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00:00:01:22 इस समय हम उस चर्च के [संगीत] अंदर ही बैठे हुए हैं। तो यह 12 से लेकर के 30 के बीच में जीसस कहां रहे? तो अब ये आता है कि क्या क्रिश्चियनिटी का जो ईश्वर [संगीत] है यहोवा वो सर्वशक्तिमान है? अगर क्रिश्चियनिटी से देखा जाए तो जो भी व्यक्ति क्रिश्चियनिटी के अनुसार विवाह नहीं किया है वो अवैध विवाह है। या है ना? तो अब उस विवाह से उत्पन्न होने वाली संतान क्या कहलाएगी? तो लॉजिकली हम ईश्वर को सिद्ध कर सकते हैं किसी के समक्ष क्रिश्चियनिटी के अकॉर्डिंग।
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00:00:37:03 तो सभी को जय श्री राम। आप देख रहे हैं आहान कॉल ऑफ Dharma YouTube चैनल। हम इस समय ऋषिकेश में हैं। यहां पर हम जब विजिट कर रहे थे तो हमने एक कैथोलिक चर्च देखा जहां पर एक बोर्ड लगा हुआ था जिसमें लिखा हुआ था कि इंटर रिलीजन रिलेशनशिप सेंटर। तो हमारे मन में एक कौतुलला आया कि हमें ऐसे जानना चाहिए भाई कि किस प्रकार का केंद्र है और यहां क्या प्रयोजन है तो इस समय हम उस चर्च के अंदर ही बैठे हुए हैं और यहां के जो होल सोल हैं वो हमारे साथ में आपके समक्ष हैं जो अध्ययन करते करवाते हैं और जो इसके फाउंडर हैं इस सेंटर के इस चर्च के। तो सबसे पहले आप हमारे दर्शकों को थोड़ा सा अपने बारे में कुछ एक संक्षिप्त विवरण इस जगह के बारे में और आपके बारे में जी जय यशु आई एम मैं फादर डेविस वरन ये सीएमआई कॉन्ग्रगेशन के सदस्य हैं। मैं यहां हम 2006 में यहां हम ऋषिकेश में आए और यह सेंटर इसका नाम है समन्वया विद्या
00:01:52:09 धाम इंटर रिलीजियस रिलेशंस यह 2009 में स्थापित हुआ यह समन्वय थियोलॉजी कॉलेज का स्टूडेंट्स जो समन्वय थियोलॉजी समन्वय थियोलॉजी कॉलेज का स्टूडेंट्स जो भोपाल में रहते हैं सामान्य या सामान्य समन्वय समन्वय जी समन्वय थियोलॉजी कॉलेज का स्टूडेंट्स यहां हम एक साल पढ़ने के लिए आते करते हैं जो प्रीस्टली जो प्रीस्ट कैथोलिक प्रीस्ट बनने का प्रशिक्षण कर रहे हैं वो एक साल यहां आकर रहकर ये लोगों से संवाद करते हैं और यह हम उनका क्लास चलते हैं। अन्य धर्म के बारे में भी वह सीखते हैं और बाहर जाकर जो ऑब्जर्व करेंगे सीखते हैं लोगों से और कभी वह एक हफ्ता आश्रम में रहते हैं और इंटर रिलीजियस पिगरीज के लिए जाते हैं बद्रीनाथ और हेमकुंड वगैरह एक हफ्ता वो जाते हैं वो हम सब देखते हैं सीखते हैं उनसे तो इस तरह का एक पिलगिरी में सभी धर्म के साथ साथ मिलकर चलना यही तो हमारे लक्ष्य है इसलिए हम उन स्टूडेंट्स को यहां लाते हैं ताकि तो उनको थोड़ा ओपननेस मिले तो सभी धर्म को आदर और
00:03:07:13 सम्मान करें उस हिसाब से सीखें उनसे तो यही तो मकसद है हम यहां रहने का सब केरल से आते हैं ज्यादा सा जो स्टूडेंट्स आते हैं वो केरल से आते हैं तो इन शॉर्ट मैं आपको थोड़ा सा बता दूं कि अगर मैं कुछ गलत बोलूं तो आप मुझे करेक्ट करिएगा। असल में इनकी जो मदर लैंग्वेज है वो केरल से है यह तो वहां से प्रभावित है इनकी टंग तो कहीं-कहीं पर ऐसा होगा कि कुछ चीजें आपको समझ में ना आए तो मैं कोशिश करूंगा वैसे हमारे पास में यहां पे ट्रांसलेटर भी हैं। अगर इनकी कोई बहुत ज्यादा ऐसी गढ़ बात होगी जो मैं भी ना समझ पाऊं तो वो ट्रांसलेट कर देंगी। इंग्लिश पे अच्छी पकड़ है तो इंग्लिश में बोल देंगे तो ट्रांसलेट ट्रांसलेट कर देंगे। खैर अभी जो इन्होंने अपना परिचय दिया तो वैसे वह सामान्य था मगर मैं बता दूं एक यह सेंटर है जो इन्होंने बनाया है और यहां पर जो भारत में अपॉइंटेड जो प्रीस्ट होते हैं कैथोलिक चर्चेस चर्च में तो वो यहां एक साल यहां पर भी आकर के ट्रेन किए जाते हैं। उनको प्रशिक्षण मिलता है और उसका जो गर्व होता है उस ट्रेनिंग का वो क्या होता है कि अह किस तरह से लोगों से कम्युनिकेट करना है। कौन से धर्म में क्या कहा गया है? किस धर्म में क्या-क्या सिद्धांत हैं? तो वो उस तरीके से किस तरीके से
00:04:22:14 हमारे जो अभियान है उसके उसमें शामिल हो सकता है। किस तरह से वहां पर कोऑर्डिनेशन है, समन्वय है। तो वो ट्रेनिंग पूरी यहां पर एक साल की उनकी रहती है। इसके साथ-साथ ये जो है अ उस रूप में भी ख्यापित है कि यहां पर अगर कोई इनकी कम्युनिटी से कोई व्यक्ति आता है और तो यहां पर उसको परिश्रय प्राप्त होता है। यह सारा अह इन्होंने बताया अभी आप तो मैं अह महोदय मैं अह थोड़ा सा एक थोड़ा सा व्यक्तिगत प्रश्न पूछूंगा। आपका जन्म भी क्रिश्चियन फैमिली में ही हुआ है या ये मेरा जन्म क्रिश्चियन फैमिली में हुआ है। वो केरल में है। केरल में ज्यादा क्रिश्चियन लोग हैं। अच्छा तो हमारा बैकग्राउंड वैसे ही है। प्रभु ईसा मसीह का बाहर चले थे। उनमें से एक सेंट थॉमस वो केरल में आए और तो 2000 से ज्यादा साल हो गए हम मतलब तो उसी समय वो आए और उन्हीं के द्वारा कुछ परिवार का कन्वर्शन हुआ और उसी से हम उसी के बैकग्राउंड में हम आते हैं वैसे ही सॉमस मतलब दो 2000 साल हो गए 2000 इयर्स से मतलब आपके माता-पिता कन्वर्ट हुए जी तो हमारे पूर्वजों वैसे मतलब कितनी पीढ़ी पहले कन्वर्ट हुए हैं वो तो कई सालों
00:05:37:22 से है वैसे ही नहीं जनरेशन कितनी हो गई ये तो मैंने हमें तो मालूम नहीं 2000 साल से उधर ये क्रिश्चियंस है अच्छा तो तब से लोग परिवार से ऐसा आता रहता है कन्वर्शन होता रहता है काफी पहले का है मतलब काफी पहले का हिस्ट्री मतलब वो जो अंग्रेजों ने भारत में जो राज किया है उससे पहले उससे भी पहले का है अच्छा ठीक है तो अभी थोड़ा सा हम आगे बढ़ेंगे एक एक बहुत जनरल सा क्वेश्चन आता है कि कैथोलिक और दूसरा एक शब्द था बा पे पेस्ट करके के कुछ शब्द तो इन दोनों में क्या अंतर है क्रिश्चियनिटी के हिसाब से तो आप जानते हैं प्रभु ईसा मसीह के मसीह से ही शुरू है ईसाई धर्म तो एक ही धर्म था चर्च तो उसको कई कारण से विभाजन हुआ तो 16 सेंचुरी में मार्टिन लूथर के नेतृत्व में वो ईसाई जो कैथोलिक चर्च था उससे वो अलग होकर कर उन्हीं के नेतृत्व में जो लोग उसको फॉलो किया उसका टीचिंग वो उसी का अलग-अलग विवा पार्ट में भी उसका डिवीजन हुआ वही है बप्टिस्ट प्रिस्पिटेरियन लूथर
00:06:53:01 इस अलग मेथोडिस्ट तो जो भी इधर चर्च देखते हैं कैथोलिक चर्च के अलावा जो भी चर्च है पेंटास्टल चर्च ये सब ये प्रोटेस्टेंट चर्च बोलते हैं उन सबको अब मुझे कुछ मुझे अब कुछ याद आ रहा है मैं थोड़ा सा मैं क्लियर करूं कि मुझे ऐसा है याद है कैथोलिक चर्च मूल है या मूल ओरिजिन है ओरिजिन है और कैथोलिक वो है जो इनकी जो ईसा मसीह से जो परंपरा चली आ रही है उससे जुड़ा हुआ अब इसके बाद कुछ लोगों ने कहा कि हमको गुरु नहीं चाहिए है ना ऐसा कुछ है ऐसा मतलब तो कैथोलिक चर्च दो जो रोम में है व्ञान पोप को स्वीकार करते हैं को स्वीकार करते और ये जो प्रोटेस्टेंट्स होते हैं ये नहीं प्रोटेस्टेंट्स होते हैं उसको लीड उसका नेदर स्वीकार नहीं करते नहीं करते तो उनका अलग समझ रहे हैं आप क्या हो रहा है जैसे हमारे यहां पर जो आर्य समाज रामपाल इस ये बने हुए हैं ना जो सार जो किसी आचार्य को स्वीकार नहीं कर रहे हैं तो वो जो एक लाइन आती है कि भाई हिंदूइज़्म में ऐसेसे करके वो हो गया है विभाजन हो गया है तो वो ऐसा नहीं है क्रिश्चियनिटी में भी वो इस चीज को फेस कर रहे हैं है ना तो सभी को जो बाइबल सब स्वीकार करते हैं सबका आधार तो मूल आधार वही है जैसे हमारे यहां वेद सब का मूल आधार है
00:08:08:07 लेकिन उसका थियोलॉजी स्पिरिचुअलिटी इनसा मीनिंग्स जो सेलिब्रेशन है सब में थोड़ा अलग है उसमें बस लेकिन और पोक को स्वीकार नहीं करते हैं उतना ही फर्क है लेकिन आचार्य आचार्य को स्वीकार नहीं करते हैं लाइननेस से जुड़े हुए आचार्य ठीक [नाक से की जाने वाली आवाज़] है थियोलॉजिकल डिफरेंस है उसमें टीचिंग में हां जी हां जी तो इससे कुछ आपको परेशानी भी फेस करनी पड़ती है इस कारण से पहले तो वैसे आपस में कॉन्फ्लिक्ट था जो यूरोप में वगैरह लेकिन अभी यहां इंडिया में कोई प्रॉब्लम नहीं सब मिलके रहता है वैसे ही नहीं मिलके तो रहना पड़ेगा ही क्या करेंगे नहीं तो मगर वैसे अपनी चीजों में कोई कुछ सिद्धांतों को लेकर के कुछ ग्राउंड लेवल पे कोई परेशानी नहीं डिफरेंस तो है लेकिन उसमें यूनिटी है हम एक साथ डिफरेंस होने के बाद डिफरेंस होने के बावजूद भी हम एक साथ मीटिंग के लिए आते हैं और एक्यूमिनिकल मीटिंग बोलते हैं उसके लिए एक्यूमिनिकल मीटिंग होता है। सभी धर्म सभी डिवीज है। सभी चर्च के लीडर्स आते हैं। ऐसी ऐसी प्रॉब्लम नहीं फेस करनी पड़ती कि कहीं पे जरूरत है कि सारे क्रिश्चियंस आए। मगर इस कारण से जो अलग हो गए हैं इतने सारे उसमें टुकड़ों में तो इस कारण से वहां पे संख्या बल कम रह जाता है। सभी लोग नहीं
00:09:23:10 आते क्योंकि उनकी श्रद्धा अलग है। या वो तो अलग है। बिलीव उनके बिलीव भी कभी कॉन्फ्लिक्ट होता है तरह से वो प्रॉब्लम होते रहता है लेकिन उसके बावजूद भी कभी जो कॉमन कोर्स है उसके लिए सब लोग एक साथ आते हैं और अपनेप डिफरेंस है तो अच्छा मैंने एक चीज देखी कि मैंने बाहर एक ईसा का पोस्टर देखा उसमें एक मेरे ख्याल से मुस्लिम का भी एक निशान है चंद्रमा और क्रिश्चियनिटी का तो है ही है और शायद कुछ और भी जो बिलीफ्स हैं स्पिरिचुअल बिलीफ्स उनके निशान है वहां पर सिंबल्स है ना और बाहर ये आपकी जो वॉल है इसके इसके बाहर और वहां पर स्वास्तिक भी है मगर स्वास्तिक आपका जो बनाया है वो उल्टा है स्वास्तिक वो सीधा नहीं है तो एक तरीके से सभी धर्मों में हां वह हिटलर जैसा बना है। और मैं यहां पर भी देख रहा हूं कि ईसा का जो पोज़ है वो थोड़ा सा हिंदूइज़्म से काफी प्रभावित है। इसमें वो योग मुद्रा में लग रहा है। शायद थोड़ा सा जो यहां पर जो बुद्ध से भी मैच कर रहा है इनका जो बुद्ध की छवि होती है उससे भी मैच कर रहा है। और थोड़ा सा
00:10:38:16 यहां पे उल्टा वृक्ष भी दिखाई दे रहा है प्रकृति वाला। तो ये कांसेप्ट को थोड़ा सा समझाइए। ये मतलब क्या ले चल रहे हैं इसमें सिंबल्स वगैरह। तो जब हम जैसे ईसाई धर्म का मतलब जहां हम भी जिस राज्य में रहते हैं उधर का कल्चर को अपनाकर वहां हम हमारे विश्वास का प्रैक्टिस करते हैं। तो जब हम भारत में है तो भारत का संस्कार है और जो भी कल्चर है इधर उसी को अपनाकर इसी के तरह से हम अपने विश्वास को हम प्रकट करने के लिए कोशिश करते हैं। तो यहां जब मैं ऋषिकेश में आया था मैंने सोचा कि यहां का जो मेडिटेशन है प्रार्थना है उसी को इससे प्रभावित होकर हमने सोचा कि एक पिक्चर बनाए तो उसी का आधार तो है मैं पढूंगा जो हमारा पुराना विधान में इस्यायास नबी का ग्रंथ में दे रखा है उसी को प्रदर्शित किया है इधर तो अध्याय 11 वाक्य छ से नौ तक मैं जरा पढूंगा उसी को मत करना बिल्कुल भी छेड़छाड़ मत करना। वैसे ही चलने देना। तब भेड़ या मेमने के साथ रहेगा। चीता बकरी का बगल में लेट जाएगा। बचड़ा तथा सिंह शस स्वाद साथसाथ चरेंगे
00:11:53:27 और बालक उन्हें हक कर ले जा चलेगा। गाय और रीच में मेल मिलाप होगा और उनके बच्चे साथ-साथ रहेंगे। सिम बाइल की तरह भूसा खाएगा। दूध मुगा बच्चा नाग के बिल के पास खेलता रहेगा और बालक करेत की भाभी में हाथ डालेगा। समस्त पवित्र पर्वत पर ना तो कोई बुराई करेगा और ना किसी को हानि। क्योंकि जिस तरह समुद्र जल से भरा है। उसी तरह देश प्रभु के ज्ञान से भरा होगा। तो इसी के आधार पर एक हिंदू आर्टिस्ट इसका नाम है सुरेश। वो भी केरल का है जो श्री शंकरा यूनिवर्सिटी का हेड ऑफ द डिपार्टमेंट था आर्ट का तो वहां हम वो ये ऋषिकेश में था तो मुझसे मुलाकात हुआ और हम दोनों वो तीन महीने यहां रहा और हम बातचीत करके उसी एक आईडिया दिया मैंने और उसी के आधार पर उसने वो इंडियन संस्कृति को मिलाकर उसको बनाई ये तो उसका यह मेन चीज तो है ऋग्वेद में कहते हैं कि रूट इज अ सोर्स ऑफ विडम। तो मूल से
00:13:09:13 उसका विडम उसका नॉलेज उसका स्रोत वही है मूल। तो उसी को लेकर उसका एक पेड़ को उल्टा डाल रखा है। गीता में भी आया है। हां। तो संसार रूपी उल्टे वृक्ष की जो सही-सही जानकारी देता है वो वेदों को जानने वाला कहा गया है और वो क्या कहते हैं? वैराग्य होता है उसके अंदर। वैराग्य को इंग्लिश में क्या कहेंगे? डिटचमेंट तो उसी को हमने इसको प्रदर्शित किया है तो एक्सबिट किया है तो उसका आर्ट के द्वारा तो उसका रूट तो ऊपर है और पेड़ का पौधे फूल वगैरह नीचे है तो उसी का बीच में प्रभु ईसा मसीह है ध्यान मुद्रे में बैठा है तो उनका हाथ में जो स्क्रोल बोलते हैं हम जो सुसमाचार का तो उसी में कई मीनिंग है उसका उसको उसको सूर्य और चंद्रमा तो डार्क और लाइट तो दोनों है डे और नाइट दोनों दिखाए गए हैं और उसी के ऊपर जो सात जो रेनबो का सात कलर है तो उसको हम कहते हैं कि हमारा पवित्र आत्मा का सात दान है गिफ्ट है तो उसी को दर्शाया गया है उधर
00:14:24:14 जो कबूतर का रूप में जो देख रहे हैं वह तो पवित्र आत्मा हम कहते हैं पिता पुत्र और पवित्र आत्मा यही हम हमारा विश्वास है द होली ट्रिनिटी हम कहते हैं तो पिता है ऊपर जो ब्रेन के रूप में और पुत्र के ऊपर पवित्र आत्मा को भेजते हैं तो प्रभु ईसा मसीह का आंख आधा खुला है आधा बंद है उसका मतलब यही है अगर हमको सही निर्णय लेना है अपने जीवन में तो आधा अंदर को देखना है आधा बाहर को देखना है तभी तो हम सही निर्णय ले सकता है ना कि केवल बाहर के हम प्रभाव होकर करें और इसमें तो जो चार पत्ता है नीचे जिसमें यशु बैठा है वो चार वेद हम कहते हैं मतलब ऋग्वेद अथर्ववेद सामवेद और यजुर्वेद कुछ कुछ ब्रह्मा जी जैसा पोजीशन बनाया गया ब्रह्मा जी जैसे दिखाई देते हैं तो उसी को हम कहते हैं मतलब हमारा चार गोस्पल है तो मात मार्क लक जॉन जिसने यशु के जीवन के बारे में लिखा लिखा है तो उसी तरह से हम उसको समझते हैं और हिंदू धर्म में उसी तरह से मतलब चार वेद का समझते हैं तो और उसमें अलग-अलग
00:15:40:07 सिंह है और साम सब कुछ एनिमल्स है उसमें तो उसी प्रभु यीशु के सामने सब मिलजुलकर रहते हैं जो नहीं तो आपस में वो झगड़ा करते हैं और मारपीट करता है लेकिन यहां हम सब एक साथ यूनिटी में रहते हैं तो हम कि जब प्रभु यीशु मसीह को समझते हैं लोग कोई भी धर्म का कोई बैकग्राउंड उनका शिष्य भी 12 शिष्य गण अलग-अलग बैकग्राउंड से आए थे लेकिन प्रभु यीशु मसीह के उपस्थिति में एक एक मन होकर मिलके उनका संदेश सुनकर उसी को पालन करने के लिए कोशिश किया तो इसी तरह हम भी समझते हैं मतलब जो ईसा मसीह इसका सेंटर है हमारा विश्वास है ये इसमें तीन पान दिखाया गया तो सृष्टि स्थिति और लय तो उसी को हम समझते कि हमारा क्रिएशन या क्रिएशन रिडमशन और साल्वेशन तो उसमें क्रिएशन में पंचभूत है मतलब मेन फाइव एलिमेंट्स है जिससे सृष्टि किया है और हम चाहते हैं कि प्रभु हमारा रक्षक है तो हम ईसाई लोग समझते विश्वास करते हैं कि प्रभु ईसा मसीह ही हमारा मुक्ति दाता तो यही विश्वास करते हैं और जो तीसरा जो पैनल में दिखाए
00:16:55:13 गए सभी धर्म के कि हम समझते हैं कि जो लक्ष्य तो एक ही है। कोई भी धर्म में विश्वास करें हम सब एक ही लक्ष्य की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। तो हम तो एक तीर्थ यात्रा है। इस तीर्थ यात्रा में सभी लोगों को मिलकर आपस में सपोर्ट करके आदर सम्मान करके हम आगे बढ़ना है। नहीं कि झगड़ा करके सबको एक दूसरे के विरुद्ध काम करके बस सबको लेकर सबको इसलिए समझने के लिए क्योंकि हम विश्वास करते हैं कि हमारे एक ही लक्ष्य स्थान के लिए हम प्रस्थान कर रहे हैं। सब तीर्थ यात्रा कर रहे हैं अपनी जिंदगी का। जी जी तो उसी में तो फर्क तो नहीं है अलग-अलग धर्म में विश्वास करते हैं लेकिन हम सोचते हैं कि हम सब मिलके आगे बढ़ना है ना कि हम केवल ईसाई लोग आगे बढ़े या हिंदू लोग आगे बढ़े सभी लोग तो मिलके कोई भी धर्म इसलिए सभी धर्म का चिन्ह प्रदर्शित किया तो सभी धर्मों का चिन्ह और ये उल्टा वृक्ष जो गीता का वाक्य है वो और जो योग मुद्रा भी है इनकी ईसा मसीह की ये सारी चीजें उन्होंने आपको बताई हैं। इसमें एक चीज़ आती है क्या वास्तविकता में ईसा मसीह ने कभी इस तरह से योग मुद्रा में बैठे थे आपके अनुसार नहीं ईसा मसीह ने जो पढ़ाए लोगों को नहीं शिक्षा दिया लेकिन तो उसी को हम भारत में जब हमारा जो मेरा मतलब
00:18:10:16 है क्या वास्तविकता में वो ऐसे कभी बैठे नहीं बैठे तो क्या आपको नहीं लगता कि इस मुद्रा में ले देखेंगे तो वो लोग सोचेंगे कि ईसा मसीह ऐसे ही रहते थे नहीं इसमें तो है ईसा मसीह थोड़ा सा भ्रमित होगा ना व्यक्ति नहीं इस तरह से इसमें तो ईसा मसीह बैठकर कर लोगों को शिक्षा देते थे। नहीं यह जो मुद्रा है मुद्रा में हिंदूज़्म का प्रतीक है जी यह तो हम भारत में तो इसी को हम समिति थोड़ा मेडिटेशन मतलब ईसा मसीह को हिंदूइज़्म में डुबो करके मतलब इंडियन या इनकल्चरेशन हम कहते हैं भारतीय संस्कार के अनुरूप हमने वास्तविकता में ऐसे नहीं कैसे कैसे जो है क्रिश्चियनिटी से भी जोड़ा जा सकता है। क्रिश्चियनिटी यूरोप में यूरोपियन कल्चर का अपनाया। तो आपने स्टार्टिंग तो सभी जगह पे जब अमेरिका में है तो उसी का अच्छा इसमें इसमें एक बात आती है कि जैसे हम जो क्रिश्चियनिटी के जो प्रीस्ट होते हैं चर्च की तो एक मुख्य उद्देश्य तो यह भी है जैसे हमारा ये उद्देश्य है कि हम हिंदूइज़्म की शिक्षा लोगों तक ज्यादा से ज्यादा पहुंचाएं। तो एक उद्देश्य यह भी होता है प्रीस्ट का एज ए प्रीस्ट यह उद्देश्य होता है कि ज्यादा से ज्यादा क्रिश्चियन का प्रचार क्रिश्चियनिटी का प्रचार प्रसार हो लोगों तक लोग उसे जाने लोगों से जुड़े तो ये उसका एक हिस्सा माना जा सकता है कि वो यह
00:19:25:20 जानते हो कि किसके धर्म में क्या है और कैसे कहां क्या कहा जा रहा है जिससे कि हम उससे रिलेटेबल चीजें जब प्रस्तुत करेंगे तो व्यक्ति हमारी चीजों से जल्दी जुड़ेगा जल्दी अट्रैक्ट हो पाएगा हमारा तो मेन हम ये इसका इसका इस समय विद्या धाम का मेन मकसद यही है कि हमको दूसरे धर्म से सीखना क्योंकि प्रीस्ट तैयार हो रहे हैं ना प्रीस्ट का उद्देश्य होता है चर्च क्रिश्चियनिटी को प्रचार प्रसार करने का तो इसे सैक्रमेंट्स हमारा संस्कार उसको एडमिनिस्ट्रेट करना है जितना हो सके क्रिश्चियनिटी को और तो हम तो जो हम विश्वास करते हैं अनुभव करते हैं उस अनुभव को दूसरों के साथ बांटना है ये नहीं कि दूसरे लोग अपने धर्म में आए हम कभी इसको मजबूरी से या किसी इस तरह तरह से कन्वर्शन नहीं वो तो हम अपनी चीजों को इस तरह से बताएं कि वो खुद ही जब हम बात करेंगे तो हम जो उनका अपने धर्म का अनुभव वो बताएंगे हम अपने धर्म के बताएंगे क्योंकि ना इस तरह से जो उन्हें अट्रैक्ट करने के लिए ये अच्छी चीज है कि हमने ईसा को भी ऐसे प्रस्तुत किया यहां के मतलब इसको ये धर्म की ओर से उसका वैल्यू से जो ईसा मसीह ने जो प्यार का संदेश दिया या शांति का संदेश दिया उस संदेश को लोगों तक पहुंचाना हमारे धर्म समझते हो। अच्छा एक चीज और
00:20:40:21 है एक बात सुनने में आती है कि ईसा मसीह की 10 साल का इतिहास जो है वो प्राप्त नहीं है। वो 10 साल ऐसा माना जाता है कि भारत में आए और यहां के वैष्णवाचार्यों से मिले। उनसे शिक्षा दीक्षा भी ली और उनकी वह भी बताई जाती है क्या कहते हैं कश्मीर में कहीं पर उनका वो भी है जहां पर उनको वो किया और यहां से वो जब उन्होंने शिक्षा दीक्षा ली थी उसके बाद वो वापस गए तब वहां पर उन्होंने जो है प्रचार प्रसार किया तो आपको आपका क्या कहना है हमारा विश्वास मतलब 30 साल के लिए हमें कोई कुछ मालूम नहीं है केवल 12 साल तक हमारा पवित्र ग्रंथ में लिखा है अच्छा 12 साल के बाद उसने क्या किया कहां गया कुछ नहीं है अच्छा केवल 30 साल के बाद केवल तीन साल रहा उसने हम 33 साल में उसका मृत्यु हुआ तो 30 तो तीन साल का उनका जो कार्य किया है उसी को हमारा पवित्र ग्रंथ में लिखा है उसका बीच में क्या हुआ किसी को मालूम नहीं है हमने कौन सी से कौन सी ऐज से कौन सी ऐज तक लिखा है मतलब उनका यही का कितना विवरण है जैसे जन्म से लेकर 12वीं साल तक का तो विवरण है विवरण है उसके बाद 12 साल के बाद विवरण नहीं है कुछ नहीं है। फिर कहां तक का है? पर 30
00:21:55:25 साल के बाद। 30 साल के बाद तीन साल का विवरण तीन साल का विवरण है। बस बस केवल तीन साल तो यह 12 से लेकर के 30 के बीच में जीसस कहां रहे? कुछ किसी को नहीं पता। अच्छा कई स्टोरीज है उसका बारे में लेकिन हम तथ्यात्मक में प्रामाणिक नहीं है प्रामाणिक नहीं है सर्टिफाइड चीजें नहीं है कोई हिस्ट्री नहीं है वो तो उसमें क्या क्योंकि ऐसा भी कहा गया है सनातन के कई प्रामाणिक आचार्यों के द्वारा शंकराचार्य जी के द्वारा भी कि 10 साल के लिए वो भारत में भी रहे थे और वैष्णवाचार्यों से शिक्षा दीक्षा ली थी। उन्होंने जाकर के वापस वैष्णवाचार्य वैष्णवाचार्य से जो भी उनको ज्ञान विज्ञान प्राप्त हुआ वो उन्होंने वहां पर दिया बट बट बाद में उनके नाम से जो बाइबल बनी है उसमें कई चीजें उससे बाहर है जो उन्होंने कहा वो एज इट इज बाइबल में नहीं है बल्कि थोड़ा सा अगेंस्ट है मतलब जो सिद्धांत ईसा सीख के गए वैष्णवाचार्यों से वो सिद्धांत उन्होंने वहां पर दिए मगर जब बाइबल को कंपाइल किया गया है ना बाइबल को लिख जोड़ा गया तो हां तो वो बाइबल को जब कंपाइल किया गया तो उसमें जो उनकी जो शिक्षा थी जो सनातन से प्रभावित थी ईसा मसीह के वैष्णव धर्म
00:23:10:26 से वैष्णवाचार्यों से तो वो एज इट इज उसमें बाइबल में नहीं आई बल्कि थोड़ा सा आउट ऑफ द वे जाकर के और कहीं-कहीं पर मिलावट करते हुए प्रस्तुत की गई तो इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगे? बाइबल तो वैसे सबसे पहले प्रभु ईसा मसीह यहूदी धर्म के सदस्य थे। ठीक है? तो यहूदी धर्म के बारे में वो जो उसका नवीनीकरण करने के लिए कोशिश किया और जो बाइबल में लिखा है वो तो कोई हिस्ट्री नहीं है। नहीं किसने लिखा है बाइबल? इसने उसका शिष्य गणना लिखा है और जो शिष्य ईसा मसीह का संदेश सुना उनसे अनुभव किया उस अनुभव को दूसरों को विश्वास में लाने के लिए लिखा गया ईसा मसीह के जीवित रहते हुए लिखा गया था मरने के बाद ही लिखा जाने के बाद जाने के बाद कैसे
00:24:03:15 तो मतलब किस शिष्य ने कंपाइल किया इसको उसमें चार रहे थे मैथ्यु मार्क कितने दिनों बाद कितने दिनों बाद किया कंपाइल वो तो एक साल का एक साल का 100 साल मतलब कुछ तो 30 साल के बाद कुछ 60 साल के बाद अच्छा ऐसे करते करते कंपाइल हुआ है तो उसी के बाद वो ये जो चार जो शिष्य हैं जीवित रहे थे इतने सालों तक जैसे ईसा मसीह स्वयं 30 साल के और 30 मैं अगर वो 30 साल के हैं तो शायद मैथ्यू और ये लोग भी 25 30 साल के वो तो कुछ साल और है इसलिए सॉमस केरल में आया मतलब एक आज के टाइम में जो हमें बाइबल प्राप्त है वो ईसा के जाने के कई साल के बाद हमें प्राप्त हुई है और वो एक ही साल में नहीं लिख दी गई बल्कि वो 10 20 सालों में 30 साल 40 सालों में लिखी गई है है ना ऐसा ही है ना और उसमें प्रमाणिकता यही है कि जिसने वो लिखी है कि ईसा मसीह ने ये बोला था इन चार लोगों ने उसने उसने अपने अनुभव लिखा है तो जिन जिनको इन चार लोगों पर विश्वास है तो उनके लिए बाइबल ईसा की वाणी है या और यदि यदि यदि इन चारों पर विश्वास नहीं है तो वह यह कह सकता है कि जरूरी नहीं है कि बाइबल जो है ईसा की ईसा मसीह की वाणी तो विश्वास करते हैं
00:25:18:16 कि क्रिश्चियन क्रिश्चियन वही है जो उन चारों पर विश्वास करें जिन्होंने ईसा की वाणी को लिखा है क्रिश्चियन वही है और उसमें एक और है जो संत पॉल वो उनका शिष्य नहीं थे उस समय जब जीवित रहते समय वो कतर यहूदी धर्म का विश्वासी था लेकिन उसी को प्रभु ईसा मसीह का दर्शन हुआ और उसके जीवन में परिवर्तन हुआ और उसने ईसा मसीह को प्रचार करने लगे तो उसी ने जो चित्र चिट्ठी लिखा है जैसे रोम रोमंस के लिए कोरिंथियन जो आजकल जो हम गल्फ कंट्री कहते हैं कई कंट्री लेबनन और ईरान इराक ये सब ईसाई धर्म था उस पहले तो संत पॉल वहां जाके लोगों को परिवर्तन ईसाई धर्म में उसको प्रचार किया और लोग उस पर विश्वास किया उन्हीं के लिए जो चिट्ठी लिखा है वह भी पवित्र ग्रंथ में है तो इस तरह से उसे मेन चीज तो यह पलरी ग्रंथ का उद्देश्य यह नहीं कि पूरा हिस्ट्री लिखा है तो सही ढंग से लिखा उसको लोगों को ईसा मसीह में विश्वास करने के लिए प्रेरित करना यही उद्देश्य तो वो जो चार शिष्य थे जिनको ईसा के जन्म से ले 12 साल तक का पता है नहीं 12 साल का ये मैं है ना ये पवित्र ग्रंथ हम विश्वास करते हैं कि पवित्र ग्रंथ लिखा है पवित्र आत्मा
00:26:33:18 की प्रेरणा से वो तो ठीक है तो उसी प्रेरणा से लिखते तो उन लिखते समय जो अपने मन में जो अनुभव किया है उसे जो शिक्षा दिया है प्रभु यीसा मसीह यह सब रहकर उसने आत्मा की प्रेरणा से लिखता है तो इसी तरह मतलब उसको जो अपने जीवन में वो नहीं देखा है 30 साल के बाद ही देखा है शिष्य गण सबको वही लिखा है 30 साल में जब प्रभु ईसा मसीह 30 साल का हुआ उस समय शिष्यों को बुलाया और उसको शिक्षा दिया तीन साल उनके साथ रहा और जो कुछ देखा है जो चमत्कार किया है ये सब देखकर उसने बाद में लिखा अच्छा ठीक है थोड़ा साहब आगे बढ़ते हैं विषय से। अ इस्कॉन नाम की संस्था शायद आप जानते हो। हम वो ये कहती है कि अ जीसस जिनको अपना पिता बताते हैं यानी क्राइस्ट यहोवा कहते हैं ना मैं उसका पुत्र हूं। या तो जिसको अपना वो बताते हैं पिता जीसस। वो और कृष्ण एक है। ये इस कौन कहता है? तो आप क्या मानते हैं इस बारे में? मैंने वो सुना नहीं है। इसको मूवमेंट के बारे में सुना है। लेकिन यह ईश्वर का प्रभु यीशु मसीह
00:27:48:21 ईश्वर को अपने पिता मानते हैं। वो पिता एक ईश्वर है। कोई भी अलग-अलग नाम से बोलते होंगे उसमें। अल्लाह बोलते हैं, कृष्णा बोलते हैं या कोई भी हो। लेकिन हमें तो मालूम नहीं है। मतलब यीशु ने अपने पिता का स्वभाव क्या है? उसका नेचर क्या है? वही हमें सिखाया है। तो बोलते हैं कि संत योहन के सुसमाचार में प्रभु यीसा मसीह पहले कहते हैं कि पिता ने मुझे इस दुनिया में भेजा है। उनकी इच्छा पूरा करना पूरा करना ही मेरा जीवन का लक्ष्य है। अच्छा और उसके बाद में बोलते हैं कि वो पिता मुझ में है और मैं उसमें है। ठीक है। और उसने वो आगे जाकर कहते हैं कि पिता और मैं एक हूं। जो मुझे देखता है वह पिता को देखता है। तो परमात्मा जो में जो एक होना मैं इसको लूंगा मैं इसको लूंगा। एक्चुअली इसको हम ऐसे समझ सकते हैं इस प्रश्न को जैसे आपने कहा कि इस बारे में हमें मालूम नहीं है कि वह कृष्ण के बारे में क्या समझते हैं। मगर हमें अपने जो ईश्वर हैं क्राइस्ट यानी यहोवा तो उनके बारे में हमें पता है तो अगर वो उनसे मेल खाते हैं तो वो दोनों एक हो सकते हैं। तो हम देख थोड़ा सा बात करते हैं तो जिससे चीजें थोड़ी समझ में आए। तो अह जैसे
00:29:04:04 हम यह कहते हैं कि सभी धर्मों में समन्वय हो। तो आपके अनुसार धर्म किसे कहा जाता है? किस आधार पर किसी को आप धर्म कह रहे हैं? धर्म जो ईश्वर और में का जो संबंध है उसी को धर्म धर्म का उद्देश्य वही है। कोई भी धर्म हो ईश्वर से जुड़े रहना। ठीक है? ईश्वर ईश्वर से जोड़ना ईश्वर को प्राप्त कराने वाली जो विचारधारा का रास्ता है। वो है धर्म। तो फिर जो ईश्वर है अब सारी बात आ गई ईश्वर पे। है ना? तो हम उसे धर्म कहेंगे जो ईश्वर तक ले जाए। अब ईश्वर हम किसे कहेंगे? ईश्वर कहते हैं मतलब जो एक शक्ति है जो जो अनमूवर और हम कहते हैं कि प्रभु ईसा मसीह ने जो हमें रिवील किया है तो मतलब [गला साफ़ करने की आवाज़] पिता है ईश्वर है तो उस ईश्वर तो उसका नाम अलग-अलग होता है लेकिन वो एक शक्ति है अब कोई देखा नहीं है कोई किसी को मालूम नहीं है मालूम इतना ही है प्रभु ईसा मसीह हमने बताया कि पिता है इसको ऐसे इसको ऐसे समझते हैं जैसे हम इस्लाम के बारे में जानते तो वहां पे ईश्वर जो है वह अवतार नहीं लेता है वो नीचे नहीं आता है और जो ईसाई मत है उसमें
00:30:19:06 भी ईश्वर नहीं आता है वो अपने पुत्र को भेजता है जैसे जीसस है ना तो क्या जो क्रिश्चियनिटी का ईश्वर है यहोवा क्राइस्ट जिसे कहते हैं मुझे क्राइस्ट नहीं तो आप समझना कि यहोवा और क्राइस्ट अलग है अच्छा दोनों यहोवा हम जो कहते हैं यीशु का क्राइस्ट का पिता को कहते हैं यहोवा और क्राइस्ट यीशु को कहते हैं या अच्छा ठीक है मैं यहोवा बोलूंगा अब यहोवा ईश्वर है और जो क्राइस्ट है यानी जीसस क्राइस्ट यानी कि जीसस क्योंकि पुराना है जो यहूदी धर्म में लोग कहते हैं यहोवा ईश्वर वो एक्चुअली क्राइस्ट का मतलब वो एक्चुअली जो इस है वो क्राइस्ट का मतलब निकालती है यहोवास फिर कहती है कि जो क्राइस्ट और जो यहोवा है वो और कृष्ण एक है तो इसलिए हम यहां पर आ रहे हैं तो
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00:31:05:03 अब ये आता है कि क्या क्रिश्चियनिटी का जो ईश्वर है यहोवा वो सर्वशक्तिमान है।
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00:31:11:10 हम यही विश्वास करते हैं। जी जी जी ईश्वर तो सर्वशक्तिमान है। मान्यता है या तो अब जैसे सर्वशक्तिमान है तो क्या वो अवतार ले सकता है? हम तो अवतार पर विश्वास नहीं करते हैं। तो ये प्रभु ईसा मसीह जो है वो ईश्वर ने भेजा है। भेजा। यही तो वो स्वयं नहीं आया। स्वयं नहीं आया। उसको भेजा है। तो फिर इसका मतलब अवतार नहीं ले सकता। हम विश्वास नहीं करते कि अवधार लेते हैं। नहीं नहीं कैपेबिलिटी है कि नहीं? ईश्वर का अवतार लेने में। हां हो सकता है ले सकता है अच्छा लेता नहीं है ले सकता है कैपेबिलिटी है सकता है मुझे मुझे उसका हम तो उसको बारे में पढ़ाते नहीं है पढ़ते नहीं है हमारा एक विश्वास एक ही है बस एक ही ईश्वर है और उस ईश्वर ने प्रभु ईसा मसीह को मुक्ति लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए ईश्वर ने इस बारे में क्लियर नहीं किया अपनी बुक में बाइबल दी तो यह सिद्धांत नहीं बताया कि अवतार मैं ले सकता हूं कि नहीं ले सकता उस बाइबल में कुछ नहीं है। उसके बारे में अवधार के बारे में। अच्छा ये ये जानकारी हमें बाइबल से नहीं मिलती है कि ईश्वर लोगों के बीच में आ सकता है कि नहीं आ सकता। लोगों के बीच में आने के लिए ईश्वर यशु का नाम किसी और को भेजता है
00:32:26:14 और किसी को भेजता है पर स्वयं नहीं आता है। तो प्रभु यही बताया यीशु जो कहता है कि मैं पिता और एक हूं। तो जो हमारा विश्वास है जो हम वो तो शेर और बकरी भी एक हो गए ना वो तो एक अलग चीज हो गई कि भावनाओं से मैं और वो एक हैं या गुणों से मैं और वो मगर वो ही हैं तो हम विश्वास करते हैं कि प्रभु यीशु ईश्वर है या सर्वशक्तिमान है तो यीशु पिता के पिता ने भेजा लेकिन पिता को समझा पिता ने भेजा ना वो स्वयं नहीं आया स्वयं नहीं आया पिता ने भेजा है वही तो यशु कहते हैं तो ठीक क्या है? यीशु भी हमारे लिए सम्माननीय है। ईश्वर तुल्य हैं। पर वो ईश्वर के पुत्र ही है। एट द एंड ना ईश्वर के पुत्र है। हां। अभी आपने जैसे बताया कि क्राइस्ट वो हैं जीसस क्राइस्ट और यहोवा ईश्वर है। ईश्वर है। वो उनके पुत्र हैं। जीसस क्राइस्ट। तो जो यहोवा है वो स्वयं धरती पर आता है कि नहीं आता है। लोगों के बीच में उनसे आकर बात करता है कि नहीं करता है या कोई भी कुछ भी। तो इस बारे में कोई बातचीत बाइबल में नहीं बताई गई। अच्छा इसमें थोड़ा सा एक और चीज जानते जान लेते हैं कि अ जो यहोवा है उसको हम सर्वव्यापक मानते हैं
00:33:42:00 या फिर एक जगह पर नहीं सर्वव्यापक मानते हैं। सब जगह है वो सब जगह ईश्वर तो हर जगह पर है। अच्छा तो ईश्वर के सानिध्य उपस्थिति हर जगह पर होता है। अच्छा मुझे ये बताएगा कोई जगह पे सीमित है। अच्छा मतलब वो ऐसा नहीं है कि वह एक जगह यह आपकी बाइबल में कहीं पर दिया है कि वो सब जगह है या थोड़ा सा बताएंगे आप मुझे नहीं बाइबल में बताया मतलब ईश्वर हम कहते हैं कि ईश्वर तो उसका ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है इंसान नहीं है कि वो इधर वो उधर जाओ ईश्वर तो हमारा विश्वास है तो एक शक्ति है हम तो वो उसका कोई नाम तो नहीं है अलग-अलग नाम देते हैं और उसका कोई मतलब बुरे लोगों में भी है सब जगह है हर जगह पर मतलब ईश्वर ने हम विश्वास करते हैं कि ईश्वर ने सबको सृष्टि किया है। नहीं सृष्टि करना अलग बात है। उसकी शक्ति होना अलग बात है और उसका स्वयं होना अलग बात है। तो उस बारे में क्या कहते हैं कि वो एक जगह है या सब जगह है। सब जगह है वैसे ही। तो ये बाइबल में कहीं पे दिया है। बाइबल में नहीं है। हम तो विश्वास करते हैं लेकिन कि ईश्वर सर्वव्यापी है। सब जगह है। तो बाइबल में इस बारे में नहीं बताया कि वो एक जगह है या सब जगह है। बाइबल मुझे एग्जैक्ट मालूम नहीं है कहां बताया है। अच्छा अच्छा अच्छा। ठीक है। ठीक है। अच्छा जैसे
00:34:57:03 कहा है कई जगह पर अरे ईश्वर सब जगह पर विषय है। क्योंकि अभी तक मैंने इसलिए उधर लिख रखा है अल्फा ओमेगा और हमारा आदि और अंत मतलब आप ये मान रहे हैं अभी एक्चुअली हुआ क्या है कि मेरी कई और क्रिश्चियन से बात हुई है। तो उसमें ये नहीं माना गया है कि ईश्वर स्वयं आता है। एक तो वो अवतार लेता है। ये नहीं माना गया। और ना ही यह माना गया कि ईश्वर सब जगह है। और इसमें मुझे जवाब यह दिया गया जब मैंने पूछा कि सब जगह नहीं है तो ऐसा-सा क्यों? तो उन्होंने कहा कि भाई अगर ईश्वर ईश्वर जो है जो खराब जगह होती है जो अपवित्र जगह होती है वहां कैसे हो सकता है? वो तो पवित्र है तो अपवित्र जगह पर वो नहीं हो सकता है। तो यह दिक्कत आ जाती है। कई लोगों ने मुझसे ऐसा कहा है। अब आप कह रहे हैं कि आपको पता नहीं है और उन्होंने बाइबल का रेफरेंस भी इस बारे में दिया और बाइबल में मेरी जानकारी में उनके द्वारा मुझे अभी तक यह नहीं बताया गया कि ईश्वर को सर्वव्यापक माना गया हो या फिर ईश्वर को अवतार लेने वाला माना गया हो। अच्छा इसमें थोड़ा सा इससे समझ जाएंगे। जैसे ईश्वर अगर सब जगह है और उसकी सत्ता भी सब जगह है। है ना? तो जैसे मान लीजिए कहीं पर कोई गलत कार्य हो रहा है। कोई किसी को मार रहा है तो जब वह किसी को मार रहा है तो वहां पर ईश्वर की सत्ता है।
00:36:12:04 मौजूद है। तो फिर वहां पे ये माना जाएगा कि ईश्वर की मर्जी से कोई किसी को मार रहा है। नहीं वो तो कैसे कर सकता है। मतलब वो तो ईश्वर तो सब जगह पे है। सभी लोगों पर है। सभी पर निवास है। लेकिन उसको स्वीकार करना ही नहीं करना वह इंसान का जो फ्रीडम है उनको स्वतंत्र है मतलब उसकी शक्ति स्वीकार उसकी शक्ति तो है लेकिन वो शक्ति को हिसाब से कोई चलता नहीं है कि जैसे ईसा जैसे ईसा जब धरती पे थे तो उन्होंने कई चमत्कार किए ऐसे चमत्कार जो सामान्य व्यक्ति कर ही नहीं सकता यानी कि प्रकृति के नियमों के विरुद्ध भी उन्होंने कुछ चीजें कर दी है ना जैसे कहीं पे मछली नहीं थी तो मछली अह आ गई थी खाने के लिए खाना नहीं था वहां या कोई अंधा था शायद मुझे ध्यान है मैंने बचपन में देखा था अंधा था उसकी आंखें आ गई थी तो यानी कि कुछ ऐसी चमत्कारिक चीजें उन्होंने की अपनी शक्ति का उपयोग करके यहोवा वाली शक्ति उन्होंने यूज़ की तो शक्ति अगर सब जगह है जी तो फिर कहीं पे कोई क्राइम हो रहा है कोई गलत चीज हो रही है जो हमारे नजरों में अपराध है तो फिर उसको वो रोक क्यों नहीं रहा है क्योंकि वो ईश्वर के वचन के अनुसार नहीं चलता या अपने स्वार्थ लाभ के लिए अपने हिसाब से चलता है नहीं तो ईश्वर की शक्ति तो है ना वहां शक्ति तो है लेकिन वो शक्ति के अनुसार जीवन बिताना चाहिए ना। आप समझे नहीं
00:37:27:06 मेरी बात। मैं नहीं बिता रहा हूं जीवन। मगर मैं अगर किसी के चाकू मार रहा हूं तो ईश्वर की शक्ति मेरा हाथ रोक सकती है ना। रोकते हैं जब आप अगर आप शुरू में सबसे पहले अगर आप किसी का चोरी करते हैं हम अंतरात्मा आप सब बोलते हैं कि वो सही नहीं है गलत है नहीं करना है लेकिन आप फिर भी करते हैं मैं बोल रहा हूं उसको फिर भी करते हैं और दूसरे बार करते हैं तीसरे बार करते हैं ये आदत बन जाती है आपके जीवन में तो ईश्वर की आवाज कभी सुनते नहीं है हम अपनी स्वार्थ अपनी आवाज सुनकर आप करते रहते हैं वो आदत बन जाते है अपने जीवन में लेकिन शुरू शुरू शुरू में जब भी कोई भी गलत काम करता है उसके अंदर आवाज सुनते हैं वो सही नहीं है। उनका कॉनशंस बोलते हैं हम विश्वास करते हैं कि पवित्र आत्मा हमसे बोलता है कि वो सही नहीं है वो नहीं करना है। लेकिन उसको दबाकर खुद करते हैं। ऐसा तीन चार बार करने के बाद वो आदत बन जाते है। कभी सुनते नहीं है। तो इसका मतलब यह नहीं कि उनका शक्ति नहीं है। शक्ति तो है सभी में है। लेकिन वो शक्ति के हिसाब से जो आवाज के अनुसार चलता नहीं है वो यानी ईश्वर कोई भी जो चमत्कार है वह ऐसे ही कर सकता है कि किसी को वह अच्छे विचार डाले उसके मन में और वह अच्छे विचारों के अनुसार काम करें। स्वयं से
00:38:42:09 उसको बलपूक नहीं रोक सकता वो मैं समझा नहीं स्वयं से उसको अपनी पावर का यूज़ करके नहीं रोक सकता। जैसे मैंने किसी को समझाया कि तुम गलत काम मत करना। गलत काम मत करना। तो वो नहीं मान रहे हैं। फिर गलत काम करने जा रहा है। तो ईश्वर उसको पावर से अभी तक तो समझा रहे थे। हम आप पावर का यूज करके स्ट्रेंथ का यूज करके उसको रोक सकते हैं कि नहीं? कर सकता है। तो वही मैं कह रहा हूं जब ईश्वर की शक्ति सब जगह है तो क्राइम को रोक क्यों नहीं रहा? ये तो इसलिए बोला ये सबसे पहले ईश्वर ने लोगों को फ्रीडम दिया है। स्वतंत्र दिया है। ये नहीं कि अपने इच्छा के विरुद्ध ईश्वर काम करे। हम ईश्वर के साथ सहयोग करना है। यानी कि यानी कि यानी कि जब कोई निर्दोष मारा जा रहा है तो उसमें ईश्वर की मर्जी है। नहीं ईश्वर की मर्जी कहां होगा? ईश्वर ईश्वर छोड़ रहा है ना कि भाई तुम इसे मार सकते हो। ये है ना मैं आपको जब ईश्वर इंसान को सृष्टि किया है तो उनको फ्रीडम दिया है। फ्रीडम मतलब गलत फ्री मतलब गलत और सही करना आपका फ्रीडम दे रखा है। लेकिन ईश्वर ने हमें इसलिए हम धर्म की जरूरत पड़ता है। हम यही सिखाया था माल ये प्रभु ईसा मसीह ने हम कहा कि एक दूसरे को प्यार करो। हम यह सिखाते हैं ताकि
00:39:57:15 लोग ईश्वर की जो सही काम करें। गलत काम ना करें। नहीं लेकिन दोनों उसी में है। हर व्यक्ति में है सही बुरा जो करने का इच्छा है। लेकिन जितना हम धर्म को पालन करते हैं, जितना ईसा मसीह के शिक्षा को हम अपने जीवन में लागू करते हैं, उसी हिसाब से हम अच्छे काम करते हैं। गलत काम में नहीं जाएगा। गलत रास्ते पर तो जब हम ईश्वर से दूर हो जाते हैं तब तो गलत काम किया जाता है लेकिन उसको ईश्वर मानते हैं मतलब उसको स्वतंत्र दिया है वो गलत काम कर रहा है वो गलत करता है नहीं तो जैसे फ्री विल दिया है तो यानी कि ईश्वर जो है डायरेक्टली कुछ ऐसे नहीं करता है कि कुछ चमत्कार तो फिर वहां पे मछली क्यों दे दी उन्होंने जीसस ने अंधे को आंख क्यों दे दी नहीं वो तो ये है नहीं हम तो यीशु तो ईश्वर हम मानते हैं उनको शक्ति दे रखा है तो उन्होंने हस्तक्षेप कर दिया। पिता और मैं एक हूं तो मतलब तो एक ही होकर तो पिता की शक्ति से चलो अपने स्वार्थ के लाभ से नहीं है। मैं इसीलिए पूछ रहा हूं कि आप कह रहे हैं कि वो हस्तक्षेप नहीं करता है। पहली बात तो हस्तक्षेप पहली बात तो ये हो गई कि हस्तक्षेप नहीं करता है। फिर भी एक चीज आएगी कि यदि जैसे कोई निर्दोष बच्चा है वो मारा जा रहा है तो ये प्रश्न उठेगा ना कि क्यों मारने दिया? अगर तुम्हारे पास शक्ति थी तो तुम रोकते। जैसे हमारे सामने कोई एक्सीडेंट हो जाता है या
00:41:12:21 कोई किसी को मार रहा होता है दुर्बल को कोई बलिष्ठ व्यक्ति मार रहा होता है तो हम उसे बचाने पहुंचते हैं क्योंकि हमारे पास शक्ति है उसे रोकने की तो जब ईश्वर के पास तो अनंत शक्ति अनंत शक्ति है तो वो नहीं रोकता है तो वो उसने फ्री विल दी है तो उसकी अपनी रीजनिंग हो सकती है मगर यह ब्लेम तो आएगा ना कि भाई आखिरकार उसने रोका क्यों नहीं इसका मतलब किसी वजह से उसने वो होने दिया एक तो यह बात आ गई दूसरी बात आपने कहा कि वो हस्तक्षेप नहीं करता है हस्त हस्तक्षेप नहीं करता है तो फिर उसने अंधों को आंख क्यों दी और या फिर मछली खाना क्यों दे दिया जहां पे नहीं था जो जैसे भूखा मर रहा था मरने देते या कोई अंधा परेशान था तो परेशान रहने देते तो हस्तक्षेप करता है कि नहीं करता है ये हस्तक्षेप का मतलब आप क्या है इंटरफेयर इंटरफेयर करता जैसे आपने कहा ना फ्री विल दिया है इंटरफेयर नहीं करता में यही है मैं बताया अगर हम ईश्वर से जुड़े रहते हैं हम तो ईश्वर हमेशा हमको अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं अगर हम ईश्वर से दूर दूर रहता है ये प्रार्थना इसलिए तो हम प्रार्थना करते हैं। मैं कह रहा हूं नहीं ईश्वर इंटरफेयर करना मतलब यही मैं डायरेक्टली डायरेक्टली इंटरफेयर जैसे अंधे को आंख देना खाना नहीं है तो खाना पैदा कर दिया जन्म दे दिया ये इनडायरेक्टली इंटरफेयर है एक मन में आपके अच्छे विचार प्रदान करना वो एक अलग चीज है कि आप ही करोगे मैं आपको
00:42:27:27 गाइड करूंगा आप ही करोगे मैं आपकी आत्मा में शोधन करूंगा नहीं हमको भी शक्ति दे रखा है अगर हम ईश्वर से जितने हम कहेंगे हमको भी कर सकते हैं आंधों को वो वो सही बात है वो सही बात है मगर डायरेक्टली इंटरफेयर करना वो पूछ रहा रहा हूं। तो दो बातें हो गई। एक तो यह है कि डायरेक्टली इंटरफेयर करता है कि नहीं करता। वह फंस रहा है। चीज थोड़ी समझ में नहीं आ रही। और एक यह नहीं समझ में आ रहा कि अ आखिरकार यह तो माना जाएगा ना कि कोई रीजनिंग ही सही मगर एक निर्दोष बच्चा जब मारा गया तो वहां पर ईश्वर मौजूद है अगर वो सर्वव्यापक है। यदि जैसा कि आपने कहा कि हम मानते हैं सर्व्यापक है। बाइबल में तो ऐसा नहीं है मेंशन। मगर वो बच्चा मारा गया तो ईश्वर ने क्यों नहीं रोका? तो हर जगह पर ईश्वर इंटरपेयर हो रहा है तो कोई झगड़ा मारपीट होने की जरूरत नहीं है संसार में सब शांति से रहेगा लेकिन हर जगह पर इसलिए मैं बोला इंसान को स्वातंत्र्य दे रखा है वो फ्रीडम होने के नाते वो फ्रीडम दुरुपयोग करते हैं वो इसलिए तो मरते हैं लेकिन वो फ्रीडम तो सही ढंग से अपने फ्री बिल इस्तेमाल करने के लिए ईश्वर से जुड़े रहना चाहिए ईश्वर ने फ्रीडम दिया सबको या ठीक है मारा गया एक निर्दोष उसकी क्या गलती थी उसकी कोई गलती नहीं है तो फिर उसने क्या किया था जो उसको मारा गया भाई ईश्वर ने फ्रीडम दिया इसको सबको ही
00:43:43:01 दिया है उसको भी दिया इसको भी दिया इसने फ्रीडम का दुरुपयोग करके उसको मार दिया तो उसकी क्या गलती हो गई ईश्वर ने उसको क्यों नहीं बचाया उसको ये तो इंसान ने करता है ना ऐसे ईश्वर बचा तो ईश्वर ने बचाया नहीं ना उसको ईश्वर ने कैसे बचाएगा मतलब तो इंसान एक दूसरे से झगड़ा करके मारपीट करता है उस समय तो मतलब इसमें क्रिश्चियनिटी ने इस बात का कोई जवाब दिया है मैं ये पूछ रहा हूं एक्चुअली नहीं हम तो इसलिए तो हम ऐसा कोई जवाब नहीं है। मतलब इसमें तो एक है। दूसरे को मारता है वो उसी में भी ईश्वर है। जो मारता है उसी में भी है। लेकिन जो मारने वाला वैसा ही है जो ईश्वर से दूर रहते हैं। ईश्वर की आवाज को सुनता नहीं है। अपनी मनमानी से चलता है। ये सब में ईश्वर है। ये वाली बात बाइबल में कहीं मेंशन है कि सब में ईश्वर है। जिसको मारा जा रहा है वो भी उसमें भी ईश्वर है। ये तो इसमें यह नहीं कि किसी को मार दे। लेकिन जो कुछ होता है ईश्वर की जानकारी से होता है सब कुछ। नहीं जानकारी है मगर सब में ईश्वर है। ईश्वर सब में है। हम यह विश्वास करते हैं। वो यह बाइबल में मेंशन है सब में ईश्वर है। कहीं नहीं आप जो सब में है मतलब किस में है आप जैसे इसके अंदर भी है। इसके अंदर प्लास्टिक की इस कुर्सी में भी है जमीन में भी है। कण पे हर जगह पे निवास निवास करते हैं। हमारे ओमनी प्रजेंस है। या ओमनी प्रेजेंस हम विश्वास करते हैं। उसका मतलब यह नहीं कि इसी में सभी हर जगह
00:44:58:09 पे है। ये तो वही मैं पूछ रहा हूं। ये मेंशन है बाइबल में। बाइबल में मेंशन तो लिखा है लेकिन मुझे मालूम नहीं एक्सैक्ट कहां लिखा है उसमें तो अच्छा ठीक है तो अब इसमें एक चीज ये आ रही है जैसे हमने कहा कि सभी धर्मों को सभी धर्मों में समन्वय स्थापित करना है। इसका मतलब हम ये मानते हैं कि इस्लाम भी धर्म है। हिंदूज़्म भी धर्म है और क्रिश्चियनिटी तो धर्म आप कह ही रहे हैं। आप ये मानते हैं। तो जब हमने फिर देखा कि धर्म क्या है? तो हमने कहा कि धर्म वो है जो ईश्वर से जुड़े। फिर हम ईश्वर पे गए ईश्वर को जानने के लिए। तो ईश्वर अवतार ले सकता है कि नहीं ले सकता है इस बारे में बाइबल मौन है। ईश्वर सर्वव्यापी है कि नहीं है इस बारे में बाइबल मौन है। अगर कहीं इसमें तो सर्वव्यापी है। ईश्वर नहीं बाइबल में कहां मेंशन है नहीं पता ना। वो तो मुझे मालूम नहीं है। बाइबल में तो है। नहीं मेरी जानकारी में नहीं है। वैसे तो एग्जैक्ट नहीं बोलते। सर्वव्यापी है लेकिन हर जगह पे ईश्वर है। वैसे अलग-अलग जगह पे वैसे दे रखा है। एक ही जगह पे नहीं है। नहीं जैसा आप बोलते हैं। फिर दूसरी बात आती है कि अगर ईश्वर नहीं भी हो तो ये तो मानना ही पड़ेगा कि ईश्वर की शक्ति सब जगह है। यस। तो फिर जब शक्ति को मान लेंगे या ईश्वर को स्वयं मान लेंगे। तो फिर इसमें आ जाएगा कि
00:46:14:07 जब क्राइम हो रहा है या कोई गलत चीज हो रही है तो उसमें ईश्वर हस्तक्षेप नहीं कर रहा है। जबकि वो कहीं-कहीं पर चमत्कार कर कर भी देता है। जीसस के माध्यम से चमत्कार भी हो जाते हैं। फिर वो क्राइम के होने दे रहा है। बुराई के होने दे रहा है। ये सब जिज्ञासाएं होती हैं। तभी कोई व्यक्ति किसी को ईश्वर मान पाता है कि हम ईश्वर को मान जान पाए मान पाए। अब मुझे इस ईश्वर के पास ईश्वर से जुड़ना है और कैसे जुड़ना है तो वो धर्म है। तो ईश्वर को जानने में कई सारे प्रश्न आ रहे हैं जहां पर अभी हमारी चर्चा में वो सॉल्व नहीं हुए जिस पर बाइबल में कहां मेंशन है वो भी रह गया और कुछ जगह पे तो बाइबल मौन ही है और अब इसमें आगे एक चीज चलते हैं कि
00:46:57:06 यह जैसे कन्वर्जन होता है आपके यहां क्या माना जाता है कि जो संतान है मतलब जो विवाह है वो क्रिश्चियनिटी के अकॉर्डिंग हुआ। जो विवाह है वही मान्य है कि कहीं किसी ने भी किसी को अपनी पत्नी मान लिया तो वो विवाह माना जाता है। हमारे इसमें तो है सबसे पहले हम कहते हैं कि अपने धर्म के लोगों से विवाह करना है। अगर कोई हिंदू धर्म हो या प्रोटेस्टेंट हो या किसी भी जगह से हो तो उसी के लिए परमिशन लेना पड़ता है। विवाह कर देते हैं वैसे ही। लेकिन चर्च में नहीं करते विवाह। अगर किसी धर्म का है तो हम उसका पूरा लिखकर जो कानून है उसी हिसाब से करके सारे अनुमति लेकर सारे डॉक्यूमेंट प्रसन्न करते हैं तो हम करते हैं चर्च में लेकिन उसको अपने धर्म में कन्वर्ट करने के लिए हम नहीं बोलते हैं वो हिंदू धर्म का है वो तो हिंदू धर्म प्रैक्टिस कर सकता है वो ईसाई एक ही दो कंडीशन है नहीं हमारा जो विवाह में हम यही कहते हैं सबसे पहले अगर एक ईसाई या पति या पत्नी कोई भी ईसाई हो अपने विश्वास को प्रैक्टिस करना है। छोड़ना छोड़ना नहीं। अगर छोड़ने है तो हम नहीं करते
00:48:12:09 चर्च में हम एक्सेप्ट नहीं करते हैं। तो ये किसी धर्म के सवाल मेरा सवाल दूसरा है। वो अलग हो गया। सवाल ये है कि क्या विवाह वो है जो क्रिश्चियनिटी के अकॉर्डिंग हो। उसमें आदमी क्रिश्चियन हो ये जरूरी नहीं है। आदमी का बिलीफ क्रिश्चियनिटी वाला है कि नहीं वो मैं नहीं पूछ रहा। अच्छा जो विधि है जैसे हमारे यहां सात फेरे लिए जाते हैं अग्नि के फेरे लिए जाते हैं और वैदिक मंत्रों का उच्चारण होता है। इस्लाम में कुछ और होता है कुबूल है कुबूल है वगैरह और आपके यहां भी कुछ और होता होगा जी कि यू मे किस द ब्राइड ऐसे करके नहीं हमारा उसमें मेन चीज तो बाइबल को हाथ रखकर वो मैं ऐसे अपनी पत्नी मानता हूं। अपपत्नी मानता हूं और सुख और दुख में सब उनका साथ रहे अब अगर ऐसे विवाह नहीं हुआ हम किसी ने कहीं और विवाह कर लिया अलग तरीके से जी तो जब तक वो क्रिश्चियनिटी के हिसाब से विवाह नहीं हुआ है तब तक क्या आप मानेंगे कि वो विवाह चर्च नहीं मानता चर्च नहीं मानता यानी कि वो एक कोई गवर्नमेंट जो रजिस्ट मैरिज करता है वो चर्च में आ सकता है लेकिन हम जो परम प्रसाद है उसका स्वीकार नहीं करते मतलब धर्म के दृष्टिकोण से धर्म की वो धर्म अगर
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00:49:25:25 क्रिश्चियनिटी से देखा जाए तो जो भी व्यक्ति क्रिश्चियनिटी के अनुसार विवाह नहीं किया है वह अवैध विवाह है या है ना तो
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00:49:33:06 जैसे हमने देखा कि भारत में लगभग आपने बताया 2000 पहले से कन्वर्शन चालू हुए हम उससे पहले जो उनके विवाह हुए हम तो वो तो क्रिश्चियनिटी के हिसाब से नहीं हुए नहीं तो यानी कि एज क्रिश्चियनिटी के हिसाब से वो विवाह अवैध अवैध माने तो 2000 पहले की बात तो हमें माल मालूम नहीं उस समय कैसे हुआ था क्या हुआ था नहीं ईसा जो क्रिश्चियनिटी वाला मामला है वह 2000 साल पहले से आया तो ऐसा अगर अभी अभी भी हो जो चर्च में आएंगे तो चर्च के हिसाब से हम करवाते हैं वैसे ही जो पहले नहीं हुआ है लेकिन जब आएंगे वो ठीक है वो मैं दूसरे क्वेश्चन पे जा रहा हूं एक्चुअली कुछ लोग हैं जो इस बारे में भ्रम फैलाते तो इसीलिए मैं पूछ रहा हूं तो जैसे 2000 साल जैसे जिसने क्रिश्चियनिटी के हिसाब से नहीं किया जैसे मान लीजिए आज ही आज ही की डेट में कोई कोई व्यक्ति है हिंदू फैमिली से है। उसने क्रिश्चियनिटी के हिसाब से नहीं किया है विवाह और आगे चलके उसकी जो संतान है जी। अब उनका जो विवाह है वो तो क्रिश्चियनिटी के हिसाब से विवाह नहीं है क्योंकि वो तो हिंदू उसके हिसाब से हुआ रिचुअल्स के हिसाब से तो उसको अवैध माना जाएगा ना। नहीं उसको तो सबसे पहले क्रिश्चियन क्रिश्चियनिटी क्या कहती है कि हिंदूइज़्म का विवाह भी हुआ है। नहीं हम तो
00:50:49:03 हिंदूइज़्म का विवाह हिंदूइज़्म के लिए सही है। हिंदूइज़्म के लिए क्रिश्चियनिटी के लिए नहीं है। हम तो इसी के हम हमसे कोई मतलब नहीं है जो इस्लाम में जो विवाह करते हैं आप समझिए आप समझिए। मतलब वो नहीं कह रहा हूं। मैं दूसरा प्रश्न इसके बाद आएगा कि जो विवाह बाइबल पे हाथ रख के नहीं हुआ है जी बल्कि अग्नि के साथ फेरे लेकर के हुआ है या और किसी तरह से हुआ है तो वो विवाह क्रिश्चियनिटी के अकॉर्डिंग वैध नहीं है ना नहीं हो सकता नहीं हो सकता है तो अब उस विवाह से उत्पन्न होने वाली संतान क्या कहलाएगी? मैं सबसे पहले यही समझना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति जन्म एक ईसाई धर्म में हिंदू धर्म में कहीं भी जन्म लेने से कोई ईसाई नहीं बनते। मैं ये नहीं कह रहा ईसाई नहीं आपको ये समझना चाहिए पहले ईसाई बनने के लिए हम विश्वास करते हैं कि सबसे पहले ईश्वर हमें बुलाना है और उसको उत्तर देना है बपतिस्मा द्वारा। बपतिस्मा के द्वारा ही एक व्यक्ति ईसाई धर्म का सदस्य बन जाता है। उसके अलावा कोई नहीं वैसा एक परिवार में इसलिए आप बोल रहे हैं जो उसी का बच्चे लेकिन इधर ही तो ईसाई धर्म में जन्म रहने वाले मांबाप है ईसाई धर्म उनका बच्चे भी ईसाई नहीं है वो जन्म से ही वो चर्च में आकर बपतिस्मा में लेगा तभी वो ईसाई देखिए
00:52:04:04 लोग परेशान परेशान इसलिए हो रहे हैं क्योंकि उनसे प्रश्न पूछा जाता है जो कन्वर्ट हो रहे हैं जैसे मान लीजिए कि कोई व्यक्ति है जिसने हिंदू फैमिली में जन्म लिया जी हां उसके माता-पिता का जो विवाह हुआ है हिंदू रिचुअल्स के हिसाब से हुआ। अब वह व्यक्ति कन्वर्ट हो रहा है यानी वह जो हिंदू जिसके माता-पिता हिंदू हैं और माता-पिता हिंदू हैं उनका विवाह भी उसी से हुआ है। अब वो व्यक्ति जो है वो कन्वर्ट हो रहा है किसमें? क्रिश्चियनिटी में। ठीक है? जैसे ही उसने क्रिश्चियनिटी को अपनाया तो क्योंकि अब वो क्रिश्चियनिटी को अपना लिया है तो क्रिश्चियनिटी के अनुसार उसके माता-पिता का जो विवाह है वो अवैध है। उसके हिसाब से वो जो संतान है वो अवैध संतान होगी नाजायज। नाजायज हो गई। तो यानी कि जब कोई कन्वर्ट होता है क्रिश्चियनिटी में तो उनको यह चीज आ रही है कि मैं जब कन्वर्ट हो रहा हूं क्रिश्चियनिटी में तो यह चीज हो रही है कि वो अपने आप को नाजायज संतान कह रहा है इललीगल वो ऐसा नहीं है ऐसे ये सबसे पहले जब कन्वर्ट हो रहे हैं बपतिस्मा स्वीकार करके कन्वर्ट हो रहे हैं तो उसके साथ ही उनका विवाह भी जो भी है उसे वो भी एक्सेप्ट करते हैं और उनका बच्चे भी बपतिस्मा करते हैं तो एक्सेप्ट करना अलग बात है एक्सेप्ट हमने कर लिया जैसे कोई व्यक्ति हीन है जो भी है मगर हमने उसको यहां शरण दे
00:53:19:06 दी उसको रहने के लिए घर दे दिया जमीन दे दी सब कुछ किया ठीक है अच्छी बात है मगर उसकी जो आइडेंटिटी है क्योंकि उसका जो माता-पिता का विवाह है वो क्रिश्चियनिटी के अकॉर्डिंग नहीं हुआ क्रिश्चियनिटी के अकॉर्डिंग नहीं है उसका मतलब यह नहीं कि वो गलत काम कर रहे हैं या वैसा कर रहे उसमें तो क्या दिक्कत है अपनेप करते हम तो यह नहीं कहते कि दूसरे लोग का जो विवाह हो रहा है वो सही नहीं है कौन बोलता है वैसे क्रिश्चियनिटी ये मानता है कि जो वैदिक चीजें हैं वह सही हैं। अगर यह मानता है तो यही बोल रहा है ना तो हिंदू धर्म में जो शादी कर रहे हैं उसी हिसाब से शादी कर रहे हैं। वो उनके लिए सही है। हम थे वो गलत है। नहीं ये तो आप कह रहे हैं। मैं उसकी बात कर रहा हूं। नहीं ईसाई धर्म में नहीं हम तो किसी धर्म के लोगों को अरे आप आप एक देखिए बात अच्छी है आप आप समन्वय स्थापित कर रहे हैं पर जो आइडियोलॉजी है जो क्रिश्चियनिटी है वो क्या कह रही है उसको जान वो तो इसलिए है ना हम तो अगर वो ये कह रही है कि भाई वो भी धर्म है जैसे जो वेद वाला क्रिश्चियनिटी में हमारे कैथोलिक चर्च में यही विश्वास है मतलब कि जो किसी भी धर्म के धर्म में विश्वास करने वाला उनका संस्कार उनके लिए सही है। मगर वह हम यह नहीं बोलते कि वह गलत है। कोई नहीं बोलता है। मगर जो यह कह रहा है कि
00:54:34:12 कि जो वेद के अलावा जैसे वेद में हमसे उससे कोई मतलब नहीं। हमें वेद के अनुसार हो अलग हो किसी भी सुनिए तो उसको हम बोलते भी नहीं है कोई उसके बारे में। उसमें वेद में एक लाइन आई है। जो भी वेद के बाहर हम वेद के विरुद्ध कोई भी कार्य होगा हम है ना या कुछ भी कहा जाएगा वो सब कुछ अमान्य है। हम वो सब कुछ आपको मुक्ति नहीं दिलाएगा। तो बाइबल में ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो वेद की इस लाइन के विपरीत वेद की चीजों के विपरीत जाती है। ऐसी कई बातें हैं। तो जब ऐसी कई बातें बाइबल में है तो बाइबल वेद के अनुसार हो गई अमान्य यानी बाइबल वेद के अनुसार हो गई नास्तिक। वेद के अनुसार बाइबल हो गई नास्तिक। तो क्या बाइबल या क्रिश्चियन जो उन्हें नास्तिक मान रहा है उनके धर्म को धर्म नहीं मान रहा है उसको भी धर्म मानते हैं धर्म धर्म वो है जो ईश्वर से जोड़ेगा और आपके अनुसार बाइबल ईश्वर से जोड़ रही है जी मगर जो वेद है वो ये कह रहे हैं कि वेद के अलावा कोई भी मार्ग नहीं है मुक्ति प्राप्त करने का वेद ही है ठीक है अल्टीमेट मुझे ऐसा लगता है इसमें भी कहा गया होगा शायद आपको ना मालूम हो बाइबल में भी कहा गया कही गई होगी। मगर
00:55:49:18 ठीक है थोड़ी देर मान लेते हैं। वेद ये कह रहे हैं कि वेद के अलावा और कोई वैदिक मार्ग के अलावा और कोई मुक्ति का मार्ग नहीं है। तो ऐसे में उन्होंने बिना नाम लिए बाइबल का भी खंडन कर दिया। ठीक है? अब जिसने बाइबल का खंडन किया है यदि हम उसको धर्म कह देंगे तो हम अपना खंडन कर रहे हैं। नहीं हम तो उससे हमारा क्या मतलब है? सही। अगर जो भी मतलब बाइबल को गलत कहने वाला या बाइबल गलत कहा कुछ भी हो लेकिन जब हमारा धर्म में आता है नहीं बाइबल में कहा गया एक-एक शब्द हम सत्य मानते हैं ना एक-एक शब्द सत्य है ना बाइबल क्रिश्चियनिटी के हिसाब से बाइबल में कहा गया है एक-एक शब्द सत्य है अब जिसको हम सत्य बोल रहे हैं वो ये कह रहा है कि बाइबल असत्य है नहीं वो बोलने दो अगर अगर बोल लेकिन जब वो हमारे पास आएंगे नहीं तो हम उसको उसको स्वीकार करना चाहिए ये नहीं कि असत्य बोल आदमी आदमी आ रहा है उसको स्वीकार करना अलग बात है। मगर उस लाइन को आप स्वीकार करते हैं कि बाइबल असत्य है। वहां ये यहां ये कहा जा रहा है बाइबल असत्य है। तो उस लाइन को आप स्वीकार करते हैं। नहीं वो तो अपने उनके धर्म में बोलते हैं तो हम उसमें हमारे क्या नहीं नहीं आप स्वीकार करते हैं कि नहीं? समस्या ये है। तो मैं उससे मैं
00:57:04:26 बता रहा हूं। किसी भी धर्म में कुछ भी लिखा है हम स्वीकार करने की क्या जरूरत है उसमें? चलिए हम अपने धर्म में स्वीकार करते हैं। अपने धर्म में प्रभु हमें जो कहा है पढ़ा है उसी को हम स्वीकार करते हैं। अन्य धर्म में कुछ भी हो गलत हो सही हो हम उसको क्या मतलब है हमसे? अच्छा बाइबल में भी एक जगह ये बात आती है सामने जैसे यहोवा ये कह रहे हैं कि कोई भी और किसी देश के देवता को या उनके भगवान को नहीं मानेगा। तो सबसे पहले यह वाली बात तो आ गई कि जो नहीं जो इस बात को नहीं मानने वाले लोग हैं मतलब जो अपने जिनके अपने ईश्वर के रूप हैं और उसको भजन कर रहे हैं। तो यहां पर वो अगेंस्ट जा रहे हैं। है ना? तो अगेंस्ट जा रहे हैं तो इन चीजों को हम धर्म कैसे कह रहे हैं? क्योंकि आपने कहा कि सभी वो धर्म वो है जो ईश्वर की ओर ले जाए। और अगर ईश्वर की ओर ईश्वर यहोवा यदि ईश्वर है तो उसके अनुसार जो अन्य देवताओं को पूजने वाले सिस्टम्स हैं यानी बिलीफ्स हैं वो ईश्वर की ओर नहीं ले जा रहे हैं क्योंकि यहोवा ईश्वर है। तो पहली बात तो यह है कि यहोवा के अनुसार क्या और भी ईश्वर हैं इस दुनिया में। यहोवा के अनुसार यहोवा बोलता है केवल मैं ही ईश्वर हूं। हम और मुझ पर विश्वास करो मेरी रास्ते पे चलो। केवल मैं ही ईश्वर
00:58:20:02 हूं। तो यहां पर ये कहना कि ये नहीं कि मैं इस मैं तुम्हारे सी आप ये समझना है कि पहले आप एक मिनट ये कहना कि और देशों के जो ईश्वर हैं या भगवान हैं उनको मत पूछो। ये किस किस तरह के भगवान के बारे में बात हो रही है। ये आप तो एक चीज तो ये समझना ये बाइबल को उसी को एक सेंटेंस सेंटेंस लेकर इसको व्याख्या करना। मुझे ऐसा लगता है उन्होंने कहा होगा बाइबल में मैं मैं समझ रहा हूं। मुझे ऐसा लगता होगा उन्होंने कहा होगा कि भाई वहां वह जो मान रहा है जिस भगवान को वह वास्तव में भगवान नहीं है। मगर वो दुर्जन तोष न्याय एक शब्द होता है कि तुम जो मान रहे हो उसी अनुसार मैंने बात कर दी। है ना? तो उस वे में उन्होंने कहा कि वो कोई और किसी और देश के भगवान को जो पूज रहा है उसको तुम्हें नहीं पूजना है। मैं ही भगवान हूं। अगर मेरी मैं मेरे लिए मेरा मांबाप है और मैं उसको जन्म दिया मुझे और मम्मी को मैं दूसरी लड़की को बोलकर यही मेरी मां बोलता सही है कि नहीं इसलिए अगर बताते हैं कि अगर ईश्वर को
00:59:24:14 ईश्वर को और मानते हैं तो ईश्वर के रास्ते पर चलना है। दूसरा मूर्ति पूजा या किसी को पीछे नहीं जाना चाहिए। अगर उधर जाना है तो उधर जाओ। तो जो जा रहा है तो जो जा रहा है वो यहोवा के अगेंस्ट जा रहा है ना यहोवा के अगेंस्ट जा रहा है क्योंकि ना तो उसी में इतना ही है अगर आप मुझ पर विश्वास कर रहे हैं तो प्रभु ईसा मसीह अगर मुझे अनुसरण करना है ठीक है तो क्रूस लेकर आप मेरे पीछे आ जाओ नहीं तो मेरे पीछे नहीं आना चाहिए अगर मैं एक ही ईश्वर पर विश्वास करता हूं उसी ईश्वर के चल रास्ते पे चलना है और दूसरे को जाने को बोल दूसरे भी ईश्वर है यहोवा के अलावा यही बता रहा है ना वो दूसरे के नहीं मैं एक ही हम विश्वास हमारे विश्वास के अनुसार मैं बोल रहा हूं ईश्वर एक ही ईश्वर है और एक ही सृष्टि करता है वो यहोवा है वो है पुराने विधान में यहोवा बोलते हैं बोलता है तो जो यह जो यहोवा की बात ना मानकर दूसरे सिस्टम्स को फॉलो कर रहा है वो धर्म कैसे फिर उसको आप धर्म कैसे कह रहे हैं अगर धर्म वो है जो ईश्वर से जोड़ रहा है यहोवा के जो अगेंस्ट जा रहा है जैसे अभी मैंने कहा था वेद के अगेंस्ट जो जाएगा वो वैदिक नहीं है हमारे अनुसार अनुसार धर्म की व्याख्या वही है। हमारा बिलीफ और हमारे तर्क और बिलीफ के अनुसार जो व्याख्या
01:00:39:15 है वेदों को मानने वाला ही आस्तिक है। मगर अभी जैसे बात कर रहे हैं कि जो यहोवा से जोड़े वो धर्म है। तो जो यहोवा से नहीं जुड़ रहा है। वो और कहीं जा रहा है। यहोवा की बात जो है वो दूसरे आइडल्स की पूजा कर रहा है। दूसरी फिलॉसफी को मान रहा है। तो वो जो कर रहा है वो धर्म कैसे हुआ? वो तो धर्म नहीं है। वो भी धर्म हो सकता है। उन्हीं के हिसाब से उनको धर्म है। वही धर्म है। उनके हिसाब से नहीं। देखिए उनके हिसाब से क्या होता है? एक होता है ट्रुथ होता है जो बदलता है। मगर जब हम धर्म की बात करते हैं तो वो तो एक ही होता है ना ट्रुथ। ट्रुथ एक ही होता है सत्य। हम तो यह चीज़ इस पर्सेक्टिव पे जैसे आपने अभी उदाहरण दिया कि कोई अपनी पत्नी है तो उसके लिए प्यार करेगा या उसको उसका भरण पोषण करेगा या दूसरे की पत्नी का या दूसरे की बेटे का या तो वो तो एक बात हो गई कि भाई यहां पे मेरा जो वो है सीमित दायरा है। मगर ईश्वर तो पूरी दुनिया का है ना। हम्। तो क्रिश्चियनिटी के अनुसार यहोवा पूरी दुनिया का ईश्वर है। उसके अलावा और कोई ईश्वर नहीं है। हम तो जो यहोवा को ईश्वर नहीं मान रहा जो यहोवा की इस बात के अगेंस्ट जा रहा है कि किसी और ईश्वर की पूजा नहीं करनी है तो फिर उसको आप धर्म कैसे कह रहे हैं? नहीं यही तो है वो तो भटका वो क्रिश्चियनिटी के अनुसार
01:01:54:24 तो वो भटका हुआ सिद्ध हुआ ना। नहीं नहीं हम हम कहते हैं यावा जो ईश्वर है हम मानते हैं ईश्वर दूसरा बोलते हैं अल्लाह बोलते आप बोलते राम बोलते कृष्णा बोलते कुछ भी केवल नाम केवल नाम का अंतर नहीं है नहीं नाम का धर्म भी अलग है फीचर्स का भी अंतर है अलग है और उसको प्राप्त करने की विधि का भी अंतर है। वो भी अंदर है। रास्ता भी अलग है उसका सभी का ऐसा ही है। मतलब धर्म में लेकिन हम यह नहीं कि जब हम एक ईश्वर पर विश्वास करते हैं उसका मतलब नहीं बाकी सब गलत है। तो गलत ही तो हुआ। नहीं हम तो हम तो बोलते नहीं है। आप बोलते नहीं है मगर गलत ही तो हुआ। एक तो एक आप समझना चाहिए। हमारा कैथोलिक चर्च में जी। सबसे पहले तो बाइबल है। एक चीज बाइबल है, पवित्र ग्रंथ है। उसके अलावा हमारा टडिशन हम बोलते हैं। जो पारंपरिक हां पारंपरिक बोलते हैं। तो और उसके अलावा तीसरा है हमारा चर्च जो इंटरप्रेट करता है उसको वो समय के अनुसार ये बाइबल को भी और सभी टीचिंग को प्रभु यीशु मसीह का शिक्षा भी उसको हम इंटरप्रेट करता है। तो इंटरप्रेट करते इंटरप्रिटेशन होता है। उसी को इसी हिसाब से क्योंकि ना समय के अनुसार बदलते रहते हैं हर चीज ये नहीं कि पुराने वाला लेकिन पवित्र ग्रंथ
01:03:10:04 में जो लिखा है वो हम विश्वास करते हैं उसमें कोई फर्क नहीं लेकिन उसको ओल्ड टेस्टमेंट ओल्ड टेस्टामेंट वैसे ही है वो यहूदी धर्म का है लेकिन प्रभु यीसा मसीह यहूदी धर्म के था और उसी को करेक्ट करने के लिए प्रभु यीशु मसीह आया वो गलत रास्ते पे जा रहा था इसलिए यीशु मसीह आकर न्यू टेस्टमेंट यानी वास्तविक बाइबल न्यू टेस्टमेंट न्यू टेस्टमेंट यहां विश्वास है तो ओल्ड टेस्टमेंट को न्यू टेस्टमेंट के बैकग्राउंड में देखना चाहिए। इसलिए प्रभु ईसा मसीह ने उन लोग मतलब जो ओल्ड टेस्टमेंट में जो बातें अगेंस्ट जा रही है न्यू टेस्टमेंट के तो वो नहीं माननी चाहिए। नहीं अगेंस्ट नहीं उसी के न्यू टेस्टमेंट के अनुसार उसको इंटरप्रेट करना है। इंटरप्रिटेट ये नहीं कि उसके अलग देखना है। क्योंकि ना प्रभु ईसा मसीह ने लोग पुराने विधान में लोग तो ईश्वर को प्यार एक ईश्वर को प्यार करते थे। जी लेकिन पड़ोसी मतलब पड़ोसियों को प्यार करते नहीं है। पड़ोसी मतलब अपने धर्म के लोग दूसरे लोग उसको पड़ोसी नहीं मानते थे। वो प्रेम प्रेम नहीं करते थे। तो ईसा मसीह ने आकर ये कहा है कि ईश्वर और पड़ोसी दोनों को प्यार करना है। तो अगर ईश्वर को प्यार करते हैं तो अपने पड़ोसी को ही प्यार करना है। पड़ोसी ये है नहीं जिनको भी जरूरत है अपनी नीड है उसी को पड़ोसी मानते हैं। ये नहीं कि अपने घर का आसपास रहने वाले तो
01:04:25:06 [गला साफ़ करने की आवाज़] कोई भी धर्म का हो, जाति का हो, सभी हो, सब अपने बात वही फंस रही है। एक्चुअली आप कह रहे हैं कोई भी धर्म का हो। बात फंस रही है। पहली बात धर्म आपने बोला कि जो ईश्वर से जोड़े वही धर्म है। इस बात को मैं भी मानता हूं। बात यह है कि सब जगह जिसको हम धर्म कह रहे हैं यह भी धर्म है, यह भी धर्म है, यह भी धर्म है। वहां पर ईश्वर के नाम पर ईश्वर ही है, कुछ और है। जैसे इस्लाम की बात करें, जैसे इस्लाम की बात करें तो इस्लाम कहता तो है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है। जी हां। मगर फिर कहता है कि वो अवतार नहीं ले सकता। और अवतार नहीं ले सकता, ये सीमित हो गया। ईश्वर में लिमिटेशन आ गई। इस ये काम वो नहीं कर सकता। जब वो सीमित हो गया तो वो ईश्वर सिद्ध नहीं हुआ। जो सर्वशक्तिमान नहीं है वो ईश्वर नहीं है। तो जब वह ईश्वर नहीं है तो फिर उसको प्राप्त कराने वाली चीज धर्म सिद्ध नहीं हुई। तो फिर हमने उसको धर्म कैसे कह दिया? इसी प्रकार से अगर बात करें क्रिश्चियनिटी की अभी हमने काफी सारी बात की। तो ये क्रिश्चियनिटी बाइबल तो मेरे जानकारी में यह कह रहा है कि ईश्वर सर्वव्यापी नहीं है। ईश्वर अवतार नहीं लेता। वो अपने पुत्र को भेजता है। आपने सर्व्यापी है। सुनिए तो सुनिए। फिर आपने यह कहा कि ईश्वर सर्वव्यापी है। मगर बाइबल में कहां लिखा है अभी आपको नहीं पता है। मेरी जानकारी में बाइबल में नहीं लिखा है कि ईश्वर सर्वव्यापी है।
01:05:40:07 फिर आगे बढ़ते हैं कि अगर वो सर्वव्यापी आप मानते हैं तो फिर जहांजहां पर ये अत्याचार हो रहा है, क्राइम हो रहा है और ईश्वर सब जगह है, वो ओमनीपोटेंट है, सर्वशक्तिमान है तो फिर वो उसको रोकने की क्षमता रखता है तो एक बच्चे की जान वो क्यों नहीं बचा रहा है? कोई बच्चा पहाड़ से गिर गया, पैर फिसल गया। उसके माता-पिता की गलती थी मगर वो गिर गया और वो मर रहा है तो उसको क्यों नहीं बचा रहा है? तो इस मामले में भी मौन है क्रिश्चियनिटी। अच्छा तो फिर इससे आगे चले तो अगर बात करें जीसस की तो उनका भी एक 12 की आयु से लेकर के 30 वर्ष के बीच का इतिहास उस पर भी मौन है। तो बात ये आती है कि जब हम किसी को धर्म कह रहे हैं तो अन्यों को आपके हिसाब से जिसको हम धर्म कह रहे हैं वो आपके ही हिसाब से वो धर्म सिद्ध नहीं हो रहा है। आप जिसको धर्म कह रहे हैं कि सभी धर्मों में सामंजस्य होना चाहिए। वो आपके अनुसार दूसरी चीज है। धर्म नहीं है। वो बिलीव्स हैं क्योंकि बाइबल के अगेंस्ट होने के कारण वो सही नहीं है। वो उनके मूल में रूट में यही है। जैसे आपने रूट की बात की ना तो रूट में यही है कि वो धर्म नहीं है। क्योंकि वो यहोवा के अगेंस्ट है। और दूसरी बात नहीं ये कैसे हो सकता है? वो धर्म नहीं है। कौन बोलता है वैसे सही कि बाइबल में ही यहोवा की टीचिंग के अगेंस्ट जाना। जैसे यहोवा का मना किया गया रिजेक्ट किया गया बाइबल के द्वारा मूर्ति
01:06:55:10 पूजा को अवतार को इन चीजों को तो इनके अगेंस्ट जाना जो है वो अधर्म कहा गया कि भाई वो ठीक नहीं है तो अब वो जहां पे जहांजहां पे यहोवा ने कह दिया ये नहीं करना है और वही जो व्यक्ति कर रहा है फिर उसके करने को हम धर्म कैसे कहेंगे अगर यहोवा के अनुसार चलना धर्म है तो यहोवा के अगेंस्ट जाना अधर्म हुआ तो जो जो यहोवा के अगेंस्ट जा रहा है वो अधर्म है तो फिर हम कैसे कह रहे हैं कि वो भी धर्म है एक तो ये बात ये वाली वाली बात हो गई। दूसरी बात कुल मिलाकर के यह है कि धर्म के मूल में है ईश्वर। आपने कहा आपने अभी कहा थोड़ी देर पहले कि वो इस्लाम कैसे धर्म नहीं है? ठीक है? आपने कहा इस्लाम धर्म कैसे नहीं है। तो हमने कहा कि ईश्वर को प्राप्त कराने वाला ईश्वर से जोड़ने वाली जो बिलीफ सिस्टम है वो धर्म है। ठीक है? फिर उसके बाद हमने जाना कि ईश्वर क्या है? तो ईश्वर वो है जो सर्वशक्तिमान है। अब जो इस्लाम है वो कह रहा है कि ईश्वर अवतार नहीं ले सकता। वह नीचे नहीं आ सकता और भी बहुत सी चीजें वह नहीं कर सकता तो फिर ईश्वर सर्वशक्तिमान नहीं हुआ इस्लाम के अनुसार जब वह सर्वशक्तिमान नहीं है तो यहां यानी कि वो जिसके बारे में वो कुरान बात कर रही है वो धर्म नहीं है। है ना? जिसके बारे में कुरान बात कर रही है वो ईश्वर नहीं है। तो जहां पर ईश्वर है ही
01:08:10:12 नहीं वहां पर उसको उससे जोड़ने वाली जो चीज है वो धर्म कैसे? आप कह रहे हो ईश्वर से जोड़ने वाली चीज धर्म है। एक तो यह टॉपिक हो गया वह काफी गहरी हो गई बातें और इधर क्या हो रहा है कि इधर बाइबल मना कर रही है कि जो भी अगेंस्ट जा रहा है वो क्या कहते हैं वो अधर्म है और आप जो है अपनी ओर से कह रहे हैं कि हम ऐसा नहीं करते मगर बाइबल कई जगह रोक रही है। कई चीजों में बाइबल मौन है। जैसे कि ईश्वर अवतार ले सकता है कि नहीं। सर्व बाइबल मना कर रही है बल्कि बाइबल स्पष्ट तौर पर मूर्ति पूजा को अवतारवाद इत्यादि का खंडन कर रही है। यानी कि वो ये नहीं चाहती कि आप अवतारवाद माने। इसका मतलब ईश्वर अवतार नहीं ले सकता बाइबल के अकॉर्डिंग। तो यहां पर भी वो वाली बात आ रही है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान कैसे फिर जब वो अवतार नहीं ले सकता क्योंकि अवतारवाद का विरोध है। दूसरी बात यह आ रही है कि अगर यह मान लें आपके अनुसार कि बाइबल में लिखा होगा कि वो सर्वव्यापी है पर हम लोग मानते हैं बाइबल में कहां लिखा है नहीं पता। तो फिर यह वाला प्रश्न आ जाता है कि जहां पर कुछ गलत हो रहा है वो रोक क्यों नहीं पा रहा है जब वो ओमनीपोटेंट है और अवतारवाद के विषय में आपने कहा मौन है जबकि वो खंडन कर रही है मगर आपकी बात रख लेता हूं कि मौन है तो मौन है तो फिर जब व्यक्ति को मालूम ही नहीं है कि वो ईश्वर है कि नहीं
01:09:25:13 तो फिर वो व्यक्ति उसको धर्म कैसे माने अगर वो ईश्वर की फीचर्स पूछेगा कि वह जैसे हमारे यहां कहा गया सतचित आनंद सच्चिदानंद अबाध्य सर्वशक्तिमान ईश्वर सर्वव्यापक सर्व नियंता यह हमारे यहां कहा तो हमारे यहां उस चीज को लेके आगे चला गया। ऐसे नहीं कि इस्लाम ने कह दिया कि वह सर्वशक्तिमान है ईश्वर। मगर उसने कहा वो अवतार नहीं ले सकता। हमारे यहां ईश्वर को सब कुछ कर सकने वाला फिर वहां आगे लेके चला गया। ठीक है? अब बाइबल अवतार का खंडन कर रही है। आप कह रहे हो ले सकता है पर बाइबल में कहां लिखा है नहीं पता। बाइबल इस बारे में मौन है कि वो सर्व्यापक है कि नहीं। और बाइबल इस बारे में मौन है कि जहां पर कुछ गलत हो रहा है वहां रोक क्यों नहीं सकता। बाइबल इस बारे में भी मौन है कि जो क्या कहते हैं जो ईसा है वो 12 से 30 वर्ष की आयु के बीच में कहां रहे? तो इसमें आपको नहीं लगता कि फिर हम कैसे तो क्रिश्चियनिटी को धर्म बता रहे हैं और फिर कैसे अन्यों को अगर क्रिश्चियनिटी को मान भी लिया जाए तो फिर हम अन्यों को धर्म कैसे बता रहे हैं ये बहुत सारी चीजें हैं जो अभी जाननी है जो प्रश्न बाकी रह जा रहे हैं थोड़ा सा एक आप अंत में जो बताना चाहेंगे एक चीज तो आप तो समझना चाहिए कि बाइबल का एक दो सेंटेंस लेकर
01:10:40:26 इंटरप्रेट करना सही नहीं है उसके कॉन्टेक्स्ट में किस कॉन्टेक्स्ट में बाइबल में लिखा है कि उसका आधार समझना चाहिए जी तभी तो हम समझ सकते नहीं कि आप एक दो सेंटेंस लेकर आप बोल रहे हैं वो सही नहीं है। तो आप बताइए हमने कुल मिलाकर हमने ये कि ईसा मसीह ने उसका उद्देश्य यही था कि ईश्वर से जोड़ना और इंसान से जोड़ना तो ईश्वर यही तो है उनका इस्लाम में ईश्वर नहीं है ना सभी में ईश्वर तो है हम कहां है यही मैं बोल रहा हूं हमारे विश्वास के अनुसार मैं बोल रहा हूं ना कि इसी के लिए तो मुझे झगड़ा था हां ये बोल रहे हैं वहां ईश्वर नहीं है ना फिर आप कैसे कहेंगे देखिए अगर ईश्वर अगर ईश्वर को आप सर्वशक्तिमान मानते हैं जी तो फिर इस्लाम का ईश्वर ईश्वर कैसे हुआ जो अवतार नहीं ले सकता
01:11:31:13 तो उसको वो ईश्वर अल्लाह को ईश्वर मानते हैं वो सर्वशक्तिमान है कि नहीं बात ये है हर मेरे ख्याल से हर धर्म यही मानते ईश्वर सर्वशक्तिमान तो सर्वशक्तिमान का मतलब क्या है सभी जगह पे है शक्ति है सब कुछ कर सकता है कर सकता है तो वो अवतार नहीं ले सकता ना यहां कट गया ना सर्वशक्तिमत्ता खत्म हो गई जी या ये बात हम भी विश्वास नहीं करते इस्लाम धर्म में विश्वास नहीं करते अवतार ले सकता है लेकिन आप नहीं करते ईश्वर आप भी नहीं करते नहीं हम नहीं करते नहीं तो आपने तो कहा था अवतार ले सकता है नहीं नहीं अवतार नहीं ले अवतार के मैंने शुरू से बोल रहा हूं आपने कहा लेता नहीं पर ले सकता है नहीं दूसरे धर्म में हो सकता है ये बोल रहा मैं वो तो दूसरा धर्म तो धर्म है ही नहीं ना क्योंकि वहां पे योगा के अगेंस्ट जा रहे हैं। चलिए खैर काफी सारी बातें हो गई। नहीं सर ये बहुत इंपॉर्टेंट है फॉर अच्छा एक एक चीज एक चीज एक एक वो वाली बात भी जरूरी रह गई कि अगर क्रिश्चियनिटी के अनुसार जो क्रिश्चियनिटी के रिचुअल्स हैं उनके अनुसार विवाह वैध है और अन्य विवाह वैध नहीं है तो जो लोग कन्वर्ज़ करा रहे हैं तो वो कन्वर्ट होते समय यदि खुद को क्रिश्चियन कह रहे हैं तो वो कह रहे हैं कि मैं नाजायज संतान हूं क्योंकि क्रिश्चियनिटी के अनुसार उनके माता-पिता का जो विवाह था वैध नहीं था। ये भी हो रहा है। तो एक
01:12:46:21 चीज और देखने में आती है। जैसे हम अपने सनातन धर्म की बात करें हिंदूइज़्म की तो उसमें कहा जाता है मतलब हमारी कई देवियां हैं जिनको पूजा गया है और कई सम्मानित अगर हमारे ग्रंथों में देखें तो सम्मानित कई सारे स्त्रियां हैं जिनके पात्र हैं सम्मानित उनकी पूजा भी होती है और हमारे यहां एक बड़ा ही वैसा श्लोक है प्रसिद्ध है जो यत्र नार पूजते रमते तत्र देवता तो मतलब और अब क्या है कि एक क्रिश्चियन वूमेन की तरफ से एक क्वेश्चन उठता है कि वहां पर कहा गया कि भाई जो नारी है उसको सदैव जो है नीचे देखना है और एक पुरुष पर कभी भी ऑथर ऑथराइज नहीं हो सकती दब के रहने वाली बात तो इसको कैसे आप करते हैं क्योंकि वहां पर नारियों के लिए कोई जगह नहीं बनाई गई ठीक समझ रहे हैं जैसे कि वो होता है ना शिव और शक्ति का मेल से ही दुनिया चल रही है तो कहीं पर शक्ति को कहा गया कि दब के रहो कहीं पर शिव को कहा गया दब के रहो परंतु यहां क्या हो रहा है केवल शक्ति को ही कहा गया दब के रहो शिव के दबने की बात है ही नहीं जैसे हमारे यहां पर अगर है कि आपको कंट्रोल में रहना है जैसे मन मनुस्मृति में बात आती है कि
01:14:02:07 एक स्त्री को सदैव किसी ना किसी पुरुष के सानिध्य में रहना चाहिए वो पिता हो पुत्र हो पति हो भाई हो किसी ना किसी उसमें उस सुरक्षात्मक दृष्टि से कहा गया है कि उसकी सुरक्षा रहे है ना और साथ ही साथ यत्र नारस्तु पूजते रमंते तत्र देवता तो कोई अगर इस श्लोक के आधार पे ये कहे कि भाई नारी को दबाया गया तो फिर यहां पर पूजने वाली बात आ गई और फिर देवियां इस बात का उदाहरण हमारे यहां बड़े-बड़े मंदिर होते हैं तो फिर ये आपके यहां पर इसका क्या समाधान है जो एक स्त्री को दबने की बात चीज सामने आ रही है। जी तो सबसे पहले समझना है कि पॉल जो लिखता है उस समय ये पेटियार्कल सोसाइटी था। उस सोसाइटी में जो चल रहे हैं उसी हिसाब से वह बात कर रहे हैं उस जमाने में। तो आजकल आप कैथोलिक चर्च की ओर देखे तो आप समझ में आएंगे कि कितना फ्रीडम फिर भी सी आप दुनिया में जो चल रहा है पेथारिक सोसाइटी चल रहा है। लेकिन उसी के बाहर जाकर अभी चर्च में पॉल ने जो लिखा है वो वो ईसा मसीह की वाणी नहीं है क्या? ईसा मसीह की वाणी हम ईसा ने जो दिया है वो अह एक वास्तविक सत्य है या जो
01:15:17:15 कभी किसी के हिसाब से कुछ है किसी के हिसाब से कुछ है ऐसे समय ईसा मसीह के वाणी के हिसाब से नहीं लिखा है उसने उसी हिसाब से लिखा है लेकिन उस किसको लिखते हैं उसी के आधार पर लिखा मतलब बाइबल में भी कुछ ऐसी चीज है जो वर्तमान में हम अह व्यर्थ है हमारी आप समझ रहे हैं तो जो गोस्पेल में लिखा है और जो संत पोल लिखा है वो एक चर्च के लिए लिखा है उस चर्च पे सोसाइटी नहीं था उधर समस्या है तो उसी को समाधान के लिए उसने लिखा है उस समय तो अगर उसी समय को हम देखते हैं तो काफी आगे बढ़कर बोल रहे हैं उस जमाने को देख रहे हां वो समाधान क्या है समाधान क्या दिया है अगर आप अभी को देख रहे हैं नहीं ये तो आपने परिवर्तन किया बाइबल में कोई समाधान है समस्या का बाइबल का समाधान यही है प्रभु ईसा मसीह ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आप एक दूसरे को प्यार करो उसमें यह नहीं कि लड़की को आवरत को मत करो केवल आदमी को ये प्यार करें नहीं सभी लोग तो पड़ोसी है सभी लोग अपने भाई बहन है तो यही मैसेज संदेश प्रभु यीशु मसीह ने दिया है कहीं पे ये बोला ईश्वर हमारा पिता है और यीशु ने कहा कि मैं ईश्वर का बेटा हूं केवल मैं नहीं सभी लोग ईश्वर का पुत्र पुत्रियां है तो सबको हम ईश्वर का संतान मानना
01:16:32:26 चाहिए तो यही समझकर तो उसका मतलब ये नहीं कि आदमी और आवर स्त्री पुरुष का भेदभाव नहीं करना चाहिए। तो जैसे इसमें एक बात आती है कि जैसे एक अह जनरल बात भगवान ने बोल दी ईशा ने बोल दी कि आपको जो है सबको एक दूसरे को प्यार करना है। ठीक है? जनरल बात बोल दी। उसमें पुरुषों को भी मिल गया एक समान भाव और स्त्रियों को भी मिल गया। फिर एक एक ऐसी लाइन अलग से बोली गई जो पर्टिकुलर किसी देश काल परिस्थिति के लिए थी। किसी टाइमलाइन के लिए थी। वो हमेशा के लिए नहीं थी। पहली बात तो उस वो बाइबल में होने की आवश्यकता ही क्या है जब वो एक किसी उसके लिए है तो उसकी बाइबल में आवश्यकता क्या है? बाइबल जब हम धर्म मान रहे तो हम कह रहे हैं कि सदैव रहने वाला एक सत्य है ना बाइबल में। तो ऐसी बातें हैं जो उन्होंने पर्टिकुलर किसी एक टाइम के लिए कही थी। अच्छा ठीक है। तुम नहीं मान रहे तो तुम ऐसा कर लो। तो तुम ऐसा कर लो। जैसे बच्चों को नहीं समझा देते हां ये चंदा मामा है या कुछ उनको इस तरह से बता देते हैं जबकि वो वास्तविक नहीं होता है वो हमेशा के लिए सत्य नहीं होता है तो ऐसी बातों को पहली बात तो बाइबल में लेने की आवश्यकता क्या है कि बात आ गई दूसरी बात ये है मेन जो है मुख्य
01:17:48:16 कि जैसे हमने एक जनरल बात सबके लिए कह दी एक दूसरे को प्यार करो ठीक है अब वहां पर एक बात आती है जिससे निकल रहा है कि स्त्री दब रही है ठीक है तो क्या ऐसी कोई बात आती जहां पर स्त्री प्राथमिकता हो और पुरुष दब रहा हो क्योंकि जनरल बात तो सबके लिए है। जनरल बात जो आपने कही कि सब एक दूसरे को प्यार करो तो ये तो सबके लिए हो गई। फिर स्त्री के लिए एक अलग से दबने वाली बात आ रही है तो क्या पुरुष के दबने वाली या स्त्री की लीडरशिप वाली बात कहीं पर जो जिसको हम उसके समाधान के रूप में समझ सके। इसमें ऐसा है। क्योंकि होता क्या है? जनरल वाली बात का लेकर के अगर स्त्री बोलेगी कि उसमें सबको प्यार देने को कहा गया है। तो पुरुष कहेगा प्यार तो मुझे भी चाहिए। वहां तो हम इक्वल के बाद एक लाइन एक्स्ट्रा आ रही है। इक्वल के बाद एक लाइन एक्स्ट्रा आ रही है जिसमें स्त्री जो है दब रही है। बोलने की भी यही तो मैं बोल रहा हूं। बोलने की भी आज्ञा पहले पोल लिखता है एक पर्टिकुलर चर्च के लिए लिखता है। तो वहां का समस्या क्या है? उस समस्या का समाधान के लिए उस समय जो लिखता है क्योंकि सबसे पहले शांति से लो रहना है तो उसी के लिए वो उसी चर्चा के लिए लिखता है। उसका मतलब नहीं है कि सारे उसी को ले इसलिए तो इंटरप्रिटेशन की जरूरत पड़ता है। तो प्रभु यीशु मसीह का जो संदेश को यानी कि बाइबल की कुछ
01:19:03:20 बातें आज के टाइम में मान्य नहीं है। आवश्यक नहीं है। ये नहीं है कि उसी को हम आज के जमाने में समझना चाहिए। उसको जो है जो एटरनल लॉ होना चाहिए उस रूप में ना दे। प्रभु ईसा मसीह ने जो संदेश दिया मेन मुख्य संदेश क्या है? करुणा प्रेम शांति यही तो है उनका मुख्य संदेश वही है। उसी के आधार पर बाकी सब समझना है। तो उसी को एक पर्टिकुलर चर्च के लिए पर्टिकुलर व्यक्ति के लिए बोलते समय ही वो उसी आधार पर हम समझ जाना चाहिए। तो आजकल तो हम देखते हैं तो अभी हमारा चर्च में भी इवन हमारा लीडरशिप में भी लड़कियों को यातों को रखा है तो अति ज्ञान में अभी पोप फ्रांसिस जो अभी पाले थे उसी ने सबको अवसर दिया है वैसे ही तो ये मान के चेंज हो रहा है बदल रहा है वैसे ही जो दुनिया में बदल बाइबल जो है एटरनल लॉ नहीं है एक तरीके से दिखा लॉ है वैसे ही लेकिन उसमें जो लिखा है वो पर्टिकुलर कॉन्टेक्स्ट के लिए लिखा है नहीं तो कॉन्टेक्स्ट के लिए कहा तो वो आज लागू नहीं है ना? तो वो तो उस चर्च के लिए लागू था जहां पर औरतें गलत होंगी। जी जहां पर औरतों को निग्रह करने के लिए कहा गया। ये भी मैं अस्यूम कर रहा हूं। आपने नहीं बताया। मैं अस्यूम कर ले रहा हूं कि वहां पे एक कोई चर्च रहा होगा जहां पर ऐसी
01:20:18:26 वुममेंस होंगी जो गैर अनुशासित हो गई होंगी। तो उनको डांट लगाते हुए ये वाक्य निकला कि आप जो है नीचे देखो। आपको बोलने का अधिकार नहीं है। और आपको जो है कुछ अधिकार नहीं है। आप नीचे देखो। ठीक है? मौन रहिए, चुप रहिए। तो, यह मैंने अस्यूम कर लिया। वहां की जो लेडीज़ थी, वो ऐसी हो रही थी और इसलिए ये वाक्य निकला है। तो अब वो वाक्य आप लोग यूज़ नहीं कर रहे कि नीचे देखो वाला। आप तो उनको समान अधिकार दे रहे हैं। तो इसका मतलब वो जो वाक्य है बाइबल का वो वाक्य है। वो एटरर्नल लॉ नहीं था। इटर्नल लॉ नहीं वैसे उसी में तो ये जो उसी हर बाइबल का जो भी देके आया जाए तो इसमें हर कॉन्टेक्स्ट के हिसाब से जो लिखा है तो वो लिख रहे उसका संदेश हम उसका एटरनल लॉ क्या ले इससे जो इस ये वाक्य नीचे देखो चुप रहो इससे एटरनल लॉ क्या लें जो आज भी हम मान सकें उसमें जैसे आपने कहा था इंटरप्रिटेशन की जरूरत पड़ती है तो इसका ऐसा क्या इंटरप्रिटेशन लिया जाए कि हम ये मान सके कि यह वाक्य आज भी हमारे काम का है। वरना हमें यह मानना पड़ेगा कि बाइबल जो है पूरी तरीके से एटरनल लॉ नहीं है। उसमें जो कुछ लिखा है ये पोल ने जो लिखा है उसी कॉन्टेक्स्ट में उसी मैं समझ गया मैं
01:21:34:00 समझ गया। लेकिन आप भी है तो उसको इंटरप्रेट करना चाहिए। आज तो इंटरप्रिटेशन क्या है उस लाइन की? उस लाइन की बोल रहा हूं प्यार प्रभु ईसा नहीं नहीं इस लाइन की। नीचे देखो चुप रहो। उसको हम अभी नहीं मानते। वैसे ही अभी नहीं बोलता। यानी कि वो वाक्य आपने छोड़ दिया ना बाइबल का छोड़ा ना मतलब ये उसी को है ना जो भी अगर ऐसे निकालते तो सारे निकालना पड़ेगा नहीं तो इसमें तो यही है नहीं यहोवा को प्यार करो यहोवा की पूजा करो ये थोड़ी निकाल दिया नहीं उसी को व्याख्या करके आज के जमाने में वो मैं वही पूछ रहा हूं मैं पूछ हिसाब से करना चाहिए वो व्याख्या क्या है इस वाक्य की व्याख्या यही है तो मतलब जो लड़की वो सब बराबर ही है उस वाक्य की जिसमें लिखा है नीचे देखो उसको तो हम इसलिए इसलिए बोल रहा हूं उसको तो अभी नहीं मानते कोई नहीं बोलते हैं उसको छुपाओ उसको नहीं मानो उसको अभी बोलते हैं कि प्यार करो उसको समान अवसर दे दो सभी बराबर ही ईश्वर का पुत्र पुत्रियां है इसलिए बराबर देख लो यही बोलते पढ़ाते हैं हम सिखाते बहुत बढ़िया प्रभु का लोग एक लास्ट और छोटा सा टॉपिक ले लेते हैं। ईश्वर है ये कैसे सिद्ध करता है? क्रिश्चियनिटी कैसे सिद्ध करती है ईश्वर है? ईश्वर है? हां। यह तो विश्वास ही है। यह
01:22:49:06 हम स्थापित नहीं कर सकते। नहीं जैसे कोई नास्तिक आकर कहे कि भाई मैं क्यों मानूं धर्म तो हम उसे कुछ ऐसा कुछ ऐसी डेफिनेशन कुछ ऐसा कुछ तर्क कुछ लॉजिक ऐसे दे सकते हैं जिससे कि हम ईश्वर को स्थापित कर पाए जिससे कि धर्म की स्थापना हो। इसमें तो [गला साफ़ करने की आवाज़] यही है। सबसे पहले हम अपनी ओर देखना चाहिए कि कुछ ना कुछ जैसे मान लीजिए कि बच्चों को मार के खाना ये गलत बात है। ठीक। अब हमने उससे किसी से कहा भाई तुम बच्चों को मार के क्यों खा रहा है? ठीक है? तो वो कहेगा कि भाई मेरा मन कर रहा है। तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] आप उसे कहोगे कि भाई ये गलत बात है। वो कहे क्यों गलत बात है? क्यों है ये गलत बात? आप कहोगे ईश्वर ने कहा है। इसीलिए तो गलत है। कानून की बात करोगे तो कानून तो किसी इंसान ने ही बनाया है। मगर वहां पर ये हो गया कि भैया बहुत लोगों ने कहा है। तो बहुत लोग तो कुछ भी कह देंगे तो मान लिया जाएगा क्या? है ना? तो वहां पे ईश्वर को लाना पड़ेगा कि ईश्वर ने कहा है, धर्म ने कहा है इसलिए गलत है। तो वो ये कहेगा कि मैं तो ईश्वर को मानता ही नहीं हूं। तो हम कैसे प्रूफ करें कि वो जो कर रहा है वो गलत कर रहा है। कैसे प्रूफ करें? नहीं गलत तो और सही इंसानियत के उसे हम देखते हैं तो भी हमें मालूम पड़ता है जो गलत है सही है। बिना कोई धर्म के कारण ही बोल सकते हैं।
01:24:04:09 और धर्म तो हमें मदद करते हैं कि सही और गलत ना गलत समझ नहीं। तो जो व्यक्ति ईश्वर को विश्वास नहीं करता है, हम उसके समक्ष सही गलत कैसे डिफाइन करें? इसलिए तो अपने जो मनसा क्या बोलते हैं अंतःकरण बोलते हैं ना। हर व्यक्ति को तो जोकर अंतःकरण की सुनते उसमें क्या है अंतःकरण की पहचान नहीं होती है हर व्यक्ति को। होता क्या है कि जैसे किसी के अंदर आ रही है इच्छा कि मैं बलात्कार करूं। ठीक है? तो उसके अंदर से एक आवाज आ रही है मत कर। मगर वो अपनी बलात्कार वाली आवाज को अगर समझेगा यह अंतःकरण की आवाज है। उसको कैसे डिफाइन करेगा? इसीलिए तो हमें ईश्वर की वाणी की जरूरत है। जिससे कि ईश्वर की वाणी से कौन सी आवाज मैच कर रही है वही हमें करना है। तो हमारे यहां कहा गया है तेरे लिए कर्तव्य है। कर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है। तस्मात शास्त्रम प्रमाणम भगवत गीता में और भी कई जगह कहा गया शास्त्र प्रमाण है। तो जहां पे ईश्वर है वहां अधर्म है। तो धर्म जिसके पास होगा वो तो निर्णय कर सकता है कि ये सही है ये गलत है। मगर जो ईश्वर को मानता ही नहीं है। तो हम उसे कैसे बताएं कि तू गलत कर रहा है। अब आपने कहा कि हम ईश्वर तो विश्वास है। करो तो करो। तो इसका मतलब हम किसी के गलत को गलत सिद्ध नहीं कर सकते। सिवाय इस बात के कि हम हम जो मान रहे हैं उसको मानने वाले और ज्यादा लोग हों तो उसकी पिटाई कर दें।
01:25:20:02 हम उसको ज्ञान नहीं दे सकते कि तू गलत कर रहा है। ये समझ ले। हम उसकी मार लगा सकते हैं। उसका हाथ तोड़ सकते हैं। उसको जेल में बंद कर सकते हैं। वो जो गलत काम करने जा रहा है उसको रोक सकते हैं। है ना? अगर हमारी कम्युनिटी बड़ी हो गई तो। तो हमारे धर्म के अनुसार जो गलत बात कही गई है, वो हम नहीं होने देंगे। ठीक है? वो एक अलग बात है। मगर क्या हम उसको ज्ञान दे सकते हैं? नॉलेज दे सकते हैं कि तुम वास्तविकता में गलत कर रहे हो। क्योंकि वो तो ये सोचता रहेगा ठीक है। आज तुम लोग ज्यादा थे तो मैं पिट गया। कल को मैं ज्यादा होऊंगा तो मैं पीटूंगा। तो क्या हम उसको लॉजिकली प्रूफ कर सकते हैं कि तू गलत कर रहा है? और प्रूफ करने के लिए हमें चाहिए होगा ईश्वर।
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01:25:58:26 तो लॉजिकली हम ईश्वर को सिद्ध कर सकते हैं किसी के समक्ष क्रिश्चियनिटी के अकॉर्डिंग।
⬜ Not used yet · 01:26:04:07 – 01:27:40:00 (1:36)
01:26:04:07 नहीं उसमें तो सबसे पहले उनको यह समझना है कि जो बोल रहे ईश्वर नहीं है उसका मतलब है ईश्वर है नहीं तो पूरे उसको नेगेटिव नेगेशन करने की जरूरत नहीं है तो ईश्वर इसका मतलब मैं अगर ये कह रहा हूं आपके बगल में एक भूत खड़ा हुआ है तो आप मानेंगे ये भूत है क्योंकि मैंने कहा है कि नहीं है तो इसलिए इसका मतलब भूत है भूतों आपके बगल में इस समय खड़ा है [हंसी] जीस ये अभी क्या बोलते हैं किस तरह से उसका समझा नाम मतलब मैं इसलिए कर रहा हूं जिससे कि क्रिश्चियनिटी को लोग जान पाए कि क्रिश्चियनिटी का क्या कहना है नास्तिकता के बारे में नास्तिकता का खंडन कैसे करता है क्रिश्चियन जी
01:26:53:01 चलिए ठीक है तो इसको करते हैं लाइट मोमेंट पे खत्म करते हैं तो ये थी हमारी और अ महोदय की चर्चा हम जो यहां पर एक सेंटर है क्या कहते हैं इंटर रिलजन सेंटर जहां पर देश भर के भारतवर्ष के जो प्रीस्ट हैं वो साल भर के लिए ट्रेनिंग के लिए आते हैं और वो तैयार होते हैं और किस तरह से यहां की शिक्षाओं का प्रचार प्रसार पूरे भारतवर्ष में किया जाए उनके साथ एक सुंदर सी चर्चा हम लोगों ने देखी होगी और आपको भी बहुत कुछ जानने को मिला होगा। आई होप कि आपको ये वीडियो अच्छा लगे तो जरूर अपने विचार आप साझा करिएगा हमारे साथ और समय देने के लिए आपको बहुत-बहुत आभार और आप सबका भी आभार जो आप लोगों ने इतनी देर तक हमें सुना। जय श्री राम।
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क्या Christianity धर्म है? | Bible, Jesus और Church पर National Trainer of Priests से चर्चा
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