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00:00:06:14 आप देख सकते हैं मेरे पीछे ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी बैठे हुए हैं और अनशन पर हैं। अनशन पर क्यों है यह मैं आपको बताता हूं। हम इस समय माघ में है प्रयागराज में। यहां पर माघ मेला लगा हुआ है और हम पूरी शंकराचार्य जी के शिविर में हैं। गुरुदेव के सानिध्य में हम आज मौनी अमावस्या का दिन था और हम सभी उत्साह पूर्वक स्नान करने गए थे। पावन स्नान किया हमने और मुझे दिन में मुझे कुछ ऐसी आवाजें सुनाई दी कि कुछ भगदड़ हो रही है। कहीं कुछ हो रहा है। फिर भी मैंने ध्यान नहीं दिया। मगर अंतत गतत्वा जब बाद में मुझे पता चला कि यहां हो क्या रहा है कि जिस शिविर में मैं ठहरा हुआ हूं उससे 100 मीटर की दूरी पर जो ज्योतिष पीठ का शिविर लगा हुआ है ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी स्नान करने जा रहे थे और अपने जो उनके परिकर इत्यादि होते हैं उनके साथ जा रहे थे पालकी में जा रहे थे यहां पर मैंने पता लगाया कि पालकी में जाने का विशेष कारण यही था कि उनकी उनका स्वास्थ्य उतना ठीक नहीं था। तो वो पालकी में जा रहे थे जिसको वर्तमान में रथ का नाम दिया जा रहा है। रथ अलग होता है और पालकी अलग होती है। पालकी बहुत छोटे से एरिया में आ जाती है और रथ के लिए बहुत ज्यादा बड़ा
00:01:22:07 आपको स्पेस चाहिए होता है। घेर के चलता है जो अब बात यह है कि हुआ क्या? तो हुआ यह कि ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी जब स्नान करने जा रहे हैं तो जो संबंधित क्षेत्र का जो एसएओ है वह खुद उनके साथ उस पालकी के साथ यात्रा को लेकर के जा रहा है। उसको कोई आपत्ति नहीं है इस यात्रा से। पर आगे रास्ते में उन्हें कुछ प्रशासनिक अधिकारी मिलते हैं जो मना करते हैं कि आप इस पालकी के साथ नहीं चल सकते। आपको जो है पैदल जाना होगा। आप जो है प्रोटोकॉल में हस्तक्षेप कर रहे हैं। और उसमें तरह-तरह की चीजें बताई जा रही है कि भाई बहुत करोड़ों की भीड़ आज माघ में यह माघ मेला थोड़ी ना है। यह तो कुंभ का मेला है। करोड़ों की भीड़ है। है ना? तो यह तरह-तरह की चीजें बताई जा रही है प्रशासन के द्वारा अपनी छवि को या जो उन्होंने कर दिया है उसको जो है उस पर पलस्तर करने के लिए कि करोड़ों की भीड़ थी भाई। और इनकी एक पालकी जाने से वह डिस्टर्ब हो रहा था पूरा मामला और यह करतेकरते इनको जब रोका गया इनकी इनकी इस यात्रा को रोका गया तो सिर्फ रोका नहीं गया है इस
00:02:37:10 यात्रा को वहां से खदेड़ा गया जो साथ में महाराज जी के साथ में जो उनके परिकर चल रहे थे उसमें दंडी सन्यासी इत्यादि भी थे मैं खुद उनसे मिला हूं उनके यहां चेहरे पर वार किया गया है वो सनातनी है सनातनियों के चेहरे पर वार किया गया है। क्यों किया गया है? क्योंकि वह अपनी गंगा माता में स्नान करने जा रहे थे। संगम में स्नान करने जा रहे थे। क्यों किया गया है? क्योंकि यहां पर भाई सनातनियों का मेला है। वो सनातनी है। इसलिए वार किया गया है। जो बटुक इत्यादि हैं जो उस उनके साथ में थे बटुक। मैंने देखा कि उसमें से एक की बेचारी की शिख को पकड़ के घसीटा गया है। यह हमारा ये हमारी वैल्यू रह गई है इस देश में।
00:03:32:24 बटों की शिख को पकड़ कर के घसीटा जा रहा है। लथेड़ करके घसीटा जा रहा है। क्यों घसीटा जा रहा है? क्योंकि शंकराचार्य जी को प्रोटोकॉल दिया गया था कि पैदल जाना है और वह पालकी में जा रहे थे और यहां पर करोड़ों की भीड़ थी और एसएओ जो साथ में प्रशासनिक सेवा में जो स्वयं हैं उनको पता नहीं है कि करोड़ों की भीड़ है या पालकी में नहीं जाना चाहिए उनको ये सब नहीं पता है वो साथ में लेके जा रहे हैं अरे भाई अगर तुम्हें इस यात्रा से इतनी प्रॉब्लम थी तो आपका यहां पर एक प्रतिनिधि मौजूद है एसएओ के रूप में वो मना करता ना कि आप प्रोटोकॉल के अगेंस्ट मत जाइए और यहां पर तरह-तरह की बातें और भी आएंगी। सामने अरे वह नकली है वो वो शंकराचार्य है ही नहीं यह है वो है तो क्यों लगाया उनका यह बोर्ड क्यों लगाया उनका यह बोर्ड क्यों उनका लगाया शिविर और यदि ये नकली है इनसे तुम्हें तकलीफ है तो इतने द शंकराचार्य नकली बना करके तुमने बिठा रखे हैं दुक्षानंद नरेंद्र इन सबका क्या होगा वासुदेवानंद इन सबका क्या होगा इन सबके साथ तुमने किया व्यवहार
00:04:37:08 तो यह एक बहुत बड़ा एक काला दिन है जो जो सत्ता जो शासन यह कहता है ना कि हम हिंदुत्व की रक्षा के लिए हैं उस हिंदुत्व की रक्षा का दावा करने वालों के लिए एक आज बहुत बड़ा काला इतिहास है क्योंकि सनातन धर्मियों पर वार किया गया है। चेहरे पर वार किया गया है। शिख पर पकड़ के घसीटा गया है। वरिष्ठ लोगों को धक्कामुक्की की गई है। अस्पताल में अभी भी तीन लोग भर्ती है। और मैंने कुछ वीडियोस देखे तरह-तरह की उसमें बातें चल रही है। करोड़ों की भीड़ है माघ में मतलब माघ नहीं हो गया कुंभ हो गया। इतना बेवकूफ बनाओगे भाई। यह सवाल केवल शासन से नहीं है। यह सवाल हर उस सनातनी से है जो आंख बंद करके बैठा हुआ है। यह सवाल हर उस मीडिया कर्मचारी से है जो ये सही बातें हिंदुओं तक पहुंचने नहीं दे रहा है। जय श्री राम। वर्ष की बात ही महाराज श्री इस वर्ष भी समय से अपने कुछ परिकरों के साथ स्नान के लिए प्रातः समय से निकल गए थे और निकल कर के जब हम लोग संगम नवज पर पहुंचे संगम नवज पर जाकर के स्नान करेंगे
00:05:52:26 स्नान के लिए पहुंचने लग गए तो वहां एक अधिकारी आए और उन्होंने महाराज श्री के यात्रा को रोक दिया कि आप स्नान करने के लिए नहीं जा सकते हम लोगों ने कहा भाई क्यों नहीं जा सकते तो उन्होंने कहा आपके साथ बहुत भीड़ है। तो हमने कहा कि हमारे साथ अधिक भीड़ नहीं है। हमारे पास हमने बल्कि ये कहा कि हमारे साथ 250 लोग हैं। और श्री ने कहा केवल 100 लोग ही अपने साथ जाएंगे। अधिकारी से कहा 100 लोग थे हमारे साथ अधिकतम। उसमें भी जो हमारे एकदम खास लोग थे जो हमारे ब्रह्मचारी और सन्यासी लोग वो 2530 की संख्या में अधिकतम। श्री राम कल मतलब आज मौर्य अमावस्या है। चतुर्दशी को दिन भर की स्थिति ये थी महाराज श्री के शरीर की कि उनको काफी ज्वर था। किसी से दिन भर मिले नहीं बहुत बुखार था लेकिन क्योंकि स्नान के प्रति और परंपरा के प्रति निष्ठा आचार्यों से ही हम लोग सीखते हैं। तो प्रातः काल जब वो बाहर आए पूजा के लिए तो हम सब लोगों ने जितने भी यहां पर उपस्थित थे गुरु भाई और जो भी मटके पर लोग सब ने कहा महाराज जी आप स्नान करने के लिए नहीं जाएंगे ऐसा हमसे प्रार्थना करना है आपसे महाराज ने कहा नहीं स्नान करने तो हम जाएंगे चाहे जो हो तो हम लोगों ने उनसे अनुरोध किया महाराज जी आप पैदल कम से कम जाइए पालकी पर बैठकर चलिए उन्होंने कहा ठीक है इतना हम स्वीकार करिये तो पालकी पर बैठकर के महाराज श्री जा रहे थे वहां चले गए जाने के बाद उन्होंने रोक दिया रोकने के बाद फिर
00:07:07:27 बदतमीजी करना शुरू कर दिया बदतमीजी भी उस हद तक हो गया कि महाराज श्री को वो अके अकेला कर दिया उन्होंने। जितने सन्यासी थे सबको पकड़ के खींचना शुरू कर दिया। ब्रह्मचारियों को पकड़ के खींचना शुरू कर दिया। छोटे बच्चे जो यहां पढ़ रहे थे शिविर में है स्नान करने के लिए सब साथ में जाते हैं। ये बच्चे बूढ़े सब जाते हैं। वो भी गए थे। मारना शुरू कर दिया। अकेले कमरे में ले जाकर के सबको गिरफ्तार कर लिया। महाराज जी को अकेला कर दिया। अकेला करने के बाद सिविल ड्रेस पहन के पुलिस वालों ने जबरदस्ती अपमानित करते हुए खींचते हुए महाराज जी के पालकी को ला के यहां पर उन्होंने रख दिया। क्षेत्र उनका गिर गया था और अपमानित करते हुए हमारे हम अभी तक यही नहीं समझ पाए कि हम लोगों का दोष क्या था आखिर क्या गलती थी गंगा स्नान करना हमारी गलती थी गलती क्या थी ये अभी तक हम लोग समझ नहीं पाए वो उनकी दो बातें जो हम लोगों ने इंटरनेट के माध्यम से देखी कि इनके साथ 200 से अधिक लोग थे ऐसा उन्होंने बताया उनके अधिकारी ने तो सवाल ये है कि 200 से अधिक लोग थे यदि आपके पास पुलिस बल था आप बाकी को रोक लेते रोकने का एक तरीका भी होता है सब भी तरीका होता है बाकी 100 लोगों को स्नान करवा देते 15 लोगों जबकि हम लोगों ने तो यहां तक कहा था कि आप हमारे पालकी को 10 मीटर और आगे तक चले जाने दीजिए। हम स्नान करने के लिए चले जाएंगे। 10 मीटर आगे तक आपने नहीं जाने दिया और अपमान के लिए तो आपने कौन-कौन
00:08:23:01 से शब्द का प्रयोग किया इसके विषय में हम कहना भी उचित नहीं समझते हैं। मर्यादा जितनी भी होती है सभी मर्यादा का उल्लंघन किया। ऐसा ट्रीटमेंट किया गया अंदर हम लोगों के साथ। जैसे हम कहीं के आतंकवादी हो। जैसे हमने बहुत बड़ा अपराध कर दिया हो। जैसे ये भगवा कपड़ा पहनना हमारा अपराध हो। हम शंकराचार्य जी के शिष्य लोग हैं। वो हमारा अपराध हो। यह सब सोच के बाद में केवल इतना ही समझ में आता है कि ये सोची समझी साजिश के तहत महाराज श्री का अपमान किया गया बल्कि अपमान से और आगे बढ़कर के बहुत कुछ करने की इनकी नीति थी। लेकिन अपमान तो सार्वजनिक रूप से किया ही गया। साथ में साथ के परिकों को मारा गया। जबकि कोई दोष नहीं था। अच्छा आप जब यहां से निकल रहे थे तो यहां से कोई पुलिस वाले जानते नहीं थे कि आप कैसे जा रहे हैं। ऐसा है कि हम लोगों ने पिछले कई दिनों से प्रशासन से कह रखा है कि मौनी अमावस्या का स्नान है। आप लिखित में अनुमति हम लोगों को दे दीजिए क्योंकि स्नान का एक अपना प्रोटोकॉल है वो कंप्लीट हो जाएगा। तो अब देते हैं तब देते हैं। कल रात में 1:00 बजे तक अभी देते हैं तभी देते हैं। अभी देते हैं तभी देते हैं। फिर 1:00 बजे रात के बाद जो हमारे यहां के व्यवस्थापक है पंकज पांडे उनको प्रशासन ने ये कहा कि आपके साथ हम अधिकारी लगा देते हैं। वो आपको लेकर के जाएंगे स्नान कराने के लिए। सुबह निर्धारित समय पे एक अधिकारी उनका आ गए। वो हमारे साथ यहां से। उसने आपत्ति नहीं जताई
00:09:38:07 कि पालकी में क्यों जा रहे हो। उन्होंने कुछ नहीं कहा। यहां से तो उसको ये प्रोटोकॉल नहीं पता थे। हमारे प्रशासन ने क्या प्रोटोकॉल दिया है। हमने महाराष्ट्र में पालकी में बैठाया और लेकर के चले। हमारे साथ एक गाड़ी भी यहां से चली। उन्होंने वहां पे उसको रोक दिया। हम लोगों ने उस गाड़ी को छोड़ दिया कि ठीक है नहीं ले चलते हैं। यहां से हम लोग आगे चले। यहां से आगे चलने के बाद उनका एक आरोप ये भी है हमारे ऊपर कि आपने हमारी पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी। हमारा यह कहना है कि मान लो हमारे किसी व्यक्ति ने कोई भी अनुशासन हीनता करने वाला हमारा व्यक्ति नहीं हो सकता। एकदम साफसाफ है। फिर भी यदि किसी ने किया सीसीटीवी में आपने यदि देख लिया। आप उनको चिन्हित करके अलग कर दीजिए। हमने यदि किसी के गलत करने पे भी कहा हो कि नहीं उसको हमारे साथ ले चलो यदि ऐसा कहा हो तो बताइए यदि किसी ने गलत किया हमारे समूह में बहुत सारे लोग आप जानते हैं कि जब लंबी समूह चलती है तो बहुत सारे अपरिचित लोग भी आ जाते हैं तो कोई अपरिचित या किसी परिचित ने भी यदि बैरिकेडिंग तोड़ी आपके अनुसार सीसीटीवी आपके पास है तो आप उसको पकड़ लेते और जिसने कुछ नहीं किया था उनको सबको परेशान करने का मारने का क्या अधिकार था आपको भी मारा है अब हम क्या बताएंगे आपको फिलहाल जो साथ वाले हैं इनके आप चेहरे पे देख सकते हैं चेहरे पे देखिए इनके निशान आपको दिखेगा इनके चेहरे पर मतलब लाठी से किससे मारा है आपको चेहरे पर जय जय हाथों से मारा है और
00:10:53:10 मैंने देखा था कुछ वीडियोस में जो बच्चे होते हैं जो ब्रह्मचारी होते हैं उनकी शिखा पकड़ के घसीट रहे शिख पकड़ के खींचा धोती पकड़ के खींचा छोटे बच्चों को लिटा कर के 10-10 डंडे मारे 14 साल का एक लड़का है उसको मारा 80 साल के एक बुजुर्ग सजन उनके पैर में चूड़ गए एक माता है अभी एडमिट स्वरूप रानी है। उनके पीठ पीठ में गिर पड़ी तो उनके पीठ में चोट लग गया। एक और माता उनको लग गया। महिलाओं को भी मारा। महिलाएं तीन दो महिलाएं जो इस समय अस्पताल में अभी भी नहीं है। अच्छा एक चीज और है जैसे आपने अभी कहा ना कि पुलिस वाले जो है सिविल ड्रेस में आए थे। तो ये हम कंफर्म कैसे कह सकते हैं? आप वीडियो में कर सकते हैं। वीडियो उपलब्ध है हम तो उस समय हम खुद ही पुलिस के पुलिस के पास थे। पुलिस ने हमको पकड़ लिया था। अच्छा जो लोग पुलिस ड्रेस में थे वही बाद में सिविल ड्रेस में दिखे। तो महाराज जी को लेके जाने की बारी आई कि महाराज जी को यहां से खाली कराते हैं। सब हमारे सारे परिकरों को हटा दिया उन्होंने। सब जितर-बितर कर दिया। हम लोगों को अंदर डाल दिया। अंदर डालने के बाद सिविल ड्रेस पहन लिया कि भाई जनता लेके जा रही है ये संदेश देने के लिए सिविल ड्रेस पहन करके खींच करके वो लेकर के गए। और वो सब लोग देख रहे हैं जिसमें उनके छत्र जो है पीछे की तरफ गिर पड़ा है और फिर वो खींच करके लेके जा रहे हैं। सिविल ड्रेस में कोई और वो जो वो ऐसे भी हम बता सकते हैं आपको कि जब महाराज श्री चले गए। हम लोगों को तो हमको तो कस्टडी में रख लिया था। हमने अपने परिकरों को जब उन्होंने जाने दिया सबको भेज दिए। हमने
00:12:08:14 कहा हम भाई हम तो अपने मन से यहां आए नहीं। सिर्फ अपने मन से जाएंगे नहीं। पुलिस वाले हमको घसीट के बाहर कर दे तो हम चले जाएंगे। हम बैठे रहे एक डेढ़ घंटे तक तो फिर उन्होंने कहा महाराज आप यहां से जाइए। हमें कहां पे बिठाया था? पुलिस थाने में जो कौन सा थाना? संगमनच का जो थाना था जिसको वो वार रूम टाइप का कुछ कहते हैं। तो उन्होंने कहा कि आप जाइए वहां से। हमने कहा हम क्यों जाएंगे? हम तो अपने पास से आए नहीं इसलिए हम जाने वाले हैं। हम य बैठे हैं। कहा कि नहीं महाराज आपको जाना पड़ेगा। हमने कहा भाई घसीट के ले जाओ हमको। तो उन्होंने सिविल ड्रेस जो हम आपको बता रहे हैं सिविल ड्रेस के साथ लोगों को बुलाया और हमको जबरदस्ती उठा के अपने लोगों को इंस्ट्रक्शन दिया कि किसी का कैमरा चालू ना हो पीछे के गेट से उठा के गाड़ी के डिब्के में हमको भरा और भर करके ला के यहां पर छोड़ा हमारे साथ ही है सर हमारा जी के साथ वीडियो में हमने बाद में देखा
00:12:54:02 तो ये आपको पूरा षड्यंत्र और पूरा इंटेंशनली ये जो क्रिएट किया गया है वो आपको समझ में आ रहा होगा कि किस तरीके से यहां हिंदुओं के जो अस्तित्व और आदर्श को कुचलने का प्रयास किया गया है। इनको इस तरीके से हमारे सन्यासियों पर वार किया गया है। हमारे महाराज जी पर वार महाराज जी का अपमान किया गया है। हमारे जो बटुक है जो कल के आने वाली जो पीढ़ी तैयार हम लोग करना चाह रहे हैं उनको कैसा [हंसी] सदमा लगा होगा? एक जो सन्यासी हैं हमारे साथ में एक पुलिस का अधिकारी अंदर उनको कहता है ये क्या तुम कपड़ा पहन के रखे हो? इसको सबको छोड़ो। इंजीनियरिंग पढ़ो तुम। मतलब डॉक्टर बनो इंजीनियर बनो मतलब हमारे जो भगवा हमारा जो भगा वस्त्र है उसके प्रति जो हमारी सम्मान की भावना है जिसके कारण प्रेरित हो कि लाखों लोग सब छोड़ के आते हैं उनके प्रति इस तरह की अपमानजनक शब्द और नीचा दिखाने की कोशिश और जब हम लोगों की जब जैसे हमारी पूछताछ हुई क्योंकि उन्होंने अंदर मोबाइल तो बंद कर रखा था तो हमारे साथ उन्होंने ट्रीटमेंट ऐसा किया जैसे कि हम एक आतंकवादी हैं हमारे सामने हमको बैठा दिया हम नीचे बैठ गए धूल में कोई दिक्कत नहीं बैठना कहीं बैठना वो कोई आपत्ति नहीं है। सामने कुर्सी लगा के दो अधिकारी पैर पर पैर चढ़ा करके उन्होंने एक-एक पता पूछा। ठीक है वो भी उनका काम
00:14:09:06 है। पूछने के बाद जिस तरह से मतलब अपमानित करने का कोई भी एंगल उन्होंने नहीं छोड़ा। हर दृष्टिकोण से जैसे अपमानित कर सकते थे वैसे पूरी तरह से अपमानित किया। और सबसे बड़ी बात उन बच्चों की है ना जो बच्चे कल को अपने को स्वयं को तैयार कर रहे हैं कि मैं वेद पाठ करूंगा। मैं जो है सनातन धर्म को जानूंगा। उसको पढ़ाऊंगा। और वेद पाठ पाठन और पढ़ा पढ़ना और पढ़ाना दोनों कार्य उसने थामे हैं। उनके हृदय में क्या चोट पहुंची होगी इस रास्ते पर चल के यह प्राप्त होना है। तो कौन कल को आपके धर्म को रक्षित करेगा जब आने वाली नई पीढ़ी को हम यह सदमा देंगे। आज ही बचपन में उनके साथ इस तरीके से उन पर अत्याचार किया गया है। तो ये बहुत ही निंदनीय और बहुत ही मतलब एक काला दिन है। माघ मेले का एक काला दिन है। प्रशासन के लिए एक काला दिन है। वो जो ये दावा करते हैं कि हम हिंदुत्व की रक्षा जो लोग ऐसा दावा करते हैं कि हम हिंदुत्व की रक्षक हैं। तो ऐसे सभी लोगों के लिए आज का दिन एक काला दिन है। जो हमारे जो वेद के रक्षक हैं सनातन आर्य वैदिक हिंदू धर्म के जो रक्षक हैं जो वास्तविकता में अपने रक्त से सींचा है जिन लोगों ने और जो आने वाले भविष्य में सींचने के लिए तैयार हो रहे हैं उनको इस तरीके से अपने
00:15:25:20 बल बल के द्वारा जो आज उनको बल प्राप्त है उसके द्वारा कुचला जा रहा है। ठीक है महाराज जी आपने बहुत समझ लिया उनको आपने ऐसा लगा कि आप आए और इस विषय में आपने जानकारी लेना चाहा जानकारी लेकर के ले रहे हैं। नहीं नहीं बिल्कुल हम लोग सब साथ में हैं आपके नहीं निश्चित रूप से हम सब मिलकर के ही हैं। इसलिए हम सबको बात केवल एक व्यक्ति की नहीं है। बात केवल किसी एक विशेष संस्था की नहीं है। ये तो हमारे अस्तित्व का प्रसंग है। पूरे हिंदुओं को इस विषय में चिंतन करना चाहिए। पूरे सनातन का पूरे पूरे सनातनी को इस विषय में चिंतन करने की आवश्यकता है कि भाई आखिर अब पहले गाय का अपमान हुआ। आचारियों का अपमान हो रहा है। अब अगला नंबर आपका आने वाला है। तो आपका नंबर है आज अगर अंडू नहीं जागेगा तो कल उसका घरघर से उठा के उसको भी रदा जाएगा। आपके ऊपर भी भाई अभी जो आपके जो नेतृत्व करता है उनको रौदा जा रहा है। अब अगली बारी आपकी है। जब आपकी इच्छा हट जाएगी। आप अनाथ हो जाओगे। आप देखिए कि जिस समय स्नान करने हम लोग गए थे। जिस समय हम लोग स्नान करने गए थे। उस समय भी घाट पे कम से कम 500 से अधिक लोग स्नान कर रहे थे। 100 लोगों को स्नान करने में क्या दिक्कत हो रही नहीं वो मैंने वीडियो देखा उसमें करोड़ों करोड़ों की भीड़ है 500 वहां जिस जगह थे मान लीजिए उसी जगह का यदि हम देखें वैसे
00:16:40:26 तो इनके ग्राफ के अनुसार लगभग 4 करोड़ लोगों ने संभवत चार पांच करोड़ लोगों ने स्नान किया आज ऐसा इंटरनेट और सरकार का जो आंकड़ा है वो बताएगा उस समय भी वहां पे 500 से अधिक लोग स्नान कर रहे हैं 100 लोगों को स्नान करने में क्या दिक्कत है उसमें कोई तथ्यात्मक बात निश्चित रूप से कुछ ना कुछ इंटेंशनली किया गया है नीतिगत ढंग से किया गया संयोग की बात है कि आज ही पूरी शंकराचार्य जी ने कोई पूरी शंकराचार्य जी से कोई प्रश्न किया गया था तो गुरुदेव ने बोला था कि प्रशासन को शासन को इससे मतलब नहीं है कि शंकराचार्य स्नान करने कब जाए कब ना जाए उनको मतलब है कौन से महामंडलेश्वर उनके पक्षधर हैं जो स्नान करने जा रहे हैं कि नहीं जा रहे कौन से स्वभूषित जगतगुरु इत्यादि है जो स्नान करने जा रहे हैं कि नहीं जा रहे हैं शंकराचार्यों की फिक्र शासन को नहीं है वो जाए ना जाए घर बैठे महाराज ने एकदम सही बात की यही वस्तु स्थिति तो सब जानते ही हैं वही तो बताते हैं हम लोगों को इसलिए उन्होंने एकदम सही बात
00:17:51:17 [संगीत]
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सनातन धर्म के अस्तित्व और आदर्श को कुचलने का प्रयास | Darkest day of #maghmelaprayagraj history
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