No part of this video is used anywhere yet.
SRT: ⬇ SRT ⬇ Original file

.srt or .vtt (Hindi). The old file is backed up. After that the match for this video is rebuilt (may take a few minutes, keep the page open).

⬜ Not used yet · 00:00:03:13 – 00:30:33:00 (30:30)

00:00:03:13 तो सभी को जय श्री राम। इस समय हम हमारी अग्रजा के साथ हैं। माननीय रंजना अग्निहोत्री जी और एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय में प्रकाश डालने के लिए आज इनके समक्ष हम उपस्थित हुए हैं। आप लोगों के समक्ष उपस्थित हुए हैं। अ जैसा कि आप लोग जानते ही हैं कि अ हिंदुओं को लेकर के हिंदू विरोधी जो गतिविधियां हैं वो समाज में बहुत बढ़ती जा रही हैं। व्यक्ति स्वतंत्र होकर के निर्द निर्द्वंद तरीके से जो है कुछ भी बोलता जा रहा है हिंदुओं के बारे में हिंदू धर्म ग्रंथों के बारे में हमारे गुरु गोविंद ग्रंथ के बारे में अनापशनाप ये सब चीजें जो हो रही है मनुस्मृति जला देना रामचरितमानस कहीं कोई जला देता है कहीं कोई ऐसी किताबें छाप देता है जिसमें कि उल्टी सीधी बातें लिखी होती हैं आपके संज्ञान में है ही हमने रामपाल पर इसको लेकर के याचिका कर रखी है दीदी के ही माध्यम से और इसके साथ ही साथ अभी एक किताब आई है हमारी की जानकारी में कोई लेखक है लेखक तो क्या कहें उसको उसने श्री राम जी पर काफी नाम है अमीष त्रिपाठी करके नाम है उसका अमेश त्रिपाठी अम त्रिपाठी उसने बहुत ज्यादा राम विरोधी हिंदू विरोधी चीजें लिखते हुए और उसको नाम दिया है राम सीता

00:01:18:16 अपनी किताब को नाम दिया है तो ये जो गतिविधियां हैं कि कहीं पर भरे मंच पर मजाक बना देना हिंदू धर्म का हिंदू धर्म ग्रंथों का हिंदू धर्माचार्यों का और या फिर ऐसी किताबें छाप देना, प्रिंट मीडिया, सोशल मीडिया सभी के द्वारा ऐसी वेब सीरीज बनाना जहां पर हिंदुओं का अपमान हो रहा है। लगातार ऐसी फिल्में बनाना, ऐसी सीरियल्स बनाना ऐसे ऐसी सामग्री किसी ना किसी प्रारूप में मतलब लगातार ये बढ़ती जा रही है। तो इस चीज को लेकर के जो हिंदू विरोधी गतिविधियां चल रही हैं। लोग ये कहते हैं कि भाई कोई कुछ करता क्यों नहीं? कोई कुछ करता क्यों नहीं? तो हम आपको बताना चाहते हैं कि अभी हिंदू सोया नहीं है। हमारी मान्य जो अग्रजा है रंजना अग्निहोत्री जी ऐसे सनातनी योद्धाओं के रूप में अभी भी हिंदू जागा हुआ है और वो लड़ रहे हैं। पर आपको आपको इन बातों का बोध नहीं है कि हमारे लिए कौन लड़ रहा है? कौन नहीं लड़ रहा है। लोग कहते हैं शंकराचार्य ने किया क्या? शंकराचार्य ने किया क्या है? शंकराचार्य जी की शिष्या है यह जो लड़ रही हैं। आपको नहीं पता है। तो आज इन कुछ मामलों पर प्रकाश डालने के लिए कि इन्होंने कैसे वह लड़ाई प्रारंभ की है और अभी उस वो लड़ाई किस स्तर पर पहुंची है और कहां पर इनकी आवाज पहुंच चुकी है। हिंदुओं की आवाज कहां पर

00:02:33:18 पहुंच चुकी है। तो इन सब बातों पर प्रकाश डालने के लिए आज हम बात करने आए हैं। सबसे पहले दीदी को चरण स्पर्श दीदी को प्रणाम और दीदी के मंगल दीदी के अतुल्य साहस को प्रणाम दीदी के अतुल्य समर्पण को प्रणाम मेरा तो दीदी थोड़ा सा आप इसपे थोड़ा सा प्रकाश डालें कि आपने जो उच्च न्यायालय में क्या जो अभी मैंने समस्या जिसके बारे में लोगों को बताया उसको लेकर के क्या मतलब आप पहुंची कैसे पहुंची क्या अभी हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की तरफ से माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका लगाई गई थी हम लोग चाहते हैं कि कोई ऐसा कानून बने बने जो कठोर हो जिसमें डेनिग्रेशन डिसऑनरिंग और इंसर्ट डिसफिगरमेंट ऑफ देवता प्रोविजन एक्ट बने जिससे कि इसको रोका जा सके। कानून है, आईपीसी में भी है, बीएएस में भी है। लेकिन सजा इतनी कम है। वो कानून इफेक्टिव नहीं है। इसलिए लोगों का जो मन है बढ़ता रहता है। अब इसको लेकर के एक याचिका लगाई गई थी जिसमें हम लोगों ने यह कहा था कि सनातन धर्म और सनातन धर्मावलंबी हमारे देवी देवता भगवान राम कृष्ण ब्रह्मा जी और माता दुर्गा मनुस्मृति रामचरितमानस भगवत गीता इत्यादि जो हमारे धार्मिक ग्रंथ हैं उनका किस तरीके से अपमान किया जा

00:03:48:21 रहा है। कोई मनुस्मृति जला के सिगरेट पी रहा है और वो सोशल मीडिया पे वायरल कर रहा है। कोई भगवान श्री राम के ऊपर अभद्र टिप्पणी कर रहा है और अभी नवरात्रों में देखा हमने मां दुर्गा का जो एक स्टेचू बना हुआ था जो नवरात्रि के दौरान दुर्गा पूजा होती है उसमें एक व्यक्ति बहुत अभद्र अश्लील हरकत कर रहा था वो सारी चीजों को लेकर के हम लोगों ने अभी एक याचिका दिसंबर में लगाई थी| ये हमारी पहली याचिका नहीं हम शुरू से ही कहते चले जाएं और इस याचिका में हमने तमाम वो बातें कही जो हम शुरू से कहते चले जा रहे इसको हमने चार खंडों में बांटा पहला हिंदू हिंदू धर्म और सनातन धर्म के ऊपर जो प्रहार करने का काम है वो सिनेमा और वेब सीरीज करते हैं। नंबर दूसरा जो है आर्ट स्क्रिप्चर्स आर्ट पेंटिंग बनाना और नंबर तीसरा है जो भद्दे भद्दे चुटकुले बनाते हैं। नंबर चौथा जो पब्लिक फोरम पर स्पीचेस दी जाती हैं। तो जो सिनेमा है, सिनेमा ने क्या किया? मतलब मूवीज, वेब सीरीज। दूसरा बुक्स तीसरा आर्ट और पेंटिंग और चौथा जो है जो सोशल मीडिया के द्वारा या सार्वजनिक इन सबको लेके जो हमारी पिटीशन गई हम पहले रिप्रेजेंटेशन भी हमने मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स मिनिस्ट्री ऑफ़ पार्लियामेंट्री अफेयर्स को दिया था। कोर्ट

00:05:03:27 ने मेरी बात को पूरी तरीके से सुना और इसमें 4 दिसंबर 2025 को आदेश पारित किया कि आप अपनी पुनः बात अह अथॉरिटीज कंसर्न पार्लियामेंट्री अफेयर्स के सामने कहें। हमने माननीय न्यायालय में यह भी कहा था कि ठीक है कानून बनाने का अधिकार न्यायालय को नहीं है। लेकिन जो कानून है वो फोर्सफुल नहीं है। जब तक पार्लियामेंट कोई कानून नहीं बना देती तब तक आप कोई कमेटी बना दीजिए। हम कोर्ट ने एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए एक आदेश किया। उसके बाद हम पार्लियामेंट्री अफेयर्स गए। तो उन्होंने हमें एक पत्र दिया। वो ये पत्र है। हम आपको अब दिखाते हैं। ये 51 2025 को ये पत्र दिया। उन्होंने कहा कि हम आपके जो पत्र हैं, आपके ग्रीवेंसेस हैं, उन पर हमने संज्ञान लिया है और जो नेसेसरी एक्शन होंगे, एप्रोप्रियट रिप्लाई होगी, वो हम आपको व्यक्तिगत रूप से देंगे। तो हम तो प्रतीक्षा कर रहे हैं। अभी हमारे पास इसकी कोई इसका कोई उत्तर नहीं आया है और हमने इसका एक रिप्रेजेंटेशन दोबारा भेज दिया है। कहने का तात्पर्य यह है कि एक पिक्चर आई थी पीके। जी। एक पिक्चर आई थी मोहल्ला 80, एक पिक्चर आई थी हैदर। एक पिक्चर आई थी राम तेरी गंगा मैली एक आई थी कलयुग की रामायण एक आई थी कलयुग की सीता एक आई थी शोले

00:06:19:08 जी इस ये तो हमने कुछ नाम बताएं ये बहुत सारी सिनेमा और बहुत सारी मूवीज आई इन सबको हमने अपनी पिटीशन में मेंशन किया जी एक आई थी ओ माय गॉड डायलॉग आता है ए गणपत दारू उल्लाह हम्म एक आता है लापता कहां हो गया अगर लापता है और उसमें जो एक पिक्चर आई थी जो पीके उसमें एक वो जिहादी टाइप का जो हीरो है वो पान के पीक को लगा देता है और कहता है कि हिंदुओं जनता इतनी बेवकूफ है कि पान के पीक को हनुमान जी समझ बैठी है। इसको भी हम लोगों ने चैलेंज किया था। करते चले एक जो स्क्रिप्चर्स हैं जो पेंटिंग्स हैं एक फिजा हुसैन क्या नाम मकबूल फिजा हुसैन एक था। ये कोई वो भी था वो हां हां मर गया है। उसकी पेंटिंग एमएफ हुसैन एमएफ हुसैन वही मकबूल फिजा हुसैन उसने जो पेंटिंग्स बनाई इतनी गंदी पेंटिंग्स बनाई सिर्फ हमारे देवी देवताओं को लेकर के अभी एक पिक्चर आई किसी ने बनाई काली उसमें माता काली को सिगरेट पीते हुए दिखाया है। यह सारी चीजें क्या और सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर चाहे उसमें क्या नाम है? बघेल हो बघेल के पिताजी मुख्यमंत्री बघेल के पिताजी हो चाहे स्टैलिन हो एम के स्टिन हो कोई कह रहा है कि सनातन धर्म मलेरिया है

00:07:34:09 तो कोई कह रहा है कि सनातन धर्म अछूत की बीमारी है कि रोग है फला है ढका है कहीं कोई कानून ऐसा है ही नहीं कि इनको सबको प्रिवेंट कर सके तो हम यह चाहते हैं कि ऐसा कानून बने जो मनुस्मृति पर आधारित हो जो महाभारत में जैसे कहा है कि जो दंड है राजा के सोने पर भी दंड दंड जागता है। महाभारत में कहा है और महाभारत के उस श्लोक को हमने कोट भी किया है। राजा के सोने पर दंड जागता है। अर्थात गवर्नमेंट अगर कुछ ना भी करती हो लेकिन अगर दंड का प्रावधान कठोर है। दंड का प्रावधान कठोर है तो अपराध रुकेंगे। जी अपराध होने से रुकेंगे। जी ये जो कानून बने हैं बीएनएस के तहत अपराध हो जाता है। तब ये आते हैं। सपोज किसी ने हमारी मनुस्मृति जला दी। किसी ने भगवत गीता जला दी। किसी ने हमारी देवी देवताओं का अपमान हो गया। उसको एक साल की सजा के तहत हमने एफआईआर लिखा दी। लेकिन हमें क्या मिला? हमारा तो जो हमारी आस्था थी उस पर प्रहार हुआ। हमारी सनातन धर्म की आस्था पर प्रहार हुआ। हमारा अपमान हुआ। हम कहीं भी जाते हैं तो लोग हमको हीरे दृष्टि से देखते हैं। अरे हिंदू सनातनी कैसे हैं? इनके तो देवी देवताओं का अपमान होता है। कोई बोलने वाले नहीं है। इनके अंदर कोई ताकत नहीं है। कोई दम नहीं। हम करें तो

00:08:49:13 करें क्या? और इसी तरीके से कानून ये कोई इस निंदा का कानून नहीं बना। डेनिग्रेशन पर कोई कानून नहीं बना। लेकिन इस मामले में जो हमारे समाज में एक दूसरा वर्ग रहता है जिसको कि मुस्लिम कहते हैं इस्लाम के फॉलोअर्स उनकी इस बात में प्रशंसा हम करते हैं कि उनके देवता पर उनके कुरान शरीफ पर उनके मोहम्मद साहब पर पैगंबर मोहम्मद पर अगर कोई भी उल्टी सीधी टिप्पणी करने की हिमाकत करता है तो उनके यहां से पूरा का पूरा कुबा निकल पड़ता है और कहते हैं सरन से जुदा जी हम हिंदू समाज को बरगला नहीं रहे हैं कि कोई कहे तो सरतन से जुदा हम तो सड़क पे तलवें लेकर नहीं आए हैं। हम कानून के सामने गए। हमने अदालत से अपनी बात कही। हमने अपनी चीज़ को कोर्ट ऑफ रिकॉर्ड बनाया। चुटकुले बनेंगे ना नौमन तेल होगा ना राधा नाचेंगी। चुटकुला आज तक यह नहीं बना कि ना नौमन तेल होगा ना रजिया नाचेंगी। रजिया को कहने की किसी की हिम्मत नहीं है। चुटकुला बना कि हम करें तो कैरेक्टर ढीला कृष्ण करें तो लीला। भाई वाह क्या बात हुई। हनुमान जी के ऊपर चुटकुले बने। इसी तरीके से सरदारों के ऊपर बहुत चुटकुले बनते थे। मालूम है? सरदारों ने अपनी बात न्यायालय के समक्ष कही। हम तो न्यायालय ने उस पर कोई टिप्पणी नहीं की। लेकिन कहा गवर्नमेंट इस बात को देखिए।

00:10:05:08 गवर्नमेंट ने जब उसको देखना शुरू किया तो अब चुटकुले जो हैं हमें लगता है नगण्य हो गए हैं। तो हम लोगों की जो ये पहल है हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की जो तुम्हारी ये पहल है ये कहीं ना कहीं कारगर होगी। कहीं ना कहीं रंग लाएगी। जो हम चाहते हैं कि कोई डेनिग्रेशन पर कोई स्ट्रांग कानून बने, कोई एक्ट आए वो अवश्य ही आएगा। अच्छा दीदी इसमें हमने देखा है कि अन्य जो देश हैं वहां के जो राजसत्ता का जो धर्म होता है है ना? उसको लेकर के ईष्ट निंदा का बहुत कठोर रहता है। इसमें आप क्या कहेंगे? अन्य कंट्रीज में मतलब कोई ऐसी चीजें नहीं हो रही। नहीं हमने हमने अपनी पिटीशन में हमने कोट किया है कि जो बाहरी देश हैं वहां पर ईष्ट निंदा के विरोध में कानून बने हैं। वहां किसी की हिम्मत इसलिए नहीं पड़ती है क्योंकि जो कानून बने हुए हैं उसमें दंड का जो प्रावधान है वो बहुत कठोर है। अच्छा यहां दंड का प्रावधान कठोर नहीं। वही तो हम लोगों ने कहा यहां जो कानून बना है वो इतना इफेक्टिव नहीं है। कानून की इफेक्टिवनेस को बढ़ाने के लिए हम सरकार से अपने आवेदन करते रहे। इसीलिए कि कानून की जो इफेक्टिवनेस है, सजा की जो ग्रेविटी है, वह बढ़ाई जाए। इसीलिए हम कोर्ट में गए और कोर्ट में यह कहा गया कि आप फिर जाइए। हम वहां गए तो उन्होंने कहा हम आपको

00:11:20:12 अभी बता रहे हैं व्यक्तिगत रूप से बताएंगे तो हम अभी प्रतीक्षा कर रहे हैं। आगे हम क्या करेंगे वो तो समय बताएगा। जी। अच्छा इसमें कई बार ऐसा यहां हमारे देश में ऐसा ज्यादा होता है कि जैसे इसको अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पे जो है इस तरह की चीजें की जाती हैं। तो क्या यह कानून भी हमारे इसके आड़े आता है जैसे इस तरह से बहुत ज्यादा कठोरता के साथ देखिए अभिव्यक्ति की अभिव्यक्ति की आजादी जी का ये अर्थ नहीं है कि आप हमारी आस्था को हमारे विश्वास को या हमको अपमानित करने की नियत से कोई ऐसी बात कहें और हर बात में कह दे अभिव्यक्ति की आ जाती है। हालांकि भारत में ऐसा हो रहा है। मकबूल फिजा हुसैन ने एक पेंटिंग बनाई मां दुर्गा की और कह दिया कि अभिव्यक्ति की आजादी है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के यहां कुछ भी होता रहे कह दिया जाता है अभिव्यक्ति की आजादी। लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी को तय करने का पैमाना हालांकि संविधान में है लेकिन उसको तय करेगा कौन? उसको इंप्लीमेंट करेगा कौन? उसको इंप्लीमेंट करने के लिए हमको फ़ोर्सफुल कानून की आवश्यकता है कि डेनिग्रेशन डिसऑनरिंग इंसल्ट कैसे रुके हमारे देवी देवताओं की हमारे धार्मिक ग्रंथों की कहीं स्वामी प्रसाद मौर्य आज आ रहा है वो फाड़े दे रहा है रामचरितमानस

00:12:36:02 की प्रतियां बिना पढ़े बिना लिखे हम अह हम हम क्या सनातनी इसीलिए जन्मे हैं कि जो कोई आए वही प्रहार करके चला जाए जो कोई आए प्रहार करके चला जाए हम अपने धार्मिक ग्रंथों को हमने हम अपने देवी देवताओं को उनके मतलब हम देवी देवताओं को तो कोई अपमानित कर नहीं सकता लेकिन हमारे देवी देवताओं के ऊपर कटाक्ष करने का मतलब है हमें अपमानित करना हमारे धार्मिक ग्रंथों को जलाना फाड़ना चप्पल के नीचे लगाना देख रहे हैं चप्पलों पे गणपति की फोटो बन रही है तो इस कठोर कानून की आवश्यकता है गवर्नमेंट में हमने कहा है अब गवर्नमेंट क्या करती है उसका भी हम प्रतीक्षा करने के बाद बताते हैं क्या करेंगे तो इसमें आपको यह भी लगता है दीदी कि जैसे जैसे ये जो चीजें हो रही जैसे अमिश अमिश नाम के व्यक्ति ने राम सीता करके बुक लिख दी। रामपाल ने अपनी ज्ञान गंगा निकाल दी या फिर बहुत से ऐसे तंत्र हैं जो कहते हैं कि हम पांच 5000 साल का युग है और उस नाम पे अपने आप को भगवान घोषित करते हुए फिर तरह-तरह की बातें करते हैं। वही तो हम कह रहे हैं कि इसमें बुक्स एंड लिटरेचर का भी बड़ा हाथ है। बुक्स एंड लिटरेचर रामपाल वाली बात हो गई। यह जो अमिश नाम का व्यक्ति है इसकी जो किताब है इकराम एक वॉरियर ऑफ मिथिला सीता और एक

00:13:51:06 रावण इसमें इसे ग्लोरिफाई क्या करना चाहता है और इस और बड़ी आश्चर्य की बात है कि भारत के प्रधानमंत्री जी ने इन पुस्तकों को देखे बिना इनका अध्ययन किए बिना इसका विमोचन कर दिया। जो वारियर और सीता है उसमें सीता जी का ऐसा प्रतिबिंब बनाया है जैसे कि कोई मतलब अब हम क्या कहें सीता जी को सीता जी नहीं बल्कि एक उड़ती हुई चुड़ैल का रूप दे दिया है। और भगवान श्री राम के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग किया और सब जगह लिख अमीष लिखता है कि यह इमेजिनरी नहीं है। यह सत्य है। यह सत्य है। लेकिन ये इसकी कोरी कल्पना है और यह भी मुझे लगता है कि बहुत गंदी मानसिकता का व्यक्ति है। क्योंकि इसने जैसे भरत जी को लिखा, जैसे इसने मां अह कैकई को लिखा, सीता जी के लिए लिखा और भगवान श्री राम के लिए जिन-जिन शब्दों का प्रयोग किया है, हम उनको रिपीट यहां नहीं करना चाह रहे हैं क्योंकि इसकी किताबें जिसने नहीं पढ़ी है, वह ना ही जाने तो अच्छा है। निश्चित ही हम उस पर भी कुछ करेंगे। तो, यह सब क्यों नहीं रुक रहा है? हमारे देश में लिखता है अमीष त्रिपाठी और त्रिपाठी की ऐसी हरकत कर रहा है। यह लज्जाजनक बात है। शेम ऑन दिस मैन अमीष त्रिपाठी। नहीं इस पर हम लोग एक अलग से एक इनेटिव वीडियो बना देंगे अमित त्रिपाठी की चीज को लेकर के इसने क्या किया है किताबें क्योंकि क्योंकि ये जो ये व्यक्ति

00:15:06:07 है जो इसकी बुक को जो है ये देखो इसमें प्रधानमंत्री इसको जरा इसको जरा ज़ूम करो ये सीता जी का फोटो ज़ूम करो जरा मैं वहां लगा फोटो इसकी जी सीता जी का फोटो वारियर ऑफ़ मिथिला सीता जी ये ऐसे ये तो कोई उड़ती हुई चुड़ैल मालूम पड़ रही है जी जी जी और इस किताब के अंदर ये लिखता है कि नॉन फिक्शन नॉन फिक्शन हां यानी कि सत्य है तो ये सत्य अगर इसका इसमें इसने कहीं भी आधार नहीं दिया जो इसने उल्टी सीधी बकवास की है उसका इसने कहीं कोई आधार नहीं दिया है लिखता है तो देगा ना आधार होगा तब देगा ना मेरे पास तो 25 रामायणों का सार रखा हुआ है 25 रामायण रखी हुई है लेकिन बात ये है इसको डर क्यों नहीं लगा इसको डर क्यों नहीं लगा क्योंकि ये प्रधानमंत्री जी से इसने इसका औपचारिक इनोग्रेशन कराया यह बहुत लज्जा की बात है। लज्जापूर्ण बात है। और दूसरी बात क्या है ना आज और प्रधानमंत्री ने इसको प्रमुख द्वारा प्रधानमंत्री जी ने इसको ये पुस्तकों को देखा ही नहीं तो हमारा इस चैनल के माध्यम से प्रधानमंत्री जी से एक निवेदन है कि किनहीं पुस्तकों का विमोचन करें तो उनको ठीक से अपनी नजर से देख लें कि इन पुस्तकों के अंदर क्या लिखा हुआ है। क्योंकि इस पुस्तक को आज नहीं आज से 100 साल के बाद जो ये जो जेंजी जनरेशन है वो पढ़ेगी तो सोचेगी कि

00:16:21:25 प्रधानमंत्री द्वारा विमोचित है तो सही प्रधानमंत्री द्वारा प्रशंसित है तो सही है तो भगवान राम हमारे वैसे भी प्रधानमंत्री जी को आजकल हमारी जो जनता है वो धार्मिक उसके निर्णायक रूप में देख ही रही है नहीं लेकिन प्रधानमंत्री जी को हमारी जनता धार्मिक निर्णायक के रूप में देख रही है लेकिन इस पर भी हमारा यह कहना है कि प्रधानमंत्री जी भारत के प्रधानमंत्री हैं श्रद्धेय हैं यशस्वी हैं परंतु तो धार्मिक निर्णायक के रूप में प्रधानमंत्री जी नहीं है। धार्मिक निर्णायक के रूप में हमारे चारों पीठों के शंकराचार्य, रामानंदाचार्य, रामानुजाचार्य हमारे जितने धर्माचार्य हैं वो धार्मिक निर्णायक हैं। जो भी प्रमाणिक परंपराएं प्रमाणिक परंपराओं के प्रधानमंत्री जी श्रद्धेय हैं, यशस्वी हैं। प्रधानमंत्री जी प्रधानमंत्री जी हैं। तो जो जनता है उसको भी अंतर समझना चाहिए कि राजनीतिज्ञों में और धार्मिक ah ah धर्माचार्यों में क्योंकि राजनीति जो है यह लोग की है। धर्माचार्य तो हमारे जो मूल है जीवन का अर्थ धर्म काम मोक्ष तो मोक्ष की ओर ले जाने का कार्य तो हमारे धर्माचार्यों का है। प्रधानमंत्री जी का थोड़ी है। फिर भी मतलब इसको एक व्यक्तिगत भूल भी की दृष्टि से देखा जा सकता था। परंतु उनका पद ऐसा है ना कि वहां से होने वाली छोटी सी गलती बहुत ज्यादा लोगों को प्रभावित कर जाती है। तो

00:17:37:01 इसलिए इस इस बात पे प्रकाश डालना बहुत जरूरी है कि उन्हें जो है किसी बुक को इस तरह से प्रमोट करने से पहले उसको अच्छे से जांच लेना चाहिए और उनके पास जो है ये बुक जो है इस तरह से आ रही है। भाई प्रधानमंत्री जी भगवान श्री राम के मंदिर में गए। प्राण प्रतिष्ठा के उत्सव में रहे और ध्वज प्रतिष्ठा में भी रहे। तो ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री जी हमारे पूरी तरीके से राममय हैं। लेकिन इस पुस्तक के अंदर प्रधानमंत्री जी के जो अगल-बगल लोग बैठे होते हैं। प्रधानमंत्री जी के पास इतना टाइम नहीं है कि जो ये छोटे-छोटे लोगों की पुस्तकों को पढ़ें। प्रधानमंत्री जी के जो अगल-बगल रहते हैं उनकी उनका यह दायित्व था कि इस पुस्तक को पढ़ के बताते कि इसमें किस प्रकार के चित्र हैं। इसमें क्या लिखा गया हुआ है। ये कोरी कल्पनाएं अमेश ने अपनी कल्पनाओं को कह दिया नॉन फिक्शन और नॉनफिक्शन के बाद इन्होंने जिन-जिन शब्दों का प्रयोग किया है वो जो जैसे लगता है कि यह पता नहीं कहां की इसने अपनी पटकथा की रचना करी हुई है। यह इस समय दीदी के द्वारा जो उठाया गया हम हिंदुओं की ओर से एक कदम है जिसमें कि यह लड़ रही हैं। हमारे जो मौलिक अधिकार हैं जो हमारे अस्तित्व और आदर्श की लड़ाई है वो ये लड़ रही हैं। तो कुछ लोग हैं जो अक्सर कहते हैं कि शंकराचार्यों

00:18:52:02 ने किया क्या या फिर इन पर भी व्यक्तिगत ऐसे आरोप लग रहे हैं कि भाई आप अपनी व्यष्टि की लड़ाई लड़ते हैं। तो ये आप देख सकते हैं यहां पर किस तरीके से पूरे हिंदू धर्म की ओर से एक हमारी अगर यहां पर इस मामले में खड़ी हुई है। ये हमारे लिए गर्व की बात है कि ये शंकराचार्य परंपरा से दीक्षित है और ये उन ऐसे लोगों के मुंह पर करारा जवाब है। वैसे तो शंकराचार्यों ने स्वयं से बहुत सी ऐसी चीजें की हैं जो कि कभी हम लोग उसकी तुलना कर ही नहीं सकते। परंतु फिर भी अगर बहुत ग्राउंड लेवल पर आप देखेंगे तो शंकराचार्य के बहुत सारे ऐसे शिष्य खड़े किए हुए हैं जो समर्पित होकर के अपना पूरा जीवन धर्म को दे रहे हैं। तो ये सारी चीजें हमें अह ऐसे जो योद्धा हैं जो धर्म की लड़ाई लड़ रहे हैं। हमारे हिंदुओं की तरफ से खड़े हो रहे हैं। ये अनसंग वॉरियर्स हैं जिनके बारे में हमें पता ही नहीं है कि भाई हमारे लिए ऐसी लड़ाईयां भी लड़ी जा रही हैं। हमें अचानक से Facebook पे दिखता है। कोई जो है मनुस्मृति जला रहा है या किसी ने जो है श्री राम जी के लिए एक भद्दा सा वीडियो बनाया और हमारा खून खोल उठता है कि हम क्या करें इसको कैसे रोके तो आपकी ये लड़ाई हम हिंदुओं की लड़ाई ऐसे जो अनसुने योद्धा हैं जिनके बारे में हमें पता नहीं है वो लोग लड़ रहे हैं तो हमें कम से कम हम कुछ नहीं कर सकते हम अपना समर्थन उनको नहीं भेज सकते उनके साथ खड़े नहीं हो सकते परंतु जो ईश्वर के भजन का बल होता

00:20:07:08 है उसमें तो हम प्रार्थना कर ही सकते हैं कि ऐसे योद्धाओं को ईश्वर शक्ति दे उनके साथ खड़े हो यद्यपि उनको को आशीर्वाद प्राप्त है गुरु गोविंद ग्रंथ का। एक चीज बता दें तुमने अनसुने नहीं कहना चाहिए था। हम अनसुने नहीं हम बहुत सुने हुए हैं क्योंकि 20 वर्ष तो हो गए अपने गुरुदेव की कृपा से राम जन्मभूमि का केस करते-करते। फिर श्री कृष्ण जन्मभूमि में आ गए। फिर काशी विश्वनाथ में आ गए। फिर धार में आ गए और फिर जितने रिलीजियस मैटर्स थे जितने धार्मिक मुकदमात थे उनमें ईश्वर की कृपा से कहीं ना कहीं हमें अपना कार्य आप सही दीदी मगर फिर भी जिस तरह का प्रकाश आपके ऊपर होना चाहिए ना वो कहीं ना कहीं मीडिया द्वारा और जो वो बात इत्यादियों के द्वारा नहीं दिया बहुत अभी आपको मैं एक बात बताऊं लल्लन टॉप पर एक वो हुई डिबेट नास्तिक के बीच और एक व्यक्ति आया इस्लाम की ओर से। इस्लाम का अपने ईश्वर को लेकर के बहुत सारे सवाल हैं कि इस्लाम का जो ईश्वर है वो सर्व्यापक ईश्वर नहीं है। ओमनीपोटेंट नहीं है। ओमनी प्रेजेंट नहीं है। मगर वहां पर नास्तिक के विरोध में उसको खड़ा किया गया। वो एक दूसरा जाकिर नायक लल्लन टॉप की ओर से दुनिया को दे दिया गया। ठीक है? मगर वहां पर किसी परंपरा प्राप्त

00:21:22:12 सनातनी को क्यों नहीं बुलाया गया? क्यों नहीं लल्लन टॉप किसी सनातनी को बुलाया? बहुत बड़ा षड्यंत्र है। किसी परंपरागत व्यक्ति को अगर बुलाएंगे तो वह षड्यंत्र कैसे उनका काम मैं आपको बताऊं एबीपी एबीपी न्यूज़ पे एक प्रोग्राम चल चला मेरा अभी चल रहा है कि नहीं चल रहा वो धर्मा लाइव करके एक प्रोग्राम चल रहा है। उसमें क्या होगा? मूर्ति पूजा का विरोध करने वाले आएंगे वहां पर मैं नाम नहीं लूंगा। मूर्ति पूजा का विरोध करने आएंगे। करवा करने वाले आएंगे और मूर्ति पूजा की रक्षा करने कौन आएगा? जो खुद विदेशों से फंडेड चीजें चल रही हैं षड्यंत्र पूर्वक उनकी ओर से एक व्यक्ति आएगा जो मूर्ति पूजा का पक्ष भी नहीं रख पा रहा है। वही कह रहे हैं हमारी तो वहां पर हार दिख रही है और जो जो व्यक्ति सशक्त है उनको लाया नहीं जा रहा पर्दे में वही हम कह रहे हैं कि इतना बड़ा षड्यंत्र जो चल रहा है सनातन धर्म के ऊपर अब इस षड्यंत्र के पर्दे हम ही लोगों को तोड़ने हैं हम ये सोचें कि कोई और इनको तोड़ेगा तो उस उसको हम भूल जाए इनके लिए हम ही को खड़े होना चाहे आप अकेले खड़े हो चाहे आपके साथ कारवा हो अकेले भी चलेंगे तो भी और कम से कम ये जो बातें अदालत में जाती है ना अदालत से हमें जो भी कुछ मिलता है ये कोर्ट ऑफ ऑफ़ रिकॉर्ड बनता है। आज नहीं तो कल यह देखा जाएगा कि कोई पिटीशन फाइल हुई थी और जिसमें डेग्रेशन के अगेंस्ट कहा गया था। कोई पिटीशन फाइल

00:22:37:13 हुई थी जिसमें अमीश की किताब को चैलेंज किया गया था। तो ये सारी चीजें कोर्ट का रिकॉर्ड बन आपको यह कहने को ना मिले कि भाई तुम सीधे लड़ने क्यों आ गए ये करने क्यों आ गए भैया आपने कल कल को अमीष की किताब को कोई यह कहने के पहले अगर कोई कहता है अमीष की किताब बहुत अच्छी है तो कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो कहे नहीं नहीं अमीष की किताब को तो कोर्ट के अंदर रखा गया था और अमीष की किताब के जो चैलेंज किया चैलेंजेस थे जो षड्यंत्र थे वो कोर्ट के सामने प्लेस करे गए थे है ना वो क्वेश्चन ऑफ डिस्प्यूट है कि एकदम से अनडिस्प्यूटेड इस किताब को मान लिया जाए ऐसा भी नहीं है आज जो ये कुछ चीजें हैं इसी का एक जो दृश्य हमें दिखाई दिया कि अनिल मिश्रा जी उसमें एक युद्ध के इस अंश में आए और जो है अभी वैसे सुनने में आया कि उनको जो है राहत मिल गई है कोर्ट की ओर से हम तो क्या आपको लगता है कि मतलब इससे जो हम लोग जो लड़ाई लड़ रहे हैं उसी का एक भाग है जिसमें कि कहीं ना कहीं वो भी इस तरह से एक सामान्य आदमी फंस जाता है। वो षड्यंत्र के शिकार हुए। एट्रोसिटीज एक्ट बना कि जो एससी एसटी हैं उनके विरुद्ध अगर कोई वास्तव में प्रताड़ित कर रहा है तो उनको सुरक्षा प्रदान की जाए। लेकिन अब इस एट्रोसिटी एक्ट का इतना दुरुपयोग होने लगा अनिल मिश्रा की जो एफआईआर है हो गई एससी एसटी में। लेकिन अनिल मिश्रा ने कहां पर किस एससी

00:23:52:24 एसटी को अह जातिचक शब्द कह करके पब्लिक में गाली दी। एक्ट साफ कहता है कि अगर कोई व्यक्ति किसी भी दलित को जातिचक शब्द कह करके जनता में सरेआम गाली देता है कमरे में नहीं अगर कमरे में किसी ने कह दिया तो वो नहीं माना जाएगा अगर जनता में कहता है तो अट्रोसिटीज एक्ट लगेगा हम अनिल मिश्रा ने तो खाली कहा कि बाबा सपाल मुर्दाबाद इसमें दलित शब्द कहां आ गया इसमें ना चमार कहा गया ना पासी कहा गया नाभंगी कहा गया कोई शब्द का प्रयोग नहीं बाबा सपाल कहना ये अट्रोसिटीज एक्ट के अंतर्गत आता है। इसीलिए तो बेल हुई। अब अनिल मिश्रा षड्यंत्र के तहत फसाए गए। और अब देखो कितना दुर्भाग्य है हम लोगों का कि अगर कोई ब्राह्मण समाज का व्यक्ति अपनी सच्चाई सामने रखता है तो अट्रोसिटीज एक्ट लगा दिया। मतलब यह जो चीज़ उसकी आवाज ही दबा दी जा रही है। मतलब ये जो चीजें हो रही है कि अपमान करना और फिर कोई प्रतिकार करे तो इस तरह से दबाया। और यही लोग जो जो एट्रोसिटीज एक्ट लगाते हैं यही लोग मनुस्मृति जला रहे हैं। उसमें चाहे स्वामी प्रसाद मौर्या हो चाहे एक वो महिला है दलित महिला जो सिगरेट जला करके मनुस्मृति जला रही थी। एक कोई और चुड़ैल टाइप की है जो कथा के समय दुर्गा जी को क्या-क्या उसने कहा था। है ना? वह सब यही इसी बिरादरी

00:25:08:04 के लोग हैं। जी जी जी तो कहीं ना कहीं जब सही से कानून नहीं बनाया जाएगा तो इस तरह से फिर वो फोर्सफुल कानून नहीं बनाया जाएगा। फोर्सफुल कानून जैसे अट्रोसिटीज एक्ट बना है दलित दलितों के प्रोटेक्शन के लिए बना है वैसे ही कानून हमारे देवी देवताओं के हमारे धार्मिक ग्रंथों के प्रोटेक्शन के लिए बनता है तो किसी की हिम्मत नहीं पड़ती। यह जितने भी दलित समाज के लोग आते हैं वही लोग ये हरकत कर रहे हैं। क्या किसी ब्राह्मण को देखा है? क्या कि मनुस्मृति जलाते हुए तो मुझे इस मामले में एक पूरी शंकराचार्य जी का एक वक्तव्य याद आता है गुरुदेव का कि वो कहते हैं कि हिंदुओं की सहिष्णुता को हिंदुओं की उदारता को उनकी कायरता समझ समझना भूल है। है ना? तो अगर अगर आप ऐसा करेंगे कि उनकी उदारता को उनकी कायरता समझेंगे तो कहीं ना कहीं कोई ना कोई एक विप्लवकारी तत्व ऐसा सामने आ ही जाएगा। तो इससे पहले कि कोई विप्लवकारी तत्व या वातावरण उत्पन्न हो उससे पहले हमें ऐसा कानून लाना चाहिए जिससे कि इस तरह की क्योंकि कब तक जो है षट सन विनय कुटिल सन प्रीति करते रहेंगे ये तो शट हैं लोग इनसे कब तक हम कहते रहेंगे कि तुम हमारी देवी देवताओं का अपमान मत करो। इसमें सरकार को फोर्सफुल और जल्दी से जल्दी फोर्सफुल एक्शन लेना चाहिए।

00:26:23:06 फोर्सफुल कानून बनाना चाहिए। जिस तरीके से इन्होंने पत्र लिखा है सरकार ने उसी तरीके से पत्र को इंप्लीमेंट करके चाहे तो कमेटी बना दें और चाहे तो पार्लियामेंट में कानून लाने की कोशिश करें जिससे भय तो हो और हमारी जो ये पिटीशन है इस पिटीशन के पिटिशनर जो हैं वादी श्री जी राय साहब भी बैठे हुए हैं। इनसे भी पूछा जाए ये भी आहत होते हैं। ऐसा थोड़ी है कि आहत नहीं होती। अभी बांग्लादेश में जो भी घटनाएं हो रही हैं कल हमारी इनकी चर्चा हुई। इन्होंने अपनी अथा पीड़ा व्यक्त की। इन्होंने कहा कि कैसे इस तरीके से किया जाता है। एक व्यक्ति एक इंसान दूसरे इंसान को कैसे जला देता है? हमने कहा एक इंसान नहीं एक मुसलमान एक हिंदू को जला रहा है। इनकी बड़ी पीड़ा थी और इन्होंने इस पिटीशन में मेरा बड़ा सहयोग किया है। इनका भी हम हृदय से धन्यवाद करते हैं। प्रस्तुत याचिका थी। उसमें मैं वादी हूं। जी और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से यह याचिका की गई थी कि सनातन धर्म से संबंधित कोई भी सामग्री जो अ विवादीय है उसके लिए कठोर कानून लाए जाए। इसकी सिफारिश हमने इसमें की थी और कोर्ट ने बहुत हद तक हमें कंसीडर

00:27:38:21 भी किया है और उन्होंने हमें यह कहा कि इसका आप अलग-अलग मंत्रालय को अपने रिप्रेजेंटेशन भेजें। उनको हमने रिप्रेजेंटेशन भेजा और उसकी तरफ से बड़े सकारात्मक तथ्य आए हैं और वह इस पर मॉनिटरिंग कर रहे हैं और हमें आशा ही नहीं वरन पूरी उम्मीद है और कि यह वर्तमान सरकार हिंदुओं और सनातन धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर है और तत्पर होने के साथ-साथ प्रभावशाली जिसको कि जो जो दंड ऐसा हो कि जो इनकी अपमान करने में लोग एक बार सोें जी ऐसा जरूर कदम उठाएगी हमें ऐसा पूर्ण विश्वास है। तो ये पूरी जानकारी थी। हमने हमारी अग्रिजा जी से बात की जिन्होंने हम हिंदुओं की ओर से ये बड़ा कदम उठाया है और हमें गर्व होना चाहिए कि हमारी ओर से लड़ रही हैं और हमें इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए और कुछ नहीं कर सकते तो अपनी प्रार्थनाओं में ईश्वर से इनके लिए हमें अवश्य प्रार्थना करनी चाहिए हम सब हिंदुओं को और हमने बात की जो अन्य जो इसमें पिटिशनर्स हैं उनसे भी बात की जो हमारे मान्य अधिवक्ता गण हैं तो ये सारी

00:28:53:27 जानकारी थी इसमें आप अंत में बस मैं यही कहूंगा ूंगा कि अपने अस्तित्व और आदर्श की रक्षा के लिए हम सभी हिंदुओं को एकत्र होना चाहिए और एकत्र हो के ऐसा नहीं है कि बर्छी भाला लेकर के जो है आप अपने घर से निकल कर के और भाला नहीं लेना है मैं इनके ऑफिस आ जाओ सबसे पहला शुरुआत आप करिए अपनी प्रार्थना जो है ना समष्टि के हित से करिए अपने लिए तो करिए अपना कल्याण मांगिए ईश्वर से अपनी प्रार्थना जब आप समष्टि के हित से करेंगे ना तो उन प्रार्थनाओं का जो असर होगा वो यहां तक इनके पास आएगा इनको बल प्राप्त होगा और और फिर आगे जो व्यवहारिक जो चीजें हो सकती है वो तो होंगी ही आगे की चीजें। तो ये सारा था। हमने तो कभी हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के लोगों को हिंदू साम्राज्य परिषद के लोगों को ये नहीं कहा कि बरछी भाला लेके सड़क पे आ जाओ। हमने ये कहा कानून की किताबें निकालो और कानून से वो मोती चुनो जो कलम की ताकत है ना वो वर्ष भाला में ताकत नहीं है। वो मोती चुनो जिसे आज नहीं 2 साल बाद दो दो नहीं तो 3 साल के बाद वो हमारे काम आए। बिल्कुल बिल्कुल और काम आया भी और काम आया। हमारी अग्रजा जो है राम मंदिर के जो लड़ाई थी उससे जुड़ी हुई है और आप आज देख रहे हैं कि राम मंदिर का जो निर्णय हमारे पक्ष में आया हमें वहां पर चीजें मिली तो ये सारा था आपको जानकारियां हमारी मां नगजा

00:30:09:03 जी को बहुत सारा साधुवाद हम हिंदुओं की ओर से लड़ाई लड़ने के लिए और तुमको भी बहुत-बहुत आभार और बहुत-बहुत आशीर्वाद आपका ही आपकी ही प्रेरणा है आपसे ही मिलने वाला जो अभी तो अभी तो दूसरी तैयारी और भी चल रही है ना वो अभी इस पे डिस्क्लोज नहीं करेंगे वो तैयारी भी आ जाए। बिल्कुल बिल्कुल तो बहुत सारा साधुवाद दे दीजिए आपको। प्रणाम जय श्री राम। जय श्री राम।

Plans for this video (0)

No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.

🤖 Ask AI for suggestions

AI reads the remaining (unused) parts of this video and gives ideas for new videos: from where to where, hook, and what to remove from the middle. Suggestions follow the RULES and appear here as "AI Suggestion". You can review, edit or approve them.

  • ⬜
    Hindi SRT Required

    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).

A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 30:54 · 11 Jan 2026

हिंदुओं की भावनाओं को आहत करना इतना आसान क्यों? Ad RanjanaAgnihotri ji Asked to Allahabad HighCourt

0%
☁️ Drive Not in Drive yet

Notes

Description

(empty)

History

No changes yet.

✂️ Clip Cutter

⌨️ Keyboard shortcuts

Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop

▶

Start

End

🔍 zoom
Already used Plan clips
⚠️ () of this clip is already used in another video (green part). Fine if on purpose, otherwise change the times.
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)

Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".

Clips () · Total

Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.

Hook, full note for editor, status