Used:
SRT: ⬇ SRT ⬇ Original file

.srt or .vtt (Hindi). The old file is backed up. After that the match for this video is rebuilt (may take a few minutes, keep the page open).

⬜ Not used yet · 00:00:04:07 – 00:04:08:12 (4:04)

00:00:04:07 सभी को जय श्री राम और जो लोग अवगत है जिन लोगों ने कर कल की चर्चा देख देखी होगी और चर्चा में अभी हमने हिस्ट्री जानी है कि मतलब बीके का उद्गम कैसे हुआ और फिर जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय उसका उद्गम कैसे हुआ और उसके बाद ये जो संजय पाराशर जी हैं इनकी अपनी एक थोड़ा थोड़ा सा और डिफरेंट मान्यता है उसको लेकर के कि सबसे पहले अ जो बीके के अकॉर्डिंग है यानी ब्रह्मा कुमारी के अकॉर्डिंग कि लेखराज जी को एक दिव्य दर्शन होते हैं। उनके हिसाब से वो शिव जी हैं निराकार स्वरूप जो आते हैं उनके शरीर में प्रवेश करते हैं और फिर वह जो है मुरली के रूप में ज्ञान प्रदत करते हैं। ज्ञान प्रदत करने के बाद उनके यहां क्या कहते हैं? 1969 में ये पहुंचते हैं वीरेंद्र दीक्षित जी। यह उनकी उनका कोर्स करते हैं। उनकी जो मुरली होती है उनको डिकोड करते हैं। इनका कहना होता है कि वीरेंद्र जो लेखराज जी के शरीर में शिव जी ने आकर के मुरली प्रदान की है। तो

00:01:19:18 लेखराज जी के यहां के जो लोग अब मुरली का अर्थ बता रहे हैं वो गलत बता रहे हैं। वो ठीक नहीं बता रहे हैं। तो वीरेंद्र देव दीक्षित जी फिर अपना एक अलग से एक तंत्र तैयार करते हैं और फिर वहां पर वो वो अर्थ बताते हैं जो उनको सही लग रहा था। उन मुरलियों का जो मुरली लेखराज जी का कहना था कि उन्होंने शिव भगवान शिव ने उनके शरीर में प्रवेश करके दी है। और जो भाई साहब संजय पारासर जी है इनकी कहानी ये है कि इनका मानना है कि जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी हैं यद्यपि वो ये नहीं कह रहे कि वो ईश्वर है। यद्यपि वो ये नहीं कह रहे कि ईश्वर ने स्वयं उनके शरीर में आकर के प्रवेश करके ये बात कही थी। मगर फिर भी इन्हीं का जो पिछला वाला शरीर था उस शरीर के द्वारा यानी सेवक राम के रूप में इन्होंने ही लेखराज जी को ज्ञान दिया था जिसके बारे में लेखराज जी ने सामाजिक रूप से छुपा लिया। उन्होंने नहीं बताया किसी को कि मैंने ज्ञान जो लिया वह सेवक राम जी से लिया है। उन्होंने वह ज्ञान बता दिया कि शिव जी मेरे अंदर आ रहे हैं। मुझे ज्ञान दे रहे हैं। मतलब ये एक तरीके से भ्रम फैला दिया और वो जो सेवक राम जी थे जिन्होंने लेखराज जी को उस समय वो दिया था। उन्हीं का एक अगला जन्म है। ये वीरेंद्र देव दीक्षित जी इनके अनुसार वीरेंद्र

00:02:34:19 देव दीक्षित जी के अनुसार नहीं इनके अनुसार। ये इनका ऐसा मानना है वीरेंद्र देव दीक्षित जी स्वयं ईश्वर ही थे और ईश्वर का ही स्वरूप थे और फिर जो है वीरेंद्र इन्होंने ज्ञान दिया था यही ईश्वर है और जो सेवक राम जी के रूप में जो बॉडी नष्ट हो गई थी सेवक राम जी वाली वो इसलिए नष्ट हुई थी कि वो समय कल्पांतर का नहीं था युगांतर का नहीं था अब युगांतर का समय तो अब जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी की बॉडी जो है वो समाप्त नहीं हो सकती तो इसलिए इनका और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी की ही संस्था है। है ना? उस संस्था के कई लोगों का मानना यह है कि वीरेंद्र देव दीक्षित जीवित है। उनकी बॉडी कहीं पर है और वो समय आने पर समाज के समक्ष प्रस्तुत होंगे। और उन्हीं के कुछ ऐसे भी लोग हैं उस संस्था के ही जो संस्था के साथ हम नहीं चल रहे वीरेंद्र देव दीक्षित जी की अनुपस्थिति में और थोड़ा सा विपरीत जाकर के कार्य कर रहे हैं। जैसे उनमें से एक है अमोल कोकने जिसने अपना आध्यात्मिक विश्वविद्यालय नाम से सेंटर बना लिया पालम में। इन लोगों का कहना है कि वीरेंद्र दीक्षित जी की जो बॉडी है वह समाप्त हो चुकी है और अब यह लोग अपने अपने हिसाब से किसी और शरीर में ईश्वर के

00:03:49:22 जन्म लेने की बात कह रहे हैं। ठीक है? तो ये सारी बातें अभी तक हमने की है। जिसने भी पिछला वाला लाइव नहीं देखा है वो जाकर के लाइव देख सकता है और इसी चैनल पर कल रात में वह लाइव हुआ था। अब हम यहां से आगे जो है बात करने वाले हैं संजय पाराश सर जी के साथ। जी

✅ This part is already used · 00:04:08:12 – 00:35:19:25 (31:11)

→ Used in: A · Video Sanjay Parashar Discussion | आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का दावा at 1:13:46 ↗

00:04:08:12 जय श्री राम संजय जी। जय श्री राम शिवंशु जी मैं आपको सुन रहा था अभी आपको तो हमारे लिए धर्म आपको तो हमारे लिए धर्मराज का काम कर रहे हैं कि दूध का दूध और पानी का पानी दुनिया के सामने करने में बड़ा सहयोग करेंगे अब तो बहुत अच्छा थोड़ा सा मुझे लगता है कि मेरी हां थोड़ा सा मुझे ऐसा लगता है कि मुझे विचारों को यथावत रखने में मतलब निपुणता शायद बहुत अच्छा रखा नहीं धन्यवाद बहुत प्यारे से रखा बहुत प्यारे सिर्फ आप बात को समझ रहे हैं। हां एक संक्षिपकरण मैंने दे दिया। जी जी जी बहुत बहुत अच्छा दिया है और सबसे पहले तो आपके चैनल के जितने भी दर्शक हैं उन सभी को जय श्री राम हर हर महादेव जी और पहले एक छोटा सा संदेश दे दूं आपके चैनल के माध्यम से पूरी दुनिया को जो भी आपके दर्शक हैं आम भारतीय खास भारतीय एक एक शब्द की वैल्यू है जो हम बच्चों के मुख से निकलेगा क्योंकि सत्य सनातन धर्म की पुनरत्थान होता है। सत्य सनातन धर्म कभी खत्म नहीं होता है। तो पूरे भारतवासियों के लिए खुशी की बात बता रहा हूं कि हमारे धर्म का पुनरुत्थान करने के लिए यदा यदा ही धर्मस ग्लानि भवती भारत जब धर्म और कर्म की ग्लानी होती है

00:05:23:13 तो भगवान स्वयं अपना परिचय देते हैं आना एक अलग बात आना नहीं होता है परिचय देते हैं अपना मैं कौन हूं कैसा हूं किस स्वरूप में पार्ट बजा रहा हूं तो मेरे पूरे भारतवासियों को शिवशियों के चैनल के माध्यम से बहुत अच्छा ये कार्य कर रहे हैं इन भाई को भी प्रणाम करता हूं कि भगवान के प्रति इनकी की आस्था और विश्वास श्रद्धा वानम लभते ज्ञानम इनका श्रद्धा और विश्वास प्यार से देखो और हमारा उनका मिलन देखो कहां के बिछड़े कहां आ के मिले हैं इनका नाम ही है शिवा शिव शिव का अंश है इनके अंदर और ज्ञान की भगवान की जो जानकारी है वो भगवान के सिवाय कोई नहीं दे सकता क्योंकि भगवान कौन है कैसा है घरघर सत्यनारायण कथा तो गाते हैं लेकिन जानते नहीं है मंदिर जाते हैं लेकिन उसकी जीवन कहानी नहीं जानते तो पूरी दुनिया को आपके चैनल के माध्यम से फिर एक बार बता दूं कि ब्रह्मा कुमारी और आध्यात्मिक ईश्वरीय विश्वविद्यालय में चार वर्ण और नौ कुड़ी के ब्राह्मण तैयार हो रहे हैं। यानी कि सृष्टि का नवनीकरण हो रहा है यहां। लेकिन जिसको जितना ज्ञान समझ में आता है वो उतनी कुड़ी का ब्राह्मण बनता है। बड़ी खुशी की बात है। नवनीकरण हो रहा है। जो इस दुनिया की मुख्य आत्माएं है यह पुरुषोत्तम संगम युग चल रहा है। यहां की ज्ञान

00:06:38:16 के अनुसार और मैं इस बात से सहमत हूं। और दोनों परिवारों का आपसी जो मतभेद नहीं है यह मतभेद यह है कि कम कुड़ी के ब्राह्मण ज्ञान की कमी है। ज्ञान तो पूरा भगवान ने दे दिया लेकिन समझने का फर्क पड़ता है। उस समझ के आधार पर सूर्य वंश, चंद्र वंश, इस्लामी बौद्ध ये सब यहीं से तैयार होता है। और वो सब आत्मा। अब हम थोड़ा सा मुख्य विषय की ओर आएंगे। तो हमने सब कुछ कर लिया था। एक जिज्ञासा वहां पर जागृत हुई थी। एक प्रश्न खड़ा हुआ था। जी जैसे आपका कहना है आप यह मानते हैं कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने यह माना था कि ब्रह्मा जी को मतलब ब्रह्मा लेखराज जी को है ना लेखराज जी को शिव जी ने आकर के मुरली दी और उन्होंने मुरली लिखी परंतु मुरली का अर्थ किसी को बताया नहीं बताया वह नहीं पता मगर अब जो मुरली का अर्थ बताया जा रहा है वह गलत बताया जा रहा है ना मुरली वीरेंद्र जी का कहना था जी शिवशु जी आज एक तो मैं आपसे प्रार्थना करूंगा कि जो क्वेश्चन पूछे हैं उसका जवाब हमें क्लेरिफाई करने दे क्योंकि भगवान का विषय है और

00:07:53:22 आप आप हमारे आप हमारे लिए आप हमारे लिए वो प्रदर्शक बन रहे हैं दुनिया के लिए अपने भारत के लिए सनातन धर्म के लिए आप बहुत अच्छा कार्य कर रहे हो जो आम दर्शक है हम इतने आसानी से बतावेंगे शिवशु भाई इतना प्यार से समझावेंगे कि आम आदमी को समझ में आवे तब तो फायदा है। बिल्कुल इसलिए जो भी आप क्वेश्चन पूछे मुझे थोड़ा सा उसको थोड़ा सा उसको यूं बताने दे कि आम आदमी मगर मगर मगर धारा में क्या होता है हम लोग कभी-कभी जब बोलना चालू करते हैं ना तो अपनी धारा में ऐसे बहते हैं कि जो मुख्य जिसका जवाब देना है वो तो आ नहीं पाया और हमने काफी देर तक कुछ कह दिया तो इस बात का आप थोड़ा ध्यान रखिएगा कि आप समझ लीजिए परंतु जो प्रश्न किया गया है उसका उत्तर उसमें आना अवश्य चाहिए है ना आएगा। जी। सबसे पहला प्रश्न यही है कि वीरेंद्र दीक्षित जी जब यह दावा कर रहे हैं कि लेख जो मुरली है उनको जिनसे मिल रही है यानी कि पहले शिवजी से मिली लेखराज जी को फिर लेखराज जी से मिली। उनकी शिष्याओं को और उनकी शिष्याओं से मिली इनको। क्या कहते हैं?

00:09:07:08 एक मिनट आप समझ शिव जी कौन? आप जो शिवजी शिवजी करते हैं पहले शिव जी को समझना चाहिए। मैं वो नहीं कह रहा हूं। मैं कह रहा हूं उनका जो क्लेम मैं जो कह रहा हूं उनका क्लेम क्या है? मैं अभी इस तरफ अभी हम शिवजी को समझने पे आएंगे। वो एक अलग चैप्टर है। अभी हम इसमें है कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी जिससे मुरली ले रहे हैं। वीरेंद्र देव दीक्षित जी जिससे मुरली ले रहे हैं तो उसके अर्थ पर विश्वास क्यों नहीं है? और जिसका अर्थ नहीं ले रहे हैं उसकी मुरली क्यों ले रहे हैं? ये बात ये मुझे थोड़ा सा क्लियर सीधा सा सीधा सा इसका जवाब सुनो आप इसका सीधा सा जवाब है कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी ही इस सृष्टि का आदि पुरुष है और वो उन मुरलियों का जो अर्थ ब्रह्मा बाबा नहीं समझ पाए दादा लेखराज जिसको हम कह रहे हैं वो नहीं समझा पाए कि इस सृष्टि का जो मालिक है जिसको आप शिवजी कह रहे हो वो कौन है तो वो बात वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने समझा दी इसलिए वो एग्री नहीं हो रहे हैं उससे काटते नहीं है मुरली को काटते नहीं है उसका अर्थ समझाते हैं। मैं वही मैं वही कह रहा हूं। उनके हिसाब से उनको जो मुरली मिली थी प्रैक्टिकली वो मिली थी लेखराज जी की जो शिष्याएं थी जिन जो उनको कोर्स करा रही थी। जी बिल्कुल जो लेखराज जी की लेखराज जी के द्वारा लिखी गई जो मुरलियां

00:10:22:19 थी वो मुरलियां वीरेंद्र देव दीक्षित जी को मिली थी। किस्से कि जो बीच की जो शिष्याएं थी उन्होंने कहा ये ये मुरलियां है उनकी लेखराज जी ने जो लिखी है। अब बात ये है कि अगर हम इनके द्वारा मिलने वाली मुरली पर विश्वास कर रहे हैं। शिष्याओं के द्वारा शिष्याओं के द्वारा शिष्याओं शिष्याओं के द्वारा दिए गए अर्थ पर विश्वास नहीं है। अब अगर हमें उनके अर्थ पर विश्वास नहीं है उसके दो कारण हो सकते हैं। अर्थ पर विश्वास ना होने के दो कारण हो सकते हैं। एक कारण हो सकता है कि भाई हमें लग रहा हो कि यह जो है जानबूझ करके किसी कारणवश लालच वश द्वेष वश भयवश ये जानबूझ के गलत अर्थ बता रही है। या तो ये कारण मान सकते हैं हम या फिर अज्ञानता या फिर अज्ञानता या फिर अज्ञानता के इनको समझ में नहीं आ रहा है। दोनों ही सूरतों में एक मिनट दोनों ही एक मिनट। दोनों ही सूरतों में हम सामने वाले की द्वारा दी गई जो चीजें हैं उसमें डाउट कर रहे हैं। तो जब हमें अर्थ पर डाउट हो रहा है तो मुरली पर डाउट क्यों नहीं? मुरली पर डाउट नहीं हो रहा है तो अर्थ पर डाउट क्यों? ये बात आती है। जैसे अगर हम किसी पर विश्वास करेंगे तो पूरा करेंगे।

00:11:38:00 नहीं तो बिल्कुल नहीं करेंगे। जी जी देखिए अब अर्थ जो समझाया गया वो अज्ञानता वश है और अज्ञानता होने के कारण ये नहीं समझ पाए कि ये ज्ञान कहां से आ रहा है ये ज्ञान दाता कौन है ये सबसे बड़ी अज्ञानता है इस ज्ञान की वो बात बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित ने उन्हीं मुरलियों को क्लेरिफाई करके निकाल के बताया मंथन कर दिया भाई साहब वो आगे की बात है कि उन्होंने फिर उनको डिकोड करके क्या बताया वो आगे की बात है मतलब अभी है अगर वो अज्ञानी है अगर वो अज्ञानी है तो वो मुरली को आप तक एज इट इज कैसे पहुंचा रहे हैं और वो अज्ञानी है जब वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने ये बताया कि तुमसे ये गलतियां हुई तो क्या उन्होंने माना कि वो अज्ञानी है अगर नहीं माना तो उनकी नियत में भी खोट आ जाएगा खोट मानना पड़ेगा वो नियत अगर नहीं अगर मैं जैसे मैं सच मैं सच बता रहा हूं आपको खोल के दिखा दिया प्रूफ के साथ बता दिया फिर भी आप कह रहे हो नहीं मैं मैं सही बोल रहा रहा हूं तो वहां पर उनकी नियत में भी खोट आ गया। तो जिसकी नियत में खोट है, जिसकी नियत में खोट है, वो आपको गलत मुरलियां क्यों नहीं दे सकता? बात यह है। देखिए अब नियत में खोट का स्पष्ट नजर

00:12:53:03 आ रहा है। कैसे? कि आज भी भगवान को न समझने के कारण आराम से मधुबन खुल रहे हैं। जोनल इंचार्ज बन रहे बैठे हैं। लेकिन दुनिया के सामने 90 साल में ये क्लियर नहीं हुआ कि वास्तविकता क्या है इस ज्ञान की। सच्चाई में वो भगवान समझ गया। मैं समझ गया उनकी नियत में हमें खोट है। अब नियत में यदि खोट है तो नियत में यदि खोट है। हां नियत में यदि खोट है तो वो आपको मुरली सही क्यों देंगी? मुरली भी तो बदल सकती है ये बात। मुरलियां बदल मुरलियां बदल तो दी। 12 पेज की मुरली थी वो दो पेज की मुरली रह गई। 10 पेज गायब हो गए उससे। तो यानी नहीं जो दी भी है जो दो मुरलियां ये तो गायब की है मगर जो दी है जो मुरली दी है वो हो सकता है अपने मन से कुछ लिख दिया हो उसमें हां बिल्कुल सब कुछ सब कुछ बदल दिया उसमें से जैसे जैसे मैं आपको बताऊंगा किसी धर्म में लिखा है कि आप जीव हत्या करो बकरा काटो मुर्गा काटो जीव हत्या किसी धर्म में लिखा है उसी प्रकार से इन्होंने जो काम की बातें उसमें से हटा दी और मनमत मिक्स कर दिया इसमें अब तो फिर हम ये कैसे कह सकते हैं कि मुरली मुरली को ही अर्थ मुरली का ही अर्थ कर रहे हैं। हम ये कहेंगे कि हम तो अपने ज्ञान को दे

00:14:08:04 रहे हैं। हम ये क्यों कहेंगे लेखराज जी ने जो मुरली दी थी हम उसी का अर्थ कर रहे हैं। लेखराज जी ने जो मुरली दी थी उसी का मतलब हम ये नहीं कह सकते जो शिवशु जी आप सही कह रहे हैं। सही कह रहे हैं। एक बात जवाब देने दो। जो दादा लेखराज के मुख से जो ज्ञान निकला था उस ज्ञान का तो इन्होंने खत्म कर दिया। बिल्कुल अब तो मात्र दिखावा रह गया। पत्थर के शिवलिंग के साथ सात फेरे ले रहे हैं। डीजे बजा रहे हैं। अरे भगवान आया भगवान आया। मेरा मेरा कहने का मतलब मैं दूसरा विषय पूछ रहा हूं। वो सही कह रहे हैं आप। उन्होंने बदल दिया। तो फिर इसका मतलब हम यह माने कि वीरेंद्र देव दीक्षित जी ने जो ज्ञान दिया वो मुरली का अर्थ नहीं बताया। अपने से बताया जो बताया लेकिन उस समय जो वीरेंद्र देव दीक्षित जी के पास मुरली थी वो ओरिजिनल थी। जो ब्रह्मा के मुख से निकली थी। वो बात 1966 है। 2025 चल रहा है। वो कहां से आई थी? ब्रह्मा कुमारी से आई थी। ब्रह्मा कुमारी से आई लेकिन उस समय फिर भी 101 पेज थे। आठ 10 पेज फिर भी बचे थे। मतलब थे ना वो ब्रह्मा कुमारी से जो आई थी वो लेखराज जी की शिष्याओं ने दी थी उन्हें। हां जी बिल्कुल चोरी चोरी करके दे और उनकी नियत में खोट था। जी इस खोट को कैसे साबित करें?

00:15:24:04 मैं बता तो रहा हूं। खोट ऐसे ही साबित है कि जब वो अज्ञानी सिद्ध हो रहे हैं फिर भी नहीं मान रहे कि अज्ञानी है तो खोट है। जी है ना और जब उनकी नियत में मेरा मेरा कहने का अर्थ है जिसकी नियत में खोट है वो आपको लेखराज जी की मुरली जो भी दे रहा है वो 10 पेज दे रहा है 12 पेज दे रहा है जो भी दे रहा है वो ज्यों की त्यों क्यों देगा जी बिल्कुल लेकिन लेकिन जिस समय दी गई ना बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित को वो वेदांती माता ने दी जिसके कारण वेदांती माता उस समय अहमदाबाद में थी आज वो साउथ अफ्रीका उनको बैठा दिया गया है यानी कि वो भारत माता है। यह हम बता रहे हैं अपनी तरफ से। वो ठीक है।

00:16:06:16 पूरा जी वही तो लक्ष्मी है। अरे वही तो लक्ष्मी है। शिवशु वही लक्ष्मी है हमारी भारत माता है। मेरा मेरा आप नाम शिवश लीजिए। शिवशु नहीं शिवश जी शिवशु के सामने रखना पड़ेगा। मेरी बुद्धि बाबा की तरफ चली जाती है। अभी बोलते हैं ना बाबा है कि जो माता जी थी उन पर वीरेंद्र देव दीक्षित जी को पूरा विश्वास था। अरे बिल्कुल 100% वो लक्ष्मी है वर तो वर शंभू वर वरना रहूं कुंवारी तो तो जब उनप उन्हें पूरा विश्वास था फिर उनके द्वारा दिए गए अर्थ पर विश्वास क्यों नहीं हुआ? माताजी को हो गया।

00:16:46:21 उन माताजी को विश्वास हो गया था। क्या? जो वेदांती माता है बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जो सुना रहे थे उसके ऊपर वेदांती माता को विश्वास हो गया था कि हां ये सही कह रहे हैं और उसी विश्वास के कारण हम सब ब्रह्मा कुमारी से ही तो आध्यात्मिक ईश्वर विश्वविद्यालय में आए हैं। हमने हम सब ने हम ब्रह्मा कुमारी दीक्षित वो भी वो भी जानते हैं हम मतलब जो वेदांती माता थी उन्होंने ही लेखराज जी की मुरली इनको दी वीरेंद्र देव दीक्षित जी को अरे महाराज आप कहीं आप क्या बात है आप में बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी प्रवेश कर गए क्या एक एक सच्चाई को जानते हो आप थोड़ा सा थोड़ा सा इधरउधर की ओर सरकाज्म या फिर विनोद इससे बचे जिससे कि हमारा जो गंभीरता है ना विषय की वो बनी रहे है ना बार-बार आपने एक बार मेरी तारीफ कर दी मैं आपका स्वागत करता हूं मगर बार-बार हमारी जो गंभीरता है ना वो धारा प्रवाह वो टूटेगा अगर हम दूसरी चीजें करेंगे तो तो वेदांत माता ने वेदांती माता ने ओरिजिनल स्ट्रोक रखा हुआ था माता जी ने वो मुरलियों का स्ट्रोक बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित को दे दिया जिसकी उनको सजा मिली

00:18:01:22 उनको अहमदाबाद से निकाल दिया गया वेदती माता अब वो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के साथ है या बीके के ही साथ है? बिल्कुल नहीं अभी भी साथ है और बड़ी बिल्कुल बहुत प्यार है आज भी किसके साथ ब्रह्मा कुमारी के साथ ब्रह्मा कुमारी के साथ तो इसका मतलब उन्होंने ये इनका वीरेंद्र देव दीक्षित जी का ज्ञान नहीं माना ना ज्ञान माना लेकिन बाहर नहीं आए वही बैठे रहे वही तो राजा दक्ष की पुत्री है तो बात ये है कि ज्ञान यदि माना भाई साहब देखिए ये आप ये आप कह रहे हो ये आपका क्लेम है उन्होंने तो नहीं कहा ना कि मैंने ज्ञान मान लिया शिव शिव शिवशं ठीक है ना एक बार नाम शिवशी बोलो ना आपको शिवश जी शिवश जी इतिहास गवाह है हम मेरो जान सदा शिव जोगी अज अनद अकाम अभोगी ये किसने कहा है किसने कहा है ये डायलॉग किसका है किसने कहा भक्ति मार्ग आप भी जानते हैं मैं भी जानता हूं किसने कहा है ये डायलॉग आप बताइए ना आप बताइए ये डायलॉग लक्ष्मी माता वरू तो वरु शू वरू लक्ष्मी माता ने कहा है ये अब ये गुप्त ज्ञान है। गुप्त रहस्य जो सामने आकर के खुलेगा। तो अभी इस बात को आप मैं अपनी तरफ से खोल रहा हूं कि मैं दुनिया

00:19:16:28 के सामने छाती ठोक के कह रहा हूं कि वो भारत माता है और बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित है। देखिए भाई साहब अभी हम मैं आपकी क्लेम पे भी आऊंगा। जो जो आप क्लेम कर रहे हैं ना मैं आऊंगा उन पे। अभी थोड़ी सी तार्किक रूप से हम लोग यह समझने का प्रयास कर रहे हैं। आपका कहना है कि वो वहां पर बीके के साथ अभी भी है। मगर वो झूठ बोल रही हैं। मन से वो आध्यात्मिक आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के ज्ञान को ही मानती हैं। बंदर से बिल्कुल मानती है और वहां से 16,000 और भी उसके साथ इस बात का प्रमाण क्या माने? मुरलियां अब जो दादा लेखराज ने गुलजार दादी के तन में जो अव्यक्त वाणी बोली वो सबूत है उसमें देखिए हां जी मैं बताऊं जो माता जी हैं वो कह रही है कि नहीं बी के सही है आप कह रहे हो कि वो ये मानती है कि आध्यात्मिक विश्वविद्यालय सही है। ठीक है? इसका मतलब माता जी इसका मतलब माता जी किसी कारणवश झूठ बोल रही हैं। बोल रही है ना? झूठ नहीं बोल रही है। हां बिल्कुल कुछ समय के लिए बोल रही है। कुछ समय के लिए किसी कारणवश झूठ बोल रही है। जो व्यक्ति जरा सा भी झूठ बोल सकता है उसको हम अपने धर्म का प्रमाण कैसे मान सकते हैं? जो व्यक्ति जरा

00:20:32:07 सा भी झूठ मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं इसलिए कि हम मुरलियां लेखराज जी की किससे ले रहे हैं? माता जी से और माता जी तो झूठी है। तो जब वो यहां झूठ बोल सकती हैं एक मिनट। माता जी जब एक बार भी झूठ बोल सकती हैं तो वो एक मिनट जी एक मिनट अब आप सुनो अब आपको सुनना चाहिए देखिए हम उनको झूठा नहीं कह सकते और आप आपसे मैं कल भी रिक्वेस्ट किया था आज भी करता हूं एक बार हमारा चाहे बीके का सुनो चाहे पीके का ज्ञान एक ही है बात है उसके लेवल को उठाने की गहराई से समझने की दूसरी बात माता जी है जो नर से नारी नर से नारायण नारी से लक्ष्मी वो अपना रोल अदा कर रही है नारियों को लक्ष्मी बनाने की शिक्षा दे रही है चुपचाप इधर से बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित जी नर से नारायण बनाने का ज्ञान दे रहे हैं। सत्य सनातन धर्म की प्रवृत्ति मार्ग की स्थापना हो रही है। तो इसलिए उनको झूठा मत कहो आप। ये अंदर की बात है। आप ही कह रहे हो। अब आप ये कह सकते हो अभी आप ये कहो कि हम उस बात को जैसे वो जस्टिफाई करनी चाहिए ऐसे नहीं करेंगे। कोर्ट कचहरी तक का बहुत लंबा मैटर है। अभी नहीं नहीं आप ही तो कह रहे हो कि वो मन से आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के साथ है मगर

00:21:47:08 तन से बीके के साथ है। अरे इसका मतलब झूठ बोल रही है ना वो तो इतिहास गवाह है। वो जन्म जन्मांतर उसी के साथ है। नहीं तो मिथ्याचारी सिद्ध हो रही है ना उसी के साथ रहती है। अरे भाई शरीर आप शरीर का मिलन देख रहे हैं। आत्म ज्ञान दिया जाता है। आत्मा का ज्ञान है। वो हमारे लिए आप कह रहे हो ना वो तो नहीं कह रही ना कि उनका आत्मज्ञान क्या है? नहीं ना आप शरीर को देख रहे हो ना मुझे सुनिए तो मुझे जैसे प्यास लग रही है मैं कहूं भाई मुझे प्यास लग रही है आप कहोगे नहीं नहीं इसको तो भूख लग रही है तो किसकी बात मानी जाएगी बात अब हाल आत्म ज्ञान दिया जाता है या आत्मज्ञान की बात करिए आप शरीरों को मत देखिए आत्मा को देखिए मैं शरीर की बात नहीं कर रहा हूं वहां पर वो अपना आत्मज्ञान यही कह रही मेरा आत्मज्ञान बीके के साथ है आप कह रहे हो उनका आपके साथ है। एक आप यहां बैठे हो यहां बैठ के किसी को याद कर सकते हो कि नहीं जिसको जानते हो कर सकते हैं। कर सकते हैं। कर सकते हैं। तो वो वहां बैठकर के याद नहीं कर सकते मन बुद्धि से क्या तो उन्होंने ऐसा कहा है कि मैं आध्यात्मिक विश्वविद्यालय को याद करती हूं। मैं उसी की हूं। ऐसा कहा है उन्होंने? एक बात बताइए। कहना जरूरी है क्या? सारी बात दुनिया को दिखाना जरूरी है। जब आपने मुझसे पूछा था, जब आपने मुझसे पूछा

00:23:02:14 था कि आप याद कर सकते हो क्या? उसमें मेरा कहना या इशारा करना जरूरी था ना? आपको कैसे पता चलता याद कर सकता हूं? एक मिनट। आपको कैसे पता चलता है कि मैं याद कर सकता हूं कि नहीं? आपको मेरा इशारा मेरा कहना जरूरी था ना। आपको कैसे पता चलेगा मैं याद कर रहा हूं कि नहीं कर रहा हूं? इसलिए कहेंगे कि ब्रह्मा बाबा शरीर छोड़ने के बाद गुलजार दादी में प्रवेश करता है। ठीक है और प्रवेश करके कहता है प्रवेश करके कहता है कि के क्या करो वैजंती माला विजय माला का आह्वान करो एक डायलॉग दिया गया था ब्रह्मा बाबा के द्वारा विजय माला का मतलब जो तुम्हें विजय पहनाएगी इस ज्ञान का पूरा तंत्र निकाल देगी भारत माता शिव शक्ति अवतारा अंत का यही नारा है तो ये वाक्य दादा लेखराज के द्वारा बोला गया गुलजार दादी के तन से ठीक है तो तो वहां यहां से हमें फिर इशारा मिल गया कि उसका आह्वान करो वो आवेगी तो प्रवृत्ति मार्ग का धर्म स्थापन हो रहा है तो सूर्यवंश और चंद्र वंश दोनों मिलकर के एक हो तो राजधानी स्थापन इशारों पे इशारों पे सुनिश्चितता नहीं होती है कांटे की नोक पे होती है देखिए सुनिए धर्म धर्म सुनिए जो सुनिए तो धर्म का जो बात होती

00:24:17:15 है धर्म की बात होती है वो ऐसे इशारों पे नहीं होती इशारों पे हमने तय कर लिया इशारा है बस इशारा उसमें प्रमाण भी होता है अब जब हम किसी को ये कह रहे कि इसने हमको मुरली दी ज्यों की त्यों। फिर हम यह कह रहे हैं कि यह अपने मन की बात नहीं बता रही है ज की त्यों। तो इसका मतलब फिर उस पर हम विश्वास नहीं कर सकते। उसने मिलावट कर दी हो मुरली में या फिर आपको चीजें प्रोवाइड कराने में मिलावट कर दी हो। ये एक चीज बची रह रही है। बस इसमें अंत में थोड़ा सा बात करेंगे। फिर हम आगे बढ़ते हैं। इसके लिए मैं आपके चैनल के माध्यम से आपको भी और पूरे भारतवासियों को और जो भी सुन रहे हैं जो धर्म प्रेमी हैं उनको कहूंगा कि जाकर के एक बार हमारे विश्वविद्यालय में जावे चाहे कोई से भी चला जाए दोनों हमारे जाकर के एक बार कोर्स करें अच्छे से समझे एक एक बात समझ में आ जाएगी। आत्मज्ञान दिया जाएगा। आपको मैं कहूं कि आपकी पूरी धारणा झूठी है और मैं कहूं कि आप जो है हमारे क्या कहते हैं बहुत सारे आचार्य हैं वैष्णवाचार्य हैं शंकराचार्य हैं इनके आचार्यों के मठ हैं। आप एक काम करिए आपकी पूरी जो चीजें हैं वो सब झूठी है। पाखंड है और आप जाइए इनमें जाकर के और जाके आप जो है एक एक घंटे के प्रवचन सुन लीजिए बस तो चलेगा। हां बिल्कुल जाना पड़ेगा। कोई चीज की गहराई

00:25:32:24 में तो जाना पड़ेगा। जानना चाहते तो फिर अभी कोई बात करने का मतलब ही नहीं है। दोनों जाएंगे अब हां तो जाना चाहिए सबको तो फिर तो फिर हमें चर्चा ही नहीं करनी चाहिए उस हिसाब से ओपन चैलेंज भी नहीं करना चाहिए जब तक आप वहां जाकर के ज्ञान नहीं लेंगे तो आप भी जो क्वेश्चन पूछोगे उसका आंसर आपको कैसे पता चलेगा कि आप सही ले रहे हैं अरे आपने लिया है ना जहां आप मुझे भेज रहे हो वहां का ज्ञान आपने लिया है सुनिए जो चर्चा होती है वो चर्चा इसलिए होती है आपने आप मुझे जहां भेज रहे हो वहां का ज्ञान आपने लिया है। मैं आपको जहां भेज रहा हूं वहां का ज्ञान मैंने लिया है। तो सुनिए मेरी चीजों के लिए जो क्वेश्चन आपके मन में आएंगे उनका जवाब मैं दूंगा। आपकी चीजों के लिए जो जो क्वेश्चन मेरे मन में आएंगे उनका जवाब आप देंगे। अब जब मैं क्वेश्चन पूछूंगा तो आप ये कह देंगे जाओ मेरा कोर्स करके आओ। ये ठीक नहीं है। ये तार्किक नहीं है यहां पे। हम तार्किक आपके ज्ञान में और हमारे ज्ञान में अंतर है। हम ये भी एक ज्ञान है सुनिए ये भी एक तर्क है। ये भी एक तर्क है। ये भी एक तर्क है। तो जब आप तर्क मानना ही नहीं है तो फिर कोई भी तर्क नहीं मानेंगे। फिर बिल्कुल भी नहीं। इस दुनिया का तर्क जो है इस दुनिया में जो ढाई हजार साल से आप

00:26:49:15 दुनिया का ही तर्क बोल रहे हैं। चलिए कह रहा हूं। आगे चलते हैं। अब कहने का मतलब यह है यहां पे इस बात से बात काम नहीं चलेगा कि आप हमारा कोर्स कर लीजिए। जहां पे भी प्रश्न का उत्तर ना हो उसका यह जवाब नहीं चलेगा कि आप कोर्स कर लीजिए। आप कह दीजिए भाई इस पे हम इतना ही बता सकते हैं। फिर हम आगे चलते हैं। बात है ना कोर्स अगर करना ही है फिर हम आपसे बात ही क्या कर रहे हैं। हमें तो कोर्स ही करना है क्योंकि हर सवाल के जवाब में यही मिलेगा। दूसरी बात आपने दूसरी दूसरी बात आपने तो कोर्स किया है। सुनिए तो भगवान के सवाल का जवाब दिया गया आपने तो कोर्स किया है तो फिर आप जवाब साल लगाए मेरे तो आप कोर्स करने भेज रहे हो ना हां तो 12 साल मैंने लगाए तो आप भी मेरे पे विश्वास करो ना मैं जो कह रहा हूं अपने अनुभव के आधार मैं विश्वास की नहीं बात पूछ रहा हूं मेरे मन में जो जिज्ञासा आ रही है वो पूछ रहा हूं मैं ऐसे तो मैं आपको बता दूं ढाई हजार साल की परंपरा है आपने 12 साल लगाए हैं सुनिए जो आचार्य है ढाई ढाई हजार साल परंपरा है और एज इट इज वही ज्ञान चल रहा है। आप फिर उन पर विश्वास कर लो। कहने का मतलब है मेरा कहने का मतलब है ऐसे काम नहीं चलेगा कि आप कोर्स करके आइए।

00:28:05:03 आपके पास जवाब नहीं है तो आप कह दो भैया मैं इतना ही बोल सकता हूं। अगला विषय चलाइए। बस ना ना बिल्कुल गलत बात। गलत बात है। गलत बात नहीं। आपके पास जवाब है तो आप मुझे कोर्स करने क्यों भेज रहे जवाब जवाब पिछले ढाई हजार साल से जो आप बता रहे हो जवाब है तो कोर्स की बात क्यों करते हैं आप मुझसे के कोर्स करने चले जाओ कोर्स तो करना पड़ेगा अगर आपको भगवान जवाब है आपके पास करना चाहते हैं भाई साहब जवाब है कि नहीं आपके पास हर चीज का जवाब ऐसी कोई बात ही नहीं है सृष्टि का जो भगवान जवाब ना फिर आप क्यों कह रहे हैं कि आप कोर्स करो इसका जवाब आपको वहां मिलेगा करना जरूरी है क्योंकि आपके पास जो ज्ञान है मैं पूछ रहा हूं अगर मेरे मेरे प्रश्न का जवाब आपके पास है तो मुझे दूसरी जगह क्यों भेज रहे हो? हर प्रश्न का जवाब है लेकिन आपका क्वेश्चन ठीक नहीं है। अच्छा और ये कहां लिखा है? कौन सा क्वेश्चन ठीक है? कौन सा क्वेश्चन ठीक नहीं है? ये मुरली में है। ये मुरली में लिखा हुआ है। कहां लिखा है? बताइए। कौन सी एक मिनट सुनो। भगवान आते हैं तो आत्मा का ज्ञान देते हैं। परमात्मा की जानकारी देते हैं। भाई साहब कोई भी जो कोई भी जो चीज है कोई भी जो चीज है ज्ञान जो शुरू होगा वो व्यवहार से ही तो शुरू होगा। आत्मा तक हम पहुंचेंगे

00:29:20:07 जीभ से प्रश्न पूछेंगे कि नहीं? एक प्रश्न पूछेंगे। जब पूछेंगे जब किसी चीज के बारे में आपको बेसिक नॉलेज हो। आपको हमारे ज्ञान के बारे में बेसिक नॉलेज भी नहीं है। नहीं आप आप नहीं तो बेसिक नॉलेज दोगे ना। आपने दी तो है बेसिक नॉलेज। लेकिन प्रश्न उत्तर ऐसे थोड़ा ना होगा। हमारे चार चित्र हैं। कोर्स है वो आपको लेना पड़ेगा। फिर आप फिर आप क्या जवाब दोगे? बात वही आ रही है कि साप्ताहिक कोर्स करो। तो अगर बात अगर सा्ताहिक कोर्स से उत्तर मिलना है तो यह मानना पड़ेगा ना कि आपके पास उत्तर नहीं है। हां तो आगे चलते हैं।

00:30:00:21 मैंने डॉक्टर की बात आगे चलते हैं। हां क्या क्या नहीं क्या पढ़ाई क्या कह रहे हैं मैं कह रहा हूं कि आपने वकील की पढ़ाई पढ़ी मैंने डॉक्टर की पढ़ाई पढ़ी तो दोनों पढ़ाई में अंतर है ना तो आप आप मुझे मैं आपसे डॉक्टरी का प्रश्न पूछ रहा हूं ना कि वकील का पूछ रहा हूं तो अब प्रश्न पूछ रहा हूं ना दोनों का सेम दोनों का प्रोफेशन सेम होना चाहिए देखिए आपने जो अभी उदाहरण दिया है इससे दो बातें निकलती है अगर मैं वकील वकील की पढ़ाई पढ़ी आपने डॉक्टरी की या तो यह निकलती है कि मैं वकालत का सवाल पूछ रहा हूं तो मेरे सवाल का जवाब आपके पास इसलिए नहीं क्योंकि आप डॉक्टर हैं। तो घुमा फिरा के बात यही हुई कि मेरे सवाल का जवाब आपके पास नहीं है। और अगर यह बात है कि मैं अगर आपसे डॉक्टरी का ही सवाल पूछ रहा हूं तो फिर आपको जवाब देना चाहिए। ये तो आपने मेरी बात कह दी। या तो यह बात मानी जाए कि मैं क्योंकि वकालत के प्रश्न पूछ रहा हूं और उसका उत्तर आपके पास नहीं है क्योंकि आप डॉक्टर हैं। तो इसका मतलब आपके पास जवाब नहीं है। फिर ये कहना गलत है मेरे पास जवाब है। अब मैं आपसे आपसे एक बात मैं पूछना चाहता हूं। हां आपको आप जो क्वेश्चन पूछ रहे हैं बहुत अच्छी बात कर रहे हैं। जी लेकिन मैं आपका भी एजेंडा क्लियर करना चाहता हूं कि दूसरों को चैनल पे बुला

00:31:15:27 के अपने को सुप्रीम दिखाना है या भगवान को भी चैलेंज करना आपका एजेंडा क्या है? मेरा एजेंडा है वास्तविकता की खोज। सत्य क्या है? क्या ब्रह्मा कुमारी सत्य बोल रही है? क्या ब्रह्मा कुमारी सत्य बोल रही है? या आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वाले सत्य बोल रहे हैं या आप सत्य बोल रहे हैं। यह एजेंडा है इनका। ठीक है। लेकिन जो एक शिवश बहुत अच्छी बात आपने कही जो वास्तविक सत्य है उस सत्य को जानने के लिए ज्ञान का तीसरा नेत्र चाहिए। आपके पास है तो मैं जो बोल रहा हूं तो ज्ञान उस ज्ञान के नेत्र के आधार पर बोल रहा हूं जो आपकी समझ से बाहर है तो भाई साहब फिर फिर वही बात फिर तो ऐसे कोई है ही नहीं जिसके पास तीसरा नेत्र नहीं होगा वो समझेगा नहीं तो फिर समझाने का फायदा नहीं है कोई इसलिए उसको वहां जाकर के कोर्स करना तो अनिवार्य है कोर्स कोर्स से तीसरा नेत्र आएगा बिल्कुल आएगा आप एक विभाग को आज नहीं पूरे विश्व को यह कोर्स तो करना पड़ेगा क्योंकि इसमें सृष्टि पूछ रहा हूं ये ये कहां लिखा है कि वहां कोर्स करने से तीसरा नेत्र आ जाएगा और आपके तीसरे नेत्र के विषय में प्रमाण क्या है ये प्रमाण ये है कि हमारा खुला

00:32:30:28 हुआ हमने भगवान को पहचान लिया सत्यनारायण को पहचान लिया को पहचान लिया आपने पहचान आपने पहचान लिया है ये कहां लिखा है कि जिसने पहचान लिया उसका पास तीसरा नेत्र है और आपने पहचान लिया इसका प्रमाण क्या है यह प्रमाण आपकी आंखों के समान सामने धीरेधी आ जाएगा। पूरी दुनिया के सामने आ जाएगा। कुल मिला के अभी जवाब नहीं है। आ जाएगा कोर्स कर लेना तब आ जाएगा। अभी जवाब नहीं है। चलिए ठीक है। किसी चीज किसी चीज के बारे में अगले अब हम अगले चैप्टर में बढ़ते हैं भाई साहब। नहीं नहीं। एक जब तक आप वहां जाकर के बैठोगे वह ईश्वरीय पढ़ाई है। पढ़ाई पढ़ाई जा रही है। कुल मिला के मैं समझ रहा हूं कि मेरे इस प्रश्न का जवाब आपके पास नहीं है। वो मुझे कोर्स करने पर ही मिलेगा। आपका दुनिया का कोई ऐसा प्रश्न नहीं है जो भगवान आ के उसका उत्तर ना देते हो। वो कभी भी ऐसा नहीं कर सकते। आपके पास तो नहीं है ना भाई साहब? हेलो

00:33:35:25 कहां चले गए? मैं जरा देखता हूं कहां गए।

⬜ Not used yet · 00:35:19:25 – 00:43:48:00 (8:28)

00:35:19:25 कि अंततो गत्वा सर हमें वही इंफॉर्मेशन प्राप्त करवा रहा है जो इंफॉर्मेशन सत्य नहीं है तो अगर ऐसी कोई चीज अटक जाएगी ना जो हो ही नहीं सकता है तो उसके पास अविद्या शक्ति है वो आपको इंफॉर्मेशन देगा केवल कि हो गया जैसे मैं बोलूं क्या ईश्वर दो और दो को पांच कर सकता है तो आप बोलोगे हां कर सकता है कैसे कर सकता तो हमें बेवकूफ बना देगा। मैं ईश्वर को ये नहीं कह रहा कि ईश्वर मेरे को बेवकूफ बना। आपको उसने बेवकूफ बनाया है। इसका साक्षी कौन होगा? वो सिद्ध कैसे करोगे कि उसने बेवकूफ बनाया। भाई अगर वो मैथमेटिकली होगा तो मैथमेटिकल कैलकुलेशन रूल्स के अकॉर्डिंग होगा ना। वो जो रूल्स है वो ईश्वर से ही आए है ना। अरे ईश्वर से कैसे आ जाएंगे? आपको ये कहां से पता लगा है कि दो और दो पांच और चार होते हैं। न्यूमोलॉजी से आए। और न्यूमरोलॉजी ईश्वर से आई है कि नहीं? मैथमेटिकल के जो रूल्स है ना वो भी ईश्वर नियंत्रित कर सकता है कि आपके मन से कब हटाए जाए, कब ना हटाए जाए तो हटा देगा। वो ऐसे रूल्स डालेगा जिससे कि आपको लॉजिकल लगने लगे सुनिए मेरी बात सुनिए विषय से बहुत नहीं है छोड़ दीजिए मैं चाहता हूं टॉपिक पे रहे ताकि हमारी बात थोड़ी जल्दी हो टॉपिक को ही तो पूरा कर रहा हूं क्योंकि आप उसमें फंस रहे हो तो आप दूसरी बात करोगे चलो कोई बात नहीं मैं मैं स्वीकार करूंगा मैं फस रहा हूं मैं चाहता हूं विषय पे तो विषय तो है आपने पूछा आपने पूछा कि मुझे तो मैथमेटिकली प्रूफ करके दिखाओ तो मैं उस बात का जवाब दे रहा हूं जितना आपको एक बार आप बोल दो उसके बाद जहां से मैंने बात शुरू किया था मैं वापस लक्षण पे आ जाऊंगा ठीक है क्यों भाई आपको जो मैं दूंगा इसको काटना पड़ेगा

00:36:35:18 इस दुनिया में हम आए हैं टेस्ट के लिए। हमारा टेस्ट हो रहा है और हर इंसान का अलग-अलग अंदाज में टेस्ट होता है। अगर मैं अपने स्टूडेंट को एमसीक्यूस दूं और उसमें सिर्फ राइट आंसर लिख कर दे दूं और कहूं तुम्हारा टेस्ट हो गया। ये मीनिंगलेस है। बहुत ही वीक यहां पर ये तर्क दिया गया है। जो विकल्प होते हैं ना परीक्षा के समय हम उसमें से किसी कौन सा सही है और कौन सा गलत है। ये जानने के लिए उस परीक्षा से पहले हमको एक पढ़ाई कराई जाती है जिसमें हमको सही सही चीजें बताई जाती है। तो अगर इस्लाम के द्वारा मिलने वाली जो शिक्षा है वो परीक्षा के विकल्पों की तरह है। है ना? तो पढ़ाई कहां पर हुई है?

00:37:16:12 जय श्री राम। आ रहे हैं वो भाई साहब जो हैं। [संगीत] उनका नेटवर्क प्रॉब्लम कर रहा है थोड़ा सा जिस कारण से वह लेट हो रहे हैं। कुछ देर हम इंतजार कर सकते हैं। तब तक हमने लिंक दिया है। आप में से कोई अगर ज्वाइन करना चाहे तो कर सकता है।

00:38:10:24 अभी कुछ ही देर पहले आहान पर भी एक बातचीत हुई थी। एक नवयुवक था। 25 वर्ष की आयु थी उसकी। उसको यह था कि भाई इस कौन अच्छी चीजें कर रहा है तो उसका विरोध क्यों कर रहे हैं आप? तो मैंने कहा कि बुरी चीजें भी तो कर रहा है। अच्छी चीजें जो कर रहा है उसके लिए हमने थोड़ी ना कहा है। जो वो गलत कर रहा है उसके लिए कहा है।

00:39:02:26 मुझे लगता है कि शायद नेट पैक खत्म हो गया हो उनका। ठीक है। आप कुछ यहां पर ऑपरेटर जी कुछ जो यहां पर दिखा दीजिए दर्शकों को। तब तक मैं उनसे थोड़ा टेली कर लेता हूं। फिर आता हूं। फिजिकल

00:40:56:14 रियलिटी को तलाश करना है। लिहाजा आज इस डिबेट में गॉड की एक्सिस्टेंस को साबित करने या उसे डिनाई करने में साइंटिफिक एविडेंस को एक्सेप्ट नहीं किया जाएगा। हालांकि इस चीज को काउंटर किया है आगे चलकर के जावेद अख्तर जी ने जो काउंटर अच्छा था कि भाई मेटाफिजिकल है क्या जो हम मान ले कि भाई ये क्योंकि ये जो है हमारा जो खुदा है या हमारा जो ईश्वर है इस्लाम का वो मेटाफिजिकल रियलिटी है। नॉन फिजिकल रियलिटी है। इसलिए उस पर जो है ये साइंस वाली चीजें साइंस वाले सवाल नहीं किए जाएंगे। साइंस के प्रमाण नहीं मांगे जाएंगे। तो पहले आपको उसका मेटाफिजिकल रियलिटी का अस्तित्व सिद्ध करना होगा ना। आप यहीं से शुरू कर रहे हो कि वो जो है हमारा इस्लाम का ईश्वर वो मेटाफिजिकल रियलिटी आपने मेटाफिजिकल रियलिटी को सिद्ध नहीं किया है। आप सीधे यहीं से शुरू कर रहे हो। तो आपको सिद्ध करना चाहिए था। तो इस बारे में उन्होंने पूछा भी आगे चलकर के तो आपने कोई ऐसा जवाब नहीं दिया। अब उसको वहां पर बातें जो है छूट गई। अधूरी नहीं कि मेटाफिजिकल रियलिटी सिद्ध कैसे होती है? यह भी तो हो कि जो हम यह संसार देख रहे हैं। प्रपंच रूपी संसार हम देख रहे हैं।

00:42:12:24 फिलहाल जो भाई साहब हैं वो अभी उनके नेटवर्क वगैरह नहीं है। पता नहीं कुछ समझ में नहीं आ रहा है। वह आएंगे कि नहीं आएंगे। अभी तो मैं चर्चा को एक स्थगित कर रहे हैं। अगेन अगर फिर कभी होता है वो उपलब्ध हो पाते हैं तो हम चर्चा आगे बढ़ाएंगे। आपको बता दें कि इन्होंने कई प्रकार के चैलेंज दे रखे हैं ओपन चैलेंज करके और जो है अपने चैनल से तो अ

00:42:50:21 ये चीजें हैं। फिर अब देखते हैं कि अपनी चीजों का पक्ष को अपने पक्ष को पुष्ट कर करने पहुंचते हैं कि नहीं और कितना है इनके उसमें सत्य का जो बल है वह कितना है? हमारी क्लासेस फ्री होती हैं। निशुल्क होती हैं। हमारी क्लासेस जो है पेड नहीं होती। [संगीत] ठीक है सभी को जय श्री राम।

00:43:46:05 [संगीत]

Plans for this video (0)

No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.

🤖 Ask AI for suggestions

AI reads the remaining (unused) parts of this video and gives ideas for new videos: from where to where, hook, and what to remove from the middle. Suggestions follow the RULES and appear here as "AI Suggestion". You can review, edit or approve them.

Live: Required tasks are not set on the Rules page yet.

  • ⬜
    Hindi SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).

B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 43:54 · 04 Jan 2026

Discussion with Sanjay Parashar | Aadhyatmik Vishwavidyalay Truth | Brahma Kumaris Connection?

% not set
☁️ Drive Not in Drive yet

🔗 This video is made from parts of these videos

A · Video क्या इस्लाम नास्तिकता का खंडन करने में समर्थ है @TheLallantop Debate o...
Open at 00:16:17:18 Open at 00:50:33:03 Open at 00:51:52:00
A · Live क्या ईश्वर अवतार ले सकता है? | Most Awaited Discussion with Nirbhay Ar...
Open at 01:08:42:09 Open at 01:15:33:03 Open at 01:23:38:19 Open at 01:26:33:27
A · Video भगवान की माया शक्ति से परास्त हुआ अलंकारी | अवतार सिद्धि | the final...
Open at 00:10:23:13 Open at 00:12:24:02 Open at 00:12:58:26 Open at 00:14:00:21 Open at 00:15:55:03 Open at 00:17:11:10 Open at 00:18:27:22

Notes

Description

(empty)

History

No changes yet.

✂️ Clip Cutter

⌨️ Keyboard shortcuts

Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop

▶

Start

End

🔍 zoom
Already used Plan clips
⚠️ () of this clip is already used in another video (green part). Fine if on purpose, otherwise change the times.
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)

Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".

Clips () · Total

Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.

Hook, full note for editor, status