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00:00:06:09 तो सभी को जय श्री राम। अभी हम आए हैं माघ मेले में और यहां पर इस का एक कैंप लगा हुआ है प्रयागराज स्कॉन का और मेरे साथ यहां पर एक ब्रह्मचारी हैं स्कॉन के। थोड़ा सा आप अपना परिचय दे दीजिए हमारे दर्शकों को परिचय। हरे कृष्णा। मेरा नाम विष्णुराज दास। मैं इस प्रयागराज से बिलोंग करता हूं। मैं पिछले ढाई साल से इस प्रयागराज मंदिर से कनेक्ट हूं और यहां मंदिर में रह के मंदिर परिसर में रह के भक्तों के साथ रह के भक्ति का अभ्यास कर रहा हूं और अपना पूरा प्रयास कर रहा हूं। जिससे अच्छे से भगवान का भक्ति और भगवान का जो दर्शन है, शास्त्र है उसको समझ करके अपने जीवन में भगवत कृपा को अनुभव कर सकूं और भगवत साक्षात्कार कर सकूं। जी जी बहुत अच्छा मतलब आप ढाई साल से ब्रह्मचारी हैं या इस ढाई साल से इस से जुड़े हैं या उससे पहले भी आप इस से जुड़े हुए थे? नहीं मुझे ढाई साल प्रॉपर ढाई साल ही हुआ इस से जुड़े हुए हैं। अच्छा उसी में आप एज ए ब्रह्मचारी डायरेक्टली एज ए ब्रह्मचारी ही कनेक्ट हुए हैं। नहीं नहीं पहले मैं एज अ सर्च करते हुए घूमते-घूमते आया था। ढूंढते हुए रिसर्च करते हुए कि

00:01:21:25 सुप्रीम ट्रुथ क्या है? परम सत्य क्या है? आखिर मृत्यु क्यों होती है? तो ये खोजते खोजते आया था। तो बाद में यहां पे आ के जब मुझे इसका आंसर मिला कि हम ये शरीर नहीं हम आत्मा है। शरीर का मृत्यु होता है। आत्मा का मृत्यु नहीं होता है। जब ये सारी सारी चीजें क्लियर हुई तो मैंने डिसीजन लिया कि हां मुझे एज अ ब्रह्मचर्य रहना चाहिए ताकि मैं इस जन्म मृत्यु जरादी वाला जो प्रॉब्लम है सबसे बड़ा प्रॉब्लम है। इससे बाहर निकल के भगवान के धाम जा सकूं। जहां पे जीवन शाश्वत है वहां जहां पे जन्म मृत्यु जरा व्याधि नहीं है। अच्छा मतलब क्योंकि आप आपको पता चला कि आप एक आत्मा है और आपकी जो है वो जन्म मृत्यु से आपकी मुक्ति हो जाएगी। यह कांसेप्ट आपको पता चला कि भगवान के धाम पहुंच के जो है आप क्लियर हो जाएंगे। तो इसमें प्रभु जी एक इसमें जो भगवान का कांसेप्ट है भगवान के धाम में पहुंचकर के ऐसा होगा तो एक भगवान के लिए एक बात आती है कि वो सर्वशक्तिमान है। है ना? तो भगवान के विषय में ऐसा क्या बताया गया कि मतलब आपको यह लगा आपको उनसे प्रेम हुआ जिसके कारण आपने सोचा कि मैं भगवान की भक्ति करके उनके धाम पहुंच के ये जो जन्म वो जन्म जरा मृत्यु वाली जो व्याधि वाली जो स्थिति है उससे उभ पाऊं। जैसे इस संसार में हम देख सकते हैं कि यहां पे जो

00:02:37:03 भी चीजें हैं वो क्षणिक है। टेंपरेरी है। आपको भी चीज अब जैसे अभी आप हैं आपका एज होगा कितना होगा? लगभग कितना आपका एज होगा? 36 36 बट आप यह सोच सकते हो कि एक समय आप जब 5 साल के थे आप ना पांच साल के छोटे बच्चे थे तो उस वक्त आपके आसपास जो एटमॉस्फियर था है ना और उसमें जब आप रह रहे थे तो आपके फैमिली आपसे बहुत प्रेम करते थे। आपके पेरेंट्स आपसे बहुत प्रेम करते थे। आपके घर वाले आपसे बहुत प्रेम करते थे। आपके आसपास के लोग आपको जानते थे। बहुत प्रेम करते थे। क्योंकि आपका बॉडी जो था वो छोटा था। है ना? इसलिए बहुत स्वीट और बहुत सॉफ्ट बहुत प्यारा था ना लेकिन आप देखिए जैसे-जैसे आप बड़ा बड़े होते चले गए आप पर्सन तो वही है लेकिन शरीर में डिफरेंस आया जी शरीर में डिफरेंस आने के आया जिसके कारण हम 5 साल के जब थे उस समय जो हम हैप्पीनेस एक्सपीरियंस किए थे वो उसके बाद वाले बॉडी में एक्सपीरियंस नहीं कर पाए करेक्ट ना यानी कि जो 5 साल के ऐज में हम थे उस समय जो हमको हैप्पीनेस मिला था जो प्रेम मिला था वो टेंपरेरी था ना उसके बाद ऊपर आके किया हुआ है या 15 साल 20 साल जैसे बॉडी बढ़ता गया बढ़ता गया तो हमने क्या एक्सपीरियंस किया कि हम पर्सन तो वही है लेकिन ये शरीर बढ़ता चला जा रहा है ऐसे

00:03:52:07 करते-करते 20 साल 25 साल फिर उसके बाद डेथ हो जाएगा ना तो यहां पे हमने जितना भी चीज एक्सपीरियंस किया हम पांच साल के थे तो दूसरा चीज एक्सपीरियंस किए दूसरा प्रेम एक्सपीरियंस किए थोड़ा बड़े हुए युवा अवस्था में तो दूसरा प्रेम एक्सपीरियंस किए दूसरा चीज एक्सपीरियंस किए अलग-अलग जैसे एज हमारा बढ़ता गया हम अलग-अलग चीजों को एक्सपीरियंस किए लेकिन हम चेक करेंगे कि हम पर्सन तो वही लेकिन ये शरीर और हमारा अनुभव ये बदलता गया। यहां पे जो भी चीजें हैं टेंपरेरी है। चाहे हम शरीर का देख लें शरीर भी छूट जाएगा एक दिन। ना जन्म हो रहा दोबारा होगा और मृत्यु हमारा होगा। मैं समझ गया मैं समझ गया। अब इसमें एक बात यह वैसे मेरा मुख्य क्वेश्चन नहीं है। वैसे एक जिज्ञासा आपने बोला है क्योंकि जन्म जरा मृत्यु व्याधि वाली बात तो जैसे आपने बोला मैं पांच साल का था तो तब जो एक्सपीरियंस था वो अब नहीं है। तो इसमें एक ऐसे ही एक जनरली एक प्रश्न आता है कि यहां से मुक्ति होकर के आप धाम जाएंगे। है ना? तो जो धाम जाएंगे आप तो यहां से पहले भी तो आप धाम में ही थे ना। हां। है ना? हम तो यहां मतलब यहां धाम में कुछ ऐसा था जो आपके पास नहीं था जिसके कारण आप यहां आए हो यहां से मुक्त हो के भी आप वहीं जाओगे तो फिर ये गारंटी कैसे ले सकते हैं कि आपको जो है वो नहीं आएगा

00:05:07:08 दोबारा वो जो प्यास थी बहुत अच्छा क्वेश्चन आपका है जी ये आपका जो क्वेश्चन है कि हम भगवान के धाम में पहले भी थे तो भगवान के धाम से यहां पे मतलब जैसे आपने बताया ना जो 5 साल में जो था वो अब नहीं है तो भगवान के धाम में भी तो आप ऐसे ही थे भगवान के धाम में हम शाश्वत थे, अमर थे। हमारा कोई भौतिक शरीर नहीं था। आपके आपके मन में कुछ ऐसी प्यास आई ना कि वो मुझे मिले। अज्ञानता जिसको बोलते हैं अज्ञानता। हमें इस भौतिक संसार का अनुभव नहीं था। अच्छा जैसे हम भगवान के धाम में थे। जैसे मान लीजिए एक बच्चा है। मेले में पिताजी के साथ में गया। पिताजी के साथ थे बहुत खुश है। ना अब वो जब मेले में या कहीं अलग-अलग जगह गया ना। मान लीजिए आग है वो आग में उंगली डालने का प्रयास कर रहे हैं। जैसे हम भगवान के धाम में थे भगवान के साथ खुश थे। हैप्पीनेस थे। पूरा एकदम ग्लिच में थे। किसी चीज का कोई कमी नहीं था। जन्म मृत्यु जरा व्याधि से परे थे। क्योंकि हमारा कोई भौतिक शरीर था ही नहीं वहां पे। मगर चित्त नहीं थे। नहीं नहीं भौतिक शरीर था ही नहीं हमारा कोई। क्योंकि हम तो भगवान के आत्मा थे। उनके अंश थे। उनके दास थे। उनके धर्म में उनकी सेवा कर रहे थे। लेकिन क्या हुआ कि हम इंडिपेंडेंट जैसे हुआ ना कि हम खुद ट्राई करना चाह रहे थे। खुद ट्राई कर रहे थे कि हम खुद ही सोच रहे थे कि हम शायद हम भी कुछ इंडिपेंडेंट रह के देखते हैं कि

00:06:22:19 हम कैसे लगता है एक्सपीरियंस नया एक्सपीरियंस करना चाह रहे थे स्वतंत्र रहना जैसे मान लीजिए तो हमको भग हम भगवान से बोले कि हमको जाना है लेकिन भगवान बोले कि वो जगह अच्छा नहीं है भौतिक संसार अच्छा नहीं है जैसे बेटा है उंगली डालने का प्रयास कर रहा है आग में आग में उंगली डालने का प्रयास कर रहा है मतलब भौतिक संसार था हां उंगली डालने का प्रयास कर रहा है उस समय भी था भौतिक संसार भौतिक संसार शाश्वत है शाश्वत मतलब है कि लेकिन यहां पे चीज़ ये टेंपरेरी है। ये भौतिक जगत जो है ये सत्य है और ये शाश्वत है। लेकिन ये टेंपरेरी है चीज़ यहां पे। रूप बदलता है। हां। क्योंकि यहां पे चीजें होती हैं फिर खत्म होती हैं। फिर होती है फिर खत्म होती है। लेकिन आध्यात्मिक जगत में क्या है कि एक है मगर इसमें चीजें बनती बिगड़ती रहती है। मतलब इसका रूप चेंज होता रहता है। हां बहुत ही तत्व से है। तत्व से शाश्वत है मगर रूप चेंज होता रहता है। टरेरी यहां पे हर चीज टेंपरेरी है। बनता बिगड़ता रहता है। जैसे कुल मिलाकर के जो सुख है वो शाश्वत नहीं है। हां वहां पे जो है शाश्वत सुख है आध्यात्मिक जगत में। दिक्कत दिक्कत यहां पर ये आती है कि जैसे आपने कहा कि अज्ञानता से ऐसा हुआ। यानी कि वहां पर जब आप थे तो आप ज्ञानी नहीं थे। फुल प्रूफ वहां पे हम फुल प्रूफ ज्ञानी थे। हां ना तो फिर ये अज्ञानता कैसे आ गई कि भाई हम भौतिक जगत में ज्यादा जैसे आग में उंगली है ना आग तो उंगली का हमको एक्सपीरियंस आग का एक्सपीरियंस है नहीं अगर बच्चे को तो नहीं है ना मतलब अज्ञानी थे उतने अंश

00:07:37:25 में अज्ञानी थे। यानी कि हमको भौतिक जगत कंप्लीट नॉलेज नहीं था। मतलब चित नहीं थे। भगवान के धाम में होते हुए भी आप हां शाश्वत रूप से ज्ञानी नहीं थे थे कुछ था जो अभाव था थे हमारी इच्छा ही मैटर करता है डिपेंड जैसे कि आपने कहा ना अज्ञानी होने के कारण जैसे अग्नि को हमने छुआ नहीं तो हम जानेंगे कैसे हमारे इंडिपेंडेंट नेचर पे डिपेंड करता है हमारा जो स्वतंत्र इच्छा है ना उस पे डिपेंड करता है हम तो यानी कि भगवान में जाने भगवान के धाम में जाने के बाद भी स्वतंत्र इच्छा हो सकती है। हां स्वतंत्र इच्छा रहेगी ना क्योंकि प्रेम जो है फोर्सफुली नहीं कर सकते किसी को आप अच्छा जैसे मुझे आपको प्रेम करना है तो फोर्सफुली मैं आपको प्रेम नहीं कर सकता। एक इच्छा है जब आप खुद से प्रेम करेंगे तो वो प्रेम प्रबल होता है। तो यानी कि मतलब जब हम भगवान के धाम में पहुंचेंगे तो एक स्वतंत्र इच्छा हो सकती है। दोबारा से कोई कमी हमें लग सकती है। आप कभी भी अपनी इच्छा से आज आ सकते हो जा भी सकते हो। कहां जा पा रहे हैं आप? इच्छा डेवलप करेंगे। प्रगाढ़ इच्छा होगा तो उसके अकॉर्डिंग जो शास्त्रों में दिया रहेगा। इच्छा तो आज आपकी हो गई है ना वो। फिर भी आप आज नहीं जा पा रहे हो। हां तो समय लगेगा। यानी कि यानी कि शादी होता है बेबी बेबी का नहीं नहीं कहने का मतलब यह है एक मिनट शादी होता है पति पत्नी का शादी होता है तो पत्नी शादी के तुरंत बाद डिजायर करे कि

00:08:52:26 मुझे बच्चा हो जाए तो ऐसा पॉसिबल है क्या समय लगेगा पॉसिबल नहीं है मगर इसीलिए तो इसको शाश्वत सुख नहीं कहते भौतिक दुनिया को मगर भगवान का शाश्वत सुख है एक मैं वही उदाहरण बता रहा हूं ऐसा है जैसे हम कह रहे हैं कि वहां का शाश्वत सुख है मगर हम ये बता रहे हैं कि वहां पर भी अभाव है। अभाव क्या है कि हमें भौतिक सुख की अनुभूति नहीं है। यह अभाव है वहां पर। जब हम शाश्वत हैं तो वहां पर अभाव है कि हमें भौतिक सुख की अनुभूति नहीं है। तो हम वह अनुभूति करने के लिए भगवान से लड़ के और यहां आ गए हैं। भगवान को मालूम था कि यहां पर ऐसे ऐसे होगा। उन्होंने भेज दिया कि इसको अनुभूति हो जाए। यानी कि इस अनुभूति की कमी हो सकती है भगवान के धाम में। और अगर स्वतंत्र इच्छा की बात करें तो फिर तो वह आ जाएगा कि यानी कि हम जैसे सुख भोग रहे भगवान के धाम में फिर भी स्वतंत्र इच्छा के कारण हमारा दूसरा कुछ ऐसा मन कर सकता है कि हम भोग भोगे।

00:09:44:24 हमको फ्री व्हील दिया गया है। भगवान ने हमको एक गिफ्ट दिया है फ्री यानी कि नहीं नहीं वो वो आप सही कह रहे हैं। मैं स्वतंत्र इच्छा को एक्सेप्ट करने के बाद ये कह रहा हूं कि लेकिन सेकंड चीज क्या है कि जब बच्चा आग में उंगली डालने का प्रयास कर रहा है। पिताजी उसको मना कर रहे हैं मत डालो मत डालो। तो डाल के देख ले। लेकिन जब कई बार बोलता है नहीं डालूंगा डालूंगा। तो पिताजी बोलते हैं ठीक है डाल के देख लो। वो वही वही वही बात हो गई ना कि भगवान के धाम में रहने वाले को भी अज्ञानता हो सकती है। यानी कि ज्ञान का जो सुख है वो कहीं ना कहीं से बाधित हो सकता है। ऐसे मतलब शाश्वतता भंग हो रही है। बस इतनी सी बात है जिसके कारण आना पड़ा। आग में जब एक बार उंगली डाल देगा तो दोबारा आग में उंगली उंगली डालेगा। क्योंकि उसको एक्सपीरियंस हो गया ना। जैसे मान लीजिए वो आग में उंगली डालने का प्रयास कर रहा है। पिताजी ने मना किया। नहीं माना डाल दिया। एक बार डाल दिया दोबारा डालेगा वो आग में क्योंकि उसको एक्सपीरियंस हो गया ना दोबारा होता है ऐसा कई बार एक चोर चोरी करता है उसको एक्सपीरियंस तो अलग है सुनिए तो एक चोर चोरी करता है उसको एक्सपीरियंस हो गया जेल का जेल में क्या-क्या होता है डंडे पड़ते हैं होता है फिर कर लेता है चोरी वो अपनी इंद्रियों पे अपनी इच्छाओं पे कंट्रोल नहीं कर पाता लेकिन एक बार नहीं 10-10 बार कर लेता है तो ये भौतिक जगत का नेचर है वो कहीं नहीं कर पा रहा है लेकिन जब एक बार उंगली डाला वो एक्सपीरियंस किया आग का ऐसा है ना आध्यात्मिक जगत चला गया वहां पे वहां से दोबारा

00:11:00:00 यहां झांकेगा नहीं क्योंकि उसको यहां का एक्सपीरियंस यह असल में यहां पर एक अभाव के कारण आना कि अभाव है इसलिए मैं आया। यही यह बात पे क्वेश्चन उठा रहा है कि फिर वहां जाकर के अभाव क्यों नहीं होगा? अब वो अभाव का कारण ही कुछ भी बना बन सकता है। जैसे उसको एक्सपीरियंस हो गया मत नहीं बहुत बहुत टाइम हो गया। अब वो जो दर्द है वो जो परेशानियां है वो उससे अरे बेकार का है। चाहता हूं भोग करके आता हूं। जैसे चोर हां वो रहा। आपका जो क्वेश्चन है कि मतलब वो भगवान के धाम में गया। दोबारा उसका इच्छा डेवलप हो गया यहां पे आने का क्योंकि जाके देख के आता हूं। बट जैसे मान लीजिए आपके पास अबकी बार मैं बहुत कदम फूंक फूंक के रखूंगा। नहीं नहीं वो चीज ठीक है। जैसे चोर होता है ना सोचता है कि अबकी बार पुलिस पकड़ नहीं पाएगी। ये प्रैक्टिकल नहीं है। प्रैक्टिकल क्या है? जैसे पेड़ा है। हां पेड़ा है। वो उतना टेस्टी नहीं है। लेकिन आप वही खा रहे हो। वही खा रहे हो। आपको सर रसगुल्ला रख देंगे। पेड़ा आप छोड़ दोगे ना? तो आध्यात्मिक जगत में जो है वो हायर टेस्ट मिलता है। हायर टेस्ट उनको प्राप्त था ना उसको छोड़ के आए ना हायर टेस्ट एक होता है ब्रह्म एक होता है परमात्मा यानी कि उन्हें एक तो यहां पे दो बातें आती है। एक तो भगवान पे अविश्वास भगवान की बात पर अविश्वास हुआ तो आ गए हम यहां। भगवान ने कहा कि वहां पे कष्ट है। फिर भी हमें

00:12:15:03 उनकी बात पर भरोसा नहीं हुआ। तो हम यहां आ गए। मगर मतलब भगवान पे भरोसा नहीं था। हम इंडिपेंडेंट यानी हम खुद ट्राई कर रहे थे भगवान बनने के लिए। हां। इस जगत में आकर के हर कोई भगवान बनने का ही प्रयास कर रहा है। लेकिन वो पॉसिबल है नहीं। मतलब वहां पर यह वाली यह वाली कमी ये वाली चीज़ ये वाली कमी थी। ये वाली कमी थी कि हम भगवान बन जाए। हां क्योंकि आध्यात्मिक जगत में भगवान के धाम में हम भगवान बनना चाहें कि हम स्वतंत्र रहना चाहे कि हम खुद भोगता बन के देखते हैं कैसा लगता है। तो वहां पे हम भोगता बन नहीं सकते। मतलब कि जीव के अंदर ये वाली प्यास भी आ सकती है कि वो भगवान जैसा भगवान ही बन जाना है। भगवान ही बन जाना चाहता है। अच्छा अच्छा। तो वो आध्यात्मिक जगत में पॉसिबल है नहीं। ये वाली प्यास की वो नहीं है निराकरण वहां वहां पे है ही नहीं। क्योंकि आध्यात्मिक जगत में भगवान भगवान एक ही है। कृष्ण तो कुल मिलाकर के शाश्वतता तो भंग हो गई ना किसी भी कारण से हुई। क्या चीज? जो सुख है जैसे जैसे मैं कहूं कि मैं वहां पर नहीं हूं उस समय। जैसे मैं मैं सोचूं कि मैं काश इस समय वहां क्यों नहीं खड़ा होता? क्योंकि मैं वहां नहीं खड़ा हो सकता क्योंकि मैं सर्वशक्तिमान तो हूं नहीं। यहां बैठा हूं फिर भी वहां खड़ा हो जाऊं। भगवान भगवान यहां बैठे हैं फिर भी वहां खड़े हो सकते हैं मगर मैं नहीं हो सकता क्योंकि मैं भगवान नहीं हूं। अब यह वाली जो चाह आ रही है क्योंकि इसमें मैं वहां खड़ा नहीं हो सकता या दूसरे लफ्जों में कह लीजिए इस तरह की और भी

00:13:32:02 उधर मत जाइए आप या दूसरे शब्दों शब्दों में अगर कहें कि कई ऐसी चीजें हमारे मन में आती हैं कि भाई मैं ये क्यों नहीं कर पा रहा ये क्यों नहीं कर पा रहा और वो उसमें ये होता है कि अगर भगवान चाहे तो कर सकते हैं तो ये जो प्यास है ये आप मान रहे हो कि ये है तो ये प्यास तो बुझेगी नहीं ये एक्सपीरियंस के वहां चले भी जाएंगे वहां फिर भोगेंगे फिर ऐसा हो सकता है कि जो है फिर प्यास लगाए लेकिन एक बार जब समझ में आ जाएगा कि हम वो चीज नहीं बन सकती भगवान पहली बात तो ये है कि अगर भगवान के धाम में है भगवान सामने है तो हमारे मन में वो प्यास आनी ही नहीं चाहिए और अगर आ रही है और आप जो तर्क दे रहे हैं कि एक बार में समझ में आ जाएगा फिर उसमें तो ये वाली बात है कि एक बार में समझ में आ जाता है चोर को फिर भी वो चोरी करता है 10 बार करता है 25 बार करता है ये वाली बात अच्छा इसमें एक दूसरी तरीके से एक कहते देखते हैं। जैसे आपके लिए भगवान के धाम में पहुंचकर जो महसूस होता है वो सबसे प्रमुख चीज है या भगवान प्रमुख चीज है? मतलब भगवान सबसे साध्य हैं या फिर जो है जो भगवान का धाम साध्य है क्या भगवान मेन साध्य है। है ना? मेन सबसे भगवान ही है। अच्छा तो जैसे आप भगवान के धाम

00:14:47:08 में पहुंच गए। आपने कहा हम सेवा करते हैं। ठीक है? भगवान के धाम में पहुंच गए तो जैसे सेवा करते हैं भगवान की जैसे मान लीजिए क्या होता है सेवा करने में मंजरी बनके करते हैं जो सेवा करते हैं ना जैसे क्या करते हैं? क्या सेवा करते हैं? अलग-अलग दास्य भाव में सक्ष भाव में वात्सल्य भाव में तो जैसे कोई एक कोई एक कोई एक उदाहरण दे दीजिए। जैसे ये कर रहे हैं। जैसे सुदामा मान लीजिए सुदामा के रूप में उनकी पैर दबाना या क्या करना मतलब कुछ सेवा के रूप में क्या मतलब मैं समझा नहीं मतलब जैसे सेवा होता है ना कि हमने भगवान का श्रृंगार किया ये उनकी सेवा हो गई हमने पैर दबाया उनको नहीं चाहिए मगर हमारे मन का भाव है कि उनकी सेवा में ही हमारा सुख है है ना तो वो सेवा क्या-क्या क्योंकि आपके लिए भगवान प्रमुख है तो आप सेवा करोगे वहां जाकर भगवान की तो वो सेवा क्या-क्या हो सकती है एक दो उदाहरण जैसे श्रृंगार करना उनके लिए भोजन बनाना उनका पैर दबाना अलग तरीके से जैसे यशोदा मैया को दे सकते हैं आप यशोदा मैया भगवान के लिए क्या करेंगे? मैं वो नहीं कह रहा। मैं कह रहा हूं एक उदाहरण दे दीजिए आप मुझे कि जैसे सर दबाना, खेलना क्या सेवा क्या हो सकती है उनकी? अलग-अलग सेवा हो सकती है। कुछ भी सेवा हो सकती है। खेलना भी हो सकता है। जैसे एक उदाहरण दे दीजिए जैसे खेलना हो सकता है। खेलना हो जैसे गोप बालों को जैसे खेल रहे हैं तो जैसे

00:16:02:12 गिल्ली गिल्ली डंडा खेल सकते हैं भगवान के साथ। हां वहां पे होता है ना भगवान के साथ खेलते हैं गोपाल। अब बात ये है इसमें जैसे हम गिल्ली डंडा खेल रहे हैं तो ये एक क्रिया है। जब क्रिया होती है तो जैसे हमने गिल्ली में डंडा मारा मान लीजिए और मार के वो गिल्ली दूर गई ठीक है फिर उसको उठा के लाए फिर मारा गिल्ली रख के डंडा तो अब क्या हुआ जब हमने मारा और दूर गई तब तक तो हमको सुख मिला मगर उठा के लाने में बीच में कि हम वहां से उठा के ला रहे हैं फिर से गिल्ली पर डंडा मारेंगे फिर उसको तो ये तो सुख फिर से टूट रहा है बीच में अगर गिल्ली डंडा में हमारा सुख है। अगर गिल्ली डंडा में हमारा सुख है। एक्चुअली मेरा प्रश्न यह है कि जो जहां पर क्रिया है ना वहां पर शाश्वतता नहीं हो सकती। क्योंकि क्रिया है। क्रिया कहीं से शुरू होती है कहीं पे समाप्त होती है। क्रिया हो रही है ना? हम तो आप सेवा जो है वो एक क्रिया है। जैसे मान लीजिए एक माता है, एक पिता है, एक पुत्र है। हां या कोई मित्र है। कोई प्रेमी प्रेमिका भी है। समझ लीजिए। जब उन दोनों में प्रेम होता है, रगाड़ प्रेम होता है तो क्रिया करते हुए भी पेन का अभाव होता है। मान लीजिए कोई पिता है, पिता से पुत्र को बहुत प्रेम है। पुत्र को पिता से बहुत प्रेम होता है। तो पुत्र पुत्र जो है पिता के लिए बहुत सारी चीजें करता है।

00:17:17:25 प्रेम के कारण बहुत प्रेम उसको रहता है। क्रिया करता है। लेकिन क्या उसको उतना तकलीफ होता है? होता है। जैसे मेरा पुत्र है और वो घर पे है। और मुझे लग रहा है कि मैं जल्दी से पहुंचूं। मगर जाम में फंसा हुआ हूं नहीं पहुंच पा। जितनी देर में अपने पुत्र को गोद में ले नहीं ले लूंगा। उतनी देर मुझे उसका अभाव लगेगा। जल्दी से गोद में लूं। है कि नहीं? तो आपका यह है कि जहां क्रिया है वहां पे कष्ट है। हां। ठीक है। मान लीजिए आप शाश्वतता भंग हो रही है। आप कह रहे हैं कि ऐसा प्लेस पे जाना उचित है जहां पे मतलब कोई क्रिया ना हो। बस आप हो। हां। ब्राह्मण। ना ये कहना चाह रहा हूं। नहीं ब्राह्मण नहीं कह रहा हूं मैं। वो नहीं कह रहा हूं कि ब्राह्मण ही हो। मगर वहां पे अगर हम क्रिया के कारण कर रहे हैं कि क्रिया हमें करनी है वहां पर कोई क्रिया हो रही है जैसे आप सेवा कर रहे हैं कुछ भी कर रहे हैं तो वो शुरू होगी और खत्म होगी जैसे ही शुरू होने के बीच में शुरू हो के खत्म होगी अगली क्रिया शुरू होगी उसके बीच में गैप आएगा टूटन आएगी जैसे मान लीजिए ये सपोज़ करिए कि हम भगवान का श्रृंगार कर रहे हैं हमने आइब्रो लगाया कुछ लगाया यहां पर ठीक है और यहां से चालू किया यहां पे खत्म हुआ अब हमें अगर दोबारा यहां से चालू करना है इसके बीच में गैप आएगा। इसके बीच में वो हमारा जो सुख अगर क्रिया से सुख आ रहा है तो बाधित हो जाएगा। मान क्रिया है ना जैसे

00:18:32:26 मान लीजिए रूम है ना आप कह रहे हैं कि कोई क्रिया नहीं उसको छोड़िए वो फिर सवाल आता जाएगा। कोई क्रिया नहीं होना चाहिए ना। कोई क्रिया रहेगा तो जो है उसमें पेन आएगा या अलग-अलग चीज मैं कह रहा हूं। दूसरा दूसरी बात कर लेते हैं। जी। तो, रूम के अंदर कोई है, बैठा है। हां। बैठा है। वह बैठा रहे कोई क्रिया नहीं करेगा, तो फ्रस्ट्रेट हो जाएगा ना वो। लेकिन जीव का जीव का भगवान भगवान भी क्रिया करते हैं क्या? और क्या? भगवान भी फ्रस्ट्रेट हो सकते हैं? नहीं। अगर क्रिया नहीं करेंगे तो क्योंकि जो वहां पे आध्यात्मिक जगत में जो भी कार्य होते हैं वो भौतिक शरीर से नहीं होते। ये फ्रस्ट्रेशन, ये पेन भौतिक शरीर में आता है। पेन भी नहीं लगा सकते। तो इसका मतलब वहां पर क्रिया की जरूरत ही नहीं है। नहीं वहां पे आपका आध्यात्मिक स्वरूप रहता है। भौतिक शरीर नहीं रहता। आध्यात्मिक शरीर रहता है। आध्यात्मिक शरीर भौतिक शरीर में अंतर होता है। आध्यात्मिक शरीर जो है सच्चिदानंद होता है ना? उसमें आध्यात्मिक शरीर सच्चिदानंद होता है। तो जब हम सच्चिदानंद है ही है तो हमें कुछ करने की जरूरत क्या काम रह गई फिर? जब हम सच्चिदानंद हैं। आप मेरी बात समझिए। बहुत जब हमारा शरीर सच्चिदानंद है यानी कि मुक्त है तो अब हमें कुछ आवश्यकता थोड़ी ना रह गई करने की। वहां पे लोग भगवान को प्रसन्न करा जाता है। यूं ही करते हैं। आवश्यकता नहीं होती है। आवश्यकता नहीं है। वैसे यानी कि हमारा जो मुख्य विषय है वह भगवान नहीं है। वहां पहुंचना

00:19:48:09 है। हमारा जो मुख्य विषय है वहां भगवान को आनंद देना भगवान को खुश करना है। भगवान की सेवा करना आप समझे नहीं। एक्चुअली थोड़ी सी बात समझ में नहीं आ रही। आपने कहा वो वहां का शरीर सच्चिदानंद है। हम वहां पहुंच गए तो काम खत्म। फिर वो हमारे ऊपर है। हम दें कि ना दे वो यूं ही दें तो बात अलग है। मगर कोई आवश्यकता नहीं है देने की। अगर आप चाहते हैं तो इसको कंटिन्यू करें क्योंकि मैंने तो अलग-अलग एक क्वेश्चन आया था मन में तो पूछ लिया। अलग-अलग रस में अलग-अलग जो है भाव में सेवा करते हैं वहां पे। जैसे पेड़ है। आप समझ नहीं रहे। पेड़ है। वहां का पेड़ जैसे जैसे वहां का पेड़ भी कल्पवृक्ष है। ना वहां का पेड़ भी सच्चिदानंद है। लेकिन वो कुछ एक्टिविटी कर रहा है क्या? मतलब है पेट दिया है सच्चिदानंद है लेकिन वो भी भगवान की सेवा कर रहा है कैसे फ्रूट्स ऑफर करके फ्रूट्स ऑफर करके कर रहा है ना वो कुछ कर रहा है ना फ्रूट्स ऑफर करके भगवान की सेवा कर रहा है क्योंकि उसका नेचर है पेड़ का नेचर क्या है वो कुछ उत्पन्न करेगा यानी कि वहां जाकर के हमारा नेचर होता है भगवान की सेवा करना आवश्यकता नहीं होती हमारा नेचर आत्मा का स्वरूप ही वो है भगवान का सेवा करना नहीं नहीं आत्मा का स्वरूप सच्चिदानंद है ना हम वहां गए और सच्चिदानंद हो गए

00:21:04:24 आत्मा का स्वरूप है जी स्वरूप है कृष्ण नित्य दास हम भगवान के नित्य दास हैं सच्चिदानंद नहीं है दास हैं दास मतलब हमारा स्वरूप है भगवान की सेवा करना तो हमारा जो देखिए भौतिक जगत में जो लोग हैं अगर हमारा स्वरूप भगवान की सेवा करना है तो उसमें हमें शाश्वत सुख नहीं मिल पाएगा बाधित होगा क्यों नहीं मिल पाएगा भगवान की सेवा कहीं से शुरू होगी कहीं पे समाप्त होगी तो भगवान शाश्वत है ना तो भगवान के साथ रहेंगे भगवान की सेवा करेंगे तो शाश्वत सुख मिलेगा ना नहीं भगवान शाश्वत हैं। जैसे हमारी जहां पर क्रिया शुरू हुई और क्रिया खत्म हुई उसके बीच में गैप आएगा दोबारा क्रिया [संगीत] शुरू होने पर। वो गैप में हमें बाधित होगा बंधन आएगा कि अरे यार दोबारा जल्दी इधर से इधर ले जाओ। जैसे मान लीजिए बहुत छोटा सा एग्जांपल दे रहा हूं। पेंसिल यहां से यहां तक आ गई। अब यहां से उठा के यहां ले जाना है। तो ये अगर मेरा इसमें सुख है पेंसिल को यहां से यहां लाने में। तो ये जो उठा के ले जा रहा हूं ना वापस इसमें मुझे दुख होगा। क्यों दुख होगा? क्योंकि मैं उठा के वापस ले जा रहा हूं। उसमें मेरा सुख नहीं है ना। आप आपका स्वरूप है भगवान से आप प्रेम करते हैं, किसी से प्रेम करते हैं तो उसके लिए कोई भी एक्ट करते हैं तो आपको पेन नहीं होता। दूसरी चीज़ कि वहां पे जो शरीर जो हमें करना होता है वो हम करने के लिए अगर नहीं कर पा रहे होते तो दुख होता है। कैसी बात कर रहे हैं आप? मान लीजिए बर्थडे पे विश करना है। केक काटना है। अरे नहीं कर पाए टाइम पे नहीं पहुंच पा रहे हैं। गाड़ी का जाम लग रहा है।

00:22:19:27 जगत का एग्जांपल ले रहे हैं। भौतिक जगत में क्या है कि वहां भौतिक शरीर है। भौतिक जगत में तो वही तो मैं कह रहा हूं। जब आध्यात्मिक जगत में सच्चिदानंद शरीर प्राप्त हो गया तो फिर कुछ करना आवश्यकता नहीं बचेगी। ये बात है। चलिए छोड़िए हटाइए। अच्छा खैर थोड़े से लाइट चीजों पे आते हैं। काफी गहरा डिस्कशन हो गया फिलोसफी का। अच्छा मैं आपके गुरु मतलब कहां से कनेक्टेड है? कैसे वो श्रील प्रभुपाद जी तक पहुंचते हैं? इसमें थोड़ा सा बताइए। आप यहां के बारे में कुछ पूछिए। अब इसके ऊपर मैं कुछ डिस्कस नहीं कर सकता। अच्छा। अच्छा। तो यहां पे कौन-कौन सी बुक्स हैं जो आपके पास यहां रखी हैं? आप ये वीडियो डिलीट कर दीजिएगा क्योंकि एक्चुअली मेरा हैबिट नहीं है ये सब चीज में वीडियो वगैरह और ये सब चीज का तो आपको पब्लिक करना हो तो कर सकते हैं एज अ अपने लिए कि हां मैं गया था इस में बाकी मुझे उतना कोई इंटरेस्ट है नहीं तो मैं अभी पेश करना चाहता हूं अभी यहां मतलब फ्रस्ट्रेशन हो रहा है यहां की बुक्स के बारे में भी नहीं नहीं मुझे फ्रस्ट्रेशन हो रहा है मतलब वीडियो वगैरह से तो आप इसको बंद कर सकते हो अच्छा आप डिलीट भी कर सकते हैं क्योंकि मेरा हैबिट नहीं अरे तो आप इतना फ्रस्ट्रेट क्यों हो रहे हैं मेरा हैबिट नहीं है हां मेरा हैबिट नहीं है इतना वीडियो पे बोलने का। अच्छा देखिए ये सब बातें कोई तय तो होती नहीं। जैसे आपने मुझे बताया कि आप जो है परमधाम क्योंकि

00:23:35:01 आपने शुरू शुरुआत ऐसी नहीं की मुझे पता चला मैं एक आत्मा हूं। आपका कांसेप्ट क्या है ना आपका का्सप्ट ये है कि आप चाहते हो कि कोई क्रिया ना हो और आनंद में रहे। नहीं वो कांसेप्ट की बात नहीं कह रहा मैं। इसको बंद कर दीजिए फिर बात करते हैं। [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 23:57 · 01 Feb 2026

इस्कॉन ब्रह्मचारी ने कहा वीडियो डिलीट करो #maghmelaprayagraj

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