:39:35:10 ठुकरा करके आपने एक पारलौकिक गुरु को स्वीकार कर लिया। ठीक है? अच्छी बात है। दूसरों के व्यवहार में वो आ नहीं रहा है। प्रमाण है नहीं उसका। आपका अपना जो व्यक्तिगत एक अनुभव है कि हमको कोई शक्ति आ रही है कुछ दे रही है उसको तुम लोगों के समक्ष इसको मान लो मैंने सपना देखा इसको मान लो शिवजी ने मुझे मंत्र दिया इसको मान लो मुझे मां भगवती ने मंत्र दिया इसको मान लो अपने आप पर्सनल एक्सपीरियंस को लोगों को कहना चाहते हो कि ये प्रमाण है और अपने तो पर्सनल एक्सपीरियंस को प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रहे हो और फिर उनको दबाना किसके नीचे चाह रहे हो? जो प्रत्यक्ष रूप से वेद के मंत्र हमें दिखाई दे रहे हैं जो पढ़ने में आ रहे हैं जो हमारे व्यवहार का विषय है। उसके नीचे आप लोगों को दबाना चाह रहे हो और अर्थ की दृष्टि से अपना क्या ले आ रहे हो? अपनी व्यवहारिक चीजें नहीं ला रहे हो। अपनी ला रहे हो भाई अलौकिक चीजें जो दूसरे के व्यवहार का विषय नहीं है। दूसरा क्या जाने कि तुमने भैया उसको वाकई में वो परम शक्ति आई है तुम्हारे पास। वो क्यों विश्वास करें? उसको तुम प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रहे हो। ठीक है? और उनको किसके नीचे दबाना चाह रहे हो? किसके नीचे? कि भाई
00:40:50:12 ये ये वेद में ये लिखा है। देखो इस वेद में लिखा है। इसका अर्थ ये होता है जो मैं बता रहा हूं। ये अर्थ कहां से मिला? मेरे वो पारलौकिक गुरु से। ठीक? ये तो सिस्टम हो गया। अब इसका एग्जीक्यूशन क्या है? वो भी समझिए। कि अवतार को और व्यवहारिक गुरु को समाजियों ने क्यों ठुकराया? अवतार को और व्यवहारिक गुरु को समाजियों ने क्यों ठुकया? इसलिए ठुकराया कि इन दोनों ही चीजों को मान लेंगे तो प्रत्यक्ष प्रमाण हो जाएगा हमारे पास हमारी बातों को काटने के लिए अगर इनमें से एक परंपरा प्राप्त आचार्य की आवश्यकता मान लेंगे तो हमारे सिद्धांतों को काट दिया जाए कोई ना कोई आकर के परंपरा प्राप्त आचार्य काट देगा तो इसलिए परंपरा आउट फिर अवतार को मान लेंगे तो अवतार आकर के कह देगा भैया यह हमारे गुरु हैं वशिष्ठ है यह हमारे शंकराचार्य हमारे गुरु हैं जो भी है अवतार को अगर मान लेंगे तो वह आकर के प्रत्यक्ष प्रमाण दे देगा तो आग की लपट को मानो ही नहीं आग की लपट को मानो ही नहीं तो काट की लकड़ी में अग्नि दाहक क्षमता होने की सिद्धि हो जाएगी इसलिए लपट को ही नकार दो तो क्या है अगर हमें धर्म के नाम पर वेद के नाम पर अपने मनमाने अर्थ प्रस्तुत करने हैं तो क्या करो ये दो जो प्रत्यक्ष चीजें आ रही है प्रत्यक्ष प्रमाण जो आ रहा है अग्नि का दाहक क्षमता का उसको नकार दो नहीं नहीं अग्नि लपट
00:42:05:18 बन ही नहीं सकती दाहक क्षमता वो आंखों का विषय बनने वाला रूप नहीं ले सकती और इसी प्रकार से परंपरा है तो क्या हुआ? वो तो वेदों के विरुद्ध जा रहे हैं। अरे भैया वेदों के विषय में तो वही प्रमाण है ना जिन पर जिनको जिनको तुम आस्था रख रहे हो। अब इससे होता क्या है? इसका एग्जीक्यूशन क्या होता है? इसका एग्जीक्यूशन यही होता है कि हमने वो एक ड्रामा स्क्रिप्ट आधी पदरी लिख ली है और हम लोग बहुत जल्द कुछ शॉर्ट फिल्म्स लेकर के आएंगे। तो उसमें क्या है कि एक जगह पर भाई बहन का विवाह चल रहा है। ठीक है? स्वयं श्री रामचंद्र जी आ गए। वह भ्रमण के लिए निकले हैं और रामचंद्र जी वहां पहुंचे और वहां पहुंच के बोलते हैं कि आप ये क्या करा रहे हो? भाई भाई बहन का विवाह करा रहे क्या दिक्कत है? अरे नहीं गलत है। अरे कैसे गलत है? अरे शास्त्रों का अर्थ ये शास्त्रों का अर्थ हमने निकाला ना। ब्रह्मा कुमारी प्रजापति ब्रह्मा आकर बता गए हमको। ये अर्थ है हो सकता है। विवाह हो सकता है। अरे मैं राम हूं। मैं भगवान स्वयं आया हूं। इस अरे अवतार नहीं ले सकता। ईश्वर तुम हो ही नहीं सकते। अच्छा मैं राम ही हूं। मैं क्या करके दिखाऊं तुम बताओ? अरे भैया जो सर्वव्यापक है वो एक जगह कैसे आ जाएगा? अच्छा तो उसका वहां पे होना उसका वहां पे होना उसके ईश्वरत्व
00:43:21:01 में बाधक है। इस पॉइंट का सहारा लेकर के जो सर्व्यापक है वो यहां कैसे आ जाएगा? तो इसको नकार वहां पे प्रजापति प्रजापति ब्रह्मा जी चले गए लेकिन राम जी नहीं चल रहे आपको अवतार के। हां हां हां वहां आ गए। वहां आ गए। जो सब नहीं अभी आर्य समाज की दृष्टिकोण से जो सब जगह वो यहां कैसे हो सकता है? अब वो जब सब जगह हो गया तो भैया अब तो वो आ नहीं सकता हमको सब रोकने के लिए हमारी बात को काटने के लिए आ ही नहीं सकता कोई परंपरा पे विश्वास नहीं है और ईश्वर के अवतार पे विश्वास नहीं है। ईश्वर अगर आ जाएगा अवतार लेकर के तो हम ऐसे मना कर दे वो तो सर्वव्यापी है। एक देसी हो नहीं सकता। और सर्वव्यापी आपको बता नहीं सकता आ के। सर्वव्यापी होते हुए वो आपके व्यवहार का विषय बन नहीं सकता। तो इस खेल में इस लूप में डाल के अपनी मनमानी शास्त्रों के नाम से चलाने के लिए यह व्यवहारिक गुरु और व्यवहारिक ईश्वर के स्वरूप को मना करते आइए लोग और आज जो भटका हुआ हिंदू है, दिशाहीन हिंदू है, संप्रदाय विहीन हिंदू है, वो भी यही कर रहा है कि परंपरा को क्यों नहीं मानना इसलिए नहीं मानना है। और अवतार को भी कब तक मान रहा है? जब तक अवतार आकर के तुमको रोक नहीं रहा है। जिस दिन भगवान श्री राम, कल्कि इत्यादि के तुम भगवान नहीं हो मैं नहीं मानूंगा। यह चालू हो जाएंगे ये लोग जो ये कह रहे हैं। तो यह बात है कि यह विरोध
00:44:36:04 करने का कारण यही होता है कि इनको अपनी चलानी है वेदों के नाम पे सनातन के नाम पे। अच्छा दूसरी बात यह है कि चलो विकृति आ गई। मान लिया मैंने कई अपनी उसमें कहा। अरे तो भैया वेदों के नाम से क्यों प्रस्तुत कर रहे हो? अपनी आध्यात्मिकता। अपना निजी अनुभव। तुम उसी नाम से क्यों प्रस्तुत कर रहे हो? जो नाम ख्यापित है पहले से। नया नाम लाओ, नया किताब लाओ, बन जाओ, मोहम्मद बन जाओ, ईसा बन जाओ। फिर हम देखेंगे तुम्हारे सिद्धांत में कितना दम है। मगर वो पहले से ख्यापित जो चीज है उसके नाम से करना इसलिए जरूरी है कि भीड़ उसको छोड़कर के इधर आए। हमारा जो हम जो धर्म विरुद्ध आचरण बता रहे हैं पशुत्व बता रहे हैं उसको ज्वाइन करें वो जिससे कि हम लोग ज्यादा संख्या में हो जाए और फिर हम लोग राज करें और उसके भी अंत में वो गति जो गंतव्य तक ना पहुंचाए उसका कोई अस्तित्व नहीं होता है ट्रेडमल पर दौड़ता हुआ आदमी उसके भी अंत में तुम अपना ही नुकसान करोगे जी ओमकार जी जी बस उसमें भी जैसे आर्य समाज का अगर यदि कोई भाई बहन मुझसे बात करे उनको यही बोलूंगा कि भाई ये जो आप एक देश वाली आर्गुममेंट जो करते हो ना स्वरूप दृष्टि से राम कण कण में बसा है। शिव कण कण में बसा है। स्वरूप की दृष्टि से जब आप किसी अवतार की बात करते हो तो वहां पर वो सगुण साकार में आ जाते
00:45:51:10 हैं तो आकार और गुण किसी विशेष देश में हो सकते हैं। तभी तो ऐसे प्राण जैसे दिखे होंगे ना त्रेता युग में कि भाई ये है लेकिन यदि उनसे पूछा जाए जैसे भगवान श्री कृष्ण को पूछा गया अर्जुन ने कि अरे आप दिखाइए दर्शन दीजिए तो फिर उन्होंने दिखा दिया तो उनमें वो भी एबिलिटी है ना कि यदि कोई भक्त प्रेम से पूछे तो वो फिर वो वाला दर्शन भी उनका विराट स्वरूप भी दिखा सकते तो उससे फिर मैं कर देता कि पारमार्थिक लेवल है स्वरूप की कण कण में बस ये सर्वत्र व्याप्त है हा व्यवहार जो क्योंकि व्यवहार इटसेल्फ भी तो लोकल है ना जो व्यवहार एक होता है जरूरी थोड़ी है वही व्यवहार वहां हो शरीर में भी तो वही है ना दिखाई आंख से देता है ना बात मुंह से करते हैं ना तो वो भी तो लोकलाइज हुआ ना तो इस तरह से मतलब मैं करके देता हूं और अभी मैं मेन फर्स्ट पॉइंट फिनिश एक कमेंट है शायद किसी को कोई कन्फ्यूजन हो रही है उसको क्लियर कर दूं नहीं शिवश एक एक मिनट नहीं शिवश भाई किसी नाटक में भगवान को मत दिखाना ये उनका अपमान होगा क्योंकि वो नाटक शास्त्री नहीं है। भगवान की लीला में वह वर्णित नहीं है। इस बारे में हम परमिशन ले लेंगे आचार्य से। अगर वह कहेंगे तो दिखाएंगे। नहीं कहेंगे तो नहीं दिखाएंगे। ठीक है। अच्छा
00:47:06:14 वो ठीक है। आप अपनी बात पूरी कर दो मिनट में फिनिश करता हूं। ओमकार जी। क्योंकि यहां पे अभी दिन है। मेरी मीटिंग एक्चुअली होगी थोड़ी देर में दूसरी ऑफिस। मैं फिनिश करता हूं। तो सबसे मेन क्वेश्चन इसका मीटिंग का कि परंपरा आवश्यक क्यों थी? जहां तक मेरी समझ है परंपरा स्वयं सिद्ध है। सांस लेते हैं। हमारे पेरेंट्स सांस लेते थे। हम भी सांस ले रहे हैं। तो मतलब कोई एक सेट सिस्टम फॉलो करना। वो हमारे अंदर पहले से ही बसा हुआ है। सांस लेना। अब इसमें मैं अभी तक धर्म गया भी नहीं हूं। कोई आस्तिक है नास्तिक है। वहां पर मैं गया ही नहीं हूं। सांस तो लेता है ना भाई। आर्य समाज जी भी सांस लेता है। भी लेता है, हम भी लेते हैं। ठीक है? तो उस परंपरा को सबने सब्सक्राइब किया हुआ है। यदि कोई अनसस्क सब्सक्राइब कर दे तो मर जाए वही पर। ठीक है? तो परंपरा का खंडन करना एक तरह से मृत्यु ही है। ठीक है? एक बात इसीलिए वो निस्ग सिद्ध प्राकृतिक भी है जो सास का उदाहरण दिया श्वास लेने का। जहां तक जनरल सेंस की बात है तो भाई परंपरा तो शास्त्र सम्मत गाइडेंस किसी भी विद्यार्थी को शिष्य को प्रोवाइड करेगी। ये उसका प्रैक्टिकल एक और एक अच्छा ये
00:48:21:18 मतलब बेसिक परंपरा आवश्यक क्यों कुछ और बिंदु मुझे रखने थे जैसे कई सारे लोग ऐसे अनर्गल प्रलाप जो करते हैं धार्मिक बुद्धि पतित होने के कारण या फिर अभी तक वहां है ही नहीं उस लेवल इसलिए ये सब होता है तो मेरा प्रार्थना उनसे यही कि ज्यादा से ज्यादा नाम जप करें पहले आप किसी चक्करों में मत पड़िए चाहे आप वर्णाश्रमी हो चाहे कुछ हो क्योंकि क्या है जब तक वो शुद्ध होगा नहीं ना तब तक वहां जाके भी क्या ही कर लेंगे। ठीक है? ये होता है तो पहले घिस के नाम जप करो। उसके बाद यदि भगवान चाहे तो मुक्त नहीं देंगे। यदि भगवान चाहते हैं कि नहीं आप प्रॉपर धार्मिक रूप से आए। प्रॉपर अपना सब कर्मकांड ज्ञान कांड भक्ति कांड स्टेप बाय स्टेप जो भी है वो सब करते हुए आए तो ठीक है वैसे भगवान की इच्छा लेकिन दोनों ही तरफ फिर कल्याण ही होना है तो इसके लिए मैं जैसे प्रेमंद जी नाम परफस करते हैं मैं भी प्रार्थना पूर्वक नाम पे बोलूंगा कि स्पेशली जैसे दीदी ने बात कही थी ऐसे लोगों के लिए जो भी वहां तक पहुंच चुके भगवान करे उनका चलता रहे आगे और कल्याण होगा उनके लिए नहीं कह रहा हूं एक बात बाद ने जो सेुलर शब्द आपने यूज़ किया ना आप थोड़ा सा गूगल एआई वगरा से पूछ
00:49:36:19 लीजिए। सेुलर टर्म भारतीय कॉन्टेक्स्ट में थोड़ी अलग है। उसकी जो ओरिजिनल डेफिनेशन है यूरोप से ये टर्म आती है सेुलर की बेसिकली स्टेट और लॉ का सेपरेशन ये है मूल में। अब हमारे इसमें ये फिट ही नहीं है क्योंकि हमारे लिए गवर्नेंस के लिए लॉ के लिए लौकिक धरातल पर मनुवाद जैसे है मनुस्मृति और और अन्य जैसे शुक्र नीति या जो भी मतलब गुरुदेव जैसे उदाहरण देते हैं कि मैनेजमेंट करने के लिए एडमिनिस्ट्रेशन करने के लिए हमारे धर्म में ऑलरेडी प्रोविजन है तो वहां सेपरेशन की जरूरत ही नहीं है। इसलिए जैसे गुरुदेव भी कह सेुलर शब्द वंदा पुत्र टाइप है मतलब ऐसे ही है। उसका कोई सरफेर नहीं है। उसका कोई अर्थ ही नहीं है। अभाव अभाव हां तो धर्म की दृष्टि से इसीलिए वो ऐसा सिद्ध होता है क्योंकि हमारे इसमें वो प्रोविजन है अन्य तंत्र में उनको सेुलर लाना पड़ा मे बी बिकॉज़ उनके पास वो प्रोविजन नहीं है या फिर उनको लगता है कि भाई हमारे पास ऐसी कोई है नहीं सिस्टम तो चलो कुछ हम लोग नया कर देते ये सोच के उन्होंने वहां पे चालू किया लेकिन भारतीय हिंदू ये रेलेवेंट है ही नहीं एक बात मतलब लौकिक धरातल के लिए ये है मनुस्मृति वगरा और बाद में आगे जाके यमराज जी न्याय करे या फिर भगवान न्याय करे।
00:50:52:09 ठीक है? ये बात है। जहां तक ये जितनी ऑर्गेनाइजेशन है मार समाज बी के जितनी भी है जहां तक धर्म संगत हो वहां तक मैं उनको प्रणाम करता हूं। उनको अग्री करता हूं कि अगर वाला कहता है मुझे हरे कृष्णा बड़ा आनंद आता है। मैंने बोला भैया जपना जितना ज्यादा जपो उतना कम ही है। मतलब जितना लेकिन अगर आप कोई जनेऊ बांटोगे अधर्म टाइप कोई काम करोगे तो भैया वो मत करना। ये मतलब अपने ही पैर पे कुल्हाड़ी मारने वाली बात। मैं उनको बोलूंगा कि भाई आप इतना अच्छा नाम जपते हो, इतना सुंदर कीर्तन करते हो। फिर ये बाकी सब करने की क्या जरूरत है? तो ऐसे करके मैं प्यार से बोलूंगा।
00:51:35:27 बस लास्ट पॉइंट सॉरी मैं क्योंकि पता नहीं बार-ब आ पाऊंगा कि नहीं। अच्छा जहां तक 15 की बात है एजुकेशन करियर उसके लिए हम लोग कॉलेज यूनिवर्सिटी जाते हैं प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन करते हैं वहां पर किसी अथॉरिटी से अपने आप को सर्टिफाई करवाते हैं तो भाई यही चीज आप धर्म में भी करो ना क्योंकि नियम तोड़ने के लिए क्या धर्म ही मिला है क्या तो ऐसे लगता है और समराइज इस पूरी चीज को करने के लिए तो किसी भी व्यक्ति को ज्ञान हो उस धर्म का या जो भी मतलब ज्ञान हो उसका उसका अभ्यास हो और फिर उसका अधिकार हो। ये तीनों अगर चीजें जैसे गुरु ग्रंथ में वैसे ही उसी फॉर्मेट में ये अगर तीन चीजें अपनी जगह पे है तो उनका कल्याण निश्चित बस ये बोल के मैं खत्म कर महादेव नहीं बहुत अच्छा आपने अपना पर्सेक्टिव दिया है यहां पे और बहुत ही ज्यादा थोड़ा सा जो प्रासंगिक चीजों को रखते हुए चीजें जब बताई जाती है तो उसमें ज्यादा कनेक्ट हो पाता है व्यक्ति। हम थोड़ा सा विलंब ना लास्ट जोड़ दूं यहां पे लिखा नहीं था विदेश को ले। भैया मैं खुद विदेश में बैठा हूं। मैं कनाडा में रहता हूं। 20 साल से ज्यादा रहता हूं। मैं भी पहले ऐसा ही था। सेकुलर पॉलिटिकल हिंदू ये भी मैं बोल दूं। घोषित मुझे कोई शर्म नहीं आ रही क्योंकि हां भाई मेरी गलती थी। लेकिन गुरु ग्रंथ
00:52:51:06 गोविंद की कृपा है कि जो धार्मिक हिंदू जो होते हैं धर्म क्या है? गुरु धीरेधीरे उनकी कृपा से नाम की कृपा से मुझे ये सब समझ में आने लगा। एक बार विदेश में रह के जहां तक जितनी धर्म संगत चीजें आप कर सकते हो। जैसे नाम जप वगरा करो आनंद पूर्वक करो लेकिन उसके लिए अपनी जो परंपरा है ट्रेडिशन है उसको उजाड़ नहीं अपने गुरुदेव से परमिशन ले जो भी उनको ठीक लगे अपने जो बड़े है भाई जो भी है गुरु भाई आदि उनकी गाइडेंस में जैसे शिवज भैया से मैं पूछता रहता हूं कि अच्छा ये करना ठीक है क्या ये करना तो वो फिर मुझे बता देते हो सकता है कि मेरा मन एक थोड़ा होता है ना कि जैसे मैं शिव षडाक्षरी मंत्र पहले ऐसे ही जपता था ठीक है बाद में उसको उसकी मर्यादा समझ में आने लगी। अरे नहीं अच्छा आप यदि अच्छा भाव की जहां तक बात है भगवान की मर्यादा को उसका पालन करना ये भी प्रेम का ही एक रूप है ना। हम जैसे छोटे बच्चों को भी कहते हैं कि अरे बच्चा बड़ा हो गया। बड़ा हो गया मतलब क्या? उसको मर्यादा समझ में आती है। एकदम से किसी के कमरे में ऐसे ही नहीं घुसेगा। पहले थोड़ा सा नक करेगा कि क्या मैं अंदर आ सकता हूं? ऐसे थोड़ा प्यार से आएगा। यही है तो इसलिए विदेश में जितने भी शास्त्र सम्मत
00:54:06:12 बातें हैं खंडन है तो उसको मैं प्रणाम करता हूं। ये मेरी असमर्थता है या विवशता कह लीजिए पूर्व संस्कार प्रारब्ध आद कह लीजिए जिसके कारण मैं मेरे जैसे यहां पे है लेकिन उनको कदापि शास्त्र खंडन नहीं करना चाहिए। गुरु ग्रंथ गोविंद का खंडन नहीं करना क्योंकि ये होता आप वहां से बोलेंगे ना तो फिर वहां पर आपको उतना शायद वो वो बोलेंगे आप भारत में रह के ये सब बोल रहे हो वही बाहर वाला चाहिए जो इसका करें। इसीलिए मैं विशेष बोल रहा हूं कि भैया धार्मिक लोगों को बाहर कोई काम नहीं है। एक क्वेश्चन बार-बार आ रहा है कि भाई आप हमें वर्तमान के चार शंकराचार्यों के नाम बता दीजिए। ठीक है? तो मैं यह कहूंगा कि मैथमेटिक्स की बुक में आपको जो है सामाजिक विज्ञान के प्रश्नों का हल नहीं मिलेगा और जो सामाजिक विज्ञान की बुक होगी उसमें आपको मैथमेटिक्स के उत्तर नहीं मिलते हैं। तो जो आप ये चार बातें अब आप ये लोट डालना चाहते हो ना कि मैं बोलूं मैं बोलूं। मुझे मालूम है एक क्वेश्चन आ क्यों रहा है? तो मैं आपको वो स्त्रोत बताता हूं। मेरा जो स्त्रोत है धर्म और ब्रह्म के विषय में जो इस समय चारों पीठों से जुड़े हुए जो ख्यापित नाम है वो धर्म ब्रह्म के विषय में वो चारों मेरे लिए परिणम में है। और ये जो व्यवहारिक प्रश्न है जिससे मेरा कोई मामला है ही नहीं कि कौन ये कौन की अथॉरिटी क्या है कौन क्या नहीं है। इसके निर्णय कुछ और हैं। जैसे कि Axis बैंक में किसके अकाउंट
00:55:21:20 में कितना पैसा है। इस वशय में मैं मेरी कोई गति नहीं है। तो इसी प्रकार से कौन किस पद पर बैठा है? किस पद पर नहीं बैठा है। मेरी पर्सनल कोई इसमें गति नहीं है। इस विषय में मैं निर्भर हूं अपने पूज्य गोवर्धन मठ पूरी पीठाधीश्वर जो वर्तमान के शंकराचार्य क्योंकि वो मेरे गुरु हैं। तो यह व्यवहार के विषय में मैं उन पर निर्भर हूं। तो उनका जो निर्णय होगा वही मेरा निर्णय होगा। धर्म ब्रह्म चारों का एक है तो चारों का धर्म ब्रह्म मेरा है। हम आपको यह बता सकते हैं कि प्रामाणिक आचार्य के क्या-क्या लक्षण होते हैं जो शास्त्रों में लिखे होते हैं। अगर आपको यही निर्धारित करवाना है निर्णायक बनना है इसी विषय में तो आप पूरी के शंकराचार्य जी के पास जा सकते हैं। आप मेरे धर्म को काटिए, ब्रह्म को काटिए। इस विषय में ये चैनल है। है ना? ये चैनल इस विषय में नहीं है। निर्णय करने के लिए शंकराचार्य कौन है? कौन नहीं। हां। गुरुदेव के द्वारा निर्गत जो बात है उसको हम जरूर प्रचारित कर देंगे कि गुरुदेव ने कहा कि फलाने शंकराचार्य हैं तो शंकराचार्य हैं। गुरुदेव ने किसी बात में समीक्षा नहीं की। मौन रहा तो हम उस विषय में मौन है। हमारी कोई गति नहीं है उसमें। अब अगर आपको ये निर्णय लेना ही है तो आप जाएं और पूरी के शंकराचार्य जी से ये विनम्र भाव से उनके शरणागत होकर के पूछे कि भाई वर्तमान के चार प्रामाणिक शंकराचार्यों के नाम क्या है? मेरे ये इसमें मेरा इसमें जो है मेरा जो व्यक्तिगत वो है क्योंकि मेरे गुरु वो हैं
00:56:36:24 तो मेरे निर्णायक वो है जिसके जो गुरु होंगे परंपरा से उनके निर्णायक वो होंगे। ठीक है जो क्या कहते हैं समष्टि का भाव है वह है धर्म ब्रह्म के विषय में तो आप चारों में से किसी भी किसी भी पीठ में जाकर के अपनी बात पूछ सकते हैं। ठीक है? तो, यह जो आप डालने का प्रयास करते हो, यह हम क्या बताएं आपको? अब यह जो इसको क्या कहते हैं? असहज स्थिति में डालने का जो उपयोग वो है उपाय कि सामने वाले को परेशान करो। जैसे कि अमुक्तेश्वर जी महाराज को आज तक वाले टीवी पर ले आएंगे। आप ये बताइए आप ये बताइए कोई शूद्र शंकराचार्य बन सकता है कि नहीं? जल्दी बताओ। पंप आप ये बताइए कोई शूद्र शंकराचार्य बन सकता है कि नहीं? बस और कोई काम नहीं है यही प्रश्न। अरे भैया फिर जब जवाब जब जवाब नहीं आएगा उसकी क्लिप काट देंगे। कह दिया नहीं बन सकता। जातिवादी है ये। ये तो इनका काम यही है। इनको क्लिप चाहिए, मीडिया चाहिए इनको और कुछ तो मैं इस विषय मैं इस विषय का निर्णायक नहीं हूं कि शंकराचार्य पद पद पर कौन बैठा है, कौन नहीं बैठा है। क्योंकि इसमें बहुत सारी जो वर्तमान की सोर्सेस होती है ना इंफॉर्मेशन वो सब चाहिए होती है। हमारा चैनल धर्म ब्रह्म के विषय में प्रकाश डालने वाला है और इस विषय में प्रकाश डालने वाला है कि आपको धर्म ब्रह्म के
00:57:52:04 को जानने के लिए किस किस तरह के प्रामाणिक आचार्य से जुड़ना चाहिए और प्रामाणिक आचार्य कौन हो सकता है? इन विषयों का प्रचार करने वाला हमारा चैनल है। एक तरीके से यदि हमारे चैनल को आप मैथमेटिक्स मानेंगे तो आप प्रश्न कर रहे हैं जाकर के किसका? हिंदी ग्रामर का। ठीक है? तो सारे सब्जेक्ट्स की बुक होती है। उसमें सब कुछ नहीं मिलता है। अब आपने वो डायनासोर के बारे में पूछने लगे अरे भैया डायनासोर क्यों बताएं हम? जब हमारा विषय यह है कि ब्रह्म की प्राप्ति कैसे मोक्ष क्या है? परम स्वतंत्र मोक्ष क्या है? सर्व शक्तिमान ईश्वर क्या है? आप हमसे पूछ रहे हो आकर के कि भैया हमको जो है वो कॉस थीटा ये सब बता दो। हमें नहीं हमारी गति नहीं है। cos थीटा में यहां बैठे कुछ लोगों की है। यहां बैठे मेरे गुरु भाई हैं जो उनकी है। मेरी कॉस थीटा वगैरह में उतनी गति नहीं है। तो आप मुझसे प्रश्न पूछने कॉस थीटा क्या है? ये कोई बात है क्या? अभी मैं ही आपके आपके संबंध में ऐसे प्रश्न पूछने लगूं जिसके लिए उत्तर देने में आपको असहजता होने लगे। तो आप यही कहोगे ना इससे हमारे विषय का क्या मतलब है? जिस विषय पर हमारा चैनल है जिस विषय पर हम चर्चा करते हैं उस विषय पर बात करिए। ठीक है? अच्छा अभी हम आ जाते हैं। अब हमारा वो जो बहुत मोस्ट अवेटेड टाइम है। वीरूपाक्षी जी आप अपनी बात रखिए। जी जी तो बात चालू करने से पहले एक पंक्ति कहना चाहूंगा
00:59:07:13 जो कि बहुत फेमस है सनातन धर्म के अंदर कि गुरु शिव स्वरूप है और शंकराचार्य ही शिव है। आदिकाल से लेकर आज तक मैंने जब इतिहास भी पढ़ा। शिव को गाली दी गई जैनों ने दी, बौद्धों ने दी, अन्य धर्मों ने दी। और शंकराचार्य की शिव स्वरूप ही है तो यह तो मैं एक्सपेक्ट करता ही हूं मलिच्छों से और जो धर्म के अगेंस्ट बोलते हैं पतित जो है कि वो बोलेंगे उल्टा सीधा बोलेंगे क्योंकि जो भगवत ज्ञान है उसकी प्राप्ति हर किसी को आसानी से नहीं होती उसकी प्राप्ति करने के लिए भी आपको संघर्ष करना होता है। शरणागति होना होता है। बातें समझनी होती है। तो सबसे पहले तो मैं सबसे निवेदन करूंगा कि कोई भी किसी व्यक्ति विशेष को गाली ना दे जाकर उनकी चैट्स में बातें होंगी अच्छे तरीके से होंगी तो आप प्लीज ना उनको हेट दीजिएगा ना हमसे उम्मीद कीजिएगा कि हम उनको देंगे या फिर आप हमसे भी हेट ना कीजिएगा तो बात चालू करते है इंटरनेट संप्रदाय की यहां पे सब मैंने क्लेम्स भी लिखे हुए हैं मैंने कुछ पॉइंट्स भी लिखे हुए हैं जो चैट में आए थे डीएम में आए थे तो इंटरनेट संप्रदाय क्या है इंटरनेट संप्रदाय मैं आपको बताता हूं Instagram के दृष्टिकोण से जब मैं चार साल से यहां पे हूं कि बच्चे आते हैं बच्चे आते वो पीडीएफ निकालते हैं। उन्होंने एक गुट पकड़ लिया है कि हम शिवजी वाले हैं। हम विष्णु वाले हैं। हम भगवती वाले हैं। अब हम वेद खंगालेंगे।
01:00:23:08 एक एक कोट निकालेंगे कि वेद तत्र्या यजुर्वेद में ये लिखा हुआ है। अब हमारे इष्ट तुम्हारे इष्ट से बड़े हैं। फिर सामने वाले बोलेगा नहीं नहीं हमारे यहां पे ये लिखा हुआ है। तुम्हारी बात कट गई है। अब वेद से वेद को काटने वाले बैठे हैं। इसमें एक बात जोड़ दूं। ये आपको डिस्कर्ड पे बहुत मिलेंगे। हां डिस्कर्ड पे मिलेंगे आपको Instagram पे मिलेंगे। मैं हाथ जोड़ लेता हूं मैं दूर जाता हूं वहां से मैंने कहा तुम अपना करते रहो जो अभय राधा कृष्ण दास जी थे जिनकी डिबेट हुई थी आवाहन जी के साथ वो इन्हीं का पार्ट है जब मैं उनको तीन साल पहले जानता हूं इनकी डिबेट तो वो इसी इसी फील्ड के है वो अब मैं बताता हूं अवेकनिंग भारत जी का इनकी रिसर्च खुद की कोई नहीं होती अगर आपको इतनी रिसर्च होती जितने श्लोक अपनी वीडियो में लगाती है तो इनको इतना पता होता कि वेद गमन वेद गमन क्या बोल रहा हूं विदेश गमन अलाउड क्यों नहीं है इनको पता होता क्लूलेस थी ये पूरे आधे घंटे डिबेट जो चली 40 मिनट चली बाद में 4 घंटे इन्होंने खींचा उसको क्लूलेस थी पूरे टाइम ये तो वही बात आती है कि इंटरनेट संप्रदाय के जो व्यक्ति होते हैं वो किताबों में से चीजें छाटते हैं कंट्रोल एफ फंक्शन होता है लैपटॉप में वहां उसको पीडीएफ डाउनलोड करते हैं कंट्रोल एफ में अपना नाम लिख दिया शिव जी के बारे में से शिव लिख दिया शिव से अब जितने वो आए हमने वो श्लोक उठा लिए मंत्र उठा लिए और उनका वो छाप दिया वहां पे परंपरा की इंपॉर्टेंस क्या होती है इसके लिए मैं स्पेशली ये लेके आया हूं अमर चित्रकथा
01:01:38:12 की गीता है ये कॉमिक बुक है शायद से इनको ज्यादा अच्छे से समझ आए इन सब से क्योंकि इसमें चित्र वगैरह है चाहे किताबों में और वहां गुरु सानिध्य में पढ़ना होता है तो ये किताबें कॉमिक इन सब से इनको ज्यादा अच्छे समझ आएगा मेरे हिसाब से तो अगर ये किताब भी है ये कॉमिक भी है जब बच्चे पढ़ते हैं इसमें गीता के बारे में लिखा है गीता के सार के बारे में लिखा है तो ये कॉमिक कहां से आती है अमर चित्र पब्लिश करता है तो इनको कहीं से इन्होने गीता से उठाई होगी यह चीज गीता उनको कहां से प्राप्त होती है गीता उनको ग्रंथालय से प्राप्त होती है जो की सबसे बड़ा ग्रंथालय आज की डेट में गीता प्रेस या फिर चौक उनको मैनुस्क्रिप्ट कहां से प्राप्त होती है? परंपराओं से प्राप्त होती है। और आधे से ज्यादा परंपराओं में जिसमें मैनुस्क्रिप्ट है शंकर परंपरा के पास सबसे ज्यादा मैनुस्क्रिप्ट है। ये बात भी कहीं छुपी हुई नहीं है। क्योंकि शंकर परंपरा सबसे ज्यादा प्रिजर्व परंपरा है। तो अगर मुझे कुछ पढ़ना है, धर्म ग्रंथ पढ़ना है और जब मुझे वो भाषा लिपि ही नहीं आती। ये संस्कृत के यू श्लोक और मंत्र उठा लेते हैं ये ट्रांसलेट कैसे करते हैं। मुझे समझ नहीं आता। क्योंकि जब संस्कृत के नियम ही तीन बार चेंज हो चुके हैं वेद वेद काल से लेकर आज तक तीन महा आचार्य रह चुके हैं संस्कृत के तो ये लोग बिना पढ़े बिना गुरु सानिध्य में वो संस्कृत समझ कैसे लेते हैं अलग-अलग टाइम की संस्कृत अलग-अलग लिपि अलग-अलग लिपी लिखावट की संस्कृत समझ कैसे लेते हैं अब यहां पे हां मैं बताता हूं इंटरनेट से हां इंटरनेट से वही
01:02:53:22 अब मेरे पे यहां पे संकीर्तन मीमांसा है करपात्री जी की किताब है वर्णाश्रम मर्यादा अगर मेरे को पढ़ना है वर्णाश्रम मर्यादा के बारे में पढ़ना है तो मैं एक आचार्य वाणी ही पढूंगा किसी आचार्य ने जिसको ये सब ज्ञान है, जिसको परंपरागत ज्ञान है, जिसको भाषा का ज्ञान है, अगर वो उस पर टिप्पणी करेगा, समझाएगा, लिखाएगा तो ही मैं समझ पाऊंगा ना भाई। क्योंकि जो चीज मेरे को पढ़ी ही नहीं जाएगी, फ्रेंच में नहीं पढ़ सकता। मुझे उसके लिए ट्रांसलेशन ही पढ़नी पड़ेगी। अगर आपको ट्रांसलेशन पे ही पूर्णता विश्वास नहीं है। अगर आपको ट्रांसलेशन केवल ट्रांसलेशन अच्छी है, ये नहीं है। इस किताब का 20% भाग अच्छा है, 80% भाग अच्छा नहीं है। तो वो बात बनेगी ही नहीं। तो अभी इन्होंने यहां पर कटाक्ष करा था या फिर कटाक्ष तो नहीं बोलूंगा इन्होंने हेट ही करा था हेट स्पीच बोली थी बहुत आचार्य के ऊपर चीजों के ऊपर और कल का इनका एक पॉइंट था मोरालिटी का उसको मैं थोड़ा सा डिस्कस करूंगा क्योंकि मैं उस वाले क्षेत्र से आता हूं जहां पे हम इसी में डील करते हैं फिलोसोफी में तो इनको शायद से धर्म संगत बातें नहीं पता पता या अच्छी भी नहीं लगती होंगी तो इनके लिए थोड़ा हम वेस्टर्न फिलोसोफी की तरफ चल लेते हैं थोड़ी देर के लिए फ्रेडरिक नीस ने मोरालिटी की बात करी मोरालिटी के लिए कहा ये इंसान का बनाया हुआ कांसेप्ट है हिंदू धर्म में भी यही बात आती है कि मोरालिटी जो है नैतिकता है वो मनुष्य की बनाई हुई है। ईश्वर तो है नैतिकता के परे है। मैं गलत तो नहीं हूं इधर।
01:04:09:25 नहीं मोरलिटी मनुष्य की बनाई हुई कैसे हो जाएगी? मोरल्टी भी हमें धर्म शास्त्रों से मिलती है तो वो अपविषय मतलब हां मोरल्टी जो है हमारी वो अनादि है। वो अनादि सिद्धांत है। अनादि सिद्धांत है पर अगर वो वैसे हम बात करते हैं। अगर हम धर्म संगत बात ना करें अभी थोड़ी देर के लिए कि मोरालिटी की बात करते हैं कि जो मोरालिटी सही मोरली सही ग्रंथ होगा। अब मनुष्य की मोरालिटी कहां से आती है? अगर आप ग्रंथ पढ़ेंगे तो आपको मोरालिटी मिलेगी एक। अगर आप धर्म के ग्रंथ पढ़ेंगे तो धर्म की मोरालिटी आपके अंदर आएगी। अगर हम यहां पर नास्तिकता के विषय में बात भी करें कि मोरालिटी क्या होती है? तो किसी अब हमारे यहां पर सर्कल में हम धर्म की बात करें तो धर्म हमारे लिए हमारी मोरालिटी है। दूसरा धर्म हमारे लिए मोरालिटी नहीं होगा। तो मोरालिटी का विषय आप उठा ही कैसे सकते हैं, कि आपके लिए मोरलिटी क्या सही है भैया? आपके लिए मोरालिटी का जो विजन है वो अलग मैं इस पर क्लियर करूं थोड़ा सा ऐसा है मोरलिटी हमारी आवश्यकता नहीं है मूल हम ये हमें ठीक करने की जरूरत है मोरलिटी हमारी मूल सेंट्रिक हम लोग मोरल्टी सेंट्रिक नहीं है हम लोग सच्चिदानंद सेंट्रिक है हम लोग क्या है सच्चिदानंद सेंट्रिक है अब क्या है कि सच्चिदानंद सेंट्रिक होने के कारण हमको मोरल्टी को साधन के रूप में लेना पड़ता है मोरल्टी बाय प्रोडक्ट है कि हमें
01:05:25:08 हमारे सामने वो खड़े हैं सच्चिदानंद स्वरूप भगवान मोक्ष ज्ञान स्वरूप है ना आत्म स्वरूप तो वो हमारे भगवान है अब हमें उन तक पहुंचना है तो कैसे पहुंचेंगे कि डूस एंड डोंट्स ये नहीं करना है ये करना है तो ये डस एंड डोंट्स जिसने हमको सच्चिदानंद स्वरूप बताया वो तो वहां तुम्हें पहुंचना है हमें उस पर आस्था भी है विश्वास भी है और तर्क संगत भी उसकी बातें हमें लग गई तो अब हमने उसके द्वारा बताए हुए जो ड डस एंड डोंट्स है वो ले इसको कहते हैं मोरालिटी डूस एंड डोंट्स को जो बाय प्रोडक्ट के रूप में हमें मिली। अब यही पर वाली बात है कि जो व्यक्ति नास्तिक होता है उससे हम क्यों कहते हैं कि सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में कौन माता है? कौन बहन है? कौन पत्नी है? इसका आधार क्या है? ये इसलिए ही कहते हैं क्योंकि वो आदमी सामने खड़े हुए ईश्वर को तो मान नहीं रहा है। मोक्ष को तो मान नहीं रहा है। स्पिरिचुअलिटी को तो मान नहीं रहा है। तो उसे डस एंड डोंट्स का आधार क्या है उसके पास? अब वो कहेगा जो जो कई लोग कहते हैं तो अभी तो कई लोगों की संख्या जो आपके हिसाब से जो मोरलिटी जो क्या कहते अनैतिकता है वह आप जो आपके लिए नैतिकता है वह उनकी अनैतिकता है। जो आपके लिए अनैतिकता है वो उनकी नैतिकता है। अगर अगर हम मोरल्टी का आधार ज्यादा संख्या पे या मनुष्यों पे लगा देंगे वही तो कारण है विप्लव का। दुनिया में जंग है क्यों?
01:06:40:12 क्योंकि हमने जो हमारी मोरल्टी का मुख्य आधार हो सकता है अती्द्रिय विषयों में जो धर्म शास्त्र वेदा आद शास्त्र जो पारंगत है ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने में ईश्वर तक पहुंचाने में और जो तर्क और तर्क और प्रमाण की युक्ति युक्त चीजों से ओतप्रोत हैं। हम उनको छोड़ के हम अलग से अपने को स्वतंत्र रूप से ये कोशिश करते हैं कि हम मोरल मोरल हो सकते हैं। जैसे वो कह रही थी कि मैं देखूंगी कि प्रकृति के प्रकृति के लिए क्या है। मनुष्य के लिए क्या अच्छा है तो वो जो अच्छा होगा उसको मैं मानूंगी ये वेद है। अरे भाई तुम ठीक है तुमको प्रकृति के लिए जो अच्छा लगेगा वो तुम मानोगी मगर वो वेद का अर्थ है ये कैसे कह रही हो तुम भाई हो जाती है मोरलिटी इनकी सब्जेक्टिव हो जाती है अगर आपको धर्म के बिना मोरल्टी प्राप्त हो रही है तो ये आपकी कोरी बकवास है वो धज्जियां उड़ जाएंगी 510 मिनट में ही वही कल आप देख ही लीजिए ना इन्होंने क्या करा है कल इन्होंने क्या करा है कल इन्होंने नाश ही करा है तर्क का पूरे तरीके से इन्होंने उन चरित्रों को और उन उन नामों को बीच में लाया जिनकी जरूरत नहीं ब्रह्मलीन स्वामी जी पे कलपोली करपात्री स्वामी जी पे ये और इनके फॉलोवरर्स लगातार अटैक कर रहे हैं। अब इन दो महापुरुषों का नाम लाना जरूरी था ही नहीं इस बात में जब विदेश गमन के ऊपर बात थी
01:07:55:18 तो आप इन पर्सनालिटीज को अटैक कर ही नहीं सकते। आपका नाम बिगाड़ा आपके नाम के बारे में बोला चलिए वो तो एक बार को एक्सेप्टेबल होता है कि आप अपना सहन कर सकते हैं। आपके जो महाभाग गुरु जी रहे हैं या फिर जो अपने ऊपर वाले गुरु जी रहे हैं उनका कोई नहीं सुनता। जो महापुरुष रहे हैं सिद्ध स्वामी जी रहे हैं उनका कोई नहीं सुनता। अब यही बात है प्रमाण की बात आ जाती है, नैतिकता की बात आ जाती है, वेदाचार की बात आ जाती है। तो इनको जब ये कोट करते हैं क्या इनको कभी ये पढ़ने को नहीं मिला कि जब विदेश गमन करता है व्यक्ति तो उसका वर्ण त्याग हो जाता है। वेदाचार से वो मुक्त हो जाता है। वेदाचार उसके लिए अब है नहीं। पतित हो जाता है। वो चातुर वर्ण में नहीं आता है। तो इसका मतलब ये थोड़ी हुआ कि आप वहां पे जैसे यहां पे हमारे साथ बैठे हैं। ये टोर ये कनाडा से है जी। तो अब इनके पास अभी इनके पास वेद अधिकार नहीं है तो इसका मतलब ये थोड़ी हुआ कि वो नाम जाप नहीं कर सकते भगवान को याद नहीं कर सकते एक वेद अधिकार वाली लिमिटेशन हो गई है उनप अगर वहीं पर उनकी आगमिक दीक्षा होती तो बात अलग होती तो जब इतना आप लोग इंटरनेट पर जाके देखोगे जितने लोग धर्म के रक्षक बने हुए हैं जिनको ये बात नहीं पता कि वेदाचार में और अभेद में और आगम में क्या डिफरेंस है वो धर्म की रक्षा करने बैठे हुए हैं फ्रंट पे वो किताबें उठाते हैं चार रेफरेंसेस उठाते हैं और अपने मन से उनकी बात करने लग जाते हैं इनसे किसी इसमें एक बात इसमें मैं इसमें एक बात ये
01:09:10:24 बोल दूं कि जो ये बात आज कर रही हैं कि करपात्री जी गलत हैं और क्या कहते हैं या पूज्यपाद ब्रह्म स्वामी श्री स्वरूपानंद जी महाराज या क्या कहते हैं या फिर मायावादम असत शास्त्रम वाला जो श्लोक कर रहे हैं। आपको क्या ये इसमें कुछ मुझे बताने की जरूरत है कि दोनों तरह की फर्सेस लगी हुई है। इधर आर्य समाज इधर आर्य समाज इधर स्कॉन सिंगल पॉइंट एजेंडा पूरी पूरी पूरी पूरी बैकिंग है इनको सिंगल पॉइंट एजेंडा इसको बैकअप दो भाई इसको बैकअप दो लाख फॉलोअ है ये लड़ेगी आवान से क्योंकि वो बंटी बबली वाला सीन है ना बंटी और बबली का सीन किसी ने देखी हो तो वो जब पकड़ नहीं पा रहा होता है बंटी और बबली को तो रात में खटिया से उठ करके जो है खड़ा हो जाता है देखा है यही हाल है वर्तमान में स्कनिस्ट का आर्य समाजियों यही हाल है। योगेश भारद्वाज जी ने अपने एक वक्तव्य में मेरा मेरा नाम कोट करके कहा है कि भाई काहे की तेरी परंपरा? योगेश भारद्वाज जी ने कहा है काहे की तेरी परंपरा। अरे भाई सीधा सा प्रश्न है। वेद कैसे आए ये बता दो ना मुझको। वही तो आप तक पहुंची वही बात है। इनको पता ही नहीं है। अब ये कल अवेकनिंग भारत जी कह रही थी कि हम शयनाचार्य जी का भाष्य
01:10:26:00 मानते हैं। इन्हें पता है शयनाचार्य जी कौन सी परंपरा चाहते हैं। शंकर परंपरा में है शयनाचार्य जी। ये क्या बातें करती है? इन्होंने वेद भाष्य उठा लिया इंटरनेट से। रिसर्च ही नहीं है इनकी। नहीं नहीं देखिए देखिए ऐसा है कि मैं थोड़ा पब्लिक के पॉइंट ऑफ व्यू से एक बात कह देता हूं कि मान लीजिए कि आपने शायण भाष्य जो है वो आर्काइव से उठा लिया और बिल्कुल वो प्रमाणिक आचार्य है तो मैं उनकी बात मानूंगा या कुल्लूक भट्ट भाष्य मनुस्मृति उठा ली या मेद भाष्य मनुस्मृति की उठा ली। ठीक है? लेकिन दिक्कत वहां आती है कि जब आप उसको इंटरप्रेट करते हो। जी। अब अब किसी आचार्य ने जब उसका भाष्य किया उसमें जो शब्दों की को चूज किया उसने या आप सिंपल सा लीजिए आप रामचरितमानस ले लीजिए है ना रामचरितमानस आपको मिल जाएगी बिल्कुल एकदम मतलब कि वो है कि टारगेटेड बाय मेनी बट डिफिटेड बाय नन वो स्वामी तुलसीदास जी है ठीक है तो ऐसा लेवल है उनका तो अब क्या होगा कि उन्होंने जिस शब्दों का चयन किया है अब वो शब्द को आप अगर अर्थ का अनर्थ कर दें अपने क्योंकि आप तो ले रहे हैं आर्काइव से, इंटरनेट से और बिल्कुल एकदम प्रामाणिक आप ग्रंथ उठा रहे हैं। लेकिन उस प्रामाणिक ग्रंथ का भी अर्थ आपको कैसे पता लगेगा? जब वहां पे डाउट होगा तो आप तो आपने अपने मन से
01:11:41:10 लिया और उसके बाद आपने उसको छाप दिया। रील बना दी उसके ऊपर। ठीक है? तो वही सब वहां समस्या आती है ना? तो उसके लिए हमें फिर व्यवहार में आचार्य चाहिए। ठीक है? जो उसका सही अर्थ बता सके या समझा सके। जैसे ढोल गवार शूद्र पशु नारी वाला जो दोहा आता है एसेट्रा। ठीक है? मैं मैं मैं बोलना चाहूंगा मेधा तिथि का इन्होंने उदाहरण लिया है। पहली बात तो यहां भी तर्क बनता है मेधा तिथि की कमेंट्री आप तक पहुंची कैसे तो मेधा तिथि ने क्या कहा है तो वह लाइनेस से जो लेके आए हैं जिन्होंने यहां आर्काइव पे दी है वो क्या कह रहे हैं उनके अर्थ में वो आपको देखना पड़ेगा और अगर आपको उन पर विश्वास नहीं है तो उन्होंने जो आर्काइव को दिया है मेधा तिथि के नाम से उस पर विश्वास क्यों कर रहे हो भाई दोनों में से एक चीज छोड़नी पड़ेगी आपको आप अपना स्वतंत्र मत लाओ फिर हम देखेंगे कितने सनातन और सनातन के विरुद्ध में कितनी देर तक टिक पाते स्वतंत्र मत लाओ फिर मेरा मेरा तिथि को वो क्लेम मत करो। वेद को क्लेम मत करो। ब्रह्म सूत्र को क्लेम मत करो। ये सनातन शास्त्रों को छोड़ दो। स्वतंत्र मत लाओ। अगर इनहीं को इनहीं को हमारा दबाव बनाना है। हम पर इनहीं के दबाव में लाना है। मेधा तिथि के अर्थों को कोट कर करके लोगों ने आचार्य विदेश गमन पर निबंध लिखा है। उन्होंने करपाती जी महाराज ने। अभी अगर मौका मिला तो उसको दिखाएंगे हम आप लोगों को। मेधा
01:12:56:21 अतिथि ने भी विदेश गमन को निषेध बताया है। अब आपने क्या किया कि उनकी कमेंट्री आपको मिली इंग्लिश में और इंग्लिश का आपने खुद से ट्रांसलेशन कर लिया। हो गए जय जयकार। बम भोले बाबा मामा आ गए मामा आ गए वाली बात चालू कर दी। तो ये एक बात ध्यान रखने की। दूसरी बात वो जो अभी चल रही थी ना करपात्री जी वाली जी। उसमें एक बात थी कि जैसे हम कहते हैं कि हम धर्म का प्रचार कर रहे हैं। हम धर्म की रक्षा कर रहे हैं। है ना? तो उसके लक्षण हमारे अंदर भी दिखने चाहिए ना। कितनी भी परिस्थिति आ गई आज तक कभी किसी ने मुझे अश्लील शब्दों का उपयोग करते देखा हो तो वो बता सकता है। कितनी परिस्थितियों से मैं गुजर चुका हूं। अभी मुझे कुछ ऐसे लोग मिल गए हैं। भागवतानंद के कैंप में मैं गया था। तो वहां पर कुछ एक कोई ऐसे बच्चे थे वहां पर लड़के थे जो अब टूट रहे हैं और वह आगे आकर के हो सकता है आपको हमारे अगले लाइव में प्रमाण मिले साक्ष्य जो वहां पर अवेलेबल थे वो आकर बोले भाई भागवतानंद की ओर से गाली दी गई थी तब भी मैंने उसको गाली नहीं दी क्योंकि गालियों से प्रभावित होना मैं आपको सच बता रहा हूं गालियों से प्रभावित होना ईश्वर साक्षी है मेरा मार से प्रभावित होना जो दहक मुझे मुझे अगर कोई मारे
01:14:11:22 बहुत हद तक भगवान पता नहीं इतना मैं अपने आप को बहुत प्रारंभिक रूप से अगर दहिक कष्ट को लेकर के प्रभावित होना बहुत उसमें न्यूनता आ गई है मैं नहीं प्रभावित होता क्यों नहीं प्रभावित होता क्योंकि मैंने अपने गुरु मुख से उन तत्वों को पढ़ा है कौन से तत्व नैन छिनती शस्त्राण नैनती पावका ना चैन क्ल श मारता ये सब केवल कहने के लिए नहीं है मेरे जीवन में यह सब रक्त में बह रहे हैं कर्मवादी कारस्ते फले कदाचना संबंध का निर्वाह करो मगर सिद्धांत का त्याग कभी मत करो रामो विग्रह धर्म असतो मा सद्गमया तमसोगया ये सब रक्त में बह रहे हैं ऐसे ही नहीं है मैं अभिनय नहीं करता हूं यहां आ के इनका ये सब रक्त में बहने वाली तो जब कोई सिद्धांत आपके रक्त में बहने लगता है तो उसको आपको याद नहीं रखना पड़ता वो आपका स्वाभाविक लक्षण बन जाता है तो वहां मेरा स्वाभाविक लक्षण था कि उसने जब मुझे अश्लील शब्दों का संबोधन किया मेरे मेरे लिए तो मैं वहां पर अपनी मर्यादा को याद रखता कि मुझे क्या करना है। इन्होंने जब अभी मुझे मक्कार इत्यादि कहा तो मक्कार से आगे बात ना बढ़े तो मैंने कहा भाई यहां से छोड़ो नहीं तो यह कुछ कह देंग मुझे आना पड़ेगा फिर ये हो जाएगा भैया वहां पर गाली दी गई इनको अब फिर मैं रामपाल को छोड़
01:15:27:01 के यहां क्रिश्चियन मिशनरीज धर्म परिवर्तन करा रही है उनको छोड़ के अनेकानेक घटनाएं घट रही है गौ हत्या हो रही है उस कार्य को छोड़ के मैं इस पर लग जाऊं कि भैया एक मेरी हिंदू बहन ने मुझे जो है गाली दी थी अब यह टास्क हो गया मेरा यह मुझे नहीं करना तो वहां से दूर हटना ज्यादा अच्छा है। खामखा का ऐसा खुद ही सरकमस्ट्ससेस क्यों उनको क्यों जन्म दो जिनसे तुम्हारा कोई बहुत बड़ा अभीष्ट तुम्हें प्राप्त फल नहीं होना है। तो अब इन्होंने क्या किया जो आचरण की मैं बात लाया कि हम धर्म की रक्षा कर रहे हैं। तो इन्होंने सबसे पहली बात तो यह है कि झूठ क्यों बोल रहे हो भाई? आपसे जब पूछा जा रहा है आपको वेद मंत्र कैसे मिले? कह दो भैया इसका मेरे पास जवाब नहीं है। मैं हार मानती हूं। सिंपल जैसे अभी मैंने जैसे अभी मैंने कहा किसी ने बोला चार शंकराचार्यों के नाम बता दो मैंने नाटक तो नहीं किया मेरी गति नहीं भाई इसमें जाके पूरी शंकराचार्य जी से पूछ लो मेरे धर्म धर्म और ब्रह्म को काट काट काटने की क्षमता हो तो आके काट लो ये है ना इसको कहते हैं सिद्धांतवादी व्यक्ति रामो विग्रह धर्म तो मैं जितना हो सकता है कोशिश यही करता हूं मेरे से मर्यादा का उल्लंघन ना हो अब आपने क्या किया कि आपसे पूछा गया पहले जो है ईश्वर परंपरा फिर रामानुज परंपरा
01:16:42:09 फिर रामानुज जो है गुरु छुपा रहे हैं। जिन कर्मों को करते समय छिपाने का भाव उत्पन्न हो वो कर्म परंपरा वो भी बोला था मैं आ रहा हूं मैं आ रहा हूं मैं आ रहा हूं मैं आ रहा हूं तो जिन कर्मों को करते समय छिपाने का भाव उत्पन्न हो वो कर्म तामसिक कहलाते हैं। 12वा अध्याय 37वा श्लोक मनुष्मति पढ़ लो। तो आप तामसिक कार्य करना सिखा रहे हो ये कह करके मैं छुपाऊंगा। अच्छा दूसरी बात फिर आगे आप चले मैं अपनी बुद्धि से तय करूं भाई अती्द्रिय विषय है मोक्ष को प्राप्त करना मैंने पूछा ना गायत्री मंत्र से मोक्ष मिल रहा है कैसे सिद्ध करोगे अती्द्रिय विषय मेरे भाई उसमें आपको वेद को प्रमाण मानना है ना तो जब आपकी इंद्रियां वहां काम नहीं कर रही तभी तो वहां धर्म है इंद्रियां काम कर रही होती तो धर्म होता ही नहीं ना इंद्रियों से सब कुछ होना जाना होता जी ओमकार जी ऐसे मजे से बोलता हूं कि जैसे छोटे बच्चों की थोड़ी साइकोलॉजी होती है ना कि मान लो कोई खिलौना है ऑलरेडी उनके पास लेकिन वो वो बोलते नहीं मुझे उसके वाला चाहिए या फिर मुझे उसके वाला चाहिए कि जो भाई आपको प्राप्त है जैसे धर्म शास्त्र की मर्यादा में रहते हैं जैसे नाम जब कोई भी कर सकता है अब वो आपको प्राप्त है वो आपको करना नहीं है अच्छा जो वो वाले भाई साहब बहन जी करे वो मुझे करना है मुझे वो चाहिए
01:17:57:20 मुझे वो वाला चाहिए मुझे सही बात है मुझे ये नहीं चाहिए मुझे वो चाहिए नहीं नहीं बाबा बाबा बाबा मुझे वही वाला चाहिए वो वाली बात। वो चलो मान लो वो दे दिया तो फिर से भी तृप्ति नहीं फिर कुछ और मांगेंगे। हां तो फिर इनका आचरण देखिए कैसे दो जो एक वाक्य आया है रामू विग्रहवान धर्मा आपसे बात कर रहा हूं। आप इस वीडियो को देखेंगी मुझे मालूम है। तो सीधे आपसे बात कर रहा हूं। क्या नाम है आपका? हां सोनाली जी। अवेकनिंग हां सोनाली जी। अवेकनिंग अवेकनिंग अवेकनिंग। तो भैया नींद से आप सोकर के जाग जाइए। 337 13 वाल्मीकि रामायण रामो विग्रह धर्म राम जी जो कहते हैं जो करते हैं वो धर्म है। ठीक है। अब उन्होंने क्या कहा रामोद नाभि भाषेते राम दो प्रकार की बातें नहीं करता। आपने कम से कम छह सात प्रकार की बातें कर डाली उसमें। अरे भाई सीधे बोल दो ना मुझे। मैं नहीं जानती इस विषय में आप ही मुझे बता दीजिए। वेद वेद के विषय में क्या है? तो मैं आपको समझाता फिर वहां पर एक बहन होने के नाते बहन हमको परंपरा से वेद प्राप्त होते हैं। इसलिए हमको परंपरा पर निर्भर होना होगा। उनके अर्थ के लिए भी हम दोगले नहीं है कि तुम्हारी इतनी बात मानेंगे इतनी अब वो क्यों गुरु का गुरु को स्वीकार नहीं कर रही। क्यों अलौकिक गुरु को बता रही ईश्वर परंपरा बुद्धि में
01:19:12:21 आए वो क्यों करता है? अहंकार जीत जाता है। वहां अहंकार जीत जाता है। क्योंकि क्योंकि यदि हम किसी व्यवहारिक गुरु को दे देंगे तो उसके व्यवहारिक शब्दों को ला के हमारे सामने रख देगा। एक्स मैन सामने हो गया बॉर्डर बन गया तो ये रख देगा हमारी सारी बातें कटंगी तो इसलिए वो बात बताओ नहीं कि हम हम किसको प्रमाण करते प्रमाण तुम किसी को मानते नहीं मगर अभी अगर तुम्हारा कोई गुरु है भी तो उसको बता दोगे यदि रामानुज परंपरा इत्यादि से मान लो दुर्जन से तो वो आपकी बात तुरंत कट जाएगी मैं विद्या भास्कर जी का या राघवाचार्य जी का आपको वक्तव्य सुनाता जो वर्तमान के प्रामाणिक उनके उस संप्रदाय के गुरु हैं। ठीक है? आचार्य हैं। तो ये तो रही ये बात। अब इन्होंने क्या किया कि जब इन्होंने यह तक कह दिया आदि शंकराचार्य जी मेरे गुरु हैं। अब भैया जब आदि शंकराचार्य जी तुम्हें गुरु तुम्हारे गुरु हैं तो क्या रामोदर नाभ भाषे का खंडन नहीं हो रहा जब तुम दूसरे दिन कह रही कि अमायावाद अस शास्त्रम ये वाक्य किसी ये वाक्य मुक्तेश्वर जी के विरुद्ध जा रहा है क्या ये वाक्य उन्हीं के विरुद्ध जा रहा है जो आप ये कह रहे हो इस देश में आ के ये इसमें आगे देखेंगे ना आप इनके मैप देखेंगे इन्होने कैसे चालू करी मैं ईश्वरीय परंपरा से हूं शंकराचार्य जी मेरे आदि गुरु हैं उससे पहले बीच में बोली कि जो मोरालिटी
01:20:28:09 के मेरी मोरली कॉन्शियस के लिए सही है। मैं वो मानती हूं। उसके बाद ये राम परंपरा पे आ गई। वहां वहां नास्तिक हो गई। पहले शंकर संप्रदाय वाली हो गई। फिर ये जो है वेद विरोधी हो गई और फिर ये नास्तिक हो गई। फिर रामानुजी हो गई और लास्ट में इंटरनेट संप्रदाय वाली हो गई। नहीं नहीं एक और आपने ध्यान नहीं दिया। एक बार में उन्होंने अपने को फ्रस्ट्रेशन बोल दिया था कि मैं कि मैं मुस्लिम हूं। ये भी बोल दिया था उन्होंने एक बार। क्या बात अच्छा अब फिर तो मैं वो भी कहूंगा एक बार उन्होंने अपने आप को वो भी नीला भी बनाया था नीला हां क्या है संविधान कानून ऊपर है कानून को भी तो ले आई थी बीच में क्या आप कानून को नहीं मानते लो भाई फिर लड़ाई किस बात की कानून को ही मान लो अच्छा अच्छा सुनिए कानून तो सब जगह लागू है ही है तो फिर काहे के लिए मरे जा रहे हो चिल्ला चिल्ला करके काहे के लिए रील बना रहे हो जब कानून को तुम मानते हो अपना अंतिम निर्णायक तो कान कानून तो लागू है। भारत में कानून लागू है। फिर क्या दिक्कत है? उसी से तो देश चल रहा है। हां जी। बताइए। अभी जैसे हम बात कर ही रहे थे किताब के बारे में मेटाफिजिकल विषय जो होते हैं जिनके बारे में हम प्रमाण नहीं दे सकते। जैसे गायत्री मंत्र वाला एग्जांपल दिया। तो जब हम देखते हैं कि जितने इनके आर्गुमेंट होते है ना इंटरनेट से जो आते हैं कि ये
01:21:43:13 धर्म किताब में ये लिखा है इस ग्रंथ में ये लिखा है सबके लिए आचार्य वाणी है। सबका ऑलरेडी आंसर दे चुके हैं आचार्य जन दे चुके हैं। अगर जिनको नहीं मालूम है उनके लिए मैं बता दूं और अवेकनिंग भारत जी को भी ये आती है कल्याण नाम की एक सीरीज गीता प्रेस की मैगजीन। इसके अंदर अंक आता है साल का एक विशेष। आप जाएंगे इंटरनेट आर्काइ पर जाइएगा। वहां पर नारी अंक करके एक अंक है। वहां पर नारी का पूरा धर्म समझा रखा है। हनुमान अंक करके एक अंक है। हनुमान जी के विषय में जितना ज्ञान है, सूर्य अंक करके तो अलग-अलग किताबें हैं भैया उनको जरा पढ़ो। वो आचार्य वाणी इन्हीं को समझाने के लिए है। वो गुमराह करने के लिए थोड़ी है। तुम जिस विषय के बारे में तुम्हें तिनका ज्ञान नहीं है, भाषा तुम्हें आती नहीं, वेदांगों का तुम्हें ज्ञान नहीं। इंटरनेट पर तुम किन से चुरा रहे हो? डाटा जो ये पोस्ट बनाती है वो डाटा भी जो शंकर परंपरा के पेज होते हैं छोटे-मोटे पेज होते हैं उन्हीं का डाटा चुरा के पोस्ट बनाती है ये जहां पे इनको बात वहां छुपी कटी वहां पे इन्होंने परंपरा को ही डिनाउंस कर दिया कि हमें ये 20% किताब अच्छी लगती है 80% हमारे लिए किताब बेकार है भाई आर्य समाज ही वाली हरकत है रामपाल आर्य समाज ये सब यही करते हैं 80% 20% हमें रामपाल ने तो ज्ञान गंगा में ज्ञान गंगा में लिख रखा है 5% ज्ञान काल ब्रह्म का है उसको नहीं लेना है बिल्कुल ये किताब है
01:22:58:14 हां ये किताब है अब आर्य समाज वाले क्या करेंगे चार बात हमारे धर्म संगत हो गई चार विरोध हो गई तो अब जो चार विरोधी है इनको काट देंगे हम और जो चार सही लग रही है वो प्रमाणिक हो गया अरे भैया ये प्रमाणिक कैसे हुआ ये समझाओ जरा ये मिलावट कैसे नहीं है ये मिलावट कैसे है तुमको जो अच्छा लगा वो मिलावट नहीं है मैं इस वो भी फिक्स नहीं है कि कौन सा वाला मिलावटी है वो भी फिक्स अच्छा लगता है अच्छा लगा कि हमारी यहां तारीफ ये मिलावट नहीं है जैसे जैसे ही एक शब्द पर भी हम अपना अप्रमाण्य बुद्धि दिखाएंगे अपनी वैसे ही वो पूरी की पूरी जो उसकी प्रमाण्यता है वो गायब हो जाएगी। मुझे लगता है एक बार मैं लीव करके वापस आ जाऊं। आप अपनी बात बोलिए वीरूपाक्ष जी आप क्या चल रहा है आपका? क्या दिक्कत है? लीव कर गए। हां बोलिए ऐशको जी। जी नाम तो आपका इतना बढ़िया है। हां एक बात तो मैं रखता हूं। मैं अब देखिए मैं शंकर परंपरा का अनुयाय हूं नहीं। मेरे मन में एक भ्रांति भरी गई थी दो वर्षों पहले कि कर्पात्री स्वामी शूद्रों से चिढ़ते हैं। विश्वनाथ मंदिर में घुसने नहीं दिया। मैं कर्पात्री धाम गया। पिछले साल मैं ये किताब खरीद के लाया। पढ़ने के लिए बकायदा मेरे को बोला था किसी ने। सिद्धार्थ पांडे जी हैं। करपात्री धाम में ही शिष्य हैं। उन्होंने बोला था ये किताब पढ़िएगा। इसके अंदर क्लियर रीजन लिखा हुआ है कि वो विश्वनाथ मंदिर को क्यों छोड़े, नया
01:24:13:15 विश्वनाथ क्यों बना? और क्या-क्या चीजें रही। और इंटरनेट पे अब क्या है? क्योंकि अवेकनिंग भारत जी महिला है। सोनाली जी महिला है। तो अब एक महिलाओं का फेमिनिज्म का चल गया। करपात्र्री और मिसोजनिस्ट भी थे। ये आचार्य मिसोजनिस्ट भी थे। मिसोजनिस्ट कहां से थे भैया? जहां तक मैंने सुना है कि एक कुछ रिपोर्टरों का ग्रुप गया था काशी घाटों पर गया था हमसे इंटरव्यू लेने तो दूर से वो देख के देख रहे थे घाट पे तो एक बच्ची खेल रही थी। लाल कलर के वस्त्र पहने हुए थे उसने तो वो खेल रही थी। पास जाके देख करात्री स्वामी जी बैठे हुए थे घाट पे। तो ये बात हमको चंडीधाम से पता चली। कहते हैं कि वो इतने बड़े भक्त थे कृपात्री स्वामी जी राजा राजेश्वरी बाल त्रिपुरा के कि संग चलती थी उनके वो व्यक्ति जो शक्ति को पूजता हो वो मिसजेनिस्ट हो कैसे सकता है भाई मिसोजनी की परिभाषा तुम्हारे लिए क्या है मनुस्मृति क्या कोई भी सिविल बेसिक राइट है उसको मना करती है कोई राइट मना नहीं करती है धार्मिक विषय में तो धार्मिक डॉक्यूमेंट ही सर्वोपरि होगा अगर आप मेटाफिजिकल विषय की बात कर रहे हैं तो मेटाफिजिकल विषय में जो डॉक्यूमेंट है मनुस्मृति इंपीरियल डॉक्ट्राइन मानी जाएगी धर्म के विषय में इम्पीरियल डॉक्ट्राइन है उसको आप संविधान की तरह नहीं कह सकते हो ना जब मनुस्मृति में अलग-अलग वर्णों के लिए आपके आपके अलग-अलग डिनोशन दे रखे हैं ये काम है ये काम है ये काम नहीं है तो
01:25:28:19 वो मानना पड़ेगा दंड भी सबको बराबर दिया गया है अब यही बात आती है मेरे को बहुत बढ़िया बात लगती है ये शंकर परंपरा के लिए कहते हैं कि शूद्र यज्ञ नहीं कर सकता शूद्र जने नहीं पहन सकता ब्राह्मण का जीवन अगर मनुस्मृति के एहसास देखिए फूंक-फूक कदम रखना होता बहुत कठिन है। देखिए मैं इसमें इसमें एक बात जोडूंगा कि यज्ञ करना और जनेऊ पहनना आपका अंतिम लक्ष्य नहीं है। ठीक है? या ब्राह्मण बनना आपका अंतिम लक्ष्य नहीं है या क्षत्रिय बनना या वैश्य बनना या शूद्र बनना हां सच्चिदानंद स्वरूप को प्राप्त करना आपका अंतिम लक्ष्य होना चाहिए। उसके लिए अलग-अलग विधि बनाई बताई है, बनाई गई है। ठीक है? तो उसके हिसाब से आपको व्यवहार में रहकर आपको फॉलो करना चाहिए और फॉलो करके आप उसी क्योंकि फल शौर्य नहीं है। गुरुदेव क्या कहते हैं? फल चौर्य नहीं है भगवान की तरफ से किसी भी जीव को फल में ऐसा नहीं है कि नहीं भाई तुम अगर मनुष्य हो तो तुम्हें ज्यादा फल मिलेगा और तुम श्वान हो तो तुम्हें कम फल मिलेगा। ऐसा भी नहीं है। यह भी नहीं है अगर पराकाष्ठा मिले कि तुम ब्राह्मण हो, सन्यासी हो, ब्रह्मचारी हो इसलिए तुम्हें ज़्यादा फल मिलेगा और अगर तुम चांडाल हो तो तुम्हें कम फल मिलेगा। फल चौरे फिर भी नहीं है। बस कर्म का बोध होना चाहिए व्यवहार में क्योंकि हम हम व्यवहार
01:26:43:20 से बंधे हैं ना। हम व्यवहार से बंधे हैं तो हम हम किसी कुल के अंदर आते हैं। किसी शरीर में आते हैं तो हमें उस शरीर के हिसाब से व्यवहार करना पड़ता है। तो बात यहां पे जैसे एक और बात आती है इनकी कि इनकी एक और बात आती है कि भैया ब्राह्मण यज्ञ करते हैं। शूद्र को नहीं करने देते। एक बात बताओ शूद्र अपना नाम जाप करे उसको उतना ही फल मिलेगा जितना ब्राह्मण को उसे कर्म करने का मिलेगा। ज्यादा कम थोड़ी होता है। जो व्यक्ति निष्ठा से अपना धर्म निभाएगा उसको उसी निष्ठा के अनुसार उसी का फल मिलेगा। ब्राह्मण ब्राह्मण को जो कठिन कठिन तपस्या करके जो फल मिलेगा वही शूद्र को कम भक्ति में मिल जाएगा। भाई माला जाप एक माला जाप करना और एक होम यज्ञ का अंतर कितना है अंतर? व्यक्ति विशेष करने बैठे 10 मिनट में माला जाप हो जाएगा। यज्ञ करने बैठे घंटा भर लग सकता है। एक तो सामग्री इकट्ठा करना संभालना करना। इसमें एक इसमें एक और बात जोड़ देता हूं मैं। मंदिर का एग्जांपल ले लीजिए आप। एक मंदिर के गर्भ गृह में जो ब्राह्मण पूरा पूज करता है पूजा अर्चना अपना सारे उपचार सारे उपचार करता है उसमें तो वो जब उसको जितना फल प्राप्त होता है ना उतना अगर एक शूद्र केवल उस मंदिर के शिखर का दर्शन कर ले तो वो फल मिल जाता है। बताइए तो अब इसमें हां तो अब इस अब इसमें फिर जाती है क्या? नहीं जाती अभी भी नहीं बोलेंगे इसमें भाई कर्म
01:27:58:24 के हिसाब से आपको मतलब शरीर के हिसाब से वर्ण के हिसाब से आपको क्या बोलते हैं अलग-अलग कर्म दिया गया है ना वह तो करना चाहिए तो बस यह है अब जब आपको दे रखी है भैया एक ब्राह्मण पुजारी है ठीक है ना वो मंदिर में अपने सात से आठ घंटे लगाएगा त्रिकाल संध्या भी करेगा सारे काम करेगा तब जाके उसको अपनी ड्यूटी पूरी होगी तो ये आपके लिए क्या वो एक चॉइस थोड़ी है कि आप ब्राह्मण बन गए ये ड्यूटी नहीं करेंगे तो फल मिल जाएगा चॉइस थोड़ी है वृणाश्रम धर्म भी बहुत कैलकुलेटेड चीज है और मैं तो कहता हूं जिनको वर्णाश्रम धर्म से इतनी दिक्कत है सब परंपराएं ओपन है आगमिक परंपराएं भी ओपन बहुत सारी परंपराएं हैं आगमन वहां जाइए हमारे गुरुदेव तो ये भी कहते हैं हां हमारे गुरुदेव ये भी कहते हैं कि आपको फल चाहिए शास्त्र सम्मत लेकिन विधि चाहिए सेुलर सेुलर वालों की विधि चाहिए विधि चाहिए अगर फल शास्त्र सम्मत चाहिए तो फिर विधि भी विधि भी शास्त्र सम्मत फॉलो करनी पड़ेगी आम आम भी खाना है पेड़ से भी नहीं तोड़ना है लिंकेट करके मंगाना है ये कहीं बात थोड़ी हुई ये कोई बात थोड़ी हुई तो इनके थोड़े क्लेम की बात कर लेते हैं जैसे तक शिवाश जी आ नहीं रहे। बेसिक बेसिक क्लेम्स की बात कर लेते हैं जो इन्होंने कल रखे हैं कि शास्त्र नहीं कहता है कि विदेश गमन गलत है। शास्त्र कौन सा शास्त्र नहीं कहता इनके लिए वेद अथॉरिटी है। वेद के अलावा सब कचरा है इनके लिए।
01:29:13:25 ये इन्होंने पहले ही इस्टैब्लिश कर दिया था कि मैं अपनी बुद्धि के अनुसार वेद को ही अथॉरिटी मानती हूं। तो इन्होंने ये बात कही थी। अब विदेश गमन क्यों गलत है? अगर हम आचार्य वाणी को भी एक बार को छोड़ दे। हम मूल ट्रांसलेशन उठा ले। ऐसा कोई ग्रंथ है 18 महापुराण दो इतिहास या फिर किसी भी और अपने शास्त्र में जहां पर लिखा हो कि विदेश गमन अलाउड है। कोई भी ऐसा ग्रंथ है तो प्रमाण रख दीजिए सामने लाके। कोई कमेंट्री नहीं मूल श्लोक दिखा दीजिए कि विदेश गमन सही है ऐसा लिखा हो। ये दिखा दीजिए बस। इतना सा है। परंपरा नेसेसरी क्यों नहीं है? इस पर भैया कितनी बार बात हो चुकी है। एग्जांपल दे दिए हैं कितने? स्टोरी भी लगा चुके हैं। अगर इनको समझ नहीं आता क्योंकि होता क्या है कि जब हम बात करते हैं हम शास्त्र संवत बात करते हैं थोड़ा टेक्निकल टर्म्स में बात करते हैं तो इनको नहीं समझ आती होगी। उसके लिए कल मैंने इनके लिए सिंपल तरीके से समझाया था इनको वो भी शायद उनको नहीं समझ आया होगा। शिवश जी आ ही चुके हैं तो अब एक क्लेम है तो शिवश जी आंसर कर पाएंगे शायद से। चले गए वापस से शायद।
01:30:14:19 नहीं जो चक्रवर्ती राजा होते थे वो वो क्षेत्र विस्तार इसीलिए तो करते थे वो ताकि कोई विदेश भूमि रहे ही ना ये भी तो था भाई अब विदेश भूमि होने का क्या है आर्य देश जो है उसकी परिभाषा क्या है यहां यज्ञ होते हैं यहां जितने धर्म शास्त्र है उनके नियमों का सम्मान होता है तो वो आर्यभूमि है होने को पाकिस्तान भी पुराने समय से भारत का हिस्सा था पर आज क्या वो वैदिक भूमि मानी जाएगी नहीं मानी जाएगी कैसे मानी जाएगी कोई तरीके कोई वो बात ही नहीं है। अब वही बात आ जाएगी कि अब ये सवाल उठाते हैं कि देश में भी इतने हो रहे हैं धर्म विरुद्ध काम हो रहे हैं तो ये भी आर्यभूमि नहीं है। बट यहां प्रयास है। यहां उन्हें रोकने का प्रयास है। यहां धर्म अभी भी बचा है। नेपाल और भारत ऐसे देश हैं जहां धर्म अभी बचा है। जहां धर्म के लिए लड़ाई चालू है। जहां पे इसके खिलाफ आवाज है। बाकी देशों में और जब ये मूल जब ये मूल धर्म को समझेंगी, बस माफ कीजिएगा काट रहा हूं। जब ये मूल धर्म को समझेंग जब ये वर्णाश्रम को समझेंग तब इन्हें समझ में आ जाएगा कि अगर एक ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र मान लो पाकिस्तान में है वहां पर तो हिंदू है नहीं अब वहां पर क्या वो अपने धर्म को फॉलो कर पाएगा ब्राह्मण क्या त्रिकाल संध्या कर पाएगा वहां पर मलेच्छों के बीच में रहकर वो नहीं कर पाएगा इसीलिए वहां पर निषेध किया गया है क्यों क्योंकि वहां पर जाएगा तो वो अपने
01:31:30:00 जो धर्म है उसको फॉलो नहीं कर पाएगा तो इससे ऐसी भूमि पर जाना ही क्यों जहां पर आपका धर्म प्रचार और धर्म का कार्य आप कर ही नहीं पाओ बिल्कुल और चलिए ये बोलते हैं कि आप मनुस्मृति का पालन नहीं करते। आप कहते हैं मनुस्मृति में विदेश गमन मना है। आप खुद पालन नहीं करते। आपके घर में वाशरूम है। ये वो ये अभी ये उठाते हैं। तो घर के अंदर वाशरूम होना या फिर जो जो भी नियम है उनका पालन करना विदेश जाने से तो आसान ही है। विदेश जाना पर्सनल चॉइस है। विदेश जाना आपके ऊपर है कि आपको जाना है। उसप आपके ऊपर ऑब्लिगेशन थोड़ी है कि सरकार ही भेज रही है बाहर। ऐसा थोड़ी है। वो आपका अपना चॉइस है कि आप विदेश जा सकते हैं, नहीं जा सकते। कुछ चीजें ऐसी होती है जो आज की डेट में फॉलो नहीं करी जा सकती। अब मनुस्मृति ये कहता है कि यज्ञ की संविधा आती है पेड़ से गिरनी चाहिए। पेड़ बचे हैं गिरने के लिए। पेड़ बचे हैं गिरने के लिए। बचे ही नहीं। अच्छा विदेश भी इनको जाना है और वो भी शास्त्र सम्मत विधि से विदेश जाना है। आप विदेश जाओ पर ये मत बोलो। हां शास्त्र सम्मत विधि से विदेश मत जाओ। आप ये बोलो कि भैया शास्त्र सम्मत विधि नहीं है। हम विदेश जा सकते हैं। लेकिन शास्त्रों के आधार पर नहीं जा सकते। तो आप अपने आप को पहले बताओ। मैं इसमें हां मैं इसमें एक बात बोलूंगा कि विदेश जाना अ इस कल्प या इस युग में पूर्ण तरह से निषेध नहीं है। कुछ-कुछ
01:32:45:08 जगहों पर कुछ-कुछ कारणों के की वजह से जा सकता है। धर्म रक्षा के लिए भी जाया जा सकता है। इसमें आपको एग्जांपल इसमें एग्जांपल दे देता हूं मैं आपको पूर्वाचार्य महाभाग जी का। हमारे फादर ऑफ फादर ऑफ वैदिक मैथमेटिक्स बोलते हैं ना एमआईटीस में आपको उनके लेक्चर्स मिलेंगे। ठीक है? वैदिक मैथमेटिक्स के वो फादर कहे जाते हैं वो। ठीक है? फादर ऑफ वैदिक मैथमेटिक्स हमारे पूर्वाचार्य जी महाराज जगतुगुरु स्वामी श्री भारती कृष्ण तीर्थ महाग तो वो भी विदेश यात्रा करके आए लेकिन धर्म संगत कैसे गए थे वो उस समय पीठ पर नहीं थे आसीन पीठ त्याग की थी उन्होंने और फिर इसके बाद धर्म रक्षा के लिए वो विदेश यात्रा करके आए थे तो कारण ये था ठीक है इनको ये भी नहीं पता होगा कि सन्यासी पे वर्णाश्रम कैसे लागू होता है इनको ये भी बात नहीं मालूम हां नहीं नहीं पता होगा नहीं पता नहीं पता होगा। अभी मैं दिखाता हूं आपको इनके हिसाब से जो इनको लोग भाते हैं ना वो दिखाता हूं। ये देख रहे हैं आप कि इजरली ब्राह्मण है जो अभी वैदिक त्रिकाल संध्या कर रहा है। इनके हैं 500 कुछ फॉलोअ है और ये रणवीर अल्लादिया के साथ पडकास्ट करना चाहते हैं। ये अभी वैदिक मंत्र पढ़ रहे हैं। इजराइली ब्राह्मण कहते हैं ये खुद को और इनका काफी पैसा बन रहा है इनका। ऐसे लोग इनको अच्छे लगते हैं। क्योंकि वहां वैलिडेशन मिल जाती है इनको ना जाने
01:34:00:12 क्या ही होगा इनका। और इनका एक और आता है कि एनआरआई फंडिंग उठाते हैं। एनआरआई हिंदुओं की फंडिंग उठाते हैं। जिनको हम अनप्योर या फिर अनवर्दी कहते हैं। ऐसा थोड़ी है। ये कहां हमने कहा किसी को जो एनआरआई वाला बंदा है या फिर कोई बाहर रहता है। उसको हमने आज तक ऐसा कहा कि आप हिंदू नहीं है। या फिर ऐसा कहा हो कि आप भगवान का नाम नहीं ले सकते। मनाही तो कहीं नहीं करी। वेदाचार का पालन नहीं कर सकते। वो एक मनाही है। अब उसका आपको पालन करना है नहीं करना है आप कर लीजिए। जी मैं तो कहता हूं आप कनाडा में बैठ के आप स्त्री हैं। आप जनेव धारण करके यज्ञ भी कर लीजिए। फल तो आपको मिलेगा नहीं। अब ये कड़वा सच है। मानना है मानिए नहीं मानिए हम ना माने। पाप लगेगा वो अलग। अब वो आपके हिसाब पे है कि आपकी बुद्धि क्या कहती है? प्रमाण सामने है। परंपराएं सामने है। बाकी आपके ऊपर है। कल जो इनके अनुयाई थे। कल जो इनके साथ बैठे थे वो बाद में लाइव में आके कहते हैं कि शंकराचार्य तो प्रचंड बौद्ध है। ये वो और कल तक इनको ये बात मालूम नहीं थी। इनकी 4 घंटे की लाइफ में ये क्लियर एक्सट्रैक्ट है। जहां पर ये कहती है ऐसा लिखा ही नहीं होगा। आप क्या बात कर रहे हो? शंकराचार्य प्रचंड बहुत कैसे हो सकते हैं? आज वही क्लेम ये स्टोरियों पे लगा रही है। पोस्ट कर रही है कि यहां पे ये लिखा है। यहां ये ये लिखा है। कल तक जो बात आपको मालूम नहीं थी कि शंकराचार्य के बारे में ये रामानुजाचार्य माधवाचार्य जी ने भाष्य में लिखा है। आज उसका डंका बजा
01:35:15:20 रहे हैं आप। ये क्या बात हुई भाई? जब आपको ये बातें बताई नहीं है। और सबसे बुरा मेरे को तब लगता है जब इन लोगों के पास कुछ बचता नहीं ना। कल इन्होंने क्या करा? शिवशं जी पे अटैक कैसे चालू करें? डिबेट चालू होती है। आप ब्राह्मण है क्या शिवश जी? आप ब्राह्मण है क्या? ये बात कहां से आई? विदेश गमन के बीच में? उनकी जाति पूछना, जाति पे खेलना या फिर मैं कहूं उनके पूज्य गुरुदेव के बारे में, उनके पूर्वाचार्यों के बारे में अलग-अलग तरीके की टिप्पणियां करना। ये प्रवोकेशन नहीं तो और क्या है? अगर आप बात पे नहीं खेल पा रहे हैं तो आप क्या चाह रहे हैं? शिवा जी अपना आपा खो दें। कुछ कह दे ताकि हम सिंपैथी गेन करें। उन्होंने करा ही नहीं। वो चले गए। और डबल डाउन कर रही है कि मक्कार बुलाया तो बुलाऊं घी। ये कोई तरीका थोड़ी है। आप अपनी ही आप अपने ही फॉलोअर की नजरों में गिर रहे हैं और कुछ इसका वो नहीं है। वो इन्होंने विनाशकाल विपरीत बुद्धि तो वही है समस्या अपने उन्हें अपने आप को गलत होते हुए नहीं देखना था। वो जो उसके लिए जो अपना सकते हैं सब लेकिन समस्या ये हो गई उनके साथ कि वो कुछ ज्यादा ही गलत हो गई। कोई बात नहीं अब मैं मैं कहता हूं मैं एक मीम डालता हूं हमेशा जब भी ऐसा कुछ होता है उसमें लिखा रहता है कि मनुष्य का अहंकार ही उसका भगवान की या फिर मोक्ष की राह से दूर लेके जाता है ये मैं हर बार कहता हूं
01:36:30:26 और ये बात अचूक सत्य है क्योंकि मैं देखता आ रहा हूं कि जितने साल यहां पे आप आवाहन जी के चैनल पे भी देख लीजिए कोई ऐसा व्यक्ति नहीं आया होगा बोल के गया होगा कि मैं आपकी बात मानता हूं आपने तर्क सही रखे हैं कोई ऐसा व्यक्ति नहीं आया होगा सब डिबेट के बाद अपने Instagram अपने सोशल मीडिया पे जाके हम जीत गए हमने आवाहन को हरा दिया हमने ये कर दिया हमने इनको डिस्रूव कर दिया हमारी किताब सही कर क्या होता है इससे कुछ नहीं होगा आप चार दिन खुश रहेंगे पांचवे दिन आपको लोग भूल जाएंगे और अभी इनका प्रोपगेंडा देखिएगा भव्य राधा कृष्ण दास के साथ जो डिबेट हुई थी इनकी उसमें से इन्होंने एक्सट्रैक्ट उठाए हैं जब वहां बात आई थी कि ईश्वर दुष्कर्म वाली जो बात उठी थी उसका एक्सट्रैक्ट उठा के हनुमान जी को ऐसे ऐसे पेंट करा है कि वो इसका समर्थन करते हैं। यही दिक्कत है इंटरनेट की कि आप इंटरनेट से धर्म का ज्ञान उतना ही ले सकते हैं जितना कि हम एक अपने नहीं नहीं यह एक्चुअली उस व्यक्ति का व्यक्तित्व और उसकी मेंटल एबिलिटी से पता लगती है उससे कि आप यह सोचिए कि इसका मतलब यह होता है कि यह व्यक्ति अपने आप को सही साबित करने के लिए कितना गलत हो सकता है। इतना कहां तक जा सकता है धर्म तो दूर की बात है धर्म तो आएगा ही नहीं। वह उसके कोई लेना देना नहीं है उसका। लेकिन अपनी बात को सही करने के लिए मैं अधर्म का पूरा साथ दूंगा या दूंगी। अपनी बात और मैं कांट छाट के दिखाऊंगी दिखाऊंगा।
01:37:46:24 सही भाई हां यही समस्या अलंकारी है वो भी ऐसे ही करते हैं। एक है अलंकारियों का चैनल वो शिवा जी समस्या भी छोटी-छोटी कटंग उठा के डालते रहते हैं। राइट राइट तो उससे ये होता है ना कि मतलब आदमी का वो दिखता है व्यक्तित्व उसका कि कैसा है। ठीक है? और ये ये काम आज के समय हर कोई कर रहा है। ये काम अगर आप देखेंगे तो आज की सारी पार्टियां भी यही काम कर रही हैं। बिल्कुल। चाहे कांग्रेस हो गई, बीजेपी हो गई, आदि आदि आदि सब आपस में यही सब कर रहे हैं। अब ऐसा भी नहीं अपनी कमजोरियों को छुपाने के लिए अपनी कमजोरियों को छुपाने के लिए जो सच है उसको दबा दो और एक झूठ को छुपाने के लिए 100 झूठ बोलो। यही सब चल रहा है। लेकिन सच नहीं बोलेंगे। अभी मैं बताता हूं आपको इन्होंने पशु तो फिर हां। इन्होंने पशु बबली के ऊपर वीडियो बनाई वहां पे इन्होंने अपने मन से पशु बलि के जो कुछ लिए कोटेशन लिए और डाल दिए कि वैदिक काल में पशु बबली नहीं होती आगमों की पशु बबली गंदी है ये वो फलाना ढिमकाना उन्होंने वीडियो बना दी अब एक बात बताइए मेरे को सिंपल सी जिस विषय में आपको दो रुपए का ज्ञान नहीं है आपने किताब खोली नहीं वो आज तक आपको किसी ने कोर्ट भेजा आपने लगा दिया आप में इतनी बुद्धि तो होगी कि आप उसको वेरीफाई चेक करेंगे अगर मैं भी आज स्वाध्याय करता हूं स्वाध्याय करने के बाद गुरु से प्रश्न तो करूंगा गुरु सब जगह
01:39:02:02 है ऐसा नहीं गुरुओं की कमी है गुरु तो है इतने पारंपरिक आचार्य हैं इतनी पीठे आप प्रश्न कर सकते हैं। प्रश्न नहीं करना। अनुयाई बैठे हैं उनके। उनसे प्रश्न कर सकते हैं। पूछ सकते हैं। पर वो नहीं करना। हम अपनी इंटेलिजेंस लगाएंगे इन चीजों में। जिन मामलों में हमारी इंटेलिजेंस शॉर्ट पड़ जाती है। शिवश जी आ गए वापस से। जी यहां पर थोड़ी सी तकनीकी कुछ पता नहीं आज पहली बार लाइव स्ट्रीम में समस्या देख रहा हूं मैं कि पहली बार जो है आज मैं वैसे लैपटॉप सेटअप है उससे मैं लाइव था थोड़ा सा परेशानी आ रही है तो आप लोग श्वेता जी आप उसको चर्चा को पूरा करवा लीजिएगा अगर मैं अगर मुझे लीव करना पड़ता है किनहीं कारणों से और दूसरी बात ये है एक शक मैसेज था कानून वाली बात पर हमने बात कर ली है। मायावाद पर बात कर ली है। और एक बात और है कि ये जो हमारा अभी का टॉपिक चल रहा है इससे अलग हट के ऐसा सामने आ रहा है कि जो अलंकारी चैनल है
01:40:08:21 उसके लोग यह कह रहे हैं कि भाई आप जो है निर्भय के साथ चर्चा करिए। तो आपको याद होना चाहिए जो हमारी निर्भय के साथ चर्चा हुई थी। निर्भय के साथ लगभग मेरे ख्याल से तीन घंटे की चर्चा हमारी हुई थी और उस चर्चा का अंत वैसा सुखद नहीं रहा। हालांकि उसमें बहुत ठीक तरीके से चला। उसके बाद में निर्भय ने भी स्वीकार किया कि वो अपने एक विशेष पर्सपेक्टिव को लेकर के आया था। इसलिए वो हमारी ओर से जो न्यूट्रल वे में रहने की कोशिश की जा रही थी उसको वो ध्यान नहीं रख पाया। हमारी पूर्ण हम किसी के लिए छवि बना लेते हैं। तो उस छवि के अनुसार उसका व्यवहार रहा जिस कारण से उसको स्थगित होना पड़ा चर्चा को वरना वो किसी निष्कर्ष तक पहुंच सकती थी। इसके बाद निर्भय ने जो है उदारता दिखाते हुए बहुत अच्छे से क्षमा भी प्रस्तुत किया और हमारा भी हृदय गदगद हुआ और हम लोग जो है एक प्रातत्व भाव से हम में बातें भी हुई निर्भय और हमारे बीच में से और उसके बाद ये हुआ था कि अब अगर एक ठीक-ठाक वे में हम लोग दोबारा से चर्चा वो जो छूट गई है वो करना चाहे तो कर सकते हैं। तो इसका अर्थ यह है कि निर्भय के साथ हमने चर्चा को कभी भी बैन नहीं किया है। प्रतिबंधित नहीं किया है। निर्भय के साथ क्या निर्भय से जुड़े हुए जो संदीप रॉय हैं या संदीपन रॉय है जो और या
01:41:23:25 फिर उस चैनल से जुड़ा हुआ कोई और व्यक्ति आर्य समाज अलंकार वो जो चैनल है अब दूसरी बात ये आती है कि निर्भय से हमने कभी नहीं कहा है हमसे बहुत सारी चार बातें हो चुकी है निर्भय से फोन पे टेलीफोनिक मेरे ख्याल से उसके निर्भय के पास रिकॉर्ड होगा उन बातों का हमारे पास भी रिकॉर्ड है बहुत सारी बातें हुई है पर क्योंकि वो थोड़ा सा प्रातत भाव में हुई थी एक तरीके से हमारा व्यक्तिगत वो बातें थी तो ना ही निर्भय ने निर्णय लिया कि हम उन बातों को जो है सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करें और ना ही मैंने इधर कोई यह निर्णय लिया कि हम कभी करने वाले हैं या करें मगर जो सैद्धांतिक पक्ष है उसको लेकर के हमने कभी नहीं कहा है कि अब निर्भय से चर्चा नहीं होगी है कि चर्चा होगी मेरी आवाज आ रही है ना सबको साफ साफ जी जी जी बिल्कुल आ रही है आ रही है जी जी ठीक है चर्चा पहली बात हमने प्रतिबंधित नहीं की है दूसरी बात ये है कि इसको ये चर्चा चर्चा एक ठीक तरीके से हो जाए चलो हमेशा दुश्मनी बन के क्यों मिले विरोधी बन के ही क्यों मिले तो मैंने इसको एक नाट्य रूपांतरण देने के लिए और समस्या की मूल जड़ तक पहुंचने के लिए मैंने एक और वो कहा था निर्भय से जब हमारी हेल्दी वार्ता हो रही थी जिस समय तो मैंने कहा था कि ऐसा कर लो कि ऐसी चर्चा रखो जिसमें कि हम
01:42:39:27 तुम आर्य समाजी बनो और मैं मुस्लिम बनूंगा और फिर देखते हैं कि आप मुस्लिम को एज ए आर्य समाजी कहां तक ले तोड़ पाते हो इस्लाम के सिद्धांत को और फिर तुम इस्लाम वाले बनना और एज ए अद्वैती हम तोड़ेंगे कि देखो ये तोड़ दिया ठीक है तो हमारा मूल उद्देश्य एक दूसरे की काट करना तो नहीं है हमारा मूल उद्देश्य सर्वशक्तिमान परमक्ष जो विधर्म को कैसे निस्तोनाबूत करना यही है ना दोनों का मूल उद्देश्य तो जिसके सिद्धांत से विधर्म पे कठोर प्रहार हो रहा है उसको अपना लिया जाए या फिर जनता देख ले कि कौन सा सिद्धांत चलो हमने एक दूसरे का सिद्धांत नहीं स्वीकारा जनता निर्णय कर लेगी कि भैया किसका सिद्धांत जो है ज्यादा शक्तिशाली सिद्ध हुआ विधर्म से सामना करते हुए एक तो यह बात तो मैंने इस तरह के हेल्दी डिस्कशन के हमारे बीच में उन्होंने कहा भी निर्भय ने मुझसे कहा भी कि संदीपन रॉय जी से मैं बात कर लूंगा शायद उधर से वो ग्रीन सिग्नल आया मगर आज तक कोई स्पष्ट उत्तर आया नहीं स्पष्ट उत्तर इन विषयों में नहीं आया तो जो लोग ये कह रहे हैं निर्भय से चर्चा करो निर्भय से चर्चा करो तो निर्भय से चर्चा को कभी हमने मना नहीं किया है निर्भय दोबारा से आ सकते हैं चैनल पर कभी भी वो चर्चा हो सकती है। सैद्धांतिक चर्चा हां मगर यह हो सकता है कि एक भाव जो हमारे जो घटनाक्रम के बाद एक आया कि ऐसा ना हो दोबारा से वो जो
01:43:54:28 भाईच प्यारा जैसा बना है हमारे बीच में वो नष्ट ना हो जाए तो इसलिए शायद निर्भय निर्भय ना आने का मन हो या मेरा ना आने ये हो सकता है। मगर यदि आएंगे तो उसमें कोई पीछे हटने वाला नहीं है। ये निर्भय भी जानते हैं और हम भी जानते मतलब हम भी जानते हैं और निर्भय भी जानते हैं। पीछे हटने वाली कोई बात नहीं है। यदि ऐसा है कि निर्भय से बात करूं तो आप निर्भय को पूछे कि अगर उनको आना है सार्वजनिक रूप से फिर से प्रस्तुत होना है सैद्धांतिक मतभेद के निमित्त तो कभी भी हो सकता है। अब आगे दूसरी बात ये आ जाती है कि भाई आपके चैनल पर ही क्यों आए? उसका कारण है। उसका कारण ये है कि जैसे दूसरों के यहां जाने वाली बात है तो हम ऐसी बहुत सी जगह पर गए हैं जो हमारी जगह नहीं थी। जैसे ये जो इनके यहां जाना ये क्या कहते हैं इनका क्या नाम है इनका? अवेकनिंग हां अवेकनिंग हिंदू अवेकनिंग इनके हम गए इसको तो छोड़ दीजिए हम तो भागवतानंद के कैंप में गए हैं और दोबारा अगर वो इधर उधर से निकलेगा लखनऊ के 100 200 किलोमीटर के और हमारे पास समय होगा तो हम फिर चले जाएंगे ठीक है तो तो हम तो वहां सशरीर गए ये हो कि भय हो कि भैया अब वहां विरोधी इतना बड़ा हमने हाई कोर्ट में केस कर रखे हैं पुलिस उसे पुलिस में बयान देने आना पड़ रहा है तो हम उसके गढ़ में क्यों जाए यहां पे उसी के उसी के लोग हैं फिर भी हम गए तो
01:45:10:21 कि हम दूसरे के यहां जाते मगर कब जाते हैं हम अब हमसे तो रामपाल ही भी कह रहे धनाना आ जाओ धनाना आ जाओ हम नहीं जाएंगे तो हम जाते हैं मगर हम ये चयन करते हैं कि हमारा जो ये एनर्जी और ये जो एक भार लेना कि हम कहीं जा रहे हैं इस जैसे बहुत सारे युद्ध हैं जो हम लड़ रहे हैं। बहुत सारे हैं। चलो एक आर्य समाज और हमारी जो वैचारिक मतभेद है उसको ठीक है साइड में रखिए। एक मिनट आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के नाम पर कई जो अभी-अभी बालग हुई है। ऐसी लड़कियों को ब्रेन वाश करके वहां पर ये सिखाया गया कि कलयुग का अंत होने वाला है। अगले युग में हम तुम्हें ले चलेंगे। बहुत सारे युद्ध चल रहे हैं। तो ऐसे में मैं अपनी जो ये मेमोरी कार्ड है ना यहां का उसको मैं खाली रखने का प्रयास करता हूं कि व्यर्थ के भार इस मेमोरी में ना डालूं। क्योंकि बहुत सारे निर्णय, बहुत सारे कार्य जो डेली मुझे करने हैं। तो ऐसे में मैं व्यर्थ का चिंतन मनन क्यों करूं कि भाई मुझे संदीपन रॉय के चैनल पर जाना है। या तो संदीपन रॉय का चैनल ऐसा हो जिससे समाज प्रभावित होता दिख रहा हो। हो सकता है हो सकता है आज नहीं तो कल उनका चैनल ऐसा हो जाएगा। उस दिन मैं जाऊंगा। जब वो मेरे लिए एक इंपॉर्टेंस लगेगा ना कि हां जैसे निर्भय ने खुद कहा था कि पहले आपका चैनल छोटा सा था। मैंने सोचा कोई
01:46:25:25 जरूरत नहीं है जाने की। फिर आज आपका चैनल बड़ा हो गया तो यह चीज सही है भाई क्याेंस क्या ऐसे हर एक व्यक्ति के बुलाने पर हम उसके चैनल पर जाने लगे तो भाई रोज मुझे कम से कम 20 लोग ये कहते हैं आ जाओ आ जाओ आ जाओ आ जाओ अरे बिना पूछे मुझे Instagram में लोग जोड़ लेते हैं अपने ग्रुप में हां भाई बताओ भाई शास्त्रार्थ शुरू शुरू भाई शास्त्रार्थ अपना पक्ष बताओ अब व्यक्ति खड़ा हाई कोर्ट में चेंबर में हरिशंकर जैन जी के पास है वो लॉयर के पास वहां हमको बोला जा रहा है हां भाई अद्वैत की पुष्टि करिए चलिए हमको वहां कुछ बताना है कि भैया यहां पर हम गए थे। यह हुआ था पुलिस आई थी जो कहते मुयना कराना है मौके का और वहां मुझे मैसेज आ रहे हैं। चलो भाई चालू हो जाओ। ऐसे नहीं होता है। तो निर्भय से प्रतिबंध नहीं है। संदीपन रॉय से कोई प्रतिबंध नहीं है। उनके लिए खुला स्वागत है। आपको अपने चैनल पर बुलाना है। आप और मेहनत करो और आगे बढ़ो। अगर भगवान ने आप पर कृपा की भगवान कभी-कभी कर देते हैं ना। उन पर भी कृपा कर देते। इसलिए तो भगवान हमारे परम प्रमाण नहीं है। हमारे परम प्रमाण अपुष ग्रंथ क्यों है? भगवान तो कृपा उन पर भी कर देते हैं। सिद्धांत विहीन लोग होते हैं। तो अगर भगवान ने कृपा कर दी उनका उनका चैनल जो चल रहा है वो आप ही की कृपा से चल रहा है। आप ही के शॉर्ट वीडियो काट काट
01:47:40:26 के लगा रहे हैं वो वहां पर। हां। और ये मैं कहना चाहूंगा कि अगर आप एक हेल्दी संबंध रखना चाहते हैं तो इस तरह की बातें ना करें कि जो मैंने राम जी के बारे में नहीं बोला। मगर आधी बात मेरी इधर से उठा के मेरी जैसे मैंने बोला कि रोको मत जाने दो। वो एक कोई बहुत बड़ा अपराधी था कोर्ट में बोला कि भैया ऐसा है। उसने उसने ये लिख के दे दिया कि मैं फलानी तारीख को जो है या तो कल्पना होगी कि सत्य है वो नहीं पता। मगर ठीक है। कहानी के तौर पर ले लीजिए। तो उसने ये बोल दिया कि मैं इतनी तारीख को यहां से निकल भाग जाऊंगा जेल तोड़ के। पता नहीं चार्ल्स सोबराज के लिए बोला जाता है या फिर उसके लिए नटवर लाल के लिए। तो उसने जब यह कह दिया कि मैं जेल तोड़ के भाग जाऊंगा तो जेलर ने क्या किया? एक पर्ची बंटवा दी अपने सारे कर्मचारियों को और उसमें लिखवा दिया रोको रोको मत जाने दो। ध्यान से रोको मत जाने दो। अब उस पर्ची का किसी ने अर्थ का अनर्थ कर दिया। रोको मत जाने दो। रोको मत जाने दो। तब क्या हुआ? चार्ल्स ओवराज आराम से जा रहे हैं जेल तोड़ के। क्योंकि बॉस ने कहा है रोको मत जाने दो। तो केवल इतना सा अंतर लाने
01:48:55:27 से उसका पूरा भाव बदल गया। तो इस तरीके से मेरे कहे हुए चीजों को ये छिट रही बातें होती है। छिचली चीजें होती है कि आप सैद्धांतिक तौर पर नहीं भिड़ पा रहे तो मेरी चीजें जो मैं कहना नहीं चाहता हूं। आप जान रहे हो मैंने क्या कहा है। फिर भी मेरे शब्दों को तोड़ मरोड़ करके प्रस्तुत कर रहे हो और मैं जो नहीं कहना चाहता हूं वो प्रस्तुत कर रहे हो। तो ये गलत बात है। ऐसा ना किया जाए और जो हेल्दी वातावरण बनाना है सिद्धांतिक चर्चा को लेकर के वो बना रहेगा। ठीक है? अब आप अपनी बात रखें। जी अभी मैं बताता हूं आपको वैसे तो निर्भय पाठक जो है निर्भय पाठक ही है ना मेरे हिसाब से जो लड़का Instagram पे कंटेंट बनाता है जिनसे आपकी चर्चा हो रही है। मैं थोड़ा सा लीव करूंगा और मैं किसी और स्पेस में जाकर के कनेक्ट होने का प्रयास करता हूं क्योंकि यहां पर मुझे आप लोगों का संदेश भी प्राप्त नहीं हो पा रहा है। आप लोग कंटिन्यू करिए। थोड़ी देर पंडित जी भी नहीं है। आप संभालिए सनातन शंकर जी मैं 15 10 मिनट में कनेक्ट होता हूं। है ना? वैसे अब बहुत ज्यादा लंबा भी नहीं खींचना है। थोड़ा सा जल्दी करेंगे। मेरे ख्याल से लगभग दो घंटे हो गए। ठीक है? जी हम यही लड़का है ना ये लड़का। हम हां तो आपको इनके बारे में बता दूं। आपको और ऑडियंस को कि क्या लेना देना है। ये तो
01:50:11:15 ये तो नहीं था ना निर्भय पाठक नाम से आर्य समाज ही है ना निर्भय पाठक निर्भय वो नहीं है ये अलग है जो ये दूसरे वाले हैं अच्छा अच्छा क्योंकि ये भी आर्य समाज ही वक्तव्य रखते हैं तो मेरे को लगा यही इनकी बात हो रही है मैंने वो वाला देखा नहीं था लाइव सेशन इसीलिए नहीं नहीं वो वो अलग है वो निर्भय अलग है अच्छा वो निर्भय आर्य है दूसरा वाला है अच्छा अच्छा अच्छा हां जी हां जी बोलिए विरुपाक जी तो जी देखिए क्लेम्स तो वैसे दूसरे वाले जो थे उनके साथ डिस्कस हो चुके हैं। एक ही क्लेम रहता है जो बड़ा क्लेम है जो इन्होंने रखा था कि शंकराचार्य जी विदेश गमन पे गए थे और दूसरा क्लेम रखा था इन्होंने कि करपात्री स्वामी जी के जो वो आता है पृथ्वी अचल है वो वाली बात इन्होंने छेड़ी थी इनके फॉलोअर्स ने इन्होंने रखी थी वो वाली बात
01:51:02:09 श्रृंगेरी के स्वामी जी के बारे में कि वो विदेश गमन करने गए थे विदेश गमन और फिर एनआरआई हिंदुओं का पैसा लेते हैं तो ये तीन पॉइंट है इनके बारे में अगर तो हमने ये अपनी लाइव में हमने क्लियर किए थे अचला को अगर अचला को अभी कर देंगे और जो वो वाली बात है उसको हमने लाइव में क्लियर किया था कि अ भारती कृष्ण तीर्थ जी ने अपने विदेश गमन को कभी भी शास्त्री नहीं कहा अशास्त्री कहा और जब उन्होंने शास्त्री नहीं कहा तो जितने अंशों में उनके जो उनका जो आचरण है वो क्या कहते हैं शास्त्र के विपरीत है तो उतने उतने अंशों में वो ग्रहण करने योग्य नहीं है। स्वयं कह रहे हैं और यह हमारे शास्त्र भी कह रहे हैं। आचरण ग्रहण करने योग्य नहीं है। जितने अंशों में किसी आचार्य के जो आचरण है वो शास्त्र के विपरीत जा रहे हैं। वो आपको ग्रहण नहीं करने। तो आप भारती कृष्ण तीर्थ जी का सहारा लेकर के अपने विदेश गमन को शास्त्रोक्त सिद्ध मत करिए। हां सच्चाई ये है कि वर्तमान में संक्रमण काल चल रहा है। हम लोग जीरो से बिल्कुल सब कुछ सही ठीक करके नहीं आ सकते हैं। अज्ञानता वश हमारे जीवन में बहुत सारी चीजें रोज हो रही हैं। अगर कोई विदेश चला भी गया है और वहां से जाकर के धर्म की रक्षा हो पा रही है तो उसको करने में कोई आपत्ति नहीं है। है ना?
01:52:17:18 मगर ये कि नहीं नहीं मेरा विदेश गमन जाना जो है वो क्या कहते हैं? शास्त्रीय है। इस पर ठप्पा लगाओ। ये गलत है। ये आप इसको आपत धर्म कह सकती हैं कि हां भाई चले गए विदेश तो चले गए। विदेश में चले गए तो चले गए। वहां से विदेश जाकर के हम धर्म की रक्षा में क्या कर सकते हैं? तो अपने विदेश गमन को अशास्त्रीय होने पर भी हम उसको भी पुण्य में परिवर्तित कर लेंगे। इतना करेंगे वहां जाके। है ना? ये प्रयास होना। जैसे अभी जो ओमकार जी हैं ये कनाडा में टोरंटो। अब वे चले गए। सो चले गए। इनको नहीं था भाई उस समय इनकी फैमिली को कहां से क्या हुआ? कहां जीरो से जब घर में आग लगी हुई पूरी के शंकराचार्य जी क्या कहते जब घर में आग लगी तब हम कुआं थोड़ी ना कूदेंगे। तो अगर आप चले गए हैं तो इसमें कोई दोष नहीं है। मगर उस पर ठप्पा लगवाना दोष है। अपने जो अशास्त्रीय आचरण हैं उनको अशास्त्रीय कहना उचित है ना कि यह कहना कि नहीं नहीं मैंने जो कर दिया वही शास्त्रीय है। जैसे कि बरसात से बचने के लिए हमारा घर हमारे आसपास नहीं है। हम रास्ते में किसी उसके नीचे खड़े हो गए यदि तो हम यह नहीं कहने लगते यही हमारा घर है। हमने थोड़ी देर अगर वहां पर वो ले लिया शरण ले ली वही हमारा घर है। वो नहीं बदलता। दूसरी बात ये है हम कि जैसे इन्होंने ये कहा था कि ये तो अभी के लोगों ने बना दिया
01:53:32:24 है तो इस बारे में शब्द प्रमाण है और जो हमारे शब्द परंपरा प्राप्त हैं वो सारे आचार्य एक मत है कि वहां जाना जो है निषेध है। चले गए वो एक अलग विषय है कि चले गए तो उसमें क्या है? हमारे जीवन में डेली ऐसे कार्य हो रहे हैं जो कि पूर्णतया धर्म शास्त्रों के संगत नहीं हो रहे। तो उस उसमें हमारे मन में यह भाव होना चाहिए। भाई मैं गलत मैं गलत हूं। शास्त्र सही है। इतने अंशों में मैं शास्त्र का अनुसरण अनुकरण नहीं कर पा रहा हूं। जैसे कि जैसे कि एक पिता ने अपने बेटे को समझा दिया कि भैया तुम्हारा जो है मदिरापान गलत है। अब उसकी इंद्रियों पर उसे वो नहीं हो रहा है। मदिरापान पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा है। अब उसने मदिरापान पीना शुरू किया। अब दो बातें हैं। मदिरापान वह भी कर रहा है जिसका पिता यह सिखा रहा है मदिरापान अच्छा है। जैसे ध्रुव राठी ने एक वीडियो बनाया था कि तुम्हारे यहां भी तो यह होता है। अभी नहीं काफी पहले कुछ उसने कहा था तुम्हारे यहां भी तो यह होता है। हमारे यहां क्या होता है इससे सिद्ध नहीं होता। वो हमारे यहां का धर्म शास्त्रीय संविधान है। तुम्हारे उस चीज पर हमने उंगली उठाई है जो आपके यहां का शास्त्रीय संविधान है। तो दोनों बातें हैं। एक का पिता कह रहा है मदिरापान कर सकते हो। दूसरे का पिता कह रहा है नहीं कर सकते हो। मदिरापान दोनों कर रहे
01:54:47:25 हैं। तो जो अपने पिता की आज्ञा का उल्लंघन पूर्वक मदिरापान कर रहा है उसके पिता पर उंगली थोड़ी ना उठेगी। उसने मना किया है ना। उसी प्रकार जिस प्रकार जैसे अब वो वहां पर दो बातें हैं कि हम पिताजी ने मना किया है फिर भी हम जो है वो पी रहे हैं। तो दो बातें हो सकती हैं। एक या तो हम यह कहें कि भाई पिताजी ने मना किया है फिर भी मैं पी रहा हूं। मगर इस विषय में पिताजी ही सही बोल रहे हैं। कहते वह सही मुझे कंट्रोल नहीं हो पा रहे। वह बात अलग है। मेरी मजबूरी है इसको पीना, सिगरेट पीना। तो यह क्या हो गया? हमारी प्रमाण्य बुद्धि क्या हुई? जो पिताजी ने कहा है उसमें हुई। अब हम अपने आप को बदलने का प्रयास कर रहे हैं। भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। क्या कहते हैं? 92 वाली कि तू भगवान कह रहे हैं तू मेरी शरण में आ जा। तेरी प्राप्ति की रक्षा अप्राप्ति की चिंता मैं करूंगा। तो भगवान आपको इतना बल देंगे जब आप नाम जप करेंगे। आप में वो शक्ति आ पाएगी आपके चित्त में कि आप अपने इस प्रकार के दुर्वसनों से मुक्त हो पाओगे। एक बार अपने आप को उनकी शरण में डाल के तो देखो। मगर आप क्या कर रहे हो दूसरी जगह पे? नहीं। अगर मैं सिगरेट पी रहा हूं, मेरी मजबूरी है, मेरी व्यवस्था है तो यही सही है। पिताजी गलत कह रहे हैं। यही सही है। जब आप उसका समर्थन करने लग जाते हैं।
01:56:02:28 अज्ञानता वश जो आपने जिस आचरण को स्वीकार किया या फिर व्यवस्था वश जिस आचरण को आपने स्वीकार किया उस आचरण को ही आप सामान्य धर्म बताने लग जाते हैं। स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल बताने लग जाते हैं। दिक्कत वहां है। रोड जब बन रहा है तो जो एक पट्टी बन रही है और दूसरी पट्टी नहीं बन रही तो डिवाइडर के इस तरफ जिनको जाना है वह भी इस समय उधर ही से जाएंगे रॉन्ग साइड मगर इस तरफ से जाने का मतलब ये नहीं है कि हम ये कहने लगे नहीं नहीं रोड जब बन जाएगा तब भी इधर ही से जाना उचित है ना ये आपातकालीन स्थिति है ये रूल नहीं है हम लोग इस बात का प्रचार नहीं करते मेरे से बहुत सारी ऐसी चीजें हो रही है मगर मैं इस बात का प्रचार नहीं करूंगा कि यही वो है स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल तो यही है कि डिवाइडर के उस तरफ से ही जाना होगा। हां, इस समय रोड बन रहा है तो अभी अभी इस समय हम लोग इस तरफ से जा रहे हैं या फिर इस समय ब्लॉक किया हुआ है या फिर उसमें गड्ढे बहुत है तो हमें जाना पड़ रहा है। वो बात एक अलग है। मगर हम ये उसको अपने धर्म को ही बदलने लगेंगे ना। परिस्थिति बश जो करने लगे वही धर्म हो गया। तो फिर हमारा धर्म सनातन नहीं कहलाएगा। वो वही हो जाएगा। कुरान बाइबल वाला धर्म। सनातन वो है जो किसी भी देश काल परिस्थिति में ना बदले उसको सनातन कहते हैं। अवेकनिंग भारत जी थोड़ा बहुत प्रामाणिक ज्ञान
01:57:18:00 विज्ञान लेने की आपको आवश्यकता है। आप बहुत अच्छा कर सकती हैं अपने जीवन में। आप बहुत सारे हिंदुओं को दिशाहीन होने से बचा सकती हैं। बहुत सारी चीजों में आप प्रकाश डाल सकती हैं। दो लाख की फॉलोइंग है। आराम से कर सकते हैं। सिद्धांतों को समझने की आवश्यकता है। अभी तो ये बहुत प्रारंभिक बातें हैं। ये अगर आप परंपरा को नहीं पकड़ेंगी ना किसी परंपरा के प्रति आधीनता स्वीकार नहीं करेंगी तो आपके सिद्धांत खोखले हैं और तभी तक हैं जब तक सामने की ओर से कोई इंटेलेक्चुअल बंदा नहीं आ रहा है। जैसे आपके आपका ये कहना है मैंने बहुत हदीस पढ़ी है। मैंने बहुत कुरान पढ़ी है। है ना? और मैं जो है मुस्लिमों को तुम्हारा इतना भाई वो जो आप कर पा रहे हो ना जो भी थोड़ा बहुत खंडन है। जैसे थॉमस अलवा एडिसन ने बल्ब बनाया। अब दुनिया में कहीं भी बल्ब जल रहा है वो थॉमस अलवा एडिसन के कारण है। इसी प्रकार से आपके पास जो भी थोड़ा बहुत वैदिक ज्ञान विज्ञान थोड़ा बहुत भी है। उसका कारण भी आपके वही परंपरा प्राप्त आचार्य हैं। वहीं से आया वो सिद्धांत जो थोड़ा बहुत आप दे पा रहे हैं। दूसरी बात दूसरी बात तो आप प्रत्यक्ष रूप से मानो या ना मानो कि मेरा थॉमस अलवा एडिसन से कोई कनेक्शन है। आपका एन केन प्रकारनेन बल्ब जलाने की स्थिति में ये मानना पड़ेगा कि आपका कनेक्शन है थॉमस अलवा
01:58:33:01 एडिसन से। ठीक है? और दूसरी बात यह है कि आपको यह जो अहंकार आ गया है कि आप ही एक समर्थ हैं मुसलमानों के उसमें तो मैं आपको एक बात कहूंगा एक रिहर्सल टाइप का रख लीजिए। अब मैं आपके चैनल पे नहीं आऊंगा। आपने वहां मेरा जो गरिमा इत्यादि का ध्यान नहीं रखा। अब मेरे मेरे प्लेटफार्म पे अगर आपको आना हो तो आ जाइएगा। वहां आपका पूरा सम्मान होगा क्योंकि सबसे पहले तो आप मुझे लगता है कि मेरे से आयु में भी बड़ी हैं। ऊपर से आप धर्म के लिए इतना कार्य कर रही हैं वहां पर। है ना? दूसरी बात यह भी है कि मातृशक्ति हैं आप और हमारे यहां पर विशेष रूप से मातृ शक्ति के लिए महत्व जो है सिखाया जाता है। तो इन सब विषयों से मैं इस बात का पूरे आपको वचन दे सकता हूं कि मेरे प्लेटफार्म पर आपके प्रति इस प्रकार की कोई अभद्रता हो गई तो अपना चैनल डिलीट कर दूंगा जिस प्रकार की अभद्रता आपने की थी मेरे साथ। अच्छा अभी शिवश जी वैसे लाइव है अभी अभी मेरे को सूचना मिली है कि ये किसी आर्य समाज के चैनल पर लाइव बैठी हैं वहां पे ये बातें कर रही हैं उन लोगों से डिस्कशन चल रहा है इनका वो तो होना ही था वो तो वो तो लोग अभी ऋषि ऋषि मानव करके क्या चैनल है ऋषि मानंत्य करके चैनल है तो उसप लाइव बैठी है ऋषि मंतव्य होगा ऋषि मंतव्य हां उसपे बैठी है ये लाइव और अभी कह रही है वहां लाइव में पता चला है की इन्होंने कोई यज्ञ करवाया है जो करि
01:59:48:04 जी ने भी करवाया था तो वापिस आके वो ये यज्ञ करवा लेंगी फिर ये हिंदू हो जाएंगी ऐसा ऐसा कहती हैं ये घर वापसी की बात कर रही है शायद तो अभी हिंदू नहीं है क्या क्या मालूम क्या ही बात कर रही है मेरे को तो ये सूचना मिली अभी डीएम आया था मेरे चलो छोड़ो ये ये बाद में देखा जाएगा अभी जो हमारे पास अवेलेबल सामग्री है उस पर बात कर लें तो मैं ये कहने वाला था कि भाई अगर आपको ऐसा कोई घमंड इत्यादि है कोई मिथ्या अहंकार इत्यादि है या फिर आपको ऐसा लगता है कि आप समर्थवान हो इस्लाम का खंडन करने में यद्यपि आप हमारे यहां की रील्स देखेंगे तो एक वो महिला आई थी स्कॉलर थी वो वहां की महिला और एक वो भी आए थे मुल्ला जी पांच मिनट लगे बस खत्म वही पांच मिनट जो इनको दिए थे पांच मिनट हम आए दिन हमारे सीधेसी सीधे सिद्धांत है अपने वो पांच मिनट में हो गए तो अगर आपको ऐसा कोई विश्वास है कि मैं ही समर्थवान हूं और मैंने तो उनको भी कहा है ऋषि मंतव्य वालों को भी कहा है तो मैं ही समर्थवान हूं अगर आपको ऐसा लग रहा है मुसलमानों के खंडन में तो एक आप हमारे चैनल पर आइए। मैं एज ए मुसलमान आपको काउंटर करूंगा। ठीक है? आप मुझे परास्त कर दीजिए। और उसके बाद जब आप यह एक राउंड पूरा हो जाएगा तब
02:01:03:18 आप फिर मुस्लिम बन जाइएगा। मैं आपको ध्वस्त कर दूंगा। इसको कहते हैं सिद्धांत का पावर। और यह बात मैं उनसे भी कह कह चुका हूं जहां पे आप लोग बैठे हो। ठीक है? उनसे भी कह चुका हूं। पता नहीं कहां छुपे हुए हैं। रोज डंके की चोट पर बात करेंगे और इतनी सब बातें हो चुकी। निर्भय निर्भय ने मुझसे खुद कहा था कि संदीपन जी तैयार है इस कार्य के लिए आ जाओ किसी दिन मैं मुस्लिम बनके बात करूंगा आप मुझे चित्त कर दो फिर आप मुस्लिम बन के बात करो मैं जो है पारंपरिक हिंदू बनके आपको चित कर दूंगा देख लेते हैं कौन किस पर भारी पड़ेगा काहे के लिए एक दूसरे के सिद्धांतों को सामने लाना जो जो विधर्मी को हराएगा जो विधर्म को परास्त कर सकता है उसी में दम है उसी के सिद्धांत में दम है उसी में दम है बिल्कुल बिल्कुल हां और इधर-उधर की बात नहीं की जब एक मुद्दे पे बात चल रही होती एक विषय पे बात चल रही होती है तो फिर वो आ जाती है अरे वाली तो वो कह रहे हैं उसमें एक चीज और हो जाएगी कि हमारे यहां की वो बातें जो छेड़ के हालांकि मैंने आज तक ये नहीं किया है आज तक मैंने ये सब नहीं किया है कि दयानंद जी की फलानी उसके साथ संबंध थे दयानंद जी ने ये कहा सीधे सिद्धांत की बात वो क्या मानते हैं क्या लिखा है आपकी किताब में वो वाली बात ये लोग क्या करते हैं कि सिंघेरी की ये बोल रहे हैं वो वो बोल रहे हैं भाई तात्विक विवेचना चल रही है धर्म ब्रह्म की उससे हटके ये सब बातें क्यों लाते तुम
02:02:19:03 जो प्रासंगिक विषय है। अच्छा तो ऐसे क्या होगा जब हम मुस्लिम को सामने रख के बात करेंगे तो एक तो क्लियर कट हमें पता चल जाएगा विधर्म को हराने में किसका सिद्धांत पावरफुल है। दूसरी बात क्या पता लगेगी कि वहां पे एक बाउंडेशन और नहीं होगी। जब विधर्मी को हराओगे तो वहां वेदों को तो बाउंडेशन बना के खड़ा नहीं कर सकते। आपको विधर्म को हरा के अपने वेदों को प्रूफ करना है वहां। तो तो ये दिक्कत खत्म हो जाएगी। है ना? कि परंपरा किसकी क्या है? ये भी दिक्कत खत्म हो जाएगी। तीसरी एक बात और अच्छी आएगी कि जो सेंसिटिव चीजें बोल के हम सामने वाले का विषयंतर करने का प्रयास करते हैं वह भी वहां नहीं होंगी। जैसे अभी ये मातृ शक्ति आई थी कि तुम्हारे स्वामी स्वरूपानंद जी ने ये किया वो किया। अब मैं सारी बातें छोडूं जो कट टू कट बात चल रही है और मैं चला जाऊं इनके पास कि भैया तुमने ऐसा कैसे कह दिया स्वामी स्वरूप जी उन सबका जवाब है मगर जो विषय चल रहा है उसको कैसे बचाएं सबका जवाब है एवरीथिंग हां जी वीरूपाक्षक जी बोलिए अभी तो मैं इनकी जब पता चला है जो मैं डीएम पड़े हैं वहां पे भी अभी शंकर पर मेरे को टैकल कर छोड़िए इनको तो इनकी बात ज्यादा ना करें तो अच्छा है हां इनकी बात ना करें तो अच्छा है तो अभी लाइव को शायद दो घंटे हो गए हैं जाने का भी समय है तो एंड एंड करने से पहले यही बोलना चाहूंगा जितने भी व्यक्ति विशेष यहां जुड़े हुए हैं जो लोग वहां से आए हैं जो हमारी ऑडियंस
02:03:34:07 है कि हां तो जो हमारी ऑडियंस है कि धर्म का ज्ञान आप यहां से ले रहे हैं परंपरागत ज्ञान आ रहा है आपके थ्रू आप कहीं और से लेते हैं चर्चाओं में जुड़ते हैं तो आप एक बात का ध्यान रखिएगा हमेशा किसी भी व्यक्ति विशेष का जब उस पर विश्वास करने बैठते हैं इंटरनेट पे मैं बताता हूं स्पेसिफिकली इंटरनेट पे Instagram पे जाकर आप किसी पेज को फॉलो करते हैं तो आप एक बार देखिए पूछिए उनसे कि उनको ज्ञान कहां से आता आता है कहां से ज्ञान आ रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि इनकी तरह वो अपने मर्जी से कुछ भी उठा के लिखते दे रही है। शंकर परंपरा की पोस्ट से ही कोई शंकराचार्य का वो है अनुयाई है। उनकी ही पोस्ट उठा के उन्हीं के स्क्रिप्चर से ज्ञान लेके उनहीं पर पोस्ट बना के कल को उन्हीं को नकार देना ये सब नहीं होना चाहिए। तो मेरा आपसे यही निवेदन है। ये दोगलापन है। ये वहां पर बोलना चाहिए। जहां बैठी हुई है अगर वहां सब सिद्धांतवादी लोग हैं तो वहां शरण देने की बजाय बोलना चाहिए कि भाई तुमने शंकराचार्य को अपना गुरु क्यों बताया? और बनाया बताया तो आज ये क्यों कह रही हो? अरे भाई तुम कर क्या रहे हो? तुम तुम धर्म का प्रचार कर रहे हो क्या अधर्म का तुम सोच लो ना फिर तुम कहते हो तुम्हारे मंच पर हम आए। हमने ऐसा कब किया भाई? ह किसी का भी सहारा ले लिया। उनको तुम्हें दुत्कारना चाहिए। दत्त तुम काहे के हिंदू हो भाई? तुम कल कह रही थी आदि शंकराचार्य तुम्हारे वो हैं। तुमने चार बार में चार चक्कर गुरु बदला। तुमको
02:04:49:10 ये कहना चाहिए। ये इस समय बात कर रहा हूं निर्भय से। जिससे मैं बात कर रहा हूं उसको उसके जो और ऑपरेटर है भाई धर्म का केवल चिल्लाना नहीं है दूसरे पर दबाव नहीं डालना यह धर्म है धारण भी करना है ना उसे जी धारण भी तो करके वैष्णव संप्रदाय भी बोला है वैष्णवी शंकर भी बोला है वैष्णवी बोल रहे हो वैष्णवी बोल रहे हो शंकर भी बोल रहे आर समाजी बोल रहे तो उसको उस लड़की को तुमको धत क्या कर रही थी आप भाई अपनी मर्यादा की सेवा में थोड़ा तो उनको आप फटकार लगाओ कि भाई तुमने आदि शंकराचार्य जी को कल वो तुम कहते हो हम उनकी रेस्पेक्ट करते हैं। आदि शंकराचार्य जी को कल वो ये कह रही थी। आज वो ये कह रही है। और फिर तुम लोग छोड़िए उसी लाइव में उसी लाइव के बीच में जब उन्होंने बोला है कि आदि शंकराचार्य जी मेरे गुरु हैं। उनका अनुयाई आके बोल के जाता है कि आदि शंकराचार्य जी प्रचंड बौद्ध है और फिर अगले दिन उसका समर्थन करने लग गई। ये कैसी बात है? उसी लाइन में 4 घंटे के अंदर हां। इसमें एक अचला वाली बात रह गई। अच्छा हुआ किसी ने याद दिला दी। तो ऐसे कई विषय हैं जिसमें साइंटिफिक थ्योरी ने वो नहीं दिया है। निष्कर्ष नहीं दिया है। कई थ्योरीज यह कहती है वैज्ञानिक कि सूर्य जो है वो क्या कहते हैं धरती के अराउंड घूमता है। और कई जो
02:06:04:14 थ्योरीज है वो ये भी कहती है कि धरती जो है सूर्य के अराउंड घूमती है। तो हमें जो परंपरा प्राप्त जो वेदादि शास्त्रों का अर्थ प्राप्त होता है तो उसमें जो है पृथ्वी को अचला मान करके सूर्य के होने की चीजें भी बताई गई हैं। दूसरी बात पूरी के शंकराचार्य जी ने अचला पृथ्वी मैंने हां अचला अचला अच्छा वो वो बात ये है उसमें कई सारे वो हैं जैसे आप सेटेलाइट से अगर मूव करती हुई सेटेलाइट से अगर किसी ऑब्जेक्ट का वो लोगे ना चित्र तो क्या होगा कि वो आप खुद घूम रहे हो जैसे आपने देखा होगा ट्रेन के बगल खड़ी हुई ट्रेन के बगल में आप होते हो आपकी ट्रेन चलने लगती है तो आपको लगता है बगल वाली ट्रेन जा रही है तो इसमें बहुत सारी रिलेटिव वाली रिलेटिविटी की थ्योरीज बहुत सारी हैं थ्योरी ऑफ रिलेशन है वो उसप मैंने अभी हां उसप मैंने भी वीडियो बनाया था कि आइंस्टाइन ने भी ये माना है कि कुछ भी चीज अब्सोल्यूट नहीं है। आप धरती को स्थिर मानो तो सूर्य धरती के चक्कर लगा रहा है और आप सूर्य को स्थिर मानो तो धरती सूर्य के चक्कर लगा रही है क्योंकि हम पृथ्वी के ऊपर हैं। व्यवहार जगत में है तो उस व्यवहार जगत में हमें ये मानना पड़ेगा कि धरती जो है वो अचला है। अगर आप धरती को अचला नहीं मान रहे हो तो फिर जल जो है वो चलायमान जो आप देख पा रहे हो और जो वायु चलायमान जो आप देख पा रहे हो वो सिद्धि नहीं होगा। तो इसीलिए जब साइंटिस्ट जो सबसे बड़े आइंस्टाइन से बड़ा तो कोई नहीं है। उन्होंने ये थ्योरी दी ही अबब्सोल्यूट
02:07:19:27 देयर इज नथिंग अब्सोल्यूट इन साइंस। साइंस में कुछ भी एब्सोल्यूट नहीं होता है। ये लोग कहते हैं एब्सोल्यूट सीधी बात है। जब बात एब्सोल्यूट की आएगी ना तो दुनिया में एब्सोल्यूट एक ही चीज है। वो है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर। किसी भी चीज में आप एब्सोल्यूट ढूंढने जाओगे तो वहां पे भगवान बैठे मिलेंगे। इसीलिए हम लोग उसको ढूंढ रहे हैं क्योंकि साइंस से हमारी अब्सोलुटली जो एब्सोल्यूटनेस की जो प्यास है ना बुझ नहीं पा रही है इसलिए भगवान चाहिए हमको हमको अब्सोल्यूट होना है तो वो भगवान ही है किसी भी क्षेत्र में पराकाष्ठा में जाएंगे तो खैर वो ये वाली बात हो गई क्लियर वो गुरुदेव वाला आपने एक प्रश्न तो शंगेरी जी वाला वो शंगेरी शंकराचार्य वो भारती कृष्ण जी वाला हमने बोल दिया वो हो गया। अच्छा डोनेशन वाली हमने बात बता दी है। डोनेशन जब आ रही है तो उसका सदुपयोग भी हो रहा है। आपको जरूरत है जाकर के चेक करिए और वो जैसे आपने इंफॉर्मेशन निकाली ना इतनी डोनेशन आई है तो आप जाकर के इस पर भी एक डॉक्यूमेंट्री निकालिए कि भाई उस वो डोनेशन कहांहां पे खर्च हो रही है। ठीक है। अच्छा एक बात और है। और और डोनेशन पे एक और बात है कि ऐसा नहीं है। एक मिनट नहीं तो मैं फिर भूल जाऊंगा। एक मिनट मैं फिर भूल जाऊंगा। एक बात
02:08:34:28 रह गई थी कि यह लोग एक तरफ को कह रहे हैं आप हमारे चैनल पे आओ। फिर चैलेंज करते हुए क्या कह रहे हैं कि कांग्रेसी आए तो पहली बात तो तुम धर्म में राजनीति को ला रहे हो कांग्रेसी तैयारी करके फिर तुम हमसे मर फिर ये मर्यादा कहां जा रही है तुम्हारी? सोचिए बचपना है ये तुम लोगों का यार। तुम अभी बड़े हो जाओ। बचपना है बचपना है। अब संदीपन जी थोड़े मुझे मैच्योर लगते हैं। मगर इस तरह की हरकतों में जब वो समर्थक बनना है तो मैं उनको भी कहूंगा तुम बचपना है अभी फिर तुम्हारा तुम्हारे लोगों का। थोड़े बड़े हो जाओ। कुछ करो जाकर के धरातल पे सोशल मीडिया वॉरियर बनने के जाओ जाके करो चुप ठीक है हमने अपने अपने आसपास तो रामपाल खत्म कर दिया ना तुम करो जा किसी राक्षस का नाश बताओ अपनी मैच्योरिटी वहां थोड़ा कुछ कर लो यार कांग्रेस बीजेपी ये सब तुम्हारा धर्म है पता नहीं चलेगा सामने आने पे ये जो ये सब बातें कर रहे हो तुम हम हम बकवास सही बात है इंटरनेट सबसे सस्ता हुआ है इंटरनेट सस्ता होते ही सबको अपना वक्तव्य रखना है। वही बात आ जाती है। बातें छोंक दो बस। हां वही है। हम अब ये विदेश विदेश गमन पे कहते हैं कि अच्छा विदेश गमन नहीं कर सकते तो धन कैसे ले सकते हैं? अरे भाई जब कोई वहां से धर्म कार्य के लिए धन दे रहा है तो उस पे कहां पर निषेध लिखा
02:09:50:00 हुआ है कि भैया विदेश से अगर कोई धर्म कार्य के लिए धन दे तो उस पे जो है वो धन नहीं ले सकते। ऐसा कहां पर भी लिखा हुआ है? यह भी बात आ जाती है। अच्छा वो आपने भी बताया कि वो जो धन है वो धर्म कार्य के लिए ही हो रहा है। वहां पर कोई भोग विलास थोड़ी हो रहा है। तो आप उन चीजों को जो इग्नोर कर दे रही हैं। मैं प्रमाण दे सकता हूं उनको। ये देखिए ये एक मातृशक्ति है। ठीक है ना? ये यूक्रेन की है। ये भारत में ही रहती हैं। पिछले 10 साल से शायद भारत में ही है। इनका मेरे को वीडियो मिला था। यह श्रृंगेरी मठ का ही अनुसरण करती हैं और यह खुद स्वयं खुद डोनेशंस इकट्ठा करके श्रृंगेरी मठ तक पहुंचाती हैं ट्रस्ट के थ्रू। तो ऐसा नहीं है कि हमें कोई चिढ़ है किसी से और फिर विदेश गमन विदेश गमन या विदेश भूमि में जन्म लेने वाले व्यक्ति को यह थोड़ी ना कहा गया कि हम तुम्हें नाम जप या भगवान के तत्व की व्याख्या नहीं बताएंगे। सबको बताएंगे। उसके अधिकार की सीमा में किस तरह से उसका माध्यम क्या हो सकता है वो सबको बताया जाएगा। मुक्ति से किसी को वंचित नहीं किया गया। स्टीव जॉब स्टीव जॉब भी आए थे भारत में तो क्या उन्हें ब्राह्मण बन गए वो आके कि मुझे ब्राह्मण बनना है वो आए थे वहां पर धर्म और भ्रम को समझा उन्होंने वहां पर तो बहुत सारे ऐसे अभी हॉलीवुड के भी बहुत सारे एक्टर हैं जो हमारे सनातन धर्म की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। उसके सिद्धांतों को पढ़ रहे
02:11:05:01 हैं। तो वो आपके जो सिद्धांत है कि आए हैं वो और हम उन्हें सीधा ब्राह्मण बनाकर वो जेनेऊ धारण करवा देंगे। भैया उससे क्या उन्हें धर्म और भ्रम मिल जाएगा? आप तो गलत कर रहे हो। आप तो उनको गलत धर्म की व्याख्या दे रहे हो। तो उससे तो आप धर्म का प्रचार ना कर कर आप तो उल्टा धर्म के विरुद्ध जो है कार्य कर रहे हो। अच्छा ये जो अभी इन्होंने अवेकनिंग को जो अपनी लाइव स्ट्रीम में ये ले रहे हैं अवेकनिंग भारत इनकी मातृशक्ति को तो यानी कि कहीं ना कहीं आर्य समाज इस चीज का समर्थन कर रहा है कि भाई अगर आप इंटरनेट से और पीडीएफ से ज्ञान ले रहे हो तो आप वैलिड हो मतलब करते रहो ये सब चीजें। उनका अपना वो है ना उनका अपना मत वही है ना वो वो भी तो अनाधिकृत रूप से बने बैठे हैं ना वही वही और उनका दिक्कत तब आएगी दिक्कत तब आएगी दिक्कत तब आएगी जब ये भस्मासुर उनके पीछे पड़ेगा जो भस्मासुर को आज वरदान दे रहे हैं हां अभी उनकी लाइफ में वो कह रही थी कि शंकर परंपरा वाले जो अनुय गाली दे रहे हैं मेरे को उनका भी नाश होगा अभी देखते हैं वो तो सुनो एक चीज और गाली थोड़ी दे रहे हमने किसी किसी को गाली थोड़ी एक और है अब वो वहां बैठी हुई वहां पर उनको नहीं कहना चाहिए कि भाई तुमने यह कहा कि स्त्रियां कभी भी किसी भी सूरत में अपवित्र नहीं होती। नहीं नहीं यह बात नहीं है। अमुक अमुक
02:12:20:07 स्थितियों में स्त्रियां अपवित्र माननी पड़ेगी। नहीं तो राम जी क्यों कहते सीता माता को वो अग्नि परीक्षा दो। ये तो वो भी मानते हैं आर समाजी हैं। जबकि सीता माता तो अयोनिजा है। अब वो भागवतानंद वाला जो वो आ जाएगा उसको खंडन नहीं किया मैंने। सबरी वाले में सीता माता अगर देखा जाए तो जिनकी अवतार बाद में मान्यता है उनके अनुसार सीता माता तो अयोनिजा है और उनमें तक भगवान जो है दोष दोष दोष होने की दृष्टि से उनको देख रहे हैं अब वो नहीं थी वो बिल्कुल साफ बात है मगर देख तो रहे हैं ना हो सकता है संभावना स्वीकार कर रहे हैं तो फिर ये क्या बकवास करके बैठी हुई हो अपने उसमें कि भैया वो नहीं होती अब तो उनको सिखाओ आपके आपके चैनल पे वो आई है तो उनको आपको सिखाना चाहिए जी इनका कुछ नहीं हो सकता ये अभी उनका समर्थन इसलिए इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वो आपके विरुद्ध खड़ी है। इतनी सी बात है। देखिए ऐसा है। और हमारे परम पूज्य कृपात्री जी महाराज जो कि गौ रक्षा आंदोलन जो उन्होंने करा था 1966 1966 में तो उस सबसे बड़ा आज का आज तक का गौ रक्षा आंदोलन वो माना जाता है। उसका नेतृत्व उन्होंने किया था। उसमें जो हजारों संतों ने उस गौ रक्षा आंदोलन में भाग लिया था। तो भाई आप जो है यह कहकर के भैया वो तो जो गौ
02:13:35:10 बलि का समर्थन कर रहे हैं। अच्छा समर्थन करने वाला फिर गौ रक्षा आंदोलन क्यों चला रहा है? अच्छा उनकी परंपरा के आज के आचार्य भी हमारे जो पूज्य गुरुदेव हैं वो क्या हुआ? वीडियो कट गई शायद इनकी। हां। चलिए मैं एक चीज दिखा देता हूं। यह एक थर नाम का एक इनके यहां पहले आर समाजी थे और इन्होंने अभी चैनल इन्होंने अपना चैनल खोला है और ये अच्छे से इनकी खिंचाई कर क्योंकि ये इनके अंदर से निकला हुआ निकले हुए हैं। ये कोई चैनल है थर तो वो जो है अब ये इनके पास इसका कोई उपाय नहीं है और आपको मैं बताऊं देश के बहुत बड़े-बड़े नास्तिक हैं जो आर्य समाज से निकल के आ रहे हैं। बिल्कुल विकास दिव्य कीर्ति नास्तिक फैमिली से है। सिर द होगी तो नास्तिकता ही मिलेगी। हां जी। हां जी। हां जी। ये बात है। अच्छा एक बात जी आप कुछ कह रहे थे सनातन शंकर जी। हां मैं ये कह रहा हूं कि हां एक और है। ये ये देखिए ये व्यक्ति भी हमारे चैनल पे आ चुके हैं एक बार। ये अजय आर्य ये बहुत बड़े अफलातून माने जाते हैं। एथ बहुत बड़े अफलातून आर्य हां।
02:14:50:14 तो ये ये भी जो है अब एथस्ट बनके आर्य समाज के विरोध में ही कार्य कर रहे हैं। यह तुम्हारे सिद्धांत है। हम वो हैं जो नास्तिकों को आस्तिक बनाते हैं और तुम वो हो जो आस्तिकों को नास्तिक बनाते हो। ठीक है। चैट में व्यक्ति विशेष सवाल उठा रहे हैं। पशु बलि गौ बलि और चौक पब्लिकेशन का सेनाचार्य भाष्य पे। तो नहीं उसी उसी पे उसी पे मैं उसी पे बोल रहा था। बीच में डिस्कनेक्ट हो गया। मैं यह कह रहा था कि हमारे परम पूज्य कृपात्री जी महाराज जिन्होंने 1966 में गौ रक्षा का बहुत बड़ा आंदोलन किया था। उस वक्त की इंदिरा गांधी सरकार के विरुद्ध उन्होंने खड़े होकर देश के सारे संतों को इकट्ठा किया। इतना बड़ा गौ रक्षा आंदोलन आज तक नहीं हुआ। तो उसमें इतने सारे निहत्ते साधुओं के ऊपर गोलियां चलाई गई। चलाई गई थी। सिर्फ इसलिए क्योंकि वहां पर गौ रक्षा की बात थी। लेकिन उस चीज का प्रचार प्रसार ना कर कर यह उल्टा यह दुष्प्रचार कर रही हैं कि भाई करपात्री जी महाराज जो है वह गौ व के समर्थक हैं और हमारे इसको क्लियर मैं इसको क्लियर कर देता हूं। हालांकि हालांकि मैंने इस बात को उनको फोन जो टेलीफोनिक वार्ता हुई है। संतुष्ट कर दिया था। उनके पास जवाब नहीं थे। मगर अब वो एक सिंपैथी
02:16:05:15 गेम नहीं होता है। विक्टिम कार्ड की कुछ ऐसी चीजों को ऐसे बोलो कि वो जो है मुद्दा बन जाए। ऐसा है कि जब भी कभी समष्टि के भाव से व्यष्टि का वो देखा जाता है तो वहां पर समष्टि को प्रायोरिटी दी जाती है। तो द्वापर युग तक ऐसे यज्ञ को मान्य किया गया जिसमें इस तरह की प्रक्रिया का प्रक्रिया को कहीं पर स्वीकार किया गया। अमुक अमुक प्रलयंकारी आपदा से बचने के लिए। ठीक है? कि भाई दुनिया की तमाम जो गौ माता हैं उनका वध ना हो। उनको बता क्या कहते हैं उनको नुकसान ना पहुंचे इसलिए ऐसी कोई प्रक्रिया निर्धारित की गई जिससे कि उनका बचाव हो सके। अब उसका जो पहली बात तो कलयुग में तो वो लागू ही नहीं द्वापर तक स्वीकार किया गया। दूसरी बात यह है कि अगर यह देखा भी जाए कि भैया हम जो करपाती जी गौ बलि के समर्थक है तो एग्जीक्यूशन भी तो देखना पड़ेगा। केवल इनपुट क्यों देख रहे हो? एग्जीक्यूशन भी तो देखो। एग्जीक्यूशन तो दिखाई नहीं दे रहा आपका। इंप्लीमेंटेशन तो दिखाई नहीं दे रहा। कौन से मठ में गौ बलि होती है भाई? मरे जा रहे हैं हम लोग। लड़े मरे जा रहे हैं। कटे जा रहे हैं गाय। गाय को बचाने के लिए हैं। फिर तुम कैसे कह दे रहे हो कि समर्थन? मतलब मैं जो मैं जो कह
02:17:20:16 रहा हूं वो मैं नहीं बताऊंगा। वो कौन बताएगा? सामने वाला बताएगा। अच्छा दूसरी बात यह है कि अगर यह मान ले कि अमुक अमुक स्थिति में भी गाय को कैसे आपने इस ऐसी प्रक्रिया का कैसे उपयोग मान लिया? तो भाई सुनो तुम्हारे जो खुद के दयानंद जी हैं नियोग के विषय में लिखते मैं नियोग का आरोप नहीं लगा रहा हूं। सामान्य एक एवरेज जो आर्य समाज विरोधी होता है वह नियोग लेकर के आ जाता है आर्य समाज हम तो सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र शाश्वत धर्म पर बात करने वाले लोग हैं। खैर तो मगर नियोग के विषय में एक तर्क दिया उन्होंने जो मानने योग्य है। जब उन्होंने पूर्व पक्ष के रूप में आपत्ति जताई है वहां पर पूर्व पक्ष में लिखा है कि भाई सब बातें ठीक है मगर मुझे व्यभचार जैसा लग रहा है नियोग वहां पर पूर्व पक्ष रखा है उन्होंने दयानंद जी ने तो पूर्व पक्ष में व्यक्ति ने कहा कि मुझे जो नियोग है व्यभचार लग रहा है तो दयानंद जी ने पूछा कि विवाह करना व्यभचार नहीं है। यह कहां से पता लगा तुम्हें? विवाह करना व्यभचार नहीं है। यह कहां से पता लगा तुम्हें? जैसे कल वह कह रही थी ना कि मानव कल्याण तो कौन सी चीज मानव कल्याण है कौन सी नहीं है तुम्हें धर्म से पता लगा शास्त्रों से पता लगा अपने से आपकी गति नहीं है अती्द्रिय विषय बहन से विवाह नहीं करना है बहन से विवाह नहीं
02:18:35:20 करना है इस विषय में शास्त्र ही प्रमाण है शब्द प्रमाण से माना हमने अब कोई कहे साइंस की वजह से साइंस तो बदलती है सनातन थोड़ी ना साइंस कल को कहने लगे कि साइंस जो है बहन से विवाह करने पर कुछ नहीं है बल्कि आप जेनेटिकली अच्छे हो जाओगे आपकी संतान करोगे हम नहीं करोगे क्यों? क्योंकि धर्म ने कहा है नहीं करना। तो गति अब उन्होंने दयानंद जी ने वहां पर तर्क दिया है कि जो विवाह है वो व्यभचार नहीं है। इस संबंध में इसको तुमने कैसे माना? आपने विवाह को और गैर विवाह की स्थिति में जो संबंध बनते हैं स्त्री पुरुष में। इसमें आपने अंतर किस आधार पे किया है? शास्त्र के आधार पे। तो जब शास्त्र ही ये कह रहा है कि नियोग को नहीं मानना है गलत। तो फिर आप उसमें कैसे शास्त्र के ऊपर जा रहे हो? आपके लिए अच्छाई और बुराई डिपेंड जिस पे करती है वही तो सेलेक्ट करेगा कि कहां पे अच्छाई होगी कहां पे नहीं होगी। तो कोई चीज हमारे लिए सही है और कोई चीज सही नहीं है। इस विषय में शास्त्र प्रमाण है। अती्द्रिय विषय जो है उसमें शास्त्र प्रमाण है। यह मोक्ष का विषय अती्द्रिय विषय है। इसको आप तर्क से सिद्ध नहीं कर सकते। मोक्ष मिल गया। अती्द्र विषय तो उसमें शास्त्र प्रमाण है। हां आपको संतुष्टि जनक देने वाले इतने सारे उपाय दिए जाएंगे। इतने सारे तर्क दिए जाएंगे कि आपके
02:19:50:26 मन में खुद श्रद्धा उमड़े कि हां भाई इसकी ये वाली बात जो है ना अतींद्र जिसमें मेरी गति नहीं हो पा रही मानने योग्य है। यह हम दे देंगे अकाट्य बातें। तो जब जिस विषय में शास्त्र ने ही संविधान दे रखा है तो उसमें हमने हमें शास्त्रों का उल्लंघन ना करके समष्टि के भाव से ऐसी प्रक्रिया को भी स्वीकार करना पड़ता है जो भले ही व्यष्टि की व्यष्टि के धर्म की दृष्टिकोण से गलत दिखाई दे रही हो मगर समष्टि के भाव से वो कि आपदा आ रही है प्रलय आ रही है प्रलय से बचने के लिए ऐसा यज्ञ है मान लो द्वापर तक अब तो है भी नहीं अच्छा दूसरी बात अब ये व्यष्टि और समष्टि को भी मैं समझा दूं प्रह्लाद जी का व्यष्टि का धर्म था कि पिता की आज्ञा का उल्लंघन नहीं करना है और समष्टि का धर्म था कि नारायण नारायण नाम जपना है। जब समष्टि का धर्म को क्रॉस करने लगता है व्यष्टि का धर्म तो समष्टि के धर्म को चुना जाता है। तो प्रह्लाद ने उसको चुना और प्रह्लाद जी आज हमारे आदर्श हैं। श्री राम जी के समक्ष धर्म था कि अपनी निर्दोष पत्नी को दंड नहीं देना है। व्यष्टि का धर्म और समष्टि का धर्म क्या था कि प्रजा जो है दुखी हो रही है उनका उदाहरण लेकर के वहां पर अनियमितताएं आ रही हैं और वो भी ऐसी वैसी प्रजा नहीं आज जैसी
02:21:06:12 स्वकर्म निष्ठ स्वधर्म निष्ठ वो प्रजा वो दुख भोग रही है तो उन्होंने समष्टि के धर्म के निर्वाह के लिए व्यष्टि के धर्म को चुनना सिखाया वो व्यष्टि के धर्म को त्यागना सिखाया समष्टि के धर्म के निर्वाह के लिए वो हमारे आदर्श अब दो उदाहरण ऐसे दे देता हूं जिन्होंने व्यष्टि के धर्म को आगे किया समष्टि को पीछे कर दिया जैसे कि भीष्म पितामह भीष्म पितामह को मालूम था धर्म क्या है द्रोपदी का चीर हरण नहीं होना चाहिए समष्टि था मगर उनका व्यष्टि का धर्म था कि उन्होंने प्रतिज्ञा ली हुई थी राजगद्दी के प्रति कटप्पा वाली तो उन्होंने क्या किया अपने व्यष्टि के धर्म को चुना समष्टि को त्याग दिया दोषी बने महाभारत में अपराधी कहलाए और भगवान ने सबसे पहले उनको दंड दिया कुंभकरण
02:21:54:04 समष्टि का धर्म था सीता माता को हरण करके लाया था उनका भाई साथ नहीं देना चाहिए था भाई का व्यष्टि का धर्म था भाई का साथ देना तो जब समष्टि का धर्म हावी हुआ व्यष्टि पे उन्होंने क्या किया व्यष्टि को चुना भाई का साथ दूंगा समष्टि जाए भाड़ में वो हमारे लिए राक्षस बने बुरे व्यक्ति करे कहलाए वहीं पे विभीषण विभीषण ने व्यष्टि के धर्म को त्याग कर दिया समष्टि के धर्म को अपनाया तो वो किधर आ गए राम जी की तरफ तरफ धर्म की तरफ तो यह आपको समझना होगा धर्म की मीमांसा बहुत कहीं-कहीं पर बारीक लकीर होती है धर्म में कहीं-कहीं पर और क्या कहते हैं दुनिया की बहुत सारी गायों के लिए अगर ऐसी एक विधि के आलंबन से दुनिया की बहुत सारे गौवंश को बचाया जा सकता है तो उसको प्रायोरिटी देनी दी जाएगी ना इसका एक बहुत बड़ा उदाहरण ले लो युद्ध हो रहा है पूरे देश के 100 करोड़ हिंदुओं की रक्षा के के लिए वहां पर क्यों बलि दी जा रही है सैनिकों की बताइए वो गलत है। छाती पर गोली खा रहे हैं। यह व्यष्टि और समष्टि का अंतर है। ठीक है जी बोले यही अधूरा ज्ञान है इनका आगामिक परंपराओं का नाम ले लेके ये अटैक करने लगते हैं
02:23:09:08 वेदाचार्य पे जबकि इनको उनकी भी नॉलेज है नहीं जरा सी भी। अभी जैसे मैं देख रहा था कि जो वीर शैवा आचार्य है चंद्रशेखराचार्य जी काशी के मटके जंगमवाड़ी मटके वो गए थे रशिया वहां पर तो कहते ये रशिया चले गए हैं यहां शंकराचार्य लोग कहते हैं कि विदेश गन अलाउड नहीं है तो आपको धर्म की थोड़ी अगर नॉलेज है आप एग्जांपल ले रहे हैं एक आगमिका आचार्य का तो उनका धर्म भी तो पढ़िए क्या कहता है उनका धर्म बात इसको बहुत शॉर्ट में ऐसे समझा दीजिए कि भैया शास्त्र में वीर शैवाचार्य विग्रहवान धर्म नहीं लिखा है। बिल्कुल शास्त्र में रामो विग्रहवान धर्म लिखा है। दुनिया के समस्त जितने भी व्यक्तित्व हैं जितने अंशों में राम जी की सीमा के भीतर आएंगे स्वीकार हैं और जहांजहां पर राम जी की सीमा के बाहर जाएंगे स्वीकार नहीं है। और और सुनिए महाभारत का वचन है घटनाओं का घटित होना प्रमाण नहीं होता है। रावण ने सीता का हरण कर लिया। हमारी वाल्मीकि रामायण में लिखा है। तो क्या वो हमारा धर्म है? दूसरे की पत्नियों का हरण करना तो घटनाओं का घटित होना प्रमाण नहीं होता है। उनको उनको न्यायोचित रूप में शास्त्रों द्वारा स्वीकार किया जाना प्रमाण होता है। शास्त्रों द्वारा या
02:24:24:12 तो वह करने वाले व्यक्तित्व को कह दिया जाए मर्यादा पुरुषोत्तम है तो उसका धर्म हो गया उसकी हर की हुई चीज या फिर उसके द्वारा किए हुए इस प्रकार के विरोधाभासी कृत को कि शास्त्र तो कह रहे हैं नहीं जाना है मगर वो जा रहे हैं तो इस प्रकार के कृत्य को शास्त्र ने स्वीकार कर लिया हो अमुक अमुक गद्दी पर अगर कोई बैठा होगा तो जाएगा और हम यह व्यक्तिगत दोष उनका इसलिए नहीं उनके पास अपना कुछ हो सकता है मगर उसको सिद्धांत बना दो उनकी कोई स्थिति हो सकती है धर्म का अनुकरण ना कर पाना यदि मेरी व्यवस्था नहीं है, चयन है तो मैं अधर्मी हूं और धर्म का अनुकरण ना कर पाना यदि मेरा चयन नहीं है, मेरी व्यवस्था है तो भी मैं धर्मज्ञ ही कहलाऊंगा। जी ठीक है जी बोले। तो बस अब खत्म ही करते हैं। फिर तो सारे तो जितने पॉइंट थे हो गए हैं कवर मेरे हिसाब से। हां और कुछ बचा नहीं है। अब नया अगर ये कुछ लाके देते हैं तो बात अलग है। अब अब वो कर ये रही हैं। फिलहाल जो अभी उनकी स्थिति है ऑपरेटर अगर देख पा रहे हो जरा वो मेरा आज का वीडियो दिखा दीजिए। वैसे हम लोग शॉर्ट में इसको डालने वाले हैं। मैंने आपको WhatsApp पे एक वीडियो दिया है छोटा सा डेढ़ मिनट का। अभी जो रील डाली है वो दिखा दूं यहां के दर्शकों को। तो
02:25:39:27 क्या कहते हैं? अब वो कर ये रही हैं। फिलहाल उन्होंने मुझको और मुझसे जुड़े हुए कुछ शायद मुख्य लोगों को जो उनकी इस वास्तविकता को जानते हैं कि उनका क्या हाल हुआ था आमनेसामने के वन ऑन वन टॉक में। तो हां मैं एक बात याद दिला दूं। मैंने जो बात कही मुझे ध्यान रखिएगा आपको बहुत ज्यादा इस बात का अगर वो है धारण कर रखा है। मैंने मुसलमानों को चटनी चटाई है तो आप इस तरह की चर्चा मुझसे कर सकती है जिसमें मैं मुसलमान बनूंगा। आप चटनी चटा दीजिए। फिर मैं आपको दिखाऊंगा कि चटनी चटाना कहते किसे हैं। दूसरी बात। दूसरी बात दूसरी बात यह है कि अभी वह कर क्या रही है कि उन्होंने हमको जैसे हमारी चीजों को ब्लॉक कर दिया तो जानना ही नहीं चाहती कि शिवश नारायण द्विवेदी क्या कह रहे हैं क्या लिख रहे हैं उनको टैग किया जा रहा है जो उनके संदेश है वो उस दुनिया से मुक्त शिवांश रहित दुनिया में जीना चाहती है क्या रहित शिवांश रहित दुनिया में जीना चाहती है शिवशित पता है इंटरनेट पे क्या होता है आपकी वजह से नहीं है कि आपको नहीं देखना चाहती वो ये चाहती है कि आप ना देख पाए वो क्या कह रही है अब हां जो इंटरनेट का मतलब यही है क्यों छुपा रही है? नहीं मगर हां हां नहीं अपने आप को छुपा रही है और वो ये जानना नहीं चाहती मैं क्या कह रहा हूं क्या नहीं कह रहा हूं तो एक आवाान रहित दुनिया में वो जीना अब वो आवाहान रहित दुनिया में जीना क्यों है इसलिए जीना है कि मैं अपने आप को बता पाऊं
02:26:55:03 मैं बहुत फन्ने खाऊं पीस मार खाऊं ये अपने आप को मैसेज देना है अपने आप को अपनी स्वकल्पित दुनिया में बताना है जैसे अभी हमने आनंदाभास नाम की एक चीज होती है ना कि आनंद नहीं है वहां आनंदाभास को ही आनंद मान लिया और उसको ही मजे में अपना हम सोचने लगे यही आनंद है यही परमानंद है और उसी को आनंदाभास को ही आनंद आनंद समझ के भोग रहे हैं तो इसी प्रकार से अपनी मन कल्पित एक एक ऐसा संसार जिसमें आहान है ही नहीं जिसमें शिवश नारायण द्विवेदी है नहीं जिससे कि मैं वहां पर खुद को ये बता पाऊं कि मैं हूं अभिजय अपरा अपराजिता मैं हूं जिसको कोई हरा नहीं सकता तो ये जो इस बात का देवता है आपका मुझे जो है वो करना जी आप अपनी बात पूरी कर लीजिए। फिर उसके बाद आज की वो चलित करेंगे। बिल्कुल। और जब जब यह भगवत आनंद का आपने खंडन किया था और जब आपकी वो चल रही थी वीडियो सीरीज तब इन्हीं इसी चैनल ने भगवतानंद के जो वीडियो की अपने उसमें कम्युनिटी पोस्ट में वीडियो लगाए थे समर्थन में कि देखो देखो हम तो अब इस इस बात के लिए हम भगवत आनंद का समर्थन कर रहे हैं। अब जैसे ही अवेकनिंग इंडिया से आपकी वो वार्ता हुई। अब वो यह सारे उसको कांटेक्ट करने
02:28:10:07 में लग गए। अब इन्होंने लाइव स्ट्रीम भी रख दी उसके लेकर है ना तो तो ये सब हो रहा है कि भ जहां पर भी इनको लग रहा है कि इनको सहारा लेना है तो वहां पर ये लोग सहारा ले रहे हैं। अब सोचो भगवत आनंद आर्य समाज का खंडन कर रहा था। वो जो उसने जो सीरीज बनाई थी उसमें आर्य समाज का और दयानंद सरस्वती जी को तो बहुत अभद्रबद्र बातें बोली थी भगवत आनंद ने। अच्छा वो सारी बातें भूल गए थे तब तब क्या करना था? क्योंकि शिवश जी से भगवत आनंद की वो चल रही थी डिबेट उस बीच में भगवत आनंद को अपने उसमें वही तो कह रहा हूं जहां सिद्धांत नहीं है जिधर सिद्धांत नहीं है क्या करेंगे और वो दूसरों का सहारा लेंगे तो यही होता आ रहा है यही होता रहेगा इनके साथ तो कोई उम्मीद है नहीं मुझे वैसे भी इनसे कुछ करें नहीं करें अब इतनी सी बात है कि मैं तो कहता हूं कि शिवश जी को लेके हम क्या करते हैं कुछ लोगों से एक पुस्तक लिखवा देते हैं जहां पे शिवश जी को हम बहुत बड़ा दिखा देते हैं और इंटरनेट पर डाल देंगे और वैज्ञानिक भारत जी तक उनकी लिंक पहुंचा देंगे कि अब देखिए इस इस पुस्तक में शिवश जी के बारे में महा महात्मा में लिखा हुआ है कि शिवश जी बहुत बड़े आचार्य है तो आपको शिव जी की बात माननी पड़ेगी तो इंटरनेट पे आए तो मान लेंगे क्या ये मैं तो ये जानना चाहता हूं इनसे उस पर ऊपर लिखवा देना वेद वेद भी लिखवा देना ऐसे लिखवा देंगे आवाहन कौरव धर्म वेद ऐसे अलग से लिखवा देंगे
02:29:26:24 मैं मैं वैसे मैं वैसे मैं वैसे ऐसा करूंगा अपने जीवन में कि जैसे मैं रामपाल के पास खड़ा हूं अगर ज्ञान है मैं नहीं मैं ऐसा करने वाला हूं हूं बहुत जल्द वो अचानक से पता चलेगा। मैं उसको बोल भी दे रहा हूं। अनाउंसमेंट भी कर दे रहा हूं। बहुत जल्द किसी आर समाजी के सामने खड़ा हुआ मैं एक नकली सत्यार्थ प्रकाश निकालूंगा। यह है सत्यार्थ प्रकाश। अब तू बता भैया तेरी क्यों असली मेरी क्यों असली नहीं इसी में भिड़ जाऊंगा और वो सिद्ध नहीं कर पाएगा कि मेरी क्योंकि उसकी अपरंपरा नहीं है। रामपाल के सामने खड़ा हऊंगा। ये है ले तेरी क्योंली मेरी कौसली नहीं। रामपाल जरा रामपाल अभी आज से 10 15 साल बाद आउट हो जाएंगे। ठीक है? तो रामपाल का लिखा हुआ जो ग्रंथ होगा तब वो कहने के लिए भी खड़े नहीं होंगे। रामपाल कि मैं मैंने ही यह लिखा है। अब मैं उसमें बताऊंगा ये लिखा है। भाई अब बता तू क्यों माना जाए? क्यों ना माना? क्योंकि परंपरा को नहीं मानते। जो व्यक्ति परंपरा को नहीं मानेगा उसके पास मेरी नकली सत्यार्थ प्रकाश का नकली ज्ञान गंगा का या क्या कहते हैं? और जितने भी परंपरा को ना मानने वाले सेक्ट्स हैं या जैसे ये जो अपनी ये हैं इनके ही द्वारा ये किसी को भी बिलीव करती हूं वही इनके सामने ले पहुंचू ये बताओ ये नकली कैसे तब इनकी आंखें खुलेंग ये परंपरा होती क्या है मूल में जाओ
02:30:41:27 भाई कैसे सिद्ध करोगे बिना इतिहास के मूल में जाओ सत्य नहीं हो सकते मूल में जाओ जब जाकिर नायक चिल्लाएगा श्रता सूत्रपनिषद का यह अर्थ है तुम उसको यह नहीं कह पाओगे नहीं ये अर्थ गलत है तुम उसको अपना पक्ष रख पाओगे निरुत्तर नहीं कर पाओगे निरुत्तर करने के लिए तुमको उनको परंपरा के पास आना पड़ेगा कि उसी का अर्थ माना जाएगा जिससे वेद आए हैं 13 नहीं उस दिन के लिए सुरक्षित करके चलना पड़ेगा हमें परंपरा को जिस दिन विधर्मी से लड़ाई होगी इसीलिए मैं ये सवाल पूछता हूं सबसे यही सवाल इसीलिए पूछता हूं मुझे तैयारी मेरी विधर्मी से है तुम लोगों से जितना मेरी तैयारी नहीं है मुझे वहां जितनातना है इसलिए अपने इस हथियार को बचा के रखना होगा संभाल के रखना होगा और उस हथियार को मैं बचा के रखे हुए हूं रखे रहूंगा क्योंकि अनादि हथियार हंसी तो इस बात पे आती है कि भगवत आनंद भी इनके आगे अच्छा लगता है कभी कबार वो भी दो बार तर्क की बात कर जाता है। शर्म की बात है ये बिल्कुल हमें मेरे को पता है मैं देख रहा था विदेश गमन वाली बात भगवतानंद की वीडियो आएगी विदेश गमन भूल के ही मत करना निगराचार्य इनसे अच्छी बात कैसे कर जा रहा है मैं तो ये सोच रहा था बैठ के आपको निग्राचार्य नहीं भगवत आनंद हां भगवत आनंद आपको एक बात निग्राचार्य केवल ईश्वर ही हो सकते हैं।
02:31:57:18 और यह जो विशुद्ध सत्यार्थ प्रकाश आ चुकी है। अब अच्छा विशुद्ध मनुस्मृति डॉक्टर सुरेंद्र कुमार की पढ़ेंगे लेकिन विशुद्ध सत्यार्थ प्रकाश नहीं सामने आने देंगे। क्यों? क्योंकि इनकी जो अभी की सत्यार्थ प्रकाश है उससे उनसे विरोध हो रहा है। तो भैया ने नया ट्रेंड चलाया कि बोरी की महाभारत पढ़ेंगे। बाकी महाभारत नकली है। बोरी की महाभारत पढ़ेंगे। हां बाकी महाभारत नकली है। जो परंपरा प्राप्त आचार्यों से ज्ञान आया वो नकली है और उसको ऑथेंटिकेट कौन कर रहे हैं? जो रिसर्च कर रहे हैं जो आज के इतिहासकार बने हुए हैं वो रिसर्च करके जो बताएंगे वो इनका वो सत्य है रिसर्च 5000 साल पहले हमें मिल गया वो सत्य है। अब बोरी की पता है दिक्कत क्या है? बोरी ने जितनी मैनुस्क्रिप्ट थी। अब इनको ये बात थोड़ी मालूम है रिसर्च कल्प भेद क्या है? अलग-अलग जो टीके हैं वो क्या है? इन्होंने जितनी स्क्रिप्ट थी लोकथाएं वगैरह सब जोड़ के एक क्रिटिकल एडिशन निकाल दिया। रामायण भी कितने प्रकार की है? अलग-अलग प्रकार की रामायण है। अद्भुत अद्भुत है, आध्यात्म है, वाल्मीकि है, रामचरितमानस है। अब ऐसा थोड़ी होगा कि आज से कुछ 100 साल बाद मैं चारों पांचों मैनुस्क्रिप्ट उठाऊंगा। एक नई रामायण क्रिटिकल एडिशन निकाल दूंगा। अच्छा ये ये एक ऐसी बात है कि जैसे सामने वाले से अगर सामने वाले को परेशान करना है तो अपना कोई भी सिद्धांत मत बताओ।
02:33:13:10 सिद्धांत बताओ। मतलब अपनी लाइन मत खींचो क्योंकि लाइन खींच दोगे तुम्हें वहां बाउंड होना पड़ेगा। तो एक जैसे कमेंट आता है ना बहुत सही कमेंट है ये कि भाई हमारा एक ही सिद्धांत है। हमारा कोई सिद्धांत नहीं है। इसलिए तुम हमें तो बाउंड कर नहीं पाओगे। हमें तो बाउंड कर नहीं पाओगे तुम। तो खैर बहुत अच्छी चर्चा रही। बहुत बढ़िया रहा। और अगर अनिकेत जी आप कुछ बोलेंगे तो आप बोले और फिर क्रमश शास्त्रवाद जी आप ले ले और उसके बाद फिर हम इसको लाइव को पूरा करेंगे। जी
02:33:46:16 जय श्री राम सभी को जय श्री राम जय श्री राम जी तो मैं तो यही कहना चाहूंगा कि देखिए पूर्व में देखा गया है इतिहास है कि असत्य असत्य के साथ जाकर के दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। जब उसको मिलकर दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है वाले फिलोसोफी में जाता है तो उसका कैसे अंत हुआ है आपस में लड़मड़ के विनाश हुआ है यह भी दिखा है तो ये फिलॉसफी दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है इसका कोई लॉजिक नहीं है पहला दूसरी चीज है कि धर्म की बात करना धर्म के अपोजिट अधर्म ही होता है तो अगर हम रामायण में देखें तो रावण किस तरह की शब्दावली भगवान रामचंद्र जी पर बोलता ता था और भगवान रामचंद्र जी ने उसका प्रति उत्तर कभी भी अभद्रता से नहीं दिया। इसीलिए जो धर्म पर रहता है ना वह कभी भी अभद्रता से कभी भी रिप्लाई नहीं देता है। क्यों? क्योंकि वो धर्म पर है जिसका प्रमाण रामचंद्र जी भी है। अभद्रता वही दिखाता है जो राक्षस प्रवृत्ति का होता है और जो जिसको जिसने ज्यादातर धर्म में भी अधर्म ढूंढने का
02:35:01:18 प्रयास किया है। तो हालांकि जो जिस तरह से पिछली बार बात किया था वो जो माता जी आई थी शिवानी भैया के साथ में मक्कारी और इत्यादि जो शब्द उन्होंने यूज़ किया था। मैं तो सराहना करूंगा शिवा भैया का कि बहुत बढ़िया करते हैं कि वहां से हट जाते हैं। ठीक है? क्योंकि जहां भी मैंने देखा है रामायण पढ़ा भी है तो उसमें रामचंद्र जी ने भी यही किया है। मर्यादा नहीं तोड़ी है और सिखाया भी यही है। तो मोटा-मोटा यही बोलूंगा कि धर्म जो है वो यही है कि अभद्रता नहीं सिखाता। किसी भी हाल में मर्यादा नहीं ढूंढनी चाहिए।
02:35:41:15 अच्छा अभी अच्छी चीज याद आ गई जय श्री राम एक अच्छी चीज आपकी वैसे याद आ गई वो कहती है वो एक शब्द यूज़ करती हैं कुछ पटने अटने इत्यादि को लेकर के ये शब्द जो है अश्लील नहीं है ये कहती है इसका मतलब डरपोक होता है जबकि ये अपने आप में एक अश्लील शब्द है हां अपने आप में अश्लील शब्द है आप इसका जो प्रयोग कर रहे हैं इसका जो सर्वविदित जो व्याख्या है वो कुछ और है अश्लीलता है उसमें और दूसरी बात यदि ऐसा है तो आप इसको दिखाइए कहां पर जो है प्रमाणिक रूप से अब जैसे कोई जो शब्द है वो प्रचलित हो गया और प्रचलित होने के कारण किसी ने उसको अपनी बुक में छाप भी दिया कि लो भाई डरपोक कहा जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि वो प्रामाणिक लोगों के द्वारा स्वीकार्य शब्द हो गया डरपोक के लिए। वो अपने आप में एक अश्लील और लीचड़ है ना जो चिचले लोग होते हैं ना टपोरी टाइप के उनके द्वारा उठाया गया शब्द है कि डरपोक के लिए ये शब्द उठा लो ठीक है तो आप उसको जस्टिफाई कर रहे हैं कि उनको जो है शब्द का मतलब भी गलत आता है ये है वो है तो उसको जस्टिफाई आप नहीं कर पाएंगी उस पे भी जब बात होगी तो खत्म हो जाएगा मामला इसको कहते हैं सिद्ध क्लियर बातें होती है हमारी बातें बदलती नहीं है ये हम ये सब
02:36:56:19 नहीं होता हमारा सीधी बात नो बकवास स्प्रेड नहीं पीते मगर यही है जी शास्त्रवाद जी एक चीज एक चीज खाली छोटी सी बोलना एक छोटी सी कि भविष्य में हो सकता है कि हमें यह भी देखने मिल जाए कि फलाने किसी ने परंपरागत किसी व्यक्ति को शास्त्रार्थ में अंत में हराया कैसे फट रहे फूट रहे निकल रहे इन शब्दों से हां अच्छा कुछ लोग मुझसे इतना सब होने के बाद भी कह रहे हैं कि तुम वहां से आए क्यों भाई तो क्या करूं वहां पे और स्तर उनका बढ़ने दूं फिर वो जब ये सोच ले इसने मेरा मक्कार शब्द सुन लिया तो अब ये भी सुन लेगा और मेरे से कहा ना जाए कुछ मैं सुन के चला हूं फिर या तो अगले दिन मैं वो सब करूं भैया रिपोर्ट लिखा ये करो वो जो भी प्रतिकार कर सकते हो अपनी सीमा में सामर्थ्य की तो ये तो ये बात आ गई ठीक है मक्कारी वाली फिर वो मक्कारी वाली बात को फिर सब लोग ब्रह्मास्त्र मान ले कहीं डिबेट या फिर डिस्कशन जितना है तो मक्कारी बोल दो हम जीत जाएंगे। अपनी गलती नहीं जी एक और एक और तरीका है। एक और तरीका है। एक और तरीका है जैसे वो कि आपको पंचाव आता है। एक और
02:38:11:22 तरीका है कि आपने अष्टाध्याय पढ़ी है कि नहीं पढ़ी है? ये भी है तरीका। ठीक है? आए थे सर्वशक्तिमान प्राप्त करने ईश्वर को। फिर व्याकरण का ज्ञान लेने लगे। तुमको है कि नहीं या न्याय का ज्ञान तुमको है कि नहीं? ये सब होने लगा या फिर तुमने मैथमेटिक्स पढ़ी अच्छा तुम्हारे गुरुदेव ने तुम्हारे बीच में मैथमेटिक्स भी आई थी एक जगह मैं मैथमेटिक्स भी आई थी बीच में एक जगह हालांकि बाद में हालांकि बाद में हालांकि बाद में निर्भय ने दूसरा अपना चीज बताई कि मैं एक पर्सपेक्टिव लेके आया था वो बोला था मुझको निर्भय ने हुआ क्या भैया मेरी आदत पड़ गई है क्योंकि इतने वो इस्लाम वालों से और इतना ज्यादा तो एक पहले से ही एक बना के जाता हूं तो मैं आपके पास भी वही लेके आया आपकी उस चीज को देख नहीं पाया कि आप न्यूट्रल थे मुझे लेकर के उसने ये सब बताया मुझे तो ठीक है शास्त्रवाद जी आप कुछ बोले नहीं तो फिर हम इसका समापन करते हैं आज की चर्चा का मुझे लगता है काफी कुछ जानने सीखने को मिला हो लोगों को जी जी बस यही था कि उसने तो अपने आप को से जोड़ लिया परंपरा से फीमेल करके उनको ज्ञान मिला था उसको कुछ बोल दीजिए फीमेल करके तो ज्ञान आया शिव जी का उनको ये सब बकवास बातें होती है जो अकारण बोली जाती
02:39:26:26 है सही नहीं है और गुरु परंपरा तो बहुत आवश्यक है ही ज्ञान के लिए सभी जानते हैं और एक और बात भैया जब आप अवतारवाद पे आर्य समाज के विषय में बोल रहे थे कि एक होने का जो सिद्धांत था आवाज नहीं आ रही आपकी शास्त्रवाद जी हां भैया तो वही जो एक ऋषि की जो बोलते हैं ना तो मैं पूछता हूं गीता में भगवान ने कहा है कि जो ईश्वर है वो सभी प्राणियों के हृदय में निवास करता है। ठीक है? अब बताइए जो सभी प्राणियों के हृदय में निवास करता है वो एक देसी नहीं हो गया क्या उस स्थिति में? यदि वो एक देसी होते हुए भी सर्वजाती है तो फिर उसका सर्वजता नष्ट नहीं होता है तो फिर अवतार लेने का कैसे नष्ट हो जाएगा सर्वजाती का? अरे वो आर्य समाजियों में भी अभी आपकी गीता को तो मना कर भी सकते हैं। मैं आर्य समाज की बात बता दूं कि वो जो अमुक अमुक ऋषियों के अंतकरण में उन्होंने जो हृदय में वो बात डाली तो वो एकदेशी होके ही तो डाली। कैसे डाल दी? अरे भाई कहीं पे अगर कुछ भी क्रिया की है ना ईश्वर ने एकदशी होके ही की है। समझ लो पहले इसको जाकर ये सिद्धांत पढ़ लो अपना जाके। खैर ठीक है। बहुत
02:40:42:00 बढ़िया चर्चा हुई। काफी कुछ जानने वाला। कभी-कभी बीच-बीच में ऐसी चर्चा हो जानी चाहिए। भाई हमेशा मुझे वॉर का वॉर का ही एक्सपीरियंस लगा रहता है। तो मैं अपना पर्सनल जो मेरा वो है ना वो बहुत होता है। क्या कहते हैं क्योंकि हमेशा वो वॉर जैसी फीलिंग्स ही आती है। तो ऐसी हेल्दी डिस्कशन भी हो जानी चाहिए। और अंत में मैं वही कहूंगा कि क्या नाम है उनका? मैं तो नाम भूल गया। सोनाली जी अवेकनिंग भारती भारत जी कि आप नास्तिकता का खंडन करते हुए ईश्वर की सिद्धि करते हुए मोक्ष की सिद्धि करते हुए और शाश्वत धर्म की सिद्धि करते हुए पूरा जगत ढूंढ लेना अंत में जब कोई ना मिले ना तो शंकर संप्रदाय के द्वारे पे आ जाना मिल जाएगा इन सब तात्विक विवेचनाओं में जाइए ठीक है ठीक जय हो और किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त हमारा नंबर 7408301869 है। आप उस वहां पर WhatsApp करके फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं और अपनी चीजों को हमें बता सकते हैं कि आपको इस विषय के निमित वैचारिक चर्चा करनी है। केवल WhatsApp करिए। कॉल वगैरह मत किया करिए। खामखा का वो होता है टाइम वेस्ट। ठीक है। सभी को जय श्री राम। जुड़ने के लिए आप सबका बहुत-बहुत आभार।
02:41:57:20 आपका भी धन्यवाद रहेगा। आपने बुलाया लाइव पे तो नहीं। अच्छा एक बात मैं आपको कहूंगा। कि मुझे ऐसी सूचनाएं प्राप्त हुई कि आपके चैनल पर भी कुछ ऐसी सामग्री है कुछ वर्तनी इत्यादि को लेकर के तो अगर उसको हटा सकते हैं तो हटा दीजिए और आगे बढ़िए धर्म के पथ पे आगे बढ़िए दो साल तीन साल पहले जब मेरे को भ्रांतियां थी तब मैंने जरूर डाली थी अब अकाउंट मेरे हाथ में भी नहीं है कम से कम कम से कम हमारी कम से कम हमारी वर्तनी ऐसी हो जो आदर्श बन सके किसी के लिए तो उस ओर जाइए और हम सब भी आपका साथ आपके के साथ है। अपने को अकेला ना समझे और इस अगर ऐसी कोई त्रुटि है तो उसको सुधार लीजिए। सब में होती है त्रुटि मेरे में भी थी। तो अगर ऐसा कुछ है ऊपर नीचे तो उसको सुधार के आगे बढ़िए धर्म के पथ पर। आप आप अच्छा लगा आप आए। इतना समय यहां पे दिया आपने। जय श्री राम सभी को। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम।
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