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00:00:01:28 [संगीत] हुई भारत वालों की बात भारत से बाहर चलते हैं इस्लाम धर्म में जहां मूर्ति पूजा नहीं है मक्का में काबा का पवित्र पत्थर है जिसको कहते हैं काबा का पवित्र पत्थर संग अस्वद ये पवित्र पत्थर के पीछे कहानी है कहानी ये है कि पहले आगे थोड़ा आगे बढ़ा दीजिए इतना ज्यादा मैं सुन नहीं परंतु जब मोहम्मद पैगंबर साहब आए तब उन्होंने कहा अल्लाह एक है। हां अल्लाह एक है। काफी मतभेद हुआ। मोहम्मद पैगंबर साहब को मदीना भेज दिया गया कि वहां जाकर ये प्रचार कीजिए। वहां प्रचार करते रहा अल्लाह एक है। अल्लाह है। धीरे-धीरे लोग उस विचारधारा से जुड़ते गए। जब काफी मात्रा में लोग इकट्ठे हो गए। पुनः मक्का आए। अल्लाह एक है। काफी मतभेद लड़ाई झगड़ा हुआ। उस समय कहा जाता है एक आकाशवाणी हुई कि आप लड़ाई झगड़ा मत करो मुझे इसी स्वरूप में याद करो और ऊपर से यह पवित्र पत्थर गिरा था और उसकी स्थापना की गई और तब से लेकर के ये मान्यता है कि जीवन में एक बार ये पवित्र हम जी हेलो
00:01:18:00 जी जी बोलिए बोलिए आपने जो अभी डी के उषा का पूरा वीडियो सुना है अभी मैं आपकी इसके ऊपर पत्री के क्या बोला रिएक्शन चाहूंगा आपका क्या बोल रहे हैं जो आपने बी के उषा का वीडियो सुना है अभी आपने एक बार एक शब्द सुना पूरा सर आपका रिएक्शन उसके ऊपर टिप्पणी दीजिए अपनी मैं अपनी टिप्पणी कई बार दे चुका हूं। मैंने तो अभी-अभी कहा ना कि यह जिस तरीके से इस्लाम को ग्लोरिफाई कर रहे हैं और सनातन के साथ मिक्स करने की कोशिश कर रहे हैं। हम लोग जो कार्य कर रहे हैं ना हम लोगों का कार्य यह है कि सनातन के जो वास्तविक सिद्धांत है वो लोगों को पता चल जाए जिससे कि उन सिद्धांतों के कारण हम लोग अपने अस्तित्व और आदर्श की रक्षा कर सके। अब लोग कहते हैं कि आप जो है बीके के बारे में बोलते हो, इस के बारे में बोलते हो, आर्य समाज के बारे में बोलते हो। हम इसलिए बोलते हैं कि अगर सनातन के वास्तविक और मजबूत सिद्धांत लोगों को ज्ञात नहीं होंगे तो हम लोग बिखरे रहेंगे। अब जैसे ये सनातन के साथ इस्लाम को मिला रही हैं। इनको लगता है इन्होंने कुछ नहीं किया। मैं कहूंगा ये बहुत बड़ा ऑफेंस है। यह बहुत बड़ा ये बहुत बड़ा अपराध है। और अभी कुछ दिन पहले
00:02:33:03 एक बाबा जी आए थे मेरे चैनल पर। उन्होंने मुझसे कहा था कि ये अरे भाई इतना ज्यादा क्यों किसी के बारे में बात बताना और वो लोग कोई मारधा मारकाट थोड़ी ना कर रहे हैं। मैंने कहा भाई वो मारकाट नहीं कर रहे हैं। वो लोगों की वैचारिक हत्या कर रहे हैं। वैचारिक हत्या का एक मैं आपको क्या कहते हैं? एक एग्जांपल बताता हूं मैं अभी। जैसे कि हमारे यहां पर हम लोग बहुत लड़ते मरते हैं। हमारे कई हिंदुत्ववादी ऐसे लोग हैं जो लव जिहाद से लड़ रहे हैं या कई सारे दल बने हुए हैं जो लव जिहाद का विरोध कर रहे हैं और बहुत युद्ध स्तर पर लगे हुए अपने जान माल के लिए जान माल को हाथ में लेकर के लड़ रहे हैं। इस इस क्रम में उन्हें कई बार जेल की सलाखों का मूवी देखना पड़ जाता है। कहीं पर मारपीट हो जाती है। कहीं भागदौड़ अपनी जिंदगी को दाव पर लगा के अपने जो अपनी मातृशक्तियां है सनातन धर्म की जो सनातन धर्म का जो स्त्री धन है उसको बचाने के लिए प्रयासरत हैं लगातार ठीक है मगर इस एक स्टेटमेंट ने इस्लाम को सनातन के साथ मिलाने वाले स्टेटमेंट ने कितना बड़ा अपराध किया है कितनी बड़ी वैचारिक हत्या की है वो मैं आपको बताता हूं हमारे यहां कहा गया है कि रघुकुल
00:03:48:07 रीत सदा चली आई प्राण जाई पर वचन ना जाई है है ना? और अगर यह तो कहा गया रामचरितमानस में और अगर वाल्मीकि रामायण के आधार पर देख ले तो इसका जो संदर्भ आएगा वो आएगा रामो दुरनाभि भाषेते जब माता कैकई के पास श्री रामचंद्र जी पहुंचते हैं जिस समय कैकई ने कैकई माता ने अपना वर मांगा था कि राम को आप 14 साल के लिए वनवास भेज दो और दशरथ जी वहां रो रहे थे तो वहां श्री रामचंद्र पहुंचते हैं और वह कहते हैं कि पिताजी क्यों रो रहे हैं? मुझे बताइए तो वह कहती हैं कि पिताजी ने मुझे एक वरदान वो वर दिया था वचन दिया था और आज मैंने वह वचन इनसे मांग लिया है तो उसकी पूर्ति ना कर पाने की स्थिति में अपनी जो क्या कहते हैं उसको जो वो हेल्पलेस हो रहे हैं इस समय है ना असहाय असहाय होने के कारण वो उसको इस तरह से रो करके दुख प्रकट कर रहे हैं तो श्री रामचंद्र जी ने कहा आप मुझे बताइए मैं आपके मैं आपका वो वचन पूरा करूंगा पिताजी का आप मुझे बताइए तो उन्होंने ने कहा रहने दो राम तुमसे नहीं होगा। वो दोतीन बार बोला राम जी ने कि भाई मुझे बताइए माता जी मुझे बताइए मैं करूंगा पिताजी ने कौन सा वचन दिया था आपको? तो वो कहती है तब रामचंद्र जी कहते हैं स्ट्रांग शब्दों
00:05:03:10 में मैं रघुकुल का वंशज हूं। रघुकुल वाला हूं मैं। रामो दुरनाभि भाषेते। राम दो प्रकार की बातें नहीं करता। इसका अर्थ बहुत बड़ा है, विशाल है। इसका अर्थ है जिसको हमने बहन कह दिया वह हमारी बहन है। जिसको हमने मां कह दिया वह हमारी मां है। जिसको हमने बेटा कह दिया वो हमारा बेटा है। हो सकता है कि हम उसके साथ पूरा का पूरा यथासामर्थ्य जो व्यवहार है वो ना कर पाए। मगर हमारी जो उसकी हम अवेलना भी कभी नहीं करेंगे। जैसे होता है ना कि जैसे हमने किसी बेटे को गोद ले लिया या फिर किसी के प्रति बेटे की दृष्टि रख ली या फिर किसी कन्या के प्रति बहन की या मातृत्व की या बेटी की दृष्टि रख ली। हो सकता है हम उसका कन्यादान ना करा पाए। हमारे पास धन नहीं है। हम अपनी बेटी का जो हमारी सगी बेटी है उसका ही कन्यादान हम करा पाए और हमारे पास इतना सामर्थ्य ना हो कि हम उसकी शादी में वह जो धन इत्यादि है वह खर्च ना कर पाए। तो यह होती है विधि। हो सकता है हम विधि का आलंबन ना ले पाए। मगर जो निषेध है उसका उल्लंघन तो हम नहीं करेंगे ना कि बहन के साथ यह वाला व्यवहार नहीं करना है और अगर हमने किसी को बहन कहा है तो हम इस बहन के रिश्ते में जो मर्यादा बताई गई है निषेध यह नहीं करना है उसका उल्लंघन
00:06:18:16 नहीं करेंगे एक सिद्धांत है विधि निषेध में कि विधि का आलंबन हो ना हो आपके पास सामर्थ्य नहीं है विधि का आलंबन नहीं ले पा रहे कोई बात नहीं चल जाएगा निषेध का उल्लंघन नहीं होना चाहिए जो मना किया गया उसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए क्यों क्योंकि निष निषेध के उल्लंघन के लिए प्रयास चाहिए होता है। अगर प्रया निषेध का जब आप उल्लंघन कर रहे हैं तो आप प्रयास पूर्वक वो अपराध कर रहे हैं। विधि का आलंबन ना लेने में प्रयास नहीं चाहिए। आपने कुछ नहीं किया। विधि का विधि का आलंबन नहीं ले पाए कोई बात नहीं। मगर निषेध का उल्लंघन का मतलब है आपने प्रयास पूर्वक धर्म विरुद्ध जाने का प्रयास किया है। जानबूझकर तो निषेध का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। तो अब हमारे यहां बता दिया गया कि रघुकुल ही सदा चली आई। प्राण जाए पर वचन ना जाए। बहन का मतलब बहन, माता का मतलब माता और पुत्र का मतलब पुत्र, पिता का मतलब पिता। अगर हमने किसी से कह दिया तो हम भले ही उसके जो जितने कर्तव्य बताए गए हैं उस अमुक अमुक संबंध के लिए वो सारे कर्तव्यों का हम निर्वाह ना कर पाएं। कोई बात नहीं। मगर उस उस अमुक अमुक संबंध में जो निषेध बताया गया है कि यह काम तुम्हें नहीं करना है। तो उस निषेध का हम उल्लंघन कभी नहीं करेंगे। मगर वहां क्या बताया गया है? कुरान में कि आपने किसी को मुख से कह भी दिया कि तुम हमारी
00:07:33:18 माता हो, तुम हमारी बहन हो, तुम हमारे बेटे हो। है ना? फिर भी उसके उलट जाकर के आप व्यवहार वहां पर कुरान के अनुसार करने की वहां पर अलऊ किया गया है। तो अब क्या होगा? जब एक सामान्य बालिका है हमारे यहां की किशोरी है युवा है और उसको हम जब इस तरह के स्टेटमेंट आते हैं कि जो है ईश्वर अल्लाह एक है और इस्लाम में भी सनातन है इस्लाम और सनातन एक है। जब इस तरह के स्टेटमेंट आते हैं तो यह किस तरह से कितना बड़ा अपराध है वो मैं आपको बता रहा हूं कि एक सामान्य जो लड़की होती है जो जो बी के उषा को धर्म को जानने वाली के रूप में देखती है जो बी के उषा को एक स्पिरिचुअल लीडर के रूप में देखती है सनातन का मर्म बताने वाली के रूप में देखती है तो वो जब यह सुनती है कि ईश्वर अल्लाह एक है कुरान और सनात वो कुरान और गीता एक है और जो है सनातन और इस्लाम एक है तो उसके मन में एक पर्सेक्टिव तैयार होता है कि हमारे यहां पर रकुल रीत सदा चलियाई सिखाया गया हमारे भाई को है ना रामो विग्रहान धर्म हमारे यहां पर धर्म है कि जो बात बोल दी सो बोल दी उसके उससे हम उलट नहीं जाएंगे और वो इसी पर्सेक्टिव से इसी ऑब्जरर्वेशन से इसी दृष्टि से
00:08:48:19 वो इस्लाम को मानने वालों को भी देखने लगती है कि अगर अगर इस्लाम और हिंदूइज़्म एक है इस्लाम और सनातन एक है तो इसका मतलब इनके यहां पर भी वही वाला मामला होगा कि रघुकुल री सदा चली जाई प्राण जाई पर वचन ना जाई ऐसे में वहां वाला व्यक्ति यदि द्वेष वश अगर वहां वाला व्यक्ति द्वेषवश हमारे यहां की कन्या को यह कह देगा कि तुम हमारी बहन हो मैं तो तुम्हें बहन मानता हूं जबकि वहां पर कहा गया अगर तुमने किसी को बहन कह दिया जरूरी नहीं है उसके साथ बहन का निर्वाह ही करो वो वहां वो अपना धर्म निभा रहा है वो अपने धर्म पर उसको जो बताया गया है उसके यहां के नियमों पर वो उसके यहां वो नियम है हमारी लड़की समझती है पलटेगा नहीं हमारी बिटिया समझती है। यह अपनी जुबान से नहीं पलटेगा क्योंकि इस्लाम और सनातन एक है। ईश्वर अल्लाह एक है। कुरान और गीता एक है। तो क्या होता है इसका नतीजा? एक दिन वो बिटिया जो है हमें 35 टुकड़ों में प्राप्त होती है। तो इस 35 टुकड़े का मूल में वास्तविक जिम्मेदार कौन हुआ? वैचारिक हत्यारा जिसने वैचारिक हत्या की। जिसने उस बिटिया को ये सोचने पर मजबूर कर दिया। उस बिटिया के मन में ये डाल दिया कि इस्लाम की फिलॉसफी इस्लाम के नियम सिद्धांत और हमारे सनातन की फिलॉसफी सनातन के नियम सिद्धांत एक
00:10:03:22 है। तो मैं कहूंगा कि वो 35 टुकड़े व्यवहारिक रूप से जिसने किए वो तो है ही है गुनहगार मगर उसमें असली गुनहगार वो व्यक्ति है जो इस तरीके से विचारों की हत्या कर रहा है। गलत विचार प्रस्तुत कर रहा है। सनातन के नाम से राम के नाम से मोहम्मद के जो आइडियोलॉजीस है राम के नाम से जो मोहम्मद की शिक्षा का प्रचार प्रसार कर रहा है वो इसके मूल में है वैचारिक हत्या करने वाला [संगीत]
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ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय अथवा हिंदुओं का वैचारिक हत्यारा
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