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00:00:06:16 है। जैसे हम देखते हैं कि जन्म से लेकर मृत्यु तक हमको पहचान मिलती है। सबसे पहचान पहली पहचान मिली आप मेल है या फीमेल हैं। फिर इस आप किस परिवार से जुड़े हुए हैं? क्या पढ़ाई करते हैं? क्या प्रोफेशन करते हैं? फिर आप कौन से धर्म के हैं? कौन से देश के हैं? माना हम देखते हैं हमारी आइडेंटिटी चेंज होती रहती है। जैसे फॉर एग्जांपल यदि आप डॉक्टर हैं तो जब तक आप अपने फील्ड में हैं तब तक डॉक्टर कहलाएंगे हॉस्पिटल में। घर पे आने के बाद तो डॉक्टर नहीं कहलाएंगे। तभी आपका मदरफादर है। आप माना रिलेशन वाइज आपकी पहचान है। तो आपकी सही पहचान क्या है जो कभी भी चेंज ना हो। तो यह आंसर हमें साइंस नहीं दे सकता है। लेकिन स्पिरिचुअलिटी बताता है कि आप सिर्फ शरीर नहीं है लेकिन शरीर को चलाने वाली शक्ति आप एक आत्मा है। दीदी एक आपका एक क्वेश्चन आ रहा है आप कहें तो मैं पुट अप कर लूं। आप अगर आज्ञा दे तो जी जी चलेगा। ये हमने कहा कि किस धर्म को मानता है? तो क्या सनातन के अलावा दूसरे भी धर्म है? उनको धर्म कहा जाता है क्योंकि वो लोग अपने आप को धर्म नहीं कहते हैं। मतलब धर्म क्या है फिर? ये तो बाद की टॉपिक है लेकिन जैसे अभी हमने कहा इस पर्टिकुलर धर्म से हम अपनी-अपनी पहचान बताते हैं ना लेकिन हमारी विचारधारा कह सकते हैं विचारधारा विचारधारा आध्यात्मिक विचारधारा जी हां
00:01:21:18 लेकिन ये सब हमारी चेंजिंग है हां है ना जैसे आप अभी भारत में है भारत भारतवासी व्यक्ति विदेश में जाएगा तो उसको क्या पुकारेंगे जरूर कहेंगे ये इंडियन है हां भारत से आए भारतीय है तो ये थोड़े समय की पहचान है ना बदल बाकी उसका नाम है तो हमारे इनको जो है ऐसे मान ले कि आध्यात्मिक विचारधारा अलग-अलग हां सबकी आध्यात्मिक विचारधारा अलग-अलग जो आपको जो है मोक्ष करा दे जैसे यहां पर ये गेम हम करते हैं। यहां पर ये 16 वैल्यूस बताई गई है। तो इन 16 वैल्यूस में से आपको कोई भी एक वैल्यू सेलेक्ट करनी है। अपने मन में रखना है। हमें नहीं बताना है। आप सेलेक्ट कर लीजिए कोई भी एक वैल्यू।
00:02:13:18 सेलेक्ट कर लिया। अभी उसका जो इमेज है वो आपको इन चार बॉक्सेस है इस पोस्टर में। उन चार बॉक्सेस में आपको ढूंढना है। वो वाली इमेज वरना वो वैल्यू फर्स्ट नंबर बॉक्स में है क्या? देखिए है। है। ओके। सेकंड नंबर में है। ओके। थर्ड में है। फोर्थ में नहीं है। अच्छा फिर से एक बार रिचेक कीजिए। वन टू थ्री में है। फोर में नहीं है। तो अभी हम आपको रिजल्ट बताएंगे कि आपने कौन सी वैल्यू सेलेक्ट की है। तो आपने सेलेक्ट किया है ब्लिस। आनंद ब्लिस मतलब मतलब कृपा। कृपा है ना? तो आपके अंदर ये वैल्यू है। अभी मेरा ये प्रश्न है कि इतनी सारी वैल्यूस है ना उसमें से वही वाली क्यों सेलेक्ट किया आपने? सब आ जाएगा। क्योंकि ये सारी ही वैल्यूस एक दूसरे से जुड़ी हुई है। तो अगर हम किसी एक वैल्यू को भी अपनी लाइफ में लाएं तो बाकी की वैल्यूस भी हमारी लाइफ में ऑटोमेटिकली आ जाएंगी। तो ऐसे धीरे-धीरे हमारी लाइफ वैल्यू बेस्ड बनेगी। नहीं मगर नहीं नॉलेज जैसे है ना नॉलेज नॉलेज तो उस रावण को भी थी। पर उसके पास शांति नहीं है। शांति नहीं। अहंकार था उसके पास। जिसके ऊपर कृपा हो गई उसके पास सब कुछ हो गया। हम मगर दूसरी चीजें है ना वो सब चीजें कृपा
00:03:28:19 अगर नहीं है तो वो सब चीजें आपकींगी कहीं नहीं क्योंकि कृपा के बिना कृपा के बिना ये सब चीजें अहंकार होती है मतलब ये ये मैंने प्राप्त किया ये मैं करता हूं मगर कृपा कृपा कब होती है जब आपका अहम भाव चला जाए सब भगवान ने किया सब भगवान ने किया कराने वाला वो है करने वाले आप तो जब ये भाव हम रखते हैं तो हमारे अंदर वो शक्ति आती है और उसकी खुशी भी हमें सच में जो मिलती है वो स्थाई रह सकती है अच्छा इसमें इसमें दीदी ये पूरा मैंने देखा तो इसमें एक एक क्वेश्चन बस लास्ट मेरी तरफ से कि जैसे हम ऐसा नहीं लग रहा है कि हम व्यक्ति को ये तो बता रहे हैं कि तुम्हारे अंदर क्या-क्या कमियां हैं मगर एक एक परफेक्ट उसको चीज नहीं दे रहे सॉल्यूशन होता क्या है मैं आजकल देखता हूं आजकल दुनिया में युद्ध बहुत हो रहा है मैं नाम नहीं लूंगा पर्टिकुलर किसी कम्युनिटी का मगर मेरे फोन पे मैसेजेस खूब आते हैं कि अरे उन्होंने हमारे साथ ऐसा किया वैसा किया और मेरे जो मेरी कम्युनिटी के लोग हैं वही मुझे वो मैसेज भेजते हैं कि ऐसा हुआ वैसा हुआ। बहुत दिन भर आता रहता है। मेरा खून खलता है उन चीजों को देख के। बहुत बुरा लगता है कि मगर वो ये नहीं बताते तुझे ये करना है। वो ये नहीं बताते। मतलब मैं क्या करूं? अगर मेरे साथ ऐसा हुआ वैसा हुआ तो मैं कहां जाकर के कुल्हाड़ी लेके निकलूं कि क्या करूं?
00:04:43:20 मैं किसको क्या कर दूं। वो नहीं बताते। ये तो ये ऐसा नहीं लग रहा कि हम व्यक्ति को उसकी कमियां तो गिना रहे हैं। मगर एक परफेक्ट उसको मॉडल सलूशन दे रहे हैं ना। जी तो सभी को जय श्री राम। हम इस समय आए हुए हैं माघ मेले में प्रयागराज और यहां पर हमें एक बड़ा ही भव्य सा इनका केंद्र मिला शिविर मिला ब्रह्मा कुमारीज का और यहां पर हम एक दीदी के साथ यहां पर बैठे हुए हैं। इनसे हम कुछ जानकारियां लेंगे ब्रह्मा कुमारीज के बारे में। तो सबसे पहले दीदी आपको जय श्री राम। जय श्री राम। नमस्ते। थोड़ा सा आप अपने बारे में थोड़ा सा एक कनेक्टिंग एक परिचय यहां का एक संक्षिप्त छोटा सा। कुछ जो परिचय आप देना चाहे ओम शांति जी तो ये यहां पर माग बेले में ब्रह्मा कुमारीज की तरफ से बहुत अच्छा ये यहां पर कैंप लगा हुआ है तो इसमें हम इस कैंप के माध्यम से सबको स्पिरिचुअलिटी की ओर लेकर जा रहे हैं। क्योंकि आज हम आज के समय में देख रहे हैं कि कहीं ना कहीं लोग अपने मार्ग से या अपने मन में बहुत विचलित सा अनुभव कर रहे हैं। तो उसके लिए मन में हम शांति की अनुभूति कैसे करें? तो इसके लिए हमारे पास अलग-अलग माना अलग-अलग हमने स्टॉल्स लगाए हुए
00:05:58:21 हैं। जैसे एक माइंड स्पा है। जैसे बॉडी स्पा होता है। तो उसी प्रकार से जैसे बॉडी स्पा में हम जाते हैं तो बॉडी को रिलैक्स करने के लिए चीजें कराई जाती है। तो ऐसे यहां पर माइंड को हम कैसे रिलैक्स करें? क्योंकि आज के समय में हम देख रहे हैं कि हमारा स्ट्रेस बहुत बढ़ता जा रहा है। ए्जायटी बढ़ रही है। छोटी-छोटी बातों में हम ओवरथिंक कर लेते हैं। तो माइंड को कैसे रिलैक्स करना है? पॉजिटिव थिंकिंग कैसे करनी है? तो उसके ऊपर हम गाइड कर रहे हैं सभी को। फिर एक दूसरा स्टॉल हमारा बहुत अच्छा है जिसमें जिसका थीम यह है स्पिरिचुअल साइंस कि साइंस और स्पिरिचुअलिटी का बैलेंस हम अपनी लाइफ में कैसे क्रिएट कर सकते हैं क्योंकि आजकल ज्यादा से ज्यादा लोग साइंस की ओर चल रहे हैं [हंसी] और स्पिरिचुअलिटी को कहीं ना कहीं हम पीछे छोड़ रहे हैं या फिर सोचते हैं स्पिरिचुअलिटी ओल्ड एजड लोगों के लिए है। लेकिन यहां पर हम यह बता रहे हैं कि स्पिरिचुअल लाइफस्टाइल आप जितना जल्दी अपनाएंगे उतनी अच्छी स्टेबल और हैप्पी लाइफ आप लीड कर सकते हैं। तो ऐसे ये बहुत अच्छा एक्सिबिशन यहां पर लगाया हुआ है। बहुत सुंदर बहुत सुंदर आपने परिचय दिया। अच्छा एक आजकल की जनरेशन में एक क्वेश्चन बहुत मेजर देखा गया है। स्पिरिचुअलिटी से वो दूर भागती है वो नई जनरेशन। तो हम
00:07:14:02 मतलब उसको अंतर क्या बताएं किसी को भी कि स्पिरिचुअलिटी में आने पर आपको यह मिलेगा। मतलब क्या डिफरेंस है कि मतलब वो अगर भौतिकवाद में ही जीवन जिए स्पिरिचुअलिटी को ना आए। स्पिरिचुअलिटी से उसे मिल क्या रहा है? मतलब धर्म अध्यात्म इन सब चीजों से क्या मिल रहा है? जैसे देखिए जैसे मैंने कहा यहां पर ये स्पिरिचुअल साइंस एक्सिबिशन है तो उसमें हमारा इंट्रोडक्शन में ही फर्स्ट पिक्चर में ये सारा बहुत अच्छे से एक्सप्लेन किया गया है। तो उस पिक्चर में आप देखेंगे तो वहां पर दिखा है एक रोबोट और एक व्यक्ति है। तो हम सभी से यह पूछते हैं रोबोट और उस व्यक्ति का अगर ये दोनों परफॉर्म करें तो दोनों में से किसका परफॉर्मेंस आपको अच्छा लगेगा? रोबोट का या व्यक्ति का? क्या बताएंगे आप? व्यक्ति का। व्यक्ति का अच्छा लगा। सही है। सबको सभी को व्यक्ति का ही अच्छा लगेगा। लेकिन क्या रीजन हो सकता है कि रोबोट का नहीं अच्छा लगा और व्यक्ति का ही अच्छा लगा। क्या डिफरेंस है? क्योंकि उसके पास वो चेतन है। चेतन है। और
00:08:13:03 चेतन होने के कारण उसके पास अपने निर्णय लेने की क्षमता है। क्षमता है। स्वतंत्र है। स्वतंत्र है। उसको जो कमांड दी गई है किसी चेतन के द्वारा वो वही कमांड को फॉलो करे। बिल्कुल सही कहा आपने कि रोबोट को हम जो इंस्ट्रक्शन जो प्रोग्रामिंग की जाएगी वो उतना ही करेगा। और व्यक्ति में जो है भावनाएं हैं, फीलिंग्स है, एक्सप्रेशन है जो रोबोट में नहीं हो सकती। आजकल कोई कहेंगे भी रोबोट में भी एक्सप्रेशनंस आ रहे हैं लेकिन हम जितना फीड करेंगे जितना प्रोग्राम करेंगे उतना ही होगा। तो ये डिफरेंस हो गया। फिर उसके नीचे एक बहुत अच्छा इमेज दिखाया है। एक व्यक्ति अंधा है और एक लंगड़ा है। दोनों भी अगर आगे बढ़ना चाहते हैं तो दोनों को क्या करना होगा? एक दूसरे का साथ देना होगा। तो वो जो अंधा और जो लंगड़ा व्यक्ति है ना वो और कोई नहीं। एक साइंस है और एक स्पिरिचुअलिटी है। क्योंकि आज हमारे लाइफ में हम सोचते हैं सिर्फ साइंस को लेकर हम आगे बढ़े। सारी मटेरियलिस्टिक अचीवमेंट्स हमने कर ली। बहुत सारा धन भी कमा लिया। बहुत सारी मतलब दुनिया की सारी अनेक बातों की खोज भी हमने कर ली। लेकिन जो सच में इनर पीस हमको चाहिए जो हैप्पीनेस हमको चाहिए। वो तो नहीं मिल पाई है हमको। हम आज लोग सोचते बहुत पैसा कमा लेंगे तो खुशी मिलेगी आनंद मिलेगा लेकिन हो क्या रहा है
00:09:29:13 हां वो दुखी हो जाता है मैंने मिल नहीं रहा है बिल्कुल मैंने देखा महंगीमहंगी गाड़ियों में भी लोग घूमते हैं उनको छोटी सी एसिडिटी की प्रॉब्लम है इसका मतलब वो महंगी गाड़ी में होते हुए भी दुखी हैं। दुखी है। 2020 तो की सोने की चैन पहने हुए हैं। फिर भी उनका पैर में दर्द है या घुटने में दर्द है। यानी कि उनका वो जो सुख है वो सस्टेंड नहीं है। वो बाधित हो रहा है बार-बार। क्योंकि सुख जो है किसी भी भौतिक चीजों से हमें नहीं मिल पाता है। सुख को हमें अपने ही अंदर खोजना है सुख शांति को और यह मार्ग हमें स्पिरिचुअलिटी बताता है। स्पिरिचुअलिटी का मीनिंग ही होता है स्टडी ऑफ़ स्पिरिट माना स्टडी ऑफ़ सेल्फ। जिसको हम अध्यात्म कहते हैं। अर्थात आत्मा का अध्ययन। स्वयं का अध्ययन करना। जी तो स्पिरिचुअलिटी से हमें जो इनर हैप्पीनेस है, इनर ब्यूटी है उसके बारे में हमें जानने को मिलेगा। जो हमें आज हम कितना भी धन कमा लें या कुछ भी कर ले जिससे नहीं मिल पाता है वो हमें स्पिरिचुअल लाइफ स्टाइल को अपनाने से मिल सकता है। तो एक जनरल सा क्वेश्चन आजकल की जनरेशन ये करती है कि भ मैं जब हिल स्टेशन पे घूमने जा रहा हूं तब भी तो मुझे सुख मिल रहा है। मूवी देख रहा हूं तो खुशी मिल रही है। या फिर मैं कुछ खा रहा हूं तो मुझे सुख मिल रहा है। तो हम समझ रहे हैं कि वहां पर जो है जो उसका
00:10:44:16 सुख है थोड़ी देर का है। उसके बाद फिर से उसको दुखी होना है। फिर से उसके लिए नई चीजें उसको करनी है। तो वही मैं पूछ रहा था कि ब्रह्मा कुमारीज का शांति देने वाला जो है वो क्या कांसेप्ट है? तो ब्रह्मा कुमारीज में मेनली जब आप आते हैं तो आपको सेल्फ अवेयरनेस कराई जाती है कि आप कौन हैं? तो जब आप रियलिटी आपकी जो रियल रियलिटी है उसको जब आप जान जाते हैं तो आप आपकी रियलिटी क्या है? मैं आपसे पूछूंगी आप कौन हैं? क्या जवाब देंगे? हां तो मैं नैन छिंदती शस्त्राण नैन दहति पावका तो जब हम यह सच में जान लेते हैं कि मैं आत्मा हूं तो जब मैंने यह जान लिया कि आई एम अ सोल और आप यह जानते होंगे कि शास्त्रों में भी हमारे लिखा हुआ है आत्मा को सतोगुणी कहा जाता है। माना हर आत्मा में सात प्रकार के गुण होते हैं। सात गुण होते हैं। तो जैसे सुख, शांति, आनंद, प्रेम, पवित्रता, शक्ति और ज्ञान। तो इन सातों गुणों की अनुभूति जब हम करना शुरू कर देते हैं तो बाहर की चीजों से फिर हमको सुख और शांति आनंद लेने की आवश्यकता नहीं रहती। फिर क्योंकि बाहर की चीजें हमें हमें टेंपरेरी जैसे आपने अपने स्वरूप में स्थित हो जाते हैं। स्थित हो जाते हैं। वास्तविकता वास्तविकता। तो ये वाला जो कांसेप्ट है ना कि हम लोग कलयुग के कगार पर
00:11:59:18 हैं और फिर नया युग शुरू होगा। ये क्या कांसेप्ट है फिर? मतलब कि अगले जन्म में आप मतलब अगले उसमें जो जो इस पे चलेंगे तो वो देवी देवता बनेंगे अगले उसमें। ये थोड़ा सा मतलब यही है ना जो आपको मिलेगा एट द एंड देखिए वो बाद की बात बाद में है लेकिन अभी हम सबको मिलकर के अभी की जो प्रेजेंट हमारी सोसाइटी है वो कैसी लग रही है कलयुग की कह रहे हैं ना आप भी तो ये कलयुग रहने जैसा स्थान तो नहीं है तो हम सबको मिलकर के एक अच्छा स्थान बनाना है। अच्छा स्थान बना करके एक अच्छी सोसाइटी बनानी है। सतयुग में पहुंचना है। एक अच्छी सोसाइटी हमको क्रिएट करनी है। सतयुग कहते हैं। भले आप जो भी कहे एक अच्छी सोसाइटी हमको क्रिएट करनी है। जहां पर हम सभी इन अपने रियल अवेयरनेस में ओरिजिनलिटी में हम रह सके। फिर जैसे हमारा ये जो फर्स्ट चित्र है इसमें हम हमने बताया है कि जब आप साइंस और स्पिरिचुअलिटी दोनों का बैलेंस करेंगे लाइफ में तो एक हम अच्छी जिसको स्वर्ग आपने कहा सतयुग कहा एक ऐसी दुनिया की निर्मिती हम कर सकते हैं। कब और ऐसी दुनिया को क्या कहेंगे उसकी डेफिनेशन जहां पर सुख शांति और जो हम बना रहे हैं वो जो है वो आपका वो है जो स्पिरिचुअलिटी से प्राप्त होगा। मगर उसमें भी क्योंकि हमें पानी पीना
00:13:14:26 है तो कुछ ना कुछ करना है तो थोड़ा सा तो वहां पर लगेगा ना कि मोक्ष नहीं हुआ अभी जैसे पानी ही पीना है। दुनिया है अच्छी दुनिया है। अच्छे लोग हैं। मगर हमको पानी पीने के लिए हाथ चलाना ही है। इतना तो करना ही है। कर्म तो करना ही है। हमें कर्म का सन्यास तो कोई नहीं कर सकता। तो फिर उतनी देर का तो सुख वहां पे भी टूट रहा है। जैसे हमको अगर पानी अपने स्वरूप में स्थित होने पानी पीने में तो सुख है ना पानी पीने के लिए प्रयत्न करने में दिक्कत है ना देर लगेगी टाइम लगेगा यहां से उठाया मतलब जैसे पानी पीने में सुख है तो हम जब पानी के लिए हाथ चला रहे हैं यहां से वहां तक की जैसे देखिए जो चीज जो चीज मुझे दुख की अनुभव हो रही है वो चीज दूसरे के लिए खुशी जैसे फॉर एग्जांपल एक मां है मेरा कहने का मतलब ये है कि अगर हम व्यक्ति को ये कह के ला रहे हैं ना कि यहां पे आपको जो है शाश्वत सुख नहीं मिल रहा है तो हमें यहां वहां पे उसको शाश्वत सुख देना होगा। मगर शाश्वत तो यहां अगर हम ये सतयुग ये जो एनवायरमेंट क्रिएट कर रहे हैं अगर वहां पर भी व्यक्ति को प्रयत्न करना पड़ रहा है या तपस्या करनी पड़ रही है। लेकिन सब कुछ इजीली अवेलेबल है। वो दुनिया ऐसी है यहां अगर सस्टेन नहीं है। हां वहां पर सब कुछ इजीली आपको अवेलेबल होता है। जिस कारण वहां दुख का नाम नहीं दुख की अनुभूति नहीं हो पाती है आपको। नहीं जैसे यहां पे थोड़ी सी समझ नहीं पा रहा हूं। आप थोड़ा या तो मैं समझ नहीं पा रहा हूं। हम एक मिनट आप ये
00:14:29:27 कट करवाएंगे तो हां कट कीजिए कराइए आप उसप आ जाते हैं आप कट कर आप ये कट कीजिए पहले जी
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ब्रह्माकुमारी क्या छुपा रही हैं | क्यों कराया कैमरा बंद @brahmakumaris
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