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00:00:02:26 सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। और आज वो विशेष दिन है जब हम सेवन डेज कोर्स स्टार्ट करने जा रहे हैं हमारी बीके नीलमा जी के साथ। आपने देखा होगा कि हमने बहुत सारे बीके वालों के साथ बातचीत की है, वार्ताएं की है बहुत सारी। उसमें एक बात बड़ी बार-बार आकर के अटक जाती है कि भाई आप से डेज का कोर्स करिए नहीं तो आप कुछ समझ नहीं पाएंगे। आप से डेज का कोर्स करिए नहीं तो आप कुछ समझ नहीं पाएंगे। हालांकि प्रश्न ये उठता है कि जो प्रश्न आपसे पूछा जा रहा है यदि आपने से डेज का कोर्स किया है तो आप उस प्रश्न का उत्तर दे दो। और अगर कोई भी व्यक्ति कोई किसी भी प्रकार का दावा करने वाला अगर प्रत्येक दावा करने वाले व्यक्ति से उसका से डेज का कोर्स लेने की ही बात स्वीकार की जाए तो दुनिया में सब लोग कोई भी झूठी बात कहेंगे वो कहेंगे मेरा 15 दिन का पहले कोर्स लो या 50 दिन का ये सब अलग-अलग चीजें हैं। फिलहाल से डेज के कोर्स को लेकर के जो यह प्राथमिक अह

00:01:19:27 इनके यहां जाते टाइम जो प्राथमिक रूप से जो ब्रेन वाश होता है जो व्यक्ति वहां नया होता है और जो बातें उसको वहां से डेज तक उसको हिप्नोटाइज करके और जो उसको गुट्टी पिलाई जाती है तो वह कौन सी बातें होती है और कौन-कौन से प्रश्न है जो वहां पर उठ सकते हैं और किन-किन बातों पर बीके के पास उत्तर नहीं यह सब चीजें आपको इस यहां पर जो यह से डेज का कोर्स उपलब्ध कराया जा रहा है बीके का ओरिजिनल तो वह सब बातें आपको यहां मिलेंग कि आप जब गए थे जो बीके के पुराने जुड़े हुए लोग हैं वो जब गए थे तो क्या आपने इस एंगल से प्रश्न सोचे थे जब आपको यह सब बताया गया था आपने पूछा था यह सब तो इस प्रकार से से डेज का कोर्स चलेगा उसी दिन आपके वो अगर आपने सेम डे नहीं पूछा पूछे थे तो जब आपसे क्वेश्चन करने को कहा गया था तब पूछे थे क्या क्वेश्चन करने को कहा गया था आपसे तो ये बीके में फंसे हुए लोगों के लिए बीके से प्रभावित लोगों के लिए भी बहुत इंपॉर्टेंट है ये सीरीज और जो बीके में अभी नहीं फंसे हैं या आध्यात्मिक विश्वविद्यालय में नहीं फंसे हैं या बीके से उपजने वाले और अन्य जो मशरूम टाइप के पौधे हैं जो कुकुर मुत्ते टाइप के जितनी भी चीजें हैं

00:02:35:22 तो अगर उसमें नहीं फंसे हैं तो आप सतर्क हो जाए अपने बच्चों बच्चों को सतर्क कर सके उसके लिए यह सीरीज है। ठीक है? तो सबसे पहले हम अपनी बी के नीलिमा जी को ऊपर ले लेते हैं। स्टेज पर ले लेते हैं और फिर आज वो हमें कोर्स कराएंगी। जय श्री राम। नीलिमा जी। ओम शांति। आपकी आवाज शांति। जी जी। अब आई आवाज? हां कुछ गड़बड़ हो रहा है। आप बोल पहले रही हो और फिर बाद में आवाज आ रही है। अच्छा दोबारा बोलिए। हां अब ठीक है। अब ठीक है। अब ठीक है। हां जी। ओम शांति। जी जय श्री राम। तो मैं आपका स्टूडेंट हूं आज। जी। और आप मुझे से डेज का कोर्स कराने वाली हैं। आप जो से डेज का कोर्स दिखाने के लिए अगर आपको कुछ चित्र दिखाने की आवश्यकता पड़ी तो आपने पीडीएफ जो मुझे भेजी है वो मैंने ऑपरेटर को दे दी है। आप जो कहेंग जो भी पेज नंबर आप बताएंगी वो वो यहां डिस्प्ले कर देंगे। ठीक है? और

00:03:53:20 और जो है एक बात मैं कहना चाहता हूं। कई लोग ऐसे हैं जो यह समझते हैं कि यह जो वीरेंद्र देव दीक्षित है या और भी फलानी मंडली इत्यादि है वो जो है बीके से अलग है। उसका बीके से कोई मतलब नहीं है। अमोल कोकने का कोई मतलब नहीं है। जब मैं ऐसा कहता हूं कि बीके और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय पर मैं कोई बात कहता हूं उनको जोड़ते हुए तो ऐसे कई लोग आकर कमेंट करते हैं। उनको मैं ये बताना चाहता हूं कि भाई यह तय कैसे होगा यदि बीके वाला जब वीरेंद्र देव दीक्षित है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वाला यह कह रहा है कि हम जो है बीके से ही सीख कर आए हैं सब कुछ मगर बीके के वर्तमान के लोग बदल गए हैं और हम वो चीज बता रहे हैं जो बीके में वास्तविकता में लेखराज जी ने बताई थी यही तो कहानी है तो आप कहोगे नहीं नहीं बीके वाले तय करेंगे कि उनकी चीजें कौन बता रहा है कौन नहीं बता रहा है तो क्या आपने तय की थी जब जब आप सनातन के नाम से प्रचार करने लगे थे। आपने सनातनियों से पूछा था कि आप आप भी तो वही आरोप लगाते हो ना कि हम सनातनी है। हम सनातन की वास्तविक शिक्षा दे रहे हैं और सनातन की जो सनातन के नाम पर जो आज धर्माचार्य जो शिक्षा दे रहे हैं वो सब गलत

00:05:08:21 बता रहे हैं। जो काम आज वीरेंद्र देव दीक्षित और उससे जुड़ी हुई संस्थाएं आपका नाम लेकर कर रही हैं। वही कार्य आपने सनातन का नाम लेकर के किया था किसी समय। तो यह वह है कर्माज आर बैक है ना तो इसलिए जिस दिन आप अपने आप को सनातनी का चोला ओढ़ के प्रचार करना बंद कर दोगे उस दिन मैं आपको आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से जोड़ना बंद कर दूंगा वरना ये फालतू की बातें करना बंद करो और अगर करनी है तो सामने आकर जी बी के नीलमा जी मैं आज आपका स्टूडेंट हूं और आप मुझे वो सेवन डेज का कोर्स करा दीजिए क्योंकि यह बड़ा एक मेरे ऊपर सर पर दर्द जैसा आ जाता है। मैं किसी से सवाल कर रहा होता हूं तो वो कहते हैं कि आपने से डेज का कोर्स नहीं किया इसलिए आपको समझ में नहीं और आप ना ड्यूरिंग द ये टीचिंग से डेज का कोर्स आप एक जैसे पूरा जो समर्थक होती है ना ब्रह्मा कुमारी की उस रूप में आप रहिएगा हर पैतरा जो अपनाया जा सकता है मेरे प्रश्नों से बचने का वो अपनाइएगा प्रश्न को घुमाने का भी अगर पैतरा हो सकता है कि उत्तर नहीं है और आप घुमाना चाहे तो वह भी आप करिएगा आज आप पूरा बीके की समर्थक बनके ही चलिएगा। पहले तो आप मुझे एक वो सेशन देंगे फर्स्ट डे वाला उसके बाद

00:06:23:22 मैं क्वेश्चन करूंगा। तब के लिए बोल रहा हूं। जी ठीक है। स्टार्टिंग जय श्री राम। ओम शांति। जो से डेज कोर्स है पहले तो वो देखिए आप भगवान में श्रद्धा रखते हैं परमात्मा को मानते हैं ईश्वर को जिस भी रूप में मानते हैं आप उसको सबको एक तरफ रख के अपनी बुद्धि को मन बुद्धि को एकदम खाली करके एकदम से वो प्याला ऐसा करके कि इसमें समाहित हो सके तो अपने जो भी ज्ञान है आप उनको एक साइड रख दीजिए आज है ना तो जो हम सुना रहे हैं पहले आप उसको समझिएगा सुनिएगा क्योंकि विश्व भर में बहुत सारे ज्ञान है बहुत सारी मान्यताएं हैं बहुत सारी बातें हैं और बहुत सारी चीजें हमने इधर उधर से सुनी होती है कि परमात्मा ऐसा है परमात्मा यह है परमात्मा वो है हम ऐसे हैं लेकिन हमने परमात्मा को जानने की बात तो की है पर कभी खुद को जानने की बात नहीं की।

00:07:39:01 जैसा कि आपने मुझे बोला कि मैं एस एन टीचर ज्ञान चुनाऊं। ऐसा आप भी एस एन स्टूडेंट मेरा ज्ञान चुनेगा। तो प्रॉपर जब से डेज कोर्स करने कोई आता है तो ऐसे ही नहीं आता है। से डेज कोर्स करने के पहले भी वो जिज्ञासु होता है। तब वो सेंटर तक पहुंचता है। जिज्ञासा कैसे पैदा होती है? जिज्ञासा ऐसे पैदा होती है। मान लीजिए आपने कहीं हमारा कोई कोर्स सुना है। कभी आपने हमारी कोई बात कहीं सुनी है। कोई चैनल पर कहीं देखा है। अब प्रभावित कैसे हुए? आप ब्रह्मा कुमारी से प्रभावित हुए और प्रभाव में आके आपने कहीं से सेंटर का एड्रेस लिया और आप सेंटर पर पहुंचे। ऐसे ना आप कहीं ना कहीं से तो इनफ्लुएंस होकर यहां तक आए ना कि कोर्स करना है चाहे रीजन कुछ भी है आपका तो जो भी रीजन है अभी आप बिल्कुल कोरा कागज होके सारे ज्ञान को एक तरफ रख के अपनी प्राप्तियों को एक तरफ रख के ये ज्ञान सुनिएगा परमात्मा को पाने की बात तो बहुत दूर की होती है। पहले तो व्यक्ति को खुद का पता नहीं होता है।

00:08:54:07 तो पहले हम खुदा को समझे फिर खुदाई को समझे। पहले खुदा को जानना जरूरी है। फिर खुदाई तक जाइए आप। खुद खुद को नहीं जानते तो खुदाई को क्या समझेंगे? है ना? तो सबसे पहला जो चैप्टर है हमारा वो हम आपको स्वयं का ज्ञान देते हैं। पहले स्वयं का ज्ञान हो जिसमें आत्मा का ज्ञान बोलते हैं। आत्मा का परिचय। आत्मा का लक्ष्य क्या है? आत्मा जीवन में चाहती क्या है? आपके यहां आने का उद्देश्य क्या है? आपके जीवन का वो रहस्य जो परमात्मा ही बता सकते हैं। कोई और नहीं बता सकते। वो तो तब जानेंगे ना जब आप खुद को समझेंगे। तो हमारे यहां से डेज कोर्स की एक पूरी बुक है। प्रॉपर बुक तो मेरे पास सेंटर वाली है लेकिन मैंने आपको दिया है। ये मेरे सेंटर की ही बुक है। बकायदा मेरा नाम लिखा है। ये इतनी बड़ी बुक हमें मिलती है वहां से। तो ये लिखा है। प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ये आपको शाइन में पता चल रहा होगा। प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वर विश्वविद्यालय कोर्स की बुक है। इतना बड़ा यह चैप्टर होता

00:10:09:10 है। तो सबसे पहले वैसे तो मुझे नहीं पता ऑनलाइन आपके पास है क्या? ये चार धाम बोले गए हैं। जहां पर आप आए हो। यह चार धाम समान है। चार धाम वो नहीं है जो चार धाम आप यात्रा करते हैं। चार धाम यह है। देखिए हिंदू चार धाम की यात्रा करता है। क्या ये प्राप्ति कर लेगा उस यात्रा से? हिंदू को तो यह समझना चाहिए। किसी भी धर्म को यह समझना चाहिए कि प्रॉपर चार धाम तो यह है। जैसे ओम शांति भवन पांडव भवन में हमारा एक कैंपस है। फिर है डायमंड हॉल। हमारे शांति वन में हमारा एक कैंपस है जिसमें भगवान की प्रवेशता होती है। फिर है ज्ञान सरोवर। ज्ञान सरोवर के अंदर हम लोग विंग्स के प्रोग्राम करते हैं। तपस्या धाम इसमें बाबा ब्रह्मा जब चले गए तो 1994 में नीचे जो सबसे पहली बिल्डिंग बनी वो ये है। तो यह हम चार धाम के रूप में पूजते हैं। यही लास्ट में आपको असाइलम के रूप में काम आएगा। जब इस दुनिया

00:11:24:16 का महाविनाश होगा। तो महाविनाश के समय सब यहां पर असलम की तरह से आएंगे। यह चार धाम की यात्रा है। यह समझ के आप कोर्स करिए। पहला चैप्टर तो फर्स्ट चैप्टर आप ऑनलाइन भी निकाल लीजिए। अगर आप ऑनलाइन निकालेंगे तो मुझे ज्यादा सुविधा होगी। मैं प्रॉपर बता सकूंगी। पहला चैप्टर के पहले चैप्टर के चित्र निकाल दीजिए। ऑपरेटर जी। पहला चैप्टर है मैं आत्मा हूं। थोड़ा नीचे करिए। हां तो ये ये आप देखिए आप आत्मा है। आपके आत्म ज्ञान को यहां हम जागृत करते हैं। प्रॉपर आप परमात्मा पिता के संतान है। तो इसमें आप देखेंगे आत्मा बिना आत्मा के शरीर जड़ है। एकदम से वो हड्डी मांस का पुतला है। और जब इसमें आत्मा आती है तो इसमें मन, बुद्धि, संस्कार यह तीन बिंदी देख रहे हैं। नीचे आत्मा से नीचे तीन बिंदी मन, बुद्धि और संस्कार तीनों से मिलकर आत्मा बनती है। जिसमें मन, बुद्धि और संस्कार काम करते हैं तो प्रॉपर आत्मा इसमें जीव आत्मा कहलाती है। जैसे ही आत्मा उसके अंदर प्रवेश करती है हड्डी मांस

00:12:39:22 के पुतले के अंदर वो जीवात्मा कहलाती है। तो ऊपर करिए इसको थोड़ा आप चित्र को दिखाइए तो मैं स्पष्ट कर दूं आपको। हां तो यह जो व्यक्ति बीच में समझाइश दे रहा है आपको कि यहां पर उंगली है उसकी माथे में कि जीवात्मा मस्तक में यहां पर ललाट में विराजमान होती है। यहां मस्तक में विराजमान होती है और पूरे शरीर को चलाती है। अब कोई कोई बोलते हैं कि आत्मा तो यहां है। आत्मा तो कहीं और है। तो अगर हम यहां आत्मा को रखेंगे तो ऐसे तो ऊपर से कोई संतुलन ही नहीं बनेगा। तो संतुलन दिखाने के लिए नीचे आप देखिए कार का चित्र है। ऊपर करिए थोड़ा इसको।

00:13:34:04 नीचे एक कार का चित्र है। है ना? ये जैसे गाड़ी में मोटर में सामने ड्राइवर बैठता है और कार को चलाता है तो ये आत्मा शरीर को ऐसे चलाती है और वो फ्रंट सीट पर बैठती है इसीलिए आत्मा की फ्रंट सीट है और वो शरीर रूपी कार को चला रही है। इसलिए आत्मा निराकार है। निराकार माना ये शरीर रूपी कार और उसमें ये आत्मा। तो जो आत्मा है वो कैसे काम करती है कि सारा जो मनुष्य का शरीर है वो इसके बिना कुछ नहीं है। जड़ है तो चेतन आत्मा है। तो जो भी आत्मा के साथ है जुड़ा हुआ कर्म वो आत्मा के साथ पूर्व जन्म का यहां हमको मिलता है और इस जन्म के अनुसार ही हम फिर आगे जो भी कर्म करते हैं उस अनुसार जन्म लेते हैं। तो परमात्मा पिता भी कुछ ऐसे ही है। निराकार आत्मा का पिता भी निराकार है। तो निराकार शिव की संतान हम निराकार आत्मा है। तो आत्मा के अंदर सारा कर्म का लेखा जोखा होता है। जैसे मोबाइल के अंदर चिप होती है। ऐसे ही

00:14:49:08 इस शरीर के अंदर आत्मा के अंदर कर्म की सारी रिकॉर्डिंग होती है। जो भी हम कर्म करते हैं वो सारी रिकॉर्डिंग आत्मा अनुसार हम कार्य करते रहते हैं। शरीर से इसका कोई लेना देना नहीं है। जीवात्मा शरीर को यूज करती है। प्रयोग करती है। लेकिन कर्म सारा बंधन जो है वो आत्मा के साथ होता है। आत्मा के स्वरूप है। जैसे मन बुद्धि संस्कार संस्कार के थ्रू वो काम करता है। कोई भी व्यक्ति तो वो आत्मा कहलाती है। आत्मा का स्वधर्म क्या है? हम ओम शांति क्यों बोलते हैं? जैसे आपने जो भी बोला नमस्ते किया तो मैंने ओम शांति किया तो ओम शांति क्यों करते हैं? आत्मा का स्वधर्म शांति है। तो स्वधर्म शांति है तो हम शांति बोलते हैं कि भाई याद रहे उसका स्वधर्म कि मैं शांत स्वरूप आत्मा हूं। तो मेरे बहुत प्रकार के गुण है। जैसे शरीर के कई गुण होते हैं। शरीर के हाथ है, पैर है, मुख है। यह सब अंग है। आत्मा के भी अंग है जैसे मन बुद्धि संस्कार तो मन जिसमें वो चिंतन करता है विचार आता है बुद्धि जिससे वो निर्णय लेता है और संस्कार उसको

00:16:04:21 रिपीट रिपीट करते करते जो संस्कार बनता है उस अनुसार आत्मा कार्य करती है तो जब हम आत्मा के कर्म की बात करते तो आत्मा का कर्म सबसे पहले शांति है। धर्म शांति है। सबसे पहले वो अपने धर्म को पहचाने कि आत्मा का धर्म शांत स्वरूप है। तो इसलिए हम ओम शांति बोलते हैं। जिससे कि मुझे मेरे आत्मा का धर्म मेरा स्वरूप याद रहे। तो यही है पहला चैप्टर। इस पहले चैप्टर में आपको एक ही बात समझनी है कि हमें पहले जड़ चेतन को समझना है। जड़ है शरीर चेतन है आत्मा और आत्मा के स्वरूप को शांति का दान देना जरूरी है। रोज रोज उसको शांति का दान दीजिए। रोज शांत स्वरूप आत्मा को समझिए। तो रोज हमें शांति याद रहे इसलिए हम ओम शांति कॉल करते हैं। ओम शांति ओम शांति है ना इसमें जो यह वाली बात है कि आत्मा जो है एकिस्ट करती है तो उसके संबंध में जो वो थ्योरी देती है ब्रह्मा कुमारी मैं हम हर काम को करते समय बोलते हैं मेरा मेरे हाथ तो मैं कहां है तो ये आत्मा को समझे कैसे हम

00:17:20:09 क्या है आत्मा को देखिए आत्मा को समझने के लिए तो आपको यह मानना होगा ना कि आप आत्मा है मतलब और कुछ समझने का तरीका नहीं है। मतलब हम बस किसी ने धर्म को जानना होगा। किसी ने कहा आपने माना मतलब किसी ने क्या ब्रह्मा बाबा ने कहा परमात्मा शिव नेह ब्रह्मा बाबा यहां दादा लेखराज की बात करते हैं हम और वो बहुत महान हस्ती है जिनकी बात मैं कर रही हूं। लेकिन यह मैं आपको से डेज कोर्स के बाद बताऊंगी। तो मतलब आत्मा को हम इसलिए माने क्योंकि ब्रह्मा बाबा ने कहा है। ब्रह्मा बाबा को हम इसलिए माने क्योंकि आपने कहा है। नहीं क्योंकि शिव बाबा ने कहा है। परमात्मा शिव ने कहा है। तो शिव बाबा ने शिव बाबा कौन है? शिव बाबा मतलब परमात्मा ज्योति स्वरूप है। जैसे आत्मा चैतन्य स्वरूप ज्योति स्वरूप बताया मैंने ऐसे परमात्मा भी चैतन्य ज्योति स्वरूप है। नहीं यह तो ठीक है मगर मेरा मैं उस कैसे बिलीव कर लूं जो आप कह रही उस

00:18:35:01 आपको बिलीव करना इसलिए होगा क्योंकि सबसे पहले आपको इस ज्ञान में बिलीव करना होगा जहां आप बैठे हैं आप उसको उसमें बिलीव करना होगा बस मान लू मतलब उसमें कोई क्वेश्चन नहीं है तर्क नहीं परमात्मा के ज्ञान को तो मानना ही होता है विश्वास करना कुछ कुछ मुझे ऐसे लॉजिक्स कुछ ऐसे लॉजिक वगरा दिए जाए जो कुछ अपनी जो बात युक्ति से पुष्ट हो पाए कि जैसे मान लीजिए यही लॉजिक है कि मुझे आपकी बात को मानना है तो क्यों मानना है आप में ऐसा क्या है जो जिसकी वजह से मैं वो बात मान या जो क्योंकि क्योंकि शिव बाबा ने कहा कि वो लेखराज जी ब्रह्मा है तो यह बात मुझे आप बता रही है। मैंने तो डायरेक्ट शिव बाबा जी के कनेक्शन में आया नहीं हूं। मैं तो डायरेक्ट आया नहीं हूं। तो आप भी और हम भी सब उनहीं के कनेक्शन में है। परमात्मा ही ये सृष्टि चला रहे हैं ना। तो फिर कनेक्शन में कैसे नहीं तो जानना पड़ेगा जानने के लिए हमारी बात पर भरोसा करना होगा नहीं परमात्मा है ये मैं कैसे मान लूं परमात्मा एक्सिस्ट करता है ये कैसे मान लू क्योंकि आत्मा के एक्सिस्टेंस के लिए परमात्मा है और परमात्मा के बारे में आप मुझे बता रही कि वो ऐसा है मगर वो है ये कैसे मानो देखो

00:19:50:24 वो है तो उसके होने का प्रमाण तो ये है कि आत्मा का जो ज्ञान है परमात्मा ने जो हमें दिया है जो मैं हूं आप है इसके अंदर जो आत्मा बैठी हुई है वो उनहीं की बनाई हुई है उनहीं का अंश है हम तो परमात्मा को जानने के लिए आपको सात दिन का कोर्स तो पूरा करना पड़ेगा वो चैप्टर भी आएगा जब मैं परमात्मा के विषय में आपको बताऊंगी अच्छा ठीक है मैं आत्मा क्योंकि आत्मा की सिद्धि परमात्मा के कथन से हो रही है और परमात्मा की सिद्धि सात दिन के कोर्स के बाद आएगा तो इसलिए अभी आत्मा के एक्सिस्टेंस की बात हम छोड़ रहे हैं। मैं एक चीज पूछ रहा था। जैसे आपने कहा ना संतुलन हां जी। तो आपने उसमें कार का उदाहरण दिया था। है ना? तो कार में तो व्यक्ति या तो लेफ्ट बैठता है या राइट बैठता है। बीच में सेंटर में नहीं बैठता है। नहीं हमने फ्रंट सीट की बात नहीं। हमने लेफ्ट और राइट की बात नहीं की। फ्रंट सीट पे बैठ के मतलब ये यहां पे बैठ के हम परमात्मा फ्रंट तो फिर फ्रंट तो फिर वो हो गया ना वो इंजन के बिल्कुल आगे नंबर प्लेट जहां होती है वहां अगर फ्रंट की बात मतलब एक उदाहरण दिया है ये कि शरीर को जैसे जो जैसे

00:21:06:09 जैसे जो चीज वर्टिकली बनी हुई है जो चीज वर्टिकली बनी हुई है अ जो चीज वर्टिकल बनी है तो उसमें उसका कंपैरिजन आप उस चीज से कर रही है जो चीज हॉरिजॉन्टल बनी हुई है आगे से पीछे की ओर हमारी बॉडी तो वर्टिकल है ना ज्यादा चौड़ी पीछे की ओर तो है नहीं तो कार में यह हम देख सकते हैं आगे क्या है पीछे क्या है मगर नहीं है ऐसा नहीं है मेरी बातों को आप अपने तरीके से समझेंगे तो फिर वो समझ में नहीं आने वाली तो जो मैं समझा रही हूं पहले आप उसको जानने की कोशिश करिए जो मैं समझा रही हूं उसको परमात्मा का ज्ञान समझ के सुनिए विश्वास से भरोसे मतलब ये वाली बात भी यही है कि आपने कहा है और आप उनकी तरफ से अपॉइंट है इसलिए मैं मान लूं कि यहां पर है बस आत्मा हां मतलब क्योंकि परमात्मा का ज्ञान है परमात्मा के विषय में हम बता रहे हैं इसलिए कार वाला उदाहरण तो कार वाला उदाहरण जरूरी नहीं है फिर तो भरोसा ही भरोसा चले मतलब कार के लॉजिक की आवश्यकता विश्वास तो सबसे पहले है भरोसा तो सबसे पहले ठीक है मगर मगर कार के लॉजिक की आवश्यकता नहीं मैं यह कह रहा हूं

00:22:17:18 अच्छा इसमें आगे एक चीज है आपने कहा कि कर्म साथ में चलते हैं फिर उसका फल मिलता है। तो फल कौन देगा? कर्म अनुसार आत्मा को सदा उसके कर्म के फल मिलते हैं। नहीं फल कोई फल देने वाला जो सिस्टम है वो चेतन है या फिर वो जड़ जड़ है। फल कैसे मिल रहा है मुझे? कौन डिसाइड कर रहा है कि मुझे जैसे मैंने किसी को मारा है तो मुझे चोट मिलेगी या मुझे दर्द ये ये मेरी आत्मा अनुसार ही मुझे कर्म का फल मिलता है और हमें बताया जाता है मुरलियों के थ्रू परमात्मा शिव हमें बताते हैं कर्म की गुति अनुसार आत्मा को उसके कर्म का फल मिलता है नहीं फल मिलता है मगर दे कौन रहा है जैसे प्रकृति तो जड़ है वो तो डिसाइड कर नहीं सकती कि किसको क्या देना है कब देना है कैसे परमात्मा डिसाइड करते हैं भगवान शिव डिसाइड करते हैं अच्छा तो इसका मतलब ब्रह्मा कुमारी का ईश्वर भी कर्मों का फल आपकी आवाज नहीं आ रही। क्या हुआ?

00:23:36:14 वो लोग मुझे देख के कुछ ना कुछ बोल रहे हैं। फिर वापस तो नहीं चली जाऊंगी। मैं ये कह रहा था कि कर्मों का फल डिसाइड कौन करता है? परमात्मा जी इसका मतलब मैं ये ले चलूं कि परमात्मा जो है अगर किसी ने कोई किसी को चोट पहुंचाई है तो परमात्मा उसको चोट पहुंचाएगा मतलब परमात्मा ये वाले कार्य भी करता है परमात्मा चोट नहीं पहुंचाते हैं आत्मा की कर्म की गति ही उसको चोट पहुंचाती है नहीं तो कर्म की गति जो है जो कर्म की गति दे उसने कर्म किया उसको मिलना है मगर कैसे मिलेगा कहां मिलेगा कब मिलेगा ये सब तो चेतन वाली बात है ना इंफॉर्मेशन आ गया तो इसको इसको करने के लिए कोई ना कोई चेतन तत्व चाहिए तो या तो हम ये माने आत्मा ही है आत्मा और परमात्मा ही चेतन है तो यानी परमात्मा देता है ना चोट जब किसी ने किसी का गला दबाया गला दबाने का कष्ट किसी को दिया उसको गला दबाने का देखिए परमात्मा अच्छे बुरे का कुछ नहीं देता है यह हमारे कर्म देते हैं परमात्मा से इसका कोई लेना देना नहीं। कर्म कर्म क्या कोई

00:24:51:18 चेतन तत्व है क्या अलग से कर्म आत्मा कर रही है ना शरीर के द्वारा बताया तो है ना मैंने देखिए मैंने मतलब तो मैं अपने आप को मारता हूं क्या जैसे मैंने किसी को मारा तो फिर उसके बाद उसके बाद जैसे मैंने किसी को चोट पहुंचाई तो अब मेरे कर्म का फल यह है कि मुझे भी चोट पहुंचे ठीक है अब वो अब वो दरवाजे से टकराने से चोट पहुंचेगी या ईंट से लड़ के चोट पहुंचेगी या और किसी से पंखे के नीचे खड़े होने जैसे पंखा गिर जाएगा तो चोट पहुंचेगी। यह फैसला कौन करेगा? यह निर्णय कौन करेगा? आत्मा के आत्मा करेगी। मैं खुद स्वयं करूंगा। मैं खुद अपने आप को मारूंगा। मतलब एक तरीके से अपने आप को खुद ही कर रहा हूं। जो कुछ कर रहा हूं इसलिए मुझे सावधानी की जरूरत है कि मुझे क्या करना चाहिए। नहीं नहीं वो करना क्या चाहिए वो ठीक है। मगर जैसे मैंने किसी को मारा था। किसी को मारा था तो अब मुझे उसका दंड मिलना है तो दंड का फैसला कौन लेगा? मेरे कर्म आत्मा। अरे मैंने तो खुद ही गुनाह किया है। चोर खुद डिसाइड करेगा अपनी सजा।

00:26:00:28 हां ऐसा ही होता है। परमात्मा तो कुछ नहीं देते। परमात्मा हमें दंडित नहीं करते हैं। हम ही खुद को दंडित करते हैं। मतलब मतलब हम यह मान के चले कि अच्छा इसमें एक प्रश्न और आ जाता है। फिर इसमें एक दिक्कत और आ जाती है कि जो आत्मा है वो जब किसी को चांटा मार रही है या किसी को कष्ट दे रही है। हम जब किसी को कष्ट दे रहे हैं हमें मालूम है। ठीक है? मगर जब हम अपने आप को चोट पहुंचा रहे हैं उसके फल स्वरूप तो वह तो मुझे मालूम ही नहीं पड़ रहा कि मैं पहुंचा रहा हूं। वो तो मैं किसी वो तो मुझे वो तो मुझे बाध्य होना पड़ रहा है लेने के लिए। उसमें मेरा चुनाव यही तो यही तो हम ये से डेज कोर्स के चैप्टर्स में आपको समझा रहे हैं। इसीलिए तो हम आपको कह रहे हैं आप खुद को जानो। खुद के कर्मों को जानो और नहीं कर्मों को कर्मों कर्मों का फल मिलना निश्चित है। वो ठीक है। मगर दे कौन रहा है? क्योंकि आप ये कह रही है ना कि परमात्मा तो देगा नहीं तो फिर कौन देगा? मिल रहा है वो स्वत ही मिल रहा है। अरे तो कोई कोई सिस्टम है कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम है। क्या है वो? सीपीयू कुछ तो होगा जो ये डिसाइड कर रहा है। आज ना से डेज कोर्स का आपका फर्स्ट चैप्टर है। पहला

00:27:16:02 चैप्टर मैंने जो सुनाना था आपको सुना दिया। आपको इसमें से जो ठीक लगे आप उठा लीजिए। जो नहीं ठीक लगे आप उसको छोड़ दीजिए। आप इसमें आगे बढ़िए। अच्छा इसमें दो चीजें और है बस नीलमा जी बस दो एक है यह आपने कहा ना कि आत्मा का स्वधर्म शांति है है ना हां जी तो तो आत्मा यहां पे है क्यों अशांति में आई कहां से क्यों आ गई कर्म अनुसार आई है 84 जो आप वो बताते हो हम 84 जन्म बताते हैं पांच 5000 वर्ष का चक्र पूरा करते हुए आई है। कर्म अनुसार जैसे उसको जो कर्म उस अनुसार वो आई है। नहीं तो इसमें ये दिक्कत आती है ना कि जैसे हमने कहा कि आत्मा का धर्म शांति है। तो आप ये कह रहे हैं कि 5000 साल के बाद एनी हाउ वो दोबारा से आने का यहां आने का कर्म करेगी ही करेगी। जी जी जी। मतलब ऐसा नहीं है कि हमेशा के लिए वहां रह जाए शांति में। वहां से वापस आने का काम करेगी करेगी। आना ही है। हां जी। इस पूरे चक्र की पुनवत्त

00:28:31:06 होती है। यह भी मैं चैप्टर में आपको बताने वाली हूं। तो जब आएगी आएगी निश्चित है तो फिर इसका मतलब आत्मा का धर्म अशांति भी सिद्ध हो गया ना क्योंकि उसको आना ही है एक दिन यहां पे। यानी कि जैसे आज यहां पर जैसे आज अशांति में है तो वह शांति के लिए कर्म कर रही है। शांति में पहुंचने के लिए मगर अगर उसका वापस आना भी निश्चित है तो इसका मतलब शांति के लिए कर्म क्यों कर रही है? शांति तो उसका स्वधर्म ही है। कर्म क्यों करेगी शांति के लिए? शांति के स्वधर्म को याद करने की जरूरत है कि वो अपने स्वधर्म को याद रखे जो वो भूल जाती है कि मैं शांत स्वरूप आत्मा हूं। मैं जहां से आई हूं वो शांति धाम है। परमधाम शांति धाम। फिर वो यहां आकर भूल जाती है कर्म के चक्कर में आके कि मैं शांति प्रिय आत्मा हूं। तो इसीलिए तो हम ओम शांति कह के बात करते हैं कि जिससे याद रहे कि मेरा स्वधर्म क्या है? नहीं बताते हैं हम आपको। इसमें एक क्वेश्चन आ रहा है नीलमा जी

00:29:32:12 कि जब वो शांति में पहुंच गई तो वो अपने कर्म काट के ही तो पहुंची है। जो उसके फल भोगने थे सब करके ही तो पहुंची है वहां वो कर्म काट के पहुंच गई। पहुंचने के बाद भी जो जिस के साथ उसका जो कोई भाई बंधु सखा जो भी मिले यहां पे जिनके साथ कर्म बने हैं उनके कर्म बंधन अनुसार जैसा किया होगा वैसा भोगने तो आना ही होगा ना शिव जी यानी कि कर्म कटते नहीं है पूरी तरीके से नहीं आ जाते की तरह आत्मा में फीड होते हैं और वो उस अनुसार ही जन्म लेती है उस अनुसार ही आती जाती रहती है तो यानी उसको भी मोक्ष मिल जाता है जो मोक्ष प्राप्त करने की पूरी तैयारी नहीं करता है। मोक्ष कभी नहीं मिलता आत्मा को। नहीं मोक्ष आप वो वाला पांच वो वाला जो 5000 साल वाली साइकिलिंग वाला मोक्ष उसको भी फल मिल जाता है। बस परमात्मा परमात्मा के पास जाके वो वापस आती है। अपनी शक्तियों से फिर से भर जो शक्तियां उसकी खो जाती है। जैसे आज ये कलयुग तक आई है। ये कलयुग तक आई है। है ना? तो कभी ऐसा हुआ है कि मेरी आत्मा को देवत्व की प्राप्ति हो गई थी। ऐसा ही हुआ होगा।

00:30:47:25 हां परमात्मा बोलते हैं कि मेरे पास परमधाम में शांति में रहते हो। पर यहां से सबसे पहले सतयुग में जाती है आत्मा। सतयुग में जाकर वह देवी देवता धर्म धारण करती है। देवी देवताओं के रूप में आती है। फिर वह अपने धर्म को भूलती जाती है। फिर सतयुग से द्वापर, द्वापर से त्रेता, त्रेता से कलयुग, कलयुग से संगम युग। अब संगम युग में मैं और आप है जिसमें परमात्मा पिता का संगम होता है। बाबा ब्रह्मा के तन में आकर निराकार परमात्मा शिव ज्ञान सुनाते हैं जिसको हम ज्ञान मुरली कहते हैं। वही ज्ञान मुरली का ज्ञान मैं आपको सुना रही हूं कि उस मुरली में परमात्मा ऐसा बताते हैं। तो हम उसी फेथ पर चलते हैं। ठीक है। तो इसमें यह यह एक बात आ गई कि परम जब कोई आत्मा वहां पर है वो सतयुग में है। है ना वो सबसे गोल्डन एरा सतयुग जी तो वहां से जब वो द्वापर में आ रही है। सतयुग से द्वापर में आ रही है। थोड़े से उसके जीवन में कष्ट बढ़ रहे हैं। इसका मतलब सतयुग में उसने कुछ ऐसा किया जिसकी वजह से द्वापर में आया और द्वापर से कुछ ऐसा किया जिससे नहीं सतयुग से ऐसा किया द्वापर में आया। द्वापर से ऐसा किया त्रेता में आया। त्रेता से कुछ ऐसा किया कि वो

00:32:02:28 कलयुग में आया। यानी कि वो गलत कर करके ही तो यहां तक पहुंचा है। जी तो गलत क्यों किया उसने? क्योंकि वो एरा वैसा है। जैसा आपने कहा गोल्डन एरा तो गोल्डन एरा में सभी देवी देवता हो जाएंगे। जरूरी नहीं है। कुछ एक आत्माएं आती है। वो 9 लाख आत्माएं होती है। वो नेक्स्ट चैप्टर में आपके पास आएगा। ये चैप्टर में बताऊंगी। उसमें आपको पेशेंस रखना पड़ेगा। फिर दूसरे में आप जब द्वापर में आते हैं तो द्वापर की प्रवृत्ति वैसी है तो वही आत्माएं जो सतयुगी थी वही फिर भक्ति करने लगती है तो भक्ति करने लगती है तो जड़ उथल सब कुछ पूजती है परमात्मा को भूल जाती है फिर वो द्वापर से जब कलयुग में आती है तो वो कलयुग में आते और ज्यादा काली हो जाती है तो वो प्रवृत्त वैसी है वहां की युग की प्रवृत्ति वैसी है तो आत्मा ऐसी हो जाती है मेरा मैं एक्चुअली कहना यह चाह रहा हूं कि जैसे मेरा स्वधर्म है शांति है ना यानी कि शांति में रहना ही मेरा स्वभाव है। ये हो गया ना स्वधर्म तो अगर ऐसा है तो फिर मुझे शांति में ही रहना चाहिए। जरूरी नहीं होना चाहिए कि मैं वहां से आऊं या ही।

00:33:18:04 भूल जाती है ना? वो भूल जाती है ना खुद को आत्मा। तो भूलने का कारण भूलने का कारण क्या होता है? भूलने का कारण तो सृष्टि में जैसे चल रहा है परमात्मा वैसे यानी कि यानी कि प्रवृत्ति मान सकते हैं इसको भूलने की प्रवृत्ति इसका मतलब कि शांति से अशांति में आना उसकी प्रवृत्ति है। प्रवृत्ति हो गई ना आत्मा भूल जाती है। हां तो भूली तो इसका मतलब उसका ये भी उसका स्वभाव हो गया भूलना। हां जी। है ना? तो जब जब हम शांत अशांति से शांति को मतलब जो जैसे हम अशांति को स्वधर्म कह रहे हैं तो वो भूल करके अशांति में आने की यात्रा करना भी उसका स्वधर्म हो गया ना। हां ऐसा कह सकते हैं। यानी कि आत्मा का धर्म अशांति भी है। स्वधर्म नहीं धर्म अशांति नहीं है। धर्म शांति है पर वो अशांति में आती है। कर्म तो वो अगर उसकी वो प्रवृत्ति है उसका स्वभाव है कि उसको आना ही है। उसकी उसको आना ही है तो उसका धर्म तो यह भी हो गया। शांति अगर निश्चित तौर पर है

00:34:31:13 नहीं धर्म आत्मा का शांति ही है और कर्म अनुसार वो अपने शांति और अशांति में आती है मतलब यहां से जब जा रहा है सतलोक में जीव या आत्मा यहां से जब सतलोक में जा रही है तो हम तो ये कह के ले जा रहे हैं परमधाम परमधाम में परमधाम सत्यलोक परमधाम तो यहां से जब आत्मा जा रही है वहां तो हम तो ये कह के लिए जा रहे हैं। यह आत्मा का धर्म है इसलिए जा रहा है। मगर वहां से जब यहां आ रहा है तो हम यह नहीं कह रहे यह भी आत्मा का धर्म है इसलिए यहां आ रहा है। यानी कि भैया मैंने आपको फर्स्ट चैप्टर करा दिया। अब मैं सेकंड चैप्टर आपको फिर कराऊंगी क्योंकि देखो अभी जन्माष्टमी का त्यौहार भी है तो थोड़ा सा। आप उसका ख्याल रखें। मैं कल आपको ये चैप्टर कराऊंगी।

00:35:23:25 अच्छा एक चीज और है लास्ट लास्ट संस्कार वाला आज का जो आपने बोला है वो रह गया थोड़ा संस्कार पूछ लो संस्कार के बारे में हां बोलिए ये आपने कहा कि वो जो कर्म करता है वो फिर संस्कार बन जाते हैं। यह नहीं समझ में आया ये क्या है? संस्कार बन जाते हैं मतलब रिपीटेड आप एक चीज को रिपीट करते हैं वो आदत बन जाती है। आदत माने संस्कार आदत जो आदत होती है हमारी वो संस्कार आदत अच्छा आदत हमारी आदत हमारा संस्कार है। हां जी

00:36:04:14 तो हम लोग फिर और उसके आदि उसके और आदि हो जाते हैं। जी जी जी यानी कोई चीज हमने अगर कोई ठीक है ठीक है आज के लिए फर्स्ट डे का कोर्स इतना ही काफी है और मुझे लगता है कि सेवन डेज का कोर्स कंप्लीट हो जाने के बाद शायद ये सारे सवालों के जवाब और अच्छे से मिलेंगे जैसे आप आज आपने थोड़ी सी जल्दी दिखाई ठीक है ना जी जी तो अभी क्या करें अब अब अपने वास्तविक रूप में आए नीलिमा थोड़ा सा एक मिनट वास्तविक रूप में बात करके जाइए। अरे

00:36:46:19 नीलीमा जी चली गई। हमने आज के कोर्स में देखा कि इन्होंने जो जो दावे किए हैं कुल मिलाकर के मैंने छह सात दावे नोट डाउन कर पाया था। एक इन्होंने आत्मा सीधे थोप दिया है मेरे ऊपर। इन्होंने उसको तार्किक रूप से सिद्ध नहीं किया कि आत्मा कैसे है। अगर सनातन सिद्धांत देखें तो देह के नाश से आत्मा का नाश नहीं होता। और देह के भेद से आत्मा का भेद नहीं होता। यह सनातन सिद्धांत है। तो इसमें तर्क है कि हमने कई बार अपने शरीर को नष्ट होता हुआ देख लिया। फिर भी हम अपने आप को जीवित क्यों मान रहे हैं? है ना? और जैसे कई बार हम सोचते हैं कि कुछ लोग ये कहते हैं ना कि नहीं नहीं मैं तो मरना चाहता हूं तो मैं वो नहीं चाहता, जीना नहीं चाहता। तो सच्चिदानंद वाले कासेप्ट का खंडन करने का प्रयास करते तो उसमें भी वह जो ढूंढ रहा है ना मर के खुशी ढूंढ रहा है। तो इसका अर्थ क्या हुआ कि व्यक्ति अपने शरीर के नाश के बाव भी अपना अस्तित्व स्वीकार कर रहा है। तो जिस रूप में वो अपना अस्तित्व स्वीकार कर रहा है वही उसकी आत्मा है। ठीक है? तो ऐसे करके लॉजिकली आत्मा को सिद्ध किया जा सकता है बहुत अच्छे तरीके से और ये उन्होंने जवाब नहीं दिया। दूसरी बात संस्कार को लेकर के तो क्लियर किया ही नहीं। लास्ट में बात

00:38:01:22 हुई संतुलन बनाने वाली एक बात की गई कि संतुलन यहां भकुटी के पास होता है। जबकि कम से कम इस शरीर अब ये थोड़ी आप बहुत दार्शनिक लेवल की बात हो जाएगी। इस शरीर में जो आत्मा है वो उसको सर्वव्यापी होना पड़ेगा कि नहीं होना पड़ेगा वो वाली बात। है ना? तो एक ये चीज हो गई। फिर भी चलो अगर इसको हम इसी से मान ले कि प्रमाण से मान ले तो प्रमाण किसी को क्यों माने? हमारे पास अपना सनातन सिद्धांत और परंपरा प्राप्त आचार्यों को प्रमाण मानने का तार्किक कारण है हमारे पास। मगर किसी को हम यहां पर यू ही बस कोई आता है और कहता है कि तुम आत्मा हो और आत्मा भकुटी के बीच में रहती है तो उसको हम सीधे तौर पर प्रमाण क्यों मान ले? इस बारे में भी कोई भी लॉजिकल आंसर नहीं मिला। अच्छा कार का उदाहरण सिद्ध हुआ नहीं। ना लॉजिक मिला ना कोई ऐसा कुछ खास प्रमाण मिला। दूसरी बात फिर सबसे जरूरी जो आज की बात थी जो आज बहुत मुद्दे की बात थी कि कर्म का फल देगा कौन? अच्छा ये है ये है नीलिमा जी वो वो बी के नीलमा जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। तो

00:39:17:01 सबसे जो आज की जो सबसे इंपॉर्टेंट बात मुझे समझ में आई कि ये जो कर्म का फल देने वाली जो बात है ना कर्म का फल कौन दे रहा है क्योंकि जब आप ईश्वर को बाधित करते हैं ना कि वो सिर्फ यही यही वाले कर्म करता है वो जिनको लोगों व्यवहारिक दृष्टि से अच्छा कहा जाता है। कहते है ना कई ऐसे सेक्ट है कई ऐसी संस्थाएं हैं जो ऐसा कहती नहीं ईश्वर तो सिर्फ पॉजिटिव चीजें ही करता हुआ दिखाई देता है। वो जो प्रलयंकारी रूप है ना ईश्वर का हां लय करने वाला उसको स्वीकार नहीं करता बिल्कुल तो तो वो कहता है कि अपने आप होता है तो इसमें बहुत बड़ा एक फैक्ट आता है कि प्रकृति तो अपने से निर्णय ले नहीं सकती प्रकृति तो अपने से निर्णय ले नहीं सकती ये सब करने का तो फिर ये निर्णय ले कौन रहा है आत्मा स्वयं से स्वयं को ले रही है तो आत्मा को जैसे जब उसने अपराध किया था तो बोध हुआ था तो दंड देने का बोध क्यों नहीं हो रहा तो आत्मा कर नहीं रही है परमात्मा कर नहीं रहा है तो हमें एक और एकिस्टेंस मानना पड़ेगा। एक और अस्तित्व मानना पड़ेगा। एक एक कोई तत्व है जो यह डिसाइड करता है कि इसने अपराध किया है तो उसको कब कहां कैसे किस रूप में उसका पनिशमेंट मिलना है। और इस इस बात पर ब्रह्मा कुमारी सदैव शांत रहेगी। मुझे ऐसा लगता है सदैव शांत रहेगी।

00:40:32:14 और यह भी एक बहुत बड़ा फैक्टर है स्वधर्म शांति वाला जो स्वधर्म शांति यह भी बहुत बड़ा फैक्टर है। क्योंकि अगर यहां से वहां जाना स्वधर्म के कारण है तो वहां से नीचे आना भी स्वधर्म के कारण ही होना चाहिए। जी जी है ना? तो फिर मानना पड़ेगा कि पाप करना भी स्वधर्म है आत्मा। यह मानना पड़ेगा क्योंकि अगर वो भूल रही है भूल रही है प्रवृत्ति हो गई। प्रवृत्ति ही उसका स्वभाव है। अगर स्वभाव है तो वो स्वधर्म है। वही हो गया। राइट? तो पाप करना भी हमको मारना पड़ेगा। ये सब मैंने आज जाना। लेकिन उनको कौन समझाए? उनको उनको आप नहीं समझा पाएंगे। यहां तो मैं कुछ बोल भी सकती हूं जिस समय मैं वाइट साड़ी में हूं। आपको सुना रही हूं। आप ऐसे क्वेश्चन कर रहे हैं तो मुझे मुझे पता है अंदर से कितनी प्रॉब्लम होती है कि मैं क्या जवाब दूं। इधर मुझे जवाब आता है। मुझे मालूम है मैं आप ही के जैसी हूं। तो मुझे वो प्रॉब्लम होती है। सोचो जब मैंने सुना होगा तो मुझे कितना ये लगा होगा कि मैं क्या करूं? अब ये क्या हो गया? अब हम कहां फस गए? जो आपने तीर्थों वाली बात सुनी जो हमारे चार तीर्थों को उन्होंने खराब किया है उस पर तो मैं अपनी हंसी नहीं रोक पा रहा था जब आपने चार धाम मैं खुद मैं

00:41:47:22 खुद परेशान थी कि ये क्या बोल रहे हैं आप [हंसी] हिंदू धर्म में सनातनी कोई भी सनातनी तीर्थ क्यों करता है इनको कोई बताए जाके लेकिन इनको समझ में नहीं आ रहा है मैं मैंने ब्रह्मा कुमारी होते हुए द्वादश ज्योतिर्लिंग किए लेकिन अगर मैं द्वादश ज्योतिर्लिंग भी कहूं तो उन्हें 12 ज्योतिर्लिंग बोलना आता है। द्वादश का मतलब भी नहीं पता। हम जैसे बोलते हैं द्वादश ज्योतिर्लिंगम तो वो उनको समझ में नहीं आता। ये क्या बोल रहे हैं? अभी अभी मेरी किसी से वार्तालाप हो रही थी। अभी स्वरा भास्कर का एक बयान चल रहा है। इतना गंदा बयान है कि हमारी माताओं को आप गालियां दे लो। आप कुछ भी कर लो। आपको जो मन करता आप कर लो। हम नहीं बोल सकते। क्यों नहीं बोल सकते भाई? क्या विकल्प था उनके पास? क्या कर सकती थी वो? क्या आज की तरीके से उसके हरम में चले जाते या कुछ सेक्स वर्कर बन जाती या वो लाशों के साथ वो रेप करते। तो वहां पे स्वरा भास्कर एस अ लॉयर समझ पा रही है कि ना अदालतें थी ना कुछ और था। सिर्फ परिस्थिति थी और उस परिस्थिति में हमारी माताओं ने सोचा कि सिर्फ

00:43:03:06 यह करना ही जायज है क्योंकि जब राजा पग बांध के जाते थे तो वो हमारा भगवा कलर का होता था कि पता नहीं संदेश जैसे आने बंद होते थे तो उनको पता चल जाता था कि रणभूमि में क्या हो रहा है। ठीक है? अगर मैं सिर्फ हिंदू मुसलमानों की भी बात करूं ना आपसे तो क्यों रानी करुणावती की बात नहीं होती। रानी करुणावती ने भी तो राखी भेजी थी हुमायूं को वो सारी बातें हैं। कहीं ना कहीं स्वर्ण की बात जो हो रही है वो स्वर्ण मुसलमानों में भी स्वर्ण है। हिंदुओं में भी स्वर्ण है और निचली जातियों में भी स्वर्ण है। यह मत समझिए आपके स्वर्ण केवल एक हिंदू को बांट के एक तरफ कर दो कि ये तो इतने परसेंट है ये हो जाएगा। यही सेम ब्रह्मा कुमारी की बात है। मैं इससे इसलिए यह बात सुना रही हूं कि एक माहौल बनाया हुआ है। एक ना क्रिएटिव माहौल है जो आपने क्वेश्चन किए वो वो माहौल से निकले हुए प्रश्न है जिनका उत्तर उनके पास नहीं है। ब्रह्मा कुमारियों के पास उनका उत्तर नहीं है। दूसरी टिप्पणी सुन रही हूं मैं। आज तो मैं सोशल एक्टिविस्ट हूं। ऐसा तो नहीं है कि मैं केवल ब्रह्मा कुमारी हूं। आज मैं फिल्म डायरेक्टर हूं, राइटर हूं, ऑथर हूं। बहुत बड़ी-बड़ी चीजें कर रही हूं। जिनको पच नहीं रहा है। जो ब्रह्मा कुमारियां मेरे साथ

00:44:18:19 थी जो बिल्कुल डल थी सॉरी बहुत हाई थी और मैं डल थी वो बहुत हाईएस्ट उस समय पढ़ाई करी हुई थी कोई इंजीनियर थी कोई कुछ था आज वो देख रही है कि ये नीलिमा जो कल तक हमारे सामने कुछ नहीं कर पाती थी ये मुंबई में है ये फिल्म डायरेक्टर है ये सब कुछ कर रही है आपको नहीं पता कितने सारे ग्रुप्स चल रहे हैं मेरे खिलाफ उस ग्रुप में आता है कि देखो ये कहती है ये पिक्चर बनाती है। देखो ये कहती है ये वहां रहती है। ये देखो इसकी तो ना प्रवृत्ति में ही मॉडलिंग थी। ये तो कभी ब्रह्मा कुमारी बन ही नहीं सकती थी। अरे जब मैं ब्रह्मा कुमारी थी तो ब्रह्मा कुमारी होते हुए भी मैं तुम्हारे यहां अवल दर्जे की ब्रह्मा कुमारी थी। ऐसी वैसी नहीं थी। मैं तुम्हारे यहां ऐसी वैसी ब्रह्मा कुमारी नहीं बनी थी। मैंने निर् भाई को एक ही बात बोली श्री राम जी जिनकी पालना मैंने ली है वो दादी रतन मोहिनी है नील भाई है और करुणाकारा सेठी है जो अभी बैठे हैं सेक्रेटरी जनरल जिसको भी डाउट हो वो जाकर मेरे बारे में पूछ सकता है मैं इनको एक ही बात बोलती थी मुझे आपका ऊपरी ज्ञान नहीं सुनना मुझे आपका गहराई का ज्ञान सुनना है मुझे प्रॉपर ब्रह्मा कुमारी बनना है मुझे वो बताइए जिससे सटीक ब्रह्मा

00:45:33:22 कुमारी बना जा सके समझे ना उन्होंने क्या किया मुझे ट्रेनिंग करने के बोला ट्रेनिंग एक माउंट आबू में होती है कन्याओं की जो ट्रेनिंग करने कन्या माउंट आबू में जाती है वो तीन महीने की होती है तीन महीने में वो हमें बोलना पढ़ना कहना से डेज कोर्स कैसे करना है वो सिखाते हैं लेकिन उस तीन महीने में मैं संतुष्ट नहीं हुई मैंने बोला तीन महीने में कैसे कोई ब्रह्मा कुमारी इसको जान सकता है इतना बड़ा सागर है ज्ञान का परमात्मा तो आप कहते हो शिव तो ज्ञान का सागर है तो ज्ञान का सागर अगर उसको जानने के लिए मुझे कुछ तो बताइए आगे क्या करना है तो उन्होंने मुझे सबसे सख्त ट्रेनिंग होती है इनके यहां जो बहुत ही प्रताड़नाएं होती है वहां प्रताड़नाएं बताऊंगी तो आपको लगेगा नीलिमा जी कैसे कर लिया आपने मैं तो आई थी ऐसे घर से कि घर में अगर मुझे जिस दिन खाना बनाने के लिए बोल दिया गया तो घर वालों को खाना नहीं मिला सब बाहर खा के आ जाते थे बनने से पहले ही तो वो बोलते थे आज वो नीलिमा को दिया था ना तो वो हमें पता था आज भी रोटी नहीं मिलेगी। ठीक है? ऐसी मैं थी। बड़े होने तक भी मैंने घर में कोई काम नहीं किया था। ना ही कभी घर वालों ने कोई फोर्स किया। ऐसा लगता

00:46:48:26 था कि ठीक है कर लेंगी। फादर ये कहते थे बड़ी हो जाएंगी बेटियां कर लेंगी। हम दो बहने हैं। कोई बात नहीं सीख जाएंगी। सीखने क्या गए? हम तो ब्रह्माकुमारी में चले गए। ऐसा सीख लिया कि पूछो मत। वहां जहां नरिया ट्रेनिंग हो रही है। आज जो मुझे कहते हैं यह ब्रह्मा कुमारी कैसे यह तो मॉडलिंग करने वाली फिल्म वाली है। फिल्म वाली बनना मेरी मजबूरी है। फिल्म वाली मैं मजबूरी में बनी। फिल्म वाली पर मैं कोई एक्टर नहीं हूं। फिल्म वाली कोई मैं धेय प्रदर्शन करने वाली फिल्म वाली नहीं हूं। मैं बिजनेसमैन हूं। आई एम ए बिजनेस वूमन। स्टिल नाउ आई एम बिजनेस वूमन। मैं फिल्म का बिजनेस कैसे होता है वह देख रही हूं। फिल्में कमर्शियल कैसे बनती है मैं वह देख रही हूं। फिल्मों में राइटिंग कैसी होनी चाहिए? मैं उसके लिए अवेयरनेस कर रही हूं। यहां पे भी यहां पर भी मैं शांत नहीं हूं। शांति की प्रवृत्ति आपकी होगी। मेरी तो नहीं है। मेरी तो क्रांतिकारी प्रवृत्ति है। ध्यान रखिएगा। इतने में आप मुझे पहचान चुके होंगे। ब्रह्मा कुमारी मुझे पहचान चुका होगा कि नीलिमा जिस भी क्षेत्र में जाएगी उधर की कमियां जरूर उठाएगी। ऐसा कोई ब्रह्मा कुमारी से मुझे शत्रुता नहीं है कि मैं उसकी

00:48:04:02 कोई बात ले अपने को कुछ करना चाहती हूं। ब्रह्मा कुमारी से मुझे मिलेगा भी क्या? मैं आपको बताऊं आपने वीरेंद्र देव दीक्षित की बात की थी। मेरे को बहुत अच्छी तरह जानते हैं। वकील साहब जो अयोध्या केस लड़े मैं एक बात बता एक बात एक बात बोल दूं। अभी वो स्वरा भास्कर का जो स्टेटमेंट आया था उसके संबंध में एक बात आ रही थी मन में अभी कुछ मेरे ख्याल से कुछ कुछ वर्ष पूर्व दोती साल पहले कुछ राजस्थान के वहां से जुड़े हुए लोग जो पद्मावती पद्मावती थी जो वहां से जुड़े हुए लोग वो एक पेंटिंग ले गए थे शंकराचार्य जी के पास पूरी के शंकराचार्य जी तो जैसे कुछ हिंदू लोग भी उसको उसका खंडन कर रहे हैं कि कि नहीं नहीं वो वो वो हमारे लिए आदरणीय नहीं है। कुछ उसमें प्रमाण उल्टे सीधे प्रस्तुत कर रहे हैं। जी तो गुरुदेव के पास जब वो पेंटिंग गई थी सीधे तो उन्होंने उनको भगवती स्वरूपा मानते हुए सबसे पहले उस पेंटिंग को सर से लगाया था। जौहर वाली पेंटिंग थी वो और फिर अपने जो उनका आसन होता है उस पे मतलब अपने आसन पे ही उसको आसन पे विराजित किया। इतना उसका सम्मान किया था और ये

00:49:19:03 मैं वही बोल रही हूं मैं बोल रही हूं शिव जी दीक्षित ना तो इनको हिस्ट्री से कोई मतलब है नहीं वीरेंद्र दीक्षित पे ही आऊंगी मैं ब्रह्मा कुमारी को आप आप क्वेश्चन कर रहे थे बहुत अच्छे ब्रह्मा कुमारीज को भारत की हिस्ट्री जग्राफिकल पैरामीटर से कोई लेना देना नहीं है पहले आप सुन लो मैं सार बता रही हूं आपको उन्हें कोई लेना देना है जग्राफिकली हम क्या है? हम पिटिकली क्या है? हम हिस्टोरिकली क्या है? हम स्पिरिचुअली क्या है? डिड नथिंग नन बिजनेस ऑफ़ ब्रह्मा कुमारी। ओके? सो आई एम वेरी प्राउड कि मैं निकल पाई। मैं धर्म को अपने धर्म को प्राउड करती हूं कि मैं निकल पाई। तो वीरेंद्र देव दीक्षित की बात होती है कि वीरेंद्र देव दीक्षित हमारा नहीं है। क्यों नहीं है? क्यों नहीं है? ब्रह्मा कुमारी का वीरेंद्र देव दीक्षित वीरेंद्र देव दीक्षित की हिस्ट्री चेक करिए आप पर ब्रह्मा कुमारी का हिस्ट्री से कोई लेना देना नहीं करता ना वो तो कुछ करता है कांड होता है लोग भूल जाते हैं उसको कोई मतलब नहीं है कि मेरे यहां से निकला हुआ कोई व्यक्ति क्या काले कारनामे कर रहा है

00:50:34:12 मेरी बात मैं तो सामने हूं आपके यहां से आपने मुझे नहीं निकाला है मैंने आपके प्रति विद्रोह किया और छोड़ा मुझे निकालने वाला कोई व्यक्ति वहां नहीं है। कोई व्यक्ति एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसने यह कहा हो मैंने नीलिमा को निकाला। देखिए जिस टाइम मैंने इनके लिए विद्रोह किया मैंने वीरेंद्र देव दीक्षित जैसे मामले अब बहन जैसे मामले ना जाने कितने मामले जब मैंने उठाए तब मेरे प्रति विद्रोह अंदर छिड़ा कि किसी तरह से इसको हटाया जाए रास्ते से। अगर यह हटी नहीं तो ये अपने जैसे पैदा कर देगी। समझे कि जैसी यह है ना इसके आसपास की मंडली वैसी पैदा हो जाएगी। अच्छा वहां का माहौल क्या है? वहां का माहौल है ब्रह्मा कुमारी किसी से बात नहीं करेगी। समझे आप? जितनी उसकी सीमाएं है वो उतनी आएगी। चुप रहेगी। ओम शांति ओम शांति। बस इससे ज्यादा कोई लेना देना नहीं है। ये हमें ट्रेनिंग में सिखाया जाता है। मैं उल्टा कर रही थी। अगर मैं आ रही थी और मुझे कोई हलचल नजर आ रही थी। मान लीजिए मैंने ट्रेनिंग करके आई। उन्होंने तो पूरा ट्रेनिंग कराया मुझे कितना बोलना है क्या बोलना है सटीक बोलना है कम बोलना है कम बोलो धीरे बोलो मीठा बोलो ये

00:51:49:15 उनका मंत्र है ठीक है अब इसमें तो कोई क्रांति होती नहीं है तो मैं चुप रहूं तो चुप ही रहती थी जितने दिन चुप रही उतने दिन शांति से चला मामला लेकिन जब बहुत ही सर से पानी उतर गया और मुझे लगने लगा कि सरकारी तौर पर भी ये गला अंदर रेप के केसेस कर रही है लड़कियां जिन लड़कियों को इन्होंने आज उपाधि दे रखी है। उनहीं लड़कियों ने इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर रखे हैं। मैं फिर दावे से करती हूं आपको। उसमें मैं नहीं आती हूं जिसमें लोग मुझे तोल रहे हैं ना कि नीलिमा के साथ कुछ कमेंट आते हैं। नीलिमा के साथ जरूर कुछ गलत हुआ होगा और बहुत गंदे अल्फाजों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा नहीं है। नीलिमा के साथ जो गलत हुआ नीलिमा कोर्ट में लड़ रही है। आप उसका पता करिए नीलिमा के साथ क्या गलत हुआ। पर जिन लोगों ने जिन लड़कियों ने इनके खिलाफ मृत्युंजय के खिलाफ या और लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। वह तो आरटीआई डाल के कोई भी व्यक्ति ले सकता है ना। मैं तो खुलेआम बोल रही हूं। मैं तो आबू रोड थाना बता रही हूं आपको। आबू रोड थाने से आरटीआई डालिए। कोर्ट से डालिए और आप कॉपियां निकलवाइए। अनगिनत एफआईआर रेप की

00:53:04:21 उस संस्था में दर्ज नहीं होनी चाहिए थी। जिस संस्था के अंदर मंत्र ही उनका ओम शांति है। कितना डिफरेंट है शिव जी और ये कितनी गंभीर बात है जिसको हम लाइटली नहीं ले सकते। हंसी में नहीं उड़ा सकते। हम ये नहीं कह सकते नहीं संस्था की कोई जिम्मेदारी लायबिलिटी बनती है भाई। मैं आज एक फिल्म डायरेक्टर हूं। मुझे किसी ने इंटरव्यू किया। बॉम्बे फिल्म फ्रेम ने मुझे इंटरव्यू किया मेरा अच्छा परफॉर्मेंस के ऊपर। तो उन्होंने बोला कि आप मैडम इंटरव्यू नहीं देते। आप कुछ हमें बताते नहीं अगली फिल्म क्या आ रही है क्या नहीं हो रहा है। तो उन्होंने जो मेरा इंटरव्यू लिया था पूरे ब्लॉग में लिखा हुआ है। पूरा मेरे को एक एक सारा बंच भेजा है। इतनी बड़ी मेरी मैगजीन निकली थी जो भी मैं प्रोजेक्ट कर रही हूं। उसके अंदर पूरा लिखा हुआ है साफसाफ कि फिल्म इंडस्ट्री की जिम्मेदारी बनती है, जवाबदेही बनती है कि सामाजिक कुरीतियों के प्रति आवाज उठाने का उसका हक है। बोलने का अधिकार है। लेकिन अगर समाज को बॉलीवुड मैं खुल के बोलती हूं। मैं जहां हूं वहां भी बोल रही हूं। सुन लो। और मुझे बहुत बड़े-बड़े लोग सुनते हैं। ये मत सोचिए

00:54:20:00 आप कि केवल आप सुनते हैं। मुझे आज अगर बॉम्बे में बैठी हूं तो लोग बहुत सुनते हैं मुझे। तो मैं उनकी जवाबदेही तय करती हूं कि आपकी जवाबदेही बनती है कि आप जब कोई कंटेंट लाते हैं, कोई भी कंटेंट आप लाते हैं, आपको उसके इर्दगिर्द का माहौल देखना चाहिए। आपको यह समझना चाहिए कि इनके प्रति हमारी क्या जवाबदेही है। आप एनिमल फिल्म बनाते हैं। आप बीफ खाते हैं। ठीक है? मैं भी आज उन्हीं के साथ काम करूंगी। ये मत सोचिए कि काम नहीं करूंगी। मुझे उन्हीं के साथ काम करना है। फिर भी बोल रही हूं। देखो नीलिमा की हिम्मत। देखिए ब्रह्मा कुमारी इस वेरी हिम्मत। मैं जिन लोगों ने बीफ खाया, जिन लोगों ने नंगा नाच किया, उन लोगों ने राम की भूमिका निभाई कैसे? मैं उसके प्रति इंटरव्यू दिया है। खुले आप दूसरी चीज क्या किसी भी फिल्म मेकर की ये जिम्मेदारी नहीं है। आप आज दादा साहेब फालके की बात करते हो। मैं क्यों केवल ब्रह्मा कुमारी के लिए बोलूंगी? मैं तो समाज की उस हर कुरीति के बारे में बोलूंगी जिस भी फील्ड में जाऊंगी। दादा साहब फालके अवार्ड मिलता है हमें जब हम कभी कोई अच्छा काम करते हैं तो दादा साहब फाल्के की बात अगर आप करें तो मेरे आइडियल है वो ऐसे ही नहीं आ गई मैं ब्रह्मा कुमारी से

00:55:35:01 यहां फिल्म इंडस्ट्री में अगर आप दादा साहेब फालके की पहली फिल्म सर्च करेंगे तो पता है कौन सी है राजा हरिश्चंद्र तो जो जो इंडस्ट्री के अंदर बहुत पैसे जिनको मिलने वाले थे विदेश जाने वाले थे लोग बाहर बुलाना चाहते थे फिर फिर भी उन्होंने देश के अंदर रह के यहां का सिनेमा दिखाना पसंद किया और शुरू के जितनी चीजें आप देखोगे वो सब श्री कृष्ण पे विष्णु जी पे या फिर हमारा सारा धार्मिक जो साहित्य था वो बनाया गया और बहुत अच्छे से पेश किया गया ऐसा वैसा नहीं ठीक है आज आइकॉन है वो क्यों नहीं बनाते आप क्यों नहीं बनाते आ रही है हनुमान जी पे फिल्म नीम करोली बाबा क्यों चल गई 400 करोड़ लगाई हुई फिल्म फिल्म चलने में डाउट है। 4000 करोड़ के बैनर के तले बनने वाली फिल्म पता है कितनी बड़ी बात होती है। और मात्र दो करोड़ में बनने वाली फिल्म भीम करौली बाबा के ऊपर चल रही है। मस्त चल रही है। इसका मतलब आपको अपने देश का माहौल समझने की जरूरत है। जिस जिम्मेदारी को पूरे के पूरे फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को उठाना अति आवश्यक है। ठीक है? मैंने कब बात नहीं

00:56:50:04 उठाई। मैंने हर बार बात उठाई। मैंने तो दिलजीत दोजान पर बात उठाई कि पाकिस्तानी हीरोइन लेकर के कैसे आप गाना बना सकते हो। जबकि हमारे साथ वर्ल्ड वार चल रहा था। ठीक है? अब मैं इसमें ब्रह्मा कुमारी को जोड़ती हूं। ब्रह्मा कुमारी ये ले कतई ना चले कि नीलिमा का कोई पर्सनल स्वार्थ था। नीलिमा का तो स्वार्थ यहां भी नहीं है। नीलिमा का स्वार्थ आपके पास भी नहीं था। हां नीलमा का स्वार्थ एक है कि राष्ट्र में अगर हम जी रहे हैं जब तक यह घट में प्राण है तब तक राष्ट्र की सेवा करें। जहां धर्म के अंदर खराब चीजें होती है वहां हम उन्हें उठाएं। जहां कर्म के अंदर होती है यह मेरी कार्मिक भूमि है। मेरे कर्म में अगर यह सब कुछ होगा तो भी बोलूंगी। वो मेरे धर्म की बात थी जो मैंने धारण किया था। अगर मुझे बुरा लगा तो मैं बोल रही हूं। मैं आपको कह रही हूं कि भाई हां आपने गलत किया है। गलत का प्रमाण कोर्ट में भी है। गलत का प्रमाण आपके थाने में भी है। गलत का प्रमाण आपके कैंपस के अंदर है। आज इतनी गंभीर स्थिति है शिवश जी सुनिए। निर्भया केस जैसा केस हुआ है दिल्ली में फिर से। पता है ना आपको? किस-किस को पता है यह पता करो। निर्भया कांड जैसा

00:58:05:06 केस फिर दिल्ली में हुआ है वापस। तो अगर फिर हुआ है तो मेरा कोर्ट से अदालतों से सबसे अपील है कि पहले तो यह जो बाबा बाबा जितने भी बाबा है बाबा इन द सेंस नॉट चैतन्य महाप्रभु और शंकराचार्य वो हमारे भगवान है वो नहीं जितने नामचीन बाबा बने हैं जिन्होंने कल्ट खोले हैं चाहे उसमें वीरेंद्र देव दीक्षित हो चाहे ब्रह्मा कुमारी हो चाहे निरंकारी हो जितने भी है ये जेल जाते हैं। आरोपी साबित होते हैं। जेल से फिर वो बाहर घूमते हैं। आप बाहर घुमाते हो उनको आराम से और आरोप ही नहीं है। वो सब बहुत गंभीर

00:58:49:18 आरोप है। अगर देश का कानून लचलचा ना होता, हलचल वाला ना होता, लचपिचा ना होता तो डरते लोग रेप के बारे में सोचते। डरते स्वरा भास्कर जैसे लोग रेप के और हमारी भगवती मां के बारे में बात करते हुए जो रोज शौहर बदलती है वो जोहर के बारे में बात कर रही है हिंदू होके शौहर रख रही है आप वो जोहर के बारे में बात करती है उनको तो समझाना भी बहुत भारी बात है भैंस के आगे बैन बजाने जैसा है उनका उनका पाला किसी ठीक-ठाक मनुवादी से नहीं होता है इसलिए ये सब चीजें हैं। एक बात ब्रह्मा कुमारी अलग नहीं है शिव जी मैं ब्रह्मा कुमारी को आपके सामने खुले आम जोड़ रही हूं इन चीजों से ब्रह्मा कुमारीज कहता है ब्रह्मा कुमारीज हमें कहता है कि ब्राह्मण हम है तुम ब्राह्मण नहीं हो खुलेआम कहता है उसकी मुरलियों में लिखा है ब्राह्मण वो जो ब्रह्मा कुमारीज में है समझे तीर्थ वो जो ब्रह्मा कुमारीज में है मुरली वो जो ब्रह्मा कुमारीज में है भगवान ब्रह्मा कुमारी में है। हद हो गई भाई। मतलब हमारा तो सब कुछ खत्म हो गया। अब आपके पीछे जितनी किताबें

01:00:04:19 लगी है ना सब जीरो है। सब कुछ ब्रह्मा कुमारी है। अब आप बताइए कैसे मानेंगे आप? अच्छा एक चीज मैं कहना चाहते थे आप? यह मैं कहना पूछना चाह रहा था कि क्या यह जो ब्रह्मा कुमारीज वगैरह में जो चीजें हैं जो आरोप होते हैं तो इसमें क्या हम यह माने कि कोई एक फॉलोअ है कोई एक वहां का ऐसा है जिससे इस प्रकार की गलती हुई या यह माने कि जो उसका कोर सिस्टम है वो दूषित हो चुका है और उस इस कारण से इस तरह की चीजें आ रही बाहर कोर सिस्टम दूषित हो चुका है। मैं उसी कोर सिस्टम में से निकल के आपके पास आ रही हूं। अच्छा कोर सिस्टम दूषित हो चुका है वहां इतनी बुरी हालत है शिवा जी कि मैं खुल के बोल रही हूं ये जिनको जो करना है कर ले मुकदमा कर दे जेल को जाने मुझे गोली मार दो जो तुम्हें करना है कर लो मैंने जीवन दे दिया भगवान को तुम कहते हो तुम्हारी सफेद साड़ी पहन के तुम नहीं सफेद साड़ी पहन के जीवन भगवान को नहीं दिया जाता ऐसे दिया जाता है जैसे हमने दिया हमने तुम्हारे यहां आने के बाद भी ब्रह्मचर्य अपना रखा है। सिर्फ सिर्फ अनमैरिड नहीं हूं मैं। ब्रह्मचारी नहीं

01:01:19:25 हूं। करवाओ डीएनए टेस्ट। अच्छा एक एक मिनट सर एक मिनट जी सुनिए जिनको भी जिनको भी ये लगता है कि नीलिमा का ये नीलम नीलिमा का आप जो मर्जी कर लीजिए। आप रोज एक मुकदमा दायर कीजिए। मैं मुकदमे के लिए ही जीवित हूं। अब मैं अब तुम्हारे से लड़ने के लिए ही जीवित हूं। एक्चुअली मेरे जीवन का लक्ष्य कुछ और है ही नहीं। अब मैंने शादी नहीं कराई इसलिए नहीं कि शादी होती नहीं है। मुझे शादी करने की फुर्सत नहीं ले दे रहा ब्रह्मा कुमारीज। इतने ऐब कर रखे हैं ब्रह्मा कुमारी से कि मुझे शादी करने की फुर्सत नहीं है। और टेस्ट भी नहीं है मुझे शादी में। किस लिए? के भाई मुझे टाइम मिले तो मैं सोचूं। टाइम नहीं है क्योंकि रोज एक नया मुकदमा हो रहा है मेरे ऊपर। कोई जो कुछ बोलती हूं कंट्रोवर्सी हो जाती है। जो कुछ कहती हूं गलत मैं गलत बोल रही हूं। ब्रह्मा कुमारीज अच्छी तरह से एक बात जान ले। खुलेआम मैं इस प्लेटफार्म पे आपके आपके प्लेटफार्म के थ्रू बोल रही हूं। ब्रह्मा कुमारी अच्छी तरह जान ले। 13 साल से मुकदमा लड़ रही हूं। 13 साल में मुकदमे की ऐ पूरी हो गई है। अब लास्ट में जज साहब को फैसला देना है। इस बात पे भी फैसला देना है कि मैं ब्रह्मा कुमारी हूं या नहीं।

01:02:35:08 पहली बात मैंने यह पूछा है मैं ब्रह्मा कुमारी क्यों नहीं हूं मुझे पहले इसका आंसर दो आके कोई उत्तर नहीं आ रहा है शिव जी वहां से 13 वर्षों से मौके पर मौके दिए जा रहे हैं कुछ नहीं हो रहा है अब उसमें फैसला आएगा दूसरा मृत्युंजय प्रकाश नीलू जैसे लोग जिनके ऊपर रेप के चार्जेस हैं वो कोर कमेटी में कैसे बैठे हैं वो कैसे शीर्ष नेतृत्व कर रहे हैं उसका जवाब देना पड़ेगा। ब्रह्मा कुमारी को अब तीसरा मुकदमा कौन सा है? आपने फॉरेस्ट की जितनी भी जमीनें घेरी है वो क्यों घेरी है? आपको क्या आवश्यकता थी? आपका पैसा कहां से आ रहा है? और आप ये पैसा कैसे लगा रहे हो? और जमीनों की आपको अगर इतनी आवश्यकता है तो लोगों को विनाश की थ्योरी क्यों पढ़ा रहे हो? तो ये सब कुछ कोर्ट में है। चौथा मुकदमा इन्होंने मेरे पर दायर किया है गुड़गांव में। इस्लाम इस्लाम वाला। इस्लाम वाला। तो मुझे बता दो मुझे शादी करने की फुर्सत है कहां? और मैं समझती भी नहीं कि अब शादी वाली बात रही भी नहीं। तीसरी बात यह समझ ले जो भी कमेंट यहां करते हैं मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि ब्रह्मा कुमारीज मेरे बारे में क्या कर देगा। जो तुमसे हो तुम वो कर लो। सिर्फ

01:03:50:09 मुझे एक ही बात कहनी है कि वहां सफेद कपड़े पहनने वाले लोग जिस दिन भगवा कपड़े पहन लेंगे उस दिन मैं पीछा छोडूंगी ब्रह्मा कुमारी का। उसके पहले तो नहीं। उसके पहले नहीं। वैदिक विद्यालय खुलेगा। बहुत बड़ी व्यवस्था है। बहुत बड़ा कैंपस है। बहुत कुछ है। वहां वैदिक विद्यालय चलना चाहिए और महाचार्य शंकराचार्य जी के थ्रू चलना चाहिए। चैतन्य महाप्रभु को पढ़ाना चाहिए। बच्चों का जीवन बच जाएगा। ये मेरा लक्ष्य है। जी नहीं बहुत बढ़िया। आपने जो चीजें संक्षिप्त में बता दी है। बाकी आज के कोर्स के कोर्स जो हमने किया है वन फर्स्ट डे का उससे रिलेटेड यदि किसी का कोई क्वेश्चन हो तो वह कर दे कमेंट के माध्यम से और यदि चेहरा लेकर के यहां आना चाहता है आज के कंटेंट से रिलेटेड तो वह आ सकता है। आप ऑपरेटर जी यहां पर वह दे दीजिए लिंक दे दीजिए यहां पर आप।

01:04:59:15 ये दे दिया गया है। अगर कोई ऊपर आकर के क्वेश्चन करना चाहता है यहां स्टेज पर आकर के तो वह कर सकता है बट विद आइडेंटिटी और अगर वह कमेंट सेक्शन में कोई अपना प्रश्न रखना चाहता है तो रख सकता है। हम लोग पांच मिनट तक वेट करेंगे वरना फिर आज के इसको मतलब आगे बढ़ाएंगे और नेक्स्ट हम या तो नेक्स्ट आने वाला जो मंडे है सोमवार उसको मिलेंगे डे सेकंड के लिए और या फिर थर्सडे या वेडनेसडे जो डिसाइड होगा सोमवार बुधवार या बृहस्पतिवार में से किसी एक दिन अब जो सेकंड डे का कोर्स है वो हमें बी के नीलमा जी कराएंगी ब्राउन

01:05:51:19 [गला साफ़ करने की आवाज़] अब आपके पास कमेंट में मेरे लिए वो भी आएंगे चीजें कि ये क्या ही कोर्स कराएगी ये तो कुछ भी बोलेगी तो आप करा दो जो कमेंट करेगा उसको कहूंगा आप करा दो आ जाओ और मैं कोशिश कर रही हूं कि मैं वैसे ही डिट्टो बोलू जो मैंने सीखा है और मैंने बहुत बहुत रटा रटाया सीखा हुआ है आप मैं तो ये कह रहा हूं ना मैं तो ये कह रहा हूं ना नीलिमा जी कि आपका आईक्यू जो जो है वो जो यूजली जो ब्रह्मा कुमारियां मिलती है मुझे उनसे बेहतर बहुत अच्छा आईक्यू है तो आप क्या करिए ना उसका यूज करिए शिवश को पछाड़ने के लिए वो मैं कह रहा हूं अगली बार करिए मतलब आप वो आईक्यू यूज किया अगर मैंने आपसे वो आईक्यू यूज किया तो उसमें क्या होगा कि मैं मैं वो क्या बोलते है उसको लाइन से हट के चली जाऊंगी नहीं ठीक ठीक सीमाएं है ना उसमें रहना पड़ेगा मुझे। मैं वही तो कह रहा हूं कि मैं वही कह रहा हूं। ब्रह्मा कुमारी को बचाया जा सकता है। उसके सिद्धांतों को तो उसकी सिद्धांतों की सीमा से बाहर निकल के ही बचाया जा सकता है। यानी कि हमारी ओर आ के ही की मुझे परमिशन नहीं है। फिर मैं ब्रह्मा कुमारी नहीं हूं।

01:07:07:06 परमिशन नहीं है। मगर आप देखो ना राजरी गार्डन वाली जो थी उन्होंने मान लिया शांति जो आत्मा का धर्म नहीं गार्डन वाले ने वापस आपको कॉल भी किया है कि भाई हटा दो मेरी वीडियो तुमने मुझे फंसा दिया [हंसी] सुनो सुनो मेरी बात क्या होता है मैं आपको बताती हूं जिस समय आपने कर लिया आपने उनका इंटरव्यू ले लिया तो क्योंकि मेरे तो कांटेक्ट है देखो मैं तो प्रॉपर जो लोग मेरे साथ रहे हैं वहां पे जो एस एन ब्रह्मा कुमारी मुझे आज भी जानते हैं। तो उनसे मेरी बात हुई। उन्होंने कहा नीलिमा दीदी बताओ इनको पता ही नहीं है इनको क्यों क्या पड़ी थी इनको इंटरव्यू देने की? और जब उन्होंने इंटरव्यू दिया उनको अंदर से इतनी डांट पड़ी है शिवा जी कि तुमको क्या जरूरत थी इतना बोलने की? इतना क्यों बोल रही थी? तुमको क्यों परमिशन नहीं लेनी थी क्या? करुणा जी के यहां से उनको बहुत डांट पड़ी है। और मुझे करुणा जी के साथी बता रहे हैं। अच्छा वो कह रहे हैं कि इनको तो बेचैनी है। इन्होंने कहा तुम्हारे को क्या जरूरत थी? तुम क्यों बोल रही थी इतना फालतू बोलने की क्या? अच्छा इन्होंने अपने वाली को तो कह लिया। मुझे तो ये कहते हैं कि हम मुझे निकाल रखा है। मेरे पे तो सीधा मुकदमा करेंगे। मेरे को बोल तो नहीं सकते

01:08:22:12 ना। मुझे तो सीधा बोलेंगे देखो ये इस फ्रेम से बाहर निकली। ये बात हमारी नहीं है। ये तो इसने बोली है। समझे आप? तो मैं उस फ्रेम में रहूंगी। मुझे मालूम है ब्रह्मा कुमारी का फेम क्या है? मतलब ब्रह्मा कुमारी इसकी ब्रह्मा कुमारी का फेम यही है कि जब एंड हो जाए तो शांति छोड़ दो मेरे पास वक्त नहीं है। ये एक बहुत ही हार्ड कोर जो है फॉलोअ है ब्रह्मा कुमारी के। बहुत हार्ड कोर और सदैव ये प्रश्न किया। ये सदैव प्रश्न करते रहते हैं और ये कह रहे हैं बहुत ही ज्ञानवर्धक मतलब इनके इनको अपना कोर्स का पहला दिन याद आ गया आज। यह कह रहे हैं ना बहुत ही ज्ञानवर्धक चर्चा अभी भी है ये। यह हमारे विरोधी हैं। मतलब जब ब्रह्मा कुमारी की बात आती है तो ये हमारे विरोधी हैं। वरना और सब चीजों में समर्थन करते हैं। मतलब जब हम आज आज क्या कर रहे हैं? आज समर्थन कर रहे हैं। आज आज ये ये कह रहे हैं कि आपने जो फर्स्ट डे का जो कोर्स कराया वो बहुत अच्छा है। ये उधर ध्यान नहीं देना चाहते कि जो मैंने क्वेश्चन किए और उनके आंसर नहीं मिले। थैंक यू सो मच [हंसी] ये उधर ये आपको मतलब आपको आपके लिए वो है ये मेरे लिए रेस्पेक्ट बढ़ जाएगी आपने ये क्या किया से

01:09:37:20 डेज कोर्स करा के मेरे लिए रेस्पेक्ट ब्रह्मा कुमार इसकी नजरों में दोबारा आ जाएगी हां ठीक है तो फिर हम ये हां ये क्या दिखा रहे हैं अच्छा ये कमेंट्स आ रहे हैं जी जी पढ़िए पढ़ लीजिए। एक दो पढ़ लीजिए। ऑपरेटर जी क्या दिखाना चाह रहे हैं? क्योंकि आपको क्लियरली दिखेगा। प्लीज लेट हाउ कैन वी कनेक्ट टू अस? हां मैंने इनको बोला है आज ही दिन में मैंने बोला था इनको कि आप जो है इस वीडियो के अंत में दिए गए नंबर पर संपर्क करें। मैं बोल देता हूं। और एक लोग और है जो जिन्होंने आज महाराष्ट्र से फोन किया था मुझे। वो कह रहे थे कमेंट पढ़ लीजिए आप एक दो कमेंट पढ़ लीजिए कमेंट कुछ ऐसा आ नहीं रहा है यहां पर कोई खास कोई प्रश्न नहीं आ रहा है तो ये बहन जी इतना बोल रही है उसे पता उससे पता चलता है कि यह ब्रह्मा कुमारी नहीं हो सकती ओके मतलब मैं चुप रहूं तो मैं ब्रह्मा कुमारी हूं बस यही तो यही तो हम साबित कर रहे हैं जो आप बोल रहे हो वही तो हो आप एक्चुअली

01:10:53:13 मैंने आपको क्या कहा शिवा जी आपने मुझे अभी कहा नीलिमा जी आप उसको तोड़ के भी बताइए अभी उतना बोलने पे भी उन्होंने बोल दिया कि ज्यादा बोल रही है या ब्रह्माकुमारी हो ही नहीं सकती [हंसी] अच्छा मैं एक बात कहता हूं कि आप इतना बोल रहे हो इससे पता लगता है कि आप मनुष्य नहीं हो फिर हो गया ये बहन जी इतना बोल रही है देख लो मतलब दीदी जी आप एक ये वाले हैं इन्होंने एक ने कमेंट किया है कि ये मत जो लिख रहे हैं ये पढ़िए आप। मुझे पता है गलत से गलत लिखते हैं। एक भाई साहब है जो कह रहे थे कि आज आपको सही स्टूडेंट मिल गया है। आप इसको जन्म जन्मांतर में भी समझा नहीं पाओगे। सही स्टूडेंट मिल गया। आप क्या समझना चाहते हैं? आप क्वेश्चन करिए। मैं आपको भी समझा दूंगी। [हंसी] मुझे बहुत बड़े-बड़े स्टूडेंट मिले हैं। दीदी जी आप भाई को कोर्स करा देना आत्मा का पथ पक्का करा दो बाबा बहुत खुश होंगे आपको पता नहीं है किसके बारे में बात कर रहे हैं आप जिन शिवान जी को आप देख रहे हैं सामने मैं बोलना नहीं चाहती थी मेरे से रिश्ता जो

01:12:08:19 आप समझते हो आत्मा का आत्मा का सबसे रिश्ता है वही सबसे रिश्ता होता है रिश्तो में कोई किसी से कुछ नहीं लगता लेकिन जिनको आप बात कर रहे हो ना शिवान जी के बारे में पहले इनका पंथ पढ़िए इनका धर्म पढ़िए। इनका सनातन का सिद्धांत पढ़िए कि पंथ किसे कहते हैं? धर्म किसे कहते हैं? सिद्धांत किसे कहते हैं? तीनों पता है इन्हें। और जिन्होंने वस्त्रों पर भी कमेंट किया था। मैंने देखा था कभी आप सफेद पहनते हैं, कभी आप गुरुकुल की पराधी को पढ़िए। पहले ऋषि कश्यप को पढ़िए और देखिए आपका डीएनए क्या है सबका? सभी का डीएनए क्या है? वो पता करिए आप। आप शिवा जी और मेरे की मेरी बात बाद में करिएगा। यह जो मक्कड़ जाल बोलते हो ना ब्रह्मा कुमारी का मक्कड़ जाल ब्रह्मा कुमारी का मकड़ जाल नहीं डीएनए का मक्कड़ जाल है। जो डीएनए मेरा है वही शिवान जी का है वही आपका है। लेकिन आपको पहचान नहीं आ रहा है। गोत्र व्यवस्था में डीएनए आपका भी है ऋषियों का। लेकिन आप मानने को तैयार नहीं है। गलती आपकी है। आप जो ये आवाज उठा रहे हैं। शिवान जी पे, मेरे पे या किसी पे भी। साधु सन्यासियों पर आवाज उठाना ब्रह्मा कुमारी को बहुत इजी है। लेकिन ऋषि कश्यप से सप्त ऋषि हुए। सप्त ऋषियों से कैसे फिर महषि हुए। महर्षि

01:13:23:25 से पहले फिर वो 49 ऋषि हुए। और इन ऋषियों से कैसे ये ज्ञान अलग-अलग गोत्रों में बटा और हिंदू से फिर कुछ और हुए। कुछ और से फिर कुछ और हुए। इसलिए मैं कई बार कहती हूं कहते हुए शर्माती नहीं हूं। मैं अपनी उम्र को बहुत नहीं मानती। मैं कहती हूं कल मर जाऊं। कल चली जाए ये शरीर छूट जाए मेरा। आप सब लोग हिंदू हैं। सब लोग सनातनी है। आप अपने डीएनए को पहचानिए। डीएनए को पहचान लीजिए। यही तो शंकराचार्य यही तो गुरुदेव कहते हैं पूरी शंकराचार्य कि सबके पूर्वज सनातन वैदिक आर्य हिंदू ही है। लेकिन ये कड़वी सच्चाई समझते नहीं है। ये एक प्रश्न आ रहा है। पुरुषत्तम को ले बैठे हैं। आप मुझे पुरुषत्तम पढ़ दीजिए। श्रीमान जी पुरुष सूक्तम को ले बैठे हुए हैं इस टाइम सब

01:14:17:06 ब्रह्मा के मुख से यह हुआ उसके मुख से यह हो गया फिर आप तो कहते हैं के ये हो गया वो हो गया अरे वो पुरुष सूक्तम का एक एक आपने श्लोक पकड़ पकड़ा हुआ है ब्रह्मास ये वो सब के मैं नहीं पढ़ती मैं नहीं कहती के उू से उू के अंदर वैश्य थे फिर जितने भी शूद्र थे वो कटी भाग से नीचे थे। लेकिन आप मुझे बताइए अगर मैं और आप मिलते हैं तो सर से सर थोड़ी टकराते हैं। मैं और आप मिलते हैं तो पैर छूते हैं। अगर शूद्र पैर कटी भाग से नीचे थे भी। मैं मानती हूं चलो कहा भी है। चलो उस उस श्लोक को आप मान भी लो। तो पैर छू के माथे पर लगाते हैं। भाई क्या बात हो गई। पूरा स्ट्रक्चर आपके ऊपर खड़ा हुआ है। ऐसी तो कोई बात नहीं है। लेकिन ब्रह्मा कुमारी ने सबसे पहले तोड़ा है उस चीज को। सबसे पहले ब्रह्मा कुमारी ने तोड़ा है। सब लोगों को मिक्स कर दिया। अपना कुछ चला दिया है। अब ना वहां कोई स्वर्ण है। ना वहां कोई कोई और है। वो अपने ही धर्म को भूल गए हैं। ये कहते हैं आत्मा के धर्म को याद दिलाते हैं। ये तो सारे धर्मों को भुला देते हैं। ये तो केवल ये कहते हैं कि हमारा जो मनगढ़ंत कहानी है उनको मानिए और चुप रहिए। ये जो अभी-अभी कहा है

01:15:32:07 इन्होंने कि जो इतनी बोल रही है ये ब्रह्मा कुमारी नहीं हो सकती। इसका मतलब आपको वो स्त्री चाहिए जो चुप रहे और चुप रह के आपकी उंगलियों पर नाचे। जिस सीता का वर्णन आप लोगों ने सुना है एक्चुअली वो सीता का वर्णन सही नहीं सुना है। मैं सुनाती हूं आपको एक बात छोटी सी। राजा दशरथ ने जिस समय रसोई करती है ना बहू रसोई करती है बहू पहली रसोई करती है तो सीता जी ने जब पहली रसोई करी ना और खीर बनाई तो खीर बना के जब ले जाने लगी ना ससुर की तरफ तो उसमें एक तिनका गिर गया और उस तिनके को जब देखा उसने काली रूप में तो राजा दशरथ ने वो दर्शन करे सीता के और इसलिए रावण को नहीं देखती थी सुन लो ब्रह्मा कुमार कुमारियां जिनको तुमने कभी रामायण पढ़ी नहीं होगी। फिर भी इसलिए छोटा-छोटा वर्तान तुम्हें सुना देती हूं। ये जो मेरे चुप रहने के ऊपर बात कही है तुमने क्योंकि सीता जी का वर्णन गलत कर दिया गया है। नारी को गलत आक्षेप में रख दिया गया है। नारी को गलत फ्रेमिंग कर दिया गया है कि नारी ऐसी ही होती है। ऐसी नहीं होती है। जब नारी पर पड़ती है तो काली जो है वो मंदिरों में नहीं रहती। काली अक्सर उन नारियों में रहती है जिन्होंने

01:16:47:22 समाज की कुरीतियों के प्रति आवाज उठाई। चाहे वो झांसी की रानी लक्ष्मीबाई हुई, चाहे कोई और हुआ, चाहे वो द्रोपदी हुई, चाहे कोई भी हुआ है। जिन नारियों को आप आक्रोशित देखते हो वही काली है। और जब दशरथ ने बोला, दशरथ ने जब काली के दर्शन किए राजा दशरथ ने बोला सीता जी को के मैं आपसे प्रार्थना करता हूं हाथ जोड़ के कि बेटा किसी को इस तरह मत देखना। इन निगाहों से किसी को ऐसा मत देखना क्योंकि जो तिनका गिरा था वह काली ने अपनी आंखों से जला दिया था। तेरी इतनी हिम्मत तू मेरी बनाई हुई उस खीर में गिर गया जो मुझे दशरथ को देनी है। और वो तिनका जला के खाक कर दिया। वो थी काली। द्रोपदी कौन थी? काली। तो जब भी कोई आपको बात आती है कि नारी बोल रही है ध्यान रखना उसके अंदर चंडी और काली बोल रहे हैं वो माफ नहीं करेगी। और मैं माफ नहीं करने वाली ब्रह्मा कुमारी इसको। यह एक प्रश्न ले लीजिए। आपका ब्रह्मा कुमारी से इतना पंगा लिया, किसी में इतना गुस्सा देखा या उसके फेस पर टेंशन देखा? यह प्रश्न से सीख से आप टाइप करें दोबारा। आप आप मैं आपने ब्रह्मा

01:18:03:06 कुमारी से इतना पंगा लिया तो उनके यहां पर आपने शायद यह कहना चाह रहे हैं कि आपने उनके यहां पर किसी में इतना गुस्सा देखा मतलब जो या तो दोबारा आपको बता दूं ब्रह्मा कुमार कुमारियों सारे सुन लो ये जो आपने चार पांच चीजें रटी हुई है ना कि जीवन जीने की कला में गुस्सा ना करना शांत रहना चुप रहना जड़ हो जाना रिएक्शन ना करना। मुर्दा जैसा रहो। इसी तरीके से ब्रह्मा कुमारी जिहादी बनाते हैं। और कैसे जिहादी बनाते हैं? चुप रहो, शांत रहो जो वो कहते हैं सुनते रहो। जी हां जी करते रहो और जितना बोलने के लिए बोला जाए उतना बोलो। ऐसा नहीं हो सकता। मगर मगर मगर मगर नीलमा जी इसमें एक बार जो ये पूछ रहे हैं ना कि जो शांति का पथ दिखा रहे हैं वो शांत रहते हैं या जब ये झगड़ा होता है तो वो आते हैं। तो बिल्कुल आते हैं। बड़ी बहने छोटी बहनों को चप्पलों से मारती है। मैं आपको बीच में इंटरप्ट करती हूं। शिवा जी मुझसे सुना नहीं जाता। ये सब मैंने वीडियो भी देखे हैं उनके मैंने। मैंने वीडियो देखे हैं। कहां शांत रहती है ब्रह्मा कुमारियां? ब्रह्मा कुमारियों के फेयरिस्ट बता दूं मैं आपको नाम सहित लेकिन यहां नाम नहीं ले सकती हूं। इतने

01:19:18:07 बड़े-बड़े सेंटर्स में सिस्टम सुनिए क्या है? बड़ी बहने छोटी बहनों पर शारीरिक हमला करती हैं। मानसिक प्रताड़नाएं देती हैं। वह कभी उन्हें घर नहीं जाने देती। कभी उनके पैसे उन्हें खर्च नहीं करने देती। ब्रह्मा कुमारियां अगर इतने कंट्रोल में है छोटी बहने तो सोचो कि रोज का ट्रीटमेंट कैसा होता है उनका? ऐसा कभी नहीं होता। आपने कभी देखा है? शिव जी हर एक व्यक्ति को बुद्धि है। बुद्धि चलती है। कोई चीज दो लोग खड़े होकर बात कर रहे हैं। तीसरे की बुद्धि चलती है। तो वहां इतना बड़ा संगठन है। इतने बड़े लोग हैं। इतनी बड़ी भीड़ होती है। बाबा मिलन में तो जिस समय ये कहते हैं भगवान आया उस समय तो 10 द हजार लोग आते हैं। तो जो छोटी बहने हैं वो बात तो करती होंगी ना आपस में। है ना? तो वो जो ग्रुप वाइज बात होती है ना वह बातें आप सुनेंगे ना आपके पैरों की जमीन निकल जाएगी गुस्सा नहीं वो मारपिटाई करती है और वो मारपिटाई की वीडियो के कारण ही मैं लड़ रही हूं कोर्ट में मुझे एक बात का जवाब दे दे हर ब्रह्मा कुमार कुमारी मेरा आप एक सर्च कर लीजिएगा बी के नीलिमा

01:20:33:22 करके जिस समय मुझे शायद ईमेल बनाना आया आया होगा जिस समय वो झगड़ा हुआ ना मारपीट पिटाई का फटाफट मैंने ईमेल बनाया फटाफट वो वीडियो डाला वो वीडियो उसी टाइम का डला हुआ है जैसे ही बीके नीलिमा करोगे उसप एक ही वीडियो है वो बाबू का वीडियो है जिसे मैंने वायरल किया था ठीक है इतनी भयंकर पिटाई हुई है और सुनिए लेटेस्ट सुनिए लेटेस्ट सुनिए कहते गुस्सा नहीं करते लेटेस्टली इनके यहां एक केस हुआ है जिसमें इन्होंने पुलिस वाले पीटे हैं पुलिस वालों को पीटा है जी क्या पुलिस पुलिस वालों को पीट दिया। पुलिस वालों को पीटा है। पुलिस वाले इनके प्रति मुकदमा लड़ रहे हैं। अच्छा ऐसा आक्षेप लगा है। मुकदमा चल रहा है इन पर। पुलिस वालों को पीटने लगाया पीटा है। वीडियोस आई है। अच्छा अंदर पुलिस वाले आए इनका मामला देखने। इन्होंने पुलिस वालों को पीट दिया। और ये कहते हैं गुस्सा नहीं करते। मतलब हम किसी भी चीज पे गुस्सा ना करें। मतलब कि एक तरीके से मेरे को बात करने को गुस्सा और तुम पिटाई करो तो गुस्सा नहीं। मतलब कि एक चीज एक चीज है मतलब कि एक तरीके से अगर देखा जाए तो

01:21:48:24 एक पूरा वो नहीं तानाशाह का जो एक वो होता है ना कि उसके टापू पे अगर कोई जाएगा तो वहां उसको उसी की हुकूमत झेलनी पड़ेगी। बाहर से कोई ऑफिसर एक मिनट एक मिनट ऐसी फिल्में ऐसी पहले फिल्में बनी है ना हुकूमत मैदान ऐलान जंग ऐलान जंग और वो बनी थी धर्मेंद्र की ज्यादा होती थी जिसमें वो एक टापू होता है डॉक्टर डैन डोंगरीला तहलका जिसमें उसका अपना एक टापू होता है उसका कोई उसकी अपनीप आर्मी ये मुझसे क्यों चिढ़ते हैं देखो ये मुझसे यू चिढ़ते हैं हां उनकी अपनी आर्मी होती है। उनकी अपनी आर्मी होती है। तो बाहर की आर्मी भी आती तो वो लड़ती है उससे। चलिए ठीक है। आज का बहुत अच्छा रहा।

01:22:38:21 जी आप से डेज कोर्स का पहला दिन हमने चिते हैं। जी जी जी ये चिढ़ने का कारण है। नीलिमा को शांत कैसे किया जाए? नीलिमा के अंदर ये सब भरा हुआ है। रोज का मेरा पाठ्यक्रम ये है। ब्रह्मा कुमारी नहीं है। और ये आज से नहीं है। जी ये देख लीजिए आज से नहीं है मैं दिखा दूं आपको ऐसे ही नहीं है देखो आप ये देखो आप बहुत सुंदर ऐसे चिढ़ रहे हैं ऐसा है शांति रखने के लिए अगर मैं शांत हूं तभी मैं तुमसे अलग हूं अगर मैं वहां होती थी तो शायद ये जो पुलिस वालों पे हमला करना बाबू पे हमला करना आप इसका हिस्ट्री जग्राफी चेक करिए जो भी इनको बोल रहे हैं कि गुस्सा नहीं करते गुस्से में ही इन्होंने सब काम किए हैं चाहे वो फॉरेस्ट वालों पर हमला किया। एक केस है जिसमें फॉरेस्ट वालों पर हमला करने का केस चल रहा है। क्या इन्होंने बिना गुस्से के हमला कर दिया? एक केस है जो पुलिस वालों पर हमला करने का चल रहा है। बिना गुस्से के हमला कर दिया। बहनों ने अलग-अलग सेंटरों पर केस किए हुए हैं। बिना गुस्से के हमला कर दिया। और आज इंटरनेट पे आप टाइप कर लीजिए। ब्रह्मा कुमारीज का पर्दाफाश भी तो इतनी वीडियोस आ जाएंगी। ब्रह्मा कुमारीज के खिलाफ इतनी वीडियो आ जाएंगी। क्यों बोल रहे हैं

01:23:53:27 नहीं खैर खैर देखिए देखिए पर्दाफाश वाली बात वीडियोस वाली बात तो ये है ना कि किसी को किसी के खिलाफ अगर फॉल्स प्रोपेगेंडा भी चलाना है तो भी वीडियो आ जाएगी मतलब मैं ये नहीं कह रहा कि वहां ऐसा नहीं हुआ होगा ऐसे आरोप है बिल्कुल और आपके पास पर्याप्त सबूत भी मगर ये जो क्लेम है ना कि आज बहुत सारी वीडियोस आ जाएगी तो आप देखो अभी आपने रामचरितमानस दिखाई आपने अभी मनुस्मृति दिखाई आपने अभी वाल्मीकि रामायण दिखाई इन सबका नाम भी आप डालोगे ना तो भी बहुत सारे वीडियो आ जाएंगे इनके विरुद्ध तो वो तो एक अलग अलग बात है। मैं इससे एक बात कहना चाहती हूं कि इन्होंने कंट्रोल किया हुआ था। मैं कुछ और कह रही हूं शिव जी आज तक ब्रह्मा कुमारी के खिलाफ चाइना की तरह कभी भी मीडिया पे कुछ नहीं आ सकता था। अभी तक इन्होंने कंट्रोल किया हुआ था सब कुछ। अब हम जैसे इनके यहां बगावत करके जब बाहर निकले तो वो बहुत सारी चीजें बाहर निकली तो लोगों ने कहना शुरू किया। ऐसा नहीं है कि पहले आता था। पहले तो लोग कहते थे 100 वर्ष जिस ब्रह्मा कुमारी ने देखा वो ब्रह्मा कुमारी गलत नहीं हो सकता। लेकिन ये जितने भी कमेंट्स ये कर रहे हैं इनको यह लग रहा है कि किसी तरह लड़की को चुप करो। भाई चुप क्यों करना चाहते हो? आप जवाब दे दो ना मेरी बात का।

01:25:09:01 चुप क्यों करना है? तो अच्छा और भी कोई लोग हैं जो पीड़ित हैं और क्योंकि आपका वीडियोस देख के बहुत लोगों को रोशनी मिली है और वो आगे आना चाहते हैं। उनके साथ काफी चीजें हुई है। अगर आप कुछ किसी तरीके से एसोसिएट करना चाहते हैं चीजों में तो आप संपर्क कर सकते हैं। नीलिमा जी आज मेरे पास एक फोन आया था। महाराष्ट्र से थे वो आपको बहन-बहन बोल रहे थे। नीलिमा बहन से मुझे बात करनी है। मैं अभी उनका नंबर आपको शेयर कर दूंगा। आप देख तो ही होंगे वो। डेफिनेटली हां हां तो देख लीजिएगा ठीक है तो सभी को जय श्री राम कोर्स का पहला दिन हो चुका है हम सोमवार बुधवार या बृहस्पतिवार को फिर मिलेंगे समय देने के लिए सबका आभार और आपका जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद आप इतनी बड़ी मुहिम छेड़ रहे हैं आपने इतना बड़ा अपने सर पे कर्तव्य प्रायणता का ये लिया हुआ है भार भगवान आपको इस कार्य में सफल करे शिवश सबका आभार सबका आभार जय श्री राम सभी को

01:26:36:24 [संगीत]

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 1:26:41 · 04 Sep 2026

Brahma Kumaris 7-Day Course Day-1 | Ex-BK Neelima Sharma | Hindu Alert

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