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00:00:02:07 तो जय श्री राम सभी को। आज की बहुत ही महत्वपूर्ण चर्चा होने वाली है। अ अनिकेत जी हैं हमारे साथ। जो कुछ ऐसे क्वेश्चन आते हैं कमेंट्स के माध्यम से जो रेलेवेंट होते हैं और जिनका उत्तर देना चाहिए पर समय के अभाव के कारण उत्तर देना वहां संभव नहीं होता है। लिख लिख करके और निष्कर्ष पूर्व मार्ग तक भी नहीं पहुंचा जा सकता है। इसलिए कुछ जो महत्वपूर्ण प्रश्न हैं उनको एकत्रित करके अनिकेत जी यहां पर उपस्थित हैं हमारे बीच जिन्होंने थोड़ा सा अपनी तैयारी की है प्रश्नों को लेकर के तो उन्ही सब प्रश्नों पर अभी बात करने वाले हैं हम तो हम ले लेते हैं अंकित जी को पहले
00:01:01:13 जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम भैया मुझे आवाज कम आ रही है क्या आपकी? जय श्री राम। अभी आ रही है? नहीं आवाज नहीं आ रही है आपकी ठीक से। कोई और बात क्या बात? हां अंकित जी आप है यहां पर
00:01:51:01 अभी आ रही है आवाज हा अब परफेक्ट है तो जी को आप देख चुके है पहले एक बार चर्चा में आ चुके उनका कुछ शंका थी मोक्ष विषयक जो समाधान हुआ था उसके बाद से वो लगातार फॉलो भी करते हैं चैनल को और प्रेमानंद जी महाराज के शिष्य हैं मतलब उनके प्रति आस्था है अभी दीक्षा नहीं हुई है ना अंकित जी जी जी करेक्ट करेक्ट
00:02:26:00 ठीक है अंकित जी अब आप प्रारंभ करें ओके तो पिछले कई दिनों से जो वीडियो मैं आपका देख रहा हूं तो उसमें कमेंट सेक्शन में जाकर के इसके रिप्लाई देना थोड़ा संभव नहीं होता है शायद आपके लिए तो वो कुछ प्रश्न मैं आपके समक्ष आपका थोड़ा सा वो फोटो है ना वो रुक रुक रुक के काम कर रहा है आपका नेट शायद गड़बड़ है थोड़ा नेट गड़बड़ है एक मिनट
00:03:12:09 अभी भी आ रहा है। लीव हो वापस आओ। हां लीव होके वापस आ जाइए। जानकारी के लिए बता दें एक गौ माता के निमित्त एक अभियान चल रहा है। उसकी जानकारी जल्दी ही निर्गत की जाएगी चैनल के माध्यम से। उससे आप लोग सभी जुड़े।
00:03:47:15 ऐसी ऐसा निवेदन है हमारा और नाम जप के सत्र चल रहे हैं बहुत अच्छे से मातृ शक्तियों के लिए अलग से भी चल रहे हैं तो आप नाम जप से जुड़ सकते हैं। कई बार लोगों का प्रश्न होता है कि आपका सहयोग कैसे करें? तो सबसे पहली आवश्यकता होती है कि आप दिन भर में सवा घंटे की भक्ति कर रहे हो तभी हम आपके और आप हमारे योग्य सिद्ध होंगे। तो अगर किसी का भी मन है धर्म युद्ध में सहायता करने का सहयोग करने का तो सबसे पहले ईश्वर का बल सवा घंटे की जो भक्ति है उसका बल एकत्रित करना शुरू करें। उसके बाद फिर आगे के स्टेप्स हैं। और इसके साथ ही साथ किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त हमने अपने दरवाजे बंद नहीं कर रखे। हम तैयार है चीजों का निस्तारण करने के लिए यदि कोई विरोध है तो आप मुझे मेरी आवाज अब रिपीट सुनाई दे रही है अंकित जी
00:04:55:10 वीडियो अभी भी अटक रहा है मेरे ख्याल से ना अटक रहा है क्या दिक्कत हो सकता है दिक्कत आप फोन से कर रहे हैं क्या हां मोबाइल से है तो मुझे लग रहा है उसमें स्पेस मेमोरी ज्यादा हो गई तो इसलिए अब वो उसका हो गया। अटक रहा है क्या? कैमरा बंद करके पूछूं क्या? आवाज तो आ रही है ना? हां कैमरा बंद कर लीजिए। ठीक है। तो ऐसा करिए ना पूरे उसमें मेरा आवाज तो आएगी मेरे ख्याल से। छोटा सा कर
00:05:33:06 ऐसा हो जाएगा क्या ये बात? ले आउट हां तो आवाज क्लियर है ना आवाज और वैचारिक मैं कुछ बता रहा था वैचारिक मतभेद के निमित्त जो है YouTube लाइव स्ट्रीम पर आने के लिए आप वीडियो के अंत में एक मोबाइल नंबर आता है स्क्रीन पर वहां पर आप WhatsApp करेंगे तो आप जो है फॉर्म भर के अपनी कुछ बेसिक सी जानकारी हमें देते हुए उसमें फोटो और नाम की आवश्यकता होती है और फिर किस संस्था या तंत्र के पक्ष को आप प्रस्तुत करना चाहते हैं। तो
00:06:24:00 तो ये जो है आप कर सकते हैं। इसके अलावा जो हम आहान के सेशंस भी चल रहे हैं जो बेसिक इंफॉर्मेशन आवश्यक है जो हर हिंदू को जानने के लिए उसको हम प्रोवाइड करा रहे हैं आान के सेशंस के द्वारा और उसके बाद फिर आपका सफर चालू होता है प्रामाणिक आचार्यों के सानिध्य में ज्ञान विज्ञान जो वैदिक है उसको प्राप्त करने का जी बोलिए एक बार आप नेट ऑफ करके ऑन करके देख लीजिए शायद ठीक हो जाए।
00:07:14:24 नहीं काम नहीं कर रहा है। वही आ रहा है मेरे ख्याल से वही प्रॉब्लम होगा जो आपने बताया था ना। ठीक है। अभी आप प्रश्न जो है बोल करके अपनी बातें सिद्ध करके और फिर चले जाते हैं। अभी आप अपने को जिताने अभी आपकी आवाज अभी आप बात शुरू से शुरू करिए। अभी आपकी आवाज कट गई थी। अच्छा अभी मेरी आवाज क्लियर है ना? जी तो पहला प्रश्न तो ये है कि जब आप किसी को लाइव बुलाते हैं या फिर कोई लाइव आता है आप बुलाते नहीं। हालांकि जब कोई आता है तो जब लाइव करते हैं उसके बाद बहुत सी जगह पर कमेंट देखने मिलता है कि आप अपनी बात रख
00:08:30:00 करके और अपनी बातें को सिद्ध करने का प्रयास करके दूसरे को बोलने का मौका नहीं देते और जब वो बोलना चाहता है तो उसको रिमूव कर देते हैं। दूसरे को बोलने नहीं देते और उसको रिमूव कर देते हैं। हां और अपनी बात सिद्ध करने के लिए अपनी बात बोल करके उसको रिमूव कर देते हैं। यह प्रश्न है। इसका उदाहरण दे तो मैं समझ पाऊं। वैसे क्या होता है? मैं बता देता हूं आपको। जैसे कोई व्यक्ति मान लीजिए अटक रहा है। जैसे अभी एक लास्ट टाइम बात हुई थी भागवतानंद की ओर से कोई आए थे वो अचुत नाम था उनका। तो वो आ के मैंने उनसे पूछा भागवतानंद की परंपरा क्या है? तो वो मुझसे ये सवाल करने लगा कि आप जो है रामानुजाचार्य जी को प्रमाण क्यों मानते हो या आपने उनको प्रामाणिक क्यों कहा है? अमुक अमुक इतने अंशों में वो प्रामाणिक नहीं है या जो भी है वो ऐसे बोलने लगा तो इसमें बात ये आती है भाई अंगूर वाली बात सबसे पहली बात तो भागवतानंद का वो वीडियो देखना चाहिए जिसमें भागवतानंद स्वयं बता रहे हैं कोई मतानुज्ञानिक गृहस्थान करके एक दोष आता है कि भाई मेरे गलत होने से आपका सही होना सिद्ध नहीं होता
00:09:45:22 आपके पास अपने लिए स्वतंत्र व्याख्या क्या है जैसे कि एक बार आर्य समाज ने हमसे पूछा कि सुखदेव नहीं आर्य समाज आर्य समाजियों का एक बार एक आरोप था कि जो गॉड पादाचार्य थे वो कुछ उन्होंने आरोप लगाया था राक्षस इत्यादि ऐसे करके कुछ सिद्ध करने का प्रयास किया था। ठीक है? तो हमने उसमें जवाब देते समय उनके ग्रंथों में उनके आगे कोई
00:10:19:03 विद्वान है उनके यहां के तो उन्होंने माना था कि जो गॉड पादाचार्य थे वो राक्षस नहीं थे। उन्होंने अपने ग्रंथ में माना था। तो हमने अपनी व्याख्या देते हुए उनकी बात को भी वहां पर क्लेम किया था कि भाई देखो तुम्हारी भी जिसको तुम विद्वान मानते हो उसको भी जो है उसने भी माना है जो तुम कह रहे हो वो उसके भी विरुद्ध है जिसको तुम विद्वान मानते हो जिसको तुम प्रमाण मानते हो तो जब ऐसा हुआ तो उसने एक आरोप लगाया कि भाई अगर उनको मानना है जो हमारे विद्वान है उनको मानना है तो वो तो यह भी कह रहे हैं कि मूर्ति पूजा गलत है तो फिर आप उनको को पूरा क्यों नहीं मान रहे? मतलब उनका प्रमाण क्यों दे रहे हो? तो हमने उनको बताया कि हम उनका प्रमाण आपको तब दे रहे हैं जब हमारे पास अपनी स्वतंत्र व्याख्या है। हमें गॉड पादाचार्य जी को राक्षस ना मानने के लिए आपके विद्वान की आवश्यकता नहीं है। हमारे पास पर्याप्त चीजें हैं। जैसे उसने जो भी चीजें दी गई थी उसको हमने अपने शास्त्रों से परंपरा प्राप्त शास्त्रों से उसका निस्तारण करके अंत में बोला था। तो हमारे पास अपनी स्वतंत्र व्याख्या है। उसके बाद हमने तुम्हारी संतुष्टि के लिए जैसे टॉपअप होता है ना टॉपअप कि ऊपर से एक चीज और डाल दी। उस टॉपअप के रूप में ऐसा नहीं है कि वो टॉपअप
00:11:34:04 नहीं है तो हमारा बेस है ही नहीं हमारे पास। उस रूप में हमने आपका उदाहरण आपको दे दिया कि भाई ये इतनी इतनी चीज तो तुम भी मानते हो। तो तुम अपने इसके अगेंस्ट कैसे जा सकते हो? ठीक है? तो ये हमने निस्तारण दिया। अब वो व्यक्ति जो भागवतानंद की ओर से आ रहा है, उसके पास अपनी चीजें बताने के लिए कुछ नहीं है की भाई मेरे मेरे भागवत आनंद के पास भागवतानंद के पास पारंपरिक ज्ञान कैसे आया अच्छा अगर सपने द्वारा आया या किसी भी दिव्य घटना के द्वारा आया तो उस दिव्य घटना को सत्यापित किसने किया क्योंकि ये जो चमत्कारिक घटनाएं हैं ये तो बुरी शक्तियां भी दिखा सकती हैं आपको। तो आप सत्यापित कैसे कर रहे हो? अच्छा अगर आप स्वयं को ही स्वयंभू बोल दो कि भाई मैं ही हूं। मेरी बात पर भरोसा है तो करो। या तो यही कहा हो आपने तो फिर जो आपको देखेगा कि आप आप तो पुरुष हो तो जिसको आपके ऊपर श्रद्धा रखनी होगी वो रखेगा। जिसको नहीं रखनी होगी वो नहीं रखेगा। जैसे मोहम्मद ने कह दिया कि मैं ही हूं। हम जिसको रखनी होगी वो रखेगा। नहीं रखनी होगी नहीं रखेगा। ब्रह्मा कुमारी वालों ने कह दिया कि मैं ही हूं। सत्यापन कराने कहीं नहीं जा रहे वो किसी मैं ही हूं। ब्रह्मा जी आ रहे हैं रोज बॉडी में तो मैं ही हूं जिसको आस्था रखनी होगी रखेगा नहीं रखनी होगी नहीं रखेगा तो पहली बात तो
00:12:49:10 यह घोषित नहीं किया अब घोषित किया तो आस्था रखने के लायक है कि नहीं वो भी एक बात आ जाती है उसके बाद यहां पर क्या है कि उसने घोषित नहीं ना नहीं किया वो तो एक अलग बात हो गई बल्कि उसने उन लोगों से स्वयं को सत्यापित करने का धोखा किया है जिनका धर्म ब्रह्म शंकराचार्य से आता है ये सोने पे सुहागा हो गया भाई उपनिषदों का कौन सा भाष्य निगमंद ने पढ़ा और पढ़ाया शंकर भाष्य तो धर्म ब्रह्म के मामले में आदि शंकराचार्य जी की परंपरा प्रमाण हो गई सत्यापन कराने क्योंकि वहां गए तो ये सारे क्वेश्चन थे तो इनके बारे में कोई जवाब ना देकर के वो ये बोल रहा है कि आप रामानुजाचार्य जी को प्रमाणिक क्यों मानते हो वो क्यों मानते हो तो मेरा कहना उसमें यह है कि भाई अगर तुम्हें मेरे उदाहरण से अपना अपने उसको महल को खड़ा करना है। करो। पहले घोषित करो कि तुम्हारे उदाहरण के बिना मेरे पास कुछ नहीं बोलने के लिए। पहले घोषित कर दो फिर आगे बढ़ो। फिर मैं तुम्हें उसमें क्वेश्चन का आंसर दूंगा कि हमने रामानुजाचार्य जी को क्यों मान लिया या कितने अंशों में माना? कितने अंशों में नहीं माना। ये सब बातें मैं आपको तब जवाब दूंगा। पहले आप घोषित करो। ये
00:14:04:16 टैगलाइन लिखो कि हमारे पास स्वतंत्र व्याख्या नहीं है। ठीक है? तो जब वो व्यक्ति ये घोषित किए बिना विषयंतर कर रहा है कि आपने रामानुजाचार्य जी को क्यों माना? अब रामानुजाचार्य जी को हम सिद्ध करने जाए या कुछ भी वहां पर करने जाए उसमें एक बात और खुलती चली जाएगी जो ये वाली बात थी कि निग्रह संप्रदाय की प्रामाणिकता ये तो कहीं खो के रह जाएगी। घंटों उसमें हम आगे बढ़ते चले जाएंगे। प्रश्न पूछा ये गया कि भागवत प्रामाणिक कैसे है? तो आपकी जो व्याख्या है वो आप पहले हमें बताओ। स्वतंत्र व्याख्या क्या है? उसमें क्या दावा है आपका? अगर आपके पास दिव्य घटना से आया है तो उसका सत्यापन किससे कराया? खुद से सत्यापन नहीं कराना मानते हो तो तुमने तो माना है। जिससे मानते हो उस पर तुम्हें पूरा भरोसा नहीं है। निग्रह की दृष्टि फिर तुम रखते ही हो तो फिर वो तुम्हारा प्रमाण नहीं हुआ। शब्द प्रमाण बहुत सारी चीजें उसमें आगे लग जाती। तो जब व्यक्ति इस तरह से विषयंतर करने की कोशिश करता है। बिना अपना क्लेम बताए। मैं यह क्लेम कर रहा हूं। अपना क्लेम करो। घोषणा करो। यह मेरा दावा है। अब मैं इसको प्रस्तुत करने जा रहा हूं। मैं आपके उदाहरण के आधार पर ही मैं भागवत आनंद को भागवत आनंद को निग्रह परंपरा को प्रामाणिक सिद्ध करता हूं। कर सकता हूं। मेरे पास स्वतंत्र व्याख्या नहीं। तो जब
00:15:19:20 इस रूप में विषयंतर करने का प्रयास किया जाता है तो मैं उसको विषय करने से रोकता हूं कि टू द पॉइंट जो चर्चा चल रही है वहीं पर है। पहली बात। दूसरी बात ये है कि रिमूव कर देना। रिमूव कब होता है? जैसे स्कॉन वगैरह जैसे परेशान आत्माएं आती है। स्कन के फॉलोवरर्स आ जाते हैं। रामपाल के फॉलोअर्स आ जाते हैं या फिर और कोई आ जाता है तो जब उनके पास यह जो सिस्टमेटिकली कोई जवाब नहीं रह जाता है, तर्क नहीं रह जाता है, प्रमाण नहीं रह जाता है तब वो क्या करने लगते हैं कि तुम मायावादी हो, तुम ये हो, तुम वो हो, कुछ पर्सनल अटैक करने लगेंगे जिसके पीछे उनका कोई बेस नहीं होगा। ऐसे अटैक्स वो करने लगेंगे। तो मैं उन अटैक्स को यहां लेने के लिए थोड़ी ना बुलाया मैंने उसको। तब मैं रिमूव कर देता हूं। जब वो इस तरह की बातें कर रहा होता है। जैसे कि हमारे बीच में था कि ईश्वर अवतार ले सकता है कि नहीं ले सकता है? कैसे ले सकता है? तो जब मुझे ऐसा लगा कि वो इस चीज में आ रहा है कि भाई शिवश नारायण द्विवेदी को कौन से शास्त्र कितना कितना पता है? वहां पर जो ट्रैक है वो बदल रहा है। तो मैंने वहां पर हटाया और वो ठीक है ना? तो विषयांतर के कारण आप सामने वाले को जो है वो हटा
00:16:34:21 देते हो या फिर वो व्यर्थ शिकायत करता है। टोकता हूं। विषयंतर के कारण मैं टोकता हूं और जब वो जब वो चर्चा से हटकर के पर्सनल टैक्स, पर्सनल क्लेम्स इन सब चीजों पर आता है तो मैं तो उसको जवाब दे नहीं सकता। वैसे के वैसे तो उनको सुनने की बजाय मैं हटा देता हूं। और ऐसा भी नहीं है बहुत सारी चर्चाएं पूरी पूरी हुई है। ऐसा भी नहीं है बहुत सारी चर्चाएं तो पूरी पूरी हुई है। व्यक्ति भागा है खुद छोड़ के तो उसको यही कैसे माना जाए कि हटाता ही हूं। खुद भी गायब हो गया। एकदम से रामपाल के ना जाने कितने लोग अचानक से गायब हो गए। आर्य समाज का व्यक्ति आया था अभी कुछ दिन पहले। आर्य समाज का व्यक्ति आया था कुछ दिन पहले। वो वो चला गया। वो भाग गया। हम आर्य समाज का व्यक्ति आया। उसने बोला कि मैं जो है लेके आऊंगा किसी और को। आज तक नहीं आया। कई कई अलंकारी ऐसे हैं जिन्होंने फॉर्म तो भरा जब मैंने उनको संपर्क किया तो बोला अरे छोड़ो जाने दो उनको समझ में आ गया मत पड़ो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में हां नहीं तो एक वीडियो मैंने देखा था भव्य राधिका दास वाला उसमें आप तीन चार घंटे तकरीबन ले लिए थे तो यह नहीं है मतलब इससे अभी समझ में आ गया हमें कि अगर
00:17:50:02 कोई व्यर्थ की बात करेगा तो इतना समय भी नहीं होता है व्यक्ति के पास कि वो आगे आगे बढ़ाते हुए। खैर आशा करता हूं कि इससे लोगों को समझ आ गया होगा कि शिवश जी हटाते नहीं है और अगर हटाते हैं तो उसका कारण भी बता दिया उन्होंने। कोई नहीं अच्छी बात है। एक और होता है शिवश भाई देखते हैं हम लोग। कई कमेंट में आर्य समाजी और रामपाल एंड टीम ऐसे कुछ लोग हैं जो आपके कुछ वीडियो में और फिर कमेंट में जाते हैं और वेदों का मंत्र और उसका ट्रांसलेशन डाल के बोलते हैं कि देखो सिद्ध कर दिया सिद्ध कर दिया और जब उनको ये कहा जाता है कि लाइव आ जाओ लाइव आ जाओ तो कहते हैं कि सिद्ध कर दिया तो फिर लाइव आने की क्या जरूरत है हम तो उन उन लोगों को आप क्या कहना चाहोगे जो कहते हैं कि सिद्ध कर सिद्ध कर दिया क्योंकि केवल इतने से तो नहीं चल पाएगा ना कि मामा आ गए मामा आ गए ठीक है मेरी लाल के असीन सपने देखने का सबको अधिकार है देखते रह
00:18:55:27 तो वो जो मंत्र डाल देते हैं उससे कई सनातनी ऐसे हैं शिवाजी भाई जो भ्रमित हो के कहते हैं हां हां यार सिद्ध तो कर दिया देखो देखो संस्कृत में है उसका अनुवाद भी है और लिखा भी है जैसे वो रामपालियों का होता है कवि कवि अरे कवि आ का विवेक इतना कम है। यदि लोगों का विवेक इतना कम है कि व्यक्ति जो दावा कर रहा है वह कह रहा है कि भाई अगर तुम्हें इस दावे से कोई असंतुष्टि है विपरीतार्थक बातें हैं तुम्हारे पास तो आप सामने आमने सामने बैठकर के आकर चर्चा कर लो। परंतु वहां पर लोग जो है आमने सामने चर्चा ना करके वहीं पर कारब टारगेट खेल के और जो है वही के व सिद्ध करके जा रहे हैं और ऐसे मूर्ख लोग जो वहां एक तरफ पक्ष सुन के वहीं पर निर्णय ले रहे हैं तो उनका हम क्या कर सकते हैं? वो अपने ही पैरों कुल्हाड़ी मारेंगे। जुगनू
✅ This part is already used · 00:19:44:14 – 00:19:49:27 (0:05)
→ Used in: B · Video रामपाली यू ट्यूबर कैसे देते हैं अपने भगत भाइयों को चूरन at 7:46 ↗
→ Used in: A · Live क्या रामपाल अब भी कामवासना में फँसा हुआ है? पाखंडी का गीता ज्ञान भाग 10 अध्याय 5 at 9:13 ↗
00:19:44:14 और उल्लू सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित नहीं होते हैं। टिमटिमाते हुए दिए की
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00:19:49:27 आकर्षित होते हैं। तो जुगनू और उल्लू का सूर्य के प्रकाश की ओर आकर्षित ना होकर टिमटिमाते हुए दिए की ओर आकर्षित होने में जुगनू और उल्लू के असामर्थता का दोष है। सूर्य की सामर्थता का नहीं। तो निर्णय क्या हुआ? प्रकाश के विषय में जुगनू और उल्लू प्रमाण नहीं होते। समझा समझा तो जो लोग वहां पर कमेंट को देख के मान जा रहे हैं तो उनको हम क्या कहे? भोली जनता कहे सीधे साधे लोग कहे या मजा लेने आते हैं वो कहे क्या कहे? अब क्या कहेंगे उसमें? आप विवेक की कमी है जो इस तरह से निर्णय ले रहे हैं।
00:20:37:27 समझ गया समझ चौथा अगला ये है प्रश्न शिवा भाई कि इस आवाज नहीं आ रही लाइव जब आप करते हैं या इस से रिलेटेड कोई वीडियो डालते हैं हम उसमें क्या होता है कि उसमें आता है कि तो इतना अच्छा काम कर रहा है खाना खिला रहा है कई कई लोगों को कई लोगों को नाम जप करवा रहा है। कई लोगों का नशा छुड़वा रहा है। तो छोटी मोटी चीज तो कलयुग है। दाग तो लग जाता है। उन चीजों को लेकर के बड़ी-बड़ी चीजों को इग्नोर कर दे।
00:21:21:01 ये निर्णय कैसे हुआ? बड़ी चीज कौन सी है? अगर अच्छी चीजें करवा रहा है तो क्रिश्चियन मिशनरी भी अच्छी चीजें करवाती हैं। कोई मर रहा है उसका जो इलाज करवा दिया जाकर के देख के। फिर क्रिश्चियन मिशनरीज भी तुमसे भी अच्छा अच्छी हो गई। तुम जितना कर रहे होगे उससे 10 गुना ज्यादा वो कर रहे हैं कन्वर्शन कराने के लिए। हम जब आप जो मानवता के मूल सिद्धांत है सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म उसके साथ ही यदि खिलवाड़ कर दोगे तो सत ही स्तर पर आप लाख चीजें करते रहो। उसके मूल में तो मानवता का दुश्मन निकलेगा ना। लाख चीजें आप करते रहो। और अब बड़ी चीज की बात ही अगर हो रही कंपेरेटिवली कि वो अच्छी चीज कर रहे हैं तो हमने क्या हत्या कर दी? हमारे भी अच्छाइयों को देख लो ना। हमने भी कौन सा वो ऐसा कर दिया कि किसी का जो है नरसंहार कर दिया हो। स्पॉन में खड़ा करके बेंडेड क्वीन की तरह तड़ात गोलियां चला दी हो। अरे भैया जिस तरीके का वह कार्य कर रहे हैं और वह कुछ ऐसी चीजें कर रहे हैं जो प्रशंसनीय हैं उनके होते हुए वो
00:22:36:04 ऐसी चीजें कर रहे हैं जो जिनका गढ़ अर्थ मानवता का दुश्मन है मानवता का शत्रु है वैदिक धर्म का शत्रु है तो उतने अंश में उनको यदि हम अपनी मर्यादा में रहते हुए प्रतिकार कर रहे हैं तो उसको भी उसी दृष्टि से देखिए ना कि थोड़ा बहुत दोष तो सब में होता है तो ये वाला दोष स्वीकार कर लो आप जैसे आप अपना दोष स्वीकार करने की अपेक्षा कर रहे हो हमसे वैसे ही अगर यदि हमारा आपका दोष स्वीकार ना करना हमारा दोष दिख रहा है आपको तो उस दोष को आप भी तो स्वीकार कर लो बात खत्म हो गई महाभारत का सिद्धांत है कि अन्यों के साथ वैसा ही व्यवहार करें जो स्वयं के साथ होने पर आपको स्वीकार हो तो जो स्वयं के लिए अस्वीकार है उसको ना करना अन्यों के साथ ही धर्म तो जब आप मेरे दोष को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं तो मुझसे अपेक्षा क्यों कर रहे हैं कि मैं आपके दोष को स्वीकार कर लूं।
00:23:38:00 और मान लीजिए कि अगर कोई बिगिनर है इस की चीजों को देखकर के नाम जप कराते का ये नाम जप हो रहा है। यहां पर सनातन का प्रचार हो रहा है। करके बिगिनर अगर कोई जॉइ करता है तो आप क्या कहना चाहेंगे? जॉइ करना चाहिए या नहीं करना चाहिए? या उसका स्वतंत्र है वो जो चाहे वो करे आपके अकॉर्डिंग इस जैसी जितनी भी सनातन विरोधी संस्थाएं उनसे दूर रहो कृष्ण भक्ति करनी है तो परंपरा प्राप्त कई ऐसे ऐसी परंपराएं हैं ऐसे आचार्य हैं जो कृष्ण भक्ति करा रही है उनके सानिध्य में और जो है आप भक्ति करिए अगर आपको शंकराचार्य से जो है दिक्कत ही है स्कॉन का भरा हुआ आपके अंदर वो जो कीचड़ निकल नहीं पा रहा है शंकराचार्य से यदि है ही है कोई तो बहुत सी और भी प्रामाणिक परंपराएं हैं इस से दूरी बनाइए उन परंपराओं के सानिध्य में आके कृष्ण की भक्ति करिए
00:24:42:16 आपने अभी कहा कि इस जैसे जो सनातन का प्रचार नहीं कर रहे हैं तो फिर वो किसका प्रचार कर रहे हैं आपके अकॉर्डिंग सनातन विरुद्ध शक्तियों का, क्रिश्चियनिटी का, इस्लाम का भाई ईश्वर अल्लाह एक है। वेद को अक्षरस मानना नहीं है। हम ईश्वर अल्लाह एक है। वेद को अक्षरस मानना नहीं है। कुरान भी जो है वो जो है वो क्या कहते हैं? कुरान देने वाला मोहम्मद। ये सब ये प्रॉफेट थे। हम तो वो जो है सनातन विरुद्ध शक्तियों द्वारा पोषित जो भावनाएं हैं उनके लिए काम करने वाली दिखाई देती है। इस मामले में मैं आर्य समाज की अलंकार समाज की प्रशंसा करूंगा कि मैंने उनके यहां से कम से कम एक इसके लिए तो मैंने सद उनको कट्टर देखा कि वो कभी भी इस तरह से सामने से ये नहीं कहते कि कुरान भी बहुत बढ़िया है। कुरान में भी वही लिखा है। यद्यपि उनकी एक बात है जो इस में नहीं है। वो बात एक अलग है। मगर इस इस इतने अंश में
00:25:58:28 अलंकार जो अलंकारी है वो प्रशंसा के योग्य है कि नहीं है। वो इस्लाम वगैरह के लिए कभी सहिष्णता नहीं प्रकट करते हैं। हालांकि सिद्धांत ऐसे दिए हैं जो इस्लाम से ही आ जाते हैं। मूर्ति पूजा का विरोध निराकार वादिता ईश्वर का कोई स्वरूप नहीं है। हम हां तो ऐसे तो इस ये भी कहता है कि हमने जो आपका लाइव देखा है इस के साथ में उसमें कई जगह पर ये भी दिखने में आता है कि वो लोग कहना चाहते हैं ये कि पहले हम उनको इस्लामिक लोगों को यहां लाना चाहते हैं और यहां ला के उनको हम असली जो मूल है सनातन सिद्धांत वो दे देंगे। इसलिए हमको अल्लाह और ये सब का नाम लेना पड़ता है। तो यह मानेंगे कैसे? इस कौन ऐसा सोचता है? पता कैसे चलेगा? इस की ऑफिशियल सोच यही है ये पता कैसे चलेगा? ऐसा है सीधी बात है कि गुरु आचार्य सन्यासी विरक्त इनके जो लक्षण है उस पर घटित ही नहीं होता है। हम आप दो तरह की बातें यदि कर रहे हैं दोगलापन का व्यवहार कर रहे हैं तो आपकी वही
00:27:14:02 बात क्यों सही है जो अभी आप बोल रहे हो वो बात सही क्यों नहीं है जो आप बाद में बोल रहे हो इधर उधर बोल रहे हो भाई मुसलमानों मुसलमान यदि ये क्वेश्चन करेगा कि तुम गीता को क्यों मिलाते हो तुम कृष्ण को क्यों मिलाते हो तो मुसलमानों को भी तो ये चूर्ण दिया जाता होगा ऐसा नहीं माना जाए जैसे हमको यहां पर ये बहला फुसला रहे हैं कि हम तो उनको लाने के लिए कर रहे हैं तो वहां पर भी बहलाते फुसलाते होंगे मानते तो कुरान कोई है बस हम उनको को हिंदुओं को कन्वर्ट करने के लिए कर रहे हैं। ये कोई बात है क्या? आपका कहने का मतलब है क्लियर कर दो। जो है क्लियर कर मतलब ये है कि इसमें फिर बहुत सारी बातें हो जाती हैं। यदि वो मुसलमानों के लिए क्रिश्चियंस के लिए है तो वो बातें उन्हीं को सुनाई जाए। फिर हिंदू के कान में ना पड़े। ऐसा तो है नहीं। हां ये भी एक बात है। करेक्ट है। करेक्ट। दूसरी बहुत सी बातें हैं। फिर अगर ऐसा है तो फिर शिव की बुराई क्यों कर रहे हो? शिव की निंदा क्यों कर रहे हो? शिव से क्या आपत्ति है? जब तुम अल्लाह से तुम्हें कोई आपत्ति नहीं हो रही। अल्लाह से कोई आपत्ति नहीं हो रही है तो शिव से आपत्ति क्यों है? दूसरी बात जिन बुक्स में तुमने इस प्रकार के उद्देश्य की पूर्ति के लिए मिलावट की है उसको तुम सनातनी धर्म ग्रंथों से
00:28:29:06 अलग करो। कह रहे हो कि हम जो मिलावट भी कर रहे हैं उनको इसमें लाने के लिए और फिर यह भी कह रहे हो कि एज इट इज गीता है। मत कहो तुम अपने आप को धार्मिक संस्था कहने की बजाय तुम अपने आप को समाज सुधारक संस्था कहो ना। भाई आरएसएस वगैरह जो है ये क्लेम थोड़ी ना करती है कि हम धर्म के ज्ञाता हैं। तो ऐसे में वो धर्म के बारे में अगर कुछ बोल भी जाती तो उससे उतना प्रभाव नहीं पड़ता है। जितना प्रभाव स्वयं को धर्माधिकारी या धर्म धर्माचार के रूप में प्रकट करने वाला व्यक्ति जब वह बोलेगा बात तो उसके बोलने से इतना प्रभाव पड़ेगा।
00:29:11:03 ठीक है। इस का ही एक प्रचारक लगने वाला एक व्यक्ति है। क्या आप उनको जानते हैं? मैं नाम लूंगा। एक प्रश्न बार-बार आ रहा है। प्रेमानंद जी महाराज अमुक अमुक विषयों में गलत बोलते हैं। ऐसा कुछ प्रश्न आ रहा है। तो इन सब बातों के लिए एक ही बात है कि प्रेमानंद जी महाराज ने अपना धर्म के विषय में प्रमाण सर्वोच्च पद पर शंकराचार्य को स्वीकार किया है। तो वहां पर दिक्कत इसलिए नहीं है क्योंकि जब प्रेमानंद जी अपनी शरणागति धर्म के विषय में धर्म और अधर्म के विषय में कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में जब अपनी शरणागति शंकराचार्य की ओर उन्होंने दिखा दी तो उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कह दिया मेरी उतनी बातों को माना जाए जो शंकराचार्य के सम्मत हो और यदि शंकराचार्य के विपरीत मेरी बातें कोई जा रही है तो उन बातों का त्याग कर दिया जाए और ऐसे बहुत से हमारे सनातन का प्रचार करने वाले आचार्य गण है या धर्माचार्य या प्रचार चारक है जिनसे गलतियां हो रही है। परंतु क्योंकि वो किसी प्रमाणिक आचार्य को अपना प्रमाण बता रहे हैं तो हमें हमारे पास एक फिल्टर है कि इनकी कौन सी बात को मानना है, कौन सी को नहीं मानना है। तो जिस विषय में वो विपरीत जाते हुए देखेंगे उतने विषयों का। मगर जो व्यक्ति शंकराचार्य की प्रामाणिक आचार्य की
00:30:26:07 शरणागति प्राप्त किए बिना गलत बातें बोल देगा। होते हुए स्वयं को धर्माचार्य दिखाते हुए उससे उससे दिक्कत है ना प्रॉब्लम उससे हो गई तो बाकी वो गलत अगर कहीं-क पर कोई कोई अगर कोई भी अमुक आचार्य गलत बोल भी रहा है तो समय आने पर समय मिलने पर आवश्यकता अनुसार और वातावरण के अनुसार उस दिशा में भी शोधन का प्रयास किया ही जाएगा कोई वो थोड़ी ना है कि नहीं किया जाएगा परंतु प्राथमिकता किसको देंगे किसको बाद में बाद के लिए रखेंगे ये भी देखने वाला वाला विषय है। आपके सामने कोई भगवती को गाली दे रहा है। अब सब कुछ छोड़ के अनुरुद्धाचार्य जी ने अपनी कथा में कुछ कह दिया जो शास्त्रीय बात है उसके पीछे पड़ गए। तो ये तो गलत बात है। पहले मां भगवती को गाली देने वाले को देखना पड़ेगा।
00:31:24:02 ये बात है। यहां कमेंट में एक चीज और आ रहा है कि ईश्वर अल्लाह को तो प्रेमानंद जी भी बताते हैं। अनिकेत दुबे जी इस पर आप क्या कहना चाहेंगे? मैंने उसी का जवाब दिया है। उसी का जवाब दिया है। मिल गया। बाकी मैंने अभी देखा नहीं है। जी कहां पे बताते हैं वो सब सामने आएगा तब बात है। मैंने भी नहीं देखा। मैंने भी नहीं देखा है। वो अपनी बात ऐसे ही कह रहे हैं। मैंने भी कहीं नहीं देखा है। जितनी भी बातें भागवत मैंने एक बात बता दी कि जैसे अब ये प्रदीप मिश्रा है अनिरुद्धचार्य हैं और मान लीजिए प्रेमानंद जी हैं। तो ये जो ये जो संत है या ये जो धर्माचार्य हैं ये जो धर्म के प्रचारक हैं इन्होंने अपनी शरणागति प्रस्तुत कर रखी है। सार्वजनिक कर रखी है। कि धर्म और अधर्म के विषय में अंतिम निर्णायक शंकराचार्य होते हैं। तो जितनी बात शंकराचार्य के सम्मत होगी उनकी वो मानी जाए और जितनी बात नहीं तो इससे क्या होता है कि विप्लव की स्थितियां दूर रहती है। जो भी विवेक विवेकी होगा शंकराचार्य के विरुद्ध जहां बात जाती हुई दिखेगी वो त्याग कर देगा उनकी उस बात का। यदि कोई ऐसी बात जा रही है तो इसलिए ऐसे विषयों में शोधन करने का प्रयास प्राथमिकता से नहीं करना पड़ता है।
00:32:40:09 वहां पर तय करना पड़ता है। रामपाल है तो शंकराचार्य का विरोध करता है। भगवती को गाली देता है। ये लोग ढिंढोरा पीटते हैं। भगवती ने आकर के मंत्र दिया। कितनी बार लड़ने चले गए भैया। इतनी इतनी जलील बातें कान में जो है तेजाब डाल दो। ऐसी ऐसी बातें उसकी किताबों में लिखी गई है। कितनी बार इन्होंने आग लगा दी? यहां आकर के प्रश्न कर रहे हैं। तो ये भी देखना पड़ता है कि अब जैसे पीएन मिश्र जी वाला ही मामला बार-बार आता है कि पीएन मिश्र जी को तो तुमने कुछ नहीं कहा। अरे भैया हम क्यों कहे कुछ वो अपने आप को धर्माचार्य के रूप में प्रस्तुति ही नहीं कर रहे हैं। और अगर हर सामान्य व्यक्ति के लिए इतने लोग बोल रहे हैं रोज के रोज उन सबके लिए वीडियो बनाएं क्या? तो जहां हमें आवश्यकता दिखाई देगी कि भैया इससे प्रभावित हो रहा है समाज और इसको हमें प्रायोरिटी देनी है उसको हम प्रायोरिटी देंगे। ठीक है? अब पीएन मिश्र यदि कोई ऐसी बात बोल रहे हैं जो कि धर्म के विरुद्ध जाती हुई दिख रही है। सनातन सिद्धांतों के विरुद्ध जाती हुई दिख रही है। शंकराचार्य के विरुद्ध जाती हुई दिख रही है। तो वो सबसे पहली बात है कि शंकराचार्य के प्रति शरणागति तो दिखा रहे हैं। तो हमें सबको मालूम है कि इनकी उतनी बात सुननी है जितनी शंकराचार्य के साथ हो। दूसरी बात यह है कि वो अपने आप को धर्माचार्य के रूप में प्रस्तुति ही नहीं कर रहे
00:33:56:19 तो वहां पर उनसे वो जो साइड इफेक्ट्स आने हैं उनकी संभावनाएं बहुत अल्प है। तो ऐसे सारा काम धाम छोड़ के और रामपाल का विरोध छोड़ के अन्य अप्रामाणिक संप्रदायों का जो अप्रामाणिक तंत्र इत्यादि उन सब का विरोध छोड़ के पीएन मिश्र जी के पीछे लग जाए। तुमने कैसे बोल दिया भाई और अमुक अमुक तरीके से जहां पर यदि किसी से प्रेम जी से या किसी से भी कोई ऐसी गलत बात होती भी है तो किस मर्यादा में रहकर किसका किसके किसके सम प्रतिकार स्वरूप बात को रखना है वो रखा भी जाता है। क्यों पूरी शंकराचार्य जी का वक्तव्य हमने जो है अपने चैनल से रिलीज नहीं किया जिसमें वो बता रहे हैं कि क्या कहते हैं जो सात द्वीप होते हैं ब्राह्मण होते हैं। हमने तो निर्गत किया। हमने तो उसमें कोताई नहीं बरती। लोग कहते रामभद्राचार्य रामभद्राचार्य जी के लिए भी हमने पोस्ट डाली। उनहीं के उनहीं के ग्रंथ में लिखा हुआ था एक जगह कि मुझे अपनी संस्कृत पर बहुत गर्व था। परंतु जब मैंने करपात्री जी की हिंदी पढ़ी तो मैं जो है सोच में पड़ गया। वो हमने क्यों डाला? वो भी तो प्रतिकार ही है। अब तुम चाहते हो कि तुम्हारी व्यक्तिगत
00:35:11:20 लड़ाई कोई किसी से चल रही है उसको हम अपने अपना बना ले। उसमें कूद जाए सब छोड़छाड़ के। दूसरी बात जो बड़े-बड़े अभियान चल रहे हैं उनमें आग लगा दें। अच्छा और तीसरी बात कि तुम जैसे चाहते हो उसी भाषा में उसके साथ ट्रीट करें। ये भी बात अगला प्रश्न बताएं। तो क्योंकि बात भागवतानंद की तरफ गई है। तो मैं यह कहना चाहूंगा यह भी कमेंट में आपके सामने पढ़ना भागवत अपने लीजिए इंटरव्यू में कह रहे थे कि
00:35:57:13 अच्छा अच्छा ठीक है तो फिर इस पे ही वापस आते हैं शिवाश भाई इस का ही एक प्रचारक है दिखने में आता है उसका नाम है बीइंग द स्पिरिट सोल क्या आप जानते हैं उनको बीइंग स्पिरिट सोल कौन है ये मैं नहीं जानता। तो जो व्यक्ति का अपना अस्तित्व नहीं है उसका जवाब मैं क्यों दूं? बोलता है कि उसने बहुत खंडन कर रखा है। अब मेहनत करके तुम्हारा खंडन बना भी देंगे और जबकि शुरुआत में उसने जब पहला वीडियो बनाया था तो उसके उस वीडियो का खंडन मैंने प्रस्तुत करके निराकरण प्रस्तुत करके उसको सीधे कह दिया था कि अब आमने सामने की चर्चा कर लो। तब से ले वो आदमी अपने ही इस मुंगेरी लाल के हसीन सपनों में क्या-क्या देख रहा है, कर रहा है। मुझे तो ज्ञात भी नहीं वो क्या-क्या कहता है, क्या-क्या करता है। हालांकि अपने हर वीडियो में, हर पोस्ट में वो जो है अ टैग कर देता है। उसकी खुद की आइडेंटिटी अभी सस्िशियस है। संदिग्ध है कि वो है कौन? कहीं भगाया हुआ है, लताड़ा गया। अब मैं उसके लिए मेहनत करके उसकी जो बातें हैं। हालांकि उसकी जो बातें बहुत छिचले लेवल की होती है जो सामने अगर सामने से वन वन बात हो तो बहुत जल्दी उसका वो हो जाए।
00:37:12:14 मगर क्या कहते हैं अब हमने मेहनत करके जो है उसके निराकरण प्रस्तुत किए। उसके बाद स्कॉन वाले कहे हमें क्या पता भैया तुमने किसका क्या निराकरण हमें क्या करना उससे? अच्छा वो शक्ल दिखाता नहीं है। सामने आता नहीं है तो वो भी नहीं है कि लोग जागरूक हो। देखो सामने से चुप किया उस व्यक्ति को। वो भी नहीं है तो हमें वहां पर कोई उद्देश्य की पूर्ति है ही नहीं उसका जवाब देने में तो हम क्यों दे उसका जवाब कोई वहां से खड़ा होगा इस का कोई जैसे अभी इस कान के कोई थे प्रबंधक थे कौन थे वहां बिहार की साइड के उन्होंने राघवाचार्य जी महाराज वाले वीडियो के बाद उन्होंने जो है रिप्लाई दिया था हमने दिया उसको उनको तफाक से बनाया वीडियो तो अच्छा अब इसमें भी वही वाली बात है कि किसका देना है बहुत से लोग डेली वीडियो बना रहे तो सबका तो हम नहीं दे पा रहे हैं हमें हमें ब्रह्मा कुमारी का भी प्रतिकार करना है। रामपाल का भी प्रतिकार करना है। अलंकार समाज का भी प्रतिकार करना है। बहुत सी चीजें हमारे सामने तो हमें देखना पड़ता है। इसके बारे में बोलना जरूरी है। तो हम बोले बाकी ये सोलवल वाले की अपनी खुद की आइडेंटिटी तो पहले पता चले तब तो हम वहां मेहनत करें।
00:38:23:06 वो है कौन? सही बात है। सही बात है। नहीं नहीं इसलिए मैंने ये प्रश्न किया था क्योंकि वो चेहरा बिगाड़ करके कुछ भी अपने मन से डाल देता है और मर्यादा के बाहर जाकर के जैसे आहवान चैनल है तो उसको हैवान कर देता है। इसीलिए मैंने आपसे पूछा तो खैर आपने उसका उत्तर बहुत अच्छा दिया। तो उसकी खुद की आइडेंटिटी नहीं है। वो मुंह छुपाते बैठ रहा है। सामने आता नहीं है। जो व्यक्ति खुद एक चोर की तरीके से काम कर रहा है। नपुंसक कायर की तरीके से काम कर रहा है। जिसका काम यह है कि मेरे वक्तव्यों को बदल करके प्रस्तुत करके उनका खंडन करना। समझ रहे हैं? मतलब एक होता है कि तुमने जो कहा मैंने उसको एज इट इज लिया। अब मैं उसको चुनौती दे रहा हूं। एक होता है कि मैंने जो कहा ही नहीं। मेरे इधर उधर से मिक्स अप करके मेरे भाव को बदल के प्रस्तुत किया। देखो यह इसने कहा अब मैंने इसका खंडन कर दिया। तो इसको क्या कहेंगे? कायरता। एडिटिंग वीर कहेंगे इसको। अब ऐसे एडिटिंग वीर का हम निराकरण कहां तक प्रस्तुत करें? अब वो हमारे आचार्यों के बारे में वो बता रहा है कि उसने क्या कहा? आचार्यों ने हमारे शंकराचार्यों ने क्या कहा? ये उसको पता है। उनसे परंपरा प्राप्त वही वाली बात। इसीलिए मैंने भागवत आनंद से पूछा ना कि अगर हम इस तरीके से किसी
00:39:38:07 के भी द्वारा किसी भी परंपरा की बातें जानने के दावे को स्वीकार करने लगेंगे तो अब इस वाला दावा कर रहा है कि हमारे आचार्यों ने क्या कहा है? वो हमारे परंपरा प्राप्त आचार्यों से ज्यादा उसको पता है। आर्य समाज कहते हैं कि जो वो है आदि शंकराचार्य जी अवतार को नहीं मानते थे। आर्य समाज क्लेम करते हैं। अगर ये परंपरा वाली चीज को हम ना पकड़े अच्छा वो यह कह देंगे कि जितनी चीजें हम लाएंगे उनके नाम से आदि शंकराचार्य जी के नाम से तो सब मिलावट है। उन्होंने मिलावट कर दिया है। इसलिए परंपरा को पकड़ के रखना पड़ेगा। आज नहीं तो कल जितने लोग जो वर्णाश्रमी है, परंपरावादी हैं और सिद्धांतवादी हैं वो इस चीज को समझ जाएंगे। इस लड़ाई में किसका पक्ष जो है सत्य का पक्ष है?
00:40:29:25 हम करेक्ट करेक्ट समझ गया। आप आप एक और प्रश्न आता है कमेंट में बहुत अच्छा ठीक। कई जगह पर ऐसे भी प्रश्न आता है शिवा भाई जो मर्यादा के बाहर जाकर के कुछ लोग शब्दावली यूज करते हैं। जैसे मैं आपको बताता हूं वो लोग क्या यूज करते हैं। अबे इतनी हिम्मत है अगर तो जाकर के अमोग लीला से भिड़ जा। जाकर के फलाने आर्या से भिड़ जा। फलाने उससे भिड़ जा। इन लोगों को आप क्या कहना चाहेंगे? जो इस तरह के शब्दावली यूज़ करते हैं। मर्यादा के बाहर जाकर के। क्योंकि मैं जानता हूं कि आप मर्यादा के बाहर जाकर के वो शब्द नहीं यूज़ कर सकते। ऐसे कमेंट वालों का क्या किया जाए?
00:41:15:18 देखिए जब चर्चा के विषय में या किसी भी जिन विषयों पर बातें चल रही है उन विषयों के बीच में तर्क वितर्क और प्रमाणों के बीच में जब व्यक्ति इस तरह की भाषा शैली पर उतर आता है तो वही तो उसकी पराजय का दतक कभी कोई यह थोड़ी ना कहेगा कि मैं जो है मैं ही हूं मैं हार गया वो इस तरह की भाषा शैली का उपयोग करना, विषय से हटकर के बातें करने लगना, इमोजीस भेजना, यह सब चीजें जो है अ
00:41:52:16 यही देवताक होती है कि व्यक्ति हार रहा है, कुछ कर नहीं पा रहा है। उसकी बेबसी है तो वो मुंह चला रहा है। मैंने इस बारे में अपना घटना है छोटी सी। मैं छोटा था जब उस दिन होलिका दहन था तो होलिका दहन वाले दिन वो पिताजी ने मुझसे जो गन्ना मंगाया था तो मैं गन्ना लेकर के आ रहा था हम और रास्ते मुझे पता नहीं था कि गन्ने के आगे का जो अग्र भाग होता है उसकी उसका ही मेन उसमें कार्य होता है मुख्य रूप से तो मैंने जो है मैं ला रहा था तो उसका आगे का अगला भाग जो है थोड़ा सा टूट गया था तो मैं साइकिल से था साइकिल के पीछे से वो टूट करके और रास्ते में मेरे घर से थोड़ा सा दूर वो गिर गया। मैंने सोचा कि इसका तो कोई कार्य है नहीं। चलते हैं आगे। तो मैं आ गया। फिर पिताजी ने पूछा गन्ना मैंने गन्ना दिखाया तो उसमें जो अग्र भाग होता है उसमें उसके बाल होते हैं गन्ने के। तो वो था ही नहीं। तो पिताजी ने कहा वो कहां है? मैंने कहा कि वो तो गिर गया पीछे। बोले कि अरे वही तो मेन है। वही तो मुख्य अची पूजा में। तो मैं
00:43:07:18 गया उसको लेने तो देखा तो एक वो बालों के साथ थोड़ा सा उसमें गन्ना भी था तो उस हिस्से को लेकर के एक बच्चा जो है खेल रहा था मेरे लगभग मेरे थोड़ा 19 20 छोटा होगा वो तो वो मैंने उससे कहा भाई ये मेरा है ये गन्ना तुम दे दो मुझे उसने कहा नहीं दूंगा मैंने एक दो बार विनम्रता से कहा भाई ये मुझे दे दो मेरा है उसने कहा नहीं दूंगा। मैंने पाया है। तो मैंने उससे ले लिया। बलपूक ले लिया मैंने उससे। जब मैंने बलपूक ले लिया मुझे गाली बकने लगा। है ना? तो जब वो गाली बकने लगा तो मैंने गाली देने का था ही नहीं। मेरे पास वो है ही नहीं। मेरे सिस्टम में ही नहीं गाली देने का। तो फिर मैंने क्या किया? वो गन्ने का वो अग्र भाग पकड़ा। और दूसरी ओर जो उसका डंडा डंडे जैसा भाग था वो लिया और गाली के उपलक्ष में उसको चपाचप चपाचप उसके लगा दिए पांच 10 और मैं घर आ गया लेके तो पीछे से पीछे से उस बच्चे की दादी थी शायद वो उसको लेते हुए आ गई वो थोड़े ग्रामीण प्रवेश का बच्चा था
00:44:22:26 तो उसको लेकर के और जो है आ गई घर पे कह अरे तुम्हारे मौला ने हमारे मोड़ा के मारा है डंडे से ये रो रहा है हमारा लल्लू तो मैंने कहा ये मुझे गाली दे रहा था मैंने कहा ये माता जी गाली दे रहा था मुझे तो बोली कि बेटा जिसके पास भगवान ने जिसको ताकत नहीं दी है ना जिसके पास ताकत नहीं होती है उसके पास जुबान होती है।
00:44:58:02 समझ गए आप? समझ गया। जिसके पास सामर्थ नहीं होता। बहुत सुंदर उत्तर है। उसके पास ही होता है। सुंदर उत्तर है। समझ गया? इसी तरह की घटना वहां पर होती है। बस उसका दृश्य बदल जाता है। स्टोरी यही रहता है। आपने एकदम सही कहा। अब जैसे कि शिवश भाई एक आपके सामर्थ्य के ऊपर एक प्रश्न मैं पूछूंगा। जैसे कि एक्चुअल में मेरे अनुसार बाकी दुनिया जो सोचे मेरे अनुसार आप जो घुस के निग्रह करते हैं किसी भी शिविर में किसी के भी आपको डर नहीं लगता।
00:45:37:27 ऐसा था कि जीवन में जब आसक्ति कम होती चली जाती है तो भय भी कम होता चला जाता है। और जब से गुरुदेव की शरण में आया था मैं मैं बता रहा हूं उससे पहले मैं थोड़ा सा सोते जागते उठते बैठते केवल एक ही चिंता रहती थी कि ये जो मेरे धर्म को दीमक की तरह खाया जा रहा है नाश हो रहा है सनातन संस्कृति का मुझे चैन से नींद नहीं आती थी जब मुझे शंकराचार्य मिले उस दिन के बाद मैंने सोना चालू किया चैन की नींद जब मुझे वो ज्ञान मिला वो विज्ञान मिला जिसके आधार पर मैं जो है अपने सनातन की रक्षा रक्षा कर सकता हूं। जीवन का उद्देश्य मिला। तो जिस दिन शंकराचार्य की शरणागति प्राप्त हो गई थी ना उस दिन बहुत बड़े हिस्से में जो मोह माया होती है जीवन की वो खत्म हो गई। नष्ट हो गई। और कई बार मैं बता चुका हूं। मुझे यदि जीवित रहते हुए जो मोक्ष का अनुभव हो सकता है वो जब मैंने शंकराचार्य को पहली बार देखा था अपनी आंखों से तो वो अनुभव मुझे हो गया था। उसके बाद मुझे कोई अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण से किसी भी चीज की भौतिक वादिता की प्राप्ति इत्यादि की इच्छा शेष
00:46:53:01 नहीं रह गई थी। तो इस कारण से जब लक्ष्य सामने होता है ना तो बस वही चीजें याद आती है। नैन छिनती शस्त्राण नैन दति पावका ना चैनम क्लेदपो ना सोति मारता गुरुदेव के पास एक बार कैंसर का मरीज आया उसने कहा मैं कैंसर गुरुदेव ने ये नहीं कहा कि मैं चमत्कार से सिद्धि से तुम्हारा कैंसर ठीक कर देता हूं। गुरुदेव ने ये कहा था कि मैं तुम्हारा दुख कम कर दूंगा। मैं तुम्हारा कष्ट कम कर सकता हूं क्योंकि मूल में तो वही है ना गुरुदेव ने यह भी कहा था जी कि जो लोग अराजक तत्व होते हैं ये सब होते हैं जो इनके अंदर एक गुण तो होता ही है ये लोग रिस्क लेना जानते हैं उतने हिस्से में तो वो जो है प्रश प्रशंसा के पात्र होते ही हैं कि एक सामान्य व्यक्ति की अपेक्षा करें तो वो लोग रिस्क लेते तो ये सारी चीजें गूंजने लगती है। फिर जब कोई ऐसा लक्ष्य महत्वपूर्ण सामने होता है और फिर हम वही करते हैं। शेर का बच्चा एक ही अच्छा
00:48:06:04 शेर से याद आया। कई लोग शेर र के आगे उ लगा के आपको शेरू भी कह रहे हैं। वो अपने परिवार में अपने लोगों को ऐसा ही कहते होंगे। इसलिए उनकी आदत है ऐसा कहने की अपने पिता पिता से ऐसे ही बातें करते होंगे शेरू टॉमी ये सब अच्छा वो आदत घर से प्राप्त जो संस्कार है वो उसको प्रदर्शित कर रहे हैं समाज में जिनके पास उत्तर नहीं है वही तो ऐसा कर रहे हैं उत्तर होता तो सामने आते फट से कितने लोग आके गए हैं और नहीं आए तो हम तो तुम्हारे खेमे में गए थे हम तो आज भी तैयार हैं मगर सामने से ही कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही। वीडियो बना के, कमेंट लिख के, पोस्ट लिख के जवाब तो दिया जा रहा है भागवतानंद की ओर से। परंतु आमने सामने बैठने में नानी याद आ रही है। हम ये बात ये आपने जो आमने सामने की बात कही भागवतानंद के लिए तो एक जगह पर मैंने उनको रिक्वेस्ट करके बुलाया था कि आप सामने आ जाइए जो भी आप कह रहे हैं वीडियो की क्या जरूरत है आप सामने
00:49:21:06 आ जाइए चीजें क्लियर हो जाएंगी ये और थोड़ा सा कहते हैं ना कॉम्प्लेक्स हो जा रहा है मगजमारी हो जा रहा है इसमें तो उन्होंने यह रिप्लाई दिया था तुम और शिवा दोनों महामूर्ख धूर्त हो तुमसे नहीं हो पाएगा ग्रंथ श्लोक हिंदी अनुवाद तक बताने के बाद भी शिवश समझ नहीं पाता वह एक उपद्रवी है वह वही रहेगा मूर्ख उपद्रियों के साथ हम समय बर्बाद नहीं करते। मतलब उनका कहने का ये मतलब है कि उनको हमने श्लोक बोला फटाफट फटाफट संस्कृत का श्लोक बोल दिया। फटाफट अनुवाद बोल दिया। लेकिन उसको केवल कुतर्क करना है। तेरा ये बता तेरा वो बता इस भाव से।
00:50:06:04 भाई बोला तो मैंने भी था कि माया मोह स्वरूप है। आज तक तो उसका उत्तर आया नहीं है। आ गया क्या? भगवान का अवतार सच्चिदानंद स्वरूप होता है। माया मोह स्वरूप होता है। बात यह है कि तुम जिसे कुतर्क कह रहे हो उसके संबंध में कोई शास्त्र का वो है क्या लिस्ट के ये कुतर्क होते हैं? नहीं है। हां तुमने निर्णय लिया है कि वो ये कुतर्क है तो उसको कुतर्क मान लिया जाए। इसी को कहते हैं कि तेरे लिए कर्तव्य कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण। हम कुतर्क कह के किसी का उत्तर देने से मना नहीं कर देते हैं। देते हैं अंत तक। झूठे की हद तक चोर के घर तक कहां तक जाओगे? चलो वहीं तक। कुतर्क तो यह है कि हमको शास्त्र अतीत जन्मांतर से प्राप्त है। यह कुतर्क है। हमने इसमें ये नहीं कहा कि ये कुतर्क है तुम्हारा। अब हम इसके आगे कुछ नहीं बोलेंगे। हमने इसमें तबाक से जवाब दिया। सुनाओ। तुम्हें अतीत जन्मांतर से शास्त्र प्राप्त है तो सुनाओ। फिर उनके पक्ष की ओर से बोला जा रहा है कि भैया उनको प्राप्त है मगर वो सुनाएंगे नहीं ठेंगा प्राप्त है। मोबाइल क्यों देखते हैं भाई?
00:51:14:26 हां क्यों देखते हैं हम मोबाइल? मोबाइल देख के वीडियो बनाने का अर्थ है कि तुम्हें अतीत जन्मांतर से प्राप्त नहीं है। ये कुतर्क था। कुतर्क किसको कहते हैं? हमने कुतर्क होने पर भी स्पष्ट रूप से कुतर्क होने पर भी हमने वहां ये नहीं कहा कि ये तो कुतर्क है। हम इसका जवाब नहीं देंगे। उसका जवाब दिया तो कुतर्कों का जवाब नहीं दिया जाता है। ऐसा नहीं है। जवाब देने के बाद ही वो कुत कुतर्क सिद्ध होता है। सही मायने में देखा जाए तो उससे पहले तक वो एक सवाल होता है, दावा होता है, क्लेम होता है। तो ये उत्तर ना दे पाने की जो अभाव है, जो असामर्थता है, उसका परिणाम है कि वो इस तरह से कह करके बचना चाहते हैं। कुतर्क है इसलिए जवाब नहीं देंगे। कुतर्क है सब। तुम्हारे पास शास्त्र कहां से आया? तुम निग्रह निग्रचार तुम्हें कैसे कहा जाए? क्या आधार है उसका? मंत्र सत्यापित कराने जा रहे हो। शंकर शंकर परंपरा से ज्ञान विज्ञान प्राप्त करने वाले किसी व्यक्ति के पास। उस पर भी तुम्हारा एक निग्रह करने की दोष दृष्टि वहां विद्यमान है। उस पर भी तुम खुद क्लेम कर चुके हो कि वह किसी ऐसी एंटिटी को भगवान कह रहा है जो है भगवान नहीं है। फिर वो तुम्हारा
00:52:29:27 मंत्र सत्यापित करने वाला प्रमाण कैसे बन गया? ये सब कुतर्क नहीं है। ये सब लॉजिकल तार्किक प्रश्न है। ये और शास्त्र सम्मतता है। शिव पुराण से ले सारे शास्त्रों में परंपरा बताई जा रही है। तुम्हारी परंपरा बताते टाइम तुम भाग रहे हो। बता ही नहीं पा रहे हो। मेरी परंपरा यह है क्योंकि बताने जाओगे तो शंकर के सानिध्य में आ जाओगे। ब्रह्म सूत्र और जितना भी जो तात्विक विवेचना है निगमानंद को भी अगर मान लिया जाए कि वो निगंद की परंपरा से दीक्षित है। उसने सत्यापित किया है। यद्यपि यदि तुम वहां से दीक्षित हो तो तुम उनके अगेंस्ट जाकर के अपना संप्रदाय खड़ा ही नहीं कर सकते। पहली बात अगेंस्ट नहीं जा सकते क्योंकि वो तुम्हारे शब्द प्रमाण है। तुम्हारे मंत्र को उन्होंने सत्यापित किया है। अगर उसमें तुम दोष दृष्टि रख रहे हो तो फिर इसका मतलब वो व्यक्ति धर्म और धर्म की गलत व्याख्या कर सकता है तो तुम्हारे गलत मंत्र को सत्यापित भी तो कर सकता है।
00:53:26:24 इसको अर्थ न्याय कहते हैं। तो इसलिए पहली बात तो जी करेक्ट तो हां नहीं मैंने कई जगह पर जो भागवतानंद का वक्तव्य आता है तो वहां पर मैंने कहा है कि आप लाइव आकर के चर्चा कर लीजिए तो पिछले 10 15 10 12 दिन से मैं वही कर रहा हूं यह सोचकर कि शायद ये आ जाएंगे आ जाएंगे आ जाएंगे लेकिन लास्ट में जाकर के मुझे भी समझ में आ गया कि वह सामने नहीं आएंगे भले ही वो क्योंकि उनको पता है कि प्रश्न शुरू ही यहां से होगा कि आपका परंपरा बताइए तो पहले क्वेश्चन में शायद से वो थोड़ा डगमगा जाएंगे इसलिए नहीं बता रहे कोई बात नहीं भाई भाई कई लोग ये कह रहे हैं कि 400 ग्रंथ है 700 ग्रंथ है उससे परंपरा हम सिद्धि करेंगे अरे भैया शास्त्रों में अगर मान लिया जाए कि कबीर नाम आ गया तो इसलिए मान लिया जाए कि रामपाल जो जो क्लेम कर रहा है वो सही है वो शास्त्रों की लिखी हुई बात तुमसे कैसे जुड़ रही है प्रश्न ये है अगर शास्त्र में कहीं निग्रह आ भी गया पहली बात तो वहां निग्रह संप्रदाय है कि नहीं निग्रह वो है कि नहीं तंत्र वो तो बाद की बात है कि क्या लिखा है 400 शास्त्रों में मान लिया जाए कि उसमें निग्रह परंपरा के बारे में बताया गया है पर वो निग्रह परंपरा तुम्हारे पास आ गई तुम उसके उत्तराधिकारी हो
00:54:42:04 इस विषय में तो तुम तुम तुमको अपने आप तुमको अपना सत्यापन किसी से कराना पड़ेगा जिससे तुमने कराया उस पर तुम्हें खुद विश्वास नहीं है जिससे तुमने कराया है उसके तुम अगेंस्ट जा रहे हो जिससे तुम तुमने कराया है वो गलत बोल रहा सत्यापन अब रही सही बात कि तुमने किसी से कराया ना होता तब हम यह देखते कि तुम खुद क्लेम कर रहे हो कि भाई मैं अपने आप में एक आप पुरुष हूं। मेरी बात को मानना हो तो मानो नहीं मानना है तो मत मानो। अभी तो तुमने और अगेंस्ट काम कर रखा है। निगमानंद के शिष्य से जो है अपने मंत्र को सत्यापित करने का जो प्रयास किया है उससे अपने पैरों में कुल्हाड़ी मार रखी है। अगर तुम ये ना करते हो स्वतंत्र रूप से कहते कि भाई मेरे ऊपर मेरी दिव्यता पर आस्था है तो रखो नहीं आस्था है तो ना रखो। तो फिर वो आस्थावानों से फिर प्रश्न होते उसकी दिव्यता के संबंध में वो एक अलग चैप्टर हो जाता।
00:55:37:08 तो ये है जी समझ गए समझ गए तो आपको क्या लगता है भविष्य में आएंगे फिर ये देखा जाता कि इनकी दिव्यता पर आस्था रखना है कि नहीं रखना है ब्रह्मा कुमारीज वाला इनका मन इनको मानना है कि नहीं मानना ब्रह्मा कुमारीज वाले भी तो आस्था रख रहे हैं कि भाई ब्रह्मा जी आते हैं वेदों का सही अर्थ बताते हैं और जो आज जो वेद प्रचलित है वो मिलावटी खत्म काम आस्था रख लो आप नहीं कई लोग आते हैं कई लोग कई लोग हम उनको निरत्तर कर देते हैं। आपको जी शंकर का विरोध करके आप अपना ताना-वाना खड़ा नहीं कर पाओगे। ठीक है? वो हमारे उदारता है कि हम नहीं कर रहे विरोध शांत है प्रतिकार नहीं कर रहे तो बात अलग है। मगर करना चाहे तो कर सकते हैं और कर रहे हैं। हां जी।
00:56:34:09 जी शिव जी लास्ट एक शॉर्ट वीडियो में एक जिज्ञासु ने प्रश्न किया था शायद जिज्ञासा है उनको उसका मैं उसने बड़ा किया है। मैं शॉर्ट में आपको समझा देता हूं। वो जो जिज्ञासु दर्शक है वो समाज इस मुद्दे पर आपके खिलाफ योजनाबद्ध फ्रेमवर्क बना रहा है। इस पर आप क्या स्पष्टीकरण देना चाहेंगे? उसने कहा है कि भाई वह जो है आर्य समाज हमारी ओर से जो पक्ष प्रस्तुत किया है उसको आधार बना के विंडा कर रहा है और यह कह रहा है कि गुरु की सब बात मान लो। हमने अपने किसी वीडियो में यह नहीं कहा है कि गुरु की शास्त्र विरुद्ध बातों को भी मान लिया जाए। ना हमने सदैव कहा गुरु गोविंद और ग्रंथ हर वीडियो के अंत में आपको चित्र दिखाई देता होगा एम थ्री जी गुरु गोविंद और ग्रंथ हमने कहा सदैव तो हमने ये कभी कहा ही नहीं है हमने कब कहा कि शबरी के विषय में हम शास्त्री व्याख्या नहीं देंगे हमने कहा क्या बुद्ध के विषय में हम शास्त्री व्याख्या नहीं देंगे मोटे मोटे तौर पर हमने चीजें बताई भी अपनी रखी भी प्रश्न यह है कि कोई भी व्यक्ति उठ के खड़ा हो जाएगा और अपने आप को आचार्य बोल के क्या कहते हैं और जो है शंकराचार्य का विरोध
00:57:49:10 करने लगेगा। परंपरा प्राप्त आचार्यों के निग्रह के नाम पर लोगों को उनके प्रति अनास्थावान बनाने लगेगा। जिससे कि विधर्मियों के खेमे में जाकर के जब वो हमारे शास्त्रों का अर्थ कर रहे होंगे विधर्मी तो हम उनसे ये नहीं कह पाएंगे भैया परंपरा प्राप्त आचार्यों के अर्थ को हमें स्वीकार करना पड़ेगा। क्यों? क्योंकि वो कहेगा विधर्मी भैया अमुक अमुक विषयों में परंपरा प्राप्त आचार्यों ने गलत व्याख्या की है। तो उनको प्रमाण के तौर पर कैसे माना जाए? तो इस नुकसान से बचने के लिए हम सीधे सबसे पहले इस सिस्टम पर आघात करेंगे ना कि कोई भी व्यक्ति बिना परंपरा के क्वेश्चन उठा कैसे रहा है। परंपरा प्राप्त आचार्यों की व्याख्या पर। यह नहीं है कि उसको क्वेश्चन पूछने का हक नहीं है। परंतु यदि कोई अपने आप को आचार्य घोषित कर रहा है तो हम स्वतंत्र रूप से उससे पूछ रहे हैं कि तुमको आचार्य कैसे बने? शास्त्र कहां से मिले? वो एक अलग चैप्टर है। शबरी के विषय में हमारा जवाब क्या है? उससे संतुष्टि हो रही है लोगों को कि नहीं हो रही है? रामानुज वाले उससे संतुष्ट है कि नहीं? रामानुज रामानुजाचार्य जी की बातों से शंकराचार्य वाले संतुष्ट है कि नहीं? ये अलग विषय है। कोई भी व्यक्ति खुद को आचार्य घोषित करके और जो है प्रश्न करने लगेगा प्रश्न ना भी करे। मगर यदि वो अवमानना
00:59:04:24 कर रहा है आचार्यों की स्वयं को आचार्य बना करके और विरोधी बातें फैला रहा है जो हमारे रहे सहे प्रमाणिक आचार्यों के रूप में हमें शब्द प्रमाण प्राप्त है उनके प्रति निग्रह की दृष्टि रखने की भावना का पोषण कर रहा है यदि कोई व्यक्ति तो हम उसकी प्रामाणिकता उससे पूछ लेंगे पूछ ली जी हमने प्रमाणिकता पूछने में ये थोड़ी ना कहा कि हम जो हमारे पास शबरी का पक्ष नहीं है शास्त्री ये कहां कहा है क्या कहीं या हमारे पास बुद्ध का पक्ष नहीं है शास्त्री है ये नहीं कहा हमने मोटे मोटे तौर पर तो हमने बता ही दिया है और विस्तृत रूप से अलग से जो है वीडियो बना करके एक जैसे राधा जी के बारे में बहुत दिनों से समय से चल रहा है राधा जी राधा मां के ऊपर बहुत सारी सवाल उठते हैं जो श्री कृष्ण की रास लीला उनका जो कुब्जा कुब्जा का प्रसंग है और राधा कृष्ण के ऊपर तो इतने दिन हो गए हम नहीं बना पाए। तो हमने कहीं भी यह नहीं कहा कि भाई शास्त्रों के विरुद्ध हम गुरु को मानते हैं। तो अगर हमारी जो हमने बात नहीं कही है उसको तुम बना करके और फिर उसके ऊपर आधारित होकर के प्रश्न कर रहे हो। तो ये तुम्हारी बेवकूफी है। इसके बारे में भागवतानंद से संपर्क करो। उसने
01:00:20:00 अपने एक वीडियो में बताया था कि जो सामने वाले में ने नहीं भी बोला है उसको तुम अपनी ओर से उसके विचारों को व्यक्त करके फिर उसका खंडन करके दिखा रहे हो। तो हमने ऐसा कहा ही नहीं है कि शास्त्र के विरुद्ध गुरु को मान लो। हमने कहा है कि ना तो गुरु को छोड़ सकते हो ना शास्त्र को छोड़ सकते हो। केवल शास्त्र को भी नहीं ले सकते केवल गुरु को भी नहीं ले सकते। धर्म तो तभी प्राप्त होगा जब गुरु और शास्त्र दोनों एक बात बोलेंगे। वो धर्म है। वो ब्रह्म है। शास्त्री भी बोले और गुरु भी बोले। केवल गुरु नहीं केवल ग्रंथ नहीं केवल गोविंद भी नहीं। गुरु गोविंद और ग्रंथ इन तीनों के सामंजस्य से मिलेगा। तो यदि कोई इस भावना का पोषण कर रहा है कि नहीं नहीं केवल शास्त्र से हो जाएगा तो हम उसको रोकेंगे पूछेंगे उससे और यही काम कर रहा है भागवतानंद केवल शास्त्र से हो जाएगा। केवल शास्त्र से हो जाएगा तो परंपरा की आवश्यकता ही क्या है? हम फिर शास्त्र आएंगे कहां से? क्या शास्त्र है और क्या शास्त्र नहीं है? कौन घोषित करेगा? अगर केवल शास्त्र से हो जाएगा। तो यह सारी बातें
01:01:28:24 जी जी इसमें काफी स्पष्टीकरण आपने दे दिया आर्य समाज द्वारा बातें आधार बनाने की है तो आप देख लो आर्य समाज ने दोनों पक्षों में से किस पक्ष की किस पक्ष का समर्थन किया है अलंकारियों का चैनल आप टटोल लो जाकर के समर्थन किसका कर रहे हैं भागवत आनंद के पक्ष का क्यों कर रहे हैं क्योंकि उन्हें रामानुजाचार्य जी से वर्तमान में दिक्कत नहीं हो रही है। जो पक्ष समर्थन कर रहे हैं। है ना? उन्हें रामानुजियों से दिक्कत नहीं हो रही। भागवतानंद से भी दिक्कत नहीं हो रही। जिसने उन्हें गाली दी इनको क्या कहते हैं? दयानंद जी के लिए इतना अनाप शनाप बका उनसे भी उसे उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। उन्हें दिक्कत हो रही है। शिवश नारायण द्विवेदी ये पूछ रहा है कि तुम्हारी परंपरा क्या है? वेद मंत्र कैसे आए? जिसके मंत्र पर विश्वास है उसके अर्थ पर विश्वास क्यों नहीं? इसके अर्थ पर विश्वास नहीं है। उसके मंत्र पर विश्वास। क्यों? ये जो सवाल है वो जो पूछ रहा है इस सवाल के विरोध में उसके ऐसे ही कुछ अपने प्रियजन जब खड़े हो रहे हैं जिन पर वो विश्वास प्रकट करता है तो हमें उनका समर्थन करना चाहिए। जिससे कि कल को
01:02:43:25 जब हमसे वो पूछेगा तो हम भी वही जवाब दे दे जो आज ये दे रहे हैं। इसलिए मैं पीछे नहीं हट सकता इस बात से। अगर उनकी बात सुनकर के भागवत के पक्ष की ओर से जो भी बातें बोली गई है परंपरा के लिए वो बातें सुनकर के मैं प्रतिकार नहीं करूंगा तो कल को आर्य समाजी उनका सहारा लेंगे ना तुमने यहां भी तो ये बातें सुन ली थी तो मैं तो प्रश्न करूंगा फिर आप खुद देख लो आर्य समाजी की ओर किसका पक्ष जा रहा है आर्य समाजी के समर्थन में उससे पता लगा लो किसका पक्ष वो है अवैध वो तो देखा हम समझ में आया खाली आर्य द्विवेदी वो शिवश नारायण द्विवेदी और भागवतानंद में से दोनों में से किसका समर्थन कर रहे हैं? क्यों? क्योंकि परंपरा के विषय में यदि मैं मैं परंपरा के विषय में सवाल कर रहा हूं तो जिस जगह पर आकर के आर्य समाज खड़ा हो रहा है वहीं पर भागवतानंद खड़ा हो रहा है। अब ऐसे में वह भागवतानंद क्योंकि भागवतानंद को आश्रय प्राप्त है जो है जिनके जिनके प्रति मेरा मेरा भी वह है श्रद्धा तो ऐसे में जब उनके पक्ष से कुछ बोला जा रहा है भागवतानंद के समर्थन में तो वो उस उन बातों का समर्थन इसीलिए कर रहे हैं कि हमारे पत्ते
01:03:59:01 सही हो जाए हमें इस बात के जवाब देने से मुक्ति मिल जाए कि हमारी परंपरा क्या है इसीलिए वो ऐसा कर नहीं तो वो मेरा समर्थन भी तो कर सकते थे भाई मैं तो दया दयानंद जी बोलता हूं वो तो तूक बोलता है पता नहीं क्या-क्या बोला था वो शौच इत्यादि तक पे हंसी मजाक ये सब तो मैं नहीं करता हूं पर्सनल टैक्स मगर क्यों कर रहे हैं वो हम इसीलिए क्योंकि वहां उनको सुरक्षा का घेरा मिल रहा है इसी इसी के चलते बहती गंगा में हाथ धोने से और जो है हमें जो है सुरक्षा मिल जाएगी इसके इस प्रश्न से कि तुम्हारी परंपरा क्या है वेद मंत्र कैसे है इसीलिए उसका समर्थन करते तो जो आर्य समाज आधार बना रहा है वो मेरी बातों का आधार नहीं बना रहा है। वो भागवतन के पक्ष से जो बातें बोली जा रही है उनका आधार बना रहा है। उनसे अपनी चीजों को पुष्ट कर रहा है। क्योंकि वो वही सारी बातें बोली जा रही है वहां पे वही प्रश्न फंस रहे हैं जो आर्य समाजियों के यहां फंसते हैं। जी काफी खाली आर्य समाज ही नहीं शिवानी भाई इसमें जितने भी लोग गुरु शिष्य परंपरा का खंडन करते हैं उन सबको एक तरह से इनकी तरफ से बल मिल रहा है।
01:05:11:15 अगर हम परंपरा के सिस्टम पे उंगली उठा देंगे तो इस वाले ये कहते हैं कि भाई मोहम्मद ने तो अच्छा बताया था तो मोहम्मद की चीजें तुम तक आई कैसे कुरान का गलत मतलब निकाल रहे हैं कुरान वाले कुरान वाले कुरान में जो लिखा है वो अच्छा लिखा है गलत मतलब निकाल रहे हैं तो उनकी ये बातें भी माननी पड़ जाएंगी कि भैया तुम कैसे बोल रहे हो कि भैया हमने अपने विवेक से पता किया है तो कुरान को भी अच्छा मान लो, बाइबल को भी अच्छा मान लो। ये सब फिर करना चालू करना पड़ेगा। अगर परंपरा के भाई परंपरा के बिना ये लोग कर्मणा आचार्य बन रहे हैं। ये लोग वैसे तो कर्मणा वर्ण व्यवस्था को नहीं मानते हैं। मगर आचार्यों के विषय में कर्मणा आचार्य। कर्मणा आचार्य से काम नहीं चलेगा ना। पीछे से ठप्पा भी चाहिए प्रामाणिकता का। जैसे पीछे से जन्म भी चाहिए। कर्म भी चाहिए ब्राह्मण के लिए। पीछे से जन्म भी चाहिए। क्षत्रिय के लिए कर्म भी चाहिए, पीछे से जन्म भी चाहिए। इसी तरीके से केवल कर्म आचार्य नहीं चलेगा ना। पीछे से जन्म भी चाहिए। जन्म का मतलब गुरु के द्वारा वो अधिकार दिया जाना, गुरु के द्वारा वो ज्ञान दिया जाना वो भी चाहिए। प्रामाणिकता पीछे से फिर आचरण। क्योंकि जो आचरण
01:06:26:16 जांचने का जो विषय है उसमें सुनिश्चितता नहीं है कि कौन एक्टिंग कर रहा है कौन एक्टिंग नहीं कर रहा है तो इसलिए पीछे से प्रमाण और फिर आगे से कर्मणा आचरण अब ये लोग खुद एक तरफ तो कर्मणा वर्ण व्यवस्था का विरोध करते हैं और फिर खुद यहां पर आकर के कर्मणा आचार्य तो बना रहे हैं कि भैया वो जो है शास्त्र है इसलिए मान लो अरे भैया जब पीछे से उसकी प्रामाणिकता सिद्ध नहीं हो रही तो आपको कैसे आप 24 घंटे उसके साथ रह रहे हो और बहुत सारी बातें आचरण में तो दोष साफ दिखाई दे रहा है। वह खुद कह रहा है मैं गाली बकता हूं। वो वाकलन के नाम पर छह बार झूठ बोल रहा है। स्त्रियों को निराधार वैश्या बोल रहा है। ये आचरण है आचार्य के। उससे जब कोई बात पूछी जा रही तो चार बार में चार पलटियां मार रहा है। ये आचरण ये आचार्य होता है। हम कर्मणा आचार्य बनाने की कोशिश कर रहे हो। अगर कर्मना पे भी आ जाएंगे तो उसके आचरण भी वैसे नहीं है। गुरु विरोधी सिद्ध होता है। जबकि गुरु के विषय में बहुत सारी चीजें बताई गई है। गरुड़ पुराण में और गुरु गीता में इत्यादि में गुरु के विषय में बहुत सारी चीजें बताई गई। जी
01:07:40:16 जी आखरी प्रश्न लूंगा मैं शिवानी भाई यही कि ये बहुत से लोग कहते हैं कि शिवश नारायण द्विवेदी जो है वो शास्त्रों को प्रमाण और शास्त्रों से बात ना करके घंटों बिता देता है खाली तर्क वितर्क और कुतर्क से ये कैसे वो कैसे अगर सर्वशक्तिमान है तो ये कैसे वो कैसे शास्त्रों का आधार नहीं रखता है ऐसा भी शास्त्रों का कई लोगों का है कई लोगों का बात तो ये गलत है। शास्त्रों का आधार नहीं रखते हैं। मगर शास्त्रों की पहली बात तो सबने अपनी व्याख्या कर रखी है। तो हम जब शास्त्र खोलेंगे तो कहेंगे ये वाली व्याख्या क्यों मानी जाए? हमारी क्यों ना मानी जाए? तो जो प्रश्न आना ही है यही पे आना ही है कि भाई किसकी व्याख्या माननी तो परंपरा बता दो। और यदि तुम्हारी व्याख्या को मान के चलते हैं तो क्या सर्वशक्तिमान ईश्वर मिलता है? वहां पर परम स्वतंत्र मोक्ष मिलता है क्या वहां पर? तो जिस व्याख्या पर आना ही है यहां से होते हुए वही आना है तो उसी को सीधे बात टू द पॉइंट बात कर लेते हैं। दूसरी बात यह है कि लड़ाई सदैव हमें कोई इन लोगों से लड़ाई नहीं लड़नी। जो मूल युद्ध है वो है सनातन विरोधियों से। तो जब सनातन विरोधियों से जो युद्ध है वहां पर वो हमारे शास्त्रों का प्रमाण थोड़ी मानेंगे। बौद्धों से जब कोई बात
01:08:55:22 चल रही होगी तो उनको हम अपने शास्त्र दिखाएंगे। देखो हमारे यहां तो ये लिखा है इसको मान लो। उससे काम नहीं चलेगा। वहां उनके सिद्धांत को उनके शास्त्रीय सिद्धांत को जो है उसका प्रतिकार करना पड़ेगा। उस दृष्टिकोण से सदैव अपनी बात को रखिए कि हम जो है सनातन के विरुद्ध तंत्रों से बात कर रहे हैं तब कैसे बात चलेगी वहां पर और ऐसा नहीं है आवश्यकता अनुसार शास्त्रों का संदर्भ भी लिया जाता है क्यों हमने हरिहर वेद पे जो वीडियो बनाया उसमें जाने कितने शास्त्रों के प्रमाण दिए हैं हरिहर वेद वाले बहुत सारे वीडियो शास्त्रों के प्रमाण दिए जहां आवश्यकता होती है देते ही है ईश्वर ने सृष्टि क्यों बनाई वेदों के चौथे अध्याय का अध्याय का पहला जो मंत्र है श्वतापनिषद का दिया ना क्यों दिया प्रमाण जी केवल तर्क में थोड़ी ना चलते प्रमाण भी जहां प्रमाण आवश्यक है अब बात हो रही है कोई ये क्लेम कर रहा है कि वेदों में नात प्रतिमा अस्ति लिखा है तो हम पहले पूछेंगे प्रमाण देने की बजाय उसमें प्रमाण कहां चलेगा नात प्रतिमा का अपना अर्थ बता रहे हैं तो हम पूछेंगे भैया तुम्हारे पास वेद मंत्र आया कैसे
01:10:04:24 जी जी काफी जगह पर काफी जगह पर आप शास्त्रों का प्रमाण देते हैं। ऐसा नहीं है। वेदों का भी प्रमाण बहुत जगह पर दिया हुआ है। बस एक मिनट मैं अपनी बात करके फिर पूरा कर दूंगा। यही है कि इस आज के डिस्कशन का कारण यही था। काफी लोग कमेंट करते हैं तो जैसे कि मैं आहान चैनल को सपोर्ट करता हूं। गुरु शिष्य परंपरा इसके अकॉर्डिंग इसीलिए तो मैं जाकर के जब वीडियो देखता हूं किसी दूसरे का भी अगर जो आह्वान के विरुद्ध में बनाते हैं शिवा भाई के विरुद्ध में बनाते हैं तो वहां पर बहुत से लोग कमेंट करते हैं जो हमारे मैक्सिमम सनातन भाई ही होते हैं तो वो लोग कमेंट तो कर देते हैं लेकिन जब उनको सामने आने के लिए बोला जाता है तो वो आने से हिचकिचाते हैं भागते हैं अगर वो सामने आ जाएंगे तो उसका उत्तर मैं एक बात बता दूं सामने आने वाली बात कभी मैं एक बात बता दूं वाला कई बार बता चुका हूं। देखो ये बातें ऐसी होती है कि जब मैं आपने कोई बात पूछी पहली बात तो यह है कि मेरे पास समय होना चाहिए। ठीक है? दूसरी बात ये है कि मैंने यदि कोई आपने यदि कोई बात पूछी मैंने उसका उत्तर दिया। यदि आपके पास अगला प्रश्न है तो आप करोगे नहीं तो आप हो सकता है वहां कोई जवाब ही ना दो। गायब हो जाओ। इससे क्या निष्कर्ष हुआ? कोई
01:11:20:02 परिणाम प्राप्त हुआ उस चर्चा का नहीं हुआ। यहां पर जब आपके पास उत्तर नहीं होगा। आप मौन हो गए तो दिखाई देगा कि आपके पास उत्तर नहीं है। जैसे भागवत आनंद से फर्स्ट राउंड में जब पूछा गया कौन सी परंपरा तो वो मौन हो गया। उत्तर नहीं था तो मौन हुआ ना वो दिखाई दिया। मगर कमेंट में जब कोई मौन होता है तो उसका वो दिखाई नहीं देता। प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं होता। दूसरी बात कि वहां पर हमारी ऊर्जा वगैरह तो उतनी लगती है, मेहनत भी लगती है। परंतु वो जो कमेंट में जो चर्चा होती है वह इतनी उसका रीच नहीं होती है। तो एक अनजान व्यक्ति को कमेंट में हम अगर निरत्तर भी कर दें तो उनसे उससे हमें वह फल प्राप्त नहीं होता है जो हम जन जागरूकता के लिए कर रहे हैं। सनातन सनातन को संगठित करने के लिए कर रहे हैं। दूसरी बात दूसरी बात यह है कि
01:12:16:21 जब सामने व्यक्ति होता है वो विषयंतर करता है तो हम उसको वही की व पॉइंट आउट करते हैं कि आप यहां विषय कर रहे हैं आप विषय जैसे कि भागवतानंद ने क्या किया जब उससे परंपरा पूछी जा रही है कि तुम्हारे यहां अग्नि पुराण तुमने सबरी भाई परंपरा बताना मेरे गलत होने से तेरा सही होना सिद्ध थोड़ी ना होता है और मैंने पूछा पूछा था कि तुम्हें कौन सी चर्चा करनी है कर लो भाई तब तो तुमने नहीं बोला था जब परंपरा का विषय शुरू हुआ तो तुम्हारी चर्चाएं निकल आई तो विषयंतर करते करते जब वो बार-बार यहां तक ले आया कि भाई शबरी जो है पहले पैर धुलाया तब वो अंदर गए तो ये यहां पर मैंने कहा ना कि विषयांतर हो रहा है भाई प्रश्न चल रहा है तुम्हारी परंपरा क्या है वो बताओ
01:13:02:02 तो विषयांतर भी कर लेता है व्यक्ति जब कमेंट में बात करता है दूसरी बात इतने के सारे कमेंट्स में जो है उसको उत्तर दे दे के दे दे के वहां पर निरत्तर करने की नत्तर करने का संभव भी नहीं है एक व्यक्ति को और अंतत गत वो निरत्तर हो भी जाएगा तो वहां से कोई प्रत्यक्ष परिणाम ऐसा इतना ठोस प्राप्त नहीं होगा कि हां भैया वो कोई निरुत्तर हुआ सामने से निरुत्तर होगा तो वो दिखाई देगा उसका निरुत्तर होना इसलिए हम कहते हैं फट से ज्यादा दिक्कत है तो आप सामना करिए बस अगर मैं अन्याय भी कर दिखाई देगा ना लोगों को तो डर कैसा लाइव चर्चा में यदि मैं अन्याय कर रहा हूं तो वो भी तो दिखेगा ना लोगों को
01:13:48:16 चलिए और आपको क्या लगता है शिवश भाई ये क्यों नहीं ये क्यों ये क्यों नहीं आना चाहते लाइव आपको क्या लगता है आपके अनुभव से ये लाइव क्यों नहीं आते बोलते तो पीछे ही बोलते हैं नहीं डरता यार डरते हैं या क्या है हां ये जो लाइव नहीं आते हैं इसका कारण आपके अनुसार आपको क्या लगता है? इसीलिए क्योंकि इनके पास सामर्थ्य नहीं है अपनी चीजों को पुष्ट करने के लिए इसीलिए लाइव नहीं आते हैं। यदि होता तो ये बढ़ चढ़ के आते भागता भागते हुए आते। मगर नहीं है उसके पास सवालों का जवाब हो। 400 ग्रंथ कर ले, 700 कर ले, सात लाख कर ले। सात करोड़ ग्रंथों का प्रमाण ले आए। प्रश्न वही रहेगा और एक जो हिस्सा था कि वह ब्रह्मा कुमारी जैसा खुद को बना सकता था वो भी उसने कट कर दिया है। अमृतानंद सरस्वती से जो है अपने मंत्र को सत्यापित करने जो गया है। खुद ही अपने पैरों में कुल्हाड़ी मार ली। तब तो कम से कम यह तो कह सकता था जिसकी मेरे ऊपर आस्था हो वो विश्वास रखे इसकी ना हो ना रखे। हालांकि उस आस्था में भी जो निग्रह परंपरा है उसके संबंध में बहुत सारी तार्किक प्रश्न खड़े हो जाते हैं। वो एक अलग है। फिर हम उसके
01:15:03:20 निग्रहत्व को समाप्त करते। मगर तो पहला स्टेप है उसने ये करके अमृतानंद सरस्वती के पास जाकर के अपने मंत्र को सत्यापित करने की बात कह करके अपने पैरों पर बहुत बड़ी कुल्हाड़ी मार ली है। उसके बाद जो दूसरी कुल्हाड़ी है वो है निग्रह। सभी संप्रदायों में अनुशासनात्मक निग्रह वो भी शास्त्रार्थ के द्वारा। एक प्रश्न यह भी आया कि पूरी के शंकराचार्य जी शास्त्रार्थ क्यों नहीं करते? जब उन्हें कोई ललकारता है तो दूसरे को ललकारने के बाद सामने नहीं आ रहा है तो फिर उस पर दोष दृष्टि क्यों? पूरी के शंकराचार्य जी ने सीधे सीधे कह रखा है मेरी शैली धर्म संस्थापना में शास्त्रार्थ वाली नहीं है।
01:15:46:04 अच्छा मगर तुमने क्या कह रखा है कि तुम निग्रह कैसे करोगे? शास्त्रार्थ के द्वारा तुमने तो यह कह रखा है। दूसरी बात यदि तुमको सामने वाला योग्य नहीं लग रहा है तो फिर भैया उससे तुमने लाइव चर्चा की बात तो खुद ही सबसे पहले कही थी। यदि वो योग्य नहीं था तो अच्छा बाद में योग्य नहीं लगा तो फिर तुम इस चीज के लिए क्यों तैयार हो कि मेरे अनुकूल वातावरण में तुम आकर के मुझसे प्रश्न पूछ लेना। मतलब मेरा कहीं शिविर लगा हो वहां तुम प्रश्न पूछ लेना। मगर बराबरी का जहां पर मौका हो वहां नई प्रश्नों का उत्तर देने के लिए मौजूद होंगे।
01:16:19:10 तीसरी बात यदि स्तर का नहीं है तो उसके लिए वीडियो बना क्यों रहे हो पोस्ट क्यों लिख रहे हो नाम ले ले के जैसे बीइंग स्पिरिट सोल वाले के लिए हमने कुछ भी लिखना लिखाना बंद कर रखा है बेकार का नगण्य व्यक्ति है हमारे लिए वो करता रहा है कुछ भी भाई उसका निराकरण प्रस्तुत करके हमें प्राप्त क्या होगा प्रामाणिक रूप से वो इस का आदमी है भी कि नहीं है हमें क्या पता कम से कम एक चेहरा दिखा के फॉलोअ आता है तो कम से कम लोगों को दिखता तो है कि मान्यता से प्रभावित था। निरत्तर हुआ। इसको बरगलाया गया था। वो तो वो भी नहीं दिख रहा है। एडिटिंग कर करके उस्ताद बना जा रहा है। खुद ही से निर्णय कर लेता है कि हमारे आचार्यों ने ये किया और फिर उसका खंडन लिख देगा। देखो यहां बवाश नारायण द्विवेदी अपने आचार्यों के इस तरह से विरुद्ध है। क्योंकि उसको पता है कि हमारे आचार्यों ने क्या कहा क्योंकि उसने यहां से कुरगम्य विद्या के द्वारा शिक्षा प्राप्त की है। हमने थोड़ी ना प्राप्त की है। उसने प्राप्त की है। यह है
01:17:18:09 जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद है। शिवश भाई आपने बहुत ही सुंदर उत्तर दिया इतने सारे कमेंट्स का। मैं सबसे यही निवेदन करूंगा। किसी को भी आपत्ति है, कुछ कहना है तो लाइव आकर के निडरता से सामने आकर के प्रश्न कीजिए। यहां कोई ये नहीं है। बाकी कमेंट में लगे रहना है तो जैसे शिवा भाई कहते हैं कि कमेंट वॉरियर बनना है तो आपकी मर्जी। कमेंट वॉरियर बने रहिए। कमेंट वॉरियर बनो, एडिटिंग वॉरियर बनो। बिहार समाजियों से कहा तो है सर्वत्र जो एक रस ईश्वर है वो कोई कार्य करने वाला जैसे ही क्रियाशील होगा तो वो कम ज्यादा होगा इस संबंध में आप वीडियो बनाओ निर्गुण सगुण को वो लोग क्या कह रहे हैं कि भैया जब वो कुछ कर रहा है तो वह सगुण है जब वो नहीं कर रहा है तो वो निर्गुण है ये उनका कहना है आर्य समाज की जो सत्यार्थ प्रकाश है यानी कि जैसे अगर मैं जिस समय कुछ नहीं कर रहा हूं तो वो जो मेरे अंदर गुण नहीं है मुझे निर्गुण कहा जाएगा। कहां का सिद्धांत है भाई? तो बहुत बड़े बेवकूफी भरी बात है ये। मेरे अंदर गुण नहीं है जिस समय उन गुणों को यूज़ नहीं कर रहा हूं। ये कोई बात है क्या? और जिस मैं यूज़ कर रहा हूं अगर मैं निर्गुण हूं तो जिस समय मैं यूज़ कर
01:18:33:10 रहा हूं उस समय मैं सगुण हो गया। वाह! तो अभी मैं बैठा हुआ हूं, अभी मैं निर्गुण हूं कि नहीं? [हंसी] जी बताओ भाई समझ रहा तो वो इस पर जवाब नहीं दे रहे हैं बाकी सब कुलाचिया मारते रहेंगे सब करते रहेंगे मगर इस बात का जवाब नहीं देंगे निर्गुण निर्गुण सगुण हुआ कैसे एक रस ईश्वर जो है शक्ति के रूप में इधर उधर काम कैसे कर रहा है बल कैसे लग रहा है धक्का कैसे लग रहा है प्रकृति में प्रकृति को जो अवयव है उनमें इन सब बातों का जवाब है ही नहीं। अवतार तो यही से सिद्ध हो जाता है। जब एक रस ईश्वर क्रियाशील होता है तो निर्गुण ईश्वर जो होता है वो सगुण होता है। सगुण अवतार है वो उसका प्रथम व से सिद्ध हो जाता है। जो उनका ये कहना है कि अपने स्वभाव के विपरीत काम कैसे करता है? उसका जवाब है। ठीक है। जी। ये उसकी सामर्थता है कि वो निर्गुण होते हुए भी क्रियाशील और सगुण हो जाता है और वो अवतार भी लेता है उसी क्रम में आगे। ठीक है। जी चलिए धन्यवाद है आपका शिवानी भाई आपने सारी
01:19:48:19 चीजों का उत्तर दिया उसके लिए। बहुत-बहुत धन्यवाद। जय श्री राम सभी जय श्री राम। जय श्री राम।
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