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00:00:01:10 सभी को जय श्री राम। हमारी संजय पारा सर जी के साथ दो लाइव हो चुकी है। एक हुई थी तीन तारीख की रात को और अभी चार तारीख की दोपहर में भी हुई है अभीभी एक लाइव। नेटवर्क की प्रॉब्लम की वजह से टुकड़ों में हो पा रही है बातचीत और काफी चीजें हम जान चुके हैं। बस इतना है अभी फिलहाल कि संजय जी का कहना था कि जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम की संस्था शुरू करने वाले वीरेंद्र देव दीक्षित जी हैं जिनके बारे में उनके आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वालों के दो टुकड़े हो चुके हैं। मतलब कुछ मानते हैं कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी अभी जीवित है। उनका कहीं पर है छुपे हुए समाज से और कुछ मानते हैं वह जीवित नहीं है। वो शरीर छोड़ चुके दूसरे शरीर में आने वाले हैं। और वीरेंद्र दीक्षित जी ने जो ज्ञान लिया है वह लिया है लेखराज जी की शिष्याओं से जो उनकी मुरली जो मुरली के रूप में लेखराज जी का कहना है कि मेरे पास जो है
00:00:57:13 शिव जी आते थे और वो लिखवाते थे और मैं लिखता था तो उनकी शिष्याओं ने वो मुरलियां लेकर इनको दी है वीरेंद्र देव दीक्षित जी को और वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने उनसे मुरलियां लेकर यह कहा कि जो शिष्याएं हैं वह सही अर्थ नहीं बता रही है। लेखराज जी भी सही अर्थ नहीं बता पाए और मैं सही अर्थ बता रहा हूं। बात ऐसी है कि अगर लेखराज जी अब यहां पर हम लोग क्वेश्चन कर रहे थे संजय जी से कि जब लेखराज जी उसका अर्थ नहीं समझ पाए नहीं बता पाए और उनकी शिष्याएं भी उनका अर्थ वो मुरलियों का अर्थ नहीं समझ पाए नहीं बता पाई तो फिर उनकी कैपेसिटी पर कैपेबिलिटी पर डाउट हो जाना चाहिए कि भाई ये हमें जो मुरली भी दे रहे हैं वो भी डाउटफुल हो गई कि वो हो सकता है नकली हो कोई मिलावट हो या जो हो तो ये मैंने प्रश्न किया तो यही प्रश्न चल रहा था इसमें हम बीच में ले लेते हैं अब संजय जी को जी संजय जी जय श्री राम जी जय श्री राम भाई जी
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→ Used in: A · Video Sanjay Parashar Discussion | आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का दावा at 1:43:32 ↗
00:01:52:28 जैसे तो अब हम उस प्रश्न से आगे बढ़ जाते हैं जी अगर आपकी संतुष्टि हो गई है तो आगे बढ़ो नहीं संतुष्टि तो नहीं हुई इसमें आपने ये कहा ना कि कोर्ट आपने कहा को वो कोर्स ले लीजिए कोर्स तो लेना पड़ेगा वो सबको लेना पड़ेगा क्योंकि देखो देखिए कोर्स कोर्स किसी दो चीज को जब जानते हो ना देखो एक मेरी भी सलाह सुनो मैं भी पढ़ा लिखा हूं दो रोटी मैं भी खाता हूं जी जी जब तक जब तक हम दोनों एक चीज को ना पढ़े हो एक चैप्टर पढ़े और उसके बारे में डिस्कस करें तो अच्छा रहता है उसका निर्णय निकलता है ठीक है जब तक आप भी एक चीज को पढ़े मैं भी एक चीज को पढूं और फिर उसके बाद डिस्कस करें तो उसका आंसर निकलेगा सागर मंथन इसी को सागर मंथन कहते हैं कि पहले ज्ञान सागर को पढ़ा जाए समझा जाए ठीक है मैं मैं इसमें अपनी बात कह दूं देखिए भाई साहब कि जैसे आपने कहा है कि सात दिन का कोर्स कोई बात नहीं जैसे अभी मुझे कोई व्यक्ति मिलता है और वो यह कहता है मैं ईश्वर हूं मैं कहूंगा क्यों वो कहेगा कोर्स कर ले वो सात दिन का नहीं वो 50 दिन का कहेगा फिर तीसरा व्यक्ति कहेगा तीसरा व्यक्ति कहेगा कि मैं ईश्वर हूं और फिर मैं उससे पूछूं क्यों कि नहीं मेरा 150 दिन का कोर्स कर ले अगर भाई तुम जो कोर्स मुझे दे
00:03:08:02 रहे हो और उसमें वह ज्ञान मेरे क्वेश्चन का आंसर है उस उस कोर्स है तो वो आंसर मुझे अभी दो जिससे मैं उस कोर्स के लिए अट्रैक्ट हो जाऊं। दूसरी बात आपने शायद ये चैलेंज भी मेरे दो मेरे दो उत्तर है ना मेरे दो उत्तर है। दूसरा उत्तर ये है कि आपने जैसे चैलेंज किया हुआ है ना ओपन चैलेंज के कोर्ट में आके भी सिद्ध कर दो कोई। बिल्कुल सिद्ध होगा। तो ये जो आपने चैलेंज किया है जब कोर्ट कहेगी आप अपनी बातों को सिद्ध करिए यहां ये बातें समझ में नहीं आ रही तो आप कहोगे कोर्ट कोर्ट वालों से कि कोर्स करो हमारा जाके बिल्कुल बिल्कुल कहेंगे एसआईटी गठित करो और एक बार इस सारे ज्ञान का पूरा आकलन करवाया जाए बिल्कुल कहेंगे क्यों नहीं कहेंगे मगर उस कोर्स को अगर उस ज्ञान को समझे तो टाइम भी आपसे जब पूछताछ होगी तो कोर्स करने की थोड़ी ना कहोगे आप तो उस कोर्स में ठीक है तो कुल मिला के कुल मिला के इस प्रश्न ने कहा अभी आपके पास जवाब नहीं है। फिलहाल नहीं बिल्कुल हर बात का जवाब है। अब आपको समझ नहीं आ रहा उसमें मैं कुछ नहीं कर सकता। चलिए आगे बढ़ते हैं। अब मुझे ये बताइए कि आप ईश्वर को मानते हैं। है ना? जी बिल्कुल। तो ईश्वर है। यह सिद्ध कैसे होता
00:04:23:03 है? मतलब कैसे विश्वास हुआ? कैसे विश्वास करें कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है? इस दुनिया में कोई ईश्वर है तो यह गीता ने फाइनल बताया। इन मुरलियों ने फाइनल बताया। गीता क्या कहती है ना भाव ना भाव विते स ईश्वर इस मुरली ने बताया शिव बाबा सृष्टि पर सदा कायम है और फिर गीता ने बताया ये बात तो उसके लिए है जो गीता पर विश्वास करता हो अभी वो जो व्यक्ति खड़ा है आप बताओ आप अपनी बताओ आप गीता पर विश्वास करते हो कि नहीं मैं न्यूट्रल व्यक्ति की ओर से आपसे प्रश्न कर रहा हूं कि क्या आपके यहां जो ज्ञान दिया गया है जैसे आप पहले आप अपना पक्ष क्लियर करो। आप जय श्री राम बोल रहे हैं तो आप गीता पाठी हो कि नहीं हो? गीता पाठी हूं। बिल्कुल हूं। तो गीता पाठी हो तो गीता में गीता में आया कि नहीं आया? पहले
00:05:19:20 कि नास्ते विद्यते भावो ना भावो विद्यते सत गीता में आया कि नहीं आया? आया। कि सत्य का इस दुनिया में कभी विनाश नहीं होता। सत्य सदाकाल होता है। उसी सत्यनारायण की कथा घर गाई जाती है। इस बात को मानते हो? अरे भाई साहब मैं मानता हूं मैं जो मेरा जो प्रश्न है वह क्या है कि कोई नास्तिक व्यक्ति कोई नास्तिक व्यक्ति जो अभी तक भगवानता है ना अभी तक वो रामायण को मानता है उसके समक्ष ये कैसे सिद्ध करें उसको कैसे विश्वास दिलाएं कि इस दुनिया में कोई ईश्वर है क्या इस बारे में कोई विवेचना है अपने आत्म विज्ञान में जैसे हम कह रहे हैं जैसे मैं और क्लियर जैसे हम कह रहे हैं ये ईश्वर है। ये ईश्वर है। इसकी पूजा वो कहेगा कि भाई ईश्वर होता कौन है? मैं क्यों मानू कोई ईश्वर है? मैं क्यों पूजा करूं? तो वहां से मैं पूछ रहा हूं क्या आपके यहां पर क्या आपके यहां पर आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में वीरेंद्र देव वीरेंद्र देव दीक्षित जी द्वारा या फिर ब्रह्मा कुमारी लेखराज जी से आई हुई मुरलियों के द्वारा क्या इस बात पर विवेचना है कि हम किसी व्यक्ति को जो कि अभी ना तो वैदिक है ना अभी मुरलियों में विश्वास रखने वाला है ना गीता में विश्वास रखने वाला न्यूट्रल खड़ा हुआ है
00:06:34:24 वो समझना चाहता है कि मैं कैसे मानू इस दुनिया में कोई ईश्वर तो हमारे पास क्या थ्योरी है उसके लिए? उसके लिए एक थ्योरी सीधी सी है। जिसको आप नास्तिक समझ रहे हैं ना वो सबसे बड़ा आस्तिक होता है। जिसको आप बोल रहे हो कि नास्तिक है न्यूट्रल है। वो सब वो प्रैक्टिकल में चीज को जानना चाहता है। आप उसको नास्तिक कह रहे हैं। हमारी परिभाषा के अंदर वो सबसे बड़ा आस्तिक है। वो प्रैक्टिकल बात को जानना चाहता है। तो फिर नास्तिक कौन? भगवान और नास्तिक वो हुआ जो सच्चाई को जानते हुए भी पीछे हट जाता है कि नहीं आत्मा और परमात्मा का ज्ञान हमें नहीं चाहिए। या तो आत्मा को मानता हो या परमात्मा को मानता हो। देखिए नास्तिक शब्द की अगर विवेचना करेंगे तो ये आएगी कि जिसमें जो आस्तिक नहीं है नास्तिक। यानी कि जो भगवान के अस्तित्व पर विश्वास वो भगवान के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करता। मगर जो जानते हुए मुकरता है तो उसको तो कुछ और कहेंगे। उसको कुछ झूठ बोलने वाला कहेंगे क्योंकि वो मन में तो विश्वास कर रहा है मगर वो हां ऊपर से मना कर रहा है कोई बात नहीं तो जब देखो कर्म अकर्म विकर्म जब उसके कर्मों का पाप कर्म बढ़ेगा तो क्या उसको भोजा नहीं होगा भोजा होगा तो उसको परेशानी आएगी फिजिकली बीमारी आएगी या कोई दिक्कत
00:07:50:00 आएगी तो दुख में तो याद करता है ना फिर सब प्यार से नहीं करते तो दुख में करते हैं तब भगवान से याद आ जाता है नहीं नहीं नहीं बात ये है कि अभी आपसे एक सामान्य व्यक्ति पूछ एक नवयुवक पूछ रहा है मान लो मैं मुझे समझ लो कि भगवान है ये मैं कैसे मानू इस बारे में क्या ज्ञान विज्ञान दिया गया है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में वो दुख आएगा तब मैं मानूंगा उसमें वही बात हो गई मैं उस समय क्या मानूंगा क्या नहीं मानूंगा ये मैं अभी मान लूं ये वाली बात है ना तो तो मैं ईश्वर है ये विश्वास कैसे करूं मतलब मैं आपके पीछे पीछे चलना शुरू करूं कि भाई वीरेंद्र दीक्षित जी भगवान है या बीके के पीछे पीछे चलना शुरू करूं कि लेखराज जी भगवान है या उनके द्वारा बताया गया कि शिव बाबा भगवान है तो मैं इनके पीछे चलूं तो मैं पहले ये तो सेटिस्फाइड हूं कि हां भगवान है या तो ये पृथ्वी अपने आप मतलब जो प्रकृति वगैरह अपने आप काम कर रही दुनिया में कोई भगवान नहीं है। जी आप ही बोलते रहेंगे या बोलने का मौका भी मिलेगा। असल में बोलने का मौका जब मिलता है तो आप मेरे प्रश्न का जवाब ना दे के सीधे अपने फेथ को लाते हो कि मान लो दुख में तो याद करते एक मिनट रुको शिव जी अब नहीं ऐसा नहीं होता
00:09:05:01 है ये चर्चा नहीं होती आप आप बोलते जाएंगे चर्चा थोड़ी ना होती है और चर्चा चर्च घर में होती है आप सनातनी हो कि चर्च घर में रहने वाले हो आप आप जो है मैं अब चुप हो रहा हूं अब आप बोले जी बोलने तो देते ही नहीं हो आप कोई आंसर तो आप ले ही नहीं रहे भाई साहब मैं फिर से अपनी बात बता रहा हूं। मैं चुप हो रहा हूं। मैं फिर से अपने मैं चुप हो रहा हूं। आप बोलिए क्वेश्चन जितना छोटा करोगे क्वेश्चन जितना छोटा करोगे तो आंसर भी स्पष्ट मिले। आंसर तो ले ही नहीं रहे ना। इसका मतलब कहीं आप मुझे डेमोरलाइज तो नहीं करना चाहते हो? नहीं नहीं देखिए मैं मैं अपने क्वेश्चन को इसलिए एक्सप्लेन करता हूं क्योंकि जब मैंने छोटा पूछा था तो आंसर भी तो आंसर भी तो देने का मौका दो ना। आपने ये कह दिया ना कि दुख में तो याद करता है ना किसको करता है शास्त्र
00:09:57:10 ये बातें वेद शास्त्र में नहीं आई क्या दुख में सब याद करते हैं सुख में कोई नहीं याद करता वेद शास्त्र में ये उसके लिए है ना जो वेद शास्त्र में विश्वास करता हो अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं जो व्यक्ति न्यूट्रल खड़ा है न्यूट्रल जो खड़ा है जब दुख तो उसके ऊपर भी आते होंगे प्रकृति उसको भी प्रभावित करती होगी दुख सुख उसमें भी आते हैं कि नहीं आते हैं तो इससे जब आते हैं तो बड़े-बड़े लोग इससे भगवान का होना यह सिद्ध हुआ कि एक दिन उसको भी अकल आ जाती है। विश्व पिता कहा जाता है। विश्व पिता तभी कहा जाता है जब इस पूरी दुनिया उसको अपना बाप मान ले तभी वो विश्व पिता या जगन्नाथ कहा जाता है। नहीं नहीं कईयों को अकल नहीं आई है। कई मना करते हैं। बेशक उसका भी नहीं देखो शिवशंश अगर नहीं मानते तो उसका वो अनाड़ी पना लेकिन वो भी टूट जाता है एक दिन। मतलब हमें उसको समझाने के लिए कुछ नहीं है। समझाने के लिए आप जब एक बात बताइए आपको मैं कहने लग हूं कि हां वहां भगवान आया भगवान की पढ़ाई पढ़ाई जा रही है। आप मान गए क्या एकदम से नहीं माने आप अपने तर्क वितर्क में फंस गए। अर्जुन क्या एक दिन में मान गया था भगवान के कहने से कि मैं भगवान हूं। 18 मैं रुका हुआ हूं क्योंकि आप अपनी ओर से बोल लीजिए। मैं रुका हुआ हूं। फिर मैं आपका
00:11:12:14 आपकी बातों का उत्तर दूंगा। जी बोलिए। जी तो फिर जैसे आप पूछ रहे हो कि मैं कैसे मानूं जब आप पैदा हुए जब समझदार हुए तो आपकी मां ने ही तो बताया होगा कि तू कौन है? मैं तेरी मां हूं यह तेरा पिता है। तो ठीक और गलत का फैसला हमें भगवान ने बुद्धि दी है हर बात को जानने की पहचानने की। और रही बात ज्ञान की। सागर मंथन सागर ज्ञान का सागर है तो ज्ञान का सागर कौन है? पहले तो उसको जानो फिर मंथन करो। तो मंथन देवता भी करते हैं, दानव भी करते हैं। तो यह ब्रह्मा कुमारी और आध्यात्मिक ईश्वरी विश्वविद्यालय इतना छोटी चीज ना लगाओ आप। देवी और देवता तैयार हो रहे हैं। सत्य सनातन धर्म की स्थापना हो रही है यहां। तो आप जो क्वेश्चन जितना कर रहे हैं आप पता नहीं किस थ्योरी पर ले चल रहे हैं। सत्य सनातन धर्म को अच्छे से जानते हैं कि नहीं जानते हैं। मुझे नहीं समझ में आती ये बातें। और किसी चीज को जब तक आप चख के नहीं देखोगे। बगैर चखे आप खट्टा मीठा कैसे बताओगे? क्या चीज है ये? सत्य सनातन धर्म कब स्थापन हुआ? कब भगवान आते हैं? ईश्वर का मतलब क्या है? भगवान का मतलब क्या है? हरि का मतलब क्या है? हर शब्द का अर्थ है। लेकिन उलझा के खड़ा कर रही है दुनिया ना। सुलझने तो देती नहीं है। भगवान तो सीधा साधा सहज ज्ञान सहज राजयोग सिखाता है आकर के। बड़ी सहजता से
00:12:27:15 ज्ञान सुनाता है। लेकिन ये उलझाया किसने ये दुनिया? यह दुनिया उड़ जाने वाली तो बैठी है। इतने चारों तरफ बैठे हैं धर्म के मामले में और यह भारत भाई साहब आप मेरी बात का जवाब नहीं दे रहे। अगर मुझे कोई नास्तिक मिले तो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय की ओर से मैं उसको क्या उत्तर दूं कि जब तू दुखी होगा तब देख लियो जा। उससे हाथ जोड़ लो। ये उत्तर दूं। हां बिल्कुल और क्या करोगे? और क्या करोगे? इसके सिवा क्या? यही उत्तर है। मेरे पास तो है उत्तर। मैं जानना चाहता हूं कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी के पास है कि नहीं। आज से लगभग 3000 वर्ष सुनिए अब देखिए आपको मैंने सुना ना आपने उत्तर नहीं दिया अब मैं बता रहा हूं आज से ढाई हजार के बारे में जानते ही कुछ नहीं ब्रह्मा बाबा के बारे में कुछ नहीं जानते बताओ ना मैं आपसे पूछ तो रहा हूं गीता जो कहती है श्रद्धावानम अगर श्रद्धा और विश्वास ही नहीं है तो उसे बातें ही क्या करनी है श्रद्धा और विश्वास बात ही नहीं करनी है ये बताइए आपके अंदर बचपन से बचपन से श्रद्धा थी। हां जी बिल्कुल थी। पैदा होते ही श्रद्धा है आपके अंदर। तो जब से होश संभाला तब से श्रद्धा थी। भगवान को जानना पहचानना कोई एक पॉइंट है ना जहां आपको जहां आपको बताया गया जहां पर श्रद्धा नहीं थी।
00:13:42:26 कोई एक पॉइंट है ना जहां श्रद्धा नहीं थी। फिर भी बताया गया। ये सब की अपनी अंदर की ये अंदर का ज्ञान है। आप पर चिंतन करते हो। मैं स्वचिंतन करता हूं। मैं कैसे फील करूं कि इस दुनिया में ईश्वर है। बताइए तो बगैर ईश्वर के आप ये दुनिया वैसे ही बन गई क्या? यानी कि चलो अब एक बात बोली है ये दुनिया बनाने वाला ईश्वर है। अब आपने एक बात बोली है तुम इतनी दिक्कतों के बाद आपने भी आप गीता
00:14:22:26 हम किसी नास्तिक को क्या जवाब देंगे? क्या वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने बताया है अब आपने एक बात क्या है सृष्टि ऐसे ही बन गई ये है जवाब सृष्टि बनाने वाला ईश्वर है यही तो है सृष्टि बनाने वाला ईश्वर है बिल्कुल मनुष्य सृष्टि का भी बीज रूप बाप है जिसने पूरी सृष्टि को रचा हुआ है बाप बगैर बच्चे पैदा होते हैं क्या ईश्वर ठीक है क्योंकि ईश्वर का मतलब क्या होता है ईश्वर का मतलब क्या होता है ईश माने शासन्ता वर माने श्रेष्ठ श्रेष्ठ जो इस दुनिया प्यार से शासन करता है उसको ईश्वर कहते हैं। मतलब आपका कहना है कि जिसने सृष्टि बनाई है वो ईश्वर है। जी जो बहुत प्यार से ईश्वर का ईश माना शासन करता है। श्रेष्ठ से श्रेष्ठ शासन करता है। इसलिए उसी ने गीता लिखी है। श्रीमद् भगवत गीता सर्वस्त्र शिरोमणि शासन बहुत मैं इस बात से मैं सहमत हूं। आपने अब एक मैंने जो क्वेश्चन किया है नास्तिक को क्या जवाब दें? उससे रिलेटेबल बात आपने ये बोली है कि जिसने सृष्टि बनाई है वो ईश्वर है। सृष्टि बनाई है मतलब ये सूर्य, चंद्रमा इत्यादि सब उसी ने बनाया है। बिल्कुल बिल्कुल देखो इस बारे में तो क्या कहते हैं? अल्लाह ताला ने जन्नत बनाई, आसमान बनाया पर वो अल्लाह ताला को कोई नहीं जानता।
00:15:38:02 नहीं वो जानने वाली बात आगे की है। आप अभी यहां पे है ना कि उसने सृष्टि बनाई है। यहीं पे है ना? जी उसको उस रचयता को जानना है। उसको जानना है। उस जी नास्तिक का नास्तिक का जो अगला अगला प्रश्न होता है वो ये होता है कि मैं कैसे मान लूं कि कोई एक शक्ति है जिसने इसको बनाया है वो मानना अब एक बात बताइए समय होता है हर चीज का अभी आप किसी चीज को नहीं समझ पा रहे हैं। एक दवाई काम नहीं करेगी, दूसरी करेगी, तीसरी करेगी। इस दुनिया में जब पतित पावन कहते हो, दुख हर्ता सुख्ता कहते हो तो क्यों कहते हो? दुखों का पहाड़ टूटेगा इसका मतलब तभी तो दुख हर्ता सुख्ता कहा जाेगा। अगर समय का नाम लेकर के यानी कि भाई साहब कुल मिला के एक ही बात हो रही है कि समय या कोर्स का नाम लेकर के हम कोई बात बोल सकते हैं। यानी कि कोई आप ही आप ही मेरे सामने खड़े हो। मैंने कहा मैंने कह दिया मान लो। मान लो मैंने कह दिया कि आपकी सारी बातें झूठी है। आप कहोगे कैसे? मैं कहूंगा समय आने पता लग जाएगा। यह कोई बात है क्या? हां। तो और एक बात बताइए क्या आप समय सृष्टि का कौन सा समय चल रहा है? कल्पांत चल रहा है। कल्पांत का जो आप वेद शास्त्र जो पढ़ रहे हैं वो कल्पांत
00:16:53:13 के समय क्या है? सारे के सारे आपको ये भी नहीं पता। क्या मतलब भाई साहब? मैं कह रहा हूं नास्तिक ये बोलेगा। मैं कैसे मान लूं यह सृष्टि किसी ने बनाई है प्रकृति है थी और धीरज धर वनवा जब समय पड़ता है बड़े-बड़े मान जाते हैं प्यार से कौन मानता है इसका मतलब मैं फिलहाल आपसे ये कह सकता हूं कि आपकी सारी बातें झूठी है धीरज धरो आपको समय आने पता चल जाएगा जी जी मैं कह सकता हूं हां तो सत्य को ही दबाया जाता है इस दुनिया में झूठा ही साबित किया जाता है और दुनिया कर क्या रही है धर्म कहना अनुचित मान रहे हैं जिस तर्क के आधार पे आप अपना कहना उचित बता रहे हैं उसी तर्क के आधार मेरा कहना अनुचित बता रहे हैं। आपको मेरा विरोध नहीं करना चाहिए। मैं भी वही बात बोल रहा हूं जो आप बोल रहे हैं। क्योंकि आप कह रहा हूं मैं समझ जाऊंगा। मैं कह रहा हूं आप समझ जाओगे। धर्म की बात कर रहे हो ना कर्म की बात कर रहे हो। पता नहीं कहां धर्म की बात ऐसे होती है। सुनिए मैं बता रहा हूं। धर्म की बात क्या कर रहा हूं। सुनिए। धर्म की बात ऐसे होती है। जब तक हम ईश्वर का अस्तित्व ही सिद्ध नहीं करेंगे। जब तक हम ईश्वर को ईश्वर का अस्तित्व ही सिद्ध नहीं करेंगे। तब तक कोई क्यों ईश्वर के नाम से बताई गई बातों को धर्म मानेगा? जब धर्म की बात करनी हो गीता हाथ में लेकर के आया करो। गीता के एक एक श्लोक में भगवान के अस्तित्व को बताया गया। गीता पढ़ो आप एक बार आराम से। मैं भाई साहब मैं गीता पे भी आऊंगा। अभी
00:18:08:14 मैं पूछ रहा हूं। मैं गीता से ही बोलूंगा। अभी मैं अस्तित्व को सिद्ध करूंगा ना। मैं उपनिषद से बोलूंगा। मैं उपनिषद से बोलूंगा। जब मैं भगवान का अस्तित्व सिद्ध करूंगा। जब मैं भगवान का अस्तित्व सिद्ध करूंगा। मैं उपनिषद से बोलूंगा। आपके पास है वीरेंद्र जी के द्वारा दिया गया ऐसा कुछ नास्तिक का मुंह बंद करने का है चुनौती दे रहे हो आप चैलेंज दे रहे हो दुनिया को नास्तिक को चुप करा पाओगे सब चुप हो जाएंगे बड़े-बड़े चुप हो जाएंगे तो कैसे होंगे ऐसे ही चुप होंगे कोर्स कर लेना समय आने पे चुप हो जाओगे ऐसे होंगे चुप भाई एक तो सीधी सी बात है या तो ज्ञान से समझेगा या फिर हालात खराब होंगे तब समझेगा ज्ञान दो ना मुझे ये क्यों कह रहे हो गीता लेके आओ तब बात करना ज्ञान दो मुझे हां तो फिर जाओ ना हमारे अरे मधुबनों के दरवाजे खुले हुए दिन रात जाके लोरा ज्ञान जा आपके पास नहीं है बताने को कुछ अरे जो बता रहे हैं वो तुम्हें सहज नहीं हो रहा है तुम कौन सा ज्ञान लेना चाहते एक लाइन बताई है कि सृष्टि उसने बनाई तो मैं मैं पूछ रहा हूं ये कैसे सिद्ध होता है कि सृष्टि उसने बताई बनाई है इस बारे में आप बोलिए क्या ब्रह्मा ने सृष्टि नहीं रची फिर वही बात आप वो बात बोल रहे हो कि मेरा फेथ किसी किताब पे है तो मैं उस किताब के आधार पे मान लूं मैं कह रहा हूं एक न्यूट्रल व्यक्ति नास्तिकता का जवाब क्या है? हमारे शास्त्रों में दिया है,
00:19:23:22 उपनिषद में दिया गया है। वो मैं पूछ रहा हूं क्या आप जिसे भगवान कह रहे हो उसने आपको बताया कि नहीं बताया? ईश्वर का अस्तित्व सिद्ध किए बिना आत्म्ञान क्या हो सकता? क्या आपको खुद समझ में आ रहा है? ईश्वर की परिभाषा आप खुद जानते हो? उसको काट नहीं पाएंगे। एक इंच मात्र तब आप उसको एक इंच मात्र काट नहीं पाएंगे। हां तो आप तो भगवान से भी बड़े हो गए। इससे क्या मतलब है? से बड़े हो गए। भाई साहब जो पॉइंट ये है क्या आपके आप जिसे भगवान कह रहे हो उसने आपको नास्तिकता का खंडन बताया है कि नहीं? नास्तिक आपके सामने खड़ा है। वो मैं क्यों तुम्हारे धर्म को मैं क्यों तुम्हारे ज्ञान को? तुम मुझे पहले सिद्ध करोगे ईश्वर है। मैं कर सकता हूं। आप कर सकते हो क्या? आप कर रहे हो। आप करो सिद्ध ईश्वर को। पहले आप करो। हां ठीक। ठीक है। पर फिलहाल अभी तो ये मान लेता हूं मैं कर देता हूं। मैं कर देता हूं। मैं कर रहा हूं। मैं कर रहा हूं। मैं कर रहा हूं। अभी ये मान ले आप सिद्ध नहीं कर सकते। हां आप ये मानिए आप सिद्ध नहीं कर सकते। आप सिद्ध करिए ईश्वर को। हां चलिए अब ये बात है। मैं करण उपनिषद से दुनिया देख रही है।
00:20:39:08 चलो आप चुप हो जाओ तो मैं कर आप थोड़ा मौन रहिए तो मैं करूं। जी। बृहधारण उपनिषद बहारण्यक उपनिषद एक तीन 28 असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय मृत्युमा इसी को क्लियर कर दो बस अरे भैया इसी को क्लियर करता आप प्लीज थोड़ी देर शांत रहिए मैं अगर सिद्ध ना कर पाऊं तो आप बताना और मेरी बात को काट के दिखाना अब चुप रहिए थोड़ी देर प्लीज उपनिषद का वाक्य में बता रहा है प्राणी मात्र के विषय में भाई साहब प्लीज प्लीज प्लीज इंटरप्ट मत करिए। अब मैं आपको बता रहा हूं नास्तिकता का खंडन। ठीक है? उपनिषद का यह वाक्य हमें बताता है प्राणी मात्र के विषय में कभी ना मरने की और अनंत ज्ञान को प्राप्त कर लेने की और सदा आनंदित रहने की प्यास विद्यमान है। इसको कहते हैं सत प्राणी मात्र में। प्राणी मात्र में एक नास्तिक के अंदर भी यह तीन तरह की प्यास सदा विद्यमान है। कौन-कौन सी प्यास है? पहली प्यास है सत की प्यास। मैं सत हो जाऊं। अमरता की प्यास। दूसरी प्यास है ज्ञान की प्यास। मैं मूर्खता
00:21:54:16 रहित हो जाऊं। ऐसा कुछ ना हो जो मुझे ना पता हो। एक मिनट बीच में आप बीच-बीच में बोलिए मत। प्लीज मैं भरू। अच्छा ठीक है। ठीक ठीक है। आप आप करिए। हम ही भरिए। तीसरी प्यास है सदा आनंदित रहने की प्यास। मैं कभी भी दुखी ना हूं। ये तीन तरह की जो प्यास है ये तीन तरह की जो प्यास है सत, चित्त, आनंद। ये तीन तरह की प्यास नास्तिक के अंदर भी है। एक नास्तिक भी कई बार सोचता है। बारिश ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। धूप ज्यादा पड़ रही है तो कम हो जाए। यानी कि वो मौसम को भी कंट्रोल कर लेने की भावना उसके मन में कई बार आती है। कल इंडिया पाकिस्तान में कौन जीतेगा? तो काश हमारा भारत जीत जाए। इसका मतलब उसके मन में भी भविष्य को देख लेने की और भविष्य को कंट्रोल कर लेने की चाह मन में आती है। एक नियम है कि हमारे मन में जिस जिस चाह का जो जो चाह विद्यमान है उस उस चाह का विषय इस दुनिया में मौजूद है। जैसे कि हमारे अंदर प्यास है तो हमारे अंदर प्यास होने से सिद्ध हो जाता है कि इस दुनिया में पानी है। हमारे अंदर भूख है
00:23:09:20 तो हमारे अंदर भूख होने से यह सिद्ध हो जाता है कि इस दुनिया में भोजन है। हमारे पास देखने की क्षमता है। तो उससे सिद्ध होता है कि दुनिया में दृश्य है। हमारे पास सुनने की क्षमता है। तो उससे सिद्ध होता है कि दुनिया में आवाज है। तो जिस प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त है ना देखने की विषय से दृश्य सिद्ध होता है। देखने की चाह से दृश्य सिद्ध होता है। भूख से भोजन सिद्ध होता है। प्यास से पानी सिद्ध होता है। उसी प्रकार एक नास्तिक व्यक्ति के अंदर भी व्याप्त सतित आनंद की चाह से सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर का अस्तित्व सिद्ध होता है। अच्छा अन्य
00:23:52:26 नहीं मानेगा नास्तिक तो वो बोल दे कि वो जो है वो मरना चाहता है। मैं क्वेश्चन पूछूं एक मिनट मैं पूरा कर लूं। मैं पूरा कर लूं। फिर क्वेश्चन पूछिए। नास्तिक व्यक्ति भी नास्तिक व्यक्ति भी कभी दुखी नहीं होना चाहता। वो भी ये सोचता है। मेरे पिता कभी ना मरे। मैं बूढ़ा कभी ना हूं। मैं यह सब ना करूं। तो यह सब उसके अंदर भी घटित होता है। अगर वो मुंह से कह भी दे, वो मुंह से कह भी दे कि भैया मैं तो मरना चाहता हूं। उसके ओर जब घुमाएंगे ना घूसा या लपाड़ा तो उसकी पलक झपक जाएगी। इसका मतलब वो भले ही मुंह से कह रहा है मगर जो उसकी जो आंख है वो ये बता रही है कि मरना नहीं चाहता है। सर्वाइवल है उसके अंदर। वो सर्वाइव करना चाहता है। छोटा सा जो बात पूछने की थी वो क्लियर करो। भाषण नहीं चाहिए। सार में टिका हुआ। अब आप प्रश्न पूछिए। प्रश्न ये है परमेश्वर किसे कहते हैं? भाई साहब अभी बात ये हो रही है आप ना करें। अगर आप एज ए नास्तिक काउंटर करना चाहते हैं मुझे तो काउंटर करिए। आपका जो आपके पास नास्तिकता का खंडन नहीं था। मैंने अभी नास्तिकता का खंडन किया है। आपके पास है नास्तिकता खंडन अरे भाई शिवशु
00:25:08:14 सारा दिन मैं कोई बच्चा थोड़ा ना हूं। मैंने दुनिया देखी है यार। ऐसे बातें ना करिए भाई साहब ये सब बातें ना करिए आप जो विषय चल रहा है उस पर बात करनी है तो बात कर वो सत्य चित्त आनंद स्वरूप कौन है परमात्मा कौन है ये बताइए परमेश्वर कौन है ये बताइए अभी विषय चल रहा है कि ईश्वर है कि नहीं पहले इसी बात पे आइए सुनिए सत्यम ज्ञानमंत ब्रह ये परिभाषा है दो एक सत्यम ज्ञान अनंतम जो है जो ज्ञान है जो अनंत है वही ईश्वर है जो सर्वशक्तिमान है वही ईश्वर है ये हमने उसकी उसके बारे में आपको बता दिया थोड़ा ब्रेक भी ले लिया कर थोड़ा भी ले लिया सर्वशक्तिमान का मतलब क्या होता है भाई साहब अभी आप पहले नास्तिकता पे आइए बताओगे तो अरे आप मुझे तोड़िए ना पहले नास्तिक पे तोड़िए आप मुझे आपको मेरी परिभाषा स्वीकार है कि नहीं नास्तिकता कुछ भी नहीं आ रहा आपको एक भी बात नहीं डिस्क्राइब कर पा रहे हो नास्तिक नास्तिक को ले बैठ गए हो और दुनिया इतनी आस्तिकों की भरी पड़ी है उनके
00:26:23:15 लिए कुछ बोलोगे एज ए नास्तिक क्वेश्चन करो एज ए नास्तिक क्वेश्चन करो आप नहीं सिवान साहब गलत ट्रैक जा रहे हैं आप पहले ये बताइए सत्य की परिभाषा बताइए सत्य किसे कहते हैं जो शाश्वत हो जो उसको कैसे सिद्ध अरे रुको भाई उसको सिद्ध कैसे करोगे कैसे शाश्वत सिद्ध ऐसे करेंगे कि भैया नास्तिक के मन में भी नास्तिक के मन में भी चार सत्य हो जाने वो भावना की बात है बात पे ट्रैक से मत जाओ शाश्वत का मतलब होता है प्रैक्टिकल में हमारे सामने हो शाश्वत का मतलब जो आंखों से देखूं और पहचानो जानू कि हां ये सत्य है चलो ये कहां लिखा है कहां लिखा है जो अपने सामने हो वही हो इसका मतलब इसका मतलब हवा को नहीं मानेगा आदमी जो जो चीज नहीं दिख रही है उसको नहीं मानेगा एक मिनट मिनट रुक जा भाई रुक जा इस भाषण को कहीं और दे दियो पागल भाई देख भाई तू बात करनी है तो बात नहीं हो पाएगी भाई बहुत देर हो गई मैंने सुन लिया लेकिन बात से भागो भाई तू बात करनी है तो निकल जा भाई तू जा सकता है भाई तेरे पास ना ज्ञान है ना कुछ है तू जा सकता है भाई कुछ नहीं है कुछ भी नहीं है आपके पास चल निकल चल निकल ये कोई
00:27:39:06 कुछ नहीं है बस केवल पाखंड कुछ नहीं है इन लोगों के पास नाटक कंपनी खोल रखी है ये आ रहा है वो आ रहा है ये जाएंगे वहां धर्म की स्थापना करने के लिए तू तड़ाक पे आ गए रुक जा भाई ये भाई वो भाई आ गए ये है असलियत इनकी विश्वविद्यालय वालों की और बीके वालों के विरुद्ध है। हालांकि उनकी भी यही पोल पट्टी है। जब हम इस तरह से सिद्ध करेंगे ना तो इनका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा। क्यों नहीं सिद्ध होगा? कि जिसने सृष्टि बनाई उसने पूरी सृष्टि बनाई ना। पहली बात तो इनके यहां माना ही नहीं जाता सृष्टि बनाई है ईश्वर ने। जब ये पूरा नाटक है तो बनी बनाई है सृष्टि। काहे की काहे की सृष्टि बनाई फिर? झूठ बोल रहे हैं खुद ही। अगर सृष्टि बनाना मान लो बनाने की बात मान लो तो वह पूरी सृष्टि बनाई कि नहीं बनाई पूरी सृष्टि का कंट्रोल है कि नहीं है सबका शासन करने वाला है हम सबका शासन इनके हाथ में है कि
00:28:54:07 नहीं है इनके ईश्वर के हाथ में तो ईश्वर के हाथ में सबका शासन है तो कैसे है वो तो एक जगह है वो तो सर्वव्यापी है ही नहीं वो तो एक जगह है ना तो भाई उसकी शक्ति सर्वव्यापी है यानी कि वो वो यहां पे है। उसकी शक्ति पूरे में है। अब उसमें और उसकी शक्ति में अंतर है। क्योंकि वो तो यहां पे है ना। वो पूरे में नहीं है। अब उसमें और उसकी शक्ति में अंतर है। तो अंतर है तो कहीं ना कहीं जो शक्ति है वो कम है। तो जब कम है शक्ति जब शक्ति कम है तो क्या मतलब है उसका? कि ईश्वर का कंट्रोल सब जगह शाश्वत रूप से नहीं है। यहां ज्यादा यहां कम है। शाश्वतता भंग हो गई। यह ईश्वर नहीं है। कंट्रोल पूरी जगह होना चाहिए बराबर। तो क्या मानना पड़ेगा? शक्ति भी वही है। मगर ये तो मानते नहीं इनका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा। दूसरी बात अगर उसने सृष्टि बनाई है तो कोई 5 किलोमीटर के एरिया की सृष्टि तो बनाई नहीं है। पूरी लंबी चौड़ी सृष्टि बनाई है। उसमें कहीं पर कुछ हो रहा है, कहीं पर कुछ हो रहा है। अगर उसने सृष्टि बनाई है मान लीजिए कि पांच अगर ऐसा मान ले कि उसने 5 किलोमीटर की सृष्टि
00:30:09:10 बनाई है। तो 5 किलोमीटर की सृष्टि बनाई है और बगल के 5 किलोमीटर की सृष्टि नहीं बनाई है। मान लीजिए सपोज करिए तो क्या दिक्कत आएगी कि बगल वाले में ज्वालामुखी फट रहा है और मैंने जो सृष्टि बनाई है उसमें मुझे गड्ढा नहीं होने देना है अभी हम तो बगल में ज्वालामुखी अगर फट गया उसका यहां पर आया प्रभाव तो गड्ढा हो जाएगा तो ये जरूरी है कि जिसने ये 5 किलोमीटर बनाया हो उसी ने ये भी 5 किलोमीटर बनाया हो अब ये भी जरूरी है कि हर 5 किलोमीटर के एरिया में क्या-क्या घटित होने वाला है मुझे पता हो तो इस तरीके से मैं सर्वज्ञ हो गया सृष्टि का निर्माता अगर बनूंगा तो मैं सर्वज्ञ होना पड़ेगा। उसके बाद क्या जरूरी है कि जो पूरी दुनिया में जो भी कुछ घटित हो रहा है उसको मैं रोक सकूं। अगर मेरे अनुसार मुझे चलाना है सृष्टि को तो फिर मुझे सर्वशक्तिमान होना पड़ेगा। अब सर्वशक्तिमान होने का मतलब क्या हो गया? देश कृत काल कृत परिस्थिति कृत किसी भी प्रकार की बाधा से मुक्त हो तो ये तो अवतार मानते नहीं है हम तो इनका ईश्वर ईश्वर ही सिद्ध नहीं होगा नास्तिकता का खंडन कौन सा ईश्वर करता है जो सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म वो ईश्वर जो अबाध्य है हमारी व्यवहारिक भूख क्या है कहां से
00:31:24:14 पता चलता है कि हमारे मूल में जो है सच्चिदानंद की प्यास है व्यवहार से व्यवहारिक भूख भी है ना व्यवहारिक भूख क्या है? बारिश ज्यादा हो रही है तो कम हो जाए। यहां से हम इसके अंदर जाते हैं। मूल में पहुंचते हैं। तो जब व्यवहारिक भूख है तो व्यवहारिक भूख का विषय भी है जो सब कुछ कर सकता है। सर्वशक्तिमान ईश्वर और जब इसके मूल में जाएंगे तो सच्चिदानंद है तो उसके भी मूल में जाएंगे तो सच्चिदानंद है। कनेक्शन हो गया। हम तो यह तो है ईश्वर। अब इनसे हमने पूछा भैया ईश्वर की प्राप्ति ईश्वर की सिद्धि कैसे होती है? तो ये बोल रहे हैं गीता हाथ में ले बात करो। फिर बोल रहे हैं कि तुम तुम बता दो। तो इनको कुछ आता जाता नहीं जो इन्होंने रट्टा मार लिया है। केवल इनके पास वही है और ये चुनौती देते फिर रहे हैं। कोई व्यक्ति आ जाता है मनुवादी हैं तो इनके ये हाल होते हैं। ना इनको ये पता है उस पर विश्वास कैसे किया जाए पीछे से और उल्टा ये तो और दो कदम आगे हैं। वे वीरेंद्र देव दीक्षित जी के द्वारा कही गई बातों पर भी अविश्वास है। इसका मतलब कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी का ज्ञान नहीं दे रहे हैं। क्यों? क्योंकि वीरेंद्र देव दीक्षित जी तो झूठ बोल सकते हैं। क्यों बोल सकते हैं? क्योंकि उनके मन में मालूम था मैं भगवान हूं मगर वो कहे कुछ और रहते हैं। मैं भगवान नहीं वो भगवान है। हम तो वो
00:32:39:15 तो झूठ बोल रहे थे इनके अनुसार। नहीं तो इनकी वाणी प्रमाण मानी जाए। माननी पड़ेगी। ये हमारे ऋषि मुनि हो गए। इनकी वाणी को प्रमाण मान लो भाई। है कि नहीं? क्यों माना जाए? क्योंकि इन्होंने एमए कर रखा है इंग्लिश से और यह कोर्ट में जाने एक चुनौती देते हैं लोगों को और चुनौती देके कोर्ट में क्या कहेंगे हाई कोर्ट में कोर्स कर लो मेरा सात दिन का समय आने पता लग जाएगा ये कहेंगे वहां ये चुनौती है इनकी हम देख रहे हो ये थी इनकी मुरली की कहानी जो मैं सुन सुन के यहां तक लाया हूं यह चुनौती दे रहे हैं कोर्ट में जाके जब कोर्ट पूछे हां भाई आपकी चीज कैसे सिद्ध होती है कोर्स कर लो समय आने पता लग जाएगा जज साहब इसलिए मेरा फैसला अभी कर दो। अच्छा छ साल में पता नहीं लगा जज साहब को। फिर सुनवाई हुई। भैया अभी तक तो पता नहीं लगा। क्या करें? अरे समय आने पता लग जाएगा। जज साहब
00:33:41:10 कौन है भाई? कौन है? जी टी एफ बी एन एन कौन है ये? अपना चेहरा दिखाएं। एक कोई है वह कह रहे हैं कि तुम्हें कितना पता है भगवान के बारे में जितना पता है तुम जैसों के लिए पर्याप्त है हमें जितना पता है वो तुम जैसों के लिए पर्याप्त है पाखंडियों के लिए और जो विधर्मी लोग हैं उनके लिए पर्याप्त है ना कभी आ जाना कभी ये जो भाई हम चुनौती देते थोड़ी ना फिर रहे हैं तुमने चुनौती दी है ना आ जाओ सिद्ध कर दो कोर्ट में आ जाओ ये कर दो वो कर दो अपनी फैंटसी की दुनिया से बाहर आ जाओ जिस दिन मनवादी से पाला पड़ गया सामना हो गया गिग्गी बंध जाएगी।
00:34:30:24 हाय बड़े तुम्हें कितना पता है नास्तिकता का तोड़ नहीं है। चले हैं धर्म की चीजें बताने। धर्म की शुरुआत होती है नास्तिकता के अंत से। बिना नास्तिकता के अंत से कहां से धर्म? काहे का धर्म? इसीलिए कहते हैं बता दी परिभाषा तो तू तड़ाक पे आ गया व्यक्ति देखो ये है सच रुक जा ये ये नहीं है वो नहीं है
00:35:08:19 खुद ज्ञान ज्ञानी बनके कौन बैठा है ये बैठा है प्रश्न मैं पूछ रहा हूं सवाल का उत्तर नहीं फिर क्या पूछा परमेश्वर कौन है परमेश्वर कौन है ये रामपाल हो गया यहां पे कबीर को परमेश्वर नहीं कहा जाएगा तो मैं जो है मना कर दूंगा। इस पर आ गया एक ही परम तत्व जो सत्यम ज्ञान अनंतम ब्रह वाला जो परम तत्व है जो अध्य है जो सृष्टि का रचयिता है वो पांच रूपों में प्रकट होता है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश कालांतर से कल्प वेद से यही पांच रूपों में से कभी विष्णु भगवान भगवान की प्रधानता के साथ महिमा गाई जाती है और कभी शिव जी की प्रधानता के साथ और कभी दुर्गा माता कभी गणेश जी कभी ब्रह्मा जी इस कारण से अलग-अलग जब भगवान के अलग-अलग रूपों में उनकी महिमा का गान हुआ तो उस रूप में ये पुराण रचे गए हैं। इसमें इनमें पांचों में कोई भेद नहीं है। तात्विक
00:36:06:02 लीला भेद है। लीला हम ये है परमेश्वर की पहचान। और जब आप खुद कह रहे हो कि परमेश्वर झूठ बोल सकता है तो उसने तुम्हें जो ज्ञान दिया है कि मैं यह था मैं वह था वो वो था सब झूठा हो सकता है। इसलिए अपुरुष ग्रंथ अपौरुषय जो भगवान ने भी नहीं रचे ऐसे ग्रंथ क्योंकि भगवान की सत्ता के अंदर ही दुनिया में सब कुछ है। है ना? विद्याद सब कुछ भगवान के उसमें है। यह भी गीता में लिखा है। सबका स्त्रोत भगवान ही है। यह भी गीता में लिखा है। हम तो जब सबका स्त्रोत झूठ और सच दोनों का स्त्रोत भगवान ही है तो फिर उनके द्वारा कही गई बात पर विश्वास कैसे अपौरुषय ग्रंथों पर विश्वास है और फिर उसके बाद जो ग्रंथ उनके अनुसार चलेंगे
00:37:06:28 उसके बाद उनके उस अपौरुषय ग्रंथ यानी वेद आदि शास्त्रों के अनुसार जो ग्रंथ आगे चलेंगे वो ग्रंथ हमारे लिए स्वीकार्य होंगे जैसे कि गीता पुराण स्मृति ग्रंथ महाभारत रामायण ये सब हमारे लिए प्रमाण इसलिए है क्योंकि वेदों के अनुसार चले
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00:37:28:21 अभी कोई पूछ रहे थे आपके साथ कनेक्ट कैसे होंगे तो हमने लिंक दिया हुआ है आप आ सकते हैं क्या नाम है इनका शास्त्रवाद जी हां जी शास्त्रवाद जी जय श्री राम दे लिया इनके वीरेंद्र के आध्यात्मिक विश्वविद्यालयों वालों का ज्ञान यही होता है भैया ये लोग आएंगे अपना देंगे वो भी चैलेंज करेंगे लेकिन उत्तर होगा नहीं इनके पास चैलेंज करेंगे फिर कहेंगे कोर्स कर लो अरे भाई जो कोर्स में मेरे प्रश्न का अगर जवाब है तो तुम अभी क्यों नहीं दे रहे हो तुमने तो कोर्स किया है तुम तो 12 साल से कर रहे करवा रहे हो कोर्स क्या कोर्स में तुम पीटते हो क्या व्यक्ति को बंद कमरे में बोल बाहर विरोध तो नहीं करेगा जाके बोल बोल हां जो व्यक्ति मैनपुलेट हो जाए उसका कोर्स कंप्लीट [हंसी] इनका कहने का अर्थ ये होता है कि भाई जो ये बोल दे वही मान लो हां उसप क्वेश्चन मत करो तो अगर ऐसा ही है तो फिर मैं जो बोलूंगा वो क्यों नहीं माना जाएगा ये भी बात तो
00:38:43:25 है अच्छा मैंने भगवान भगवान को देखा भाई तुम्हारी ये बात कैसे मान ले तुमने देखा है तीसरा आंख का ये लोग बात करते हैं थर्ड आई कहां से क्या प्रमाण है इसका आपने पूछा इसका तो उत्तर नहीं था इनके पास एक प्रश्न इसमें उत्तर नहीं करता इसी प्रकार एक नंबर का पूरा नाटक चल रहा है पूरा नाटक पूरी नाटक कंपनी खोल के बैठ बैठ गए और सब स्टोरी लिख दी है स्क्रिप्ट लिख दी है ये हुआ वो हुआ बंपर स्क्रिप्ट पहले लेखराज जी के यहां से चालू होता है। फिर वो उनका उसको उसका विरोध ये करते हैं वीरेंद्र देव दीक्षित फिर जो है ये चालू करते हैं भाई वीरेंद्र देव दीक्षित से भी आगे वो भी कहानी जोड़ दी वीरेंद्र देव दीक्षित नहीं कह रहे हैं कि मैं जो है वो सेवक राम हूं ये कह रहे हैं मैं सेवक वो सेवक राम थे क्या बात है वही वाली बात कबीर नहीं कह रहे हैं कि मैं भगवान हूं कबीर कह रहे हैं मैं तो भक्त वो हूं भक्त हूं फिर कबीर भगवान है लो तो फिर प्रश्न वही आ जाएगा परमात्मा कौन है तुम बताओ
00:39:49:13 मतलब प्रवचन देने खुद आए हैं। और जब क्वेश्चन खुद पे नहीं रहा आंसर नहीं आया तो लो यही होता है भैया जब पास नहीं होता है तो 50 बार सुनो ये क्या कह रहे हैं उनको पूरी बात कहने दो तब पता चलेगा कितनी बार कहने दे पूरी स्टोरी सुनिए है एक घंटे की उनकी क्या हुआ कैसे हुआ हां भाई मेरा सीधा सा प्रश्न है नास्तिक व्यक्ति के लिए आपके पास पास क्या विचार है? क्या कहोगे उससे? पता लग जाएगा। जा ये है हमारे हमारे अज्ञान। हम अभी राइट नाउ हमारे सामने नास्तिक खड़ा है। मना कर रहा है कि भाई मैं नहीं मानता भगवान को। क्यों मानू भगवान को? क्या कहोगे उससे? कुछ तो कहने ये है कहना। जाओ पता लग जाएगा। ये कोई बात है क्या? जाओ तुम्हें भी पता लग जाएगा। कुछ दिनों बाद जाओ घूमते रहो। ऐसे ही पता लग जाएगा। पता लग जाएगा। खेलते रहो। यह खेल है। पता लग जाएगा। या तो इनकी बात मानो या पता लग जाएगा तो फिर मेरी बात मानो या तो फिर पता लग जाएगा। ठीक है?
00:41:01:08 कौन आया है? परिस्थिति उत्सव आपका चेहरा नहीं दिख रहा उत्सव जी। हां बताइए जय श्री राम। जय श्री राम। अरे मैं तो आपका लाइव स्ट्रीम बहुत दिन से देख रहा हूं यार। अच्छा लगता है। जी अरे अह कुछ दिन पहले एक भाई के साथ आपका बहस हुआ था इस सर का अबदार के गुण लेकर मतलब गुण है कि नहीं इस बारे में थोड़ा सा
00:41:37:25 हम तो उसने उस टाइम पर आपने बोला ईश्वर का मतलब जो अवतार है उसका कोई गुण नहीं होता है। पहचान लक्षण हां हां लक्षण वो वो जो भाई था वो जो जिस तरीके से उसने ईश्वर को स्वीकारा है उसने भी अनुभव से स्वीकारा है। उसमें कोई स्पष्ट पहचान से नहीं स्वीकारा है। उसके यहां भी ये मान्यता है कि ऋषियों के अंतःकरण में ईश्वर ने वेदों का उपदेश दिया। तो ऋषियों ने कैसे पहचाना था कि वो ईश्वर ही दे रहा है। कैसे पहचाना था? अनुभव से। उनको एक अनुभव हुआ कि भाई ऐसा अनुभव पूरा माया माया रूपी संसार के विरुद्ध है अविद्या के विरुद्ध एक अनुभव वही अनुभव हमारे जो शब्द प्रमाण होते हैं ऋषि ऋषि मुनि संत गण इत्यादि जो हमारे शास्त्रों में वर्णित है वही अनुभव उन्हें होता है जिसको देख के वो ईश्वर है जिसको जिसको अंतकरण में अनुभूति करके जो अनुभव हुआ और फिर ये निर्णय हुआ ईश्वर है ऐसे ही जिसको देख के ये अनुभव हो ईश्वर है वो ईश्वर है। मगर किसके द्वारा जो तपस्वी है जो आप पुरुष है
00:42:54:04 वो लोग अपने मतलब सा वो पुरुष वो पुरुष वो गुरुजन जो हमारे लिए प्रमाण है उनके द्वारा ठीक है। हां हम नहीं बट अवतार का तो लक्षण है कि नहीं ये मैं पूछ रहा हूं। अवतार का लक्षण बता तो दिया भाई वो सारी चीजें कर देगा मगर वो पहचान जो निश्चित पहचान है निश्चित पहचान किसी शब्द उसके अधीन ही है किसी आप पुरुष के द्वारा कहे गए शब्द के अधीन ही है वो जैसे कि प्रणवाक्षर यह बात हम भी तो कहते हैं ये जो वेद है ये वही वेद है जो ईश्वर ने दिए थे इस संबंध में क्या प्रमाण है इस संबंध में? यही प्रमाण है किसी आप पुरुष का शब्द कि हां यह वही वेद है। यह वही मंत्र है। ठीक है। वेद अपारुषय हैं। इस संबंध में वेद का वाक्य यही प्रमाण है। वेद अपारुषय हैं।
00:44:02:09 अच्छा बहुत सारे लोग बोलते हैं मतलब अच्छा एक बात बताओ शिवांश भैया जो पूर्ण ब्रह्म है उसका कोई विश्लेषण व्याख्या कोई कर सकता है क्या? कोई संत ऐसा कोई डिटेल्स से मतलब डिटेल्स ज्यादा व्याख्या हिंदी एक हद तक जहां तक की जा सकती है वहां तक की गई है। इतनी तार्किक कि आपको ये फील हो जाएगा कि हां यही वो व्याख्या है जिससे कि उस ब्रह्म तक पहुंचा जा सकता है जो ब्रह्म अंततो गत निर्वचनीय है। ठीक है? हां मेरे हिसाब से तो जो गीता में श्री कृष्ण जैसे कि मैं आपको बताऊं मैं आपको बताऊं जैसे कि मैंने आपको यह बता दिया कि आपको अगर बॉडी बनानी है तो आपको क्या-क्या खाना है। ठीक है? मैंने आपको यह बता दिया कि अगर आपको बॉडी बनानी है तो आपको क्या-क्या खाना है। पर मैं आपको यह नहीं बता सकता निश्चित रूप से कि अगर आपको बॉडी बनानी है तो आपको क्या-क्या नहीं खाना है। क्योंकि वो लिस्ट अनंत होती चली जाएगी। अनंत दुनिया कितने पता नहीं पौधे होंगे जहां पर वो नहीं होगी। तो वो अनिर्वचनीय लिस्ट
00:45:17:15 होगी। तो मैं आपको यह तो निश्चित नहीं बता सकता कि आपको क्या-क्या नहीं खाना है। मगर यह निश्चित बता सकता हूं कि आपको क्या-क्या खाना है। यानी कि जिस हद तक बताया जा सकता है जो शब्दों में व्यवहारिक हो सकती है बात उसको हमने व्यवहारिक रूप से बताया है। बता सकते हैं संतग मगर जो फिर उससे आगे की चीज जो व्यवहार का विषय है ही नहीं। तो वह सीधे फिर प्राप्त करने का प्राप्तव्य का विषय है। अच्छा मेरा एक मतलब इसमें इस बारे में मत है। कहां तक सही है कहां तक गलत है थोड़ा सा बोलना मेरे हिसाब से तो जो ब्रह्म है पूर्ण परमात्मा जो भी बोलते हैं हम लोग उसका व्याख्या खुद ब्रह्म ही कर सकता और कोई दूसरा संत अरे नहीं कर सकता भाई बात ये है वो वचनों में आ ही नहीं सकता सुनिए वो व्याख्या वचनों में नहीं आ सकती है। मैं बता तो रहा हूं। वो जो व्याख्या है वो वचनों में आ ही नहीं सकती ना। समझिए आपको मेरी बात सुनो वो छोड़ो। ब्रह्म की ब्रह्म की व्याख्या छोड़ दो। मैं कह रहा हूं गुड़ खाते समय आपको कैसा लगता है? ये व्याख्या कौन कर सकता है? बताइए। नहीं कोई नहीं कर सकता बट थोड़ा बहुत हिंट दे सकता है।
00:46:32:16 बट व्याख्या नहीं कर सकता। तो ये ये अनिर्वचनीय चीजें होती हैं। अनिर्वचनीय चीजें होती है। मगर इसके कारण इस अनिर्वचनीयता के कारण सुनिए इस अनिर्वचनीयता के कारण हम जो चीजें कही जा रही है उसको नकार नहीं सकते। आप हमारी अनिर्वचनीय को तो अनिर्वचनीयता जो है उसको खंडित नहीं कर सकते। नहीं यार मैं नहीं कर सकता। और मेरा तो मानना है जब गिता में श्री कृष्ण आपकी पहचान क्या है? मैं तो यार सच्ची बोलो तो मैं तो श्री कृष्ण का भक्त हूं बस और कुछ नहीं मेरा दूसरा कोई पहचान नहीं है बस इतना ही आप जो है ऐसा करें हमारी क्लासेस में आए वहां पर आ के क्लासेस में आ के जिज्ञासा पूछे क्योंकि अगर शास्त्र करना है या आपका वैसा विषय कुछ सुनिए तो अगर आपका कुछ वैसा विरोधाभासी विषय तो हम उसको आपके साथ उसको ऑर्गेनाइज करें। तरीके से उसको सेटल्ड वे में करें। ठीक है? नहीं मेरी बात सुनिए। अगर आप अगर आप जिज्ञासु हैं अगर आप जिज्ञासु हैं तो आप जो है क्लासेस में आ जाइए। ठीक है? क्योंकि अभी क्या है ना हम लोग एक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वाले से बात कर रहे हैं।
00:47:48:00 उसके रिगार्डिंग यह जो है यह वीडियो है। अब इसमें आकर के यदि आप कोई दूसरे मत के हैं, दूसरे विरोधी दर् भाई साहब मैं क्या कह रहा हूं? मैं ये नहीं कह रहा कि आप हो। मैं ये कह रहा हूं अगर हैं तो यह जो वीडियो है ये हमारा ये जो लाइव है वो बेकार हो जाएगा। खराब होगा। हम आपके साथ व्यवस्थित रूप से अलग से कर लेंगे। दूसरी बात जो दूसरी बात है कि यह क्यों कहा गया है अनिर्वचनीयता क्यों कही गई है वो मैं आपको बता रहा हूं कि जिस समय आप भगवान के साथ एक ही भूत होंगे उस समय आपको कैसा लगेगा ब्रह्म के साथ एक ही भूत होंगे उस समय आपको कैसा लगेगा यह केवल फील है इसको आप शब्द से व्यवहार से बता नहीं सकते इसलिए भगवान को कहा गया है व्यवहार में ना आ सकने वाला जो वाणी का भी विषय नहीं है। अंतिम स्वरूप क्या है भगवान का? जो वाणी का भी विषय नहीं है। वह स्वरूप है। मगर भगवान फिर एक स्वरूप ऐसा बनाते हैं जो वाणी का विषय हो जाए जिसके बारे में बातचीत करके हम जो वाणी का विषय नहीं है उस तक पहुंच सके। समझ गए आप? समझ गए ना आप? जैसे कि
00:49:03:08 जैसे कि जैसे कि हमें लगी है भूख तो हमारी भूख मिटती है कैलोरी से। हमारी भूख मिटती है कैलोरी से मगर कैलोरी हमारे व्यवहार का विषय नहीं है। कैलोरी खरीदने जाते हो क्या बाहर कभी? कैलोरी खरीदने जाते हो क्या? पूछ रहा हूं। नहीं जाते। क्या खरीदने जाते हो? जिससे जिसके द्वारा कैलोरी प्राप्त हो जाएगी वो फूड। ये हो गया कैलोरी का सगुण साकार स्वरूप। खाना। मगर अंतत गतवा खाना खा के क्या मिलता है? कैलोरी एनर्जी मिलती है कैलोरी की फॉर्म में। तो कैलोरी के लिए हम प्रयास नहीं कर सकते क्योंकि वह हमारे व्यवहार का विषय नहीं है। प्रयास किसके लिए कर सकते हैं? जो कैलोरी जिससे मिलती है। इसी तरीके से ब्रह्म का व्यवहार में ना आ सकने वाला जो स्वरूप है उसके लिए हम प्रयास नहीं कर सकते। मगर उसके लिए कर सकते हैं। ब्रह्म के उस स्वरूप के लिए जिसके द्वारा ब्रह्म का व्यवहार में ना आ सकने वाला स्वरूप प्राप्त होगा। ठीक है? चलिए ठीक है और आप क्लासेस ज्वाइन कर लीजिए उसमें विस्तृत बात होगी है ना नहीं
00:50:20:04 ठीक है फिर काफी रोचक रहा आज का कोमल जब खुद हिंदू बांटे बांटे हिंदू धर्म का मजाक बैठे-बैठे बना दिया है आप लोगों ने ये आप लोगों ने किया है ये जो हमें बता रहे हैं ना आप यह आपने किया है। ब्रह्मा उसके शरीर में आ गए। यह मजाक बना रखा है। और दो ढेले की बातें नहीं पता है। बता रहे हैं मेरे को गीता पता मेरे को यह पता है। वो पता है। कुछ नहीं पता है। मजाक बना रखा है आप लोगों ने। लोगों को बहका रहे हैं आप। पाखंड फैला रहे हैं। ठीक है। सभी को जय श्री राम।
00:51:04:07 जय श्री राम। हर जी। जय श्री राम भैया
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