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00:00:00:02 मैंने कहा मैं समर्पित होना चाहती हूं और जो मैं चाहती हूं वो वहां पे दे दीजिए आप फटाफट बैठ के फोटो फोटो खींच के मेरा आईडी बना दिया समर्पण भी करा दिया और वो पैसा वैसा ले वो सब शिवलिंग को फेरे दिलाना यार पे रहूंगी और ज्यादा कनेक्शन माउंट आबू से नहीं रखूंगी शुक्र कीजिए आप कि वो एक सबूत [संगीत] है मेरे पास धूम धूम मात्र लेकिन पता नहीं मुझे क्या हो गया कि भाई क्या अंदर जाग गया मेरे चार घर थे जहां पे ये मौतें हुई थी जिसमें मेरा भी घर था सभी एजेंसीज आ जाएंगी हम गोली चलाने वालों के लिए गोली के आदेश ले आएंगे बहुत बुरा हुआ है मैं नहीं [संगीत] चाहती आपकी बच्ची के साथ कुछ गड़बड़ हो और मेरे लिए और उनके लिए कुछ गलत भी बोलने लगे हैं लोग [संगीत] [घंटी की आवाज़] तो अब थोड़ा सा वापस आ जाते हैं वहां पे जहां पे जो बहनें थी वो चली गई सेंटर्स पे हमने ने सेंटर्स के बारे में भी थोड़ा बहुत जान लिया और आप आई हैं वापस माउंट माउंट आबू में और सीधे मैनेजमेंट कमेटी में है ना तो फिर यहां से आपकी यात्रा क्या रही क्योंकि आपने अभी बताया ना कि आप बीच में सेंटर भी चलाया आपने तो यहां से आपकी यात्रा क्या थी वो ट्रेनिंग
00:01:15:06 ट्रेनिंग लेकर के आप वापस जब आई है माउंट आबू मैनेजमेंट वाले में तब आपको गाड़ी मिल गई एक रूम मिल गया और अच्छे से आपका सब हो गया फिर मैं चीजें सुनने लगी मुझे बुरा लगने लगा मैंने इनके पास एक बार बैठ के रिक्वेस्ट की कि मुझे सेंटर दे दो प्लीज। इन्होंने मुझे सेंटर देने में बहुत दिन लगाए। मेरा मैनेजमेंट मैनेजमेंट कमेट में आपका रोल यही था कि जो बाहर से चीजें आ रही है उनको शॉर्ट आउट करना। ये बाहर से खुद खुद राजस्थान जोन के अंदर बाहर के ऑफिसरों को जैसे फॉरेस्ट ऑफिसर जैसे पुलिस वाले जैसे बहुत लोगों में इनका प्वा है वहां उन लोगों को डील करना। बेसिकली मेरा यह काम था एस अ पीआरओ तो मैंने मना कर दिया था कि मैं पीआर नहीं कर सकती आपका पीआर का मतलब होता है कि सिर्फ आपकी प्रशंसा तो मैं वो सिर्फ प्रशंसा नहीं कर सकती अगर सच बताना है तो मैं सच बताऊंगी ना कि एक्चुअली हो क्या रहा है यही था तो फिर आपको सेंटर सेंटर लेने का मन इसीलिए हुआ कि पीआर से आप नहीं संतुष्ट नहीं हां परेशान थी मैं कि मैं पीआर नहीं कर सकती तो फिर कैसे आप बता रही है उसमें भी आईडी नहीं बना रहे थे आपकी ऐसा कुछ था
00:02:30:09 फिर वो सेंटर लेने की बात है तो भाई इन्होंने तो 2012 10 से किस्सा शुरू हुआ कि मेरा आईडी तो बना लिए सेंटर पे जाना है तो तो उन्होंने बनाएंगे इसको ये देना है इसको वो देना है तो दिया मैंने जो भी देना था मेरी मदर को फोन किया एक दिन और हां आईडी लेना है तो यहां से कुछ देना होगा। अरे घस देनी है वहां पर भी घस चलती थी। हां तो मेरे पास कुछ था नहीं देने के लिए। मैं तो अभी तक तो आप ही के पास रह रही हूं। तो मेरे पास पर्सनली तो कुछ था नहीं देने के लिए। मैंने तो जो दिया था शुरू में मेरी नानी ने मुझे कुछ गोल्ड दिया था तो वो गोल्ड निकाल के दे दिया। इन्होंने कहा कानो में नहीं पहनना यहां नहीं पहनना। ब्रेसलेट पहनती थी वो नहीं पहनना। तो वो एक दिन सब निकलवा लिया था। तो वही था मेरे पास एज अ कन्या एज अ कुमारी कन्या क्या पहनती है। हमारे यहां बचपन में ही कान छेदने के लड़कों का भी और लड़कियों का भी होता है ना सनातन में तो वो डायमंड के थे वो दे दिए थे नाक में मेरे एक उस समय सानिया मिर्जा टेनिस स्टार आई थी तो वो एक नथ पहनने का स्टाइल उन्होंने चलाया था वो मेरे फादर ने मुझे दी थी वो मैंने दे दिया था गले में एक छोटा सा चैन था वो दे
00:03:45:13 दिया था तो मेरे पास जो था मैंने दिया था एक टाइटन की घड़ी थी मेरे पास इन्होंने बोला ये गोल्ड प्लेनेट है और गोल प्लेनेट घड़ी नहीं पहन सकती एक समर्पित बहन तो वो भी मैंने दे दिया था मेरे हाथ में एक रिंग थी छोटी सी मेरी मदर ने डाली थी वो भी मैंने दे दी थी तो मेरे पास कुछ ऐसा खास नहीं था मैं क्या दूं समर्पित के लिए तो मैंने मेरी मदर को कॉल किया एक मिनट यहां पे एक थोड़ी सी जिज्ञासा हो रही है आप बहुत रोचक तरीके से आप बता भी रही है जब आप जब आप उनसे कह रही है कि मुझे आप सेंटर दे दीजिए तो सेंटर देना पहली बात तो यह है क्या ऐसा है कि सेंटर मिल जाना कंपैरेटिवली टू एक मैनेजमेंट में अच्छा पद मिलना इससे थोड़ा सा श्रेष्ठ है सेंटर मिल जाना एक ये तो एक बात दूसरी बात यदि दूसरी बात यदि वहां पर आपको क्या कहते हैं घूस देनी पड़ रही है किसी को है ना तो किसको दे रही हैं घूस क्योंकि आप तो स्वयं ही अपना जीवन समर्पित करने के लिए वहां पर आई तो यहां पे एक ये बनता है ना लॉजिक आप मांग किससे रहे हो और किस लिए मांग रहे हो कि मैं तो ये दो ये ये दो चीजें एक तो वो अगर ऊंचा है तो क्यों ऊंचा है सेंटर मिलना और एक ये जो यहां पे यहां पे आपको
00:05:00:16 एक तार्किक सोच आई होगी आपके मन में कि मैं किसको दे रही हूं अगर आपने दिया भीगे तब भी जी बिल्कुल आई थी तो शुरू में मैंने जब ये गोल्ड दिया जिसका जिक्र मैंने किया तो उसमें तो उनका तर्क ये था कि जब भगवान शिव पर समर्पित हुई थी गिरिराज की बेटी पार्वती उमा मां तब उन्होंने फूलों के गहने पहने थे। ये सब नहीं चाहिए तुम्हें। तुम्हारे यहां ये सब क्या करोगी तुम गोल्ड का? तो हम भी सुनते थे हमारे यहां लोकगीत होते हैं कि भाई गौरा घूम रही पर्वत पर शिव को पति बनाने के लिए और नहीं चाहिए मुझे कानों के जिनके कान सजाने के लिए। नहीं चाहिए मुझे गले की माला गला सजाने के लिए। मुझे तो दे दो हर की माला जाप कराने के लिए। ये गीत मैंने सुने भी थे तो छाप थी इधर कि ठीक है छोड़ दूंगी तो क्या हो जाएगा वो मैंने छोड़ दिया था पहली बात दूसरी बात मैं अब क्वेश्चन कर रही हूं हां मैं किसे दे रही हूं जबकि मैं तो समर्पित हुई इतनी तो सेवाएं दे चुकी हूं और अब तो मेरे पास कुछ नहीं है तो इन्होंने बोला कि घर वाले जब तक समर्पित नहीं करते तब तक आप समर्पित नहीं होते हो तो ये फॉर्म जो है इस पर साइन करा के
00:06:15:20 लाइए अपने मम्मी पापा का और जो वो दे सकते हैं वो देंगे आपको तो मुझे दो तीन महीने के लिए घर भेज दिया गया। खुद ही भेज दिया इन्होंने सब खुद ही घर भेज दिया कि घर जाओ अभी आप यहां नहीं आप घर जाओ। तो मैं घर आई इस समय कोई इस समय कोई झगड़े का कोई झगड़ा नहीं था। नहीं 2010 की बात है ये। इस समय कोई झगड़ा नहीं था। मैं घर आई। उम्र मेरी छोटी थी। घर में बहुत हल्ला मच गया कि घर वापस आ गई है और शादीवादी करो। ये वो करो। तो मेरे पर प्रेशर बहुत था घर से कि अगर मैं कुछ ज्यादा दिन रही तो ये मेरी शादी कर देंगे। तो मेरे फादर को मैंने बताई बात मेरे फादर मुझसे बहुत ओपन थे। बहुत मतलब वो फ्रेंड की तरह थे। बहुत अच्छे शिक्षक भी थे मेरे लिए। तो उन्होंने बड़े भाई ने बड़ा भाई पूछने लगा कि कुछ है तो बताओ कैसे क्या करना है। तुम्हारी इच्छा से करेंगे। क्योंकि मैंने उन्हें ये कह दिया था अगर तुमने शादी की तो वो सुसाइड कर लेंगे। तो वो थोड़ा घबरा गए थे घर वाले है ना घबराने के बाद उन्होंने कहा तुम क्या चाहती हो वो बताओ तो मैंने कहा मैं समर्पित होना चाहती हूं और जो मैं चाहती हूं वो वहां पे दे दीजिए आप कुछ दे देंगे तो वो मुझे जल्दी समर्पित कर
00:07:30:21 देंगे तो कुछ क्या घर वालों ने पूछा कुछ क्या लोग आपस में भी मीटिंग करते थे मुझे नहीं बताते थे बट मेरी मदर दुखी थी बहुत तो उनको बहुत प्रेशर था मेरे फादर मेरे ताऊजी मेरा फैमिली आज भी बहुत जॉइ पॉइंट है। ताऊजी, चाचा जी सब इकट्ठे रहते हैं। उनके बच्चे हम ताऊ जी के बच्चों से भी डरते हैं। हमारे ऊपर मेरे मैं अपने घर में बड़ी हूं। लेकिन ताऊ जी के बच्चे मेरे ऊपर बड़े हैं। तो मेरा बड़ा भाई फिर मेरे चाचा के बच्चे मेरे मामा के भी बच्चे आते जाते हैं। सब इकट्ठे हैं आप लोग। तो अभी मुझे इस फैमिली को समझाना बहुत मुश्किल हो रहा था कि देगा कौन? प्रश्न ये था कि वहां पे अगर समर्पित होना है तो मेरे लिए कौन क्या देगा? तो मेरी नानी आई नानी कभी कभी कुछ देती है ना तो नानी आई तो नानी मुझे बोली एक दिन ऐसे ही वाइट साड़ी में आपने क्वेश्चन रोचक किए हैं। मैं रोचक तरीके से बताने भी हूं आपके क्वेश्चन रोचक है। तो [हंसी] मेरी नानी आई और मुझे वाइट साड़ी में देख के रोने लगी। जोर-जोर से रोई वो तो वो रो रही है। मैं कह रही नानी रो क्यों रही हो आप? तो बोली ऐसी जैसे गांव की औरतें होती है ना तो वो वैसे वो रोगी कह रही हाय किसी का लड़का मार दिया तूने तो ये कर दिया मैंने
00:08:46:00 कहा मैंने कहा मैंने किसका लड़का मार दिया अरे तुमने क्या कर दिया तुमने पूरा परिवार बर्बाद कर दिया कोई तो मैंने कहा कौन सा पूरा परिवार तुमको पता है सनातन धर्म में चार विधियां होती है ऐसे होती है वैसे होती है उसके बाद भी आश्रम में जा सकती हो आश्रम तो खुद भी अपना सकते हो मैंने कहा आप रो क्यों रही हो बोली मैं इसलिए रो रही हूं कि वो मामा भात देते हैं भारत माने मायरा आपको पता होगा तो मायरा के मायरा के लिए ना मामा नानी कुछ ना कुछ रखते हैं हमारे लिए मतलब मैं अभी अपने आप को भाग्यवान मानती हूं कि उस दिन नानी आ गई तो वो बोलने लगी मैं तो तेरे मायरे के लिए कुछ लेके आई थी मतलब उसने सबको कुछ ना कुछ दिया था अभी मैं बाकी थी मतलब इस फैमिली में स्टार्टिंग का बच्चा अभी ताऊजी के बच्चों की शादी हो चुकी है मेरी होने वाली है उसको ऐसा लगा तो वो चुपके से कुछ लाके मम्मी को देना चाहती थी। मम्मी ने बोला वापस ले जाओ। कोई जरूरत नहीं है। देखो इसने क्या हाल कर रखा है। इसको क्या देना है। जाके मंदिर में चढ़ा दो। तो मैंने कहा नानी मुझे दे दो। वो जो लाइट बोल रही है मैंने वो खींच ली। मैंने कहा नानी मुझे दे दो। मुझे चाहिए। तो नानी बोली क्यों चाहिए तुमको? तुमको तो शादी नहीं करनी है। मैंने कहा नानी आप ये सोच के तो आपने मेरा मायरा दे दिया। तो बाहर दे दिया। तो बोली
00:10:01:10 उसमें दो सोने के कंगन थे बड़े। और पायल थी जो छोटी-छोटी लड़कियों के लिए लाते हैं। कुछ ज्यादा खास नहीं था। उस समय एक लाख थे। तो बोली अच्छा ठीक है तू रख ले लेकिन तू शादी करा ले। मैंने उसको पूरा पक्का करा कि हां मैं शादी कराऊंगी। तो चार पांच दिन वो सफेद साड़ी भी नहीं पहनी। तो उसको मैंने बोला मैं शादी कराऊंगी। जब नानी चली तो मैंने बहुत जिद करी कि मुझे माउंट आबू जाना है। इन्होंने मुझे जाने नहीं दिया घर वालों ने। मैंने चुपके से उस समय कुल ₹00800 में एक टिकट होती थी माउंट आबू की तो वो ₹700 में किसी से मैंने टिकट कराई क्योंकि मैं ब्रह्मा कुमारी थी मैं सब कुछ सीख के आ चुकी थी कैसे जाना है कैसे नहीं जाना है मेरे को आज सब पता था तो मैंने वो टिकट कराई और मैं माउंट आबू आ गई मेरी नानी की वो पोटरी लगी उसमें कुल मिला के वो उस समय मतलब होगा 10-12 लाख का कंगन होगा उसमें तो वो सब बैठे जाके निर् भाई को बोला कि भाई जी मैं समर्पित होना चाहती हूं। अब मेरी आप आईडी बनवा दो। बोले मुन्नी बहन से बात करो। अब ये मुन्नी बहन क्या थरी है? मुन्नी बहन को देना होता है। वो उसको लक्ष्मी कहते हैं ये ब्रह्मा कुमारीज वाले कि उसको ये देना है आपको जो लाई
00:11:16:14 हो आप। उसने देखा भी नहीं। बस उसने कहा मुन्नी बहन को ये देना है। तो उनसे मेरी मीटिंग फिक्स कराई गई। मुझे वहां भेजा गया। मैंने वो सब जो भी हैंकी था रुमाल था वो सब खोल के दिखाया पैसा दिखाया दिखाया तो इन्होंने मुझे मतलब जो आईडी बनाने में इन्होंने सात से आठ साल लगा दिए और या आज भी सबका नहीं बनाते इन्होंने वो आईडी रातों रात बना दी अगले दिन वो फटाफट बैठ के फोटो फोटो खींच के मेरा आईडी बना दिया समर्पण भी करा दिया और वो पैसा वैसा लेके वो सब शिवलिंग को फेरे दिलाना ये करना वो करना वो मेरा नहीं हुआ तो मैंने मैंने कहा अब तुमने जब आईडी बना दी तो मुझे क्या जरूरत है वो शिवलिंग को फेरे ये सब मैं नहीं लूंगी तो आईडी लिया मैंने और मैंने कहा मुझे सेंटर का सर्टिफिकेट दीजिए आप सेंटर का सर्टिफिकेट दीजिए मैं शांति से आऊंगी जाऊंगी कुछ लोगों को ज्ञान सुनाऊंगी मैंने ये सोचा था सनातन का जो ज्ञान मेरे पास है उसको मिक्स करके मैं कुछ लोगों को ज्ञान सुनाऊंगी और वहां मेरे हिसाब से और जरूरी नहीं है कि मैं माउंट आबू आऊं ऐसा सोच के मैं आ गई थी। तो इन लोगों ने मुझे मतलब मुजफ्फरनगर का एक सेंटर कहीं का जहां को मैं जानती भी नहीं थी और बिल्कुल जंगल बिल्कुल वहां की बहने कहने लगी यहां नहीं आएगी यहां हम क्यों
00:12:31:15 क्योंकि मेरे से ऑलरेडी बहने चिड़ी हुई थी सभी बहने बहुत खार खाई हुई थी वो क्यों वो आप भी समझते होंगे क्योंकि मैं जब वहां थी तो उन्हीं के फैसले किया करती थी ना तो वो बहुत मतलब मेरे से आज भी बहनों की बनती नहीं है उनहीं के खिलाफ तो आंदोलन था मेरा कि तुम लोग गलत यहां से आगे बढ़ने से पहले एक क्वेश्चन आ रहा है कि जैसे आप सेंटर आपको लेना है तो आपको एक तरीके से घुस देंगे ना जी घस और और वहां पर भगवान का ऐसा कोई चरित्र है नहीं जो ऐसा हो जिसके प्रति हमारे मन में आकर्षण हो है ना भगवान [गला साफ़ करने की आवाज़] के वहां पर जो मुख्य भगवान का रूप बताया गया है वो निराकार है और जो लेखराज है वो ऐसे हैं जैसे से बस उन्होंने उनके शरीर में आकर के कहा है ना इस तरह से लेकर तो फिर आपका जो वो था ना एक आत्मिक संबंध एक होता है ना कि हम इसके लिए कर रहे हैं ब्रह्मा कुमारी हां वो भावना किसके लिए थी जैसे कि जैसे कि आर्य समाज वालों से हम बात करें तो आर्य समाज वाले कहेंगे हमारी जो उनकी मुख्य भावना है वो दयानंद जी के लिए है क्योंकि उनके यहां परमात्मा निराकार है तो निराकार के लिए उतनी भावना नहीं
00:13:46:16 है मगर दयानंद के लिए उनकी वो है। भावना है। अगर अगर इस्लाम वालों से बात करेंगे तो उनकी भावना मोहम्मद के लिए है। है मोमेंट क्योंकि उनके यहां भी ईश्वर का कोई स्वरूप है नहीं तो डायरेक्ट ईश्वर के लिए कोई भावना नहीं है। तो जो उनका प्रतिनिधि बन के यहां पर है उससे ही सारा अटैचमेंट होता है। तो ऐसे में आपकी भावना जो है वहां पर क्योंकि अब जो मैं जो यहां दिख रहे हैं वो भी घूस ले रहे हैं। आप उनको घस देकर तो फिर आप वहां पर जुड़ी किससे हो? कहने का मतलब ये है और परमात्मा निराकार है। जी मैं आपको बताती हूं। यही एक ऐसी चीज है जो आपके चैनल पर होनी चाहिए। आप लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं कि कम से कम इस चीज को दूसरों तक पहुंचाने का काम करेंगे। जिस उम्मीद में मैं आपके यहां इंटरव्यू देने आई। अभी आपने जो क्वेश्चन किया है ये मेन पॉइंट है डमाकोलाइज का जो सच में पूछना चाहिए था। बहुत रिलेवेंट क्वेश्चन किया आपने। इन्होंने एक थरी बनाई है कि अपने आप ही मनगढ़ थरी है वो बाद में पता चली मुझे कि गुलजार दादी के तन के अंदर शिव प्रवेश करते हैं और शिव प्रवेश करके शिव की वाणी बोलते हैं वो तब गुलजार दादी को अपना होश नहीं रहता
00:15:02:09 उसके अंदर अवतरण होता है ये एक अंधविश्वास है और ये ये देखते देखते देखते देखते जैसे ओशो रजनीस को मानने वाले लोग जाते मिस्टर विनोद खन्ना जैसे लोग भी वहां जुड़े। ठीक है? और कहीं-क लोग आज भी जुड़े हैं। जिनकी जहां आस्था है वो वहां जुड़ता है। मेरी आस्था सिर्फ शिव में थी और कहीं ना कहीं मैं ये मानती थी कि मैं इनके लिए नहीं उनप तो मेरे को हमेशा डाउट रहा कि ये शिव ऐसे नहीं आ सकते। शिव का अवतरण ऐसे नहीं हो सकता क्योंकि मैंने हलाहल के बारे में भी पढ़ा था। मुझे हलाहल के बारे में भी पढ़ना मतलब मैंने आप सोचो कि काल नेमी हलाल यह सब तो हमने पढ़ा था। हमें हमारे नाना जी ने सब बताया था कि कलयुग में काल नेमी होगा और कैसे कैसे शिव ने वो हलाल पिया था। जिस शिव को कोई धारण करने की बात भी नहीं कर सकता वो शिव आ कैसे सकते है? तो मुझे भरोसा नहीं होता था। पर फिर भी मैंने एक चीज समझ ली कि मैं बहुत बचपन में आई। मेरा एक वीक पॉइंट ये हो गया था कि जिस समय मैं बचपन में आई उस समय उस बात को सच माना था। क्योंकि मेरे को इतना ज्ञान नहीं था। मैं बच्ची थी तो बच्चे को जो बता देंगे आप
00:16:17:13 सोचो उसको बताओ आप ये चाकू है। ये लॉलीपॉप है, ये ब्रेड है, ये दूध है। तो बच्चा वही मानता है ना ए बी सीखने की उम्र में आई थी मैं। उन दिनों मानते मानते जो भावना बनी और जहां मैं फस गई ट्रैप में। अब मैं ये मानने लगी जब मुझे होश आ गया जो भावना मेरी बनी रही कि चलिए यहां नहीं है शिव। है ना? मान लीजिए यहां ढोंग होगा। लेकिन मैं तो शिव के नाम पर आई। मैंने तो भगवान शिव को अपना जीवन दे दिया। मैंने तो यह सोच के भगवान शिव को अपने को समर्पित कर दिया कि मैं अच्छा काम करूंगी। जरूरी नहीं है मेरा माउंट आबू जाना। तो मैंने माउंट आबू से इसीलिए विमुखता दिखाई। बहुत जल्दी माउंट आबू से आ गई कि मैं यहां अपना सनातन वैदिक ज्ञान सुनाऊंगी और सेंटर पर रहूंगी और ज्यादा कनेक्शन माउंट आबू से नहीं रखूंगी। अच्छा तो एक तरीके से मतलब आईडियोलॉजिकली आप ब्रह्मा कुमारी से टूट चुकी थी पहले ही टूट चुकी थी पहले आईडियोलॉजिकली आपको ब्रह्मा कुमारी समझ में नहीं आया था जी बिल्कुल मैम हां ये बहुत ये मतलब एक बहुत जरूरी बात है क्योंकि आइडियोलॉजिकली आप पहले ही वो फिर आपका मोटिव पहले तो फिर आपका मोटिव मोटिव ये रह गया कि आप अपना एक सेंटर चलाएंगे जहां पे आपको सारी सुविधाएं मिल जाए
00:17:32:14 आपके जीवन के लिए पर्याप्त और उसमें आप जो सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करें ईश्वर की बात करें और उसमें ऐसा भी कुछ खास नहीं था कि आपको ब्रह्मा कुमारी का ही एज इट इज ज्ञान देना था उस सेंटर से नहीं ऐसा एक्चुअली ब्रह्मा कुमारी का बोर्ड लगाने के बाद तो आपको बंधना पड़ता था कि आपको वही सुनाना है। मैं तो यह चाहती थी कि मैं भगवा पहनू सबको वैदिक ज्ञान की बात बताऊं। बताऊं इनको कि अग्नि अग्नि पूजा क्यों जरूरी है? किस लिए हम अग्नि कौन मानते हैं? किस लिए हम यह वस्त्र पहनते हैं? और मेरा फेवरेट कलर था सैफरन कलर। ठीक है? और मैं ये कर नहीं पाई। प्रॉब्लम ये थी कि अगर ब्रह्मा कुमारी का बोर्ड बाहर लगाना है तो ब्रह्मा कुमारी की साड़ी पहननी है। और ब्रह्मा कुमारी की साड़ी पहननी है तो जितने जो लोग ज्ञान सुनने आ रहे हैं। एक्चुअली वो भी ब्रह्मा कुमारियों को जानते हैं तब आ रहे हैं। अगर मैं स्टेज पर बैठ के कुछ सनातनी सुनाऊ तो मुझे कथावाचक बोल दिया गया। मुझसे बहने फ्रंट हो गई। मुझसे बहने टूट गई। बहनों ने मुझे यह कहा कि तुम तो कथा सुनाती हो। तुम तो सनातन की रटी बातें बताती हो। तुम तो अंधविश्वास फैलाती हो। तुम ये चार पांच दिए क्यों जलाती हो? मैं रोज एक
00:18:47:18 मैं घर में अभी भी मेरे मुंबई में बहुत जगह नहीं होती मुंबई में। फिर भी हम बालकनी पे क्या मैं पौधे रखती हूं। मैं आपको पौधे बता दूं। वृक्षों की पूजा हमारे यहां होती तो मैं करती थी। मैं सूर्य को जल देती हूं सुबह तो मैं तब भी देती थी। वह तो मैंने मेरे घर में सीखा था। ब्राह्मण हूं मैं तो सूर्य को जल देना इनको पसंद नहीं था। मेरे से मेरे मैं सेंटेंस चार थी तो मेरे साथ रहने वाली छोटी बहने मुझे उल्टा बोलती थी। दीदी आप मुझे हमें क्या सिखा रही है? सूर्य को जल देने का क्या मतलब है? मैं आंगन में तुलसी लगा रही हूं। बड़ा घर लेती थी। मैं कुछ ऐसा कर लेती थी जो रेंट पे लिया गया जो थोड़ा बड़ा हो और फैसिलिटी ज्यादा ना हो। तो किसी का टूटा फूटा मैंने एक बंगलो लिया था गाजियाबाद में कि मैं इसको ठीक कर लूंगी तो मैंने दो तीन चार टोली मिट्टी गिराई उस पे और काफी अच्छा गार्डन बनाया गार्डन के बीचोंबीच मैंने तुलसी लगाई देखिए आप तो वो तुलसी का पूरा एक घर बनाते हैं ना हम लोग वो बनाया तो उस पर परिक्रमा देना बहने कहने लगी ये क्या है मैंने कहा तुम लोग एक्सरसाइज भी करो गार्डन बन जाएगा एक हॉल एक कमरा तो बहनों को यह पसंद नहीं था यह क्या लिया आपने एक हॉल एक कमरा आपको अलग कमरा नहीं चाहिए। तो तब मुझे पता चला पहली बार कि सेंटर इंचार्ज का
00:20:02:19 कमरा अलग होता है। तो मैंने कहा दो हॉल थे वहां पे दो हल थे। एक गार्डन था तो मुझे कुछ ज्यादा नींद नहीं थी। तो मैंने कहा हॉल है तीन बहने हैं हम दो दो कन्याएं थी मेरे साथ जो उनकी भेजी हुई थी। तो हम तीनों सो सकते हैं ना। एक हॉल में तीनों सो सकते हैं। उसमें क्या प्रॉब्लम है? और मैं तो हॉस्टल की तरह समझती थी। जैसे हॉस्टल में पढ़ते हैं या जैसे कन्याकुमार रहते हैं घर में। तो मैंने तीन बेड लगवाए के तीनों यहां सोएंगे। नहीं दीदी आपका तो अलग कमरा होना चाहिए। आपका तो अलग ट्रीटमेंट होना चाहिए। मतलब वीआईपी होनी चाहिए। बहनों के कमरे में कोई जाता नहीं है। मेरी ना कोई आज तक अलमारी की चाबी ना पहले थी ना आज है। मैंने कोई अलमारियां नहीं जुटाई है। मेरे पास कोई ऐसा पर्सनल सामान नहीं है जिसे कोई देख नहीं सकता। मेरे फोन में आज भी बॉलीवुड से होते हुए भी इंडस्ट्री से होते हुए भी आज भी मेरे घर में कोई भी या मेरे फोन में कोई पासवर्ड नहीं है। जरूरत नहीं है मुझे। मतलब मेरा कुछ ऐसा है नहीं। तो बहनें कहती थी कि ये अजीब दुनिया है आपकी। और फिर बेल पत्री का पौधा एक है। मैं शिव जी के लिए दिया वहां जलाऊंगी। शिवलिंग रखे हैं। वहां बाहर उनको मैं अभिषेक करूंगी।
00:21:17:22 अलग-अलग अभिषेक कहने का मतलब यही था कि आप आप जो सेंटर में जाने वाली थी घस देकर के वो आप अपने तरीके से उस सेंटर को चलाने वाली थी। चलाने वाली थी तो नहीं चला पाई। मैं इन्होंने फिर इन्होंने आपको जब सेंटर दिया तो इनको तब तक आपकी आईडियोलॉजी नहीं पता थी कि थोड़ा थोड़ा हमारी चल गई ना। दो बहने मेरे साथ छोड़ी थी ना उन्होंने उनसे पता चल गई। अच्छा तो वो बहनों को लेकर के आपको फिर भी इन्होंने मतलब एक तरीके से ना चाहते हुए भी आपको घस के कारण इन्होंने वो सेंटर दे दिया मुजफ्फर नगर वाला मुजफ्फरनगर वाला फिर फिर फिर क्या हुआ वहां से आगे बताइए मुजफ्फरनगर वाला नहीं मतलब मैंने ही बनाया मैंने ही एक एक मकान ढूंढा मैंने वो दोनों बहनें रखी फिर क्या होता है वो दोनों बहनों को ये बुला लेते हैं वो दोनों बहने मेरी बुराइयां करती है कि ये तो पूजा पाठी है ये तो वो ज्ञान नहीं सुनाती तो ये लोग एक बात पकड़े हुए इनके यहां से ना एक संस्था टूटी हुई है। आपको पता होगा कौन वो फिक्स ड्रेस आध्यात्मिक आध्यात्मिक आध्यात्मिक विश्व दीक्षित वीरेंद्र देव दीक्षित जी तो वीरेंद्र देव दीक्षित को ये लोग शंकर पार्टी बोलते हैं। शंकर पार्टी शंकर पार्टी तो ये लोग क्या मुझे तब पहली बार पता चला तो जो पूजा पार्टी लोग हैं
00:22:32:24 ये उनको भी शंकर पार्टी भक्ति वालों को बोल देते हैं। तो अचानक से मुझे फोन आता है माउंट आबू से निर् भाई का वही जिन्होंने सेंटर दिलाया था वो कहते हैं नीलिमा बहन आप जल्दी से यहां आ जाओ आपके लिए मीटिंग रखें जरूरी है बात करना आपसे तो मैं गई तो मेरे लिए बहुत सारे लोग बैठे थे जैसे मुझे ट्रिबनल बैठती है मुझे सजा दे देंगे उन्होंने कहा कि ये बहने बता रही है आप पूजा पाठी हो ये हो वो हो आप तुलसी पे दिया जलाती हो बेल पथरी पर दिया जलाती हो ये क्या करती हो भर के बाहर दिया जलाती हो ये सब नहीं चलता है ये 2000 12 की बात है। सेंटर का सर्टिफिकेट इन्होंने मुझे 2012 में दिया था। तो मैंने कहा दिया जलाना यह सब करना कोई गलत बात नहीं है। कहा आपने अगर बहुत जल्दी से बंद नहीं किया तो सेंटर बंद कर दीजिए। तो मैंने कहा नहीं सेंटर बंद नहीं करूंगी मैं। आप सोचो जिसके लिए मैंने जद्दोजहद की मेरा परिवार भी मैंने छोड़ दिया। तो इन्होंने एक बार भी नहीं सोचा कि मेरा क्या होगा? मैं कहां जाऊंगी? मैं क्या करूंगी? उन्होंने कहा सेंटर बंद कर दीजिए और सेंटर पर ताला लगा दीजिए और आप अपने घर जाइए। तो मैंने इनसे प्रॉमिस नहीं किया। मैं भी अभी तक थोड़ी हिम्मत वाली हो चुकी थी। मैं अकेली वहां से आ गई। मेरे साथ बहने नहीं आई। कोई भी बहने मेरे साथ आने के
00:23:47:27 लिए रेडी नहीं थी। तो मैं अकेली वहां पे आई। तो इन्होंने एक एक मतलब सेमिनार रखा था वहीं पे। मेरे को आना था जिस दिन उस दिन एक कुमारी को दादी ने भेजा जिसका नाम नीलम बहन था। आगरा से तो वो लड़की किसी को कह रही होगी कि मुझे कोई ऐसी बहन चाहिए जो केयर करे। तो वो बहन थोड़ी सी सीधी साधी सी थी जिसको रखने के लिए शायद कोई तैयार नहीं था। तो दादी रतन मोहिनी ने मुझे बुलाया। दादियों से दादियों को मेरे से प्यार बहुत था। वो क्यों था वो तो अभी तक आपको पता चल चुका होगा। तो मेरी सारी बातें फैली जैसी तो दादी रतन मोहिनी को स्नेह बहुत था मेरे से क्योंकि मैं बचपन में उन लोगों के साथ रही तो बेटी जैसा देखते थे तो उन्होंने कहा दादी ने बुलाया आपको एक बहन आपको देंगे तो मैं गई तो दादी ने कहा इस कन्या का आपको ध्यान रखना है मां की तरह से पालना देनी है शुक्र कीजिए आप कि वो एक सबूत है मेरे पास जो आज मैं बोल रही हूं आपको वो उसकी पूर्णतः गवाह है वो आज तक जुड़ी हुई है मुझसे तो वो दादी ने मेरे साथ भेजा और मैं रो रही थी। मैं बहुत परेशान थी। व्हेन कोई भी आपको इग्नोर करता है, रिजेक्ट
00:25:03:08 करता है। तो फॉर द टाइम आपको क्या लगता है कि मेरे में बहुत कमियां होंगी। शायद मैं बहुत खराब होऊंगा। शायद मैंने कुछ ज्यादा गलत कर दिया। तो मैं खुद से रिग्रेट हो रही थी कि मैंने क्या किया ऐसा? तो वो लड़की ने बोला दीदी मैं रहूंगी आपके साथ। वो बस उसकी टिकट करा के दादी ने मुझे भेजा और मैं यहां आ गई गाजियाबाद। तो जो दादी है जो दादी है रतन मोहिनी जी तो वो नहीं है। अब नहीं है। मतलब वो इनके वो जो बीके के काले कारनामे होते हैं जैसे लोगों को बहलाना फुसलाना वो उन सब में इन्वॉल्व नहीं थी क्या? मतलब वो भी तो वही ले उनको इंफॉर्मेशन थी। पता सब था। अच्छा वो चुप थी बस। पता सब था। थी उनकी दर्शक दर्शक थी तो एक तरीके से एक तरीके एक तरीके से कहना चाहिए कि जो आपके जो मेन जो वो हुआ है विरोध बीके वालों से उससे काफी पहले से थोड़ा सा एक मानसिक वैचारिक विरोध चालू हो गया था आपके हिंदुत्व की वजह से सनातन सनातन की वजह से सिर्फ हिंदू नहीं कहूंगी मैं कट्टर सनातनी ब्राह्मण कहूंगी उसकी
00:26:18:16 वजह तो फिर फिर वो सेंटर फिर चला नहीं चला फिर वापस कैसे आ गई आप दोबारा से अगर कोई सनातनी है सोचे सोच के देखिए कि मैं हिंदुत्व का प्रचार करूंगा मैं तो आपको बहुत सलाम करती हूं प्रणाम करती हूं बेसिकली हम सब सनातनी थे ठीक है बेसिक में मैं मानती हूं ऐसा कि बेसिकली जब बच्चा पैदा होता है नहीं वो रियलिटी है वो रियलिटी किसी भी धर्म में तो उसको धर्म धारण करना पड़ता है चाहे आप सिख में सिखिज्म में जाओ तलवार धारण करना, पग धारण करना, कड़ा धारण करना पड़ता है ना। अगर आप ईसाइयत में जाओ तो वहां भी कुछ ना कुछ धारण करना पड़ता है। अगर आप इस्लाम में जाओ तो धारण करना पड़ता है। लेकिन जब एक हिंदू बच्चा पैदा होता है तो कुछ धारण नहीं करता है। क्योंकि वो ऑलरेडी जिसमें है वो ऑलरेडी आदमी सनातन वो है कि जो जो सबको जन्म देता है तो मैं तो वो हूं तो मैं क्यों किसी की विरोधी हूं ना मैं इस्लाम विरोधी हूं ना मैं ईसाइयत की विरोधी हूं ना मैं क्योंकि मुझे पता है हम सब बेसिकली सुना तो नहीं है वो सब हमारे भाई हम सब सत्य हम सब के पक्षधारी हां जी तो मुझे प्रॉब्लम ये हुआ कि मुझे
00:27:33:22 अकेला कर दिया गया मुझे सब मतलब मतलब पूरी दुनिया भर के ब्रह्मा कुमार कुमारी एक हो गए और मुझे ऐसे कर दिया गया जैसे कोई विभीषण लंका में विभीषण का जो हाल हुआ होगा वो मेरा हुआ है तो फिर ये बहन मेरे साथ आ तो गई अब इन्होंने दूसरा अपना कुछ आजमाया कि इसको निकालने का क्या रास्ता निकाले क्योंकि इसको आईडी दे दी हमने इनको प्रॉब्लम क्या हुआ कि इसको निकाला कैसे जाए क्योंकि एक आईडी का पर्टिकुलर टाइम होता है कि वो वो लाइफ टाइम के लिए होती है और जो सर्टिफिकेट होता है वो एक साल में रिन्यू होता है तो अभी तो साल भर हुआ नहीं था तीन महीने हुए थे कुल तो वो सर्टिफिकेट तो रिन्यू करने से रोक सकते थे पर वो आईडी नहीं बदल सकते थे मेरी हम तो अचानक पता नहीं अंदर अंदर कुछ चल रहा था मेरे लिए कुछ तो भी अंदर चल रहा था कि भाई सबकी एक सलाह हो गई थी इस लड़की को निकालो तो अचानक से इनको मेरी फिर जरूरत पड़ती है भगवान की लीला देखिए आप तो ये लोग मुझे फोन करते हैं कि ये अबकी बार जेन्युइन जरूरत पड़ रही है इन्हें और इन्हें पता है कि मैं सेंटर चला रही हूं और अब इन्होंने मेरे स्टूडेंट्स जो आते थे उन लोगों को तोड़ना शुरू किया। उनके
00:28:48:24 घरों में बहने भेजना शुरू की। एक एक शहर में तीन सेंटर होते हैं। एक मेरा एक दो और सेंटर जो उनके अंडर थे। उन सभी बहनों ने मेरे सभी अनुयायियों को तोड़ना शुरू कर दिया। सभी के घरों में जाके सभी से गलत फोन पर बात करके यह हमारे यहां की नहीं है। हम लोग इसे निकाल रहे हैं। यह हमारे एंटी है। यह संदिग्ध गतिविधि करती है। इसलिए हम पता नहीं क्या-क्या वर्ड उस समय मुझे संदिग्ध शब्द का मतलब पूछना पड़ा था किसी से। ये संदिग्ध क्या होता है? किसी ने मुझे कहा था दीदी देखो आपके लिए क्या लिखा है। मैंने कहा क्या ये संदिग्ध बहुत बुरा होता है। मैंने कहा क्या होता है? तो फिर उन्होंने बताया कि मतलब जो कुछ गलत काम करती हूं तो वो सब वो सब मैंने बहुत सुना लेकिन कोई टूटा नहीं सब आते रहे क्लास चलती रही अचानक से इन्हें मेरी जरूरत पड़ी क्यों पता है आपको ये माइनिंग कर रहे थे ये पहाड़ दौड़ रहे थे ये इललीगल जमीनें जब्त कर रहे थे तो अचानक से एक कलेक्टर साहब आए और उन कलेक्टर साहब ने बोला कि मैं सब कुछ तोडूंगा जो भी आपने इललीगल लिया है अभी मेरे मेरे घर का थोड़ा पॉलिटिकल थोड़ा सा था जान पहचान और मैं ऑफिसर्स के यहां सेवा करने इनके यहां से राखी बांधने जाती थी। कुछ
00:30:04:07 पहचान में लोग समझते हैं कि बहन हमें जानती है कोई बात नहीं। तो इन्होंने मुझे कहा नीलिमा बहन आप आओ यहां पे ऑफिसर से बात करो और ये तोड़ना नहीं चाहिए। फिर मैं आई मैंने सेवाएं करी लेकिन मैं क्या करूं मैं मजबूर मैं वही सनातनी मुझे तो भीष्म पिता बनने से बड़ा डर लगता था। आपको आपने आपने बताया था ना कि आपको उस टीम में डाल दिया गया था जो लॉयर वाली टीम होती है उसका हेड तो वो यही सब वो यही टाइम य से शुरू हुआ इन्होंने बोला लॉयर से मिल लीजिए लॉयर्स आपकी बात सुनेंगे आप लॉयर्स के साथ जाइए आप करना तो मुझे ये चाहिए था अगर मैं बहुत स्वार्थी थी कि यार इनको मेरी जरूरत है अब मैं इन्हें इंप्रेस कर सकती हूं लेकिन वही मेरी गंदी आदत है सच को सच और बुरे को बुरा कहने का पड़ गया था कि नहीं अगर मैं मुखदर्शक हुई तो मुझे भुगतना होगा। ऐसा मुझे धर्म का ज्ञान था वो धर्म कुछ करने नहीं देता था कि धर्म रक्षित रक्षित है। ये जो पढ़ा था ना ये बुद्धि में चलता था कि धर्म की रक्षा तुम करोगे तो धर्म तुम्हारी स्वतः रक्षा करेगा। कि माता नाना जी बताते थे कि माता कौशल्या ने राम को कुछ नहीं शिक्षा दी थी। भवन जाते हुए यही कहा था राम तुम धर्म की रक्षा करना। धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा। तो
00:31:20:00 मैं गई कलेक्टर ने बहुत बुरा बात बताया नीलिमा जी ऐसा है वैसा है नहीं वो वो क्या सीन था वो क्या सीन था जब आपके साथ दो लोग आए थे तो उनको बाहर भेज दिया था किसी को वो जो मैंने आपको बताया था जी जी जी पहले ऐसा कुछ था एक बार ऐसा कुछ था जी जी वो ये हुआ था मैं डिटेल में इसलिए नहीं बताना चाह रही थी मैंने कहा कहीं कोई बहुत लंबा कन्वेशन ना हो जाए ये नहीं नहीं आप केवल उतना बता दीजिए कि आपके साथ जो लोग भेजें गए थे उनको लेकर के पहले से वो जो कलेक्टर था वो संदिग्ध था मतलब उसकी नजर में वो लोग थे जो आप संदिग्ध थे एक कलेक्टर आए थे मिस्टर श्रीराम मीणा मैं नाम भी ले सकती हूं क्योंकि उन्होंने कारवाई की थी तो यहां पे भरत नाम का एक भाई है जो बहुत गलत काम करता है और वो मैं किस लिए बोल रही हूं क्योंकि उसके बहुत सारे रिकॉर्ड्स हैं जो मैं दिखा उस पर आरोप उस पर आरोप है कई आरोप नहीं सिद्ध सिद्ध हो चुका है। अच्छा मतलब वीडियोस आई आरोप लगे लेकिन वो निकाला जा चुका। उसके बाद उसके ऊपर आक्षेप लगे। गलत चीजें हुई। बहुत कुछ आरोप भी है सिद्ध भी है। दोनों चीजें हैं उस कुछ आरोप डिसीजंस भी आ चुके हैं।
00:32:35:08 तो वो भरत भाई एक लता बहन इनको मेरे साथ भेजा गया कि आप श्री राम मीणा से जाके मिलिए और कलेक्टर को बोलिए वो हमारे यहां कोई तोड़ाफोड़ी ना करें। तो लता बहन इनकी वकील है। नोटरी की एक वकील रखते हैं ये। लेकिन वो क्या करती है? उनकी कितनी रिससिबिलिटी है वो मैं नहीं जानना चाहती उसमें। वो मेरे साथ भेजी गई कि क्या करती है नीलिमा कितनी वफादार है जाके देखो। तो कलेक्टर ने भरत और लता बहन को बाहर निकाल दिया। उन्होंने बोला आप बाहर जाइए। उन्होंने वकील का पाट दिया। उन्होंने कहा बाहर जाइए आप। आपसे बात करने मैं नहीं बैठा हूं। वो तो क्योंकि किसी जान पहचान से मैं गई थी तो उन्होंने कहा नीलिमा बहन मैं आपको कुछ सच्चाई बताना चाहता हूं मैं इनके सामने बात नहीं करूंगा लेकिन क्योंकि मैं छोटी थी मेरी एज कम थी मेरा कद कम था मैं कोई इतनी बड़ी नहीं थी जितना बड़ा कलेक्टर समझ रहे थे मुझे तो मैंने कहा कलेक्टर साहब आप इनहीं के सामने बात करिए प्लीज मेरी रिक्वेस्ट है क्योंकि ये बड़ी बहन है तो वो बैठी और उसको बाहर निकाल दिया गया क्योंकि भरत उसके नजरों में आरोपी था तो भरत को बाहर निकाला गया और हमें में बताया गया कि आपने बहुत सारी इललीगल आदिवासियों की जमीन को घेरा हुआ है जिस पर आपका त्रिलोक
00:33:50:19 भवन बिल्डिंग खड़ी हुई है जहां पर फॉरेस्ट की जमीन है हम आप उसे छोड़ दीजिए और फॉरेस्ट से भी हमारे पास शिकायत है कुछ रेवेन्यू की भी साथ झगड़ा है वो भी हमारे पास शिकायत है तो आप इसको खुद खाली कर देंगे तो हम कुछ भी नहीं कहेंगे हम आपको एक टाइम देंगे फॉरेस्ट ऑफिसर से मैं बात करा दूंगा उस टाइम पे अगर अगर खाली हुआ तो ठीक नहीं हुआ तो हम लोग एक एजेंसी बुलाएंगे। उस एजेंसी से आपकी पूरी बिल्डिंग को तोड़ेंगे क्योंकि हमको जमीन चाहिए। हमें आपकी बिल्डिंग से कोई लेना देना नहीं है। अगर आप बिल्डिंग में पहिए लगा सकते हो तो पहिए लगाइए और हटा लीजिए अपनी बिल्डिंग। हमें जमीन दे दीजिए। मेरे पास ऑलरेडी एक शिकायत आई है। उन्होंने ये बोला था। तो मैं जाती हूं जाके यही रिपोर्ट निर्भयर भाई को देती हूं। आपको ये इंडिकेशन भी दी। उन्होंने दिया था कि आपके साथ जो व्यक्ति आए हैं यह वो अपराधी है वो फॉरेस्ट के हां उन्होंने साफ कहा था इंडिकेशन नहीं दिया साफ कहा था वो अपराधी है मैंने बोला उनसे क्यों नहीं मिल रहे हैं भरत भाई को बाहर क्यों बिठाया उन्होंने कहा वो अपराधी है मैं अपराधी से बात नहीं करूंगा तो अब उनकी नजरों में वो अपराधी था लेकिन निर्भय भाई की नजरों में तो बहुत बड़े पद पे था वो तो वहां
00:35:05:22 पे कंस्ट्रक्शन इंचार्ज था हम कंस्ट्रक्शन के लिए वो पैसा पैसा लेता था और वो इललीगल फोर्स की जमीनें घेरता था। वो पहाड़ियां तोड़ता था, माइनिंग करता था और वो पैसा जमा करता था अपने लिए और एक तरीके से कहा जाए जैसे कोई हरिया जैसे जो भू माफिया मतलब जो गुंडा नहीं होता है गुंडा टाइप से गुंडा टाइप भू माफिया था वो इस तरह के कार्य करने वाला इस तरह के कार्य वो बाद में डिसीजन आया मैं डिसीजन आपको भेज दूंगी हां जी निर्भर निर्वर जी को क्या हुआ फिर जी ने मुझे उस मीटिंग से आपने ये फैसला कर लिया कि कौन सही है कौन कौन गलत है? कौन सही है? कौन गलत और ये तो बाहर बहुत कुछ कर रहे हैं। अभी क्या होगा? तो मैंने फिर भी अपना जीवन बचाने के लिए कि मैं सेंटर मेरे से मेरे को सेंटर से निकाल दिया जाएगा। तो मैं इतनी अग्रेसिव नहीं थी। तो मैं अपने आप को समझाते हुए आ रही थी। चुप थी, शांत थी, गंभीर झटका था अंदर मुझे, कि शायद मैं बहुत गंभीर ट्रैप में हूं। मैं बहुत गलत जगह फंस गई हूं। मैंने फिर भी सोचा कि शायद एक प्रयास बताने का करूंगी अगर यह समझ गए तो मैंने निर् भाई को बोला कि भाई साहब मैं गई तो जरूर थी लेकिन भरत की स्थिति यह है भरत को अगर आज ही निकाल
00:36:21:01 दें आप या भरत से अलग हो जाए तो संस्था बच जाएगी संस्था की छवि बहुत खराब हो रही है वो तोड़ेंगे वो आएंगे उन्होंने ऐसा-सा बोला है और काम खराब हो जाएगा वो बहन भी कह रही थी कुछ नहीं होगा बोलने दो ऐसे तो बहुत ऑफिसर बोलते हैं क्या फर्क पड़ता है? हम मिलने गए थे। उसने नहीं किया। बात खत्म करो। भूल जाओ। ऐसे वकील हैं। मैं चुपके से उठकर चलने लगी वहां से कि अगर आपको नहीं समझना है तो ठीक है मैं टिकट कराती हूं। मैं अपने घर वापस जाती हूं। मतलब घर बना सेंटर पे। अभी निर्भर भाई मुझे रोकता है जोर से बोल के चलते हुए। नीलू बहन बोलता था मुझे तो बोलते हैं नीलू बहन थे तो वो मेरे बाप दादा जैसे उम्र के दादा जैसे उम्र के थे पर बहन भाई कहने का यहां एक रिवाज है तो बोले कि नीलू बहन इधर वापस मुड़ो आप तो मैं गई वापस मैंने तो बचपन से इन सबको देखा था तो डरती नहीं थी मैं इनसे लोग डरते थे मैं डरती नहीं थी तो वह सोचते थे मेरी आंखों में खौफ होना चाहिए उनके लिए तो मैंने कहा हां जी भाई साहब बताइए और उस समय डर निकल गया था। अब मेरा डर निकल गया था। जो कुछ अंदर था थोड़ा बहुत पैर
00:37:36:02 था वो निकल गया था। इज्जत कहेंगे जिसको आप सॉरी फिर नहीं इज्जत कहेंगे कि जो इज्जत थी वो खत्म हो गई थी। जो मान सम्मान था वो अब मेरे मन में खत्म हो गया था। तो उन्होंने कहा नीलू बहन इधर आइए। मैंने कहा हां जी उसको शायद उसको कहते हैं लिहाज। वो खत्म हो गया। वो खत्म हो गया था। तो उन्होंने बोला कि आप क्या कह रही है आपको अंदाजा है? तो मैंने कहा हां मैं आपको बताया है बाहर क्या हो रहा है आप भरत भाई को निकाल दो यह कह रही हूं मैं बोले आपने अपनी औकात से ज्यादा बात की है बच्ची हो छोटे मुंह बड़ी बात बोल रही हो पता
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00:38:12:19 है क्या बोल रही हो कितना बड़ा भाई है वो वो क्या है वो जो चाहे वो कर सकता है आपके साथ और सुनो ध्यान से आपने
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00:38:21:08 अगर यह किया ना तो पूरे कैंपस में छोड़िए पूरे ज्ञान में सोसाइटी में दुनिया में कोई सफेद वस्त्रधारी आपको ओम शांति करना पसंद नहीं करेगा अगर हमने यहां से एक पत्र निकाल दिया आप कहां पे हैं? पता है कहां खड़ी है? हमारी दी जमीन पर खड़ी है आप तो मैं उस दिन पता नहीं मुझे क्या हो गया कि भाई क्या अंदर जाग गया मेरे कि चाहे तो हिंदू सनातनी कुछ वो कहो या फिर क्या जगह है मुझे नहीं पता। मैं वापस जो मुड़ी थी मैं तो गई। हां मतलब अपने को बचाने वाली बात खत्म हो गई थी। यह नहीं था अब मुझे कि मेरा क्या होगा? मुझे यह था जो होगा देखा जाएगा। हम तो मैंने बोला ऐसा झुक के मैंने कहा भाई साहब मेरी बात सुनिए ध्यान से कान लगाइए मेरी बात पे और ध्यान पूर्वक सुनिए कहीं पर भी एक वर्ड मिस मत कीजिएगा जो बात मैं बोल रही हूं शायद मेरी आपकी आखिरी मुलाकात है ये तो कहने लगे इतनी हिम्मत तुम्हारी मैंने कहा हां जी मेरी इतनी हिम्मत है हिम्मत अभी आपने मेरी देखी नहीं है ये हिम्मत आप ही ने दी है मुझे आप ही ने सिखाया है और आज जो आप सिखा रहे हैं वो बहुत बड़ी हिम्मत दे रहे हैं आप मुझे मैं अंदर से परेशान थी और वो परेशानी मेरी आज दूर हो गई। जो आपने कहा है ना
00:39:36:12 मैं जो काम कर रही हूं मेरा नाम लेने वाला कोई ब्रह्मा कुमार कुमारी नहीं रहेगा। मैं आपको बताती हूं कि जो मैं काम कर रही हूं अगर मैं इसी पथ की पथगामी रही तो मेरा नाम आपके ब्रह्मा कुमारीज में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। और जो आप कर रहे हैं गलत लोगों का साथ दे रहे हैं। भीष्म पितामह की तरह धृतराष्ट्र की तरह शायद आपको यह नाम समझ में नहीं आएंगे क्योंकि आपको पता ही नहीं है मैं किन का नाम ले रही हूं। आपकी दुर्गति भीष्म पितामह से बुरी होगी। और जब आप शीर्ष सैया पे होंगे, शीश सैया पर लेटे होंगे, बाणों की सैया पर लेटे होंगे। उस समय अगर पानी मांगेंगे ना यही इसी कैंपस में। मैं तो कैंपस की बात नहीं करती अपने लिए। आपको कहती हूं इसी कैंपस में रहेंगे ना आप अपनी जमीन पर इसी कैंपस के लोग आपको पानी देने के लिए भी नहीं आएंगे। आपके आवाज लगाने पर भी नहीं आएंगे। जिस दिन मेरी बताई सच्चाई इन सबके सामने आएगी क्योंकि ये जितने भी वाइट कपड़ों में आपको दिख रहे हैं ये सब शिव की भावना से जुड़े हैं। और जैसे आज मैं टूटी हूं जिस दिन इन्हें पता चलेगा नीलिमा ठीक है। यह गलत है। तो वो सब आपको पहले पानी देना छोड़ेंगे। आपको खाना देना छोड़ेंगे। आपके आवाज पर बोलेंगे नहीं। और जा रही हूं मैं। आज के बाद मुझे किसी बारे में बुलाने
00:40:51:20 की जरूरत नहीं है। ऐसा करके मैं वहां से आ गई थी। और आने के बाद इन्होंने जो मेरे पहचान में लोग थे जो मुझे जानते थे जो मेरा फेवर ले रहे थे बाद में जिनको बातें पता चली जो लोग इनसे जाके लड़े उन लोगों को मारना पीटना शुरू किया। अच्छा ये हुआ। तो फिर आपने फिर बाहर आकर के आप यहां ये नहीं है सेंटर पे नहीं फिर मैं वहां नहीं आई मुजफ्फरनगर नहीं आई मैंने गाजियाबाद में एक सेंटर देखा वही वही प्रक्रिया शुरू की एक सेंटर चालू किया वही सर्टिफिकेट ले गाजियाबाद आ गई दादी को फोन किया जिस दादी ने मुझे सपोर्ट किया था दादी मुजफ्फरनगर में तो इन्होंने बहुत गलत गलत फैला दिया है कुछ भी लोगों को बोल रहे हैं तो मैं कहां जाऊं मुझे कोई ऐसी जगह बताओ जहां आप मुझे सपोर्ट कर सको तो आप क्योंकि क्योंकि मेरा कोई ठिकाना नहीं था ना आप समझिए मैं कहां जाती या तो मर जाओ कहीं पे जाके कुछ खा लो या घर लौट जाओ घर लौट नहीं सकते कैसे लौटेंगे किस मुंह से घर लौटेंगे तो या फिर ये भी जिंदगी जियो तो आपने एक क्रांतिकारी की तरह इनके विरुद्ध इनकी इच्छा के विरुद्ध
00:42:06:26 सेंटर इनके नाम से चलाना ये सोचा नहीं इनके नाम से नहीं इनके नाम से इतना इतना नहीं कर सकती थी मैं कि जिनके साथ मेरा कुछ नहीं बन रहा है मैं उनके नाम पर नहीं बैठूंगी ऐसा सोचा था मैंने तो मैंने दादी से बोला कि दादी आप मुझे डायरेक्ट कनेक्शन का एक सर्टिफिकेट दीजिए और आप मुझे इधर गाजियाबाद में रखिए तो कम से कम मुझे ये था दादियां जिंदा है दादियों को ये खुद जवाब देंगे ये लगा था मुझे ज्ञानी सुनाना था तो दादी ने बोला मैं तुझे बोल रही हूं ना मतलब क्योंकि वो मजबूर थी लिख के कुछ नहीं दे सकती थी दादी तुझे बोल बोल रही है ना वो थ्योरिटी से बात करती थी क्योंकि वो लेखराज के टाइम के लोग थे वो ये समझते थे अभी भी कि शायद हमारी चलती है लेकिन ब्रह्मा कुमारी की एक बहुत बुरी बात यह है कि चेहरा बहनों का है वहां चलता भाइयों का गह बहनें संस्था नहीं चला रही है ये बहनों की संस्था नहीं है इसीलिए बहनों के संस्था के ऊपर जो शीर्ष नेतृत्व में है वो बलात्कारी भी है जिनके ऊपर बलात्कार के केसेस है अच्छा उनको बहनों को संरक्षण दिया गया है। अच्छा ऐसे लोग हैं वहां पर शीर्ष नेतृत्व में मृत्युंजय के ऊपर मृत्युंजय भाई के
00:43:21:27 ऊपर बलात्कार के तीन केसेस आरोपी है वो उसमें बेल पर है प्रकाश
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00:43:28:09 करके एक है वो बेल पे है उसके ऊपर मृत्युंजय के ऊपर प्रकाश के ऊपर नीलू बहन गुलजार दादी की ब्राहणी उनके ऊपर बलात्कार का आरोप है आरोपी वहां पे शीर्ष नेतृत्व कर रहे हैं। उनको यह लोग बचा रहे हैं। हम
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00:43:47:03 खुद मैं उन सब केसेस में फिर तो फिर तो फिर आप जो दादी की परमिशन लेकर और फिर आपने जो है गाजियाबाद आ गए क्योंकि एक और लड़की का जीवन मेरे साथ जुड़ गया था ना मेरी मजबूरी समझिए मेरे साथ एक और लड़की थी आपको ब्रह्मा कुमारी के नाम की जरूरत इसीलिए थी क्योंकि ब्रह्मा कुमारी को जानते हैं लोग उसी के कारण लोग आपसे कनेक्ट मेरा जो पहचान बना हुआ है वाइट साड़ी में ब्रह्मा कुमारी की अब या तो मैं समाज में यह कहूं कि मुझे निकाल दिया गया या मैं समाज में अब यह कहूं कि शायद मैंने उन्हें छोड़ दिया तो छोड़ी हुई लड़की जैसा ट्रीटमेंट करेगा समाज हम हमेशा एक नारी को आंसर देना पड़ता है समाज को तो मैंने दादी जी जी हां जी सॉरी फिर फिर वहां से क्या आपकी लाइफ स्टार्ट हुई फिर दादी को बताया तो सही मैंने लेकिन मैंने मुझे फिर मेरी मां याद आई हम दादी को बता जरूर दिया पर मैंने मेरी मां को एक फोन किया तो मेरी मां फोन पर आई लेकिन रोक दिया गया उन्हें सब घर वाले जो जेंट्स थे घर के वो मुझसे बात करना नहीं चाहते थे और लेकिन मतलब वो जो आप टिकट वो जो आप टिकट कटा
00:45:02:04 के आई थी घर वालों की मर्जी हां उससे नाराज थी वहां से वहां से क्लैश हो गया था आज तक कोई भी बिना पूछे घर से ऐसे लड़की गई नहीं थी जैसे मैं तो मैं पहली लड़की हूं जो घर से ऐसे निकली थी तो उन्होंने कसम खाया था ऐसे लड़की चली गई है वो वापस नहीं आएगी तो मम्मी ने मेरी फोन किया वापस मुझे और उन्होंने पूछा कि क्या बात है क्यों परेशान हो क्या हो गया है तो मैंने बोला कर दिया है इन्होंने मतलब मेरे साथ ऐसा कर दिया कि मैं अब शायराया चला सकूं तो उन्होंने बोला कि तो मैं ब्रह्माकुमारी की क्या जरूरत है सेंटर चलाने के पढ़ाई का क्या होगा? तुम्हें वापस लौटना है? मैंने कहा हां वापस तो लौटना पड़ेगा। तो उन्होंने कहा तुम्हारे फादर की शर्त है पढ़ो पढ़ाई को। पढ़ाई का क्या होगा? अगर तुम पढ़ पढ़ोगी मतलब जो मां बेटी की बात होती है वो उन्होंने की कि अगर तुम एजुकेशन एक्सेप्ट कर लो तो मैं तुम्हारे फादर को मनाऊंगी। अभी क्या होता है सोचो आप। मैं अभी यहां आपके चैनल पर बहुत इमोशनल नहीं होना चाहती। 2010 11 12 तक ये सब चला। 12 में मैं आई सेंटर पे मैंने एडमिशन लिया वापस 11 में।
00:46:17:10 11 में ले लिया था जब मेरा प्रॉब्लम था। 11 में ही मेरी मदर से बात हो गई थी। 12 में मैं पढ़ रही थी। मतलब बीएससी फर्स्ट ईयर में थी। तो अब बहुत बड़ी त्रासदी हो जाती है मेरे साथ। और मेरा घर जाने का एक रास्ता भी खुल जाता है। और जो मेरे साथ बहन थी उसे भी घर भेजने का रास्ता खुल जाता है अचानक से। 2013 का केदारनाथ फ्लर्ट आता है। तो मेरे फादर बहुत बड़े शिवभक्त थे। मेरे उसमें काफी रिलेशन वाले लोग गए हुए थे। गाजियाबाद में वो चार घर थे जहां पर यह मौतें हुई थी जिसमें मेरा भी घर था। जो पत्थर आके रुक जाता है केदारनाथ के रास्ते में गेट पर वहां अंदर मेरे फादर थे हम तो वो हां तो वो हो गया मेरे फादर नहीं रहे
00:47:22:19 कोई बात नहीं हम इस विषय को छोड़ देते हैं स्किप करते हैं हम कुछ और बात कर लेते हैं कोई बात नहीं फिर वो मुझे बुला बुला लिया गया घर पे। मेरे घर वालों ने मुझे बुला लिया। मैंने उस लड़की को उसके घर भेज दिया। अब मैं घर आ रही थी जा रही थी। लेकिन इन्होंने अचानक से कुछ गलत कर दिया जो इनको नहीं करना था। इनको ये सोचना था कि अभी उसके फादर नहीं है तो शायद वो खुद ही छोड़ देगी। लेकिन मैं सेंटर बंद करने तक तो वाइंड अप करने तक तो आना जाना करती ना सेंटर पे। मुझे वाइंड अप करना था पर इनको मुझे समय देना था। इन्होंने समय नहीं दिया। इन्होंने मेरे नाम से एक बहुत गलत लेटर निकाला और जहां मैं दुख में थी, परेशानी में थी, उसी समय पे एक बहुत गलत लेटर सर्कुलेट कर दिया गया। Facebook पर सभी सेंटर्स में क्योंकि यह समझते थे कि श्री राम मीणा जो है फॉरेस्ट के जो डिपार्टमेंट के लोग हैं मैं उनसे अटैच्ड हूं। मैं इनके खिलाफ हूं। तो ये लोग मुझे वहां से रोकना चाहते थे दबाव बना के
00:48:38:19 कि यह हमारे से खुशामद करेगी। और ये फॉरेस्ट वाले लोग जिनकी ये मदद कर रही है क्योंकि फॉरेस्ट वाले लोग इनके पीछे थे। अपनी जमीन लेना चाहते थे। वो मेरे से पूछते थे ऑफिसर्स कि नीलिमा जी अगर कोई शिकायत कर दे। जैसे सलमान खान साहब का एक केस हुआ था। और मैं इसलिए बोल रही हूं क्योंकि वो मेरी इंडस्ट्री की लेजेंड एक्टर है। इसलिए सलमान खान बोल रही हूं। साहब कह के इसलिए नहीं बोल रही हूं। मेरा कोई दबाव है लेकिन मेरे से सीनियर है इसलिए बोल रही हूं। उनका एक केस चल रहा है। तो ब्नोई समाज ने आवाज उठाई तब जाके वो एक केस चला। और क्योंकि हिरन का मामला है। गंभीर मामला है। तो फॉरेस्ट वालों ने कहा इसी तरह से हमें कोई शिकायत करने वाला चाहिए। अगर कोई शिकायत करे तो हम ब्रह्मा कुमारी से काफी कड़ा मामला बना सकते हैं। तो क्या आप अचानक से ये भी सब अचानक हो रहा है। सब भगवान कर रहा है। मुझे नहीं पता ये सब क्या हो रहा है। अचानक से मेरा लेटर निकलता है। अचानक फॉरेस्ट वाले मुझसे बात करते हैं। उन्होंने कहा एक शिकायत अगर एक कंप्लेन आप कर देती हैं तो हम शायद कुछ कर लेंगे इनके लिए। एक एक शिकायत करता चाहिए हमको। हम
00:49:53:27 सर मैंने फिर अपने बारे में कुछ नहीं सोचा क्योंकि ये लोग तो कर चुके थे जो करना था। ये तो पहले ही निकाल चुके थे मुझे। तो मैंने एक शिकायत की तो उन्होंने कहा हमें नहीं आप वो मेरी वो देखना चाहते थे कि मैं सच में ब्रह्मा कुमार के खिलाफ हूं या नाटक कर रही हूं। कई बार ऐसा होता है ना कि कोई विश्वास नहीं करते हैं ना ऑफिसर्स। तो उन्होंने बोला कि आप ये हमसे नहीं करिए शिकायत। आप लिखित में मुख्यमंत्री पोर्टल पर करिए। मुख्यमंत्री पोर्टल पर डालिए। वहीं पर हम आपको जवाब देंगे। वहीं पर हम कारवाई करेंगे। खुले में कारवाई होगी। उसमें ना आपको कुछ है ना हमें। तो मैंने कर दिया। मैंने एस अ ब्रह्मा कुमारी नहीं किया एस अ मतलब सिंपल पर्सन कि मैं यह चाहती हूं ये फला खस नंबर के बारे में जाना जाए और ब्रह्मा कुमारी में ये ये जमीनें गलत फॉरेस्ट के नंबर को दबाया गया है नंबर को और मैं चाहती हूं इसप एक सर्वे हो फिर मतलब आपने एक स्वतंत्र रूप से एक समष्टि का युद्ध अपने हाथ में ले लिया ले लिया मतलब ये पहली शिकायत थी शायद ब्रह्मा कुमारी के पहली शिकायत थी। हां जी
00:51:08:28 वो थी कि वो जो है जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। है ना? हां। बस फिर तब से ले अभी तक इनका मेरा विवाह है। फिर इन्होंने वो चालू किया मतलब कारवाई हुई उस पर जो ऑफिसर्स थे जिन्होंने फिर इन्होंने पुलिस वाले मेरे घर भेजे मतलब सेंटर पर भेजे। इन्होंने कहा बोर्ड हटाइए ब्रह्मा कुमारीज का। मैंने कहा ब्रह्मा कुमारी के गाजियाबाद से लेकर दिल्ली तक 300 सेंटर हैं। पुलिस वालों से कहा ब्रह्मा कुमारीज के लोग आए ये बोर्ड हटाने के लिए। मैंने किसी आईपीएस पीसीएस का बोर्ड नहीं लगाया है। आप ये बोर्ड नहीं हटवा सकते क्योंकि मैं उनकी सब चीजें जानती थी ना। कानूनी प्रक्रिया भी जानती थी। तो मैंने कहा आप नहीं हटा सकते। ऑफिसर आप ब्रह्मा कुमार के लोगों को बोलिए वो मेरे बोर्ड हटाए या हटाने का आदेश दें। तो आप नहीं हटा सकते क्योंकि आईएस पीसीएस का बोर्ड नहीं है। तो वो जो वो जो शिकायत वो जो शिकायत आपने शिकायत मैंने की थी उसके कंडम में कर रहे थे। नहीं वो ठीक है। मगर वहां पे क्या कारवाई हुई जो आपने शिकायत की उसमें वहां पुलिस जा रही थी। फॉरेस्ट ऑफिसर जा रहे थे। वहां मतलब उन्होंने कारवाई उन्होंने कर दी थी। इन्ह उनको
00:52:24:07 नोटिससेस गए। बाद में सर्वे हुआ। सर्वे में वो जमीन निकली। जमीन में वो ये बोलते थे लोगों को जो जो बीच में थे वो मुझे बताते थे कि क्या कर लेगी निकलवा देगी जमीन निकलवा दे 15000 लोगों पर गोली चलवा देंगे 15000 लोगों को इकट्ठा करेंगे 15000 लोग गोली चलाएंगे फॉरेस्ट ऑफिसर्स ने इन्हें चैलेंज दिया है कि आप 15,000 इकट्ठे करिए आपको पता नहीं है फॉरेस्ट क्या है इंडिया का आर्मी सेक्टर से ले सभी एजेंसीज आ जाएंगी हम गोली चलाने वालों के लिए गोली के आदेश देश ले आएंगे। उन्होंने अपने तरीके से कब्जा आया। उन्होंने एक पर्टिकुलर जगह कब्जा ली। 80 कमरे जब्त कर दिए। सीज कर दिए। तो बहुत अच्छी कारवाई फॉरेस्ट ऑफिसर हेमंत शेखावत जी ने की। और मैं उन्हें सैल्यूट करती हूं कि वो भी एक यंग ऑफिसर एक नए-नए पदाधिकारी थे उस समय। डीएफओ थे। उप वन संरक्षण अधिकारी थे वहां पर और उन्होंने अपनी जान का जोखिम लेते हुए यह काम किया और मुझे यह कह दिया गया कि सेंटर से चली जाइए नहीं तो आपको मार दिया जाएगा। कुछ ना कुछ दोद चार-चार लोग मेरे यहां कुंडियां बजाते थे शाम को रात को सुबह
00:53:39:10 ऐसे होता था। रोज का कुछ ना कुछ चीजें हमारे डराने के लिए कर रहे थे वो तो वो मैं नहीं डरी। बाद में मैंने ये विचार किया कि मेरी पढ़ाई डिस्टर्ब हो रही है। एक्चुअली मुझे वहां से नोएडा जाना पड़ता था। मैंने नोएडा से फिल्म सिटी से मेरे फादर मेरे भाई ऑलरेडी फिल्म में थे। मुंबई रहते थे। तो उन्होंने कहा मुंबई नहीं आना चाहती। बीएससी आपने कर लिया तो बीएससी सिनेमा कंटिन्यू कर लो। तो फिर मैंने कहा कैसे? तो पहली बार कलर कपड़े पहने। कैब करना सीखा। कैब में बैठती थी। कॉलेज पे उतरती थी। कॉलेज से घर आती थी। तो जिन बच्चों के साथ पुनर्जन्म हुआ आपका हां तो वहां से वो सब बीएससी सिनेमा पूरा हुआ फिर मैं सोचती भी नहीं थी कि मेरे साथ वाले बच्चे मेरे से बहुत यंग है और शायद हो सकता है कि मैं उतना अचीव ना कर सकूं लेकिन सेलेक्ट हुआ मेरा प्रोजेक्ट और मुझे मुंबई भेजा गया मुझे बहुत अच्छे-अच्छे डायरेक्टर्स यहां लेके आए और यहां पर मैंने कुछ आध्यात्मिक और कुछ वैसी ऐसी फिल्मों में काम किया कि जो मैं लिख सकती थी अच्छे सब्जेक्ट्स पे जैसे कुछ कुरीतियां, कुछ सामाजिक मुद्दे और या फिर कुछ रामायण और महाभारत
00:54:54:12 के पात्रों के ऊपर बहुत चीजें की और धीरे-धीरे यहां रिकॉर्ड बनने लगा। अब मुझे वो लड़की को घर भेजना था जो मेरे साथ थी। वो कहां सोचो समय मेरे साथ इतना बड़ा प्रॉब्लम हो गया कि जिस लड़की ने सारी सच्चाई देखी वो मुझे छोड़ के क्यों जाएगी? हम उसने तो उनकी भी देख ली ना मेरे बहाने कि वो वहां भी नहीं जाना चाहती। अब वो घर भी नहीं जा सकती। दादी रतन मोहिनी शरीर छोड़ चुकी थी जो सपोर्ट कर रही थी। तो उसने कहा अब मुझे ऐसा लगता था धर्म में ये सिखाया जाता है के शरणागति को नहीं छोड़ सकते आप। जो आपकी शरणागति है कैसे छोड़ देंगे उसे आप? यहां तक की बातें ये करने लगे कि इस लड़की का तो इससे कुछ चक्कर है शायद। पता नहीं क्या बोलना शुरू कर दिया कि इसे नहीं छोड़ती। हां [हंसी] तो मैंने सोचा अभी तो नीलिमा इसे छोड़ना बहुत जरूरी है। ये होना बाकी था ये [हंसी] और वो चक्कर क्या होता है मुझे नहीं पता। तो मैंने उसको बताया। मैंने कहा नीलम उनका नाम नीलम था। मैंने कहा नीलम तुम्हें पता है क्या हो रहा है। बोले क्या? मैंने कहा यहां तक बोल रहे हैं वो लोग। तो बोलती है कि दीदी वो पागल है। इतनी सारी चीजें तो हो चुकी है। तो उनको बोलने दो उससे क्या फर्क पड़ता है? मैंने
00:56:09:20 कहा नहीं तुम्हें घर जाना पड़ेगा। तुम्हारे घर वालों से मैं बात कर लूं। अब मुझे कौन सा किस्सा याद आता है? मुझे धर्मराज का किस्सा याद आता है। युधिष्ठिर का। धर्मराज युधिष्ठिर जब मुक्ति के लिए जा रहे थे अपने शरणागति हुए एक स्ान को नहीं छोड़ पाए। तो आप सोचो कि मैं वो पढ़ रही हूं और धर्मराज कह रहे हैं आओ मुक्ति देता हूं। चलो इंद्र के सिंहासन पर तुम्हें स्वर्ग मिलेगा। उन्होंने कहा जो मेरा शरणागति है उसे कैसे छोड़ दूं? तो धर्मराज खुद आते उनके पिता थे। उन्होंने कहा मैं अब परीक्षा ले रहा था। लेकिन तुम कैसे हो? युधिष्ठिर तुम्हारे पांच भाई वो तुम्हारे चार भाई और तुम्हारी पत्नी पीछे छूट गई। उनसे भी प्यारा स्वान हो रहा है तुमको। तो उन्होंने कहा उनको तो उनकी मुक्ति ले गई। इनके प्राण चले गए तो मैंने छोड़ दिया। लेकिन यह तो जिंदा है। यह तो जिंदा है जो मेरे साथ जाना चाहता है। अगर स्वर्ग में ये नहीं जा सकता तो मुझे स्वर्ग नहीं चाहिए। तो मेरा अब ये हो गया था नीलम के प्रति कि भाई शरणागति को छोड़ना तो पाप है। तो अब वो सिचुएशन जो आज मैं आपको समझा रही हूं इस बारे में तो मैंने कभी किसी से बात नहीं की। आप सोचिए मैं उसको कैसे भेजूं। वो लड़की जाने को तैयार नहीं।
00:57:24:24 फिर क्या रहा जिससे कि वो गई? उसके घर वालों ने मैंने उसके घर वालों को फोन किया। मैंने उन्हें सब बताया। मैंने कहा देखिए मेरी बहुत दुर्गति हुई है। मेरे साथ बहुत बुरा हुआ है। मैं नहीं चाहती आपकी बच्ची के साथ कुछ गड़बड़ हो और मेरे लिए और इनके लिए कुछ गलत भी बोलने लगे हैं। लोग बहुत बुरा हो जाएगा। आप रखिए। जो कुछ मुझसे बन पाएगा मैं इनकी मदद करूंगी। आप इन्हें रखिए। अब यह उनके घर वालों को फोन करते हैं। सोचिए
✅ This part is already used · 00:57:53:20 – 00:59:08:05 (1:15)
→ Used in: A · Video 🚨 ब्रह्माकुमारी का कड़वा सच: पुलिस, FIR और कोर्ट केस | EX-BK दीदी जान बचाकर कैस... at 1:10 ↗
00:57:53:20 कि देखिए कितना बुरे टाइम पर छोड़ा है आपकी लड़की को। देखा कैसे फसाया हुआ था उसने और आपकी लड़की आपके यहां आ गई। तो मैंने भेजा उनको कुछ जिम्मेदार लोगों के साथ वो घर पहुंच गई। उन्होंने मुझे फोन किया और वो आज भी आपके साथ कनेक्टेड है। कनेक्टेड थी अब से मतलब कुछ तीन महीने पहले तक मेरी वीडियो आई इंटरव्यू आया यह जो वीडियो इंटरव्यू आया उससे उनके घर वालों ने उस बंदिश किया कि तुम बात नहीं करोगी उनसे अच्छा मतलब जैसे आज आप हमारे साथ जो वीडियो कर रहे हैं ऐसे वो देख लिया उन्होंने कि वो तो ब्रह्मा कुमारी है ही नहीं तुम कहां जा रही हो ये तो मतलब मेरे ख्याल से वो जो आपका रंगदे बसंती वालों के साथ जो वीडियो हुआ था उससे आपने तो ऐसे क्वेश्चन किए हैं जो रंगदे बसंती में मैं बोलना चाहती चीजें मैं बोल नहीं पा रही थी बल्कि आज जो क्वेश्चन हुए हैं वो उस इंटरव्यू से काफी बेहतर लग रहा है मुझे ये मेरे मतलब जो चीजें मैं बताना चाह रही थी वो मैं आज बता पाई हूं।
⬜ Not used yet · 00:59:08:05 – 00:59:10:00 (0:02)
00:59:08:05 [संगीत]
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आश्रम, अवैध ज़मीन और CM पोर्टल पर शिकायत: ब्रह्माकुमारीज़ के खिलाफ एक खुली बगावत
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