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00:00:03:08 जय श्री राम सभी को। तो कल वाले जो भाई साहब हैं वह दोबारा आए हैं ब्रह्मा कुमारी के प्रबल समर्थक और बहुत सारे प्रश्न थे जो कल अधूरे रह गए थे। आज हम उनको पूर्णता की ओर ले जाने का प्रयास करेंगे। जय श्री राम जय श्री राम जी जय श्री राम

00:00:48:02 जी मेरी आवाज क्लियर है ना हां तो कल एक विषय चल रहा था कि आप सब धर्मों में कही हुई एक बात को आप मानते हैं जो सब धर्मों में होती है। तो इस कारण से आप उस बात को मानते हैं कि वो क्योंकि सब धर्म वाले बोल रहे हैं। और फिर बात ये हुई थी कि भाई किसी को भी धर्म की कैटेगरी में आप किस हिसाब से रखते हैं? तो आपका कहना था क्योंकि वो किसी अ क्या कहते हैं? आठ कला वाले व्यक्ति ने कही है इसलिए उसे रखते हैं और फिर वो बात अलग हुई कि आठ कला वाले व्यक्ति की सिद्धि कैसे होगी कि वो आठ कला का था तो उसमें आपने दो तीन चीजें कही थी एक कि उसे कई लोग मानते हैं तो उसका यह था कि लोग उसको तो नहीं मान रहे उसकी गलत चीजों को मान रहे हैं जो आप मानते नहीं कि वो उसकी चीजें हैं। दूसरी कि उसने अपने जैसा कईयों को बनाया है तो उसने बनाया है क्यों बनाया है इस विषय में भी कोई प्रमाण नहीं था हमारे पास फिर तीसरी आपने ये कहा जो सबसे ज्यादा प्रबल बात हुई वो ये हुई कि उन्होंने क्योंकि धर्म

00:02:03:10 स्टार्ट किया था इसलिए वो आठ कला वाले थे तो मेरा ये कहना था कि जब किसी भी धर्म किसी भी तंत्र को या विचारधारा को धर्म मानने के लिए हम यह देख रहे हैं कि यदि उसे आठ कला वाले ने कहा है तो उसे धर्म माना जाएगा तो आठ कला वाला किसे माना जाए उस संबंध में हम धर्म कैसे ले लेंगे क्योंकि धर्म की तो अभी तक सिद्धि नहीं हुई है कि वो धर्म है कि नहीं है उसके लिए ही तो हम आठ कला पर पहुंचे हैं तो ये सब बातें चल रही थी तो अभी अ

00:02:43:22 हां अभी एक एक बार फिर से थोड़ा रिवाइज कर लेते हैं कि जो मैंने यह सवाल पूछा है कि आप किसी भी बात को जैसे आपने का कहना है कि जो भी बात चार चीजों में समान होती है उसको हम जो है वो मान लेते हैं धर्म ये चार जो आपने नाम लिए धर्म के हां वो चार मुख्य धर्म बताया वैसे तो छोटे-छोटे धर्म मंत्र पथ बहुत हैं लेकिन मुख्य चार है जो बरा धर्म है मुख चार है। नहीं नहीं तो बुद्ध को इसमें नहीं गिनते। पांच मानते हैं कि चार मानते हैं मुख्य देखिए अगर सिख को जोड़ देते हैं सिख 500 वर्ष पहले स्थापन हुआ था। अगर जोड़ते हैं तो पांच हो जाता है। नहीं तो चार ही है। जो सबसे पुराना और मुख्य अच्छा एक विषय ये भी था कि बुद्ध का बुद्ध के बारे में ब्रह्मा कुमारी का मानना है कि वो परमेश्वर को मानते थे। है ना? जी जी परमात्मा को ज्योति रूप में मानते थे। ऐसा हमें बताया गया है। ठीक है? ये ब्रह्मा कुमारी का कहना है। जबकि हमें बुद्ध के इतिहास में ऐतिहासिक वर्णन यही मिलता है सभी प्राप्त सभी तरह से कि बुद्ध ने किसी भी ईश्वरीय सत्ता अथवा जो आत्मा की सत्ता की बात स्वीकार नहीं की

00:03:58:28 है। हो सकता है। आपकी बात सही हो सकता है। तो अब बात यह है कि आपका कहना है कि हम वो जो चारों धर्म चार मुख्य धर्मों में जो एक बात होती है उसको मानते हैं। तो आप मुझे बताएं कि जैसे कौन सी एक बात है जो चारों में समान है जिसको आपने धर्म माना है। देखिए मुख्य चार धर्म जो माना गया है ना उसमें मुख्य एक बात है कि सभी परमात्मा को ज्योति बिंदु मानते हैं। ज्योति स्वरूप मानते हैं। ज्योति की पूजा करते हैं। ज्योति के रूप में उसको मान्यता दिया गया है और वास्तव में शायद मान इस्लाम में इस्लाम में इस्लाम भी वो संग असमद इस्लाम में ज्योति की बात कहां पे मानी है? संग असमत नामक पत्थर दीवार पे चिपका हुआ मक्का मदीना में और मुसलमान लोग जाके उसी को चूमते हैं पूजा करते हैं। ज्योति कहां है? वही बिंदु रूप में पत्थर चिपका दिया। ज्योति मान लीजिए जैसे हमारा शिवलिंग ज्योति का ही प्रतीक तो है। नहीं उन्होंने माना है

00:05:14:02 उन्होंने माना है ज्योति का प्रतीक है। देखो उन्होंने माने या ना माने हमें बताया गया है कि वो ज्योति रूप प्रक मेरी बात समझिए आप आपने क्लेम किया। आपने क्लेम किया आपने क्लेम किया कि वो ज्योति की ज्योति स्वरूप मानते हैं। ज्योति स्वरूप की पूजा करते हैं। ठीक है? अब मैंने पूछा कि ज्योति ज्योति स्वरूप मुसलमान में कहां पर है? आपने कहा कि वो में जाते हैं जो मक्का में वहां पर जाकर जो पत्थर है उसको चूमते हैं। तो बात यह है कि पहली बात तो पत्थर और ज्योति में अंतर है। पहली बात अब आपने कहा कि वो पत्थर एक मिनट अब आपने कहा कि वो पत्थर जो है वो ज्योति का ही प्रतीक है। ठीक है? हां। तो जब कोई चीज किसी की प्रतीक है तो हम जिस चीज को प्रतीक मान रहे हैं उस चीज को उसी का प्रतीक मान रहे हैं। दूसरा सामने वाला जिस पर हम क्लेम कर रहे हैं कि वो भी इसको ज्योति का ही प्रतीक मान रहा है। ये कंफर्मेशन आपने ली है। हां हमारे लिए है। क्योंकि हमारे हमारे मंदिर में भी शिवलिंग के रूप में जो भाई साहब मैं क्या कह रहा हूं? मुसलमान उसको ज्योति स्वरूप समझकर ज्योति के प्रतीक

00:06:29:13 के रूप में मानते हैं या कुछ कोई और किसी और चीज के रूप में उसको मानते हैं। वो मैं ये पूछ रहा हूं। आपने कहा मुसलमान भी आपने कहा मुसलमान भी ऐसा कर रहा है। आपने कहा आपने कहा मुसलमान भी ऐसा कर रहा है। ठीक है? तो आपने मुसलमान से कंफर्म किया कि मुसलमान उस पत्थर को ज्योति का स्वरूप मानता है या नहीं? हां मानता है या नहीं मानता यह हमें कंफर्म नहीं है। हमने उनसे कोई कन्फर्मेशन आप यह दावा कैसे कर सकते हो कि वह ज्योति स्वरूप की पूजा कर रहा है। हो सकता है वो पत्थर की पत्थर को हो सकता है वो पत्थर को पत्थर समझ के ही पूज रहा हो। फिर क्यों उसको अपना तो फिर अपना क्यों थोप रहे हो कि वो ज्योति मान के पूज रहा है उसे। इसलिए कि ज्योति रूप में वो बना के दिखाया गया। हम भी शिवलिंग को पूजा करते हैं। वो ज्योति का ही रूप है। मैं आपसे पूछ क्या रहा हूं? आपने जब उससे कंफर्म नहीं किया कि तुम पत्थर को पत्थर समझ के चूम रहे हो या फिर ज्योति का प्रतीक समझ के पूज रहे हो तो फिर आप उसकी ओर से क्लेम क्यों कर रहे हो कि वो ज्योति समझ के उसको पूज रहा है और फिर उस बात को फिर उस बात को ले रहे हो कि उसके यहां हमारे यहां पे सेम है। इसलिए कर रहे हैं कि हमारे परमपिता परमात्मा स्वयं पर काया

00:07:44:16 में प्रवेश करके बताया कि वो इसे मान के पूजा कर रहे हैं। इसलिए वही मैं कह रहा हूं। इसीलिए बात अटकी थी कल इतनी लंबी सुनिए कुल मिलाकर के जो एक मुस्लिम है एक मिनट जो एक मुस्लिम है वो इस पेन को इस पेन को अगर वो किसी भी वजह से पूज रहा है या उसको सम्मान दे रहा है तो क्योंकि आपके बाबा ने ये बताया है पर काया में प्रवेश करके कि वो ज्योति का स्वरूप समझ के पूज रहा है इसलिए आप ये कहोगे कि मैं ये जो मुसलमान है ज्योति स्वरूप मान के पेन की पूजा पूजा कर रहा है। पेन को सम्मान दे रहा है। ठीक। भले ही भले ही मैं यह कहूं कि मैं ज्योति स्वरूप का समझ के इसकी पूजा नहीं कर रहा हूं। मैं इसको पेन समझ के ही पूजा कर रहा हूं। मगर आपके बाबा अगर ये कह देंगे कि इसकी ज्योति समझ के ये पूज रहा है तो वो बात आपके लिए मान्य है। मान्य है। बिल्कुल। क्यों मान्य है? क्योंकि परमात्मा मतलब कि एक एक मिनट एक मिनट। मतलब कि मैं आपको ये कहूं कि आप जो है अ रात को रोज चोरी करने का मन बनाते हो। आपके रात में आपको रोज रात में चोरी और डकैती डालने का प्लान बनाते हो। तो ये बात मैं समाज को बता

00:08:59:22 दूं आपके आपके माध्यम से मुझे किसी दिव्य शक्ति ने ये बात कही है। पर काया में प्रवेश करके जी नहीं ऐसा नहीं हो सकता है। क्यों परमात्मा ये साधारण बातें नहीं कर सकता। परमात्मा का बातें दिव्य होता है। अलौकिक होता है। वो इस से अलग होता है। सारी बातें तो ठीक है। तो ठीक है। अलौकिक अलौकिक अलौकिक बातें सुन लीजिए कि आप रोज रात में परमात्मा को हटाकर उसकी गद्दी में बैठने की योजना बनाते हो। आप जी हम ये अलौकिक हो गई। नहीं अलौकिक कैसे हो गया? हम परमात्मा नहीं हो सकते कभी भी। नहीं मैं ये नहीं कह रहा आप बोल सकते हो मैं ये नहीं कह रहा मैं कह रहा हूं कि आप ऐसी प्लानिंग करते हो रोज जी ऐसा प्लानिंग क्योंकि मुझे क्योंकि मुझे क्योंकि मुझे किसी ने बताया है जिस पर परकाया में प्रवेश करके मुझे किसी दिव्य शक्ति ने बताया है तो ये बातें तो ये बातें छपवा दूं अखबारों में प्रिंट मीडिया में कि आप जो है भगवान की गद्दी हतियाना चाहते हो भगवान बनना चाहते हो नहीं नहीं जनाब भगवान जो ऐसी बातें नहीं करता है। छोटी मैं ये नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं आप ऐसी गलत बात रोज

00:10:14:24 कर रहे हो। नहीं कर सकते ना हम। अरे तो ये तो आप कह रहे हो ना। हम तो उसकी मानेंगे ना जिसने आकर के हम परकाय में प्रवेश करके हमको बताया है। नहीं जो जो समझदार होगा हमारी बातों को परख लेगा। वो कि ये भगवान द्वारा ही कहा गया है। साहब आप देखिए अभी अभी बात क्या हो रही है? हमने कहा मुसलमान पत्थर को चूम रहा है। आप कह रहे हो ज्योति स्वरूप समझ के चूम रहा है। मुसलमान कह रहा है नहीं ये हमारा पवित्र पत्थर है। कोई ज्योति ज्योति के स्वरूप में नहीं पूज रहा हूं। मैं इसको पवित्र पत्थर समझ मैं इसको पत्थर समझ के ही पूज रहा हूं। मगर आपने कहा कि क्योंकि हमारे बाबा ने कहा है इसलिए हम इसको यह मानेंगे कि वो भले ही कहता कहता मर जाए मुसलमान कि मैं इसको पत्थर समझ के चूम रहा हूं। वो भले ही कहता कहता मर जाए मगर हम ये मानेंगे कि वो ज्योति स्वरूप समझ के पूज रहा है। इसका मतलब मैं अपने मन में क्या सोच रहा हूं इस विषय में मेरी गवाही मान्य नहीं होगी बल्कि आपके बाबा ने आ के परकाय में प्रवेश करके जो बोल दिया वो बात मान्य होगी। तो इसी प्रकार से आप अपने मन में आप अपने मन में ये जो मैं आप पर आरोप लगा सकता हूं कि आप जो ब्रह्मा कुमारी जाने का दिखावा करते हो आध्यात्मिक वगैरह जाने का वो दिखावा

00:11:29:25 है बल्कि आप वहां इसलिए जाते हो जिससे कि लोगों का धन दौलत वगैरह अपने पास संचित कर सके। नहीं वो हमारे व्यवहार से हमारे स्वभाव से लोगों को पता लग जाएगा। अगर ऐसा है तो पता लग जाएगा। को मुसलमान के किस स्वभाव से पता लगा कि वो जो है वास्तव में ज्योति स्वरूप की पूजा कर रहा है। पत्थर को नहीं चूम रहा है। वो देखिए वो जब मुसलमान के धर्म की स्थापना किया गया था उस समय हम तो थे नहीं। हम उसको जानते नहीं है। लेकिन जब आपको किसी के बारे में सीधी सी बात है ना जब आपको किसी के बारे में कुछ मालूम नहीं है तो क्लेम मत करो। इसलिए इसलिए कर रहे हैं। कारण बता देता हूं। 2500 वर्ष पहले उसकी स्थापना हुई है। अरे भैया 2500 नहीं 1400 पहले इसको ठीक कर लो आप 1400

00:12:23:25 1400 वर्ष पहले हुई है इस्लाम धर्म की स्थापना हां इस्लाम धर्म से पहले कौन सा धर्म आया था? अरे अब दूसरी बातें करने लगे इस्लाम की स्थापना कहां से मानोगे कहां से जहां से भी हो मतलब 2500 वर्ष पहले उसकी कौन सी घटना है कौन सी घटना है जिससे मानोगे इस्लाम की स्थापना

00:12:56:04 देखो 2500 वर्ष की हमें थोड़ी पता व्यर्थ की बातें मत करो व्यर्थ की बातें हैं ये टॉपिक बदल जाएगा अभी बात ये टॉपिक ये चल रहा है कि व्यक्ति के बारे में वो मन में क्या सोच रहा है? इस विषय में व्यक्ति नहीं बताएगा। आप बताओगे क्योंकि आपके आपके बाबा जी ने कहा कि ये ये सोच रहा है मन में। इसी प्रकार से मैं भी इसी प्रकार से मैं भी कह रहा हूं कि आप जो है अपना धंधा चलाने के लिए बीके की बातें करते हैं। वास्तविकता में कोई आध्यात्मिक व्यक्ति आप नहीं है। वो बातें तर्क पूर्ण भी होना चाहिए। वो ज्योति बिंदु रूप फिर आप जो है मुसलमान द्वारा उस पत्थर को ज्योति मानने के संबंध में तर्क बताइए क्या तर्क है ज्योति मान नहीं रहे ज्योति रूप में दिखाया गया बिंदी परमात्मा ज्योति बिंदु है तो परमात्मा को ज्योति हर कोई मान रहे हैं मैंने अभी क्या है मैंने अभी क्या कहा जब आप आप अपने मन में क्या सोच रहे हो इस विषय में आपने तर्क मांगे मेरी बात पर विश्वास नहीं किया तर्क मांगे अब अब मुसलमान अपने मन में क्या सोच रहा है? उसको ज्योति मान रहा है कि नहीं मान रहा है? इस संबंध में मैं तर्क मान रहा हूं। मैं तर्क मांग रहा हूं। बताइए तर्क क्या है?

00:14:11:06 ठीक है? वो ज्योति ना मानता हो लेकिन हमें ज्योति रूप में दिख रहा है इसलिए हमने मान लिया और परमात्मा ने हमें ज्योति रूप में कैसे दिख रहा है वो? वो पत्थर ज्योति रूप में कहां से दिख रहा है? अभी तो कह रहे थे वो प्रतीक है उसका। ज्योति बिंदु ज्योति बिंदु ज्योति का मतलब हुआ प्रकाश जैसा बिंदु जैसा हुआ है डॉट डॉट बिंदु मतलब डॉट वो डॉट नहीं है वो पत्थर है वो डॉट भी नहीं है बिंदु नहीं है नहीं ज्योति है प्रकाश नहीं है हमारा शिवलिंग भी पत्थर नहीं है लेकिन हम उसको ज्योति हमारे यहां पे लिखा हमारे यहां पे लिखा है कि वो ज्योति स्वरूप परमात्मा का प्रतीक है लिखा है हमारे यहां हम मानते हैं कि वो परमात्मा का प्रतीक है तब उसे तब तब शिवलिंग उस पत्थर को तब वो जो शिवलिंग है उसको हम जोड़ते हैं कि वो ज्योति से मैच खाता है। मगर उसके यहां पे नहीं लिखा है। उसके यहां पे नहीं लिखा है कि ये ज्योति स्वरूप परमात्मा का प्रतीक है। उसमें हम नहीं जाना चाहेंगे क्योंकि उसमें टाइम खराब है। अरे भाई तो नहीं जाना चाहेंगे तो आप यह कहो ना कि भैया उसके यहां क्या है क्या नहीं है। नहीं पता फिर झूठा क्लेम क्यों कर रहे हो? जिस बारे में आपको पता नहीं है वो क्लेम क्यों कर रहे हो? या फिर ये मान लो कि हम किसी के बारे में भी कोई भी क्लेम कर सकते हैं क्योंकि हमारे बाबा जी आकर

00:15:26:12 के परखा में प्रवेश करके बताते हैं वो हम क्लेम करेंगे। हां हां बिल्कुल बिल्कुल वही बता इसलिए अब अगर ऐसा आप कर सकते हैं तो मैं भी कह रहा हूं मेरे पास एक मेरे बाबा जी है जो परकाय में प्रवेश करके आते हैं और ये बताते हैं कि आप धंधेबाज हो फिर मान ले इस बात को। देखो आप तो मांग सकते हो लेकिन तर्क अगर लगाया जाए तो तर्क आप कहां दे रहे हो बाबा जी के बाबा जी के कहे के अलावा आप तर्क कहां दे रहे हो बाबा जी का बात के कहे के अलावा आप मुसलमान द्वारा उस पत्थर को ज्योति स्वरूप मानने के संबंध में तर्क कहां दे रहे हो मैं यह कह रहा हूं कि मेरा पिता कौन है हमें नहीं पता है लेकिन हमारी मां बताया कि ये तुम्हारे पिता है तो हमने माना ना उसी तरह से परमपिता परमात्मा स्वयं आ के बता रहे हैं तो हमें मानना चाहिए बस ये कहना है तो वो परमपिता परमात्मा ही है ये आप मानते हो ना मैं तो मानता हूं कि मेरे पास जो परकाय में प्रवेश करके मुझे बता रहे हैं मैं वो मानता हूं उनको मानता हूं वो परमपिता है और वो बता रहे हैं कि आप लोग धंधेबाज हो बीके वाले तो क्या वो माने कि आपकी स्वतंत्रता है हम उसे मैं उसको किताबों में छपवा दूं आपके नाम से लक्ष्मी शर्मा जो है धंधेबाज व्यक्ति

00:16:41:13 है लोगों को मूर्ख बनाता है पाखंडी हैवा सकते हैं इसमें तो आपका अनुचित अनुचित तो नहीं होगा नहीं नहीं आपका रिमोट कंट्रोल हमारे हाथ में थोड़ी है आप जैसे मर्जी आप पुलिस स्टेशन तो नहीं जाएंगे मानहानि का दावा इत्यादि तो नहीं करेंगे नहीं सर नहीं हम कोई विरोधाभासी बात नहीं होगी हमारे परमात्मा ने ये भी बताया कोई आपत्ति आपको कोई आपको कोई आपत्ति नहीं है कि आपको झूठा और ये सब षड्यंत्र करने वाला कह दिया जाए। हां कोई आपत्ति नहीं। आप कर सकते हैं। आप स्वतंत्र हैं। वो आप अपने लिए करेंगे। हम अपने लिए करेंगे। सबका धर्म अलग-अलग है। चलिए ठीक है। ये बात हो गई। अब अब आप ये बताइए जी। कि आपने कहा था कि किसी भी किसी भी तंत्र को किसी भी विचारधारा को जी। धर्म की कैटेगरी में मानने के लिए आपने कहा क्योंकि वो एक आठ कला वाले व्यक्ति द्वारा स्थापित किया गया है। इसलिए वो धर्म है। जी जी जी है ना? जी हां तो इसका तर्क जानना चाहेंगे? बताइए। हां।

00:17:56:24 ये पूरी सृष्टि जो है परमात्मा ने हमें बताया 5000 साल का हूबहू रिपीट होता है। हर 5000 साल पे हूबहू रिपीट होता है। मतलब अभी आप जिस नाम से जिस रूप से जिस समय जिस स्थान से बात कर रहे हैं 5000 साल पहले भी किया था आपने और आने वाले 5000 साल के बाद भी करेंगे। क्योंकि यह सृष्टि ड्रामा हूबहू रिपीट होता है। इसलिए किसी का कोई दोष नहीं होता है। कोई कुछ भी कर रहा है वो वास्तव में वो दोषी नहीं है। ड्रामा अनुसार ही कर रहा है। क्योंकि फिक्स है रोल उसका और उसका जिसका रोल जो फिक्स है वही करेगा। हमारे कहने से वो चेंज नहीं होगा। ये ड्रामा अटल है अविनाशी है और फिक्स है। ये भी बताया है बाबा ने। तो इसलिए अगर कोई बुरा करता है हमारे लिए या आपके लिए तो वो अपने लिए करता है और उसका रोल है। उसमें उसका कोई दोष नहीं है। वो उसका सजा उसको अपने आप मिलेगा। वो ड्रामा का काम है। हमारा काम नहीं है। किसी के गलती को सुधारना हमारा काम नहीं है।

00:19:02:16 तो इसी प्रकार से सृष्टि के शुरू 5000 में 16 कला आत्माएं होती है और सृष्टि आधी जब खत्म हो जाती है तो आठ कला हो जाती है और फिर उसके बाद कलाहीन हो जाती है। यानी कलयुग के अंत में कोई कला नहीं बचा है किसी पे मनुष्य में। इसलिए आठ कला वाला मनुष्य जो धर्म स्थापन किया था उसकी हर बातें आप यथार्थ रूप से नहीं समझ सकते। क्यों? क्योंकि वो कला नहीं है। अभी उस कला को समझने के लिए उसी आठ कला में जाना पड़ेगा। तभी हम धर्म संस्थापक की बातें यथार्थ समझ पाएंगे। नहीं तो नहीं समझ सकते। यह प्रमाण है कि वो आठ कला वाला आत्मा ही धर्म का स्थापन किया है। क्योंकि वो 2200 वर्ष 2250 वर्ष पहले हुआ है। यानी 1250 वर्ष से पहले आठ कला था और 2500 वर्ष के पहले 2500 वर्ष के पहले 16 कला था। ये क्रमश बढ़ा। पहले 14 हुआ फिर 16 हुआ। इस तरह से क्रमश घटते जा रहा है। आठ के बाद एकाएक जीरो नहीं देर बाद मुझे बोलने की मुझे बोलने का समय मिलेगा। जी जी जरूर जरूर जरूर मैं तो तर्क दे रहा था मैं पूछ रहा हूं कितनी देर बाद मिलेगा समय मुझे बोलने का आप बोल सकते हैं मैंने आपको तर्क बता दिया

00:20:18:02 बात हो गई हो गई आपकी बात बिल्कुल आपने कहा कि परमात्मा ने ये बताया है कि जो ढाई हजार साल पहले का समय था लगभग 2250 वर्ष पहले का समय उस समय आठ कला वाले लोग होते थे ठीक इसलिए क्योंकि उस समय आठ कला वाले लोग होते थे। इसलिए बुद्ध के द्वारा स्थापित किया जो मामला है वो धर्म है। जी बुद्ध के द्वारा हुआ। एक मिनट भाई साहब भाई साहब 50 चीजें मत बोला करिए। अब मैं बोल रहा हूं। जी आपने बोल लिया ना। जी तो बोलिए आपने कहा 2250 वर्ष पूर्व क्योंकि बुद्ध हुए थे इसलिए उनके द्वारा स्थापित जो तंत्र और जो जो भी सिस्टम है विचारधारा है वो सब धर्म है क्योंकि वो आठ कला के थे क्योंकि वो 2250 वर्ष पूर्व हुए थे तो फिर यहां पर प्रश्न ये आता है कि 2250 वर्ष पूर्व सभी लोग तो होते नहीं थे आपने ही कहा आठ कला के कोई कम था कोई ज्यादा का थांब

00:21:30:26 तो तो बुद्ध आठ कला के थे इस संबंध में प्रमाण क्या है प्रमाण यही बताया ना कि 5000 साल का पूरा सृष्टि है तो 2500 वर्ष 16 कला होता है अरे भैया आप ही तो आप ही कह रहे हो कि उसी उसी समय धारा में दूसरे लोग दूसरी मतलब कम कलाएं ज्यादा कला के भी थे तो कला और कला से मेरा मतलब है कि थोड़ा बहुत जैसे आठ के जगह थोड़ा बहुत तो बुद्ध बुद्ध आठ कला के थे ये कैसे पता इसलिए कि वो 2200 वर्ष पहले था उस समय सभी मनुष्य के कला इतना ही होता है लगभग जैसे आप कोई बताते हो आपका कहने का मतलब है उस समय का हर मनुष्य सात आठ कला वाला ही था लगभग लगभग बिल्कुल इसका मतलब उस समय उस समय जितने लोग आए और उन्होंने जो जो धर्म स्थापना की वो सारी धर्म वो सारे विचार जो थे वो धर्म थे हां धर्म थे या उत्तम विचार थे जो भी आप मान सकते हैं क्योंकि उसके समांतर और कोई दूसरा नहीं था तो वही धर्म था उस समय के समाज को

00:22:45:27 सुधारने के लिए उन्होंने जो मत दिया वो धर्म है 2250 वर्ष पूर्व बुद्ध आए और बुद्ध ने जो विचार दिए वो आपके अनुसार धर्म थे क्योंकि उस समय के लोग आठ कला वाले होते थे। जी जी लगभग आठ कला वाला होते थे और उनको वो समय भी आता था पूरा यथार्थ आदि शंकराचार्य जी का नाम सुना है आपने? जी जी जी सुना है सुना है बिल्कुल वो भी लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्वी हुए थे। जी बिल्कुल बिल्कुल वो भी आठ कला में थे। तो वो भी आठ कला के थे। बिल्कुल बिल्कुल तो फिर उनके द्वारा दिया गया भी धर्म हो गया। बिल्कुल उनके द्वारा भी जो मत और आदेश दिया गया वो धर्म माना जाता है और वो समाज को सुधारने के लिए उन्होंने दिया है। ठीक। अब ये बताइए कि बुद्ध ने भी धर्म दिया ढाई हजार वर्ष पूर्व और आदि शंकराचार्य जी ने भी धर्म दिया ढाई हजार वर्ष पूर्व। यानी दोनों ने उत्तम विचार दिए। जी बिल्कुल। हां। तो अब यह बताइए जब दोनों दोनों यानी कि दोनों एक ही बात कही लगभग दोनों ने एक ही बात कही हां लगभग उसमें कुछ अलग अलग भी हो सकता है लेकिन मोटा

00:24:00:28 मोटी आत्मा और परमात्मा की तरफ बढ़ने की बातें एक ही अलग-अलग तो फिर बुद्ध के बुद्ध जो थे बुद्ध से बौद्ध वालों से बौद्ध से आदि शंकराचार्य की लड़ाई क्यों हुई शास्त्रार्थ क्यों क्यों हुआ युद्ध क्यों हुए वो मतभेद या मन मनभेद अरे मतभेद अरे भैया जब आत्मा परमात्मा की बात दोनों कर रहे हैं थोड़ा बहुत करने धरने में अंतर आ रहा है तो थोड़ी ना युद्ध होते हैं युद्ध तो होते हैं आर्या पार की बातों पे एक कह रहा है कि जो है भगवान है दूसरा कह रहा है भगवान है ही नहीं तब होते हैं युद्ध ये मतभेद तो किस हो सकता है भाई भाई में हो जाता है पिता पुत्र में भी हो जाता है भाई भाई में कोई बात अटकती है ना तब होता है वो बात क्या थी जो अटकी थी?

00:24:53:08 आदि शंकराचार्य और बुद्ध दोनों की विचारधारा ईश्वर को लेकर के एक थी। जी एक चीज नहीं थी। हां वो आप बता सकते हैं। तो आप काहे के लिए बता रहे हो? फिर आठ कला वाले होते थे। हम ये बता रहे हैं कि उन्होंने जो भी उस समय कहा था वो आठ कला में कहा था। इसलिए उत्तम बात कही होगी। आत्मा तो फिर जब दोनों उत्तम बात कह रहे हैं तो लड़ाई क्यों हो रही है? देखिए दोनों उत्तम बात कह रहे हैं लेकिन दो रास्ते से जा रहे हैं। मान लो आप दिल्ली जाना चाहते हैं तो उसके दो रास्ते इसका मतलब इसका मतलब जो सत्य बात होती है उसके दो विपरीत ऐसे मार्ग हो सकते हैं जो आपस में लड़ाई भी हो उसके उसके कारण सत्य तो सिर्फ आत्मा और परमात्मा है लेकिन उसके समझने का तरीका अलग-अलग है इसलिए मतभेद हो जाता है। यानी कि समझने का तरीका आठ कला वाले का भी किसी एक का गलत हो सकता है। समझने का तरीका किसी एक का सही हो सकता है। जी नहीं अलग-अलग हो सकता है थोड़ा बहुत नहीं किसी एक का सही किसी एक का गलत हो सकता है ना बिल्कुल थोड़ा बहुत फर्क हो सकता है ज्यादा जमीन आसमान का फर्क नहीं होगा जैसे इतना हो सकता है जिस पर लड़ाई हो

00:26:08:21 हां तो लड़ाई कब हुआ अभी तो हो रहा है ना कलयुग में हो रहा है अरे मैं तभी कह रहा हूं तभी कह रहा हूं ढाई हजार वर्ष पूर्व लड़ाई हुई है बौद्धों से आदि शंकराचार्य चलो हो सकती है मान लेते हैं हम तो तो जब आप कह रहे हैं एक मिनट भाई साहब जब आप ये कह रहे हैं कि दोनों उत्तम विचार वाले थे दोनों ने उत्तम विचार दिए जब दोनों के उत्तम ही विचार थे तो लड़ाई नहीं होनी चाहिए थी लड़ाई होने का मतलब ये है एक मिनट अभी मुंह थोड़ा बंद रखिए थोड़ी देर लड़ाई होने का अर्थ ये है कि दोनों में से किसी एक का विचार उत्तम नहीं था तभी वो उत्तम उत्तम वाला अनुत्तम से लड़ था। उत्तम था लेकिन रास्ते अलग-अलग थे। रास्ते अलग-अलग होने से भी मतभेद होता है। यानी कि उत्तम उत्तम विचार होते हुए भी दो इतने विपरीत रास्ते हो सकते हैं कि उनमें आपस में लड़ाई भी हो जाए। हो जाएगा। वहां मानसान की बात आ जाती है। हम बने हैं, हम बने हैं। ऐसा हो सकता है। यानी कि किसी एक के अंदर गलत विचार थे। थे। हो सकता है। लेकिन आजकल हो सकता है वाली बातें नहीं हो रही है भाई साहब यहां पर। यानी कि किसी के अंदर गलत विचार थे ना ये घमंड वाले मान सम्मान

00:27:23:22 वाले जो नहीं होने चाहिए थे। द्वापर जो जितने भी धर्म है देखिए आप बार-बार पटरी मत बदला करिए। अभी मैंने पूछा किसी के अंदर वही नहीं आप अभी इसका जवाब दीजिए। आपने कहा मान सम्मान के कारण मान सम्मान के कारण लड़ाई हो सकती है। इसका मतलब किसी के अंदर ऐसे ऐसे गलत विचार थे घमंड वाले जिसके कारण लड़ाई हुई ऐसे मतभेद थेकि 16 कला में कोई मतभेद नहीं है परिपूर्ण है आठ कला में मतभेद है इसलिए उसको द्वापर कहा गया द्वत मत शुरू हो गया कला के द्वारा भी आठ कला वाले के द्वारा भी जो बातें हैं उनको धर्म नहीं माना जा सकता क्योंकि उसमें गलत बातें भी हो सकती है द्वत मत हो सकती है द्वत मत दो वो दो रास्ते आठ कला वाले से गलत बातें आठ कला वाले के द्वारा गलत बातें बताई जा सकती हैं। चलो बताई जा सकती है। आप कह रहे हैं तो मान लेते हैं हम क्योंकि आठ कला मतलब उसकी आप ही ने तो कहा है कि हां हो सकता है। नहीं तो मतभेद नहीं होना चाहिए था। नहीं मतभेद तो

00:28:39:03 आप दिखा रहे हैं। सतयुग में भी रावण और राम के साथ मतभेद था। किसके साथ? तो सतयुग में दिखा रहे हैं आप। क्या कोई मतलब कोई रावण के साथ रावण नहीं था। कोई कंस के साथ कृष्ण नहीं था। लेकिन बता रहे हैं एक मिनट भाई साहब तो आप क्या कहते हैं कि रावण और कंस ने भी धर्म दिया है दुनिया को। रावण रावण राम के समय में था ही नहीं। अरे जो था आपके हिसाब से जो था ये रावण और कंस ने दुनिया को धर्म दिया है क्या? जो आप बता रहे हो फिर तो रावण और कंस में लड़ाई क्यों हुई? मैं वही तो पूछ रहा हूं। आप कह रहे हो आप कह रहे हो। देखो थोड़ा ठंडे दिमाग से बात करो। आप बड़े बड़े हो। कल मुझसे लोगों ने कहा कि भाई आप जो है बहुत ज्यादा क्या कहते हैं? अग्रेसिव होकर के बात कर रहे थे। तो मैंने अपने आपको मैंने अपने आपको मना मैंने अपने आप को मनाया कि मैं आज अग्रेसिव नहीं हूं। आपसे बात करने से और आपको लग रहा है नहीं। और सुनो आपके द्वारा जो है ऐसे बातें कई बार हो रही है जो मूर्खता की पराकाष्ठा है। मगर फिर भी मैं अपने आप को नियंत्रित करके आपसे बात करने का प्रयास कर रहा हूं। तो थोड़ा ध्यान दो

00:29:54:04 आप मेरी बात पे कि बिल्कुल हां कि बात ये है आपने कहा कि बुद्ध ने भी धर्म दिया। आदि शंकराचार्य जी ने भी धर्म दिया। मैंने बताया दोनों में लड़ाई झगड़ा क्यों हुआ कि भैया दोनों के अंदर दोनों में से किसी में हो सकता है मान सम्मान की बात आ गई हो। इसका मतलब कि वो जो आठ कला वाले लोग हैं वो गलत बातें बोल सकते हैं। देखिए द्वैत मत वहां से शुरू हो गया। दो मत होगा तो मतभेद होगा ही। रास्ता एक ही है परमात्मा तक जाने का। मत एक ही है। लेकिन रास्ता अलग-अलग है। मुझे उदाहरण देके बताइए कि किस बात को लेकर में दोनों में झगड़ा हो सकता हुआ होगा? बताइए। जैसे जैसे उदाहरण के लिए कोई कृष्ण को परमात्मा मानते हैं। कोई राम को मानते हैं। कोई गणेश को मानते हैं। तो इन मान्यताओं के कारण मतभेद हो सकता है। इसी तरह से परमात्मा को मतभेद सुनिए सुनिए। अगर मानते हैं ठीक तो उनमें से एक जो होगा वो ये कहेगा ना कि नहीं नहीं कृष्ण परमात्मा नहीं है। बिल्कुल और एक कहेगा है तभी मतलब एक कहेगा है मगर क्या परमात्मा दोनों है या फिर जो अर्थ लगाए जा रहे हैं कि केवल कृष्ण है केवल

00:31:09:18 राम है या एक ही परमात्मा के दो स्वरूप है इनमें से कौन सी बात सच्ची होगी परमात्मा कोई भी शरीर धारी नहीं हो सकता हां इसका मतलब इसका मतलब ये उदाहरण आपका गलत है आप आप यहां पर क्या है बुद्ध और जो आदि शंकराचार्य दोनों आप कह रहे धर्म देने वाले हैं। मगर उदाहरण किसका दे रहे हो? आप उदाहरण दे रहे हो कि दोनों गलत बात कहने वाले हैं। वो लोग धर्म देने वाले नहीं है। आपके आपके अनुसार आपके अनुसार कृष्ण को भगवान यानी परमात्मा मानना भी गलत है। राम को परमात्मा यानी भगवान मानना भी गलत है। तो फिर उदाहरण क्यों दे रहे? वो तो वो तो आपस में लड़ेंगे ही। उनके उनके वो तो गलत है ही है। बस एक कृष्ण को मान के गलती कर रहा है। दूसरा राम को मान के गलती कर रहा है। वो तो आपस में उनका लड़ना तो निश्चित है। मगर यहां तो आप दोनों को सही कह रहे हो। ये दोनों लोग सही थे। देखिए सही का मतलब ये नहीं कि 100% सही थे। मानव कभी भी 100% सही नहीं। मुझे वो बात बताइए। मुझे वो बात बताइए। किस बात के आधार पर उनके बीच में लड़ाई हुई? जब परमात्मा और आत्मा को लेकर के जब आत्मा और परमात्मा को लेकर के उन दोनों ने उत्तम बात कही तो किस बात को लेकर के दोनों में लड़ाई हुई?

00:32:25:18 इसलिए कि दो रास्ता था अलग-अलग रास्ता था। इसलिए वो रास्ते में अलगाव क्या था? क्या रास्ता अलग था? वो क्या था? वही वही तो बता रहा हूं कि किसी ने परमात्मा को जाने परमात्मा तक जाने का रास्ता राइट से बताया। किसी ने लेफ्ट से बता दिया होगा। इसलिए मतभेद है। परमात्मा तक जाने का रास्ता किसी ने राइट से बताया, किसी ने लेफ्ट से बता दिया। जैसे कि क्या परमात्मा तक जाने के लिए क्या दिल्ली से मुंबई इस तरह से रास्ता है? कोई क्या है मामला? जी मतलब विचार रूपी रास्ता की बात कर रहा हूं। तो वो विचार बताइए। विचार बताइए। कौन सा विचार अड़ा आपस में वो विचार बताइए। ये मन का भेद था। परमात्मा मैं पूछ रहा हूं आपने विचार रूपी रास्ता जो बोला है वो विचार बताइए जो अटका दोनों का आपस में

00:33:22:00 देखिए विचार जो अटका उसमें और भी कई बातें हैं उसमें भाई साहब आप इस तरह से बात नहीं होती किसी किसी समझदार व्यक्ति को भेजिए अपनी ओर से क्योंकि जितनी बार आप अटकते हैं चलिए मान लीजिए चलिए ये कर लीजिए चलिए वो कर लीजिए यही कर रहा हूं मैं तब से हम ठीक है। अभी अभी मैंने आपसे पूछा आपने कहा दोनों ने उत्तम बात की तो मैंने कहा फिर दोनों में झगड़ा कैसे? जब झगड़ा झगड़े की बात आई तो आपने कहा कि भाई किसी का रास्ता अलग हो सकता है किसी का रास्ता। तो हमें विचार में समझाइए कि परमात्मा को प्राप्त करने के दो सही विचारों के बीच में एक दूसरे से झगड़ा कैसे हो सकता है? दो सही विचार। परमात्मा को प्राप्त करने के दो सही विचार आपस में झगड़े का कारण कैसे बन सकते हैं वो बताइए मुझे। आप जो उदाहरण दे रहे हैं वो दो गलत विचारों का दे रहे हैं। राम को मानते थे, कृष्ण को मानते थे। आपका कहना है कि वो दोनों गलत है। देखिए मनुष्य दो दो सही विचारों का उदाहरण दीजिए मुझे। तो आप उदाहरण नहीं दे रहे हैं। मनुष्य के विचार अलग-अलग हो सकते हैं। कोई दिल्ली पहुंचना चाहता है। भाई साहब देखिए आप जाइए आप हो गया। कोई ऐसे ही ये ब्रह्मा कुमारी में सब आपके

00:34:37:06 जैसे ही भरे पड़े हैं क्या? आपके जैसे ही है सबके सब थोड़े बहुत थोड़े बहुत कुछ विद्वान भी हैं। चलिए ठीक है। जय श्री राम सभी को। अगर आप आज्ञा दे तो मैं आपको ब्रह्मा कुमारी का थोड़ा सा उद्देश्य पे बात कर दूं। क्या चाहते हैं? नहीं मैं मैं जानता हूं मैं जो है आपको यहां पे ब्रह्मा कुमारी का प्रचार करने के लिए नहीं बुलाया है। ब्रह्मा कुमारी जो पाखंड सुनिए ब्रह्मा कुमारी जो पाखंड फैला रहा है आप जैसे लोगों के रूप में अपना प्रचार करवा रहा है। मैंने उसकी वास्तविकता को सामने लाने के लिए कि ब्रह्मा कुमारी के द्वारा कही जाने वाली बातें कितनी मूर्खता पूर्ण वो कितनी धूर्तता पूर्ण है। ये समाज के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए बुलाया है। अब आप मुझे बता दीजिए। ये आपकी नजर में हो सकता है। अब आप मुझे बता दीजिए। अब आप मुझे बता दीजिए। अब आप मुझे ये बता दीजिए कि ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार

00:35:53:18 अ ईश्वर है। ये कैसे सिद्ध होता है? ब्रह्मा कुमारीज के अनुसार ईश्वर ज्योति बिंदु स्वरूप में है। उनका रूप और रहने का जगह परमधाम बताया गया है। मैंने नहीं पूछा है। मैंने नहीं पूछा है। मैंने नहीं पूछा है। मैंने ये नहीं पूछा है। मेरी बात सुनिए भाई साहब। मेरी बात सुनिए। मैं पूछ रहा हूं कि ब्रह्मा कुमारी के अनुसार ईश्वर है। ये कैसे सिद्ध होता है? आप बता रहे हैं ईश्वर ऐसा है। ईश्वर वैसा है। ईश्वर यहां रहता है। वहां है। आप थोड़ा मूर्खता से बाहर आइए। भाई साहब आप इतने ऐज में बने हैं। बार-बार मुझे आपके साथ इस तरह से बात करनी पड़ रही है। शर्म आनी चाहिए आपको। जी ठीक है ठीक है मैंने पूछा क्या है आपसे ईश्वर सिद्ध कैसे होता है तो आप ये क्या बता रहे हो सर लाल है पीला है नीला है देखिए तभी तो पता लगेगा ना ईश्वर सिद्ध कैसे होता है उसका रंग बताएंगे रूप बताएंगे रहने का जगह बताएंगे तभी तो आप जानेंगे ना कि इससे सिद्ध होता है अच्छा अगर मैं अगर मैं आपको ये कहूं अगर मैं आपको ये कहूं आप किस समय कहां पर हो

00:37:06:21 जी धरती पर हैं आप अभी धरती में किस जगह पे समस्तीपुर बिहार बिहार और बिहार में कहां पर समस्तीपुर जी ठीक है आपकी आप जिस कमरे में इस समय हो वहां पर जो है एक चुड़ैल खड़ी हुई है जी मान लोगे कैसे मान लेंगे उसका उसका मैं आपको उसका रंग बता रहा हूं। मैं आपको उसका रंग बता रहा हूं। सफेद कलर की साड़ी है और लाल कलर का खून लगा हुआ है चेहरे पर। जी जी और जैसे हवा चलती है हमको महसूस होती है दिखाई नहीं देती। ऐसे ही वो खड़ी हुई है मगर आपको दिखाई नहीं दे रही है। मान लो चुड़ैल चुड़ैल का काम क्या है? चुड़ैल का काम है आपका चुड़ैल का काम है आपका आपको मूर्ख बनाना। आपके आपके दिमाग में जो मूर्खता भरना हां तो अगर मूर्खता भर रहा है तभी तो यह सिद्ध होगा ना कि चुड़ैल है लेकिन अगर अच्छी बातें भर रहा है तो हम कैसे फील करेंगे कि वो चुड़ैल है ये भी तो हो सकता है ना अब ये जो अच्छी बातें है कि मूर्खता है डिसाइड कौन करेगा

00:38:22:04 देखो परमात्मा कोई शरीरधारी नहीं हो सकता ज्योति बिंदु है और उसको फील फिर बकवास शुरू कर दी इसीलिए फिर लोग कहते हैं कि बोलने नहीं देते हो। लोग कमेंट करते हैं कि बोलने नहीं देते हो। यह बकवास सुनने के लिए मैं बोलने दूं आपको। चलिए जाइए आप अपना काम करिए। दो कौड़ी का दिमाग 32 ही दिखाने आते हैं। ऐसे ही लोग भर रखे हैं ब्रह्मा कुमारी में सब के सब।

00:38:59:18 कोई और चर्चा के लिए आना चाहता हो तो आ सकता है। मुंह चलाने आए थे बस 5000 साल का ड्रामा है दोबारा होगा और वह प्रवचन देने आए थे जो इनको इन्होंने रटा हुआ है जो अपने यहां मूर्खों की टोली मूर्ख कुमारीज

00:39:32:12 अगर ऐसे लोग वहां पर है इन इन लोगों को वहां पर रख रखा है तो क्या कहा जाए मूर्ख ना कहा जाए तो कहां से आते हैं ये लोग? कोई ज्वाइन करेगा कोई? हर्ष जी आप ही आ जाओ। शास्त्रवाद कोई हो तो वो आ जाए।

00:40:18:02 हां पंडित जी आइए। आ जाइए आप भी आ जाइए। [हंसी] कल रात को मुझे कुछ ऐसे कमेंट्स दिखाई दिए तो मैंने कहा आज मैं अपने को कंट्रोल में करूंगा। भाई शिवश जी आप प्लीज उनके यहां से कोई प्रमाणित व्यक्ति लाइए वरना लोग आपको गलत समझ रहे हैं। देखिए हम मैं एक बार मंदिर के बाहर खड़ा हुआ था। आज से चार पांच साल पहले की बात है। मेरे हाथ में

00:41:20:07 ये हिंदुओं को भटकाने के लिए जो तंत्र चल रहे हैं इनको लेकर के मैंने एक प्लेट बनवाया था और मैं बांट रहा था बाहर और मैं माइक पे पोर्टेबल माइक स्पीकर पे जो है बोल रहा था कि अपने बच्चों को ब्रेन वाश होने से बचाएं। ऐसे लोग मंगलवार था हनुमान जी के मंदिर में भीड़ थी तो काफी लोग वहां पर जुट रहे मगर मैं अपना काम कर रहा था और वो प्लेट्स बांट रहा था। तो वहां पर एक व्यक्ति आ गया। बोला कि हिंदू धर्म भी कोई बहुत अच्छा धर्म नहीं है। तो मैंने तपाक से उसको बोला कि हिंदू धर्म में एक सूत कोई कमी नहीं है। बोला कि अच्छा सती प्रथा सही थी। जाति वो सती प्रथा सही है। दहेज प्रथा सही है। तो मैंने कहा दहेज प्रथा सती प्रथा कहां पर मैंडेटरी लिखी गई है? भाई किसी स्त्री का जो

00:42:20:02 भरता है उसने देह त्याग कर दिया है। उस स्त्री को अब कोई मोह नहीं रह गया है सांसारिक तो वो अपने अभिभावकों से और इच्छा पूर्वक वो भी जो है जो दिव्य शरीर होते थे उसी में पॉसिबल हुआ। इच्छा पूर्वक अगर वो जाती है उसको सती कहते। कोई यह थोड़ी ना कि हमारे यहां किसी को मार मार के सती बनाया जाता हो। ऐसा कहीं नहीं है। ऐसा था, ऐसा होता तो माता कौशल्या को श्री राम जी ने बनाया था क्या सती? हां कैकई को बनाया था क्या? बनाया गया था क्या सती?

00:43:00:28 तो सती कोई एक इच्छा पूर्वक कुछ कार्य कि दिव्य आत्माओं ने किया है जैसे पद्मावती ने किया था अलाउद्दीन खिलजी से अपने शरीर की रक्षा करने के लिए हम और दहेज की बात भी ऐसी है मनुस्मृति में लिखा हुआ है कि जो लोग धन सामग्री इत्यादि प्राप्त करने हेतु तू अपने पुत्र का विवाह करते हैं। मतलब मांग करते हैं सामान की वो सभी नीच होते हैं। उनका खंडन किया गया है। तो फिर यह दहेज क्या है जो आ रहा है विवाह में? ये पिता के द्वारा अपनी पुत्री को दिया गया उपहार है। भेंट है। आशीर्वाद है। वो है उसकी मंगल कामनाएं। कोई अगर उसका गलत उपयोग कर रहा है कि कितना दोगे तो उसको तो नीच कह रहा है ना धर्म। खैर उससे यह सब बातें हुई थी मेरी। उसके बाद उस दिन मुझे पता लगा था कि भाई हम सबको कभी खुश नहीं कर सकते। हम सबको कभी खुश नहीं कर सकते। जैसा अभी कमेंट था ना कमेंट में

00:44:16:00 आया था कि लोग आपको गलत समझ रहे हैं। तो हम सबको कभी खुश नहीं कर सकते। और इस बारे में करपात्री जी ने एक बात कही है। वो यह बात है कि कुत्तों को अगर शंख की ध्वनि पसंद नहीं आए तो इसका अर्थ है हम शंख बजाना बंद नहीं कर सकते। हम अपने ओर से सत्य के मार्ग पर जो कर सकते हैं यथा सामर्थ्य वो कर रहे हैं। फिर भी लोगों को अगर समझ में नहीं आ रहा है। अंधे हो चुके हैं। ठान रखी है उन्होंने। मानवता का नाश करेंगे। धर्म का नाश करेंगे। धर्म से लड़ेंगे तो लड़ो। हम भी लड़ेंगे सवा लाख से एक लड़ावा चिड़िया से मैं बाज बाज लड़ावा

00:45:03:22 जय श्री राम भैया जय श्री राम बताइए दो दिन से अभी जो दो दिन से जो अभी लाइव चल रहा है उसे देख के तो मतलब जनता का पूरा मनोरंजन तो हो ही गया पूरा नहीं मनोरंजन नहीं है। देखने वालों को सर में दर्द हो रहा होगा। उस व्यक्ति के पास अपनी रटी हुई बातों के अलावा कहने के लिए और कुछ है ही नहीं। बिल्कुल आपने सिद्धि पूछा वो अपने ईश्वर का डेफिनेशन देने लग गया। हम डेफिनेशन भी नहीं थी। वो वो लक्षण थे केवल।

00:45:48:16 जी भैया। डेफिनेशन दीजिए। डेफिनेशन को वो कहेंगे जिसमें थोड़ा बहुत लक्षण हो और मुख्यता उसका उपयोग हो। वो परिभाषा कहलाएगी कि व्हाट इज ए कंप्यूटर? कंप्यूटर इज एन इलेक्ट्रॉनिक मशीन व्हिच कैन परफॉर्म आवर अर्थमेटिकल एंड लॉजिकल ऑपरेशंस एट वेरी हाई स्पीड। ये डेफिनेट ये कुंफू पांडा कौन आया है?

00:46:23:13 देखा आपने ब्रह्मा कुमारी वाले भाई साहब से मैंने बहुत आज की वार्ता तो तसल्ली से की है ना। कल कुछ लोग आरोपी ये कह रहे थे कि भाई आप बहुत एग्रेसिव होकर के बात कर रहे हो। आप आकर के इन मूर्खों से जब इन मूर्खों से जब यह जो कमेंट करने वाले लोग हैं जब ऐसे मूर्ख लोगों से करेंगे ना उनको जब तो समझ में आएगा कि शिवश जी ने तो बहुत झेल लिया था। जी भैया ये लोग आते नहीं है ना। ये लोग बोलेंगे कि किसी प्रोफेशनल को लेकर आओ। इस तरह से बातें करेंगे। हम कहते हैं भाई सब यहां पर प्रोफेशनल बन के ही आते हैं। लेकिन जब वो निरुत्तर हो जाते हैं तो फिर वह अनप्रोफेशनल लगने लग जाते हैं। और फिर बात ये है कि जो परंपरा विहीन है वो कहीं से भी एट द एंड प्रोफेशनल सिद्धि नहीं हो पाएगा। अब जो ब्रह ये जो ये वाले लोग हैं जो आध्यात्मिक विश्वविद्यालय इनका कहना है कि हम ब्रह्मा कुमारी से निकले हैं। ब्रह्मा कुमारी वाले का कहना है कि गलत लोग हैं।

00:47:28:24 जी भैया ये लोग कभी अपने बात को सिद्ध कैसे कर पाएंगे जब आएंगे तब निरुत्तर होके ही जाएंगे तो कोई भी यहां पर प्रोफेशनल यहां तो ये है कि ब्रह्मा कुमारी में केवल उससे बात की जाए जिसके ऊपर वो देवता आ रहा हो सीधे उससे बात की जाए और उसमें भी वो कह देगा कि अभी मेरे ऊपर देवता थोड़ी जब देवता आए तब बात करना तो उसी समय बात की जाए जिस समय वो देवता मुरली बोल रहा हो तब बात की जाए अन्यथा बात कर ही नहीं सकते तब तो आप उसके ईश्वर जो है उसी को निरुत्तर कर देंगे [हंसी] आप तो उसके पास है क्या मैं तो उससे पूछूंगा तुमने कहा मिलावट हो गई इसका मतलब तुम्हें पता है वहां क्या लिखा था सुनाओ कुरान पूरी सुनाओ जरा

00:48:23:20 बिल्कुल भैया ये लोग कभी के मंत्र सुनाओ और एक ही जगह अटके रहते हैं। हां कुछ जाना ना ताना कुछ ना तर्क पूर्ण अपने सवाल रखे वहां पर जो बता दिया गया चले आए और यहां पे वो एक बटन लगा दिया और अपना वो टेप रिकॉर्ड है चालू कर दिया उगल दिया सारा और यही उगलने से मैं कल मना कर रहा हूं तो लोग कह रहे है कि तुम बोलने नहीं देते हो यही टेप रिकॉर्ड सुना था ना अभी दो पांच मिनट में जब मुझे कहना पड़ गया था कि मैं कब बोलूंगा मैं अगर यह ना कहूं तो वह आधे घंटे तक उनमें से उन्हीं बातों को तोड़ मरोड़ करके वह रिपीट करता रहे व्यक्ति हद है वही भैया ये बुद्धि का स्तर है हमारा तो ऐसे लोगों के यहां पर फंसते हैं हमारे हिंदू

00:49:12:00 चलिए ठीक है मुझे लगता नहीं और कोई बात होनी है कल निर्भय आर्य के साथ है 1:00 बजे है कल आप लोग जुड़िएगा मोस्ट अवेटेड है वह निर्भय आर्य ने बड़ी तैयारी कर रखी है अवतार का खंडन करने की क्या लगता है? अभी तो बहुत ही अभी तो बहुत ही वो प्रोफेशनल बन रहे हैं। है ना? यहां पे आएंगे और जब वो उत्तर में निरुत्तर हो जाएंगे तो फिर समझ आएगा सभी को। मतलब अच्छा वो लोग स्वयं को वो स्वयं को इतना ज्ञानी समझ करके पुराणों में जो है अवतारवाद और शास्त्रों में जो है उसको खंडन करने आ रहे हैं ना यहां पे ज्ञानी बनके और जब पुराण की तो बात ही नहीं है ना उसमें कोई

00:50:05:22 नहीं पुराण की तो बात ही नहीं है कोई अवतार अवतार का जो सिद्धांत बहुत सारे हमारे पुराण शास्त्र इत्यादि सभी में है ना हम तो अवतार को जब वो जब अवतार को वो मना करेंगे तो इनडायरेक्टली तो वो सभी शास्त्रों को चैलेंज करेंगे ना और जब सभी शास्त्रों को चैलेंज करेंगे तो शास्त्रों के रक्षक जो है परंपरा प्राप्त आचार्य गण जो है तो उन्हीं के जो एक आप है शिष्य हैं जब उनसे इस विषय में भिरेंगे तो ये बहुत ही अच्छा एक डिस्कशन होगा और सभी को समझ भी आएगा आएगा कि इस प्रकार से चैलेंज जो करते हैं ना उस वो कैसे निरुत्तर होते हैं वह कल के लाइव में देखने को मिल सकता है। हां और हमारे चैनल पर आह्वान पर मेन चैनल पर इस समय दो बहुत अच्छे वीडियोस पड़े हुए हैं। आपको उन्हें देखना चाहिए। एक तो बुद्ध से जो एक बुद्ध को मानने वालों से जो बाती बातें हुई हैं और एक जो कल मैंने एक डिटेल्ड वीडियो बनाया है नास्तिक और ये जो मुस्लिम के ऊपर जो और उसमें हमारी फिलोसफी भी बहुत अच्छे से समझ में आएगी आपको वीडियो में तीनों पक्ष है नास्तिकता

00:51:21:06 का खंडन कैसे है और इस्लाम का ईश्वर ईश्वर कैसे नहीं ना ही वह नास्तिकता का खंडन कर सकने वाला है और ना ही उसका अस्तित्व भी सिद्ध होता है। और फिर तीसरा पक्ष है कि सनातन की जो कोर चीजें हैं वो भी आपको उससे पता चलेगी। बहुत इनेटिव वीडियो है वो। बनते बनते बन गया है अपने आप। बहुत ही ज्यादा ज्ञानवर्धन है। उसमें बहुत ही ज्ञान है। उसे देख के तो ऐसा लग रहा था जैसे कि आप वहां होते तो फिर उन दोनों में से किसी में भी मतलब अपने तर्क को सिद्ध करने का वो रहता ही नहीं। वहां पे आप दोनों के बीच आप उन दोनों के बीच आप रहते तो फिर जीत तो सनातन की वहां पे होती। और वैसे भी उसका जो सिद्धांत दिया गया था वो सनातन के पक्ष से ज्यादातर कुछ कुछ लग रहा था।

00:52:16:21 हम चलिए ठीक है। मुझे लगता नहीं है आज और कोई कोई वैसी बात होनी है अर्थपूर्ण कल आप लोग जुड़े और साय काल को शायद हमारी चर्चा होगी आर्य समाझी के साथ या फिर एक दो लोग और हैं जिन्होंने संपर्क किया है तो शाम को देखते हैं। ठीक है चलिए जय श्री राम सभी को जय श्री राम

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