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00:00:06:09 कुल मिलाकर के इनके लिए अंतिम प्रमाण इनकी अपनी खोज है जो ये आत्मचिंतन के नाम पे बता रहे हैं और इसको प्रस्तुत कर रहे हैं। है ना? वो ना ही अंतिम प्रमाण ब्रह्मा कुमारी है। और फिर अभी हम लोग सिद्ध करेंगे कि वेद और गीता भी कैसे इनका अंतिम प्रमाण नहीं है। वो अभी हम बात करेंगे। आपका अंतिम प्रमाण है कि मेरे को अपने अनुभव अपने तर्क शक्ति इत्यादि जो लॉजिक्स इत्यादि हैं उनसे जो निष्कर्ष निकल के आ रहा है वही वह है और फिर इसके साथ में जो है वह ब्रह्माकुमारी हो तो मान्य है। वह कुरान हो तो मान्य है। बाइबल हो तो मान्य है। ठीक है? जितने अंश में वो जो मेरा अनुभव कह रहा है वो सही कह रहा है आत्मचिंतन अगर हमारे वेद है वेदों के कुछ विरुद्ध है और वेद यदि भगवत गीता के कुछ विरुद्ध है तो हम उसके बर खिलाफ है भगवान आता है आ के आदि सनातन देवी देवता धर्म की पवित्र प्रवृत्ति मार्ग की स्थापना करता ठीक है अब आप वेद के विरुद्ध मार्ग की स्थापना नहीं करते अब देखिए अब यहां तक जो बात हुई है वो एक मिनट अब यहां तक जो बात हुई है वो इस परिपेक्ष में थी कि ब्रह्मा कुमारी सही है या गलत है क्योंकि अब यहां पे मामला थोड़ा सा अलग हो रहा है। इन्होंने ब्रह्मा कुमारीज की उंगली भी छोड़ दी है कि हम ब्रह्मा कुमारीज के क्योंकि इन्होंने मान लिया ब्रह्मा कुमारीज भी कई जगह गलत कहती है और फिर मैंने क्वेश्चन भी किया है कि अगर आप यह क्लेम कर रहे हैं कि मुरली

00:01:21:20 जो है आ रही है आपके पास एक मिनट आप जो अर्थ बता रहे हैं वो मुरली का ही अर्थ बता रहे हैं तो इन्होंने ये भी कह दिया कि मुरली भी कहीं-कहीं पे गलत है। इसका मतलब इनका अंतिम प्रमाण मुरली भी नहीं है। अब हम इस पे बात करेंगे कि इनका अंतिम प्रमाण क्या वेद और गीता है। ठीक है? इस पे बात करेंगे। तो सबसे पहले आप ये बताइए आपने एक बात कही कि सभी धर्मों से ज्ञान आता है। है ना? सभी धर्म सही है। ठीक। सभी धर्म सही है। मतलब जो तो अब मुझे अब देखिए अब बहुत बिल्कुल आत्मज्ञान आत्मज्ञान की बात ही करेंगे। बिल्कुल पक्की बात करेंगे। उसको ले मैं उसी की बात कर रहा हूं। मैं उसी की बात कर रहा हूं। मैं उसी की बात कर रहा हूं। मैं उसी काउंटर करने की पक्ष विपक्ष भाई साहब मैं कोई गुलदस्ता नहीं। मैं मैं बता रहा हूं। अब आप मुझे यह बता दीजिए धर्म किसे कहते हैं आप? आपने कहा ना सभी धर्म यानी कि सनातन के अलावा और भी धर्म धर्म ही है आपके हिसाब। नहीं नहीं और कोई है ही नहीं। आप ही तो कह रहे हो। आत्मा को ही धर्म कहा जाता है। कहां पे लिखा है? कहां पे लिखा है? आत्मा को धर्म कहा जाता है। आत्मा तो एक तत्व है। धर्म के द्वारा प्राप्त किया जाने वाला। धर्म के द्वारा प्राप्त अथातो धर्म जिज्ञासा अर्थातो ब्रह्म जिज्ञासा। धर्म से ब्रह्म तत्व आया कहां से? धर्म से ब्रह्म प्राप्त होता है। आत्मा धर्म नहीं है। आत्मा-आत्मिक उच्चतम स्तर तक पहुंचना

00:02:37:06 पहुंचने का प्रयास करने हेतु धर्म आत्मा से भिन्न नहीं है तो अभिन्न भी नहीं है। आप भिन्न करके दिखाओ। अरे दिखा तो रहा हूं भाई। धर्म क्रिया है। और जो क्या कहते हैं जो वो है ब्रह्म आत्मा वो परिणाम है। हां। समझ रहे हैं? धर्म क्रिया है। क्रिया व्हाट टू डू व्हाट क्या करना है? क्या नहीं करना है? इसलिए भगवत गीता 16 24 में कहा है तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में एकमात्र शास्त्र प्रमाण है। यानी क्रिया का नाम धर्म है कि ये करना है ये नहीं करना है। इससे विवाह करना है इससे नहीं करना है। ये धर्म है। अब इस ये ऐसा करने से होगा क्या? हमको अपने आत्मज्ञान मिलेगा। आत्मा तक पहुंचेंगे। वो प्राप्तव्य है। ठीक है? तो धर्म माना जिस धर्म के रास्ते पे हम चल रहे हैं। जिसको उसका लक्ष्य उसका लक्ष्य है धर्म। उसका लक्ष्य है आत्मा। उसका लक्ष्य है ब्रह्म। आपने कहा ना आत्मा ही धर्म है। आत्मा ही धर्म नहीं है। प्राप्त हो जाता है तब धर्म की शुरुआत होती है। अगर आप आत्मा की स्थिति से आत्मनिष्ठ से नीचे हैं। मन की मुझे आप मुझे थोड़ा सा उदाहरण दीजिए। आपके अनुसार धर्म क्या है? जो आप कह रहे है सनातन के अलावा ये कुरान इत्यादि भी धर्म है। देह के आधार से कोई काला है, कोई गोरा है। मैंने पूछा कुरान इत्यादि भी धर्म है। मैंने पूछा कुरान इत्यादि

00:03:52:09 भी धर्म है। ये सब दैहिक धर्म है। दैहिक मान्यता है। धर्म है। तो यानी कि आपने जो कहा सभी धर्मों में ये बात होती है। वो सभी धर्म कौन-कौन से हैं? फिर सभी धर्म सभी नहीं धर्म एक हैं। आपने अभी कहा थोड़ी देर पहले सभी धर्म की बात ये सभी संप्रदाय हैं। मान्यताएं हैं। तो इसका मतलब आप उन्हें धर्म नहीं मानते ना? मतलब मानसिक व्यवस्था है। मनुसकृत व्यवस्था है। एक जो समाज मन से उत्पन्न जो व्यवस्था है वो मनुष्य आप धर्म मानते हैं उनको कि नहीं? उनमें धर्म है पर धर्म उनमें धर्म है। उनमें धर्म है। पूरे प्रॉपर धर्म नहीं है। पहले समझो बात को समझो। हां हां हां अगर शरीर है हां तो बिना आत्मा के नहीं है। हां आ जहां शरीर है वहां आत्मा है। हां जीव आत्मा में आत्मा का ही धर्म है। हम्म अगर कोई अपने को देह के कॉन्शियस में लेकर चल रहा है हम्म तो वो धर्म से विरुद्ध है। दैहिक धारणा में है कि मैं हिंदू हूं। टीका लगा लिया तो मैं पंडित हूं। मोच कटा ली तो मैं मुसलमान हूं। ये फला एक आडंबर जो भी मान लो देह की क्रिया कर्म लेकिन वास्तव में जो आत्मनिष्ठ है जो आत्मा का धर्म है वहां सभी के अंदर वो आत्मा है जिसको कोई रूह कहता है कोई फॉल कहता है कोई आत्मा

00:05:07:10 कहता है है ना तो ये भिन्नता नहीं एक ही तत्व वो अविनाशी तत्व है मैंने मैंने प्रश्न ये कहां कहा है कि भैया सब में समानता क्या है मेरा प्रश्न ये है मेरा प्रश्न ये है सबसे पहले कि आपकी धर्म धर्म की परिभाषा क्या है और उसकी अपने को आत्मा समझ अपने आराध्य को याद करो ये तो लक्षण है ये लक्षण है जैसे मैंने पूछा कि भैया मोटरसाइकिल क्या है तो आपने ये नहीं बताया दो पहियों से चलने वाली पेट्रोल डालकर चलने वाली या एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाने वाली ये नहीं आपने बताया आपने आपने क्या बताया वो नीली कलर की बुलेट जो है वो मोटरसाइकिल है हमने टैग नहीं लगाया है मैंने मैंने क्या पूछा है आपने टैग नहीं लगाया जहां टैग लग जाता है वहां धर्म आपने आपने वस्तुनिष्ठ कर दिया ना वस्तु आप अपने आप को आत्मा मानो यह धर्म है मैं लक्षण नहीं पूछ रहा हूं मैं उसकी उपयोगिता के अनुसार परिभाषा पूछ रहा हूं जो अविनाशी तत्व है जिसका कभी विनाश नहीं होता

00:06:03:13 मैंने क्या पूछा कुछ भी मैंने क्या पूछा मैंने आपसे क्या पूछा धर्म की उपयोगिता के अनुसार उसकी परिभाषा क्या है जिसका कभी विनाश नहीं होता है अरे भैया ये जिसका कभी विनाश नहीं होता ये परिभाषा है अधर्म की उसी से ये मैंने उपयोग मैंने अगर वो मैंने उपयोगिता के अनुसार उपयोगिता क्या है धर्म की क्या मिलेगा हमको ईश्वर द्वारा नियत किए हुए जो भी कर्तव्य कर्म है वो उसकी उपयोगिता है उस धर्म अर्थात आत्मा की शक्त आत्मा का पर्यायवाची शब्द शक्ति की उपयोगिता है वो शक्ति भिन्न-भिन्न रूपों में जीवन के फिर आप उसके लक्षण बता रहे हो यूटिलाइज होते फिर आप उसके लक्षण बता रहे हो मैं पूछ रहा हूं कि धर्म से हमें प्राप्त क्या होगा इस विषय में धर्म की परिभाषा बताइए की ही तो बात कर रहे हैं आवश्यकता आविष्कार की जननी है तो बताइए ना क्या मिलेगा धर्म से जैसे सुबह है धर्म से क्या मिलेगा पूछ रहा हूं धर्म से आपको सुख शांति आनंद प्रेम मिलेगा मुक्ति जीवन मुक्ति मिलेगी अच्छा यानी कि यानी कि भगवत प्राप्ति होगी यानी कि रूप में यानी कि भगवान की प्राप्ति होगी ये धर्म है ठीक है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की प्राप्ति होगी परम सुख मिलेगा अनंत जीवन है ना सच्चिदानंद अमृत ठीक है ये आपने अब आए यहां पर कि धर्म से आपको ये प्राप्त होता जो

00:07:19:10 प्राप्त है। अब यह बताइए हमें जो आपने लक्षण बताए कि जो है जो ईश्वर द्वारा बताए गए तो ये ईश्वर द्वारा बताया गया जो धर्म है ये आप किसे मान रहे हैं? कहां पे लिखा हुआ है? क्या है? देखो हां अगर आप अपनी दृष्टि से देखते हैं हम अपनी खुद की दृष्टि से। जी तो यहां पर हो सकता है कि आपकी मन की बात है, मनगढ़ंत बात हो सकती है। हम्म दृष्टि भी कई तरह की होती है। तो किस कैसे पता लगाएं क्या धर्म है? वो निश्चित कहां से हो रहा है? जो ईश्वर तक पहुंचाएगा। जी जी। जो आत्म दृष्टि होती है, परमात्म दृष्टि होती है। उस दृष्टि से अगर सभी देखना शुरू करें जिसको उसकी पहचान क्या है? बिल्कुल प्रैक्टिकल थोड़ा सा बताइए। जैसे कि मान लीजिए मेरे सामने मतलब मैं बता मैं पूछ रहा हूं। मैं पूछ रहा हूं। जैसे कि मेरे सामने एक महिला खड़ी है। जी ठीक। मुझे उसके साथ किस प्रकार का व्यवहार करना है? व्यवहार करना ही धर्म और अधर्म है। अगर मैं सही व्यवहार का व्यवहार हां तो अब आप मुझे बताइए किस दृष्टि से पता चलेगा कैसे पता चलेगा कि उसके साथ क्या व्यवहार करना है? उस पहली बात उसकी आवश्यकता क्या है? और फिर आ ईश्वर ने हमें सिखाया क्या है? हमारे आराध्य ने हमें सिखाया क्या है? तो बताइए ना कैसे

00:08:34:16 आपने पता किया कि किसी स्त्री के साथ क्या व्यवहार क्यों करना है? आत्मीयता से अगर स्त्री है, मां है तो एक बच्चे बच्चे का तो ये आपको किसने बताया? आत्मा ने बताया आपके माता-पिता ने बताया है? ये हमारे ईश्वर द्वारा अरे ईश्वर ने कान में आ के कहा है। कैसे कहा है? मैं प्रैक्टिकली पूछ रहा हूं। हमने हमें गीता, वेद, पुराण, माता-पिता, बुजुर्गों से, अपने पूर्वजों से, अपने देवी देवताओं से, अपने फ्रेंड सर्किल से सीखी है। अच्छा मतलब बहुत सारे लोगों से सीखी है। बहुत सारे लोगों ने बहुत सारे लोगों मतलब उन्होंने गलत नहीं सिखाया है। अरे ये आपको पता कैसे लगा उन्होंने गलत सिखाया कि नहीं सिखाया? जब बच्चे थे तो बच्चे की बात अलग लेकिन अभी जब बच्चा बड़ा होता है तो माता-पिता गुरु होते हैं। आपके लिए माता-पिता प्रमाण हैं। माता-पिता माता-पिता गलत बात तो नहीं बोलते? नहीं बोलते। किसी के भी नहीं बोलते। तो वो माता-पिता कौन है जो हत्या कर देते हैं अपने बच्चे की? ये फालतू की बातें मत करो भाई। जी अखबार में कितनी न्यूज़ आ रही मां मां ने अपने बेटे की हत्या कर दी। पत्नी ने अपने पति की हत्या कर दी। वो माता नहीं होती है। वो कुमाता होती है। माता माता है ना उसमें भी कुमाता में है। हां माता के बिना कु हो गया क्या? देखो आत्मा होती है। आज सुनिए मेरी बात।

00:09:49:18 देखिए हम लोग गलत डायरेक्शन हम लोग गलत डायरेक्शन में जा रहे हैं। तो हम लोग गलत हम लोग गलत डायरेक्शन में जा रहे हैं। आत्मा सिर्फ आत्मा होती है। हम लोग गलत हम लोग गलत डायरेक्शन में जा रहे हैं। बात ये है कि आपका धर्म निश्चित कहां से हो रहा है? यह बता दीजिए मुझे। कैसे निश्चित कर रहे हैं कि क्या करना है और क्या नहीं करना बस अपने आप को आत्मा समझकर आराध्य को याद करना अरे वह आराध्य कहां से आ रहा है आपका कहां पे उसका वर्णन है कहां पे उसका वर्णन है वो जो आराध्य है आपका वो कहां से आ रहा है कहां से निश्चित हो रहा है ये वाला आराध्य है मेरा ये अभिव्यक्ति की आजादी है। अभिव्यक्ति की आजादी मतलब किसी को भी आराध्य मान लो किसी को मतलब यही आजादी तो चाहे कोई हनुमान [हंसी] हनुमान को मानने वाला है हनुमान को भी अगर कोई हनुमान का भी भक्त हो सकता है उसके लिए हनुमान ही उसके भगवान है उसके लिए हनुमान ही अब आप कहो नहीं राम ही भगवान है मैंने कब कहा मैंने कहा कि शास्त्रों से आ रहे हैं आपके भगवान मैं पूछ रहा हूं शास्त्रों से आ रहे हैं आपके भगवान अगर मैं हूं एक छोटी सी बात आप जिस बात का मतलब एक कर रहे हैं देखो मैं हूं मैं एक अकेला हूं। पर मैं किसी का भाई हूं। आप मेरी बात को आप मेरी बात को कुछ और समझ रहे हैं। मैं पूछ रहा हूं। आप जिसको आराध्य कह रहे हैं वो हमारे सनातन शास्त्रों से आराध्य है या कहीं से भी आपने कुछ चुन लिया है।

00:11:05:18 सनातन की परिभाषा को आप क्या मानते हो? इस सृष्टि में सनातन परिभाषा जो सनातन शास्त्र वो है जो वैदिक शास्त्र हैं। अपौरुषय शास्त्र हैं। बृहधारणिक उपनिषद के साथ उनको ईश्वर ने भी नहीं रचा है। वो है सनातन शास्त्र। उनको मानने वाला सनातनी है। सनातनी हर कोई है। सुनिए सनातन हर कोई है। जो था है और रहेगा। हर कोई है। मीरा की दृष्टि क्या है? मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। एक ही सनातन शाश्वत परम तत्व अपने आप को विभिन्न रूपों में प्रकट करता है। वो कहीं मीरा का श्याम बन जाता है। कहीं तुलसीदास का राम बन जाता है। और कहीं पे हनुमान बन जाता है। ठीक है। वो एक ही परम तत्व ये सब बन रहा है। तो मैं ये नहीं कह रहा कि इनमें से आप किसको मान रहे हैं। मैं ये कह रहा हूं रुको। यहीं पे रुको, आप यहीं पे रुको। एक ही वो परम तत्व है। जो किसी के लिए कहीं एक्टिव अह प्रत्यक्ष हो जाता है। किसी के लिए कहीं कुछ बनकर प्रत्यक्ष हो जाता है। तो भगवान आकर के सभी की सर्व मनोकामनाएं कहते हैं ना दाता एक राम भिखारी। अरे यार मुझको ये सब आप क्यों बता रहे हैं? ये सब तो मैं मानता ही नहीं। बता रहा हूं इसलिए बता रहा हूं कि आप उसको पर्टिकुलर करने की कहां पर्टिकुलर किया? मैंने पूछा आप जिसको आराध्य कह रहे हैं वो कहां से आते बाइबल से आते हैं। बाइबल कहां से आते हैं? उसकी निश्चितता है कि नहीं है? आप उसके विराट

00:12:20:19 रूप को देखो। मैं विराट रूप में भी आऊंगा। मैं विराट ठीक है। ठीक है। तो अब आप ये बता दीजिए। विराट में यानी कि शास्त्रों यानी कि ठीक है। ठीक है। ठीक है। अब मैं पूछ रहा हूं। यानी कि शास्त्रों की सीमा के बाहर भी ईश्वर के स्वरूप को स्वीकार किया जा सकता है। हां। बहुत अच्छी बात। इतनी देर से बोलो ना। यह क्यों नहीं बोल रहे? अब अब देखिए अब मैं अब मैं अब आगे बढ़े युक्त हो मैं संप्रदाय पे ही लाऊंगा आपको मैं ला ले आऊंगा मुझे बोलने दीजिए बताइए अब ये बताइए कि शास्त्रों की सीमा के बाहर भी किसी भी ईश्वर के स्वरूप को ग्रहण किया जा सकता है तो किसी का मन कर रहा है कि मैं जो है मल को ईश्वर मानू तो मान ले मान ले है देखो मल को ईश्वर मानने का मतलब ये कि सूअर है हम प्रकृति सूअर नहीं सीधे मल उसको ईश्वर मानना ठीक है जिसकी जो जरूरत होती है। उसका ही यानी कि यानी कि अपने अनुसार जो जो मान रहा है वो सही है। इस सृष्टि में गलत क्या है? मैं बता रहा हूं। निठारी ने कुकर में डाल के बच्चे खाए थे कि नहीं खाए थे? वो गलत था कि नहीं? गलत। वो आवाज कहां से आ रही थी? तो जो कुछ हो रहा है। हां। नहीं वो आवाज उसकी आत्मा से आई थी। वो कह रहा है। तो उसने सही किया। जो कुछ हो रहा है टैग ही क्यों लगाते हो? अरे मैं पूछ रहा हूं। आपने कहा कि शास्त्रों के बाहर भी ईश्वर के स्वरूप को ग्रहण किया। एक

00:13:35:27 भाई साहब बात मत पलटिए। नहीं ये बात नहीं। बात एक बात ये चल रही सुनिए बात ये बात ये चल रही है बात ये चल रही है निठारी का जो ईश्वर था वो कुकर में बच्चों का पकाया हुआ मांस था तो इसका मतलब आप अपने मन से जो कुछ भी किसी को भगवान मान ले वो मान लेना चाहिए आपने अभी कहा ना कि शास्त्रों के बाहर भी वो है भगवान का स्वरूप सुनिए अब मैं बताता हूं आपकी आपकी आपकी विराट आपकी विराट आपकी विराट स्वरूप वाली आपकी विराट स्वरूप वाली बात का जवाब देता हूं ईश्वर अनंत है। ठीक है सर मैं मैं बता रहा हूं आप सुनके संतुष्ट हो जाओगे रुको मुझे बोलने दो आप बता रहे हो लेकिन जो निठारे की बात मैं मैं गलत फिर उदाहरण दे कर के उसको सही करना मैं फिर नहीं दूंगा नहीं मैं मैम उस आपका जवाब आपका जवाब आपका जवाब दे रहा हूं आपका जवाब दे रहा हूं जी बताइए सुनिए ईश्वर अनंत है उसकी कोई सीमा नहीं है सब कुछ ईश्वर है ठीक सब कुछ ईश्वर है मगर हम ईश्वर के उस स्वरूप को भजते हैं ईश्वर के उस स्वरूप रूप का अनुकरण अनुसरण करते हैं। पूजा वंदना करते हैं। जो हमारे शास्त्र की सीमा में आता है। अब क्यों करते हैं? पानी हर जगह है। नमी इत्यादि के रूप में हवा में भी है। मगर हम पानी के उस स्वरूप को ग्रहण करते हैं जो हमारे व्यवहार

00:14:51:03 की सीमा में आ जाए। उसी प्रकार से ईश्वर हर जगह है। कुछ भी ईश्वर के बिना है ही नहीं। ईश्वर अनंत है। वो वाणी का विषय नहीं है। मगर हम ईश्वर के उस स्वरूप को भजते हैं, वंदना करते हैं जो वेद रूपी व्यवहार की सीमा में हमारे आ जाए। वो हमारे लिए ग्रहण करने योग्य है। ये सिर्फ आप करते हो। ये सिर्फ आप करते हो। आपको तो मैंने अभी मैंने अभी क्या पूछा? कि मल को मानना चाहिए ईश्वर कि नहीं? आप शिक्षा दोगे मल को मानने की? अगर चराचर जगत परमात्मा का विराट रूप है। अगर ये प्रकृति पति परमात्मा मैंने आपसे क्या पूछा? कोई व्यक्ति अगर मल की पूजा आपके घर में लाके मल की पूजा करेगा आप मानोगे उसको सही करोगे या रोकोगे कम कमल क्या है मैं आप मैं आपसे क्या पूछा भाई साहब मैंने क्या पूछा कोई मैंने क्या पूछा आपसे कोई मल को ला के आप आप मल से भिन्न नहीं हो मैं क्या पूछ रहा हूं आप पूजा करने दोगे वो आपके यहां पूजा के मंदिर में ला के मल को रखेगा और उसकी पूजा करना चाहेगा आप रोकोगे उसको को प्रायोरिटी क्यों दे रहे हो मैं वो प्रकृति है ना सब कुछ है ना वो मल में अपना ईश्वर देख रहा है अगर दूध है दूध मैंने क्या कहा? देखिए भाई साहब भाई साहब देखिए बहुत दही भी मैंने आपसे पूछा है। मैंने आपसे पूछा है कि लेकिन हमारा गोल मतलब मैंने आपसे पूछा है कोई मल की पूजा करेगा

00:16:06:09 आपके यहां घर में ला के करने दोगे रोकोगे? तो कह रहे हैं रोकोगे कि नहीं? भाई यही तो कह रहे हैं। मैं पूछ रहा हूं रोकोगे कि नहीं? रोकोगे। इसका मतलब वो पूरे सबको वो नहीं मान सकते भगवान। तो यही तो कह रहे हैं यथार्थ की बात। इसका मतलब कोई सीमा है जिस जिसके बाहर भगवान के स्वरूप को नहीं स्वीकार कर सकते। सिंपल, अब आप मुझे ये बता दीजिए। हां। अब आप मुझे ये बता दीजिए। ईश्वर है ये सिद्ध कैसे होता है? ईश्वर है ये सिद्ध कैसे होता है? हां। ईश्वर निस्वार्थ होता है। हम्म। निष्पक्ष होता है। नहीं मैं पूछ रहा हूं सिद्ध कैसे होता है इस दुनिया में कोई ईश्वर? उससे प्रेम हम सुख शांति हम आनंद की मतलब एक जो अविनाशी खुशबू है ईश्वर की जो खुशबू है वो उसके आत्मा को मिलती है अनुभव होती है ये उसकी ये तो पहचान है ईश्वर की खुशबू मुझे नहीं आ रही मुझे नहीं आ रही अभी फिर आपको ईश्वर नहीं है तो आपको क्या मेरे समक्ष सिद्ध करो ना ईश्वर है आपके समक्ष एक नास्तिक बैठा हुआ है सिद्ध करिए ईश्वर है तो नास्तिक बैठा है। देखो परम अगर कोई कहता है कि परमात्मा कहां है? आप उसे ऐसे मैं कहां कह रहा हूं कहां है? मैंने कहा परमात्मा है पहले ये

00:17:21:13 सिद्ध तो करो। कोई सुप्रीम कंट्रोलर सुनिए आराध्य को अपने दिल में याद कर कोई सुप्रीम कंट्रोलर है इस दुनिया में। वो सिद्ध कर सकते हैं आप? सुप्रीम कंट्रोलर है वो सिद्ध कर सकता है। बताइए हमारे आराध्य ही हमारे लिए सुप्रीम कंट्रोलर है। मैंने नहीं पूछा कि कौन है सुप्रीम कंट्रोलर? मैं पूछ रहा हूं कोई सुप्रीम कंट्रोलर है। ये हम विश्वास कैसे करें? सुप्रीम कंट्रोलर मतलब जो अविनाशी है जिसका कभी विनाश नहीं होता है। जो स्थिति प्रज्ञ है, अचल है, अडोल है। हां। है वो कैसे पता? वो ऐसे पता कि सब कुछ जो श्री कृष्ण के रूप में आया था। जो श्री कृष्ण के रूप में आया भी था। हां आया था। हां ठीक। ठीक है। अब कैसे श्री कृष्ण के रूप में मतलब विराट रूप में सब कुछ आ जाता है। आप भी आ जाते। अरे भैया मैंने क्या कहा विराग ये पत्ते ये दीवार ये बैग ये कैमरा ये सब कुछ ब्रह्म है सुनो वही तो अरे मेरे को बोलने दो मगर ये सब सावरण ब्रह्म है इसने माया के कपड़े पहने हैं स्वरूप है मुझे बोलने दो ना जब मैं बोल रहा हूं ये सावरण ब्रह्म है जिसने माया के कपड़े पहने हैं मगर श्री राम कृष्ण इत्यादि जो भगवान अवतार लेते हैं वो निरावरण ब्रह्म होता है वो माया के कपड़े ओढ़ के नहीं माया

00:18:36:16 के कपड़े हटा के आता है हमारे सामने इसलिए वो हमारे लिए भजनीय और पूजनीय होता है। अगर हम यह मान लेंगे कि सब कुछ ब्रह्म है इसलिए किसी की भी पूजा करो तो मैंने आपसे पूछा मल की पूजा करो। आपने मना कर दिया नहीं करेंगे। रोक देंगे हम। हटा के हटा के मतलब वो होता है। सब कुछ ब्रह्म है। मैंने क्या कहा? निरावरण ब्रह्म मतलब उसकी निराकारी स्थिति होती है। निरावरण ब्रह्म मतलब स्टेज होता है। मैं बता रहा हूं। जैसे आपके सामने माया का ये पर्दा है। इसके उधर परम सत्य है। आपको कुछ नहीं दिख रहा। उसके उधर। आपको यह दुनिया दिख रही है व्यवहारिक प्रपंच रूपी संसार दिख रहा है। पेड़ पौधे एक मिनट एक मिनट ठीक है अब इसमें भगवान क्या करते हैं एक चीरा लगाते हैं मनुष्य की आकृति का ठीक और अब क्या दिख रहा है उस चीरे से जब हम देख रहे हैं तो वो उधर का परम तत्व एक आकार में दिख रहा है हमें जैसे हम बंद कमरे से आसमान को देखे ना खिड़की के द्वारा तो चौकोर आसमान दिखता है जबकि आसमान तो अनंत है मगर हमको वो चौकोर दिखता है तो आसमान का वो अवतार होता है खिड़की के रूप में उसी तरीके से जब हम जो ब्रह्म जो हमारे समक्ष जो देख रहा है सिर्फ उसी तरीके से हां तो भगवान ये चीज निश्चित करते भगवान ने कहा ना भगवत गीता में कि जो लोग मुझे मनुष्य के रूप में जानते हैं मैं अपनी योग माया से छिपा रहता हूं तो ये सब कहा ना उन्होंने यही तो अपन अभी जो शुरुआत में हम कह रहे थे यही तो कह रहे थे भगवान आकर

00:19:52:09 सभी की सर्व मनोकामनाएं पूर्ण करता है भगवान है ये कैसे सिद्ध होता है पॉइंट से भटकिए मत सिद्ध कैसे होता है सिद्ध होता है मतलब वो अचल है अोल है अरे भाई आप उसके फीचर्स बता रहे हो मैं कह रहा हूं आप सिद्ध कैसे करोगे किसी को भगवान है उसकी जो सिद्ध मतलब जहां इच्छाएं होती हैं वहां परमात्मा नहीं होता है। अरे यार जो इच्छा मात्रम अविद्या होता है। जहां इच्छाएं होती है वहां परमात्मा नहीं होता है। परमात्मा का स्वरूप होता है। परमात्मा कहता है ये मेरा स्वरूप है। मैं मैं और मेरा ठीक है मैं समझ गया वो। ब्रह्मा कुमारीज के बारे में आपको बात करनी नहीं है। अच्छा एक लास्ट वो ये ले लेते हैं। जी ये ईश्वर है। ये सिद्ध करने के विषय में आप कोई बात कर नहीं रहे हैं। नहीं सिद्ध करने का मतलब परमा जो चीज है उसको अलग से सिद्ध करना। आप आप समझाओगे ना किसी को आप समझाओगे ना कि जैसे कि मान लीजिए कि सेब है। अब अब कोई कहे कि सेब है तो सिद्ध कर। मैंने कहा देखो इसको छू के देखो छूने से सिद्ध हो रहा है कि नहीं? अच्छा इसको देखो ये आपकी आंखें इसके उस पार देख रहे इसका। आत्मा को सिद्ध करने का पैरामीटर क्या है? मैं दूंगा पैरामीटर आप पहले बैठे हो आप बैठे हो जो कुछ भी दिख रहा है आप इसमें अपने आराध्य को देखो परमात्मा को देखो अरे

00:21:07:18 भैया परमात्मा को देखूंगा तब ना जब मैं मानूं कि परमात्मा है हां कैसे मानूं तो जो अनुभव जिसकी आपको आवश्यकता है जिससे [हंसी] आप खुश हैं संतुष्ट हैं उसमें चलो हटाओ अब मैं समझ गया इस पर बात करना व्यर्थ था ये और बता दूं मुझे कि आपके लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में निर्धारित कहां से होता है कि यही कर्तव्य है मेरा। कर्तव्य का मतलब यह है कि जो कुछ हम करते हैं इसको क्रिया आपकी क्रिया कहां से निर्धारित होगा? क्रियाएं अंतिम प्रमाण क्या है? जिसमें आप खोट ना देख सको। जैसे आपने मुरली में भी खोट देख लिया। अंतिम प्रमाण क्या है? खोट मतलब मतलब जिस पे आप ये हो ये कह रहा है तो सही होगा। सब कुछ मेरे आराध्य कर रहे हैं। जो कुछ मैं पूछ रहा हूं प्रमाण आराध्य आपसे बात करते हैं क्या? हम हम बात करते हैं। मन ही मन बात करते हैं। दिल से बात करते हैं। आप अपने इरादे से बात करते हैं। वो जो कहते हैं वो आप करते हैं। जी कंफर्म ना? कंफर्म। अच्छा ठीक। अब इस पे आपको फंसाते हैं। चलिए आपने कहा था ना कि वो मैं वो क्या कहा था शुरू में आपने कुछ कहा था? कि वो लोग कुछ हो जाते हैं। मैंने कहा था मैं अभी आपको जो है करूंगा। ठीक। अब ये बताइए इस संसार में जो लोग बुराई कर रहे हैं, झूठ बोल रहे हैं। उनका निमित्त कौन है?

00:22:23:27 कैसे बने वो जो बुराई कर रहे हैं वो निमित्त उनका निमित्त कौन है किस दृष्टि से परमा हेतु क्या है उनका कैसे कैसे अस्तित्व में आए वो अगर हम यथार्थ की बात करें हम तो जो आपको गलत दिखाई दे रहा है हम नेगेटिव पक्ष दिखाई दे रहा है वो भी सही है वो भी परमात्मा हां यानी कि यानी कि परमात्मा के ही कारण अच्छाई भी है और बुराई भी है। ना माना आपने पहले हम गीता में कि गीता में उन्होंने कहा है सत असत दोनों में हूं कहा है ना असत भी अगर सत्य है जड़ भी अगर चैतन्य भाषित होता है तो सत्य असत सत्य नहीं है 216 में कहा है कि असत का कभी भाव नहीं होता और सत का कभी अभाव नहीं होता असत नहीं है तो दोनों भिन्न नहीं है ना भिन्न क्यों भिन्न क्यों नहीं है माया अलग है असत और वो जो परमेश्वर अलग है ब्रह्म तो चलो दोनों को अलग कर दो अगर आप ये भिन्न ये जो अभिनाशाती और अविनाशी सत और असत ये दोनों जब कंबाइंड होते हैं दोनों का मेल होता है तभी सृष्टि गतिमान होती है। तो मैं कहां कह रहा हूं कि नहीं होती है। अगर आप शरीर को अलग-अलग कर दोगे तो मैं नहीं कह रहा मैं नहीं कह रहा। मैं वो नहीं मैं पूछ रहा हूं कि दुनिया में जो बुराई है उसका मूल कारण कहां से आ रहा है? जब आपने कहा कि पूरी दुनिया जो है ब्रह्म का ही वो है। सब कुछ भगवान ही

00:23:38:28 है। एक मिनट जहां से जहां से एक मिनट 1 मिनट मैं अपना मैं अपना प्रश्न क्लियर कर दूं। आपने अभी कहा था कि सब कुछ भगवान ही अनंत भगवान सब जगह भगवान है। जो अपना जिसमें ईश्वर देखना चाहे वो देख सकता है। अभी मैं आपसे पूछ रहा हूं। आपने कहा कि मैं ईश्वर से बातें करता हूं। मेरा धर्म ईश्वर से निर्धारित होता है। ठीक। अब मैं आपसे ये पूछ रहा हूं कि भैया जो दुनिया में बुराई हो रही है। जो व्यक्ति झूठ बोल रहा है वो उसके मूल कारण क्या है? मतलब वो कैसे बोल पा रहा है। हां वो वहां अपने आराध्य को परमात्मा को प्रायोरिटी ना दे कर के अपने मन को प्रायोरिटी अपनी इच्छाओं को प्रायोरिटी। ठीक है। ठीक है। तो वहां ईश्वर महा ईश्वर की सत्ता नहीं है क्या? नहीं सत्ता का मतलब विकृत रूप है। कंट्रोल है कि नहीं? भगवान का वहां विकृत रूप। भगवान चाहे तो रोक सकता है कि नहीं उसे? इसका मतलब जो झूठ बोल रहा है भगवान की सीमा में है वो। सब सब कुछ उसी के अंदर घटित हो रहा है। तो भगवान की सीमा में है ना। भगवान चाहे तो रोक सकता है ना? इसका मतलब भगवान झूठ बोलने दे रहा है किसी को। नहीं नहीं हम इच्छाएं हैं इच्छाएं हैं अगर कोई कहता है मैं ऐसा अच्छा अच्छा ये बताइए आपने कहा ईश्वर सर्वशक्तिमान है वो अबाध्य है जी वो झूठ बोल सकता है कि नहीं कौन ईश्वर अगर धर्म की रक्षा के लिए मैंने कहा झूठ बोल सकता है कि नहीं धर्म की रक्षा के लिए वो बोल सकता है बोल सकता है जी

00:24:54:00 तो हो सकता है अब धर्म की रक्षा के लिए आपको उल्लू बना रहा हो कौन जो आपसे बातें करता है अगर धर्म की रक्षा के लिए उल्लू बन बनना पड़े या बनाया जाए यानी कि आप विश्वास से नहीं कहा जा सकता कि वो आपको सही चीज बता रहा है। तो धर्म अर्थात सही चीज तथ्य तथ्य अरे जो जो झूठ बोल सकता है वो आपसे झूठ नहीं बोल रहा है। ये कैसे तय किया आपने? देखो धर्म को प्रायोरिटी है। आपको ये कैसे पता चला कि वो धर्म के लिए नहीं वो धर्म के लिए बोल रहा है आपसे। सत्य और असत्य का टैग क्यों लगाना है? आपने आपका जो प्रमाण है वो भगवान है ना? भगवान आपसे बातें करते हैं। वो आपको बताते हैं। सभी सभी आपने भगवान से बातें। नहीं हम नहीं करते। हमारे लिए वेद अपोरषय ग्रंथ प्रमाण है। हमारे सामने विष्णु भगवान बुद्ध के रूप में आए। हमने मना कर दिया। उनकी बात को नहीं माना। भगवान आए थे। तो ग्रंथ क्योंकि ग्रंथों को किसी ने तो लिखा होगा। मैं मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं। क्योंकि भगवान जो हैं वो सत असत दोनों के नियामक हैं। इसलिए वो हमारे लिए प्राप्तव्य तो हैं। अनुकरणीय तो हैं। अनुकरणीय नहीं अनुसरणीय तो हैं मगर उतनी हिस्से में जब तक वो वेद के साथ है। परम प्रमाण वेद है। अब वेद की बात आती है। वेद क्यों है? ठीक है? मैं बता रहा हूं। आपने अभी सवाल किया है। जी। वेद इसलिए हैं क्योंकि वेद कभी यह क्लेम नहीं करते कि हमको भगवान ने लिखा या फलाने मनुष्य ने लिखा। वेद जो है अपौरुषय हैं।

00:26:09:10 वो स्वास रूप में वेद जो है प्रकट होते हैं। स्वास रूप क्या है वो समझा देता हूं। हम दो प्रकार के कार्य करते हैं। ठीक है? एक चाहकर और एक बिना चाहकर। हम जब हम चाहकर कुछ करते हैं तो हम यह निर्णय ले सकते हैं कि हमें यह करना है या वो करना है। जैसे फॉर एग्जांपल मैं आपको बताऊं कि अगर मैं चाहता हूं कुछ उठाना तो मैं चाहूं तो ये लिफाफा उठाऊं और या मैं चाहूं तो एक मोबाइल उठाऊं क्योंकि मैं चाहता हूं मेरा इसमें बुद्धि है। ठीक है। मगर कुछ कार्य हम ऐसे भी करते हैं जिसमें हमारी चाहत नहीं होती है। वृद्ध उपनिषद में लिखा हुआ है। इच्छा मात्र में अविद्या है। नहीं जिसमें हमारी इच्छा नहीं होती है। वो हमारे शुद्ध जो जो स्वभाव है ना एक मिनट भाई भाई साहब एक मिनट भाई साहब एक मिनट मुझे कंप्लीट करने दीजिए तो कुछ कार्य हम ऐसे भी करते हैं जिस वो इच्छा पूर्वक नहीं होते बुद्धि पूर्वक नहीं होते वो हमारे स्वभाव के कारण होते हैं नैसर्गिक होता है सुनिए सुनिए सुनिए तो अब जो है जैसे बच्चा सांस ले रहा है ठीक है तो बच्चा सांस ले रहा है छोटा सा बच्चा है वो भी सांस ले रहा है उसमें ना तो उसकी कोई बुद्धि है ना कोई इच्छा है वो सांस ले रहा है इसी प्रकार से जो वेद है भगवान की स्वास के रूप में है भगवान ने वेद रचे नहीं है इच्छा पूर्वक रचेंगे तो यह आ जाएगा भैया माया भी तो इन्होंने बनाई संसार भी तो इन्होंने बनाया तो वेद पर विश्वास कैसे करें तो वेद उन्होंने

00:27:24:12 रचे नहीं है वेद अपौषय ग्रंथ है किसी ने नहीं रचे मतलब संकल्प किया संकल्प उठा संकल्प नहीं वो वो स्वास रूप में प्रकट होते हैं भगवान केत है हां प्रकृति नहीं है प्रकृतिग्रत है मायाकृत हो जाएंगे प्रकृति होंगे वो अपारुषय ग्रंथ है इसलिए इसलिए एक मिनट ईश्वरत है एक मिनट ईश्वरत भी नहीं है अपारषयत है उनका उनका निर्माण करता कोई नहीं है। करता कोई नहीं है। यही तो बात है। यहीं पे तो हम इस्लाम की धारा को जो है वो करते हैं खंडित। ठीक है? वो अनाद अब सुनिए अब अब जब भगवान आपसे इच्छा पूर्वक आकर के कुछ बोल रहे हैं तो भगवान ने तो भस्मासुर को भी उल्लू बनाया था। बनाया था कि नहीं? भगवान ने जो है खूब सारी ऐसी लीलाएं की है। काल्यावन को जो है मचकुंद में ले जाकर के मचकुंद महाराज की जी के द्वारा मरवा दिया था। पर भस्मासुर के द्वारा कोई धर्म की तो स्थापना नहीं हुई थी। तो यह कैसे पता कि आप कोई गलत भाई जब कोई भगवान का अनुसरण करता है भगवान के भगवान की शरणागति में आता है तो माया उसको विक्षिप्त नहीं करती उसको व्यथित नहीं करती माया उसका सुरक्षा कवच बन जाती है वो माया पति है लेकिन जब कोई मैंपन में आ कर के अहम भाव में आ कर के संकल्प करता है मैं भी कुछ कर सकता हूं तो वहां भिन्नता पैदा होती है वहां गलत और सही काम अरे आप ही तो कर

00:28:39:15 रहे हैं कि मैं बात कर रहा हूं डायरेक्ट ना वेद को मान रहे हैं ना उसको को मान रहे हैं गीता को परम प्रमाण आप अपने आप को मान रहे हैं। भाई आपके आपके पास कोई माया रूपी कोई अरिष्ट शक्ति आकर के बात कर रही है या भगवान ही बात कर रहे हैं। मैं कैमरे के सामने आपके माध्यम से मैं इस बात को फिर से स्पष्ट कर देता हूं। मैं जो कुछ हूं अपने मैं कुछ नहीं हूं। लेकिन जो कुछ हूं अपने आराध्य मैं जो हूं जैसा हूं। अपने तो आपने अपने आराध्य के बारे में बताया कि आपके आराध्य भगवान विष्णु है। शंकर है कौन है? हमारे कौन से शास्त्र में वर्णित है भगवान शिव है और शिव जो है वो तो शिव ने कहा है क्या शिव ने कहा है क्या कि मेरी बात मानो ब्रह्मा विष्णु शंकर माता पिता ऐसा है पूरा वृक्ष आपकी सब कल्पनाएं हैं ये कल्पनाएं नहीं है तो मैं पूछ तो रहा हूं कि भगवान तो झूठ भी बोल सकते हैं ना तो उनकी बात कैसे मान रहे हो भगवान झूठ देखो भगवान झूठ बोल सकते हैं देखो अगर कोई कार्य करना होता गीता में युद्ध हुआ कौरव पांडव के बीच में युद्ध हुआ आपने चलो कौरव पांडवों के बीच में युद्ध हुआ अर्जुन जो था जब भगवान की शरणागति में आया तो भगवान ने उसको दिव्य दृष्टि से अपना विराट रूप दिखाया और कहा जब उसने दिव्य दृष्टि से अपना रूप दिखाया तो

00:29:54:16 वहां पे अर्जुन का नष्टो मोह हो गया अर्जुन का अपना कुछ नहीं बचा फिर अर्जुन ने कहा कि प्रभु आप जैसे कहोगे वैसे हम चलेंगे हर बात में वो हां जी करता था उसकी अपनी कोई इच्छा नहीं थी फिर उसके बाद युद्ध में किसी ने देखा कि पांडव ने कौरवों को मारा कौरवों पांडवों को मारा। क्या हो रहा? पर बरबरीक ने क्या कहा? क्या हो रहा है? हो रहा है क्या? मैं पूछ रहा हूं कि भगवान जो आपसे आके बात कर रहे हैं आपको कैसे पता वो आपसे झूठ नहीं बोल रहे? वही तो बता रहा हूं। बरबरीिक क्योंकि आपने मान लिया है कि भगवान झूठ भी बोल सकते हैं। गीता का एक ही सत्य साक्षी था। यथार्थ साक्षी था बरबरीक। उसने देखा कि ना कौरवों ने पांडवों का मारा ना पांडवों ने कौरवों को मारा। पूरे युद्ध में एक ही सुदर्शन चक्र चल रहा था। क्या बोल रहे हैं भाई साहब? मैंने पूछा है कि जब भगवान सत्य और असत दोनों के नियामक हैं तो आपको कैसे पता कि वो आपके कान में आकर के सत्य बोल रहे हैं? तो अगर वो सत्य ही है असत्य जब सत्य है तो वहां गलत और सही नहीं है। पक्ष विपक्ष है ना भगवान असत्य भी तो बोल रहे हैं बुद्ध के रूप में आकर के। तो अगर आप जहां जहां भगवान है वहां शैतान नहीं। जहां शैतान है वहां भगवान नहीं है। अरे मैं कह रहा हूं कि शैतान को बनाने वाला कौन है? तो शैतान को बनाने कहां से आया? शैतान को बनाने वाला है। कौन है? खुद मैं मेरापन है रावण

00:31:10:00 है भगवान नहीं है अब नियामक भगवान नहीं है नियामक मतलब उसकी मूल में कौन है शक्ति जब उससे विमुख हो की शक्ति जब शिव से विमुख हो जाती है तो शिव की इच्छा के बिना हो सकती है प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मैं पूछ रहा हूं शिव जी अगर चाहे तो विपक्ष होती हुई शक्ति को रोक सकते हैं शिव डायरेक्ट जब शिव डायरेक्ट हस्तक्षेप करता है इंटरफेयर करता है तो शिव के अकॉर्डिंग सब होता है और यानी की रोक सकते हैं ना रोक सकते हैं तो फिर नहीं रोक रहे ना तो इसका मतलब उनकी इच्छा की सीमा में है झूठ बोलना और जब शिव ठीक है बहुत बातें हो गई वैसे भी आप जो है पर्टिकुलर ब्रह्मा कुमारीज के पक्ष की ओर से बैठे नहीं हो तो हमारा जो है आपको समय देना बहुत आवश्यक नहीं है कोई ठीक नहीं है लेकिन बात ये है बात ये है कि वसुदेव कुटुंबकम की वसुदेव कुटुंबकम पे आप नहीं जा रहे हो आप जो है कुरान को कह रहे हो कि वो भी धर्म है उसमें लिखा हुआ है कुरान को धर्म नहीं मान रहे हैं तो क्या कह रहे हो धर्म है आपने क्या दैहिक मान्यताएं हैं। लेकिन अरे तो भैया आप जब ये आप आत्मा की मान्यता मान रहे हो तो आत्मा से तो निठारी कह रहा है आप निठारी के क्यों नहीं करेंगे मीरा के जो कृष्ण थे वो वैदिक है वैदिक है तो सिद्ध करो फिर मीरा सभी अगर वो काली के मंदिर में जाती थी अगर वो विष्णु के मंदिर में जाती थी

00:32:25:08 किसी के भी मंदिर में जाती थी तो वो सिर्फ अपने आराध्य का दर्शन तो हमारे शास्त्रों में लिखा है ना कि सबका एक ही स्वरूप है एक ही स्वरूप श्री श्री कृष्ण के रूप में अवतरित हुआ यही तो कह रहे हैं कि हर जगह आप वो चर्च में नहीं गई थी मीरा चर्च में जाके उसने नहीं कहा श्री कृष्ण चर्च को फिर क्यों क्यों ला रहे हो देखो तू कहां से आया तो वो आया ना वो हर जगह अपने श्री वो देख तो वैदिक रूप को रही है ना वो ये तो नहीं कह रही ये जो जीसस क्राइस्ट है ये भी मेरा भगवान है चलो ठीक है बस बस बंद करो भगवान की दृष्टि से चश्मे को लगाना चाहिए ना भाई देखो अरे भैया शास्त्र की दृष्टि से चश्मा लगता है वरना कोई निठारी बन जाएगा क्या करोगे आप वो कहेगा भैया मेरी आत्मा में आके भगवान ने कहा है बच्चे खाओ वो कहेगा भाई कृष्णपुरी कृष्णपुरी मैं पूछ रहा हूं आपसे निठारी भिखारी के भगवान ने उससे कहा आ के बच्चे खाओ वो खा रहा है तो फिर उसका धर्म धर्म है नहीं ठीक है लेकिन कहने का मतलब यह है कल्याण की बात हो कल्याण की बात ये पता कैसे चला कि ये कल्याण की बात है मैं पूछ रहा हूं ये पता कैसे चला कि कल्याण मैं पूछ रहा हूं कि ये कल्याण की बात है पता कैसे चला आपको ये फ़ोर्स जो लगी हुई है ना इधर उधर सुनो सुनो सुनो ये आर्मी सुनो ये आर्मी और सुन लो ये आर्मी ये पुलिस फ़ ये जो क्षत्रिय इधर-उधर मरम के रक्षा कर रहे हैं ना तो आराम से ऐसी चिकनी चुपड़ी बातें आप लोग कर लेते हो वरना अभी दो मिनट के लिए हट

00:33:40:12 हट जाए ना कहां है भाला आपका दोनों की आप तो कह रहे हो सब कुछ सही है आप जब दुनिया में दुनिया में लड़ाई करवाने वाली बात ही यही है कि व्यक्ति के पास अपने भगवान आएंगे वो कहेंगे वो कर लो काटने की बात नहीं है ये हाथ आशीर्वाद देता है तो यहां थप्पड़ मारता है अरे कहां मार रहा है भाई आपने कहा मेरे भगवान आपने कहा मेरे भगवान आपने कहा आपने क्या कहा आपने क्या कहा आपने आपने क्या कहा? मेरे भगवान आकर के मुझे बताते वो मैं करूंगा। अब कोई दूसरा व्यक्ति कह रहा है मेरे भगवान आ के कहते हैं बच्चे खाओ तो वो खा रहा है। कैसे रोकोगे? जब तक तृतीय सत्ता नहीं होगी ना धर्म और धर्म के लिए शास्त्र काट रहा हूं। काट ही तो रहे हो नहीं शास्त्र नहीं मेरा मन। नहीं नहीं मैं नहीं कह रहा हूं। मैंने कहा एक बात आपने कहा मेरे आराध्य आके बताते हैं। जो आराध्य शास्त्र के विरुद्ध आकर के आपको कान में कुछ कहेगा वो गलत है। कौन ऐसी कौन सी बात है अब आप बताइए जिसके पक्ष में मैंने कहा। यही बात है। सबसे बड़ी यही बात है। वेदों के भी पक्ष में हूं। आपने अंतिम प्रमाण क्या बताया? अंतिम प्रमाण पूछा मुक्ति ना वो तो प्राप्त अंतिम प्रमाण आपने बोला मेरे आराध्य मुझसे बात करते हैं। मैंने कहा कंफर्म कर दूं? तब हमने कंफर्म किया। ठीक है हो गया। जय श्री राम। जय श्री राम भैया। जय श्री राम।

00:35:01:07 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 35:03 · 16 Jan 2026

सीधी बात - भाग २ ब्रेनवाश का परिणाम : ब्रह्माकुमार या पगलाकुमार

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