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00:00:01:25 सभी को जय श्री राम जैसा कि हमने अभी एक लाइव की थी पिछले में और उसी का अगला भाग वैसे यह जो लाइव हम कर रहे हैं यह भगवता आनंद के द्वारा जो एक लाइव निर्गत किया गया था जब वो रेलवे स्टेशन बैठ के उसने एक बड़ा लंबा सा लाइव बनाया था हमारे वीडियो को चला चलाकर सुन सुनकर जवा आप दे रहा था तो उसके बाद से एक सीरीज जैसी है कि उसने जो जो कहा वो उसका हमने भी एक एक बात पर जो जो बात प हम गौर कर सकते उस पर ध्यान दिया इसकी अलग से प्लेलिस्ट बना देंगे अभी हम लोग जो उसको उत्तर दे रहे हैं उसने

00:00:48:08 जो पहली लाइव के बाद जो दूसरी और तीसरी लाइव की थी उसमें से दूसरी लाइव का उत्तर हम दे चुके हैं अभी तीसरी लाइव का उत्तर दे रहे हैं फिर भी हम उत्तर देते हुए बता रहे कि भाई तुम साथ लाइव चर्चा करना चाहते थे और हम लाइव चर्चा के लिए तैयार हैं तुम बस अपनी ढपली बजाओ और बताओ कि तुम कब आ रहे हो क्योंकि तुम्हें जो सामंजस्य की भाषा थी वह पसंद नहीं आई फिलहाल व तीसरी वाली की हम बात कर ले हां जो अभी इससे जस्ट पहले जो लाइव हमने की है उसमें हमने जो इन्होंने एक विधवा विलाप चालू किया ना कि अरे तुम खाले तू जल उठा के कह दे बचपन में ऐसे करते थे कि तू जल ले ले हाथ में तू कसम खा ले तू जो सौगं खा ले वो बच्चों वाली बात विधवा विलाप हर जगह बारबार अब कुछ रह नहीं गया बचने को तो सौगंध खाओगे तभी वो होगा फिर सौगंध वाली बात में भी जब इनसे पूछा जाता है तो इनके पास उत्तर नहीं होते हैं जैसे कि एक उत्तर के प्रसंग भले ही हमें ठीक से मालूम है या ना मालूम हो इतना पक्का है इन्होंने यह अपनी लाइफ में कहा कि भाई मेरे पिता के ऊपर दबाब डाला गया अमुक अमुक की ओर से जो कि

00:02:03:12 जोते मट से जुड़ा हुआ व्यक्ति है उनका शिष्य है और मेरी उनकी ओर से दबाब डाला गया तो मेरे पिताजी ने एक वक्तव्य दिया तो हमने पूछा है कि यह कब अपने पिताजी के साथ जो है वह हाथ में शालिग्राम भगवान लेकर के सौगं खाने वाला है कि ऐसा सच है जोति मठ के लोगों के द्वारा इन पर दबाब डाला गया इनके पिताजी पर दूसरी एक बात आती है कि जो पिछले वाले उससे हमें पता चली जो मुख्य तथ्य है वो क्या है आज हमने एक कॉल रिकॉर्डिंग डाली थी जिस पर सच सत्य अथवा असत्य होने का विषय विचाराधीन है और तो हम यह तथ्य उससे निकल के आता है कि यदि आप किसी की कॉल रिकॉर्डिंग को जांच के अधीन मानते हैं उसके आधार पर कोई निर्णय नहीं लेते हैं तो ऐसा ही आपको दूसरों के साथ भी करना चाहिए सुनी सुनाई बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए और अगर विश्वास हो भी रहा है तो उसे पब्लिक में सार्वजनिक रूप से अपने जो अपना जो विचार है जो आपका व्यक्तिगत है सैद्धांतिक नहीं है वो उस विचार को पब्लिकली प्रस्तुत करते हुए और किसी के ऊपर गंभीर आरोप नहीं लगाने चाहिए

00:03:18:25 दूसरा तीसरा ये कि अगर अ शपथ लिए जाने के अभाव में इनके लिए आचार्य राम शंकर शुक्ल जी की वाणी प्रमाण नहीं थी तो फिर और य पहले भी कह चुके कई बार उनके लिए बहुत सारे अभद्र आपत्ति जनक शब्द भी कह चुके हैं तो जब किसी व्यक्ति की वाणी आपके लिए वो नहीं है मान्य नहीं है शपथ के अभाव में तो फिर तुम्हें दोगलापन नहीं दिखाना चाहिए कि अपनी बातों को सिद्ध करने के लिए उसी व्यक्ति की वाणी को आप मान्य कर दूस बा वो बात और है कि हमारे लिए उनका एक एक अक्षर जो है अक्षरस सत्य है और एक बात और निकल के आई थी पिछली वाली लाइव में कि जो गुरु द्रोही है नीच है जो इसके समर्थक हैं जो यह सोच रहे हैं कि मठ का शोधन कर रहे हैं वो उसका साथ देक के और जबकि इसके जो वास्तविक कर्म है यह केवल पूरी पीठ के परेकर का द्रोह नहीं कर रहा है यह गुरुदेव भगवान का ज्योतिर मठ वाले अनंद सरस्वती जी का सभी शंकर परंपरा से जुड़े हुए जितने भी गद्दी से जुड़े हुए व्यक्तित्व हैं य उनका भी विरोध कर रहा है उन्हें भी धर्म द्रोही सिद्ध कर रहा है अशा स्त्रीय सिद्ध कर रहा है इसका

00:04:33:28 अर्थ है कि अप्रत्यक्ष रूप से यह शंकर संप्रदाय का नाश कर रहा है नाश करने का प्रयास कर रहा है नाश तो क्या ही कर पाएंगे य इनसे बड़े-बड़े तुर्रम खा आ के चले गए और यह सब चीज हमें पिछली वाली लाइव से पता चली अब हम इनकी लाइव के कुछ पॉइंट्स है जो हमारे एक गुरु है उन्होंने तैयार किए हैं और उन पर हम एक एक करके बात करेंगे इनका पहला जो इनकी तीसरी लाइव रात के समय हुई थी जो इसने अपनी तीसरी लाइव में क्या कहा है हम लोग वहां से बात करते

00:05:23:04 हैं अद्वैत विशिष्टा द्वैत कौन बण संप्रदाय ने तुम्ह प्रमाण के रूप में तुम्हारे संप्रदाय को प्रमाण के रूप में स्वीकार किया है उसके ऊपर कहता है कि पहले तुम कितने संपका एक इसका पहला जो प्रश्न आया था वह यह था कि तुम कितने संप्रदाय ज हमने संप्रदाय पर प्रश्न किया है परंपरा पर प्रश्न किया है तो यह भगवता अंद का कहना है कि तुम कितने संप्रदायों को प्रमाणिक मानते हैं तो तात्विक विवेचना का भेद अवश्य है वरना जितने भी यह परंपरा प्राप्त परंपराएं हैं जैसे श्री संप्रदाय है मद्व परंपरा है और और भी अनेक परंपराएं हैं विशिष्टा दव द्वैत द्वैता द्वैत शुद्ध द्वैत इन सब सभी परंपराओं को प्रामाणिक माना जाता है तात्विक भेद है और दूसरी एक बात और है कि तुमने भी अपने ही वीडियो में हमसे ही बात करते समय कहीं एकद जगह य बोला है कि भाई जितने भी परंपरा

00:06:38:21 प्राप्त जो संत हैं जो आचार्य गण है मैं उनका खंडन नहीं कर रहा हूं मेरी बात केवल शास्त्रों के लिए है इस तरह की वाणी तुमने बोली है तो यदि जो अन्य संप्रदाय हैं अद्वैत से भिन्न वह प्रामाणिक नहीं है तो फिर जो तुमने अपना वक्तव्य दिया वो भी कट जाता है तुमने भी यही कहा ना कि वो सब संप्रदाय जितने भी परंपरा वाले हैं वो सब तुम्हारे लिए जो है प्रणम में है ऐसा भाव प्रस्तुत किया है तो तात्विक विवेचना का भेद अवश्य है मगर ऐसा नहीं है कि शंकराचार्य जी ने जो रामानु संप्रदाय है उसे अप्र माणिक माना है क्योंकि वेद में प्रमाण बुद्धि वर्णाश्रम धर्म परंपरा है ना और दूसरी बात यह है कि ब्रह्म की ब्रह्म जो तत्व है उसमें जरूर थोड़ा सा भेद है तात्विक विवेचना में मगर धर्माचक्र

00:08:00:16 मब इस ऐसा कना मब इस ऐसा कना है अब ये हमारे गुरु भाई है इन्होंने पॉइंट नोट करके बताया कि इसने अगला जो पॉइंट दिया है वो यह है कि क्या इसने यह बोला है जब हमने यह बोला कि भाई तुम्हारा तत्व तात्विक वो कहां से आया कि तुम्हारा अव्यक्ता द्वत कहां से आया तो इसने बोल कि भैया द्वैता द्वैत विशिष्टा द्वैत ये सब एक है द्वैत एक ही है मतलब सारे एक ही है अच्छा जब एक ही है तो जब तुम एक मानते हो यदि तो तुम्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था कि तुमको कितनी संप्रदायों ने प्रमाणिक माना है स्वीकार किया है प्रमाणिक रूप से यह कोई परंपरा है ठीक है और अगर तुम एक ही नहीं मानते हो तो यहां पर क्यों कह रहे हो कि सब एक ही है दूसरी बात क्या जो परम तत्व की विवेचना हुई है क्या जो परम तत्व की विवेचना हुई है उसको जो तुम बता रहे हो कि विशिष्टा द्वैत अद्वैत एक ही है तुमने इस बात को कंफर्म करा लिया है अन्य जो आचार्य गण गद्दी पर बैठे हुए हैं उनके मुख से

00:09:16:00 ठीक है तो पहली बात तो यही है कि तुम खुद ही कह रहे हो कि अलग-अलग है क्योंकि अलग-अलग संप्रदायों ने मतलब तुमय वहां पर भाव प्रकट कर रहे हो कि सभी संप्रदायों ने उसको माना है कि नहीं माना है तुम्हारे संप्रदाय को प्रामाणिक या तुमने उनको प्रामाणिक माना है कि नहीं माना है यानी कि तुम अलग अलग होना मान रहे हो फिर यहां पर व तात्विक विवेचना को एक मान ले जब तात्विक विवेचना भी एक है जो एक मुख्य अंतर है संप्रदायों में तो तात्विक विवेचना भी एक ही तुम मान रहे हो तो फिर तुम क्यों कह रहे हो कि अन्य संप्रदायों को तुम प्रमाणिक मानते हो कि नहीं या या अन्य संप्रदायों के द्वारा तुम्हारा प्रमाणिक माना जाता है कि नहीं तो यह बात अब सुनते हैं आगे

00:10:07:12 [संगीत] अ क्या माछ कबीर पंथ को जगतगुरु शंकराचार्य भगवान ने अपने मंच से उनका उनके किसी कार्य का अप्रिशिएट किया उस कार्य को जैसे कि ब्रह्मा कुमारी को भी किया है उनके किसी कार्य को अप्रिशिएट किया है गायत्री परिवार के कार्य को भी अप्रिशिएट किया है वही तो बात है यही बात तो तुम्हें समझा नहीं है कि तुम यह बागेश्वर करौली इन सब को लेकर के जो तुम दंब भरते हो अपने जो अंध भक्त है अपन उनको सुनाने के लिए यही तो क्वेश्चन तुमसे है जब तुमने कहा कि मैंने जो मैं पुरी शंकराचार्य के पास गया था शिक्षा लेने मगर उनकी आशा स्त्रता का समर्थन नहीं किया था मैंने एक विदेश गामी के द्वारा स्वागत सत्कार स्वीकार किया था मगर उसकी अ जो विदेश विदेश गमन यात्रा उसका समर्थन नहीं किया इसी प्रकार से गुरुदेव अगर बागेश्वर वालों से मिल रहे या किसी करौली वाले से मिल रहे तो किसी एक्स वाई जड से भी मिल रहे हैं मगर उसकी अशा स्त्रीय का व समर्थन नहीं कर रहे उतने ही अंश में मिल रहे हैं जितने अंश में उसकी कोई सही चीज है तो तुम अपने लिए दूसरा सिद्धांत और दूसरे के लिए दूसरा सिद्धांत जैसा

00:11:22:14 कि मैंने बताया कि जब मैं रामपाल से लड़ रहा हूं उस समय आरएसएस से प्रभावित लोगों को अगर मैंने साथ में लिया है तो तुम्हारा कहना है कि आरएसएस का आदमी है उस हिसाब से तुम भी विदेश विदेश गमन को समर्थन करते हो तुम अपनी बात को खुद ही काट रहे हो और ना जाने कितनी बार काटा है क्योंकि तुम छोटे बच्चे हो संकीर्ण विचारधारा वाले चलो फर आगे सुनते हैं क कोने से उस

00:12:17:02 अब इसमें यह कह रहा है इसने क्या किया कि मठाधीश की बात आई कि तुम मठाधीश बनना चाह रहे हो तो इसने अनावश्यक प्रलाप करते हुही अपनी बात को वजन देने के लिए तमाम सारे इधर उधर के प्रमाण की मठा मठ क्या होता है ये वो इस संबंध में बहुत सारी चीजें इसने कर दी और उसके बाद बताया उसके बाद अंत में बताया हमने तो कभी कहा ही नहीं कि हमें मठा दीज बनना है तुम हमारे ऊपर क्यों थोप रहे हो क्यों मैंने बहुत सी ऐसी बातें जो तुमने मेरे ऊपर थोपी है पूरी शंकराचार्य जी के ऊपर थोपी है पूरी पीठ पूरी परक पर थोपी है जा ना जाने कितनों पर थोपी है विजया श्री और मेरे को लेकर के तुम अनावश्यक प्रलाप करते हो यह क्या है मैंने कहा है क्या ये सब तो मेरे तुम्हारे मानने से ही मुझे कोई चीज प्रतीत होगी या नहीं होगी तो तुम डिसाइड नहीं करोगे और वह भी तब जब तुम सब लोगों के लिए जो तुम्हें प्रतीत हो रहा है उसको निर्णय निर्णय के रूप में प्रस्तुत कर रहे हो यह क्या दोगलापन है आगे सुनते हैं य क्या

00:13:35:20 वो तुम्हें बनना इसलिए नहीं है क्योंकि तुम्हारे पास मठ है नहीं और मट इसलिए नहीं है क्योंकि तुम आचार खुद को कहते हो मगर तुम्हारे जो कार्य है वो है दुराचार दुराचार वाले कार चोरों की तरह फिरना है अपनी आइडेंटिटी को छुपा के रखना है अपनी स्थान को छुपा के रखना है इसलिए यह सब करना है कि मैं कुछ भी करता रहूं कोई मेरे ऊपर सवाल ना कर पाए और लोग कुछ भी कर रहे तो मैं सब में जो है सवाल कर चकू कौन क्या कर रहा है यह सिद्धांत भी दिखाना जब परंपरा का वो दोगे ना प्रमाण कि तुम्हारी परंपरा परंपरा क्या है य सिद्धांत भी दिखाना चलो और आगे चलते हैं थोड़ा सा काम को हल्का कर दिया हमारे गुरु भाई ने वरना बहुत लंबा हो जाता हैय

00:14:33:04 ये है क्या कौन सा है कहां गया सारे मैसेजेस क अच्छा ये अच्छा औरता है अच्छ य पर फस गए यहां पर क्या हुआ

00:15:30:01 अब इसने यहां पर एक एक आपत्ति जनक बात कही है जब मैंने मठ के ऊपर वो उठाया तो वो कहते ना कि अपनी बात को वजन कैसे डाले लोगों का ध्यान दूसरी तरफ कैसे ले जाए तो जब मैंने मठ वाली बात कही इसको तो यह बोलता है कि तुम्हें इस बात की जलन हो रही है कि कुत्ते के स्थान पर तुम क्यों नहीं हो है ना तो फिर इस तरीके से अगर देखा जाए तो बहुत सी चीजें ऐसी कही जा सकती है मतलब ये कुल मिलाकर य बातें वाली है ना जो लुगाइयां नहीं करती है आपस में जब कुछ नहीं बचा तो गालियां देने लगो कुछ भी निराधार बातें करने लगो पतिया कसने लगो चिढ़ाने लगो और क्या है ये अब इसमें मैं क्या कहूं कुत्ते के स्थान पर तुम नहीं हो और मैं कहूंगा कि अगर तुम्हारे बारे में बोला जाए कि तुम होना चाहते हो कुत्ते के स्थान पर पर तुम तो उस योग्य भी नहीं हो जैसा कि वीडियो रिकर्ड जो ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग के माध्यम से और लोग हमें बता रहे हैं उनको अगर सच मान लिया जाए तो तुम तो योग्य भी नहीं हो कुत्ते के स्थान पर होने के लिए उसके लिए वजन चाहिए धातु चाहिए पर तुम तो हर शुक्रवार को बाहर जा रहे हो इलाज कराने तो तुम कुत्ते के स्थान पर कैसे होगे

00:16:45:12 यह भी सोचने वाली बात री तो धातु ही कंट्रोल में नहीं हो रही सारी वही जा रही है शरीर से निकल कर के क्या

00:17:52:01 हमने यह कबका अच्छा पुलक शास्त्री जी का नाम आ रहा है यहां पर एक बार और सुनते हैं हा बिल्कुल माना जाएगा क्योंकि जो सार्वभौम गुरु गद्दी है उसने कहा है कि भैया इनका कहना है कि आचार्य रामशंकर शुक्ल जी की बात की जितना विपरीत पुलक शास्त्री जी की बात जाएगी वह मान्य नहीं है और जो आचार्य राम शंकर शुक्ल जी के जितना समर्थन में होगी जितना सामंजस्य होगा उतनी मान्य इसलिए मान्य है कि जो हमारे निर्णायक हैं गुरुदेव जगतगुरु शंकराचार्य जी उनके द्वारा कहा गया है कि भाई अपनी विधि विषयक जो आपकी जो वो होती है जानकारिया उनको आप यहां से स्टॉट आउट करें तो वो प्रामाणिक

00:19:07:09 है गुरु गद्दी के द्वारा आचार्य गद्दी के द्वारा और वह अपिक आचार्य गद्दी के द्वारा व घोषित नहीं किए गए ऐसे में उनकी जो वाणी इस प्रमाणिक आचार्य को काट रही होगी वो वाणी इसकी नहीं मानी जाएगी और तुम तुम यह कहते हो कि हमारे जो गुरु है वो शास्त्र से भी मतलब जो शास्त्र ऊपर है गुरु इसमें बात यह है कि गुरु अगर कोई ऐसी शिक्षा दे रहा है जो उसके द्वारा प्रमाणित किए गए शास्त्रों के विपरीत जा रही है शिक्षा दे रहा है तो वहां पर आप गुरु का गुरु से क्या कहते शास्त्रोक्त पक्ष रखने के लिए गुरु के समक्ष खड़े हो मगर यदि गुरु के द्वारा कोई प्रमाण माना ही नहीं गया किसी शास्त्र को और उस शास्त्र के आधार पर लाकर के या फिर उसके उस अर्थ को प्रमाण नहीं माना गया जो तुम मान रहे हो जैसा संभवत मुझे पूरी तरी से मालूम नहीं है वो सबरी वाले मामले में आएंगे जो सुंड रामायण है उसके बारे में आएंगे बाद में मगर कि उसके उस अर्थ को नहीं माना जो तुम मान रहे हो तो वहां पर भी आपका गुरु के प्रति जो विरोध करना है वह व्यर्थ हो जाएगा क्योंकि जैसा कि मैंने पीछे पूछा कि तुम्हारे लिए गुरु के रूप में प्रमाण कौन है जो सही सही व्याख्या करता है

00:20:23:07 मतलब कहने का यह है कि अगर यदि वो अपने ही द्वारा स्वीकार किए गए शास्त्रों के विरोध में शिक्षा दे तो वहां पर हम उसको उसका प्रतिकार कर सकते उसके उसमें खड़े हो सकते कि गुरुदेव आपने य शास्त्र दिए और करपात्री जी ने ऐसी आज्ञा दी भी है मगर तुम कोई नया शास्त्र ले आओ जो गुरुदेव ने स्वीकार किया ही नहीं है और उसके आधार पर या नई व्याख्या ले आओगे जो गुरुदेव ने स्वीकार की नहीं है उसके आधार पर तुम अपने व अंतिम निर्णय गुरु के प्रतिकार स्वरूप खड़े नहीं हो सकते प्रतिकार स्वरूप गुरु के तभी खड़े हो सकते हो जो गुरु के द्वारा स्वीकार शास्त्र और व्याख्या है शास्त्र की उसके विपरीत जब गुरु तभी खड़े हो सकते हो वरना गुरु द्रोह होगा तुम्हारे पास शब्द प्रमाण होगा नहीं कि तुम जिन शास्त्रों को शास्त्र मान रहे हो वो शास्त्र तुम्हारे पास आए कैसे यह सारी चीजें तुरंत हो जाएंगी व्याख्या और शास्त्र गुरु के द्वारा स्वीकार होने चाहिए उनके विपरीत अर्थक स्थिति में अगर गुरु हैं तो उनके उनका प्रतिकार आप कर सकते हो कई बार ऐसा भी हो जाता है कि गुरु स्वयं कह देते हैं कि जितने अंश मैं शास्त्र का अनुकरण करता ना दिखाई करूं उतने उतने अंशों में मेरा भी मत लेना मगर वहां पर इसका मतलब यह नहीं है कि आप कोई भी शास्त्र ले

00:21:38:09 आओ यह गुरु गुरु इसके विरोध में जा रहा है और या कोई भी व्याख्या ले आओ किसी की भी की हुई और गुरु इसके विरोध में जा रहा है अगर आपको गुरु की व्याख्या पर या गुरु के यह बताने पर विश्वास नहीं है कि कौन सा शास्त्र मान्य है कौन सा शास्त्र मान्य नहीं है तो आपका गुरु पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता फिर वही वाली बात आ जाएगी कि जिससे वेद मंत्र लिए यदि उस पर विश्वास नहीं है तो फिर आपका वेद मंत्रों पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होता और यदि वेद मंत्रों पर विश्वास है तो गुरु पर अविश्वास होना सिद्ध नहीं होता तो यानी कि गुरु की क्रेडिबिलिटी पर आप उंगली नहीं उठा सकते कि उसकी व्याख्या गलत है या उसके द्वारा यह बताया जाना कौन सा शास्त्र स्वीकार्य है कौन सा स्वीकार्य नहीं है यह बताया जाना में गुरु त्रुटि कर रहा है अगर यह दोष आप लगा देंगे उसके ऊपर गुरु के ऊपर तो फिर आप आपकी अपनी क्रेडिबिलिटी खत्म हो जाएगी ठीक है तो यहां पर वही हो रहा है व्याख्या में आप उंगली उठा रहे हैं तो इसलिए मैंने आपसे पूछा था कि आपका गुरु कौन है जिसके द्वारा जिसके भले ही आचरण हो सकता है आपके हिसाब से विपरीत हो गए हो मगर उसकी व्याख्या और शास्त्र शास्त्र की प्रमाणिकता पर आपको विश्वास हो इसने य व्याख्या ठीक की है बिल्कुल गुरु

00:22:53:22 ने सारी व्याख्या ठीक की है गुरु ने जो शास्त्र चयन किए है य जो प्रामाणिक है वो बिल्कुल ठीक है ठीक है तो यदि तो अब जो गुरु है हमारे जो गुरु है जो निर्णायक अंतिम निर्णायक पद पर है जैसे तुमने एक बार मुझसे कहा था कि तुम्हारी तुम हमारे साथ बैठने के लायक नहीं हो अ तुम हो पूरी शंकराचार्य जी के विरुद्ध में बोल रहे हो तुम सन्यासी हो क्या सन्यासी है वो परंपरा प्राप्त आचार्य है तुमने तुम आज तक अपने गुरुओं के नाम बताने में तुम्हें शर्म आती है भागते फिर रहे हो मैं किताब लिखूंगा तब आऊंगा तो तुम कौन से एंगल से उनके समक्ष स्टैंड करते हो अब तुम अगर कहो कि शास्त्र तो वो शास्त्र तुम्हारे पास कहां से आए यह बात आ जाएगी उनकी क्रेडिबिलिटी पर प्रश्न उठ जाएगा यदि तुम्हें पीछे के आचार्यों पर भरोसा नहीं है तो तो ये चीजें गुरु गोविंद और ग्रंथ केवल ग्रंथ नहीं केवल गुरु भी नहीं गुरु गोविंद और ग्रंथ अब ये ग्रंथ कहां से आ रहे है गुरु से गुरु कहां से आ रहा है ग्रंथ इसमें तुम ग्रंथ को ऊपर नहीं कर दोगे

00:24:09:03 ग्रंथ को तब ऊपर करोगे जब गुरु के द्वारा वह ग्रंथ और उसकी व्याख्या स्वीकार रहे हो और यदि तुम गुरु की व्याख्या को चैलेंज कर दोगे या ग्रंथ की प्रामाणिकता को चैलेंज कर दोगे जो गुरु ने स्वीकार किया तो फिर तुम्हारा गुरु पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होगा और जब ऐसा करोगे तो तुम्हारा वैदिक होना ही सिद्ध नहीं होगा वे कहां से आए पता नहीं ठीक है तो ये बात है जैसे मान लो कि एक एग्जांपल के लिए बता रहा हूं वो हमारे लिए प्रणम है तुम्हारे पिताजी विद्वान है उन्होंने तुम्हें गायत्री मंत्र दिया ऐसा शायद तुम्हारा कहना मुझे पता नहीं ठीक से कंफर्म कर लेना उन्होंने गायत्री मंत्र दिया अब उन्हो वो यदि यह व्याख्या कर रहे हैं यदि वो यह व्याख्या कर रहे हैं कि जो व्यास गद्दी पर बैठ सकती है तो तुम्हारा गायत्री मंत्र निरर्थक हो गया खत्म हो गया क्योंकि तुम्हें उनकी व्याख्या पर विश्वास नहीं है जब उनसे मिली हुई व्याख्या पर विश्वास नहीं है तो उनके मिले उनसे मिले हुए अगर वोह अपनी व्याख्या पर डटे हुए हैं ये भी बात है जैसा कि तुमने कहा कि उन्होंने वो दबाब में आके कह दिया था बात तो अलग है दबाब में आके कह दिया था मगर यदि वो अपनी व्याख्या पर डटे हुए

00:25:24:04 हैं कि नहीं महिला जो है व्यास गद्दी पर बैठ सकती तो क्या हो हुआ अब तुम्हें अपने जिन्होंने तुम्हें गायत्री मंत्र दिया है उनकी व्याख्या पर विश्वास नहीं है तो फिर उनसे मिले हुए मंत्र पर विश्वास कैसे फिर किसी और से मंत्र लेना पड़ेगा दिक्कत आएगी तो इसलिए गुरु में अविश्वास की दृष्टि नहीं रख सकते क्योंकि अगर अविश्वास गुरु में करोगे अविश्वास मतलब उनकी व्याख्या में अविश्वास और उनके वो जो शास्त्रों को स्वीकार करने की प्रामाणिकता है उसमें अविश्वास अगर तुम वो उसमें अविश्वास करोगे तो तुम्हारा उनके द्वारा तुम्हें दिया हुआ जो वैदिक वांगम है उस पर विश्वास होना सिद्ध नहीं होगा तो इस बात को समझना वो कभी लाइव होगी ना तो अच्छे से जब मैं प्रश्न पूछूंगा तुम्हारी परंपरा के बारे में तब फस होगे जिस दिन लाइव होग और तैयारी के साथ आना ये ध्यान रखना अब तुम्हें वो शिवांश नारायण द्विवेदी मिलेगा जो आर्य समाज यों को मिला जो इस पनियों को मिला जो हर धर्म के दुश्मन को मिला तुम्हें वो तुम्हारा वो क्या कहते हैं उदारवादी और सामंजस्य के लिए प्रयास करने वाला वो शिवांश नारायण द्विवेदी नहीं मिलेगा अब बाल की खाल निकालेगा

00:26:40:01 बाल की खाल तो लेके आना अपनी वो परंपरा फिर करेंगे उस उड़ाएंगे उसकी धज्जिया तुम्हारी परंपरा की लुप्त संप्रदाय का गुप्ता आचार चलो अगला प्रश्न लेते हैं चलो खैर तार्किक दृष्टि से तो उस बात को कोई मतलब नहीं है इसने कहा कि इस हिसाब से अमुक अमुक व्यक्ति को डेढ़ क्विंटल का होना चाहिए था क्योंकि हमारे शरीर से धातु निकलने के कारण

00:27:42:01 यदि हमारा वजन कम हो रहा है तो अमुक अमुक व्यक्ति का वजन जो है वह धातु अधिक होने के कारण धातु आने के कारण जो है ज्यादा वजन का होता तो यह तो खैर इसकी नीचता है और कुछ नहीं है इसमें क्या कहा जाए मगर अगर तार्किक रूप से अगर देखा जाए तो किसी परेशानी के आने के बहुत सारे कारण हो सकते हैं मगर प्राथमिकता से जो कारण हमारे सामने ही है तो उसको तो भूला जाएगा ना कहीं इस वजह से तो नहीं है तो जब प्राथमिकता से ऐसा है कि तुम हर शुक्रवार को कहीं जा रहे हो इलाज कराने है ना तुम्हारे सिद्धांतों के अनुसार और जो प्राप्त होने वाली कोई भी कही सुनी बातों विश्वास कर लेना चाहिए तो उसके अनुसार तुम्हारा टिकट कट रहा है ना हर बार राजस्थान का राजस्थान का जब टिकट कट रहा है या राजस्थान की यात्राएं तुम्हारी हो रही है तुम्हारे सिद्धांतों के अनुसार प्रत्येक शुक्रवार को कहीं किसी डॉक्टर के पास जा रहे हो तो यह दिखाई दे रहा है ना तो इसके आधार पर क्यों ना माना जाए कि तुम्हारा वजन रुक गया है खैर करो

00:28:56:19 नीचता और और एक बात और तुम्हें बता दूं धातु क्षीण हो जाने से वजन का गिरना यह साइंटिफिक है धातु अधिक हो जाने से वजन का बढ़ना साइंटिफिक नहीं धातु क्षीण हो जाने से वजन का गिरना सामान्य है धातु अधिक हो जाने से वजन का बढ़ना सामान्य नहीं है ठीक है फॉर योर काइंड इंफॉर्मेशन और सुनो तुम्ह वजन वजन बढ़ाना हो थोड़ा बल प्राप्त करना हो शारीरिक वाला भी जो ठीक ठाक व्यक्ति से थोड़ा सामना कर पाओ तो बताना कुछ खुराक खुराक तुम्ह भी बता देंगे इतने निर्दय नहीं है हम धातु निकल गई तो क्या हो गया दोबारा खा पी के मुंडे हो जाओगे कोई दिक्कत नहीं है बताना निशुल्क निशुल्क देंगे तुम्हें हां और वो पदार्थ बना लो तो बता देना वो वाला पदार्थ जिससे तुम मुझे वशीकरण वश में कर पाओ बना लेना तुम तो ज्यादा सिद्ध होगे पुरी के परिकर से तो

00:30:11:26 मुझे वश में करने में क्या दिक्कत है कर लेना बस सामना हो जाएगा एक तंत्र वादी एक तंत्र वाले का जो तंत्रों के नाम पर जो प्रमाद फैलाता है सामना हो जाएगा एक तंत्र के नाम पर प्रमाद फैलाने वाले का एक राम के भक्त से कर लेना तुम्हें भी याद रहेगा किसी राम के भक्त से सामना हुआ था तो बना लो पदार्थ क्या है वो क्या चूना उना मिलाते हो क्या क्या मिलाते हो वश में करने वाला बनाते हो तो उसी से वश में किया दो चार जो इधर उधर खड़े रहते हैं शूटिंग करते टाइम हसते हैं जो उसी से वश में किया है क्या क्योंकि वैसे तुम्हारी बातें सुन कर के वश में होने वाले कम लोग होंगे तो ऐसा कोई पदार्थ बनाओ मुझे भी वस में कर लो कहां मिलना है तय करते बया तुम्हारा चना उना मिला के लाओ कुछ खाएंगे तुम्हारा ठीक बताना और

00:31:29:19 कुछ अब इसका कहना है मटके परक के बारे में अगर तुम्हें लाइव रिकॉर्डिंग दिखा देंगे तो तुम क्या करोगे हमने तो बोला था ना पहली बात तो यह तुम्हारे सब प्रलाप है तुम्हारे पास कुछ है नहीं जैसे कि तुमने एक झूठ बोला था ने क्या झूठ बोला था कि भाई आचार्य राम शंकर शुक्ल जी की मेरे पास ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग है ठीक है यह तुमने बोला था ना य आचार्य के लक्षण क्या झूठ बोलने के तुमने बोला था आचार्य राम शंकर शुक्ल जी की तुम्हारे पास वीडियो रिकॉर्डिंग वो ऑडियो रिकॉर्डिंग है कॉल रिकॉर्डिंग और तुमने य भी यह भी पूछा था कि अगर तुम कहो डालोगे अगर तुम वचन दो डालने का तो तुम भेज दोगे

00:32:44:19 और जब जब आचार्य श्री का वक्तव्य आ गया तो तुम विधवा विलाप करने लगे रोने लगे काश मेरे पास वो रिकॉर्डिंग होती आज मैंने देख लिया कि विश्वास का मूर्तिमान रूप कैसा होता है यही कर रहे थे ना विधवा विलाप तुमने जब ये सब किया था तब किसी ने किया था क्या मैंने विश्वास त मैंने ये वो हाथ में गंगाजल ले लो यह करो वो करो और जब शब्द प्रमाण है ही नहीं तो गंगाजल का वो हाथ में लेकर के सामने वाला बोल देगा तो क्या तुम्हारे लिए प्रमाण रह जाएगा और तुम्हारे लिए होगा हमारे लिए होगा मगर तुम जैसे जो टचे लोग हैं उनका हमारे लिए कोई वो नहीं है हम ये उम्मीद नहीं कर सकते कि तुम हाथ में लेकर के बोलोगे तो वो सही बोलोगे जो व्यक्ति हर शुक्रवार को जिसके बारे में लोग कह रहे हैं कि हर शुक्रवार को व अपनी धातु बचाने के लिए यात्राएं करता है वह कितना स्तर का गिरा हुआ व्यक्ति होगा कितना नीच होगा कैसे विचार उसके लगातार चलते होंगे मन में और वो फिर आ कर के रो रहा है कि इधर वो है इधर वो है ये है

00:33:59:00 मैं उसकी सौगंध खा रहा हूं प्रशांत मिश्र जी की बात से याद आया इस आदमी ने वैसे तो ज्यादातर रिकॉर्डिंग जो दिखाई है जो ट मैसेजेस दिखाए हैं परिक को गुरुदेव को मठ को धर्म को बदनाम करने के लिए उन सभी रिकॉर्डिंग्स में ज्यादातर इसने मैं हाथ लगा रहा हूं यह र भाई हम भी ये सब ऐसे मैसेज तुम्हें 50 पढवा सकते हैं और अगर तुम शांत नहीं हुए तो पढवा ध्यान रख मगर बात यह है कि इनकी क्या वैल्यू है और अगर वैल्यू है तो जैसे तुम आचार्य राम शंकर शुक्ल जी से मा मांग रहे हो कि शपथ खाओ हाथ में शालिग्राम भगवान लेकर के जितने लोग तुम्हें भेजते हैं उनसे शपथ लेवाया करो उसके बाद आया करो यहां विधवा विलाप करने

00:35:03:16 तो तुमने प्रशांत मिश्र जी का नाम लिया उन्होंने तो तुम्हें रेल दिया एफबी में पोस्ट डाली ना उन्होंने मुझसे भी कहा हम उनका समर्थन नहीं करते भाई इन सब चीजों का जो बोल रहे हमारे नाम से क्या हुआ फिर य क्या अजीब उल्टी सीधी बातें कर रहा है मैंने बोला कि भाई तू अपने जीवन को सार्वजनिक कर तू किसी पर टिप्पणी कब कर पा रहा है जब वह कहां जा रहा है क्या कर रहा है सब कुछ वो बारबार आपको दिख रहा है तभी तो टिप्पणी कर पा रहा है तो तू अपने उस जीवन को सार्वजनिक करना जो सामान्य है तू केवल तभी तो दिख रहा है लोगों को जब तू चाहता है जब जिस मामले में तू बोलना चाहता है त अगर जिन आचार्यों की जिन संतों की तू समीक्षा कर रहा है तो उन लोगों ने अपना जीवन सार्वजनिक कर रखा है कि हम कहां क्या कर रहे हैं क्या है ज्यादा से ज्यादा उनके जीवन की अपडेट्स आ रही है तभी

00:36:18:20 तो तू टिप्पणी कर रहा है तो मैंने तुझे यह ललकार दी है कि तू अपने जीवन को सार्वजनिक कर दो तीन दिन लगेंगे तेरा जीवन अशा स्त्रीय सिद्ध करने में तू नहीं करेगा फोटो डाल अपने चैनल पर कौन-कौन तेरे सहायक है नाम पता तो डाल अभी कहां रुखा है ये तो डाल कितने दिन तक काम्या में है इसके बाद तेरा अगला ट्रिप क्या है गुरुदेव और पूरी मटके जो लोग हैं वो कहां जा रहे हैं कहां जा रहे हैं सब पता चलता रहता है भाई चल तू म मूविंग पे वो भी तो मूविंग पे है वो भी तो मूव कर रहे हैं पर उनका तो पता चलता रहता है अब कहां है अब कहां है अब कहां है तेरा क्यों नहीं पता है क्योंकि तू चोर है अपने जीवन को चुराना चाहता है छुपाना चाहता है लोगों

00:37:12:22 से और जहा इंपोर्टेंट बात होती है जहां तुम फस रहे होते हो वहां पर कह देते हो मैं दिखाऊंगा मैं यह करूंगा मैं वह करूंगा ये करूंगा पर बातें चलती है क्या ये सारी चीजें करूंगा प है क्या मैं भी एक दिन मैं भी एक दिन जो है निग्रह संप्रदाय का गुप्ता आचार्य होगा ना उसको गुप्त करके दिखाऊंगा मैं भी एक दिन लुप्त संप्रदाय के गुप्त आचार्य को इस दुनिया से गायब भी करके दिखाऊंगा ये क्या मेरा कहना ठीक है क्या उचित है क्या हैं उठा के पटक के दिखाऊंगा क्या मेरा कहना ठीक है क्या धोबी के कुत्ते की तरह पीटू क्या मेरा कहना ठीक है क्या कहने को कोई कुछ भी कह सकता है भाई कुछ भी है जुबान दी है मुंह चला लो जितना है भगवान ने दी है जवान और वैसे भी जवान चलाने का कार्य वो ज्यादातर वही लोग करते हैं जो कुछ वास्तविकता में नहीं कर पाते

00:39:23:07 पूरी पीठा श्वर जी का तुमने बहिष्कार किया या अपमान किया या हास्य किया उनके ऊपर हम यह दिखाएंगे जहां पर तुमने उन पर अनावश्यक चीजें कही अनावश्यक केवल शास्त्र का खंडन नहीं था शास्त्रोक्त पक्ष नहीं था वहां अनावश्यक कोई बात ना चीत और जिसमें से एक उदाहरण तुम्हें दे चुके हैं जिसमें की तुमने चारों शंकराचार्य को बुला लो एक करोड़ रुपए के आधार पर क्या इसमें पक्ष है तुम्हारा सिद्ध करोगे एक करोड़ रुपए लेते हैं हर बार हमें तो पता है कई बार निशुल्क जाते हैं कई जगह और अगर लेते हैं तो लेना भी चाहिए तुम्हारे खुद के हम फेसबुक पर कमेंट दिखा देंगे जिसमें तुम कह रहे हो यहां बिल्कुल उनके पास होना चाहिए धन कार्य कैसे करेंगे तो ये तो रही बाद की बात मगर एक करोड़ रुपए देखकर मतलब चार शंकराचार्य चार करोड़ में आते हैं वहां क्या संदर्भ था उनका आराम लेने का खुद को बला बड़ा दिखाने का क्योंकि व्यूज चाहिए अं भक्त चाहिए बिना बात के किसी को कहीं पर भी खींच कर के नीचा दिखा दो फिर कहो जो है हम जो है पूरी मट की रक्षा करना चाहते हैं फिर कहो हम संप्रदाय

00:40:38:14 की रक्षा करना चाहते हैं फिर कहो हम धर्म की रक्षा करना चाहते हैं वास्तविकता में तुम्हे धर्म की कोई चिंता नहीं है तुम्हें संप्रदाय की परंपरा की कोई चिंता नहीं है एट द एंड तुम्हें पूरी मठ की कोई चिंता नहीं है तुम अपने आप को खपत करने में लगे हो और सच कहूं तो अपने आप को भी ख्या पित नहीं करने में लगे हो तुम ध्यान ही नहीं दे रहे हो कि हो क्या रहा है तुम केवल यट को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रहे हो तुम्हारा इस पर भी ध्यान नहीं है कि तुम आगे बढो क्योंकि तुम जिस तरह से गाली गलोज करते हो तो तुम्हारा एक संत की भूमिका में भी कोई रोल नहीं रह जाएगा आने वाले कुछ दिन कि लोग तुम्हें एक संभ्रांत जगह पर जो है सम्मान पूर्वक एक संत के रूप में बिठाए वरना वहां बैठ के देना मां बहन की गाली जो तुम कहते हो मैं गाली दूंगा मैं गाली दूंगा वहां बैठ के देना गाली और तुम अपनी माताओं बहनों के बीच में भी बैठ कर के देते होगे सदाचरण है ना गाली देना सदाचरण है गाली देना तो क्योंकि जब तुम धार्मिक बातें कर रहे हो धार्मिक व्याख्यान कर रहे हो तो धार्मिक व्याख्यान तो सभी के लिए है उसमें तो ये चुनाव है नहीं कि अमुक अमुक के लिए नहीं है तो उसके बीच में बैठकर गाली देना तुमने ऐसा देते होगे शायद हमें तो नहीं सिखाया गया भाई खर उस पर तब आएंगे जब वो प्रकरण आएगा जो तुम कहते हो कि हां वो गाली मैं इसलिए देता हूं

00:41:53:21 क्योंकि श्री राम श्री राम और श्री कृष्ण की तरह मेरे पास वो नहीं इसलिए गाली देते हो अच्छा कोई अगर यह कह दे कि तुमने जितने आरोप लगाए वो यह करता है वो यह करता है क्योंकि उसके पास ऐसा नहीं था इसलिए उसने काम करने के लिए ऐसा किया हो गया कम तो तुम अपने वाले पक्ष के लिए तो मान लोगे मैंने गाली इसलिए दी भाई तेरे लिए कर्तव्य और कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है शास्त्र कहां है अगर कहीं पर शास्त्रों ने आपातकालीन धर्म की व्यवस्था की है तो उसमें भी बताया कि तुम्हें करना क्या है तुम तो मर्म हो ना तुमने ये वाला पार्ट जाना ही नहीं है तुमने यही जाना है जो व्यक्तिगत जो धर्म है वही जाना है तुमने ये नहीं जाना कि समाज के प्रति कैसा व्यवहार होना चाहिए इसी कारण से तुम्हारी ये हालत है ना धर्म को तुमने धारण किया है नहीं तो तुम्हारे हिसाब से जो पूरी मट के जो परिकर है उनके पास तंत्र है पदार्थ बनाने का और तुम उनसे बड़े सिद्ध हो बना लेना पदार्थ और मुझे बताना मेरा नंबर याद है ना 7408 30169 उस पर कॉल करना ट करना या किसी बिचौलियों को भेजना क्योंकि तुम में साहस तो है नहीं बिचौलियों को

00:43:08:25 भेज देना भाई [संगीत] ब तो यहां पर मुझे बताया जा रहा है कि तुम्हारा जो लाइव था उसमें तुमने क्या किया था कि जब मैंने यह वाला प्रश्न उठाया था कि तुम खुद कह रहे हो तुमने मेरे वीडियोस को पूरा देखा नहीं चार घंटे वाले को पूरा नहीं देखा और उसके बावजूद भी तुम उसका मर्म निकाल रहे हो कि हमने जो वीडियोस बनाए थे वह तुम्हारे विरोध में बनाए थे तो इसका मतलब और तुम यह भी बोल रहे हो कि मेरे

00:44:23:28 समर्थकों ने मुझे बताया तो मैंने एक कटा किया था इसका मतलब तुम अपने समर्थको के अनुग हो रहे हो ना अगर तुम पूरा वीडियो देख नहीं रहे हो और तुम एक मर्म बता रहे हो उस वीडियो का पूरा का पूरा तो तुम वहां परर समर्थको के अनुग हो जा रहे हो और जबक सामने वाला बता भी रहा है भाई मैंने आप मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारे विरोध में वीडियो नहीं बनाया है वह प्रकरण पिछले कई दिनों से 20 दिनों से इग्रा पर चल रहा था टांग खींची जा रही थी विजया श्री की तो वहां पर उठने वाले सभी सवालों को क्रमबद्ध से हमने यहां पर लिया था और क्योंकि तुमने ने भी उस दिन सेम डे ही वो वीडियो बना दिया था जिसमें तुमने दो बातें कुछ अलग हटके कही थी वो दो बातें थी एक फ्री मिशन और एक तुमने कही थी वो क्या कहते हैं वो व्यापार के लिए वहां गई यही दो बातें अलग हट के कही थी ना पुरी मिट में व्यापार के लिए गई तो उन बातों को हमने य लिया था हां वो वो व्यापार के लिए गई है नहीं वो पूरी मंच पर वो बैठी हुई है उन बातों को मैंने यहां ठीक है तो यहां पर जब यह वाली बात आती है तो य भाई साहब आगे बढ़ जाते हैं कोई जवाब ना देकर क्योंकि जवाब है भी नहीं तो क्या करें तो ब दिखाते हैं

00:45:59:06 हां लागू है लागू है कि अगर किसी की गुरु की निंदा की जाएगी व्यक्तिगत निंदा व्यक्तिगत निंदा मतलब समझते हो कि कोई बात ना चीत कोई गाली बग दी कोई गाली बकना यह व्यक्तिगत निंदा है व्यक्तिगत हो जाना शास्त्र की बात चल रही है शास्त्र से खंडन हो रहा है मगर व्यक्तिगत हो जाना कि भैया जैसे तुम गालियां देते हो वो व्यक्तिगत बात जब होने लगती है संदर्भ से अलग हट कर के तो वो निंदा है और वो निंदा यदि तुमको लगती है कि कोई कर रहा है तो तुम उससे दूर ही रहो ये बात बिल्कुल सही है और तुम हमेशा बचने के लिए जब तुमको कुछ कहा जाता है तो तुम ये क्यों ले आते हो कि यह बात पुरी शंकराचार्य जी पर लागू होती है कि नहीं यहां पर क्या तुम शास्त्र को नहीं मानते हो क्या अगर पुरी शंकराचार्य जी पर लागू नहीं हो रही है तो इस पूरी शंकराचार्य जी पर भी लागू होती है परंतु वहां पर कोई फॉलो नहीं कर रहा है उसको तो इसका मतलब तुम्हारे यहां पर फॉलो ना करना उचित मान लिया जाए तुम्हारे धर्म और अधर्म का निर्णय क्या इसी बात पर होता है कि पुरी शंकराचार्य जी जो कि तुम्हारे अनुसार ठीक नहीं है पूर्णतया उनके यहां क्या होता है क्या नहीं होता है तुम अपना पक्ष रखो ना भाई तुम्हारा पक्ष कहां

00:47:14:12 है अगर किसी को पुरी शंकराचार्य जी ऐसा लग रहा है कि वो उसके गुरु की निंदा कर रहे हैं बिल्कुल वो आदमी दूर रहेगा शास्त्र का सिद्धांत भी है और उसके मन में अपने आप ही रहेगा कई लोग गलत फहम पालते हुए रहते भी है अगर वह सिद्धांत रख रहे होंगे या कोई बात रख रहे होंगे जो कि वेल नोन है तो वहां पर अगर वह चीज वो बात किसी ने निंदा समझ ली तो वो दूर रहेगा बिल्कुल निंदा परख अर्थ अगर उसने लिया है तो वो दूर रहेगा और दूर रहना भी चाहिए मगर तुम व्यक्तिगत होते हो गंदी बातें करते हो अश्लील बातें करते हो हो फिर क्यों गूद में चिंगारियां लग रही है ये सब बातें करने लगते हो उन्हीं आचार्यों के लिए क्या कहते हैं गुरुओं के लिए ये अंतर है उसका कोई संदर्भ नहीं होता है जैसे मान लीजिए कि किसी का कोई ये सोचता है कि प्रभुपाद मेरा गुरु है कोई ये मानता है कि प्रभुपाद जो जो इसके संस्थापक है प्रभुपाद जी वो मेरा वो मेरे गुरु हैं तो वहां पर जो पूज्य गुरुदेव है

00:48:29:18 वो अगर यह कह रहे हैं कि भैया मैं प्रभुपाद उनको जानता हूं प्रभुपाद जी को या जिसने इस कन की संस्था संस्थापन किया था मैं उनको जानता हूं क्या क्या हुआ था मैं ये जानता हूं और यह जानते हुए वो कह रहे हैं कि उनके द्वारा जो बनाया गया तंत्र है वो गलत है सिद्धांत गलत है तो यह तो एक अलग बात है और वो यूं कहने लगे कि वो तो चोर है वो धूर्त है वो पाखंडी है इस रूप में गालियां देने लगे यह निंदा है य तो शा ये तो पक्ष रख रहे हैं वो अपना उसका सोर्स भी बता रहे हैं वो अब जिसको उन पर विश्वास है वो माने जिसको उन पर विश्वास नहीं नहीं माने नहीं मानेगा वो दूर रहेगा अगर वो कोई व्यक्ति अपने को प्रभुपाद जी का वो समझता होगा कि मैं उनका शिष्य हूं तो वो दूर रहेगा उनसे और रहते हैं दूर रहते भी है दूर ऐसा समझ के निंदा परक अर्थ निकाल कर मगर तुम क्या करते हो ऐसी बातें बोलते हो जिसके लिए तुम खुद ही खड़े नहीं होगे कि हां ये है ऐसा बोलो जो गालियां तुम देने की बात करते हो अपनी भागवत कथा में बैठ के दो गुरुदेव जो बात करते हैं वह सब जगह देंगे मैं जो बात करता हूं व सब जगह कहूंगा तुम जो बात

00:49:44:20 करते हो वह सब जगह नहीं करोगे वीडियो बनाते समय करो भागवत कथा में कहो अपनी माताओं बहनों के बीच में कहो जाकर के जो नहीं कहोगे पलट जाओ वहां पर मृद भासी बन जाओगे गाली तो नहीं दोगे कम से कम तो ये जो गाली देने का हुंकार भरते हो खत्म हो गया रामो रना भी भाषित तुम दो प्रकार के व्यक्तित्व लेकर चल रहे हो ना ये थोड़ी ना होता एक ही प्रकार का व्यक्तित्व होता वरना कम से कम खुद को आचार्य तो मत कहो कहे क्या आचार्य थू ऐसे आचार्य रोने पर

00:50:29:07 मां बहन की गालिया दोगे लोगों के और संत बने फिरो ग अब यहां पर फिर वही बात आ गई जब मैंने बताया कि भैया जो रामपाल के मामले में हम लोग धरातल पर जो कार्य किया था तुमने उसम फिर मैंने उसम अपना पक्ष भी बता दिया कि पहली बात तो यह है कि जो लोग मेरे साथ गए थे व आरएसएस से जुड़े हुए थे वोह स्वयं आरएसएस नहीं थे और मैंने कोई ऑफिशियल आरएसएस का साथ नहीं लिया था मेरे घर के आसपास हिंदू रहते हैं उनमें से कुछ आरएसएस से जुड़े हुए हैं कुछ विश्व हिंदू परिषद से जुड़े हुए हैं यदि मेरे आसपास मेरी मां की घरमा बंग हो रही होगी और मैं किसी का साथ लूंगा तो वहां

00:51:44:10 पहले पूछूंगा क्या तू आरएसएस से तो नहीं है वरना मत चल मेरे साथ और अगर आरएसएस से तो सुन करपाती जी ने उसका खंडन किया है पूज्य शंकराचार्य जी ने आरएसएस के सिद्धांतों का खंडन किया ये बोलूंगा तो तुमने मेरे इस पक्ष पर ध्यान नहीं दिया और फिर भाई तुम तो अपने गुरु के द्रोहियों से हाथ मिलाते हुए वो है अरे मेरे भाई तू कौन होता है डिसाइड करने वाला मैं किससे हाथ मिला रहा हूं कि नहीं मिला रहा हूं गुरु गुरु के विपरीत जाकर के ये तो गुरु तय करेंगे ना किसके विपरीत रहना है किसके विपरीत नहीं रहना है अभी तूने अपने वो पिताजी वाले वीडियो में कहा कि ना वो आयोजक थे ना वो वक्ता थे ना वो श्रोता थे फिर भी 500 किलोमीटर दूर से वो बातें छोक रहे हैं यही तो कहा था ना तने तो यहां पर क्या हो गया भूल गया क्या अपने तर्क मान ना मान मैं तेरा मेहमान तू होता कौन है बताने वाला कि गुरुदेव हमारे क्या शिक्षा दे रहे हैं क्या रणनीति बता रहे हैं उन्होने तो कहा है कि भैया कुछ मामलों में आरएसएस भी सीखने वाली बात है कि कोई संस्था कैसे चलाई जाती संगठन कैसे तैयार किया जाता है तो और तू खुद कह रहा है कि मैं मैं जब विदेश गमन के विदेश गमन व्यक्ति से जब मैं मिला मैंने उसका आतिथ्य स्वीकार

00:52:59:13 किया तो मैंने उसका विदेश गमन स्वीकार नहीं कर लिया तो यदि तू ऐसा कर सकता है कि एक ही व्यक्ति की दो अलग अलग चीजों में एक चीज के लिए अलग व्यवहार दूसरी चीज के लिए अलग व्यवहार तो मैं नहीं कर सकता वो भी तेरी कोई मजबूरी नहीं है तेरी कोई मजबूरी नहीं है अतिथ स्वीकार करने की भगवता आनंद मेरी तो मजबूरी है ना मेरी मां की गरिमा भं की जा रही है ना तेरी मां तो है नहीं वो नाटक करता है तू कामख्या में बैठ कर के दिखावे बाज

00:53:32:08 पाखंडी दोगला कहीं का दिखावा करता है इधर कामख्या उधर धवज इधर जने है मैं सौगंध खाक कह रहा हूं विधवा विलाप और जो मां की रक्षा में जाता है तो उसका विरोध करता है पाखंडी कहीं ना अपना पदार्थ लेकर वश में करने वाला और सुन उसमें एक सर्त रख लेंगे कि तूने मुझे पदार्थ खिलाया उसके बाद मैं वश में हो जाना चाहिए हूं अगर मैंने उसके बाद दो चार थप्पड़ लगा दिए तो मैं जीता और दो चार थप्पड़ नहीं लगाए तो तू जीता ठीक है पदार्थ खिला और फिर देख तमाशा और दो चार थप्पड़ के लिए कोई वो शिकायत इयत मत करना नहीं तो तू नाटक करता है कि वो मैं जो है कोर्ट जाता नहीं मगर चला भी जाता तो वो मत करना पदार्थ खिलाने के बाद यदि हाथ पैर पड़ जाए तो उसको उसमें ही पर्या अवसान उसमें लेना कि प्रतियोगिता का एक हिस्सा है ठीक है उसको वो मत मानना कि द्वेष वस मारा गया है पर पदार्थ मैं जब तुम्हारा खा लूंगा जो तुम बना के लाओगे तंत्रोक्त पदार्थ उसको मैं खाने के बाद तुमको पीटू अगर तो इस ये दिखाने के लिए पीटू कि मैं तुम्हारे वश में नहीं हूं समझ रहे हो आ ना यही

00:54:47:08 शर्त रखेंगे पदार्थ खिलाओ वश में हो गया नहीं पीटू बस में नहीं हुआ पीटू बढ़िया है ना तूने रुला दिया काशीनाथ तूने रुला दिया सात भाई थे सातों के साथ शेर से कोई कुछ नहीं कर पाया पर तूने रुला दिया हां भाई कब ला रहा है पदार्थ बता तो सही कम्युनिटी पोस्ट डाल जल्दी से डालता है ना तू बना गोल चूना मिला पिंट मिला कुछ मिला उसमें कुछ जहर वहर सब

00:55:32:15 मिला जहर नहीं नहीं तो फिर कुछ हो गया तो फिर बाद में तू कहेगा इसी ने कहा था जर वशीकरण वाला पदार्थ लेके आ वशीकरण वाला ठीक है क्या है वो हीलियम है क्या है वो कौन सा पदार्थ है प्रोटीन तो नहीं लाओगे वे प्रोटीन बस करने के लिए इसको बॉडी बनानी है तो प्रोटीन लेक चलता हूं तो बस में हो

00:56:24:27 जाएगा य फोटो जो तुमने यहां पर यह कह रहा है कि इसने किसी मातृ शक्ति को गाली दी है इसका बात इस बात का प्रमाण दिखाओ तो वो हमने जो हमें प्राप्त हुआ था इस रूप में कि इसने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से कितना अश्लीलता फैला रखी है इससे बात नहीं कर सकते सब भ्रांत परिवार के लोग इतना बड़ा गाली बाज है तो उसके बारे में कह रहा है कि प्रमाण दिखाओ तो वो हमारी पिछली लाइव है उसमें देख लेना प्रमाण दिखाए गए हैं रे फेसबुक के और

00:57:28:02 यहां पर तुम्हारी एक अच्छे श्रोता नहीं हो यह बात यहां पर आ रही है तुमने कहा जब मैंने यह कहा कि रामपाल हमारी मां को गाली दे रहा है है ना तो हमने ये कहा था कि भा रामपाल ने हमारी मां को गाली दी है जो हमारी मां को गाली देगा उसके साथ हम ऐसा ही करेंगे रामपाल के विषय में मैंने कहा था तो यह व्यक्ति इतना जल्दी सुनने और उस पर प्रतिक्रिया देने पर अमादा रहता है इसको भूख है इतनी जो वर्चस्व का चूर है उसकी इतनी चाटने की इसको भूख है कि यह जो है अपने चाटने के चक्कर में य भूल जाता है कि व्यक्ति सामने वाला कह क रहा है मैं कह रहा हूं कि रामपाल ने हमारी मां को गाली दी है तो यह कह रहा है कि मैंने अभी तक किसी की मा को कहां गाली दी भाई तो ये इसका प्रमाद है उसका क्या ही उत्तर दे चूर चाटने की भूक है

00:59:21:04 पहली बात तुम्हारा यह कहना है कि पूरी के शंकराचार्य जी ने अमुक अमुक बातों में त चर्चा के लिए चर्चा की थी क्या तो पहली बात है अगर चर्चा नहीं की थी तो उन्होंने कोई बहुत बड़ा केस जैसा भी नहीं चलाया कि यहां ये हो रहा है वहां वो हो रहा है दूसरी बात व्यक्तिगत चर्चा हुई है कि नहीं हुई है तुम्हें कैसे पता व्यक्तिगत चर्चा हुई है कि नहीं हुई है यह तुम्हे कैसे पता जब कोई चीज गुप्त ही है तो उसके बारे में तुम ये निर्णय कैसे दे सकते हो जब कोई चीज इस बारे में ही है कि वो होगी भी तो गुप्त रूप से तो इस बारे में तुम निर्णय कैसे दे सकते हो कि वो नहीं हुई और दूसरी बात कि व्यक्तिगत चर्चा के लिए सामने वाला खुद तुमको कह रहा है याद दिला रहा है स्थान दे रहा है कि भाई यह बात ऐसे नहीं ऐसे होनी चाहिए तुम्हारे ललकारे जाने पर तुमको याद दिला रहा है कि यह विषय पर ऐसी बात ना हो फिर तुम कहते हो कि तुम हो क्या पुरी मट की ओर से तुमसे क्यों की जाए तो क्यों आ रहे हो लालची कुत्तो की तरह तो तुम ही ने मुझे कहा था ना कि आ जाओ आ जाओ लाइव कर ले लाइव कर ले तुम्हारे अंदर लोकेश का लालच था ना किसने कहा था आ जाओ आज जाओ लाइव कर ले उनको अनुकूल लगे मुझे पता नहीं है क्या तुम्ह मसाला चाहिए था तुम्हें लगता था इसको हम खा जाएंगे

01:00:36:21 तुम्हें लगता था इसका शास्त्र का अध्ययन कमजोर है शास्त्र का अध्ययन भले ही तुमसे थोड़ा बहुत कम होगा और सिद्धांतों में आगे होंगा ये जो वस्तुनिष्ठ चीज तो मैं ज्यादा बताऊंगी र सिद्धांत मेरे पक्के होंगे ये मुझे मैं अब तक के अवलोकन से समझ चुका हूं तो मगर मेरे पास पीछे गुरु गोविंद ग्रंथ है और तुम्हारे पास पीछे जो है तुम्हारा स्वा अध्यन है बस कुछ नहीं तुम्हारा गुरु कोई है ही नहीं कोई है तुम्हारे ऊपर जिसको तुम कहते हो कि यह मेरे से ऊपर है इनकी बात मेरे लिए प्रमाण है मेरे पास तो है मेरे गुरु प्रमाण है मेरे लिए है कोई तुम्हारे पीछे कोई नहीं जब गुरु नहीं है तो ग्रंथ कहां से हुआ भाई होगा तो तीनों होंगे नहीं होंगे तो एक भी नहीं होगा जब गुरु नहीं है तो ग्रंथ कहां से हुआ जब ग्रंथ नहीं है तो गोविंद कहां से हुआ सब खत्म तुम्हारा समा जीयों का ईश्वर ईश्वर क्यों नहीं है गुरु परंपरा को नहीं मानते तो तुम जब स्वा अध्यन स्वघोषित आचार्य हो तो तुम्हारे पास गुरु कहां है कौन है तुम्हारे गुरु बताओ आओ परंपरा को लेकर पहली बात तो यह है कि लालच लोके शना का तुम्हारे अंदर था तुम्हें

01:01:52:00 ट हिट होना था तुम्हें प्रसिद्धि प्राप्त करनी थी इसलिए तुम ही तो ला लालचि की तरह आए थे लाल टपका हुए मैं आया था क्या तुम आए थे क्यारे साथ चर्चा कर लो क्यों तब याद नहीं था कि मैं पूरी मट की ओर से अधिकृत व्यक्ति नहीं हूं यानी कि मैंने तुम्हें अपने आप को ऐसा प्रस्तुत किया जिसके साथ तुम्हारे मन में चर्चा करने की भावना उत्पन्न की मैंने तुम्हें विवश किया उस भावना उस भावना को उत्पन्न किया तुम्हारे अंदर यानी कि मैं कुछ हूं भगवत कृपा से तब ऐसा हुआ

01:02:28:03 ठीक है ना तुम सिद्धांत में हो ना तुम युक्ति में हो तुम खाली श्लोकों को रट लियो इस मामले में हो यहां तक कि उनका उपयोग कहां करना है इसमें भी नहीं हो प्रसंग प्रसंग भी तुम्हारा ऐसे ही है तो तुम यह सोचना बंद कर दो कि जो है शिवांश को मैं खा जाऊं केवल उदारता के कारण आज जो ये समाजी और ये स्न वाले सब जो कर रहे हैं ना इसी सीन से डरता था क्योंकि मुझे चिंता धर्म की थी तुम्हे हो ना तो मैं अपनी उसकी प् उसकी चिंता है तभी तो क्रेडिट लेते घूमते हो तभी क्रेडिट लेते घूमते हो ना कि तुमने आवाज उठाई तो आज जगह जगह से आवाज उठ रही है तुमने नहीं उठाई भाई तुम जब मुन्ना गिरी कर रहे थे तब से आवाज उठा रहे हो तुम जब बाइपोलर में फसे हुए थे तब से आवाज उठा रहे हैं ठीक है उने नहीं आवाज उठाई तुम्हारे कारण कोई दो ढेले का वो नहीं हुआ प्रेरित हुआ होगा मैं नहीं हुआ मैं अपनी बात वो अपने लिए कह रहा हूं

01:04:20:21 अा उतर क्या क्या कर जब भी जब भी कभी हम यह बताते हैं कि इसने गुरु द्रोह किया तो यह सिद्ध करने का प्रयास करता है कि मैं तो जो है वह परिकर का विरोध कर रहा हूं वहां की अशा स्त्रता का विरोध कर रहा हूं मैं जो है पुरी के शंकराचार्य जी का विरोध नहीं कर रहा फिर जब उस

01:05:35:22 मामले में इससे भिड़ो ग तो य पुरी शंकराचार्य जी का विरोध करेगा मैं करपात्री जी का खंडन कर चुका हूं काक भुशुंडीर मायण के आधार पर है ना मैं जो है पूरी शंकराचार्य जी का विरोध कर चुका हूं चारों शंकराचार्य जो है पैसे लेकर चलते हैं शंकराचार्य के गूद में ये क्यों हो रहा है क्यों हो रहा है है ना और मैं जो है उनकी अ मानना नहीं कर रहा मैं जो है मठ में शोधन करना चाहता हूं मैं जो है पूरी पीठ को बचाना चाहता हूं झूठे दोगले बात को पलटना यह तो मैं अब मतलब थोड़ा सा मैं चीजों का अभ्यस्त हो गया हूं कि जो

01:06:20:15 अधार्वा कट टू कट नहीं होता है से आज मैं जान गया अभी तक मैं यही समझता था कि यार समाजी स्कोन वाले ही ऐसा करते हैं मगर मैं यह समझ गया कि जो भी व्यक्ति उसके विरुद्ध जाएगा सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म के विरुद्ध वह ऐसे ही करेगा तू भी शाश्वत धर्म के विरुद्ध है क्योंकि यह जो धर्म है ना कि मैं गाली देता हूं और इस तरीके की और बात है मनम कीी यह शाश्वता नहीं है य तूने अपने मन से इजाद की ठीक है

01:07:24:15 श बोल रहे स्वयं कमेंट कर रहे है तुमों पछ रहे हो हम तुम्ह बता रहे अव्यवस्था है ये है वो है तो उनसे भी बात करलो ऐसा क रहा है किसी लाइव में आ कर के कमेंट ऐ कहा अब इसका क्या ही करें इसका कहना है कि किसी ने हमारी लाइव में आकर के ऐसा कहा है जो आरोप य लगा रहा है वो किसी और ने भी लगाए उसका क्या ही करें भेजो उसको कौन है और तूने उनकी बातों पर विश्वास कैसे किया अब तो भाई किसी की बात पर विश्वास तब होगा ना जब तुझको कम से कम जब वो हाथ में वो लेकर के शाली राम भगवान का विग्रह लेकर के हाथ में जब वो शपथ खा लेगा सिद्धांत कमजोर है भाई तेरे इसम कह रहा है

01:08:19:08 े क रहे कुछ नहीं इसका कहना है कि तुम्हें निराकरण से कोई मतलब नहीं है तुम्हें केवल विजया श्री की उससे मतलब है पहली बात तो यह है कि निराकरण मुझे निराकरण से मतलब है कि नहीं यह सनातन सिद्धांत है यह श का वचन है कोई शिवांस द्विवेदी को निराकरण से मतलब नहीं है तो कैसे कह रहा है तेरा शब्द भी प्रमाण नहीं है चलो जगतगुरु शंकराचार्य जी गए तो प्रमाण मान लिए जाए और तेरे खुद के लोगों को तेरे शब्द में वो नहीं होगा क्योंकि तू बहुत जूठ बोल चुका है जब भी तू गाली देता है किसी को वह झूठ होता है गाली क्या होती है किसी के लिए कोई अश्लील फती कसना जिसका सच्चाई से कोई मतलब नहीं होता यही गाली है ना और तू खुद कह रहा है कि मैं गाली देता हूं तो असत्य भाषण करता है दिन दिन भर में जाने जाने कितनी बार गाली देते हुए तो जो असत्य भाषण तू करता है

01:09:34:08 उसके बाद तेरा शब्द प्रमाण कहां रहा तेरा भी शब्द प्रमाण नहीं है और झूठ तो तेरे पकड़े ही गए हैं शिवांश ने कभी मेरा जो है वो नहीं किया समर्थन हमने लाइव में दिखाया कि कहां हमने समर्थन किया 18 फरवरी को तेरी वो जो पोस्ट थी वो लाइक की थी जबकि तूने उसमें भी एक अपना वो जो गोटी है खेली थी उसमें भी तूने अपना दंब भरा था कि मेरे कारण ऐसा हो रहा है कि जगह जगह से आवाज उठ रही है उसमें भी बड़पन दिखाते हुए तेरी उस पोस्ट को लाइक किया था तू क्या सोचता है तू ही है क्या दुनिया में कोई बात नहीं जयकांत

01:10:19:09 सिकरे और दूसरी बात एक और है कि तुझे केवल मतलब है विजया श्री की सम्मान से वो पहले तूने इज्जत बोला फिर ठीक कर दिया कोई बात नहीं तो क्यों नहीं होना चाहिए भाई पहले तो सिर्फ अगर मतलब मुझे है तो य सिद्ध कर कि विजय श्री के सम्मान से ही मुझे मतलब है और फिर क्यों नहीं होना चाहिए उससे वह इंपॉर्टेंट क्यों नहीं है यह बता एट द एंड धर्म और धर्म का आधार क्या है तो अगर कोई हमारे घर की स्त्री है या हमारे सामने किसी स्त्री के साथ अन्याय हो रहा है तो तू चुप रह सकता है मैं नहीं भगवान ना करे तेरे घर की स्त्री के साथ कल को अगर कुछ होगा तो भगवता अंद तू चुप रहना पर मैं तो बोलूंगा मैं लड़ूंगा समझा

01:11:25:21 न बार बार और तीन बार कह रहा साढ़े तीन वर्ष हिंदू राष्ट्र वाली बात का जवाब हम दे चुके हैं आज पिछली जो लाइव हुई थी उसमें सबसे पहले उसको जाकर देख सकते हैं यहां पर भी ये जो हिंदू राष्ट्र पर उंगली उठाई है हिंदुओं की आस्था के साथ यह हुआ है वो हुआ है यहां पर भी ऐसे कई शब्द है जो अपमान जनक है आपत्ति जनक है और उनके बिला बिना भी तू अपनी बात रख सकता था मगर तूने नहीं रखा क्योंकि तू केवल तेरा कोई मतलब नहीं है कि तुझे ये करना है वो करना है तुझे तो पूरी पूरी पीठ का ही नहीं तुझे संप्रदायों का सभी सब सब परंपराओं का नाश करना है और मैं तो कह रहा हूं सबसे बड़ा अगर तू सबको मलेच्छ राज बता रहा है ना तो सबसे बड़ा मले राज तो तू ही दिखने

01:12:23:00 लगा यह सब करके ऐसा ही दिखाई देता है तेरे आचरण से तो यही लगने लगा है मलेच्छ राज का जीता जागता स्वरूप तही हां उतना पावरफुल नहीं है क्योंकि मुझे लगता है कि मले राज ऐसा तो कम से कम होगा जो शिवांश नारायण द्विवेदी के सामर्थ से बाहर हो कम से कम भाई उसम बड़े आचार्यों की आवश्यकता पड़े पर तू तो टट पंजियन है तू तो मेरे जैसे एक वो क्या कहते हैं नगन व्यक्ति के द्वारा भी मा खा रहा है और खाएगा ज्यादा अगर बीच में पड़ा तो खाएगा ठीक

01:13:02:21 है ब इसके पर क उनके बण म क्या पहली बात तो यह है कि बारबार जब भी इससे कुछ पूछा जाता है जैसे हमने कहा कि भाई किसी के निजी विषय को लेकर हम सार्वजनिक मंच पर चर्चा नहीं करना चाहते तो इसका कहना है कि क्या अभ मुक्तेश्वर जी का मामला निजी नहीं था था तो किसने किया वीडियो कैमरे के सामने य सब विवेचना किसने की उसका कौन था क्या था बस ये कह दिया गया कि हमने शंकराचार्य नहीं मानते पूरी पूरी शंकराचार्य जी के द्वारा किसने की विवेचना भाई वोह इस तरीके से जो वक्तव्य देना वो तो तू भी दे चुका है कि मेरे पास पुरी मट के लोगों के लिए जो है मेरे पास वो है स्क्रीन रिकॉर्डिंग अब

01:14:17:22 तो विवेचना होनी है ना एक एक सीन की एक एक अंग की ऐसे कहां कौन कैमरा विवेचना करता पुरी मट ने ज्योति मट के अक्त सरस्वती जी के लिए कहां की कहां कर रोड़ा रोज भानुमति का कुनबा जोड़ा इसीलिए तो तू सामने होता ना तब तुझे पता चलता यह विषय अतर ना करने देता मुझे और इसके आगे कहता है कि अभी जो ये थ लाइव है इसके बाद इसने और थ लाइव के बादला तो आपका जो बड़ा है दो भाग में जो ब

01:15:19:00 हैके बाका उस व के बारे में कह रहा है न लाइव होने के बाद मब चौथा पाचवा छ इसके बाद हम केपर या जो भी लाइ बना उस न य को पट नहीं है और इसके आगे कहता है बो इन सब चीजों के बारे च नहीं य कोई पॉट नहीं

01:15:56:28 मालूम हम इस हरा छ हो जाने के बाद दूसरा भी दोने ता हैके बाद आपका हमारा आया तो उस के बारे में कह रहा है न लाइने के बाद मतलब चौथा पाचवा छ इसके बाद हम आ केपर या अति जो भी लाइ बना उस न य कोई पॉट नहीं है मालूम होना चाहिए उसने ऐसा कहा अभी हम इसरा इसने अपने लाइव में एक बात और कह दी है कि अब मैं जो भी लाइव करूंगा इसको उत्तर देने के लिए तो उस पर अब वो ध्यान नहीं देगा तो ध्यान रहे कि अगर वो अब अब यहां से पिछले वाले से आगे जो अगर वह बनाता है तो वह जो है अपनी बात का अपनी बात के विरोध में जाते हुए वह सब करेगा कता है अभी जोका थड लाइ है इसके बाद इसने

01:16:58:24 आपका ब दो भाग में है अब इसका एक तर्क आया है कि यदि जो पुरी मट के जो परिकर है वो निर्दोष है तो एक दूसरे से पूर्णतया अपरिचित व्यक्ति एक बात क्यों कह रहे हैं तो भाई वो तू देख रहा है ना वो तू देख रहा है और तेरी वाणी हमारे लिए प्रमाण नहीं है

01:17:56:27 तू तो हाथ में तू ऐसा व्यक्ति है जो प्रत्येक शुक्रवार को अपना इलाज कराता है तो तेरे हाथ में तो वह शज गराम भगवान भी ठीक नहीं लगेंगे और तू अगर उनको हाथ में लेकर के कह भी देगा मैं सच बोल रहा हूं कि मुझसे अलग अलग व्यक्तियों ने कहा यही तो दिक्कत है ना सोचना नहीं है रट्टू तोते हो तुम केवल उसके अर्थ में जाने का गुर्दा नहीं है तुम्हारे अंदर क्यों तुम यह कह रहे हो कि तुमसे अलग-अलग लोगों ने कहा है हम कैसे मान ले तुमसे कहा है तुमको भगा दिया गया था मट से अधिकार छीन लिए गए थे तुमसे इसलिए तुम बड़बड़ा हुए हो यह क्यों ना माने तुम गाली बाज हो रोज 100 झूठ बोलते हो तुम्हारे मुंह से य कैसे मान ले कि तुमसे बहुत सारे अलग अलग लोगों ने कहा है भाई कोई व्यक्ति ऐसा ऐसी गरिमा रखता होगा जिस जिसकी बात को हम प्रमाण मान सके माना जाएगा तुम हो कौन गली के टचे हो तुम और मेरे तो छोटू हो

01:19:19:04 मुन्ना व केवल मुला कान करवा सती है में अब यहां अभद्र टिप्पणी कर रहा है तो ठीक है क्या करें उसका विजया के साथ जोड़ कर के बोल रहा है इसका ज्ञान करा सकती है उसका ज्ञान करा सकती है उससे आगे का जो ज्ञान है वो हम करवाएंगे जब आपने कहा कि हमें पता है तुम इतने ये क हो तुम्हारी सब क च तो उसके ऊपर य कहता है क्या वही र यह कहां का सिद्धांत है यह कहां का सिद्धांत है कि जो धातु तुम्हारे शरीर से निकली है वही धातु मेरे शरीर में घुग तो वजन बढ़ेगा धातु के निकलने से वजन कम होता है यह सिद्धांत है विज्ञान का भी और संभवत आयुर्वेद इत्यादि का भी मगर धातु के बढ़ने से वजन बढ़ेगा वजन बढ़ेगा ही सामान्य व्यक्ति का भी बढ़ जाएगा यह कहीं का सिद्धांत नहीं

01:20:26:22 साइंस का तो नहीं है आयुर्वेद का मुझे पता नहीं है कि एक्स्ट्रा हो जाएगा धातु अगर आ जाएगी ज्यादा धातु अगर ज्यादा आ जाएगी तो एक्स्ट्रा हो जाएगा और इतनी फिक्र है तो मिल लो धातु का पता चल जाएगा किसमें कितनी है वो पदार्थ लेके मिलो पदार्थ है ना वो तंत्रोक्त वाला वो तुम नाक जैसा कुछ लेके डंडा टहलते हो ना कुछ कुछ टहलते हो ना हाथ में क्या है वो दंड है हां सांप जैसा वो उसको लेकर मिलो तो प्रतियोगिता ये वाली रख लेना कि अगर मैं जो है तुम्हारे वश में हो गया अगर तुमने मुझे वो पिलाया पदार्थ और मैं तुम्हारे वश में हो गया तो तुम्हे कुछ नहीं कर पाऊंगा वरना तुम्हारा वही डंडा लेकर के देश रेलम पेल दे रेलम पेल देश सुताई देश सुताई कर दूंगा पर उसकी कहीं शिकायत मत करना क्योंकि वो प्रतियोगिता का एक हिस्सा होगा ठीक है व अपना सांप ले आना साथ में डंडे वाला जो लेकर आजकल टहल रहे हो सांप जैसा ही है ना वो स सर्प दंड क्या है वो सर्प वाला स्पेशल लगता है अभी कौन सा लेकर टल लो पता नहीं है पर वही वाला ले आना तो बढ़िया रहेगा प्रतियोगिता में य तुम्हारा पदार्थ जो है

01:21:41:24 वशीकरण वाला मेरे ऊपर काम कर गया तो ठीक है बढ़िया बात है तुम तुम पीट लेना तुम पीट लेना तुम्हारी इच्छा निकल जाएगी तुम पीट लेना और अगर मैं बस में नहीं हुआ भगवता अंद तो कम से कम 15 20 मिनट की मुझे छूट देना कि मैं सुताई कर सकू री ठीक है मेरे अंदर वजन क्यों आया यह तो तुम ही मान चुके हो लो अब चलो इसी में पकड़ ले लेते तुमको तुम्हारा कहना है कि भाई तुम्हारे अंदर से धातु क्षीण हुई तो मेरा जो मेरा वजन ज्यादा है तो क्या वो तो मेरे अंदर आ गया पर तुमने ही तो मूर्ख अपने ही वीडियो में कहा है कि मैंने जो है प्रोटीन पाउडर खा कर के बॉडी बनाइए मजाक में भी दोगलापन और मजाक में भी पकडा मैं तर्क से है ना तुम मजाक में भी झूठ मक्कारी करोगे विनोद में टोंट में तंज में

01:22:57:16 और मैं उसमें भी तर्क से तुम्हें पकड़ लूंगा तो तुमने ही अपने वीडियो में कहा ना कि तुम य मानते हो कि प्रोटीन पाउडर से बॉडी बनी है प्रोटीन पाउडर उसका कारण है वे प्रोटीन पाउडर उसका कारण है तो फिर क्यों अब अपनी कथनी को झुठला रहे हो क्योंकि तुम हो ही झूठे तुम्हें मिला ही दोगलापन है तुम्ह सिखाने वाले लोग ही दोगले हैं जो पहले कुछ कह देंगे फिर उसके पलट जाएंगे ऐसे ही लोगों ने तुम्हें तैयार किया होगा सांप देकर के हाथ में सर्व दंड है ले आना इंदौर में मिल लेना इंदौर में इंदौर में मिल लेंगे लखनऊ आ जाना या कहीं मिल लेंगे खिलाओ अपना वशीकरण वाला फिर देखो

01:23:49:14 तमाशा थोड़ा उसको लचीला करके लाना खाल खाल हमारी हड्डी हड्डी तुम्हारी ठीक है मतलब वो जो अपना डंडा है ना सांप जैसा उसको थोड़ा फ्लेक्सिबल करके लाना फ्लेक्सिबल मतलब वो ऐसा ना हो हड्डी तोड़ दे पड़े तो खाल पही खाल पही असर हो अंदर ना हो हड्डी ना टूट जाए कहीं चपाक यह चीज हो होस ना पड़ जाए कहीं हड्डी बड्डी टूट जाए ऐसा लाना ठीक है खाल खाल हमारी हड्डी हड्डी तुम्हारी

01:24:28:20 बचपन में हम जिस एक स्कूल में थे वहां के जो अध्यापक गण थे वह ऐसे ही बोलते थे बच्चा बहुत कोई शरारत कर रहा है उसके माता पिता आए तो बोले कि अरे उसको बोले वो कि तुम्हारा जो बेटा है बहुत शरारत करता है तो उसके माता-पिता ग्रामीण उससे थे पर्यावरण से तोव बोले मास्टर साहब खाल खाल तुम्हारी हड्डी हड्डी हमारी हड्डी छोड़ देना बस हड्डी ना टूटे खूब मारना खाल पूरी उध लेना बस हड्डी ना

01:25:21:24 टूटे व खुद के ब ये सब चर्चा हो जाने के बाद परि चलते गम पानी प बात बता रहा था तो ये आपको बताने का उद्देश्य इतना है कि कभी कभी वो क रहा था कभी कभी कुछ व्यक्ति बहुत खा नहीं लेते बहुत बड़े दिखते है और खेतो में काम करने वाले मजूर होते हैं कम ये बात सही है कि कई बार बिना वजह के कोई व्यक्ति दुबला दिखता है और कोई कोई व्यक्ति तगड़ा दिखता है बिना वजह के उसके जेनेटिक्स ऐसे होते हैं परंतु यदि उसके साथ में एक खबर जुड़ जाए कि उसकी धातु छी हो रही है प्रत्येक शुक्रवार वाली बात अगर यदि जुड़ जाए तो फिर इसको भी एक घटक माना जाता है कि ऐसा भी हो सकता है कि उसका वजन इस कारण से रुका हुआ है ठीक है और इसमें एक य भी बात जांच का जांच का विषय है कि वो

01:26:24:10 बढ़ाने का प्रयत्न किए जाने पर वजन बढ़ रहा है कि नहीं धातु जहां छड़ हो जाती है वहां बढ़ाने का प्रयत्न जब करते हैं सामान्य तो उसमें वजन नहीं बढ़ता है इसके सामने

01:27:32:20 अच्छा यानी कि जो जो सचिव जी के सामने इसका कहना है इसका कहना है मुझसे कि अगर मैं ठोस प्रमाण लाकर तुम्हें दे भी दूंगा तो तुम क्या खड़े रह पाओ खड़े हो पाओगे जो पूज पूरी शंकराचार्य जी के जो सचिव है उनके आगे स्वामी जी के आगे इसका कहना है तुम्हारी औकात नहीं है तुम्हारी क्या आचार्य श्री का नाम भी लिया यहां पर आचार्य श्री की भी वो नहीं है सामर्थ्य इसका मतलब है कि जो उनके सामने खड़ा नहीं हो पाता है वह औकात से हीन इंसान है तुम्हारे अनुसार है ना तो इसका मतलब तुम्हारी भी औकात नहीं है क तुम भी तो खड़े नहीं हो पा रहे हो तो तुम्हारी भी औकात नहीं है और यह बात सत्य है औकात नहीं है तुम्हारी उनके सामने खड़े होने की है क्या पतलून गीली हो जाती होगी जिस दिन भगाया गया

01:28:39:20 होगा इसके क र है गु क्यों सब गुरु भाइयों को एकत्रित करके खड़ा हो क्यों उसका कारण क्या है मुझे बिलीव तो हो कि तुम जो कह रहे हो लांछन लगा रहे हो वो सत्य है कि तुम ने आका बनने का ठेका ले लिया है सारी दुनिया का इनका कहना है कि भैया तुम जो है तुम अगर इतने बड़े गुरु भक्त हो तो सब गुरु भाइयों को लेकर के खड़े हो जाओ अपने गुरु के सामने तो क्यों हो जाए भाई पहले ऐसा कुछ हो तो हमें तो लग रहा है ठीक है सब और हमें क्या करना है तुम क्यों बता रहे हो तुमको नहीं जाने दिया जा रहा था ना गुरुदेव के पास तुम क्यों नहीं जा रहे हो 10 20 लोग नहीं तुम्हारे पास क्यों नहीं जा रहे हो

01:29:55:13 तुम हां तुमने बताया था तुम्हारे पास हथियार नहीं इसलिए तुम जबान चलाते हो वो पागल हो जाती ना औरत सड़क पर व भी यही करती है उनके पास हथियार नहीं होता है वो भी जवान चलाती है देखा है ना सब मर गए तू भी मरेगा ऐसे करा करती ना महिला सड़क पर कभी कभी मिल जाती होगी वही तुम हो ना जिसके पास सामर्थ्य नहीं होता मुंह चलाता है चलाओ हमने तो अपनी ही स कर दिया तुम्हारे अंदर औकात नहीं है कोई तंत पानी थोड़ी ना इन सब बातो में जो कर रहे हो तकन बात

01:30:54:25 दिसंबर तक क्यों पहले ही आ जाओ ना पहले आ जाओ अपना पदार्थ लेने सामने तोसे करया तो इससे आ

01:31:34:20 करया कहीं कहीं पर जहा इसके पास उत्तर नहीं होता वहा य क्या करता है भगतान कहता हैरे इस पर क्या ही कहे अभी तो फालतू की बात है विषय से हटके है कुछ भी अरे मैं क कह रहा हूं सामने ना आए मैं तो यह कह रहा हूं तू विजय श्री से चालू किया है मैंने वीडियो मैंने तुझे जो जवाब दिया था विजया स से दिया था विजया स पर बात कर फिर परिक पर बात कर और फिर मैं तेरी परंपरा पूछूंगा उससे और हां वो अपना वो सार्वजनिक कर जो तूने वो किया है ना व तेरा दावा है ना तूने करपात्री जी महाराज का खंडन किया है वो पीडीएफ वगैरह जरा कम्युनिटी पोस्ट पर डाल अपनी यह है मेरा खंडन फिर देखें में क्या है क्या नहीं है कितनी दम है उन पर भी बात करेंगे फिर उसके बाद वैसे मेरा यह उद्देश्य था नहीं कि तुझसे इस रूप में आकर के मैं ये सब बातें करूं मगर ठीक है तुझे यही पसंद है तो यही सही वोह पदार्थ खिलाते समय जो दंड लेकर आना वह थोड़ा लचीला लाना कामा का हड्डी तोड़ने का आरोप लग

01:32:49:20 जाए मेरे ऊपर चल रहा है और यदि ना भी आगे लोगों को दिवा दो और इससे बीच में सब निकल और आगे उसने कहा भी है एक घंटे का वीडियो बचा उसने कहा भी है मैंने बोलिया तो प्रोजेक्ट किया गया विय वा वो सामने पहले तो ऐसे दिखा दो लोगों को और मेरा चल रहा है इसमें भी आप जो से कह रहे हो हम साथ आ सकते थे हो सकते थेवा आशय है उसको ना समझते क रहा हम तुम्ह और हम साथ आना नहीं

01:33:32:06 चाहिए य रे साथ जा यहां पर य कह रहा है कि हमें और तुम्हे मैं यह कह रहा हूं कि भाई मनोवा दियों को हम लोगों को साथ आना चाहिए था तो कह रहा है कि भाई हमें और तुम्हें साथ आने की आना भी नहीं चाहिए क्योंकि तुम सिंडिकेट हो और हम एक परंपरा के आचार्य और वो कौन सी परंपरा है वो परंपरा अभी मैं ढूंढ रहा हूं फिर मैं लिखूंगा वो परंपरा तब पता चलेगी बेवकूफ तू ही तो कई जगह पर आशय प्रकट कर चुका है कि हम तेरे हम तेरा समर्थन क्यों नहीं कर रहे तूने वहा फेसबुक पर भी लिखा कि शिवांश नारायण द्विवेदी मेरा मेरा मेरे लिए कभी नहीं बोलेगा भले ही हम उसके लिए कितना भी बोल दे तू तो इसका भूखा है लोकेश ना का तू तो भूखा था थोड़े दिन पहले लाड़ टपका ता फिर रहा था आज जब युद्ध की स्थिति आई तो हमें साथ में नहीं आना चाहिए यहां तक कि लाइव का प्रस्ताव भी तूने रखा चटोरे लोकेश ना के लोकेश णा का चूर चाटना है ना तुझे रोज सुबह

01:34:44:15 उठके औरता हैगा ये मैंने आपको भे हम परक का विषय कहां नहीं आने दे रहे भाई हम तो कह रहे हैं ना आजा लाइव परिक वाले पर बात होगी विजय श्री पर बात होगी आजा लाइव यही तो यही तो है मूल कारण आजा लाइव कब आ रहा है बता

01:35:47:03 हो यह बता तू एक काम कर तुझे ऐसा लगता है ना कि विजय श्री के लिए मैं विजय के नाम पर मैं विषय डायवर्ट कर रहा हूं परक को छोड़ कर के पहली बात तो ऐसा है नहीं पर तू एक काम कर तू अपनी सारी बातें वापस ले ले क्षमा मांग ले चल केवल पररो पर ही बात करेंगे विजय श्री पर नहीं करेंगे बना वीडियो विजय श्री के लिए जो भी मैंने कहा उसका मुझे दुख है एक आचार्य होते हुए मैंने य सब बातें कही मैं निर्लज हूं या जो भी तुझे लगता है और अपनी बातों को गलत बोल मैंने गलती की यह बोल के ऐसा ऐसा मु कम का आरोप लगा के जिनका आधार मेरे पास नहीं था यह बोल दे फिर केवल परग पर बात करेंगे मैं तो केवल विजया श्र की बात नहीं कर रहा हूं मगर तू ऐसा जनता को दिखा रहा है कि मैं तू केवल परग पर बात कर रहा है क्यों क्योंकि तुझे लगता है तू परिक वाले में जीत जाएगा मगर भगवता अंद मैं वहां भी तुझे पटकूंगा मैं उस मैटर में भी तुझे पटकूंगा वाणी वो वक्तव्य के द्वारा उठा के नहीं पटकूंगा वो उठा पटकने का सीन अलग है वो तब है जब वो अपनी प्रतियोगिता होगी ना वो पदार्थ वाली उसमें ऐसा रख लेंगे कोई

01:37:02:19 मैं तेरा अनुग हुआ कि नहीं अनगतला तू मुझे पटक लेना पीट लेना मेरे को तो होश होगा ही नहीं तू गगा मार का मार काऊंगा अनगतला और अगर अनगतला मैं बच गया उसके बाद क्या होगा वही कि बाप बन के बेटी को विदा कर दो वरना आज अगर य जट बिगड़ गया तो सैकड़ों कोले मरेगा वही होगा

01:38:06:18 पर य क्या क पले मल स पने र तुमने केवल सार्वजनिक चीजों को नहीं रखा था तुमने मैंने बताया ना दो चीजें तुमने अलग की थी दो चीजें अलग की थी तुम्हारा कहना है कि हमने उन्हीं चीजों को रखा जो सार्वजनिक थी नहीं तुमने फ्री मशस का नाम लिया और तुमने पूरी पूरी पीठ के मंच पर विजया शी के बैठे होने का दावा करते हुए किसी अनत महिला को दिखाकर उससे विजया श्री को जोड़ दिया यह तुमने गलत किया अलग किया दूसरी बात जो इा पर चल रही थी उसमें से और भी कई पहली बात तो ज्यादातर लोग ऐसे थे जिनका ना शक्ल थी ना सूरत थी सब आप पमाण लोग थे और तुमने वहां पर अपना चेहरा दिखाया तुमको लोग जानते हैं तुम कौन हो तब तुमने वह बातें बोली वो लोग अनाधिकृत लोग कौन है क्या है हो सकता है कोई मुस्लिम ही हो हो सकता है कोई आर्य समाजी हो हो सकता है कोई क्रिश्चियन हो हो सकता है कोई क्या कहते स्कन वाला हो

01:39:21:25 ऐसे लोगों के द्वारा कैंपेन चल बातें उठ रही थी और तुमने नई बातें की तो वो वीडियो बना था तो उस वीडियो के उसमें तुम्हारा वो था और बात यहां यह नहीं हो रही है तुम जिस प्रश्न के जवाब में अपनी बात बोल रहे हो इसको कहते हैं विषयात बात यह हो रही है कि हमने तुम्हारे विरोध में वीडियो बनाया था कि नहीं बनाया था तो हम वहां कह रहे हैं कि हमने उस संबंध में वीडियो बनाया था जिसमें ्र पर पहले से बातें चल रही थी ठीक है तो तुमको यहां यह सिद्ध हमने तुम्हारे लिए ही व चार घंटे की लाइव की थी तुमने क्या किया तुरंत उस विषय को छोड़ दिया चार घंटे की लाइ तुम्हारे लिए हुई थी नहीं हुई थी इसका मतलब हमने वही बातें की जो पहले से सार्वजनिक यह है

01:40:22:09 विषयात कि को भी आगे क्या होगा इसका आगे क्या होगा किसी को भी पूर्वानुमान नहीं है तुम तो कह रहे हो पूर्वा पूर्वानुमान है तुम्हें यह होगा पूरी पीठ में वो होगा पूरी पीठ में य सब बातें कौन कह रहा है तुम बक रहे हो य इनका यह कहना है कि हमने जो वो वाली बात की थी कि तुम्हारे व मंच में नाचे थे लोग जिस पर तुमने जो है लोगों की डांट लगाई थी इसका कहना है कि पहली बात तो हम वो आरोप के रूप में नहीं प्रस्तुत कर रहे मगर फिर भी अगर तुमने उसको आरोग के रूप में लिया भी है तो तुम वहां पर ये कह रहे हो कोई भी होगा उसको पूर्वानुमान नहीं हो सकता है अरे भाई तो फिर तुम ही तो दिन और रात ये कर रहे हो यहां ये होगा व वो होगा दम भर रहे हो भविष्य वक्ता बन रहे हो तुम ही तो दिन और रात कर रहे हो ये सब

01:41:46:22 अगर यह दिखाने के लिए इसका कहना है कि हमने मले राज का शब्द का उपयोग किया इसका कहना है कि हमने अगर मलीच राज शब्द का उपयोग किया तो यह दिखाने के लिए क्या किय संघर्ष मेरे और तुम्हारे बीच है तो ऐसा नहीं है और अगर संघर्ष ही दिखाना होता तो फिर मैं फोटो ही क्यों ना दिखाता मुझे केवल तुम्हारी उस बात का प्रतिकार करना था जो तुमने विजया श्री के बारे में मिथ्या जनक बातें कही थी दुष्प्रचार किया था तुम्हारे तुमने जो उस वीडियो में तुमने वो पीडीएफ पढ़ी थी उस पीडीएफ में बहुत सी बातों को मैंने बिल्कुल वर्ड कट टू कट नहीं लिया था हां मैंने परिकर के बारे में एक बात जरूर कह दी थी मैं अकाट्य प्रमाण दो क्योंकि मैं मैं जो चीज तु उसके बाद में जो अपनी लाइव में दिखाई है वीडियो में दिखाया है वह चीजें मैं पहले से जानता हूं देख चुका हूं मगर हमें अगर कहीं पर युद्ध स्तर पर उतरना है तो हमें ठोस चीजें चाहिए होंगी जैसे आज की वो जो कॉल रिकॉर्डिंग डाली गई है उसके आधार पर इस बात की लड़ाई नहीं की जा सकती कि नहीं भगतान जो है प्यार में पड़ा नहीं नहीं भगवता अंद जो है व हस्तमैथुन का इलाज कराने जाता ही जाता है लड़ाई के लिए नहीं उतरा जाता कहने सुनने

01:43:01:22 की बातें जिसको उसको सुनके बिलीव हो जाए बिलीव हो जाए नहीं हो नहीं हो ठीक है देख लेना रामपाल के द्वारा जाकर के रामपाल के लोगों के द्वारा रामपाल की आवाज का रोज एआई से ऑडियो निकाला जाता है यह सब बातें थी मेरे ख्याल से जो इनकी जो दो लाइव में जो रात में दो वो हुई थी लाइव उनका ये एंड हो गया है बातों का और हो सकता है कि अभी मैं दोबारा से जुडू या फिर सुबह जुडू क्योंकि मुझे चैप्टर बंद जल्दी पूरा बंद करना है य जो इसने लाइव में जो वेगला है उसको तो य तो एक अलग बात है मगर तीन चीजें मैं तुमसे कहूंगा पहली तुमने जो बौद्ध का और बौद्ध वाले प्रकरण में और शबरी वाले प्रकरण में तुमने जो वो है ना जिसको तुम सो कॉल्ड खंडन कहते हो उसको सार्वजनिक करो सुलभ करो लोगों के लिए सुलभ तो तुम अपने कम्युनिटी पोस्ट में उसको ड्राइव पर डाल के उसका लिंक उपलब्ध

01:44:16:28 कराओ ठीक है पहला और बौद्ध का थोड़ा बहुत है भी मुझे लगता है वेबसाइट पर है तो अगर तुम्हें लगता है कि वहां पर कंप्लीट नहीं है फिर भी कंप्लीट हो भी फिर भी एक पीडीएफ के रूप में उपलब्ध कराओ जिससे कि लोग उस पर विवेचना अपनी अपनी कर सके कि तुम कहते क्या हो है ना तुमने कपाती जी का वो किया ना खंडन देखे भैया कौन आ गया माइका लाल करपाती जी का खंडन करता है और दो पहली बात तोय हो गई य उपलब्ध कराओ सार्वजनिक करो इसको दूसरी बात ये हो गई कि यदि माता जी ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है और तुमको लगता है कि तुम्हारे अंदर सामर्थ्य है तुम्हारे पास ज्यादा सिद्धियां है पूरी मट के परक से ज्यादा क्योंकि तुम्हारे अनुसार वो एक वशीकरण कर लेने वशी वश में कर लेने वाला पदार्थ बनाना जानते हैं यदि तुमको लगता है कि तुम्हारे पास उनसे ज्यादा सिद्धियां हैं और तुम्हारे पास ज्यादा यह सब विधियां है विद्या हैं तो अगर वशीकरण वाला मन ऐसा कोई पदार्थ बना सकते हो जिसको खिलाकर तुम मुझ जैसे साधारण व्यक्ति

01:45:32:02 को वश में कर सको तो बनाओ और मुझे खिला के दुनिया को वश में करके दिखा दो ठीक है और वह प्रतियोगिता कैसे होगी व तो मैंने तुम्हे बता ही दिया है और कोई उसका रूप भी हो सकता है यह मेरा सुझाव है तुम्हे अगर वो पिटाई वाला पार्ट हटाना है तो तुम दूसरा कुछ दे देना दूसरी कोई अपना ली जाएगी और तीसरा कि कब तक ये सब खींचा तानी चलती रहेगी आ जाओ सामना कर लो सीधे-सीधे लाइव प जुड़ जाओ तुमने कहा था ना मैं लाइव पे आना चाहता हूं आ जाओ तो इस मैसेज के साथ इस लाइव को हम ऑफ कर रहे हैं अभी और हो सकता है कि हम दोबारा ऑन करें क्योंकि हमको ये चीजें पूरी करनी है जल्दी-जल्दी तब तक के लिए जय श्री राम और हो सकता है सुबह भी करें तो कुछ कह नहीं सकते जो भी करेंगे अभी 15 20 मिनट में आधे घंटे में यहां पर अपडेट आ जाएगा य चैनल पर जय श्री राम सभी को

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 1:46:33 · 03 Apr 2025

लुप्त संप्रदाय और गुप्त आचार्य का सच part-2

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