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00:00:03:06 सभी को जय श्री राम और आप सभी जानते हैं एक विवाद चल रहा है इस समय और जिसमें कि आरोप प्रत्यारोप चल रहा है इधर से उधर से सभी तरह की चीजें चल रही है तो अभी-अभी रिसेंटली भागवतानंद ने एक वीडियो डाला है जिसमें कि बहुत सारा व्यर्थ का प्रलाप करते हुए कुछ ऐसी बातें की है जो विषय से संबंधित है इसलिए हम ये वीडियो बना रहे हैं। अच्छा विषय से संबंधित में याद आया इसने अपने एक वीडियो में कहा था कि भाई जो व्यक्ति ने अगर किसी पर कोई आरोप लगाया है तो उस आरोप या उसके मत का खंडन किया है तो मत का खंडन करते समय सामने वाला व्यक्ति अपने मत मत की रक्षा ना करे बल्कि सामने वाले व्यक्ति के मत पर प्रहार कर दे तो इसमें उसने अमुक अमुक कुछ शास्त्रों के वचन बोलते हुए बताया था फलाना दोष होता है। और इस पूरे विवाद में इस पूरी कहानी में प्रारंभ से ले आज वर्तमान तक जो भागवतानंद है वह यही

00:01:18:09 करता हुआ दिखाई दे रहा है। कि यदि उससे कोई बात पूछी गई है तो उस बात का जवाब ना देते हुए उस पर उस पर कोई उसकी किसी उसके द्वारा प्रस्तुत किए गए किसी तथ्य पर प्रहार करते हुए यदि कोई बात कही गई तो उस बात का जवाब देते हुए वो उसने अनग बहुत सारे प्रलाप किए जिसके कारण इतनी सारी लाइव डिस्कशंस हो गए। जैसे कि फॉर एग्जांपल मैं कहूं कि आप हमें ठोस प्रमाण दे दो पूरी मठ के परिकों के संबंध में। उसने स्क्रीन रिकॉर्डिंग दिखाई। ठोस प्रमाण देते समय उसने यह बात भी रखी कि ये आज हम स्क्रीन रिकॉर्डिंग डाल रहे हैं। मगर यदि तुम चुप नहीं रहे तो बहुत सारे हमारे पास ऐसे साक्ष्य हैं जो अभी भी सुरक्षित हैं। बहुत सारे लोग हैं। तो ना तो वो लोग आज तक हैं। प्राप्त हुए ना ही वो बाकी की रिक चीजें प्राप्त हुई। हां। मगर उनके बल पर प्रस्तुत की हुई एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग के आधार पर बहुत कुछ अपने ख्याली पुलाव पकाने का प्रयास किया गया। यह बात जरूर है। तो आज तक भी वो ठोस प्रमाण लेकर आने में समर्थ सिद्ध नहीं हो पाए। जो अपने आप

00:02:33:13 को निग्रहचार्य कहने का कहलवाने का प्रयास कर रहे हैं। सारी दुनिया उनको निग्रहाचार्य एक परंपरा प्राप्त आचार्य के रूप में स्वीकार करें। लुप्त संप्रदाय के गुप्त आचार्य के रूप में। खैर तो आज उन्होंने एक वीडियो डाला है। उसमें जल्दी से डिस्कस कर लें। बहुत लंबी लाइव नहीं करेंगे। पहली बात उसने भगवतानंद ने अपने वीडियो में कहा कि पूरी शंकराचार्य जी अलपनिषद को क्योंकि चौखंबा ने छापा है इसलिए प्रमाणिक मानने को कहते हैं। तो मैं कहूंगा भगवतानंद आप झूठ कहते हैं। यही होता है सच के आसपास वाला झूठ। अलपनिषद पे बात की। अलोपनिषद का खंडन पूरी तरीके से पूरी शंकराचार्य जी ने नहीं किया। मगर अलपनिषद को उन्होंने प्रामाणिक भी नहीं माना। ये है झूठ। पूरी शंकराचार्य जी ने जब भी अलपनिषद पर बात की है तो यही बात की है कि मैं अलपनिषद का ना ही समर्थन करता हूं ना ही उसे प्रमाणिक मांगने मानने के पक्ष में हूं ना ही उसका मैं खंडन करता हूं। उसके पीछे अन्य कई जो धर्म की स्थापना के लिए आवश्यक कारण है वह उनके अपने हैं। मगर जब उन्होंने यह बात कही

00:03:48:19 तो उन्होंने सिर्फ यह बताया कि यदि आप अल्लाह शब्द के कारण उसको मान रहे हैं कि अलपनिषद जो है वो प्रामाणिक नहीं है। तो उन्होंने बताया कि अल्लाह शब्द का अमुक अमुक अर्थ होता है जो देवी मां से जुड़ता है। शक्ति से जुड़ता है। अंबा से जुड़ जाता है। मगर उन्होंने कभी भी यह नहीं कहा स्पष्ट रूप से कि अलोपनिषद अलोपनिषद को हम प्रमाणिक मानते हैं। इसमें ऐसा भी देखा जा सकता है इस बात के अर्थ के अर्थ में अगर जाए तो इस तथ्य को भी ले सकते हैं कि अलोपनिषद का जो भाग जैसे कि इस व्यक्ति ने अपने वीडियो में अगर आगे पढ़ के बताया। हालांकि अलोपनिषद पे हम एक वीडियो बना चुके हैं जो हमारे मेन चैनल पर डला हुआ है। उसमें गुरुदेव से हमारा प्रश्न है। तो आप जाकर देख सकते हैं कि गुरुदेव ने क्या उत्तर दिया। वहां पर उन्होंने यह नहीं कहा कि चौखंबा से छपा हुआ है तो उसको प्रमाणिक मान लेना चाहिए। तो यह होता है इसका वाकल कि सच के आसपास वाला झूठ कि पूरी शंकराचार्य जी ने क्या कहा है उससे बचते हुए उनकी वास्तविकता ना बताते हुए और जो है और ये सच के आसपास वाला झूठ हम शुरुआत से ले रहे हैं और आज भी वही हो रहा है। अभी हम बात करेंगे आगे अन्य कई तथ्यों में यह सच के आसपास वाला झूठ तो पूरी शंकराचार्य जी ने अलपनिषद का खंडन नहीं किया मगर उन्होंने समर्थन

00:05:03:25 भी नहीं किया तो क्योंकि खंडन नहीं किया इसलिए इसने समर्थन मानते हुए पूरी शंकराचार्य जी के ऊपर यह आक्षेप लगाने का प्रयास किया है कि वो जो विचारधारा है या मत पंथ संप्रदाय जो भी है उसका महिमागान करना चाहते हैं। उसके पक्षधर हैं। ऐसा कुछ प्रकट करने का प्रयास किया। तो पहली बात तो यह हो गई कि उन्होंने यह नहीं कहा है कि अलपनिषद को प्रमाणिक मान लेना चाहिए। मगर इसका अर्थ हमें केवल इतना लेना चाहिए कि जब तक कोई बात वेद विरोधी सिद्ध नहीं हो रही है तो उस पर हम प्रक्षिप्त होने का जो आरोप है हमें नहीं करने का प्रयास करना चाहिए। कि हम ऐसा आरोप ना लगाएं जो वेद विरुद्ध साबित नहीं हो रहा है। उस पर प्रक्षिप्त होने का आरोप लगाने से बचना चाहिए। दूसरी बात यह है कि अगर उसमें कहीं पर ऐसा है जो वेदों से मिलता जुलता अंश है और कहीं पर ऐसा है कि आगे जाकर के और भी ऐसी चीजें हुई है जो हम बिल्कुल भी कदाचित स्वीकार नहीं कर सकते कि ये सनातन धर्म द्वारा दी गई शिक्षा है। तो हम ये मान सकते हैं कि अल्पपनिषद था मगर उसमें कालांतर में इन चीजों को डाल दिया गया। 100 की सीधी एक बात कि पुर शंकराचार्य जी ने कभी भी प्रॉपर तरीके से अलपनिषद का समर्थन किया ही

00:06:18:28 नहीं। उन्होंने केवल इस बारे में इतना कहा कि अल्पपनिषद को ना ही मैं खंडन करता हूं और ना ही मैं समर्थन करता हूं। हां, यदि अल्लाह शब्द से अल्लाह शब्द के कारण आप उसका विरोध कर रहे हैं तो अल्लाह शब्द का यह अर्थ हो सकता है। और जब तक हमें जब तक किस कोई ग्रंथ है जो कि वेद विरोधी सिद्ध ना हो तब तक हमें उसका विरोध इस प्रकार से नहीं करना चाहिए कि वह प्रक्षिप्त है। और इसके भी अपने कारण है। ठीक है? वह जब किसी दिन विस्तृत बात होगी तो उसमें बात की जाएगी। तो इनका एक झूठ यहां पर पकड़ा गया सच के आसपास वाला झूठ। अब आगे चलते हैं। बात ऐसी है कि अगर वह मुस्लिम धर्म के पक्षधर हैं। सीधीसीधी बात है कि वह मुस्लिम धर्म के पक्षधर हैं। क्योंकि वो मुसलमान से मिल रहे हैं या मुसलमान का मेले में आना स्वीकार कर रहे हैं या फिर जो है मुसलमान के हक के बारे में बात कर रहे हैं। तो सबसे पहली बात तो यह है कि मुस्लिम धर्म के पक्षधर के चरणों में तुम क्या कर रहे हो? तुम क्यों वहां नाक रगड़ रहे हो? तुम वहां पर क्यों अपनी सेवाएं दे रहे हो? भाई इनका कहना है

00:07:34:04 कि जो पूरी पीठ के परिकर हैं उसमें सचिव महोदय जो हैं वो इन चीजों में लिप्त हैं। तुम क्या कर रहे थे वहां? इनका यह भी कहना है कि पूरी पीठ के परिकर क्या करते हैं? वहां जाकर के दो-तीन दिन रह के आप देख लीजिए। ठीक है? तो ये नहीं रहे क्या वहां पर? यह वहां पर पीठ में नहीं रहे। पीठ में रहे थे तो यह कुछ नहीं जान पाए, देख पाए। मुस्लिम पंथ मुस्लिम मत धर्म शब्द गलती से निकल गया। अगर इनके अनुसार ये जो मुस्लिम इनके अनुसार पूरी शंकराचार्य जी मुस्लिम पंथ के मुस्लिम विचारधारा के समर्थक हैं। तो ये क्या कर रहे थे वहां? यह चरणों में बैठ बैठ के मुस्लिम ज्ञान अर्जन करने गए थे क्या? अच्छा अब दूसरी बात कि

00:08:32:15 ये अगर गुरुदेव मुस्लिम विचारधारा के मुस्लिम आईडियोलॉजी के पक्षधर हैं तो इन सब बातों का एक ही बार में खंडन हो जाता है। एक ही बार में जब वो यह कह देते हैं कि कुरान की सीमा का ईश्वर साक्षात अवतार नहीं ले सकता बाधित है। और उस समय वह अन्य भी बहुत से विचारधाराओं के द्वारा प्रतिपादित होने वाले ईश्वर की बात करते हैं। घटिया तक कहते हैं। उनका वीडियो है। तो जब यह बात आ जाती है तो तो हमें ऐसी बात निकालनी होगी ना जिसमें इस बात का भी मान रह जाए। हम मगर इस बात पर ध्यान नहीं दिया जाएगा। वो उनको जो है आज जो है तुम्हें उनके उनके साथ बैठने का प्रशय प्राप्त नहीं हुआ। यही चाहते हैं। भाई सब जगह आपको जो है ऐसा प्रशय मिल गया कि साथ में आपकी गद्दी लग गई। मगर पूरी शंकराचार्य जी के चरण चरणों से आगे आप ऊपर नहीं जा पाए तो इसलिए उस गद्दी की आप जो है जरूर अवश्य ही खंडन करेंगे। और सेलेक्टिव जो पॉलिटिक्स है इस पर हम बात आगे बात करेंगे। सेलेक्टिव सेलेक्टिव पॉलिटिक्स पर अभी मैं एक बात कर रहा हूं। कह रहा हूं कि अब इनका कहना है क्योंकि पुरी शंकराचार्य जी

00:09:47:18 ने अलोपनिषद को कहा। अलोपनिषद के बारे में तो हमने बता ही दिया कि उन्होंने ना समर्थन किया है ना खंडन किया है। खंडन ना करने का अपना एक कारण है जो हम अपने अलग वीडियो में बना बता भी चुके हैं और आगे आने वाले वीडियो में बताएंगे भी और दूसरी बात हम इस बात का ये अर्थ भी ले सकते हैं कि अगर उसमें बहुत सारी ऐसी बिल्कुल प्रत्यक्ष रूप से मिल जाने वाली सामग्री है जो बिल्कुल भी सनातनी सिद्ध नहीं हो सकती तो हम ये क्यों कहे कि वो अलोपनिषद ही अप्रामाणिक है। हम ये क्यों ना कहे कि अलोपनिषद में अमुक अमुक सामग्री जो है प्रक्षिप्त डाल दी गई है। पहली बात। दूसरी बात यह है कि क्या रस अगर पूरी शंकराचार्य जी कुंभ के मेले में मुस्लिमों का आना अलऊ करने की बात कहते हैं तो क्या वहां पर वो यह नहीं कहते कि रसखान जैसे जो मुस्लिम है वो वंचित ना रह जाए। अच्छा एक बात बताइए क्या आप नहीं चाहते हैं कि पूरा विश्व जो है सनातन के अनुगत हो जाए तो कैसे होगा वो अनुगत? जब उसे आने नहीं दोगे? वह कैसा हॉस्पिटल जिसके बाहर आप यह लिख दो कि यहां पर मरीज का आना अलाउ नहीं है। दूसरी बात तीसरी बात क्या है कि पूरी शंकराचार्य जी जो है मुस्लिम से मिलते हैं। मुस्लिम से मिलते हैं तो वो हो गए मुस्लिमों के पक्षधर। वह इसलिए मुस्लिम से नहीं मिल सकते

00:11:02:21 हैं कि मुस्लिम को हिंदू बनाना है। हिंदू आईडियोलॉजी के अनुगत करना है। इसका अर्थ है कि पूरी शंकराचार्य जी की सभा में एक जगह जो एक मुस्लिम युवती ने आकर के प्रश्न किया था बालिका ने आकर के प्रश्न किया था कि अमुक अमुक ये सब कैसे होता है? तो पूरी शंकराचार्य जी को कहना चाहिए था तुम मेरी सभा से बाहर चले जाओ। और अगर वहां पर आकर के मुस्लिम ने प्रश्न कर लिया तो पूरी शंकराचार्य जी हो गए मुस्लिम समर्थक। तीसरी बात चौथी बात क्या है कि वह मुस्लिमों के हक की बात करते हैं। तो क्या कहें? जब कोई ऐसा बिल पास होता हो रहा है जो हिंदुओं के समर्थन में है तो लोगों को यह आधार दें। लोगों को यह आधार दें कि इसका विरोध क्यों क्यों होना चाहिए? बल्कि यह आधार दें कि इसका विरोध क्यों नहीं होना चाहिए।

00:11:57:18 यही है मूर्खता की पराकाष्ठा। जिस डाल पर बैठे हो उसी को काटो। ऐसे ही होगी हिंदू धर्म की स्थापना। आप बताओ कि मुस्लिम ये हिंदुओं के पक्ष में या मुस्लिमों के विरोध में यदि कोई बिल पास होता हुआ दिख रहा है तो उसको ऐसा कहकर ज्यादा उसका समर्थन होगा। उसकी रक्षा होगी कि वो वो बिल हिंदुओं के पक्ष में नहीं बल्कि मुस्लिमों के पक्ष में है।

00:12:32:00 जो है मुस्लिमों के पक्ष में नहीं हिंदुओं के पक्ष में क्या कह के रक्षा होगी उस बिल की कि वो हिंदुओं के पक्ष में नहीं मुस्लिम के पक्ष में है या मुस्लिम के पक्ष में नहीं हिंदुओं के पक्ष में है इनमें से कौन सी बात से उसकी रक्षा की संभावना अधिक है सोच के देखो अब बात आ जाती है कि ये तो हमने जो उनके ऊपर इसने जो कटाक्ष किए वो दे दिए अब ये भाई साहब का जरा आप चित्र दिखाइए यह भाई साहब ऐसे जगह से जुड़े रहते हैं जहां पर मुस्लिम कुल में उत्पन्न व्यक्ति को वहां का जो है पीठाधीश्वर माना जाता है और यही नहीं उसकी प्रशंसा में बुक लिखते हैं जिसको जो इनके नाम से छपती है और वह बुक जो है बांटी जाती है तो अब यह क्या कर रहे हैं यह यहां पर मान लिया जाए कि ये मुस्लिमों के समर्थक हालांकि यह देखिए यह बुक देखिए किसके द्वारा लिखित है यह

00:13:39:28 बुक बड़ा करिए इसको। नहीं नहीं वो हिस्सा बड़ा करिए जो बुक किसके द्वारा लिखे थे वो दिखाइए। बड़ा नहीं हो सकता वह हिस्सा जिसमें आप बुक दिखा रहे हैं। बुक किसके द्वारा लिखी हुई है। खैर इन्हीं के द्वारा लिखी हुई बुक है। ये आपको इस पर मिल जाएगी आरव पे तो आर्काइव पे। तो ये ये देखिए बाबा डॉक्टर वीरनाथ अघोरी का भौतिक शरीर तो एक मुसलमान के यहां उत्पन्न हुआ। अब यह जिस परंपरा की बुक है यह परंपरा के मतलब उस परंपरा के गुरु हैं। और उस परंपरा की महिमा मंडन की बुक लिखने वाला कौन है? आपके स्वयं के तथाकथित स्वभोषित आचार्य। ठीक है? तो अब हो गए हो गए ना? यह हो गए मुस्लिम समर्थक।

00:14:49:03 जो प्रशंसा में बुक लिख रहा है वह समर्थक नहीं है। जो कहीं पर दिख गया मुसलमानों से के साथ में खड़ा हुआ या उसने कहीं पर ऐसा कोई वक्तव्य दे दिया जहां पर कोई हिंदुओं का विरोध नहीं है। मगर वो मुस्लिमों का समर्थक है। है ना? और उसके चरणों में जाकर के लौटते भी हैं। फिर लौटते हुए भी दिखाई देते हैं। उसी के चरणों में उनकी बातों को प्रमाण के रूप में अपने वक्तव्यों में उपयोग भी करते हैं कि देखो देखो यहां पर इन्होंने वो विश्व के 13 व्यापारियों की बात की है। यहां इन्होंने जो है न्यू वर्ल्ड ऑर्डर की बात की है।राज की बात की है। उनको प्रमाण के रूप में लेते भी हैं। है ना? और 100 की सीधी एक बात है कि मुस्लिम विचारधारा से प्रतिपादित होने वाला जो सर्वोच्च गद्दी पर बैठी बैठा हुआ बैठा हुआ कोई एंटिटी है। है ना? सर्वोच्च गद्दी पे बैठा बैठी हुई एंटिटी क्या है? स्वागत है आपका पंडित जी। जय श्री राम। जय श्री राम। तो अब क्या है कि जो मुस्लिमों की जो जो भी कुछ फिलोसफी है उसमें सर्वोच्च गद्दी पर बैठी हुई एंटिटी कौन है? अल्लाह। और वो वहां पर सीधे-सीधे निरस्त करते हैं

00:16:04:13 कि कुरान के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर वो साक्षात अवतार नहीं ले सकता। बाधित है। तो उसकी ईश्वरता ही भंग कर दी। कब कह दिया उन्होंने पूजने की बात? अब बात आती है कि यह भाई साहब जो विरोध कर रहे हैं उनको मुस्लिम समर्थक सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं। यह क्या करते हैं? कालिया जिन्न की पूजा करवा रहे हैं। मतलब दूसरी विचारधारा की जो निम्नतम श्रेणी की चीजें हैं उनकी पूजा करवा रहे हैं। उनका महिमा गान कर रहे हैं। कि मैंने अमुक हां। तुल्य चीजें हां। उनकी चीजों का महिमागान कर रहे हैं कि मैंने अमुक अमुक लोगों को यह दिया था तो उनको जो है फायदा हो गया था और उसमें अपने डिफेंस में कह क्या रहे हैं कि भाई तुम मांगे थे मुझसे आकर के तो मैंने दिया तो कसूर मेरा कहां से हुआ अरे भाई पहली बात तो तुम आचार्य हो कल को वो आकर के तुमसे अश्लील चलचित्र मांगेगा कोई आकर के तो वो भी उसको दे देना तुम दोषी थोड़ी ना होगे उसको अश्लील चलचित्र देने दे देना जो जो गलत चीजें मांगे तुम तो बता ही रहे हो कि वो मांग रहे हैं तुमसे उल्टी सीधी चीजें

00:17:19:15 तो दे देना तुम उसमें दोषी थोड़ी ना रहोगे अगर कोई व्यक्ति अवैध रूप से जो नशे की बातें भी है ना वो भी नशे की सामग्री भी बेचता है तो उसमें केवल खरीदने वाला ही नहीं जो बेच रहा है वह भी अपराधी होता है। अच्छा जो मनुस्मृति में उसमें रामायण में मांस बेचने वाले को अधि पूर्वक जो मांस बेचकर अपने घर का पालन पोषण करता है उसको जो है पापी क्यों कहा गया है भाई मांस तो खरीदने वाला पापी है ना जो खरीद के खा रहा है पर जो नाथ संप्रदाय की बात है हमने इसलिए नहीं दिखाया कि हम उनके प्रति अनास्थावान बनाना चाहते हैं लोगों को या उनका अपमान कर रहे हैं नाथ संप्रदाय का नहीं अगर इस तरीके तरीके से नकारा जाएगा तो यह नकारे अपने अस्तित्व को और कहे कि मैं मुस्लिम धर्म का पक्षधर हूं या फिर हमें मानना पड़ेगा कि ऐसे मुस्लिम पंथ का पक्षधर हूं या फिर हमें यह मानना पड़ेगा कि ऐसे मुस्लिम जो भले ही मुस्लिम कुल में उत्पन्न हुए मगर यदि उनमें सनातन के प्रति आस्था है तो उनको रोका नहीं जा सकता सनातन में आने से और नहीं रोकना

00:18:34:24 चाहिए और यह बात कहने वाले पूरी शंकराचार्य जी गलत है और तुम एक जगह पर इस बात का खंडन करते हुए दूसरी जगह पर इस बात का समर्थन करने वाले सही हो। इसको कहते हैं दोगलापन। अब आगे चलते हैं। दूसरा एक चैप्टर आता है कि ये भाई सिंपैथी सीकर हैं। ये जब फंस रहे हैं कहीं पर किसी मामले में इनके पास जवाब नहीं है तो ये सिंपैथी बटोरते हैं। क्या-क्या कहते हैं देखिए। बिल्कुल। सिंपैथी बटोरने के लिए मेरा वीडियो डिलीट करवा दिया गया। है ना? और मेरा जो है मुझे जो है मेरी पत्नी के लिए ये गालियां ये मुझसे अभद्र टिप्पणियां की जा रही हैं। मेरी माताजी के लिए ये टिप्पणियां की जा रही हैं। मुझे जान से मारने की धमकी दी जा रही है। हम और मेरे विरुद्ध ये किया गया। वो स्क्रीनशॉट बनाए गए। ऐसा किया गया। वैसा किया गया। फैब्रिकेटेड वो दिए गए। अरे भाई तुमने कौन सी ठोस चीजें दे दी थी? जब तुम दूसरों पर कीचड़ उछाल रहे थे। तो जब आज पहली बात तो यह है कि हम इस तरह का कोई समर्थन नहीं करते हैं। यह अपने वीडियो में कहता है जबकि मैंने मैंने आज तक जो है किसी

00:19:49:25 को गाली नहीं दी है ना ही किसी को गाली देने के लिए कहा है। तो हमने कब कहा है भाई? हमने कब कहा है? यह बात कह क्यों रहे हो? तुम हमारे विरोध में वीडियो बनाते समय एक बात कह क्यों रहे हो? और अगर किसी पर्टिकुलर किसी पर्सन के लिए कह रहे हो तो फिर हमें वहां पर जोड़ क्यों रहे हो उनके साथ? हम खुद ऐसे लोगों का प्रतिकार करते हैं जो मां बहन की गाली दे वो भले ही तुम हो या कोई और हो हमारे गुरु ने नहीं सिखाया सब राम ने नहीं सिखाया सब अब तुम कहने लगना अब ये बातें छोड़ के चले जाना राम के आगे देखो श्री क्यों नहीं लगाया प्रभु क्यों नहीं लगाया तुम इस पर जाना जो कह रहा हूं उसप ध्यान मत देना है ना तो क्या है बात कि राम ने हमको नहीं सिखाया है हां तुम जरूर तुम जरूर जरूर कहते हो कि भाई ऐसे के साथ ऐसा करना चाहिए। तो जैसे तुमने बिना किसी शास्त्रीय विधान के ये कह दिया था कि भैया मेरे साथ कोई गलत करेगा और मेरे पास चक्र नहीं है त्रिशूल नहीं है इसलिए जो है मैं गाली देने को वो मानता हूं तर्क संगत तो अब वही पलट करके आ रहा है तो तुम्हें बुरा नहीं लगना चाहिए। हमें बुरा लग रहा है तुम्हारे साथ अगर ऐसा हो रहा है तो। और दूसरी बात हमें भी गालियां दी जा रही है। तुम्हारे ही समर्थक गालियां दे रहे हैं। अरे मुझे तुम्हारे समर्थक क्या है? तुमने तक

00:21:04:26 इतनी गलत गलत बातें की है। हमने तो रोना नहीं रोया। तुम जो विजय के साथ हमको जोड़ते हो विजय श्री के साथ उल्टा सीधा संबंध बताते हो। तब तुमने नहीं सोचा कि इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है। तो ये व्यक्ति किस तरह से अटेंशन सी मेरा वीडियो हटवा दिया। अपना जनेऊ हाथ में लेकर के अब सौगंध खा के बोल कि वीडियो हटवाने में या तुझे गाली दिलवाने में शिवश द्विवेदी का भी निर्देशन है। ये बोल दे इतना कण है कि मैंने मेरी इच्छा से तुझे गाली दी गई है या तुम्हारी माता पत्नी इत्यादि के बारे में कुछ भी जो गलत बोला गया है वो उसमें मेरी इच्छा भी वो है।

00:21:54:02 हम तो चाहते ही नहीं थे ना यह सब करना और इसीलिए यह व्यक्ति कहता है कि क्लिकबेट क्लिकबेट हां अरे भाई पहली बात तो यह है कि अगर कोई क्लिकबेट से अगर मान लिया जाए दुर्जनोषण नेहा से क्लिकबेट से कोई आदमी अपनी अर्निंग बढ़ा रहा है तो उससे तुझे दिक्कत हो गई क्या और दूसरी बात तूने ये नहीं सोचा कि हमने अपने सेकंड चैनल पे जिस पे व्यूज कम होते हैं उस पे क्यों बनाई लाइव स्ट्रीम क्यों नहीं अपने मेन चैनल पे लाइव स्ट्रीम जिसमें आज 8000 व्यूज है उसमें उस पर 20,000 400 व्यूज होते। क्यों नहीं लगाई थी? इसलिए क्योंकि हम कम से कम लोगों को यह बताना चाहते थे कि हम तुम्हारे अमुक अमुक वक्तव्य का वहां पर प्रतिकार कर रहे हैं। किसी एक जगह बल्कि जो वितंडा करने वाले जो शंकर संप्रदाय स्वयं को शंकर संप्रदाय का कहने वाले जो लोग हैं उनके बारे में भी हम जो बोल रहे हैं वह कम से कम लोगों को सुनाई दिखाई दे। इसलिए हमने इस पर किया था।

00:22:55:27 ठीक है? तो ये सिंपैथी गेम जो खेलते हो ना और देखिए आप एक मजे की बात बताऊं। जब ये सिंपैथी गेम खेलता है ये व्यक्ति उस समय इसका लहजा देखिएगा। उस समय तंज नहीं कसता। सीमा का अतिक्रमण हो रहा है। यह जो तंज कसता है सीमा नाम से सचिव जी के नाम से ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी के नाम से वो एक वो एक ऐसी युवती है विजयश्री अरे भाई कोई आपके उसमें आ रहा आपके सिद्धांतों को फॉलो करने लगा। आपके सिद्धांतों के प्रति निष्ठा दिखाने लगा तो वो गलत है। वो नहीं आना चाहिए। तुम उसके पुराने जीवन को लेकर के उसकी टांग खींचोगे।

00:23:43:22 और तुम ही खुद कहोगे कि अगर मैं विदेश किसी ने अगर विदेश यात्रा की है तो क्या कहते हैं यदि कोई अगर विदेश यात्रा करने वाला वापस आ जाएगा पश्चाताप प्रकट करेगा और अपने उस कृत का कृत की वकालत नहीं करेगा तो मैं उसे क्षमा कर दूंगा उसको जो है उसके अधिकार की सीमा में पूजा पूजा दे दूंगा कि तुम मोक्ष को कैसे प्राप्त कर सकते हो मगर वही काम यदि विजयश्री करेगी वो अपनी वकालत नहीं करेगी कुत्ते को स्पर्श करने की वो अपनी वकालत नहीं करेगी अमुक अमुक गलत जो अशास्त्रीय कार्य उसने किए उनके उनकी वकालत नहीं करेगी और वो गुरुदेव की शरणागत प्राप्त हुई मगर भैया गुरुदेव उसको जो है उसकी अधिकार की सीमा में भगवत भक्ति नहीं दे सकते हो केवल तुम दे सकते

00:24:28:27 हो और और इसका वो देखो मैं प्रतिकार करते वो जो सिंपैथी गेम जो खेलता है उसमें क्या करता है ये कि ना तो तू तड़ाक की भाषा होगी ना ही उसमें जो है ये फतियां कसी जाएंगी क्योंकि उसमें पूर्ण रूप से अपने आप को वो दिखाना ना बेचारा लाचार इसके ऊपर सब मिलकर के प्रहार कर रहे हैं। अपना जनेऊ हाथ में लेकर के आइए आइए सौगंध आपका जनेऊ आपके लिए महत्वपूर्ण है। मुझे नहीं लगता कि महत्वपूर्ण है। पर जनता के समक्ष खाओ तो कि तुम्हें गाली दिलवाने में, तुम्हारा वीडियो हटवाने में और तुम्हारे नाम तुम्हारे नाम से अगर तुम ये जो स्क्रीनशॉट गलत बनाए गए हैं उसमें जो है मेरा मेरी इच्छा भी शामिल

00:25:17:14 है। समझे? फिर कहते हैं कि उनका प्रतिकार क्यों नहीं किया? अरे भैया बहुत सी चीजें गलत हो रही दुनिया में। तुमने आज तुम्हारे बारे में वीडियो बना तो तुमने प्रतिकार किया। वह एक लड़के को परीक्षा में नहीं घुसने दिया गया जनेऊ के कारण। उसका प्रतिकार क्यों नहीं किया? अनुराग कश्यप ने ब्राह्मण ब्राह्मण के लिए इतनी गलत बातें कही। उसका प्रतिकार क्यों नहीं किया? बांग्लादेश में हिंदू कट मर रहे हैं। उसका प्रतिकार क्यों नहीं किया? तुम्हारे पास कारण हो सकता है किसी बुराई का प्रतिकार ना करने में तुम अपनी असमर्थता बता सको। मगर दूसरे से तुम कहोगे कि तुमने प्रतिकार क्यों नहीं किया?

00:25:59:25 नाम ले प्रतिकार करना ही आवश्यक होगा क्या हर बार आगे चलो अपने लिए क्या कहते हैं ये कि वो जो पर्ची थी वो कोरोना के टाइम पर लिया गया कोरोना का इलाज था वो सर्दी जुकाम का इलाज था उसको हमसे जोड़ दिया गया तुमने जो स्क्रीन रिकॉर्डिंग दिखाई थी उसके क्या दूसरे मायने नहीं निकल सकते तुमने जो चीजें अपने यहां पर प्रस्तुत की उसके दूसरे मायने नहीं निकल सकते। तुमने एक्सप्लेनेशन देने का रूम रखा था क्या वक्तव्य देते समय और फिर उस पर्ची के आधार पर तो ये कहा ही नहीं जा रहा है कि तुमने उसी पर्ची में जो इलाज बताया गया वो इलाज तुमने जो है लिया है उसी में अपना वो जो जो भी है जिस पर विवाद चल रहा है उस पर्ची के आधार पर तो ये नहीं सिद्ध करने का प्रयास किया जा रहा है पर तुमने जो स्क्रीन रिकॉर्डिंग दिखाई थी क्या उसके दूसरे मतलब निकल सकते कि नहीं तुमने क्या कहते हैं जब तुम खुद यह चाहते हो कि सामने वाला तुम्हारे पक्ष जाने बिना वीडियो ना बनाए कुछ ना बोले तो तुमने क्यों बनाया था वीडियो

00:27:15:08 बिना पक्ष को जाने जो आज सब तुम कर रहे हो ना ये तुमसे करवाना ही था यही लक्ष्य था कि जो चीजें मैं बोलना चाहता हूं कि अगर रखो तो ठोस प्रमाण रखो वो आज तुम बोलो और आज तुम बोल रहे हो यही चाहता था ना मैं तुमने ठोस प्रमाण नहीं रखे थे ना अब तुम खुद बोलने पर आ गए ठोस प्रमाण रखो हालांकि हम तो ठोस प्रमाण के साथ ही बात करेंगे अब इनकी जरा सेलेक्टिव पॉलिटिक्स की बात करें इनके पिताजी अगर कहीं पर महिला कथा वाचक का समर्थन कर देते हैं तो उनके लिए बड़ी विनम्रता से बोलते हैं और वहां पर भी आरोप डाल देते हैं कि भैया किसी ने हमारे पिताजी को धमकाया तब उन्होंने ऐसा वक्तव्य दिया ज्योतिष स्पीड की ओर से हमारे पिताजी को धमकी दी गई या उनका भय था उनको हमारे पिताजी को कि हमारे बेटे को कुछ ना हो जाए इसलिए हमारे पिताजी ने ऐसा वक्तव्य दे दिया दूसरे किसी व्यक्ति का प्रतिकार करने से पहले तुमने जाकर के पूछा उसने किस देश काल पर स्थिति में क्यों दिया कोई वक्तव्य जिसका तुम प्रतिकार कर रहे हो तो फिर अपने पिताजी की बारी में यह क्यों चाहते हो विनम्रता और सुनो हमारे लिए आदरणीय है चारों पीठ

00:28:31:12 मगर ज्योतिर्म के बारे में जब ये वक्तव्य देते हैं तो क्या कहते हैं? हालांकि मैं नहीं मानता कि एक एक व्यक्ति दो पीठों पर शंकराचार्य होना चाहिए। पर चलो है तो मान लिया। अरे कैसे मान लिया भाई? नहीं मानता मान लिया। अरे वहां प्रतिकार करो ना। जो मान्य हमारे आचार्य श्री है दीनदयाल त्रिपाठी जी उनकी बात आई। तो क्या बोलते हैं? अगर किसी को विवाद में नहीं पड़ना है वो दूर रहना चाहता है तो नहीं बोलता ठीक है तो तुम दूसरों के लिए क्यों नहीं सोचते हो कोई विवाद में नहीं पड़ना चाहता है इसलिए वो शांत शांत रह जाता है जहां वेद वेद वेद पाठ हो रहा होता है बालिकाओं के द्वारा अरे जो नहीं होना है तो नहीं होना है अगर नहीं होने वाली चीजों का प्रतिकार करना है तो करो ना फिर वहां क्यों चुप रह रहे हो सेलेक्टिव पॉलिटिक्स ना

00:29:26:19 विदेश गमनकारी यदि इनके अनुगत आएगा पश्चाताप करेगा और बदलना चाहेगा अपने जीवन को तो उसके अधिकार की सीमा में उसको भगवत व्यक्ति का रास्ता बता करके ये जो है उसको जो है उसके पाप क्षमा करवा देंगे उसको प्रायश्चित इत्यादि करवा देंगे मगर कोई दूसरा व्यक्ति जिसने कुत्ते को स्पर्श किया हो यदि वो पूरी शंकराचार्य जी के सानिध्य में आकर के अपने जीवन को बदलना चाहेगा तो उसकी टांग खींचेंगे कि कुत्ते को लिप से लिप किस कर रही है ये लड़की। अरे तो एक बात बताइए इसे कहते हैं दोगलेपन और नीचता की पराकाष्ठा। उनके डिफेंस में बोल देता हूं मैं। जी शिवाश जी ये बताइए कि अगर वो ऐसी बातें नहीं करेंगे तो फिर YouTube पे लाइक्स और कमेंट्स्राइबर कैसे बढ़ेंगे? ये बताइए। कैरी धार्मिक कैरी मिनाटी बन रहे हैं ना वो। धार्मिक कैरी मिनाटी है वो। धर्म की दुनिया कैरी मिनाटी। ऐसे तो अपने लिए विदेश गमनकारी करियर खत्म हो जाएगा। हां अपने लिए विदेश गमनकारी के लिए कहेंगे कि अगर वो वकालत नहीं कर रहा है तो ठीक है हम उसके साथ खड़े हो सकते हैं। हां विदेश गमनकारी के साथ अगर हम खड़े हो गए उसका आतित स्वीकार कर लिया तो हमने उसके विदेश गमन को हमने सही नहीं ठहरा दिया। मगर पूरी

00:30:41:27 शंकराचार्य जी अगर किसी कारण से उनका उनका व्यवहार स्वीकार कर ले बागेश्वर वालों का या करौली करौली वालों का तो वो उनके समर्थक हो गए। अगर रामपाल के जो कैंप है उससे भिड़ने के लिए अगर आरएसएस वालों का आरएसएस से जुड़े हुए लोगों का समर्थक ले लिया एक हिंदू होने के नाते शिवश नारायण द्विवेदी ने तो वो पूरा आरएसएस का समर्थन समर्थक हो गया। मतलब यह विदेश गमनकारी के साथ खड़े होते हुए भी विदेश गमनकारी विदेश गमन के समर्थक नहीं होंगे। मगर यदि कोई दूसरा कहीं किसी गलत एक्टिविटी करने वाले के साथ खड़ा हो गया। उसकी उस स्थिति में जब वह गलत एक्टिविटी नहीं कर रहा है। मगर वह दूसरा उसका पूर्णतया समर्थक हो जाएगा। यह है दोगलेपन और नीचता की पराकाष्ठा। क्योंकि आपने इसे कहते हैं सेलेक्टिव पॉलिटिक्स। कुत्ते की बात कर ही दी है जो शान की तो ये कहावत नहीं है वो बड़ी आजकल ट्रेंडिंग भी है कि मेरा कुत्ता कुत्ता तुम्हारा कुत्ता टॉमी तो बस वही वाली बात है इनकी। इसे कहते हैं सेलेक्टिव पॉलिटिक्स। अब ये बात करते हैं। अब ये बोलते हैं कि बाईपोलर की बाई पोलर की प्रमाणिकता है और निग्रह प्रवेशिका की प्रमाणिकता नहीं है। बाईपोलर की कोई प्रमाणिकता नहीं है। बाइपोलर में तुम अपने बारे में बता रहे हो और

00:31:57:01 निग्र निग्रह प्रवेशिका में तुम अपने आप को आचार्य घोषित करना चाहते हो दुनिया का और निग्रह प्रवेशिका का मूल्यांकन करने के लिए हमारे पास दूसरे आधार हैं। जो हमारे लिए प्रामाणिक हैं। और पहली बात निग्रह प्रवेशिका लाओ तो सही तब तो देखें कब लाओगे पता नहीं कोई तो कह रहा है तीन साल तीन साल से बोल रहे हो निग्रह प्रवेश का निग्रह प्रवेश का और बाईपोलर में जो तुमने अपने बारे में लिखा है उससे रिफ्लेक्टेड चीजें जब हमको दिखाई दी तो हमने ये माना कि हां भाई अब निग्रह प्रवेशिका में जो चीजें तुम लिखोगे वो हमें रिफ्लेक्टेड दिखाई देना चाहिए ना तो हम देखेंगे वो पहली बात तो लाए नहीं हो तुम और कह रहा निग्रह भविष्य का मेरी प्रमाणिक नहीं है। श्रृंगार करता है। एक इसने आरोप लगाया डॉक्टर साहब पर जो डॉक्टर हेमंत पालीवाल जी हैं उन पर आरोप लगा रहा है ये व्यक्ति कि भैया जो व्यक्ति जो ये जो धार्मिक जो आभूषण होते हैं उनको जो धारण कर रहा है वो व्यक्ति इनके हिसाब से जो डॉक्टर साहब है इनके हिसाब से वो व्यक्ति जो है वो यौन रोग से पीड़ित है। तुमने यह कहा कि

00:33:12:04 खड़े नहीं ये डॉक्टर बोल रहे हैं। ये ये जो हेमंत पालीवाल जी हैं जिनका आज वीडियो रिलीज हुआ है मेन चैनल पर तो उन्होंने ये कहा है कि भाई जो व्यक्ति इस पीड़ा से ग्रसित होता है तो वो ज्यादा अति श्रृंगार करता है। अति आभूषण इत्यादि कई बार कई बार तो इसका मतलब ये थोड़ी ना है कि जिसने भी श्रृंगार किया वो सब वही पीड़ा से पीड़ित हो गए। इसने जो है अपने मच्छराज वाली सीरीज में कहा है कि वो खड़े खड़े होकर खड़े होकर मूत रहे हैं। जो है वो मश मलेश राज का वो नहीं है क्या प्रभाव नहीं है क्या तो इसका मतलब दुनिया में जितने भी खड़े होकर के ये क्या कहते हैं लघु शंका करने वाले लोग हैं वो सब मलेचराज वाले हो गए और तो और शास्त्रों में लिखा है कि ब्राह्मण जो कलयुग में है वो ब्राह्मण पतित हो जाएंगे और जो स्त्रियां होंगी वैभचारणी हो जाएंगी तो हो गई सारी स्त्रियां व्यभचारणी क्योंकि कलयुग के लिए कहा था या कलयुग के सिम्टम्स है स्त्रियां ऐसी होने लगेंग मगर सभी स्त्रियां होंगी कांटे की नोक पे ऐसा नहीं कहा जा रहा है मगर इसको तो बातें बनानी है इसको सिंपैथी हासिल करनी है और इसको जो है बच के निकलना है सच्चाई से इस व्यक्ति को बच के निकलना है इसीलिए तो सामने नहीं आ रहा है भाई

00:34:27:06 हमने हमें ये जो चीजें थी जहां तक बचानी थी लोगों को दिखाने से बचना था बचाई जब हमें समझ में आ गया कि ये व्यक्ति रुकने वाला है नहीं भाई इसको तो आ मुझे मार वाली बात करनी ही है तो हमने कह दिया कि आ जाओ भाई तो तब से व्यक्ति ये भागता फिर रहा है और इसके जो अमुक अमुक कारण है वो मैं अभी बताऊंगा आगे। फिर क्या है? अब देखिए इसकी एक जो सबसे जरूरी बात है बारीकी इसने जनेऊ हाथ में पकड़ के कसम वो सौगंध खाई थी। जनेऊ हाथ में पकड़ के वो वचन कहे थे। इधर कामाख्या उधर ध्वजा। क्या बोला था? कि मैं कभी भी किसी यौन रोग के लिए जोधपुर इत्यादि या कहीं भी नहीं गया। जबकि यह व्यक्ति स्वयं पर्ची डाल के अपने पर स्वीकारता है कि ऑनलाइन भी इलाज प्राप्त किया जा सकता है और उसने किया भी है। इसका मतलब बिना जाए भी इलाज प्राप्त हो सकता है। तो इसको कसम तो इस ना जाने मतलब इलाज ना लेने को सिद्ध करने के लिए ना जाने के संबंध में जो सौगंध खाई जा रही है वो तो व्यर्थ है। क्योंकि यह खुद मानता है कि बिना जाए भी इलाज प्राप्त किया जा सकता है। तो क्यों खाई? भ्रमित करने के लिए। इसने उसमें जनेऊ पकड़ के यह नहीं बोला कि मुझे कोई यौन रोग नहीं है। यह ठोक के नहीं बोला। मैं कहीं नहीं गया

00:35:42:14 यौन रोग के इलाज के लिए। ये बोला इसने ये है बारी की वाक छल। क्यों नहीं बोला इसने कि मुझे यौन रोग नहीं है। क्योंकि इसको अपने जनेऊ की चिंता थी शायद थोड़ी बहुत। बच गया था इसके अंदर कुछ धर्म। अरे आपने अगर हम उनके वक्तव्यों को देखेंगे तो वह हमेशा मतलब वर्ड्स को ट्विस्ट करते ही करते हैं या कोई बात कर रहे होंगे उसी में कुछ और बात ऐसे जोड़ देंगे कि लगेगा कि वो उसी से रिलेटेड है। ठीक है? और फिर वह फिर जनता समझने लगती है उसको कि हां ठीक है वह इसी के बारे में बात कर रहे होंगे। तो कई बार जैसे ये नहीं है कि मान लीजिए कि वो एक न्यूज़ चल रही है। क्या कमेंट हो रहा है? क्या कमेंट हो रहा है? शिवश तू तेरी माता और एक ये रिदमम। क्या कमेंट हो रहा है? जरा दिखाइए जरा। क्या कमेंट है

00:36:35:02 ये? ये देखिए। अब यहां पर जो भी लिखा है मैं बोलूं यह मैं यह विलाप करूं यह जो है यह भगवत आनंद करा रहा है यह विलाप करूं मैं उन बातों पर बात नहीं करता हूं जो सत्यापन के अधीन हो शुरू से कह रहा हूं जब मैंने ठोस प्रमाण मांगे तो तुमने क्या चालू किया हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं बना अरे भाई तुम ही तो कहते हो ना कि अगर कोई किसी को कह रहा है कि तू अंधा है तो सामने वाला कह तू ही तो लंगड़ा है तो उससे उसका अंधा ना होना सिद्ध नहीं हुआ मैंने तुमसे ठोस प्रमाण मांगे थे आज तक कहां दिए तुमने ठोस प्रमाण तुम तो ये कहने लगे ठोस प्रमाण क्यों चाहिए? पूरी शंकराचार्य जी की बातें भी तो ठोस नहीं है। इसलिए मान लो हम जो कह रहे हैं वो सही है। किसी को दोषी मानने का ये तरीका होता है क्या? अब ये ये मैं ये मैं कहता फिरू जो भागवतानंद करवा रहा है

00:37:25:09 ये। आगे क्या है? इसने बोला है कि मुझे झूठ बोलना होता तो उस पर्ची को मैं अपना क्यों बताता? किसने बोला है? मतलब वही वाली बात कि दल वो क्या कहते हैं कि अगर किसी ने कुछ ये मुझे झूठ बोलना होता तो मैं अपनी पर्ची पर्ची में अपना पहली बात तो यह है कि इस पर जो है दबाव डाला गया था। उस पर्ची के बारे में बातचीत की गई थी। तो इसने वो पर्ची आनन-फानन में जल्दी से प्रस्तुत कर दी। लोग हो सकता है कमेंट के माध्यम से पूछ रहे हो। किसी प्रकार से इस पर दबाव डाला जा रहा था। है ना? तो इसने जल्द जल्दी से पर्ची जो है वो कर दी। डाल जाता हूं मैं। डाल देता हूं पर्ची को। अब तुमने यदि पर्ची में अपनी पहचान वास्तविकता से बना ली तो बस। अब तुम जो बोलोगे बिल्कुल अक्षर सत्य हो गया। कहां का सिद्धांत है भाई ये? अब तुम जो बोलोगे वो बिल्कुल सत्य हो गया। और तुमने अपने वीडियो में कहा है। तुमने मुझे चैलेंज दिया है ना कि दिखाओ चैलेंज पे आऊंगा मैं। मैं चैलेंज देता हूं शिवश दिखाए। हालांकि वह मैं क्यों दिखाऊं भाई? जिनके पास जिनसे तुम चैलेंज की बात कर रहे हो ना वह तो उनका डिपार्टमेंट

00:38:40:19 है। मगर तुम जो चैलेंज दे रहे हो मैं भी तो तुम्हें चैलेंज दे रहा हूं कि तुम दिखाओ कौन सी और सामग्री है जो सुरक्षित है। वो 50 लोग कौन से हैं जिनके आधार पर तुम कहते हो कि अब पूरी पीठ के परों में ये हो रहा है। हम्। तुमने अपने स्वयं को सेफ साइड रखने के लिए तुमने वह पर्ची डाली थी। तुमने स्वयं को सेफ साइड रखने के लिए बायपोलर की किताब लिखी थी कि देखो मैंने अपने बारे में पहले से ही बता दिया है। करते हैं ऐसे लोग झगड़ा हो रहा है। नीच लोगों का झगड़ा हो रहा है। कंजड़ लोगों का। ठीक है? और मारपीट होने की नौबत आ रही है। पुलिस आई तो चिल्लाने लगी। लेडी पहले से ही जैसे ही देखा अपना कर रही है हमला कर रही सब कर रही मगर पुलिस आई तो पहले ही चिल्लाने लगी देखो देखो यह लोग हमको मार रहे हैं देखो देखो ये क्या है सेफ साइड खेलना वही तुमने

00:39:37:19 खेला पुरानी आईडी तुमने क्यों हटा दी अपनी Facebook आईडी अगर इतने ही दूध के धुले थे तुम तो बचपन से सुधरे हुए थे एक वीडियो में उसमें कह रहे हैं हम बचपन से सुधरे हुए हैं तुम तो आज सुधरे हो हां सुना मैंने यह फिर अपने वीडियो में कह रहा है कि वह जोधपुर जा सकता है। शिवशु नारायण द्विवेदी अपने पड़ोस में सूचीव्रत के पास क्यों नहीं जा सकता? तुम अपना तुम जो है सूचीव्रत से कहलवा दो कि सूचीव्रत जो है पूरी पीठ के बारे में बोलने के लिए ऑन कैमरा तैयार है। चले जाएंगे। तुम्हारे द्वारा दी जाने वाली जानकारी के अनुसार तो सूचीव्रत कायर है और मेरी जानकारी में सुचिव मिश्र सुचिवत मिश्र के बारे में बताया जाता है कि भाई वो यहां लखनऊ में ही रहते हैं ज्यादा दूर उनका निवास नहीं है तो उनके नाम से ये बोल रहे हैं कि सुचीव्रत जो है पूरी पीठ के बारे में जो है बोल रहा है बुरा अरे भाई तुम बोलो कि वो ऑन कैमरा बोलने के लिए तैयार है तो जाऊं ना मैं उसके पास मेरी नजरों में तो वो व्यक्ति शांत है वो नहीं बोल रहा है कुछ

00:40:44:01 भी विवाद से दीनदयाल मनी त्रिपाठी आचार्य श्री दूर रहना चाहते हैं तो ठीक है हम समझते हैं मगर विवाद से राजेंद्र दास जी अगर दूर रहना चाहते हैं तो वो ये नहीं समझेंगे बिल्कुल ये है दो तो बताओ ना उस डॉक्टर का नाम बताओ मैं भी जानना चाहता हूं कि जोधपुर इस जन्म में कब गया ये देखो मेरा ये देखो एक मिनट की देखिए इसी से पूरा पूरा पता चल जाएगा। इस व्यक्ति ने यह क्यों नहीं कहा था जनेऊ पकड़ के मुझे यौन रोग नहीं है। जब इसको मालूम है कि बिना जाए भी अमुक बिना जाए भी इस प्रकार की बीमारियों का इलाज लिया जा सकता है ऑनलाइन और इसने ये स्वीकार भी किया कि इसने ऑनलाइन इलाज लिया है। तो ये अपने यौन रोग को जो है नहीं है मुझे। ये सिद्ध करने के लिए ना जाने के विषय में सौगंध क्यों खा रहा है? क्योंकि इसने वाक चल किया था। देखिए और वो भगवान सूर्य आकाश में जो हम सापियों के पूर्वज हैं और साक्षी हैं शिवश मैं अपने कुलदेव के समान भगवान सूर्य जो सभी सुस कर्मों के साक्षी है यज्ञ पवित्र हाथ में रखकर यद्यपि इसकी आवश्यकता नहीं है इसका वाख्या में बैठकर शपथ पूर्वक कह रहा हूं कि मेरे अंदर कभी भी

00:41:59:13 मेरी जानकारी में किसी प्रकार का ऐसा यौन रोग जो मैं जोधपुर में जाकर किसी डॉक्टर से या कहीं भी जोधपुर क्या पूरे भारत में कहीं भी एक ही वाक्य किसी भी डॉक्टर के पास जाकर मैंने कोई इलाज कराया हो अस है ये मैंने कभी नहीं कराया जोधपुर तो मैं आज तक गया नहीं कभी नहीं गया इतना खुलकर इससे अधिक मैं नहीं कह सकता हूं जोधपुर कभी नहीं गया अरे भाई जोधपुर बिना गए तुमने इलाज लिया था ना तो फिर यौन रोग ना होना सिद्ध करने के लिए जोधपुर ना जाने के संबंध में सौगंध खा के तुम क्या सिद्ध कर रहे हो जब बिना जाए इलाज प्राप्त होता है ये था वाकल इसका देखिए देखिए कैसे इसने ट्विस्ट किया। एक बात बताइए हो सकता है मैं नहीं मानता ये लोग इतने गिरे हुए हैं कि अब दोबारा से अपने यज्ञ पवित की चिंता ना करते हुए अब ये भी कह देंगे कि भाई वो जो है क्या कहते हैं यौन रोग नहीं है अब तो कहेंगे ही जब फंस गए तो इनके लिए फिर कुछ भी नीचता की वो नहीं है सीमा कुछ भी कह सकते हैं अरे सुनिए सुनिए जब आपने डॉक्टर साहब से पूछा था तो डायरेक्ट पूछा था आप क्योंकि आपने डायरेक्टली क्वेश्चन पूछ दिया था उनसे कि ऐसा है क्या तो उन्होंने इसका खंडन क्यों नहीं किया? मतलब मना क्यों नहीं किया? उन्होंने यह बात क्यों कही कि मतलब

00:43:14:21 मैं अपने मतलब नहीं कर सकता। ये तो उनकी अपनी इच्छा है ना कि वो क्या उत्तर देते? हम तो उनको ये कह नहीं सकते क्या? हां। नहीं नहीं मैं ये कहना चाह रहा हूं कि अगर नहीं होता तो वो सीधा-सीधा मना कर देते। इस व्यक्ति ने तो इस व्यक्ति ने तो यह स्वीकार किया है। इस व्यक्ति ने यह स्वीकार किया है कि उन्होंने इसलिए नहीं किया कि वो यह जनवाना चाहते थे लोगों को कि है। उन्होंने सीधे मना इसलिए नहीं किया इसलिए वही कहना चाह रहा हूं। इस व्यक्ति ने अपने वीडियो बना के ये ये घोषित किया है कि डॉक्टर साहब ये मनवाना चाहते थे लोगों को जिससे कि लोग ये सोचे कि हां इनको वो यौन रोग है। ठीक है? तो ये बात है। अब ये एक चीज और कर रहे हैं। वो क्या कर रहे हैं कि अब ये धमकी दे रहे

00:44:10:03 हैं। ये वो पर्ची है जो इन्होंने अपने उसमें लगाई थी। इसमें देखिए इन्होंने क्या लिखा है। पढ़वाइए जरा बड़ा करिए। वो लिख रहे हैं कह रहे हैं कि जो नरधाम हम पर डॉक्टर हेमंत पालीवाल से यौन चिकित्सा लेने का आरोप लगा रहे हैं। देखिए देखिए अब यहीं से हो गया। इन पर दबाव पड़ा था। इन्होंने अपने से वो पर्ची नहीं दिखाई थी। इन पर दबाव पड़ा था। डॉक्टर हेमंत पालीवाल का नाम लेकर के इनको किया जा रहा था। लोग टोक रहे थे क्योंकि कुछ लोग हैं जो इनको पुराने से जानते तो वो जानते थे इनका जो भी हो बैकग्राउंड ठीक है तो आगे आगे लिखते हैं कि उन्होंने कहा उन्होंने इस चिकित्सा की पर्ची या हेमंत पालीवाल का कोई सत्यापित वक्तव्य प्रस्तुत करना चाहिए जिससे यह सिद्ध हो ऐसा मत हां अब देखिए सत्यापित वक्तव्य ठीक है अब जो है अब सामने वाले पे ही कह रहे हैं कि अब तुम्हें चैलेंज दे रहा हूं दिखाओ सामग्री अब वक्तव्य सब अब वक्तव्य में प्रमाण नहीं होगा। यहां पे प्रमाणिक वक्तव्य मांग रहे हैं। हां बिल्कुल है ना? खैर अपनी बारी अपनी बारी में हर हर बात प्रमाण चाहिए। अब ये व्यक्ति क्या गेम खेल रहा है आगे कि

00:45:25:22 वो जो है अब उनको धमकी दे रहा है। अब इसकी धमकी का सीधा-सीधा अर्थ क्या है? सभी जानते हैं। ये तांत्रिक क्रियाएं करने की धमकी दे रहा है कि अब मैं तंत्र का सहारा लूंगा तुमसे निपटने के लिए। अगर तुमने 2 दिन में मेरे मुताबिक जो है वक्तव्य नहीं दिया। है ना? क्योंकि कोर्ट कोर्ट का सहारा तो लेते नहीं है। कोर्ट का सहारा किस मुंह से लेंगे? क्योंकि अपने ही वक्तव्यों में बोल चुके हैं कई बार कि कोर्ट से मुझे कोई उम्मीद नहीं है। वो बेकार है। ये है वो है। मैं कोर्ट को नहीं मानता। ये वो ये सब बोल चुके हैं। वो बात अलग है कि इस तरह की प्रक्रिया का आलंबन लेने के नाम पर ये पूरी शंकराचार्य जी का कई बार विरोध करते हैं कि तुम तुमने अमुक अमुक कार्य अपने कार्य में बाकी के तीन शंकराचार्यों से क्यों लिखवाया था अपने विषय में। और वहीं पर जब स्टेशन पर बैठकर के इनको घंटों भाषण देना होता है, लाइव रिकॉर्डिंग करनी होती है तो वहां के चपरासी स्तर के जो जो हवलदार इत्यादि जो होते हैं या इंस्पेक्टर स्तर के होते हैं जो लोग उनसे वहां बैठने की परमिशन लेते हैं ना अपने कार्य में जो शासन तंत्र इत्यादि है उसका आलंबन लेते हैं ना तो वहां ये इनको वहां ये इनको ध्यान नहीं आता। है कि हम किस किससे अनुमति ले रहे हैं। अरे क्यों अनुमति लेनी

00:46:40:24 है? पुलिस, प्रशासन, कोर्ट, कचहरी किसी से अनुमति नहीं लेनी। कोई भी कार्यक्रम कहीं भी करने लगो देखो अभी क्या होगा। ठीक है? तो फिर आगे क्या है कि अब ये धमकी दे रहे हैं कि दो दिन के अंदर अगर तुमने वक्तव्य मेरे मुताबिक नहीं दिया तो मैं दूसरा रास्ता इ्तियार करूंगा। अब दूसरा रास्ता कोर्ट का कोर्ट तो बचता नहीं है क्योंकि कोर्ट के लायक मुंह तो इनका है नहीं। अब फिर भी अगर कोर्ट का रास्ता इ्तियार करें तो बात अलग है कि अपने ही बातों का खंडन करते हुए और दोगलेपन की पराकाष्ठा को सिद्ध करें। मगर दूसरा क्या है कि यह कर दूंगा तांत्रिक धमकी। अरे भाई तुम्हें इतना ही वो है तो व्यक्तिगत जाकर के मिल लो ना हेमंत जी से। जाओ जाकर के उनसे रिकॉर्ड करवा के तुम भी ले आओ। नहीं नहीं उन्होंने वो ऐसा नहीं बोलना चाहते थे या जो भी तुम बात करना चाहते हो। क्यों नहीं व्यक्तिगत रूप से बात कर रहे हो?

00:47:30:12 तमाशा क्योंकि इनको करना है। बोलते हैं कि कालिया जिन के मंत्र देने में मैं दोषी नहीं हूं। क्यों दोषी नहीं हूं भाई? तुम तो आचार्य हो ना लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य या गुप्ता आचार्य को ये दोष नहीं लगता है। उसके पास कोई गलत चलचित्र मांगने आएगा तो दे दोगे। तो मांगे तो जा ही रहे हैं। तो मैं तो यह नहीं समझता हूं कि मतलब मैं तो अब यहां तक सोच चुका हूं यह लोग इतना गिर सकते हैं। यह व्यक्ति इतना गिर सकता है कि दे देगा। जो वो लोग मांगने की बातें कर रहा है। ये व्यक्ति के वो लोग मांग रहे हैं। ये दे देगा उनको। यह व्यक्ति ऐसा वीडियो दे सकता है उनको जो वो लोग मांग रहे हैं। बोल रहा है कि मेरी पत्नी का वीडियो मांग रहे हैं। सामने वाले हम सदैव इस तरह की बातों का खंडन करते रहे। इस तरह की बातों का प्रतिकार करते रहे। अरे भाई हमारे सामने आएंगी चीजें तो हम बिल्कुल करेंगे। अब ऐसा भी नहीं है कि एक किसी ने अगर कमेंट कर दिया तुम्हारे विरोध में हमारे विरोध में तो उस पर हम वीडियो बना दें। तुम बनाओगे तुमको क्योंकि मसाला चाहिए। तुमको शंकराचार्य के बगल की गद्दी चाहिए थी जो ना मिल सकी तो तुम बाहर निकल के भीषण विरोधी बन

00:48:46:15 गए। अपना जीवन तो स्वयं तुमने छुपा के रखा है। आचार्य कहते फिरते हो खुद को। चैलेंज करते हो। मैं चैलेंज कर रहा हूं। तुमने अपने वीडियो में कहा है तुम्हारे पास और सामग्री सुरक्षित है। स्क्रीन रिकॉर्डिंग से कुछ सिद्ध नहीं हो रहा है। स्क्रीन रिकॉर्डिंग जब तुम दिखाते हो तो उसका एक्सप्लेनेशन या उसमें और कौन-कौन सी चीजें हो सकती है ये तुम जानने की भावना नहीं रखते हो। मगर तुम्हारे समक्ष तुम्हारे प्रतिकार स्वरूप अगर कोई चीज रखी जाए। ये लो भाई तुम्हारे लिए भी ये कहा जा रहा है। तो उसकी एक्सप्लेनेशन तुम जरूर चाहते हो और एक्सप्लेनेशन ना होने के संबंध में कि एक्सप्लेनेशन का प्रयास भी नहीं किया गया। तुम्हारे पक्ष को जानने का प्रयास भी नहीं किया गया। उस संबंध में सामने वाले को दोषी ठहराते हो। तुमने सामने वाले का पक्ष जानने के लिए क्या प्रयास किया था? गए थे तुम उसके पास कि क्या अर्थ है इस स्क्रीन रिकॉर्डिंग का? मैं चैलेंज कर रहा हूं। लेके आओ। तुमने अपनी वीडियो में कहा है जिसमें तुमने स्क्रीन रिकॉर्डिंग दिखाई है उसी में कहा है कि हमारे पास और भी बहुत सी सामग्री सुरक्षित है। हमारे पास और भी चीजें सुरक्षित है। मैं चैलेंज कर रहा हूं। आप ले आइए।

00:50:01:22 तुम वो लेके आओ ठोस प्रमाण जिनसे सिद्ध हो सके समलैंगिकता इत्यादि के जो तुमने पूरी पीठ के परिककरों पर आरोप लगाए थे और जो तुम चैलेंज कर रहे हो वो चैलेंज जिसके पास वो सामग्री होने की बात है उनसे आप बात करिए और ये जो धमकी दिखा रहे हो ना तो अभी कुछ नहीं हुआ है तो धमकी तो जो सोच रहे हो कि धमकाने से सामने वाला भय खाएगा या अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारना है मारो कुल्हाड़ी और दंभ में काट लो जिस डाल पर बैठे हो उस डाल को आचार्य दीनदयाल मनी त्रिपाठी जी का प्रतिकार कैसे करेंगे पानी में रह के मगर से बैर नहीं करना है ना आचार्य श्री है भाई उनका लेवल तुम्हें हमसे ज्यादा तुम्हें पता है तो इसलिए वहां पर बच के निकल लोगे। अरे वह विवाद में नहीं पड़ना चाहते हैं तो ठीक है। हमारे लिए भी पूज्य हैं। मगर इस तरीके से आचार्यों का इस तरीके से अपने वक्तव्यों में उपयोग नहीं करते हैं। जैसे तुम करते हो सिंपैथी हासिल करने के

00:51:14:27 लिए। मैंने कभी भी गाली देने वालों का समर्थन नहीं किया। मैंने कभी किसी को गाली देने के लिए नहीं कहा। मैंने कब कहा भाई? और यदि तुम मेरे बारे में बात नहीं कर रहे हो तो जोड़ क्यों रहे हो? क्योंकि तुम्हें मेरा मेरे से सुरक्षा प्राप्त कैसे होगी कि मुझे पहले गलत लोगों के साथ दिखा दो दुनिया को और फिर उन गलत लोगों का प्रतिकार करते हुए तुम मेरे से सुरक्षा प्राप्त कर लो। क्योंकि मैं ला रहा हूं तथ्यात्मक चीजें। मैं ला रहा हूं तार्किक चीजें। तो मुझसे मेरे द्वारा होने वाले इस प्रतिकार से तुम्हें सुरक्षा कैसे मिलेगी? मुझे पहले खड़ा करो उनके साथ जो तुम्हें गालियां दे रहे हैं। तुम्हारे घर परिवार को नष्ट कर देने की बातें कर रहे हैं। अमुक अमुक जो भी चीजें कर रहे हैं। पहले मुझे उनके साथ जोड़ दो और फिर उनको बुरा भला कहते हुए तुम मुझे बुरा भला कहो। यही तो टेक्निक

00:52:08:10 है। प्री मिशंस को सपोर्ट करते हैं खुलेआम। उसके Facebook फ्रेंड में वो मिल गया था वो व्यक्ति। अरे भाई जाके अपना चैनल देखो। उसमें तुम्हें लिखा होगा YouTube पार्टनर जाओ देखो जाकर के YouTube पार्टनर लिखा होगा तुम्हारी प्रोफाइल में खोल के देख लेना YouTube स्टूडियो YouTube पार्टनर का मतलब समझते हो YouTube के साझेदार YouTube अपने YouTube पर क्या-क्या चीजें नहीं दिखाई जाती है जो तुम बुरी से बुरी अश्लील से अश्लील चीजें तुम देखना चाहो वो देख सकते हो और YouTube और Google आपस में पार्टनर नहीं है क्या अब Google पे क्या बोलेंगे उनका काम बंद नहीं हो जाएगा अपना काम ही तो नहीं करना Facebook पे अगर कोई किसी का फ्रेंड है बस हो गया फ्री मिशनंस का वो और YouTube तुम पार्टनर हो तुम लोगों को अश्लील चित्र दिखवा रहे हो YouTube को पार्टनरशिप दे के ये देखो आर्य समाज के स्कूल में पढ़ता है व्यक्ति आर्य समाज फ्री मेंशन इनके पिताजी को फ्री मेंशन वाला क्यों ना कहा जाए जिन्होंने इनका दाखिला आर्य समाज के स्कूल में करवाया था और फिर

00:53:13:13 हमारी जो प्राथमिक शिक्षा दीक्षा है दो है वर्षों तक वो डीएवी ग्रुप में हुए लेकिन डीएवी ग्रुप क्योंकि आर्य समाज है तो वहां सैद्धांतिक टकराहट होने लगी हमारी फिर पिताजी वहां से ले गए यदि बात

⬜ Not used yet · 00:53:23:22 – 00:58:09:00 (4:45)

00:53:23:22 करो और इनकी शुरुआती शिक्षा दीक्षा कहां हुई और इनके पिताजी ने डीएवी में क्यों इनको भर्ती कराया फ्री मेंशनंस के हैं वो तो इसी तरीके से हर व्यक्ति फ्री मेंशन का होता है ना इतने अनर्ग तत्वहीन अप्रामाणिक निराधार रूप से तुमने चीजें प्रस्तुत की थी तब नहीं सोचा था। आज जब तथ्यात्मक चीजें सामने आ रही तो विलाप चल रहा है। विधवा

00:53:58:08 विलाप कोई इनसे कालिया जिन का मंत्र लेने आएगा तो ये उसको दे देंगे। मगर ये दोषी नहीं है। मेरे मुंह से ऐसी बातें नहीं निकलती नीचता भरी जो तुम्हारे मुंह से निकल जाती है। बहुत कुछ है कहने को। और सीधी बात तुमने कहा सामना क्यों नहीं करते भाई सामना करो ना सबसे पहले पूरी पीठ के परिककरों वाला मुद्दा लिया जाएगा दूसरे नंबर पर विजय श्री का लिया जाएगा तीसरे नंबर पर तुम्हारी बात पूछेंगे कि तुम्हें आचार्य क्यों माना जाए अब तुम अब तुम इस बात पे नहीं आओगे कि मेरे से आचार्य ना पूछे क्यों भाई तुम जब किसी पीठ से कुछ पूछ रहे हो कुछ अपना वक्तव्य दे रहे हो तो तुमसे वो उनका जवाब उन पर बात हो जाने के बाद तुमसे बात क्यों नहीं की

00:54:50:13 जाए? हमारे पास पहले समय था अब समय नहीं है। लालटेन लेकर के लोगों को बेवकूफ बनाने वाले वो जो कॉमेडी सीरियल्स बनाने का समय है। किसी के बारे में कुछ भी बोल दो। वो जब प्रतिकार करे तो अरे हमारे पास समय नहीं पहले बोला था। हम और तुम पूछते हो कि शिवश नारायण द्विवेदी है कौन? शिवश नारायण द्विवेदी वो है जिससे तुमने खुद कहा था कि हमारे साथ चर्चा कर लो। क्यों कहा था? और तो और शिवश नारायण द्विवेदी है कौन? तो तुमने वो जो तुम अपने वीडियो में कहते हो उनको 50 लोगों ने कहा पूरी पीठ के ऊपर आरोप लगाते हुए। अरे भाई वो 50 लोग कौन हैं? उनकी प्रमाणिकता क्यों नहीं पूछी थी तुमने? होते कौन हो तुम? तुम आप पुरुष है। तुम्हारे वक्तव्य को प्रमाण क्यों माना जाए? मतलब तुम जब आरोप लगाओगे तब तो किसी भी अप्रामाणिक साधन का आलंबन ले लोगे। मगर जब उसका प्रतिकार करने कोई आएगा तो तुम ये उसमें रोड़ा अटकाओगे कि सामने वाला जो है वो होना चाहिए। वहां से नियुक्त किया गया अधिवक्ता। वो बात और है कि तंज कसने के लिए

00:56:05:15 ही सही। तुमने अपने कई वीडियोस के टाइटल में मुझे एडवोकेट ही लिखा है। ठीक है? सामना करो सामना। भागो मत। सीधी बात। पूरी पीठ के परिकरों पर जो आक्षेप लगाया है उस पर बात करो। विजयश्री पर बात करो। फिर तुम्हारी परंपरा पर बात होगी। फिर इस पर भी बात करनी है तो कर लेना। यह जो चल रहा है जो आज तुम्हारा रिलीज हुआ है शुरू में ही कहा था मत करो मत करो अब जब हो रहा है तब तुम विधवा विलाप कर रहे हो चैनल पर आकर के और अभद्र से अभद्र नीचता से नीच नीच से नीच टिप्पणियां कर रहे हो करो उससे तुम्हारे तुम्हारा ही क्षीण

00:56:55:21 होगा राजन दास जी के शिष्यों से भाग रहे हो सन्मार्ग वालों के से भाग रहे हो। सब जगह अपने बहाने बना रहे हो। हम हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना था कि भाई दो वर्णाश्रमी है और वेद पुराण मूर्ति पूजा इन सब पर आस्था रखने वाले हैं तो हम लोग भिड़ते हुए सार्वजनिक रूप से ना दिखाई दे। अगर कुछ चीजें हैं तो हम लोग व्यक्तिगत रूप से बात करके उन पर कार्य करें। मगर तब तो तुम्हें मसाला चाहिए था ना। आ हा हा मैं वो हूं मैं खा जाऊंगा। खाया होगा तुमने कई लोगों को मगर मैं शुरू से कहता आया हूं फिर कहूंगा खेल अच्छा खेला था तुमने आदमी गलत चुन लिया जय श्री राम सभी को और हां जो यहां पर आकर के उल्टे सीधे जो वक्तव्य देते हैं ना सामना करो माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है तो प्रत्यक्ष वार्ता करो ठीक है

00:58:06:14 जय श्री राम सभी को

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 58:11 · 23 Apr 2025

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