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00:00:02:19 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल मंगल होंगे और आज एकादशी भी है। एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं सभी को। एक वीडियो आ गया है भगवतानंद जी के द्वारा। अ हमारे संबंध में बना। उन्होंने कुछ वक्तव्य दिए हैं। तो सबसे पहले जो लोग नहीं जानते हैं वो पिछला वीडियो देख आए और मैं कहूंगा कि उनका वीडियो देख लें। हमारा वीडियो देख लें। तो जो लोग नहीं जानते हैं तो क्योंकि पीछे से हर बार पूरा बताने में थोड़ा समस्या

00:00:48:20 है। तो सबसे पहले तो मैं यह कहूंगा भगवतानंद जी को उन्होंने कहा है अपने वीडियो में जो भी कुछ कहा है उसके लिए मैं यह कहूंगा कि आपके लिए हमने वह लाइव किया ही नहीं था और हम नहीं चाहते थे इस तरह से आपके बारे में हम वीडियो बनाएं या आप हमारे बारे में वीडियो बनाएं उसके कई कारण है कुछ रणनीति है जो हो सकती है जो कभी शायद हमारी आपसे बात हो पाती तो हम बता पाते और शायद आप भी उससे सहमत होते पर वह संभव नहीं हुआ और इस तरह से आपके साथ आना पड़ रहा है। तो ऐसा बिल्कुल भी हमारा मन नहीं था और इसीलिए वीडियो बनाते समय हमने आपकी पहचान को जितना हो सका छुपा कर रखा और जिससे कि वही लोग उस चीज को जान सके जो लोग आपको पहले से जानते हैं। कोई भी अन्य तीसरा पक्ष इस विवाद का उपयोग ना कर सके। हम नहीं चाहते थे कि कोई इस विवाद का उपयोग कर सके।

00:01:56:03 और क्योंकि कहीं ना कहीं हमें ऐसा लगता है कि एक ही पथ पर चल रहे हैं। हो सकता है थोड़ा सा वैचारिक मतभेद है जिसके कारण कुछ चीजें हैं जो कभी ना कभी लगता था कि सॉर्ट आउट हो जाएंगी बात करके और पर अब जब मैदान में उतर ही आए हैं और आप माने नहीं आपका नाम भी नहीं लिया आपका चित्र भी नहीं लिखा है मगर आपने आपको शायद नहीं लगा ठीक अच्छा दूसरी एक बात है कि उसमें हमने जो प्रमाण भी मांगे हैं जिस पर हम आगे बात करेंगे जो आपने दिए हैं वो प्रमाण भी हमने हमने उन लोगों से मांगे हैं जिन लोगों ने आपको पीडीएफ दी है। हमने आपको कहीं भी नहीं ललकारा कि भाई वो प्रमाण दो। आपको शायद ऐसा लग गया होगा क्योंकि बहुत सारी बहुत लंबी चर्चा थी तो उसमें ऐसा आपको लग गया हो शायद। मगर हमने आपको कहीं भी ऐसा नहीं कोई ललकार इत्यादि ऐसी बोली कि मतलब आप ये लाकर दो तो आप पर विश्वास करेंगे। ये वो सब वो शायद आपने अपने ऊपर ले लिया। खैर अब जब ले ही लिया है और चालू चालू हो ही गया है तो गुरुदेव ने ही सिखाया है और हम सब उनहीं के शिष्य हैं कि जो उदारता आपके अस्तित्व और आदर्श को नष्ट करने

00:03:11:10 के लिए बाध्य करे उदारता नहीं कायरता होती है। तो बस इसी संबंध में अभी वीडियो हमें बनाना पड़ रहा है। इसको कहीं भी व्यक्तिगत रूप से ना लेकर के सैद्धांतिक और एक अपनेप धर्म की रक्षा के लिए लड़ाई आप समझे। अपने धर्म की रक्षा के लिए कही जाने वाली बात है। सबसे पहला पॉइंट है आपका जो आपने बोला है जो मुझे याद है क्योंकि मैं अच्छे तरीके से नहीं देख पाया हूं वीडियो अभी भी। तो मुझे जो याद है उस पर मैं बात करूंगा। शायद कुछ छूट जाए तो आगे बताया ही जाएगा क्योंकि आप तो रुकने वाले हैं नहीं आप बनाएंगे। ठीक है कोई बात नहीं। तो सबसे पहला पॉइंट है आपका कि भाई किसी संस्था के लिए कार्य जो उससे जुड़ा है वही तो करेगा। जो उससे जुड़ा नहीं है वो थोड़ी ना करेगा। यह आपका वो मर्म था प्रीशंस से विजय श्री को जोड़ के दिखाने का। पूरा जो आपने वक्तव्य दिया उसका मर्म यही था लास्ट में। तो आपने शायद हमारी कल की वार्ता देखी है कि नहीं देखी आपको देखनी चाहिए। हमने उसमें केवल यह नहीं कहा है कि वो जुड़ी है कि नहीं जुड़ी। हमने यह कहा है कि अगर जिस आधार पर आप उनका जुड़ा हुआ होना मान रहे हैं तो आप सबका जुड़ा हुआ

00:04:26:19 होना मानना पड़ेगा आपको। सब लोग जुड़े हैं किसी ना किसी प्रकार से। जो एमएसी कंपनीज में काम कर रहा है जो किसी का सेल्स एग्जीक्यूटिव है ये है वो बहुत सारे उदाहरण आपको मिल जाएंगे। वो सब हिंदू होंगे। शास्त्रनिष्ठ होंगे। राघवाचार्य जी में आस्था रखते होंगे। शंकराचार्य जी में आस्था रखते होंगे। मगर वह लोगों का कनेक्शन भी क्योंकि भाई वह किसी पोस्ट पर है। आपने उसमें आगे कहा है कि भाई कोई सी ऐसी वैसी पोस्ट पर थोड़ी ना है। हम बात कर रहे हैं उस व्यक्ति की जो फ्री में जो संस्था के किसी अच्छे पद पर बैठा हुआ है। तो भगवतानंद जी यहां प्रॉब्लम ये आएगी कि कोई किसी संस्था से जुड़ा हुआ है क्योंकि एन केन प्रकार सब इधर-उधर से जुड़े हुए हैं। जिस जिस तरीके से आपने जुड़ाव निकाला

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00:05:09:15 तो प्रॉब्लम यह आएगी कि अगर कोई किसी संस्था से जुड़ा कोई भी किसी संस्था से जुड़ा हुआ है तो उसमें वो किस पद पर कार्यरत होना चाहिए। यह कहां पर सिद्धांत मिलेगा कि भगवतानंद जी के द्वारा डिक्लेअ कर देने पर मान लिया जाए कि इस पद पर यदि उस संस्था के द्वारा नियुक्त होगा व्यक्ति तो यह मान लिया जाए कि वो उसी के लिए कार्यरत कर रहा है और उससे थोड़ा सा नीचे वाले पद पर जैसे आपने उदाहरण दिया कि वो कोई उसका रिसेप्शनिस्ट थोड़ी ना है। वो कोई उसका यह थोड़ी ना है। तो थोड़ा सा उससे नीचे वाले पद पर अगर कार्यरत होगा तो वो उसके लिए कार्य नहीं कर रहा है। यह सिद्धांत कहां से प्रतिपादित होता है? इसको हम कैसे मान ले? तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है। आपको लगता है कि अगर उस संस्था से कनेक्टिंग किसी संस्था के द्वारा किसी पद पर जो आपके अनुसार है वो पद वो क्या था स्पोर्ट्स प्रेसिडेंट या योग योग प्रेसिडेंट मुझे याद नहीं उस पद का नाम तो आपके अनुसार उस पद पर अगर कोई बैठा है तो वो प्रीमेशंस के लिए कार्य कर रहा है। मगर उसी संस्था के रिसेप्शन पर कोई अगर बैठा है तो वह उस संस्था का एजेंट नहीं है। तो यह सनातन सिद्धांत नहीं है। अगर है तो आप मुझे दे दीजिए मैं मान लूंगा।

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00:06:20:02 सनातन सिद्धांत नहीं है। निग्रचार्य जी की अपनी मनो की व्याख्या है। यह तो कि हमने भी किसी पद पर बैठे हुए व्यक्ति की बात की है। हमने किसी रिसेप्शनिस्ट की बात थोड़ी ना की है। है ना? यह सनातन सिद्धांत नहीं है। तो पहली बात तो एन केन प्रकारन अगर जिस तरीके से आपने कहा तो सब लोग जुड़े हुए हैं तो उसमें फिर आपके अनुसार यह माना जाए कि जिस पद पर बैठकर आप व्यक्ति को फ्री मिशनंस के लिए कार्य करने वाला मान रहे हैं। है ना? उस पद को ही वो क्यों माना जाए कि फ्री मिशनंस अगर इस पद पर व्यक्ति बैठा होगा तो उसको फ्री मिशंस पर के लिए कार्य करने वाला मान लिया जाएगा। और भले ही वह दूसरे और वह भले ही दूसरे पद पर नियुक्त होते हुए उसी संस्था से जुड़ा हो तो उसको नहीं माना जाएगा। और अ ऐसी बहुत सी चीजें अगर आप अपने बारे में हमें थोड़ा बहुत बता देंगे जैसे आप कहीं कथा करने गए उन लोगों के बारे में आपने बता दिया तो ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो आपके बारे में भी निकल आएंगी। फिर मेरे बारे में निकल आएंगी। कल जो हमसे बात कर रहे हैं उनके बारे में निकल आएंगी। तो अब उसमें हम यह कह देंगे कि हम भैया फलाने पद पर नहीं है। प्रेसिडेंट के पद पर नहीं है। तो यह जो यह जो लाइन आई है ना यह मर्यादा कि नहीं प्रेसिडेंट के पद पर ही होना चाहिए या फलाने पद पर ही होना चाहिए।

00:07:35:10 तभी उसको फ्री मेंशन के लिए कार्यरत करने वाला है। माना जाएगा तो यह मर्यादा आपने कहां से प्रतिपादित की है? हम कैसे माने इस मर्यादा को? पहली बात। अब दूसरी बात यह है कि यदि किसी व्यक्ति का लिंक निक दिखाई दे रहा है फ्री मेंशन से कि वह भैया प्रीशन से जुड़ा हुआ है। ठीक है? जब तर्क की बात है तो तर्क से ही करते हैं ना कार्य है ना? तो दूसरा पक्ष सुनिए कि यदि कोई व्यक्ति फ्री मिशनंस से जुड़ा हुआ दिख रहा है। जैसे आपने लास्ट में कहा कि भाई कोई फ्री मिशनंस से जुड़ा हुआ व्यक्ति जो है अ फ्री मिशन से जुड़ा हुआ व्यक्ति ही तो फ्री मिशनंस के लिए काम करेगा। फ्री मिशन से ना जुड़ा हुआ व्यक्ति थोड़ी ना करेगा। तो पहली बात तो यह है कि इस जिस तरीके से आपने उनको विजय श्री को फ्री मिशन से जुड़ा हुआ बताया है। उस तरीके से इनके प्रकांड हम सब लोग जुड़े हुए निकल आएंगे। इस वीडियो को देखने वाले 90% लोग निकल आएंगे। अरे फ्री मेंशन से नहीं तो कम से कम किसी ना किसी सनातन विरोधी तंत्र से जुड़े हुए निकल आएंगे। जिस तरह से आपने करा है उस तरीके से। मगर फिर वो पद की बात मैंने आपको बता दी कि वो पद कौन डिसाइड करेगा कि इस पद पर कार्य करने वाला तो आप वो व्यक्ति नहीं है जो ये डिसाइड करेंगे कि इस पद पर

00:08:50:12 कार्य करने वाला होगा तो मान लिया जाएगा। कार्य कर रहा है फ्री मेंशनंस के लिए और इससे अमुक अमुक पदों पर होगा तो नहीं माना जाएगा। तो यह डिसाइड आप करेंगे या आप करेंगे तो क्यों करेंगे या आप नहीं करेंगे तो कौन करेगा फिर यह सब चीजें आपको बतानी ठीक है अब इसका दूसरा पक्ष यह है कि जब आपको कोई फ्री मिशनंस से काम करने वाला दिख रहा है और वो आपको फ्री मिशनंस के अनुरूप कार्य करता हुआ नहीं दिख रहा है जैसे कि बम लगाना सनातन विरोधी नारे लगाना सनातन विरोधी उद्घोष करना या फिर कुछ और ऐसी आपत्तिजनक गतिविधि जिसको हम सनातन विरोधी गतिविधि मान सके ठीक है? सार्वजनिक दृष्टि से तो जब हमें वो यह दिख रहा है कि वह प्रीमेशन से जुड़ा हुआ है। मैं भी दिख रहा हूं और मेरे साथ में बहुत सारे जो कार्यकर्ता हैं आह्वान के वो वो भी दिखेंगे। आप भी दिख जाओगे। आपके साथ जुड़े हुए कई लोग दिख जाएंगे इस पडकास्ट को इस ये जो हो रहा है स्ट्रीमिंग इसको देखने वाले कई लोग दिख जाएंगे। फेमेशन से जैसा आधार आपका है उनको बताने का विद्या को बताने का तो वो दिख जाएंगे। मगर अभी बात ये आती है कि

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00:10:01:15 जिस व्यक्ति का आप फ्री मिशन से होना सिद्ध कर रहे हो नकारात्मक रूप में। ठीक है? उस व्यक्ति का सनातन परंपरा प्राप्त आचार से जुड़ा होना भी तो सिद्ध है। तो यदि वह सनातन विरुद्ध कार्य करते हुए नहीं दिख रहा है तो यह क्यों ना माना जाए कि वो शंकर परंपरा के द्वारा फ्री मेंशन में भेजा गया एजेंट है।

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00:10:23:10 भाई वो फ्री मेंशनंस में आपने जोड़ दिया उसको तो हो सकता है वो शंकराचार्य के द्वारा भेजा गया कोई सिपाही है जो फ्रीशंस में सेंध लगा रहा है। इसलिए इन सब चीजों को जब हम टटोलेंगे ऐसे हिलाएंगे ना तर्कों को तो फिर हमें मानना पड़ेगा कि हमें कोई ठोस आधार चाहिए होगा जिस व्यक्ति को हम फ्री मेशंस का बता रहे हैं उस व्यक्ति का प्रीमेशन से होने वाला उसको सिद्ध करने के लिए समझ रहे वही वाली बात कि जिस गीता को पढ़ के कोई व्यक्ति क्रिश्चियन से हिंदू बन सकता है इसको ये दावा करते हैं ना जिस गीता को पढ़ के कोई व्यक्ति क्रिश्चियन से हिंदू बन सकता है तो उसी गीता को पढ़ के कोई हिंदू भी क्रिश्चियन बन सकता है। तो फिर आप ये डिसाइड कैसे कर रहे हैं कि वो फ्री मिशनंस के लिए ही काम करने वाला है। क्योंकि उसके दोनों पक्ष दिख रहे हैं ना। दिख तो ये भी रहा है कि वो शंकराचार्य जी के लिए शंकराचार्य जी की से दीक्षित है। दिख तो ये भी रहा है कि वो जो मनुवाद के सिद्धांत है उनका प्रचार प्रसार कर रहा है। जबकि फ्री मेशंस के लिए वो सनातन विरोधी कंटेंट नहीं दिख रहा है। आज की तारीख वर्तमान में तो हम ये क्यों माने कि वो फ्री मेशंस का एजेंट है जो यहां आया। हम ये क्यों ना माने वो शंकराचार्य का एजेंट है जो फ्री में मिशनंस गया है। ये सोचने वाली बात है। अब जो दूसरी एक बात है वृंदावन में

00:11:38:14 बहुत सी प्रॉपर्टी स्कॉन की है। बहुत सी प्रॉपर्टी मतलब ऐसे लोगों की है जिनका कनेक्शन कहीं ना कहीं से प्रीमेशन से निकल ही आएगा। तो ऐसे में क्या होगा कि राघवाचार्य जितने लोग भी वहां पर हैं वृंदावन में राघवाचार्य प्रेमंद जी महाराज या अनिरुद्धचार्य या वहां पर गड या वैष्णव संप्रदाय इवन वहां पर शंकराचार्य जी का मठ है इन सबके कनेक्शन फ्री मिशनंस से निकल आएंगे तो क्या आप इन सबको फ्री मिशनंस का घोषित करेंगे अरे मैंने एक वीडियो देखा था जिसमें आप सहारा न्यूज़ वाले आपका इंटरव्यू ले रहे थे। आपके बचपन का है तो वह सहारा का भी कनेक्शन किसी ना किसी सनातन विरोधी तंत्र से निकल आएगा। मैं आज की तारीख में कह रहा हूं ना मेरा कनेक्शन निकल आएगा तो मैं भी फ्री मिशनंस का हो गया। तो अगर इस तरह से हम सभी लोग कहीं ना कहीं गलत और सनातन विरोधी तंत्रों से जुड़े हुए हैं तो फिर यह कैसे डिसाइड होगा कि कौन से जुड़े हुए व्यक्ति को वाकई में माना जाए कि वो उसके लिए कार्यरत है और कौन से जुड़े हुए व्यक्ति को वाकई में ना माना जाए कि उसके लिए कार्यरत है। तो इसके बारे में कोई आपने सनातन सिद्धांत नहीं दिया। कोई ऐसा ठोस सिद्धांत आपने नहीं दिया कि भाई इसको मान लो।

00:12:53:15 आपने वहां पर यही कहा कि बड़ा पद है। एक बार में क्या हुआ था? मैं अपना एक्स अनुभव बता रहा हूं। मैं बैठा हुआ था मुफ्ती के सामने और वहां पर मुफ्ती को मैंने एक बात पूछी कि भाई ईश्वर सर्वशक्तिमान है और तुम्हारा ईश्वर बाधित है। हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है। ठीक है? उसने कहा कैसे कि तुम्हारा ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। ही कांट डू इट। और हमारा ईश्वर अवतार ले सकता है। तो उसने कहा कि आर्य समाज तो ये नहीं मानता। तो मैंने कहा भाई तुम्हारे कुरान के विषय में कौन था? सैटेनिक वर्सेस करके किसी ने कोई किताब लिखी थी जिसको 30 साल बाद मार दिया गया। तो सैनिक वर्सेस वाले को लिखने वाले का मैंने नाम दिया नाम लिया कि भाई तुम्हारे यहां भी तो कुछ लोग ऐसे हैं जो वो नहीं मानते जो तुम नहीं मानते जो तुम मानते हो। तुम्हारे यहां भी कुछ लोग ऐसे हैं जो तुम मानते हो वो नहीं मानते। तो तुमको मानूं कि उसको मानूं। तो वो अपने आप ही हंसने लगा। वो कहने लगा अरे आप अब आप जो है सैटेनिक वर्सेस को लिखने वाले जैसे तुच्छ व्यक्ति की तुलना जो है वो आर्य समाज जैसे आपके यहां का इतना बड़ा तबका है उससे करोगे दयानंद जी से करोगे दयानंद जी का सम्मान दिखाने लगे तो ये सिद्धांत कहां से आया कि जो मुफ्ती साहब तय कर रहे हैं वो व्यक्ति तो वैलुएबल है और जो मैं बता रहा हूं वो चीजें

00:14:08:28 वो जो पद है वो जो व्यक्ति है वो वैलुएबल नहीं है तो ये सिद्धांत कहां से आया कि जिस पद को निग्रचार जी वैलुएबल बता बता रहे हैंेंस दे रहे हैं वो तोेंस है वो तो वैलुएबल है मगर जिसको मैं बता रहा हूं वो वैलुएबल नहीं है ये सिद्धांत कहां से आया मुझे उसको बताएं कृपा करके राजेंद्र दास जी महाराज ये सब लोग आपको कहीं ना कहीं आपने बोला भी है खैर इनके अलग-अलग परिपेक्ष में सबके लिए बोला है और ये सभी लोग आपको जो है फ्री मिशनंस से कनेक्टेड मिल जाएंगे। जाएंगे तो उस हिसाब से दुनिया में कोई भी फ्री मिशनंस से डिस्कनेक्टेड मिलेगा ही नहीं। तो उस हिसाब से फिर देखा जाए तो एक तरीके से वो अधर्म हो चुका है और धर्म का नाश हो चुका है क्योंकि आप और मैं भी फ्री मिशन से जुड़ चुके हैं। YouTube का इस्तेमाल कर रहे हैं और YouTube को खगोलेंगे तो बहुत सारे सनातन विरोधी तंत्रों के साथ इसका मिल जाएगा। ठीक है? YouTube के पार्टनर है हम लोग। वो पार्टनर नहीं थी जिस संस्था में वो काम कर रही थी। पार्टनर नहीं थी। ठीक है? हम पार्टनर हैं। तो ये एक बात है कि

00:15:21:04 अ कि प्रीिशन से किसी को जुड़ा हुआ माना जाए तो किस आधार पर माना जाए? इसके बाद पूरी दुनिया में मलेच्छराज एक तरीके से अगर देखा जाए तो हो चुका है। अब इसके बाद एक दूसरा विषय आया था। वो ₹55,000 वाला तो मेरे पास अभी पीडीएफ नहीं है। मैं आपको दिखाता वो पीडीएफ थोड़ा सा दिखा दीजिए।

00:16:04:00 जितने भी आधुनिक पढ़ाई करने वाले लोग हैं जो बड़े-बड़े कॉलेजेस में पढ़ रहे हैं, प्राइवेट कॉलेज है, आईआईटी कर रहे हैं, ये कर रहे हैं, वो कर रहे हैं। वो सब फ्री मेंशन से जुड़े हुए हैं। ठीक है? तो आपको यह सिद्धांत बताना चाहिए समाज को कि किसके द्वारा माना जाएगा कि यह पद पर कार्य करने वाला वाकई में फ्री मेंशन का है। और दूसरा पक्ष भी मैंने दे दिया कि जो व्यक्ति फ्री मेशंस में आपको दिखाई दे रहा है वो व्यक्ति शंकर के मठ में भी आपको दिखाई दे रहा है तो उसको फ्री मेशंस का एजेंट शंकर के मठ में क्यों माना जाए। शंकर का एजेंट फ्री मेशंस के मठ में क्यों ना माना जाए। इस बारे में शास्त्रों सिद्धांत या कोई ऐसा सिद्धांत, कोई ऐसा तर्क, कोई ऐसी बात जो हम भी मान सके सिवाय इसके कि वो आपने बोला है। ठीक है? पहली बात। अब इनको जरा पीडीएफ दिखाइए वो 55,000 में जो बेचा गया है। यह वो पीडीएफ है जो इन्होंने शेयर की थी अपने Facebook आईडी पर प्रचार प्रसार किया गया था और इस पीडीएफ की प्रमाणिकता आपको मिल जाएगी। जब आप विजय सुई की आईडी पर जाएंगे और आईडी पर जाने के बाद मतलब आप पीछे स्क्रॉल करेंगे तो शायद इसकी कुछ पोस्ट वोस्ट आपको मिल जाएंगी। उन्हीं तारीखों में यही सब मटेरियल वहां पर

00:17:19:04 अ आपका जो मटेरियल है ये मटेरियल आपको वहां पर मिल जाएगा। तो अब इसमें देखिए सबसे पहले तो यह फ्रंट पेज है उसका जो प्रचार किया जा रहा है। पहली बात तो यह है कि ₹55,000 जो लिए जा रहे हैं आप पहले चेक करें कि ये किसके द्वारा लगाया गया कैंप है। इसमें नीचे डिटेल्स हैं। यह देखिए डिटेल्स है ना? एक मिनट ऊपर जाइए। ऊपर जाइए। ऊपर जाइए। कंपनी वगैरह का नाम वगैरह दिया है क्या? बड़ा करिए। यह बड़ा करिए। ऑरेंज वाली पट्टी है जो

00:17:59:01 इसमें देखिए कहां पर लिखा है शंकराचार्य को कहां शंकराचार्य का आलंबन लेकर के स्वयं को कहां प्रमोट किया गया है बताइए यही तो है जिसको देख के लोगों ने इनका वो पैकेज खरीदा होगा इस कंपनी का जिससे इनका जिसके साथ ये एसोसिएटेड हैं और इस और हां एक बात और इस कंपनी का भी आप रिकॉर्ड वगैरह कुछ चेक करिएगा शायद किसी ना किसी सनातन विरो विरोधी तंत्र से निकल आएगा उनका कनेक्शन। ठीक है? तो फिर इस हिसाब यहां से भी वह फ्री मिशनंस की सिद्ध हो जाएंगी। तो आपको यह सब देखना चाहिए और इसमें मुझे बताएं इस पूरी पीडीएफ में जिसका प्रचार किया गया है उन वो जो कैंप लगे थे उनको बता बनाने के लिए। यह मैं इसका लिंक नीचे डाल दूंगा और जिसको इनकी आईडी पर जाकर के देखना हो वह भी देख सकते हैं। भाई इन्होंने तो यह किया कि यह जिस माध्यम से आजीव को पार्जन करती हैं उसमें भी अपने मनुवादी गुरु की गुरु का प्रचार करती रही। जिसका वो है कि उन उन चार लोगों में से आने वाले एक व्यक्ति ने गुरुदेव से दीक्षा ली। तो यह हमारे लिए एक अचीवमेंट है। शायद आपके लिए ना हो। हमारे लिए एक अचीवमेंट है। अच्छा इसमें एक चीज और है कि आपको जो

00:19:14:02 इसमें 55000 55000 वाला जो वक्तव्य आप प्रस्तुत कर रहे हैं तो आपको इसमें वक्तव्य प्रस्तुत करना चाहिए था किसी व्यक्ति को पकड़ते उन चारों में से उसको गवाह के रूप में बुलाते उससे बुलवाते पहली बात तो कि भैया तुझको क्या-क्या बताया गया था और उससे साक्ष्य पूछते तुझको कौन-कौन सी चीजें दी गई थी तो ऐसा कुछ नहीं हुआ ठीक है तो यह सारी चीजें मिल गई। यह हो गया आपका वो जो आपने 55,000 वाली बात कही ये है। तो मैं वही कह रहा हूं पूरी तैयारी के साथ अपनी बात को रखें। पूरी रिसर्च करके आए अच्छे से कि मतलब अकाट चीजें बोले। ऐसी ऐसी चीजें ना बोले जो कि आराम से वो उनका जो है प्रतिकार हो सके। ऐसी चीजें ना बोले। उसको बोलने से बचें। हालांकि हम आपका नाम लेकर के इस तरह से आपके सामने नहीं क्या कहते हैं आना चाहते थे। मगर आपने विवश किया ऐसा करने के लिए तो हम कभी नहीं देखते थे इस रूप में आपके साथ। उसका कारण है और वो शायद आप भी समझ रहे होंगे। उसका कारण यही है कि हम और आप कहीं ना कहीं परंपरा विरोधियों

00:20:29:06 का जो परंपरा प्राप्त आचार्य गण हैं उनके साथ हैं और परंपरा के विरोधियों के विरुद्ध हैं। तो हम नहीं चाहते थे कि उनको ऐसा मसाला मिले कि भाई मैं कुछ कह रहा हूं फिर आप कुछ कह रहे हैं। फिर आप कुछ कह रहे हैं तो वह इस तरीके का मगर ठीक है। अब जब हो ही गया है तो फिर वही वाली बात है कि कहां तक वो चीज है उसको संभाला जाएगा। है ना? अब दूसरी बात आ जाती है योग की। तीसरी बात योगाचार्य के लिए आपने वीडियो दिखाया। पहली बात तो यह है जब आपने योगाचार्य के संबंध में वीडियो देखा है तो इसका मतलब आपके अनुसार गुरुदेव जानते हैं और गुरुदेव उन्हीं की बात कर रहे हैं योग के बारे में बताते हुए और यह वीडियो जाहिर सी बात है पुराना है और इसके बाद आपने ही अपने वीडियो में कहा वो गलती से कहा वो बात बाद की है गलती से कहा कि सही से कहा आपने ही अपने वीडियो में कहा कि वो महिला गुरुदेव के साथ मंच साझा कर रही है यानी कि आप एक तरफ ये जानते हैं आप एक तरफ ये कह कह रहे हैं कि गुरुदेव उनका खंडन करते हैं। वो गलत है। उनको योग नहीं सिखाना चाहिए। उनको व्यायाम योग वाला जो व्यायाम है वो नहीं बताना चाहिए। मगर दूसरी तरफ

00:21:44:07 आप ये कह रहे हैं कि वो गुरुदेव के साथ मंच साझा कर रही है। गुरुदेव होने दे रहे हैं। पहली बात। दूसरी बात यह है कि आपने अगर गुरुदेव का वक्तव्य ध्यान से सुना हो तो उसमें उन्होंने कहा कि वह पूरी में आती हैं। आती हैं। तो यह क्या हो गया? प्रेजेंट इनडेफिनेट। कोई जो कार्य हो रहा होता है बार-बार होता है उसको कहा जाता है कि आती हैं। ठीक है? जबकि विजय श्री जी जो अभी चातुर्मास लगा था उस चातुर्मास में पहली बार वो अभी तक वहां गई है। तो अगर वो जो वक्तव्य है गुरुदेव का वो विजय श्री जी के लिए ही है। तो गुरुदेव कहेंगे कि पूरी में एक आई थी। गुरुदेव ये नहीं कहेंगे आती हैं। जब जब आप ऐसे बाल की खाल निकाल रहे हो तो ऐसी बाल की खाल निकाली जाती है। फिर ठीक है तो तो क्या हुआ? गुरुदेव ने क्या बोला? आती हैं। गुरुदेव ये नहीं कहा कि वो आई थी। इस बार के चातुर्मास में आई थी। तो यह वक्तव्य उनका सिद्ध नहीं हुआ। दूसरी बात आपने भी अपने वीडियो में माना कि उनका उन्होंने नाम नहीं लिया है। यदि मैंने आपको ऐसे नाम बता दिए कि गुरुदेव के शिविर में कई ऐसी अन्य वह आई हैं महिलाएं जिन्होंने जो योग भी सिखाती है,

00:22:59:13 योगा योग अभ्यास भी कराती हैं। ठीक है? और वह आई हैं। तो गुरुदेव उनके बारे में यह वक्तव्य क्यों नहीं हो सकता? दूसरी बात गुरुदेव ने बोला आचार्य। योग आचार्य। आप मुझे उनकी आईडी खोल के बताइए कि उन्होंने कहां स्वयं को योग आचार्य लिखा। ठीक है? तो ये त्रुटि है थोड़ी सी। जब बात करते हैं ना कि बिल्कुल कांटे की बात तो बिल्कुल कांटे की बात ही करनी चाहिए। बचना चाहिए ऐसे वक्तव्य निर्गत करने से जिन जो वक्तव्य काटे जा सकते हैं। अकाट्य बातें नहीं है। यह तो यह बात हो गई। एक अब इसके बाद क्या है कि एक पक्ष और है इसमें एक पक्ष और लिया जा सकता है पूर्व पक्ष के रूप में कि क्या कहते हैं वो गुरुदेव जो है दुलार में। ठीक है? गुरुदेव कई बार जिनसे वह स्नेह रखते हैं जिनके प्रति उनके मन में थोड़ा सा करुणा का अलग सा भाव होता है तो उनके उनकी भी कई बार वो दुलार में टांग खींचते हैं जो एक विनोद होता है वो करते हैं वात्सल्य भाव से तो वो वात्सल्य भाव वाला वक्तव्य भी होता है जबकि यह जो योगाचार्य वाली बात है इस पर

00:24:14:19 हमने आपने शायद वो वीडियो हमारा देखा नहीं इसी वजह से आपसे चीजें हो रही है हम फिर से वो कहेंगे बेनिफिट ऑफ डाउट देंगे। आपने वीडियो पूरा नहीं देखा जाहिर सी बात है वो तीन घंटे का है। आपने कहा भी है तो आप उसको देखें। यह योगाचार वाली बात हम बता चुके हैं कि गुरुदेव ने ऐसे ऐसे योगाचार तो गुरुदेव ने उनके लिए नहीं कहा। इसके कई कारण हो सकते हैं। पहली बात उनका खंडन नहीं था कि वो विनोद हो सकता है उनके लिए। दूसरी बात कि वहां आने वाली कई अन्य महिलाएं हैं। कई अन्य मात्र शक्तियां हैं। तो वो उनके लिए हो सकता है क्योंकि उसमें नाम नहीं है। तीसरी बात जब बाल की खाल निकालने बैठे हो तो फिर निकालो। गुरुदेव ने कहा आती है। गुरुदेव गुरुदेव ने यह नहीं कहा इस बार के चातुर्मास में आई थी। गुरुदेव ने कहा आती हैं। तो इसका मतलब वो कई वो ऐसे किसी के बारे में बात कर रहे हैं जो कई बार आती हैं। आ चुकी है। कई बार आती रहती है। जबकि विजय श्री पहली बार पूरी गई है। उससे पहले वो कभी नहीं गई। तो यह भी कट हो रहा है। अब इसके बाद 100 की सीधी एक बात है कि अगर इस संबंध में कोई प्रमाण हो सकता है कि गुरुदेव ने उनका खंडन किया है कि नहीं क्योंकि अब इसका वीडियो हो सकता है निकल आए क्योंकि वीडियो बनता है जो भी क्योंकि सभा में पूछा गया प्रश्न है तो हम देख रहे हैं कि वो वीडियो अगर मिल जाए बहुत सारे वीडियो होते हैं। गुरुदेव की डेली जितनी भी वह होती है

00:25:29:20 सभाएं उन सबका रिकॉर्डिंग होती है। तो हो सकता है कि वह वीडियो निकल आए जिसमें कि विजय जी ने गुरुदेव से वह प्रश्न किया था। ठीक है? निकल आएगा तो हम लोग प्रयास कर रहे हैं उसको दिखा देंगे। मगर मगर बात ये है कि ये जो वीडियो है इसमें उन्होंने गुरुदेव ने विजय श्री का नाम नहीं लिया तो ये अकाट्य तथ्य नहीं है। आप ही तो सोचो जब हमारे आचार्य गण कोई बात करने बैठते हैं तो ऐसे बैठते हैं कि हमको क्या लगता है। ऐसे करते हैं। सोचिए ना उसमें कितनी तरीके से मार मारते हैं उसको सिद्धांत को प्रतिपादित करने से पहले। आप तो इतने शास्त्रज्ञ हैं। कितनी तरीके से शंकराचार्य जी जब अपनी गीता भाष्य लिखते हैं, ब्रह्म सूत्र पर भाष्य लिखते हैं तो वो कितने तरीके से पूर्व पक्ष ले ले ले लेके जो जो आर्य समाज सोच नहीं सकता वो सारे पूर्व पक्ष ले ले के बात की जाती है। कोई सोच विरोधी सोच नहीं सकता। ऐसी ऐसी चीजें तो क्या ऐसे बात करते हैं जब मतलब हमें क्या लगता है? हमने अगर डिसाइड कर लिया कि उसका पद ये होना चाहिए। वो कार्य करने वाला माना जाएगा। तो ऐसे नहीं चलता है। बचाएं अपने आप को इस चीज से। अब तीसरी बात आती

00:26:45:07 है प्रमाण की। प्रमाण की बात आती है। सबसे जो इस वीडियो का इंटरेस्टिंग और मेरे ख्याल से सभी को जिस पर बात करनी होती है वो बात करनी होगी। जिसका इंतजार होगा वह सब यही है। इसी प्रमाण वाले सेक्शन का इंतजार है। ठीक है? तो पहली बात तो यह है कि हमारी बात शुरू होती है जो कल की लाइव का भी हमारा जो मुख्य बिंदु था वो था विजय श्री को लेकर और कहीं भी हमने आपको नहीं ललकारा था कि आप हमें प्रमाण लाके दो हम उन वो जो वो है ना क्या कहते हैं क्या कहेंगे उनको गुरुद्रोही हम उनको ललकार रहे थे कि आप हमें प्रमाण लाके दो मगर आपने अपने ऊपर ले लिया और आपने उन्हीं से प्राप्त होने वाली चीजों को ये कर दिया मगर कोई बात नहीं एक ना एक दिन होना ही था तो आपने कर दिया कोई दिक्कत नहीं है तो पहली बात है कि यह वीडियो जो आपने अपने उसमें दिखाए हैं ये कब के हैं आज 2025 के हैं 2024 के हैं कब के हैं आप जानते हैं कि वो वीडियो तीन से चार साल पुराने हैं। है ना? लगभग

00:28:00:12 3 साल तो होंगे। मेरे ख्याल से 22 के अगर लास्ट में करेंगे तो 3 साल तो हो ही गए। 23 हो गया, 24 हो गया और 25 नहीं 2 साल पुराने। ठीक है? 2 साल से ऊपर पुराने वीडियोस हैं। तो पहली बात है क्या आपको ये लगता है कि ये वीडियोस हमने नहीं देखे होंगे? आपको क्यों लगता है कि ये वीडियोस हमने नहीं देखे होंगे। ठीक है? आपको ऐसा नहीं लगना चाहिए कि ये वीडियोस हमने नहीं देखे होंगे। तो पहली बात तो है कि जैसे विजय श्री व्यापार कर रही है। इस संबंध में आपने क्या प्रमाण दिया? आपने वक्तव्य दिया। मगर आपने प्रमाण क्या दिया? कोई प्रमाण नहीं दिया। विजय श्री फ्री मिशनंस के लिए कार्य कर रही है। कार्य कर रही है। क्योंकि जुड़े हुए हम सभी हैं। ठीक है? आपके आपके अनुसार तो कार्य कर रही है। इस संबंध में आपने प्रमाण दिया। कोई प्रमाण नहीं दिया। अच्छा और भी चीजें हैं वह जो पीडीएफ आपने पढ़ी थी उसमें वैश्य इत्यादि का नाम भी आया था तो इस संबंध में उन्होंने आपको प्रमाण दिया कि नहीं दिया आपने प्रमाण नहीं दिया तो ये सब चीजें एक कोने हो गई ठीक अब क्या बचा तीन साल पहले के जो वीडियोस है जो पहले ही मठ में सभी लोग देख चुके हैं ये वही है इस पर भी जांच का विषय है कि उसमें वो कौन सी डेट पर क्या हो रहा है जो व्यक्ति कुलदीप शर्मा का नाम

00:29:15:15 है वो जांच जांचने का विषय कि कुलदीप शर्मा जो कि ब्रह्मचारी जी को ऋषिकेश ब्रह्मचारी को जानने वाला होना चाहिए। वो यह कैसे कह रहा है कि आप कहां के हो? 2022 में जो कि बहुत बहुत समय से जुड़ा हुआ है। तो ये कुछ बातें हैं। वो जांच का विषय है। मगर पहली बात तो यह है कि आपने इन सभी बातों को छोड़ दिया। आपने इस बात को भी छोड़ दिया कि आपने अपने वीडियो में किस अधिकार से यह कहा कि मंच पर विजय श्री बैठी हुई है। अपने व्यापार को पोषित कर रही हैं। यह किस अधिकार से आपने कहा? जबकि आपने जो वीडियो संलग्न किया वो उनका नहीं था। बाद में आपने हमारे लिए कहा कि शंकराचार्य के चेले लीपापोती कर रहे हैं। लीपापोती आपने की है अपने डिस्क्रिप्शन में जाकर के कि जो आपसे गलती हो गई है उसको आपने वहां सुधारा और वहां पर भी आप पता नहीं वो क्या बात है कोई दबाव है कि अहंकार है वो कौन सी वजह है जो आप वहां पर अपनी गलती को स्वीकार नहीं कर पाए। वहां पर भी आपने अपने आप को फसाया ही है। आपने यह स्वीकार नहीं किया कि वो हम पहचान नहीं पाए थे। हमने उसको विजय श्री बोल दिया। बल्कि आप यह बोल रहे हो कि हमने वहां पर शास्त्री मर्यादा दिखाई है। जबकि आपके वीडियो में आप स्पष्ट बोल रहे हैं। आपने आज का वीडियो निर्गत करते समय अपने इस कमजोर पक्ष को छोड़ दिया। और ये जो कि बहुत महत्वपूर्ण पक्ष है। इन सभी पक्षों

00:30:30:19 को आपने दरकिनार कर दिया। अब आप आए किस पे? जो तीन साल पहले से हमने देखा हुआ है। अब वो जो देखा हुआ है उसकी बात अगर करें। तो मैंने कहा कि भाई मैं अपनी जान हथेली पर रख कर गया। आपने जैसे साहस की बात की थी ना एक बार मैंने आपका एक वीडियो देखा था जिसमें आप बोल रहे थे कि मैं तो शिष्य होने का कर्तव्य निभा रहा हूं। ठीक है? आप कहीं ना कहीं गुरु भाव रखते हैं पूरी के शंकराचार्य जी के प्रति। तो आपने उस वीडियो में कहा था कि मैं तो पूरी के मैं तो शिष्य होने का वो निभा रहा हूं। कर्तव्य मगर गुरु भी तो अपनी ओर से निभाए। तो आपने यानी कि एस ए शिष्य जब आप कल के वीडियो में परसों की वीडियो में यह लोगों को कह रहे हैं कि आप जाइए वहां पर हाथ पैर पकड़ लीजिए पांच मिनट के लिए। ऐसा साहस आपने क्यों नहीं दिखाया? अगर आपको गुरुदेव गुरु भाव है। आप कह रहे हैं आप कर्तव्य निभा रहे। जबकि आप जब दूसरे को कर्तव्य दिखा रहे हैं तो आप बता रहे हैं वहां जाइए दलबल के साथ और वहां पांचप मिनट के लिए सबका हाथ पैर पकड़ लीजिए। अपनी बात बोल डालिए। ये साहस आपने क्यों नहीं दिखाया? आप भी तो वही चीज कह रहे हैं ना कि मैं गुरुदेव से मिलना चाहता था पर मिलने नहीं दिया गया। मैं तो अपने शिष्य का कर्तव्य निभा रहा हूं। यह सब आप आपके डायलॉग्स हैं जो आपने बोले। तो ये गुरुदेव से मिलने

00:31:45:20 वाली बात आपने नहीं दिखाई। तो ये कुछ वो है कमजोर पक्ष जिसको आप छोड़ देते हैं। इसको ना छोड़े। फिर एक-एक पॉइंट को लेकर के चले चल रहे हैं तो तभी आनंद आता है चीजों में। ठीक है? अब आप अब बात करते हैं आपके द्वारा निर्गत किए गए जो प्रसारित किए गए जो दो मुख्य वो हैं क्या कहते हैं तो पहले पहली बात तो यह है कि आपने तब से अब तक ये जो 2023 के वीडियोस है तब से अब तक आपके पास रखे थे आज की डेट में पहुंचे हैं क्या है इसकी स्थिति सोचने वाली बात है अगर आपको धर्म की चिंता है वास्तविकता में सनातन धर्म की चिंता है और आप मानते हैं कि इससे सनातन धर्म को हानि है तो आज से पहले आप क्या कर रहे थे अगर आप कहें कि हम बदनामी नहीं कराना चाहते थे। ठीक है? हम बदनामी नहीं कराना चाहते थे। तो आज तो आपने वही किया। अगर आपके हिसाब से इन वीडियोस के द्वारा बदनामी हो रही है। और अगर आप कहें कि हम विवश हो गए क्योंकि हमारा प्रतिकार किया गया तो इसका मतलब आपके लिए आपकी जो वर्चस्वता है या जो भी है वो ऊपर है और सनातन धर्म की रक्षा जो है पीछे है। क्योंकि बदनामी से आप तीन साल तक रुके रहे बताने से और आज बताया। ठीक है। तब बात कर लेते हैं कि उसमें दिखाया गया क्या गया गया क्या गया क्या गया क्या गया क्या गया है दिखाया गया है कि जो

00:33:01:18 मठ के परिकर हैं उनके फोन में कुछ ऐसे लोगों की फोटो हैं जिन्हें हम सामान्य नहीं कह सकते। उनसे वो यह कह रहे हैं किसी व्यक्ति से वो ये कह रहे हैं अपनी चैट में कि मुझे तुमसे अकेले में मिलना है। यही तो है। यही उसका मन में और ज्यादा मैं देख नहीं पाया। वो तो आप कुछ और वो तो बताइएगा। अभी तो ये सिलसिला चल चलेगा। मुझे ऐसा लगता है। चाहता नहीं हूं। मुझे ऐसा लगता है। तो तो यह चीजें हैं। अब पहली बात यह आती है कि क्या किसी के फोन में ऐसे व्यक्ति की फोटो हो सकती है जिससे उसका संबंध ना हो बल्कि विरोध हो? क्या हम किसी व्यक्ति से ऐसा कह सकते हैं कि नहीं कि मुझे तुमसे अकेले में मिलना है। ठीक है? पहली बात। अभी ये सब जांच का विषय है कि वो जो वो है स्क्रीन रिकॉर्डिंग वगैरह वो सब उन्हीं के मोबाइल से है या एडिटिंग है या क्या है वो सब चीजें अलग है। सब जांच का विषय है। मगर अगर उनको मान भी लिया

00:34:14:22 जाए। मगर अब उनको अगर मान भी लिया जाए कि यह क्या कहते हैं? यह जो चीजें हैं तो मैं उस पर बात कर रहा हूं कि अ क्या कहते हैं क्या हमारे फोन में किसी विरोधी की या अज्ञात व्यक्ति की फोटो हो सकती है? क्या इस वजह से हमारे फोन में फोटो आ सकती है कि नहीं कि भैया हमको जो है हमारे बारे में व्यक्ति दुष्प्रचार कर रहा है। क्या इस बारे में हम बात कर सकते हैं कि कि हमें अभियान के निमित्त कोई गंभीर बात करनी है। हमें आपसे अकेले मिलना है। ये सब चीजें हैं। तो ये सब चीजें मैंने ये जो चीजें हैं अच्छे से 2000 जब जब 22 या 23 में जो ये चीजें निर्गत हुई थी तभी मेरे सामने आ गई थी और मैंने इनको अच्छे से देखा था। अच्छे से देखा था। और आज दोती साल बाद आपने फिर से देखा है तो इसमें इस बीच के अंतर में थोड़ा कुछ भूल गया हूं कि उसमें और क्या-क्या है तो आज आपने जो दिखाया है उस समय मैंने देख लिया था हर एंगल से मेरा तरीका है कि यदि किसी के ऊपर मुझे दोष लगाना है और मैं आपको कारण बता रहा हूं। जैसा कि मैंने कहा कि जैसे आपने बताया कि साहस होना चाहिए। कि वहां पे 10 20 50 लोग जाओ। उनके हाथ पैर पकड़ लो। या जो साहस आपको पूरी के शंकराचार्य जी में

00:35:30:07 नहीं दिखा। पूरी के शंकराचार्य जी के शिष्यों में नहीं दिखा जिस पर आपने उनको सुनाया आपने परसों के वीडियो में और जो जो साहस मुझे आप में नहीं दिखा क्योंकि आप भी उन तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं मगर आप नहीं गए और मैं मैं ईश्वर साक्षी है मैं अपने मन में आपसे प्रश्न करता रहता था सच बता रहा हूं कि अगर निग्रचार्य जी को ऐसी ऐसी चीजें हैं जो कुछ कहनी है तो क्यों नहीं जाते वो लाउडस्कर लेकर के क्यों नहीं उनको 10 20 लोग नहीं है उनके साथ जो जाकर के वो जो चलती हुई सभा है उसमें 10 20 लोग अपने बैठा दे और पहले वह कोशिश करे फिर दूसरा कोशिश करे वह बैठ जाए तो तीसरा कोशिश करे चौथा कोशिश करे करत करत अभ्यास ते जड़मती होत सुजान रसिया आप जात सिर पर परत निशान ये प्रयास क्यों नहीं किया गया तो जो साहस आपको शंकराचार्य जी के शिष्यों में नहीं दिखा वो शंकराचार्य जी के शिष्य जो मठ के अनुसार गुरुदेव के अनुसार हमारी जानकारी में गुरु द्रोही है ठीक है उनमें आपको वो साहस नहीं दिखा तो वही साहस आप में भी मुझे नहीं दिखा और मुझ जैसे कई

00:36:38:02 अब बात करते हैं मेरी मेरी आवाज ठीक आ रही है ना? आवाज ठीक आ रही है? हां। अब बात करते हैं कि भाई यह अब बात करते हैं कि मैं क्यों कह रहा हूं कि मुझे अकाट्य प्रमाण चाहिए। आपने जो प्रमाण दिखाए हैं हो सकता है। हां, यह बात सही है कि इससे अमुक अमुक व्यक्ति के ऊपर किसी को शक हो सकता है। ठीक है? पर सिद्ध कुछ नहीं किया जा सकता। देखिए एक जो अभी मैं बात बता रहा था इनका एक वक्तव्य है निग्रहाचार्य जी का। इस वक्तव्य में कोई इनको कह रहा है कि अब शीघ्र ही पूरी पीठ और पूरी पीठ और महात्मा स्वतः ही श्रीमान निग्रचार्य श्री भगवतानंद जी गुरु को से संपर्क निश्चित रूप से करेंगे। तो अब देखिए जब वैसे आप आपका कहना है कि हमको मिलने नहीं दिया जा रहा है। मगर जब मिलने की बात आ रही है तो आपका एक भाव वहां से प्रकट हो रहा है कि वो क्या करने के लिए संपर्क करेंगे गाली देने के लिए या

00:37:53:12 धमकी मतलब आपको मिलने में एक नकारात्मकता की भावना यहां पे आपके वक्तव्य से प्रदर्शित हो रही है। तो एक ये बात भी है। अब दूसरी बात यह है मैं अपने पॉइंट से बार-बार थोड़ा सा बात करते करते इधर उधर हो जाता हूं। बहुत सारी बातें लेनी है। तो क्या है कि मैं क्यों कहता हूं कि मुझे प्रमाण दो मगर अकाट्य क्योंकि जो आपने प्रमाण दिखाए हैं इनसे किसी पर डाउट हो सकता है। आज का वातावरण ऐसा है। आज आश्रमों में कई आश्रमों में हो रहा है। दोष हो रहे हैं। ये है वो है। तो इनसे किसी पर डाउट हो सकता है।

00:39:21:08 हां कुछ नेटवर्क का ये आपने

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→ Used in: A · Video धर्मयुद्ध अहंकार या व्यापार | क्या है पूरा विवाद | at 22:21 ↗

00:39:38:04 जो प्रमाण दिखाए हैं इससे हम किसी के ऊपर शक कर सकते हैं। बिल्कुल बात सही है। शक जा सकता है। डाउट हो सकता है मगर सिद्ध कुछ नहीं हो सकता। ठीक है? और जब हम फिर चीजों को जोड़ेंगे कि हम वहां जा रहे हैं। हम स्वयं वहां रह रहे हैं। और भी लोग वहां रह पर स्त्री भी रह रही हैं। हम लोग कुंभ में रह रहे हैं। हम लोग वहां पर रह रहे हैं। हमको ऐसी चीजें जब नहीं दिख रही और जब हमारे पूज्य गुरुदेव जो है जो हमारे लिए प्रमाण है वो उनके द्वारा संरक्षित

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00:40:09:10 है जो उनके परिकर और सबसे बड़ी बात कि गुरुदेव की दिनचर्या का ध्यान रखने वाले वही है। हमारे गुरुदेव की जो सेवा आज हम नहीं कर पा रहे वो वही कर रहे हैं। आप नहीं कर पा रहे वो वो कर रहे हैं और जितने गुरु द्रोही हैं यह नहीं कर पा रहे वो वो कर रहे हैं। पहली बात और ऐसा भी नहीं कर सकते कि आज कोई जाकर के वहां कह दे कि मुझे परिककर बना लो तो बना लिया जाए। समय बिताना होगा। निष्ठा दिखानी होगी। कई कई वर्षों का अनुशासन दिखाना होगा। तब जाकर के उस पर विश्वास होगा कि हां भाई इसको जो है मुख्य परिककरों में वो किया जा सकता है। तो कई और चीजें हैं। पहली बात कि वो जो आपने जो चीजें दिखाई है उससे डाउट हो सकता है मगर सिद्ध कुछ नहीं हो सकता।

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00:40:50:19 अब बात जब ये आती है कि हम लड़ने मरने निकले हैं। जान देने निकले हैं। कुछ भी हो जाए हम ये बात पहुंचा कर ही रहेंगे। तो हम ऐसी चीज के लिए लड़ते मरते हैं जो अकाट्य हो। और यही गलती की थी इन लोगों ने भी जो यह गुरुद्रोही है ऊपर ऊपर की अगर यह मुझसे मिले होते मैं इनको रोक देता कि भैया इन चीजों में दम नहीं है आप और ठोस सबूत निकालिए अगर कोई व्यक्ति गलत है तो उसके लिए आप ठोस सबूत लाइए ठोस अकाट्य सबूत मगर वो नहीं है काम चलाओ चीजें जिससे आप हाहाकार तो मचवा दोगे जिससे आप जो पहले से ही आपके वचनों से प्रभावित होने वाली जनता है उसको अपनी बातों को मन मनवा लोगे। मगर जब हम कहीं वास्तविकता में उन सबूतों के आधार पर लड़ने खड़े होंगे तो हमें पराजय का मुख देखना पड़ेगा। इसलिए

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00:41:40:07 मैं कहता हूं मुझे अकाट्य प्रमाण दीजिए। आपने अकाट्य प्रमाण नहीं दिए। पहला ये जो ऋषिकेश जी ब्रह्मचारी वाली वो है वीडियो और दूसरी बात कर लेते हैं कीचड़ वाली होली। उसके मुझे बहुत मैसेजेस आए। पहली बात तो मैं यह कहूंगा कि आपने आरोप कितने लगाए हैं? पिज़्ज़ा खाते हैं। वो वहां पर वैश्यागमन होता है। यह है वह है। बहुत सारे आरोप लगाओगे 50 और जब आपसे वो मांगा जाएगा प्रमाण तो आप 3 साल पहले का प्रमाण दोगे दो। क्यों? बाकी के 48 बातों का कोई प्रमाण नहीं है। ये सोचने वाली बात है। और अभी जो आपने कुछ और अनावश्यक प्रमाण जोड़े हैं उनपे भी बात करेंगे। ठीक है? तो प्रमाण की जो बात है कि आपने जो प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया है वह प्रमाण डाउट पैदा कर सकते हैं। सिद्ध कुछ नहीं कर सकते। जब मीमांसा करने बैठेंगे एक एक वर्ड की एक एक शब्द की तो कुछ नहीं होगा उससे। तो ऐसी स्थिति में वो भी तब जब हम स्वयं भी मठ में जाकर रह रहे हैं। ऐसी स्थिति में हम लड़ने मरने कटने नहीं जा सकते। आप

00:42:55:20 भड़काइए लोगों को और आप भेजिए या आप स्वयं जाइए कि आपको लगता है कि बिल्कुल अकाट प्रमाण है और यदि कोई है जो इसको सिद्ध कर सके कि इससे जो है ये सिद्ध हो रहा है सिद्ध हो रहा है डाउट नहीं सिद्ध तो वो आए बताएं कौन कर रहा है क्योंकि मुझे अभी एक फोन आया था एक व्यक्ति का उसने कहा कि मैं आपके साथ लाइव आ जाऊंगा भाई जो प्रमाण आप प्रस्तुत कर रहे हो उससे उसमें कुछ भी ऐसा सिद्ध नहीं हो पाएगा आएगा। आप सोच सोच के देखो। आप न्यायालय में खड़े हो। आपको सिद्ध करना है कि उनका किसी के साथ संबंध है अमुक अमुक व्यक्ति का। तो क्या दिखाओगे कि उन्होंने ये बोला कि मेरा जो मुझसे जो है एकांत में मिलो। क्या दिखाओगे कि उनके फोन में एक फोटो है। क्या दिखाओगे बताओ? तो ये चीज है कि वो जो प्रमाण है उसके लिए युद्ध नहीं लड़ा जा सकता। उसके आधार पर। इसलिए मैं कहता हूं कि प्रमाण लाओ जो कि मैंने आपसे नहीं कहा था। मैंने कहा था उन गुरु द्रोहियों से जिन्होंने आपके पास पीडीएफ भेजी है जिसको आपने

00:43:58:20 पढ़ा। अब कीचड़ वाली होली की बात करते हैं। वो भी वही काफी साल। भाई जब पूरी मठ में इतना सब कुछ हाहाकार हो रहा है तो आप ले दे के वही प्रमाण क्यों ला रहे हो जो दो तीन साल पहले एक बार हो चुका है सर्कुलेट। नए प्रमाण नहीं आ रहे क्या? और नए प्रमाण नहीं आ रहे तो आप क्यों कह रहे हो? हो रहा है। आप कहो हुआ था। यह सब चीजों का ध्यान रखो ना। गलत वक्तव्य क्यों दे रहे हो? जिसका आधार नहीं है वह वक्तव्य क्यों दे रहे हो? हो रहा है। जिस व्यक्ति ने आपको वो एप्लीकेशन दी है ना जिसने थाने में एप्लीकेशन दी थी उस व्यक्ति की सच्चाई सुन लीजिए जिसकी आपने पोस्ट डाली थी। हालांकि मैंने कभी कहा नहीं अपनी उसमें जिस व्यक्ति ने थाने में एप्लीकेशन लिखाई थी। वो व्यक्ति इतना विवादास्पद व्यक्ति था। वही कुंभ में मैं भी था और मैं मिला था उस व्यक्ति से और मुझे खुद मन कर रहा था। कई कई ऐसे समय आया था कि मुझे खुद मन कर रहा था उस व्यक्ति के चार थप्पड़ लगाने का। तो मेरे मन में तो आया था कि उसमें अगर उसके मार पड़ा लिखा हुआ है तो वो सही पड़ी है मार। क्यों? एक मोटा मोटा आपको कारण दे दूं। स्वामी नारायण वाले आए थे वो मठ में एंट्री ले रहे थे और वो उनकी चापलूसी कर रहा था।

00:45:13:01 स्वामी नारायण वाले जो आपत्ति वाले हैं वह लोग मठ में घुस रहे थे और वह उनकी चापलूसी कर रहा था। पैर छू रहा था जाते समय सब कार्य कर रहा था। मैंने उसको टोका तो वो मुझसे ही बिगड़ने लगा। तो थोड़ा ठस बुद्धि था वो और उसके अपने अलग ख्यालात थे जो कहना चाहिए कि किसी और की किसी और के अनुगत कार्य ना कर पाने वाली एक सोच होती है ना कि मैं स्वयंभू बन के ही काम कार्य करूं। कभी अपने पास बुला लीजिएगा। रख के देखिएगा क्या वह किसी और की कैप्टनशिप स्वीकार कर सकता है। तो जब आप किसी बड़े किसी कैप्टन के यहां पर पहुंचोगे ना जो शास्त्रों के हिसाब से कैप्टन है और उसके यहां भी आप उसकी कैप्टनशिप ना स्वीकार करके अपनी कैप्टनशिप चलाओगे तो ऐसी चीजें हो सकती है। मुझे नहीं पता कि उसके मार पड़ी कि नहीं पड़ी वो एक अलग विषय है। मगर पड़ी तो बिल्कुल सही पड़ी। ये सब सबूत नहीं होते

00:46:05:04 हैं। यह सब हो रहा है। अरे भाई हो रहा है तो प्रेजेंट कंटीन्यूस वाले वो दो ना प्रमाण हुआ था वही दो तीन साल पहले की एक ही चीज है हमारे पास ऋषिकेश ब्रह्मचारी जी के स्क्रीन रिकॉर्डिंग और कीचड़ वाली होली बाकी पहली बात तो बाकी के प्रमाण कौन देगा 48 वाले दूसरी बात जो आज हो रहा है उनके प्रमाण कहां है और आज अगर नहीं हो रहा है उसका प्रमाण नहीं है तो बोलना बंद कर दीजिए अकाट चीजें बोलिए अकाट भगवतानंद जी मेरा मेरा निवेदन है आपसे अकाट्य चीजें बोलिए अकाट्य अच्छा अब बात करते हैं कीचड़ वाली होली कीचड़ वाली होली खेली जा रही है वहां पर जो होली खेलने वाली मातृ शक्तियां है वो कौन है उनकी माताएं और उनकी बहने और तो और पूज्य गुरुदेव जगतगुरु शंकराचार्य वहां पर स्वयं विराजमान है उनको उसमें दोष नहीं लगा ठीक है? मगर अन्यों को उसमें लगा और आज तीन साल से वह प्रेजेंट कंटीन्यूस में बनकर चल ही रहा है। यह कीचड़ वाली होली बंद नहीं हुई है। तब से अब तक लगातार चल रही है। यही तो है। मठ में यही हो रहा है। वो स्क्रीन रिकॉर्डिंग

00:47:20:14 लगातार चल रही है। वो जो चैट है वो लगातार चल रहा है। वो जो कीचड़ वाली होली है वो लगातार चल रही है। तभी तो आप कह रहे हो पूरी मठ में ये हो रहा है। क्योंकि हो रहा है के संबंध में आपने कुछ नहीं दिखाया। हुआ था के संबंध में आपने कुछ दिखाया। तो अगर हुआ था के संबंध में आपके पास प्रमाण है तो हुआ था बोलिए। हो रहा है मत बोलिए। ठीक? अब हो रहा है के संबंध में आपने कुछ चीजें बोली है। उसको भी ले लेते हैं। वो क्या बोला है आपने? आपने बोला है कि गुरुदेव के यहां पर करौली सरकार आए। बागेश्वर वाले आए जो दुबई जा चुके हैं। ये सब बातें आपने भूल। ठीक

00:48:04:03 है। पहली बात जो मुझे याद है वह मैं बता दूं। आपने एक पोस्ट डाली थी अपने उसमें आपने बताया था मुक्तेश्वरानंद जी जो बौद्ध हैं बौद्ध मलेच हो गए क्योंकि वो मलेच वहां गए थे जब आपने उनको मलेच आप मलेच मानते हो इतना तो है बौद्धों को तो अब मुक्तेश्वर आनंद जी जब जो अभी जो उनके उत्तराधिकारी के रूप में ख्यापित हैं वो जब उत्तरा ये ज्योतिर मठ के संरक्षक संरक्षक और शंकराचार्य के रूप में जाने जा रहे हैं। वह जब इस रूप में नहीं जाने जाते थे। वह जब केवल दंडी सन्यासी थे। वह जब केवल स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज जी के ब्रह्मलीन पूज्य श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी के शिष्य थे। उस समय वह बौद्धों से मिलने गए और उनके बीच में बैठे हुए फोटो लेकर के आपने एक अपने किसी प्लेटफार्म से निर्गत की थी और आपने बताया था देखो देखो वो जो है मच्छों के बीच में बैठे हुए हैं देखिए है ना मुक्तेश्वर जी की तो मच्छो के साथ बैठने वाला तो हमारा विरोधी हो गया उनके कुंभ में लगे हुए वो मंच पर आपका वक्तव्य क्यों प्रसारित हो रहा है आपकी उनसे साठगाठ क्यों हो रही है यह

00:49:19:06 करौली वाले जो है यह जो करौली वाला व्यक्ति है यह कई जगह ऐसी जगह गया जिनसे आपका वो है संबंध क्यों है नहीं होना चाहिए वही फ्री मेंशन से ऐसा हो जाएगा ना सब जुड़े हुए हैं आपस में अरे मैं तो कह रहा हूं आप मुझे दो चार वो नेम एड्रेस दे दीजिए जहांजहां आपने कथा की है बस दे दीजिए देखिए निकाल दूंगा 50ों अशास्त्रीय चीजें धर्म विरुद्ध चीजें हो सकता है फ्रीमेशन से कनेक्शन निकल आए। कम से कम सनातन विरुद्ध तंत्रों से तो कर ही दूंगा। आपके अनुसार मेरे अनुसार नहीं सिद्ध हो जाएगा। तो आप जो है स्वामी श्री राघवाचार्य जी का विरोध भी कर चुके हैं कि उन्होंने बंगाल में ये क्यों किया? है ना? और आप उन्हीं के गुरु के साथ उनके साथ जो है दिखाई देते हैं उनके साथ। क्यों? भाई जो व्यक्ति गलत कर रहा है उसके साथ आप क्या कर रहे हैं? और ऐसा कई बार देखा गया है आपके ही द्वारा जिनका खंडन हुआ है आपने खंडन करने का प्रयास मुझे नहीं पता वह हुआ कि नहीं हुआ मगर जिनका खंडन करने का प्रयास आपके द्वारा किया गया उनके साथ भी आपका आपकी चीजें देखी गई क्यों तो यदि आप जिनका खंडन करने का प्रयास या जिनके प्रति आप विरोधाभास

00:50:34:12 रखते हैं उनके साथ आप खड़े हो सकते हैं तो वो सही है मगर शंकराचार्य यदि जिसको कहेंगे कि तूने जातिवाद के ऊपर जो ये बात कही है ना जातिवादी होने के नाते तूने ये बात कही है ना वो क्या था बटेंगे तो कटेंगे वाली यात्रा निकाली थी ना बागेश्वर जी ने बागेश्वर वालों ने वो निकाला था क्या कहते हैं अ जातपात की करो विदाई हम हिंदू वो सारे भाई भाईाई हम सब हम सब भाई भाईाई और जातपात की करो विदाई वो निकाली थी तो गुरुदेव का जो वक्तव्य है वो क्या आया था कि मैं उसके यहां पर पानी भी नहीं पऊंगा। आया ना विरोध किया ना? मगर गुरुदेव उनके मंच पर भी गए थे। तो गुरुदेव जिनका खुलेआम खंडन कर रहे हैं विभव रूप से खंडन कर रहे हैं उनके साथ यदि गुरुदेव खड़े दिख जाएंगे तो ये मठ में जो है वो हो रहा है अधर्म आचरण अधर्मी लोग घुस रहे हैं और आपके द्वारा जो ठीक नहीं है जो धार्मिक नहीं हो रहा है अशास्त्रीय हो रहा है मगर आप उनके साथ उनका मन साझा करते हुए खड़े मिल जाएंगे वो गलत नहीं तो जितने

00:51:49:13 अंश में जो गलत होता है उसको को कहा जाता है। जितना अंश जिसका जहां पड़ जाएगी बात वहां उनका कहा जाएगा और जितने अंश में जहां जो गलत नहीं होगा उसकी कोई प्रोत्साहन वाली चीजें होंगी उसका एप्रिशिएशन भी करा जाएगा। ये आपसे भी सीखा है। ये मैंने आपसे भी सीखा है। आज आप पता नहीं क्यों अपने सिखाए हुए से ही विमुख हो रहे हैं। ठीक है? तो एक रही ये बात। अच्छा एक यहां पर सोचने वाली बात है। आपका कहना है कि जो पूरी मठ के जो परिककर हैं वो बागेश्वर वालों जैसों से साठगाठ बनाकर चलना चाहते हैं। ये आपने सबूत दिया कि वो इनके साथ खड़े हैं। मैंने भी सबूत दे दिया आप इनके साथ खड़े हो। मलेच्छों के साथ वालों के साथ आप खड़े हो। तो आप भी उसी के साथ शामिल हो रहे हो। तो यह तो फिर आपके यहां भी वही चल रहा है जो आप जिसका आरोप लगा रहे हैं। या फिर हमें मानना पड़ेगा कि जितने अंश में जिसकी जहां जो बात है जो शास्त्री होती है उस पर वो कहा जाता है। भाई जैसे राम श्री राम जी ने कम रामायण के अनुसार उनको बुला लिया था रावण को और वो पुरोहित बनाया था। ठीक है पूजन ने आप आपको ज्यादा ज्ञात होगा। शास्त्रों के मर्मज्ञ हैं आप। तो एक तो यह बात हो गई कि आपने यह कहा कि वह बनाकर चलना चाहते हैं। ठीक है। वो

00:53:04:19 वो डाउटफुल चीजें हो सकती हैं। आपके अनुसार जिस तरह से आप जिस ग्लांस से जिस नजर से आप देख रहे हैं उस नजर से अगर देखा जाए तो डाउट हो सकते हैं। मगर बात यह है कि जब बना के चलना चाहते हैं तो फिर गुरुदेव ने तो वक्तव्य दे दिया था। मैं उसकी मां के हाथ का पानी भी नहीं पूंगा। फॉर एग्जांपल बोल रहा हूं मैं। गुरुदेव ने नहीं कहा था कि इसको YouTube पर डालो। किसने डलवाया? उनहीं परिककरों ने ना जो बागेश्वर वालों के साथ साठगांठ करना चाहते हैं। उसका जो थंबनेल था उस वीडियो का वो इतना ज्यादा वैसा था कि हम लोगों को फोन करना पड़ा कि वो अच्छा नहीं लग रहा। गोवर्धन मटके YouTube चैनल पर के कि वो धीरेंद्र शास्त्री को शंकराचार्य का तमाचा ऐसा कुछ थंबनेल बना था। किसने बनवाया? गुरुदेव ने कहा कि ऐसा थंबनेल बनाओ। कहीं ना कहीं वर्णाश्रम से प्यार था ना। वर्णाश्रम के पक्षधर थे ना जिन्होंने वो बनाया वो थंबनेल। उस वीडियो को डाला कि मैं उसकी मां के हाथ का पानी भी नहीं पूंगा। ये सब सोचने वाली बात है। अकाट्य तथ्य नहीं और इससे मैं दुखी हुआ हूं। सच बताऊं। अकाट चीजें नहीं बोली आपने और

00:54:19:22 मैं नहीं चाहता हूं कि यह चीजें आगे बढ़े। आप चाहे तो इसको रोका जा सकता है। रोक दीजिए। हमारी जो कल की लाइव थी वो अपने उन गुरु भाई तो क्या ही कहूं। गुरु द्रोहियों के बारे में थी जो इस तरह की पीडीएफ को निर्गत कर रहे हैं, बना रहे हैं, लिख रहे हैं। आपके प्रति कोई द्वेष भावना नहीं कहीं ना कहीं मन में आपके लिए प्रशंसा ही है कि आपने अभी वो मलेचराज वाली सीरीज बनाई और यह सब किया और सच कहूं तो मेरे पास समय नहीं मिल रहा था मुझे अ रामपाल वालों ने मेरे विरुद्ध एक मेरा चेहरा बिगाड़ कर उसे राक्षस का बना करके और एक अपने YouTube चैनल पर एक लाइव किया था लाइव नहीं था वो प्रीमियर लगाया था तो उसमें उन्होंने कुछ आक्षेप लगाए थे उन आक्षेप के वह प्राप्त है मतलब शिव जी ने यह किया वो किया वो जो पौराणिक व्याख्याओं पर जो बातें होती है तो मेरे मन में यह भाव आया कि निग्राचार्य जी इस मामले को देख ले तो हम दो लोग हो जाएंगे मतलब उस समय बहुत ज्यादा उनका मतलब हो रहा था हर आए दिन मेरे ऊपर दोद हर आए दिन मतलब 10-10 चैनल्स जो है वीडियोस बना रहे थे क्योंकि हमने उनकी किताबें किताबें जला दी थी और

00:55:35:20 क्या कहते हैं आए दिन विरोध हमने किताबें तो क्या ही चलाई थी जो आयत मतलब हमने विरोध पुरजोर किया था उनका जो वो था वहां जाकर के छापा मारा जहां नकली प्रेस थी उनकी आपने देखा नहीं होगा ये सब मगर ऐसा मेरे मन में भाव आया कि भाई निग्राचार्य जैसे जो मेरा भाई है वो जो है आकर के इसमें वो हो जाए निगराचार्य के रूप में जो है एक व्यक्ति और मनुवादी खड़ा हो जाए और रामपाल वालों को चटनी चटाए क्योंकि मैं थोड़ा सा धरातल पे सक्रिय हो रहा था पुलिस पुलिस थाना कोर्ट कचहरी ये सब तो उधर उन लोगों ने मेरा चेहरा राक्षस का बना के गुरुदेव के बारे में अंट शंट लिख के और हमारे जो ईस्ट हैं शिवजी हैं और जो और पौराणिक अन्य मान्यताएं हमारी उस पर आक्षेप किया था। हालांकि उसका वो है मगर मैं चाहता था कि कोई नाम लेकर के दोबारा से वीडियो बनाए। तो मेरे मन में एक ही विकल्प आ रहा था उस समय कि निग्रचार्य जी तक ये बात पहुंचे और वो इस युद्ध में कूद पड़े। वह जो है रामपाल वाले उसमें मामले में साथ दें। पर वो मेरा जो भाव था भाव मन में ही रह गया और किसी प्रकार से आप तक नहीं पहुंचा। क्यों नहीं पहुंचा उसको मैं अभी आगे

00:56:50:27 बताऊंगा। क्यों नहीं पहुंचा? तो ये बात हो गई। तो वही रामपाल वाला बात मैं बता दूं कि उसमें मुझे यह मालूम था कि आप अगर वीडियो बनाओगे तो वो बिल्कुल अकाट्य टाइप से होगा क्योंकि शास्त्रों के मर्मज्ञ हो तो और मेरे पास समय नहीं मिल रहा था कि मैं ऐसा बनाऊं वो आज भी पेंडिंग ही है वो जो उन्होंने एक लाइव किया है वो रामपाल वालों ने मेरे ऊपर वो आज भी मेरे उसमें जो मैं लिखता रहता हूं ना कौन-कौन से टॉपिक्स हैं जिन पर बनाना आवश्यक है तो उसमें आज भी वो पेंडिंग ही डला है मैं उसको आप तक पहुंचा नहीं पाया और आज जब आपसे वह हुआ इंटरेक्शन तो इस तरह से हुआ तो वो मुझे अच्छा नहीं लगा। खैर आ जाते हैं अपने अपने धर्म के पालन पर है ना स्वधर्म। अब भले ही आप मुझे अर्जुन समझे या खुद को भीष्म या खुद को अर्जुन और मुझको भीष्म। अब हम लोग हो तो गए हैं आमनेसामने।

00:57:57:25 पर मैं ये चाहता नहीं हूं कि ये सब ऐसे इस क्रम में आगे बढ़े। मेरा यही है कि आप मुझे प्रमाण दीजिए। मैं लड़ने मरने को तैयार हूं। जैसे आपने बताया आप नहीं है। वो शिष्य नहीं है जो अपने आप को शिष्य कहते हैं। मगर हमारे जानकारी के अनुसार वो गुरु द्रोही है। मगर मैं तैयार हूं। मगर मुझे ऐसे प्रमाण दीजिए जिसके लिए मैं लड़मड़ सकूं ना। ऐसे प्रमाण मत दीजिए जो हल्के हो जिससे कि बात कट सके। अकाट प्रमाण दे दीजिए मैं जाऊंगा। ठीक है? और थोड़ा सा कोशिश करिए कि आपकी भाषा कहीं-कहीं पर थोड़ी अपमानजनक जैसी दिखने लगती है। जैसे आपने अपना थंबनेल लगाया तो उस पर लिख दिया चेले। हमने आपके लिए जब बातें की थी तो बहुत इस बात का ध्यान रखा था कि आपके उसमें संबंध में कोई भी अनावश्यक बात ना बोली जाए। अनावश्यक आपत्तिजनक शब्द ना बोला जाए। इवन आज भी जो थंबनेल बना है मैं बताऊं तो उसमें दो बार मैंने उसको करेक्ट किया। उसमें जो टाइटल डाला जा रहा था उसको मैंने करेक्ट करवाया कि यह कहीं टाइटल मतलब जो भी चीज है ऐसा ना हो कि हम उनको ये नाम दे रहे हैं जो टाइटल लिखा जा रहा है वो हम नाम जो है भगवत आनंद जी को दे रहे हैं। नहीं हमने दोनों को इधर उधर किया कि भाई हम दोनों के बीच की बात है और विषय क्या है वो ये है तो वो

00:59:12:28 भी करेक्ट किया तो ऐसी कुछ चीजें हैं वो शायद आप कभी जानना चाहते हैं कि नहीं चाहते हैं मैं नहीं जानता हूं अ ठीक है। अब आ जाते हैं अपने धर्म के पालन पर। तो वो भीष्म और अर्जुन की बात नहीं जाएगी। सही वो मेरे ख्याल से अर्जुन और कर्ण की बात ठीक रहेगी क्या? देख देख लीजिएगा। अ बात एक आ जाती है कि पहली बात तो उनका कहना है मैंने इस बारे में बात की थी। आपने एक बात कही है सीता माता वाली बट मैं रह सकती है कि नहीं। तो पहली बात तो ये आ जाती है कि अ ये प्रश्न गुरुदेव से किया गया था कि कोई स्त्री मठ में रह सकती है कि नहीं? तो आक्षेप क्या है? सबसे पहले उस पे ध्यान दीजिए। आक्षेप यह नहीं है कि एक अविवाहिता जो विदेश गमन कर चुकी है जो क्या कहते हैं अपने आजीव कोपार्जन के लिए योग सिखाती है

01:00:28:12 ठीक है और क्या हो सकता है इसमें और क्या ऐड कर सकते हो और जिसकी पुरानी कुछ आपत्तिजनक फोटो ये भी जोड़ देते हैं और आपके अनुसार वो जो लिप टू लिपो वाला जो वक्तव्य है वह भी अच्छा नहीं है उसको चेंज कर सकते हैं आप लिप टू लिप वाला भी ठीक नहीं है तो यह तो आक्षेप यह नहीं था कि ऐसी ऐसी ऐसी ऐसी स्त्री जो है मठ में रह सकती है कि नहीं रह सकती। आक्षेप ये था कि स्त्री मठ में रह सकती है कि नहीं? उसका जवाब निकल दिया था कि गुरुदेव ने सीता माता का उदाहरण दिया तपाक से। ठीक है? दूसरी बात यह आती है कि कैसी कैसी रह सकती है। अब जैसे सीता माता जैसी अब जैसे मान लीजिए किसी भी स्त्री को हम जब सीता माता के उदाहरण देते हुए उस नियम सिद्धांत का प्रतिपादन करेंगे तो उसकी कोई ना कोई चीज तो ऐसी होगी जो सीता माता जैसी नहीं होगी। तो हम कह देंगे कि भैया सीता माता तो क्या कहते हैं? राम के द्वारा हटाई गई थी। अपने पति के द्वारा हटाई गई थी। मगर यह स्त्री थोड़ी ना हटाई गई है। सीता माता ने तो फलाने कलर की साड़ी पहनी थी। इसने थोड़ी है वो साड़ी पहनी है। सिद्धांत यह है कि पिता पति भाई के बिना कोई स्त्री आश्रम में रह सकती है कि नहीं? तो वो रही थी सीता माता। ये मैंने नहीं कहा है। मैं तो जिज्ञासु वश पूछने गया गुरुदेव से। गुरुदेव

01:01:43:22 ने दिया और ऐसा सिद्धांत देते हैं गुरुदेव जो अकाट्य हो। इसीलिए वो जगतुगुरु है। वो मिली मिलाई बातें नहीं बोलते। तो उन्होंने वही सिद्धांत दिया कि सीता माता रही तो उन्होंने कहा कि जो व्यभचारी ना हो वो रह सकती ये उनका सिद्धांत है। यह उन्होंने बोला जो व्यभचारी ना हो किसने बोला? परंपरा प्राप्त जगतगुरु शंकराचार्य ने। ठीक है? कि जो व्यभचारी ना हो वो रह सकती है। तो अगर आपको यह दावा करना है कि मठ में स्त्री नहीं रह सकती है। विजयश्री जैसी। अगर शंकराचार्य जी को आप मानते हैं कि वह जगत गुरु शंकराचार्य हैं तो आपको विजय श्री कोचारी सिद्ध करना होगा। ठीक है? और अगर यह कह देंगे कि सीता माता से तो ये चीज नहीं मिलती है। सीता माता से तो वो चीज नहीं मिलती तो वस्तुनिष्ठ चीजें फिर तो हम सीता माता का उदाहरण कहीं ले ही नहीं सकते। फिर तो हम किसी का भी उदाहरण कहीं भी नहीं ले सकते। कोई ना कोई चीज तो अलग हो ही जाएगी ना। तो फिर ये कैसे तय होगा कि कौन सी स्त्री रह सकती है और कौन सी स्त्री नहीं रह सकती। तो इस संबंध में आपने अपने वीडियो में अकाट्य बात नहीं बोली। गुरुदेव ने अपने वक्तव्य में अकाट्य बात बोली हम सबके गुरु है आपके भी है बोल सकते हैं ऐसी चीजें जो हम नहीं जानते हम नहीं बोलते तो गुरुदेव ने बोला जो व्यभचारी ना हो फिर उसमें उन्होंने ये नहीं बोला वो अपने

01:02:58:26 पति द्वारा निष्कासित निष्कासित की गई हो ये सब नहीं बोला उन्होंने अकाट सिद्धांत दिया वस्तुनिष्ठता पे नहीं गए जो व्यभचारी ना हो वो रह सकती है तो यह निर्णय कौन करेगा कोई स्त्री विभचारी है कि नहीं आप करिए सिद्ध ठीक है दूसरी बात आपने पता नहीं कल का वो वीडियो देखा कि नहीं देखा। हमने उसमें एक चीज और बताई है कि विजय श्री मठ में नहीं रह रही हैं। जैसे अन्य 2000 लोग कुंभ में जाकर के वास करते हैं कल्पवास में रुके थे वहां पर गुरुदेव के शिविर में बहुत सारे लोग तरह-तरह के लोग ठीक है। दुबई से आने वाले लोग दुबई से आए हुए वो लोग भी उस उनके वहां जो उनका प्रवास था गुरुदेव का वहां पर रुके थे उनके शिविर में तो और उनके साथ उनकी वो भी थी हर और अभी भी मैं आपसे आप कहोगे तो मैं उनको लाइव ले लूंगा एक दो दिन में रुके थे दुबई से आने वाले है ना तो बहुत सारे लोग रुके थे उनमें से एक ये विजय श्री भी थी वो मठ में रहती नहीं है ये बात हमने कल बताई है मुझे मालूम है आपने पूरा वीडियो नहीं देखा है बस मैं यही निवेदन है कि पूरा पूरा पूरी जानकारी करिए और अकाट्य तत्वों के साथ अपना वक्तव्य

01:04:14:09 निर्गत करिए और मैं तो कहूंगा कि मत करिए। ये हमारी और जो वो जो गुरु निंदक वो जो गुरुद्रोही है उनके बीच की बातें हैं। है ना? आप इसमें मत पढ़िए। दूर रहिए। और जो आपका जो मुख्य कार्य है पाखंड के खंडन का उसमें आगे बढ़िए। हम लोग उस मत में जाकर के एक मत हैं तो उसमें आप आगे बढ़िए। फिर भी अगर करेंगे तो धर्म जैसे आपका धर्म है यदि आपको आपका धर्म लगता है तो फिर मुझे भी अपना धर्म निभाना पड़ेगा। है ना? अ तो क्या है कि विजय श्री मठ में रहती नहीं है। सवाल ये है कि एक स्त्री मठ में रह क्यों रही है? उस संबंध में गुरुदेव ने बता दिया कि यदि वैभचारी नहीं है तो रह सकती है। आपने नहीं बताया कि कौन रह सकती है, कौन नहीं रह सकती है। ठीक है? सीता माता के उदाहरण और दूसरी बात यह है कि विजय श्री मठ में रह ही नहीं रही है। आज इस समय भी विजय श्री ऋषिकेश में है। वो क्यों नहीं रह रही मठ में? मठ में रहने के लिए उनका मठ में रहना सिद्ध करना होगा ना। तो वो सिद्ध करिए ना। कहीं पे कोई आयोजन हुआ उस समय वो गई। हां इतना है कि जब वह जाती है तो वहां पर सक्रिय रहती है। जैसे मैं जाता हूं तो मैं भी थोड़ा सक्रिय रहता हूं कि भाई मैं जब

01:05:30:07 मैं क्या कहते हैं शुद्ध अवस्था में हूं तो मैंने वहां पर अगर भोजन बांटा जा रहा है तो मैंने भोजन बंटवा दिया जो सामान्य लोग बैठते हैं। हालांकि मैं स्वयं को बड़ा वो मानता हूं तो मैं दूर रख दूर रखता हूं थोड़ा सा अपने आप को स्वयं ही एक भाव रहता है कि ऐसा जो ज्ञान का पुंज है, शक्ति का पुंज है, शुद्धता का पुंज है, मैं थोड़ा उससे दूर रहूं। तो मैं थोड़ा दूर रहता हूं और सामान्य जो बिल्कुल चीजें कर सकता हूं वो करता हूं। तो जैसे मैं वहां जाकर के सक्रिय हो जाता हूं वैसे ही वो वहां जाकर के सक्रिय हो जाती है। मगर वो मठ में रह नहीं रही है। शी इज नॉट ए पार्ट ऑफ गोवर्धन मठ। शी इज ए फॉलोअर ऑफ गोवर्धन मठ।

01:06:10:00 ठीक है? तो आपको आपको अगर इस चीज से आपत्ति है तो आपको उनका व्यभचारी होना सिद्ध करना पड़ेगा। आपको उनका मठ में रहना सिद्ध करना पड़ेगा। तो यह सब अकाट बातें नहीं है। सब बस बातें हैं। बढ़िया बढ़िया अच्छे तरीके से थोड़ा सा गंभीर तरीके से या क्या कहते हैं थोड़ा ऐसे तरीके से कि वो ज्यादा प्रभावशाली हो जाए। हो जाता है। सच के आसपास वाला झूठ। सच के आसपास वाला झूठ क्या होता है? कि हमने 50 आरोप लगाए। 50 में से दो के हमारे पास तीन साल पुराने चीजें हैं जो अकाट नहीं है। थोड़ा थोड़ा डाउट पैदा करने वाले हैं। उस पर बात हो सकती है। जांच का विषय मगर उनके चक्कर में हमने 48 वक्तव्य और दे मारे। हमारा वो व्यक्ति गया था। उसको मार पड़ी। वो जो क्षतिजमानी है वो पहले मठ में ही रहता था। और उसने कुछ ऐसी चीजें की जिसकी वजह से आज वो नहीं है वहां। और यह कोई प्रमाण नहीं है। आपका वक्तव्य है केवल। अरे भाई आपके फॉलोअर्स को आप में आस्था हो सकती है। भगवतानंद जी हमें हमारे गुरु में आस्था है। हमारे गुरु नहीं कह रहे हैं कि वहां किसी को मार पड़ी। आप कह रहे हो तो आपकी कही हुई बात कोई

01:07:25:01 कैसे मान ले? हमको लड़ने मरने के लिए प्रमाण चाहिए। हम ऐसे ही जाकर के नहीं लड़ मर जाएंगे। प्रमाण चाहिए ठोस प्रमाण। कि जब हम वो खोले जब हम वो दिखाएं तो कोई उसमें चू चाचा ना कर सके। समझने का प्रयास करिए। ऐसी चीजों के लिए युद्ध होता है जो चीजें ठोस हो। और जो लोग बिना ठोस चीजों के लिए युद्ध करते हैं वो आप भी जानते हो क्या होंगे। मूर्ख ही तो कहलाएंगे। तो मैं तो वो नहीं हूं। कम से कम मैं स्वयं को मूर्ख नहीं समझता। ठीक है?

01:08:05:25 अब मेरे ख्याल से सभी चीजें हो गई हैं। मैं एक बार देख लूं क्या-क्या मैंने देखा था। हां, एक वो वाली बात आ जाती है कि आपने जो यह वाली बात कही कि कोई कहीं से जुड़ा हुआ है। इस तरीके से हर कोई व्यक्ति जुड़ा हुआ निकल सकता है। हां। तो और उस चीज से हमें दूर हो जाना चाहिए। तो यह सब चीजें अभी देखिए थोड़े दिन पहले पूज्य राघवाचार्य जी महाराज के साथ हमारा जो इंटरव्यू हुआ था उसमें राघवाचार्य जी ने मलेच कहा था उनको क्या कहते हैं अ जो विदेशों से आकर के दंड सन्यास इत्यादि ले लेते हैं। जब उनको मलेच कहा था तो इस धनबाद से एक वीडियो बनाया गया और उसमें कहा गया कि भाई अगर मलेच्छों का फोन है तो क्यों यूज़ कर रहे हो? अगर मलेच्छों का द्वारा YouTube बनाया गया तो क्यों यूज़ कर रहे हो? तो इस तरह से तो कोई कुछ करेगा ही नहीं। ना मलेच्छ कुछ करेंगे ना हम कुछ करेंगे। ऐसे अगर कनेक्शन देखेंगे तो सबका कनेक्शन निकल आएगा। तो कनेक्शन पर हम लोग बात कर चुके हैं। यह वाली बात भी हो गई

01:09:25:24 है। ये जो गुरु द्रोही है ये पता है ये वो लोग भी है जो आपको भी गाली देते हैं। जिन जो ये भारत ये ये सब जो प्रचार प्रसार प्रकल्प इत्यादि जो बिना ये जो बता रहे हैं ना कि गुरुदेव के ही वो है। यह गुरुदेव के द्वारा मठ के द्वारा कोई ऑथराइज ग्रुप नहीं है। WhatsApp ग्रुप जिस पीडीएफ के बारे में यह बताया गया है कि यह पीडीएफ पूरी के शंकराचार्य जी के शिष्यों का एक ग्रुप है हिंदू राष्ट्र प्रचार प्रसार प्रकल्प वहां से निकल के आई है। तो वो कोई ऑथराइज ग्रुप नहीं है। किसी लड़के ने लड़कपन में अपना बनाया हुआ है ग्रुप। आपके नाम से भी कई ऐसी कई YouTube चैनल खुल गए हैं। वो सब आप देखते हो क्या? उसमें क्या निर्गत हो रहा है? आपकी ओर से क्या नहीं हो रहा है। तो वह कोई ऑथेंटिक ग्रुप नहीं है। वह लोग आपको भी गाली देते हैं। तो कल तक आप उनके साथ नहीं थे। आज आप अब आपके पास वो चीज आप एक तरीके से कमकक्षी हो गए। तो ये तो वही वाली बात हो गई ना कि वो बागेश्वर वाले उनके पास क्यों जा रहे हैं? वो क्यों उनके पास जा रहे हैं? आप भी तो अपने विरोधियों के साथ खड़े दिख रहे हो। जो आपका खंडन कर रहे हैं वह भी तो अपने विरोधी के साथ खड़े दिख रहे हैं। जिसको वो गाली दे रहे हैं सुबह शाम ये सोचने

01:10:40:26 वाली बात है। विचारणीय है और तो कौन सा वक्तव्य गुरुदेव किसके बारे में कब कह रहे तो इसके लिए आपको फिर अगर आपको यही सिद्ध करना है कि गुरुदेव ने रिदमम कपूर का विजयश्री का खंडन किया तो आपको फिर गुरुदेव से स्पष्ट कहलवाना चाहिए जो आपने नहीं कहलवाना है और जो आपने वीडियो वगैरह दिखाया वो हमने देखा हुआ है ऐसा नहीं है उसके बारे में बात भी की है तो वो अकाट चीजें नहीं है अकाट सिद्ध करिए अकाट्य अकाट्य ये शब्द को जो दर्शक है हमारे वो रटे वो बात करें जो अकाट्य हो जो अकाट्य ना हो उन बातों को करने से बचे समय व्यर्थ होता है सनातन वो है जो अकाट्य है मनुवादी वो है जो अकाट्य है अकाट्य बातें करिए अकाट्य मलेच्छों की जैसी यह जो चीजें आप लोग पीडीएफ के द्वारा फैला रहे हो यह गुरुदेव के लिए बोल रहा हूं यह जो चीजें आप फैला रहे हो आप ले आओ ना अकाट्य प्रमाण भाई मैंने कहा ना चलेंगे हम आपके

01:11:52:27 साथ हम रिसर्च थोड़ी करनी चाहिए थी। वीडियो पूरा नहीं देखा था तो जल्दी से वीडियो नहीं बनाना चाहिए था। थोड़ा सा वो जो लिप टू लिप वाली वो बहुत थोड़ा निम्न स्तर का शब्द हो गया वो नहीं बोलना चाहिए था थोड़ा बचें ऐसा करने से निवेदन पूर्वक ही कहूंगा मैं क्योंकि आपका सम्मान भी है और मैंने जैसा कि बताया कि इस रूप में आपके साथ आप नहीं दिखना चाहता था मैं किसी को भी तो गुरुदेव कहां किस किस परिपेक्ष में किससे क्या कह रहे हैं तो फिर हमें उसमें चीजें बिल्कुल मीमांसा करनी चाहिए। ऐसे ही नहीं किसी कहीं का ईंट कहीं का रोणा भानुमती का कुरमा जोड़ा ये सब नहीं करना

01:12:49:00 चाहिए। अब एक बात आती है कि कुछ लोग कहते हैं कि मुझे आपसे सौहार्दपूर्ण चर्चा करनी चाहिए थी। ये मैंने क्यों नहीं की? और मेरा वह जो भाव था रामपाल के विषय में आपका साथ प्राप्त करने का कि मुझे एक मनुवादी ऐसा चाहिए था जो थोड़ा सफक्त व्यक्तित्व वाला हो है ना जो रामपाल से लड़े लोहा ले क्योंकि रामपाल का क्या है अभी वो मेरे को समय नहीं मिल पा रहा है मुझे बाहर चालू करना है उधर मैं उसके केस भी करने हैं मतलब केसेस की भी कुछ तैयारियां है मगर बात ये है कि मैं उस समय मनुवादियों की तरफ से प्रखर होके बोलने वालों मैं थोड़ा कम पड़ रहा था और मुझे चाहिए था कोई अपना मनुवादी भाई तो मुझे आपकी याद आई उस समय मगर मैं आप तक अपना वो भाव क्यों नहीं पहुंचा पाया इसका एक कारण है इसलिए नहीं पहुंचा पाया कि कहीं क्योंकि आपको लेकर के थोड़ा सा विश्वास जो है वो डामाडोल है। सीधी बात वो क्यों है वो मैं बताता हूं। हालांकि थोड़ा यह विनोद पूर्ण बात है, फनी है। मगर वह इसलिए है कि यदि मैं आपके पास आऊं यह कहने कि आप इसमें साथ निभाइए तो पता नहीं आप उसको

01:14:04:04 किस रूप में दूसरे दिन वीडियो बना दें। उसको यह मुझे अपनी बात को रखने का, अपनी रणनीतियों को आपके साथ साझा करने में भय है। और यह भय आपने बनाया। यह भय आपने बनाया। क्यों बनाया? भाई मैंने कोई गुप्त बात आकर आपको शेयर करी। हो सकता है कि आप उससे सहमत नहीं है। वो मेरी रणनीति है। तो मुझे इस बात का भय है कि अगर हम में वो बात नहीं बनी तो आप उसको अगले दिन निर्गत कर देंगे। प्रचारित प्रसारित कर देंगे। उसका भय क्यों है? अब वो मैं आपको बताता हूं। मैंने आपका एक वीडियो देखा था जिसमें आपने बताया था कि पहले पूरी मठ में जो सवाल आते थे प्रश्न आते थे सामान्य जनों के ठीक

01:14:53:04 है उनके प्रश्नों के जवाब आप भी देते थे एक टीम थी कोई दो तीन लोगों की उसमें से एक आप भी थे और जो लोग पूरी प्रश्न पूरी पूरी पीठ में अपने प्रश्न भेजते थे कि हमको यह सवाल दो हमको इस सवाल का जवाब दो विधि विषय या दर्शन विषयक शास्त्र के सवाल होते थे तो वह पूरी मठ में भेजे जाते थे और आपका उस वीडियो में कहना था कि मैं भी वो जो लोगों के सवाल आते थे उनके जवाब मैं भी देता था। ठीक है? फिर आपने कहा कि लोगों को यह पता नहीं था कि उनके सवालों के जवाब कौन दे रहा है। लोगों को लगता था कि उनके सवालों के जवाब शंकराचार्य दे रहे हैं। ये आपका कहना था उस वीडियो में। ठीक? तो अब क्या हुआ? कि जिस समय आपका पूरी मठ के साथ अपनत्व था, एकत्व था तो आपने उसके राज को राज रखा आपके अनुसार और आज आप ही जब आपकी वैमनसता है, कुछ दूरियां है, बात पटरी नहीं खा रही है तो वो जो आपने साथ में मिलकर मित्रता पूर्ण जो चीजें की है आप उनको खोल रहे हैं। यह वह वाली बात हो गई जैसे दो लोगों ने मिलकर के कोई खुरापात की मान लीजिए दो बच्चों ने मिलकर के कोई खुरापात की

01:16:08:07 और उसके बाद जब एक लड़का मतलब किसी बात से आपस में लड़ाई हो गई तो उन दोनों में से एक जाके पिता को शिकायत कर रहा है या किसी को भी शिकायत कर रहा है कि देखो देखो वो मुझे मेरा हिस्सा नहीं दे रहा है जुरापात की कुछ मिठाई ले ली या कुछ भी करी तो यहां इसकी वजह से आपका जो व्यक्तित्व है मेरे मन में यह बना कि मैं आपसे कोई रणनीति वाली बात करूं तो कैसे करूं? मैं आपके पास जाऊं किसी और उद्देश्य से और आप उसको दूसरे दिन चर्च से वीडियो बना दें कि देखो देखो या तो आपको मेरी बात समझ में आ जाए तो तो ठीक है। अगर समर्थन नहीं है तो तुरंत आप उस बात का वीडियो बना देंगे। आप बोल देंगे ऐसा ऐसा है वैसा वैसा है। तो यह कारण रहा कि मैं आप तक अपने भाव को पहुंचा नहीं पाया। और यह भाव मुझे आपने दिया क्योंकि आपने ऐसा किया था कि आपने जो चीजें अच्छा अगर वह कार्य गलत था पूरी मठ से सवाल पूछे जाते थे। ठीक है? पूरी मठ से सवाल पूछे जाते थे और आपने कहा कि भैया मैं भी उन सवालों का जवाब देता था। मगर लोगों को मैंने कभी उस समय आपने उस राज को राज रखा। आपने कभी नहीं बताया कि ये जो जवाब है वो शंकराचार्य जी नहीं दे रहे। ये मैं दे रहा हूं। हो सकता है मेरी जानकारी में कुछ अधूरापन हो या आक्षेप नहीं है।

01:17:23:08 एक अपना मनोभाव है वो प्रकट कर रहा हूं। मैंने बहुत समय पहले वो वीडियो देखा था। अगर कुछ कहीं इसमें यह जो चीजें हैं तो आप उसमें संशोधित करके बता सकते हैं। वैसे मैं नहीं चाहूंगा कि उत्तर प्रत की ये श्रृंखला आगे चले। चलिए ठीक है। तो कहने का मतलब यह है कि अगर वो कार्य गलत था तो आपने उस समय लोगों से उसे क्यों छुपाया? और यदि वह कार्य छुपाना सही था तो आज आप उसको लोगों को क्यों बना रहे क्योंकि आपकी बनी नहीं इसलिए मैं अपनी चीजें आप तक नहीं पहुंचा पाया। तो यह सब चीजें थी और रही बात वह योग सिखाने वाली तो वह एक व्यायाम प्रशिक्षिका है जिसको आप योगा प्रशिक्षिका कह सकते हैं और इसकी अनुमति अपने आजीवोजन के निमित्त उन्होंने गुरुदेव से ली है और हो सकता है आने वाले कुछ दिनों में हम गुरुदेव के पास जाएं और गुरुदेव से एक साक्षात्कार या उनके वक्तव्य को प्राप्त कर ले उससे आपका ये जो चीजें हैं शायद आपको संतोष मिल जाए तो ये सारी सारी चीजें थी। मैं कुछ अगर सारे आपके विषय नहीं लिए हैं

01:18:38:13 तो और मैं वैसे इस श्रंखला को नहीं बढ़ाना चाहता हूं। मुझे लगता है कि एक मनुवाद की सेना के रूप में हमें आगे आना चाहिए और उस रूप में हमें समाज को दिखना चाहिए ना कि एक दूसरे को उत्तर प्रतितर देते हुए और कुछ किसी अंशों में जाकर के अगर वैचारिक मतभेद हैं तो वह सौहार्दपूर्ण चर्चा से निपट सकते हैं। उसके लिए सार्वजनिक मंचों पर आकर के भिड़ने की आवश्यकता नहीं है। सम्मान के साथ मैं इस लाइव को विराम देता हूं। जय श्री राम।

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 1:19:17 · 25 Mar 2025

सच के आसपास वाला झूठ भाग 2

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