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00:00:02:16 मेरा प्रश्न यह

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→ Used in: B · Live क्या गीता का ज्ञान देने वाला मोक्ष नहीं देगा at 6:21 ↗

00:00:03:25 रहेगा। पहला तो मैं यह प्रमाणित करूंगा। उसमें प्रश्न नहीं है। प्रमाणित करूंगा कि गीता ज्ञान देने वाला जो ईश्वर है वो मोक्ष नहीं देता। यह गीता में ही प्रमाण है। दूसरा प्रश्न आपसे यह है कि गीता ज्ञान देने वाला प्रभु वो राक्षस स्वरूप क्यों है? जीवों का भक्षण क्यों करता है? और वह क्रूर क्यों है? उसका जो स्वभाव है वह क्रूरता वाला क्यों है? यह आपसे प्रश्न है मेरा। पहले आप अपनी बात वो जो पहली वाली है वो साबित करो।

00:00:41:27 पहली वाली कौन सी साबित करूं? जो आपने ये कहा कि मैं ये साबित करूंगा कि गीता ज्ञान देने वाला जो है वो मोक्ष नहीं देगा। आपने प्रश्न पूछा था। मैं प्रश्न कहिए तो मेरा प्रश्न पहला यही है कि वो क्रूर क्यों है? दूसरा प्रश्न अरे भैया मोक्ष नहीं देता है आप कैसे सिद्ध करेंगे मोक्ष नहीं देता है ये आप कैसे सिद्ध करेंगे मोक्ष नहीं है कैसे सिद्ध करेंगे गीता से गीता से गीता से इसके लिए इसके लिए हम जाएंगे गीता अध्याय दो में और गीता अध्याय नौ में

00:01:23:03 गीता अध्याय दो का कौन सी कौन सी प्रश्न की छपी गीता है आपके पास? मेरे पास गीता गोरखपुर वाली है। ये छोटी जो गुटखा आती है ₹2 वाली। अच्छा तो ये कैसे आई आपके पास भगवत गीता? आपकी आवाज कट रही है। कहने का तात्पर्य यह है कि आप गीता से गीता अरे मैं गीता प्रेस गोरखपुर वालों ने दी है मुझे। मैं मैं बता प्राप्त हुई है। मुझे मैं मैं अपनी बात पूरी कर लूं। कि कहने का तात्पर्य यह है कि आप गीता नामक शास्त्र से सिद्ध करेंगे कि गीता का ज्ञान देने वाला मुक्ति दाता नहीं है। ठीक है? आप आपकी आवाज कट कट के आ रही है। आपके इंटरनेट में प्रॉब्लम है। इंटरनेट में प्रॉब्लम है आपके। मेरे में नहीं है।

00:02:37:13 एक सेकंड नेटवर्क स्लो है आपका लगता है। आ रही है आवाज? हम हां तो मेरा यही कहना है गीता प्रेस गोरखपुर वालों ने दी है मुझे और दुकान से खरीद के लाया हूं मैं। हम गीता प्रेस के पास कहां से आई है वो? गीता प्रेस के पास कहां से आई? अब ये मुझे नहीं पता उनके पास कहां से आई।

00:03:14:19 वो तो वहीं जाके तहकीकात करनी पड़ेगी। तो आपको यह नहीं पता है कि गीता ब्रश के पास कहां से आई है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कहां से आई है। हां आप है ना थोड़ा सा प्रश्न गलत पूछ रहे हो कि गीता का ज्ञान किसने दिया ये ये पूछोगे तो तो मैं बता सकता हूं और इसके रचयिता कौन है ये बता सकता हूं मैं ये कह रहा हूं कि लेकिन आई कहां से ये ये नहीं बता सकता मैं ये नहीं बता सकता इसका मतलब ये कहां से इसका मतलब ये तो सिद्ध हो गया कि रामपाल यानी कि आपके पास जो गीता का ज्ञान आ रहा है गीता के श्लोक और उसका अर्थ आ है वो रामपाल गीत है ये आपको नहीं पता है गीता प्रेस गोरखपुर वाले जो अनुवाद है उनको मानते हो ना आप मैं मैं अपनी मैं बात करूंगा मैं बात करूंगा मगर फिलहाल तो बात ये हो रही है कि रामपाल रामपाल जी कह रहा हूं मैं फिलहाल क्योंकि भाई आपकी रामपाल के प्रति श्रद्धा है तो मैं फिलहाल रामपाल जी कह रहा हूं रामपाल जी के पास गीता का ज्ञान कहां से आया गीता के श्लोक कहां से आए आए आपको नहीं पता है कहां से आए

00:04:32:12 कहां से आए मतलब उन्होंने गीता प्रेस गोरखपुर से दुकान गोरखपुर वाली दुकान से खरीदी होगी अच्छा गीता प्रेस गोरखपुर की दुकान से खरीदी मतलब गीता में क्या लिखा है और क्या नहीं लिखा है इस विषय में रामपाल जी के लिए गीता प्रेस प्रमाण है। गीता प्रेस प्रमाण हो गई ना? गीता प्रस प्रमाण मतलब कि इसमें यह श्लोक लिखा है तो मैं मानता हूं कि गीता प्रेस ने सही लिखा है वो श्लोक जरूरी नहीं है अगर प्रमाण नहीं मानेंगे तो हो सकता है कि वहां पर भगवान ने कुछ और कहा हो अर्जुन ने कुछ और कहा हो गीता प्रेस वाले कुछ और छाप रहे हो तो गीता प्रस से जब वो मान रहे हैं कि ये गीता प्रस से जो गीता है ये वही गीता है जो कृष्ण भगवान ने अर्जुन को कही थी तो इसका मतलब रामपाल के लिए ये बता लीजिए आप प्रमाण किसको मानते हैं? तर्क वितर्क कर रहे हो। बेकार की बहस नहीं है। बहुत आवश्यक बहस है। और इसमें मैं आपके पॉइंट पर जल्दी आ रहा हूं। एक हमारा कार्य केवल आपको निरुत्तर करना नहीं है। हमारा कार्य जनता के समक्ष तथ्यात्मक तार्किक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है। अपने सनातन को जानने के लिए कि वो कौन

00:05:47:15 सा दृष्टिकोण उन्हें रखना चाहिए। तो आपने कहा कि रामपाल जी जो है वह भगवत गीता ले आते हैं गीता प्रेस से तो इसका मतलब रामपाल जी के लिए गीता के विषय में गीता प्रेस गोरखपुर प्रमाण है। मैं यानी वो मानते हैं यानी यानी मैं बता दे रहा हूं जो आपके प्रश्न का उत्तर दे रहा हूं। मैं अथवा मेरे गुरु जी जो मानते हैं वही मैं मानता हूं। मेरे गुरु जी का यह कहना है कि ये गीता का जो ज्ञान है वह काल ब्रह्म ने बोला है। जो गीता में सीधे स्पष्ट लिखा हुआ है वह अपने आप को ब्रह्म बता रहे हैं और अपना मंत्र ओम बता रहे हैं। दूसरी बात इसकी जो रचनाकार लिखने वाले हैं वो वेदव्यास जी हैं। यानी कि जो गीता का ज्ञान देने वाला ब्रह्म और लिखने वाला वेदव्यास जी और जिस चीज को प्रमाण मानकर हमारे गुरु जी ने अपनी स्वयं की पुस्तक लिखी है गीता मैं थोड़ा सा इंटरप्ट करूंगा इंटरप्ट करूंगा देखिए बहुत अच्छे से बात हो जाएगी मुझे बहुत लंबा महिमा मंडन या प्रवचन इत्यादि नहीं चुनना है यहां पे बात ये है कि रामपाल जी मैंने

00:07:02:19 पूछा मैंने आपने काफी लंबा बोला है और आपने व्यर्थ का बोला है वो मैं सिद्ध कर रहा हूं कैसे व्यर्थ का बोला है रामपाल जी क्या मानते हैं गीता को गीता ज्ञान देने वाला कौन है या उसको किसने लिखा था मैं मेरा प्रश्न ये नहीं है वो भले ही काल ने बोली मगर वो जो श्लोक वहां पर बोले गए हैं महाभारत काल में वो रामपाल जी को कैसे प्राप्त हुए तो आपने कहा वो गीता प्रेस गोरखपुर से प्राप्त हुए।

00:07:35:01 उनको कैसे पता कि काल ने यह बोला था या नहीं बोला था? अगर वह इस विषय में गीता प्रेस पर आश्रित है तो गीता प्रस उनके लिए प्रमाण हुआ कि गीता प्रेस सच बोलती है। जो काल ने वहां पर बोला था आपके अनुसार वो काल ने बोला था। तो काल ने जो बोला है एज इट इज वो संस्कृत के श्लोक गीता प्रस ने आपको छाप कर दिए हैं। इस विषय में रामपाल जी के लिए गीता प्रेस प्रमाण हो गई ना आप नेटवर्क इशू आ रहा है थोड़ा सा हम

00:08:20:12 [हंसी] हम नेटवर्क इशू नहीं है। मुझे लग रहा है कि आपका फोन जो है ना उसमें मेमोरी ज्यादा उभर गई है जिसके कारण वो ये वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग वो सहन नहीं कर पा रहे हैं।

00:08:56:28 ऐसा होता है नेटवर्क इशू आ रहा है। आपको तो आपको नेटवर्क नेटवर्क वाले एरिया में जाता हूं। हां जाइए जाइए। नेटवर्क वाले एरिया में जाकर एक बार आप लोग समझ रहे होंगे मैं किस तथ्य पर प्रकाश डालना चाहता हूं। आप लोगों को समझाना चाहता हूं कि

00:09:42:26 हर व्यक्ति को शास्त्रज्ञ या शास्त्रों को जानने वाला होने की आवश्यकता नहीं है। यदि वो अपने परंपरा विषयक सिद्धांत को समझ जाए। आपको लोगों को केवल ये समझाना है ना कि परंपरा क्या होती है और किस लिए आवश्यक है। कहां तक उनको सारे शास्त्रों की नॉलेज आप देंगे। कोई भी आकर के विधर्मी आपके शास्त्रों का खंडन करने लगेगा। आपके सिद्धांतों का खंडन करने लगेगा। आपके धर्म का खंडन करने लगेगा और वहां पर वह कुछ ना कर पाए। एक साधारण व्यक्ति तो वहां पर आपको कौन बचा सकता है? बहुत लंबी लड़ाई लड़ने की जरूरत कहां है?

00:10:35:13 हां बताइए आप हां तो काल ने आपके हिसाब से महाभारत काल महाभारत का जो समय था उसमें काल नामक कोई एंटिटी है जो राक्षस जैसी है और उसने भगवत गीता का ज्ञान दिया वो ठीक है अभी फिलहाल के लिए दुर्जन तोष मान लेते हैं कि उसी ने दिया है जो रामपाल का मानना है वो सही है मैं ये कह रहा हूं कि वो जो श्लोक है उसने क्या कहा था संस्कृत में क्या नहीं कहा था वो श्लोक आपको आपके रामपाल जी को कहां से प्राप्त हुए? आपको प्राप्त हुए मान लो गीता प्रस से। आपके रामपाल जी को भी प्राप्त हुए गीता प्रेस से। इसका मतलब काल ने क्या कहा और क्या नहीं कहा? इस विषय में गीता प्रेस रामपाल दास के लिए प्रमाण है। गीता प्रेस गोरखपुर

00:11:23:27 मेरे लिए भी प्रमाण है। नहीं। तो जब हम किसी को प्रमाण कहते हैं तो इसका मतलब यह होता है कि हम यह कह रहे हैं कि नहीं यह झूठ नहीं बोलता अगर मेरे लिए प्रमाण है तो हम मेरे लिए सनातन धर्म के जितने भी शास्त्र है क्योंकि मैं रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले एक हो जाने दीजिए एक मिनट एक मिनट एक मिनट अरे एक मिनट सुन तो लीजिए अब इससे पहले संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले मैं हिंदू ही था और मैं सारे शास्त्रों को मानता था। अरे मेरे भाई उन्होंने मेरे शास्त्रों में

00:12:09:03 आप मैं आपने जो क्लेम कर दिया कि मैं मैं उसको प्रमाण मानता हूं। मैं उस क्लेम को काउंटर कर रहा हूं ना। सुनिए ना मैं उस क्लेम को मैं उसको प्रमाण अरे सुनिए मैं मैं भी इनको प्रमाण मानता हूं। इसकी हर को प्रमाण मानता हूं। कर दिया। अब आपको और ज्यादा बताने की आवश्यकता कहां रह गई? कर तो दिया आपने। आप मानते हैं प्रमाण। ठीक है। बस बस एक बात शुरू होती है। बात यहां पे शुरू होती है। एक मिनट एक मिनट एक मिनट। बात यहां पे शुरू होती है। बात ये शुरू होती है कि अ रामपाल दास प्रमाण मानते हैं गीता प्रेस को। यानी कि गीता प्रेस झूठ नहीं बोलती। काल ने जो जो कहा एज इट इज छाप के दिया है गीता प्रश्न

00:13:01:01 यही तो मानना पड़ेगा में लिखा हुआ है हां हां हां मैं उसके लिए थोड़ा सा बोलूंगा कि गीता मैथ वालों ने जो चीज कोष्टक में लिखी है वो उन्होंने अपनी तरफ से लिखी है बाकी के जो संस्कृत के अनुसार है वो ठीक है अच्छा ठीक है जो चीज कोष्टक में यानी कि गीता प्रेस अज्ञानता वश कुछ कर सकती है बता सकती है आपको धर्म का जो आपके लिए प्रमाण है वोक में जो आपके लिए प्रमाण

00:13:38:07 मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं जो आपके लिए प्रमाण है वो कोष्क में झूठ बोल सकता है ना हां बिल्कुल हां यानी कि कोष्क में वो झूठ बोल सकता है। फिलहाल मैं आपको बता दूं विष्णु पुराण का अर्थ करते समय रामपाल ने बिना कोष्क के माना है कि जो गीता प्रेस है उसने यहां पर अनुवाद गलत कर रखा है। यानी कि बिना कोष्क के भी गीता प्रेस वाले रामपाल दास के अनुसार झूठ बोल सकते हैं। अज्ञानता कर सकते हैं।

00:14:17:03 मेरे सुनिए मेरे अनुसार गुरु जी के अनुसार मेरे अनुसार मतलब आप जो है रामपाल को नहीं मानते इतने अंश में जितने अंश में वो गीता प्रेस को बिना कोष्क के झूठ बोलने वाला या अज्ञानी कहते हैं कहते हैं फिलहाल में आपकी अरे फिलहाल में आपकी मेरे से ज्ञान चर्चा हो रही है अरे भाई तुमने अभी क्लेम किया कि रामपाल दास जो जो मानते हैं मेरे से चर्चा हम हां तो उनकी उनकी उनसे चर्चा नहीं हो रही ना आपकी उनसे जब चर्चा होगी तब आप उनसे बात करना फिलहाल मेरे से चर्चा की है पर्सनली मैं जो मानता हूं उसे मैंने आपको बता दिया एक मिनट अमित दास मैं तुमसे चर्चा कर रहा हूं रामपाल को मैं इस समय उस समय उस फिलहाल मैं चर्चा ये कर रहा हूं ज्ञान देने वाला जो प्रभु है इंटरनेट अटक रहा है मोक्ष नहीं रहा है उसका प्रमाण इंटरनेट अटक रहा है आपका? मैं इंटरनेट अटक रहा है। गीता का इंटरनेट चिपक चिपक के आ रहा है। अरे जो बता रहे हो वो बिगड़ रहा है ना मामला बताते हुए?

00:15:34:28 मैं मैं ये मैं ये कह रहा हूं कि गीता का फिलहाल मेरी चर्चा इस पर नहीं है कि उसको सही साबित करना है कि किसको गलत करना है। ले जिस को लेकर के क्लेम करने वाले हो जिस जिस शास्त्र को लेकर के तुम क्लेम करने वाले हो उसी शास्त्र को लेकर के मैं उसकी प्रमाणिकता के विषय में तुमसे बात कर रहा हूं ना

00:16:09:08 ठीक है तो उसकी प्रमाणिकता के विषय में आपके जो रामपाल है वो वो यह नहीं मानते कि गीता प्रेस अपनी किताबों में सच सच लिखती है। वो यह मानते हैं कि गीता प्रेस झूठ भी लिखती है। हम गीता प्रेस पर आश्रित नहीं है। उनकी मैं अपनी बात उनकी मान्यता में उनकी मान्यता में अभी ये क्लियर हुआ ही नहीं। मैंने उनको मुख से सुना ही नहीं कि क्या गलत है क्या सही है। अच्छा मतलब अभी आपको अभी आपको पता नहीं है रामपाल दास सही है कि गलत है। आपने ये कहा कि गीता प्रेस वालों गलत लिखते हैं। मैंने उनके मुंह से सुना नहीं ना।

00:16:48:26 तो विष्णु पुराण का जो वो क्या कहते हैं? वीडियो दिखाते हैं कि भैया इतने अंश में वह गलत है। जहां पर विष्णु पुराण में वह महादेव को काल बोला गया है। हम विष्णु पुराण के शिव पुराण में विष्णु पुराण विष्णु पुराण का अच्छा विष्णु पुराण में लिखा है ना वो विष्णु पुराण है समय विष्णु पुराण का अर्थ करते समय रामपाल दास ने यह माना है कि यहाँ पर जो है उन्होंने गलत अर्थ कर दिया है हां तो उनका मानना है ठीक है सही बात है तो सही मानना है तो इसका मतलब गीता परस्पर विश्वास नहीं किया जा सकता कि वह आपको सही सही श्लोक देगी क्योंकि वह अमुक अमुक जगह कहीं-कहीं पर झूठ भी बोल रही है अज्ञानता वश या फिर किसी और के कारण

00:17:43:27 अभी अभी आपको अभी आपको चर्चा डिवाइड करनी है या टॉपिक पे करनी है? अरे भाई इसको बताओ तो गीता प्रेस पर विश्वास है कि नहीं है? अरे गीता प्रेस गोरखपुर वाली जो गीता भगवत गीता है मैं ले जा रहे हो जगह भी झूठ बोल सकता है आप विश्वास मानते हो गीता गीता प्रेस विष्णु पुराण में और कोष्क में झूठ बोल सकती है तो वो अन्य जगह श्लोकों को भी बदल सकती है श्लोक भी दूसरे लिख सकती है हाँ तो ये ऐसा ऐसा बोलो ना कोष्टक में जब उन्होंने इशारा कर दिया है ये अपनी तरफ से लिखा हुआ है ऐड करके। बाकी उन्होंने

00:18:30:21 एक मिनट एक एक मिनट उन्होंने ये कहां लिखा है कि कोष्क में मैं अपनी तरफ से लिख रहा हूं। बुद्धिमान व्यक्ति समझ जाता है। कोष्टक में जो लिखा हुआ होता है वो उसका अपनी तरफ से लिखा रहता है। कोष्टक में लिखने का मतलब होता है कि वहां पे लिखे गए भाव को और अच्छे से समझाना। हम्म हम्म बिल्कुल। उसमें ये नहीं होता है कि मैं अपनी ओर से लिख रहा हूं। ये ये आवश्यक नहीं है। वहां पे जो चीज समझ में आ रही है। वहां पे जो चीज कठिनता से समझ में आ रही है उसका एक सरलार्थ कोष्क में लिख दिया। हां वो वो सरलार्थ अपनी तरफ से ऐड किया है ना। अपनी ओर से कहां किया? उसी का अर्थ लिखा ना उन्होंने तो। उन्होंने अपनी जानकारी में हम उसी का अर्थ लिख रहे हैं। अब सुन अब सुनिए। अब जैसे कोई कार्य है उस कार्य करने में

00:19:25:10 कर दिया। मैं इसको और क्लियर कर देता हूं। जो वो श्लोक छाप रहे हैं वो अपनी बुद्धि विवेक से छाप रहे हैं कि नहीं छाप रहे हैं? अब मैं आपको एक एक मैं श्लोक दिखा देता हूं। इस श्लोक में क्लियर हो जाएगा। आपने कहा है कि सरलता है क्या? नहीं नहीं। आपको श्लोक दिखा देता हूं। इस श्लोक में क्लियर हो जाएगा। श्लोक क्यों दिखा रहा हूं मैं फिलहाल बात ये चल रही है बता रहा हूं मैं आपको मैं आपको ये कह रहा हूं कि जो वो अपने बुद्धि और विवेक से आप कह रहे हो कोष्क में लिखते हैं तो क्या वो जो श्लोक छापते हैं वो अपने बुद्धि और विवेक से नहीं छापते उसमें बुद्धि विवेक को साइड में रखते हैं अब साइड में रखे है या घर पे रखे वो तो मुझे पता नहीं लेकिन गीता अध्याय श्लोक 14 15 में आपको विश्वास नहीं जिस आपको विश्वास नहीं है उसकी छापी हुई किताब को आधार बना के आप दावे कैसे कर रहे हो यह सुनिए चर्चा खत्म कीजिए फिर जब विश्वास है नहीं है चर्चा खत्म नहीं है कि नहीं है खत्म कीजिए बेकार की बात कुछ नहीं होती

00:20:40:12 सुनो मेरे आप जैसे मुझे गुमराह करने का प्रयास कर रहे हो तो मैं गुमराह नहीं होऊंगा और [हंसी] आप फालतू बातें करेंगे आपको वाकई में निकाल दूंगा। आप यह स्वीकार करो नहीं है। आप चर्चा पे आओ। इस बात का नहीं है। अब आपको भ्रमित करने का नहीं है। आप चर्चा में आओ। नहीं आप भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हो। सीधा मेरा भ्रमित करना कहां पर सिद्ध होता है? कौन से शास्त्र के सिद्धांत से सिद्ध होता है? वो बताओ। चलो। तुम्हारे तुम्हारे तर्कों से सिद्ध होता है कि आप आप हमारा टॉपिक ये था कि गीता ज्ञान देने वाला जो प्रभु है वो मोक्ष नहीं तुम्हारा ये लिखा है तुम्हारे मन से मानी जाए

00:21:30:07 आपके मन से मानी जाए बातें अरे हमारे मन से कुछ मत मानो तो फिर एक ये क्लेम जो किया है कि आप भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हो इसके संबंध में शास्त्रीय सिद्धांत दो चलो तुम रामपाल दास की किताब से ही बता दो। [हंसी] सुनो आप आप है ना मैं आपको दे रहा हूं। मैं आपको सत्य की बात कर रहा हूं। आप इस संबंध में इस रामपाल दास की किताब से प्रमाण दे दो मान लूंगा। चलो इतनी छूट आप नहीं आप आप टॉपिक को छोड़कर दूसरे को जहां पे फसने लगो वहां पे अपने मनगढ़ंत बातें बोलने लगो। तो फसने वाली बातें कहां है? तो भ्रम भ्रमित कर रहे हैं आप मुझे। तो टॉपिक पे बातों का क्यों लग रहे हो? अरे तो आप ना सुनो जब मैं प्रमाण जब मैं प्रमाण दे रहा हूं। गीता ज्ञान दाता प्रभु स्वयं कह रहा है कि मैं मोक्ष नहीं देता तो आप मैंने क्या कहा है भाई साहब? उस सुनने की बजाय आप जिसको प्रमाण कह रहे हैं वो प्रमाण सिद्ध नहीं हो रहा ना?

00:22:45:20 आप जिसको प्रमाण कह रहे हो वो प्रमाण सिद्ध नहीं हो रहा। शुरुआत में आपने पूछा था कि पहले वाला जो प्रश्न है उसे सिद्ध कीजिए। आप जिसको प्रमाण कह रहे हैं वो प्रमाण सिद्ध शुरुआत में अपनी बातों से मत भागिए। शुरुआत में आपने कहा था कि पहले ये सिद्ध कीजिए कि गीता ज्ञान दाता प्रभु मोक्ष नहीं देता है। ये सिद्ध कीजिए। जब मैं सिद्ध करने लगा तो आप तर्क वितर्क पे आ गए कि गीता प्रेस नहीं है या नहीं आ रहा हूं। जब आप ये सिद्ध करने लगे तो आपने गीता प्रेस की गीता उठाई है। मैंने कहा क्यों उठाई? गीता प्रेस पे क्यों आश्रित हो? तो मैं अपनी दिखा रहा हूं। अपने गुरु जी की दिखाऊं। उसको मानोगे तो आपने मैं बताऊं मैं बता रहा हूं। गुरु जी के पास जो आई है वह भी गीता से आई आपने खुद कह दिया या तो आप कहते हैं कि गुरुजी के पास उनके गुरु से आई उनके पास उनके गुरु से आई गुरु परंपरा बताते तब हम सुनते सुनिए गीता का बहुत से गुरुओं ने बहुत से संतों ने अपने अलग-अलग अनुवाद किए हैं। ऐसी बात नहीं लेकिन जो ज्यादातर है ज्यादातर संख्या में लोग गीता प्रेस गोरखपुर की प्रमाण मानते हैं क्योंकि ये सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। [हंसी]

00:24:02:16 अरे सोच तो लिया करो क्या बोल रहे हो कहां मान्यता प्राप्त है सरकार मान्यता देगी कौन सी चीज प्रमाणिक है कौन सी नहीं है बिल्कुल भाई अब सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है आपको इसकी नॉलेज नहीं है अच्छा ठीक है रामपाल की रामपाल दास की किताबों की मान्यता कहां से प्राप्त है हम जब आप सरकार की मानते हो तो फिर सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है क्या रामपाल की किताबें? अरे हम रामपाल जी महाराज को ही प्रमाण मानते हैं। अरे तो जब सरकार नहीं मान रही है उनको प्रमाण तो तुम क्यों मान रहे हो? यानी कि सरकार माने या ना माने उनकी मान्यता में सुनो उनकी मान्यता को लेकर मैं मानूंगा क्या? यानी सरकार उनकी मान्यता को मैं मानूंगा। नहीं मेरी मान्यता मेरे पर निर्भर करती है। इसलिए मानते हैं क्योंकि सरकार प्रमाण मानती है। मैं क्या मानता हूं क्या नहीं मानता ये मेरे ऊपर निर्भर है। मैं गीता प्रेस को मानता हूं। ये मेरे ऊपर निर्भर है। मैं रामपाल जी को मानता हूं। ये मेरे ऊपर निर्भर है। ये किसीको कोई और तय नहीं करेगा। इसका कोई इन बातों का कोई उत्तर नहीं है। बस आपने माना है यहां से शुरू

00:25:17:20 करो कि भैया वो किताब में ये छपा है। बाकी मेरे पास इसका उत्तर नहीं है। प्रमाण ये बताइए भाड़ में आप आप ये बताइए आप गीता प्रेस को मानते हो? अरे मैं मैं तो मानता ही हूं ना मैं तुमसे पूछ रहा हूं तुम क्यों मानते हो? मैं तो इसलिए मानता हूं क्योंकि मेरे जो परंपरा प्राप्त आचार्य है उन्होंने कहा गीता प्रेस की गीता में सही सही श्लोक चल रहे हैं। सुनो हम जिसको मानते हो मैं उसी से प्रमाण दे रहा हूं। अरे मेरे भाई तो तुम तुम्हारे जो क्लेम है वो तो झूठे है ना। पहले ये तो स्वीकार मेरा सुन लो। मेरा छोड़ लो। मेरा छोड़ दो। आप जिसको मानते हैं मैं उसी से प्रमाण दे रहा हूं। ठीक है। अब बात ये आएगी कि मैंने जो लिखा है जो मैंने लिखा है उसके बारे में कोई और बताएगा कि मैं ही बताऊंगा कि मैंने क्या लिखा है। इसका अर्थ। तुमने जो लिखा है वो तुम ही बताओगे। कोई और क्यों बताएगा? तो मेरे गुरुओं ने जो व्यास जी से लेकर के यहां तक जो गीता लेकर के आए हैं उसका अर्थ बताया है कि गीता ज्ञान देने वाला जो है वो भगवान श्री कृष्ण जो है वो मोक्ष दायक है वो ले आ रहे हैं वो लिख रहे हैं वो गीता प्रेस को दे रहे हैं गीता छापो

00:26:33:22 अब तुम आकर के कह रहे हो कि तुमने जो लिखा है वो गलत उसका सही अर्थ मैं बता रहा हूं हम्म मतलब आपका ये कहना है कि जिन्होंने लिखा है। उन्होंने कह दिया श्री कृष्ण भगवान मोक्ष देते हैं। बस इतना काफी है। पढ़ने की आवश्यकता नहीं है। है मगर यदि उसका अर्थ यदि उसका अर्थ उन गुरुओं के विपरीत जा रहा है जिन्होंने लिखा है जिन्होंने परंपरा से आपको गीता दी है। यदि उसका अर्थ उन गुरुओं के विपरीत जा रहा है। एक मिनट एक एक मिनट भाई साहब एक मिनट यदि उसका अर्थ आपके हिसाब से उन गुरुओं के विपरीत जा रहा है जो जो गीता को लेकर के आ रहे हैं। तो आपको यह मानना पड़ेगा कि मैं गीता को प्रमाण नहीं मानता। मैं गीता को प्रमाण नहीं मानता। ये आपको कहना पड़ेगा। अगर अनुवाद को आप नहीं मानते तो आप भी प्रमाणित नहीं हुए। अरे मैं तो मानता हूं ना। मैं तुमसे पूछ रहा हूं। तो तुम अपने क्लेम को साफ करो कि गीता के आधार पर आप कुछ नहीं मानते हो। आपका आधार दूसरा होना चाहिए। ये कहना बंद करो कि मैं

00:27:48:26 गीता के कारण किसी को तत्वदर्शी मानता हूं। ये कहना बंद करो कि मैं गीता के कारण किसी को काल मानता हूं। ये कहना बंद करो कि मैं किसी को गीता के कारण कबीर मानता हूं। मैं ये कहना चाह रहा हूं। आप स्वतंत्र होकर के कहिए कि भैया कबीर भगवान है बिना गीता के। गीता को मानने का दावा करना झूठा है। ये बात है। तो मैं मैं इसी इसी बात के प्रति उत्तर में मैं यह जवाब दूंगा आपको। जैसे किसी भी अन्य धर्म के व्यक्तियों से जब चर्चा होती है तो मैं उनको स्पष्ट कह देता हूं कि भाई मैं इस चीज को मानता हूं। इसमें इसमें जो चीजें लिखी हैं उन बातों को मैं प्रमाणित मानता हूं। और जो अनुवाद किया है मैं अपने से खड़े हुए हो जिसकी सहाय से तुम यहां खड़े हुए हो वो तो नहीं मान

00:28:39:25 पर्सनली अपनी साइड से तो ये मानो कि अभी मुझे नहीं पता रामपाल सही बोलते हैं कि गलत बोलते हैं ये मानो मैं रामपाल जी महाराज की बात ही नहीं कर रहा अरे भाई तुम तो तुमसे हम बात क्यों कर रहे हैं फिर क्यों बात करेंगे फिर तुमसे हम हम गीता ज्ञान देने वाला जो प्रभु है का दावा कर रहे हो रामपाल के पक्ष को यहां पुष्ट करने नहीं आए हो तो हम क्यों तुमसे बात करें बहुत सारे लोग हैं जो हमारा विरोध करते हैं तुमसे हम क्यों बात करेंगे भाई एक सेकंड तुम्हारी क्या बात हुई थी कि हम ज्ञान चर्चा करेंगे और अपने ज्ञान चर्चा में ये सिद्ध करेंगे कि गीता ज्ञान देने वाला प्रभु है वो मोक्ष नहीं आगे बढ़ो के इस विषय में मेरे मेरे पास उत्तर नहीं है मैं आगे बढ़ना चाहता हूं ये बोल दो आगे बढ़ो नहीं इस विषय में मैं बात नहीं करना चाहता। मुझे सिर्फ यह बात करनी है कि गीता ज्ञान देने वाला नहीं देता। बात ना करने का कारण बताओ कि मेरे पास उत्तर नहीं है। कारण बताओ। कारण नहीं नहीं क्या क्या उत्तर मैं जरूरी मैं उत्तर देना ही नहीं चाहता उसका।

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00:30:04:16 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 30:07 · 12 Feb 2026

रामपाल को शास्त्र कहां से मिले?

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