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00:00:07:10 जी सभी को नमस्कार सत साहेब। अ मेरा नाम गणेश दास है और मैं झारखंड से हूं। गोडा जिला पड़ता है। मैंने संत रामपाल जी महाराज से 2014 में नाम दीक्षा लिया है। हम्म। तो 2014 मतलब उनके वो क्या था? बरवाला कांड था। बरवाला कांड से ठीक करें। ये बरवाला कांड से पहले लिया है। जी। अच्छा ठीक है। तो हम लोग ना विस्तार से बात करेंगे और हो सकता है ये हमारी चर्चा कई एपिसोड्स में हो क्योंकि बहुत सारी चीजें हम लोग डिस्कस करेंगे आराम आराम से। तो सर्वप्रथम एक यह बात आती है कि रामपाल जी महाराज की कहानी जो समाज में शुरू होती है वो यहां से होती है कि उन्होंने सभी धर्मों के पवित्र सद ग्रंथों से खोल खोल कर दिखाकर सिद्ध कर दिया है कि वास्तविक ज्ञान क्या है? वास्तविक ईश्वर कौन है? वास्तविक तत्वदर्शी कौन है? है ना? जी जी तो
00:01:22:12 इसमें तीन विशेषण आए हैं। धर्म और उसके बाद पवित्र और उसके बाद सद ग्रंथ तो रामपाल जी महाराज के द्वारा किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म के रूप में स्वीकार करने का आधार क्या है? जी एक बार फिर से प्रश्न को दोहराइएगा। मैं समझा नहीं कि आप कहना क्या चाह रहे हैं। रामपाल जी महाराज के द्वारा और उनके अनुयायियों के द्वारा आपके जो रामपाल जी महाराज हैं उनके द्वारा और आप लोगों के द्वारा एक क्लेम सबसे पहला जो क्लेम है जिस पर पूरी इमारत खड़ी हुई है। है ना? उस पर यह है कि उन्होंने सभी धर्मों के पवित्र सद ग्रंथों से यह सिद्ध कर दिया है कि परमेश्वर कबीर है। वो तत्वदर्शी है और गीता का ज्ञान काल ने बोला है। ये सब चीजें उन्होंने बोली है। तो जी अब जब वो आप लोग जब यह क्लेम कर रहे हो कि सभी धर्मों के यानी कि जिन जिन बुक्स को उन्होंने यूज किया है उन बुक्स वो बुक्स जिन आईडियोलॉजी से जुड़ी जैसे इस्लाम से क्रिश्चियनिटी से किसी भी आईडियोलॉजी से जुड़ी हुई वो चीजें हैं तो
00:02:37:18 उनको भी उन्होंने धर्म माना है। क्रिश्चियनिटी को भी धर्म माना है। इस्लाम को भी धर्म माना है। सबको उन्होंने धर्म माना है। ठीक है? जी जी तो दूसरी बात उनके जो ग्रंथ है स्क्रिप्चर्स हैं उनको उन्होंने पवित्र और सद ग्रंथ भी बोला है। ठीक है? तो सबसे पहला सवाल यह है कि अ किसी भी विचारधारा को धर्म के रूप में किसी भी ज्ञान को धार्मिक ज्ञान के रूप में स्वीकार करने का रामपाल दास जी का आधार क्या है?
00:03:18:14 किसी भी बात को स्वीकार करने का आधार उनके शास्त्र है। जैसे हम हिंदू धर्म की बात कर रहे थे। हिंदू धर्म में जो भी शास्त्र है जैसे वेद हो गया। मेरी बात आप समझ नहीं रहे। जैसे जैसे कि मैं आपको उदाहरण दे दूं। जैसे कि मान लीजिए कि मेरे पास एक बुक है। जी। एक मिनट दिखाता हूं। मान लीजिए ये है। ठीक है। इसमें मैंने कुछ बातें लिखी है। जो मुझे ठीक लगे। ओके। जी। भगवान के बारे में भी लिखा है। और भी कुछ बातें लिखी है। इस इस किताब को कुछ 10 20 लोग मानते भी हैं। जी। और धर्म भी कहते हैं। तो क्या इस किताब को भी आप धर्म मान लेंगे, धार्मिक किताब मान लेंगे या कोई कारण होगा जिस कारण से आप इसको किसी भी किताब को धार्मिक किताब मानेंगे। वह क्या कारण है?
00:04:17:27 वो कारण यही है कि जो किताब को हम लोग धर्म के रूप में मानते हैं वो वास्तव में ईश्वर प्रदत है। इसीलिए उनको ग्रंथ माना गया है। सद ग्रंथ माना गया है। जिसको कि आप बोल रहे हैं किसी व्यक्ति के द्वारा लिखा गया ऐसा नहीं है। जैसे वेद ईश्वर कृत है। गीता भी गया। मैं आपकी बात समझ गया कि जो ग्रंथ ऐसा होगा जो ईश्वर प्रदत्त होगा उसको आप पवित्र सद ग्रंथ और धार्मिक मानते हैं। जी जी जी अच्छा तो मैं भी कह रहा हूं कि ये ईश्वर प्रदत्त है मुझे। फिर इसको धार्मिक मानेंगे आप? नहीं आपके कहने से केवल नहीं हो जाएगा। उसको प्रमाणित करना होगा कि वास्तव में ईश्वर प्रदत है। तो आपने आपने यह जो क्रिश्चियन वाला है वह कैसे प्रमाणित किया है कि वो ईश्वर प्रदत्त है
00:05:22:00 हम कर देंगे पर जैसा कि आपने शुरुआत में कहा था कि संत रामपाल जी महाराज ने सर्व धर्म ग्रंथों से ये प्रमाणित किया कि कबीर साहब भगवान है पूर्ण परमात्मा है। मैं वो नहीं पूछ रहा हूं। नहीं सबसे शुरू में आपने हम पहले इस पर भी आएंगे। आपके हर प्रश्न का उत्तर देंगे लेकिन शुरुआत में जैसा कि आपने कहा कि संत रामपाल जी महाराज सभी धर्म ग्रंथों को लेकर के खुद को खोल के दिखाते हैं और कहते हैं कि कबीर साहब परमात्मा है। तो इस विषय को आगे बढ़ाते हुए सबसे पहले हम आपसे जानना चाहते हैं कि आपका ईश्वर के विषय में क्या विचार है? ईश्वर ये विषयांतर हो रहा है। देखिए ऐसा है ये विषयांतर हो रहा है। अभी एक विषय चल रहा है कि अगर रामपाल जी अगर रामपाल जी ने किसी आईडियोलॉजी को किसी विचारधारा को धर्म कहा है तो किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म के रूप में स्वीकार करने का आधार आपने बताया कि वो ईश्वर प्रवृत्त होना चाहिए। इसमें हमें आपकी ओर से आप नहीं दे रहे हैं। मगर आपकी ओर से एक हम तर्क खुद ले लेते हैं कि भाई आपको विश्वास है कि मोहम्मद साहब ने सही कहा था। आपको विश्वास है ईसा मसीह ने सही कहा था। ठीक है? रामपाल जी को विश्वास है। अब मुझे
00:06:37:03 पहले तो एक बात बताइए क्या गीता जी काल के द्वारा प्रदत्त है या ईश्वर के द्वारा प्रदत्त है? ये फिर विषय अंतर होने लगा। जैसा कि हमने आप जो प्रारंभ में जो बात शुरू किया था हम उस पर हम आना चाहेंगे। इसके बाद भाई साहब मेरी बात मैं आपको कनेक्ट बता देता हूं। वो कनेक्शन क्या है? आपकी जो यह जो लाइन है ना यह गलत लाइन है। इसको मैं सिद्ध करूंगा। इसी को सिद्ध कर रहा हूं। आपने जो यह कहा है कि ईश्वर द्वारा प्रदत्त जो धर्म जो शास्त्र होगा वो हमारे लिए धार्मिक ग्रंथ है। तो जो ये जो गीता का ज्ञान है क्या वो ईश्वर के द्वारा प्रदत्त है? बिल्कुल। अच्छा वो स्वयं ईश्वर ने दिया है या काल ने दिया है? यह तो काल के द्वारा दिया गया है। और ईश्वर शब्द जो है यह हर के लिए प्रयुक्त होता है। आम भाषा में ईश्वर भगवान को भी कहा जाता है। ब्रह्मा विष्णु महेश को भी कुछ लोग ईश्वर कहते हैं। ईश्वर शब्द केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं होता है। बल्कि भाई साहब मैं आपसे ये कह रहा हूं कि आपकी किसी भी शास्त्र को धर्म के रूप में स्वीकार किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म के रूप में स्वीकार करने का आधार जो आपका पूर्ण
00:07:52:12 ब्रह्म है। उसके द्वारा प्रदत्त ज्ञान है। किसी किसी को भी जिसको ईश्वर कहा जाएगा उसके द्वारा जो है आप मान लेंगे कि ईश्वर द्वारा प्रदत्त है। देखिए पूर्ण ब्रह्म के द्वारा जो ज्ञान प्रदत है उनहीं से मिलता जुलता ज्ञान अगर अन्य शास्त्रों में है तो हमारे लिए मान्य है। चाहे वो कुरान शरीफ में हो चाहे बाइबल में हो चाहे वेदों में हो कहीं भी हो तो हमारे लिए मान्य है। यानी कि जिस शास्त्र में पूर्ण ब्रह्म की बातों के अनुसार बात लिखी होगी कहीं भी थोड़ी बहुत भी वो आपके लिए धर्म धार्मिक ग्रंथ हो जाएगा। जी तो ये मैंने लिखा है पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करो। दिख रहा है आपको? जी तो क्या अब ये धार्मिक ग्रंथ हो गया आपके लिए? नहीं केवल एक शब्द लिख देने से तो फिर मुझे बताइए कितने शब्द कितने शब्द लिखने पर हो जाएगा बताइए ग्रंथ के कुछ नियम होते हैं वो क्या है सिद्धांत होते हैं वो हम वो अलग विषय है अलग विषय नहीं है आप अलग विषय नहीं है मैं कनेक्ट बता रहा हूं आपकी बात कट रही है आपने अभी एक बात कही कि जिस ग्रंथ
00:09:07:15 में थोड़ी बहुत बात भी भगवान से जुड़ी हुई होगी भगवान वो वाले भगवान नहीं जिनको वाइस कैप्टन के रूप में देखते हैं मेन भगवान। ठीक है? पूर्ण ब्रह्म। पूर्ण ब्रह्म के अनुसार जिस भी ग्रंथ में कहीं भी लिखा होगा वो हमारे लिए धार्मिक ग्रंथ है। वो धर्म है। तो ये आपका धार्मिक ग्रंथ माना जाएगा क्या ये? अब आप कह रहे हैं अब आप कह रहे है कि नहीं और भी कुछ होता है। वो और भी कुछ क्या है? देखिए उसके विषय में हम आ रहे है। उस पर भी आएंगे कि ग्रंथ क्या होता है? महाकाव्य क्या होता है? मैंने ग्रंथ नहीं कहा है। मैंने कहा है धर्म। धर्म आप किसी को भी किसी किसी भी बात को समाज में कोई भी संस्था है, कोई भी मत है, कोई भी पंथ है, उस पंथ मत के द्वारा दी जाने वाली शिक्षा, ज्ञान को आप धर्म जब कब कहते हैं? किस कारण से कहते हैं? यह पूछ रहा हूं मैं। आपने कहा कि ईश्वर द्वारा प्रदत्त ज्ञान से मिलता जुलता होगा। उसको हम धर्म कहेंगे। तो यह मिलता जुलता है। पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करो। तो इसको भी जिसमें भी ऐसा कुरान शरीफ है चाहे इसको आपने एक बात कही अभी इसको भी ये धार्मिक ग्रंथ है आपका ये
00:10:22:19 ग्रंथ का क्या नाम है बताइए शिवांश उसको हम पढ़ेंगे तभी तो हम कुछ कह सकेंगे बिना पढ़े हम कह सकते हैं आपने कहा था मिलती जुलती कहीं पे भी बात होती है वो धार्मिक ग्रंथ होता है तो ये मिलती जुलती बात दिखा दी ना पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करो हमको हम तो नहीं पढ़े हैं आपके दिखा आपको दिख नहीं रहा है क्या दिख नहीं रहा है जूम कर दिख रहा है कि नहीं वो हमको दे दीजिए पूरा हम पढ़ लेंगे इसके बाद हम निर्णय करेंगे कि ये है कि नहीं है तो वो तो यानी कि मिलती जुलती बात होने के बावजूद भी कुछ कारण ऐसे होते हैं जिन कारणों से आप डिसाइड करेंगे वो धार्मिक ग्रंथ है कि नहीं। वो कारण क्या है?
00:11:18:14 यानी मेरी बात समझिए। देखिए मैं मैं आपसे शायद आप मेरा प्रश्न समझ नहीं पा रहे हैं। इसलिए ऐसा हो रहा है। यानी कि सिर्फ मिलती जुलती बात होने का होने से आप किसी को धर्म ग्रंथ नहीं मानेंगे। आप उसमें और भी जांच करेंगे। वो जांच का आधार क्या होगा? यह पूछ रहा हूं। जांच का आधार होगा कि वो उनका जो लेखक है वो कौन है? वो कोई प्रमाणित व्यक्ति है अथवा नहीं इसके कौन लेखक होगा? क्या प्रमाणित व्यक्ति किसके द्वारा प्रमाणित होगा? किसी संत महात्मा के द्वारा लिखा होना चाहिए या जिसके बारे में हम जानते हैं कि वो भगवान का भेजा हुआ है उनके द्वारा होना चाहिए। किसी आम व्यक्ति के लिख देने से कोई ग्रंथ नहीं हो जाता। जैसे हम कोई शिवश आपके बारे में कुछ उल्टा सीधा या कोई भगवान के बारे में लिख दे तो वो ग्रंथ नहीं माना जाएगा। तो यानी कि अब आपने कहा कि किसी संत कोई संत होना चाहिए। है ना? जी। तो तो इसका मतलब यह है कि संत के द्वारा जो लिखा गया होगा वो आपका धार्मिक ग्रंथ है। जी और संत
00:12:33:20 की परिभाषा क्या है आपके अनुसार? संत कौन है? शांति को जो प्राप्त कर ले वह संत कहलाते हैं। शांति को जो प्राप्त कर ले वो संत कहलाते हैं। तो आज के टाइम में कोई आपके सामने ये रामपाल जी को छोड़कर के संत है क्या? नहीं। अच्छा शांति से मतलब है वो युद्ध वगैरह ना करे। नहीं शांति का मतलब होता है जैसे श्रीमद् भगवत गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में कहा गया है कि भारत तू सब प्रकार प्रकाश उस परमेश्वर की शरण में जा उनहीं की कृपा से तू परम शांति को यहां परम शांति जिस परम शांति की बात हो रही है उनको जो प्राप्त कर ले वो संत होता है वो संत होता है उसके द्वारा लिखा हुआ कोई भी ग्रंथ आप धार्मिक मानेंगे जी तो कुरान को किसने लिखा और क्या वह शांति को प्राप्त थे?
00:13:45:13 कुरान शरीफ मोहम्मद साहब के द्वारा लिखा हुआ है और वो भगवान से मैं पूछ रहा हूं क्या वो शांति को प्राप्त थे? बिल्कुल। आपने कहा जो संत जो संत महात्माओं के द्वारा लिखा गया ग्रंथ होगा वो धार्मिक ग्रंथ है। अब उसके बाद आप आपने बताया कि संत वो है जो शांति को प्राप्त हो चुका हो। यानी कि जो परम शांति होती है मोक्ष को है ना मोक्ष अलग विषय है। मोक्ष नहीं तत्व से तत्व से जान लेना। तत्व से जान लेना। इतना ही बहुत है। हां। तो क्या मोहम्मद साहब आपकी उस संत की कसौटी पर खरे उतरते हैं?
00:14:38:00 जी नहीं नहीं तो फिर वो आपका धार्मिक ग्रंथ कैसे हुआ? इसलिए हुआ क्योंकि उसमें जो भी ज्ञान दिया गया है यानी देखिए भाई साहब अब थोड़ा सा मैं अब कहूंगा आपकी बातें बदल रही आपने कहा था कि संत के द्वारा जो भी लिखा गया होगा वो धार्मिक ग्रंथ माना जाएगा ऐसे किसी के भी लिख देने से नहीं माना जाएगा फिर मैंने संत की परिभाषा पूछ ली संत के कसौटी पर वो जो है मोहम्मद साहब वो खरे नहीं उतर रहे मैं जानता हूं कोई नहीं उतरता सिवाय आप आप जिनको मानते उनके अलावा तो जब वो खरे नहीं उतर रहे हैं संत के द्वारा जो लिखे हुए जो ये हैं वो संत है ही नहीं वो शांति को प्राप्त है ही नहीं तो फिर आप उनके ग्रंथों को धार्मिक ग्रंथ कैसे बोल रहे हैं क्यों बोल रहे हैं
00:15:28:00 देखिए शांति को वो प्राप्त है कि नहीं इस विषय पर विचार करने से पूर्व हम अचानक ऐसा नहीं कह सकते हैं कि उन्होंने शांति को प्राप्त कर लिया कि नहीं किया ऐसे फिलहाल हम कहा आपने मैं आपको क्लियर कर दूं। पहली बात तो आपने भी कहा है कि वो संत नहीं थे क्योंकि वो शांति को प्राप्त नहीं थे। दूसरी बात मैं आपके द्वारा बता दूं। आपने एक किताब लिखी है मुसलमान नहीं समझे कुरान का ज्ञान। जी यानी वो तत्व से नहीं जान पाए। जी मुसलमान तो उसमें मोहम्मद भी आते हैं। बिल्कुल। आते हैं तो फिर कहां से वो शांति को प्राप्त होने वाले हो जाएंगे? उसमें मतलब कि जो आप वो कह रहे हैं ना कि ऐसा हम लोग क्लियर नहीं कह सकते कि वो शांति को प्राप्त है कि नहीं है। ये कह रहे हैं आप मगर आपकी ओर से क्लियर है कि वो शांति को प्राप्त नहीं है क्योंकि वो जान नहीं पाए कुरान का ज्ञान ये ये केवल मोहम्मद साहब के लिए नहीं है। आम जो मुसलमान है वर्तमान के समय उनके लिए वो किताब लिखा केवल नहीं केवल नहीं जो जो आज के जो मुसलमान है वो मोहम्मद साहब को जो आयतें उतरती थी मोहम्मद साहब अपने लोगों को बताते थे कि इस आयत का ये मतलब है उस आयत का वो मतलब है वो आगे चला
00:16:43:13 तो मोहम्मद साहब आपके अनुसार संत नहीं है। मोहम्मद साहब आपके अनुसार जो है वह शांति को प्राप्त नहीं है। मोहम्मद साहब कुरान के ज्ञान को समझने वाले भी नहीं है। तो जब वह नहीं है तो फिर उनके द्वारा दिया गया जो ग्रंथ है वह आपके लिए धार्मिक कैसे हुआ? असल में बात ये है मैं बताऊं। बात ये है कि इसका जो ये प्रश्न चल रहा है, इस प्रश्न में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रश्न में बात करने से पहले हमें यह पता होना चाहिए कि धर्म क्या है? जब हम यह पता कर लेंगे कि धर्म क्या है? तो हमारे लिए स्पष्ट हो जाएगा कौन सा धार्मिक है कौन सा नहीं है। धर्म क्या है? जीव की चाह का जो वास्तविक विषय है मैं बोल लूं धर्म यह है क्योंकि वो वो प्रश्न छेड़ दूंगा उसमें भी आपको घंटा भर लग जाएगा। जीव की चाह का जो वास्तविक विषय है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि विधान मर्यादा का नाम धर्म है। तो यानी कि जो शास्त्र सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की बात करेंगे और उसको प्राप्त कराने की बात करेंगे
00:17:58:19 सर्वशक्तिमान ईश्वर की बात करेंगे वो हमारे लिए और उनके उसको प्राप्त करने के लिए प्रमाण और युक्ति के साथ तर्क के साथ जो परंपरा प्राप्त रूप से हमें प्राप्त हुआ होगा तो उन शास्त्रों को हम हम धार्मिक कहते हैं। हमारी परिभाषा है। अब आपकी परिभाषा यह है किसी ने संत ने लिखा हो तो आपके ही अनुसार कोई संत है नहीं। यहां तक कि व्यास इत्यादि भी संत नहीं थे। महर्षि वेदव्यास जी जिनके द्वारा आपको वेद मिल रहे हैं, जिनके द्वारा आपको पुराण मिल रहे हैं, वो भी संत नहीं थे क्योंकि उनको भी तत्व ज्ञान नहीं हुआ था। तो फिर ये धार्मिक ग्रंथ कहने का दिखावा क्यों नहीं? आप सीधे कहिए कि हम कबीर सागर को धार्मिक ग्रंथ मानते हैं और उसके अनुसार जो होता है उसको हम कह देते हैं ये धार्मिक ग्रंथ है। मगर वास्तविकता में वो तत्व ज्ञान को ना जानने वालों ने लिखे हुए ग्रंथ है। इसलिए हम नहीं मानते। वास्तव में ये है मगर हम कह देते हैं। आपको ये मानना पड़ेगा इस चीज को।
00:18:59:18 देखिए आप बोले जा रहे हैं, बोले जा रहे हैं। हमने ऐसा कहां कहा कि व्यास जी संत नहीं थे या फिर गीता जी क्या कहता है? वेद आदि ये ग्रंथ नहीं है। क्योंकि ये संत के द्वारा लिखा हुआ नहीं। ऐसा हमने कहा नहीं। ये आप पहले पूर्व में क्या जाने रामपाल दास जी ने लिखा है व्यास इत्यादि को भी तत्व ज्ञान नहीं था। ये तो शास्त्रों में भी लिखा अन्य ग्रंथों में भी लिखा हुआ है। ठीक है। वो ठीक है। हम आपकी बात वो बाद में देखेंगे। वो लिखा है उसका मतलब क्या है? मगर फिलहाल वो संत नहीं थे। उनके द्वारा दिया गया जो ग्रंथ है वो धर्म ग्रंथ क्यों? उसको जब आपको संत रामपाल जी महाराज ने ऐसा कह दिया कि अभ्यास आदि को तत्व ज्ञान नहीं थे। यही बात अगर पुराणों में लिखा हुआ है अन्य शास्त्र ये दूसरी बात है आपका यह मानना है कि व्यास को तत्व ज्ञान नहीं था ये आपका मानना है वो कारण उसका कुछ भी हो शास्त्र हो या कुछ भी हो सुन लीजिए सुन लीजिए सुन लीजिए देखिए व्यास जी व्यास जी को तत्व ज्ञान नहीं था कारण इसका कुछ भी हो मगर आप तो ये स्वीकार अंतत गतवा कर रहे हैं कि व्यास जी को तत्व ज्ञान नहीं था तो जब आप ये स्वीकार कर रहे तो उनके द्वारा प्राप्त
00:20:14:26 होने वाले जो धर्म ग्रंथ है लिखे गए जो धर्म ग्रंथ है मोहम्मद को भी मोहम्मद जी को भी तत्व ज्ञान नहीं था आपके अनुसार तो फिर उनके द्वारा मिलने वाला ईसा को ईसा को भी तत्व ज्ञान नहीं था आपके अनुसार तो फिर उनके द्वारा ये सब मिलने वाले जो धर्म ग्रंथ है इनको आप धर्म ग्रंथ क्यों कह रहे हो आप देखिए या तो आप अपनी परिभाषा को चेंज करिए वो सही परिभाषा बताइए जिससे कि हम इन सबको धर्म ग्रंथ मान सके आपने जो परिभाषा बताई है उसके अनुसार ये धर्म धर्म ग्रंथ सिद्ध ही नहीं हो रहे तो फिर आप क्या ढोंग करते हो बोलने का कि ये धर्म धर्म ग्रंथ है सभी धर्मों के ग्रंथों से हमने प्रमाणित कर दिया वो परिभाषा सही नहीं बताई आपने इसका मतलब आपने कहा कि जो संत के द्वारा दिया गया होगा ऐसे किसी के भी द्वारा लिख देने पर नहीं माना जाएगा किसी संत प्रमाणिक भाई आपके आपके अनुसार ना व्यास प्रमाणिक संत है आपके अनुसार ना मोहम्मद प्रामाणिक संत है आपके अनुसार ना ईसा ईशु ऐसा प्रमाणिक संत है जवाब बोल रहे हैं ये मैंने कुछ कहा आपको? अरे भाई आप अच्छा तो मैंने अभी आपसे पूछा अभी चलिए ठीक है। आपने कहा नहीं कि मोहम्मद संत नहीं थे। कहा नहीं व्यास जी का नाम ले रहे हैं और सबका नाम ले व्यास जी के लिए भी लिखा है ब्रह्मा जी के लिए
00:21:29:27 भी लिखा है कि इनको तत्व ज्ञान नहीं था। सब के लिए लिखा है इनको तत्व ज्ञान नहीं था। यह कोई संत सिद्ध नहीं हुआ। आपकी परिभाषा मैं मैं आपकी बात पर बात कर रहा हूं। अच्छा आपको तत्व ज्ञान हुआ फिर विषयंतर मैं अभी एक चीज क्लियर कर रहा हूं। देखिए मैं ये क्यों पूछ रहा हूं जिससे जब हम आगे बात करें तो हमें पता हो कि किस शास्त्र से प्रमाण लेना है। समझ रहे हो? इसलिए यह जानना आवश्यक है कि आप जिनको जिन जिन व्यक्तियों को मानते ही नहीं है कि वो तत्व ज्ञान वाले थे वो जो है वो संत थे और आपकी परिभाषा है कि जो संत के द्वारा दिए गए शास्त्र होंगे वो हम मानेंगे कि धार्मिक है ये आपने कहा तो इसलिए अब हम चेक करेंगे कि भाई ये धार्मिक तो सिद्धि नहीं हो रहे क्योंकि आप ही कह रहे हो कि मोहम्मद वशिष्ठ और जो ईसा है ईशु है ये सब जो है प्रामाणिक संत नहीं थे हमारे लिए भी नहीं हमारे लिए व्यास प्रमाणिक संत है। आपके लिए व्यास भी नहीं है। और अगर अगर केवल भगवान की बात लिख देने से ही वो संत होने की आवश्यकता नहीं है। प्रामाणिक होने की आवश्यकता नहीं है। केवल भगवान की बात होनी चाहिए। तो तो फिर ये भी मान लो इसको भी ग्रंथ
00:22:45:03 कह दो धार्मिक ग्रंथ।
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कुरान, इस्लाम और रामपाल का तत्वज्ञान!
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