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00:00:02:16 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और आज की जो चर्चा है उसका विषय आप जानते ही होंगे। एकमात्र शक्ति हैं नीलमा जी जो मेरी जानकारी में सबसे प्रथम जिन्होंने धरातल पर ब्रह्मा कुमारी का और यथासामर्थ और सशक्ति विरोध किया है शुरू 2012 से ये ब्रह्मा कुमारी से मोर्चा ले रही हैं और अ ब्रह्मा कुमारी में काफी शीर्ष पद पर यह कार्यरत थी और तब इन्होंने कुछ ऐसा देखा अपने जीवन में जब इन्होंने निर्णय लिया ब्रह्मा कुमारी को छोड़ने का और एक क्रांतिकारी के रूप में इन्होंने वहां पर बिगुल बजाया। तो सबसे पहले मैं उन्हें ले लेता हूं। फिर आगे वो अपने बारे में स्वयं भी बताएंगी आपको। नीलमा जी आप कैमरा ऑफ किया शायद आपने। हां जी जी नमस्ते नमस्ते। सभी दर्शकों को मेरा प्रणाम। जय श्री राम। जय जय राम। तो
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→ Used in: A · Video ब्रह्माकुमारीज़ के बंद दरवाज़ों के पीछे क्या होता है? 20 साल का अनुभव और इनसाइड... at 0:00 ↗
00:01:17:27 नीलिमा जी थोड़ा सा अपना एक परिचय दर्शकों को बताएं कि किस प्रकार से आपकी जर्नी रही जो आप ब्रह्मा कुमारी में पहुंची वो कनेक्टिंग जो एक परिचय हो कि वहां पर आप कैसे पहुंची और वहां पर आपका क्या कार्य था इस बारे में थोड़ा सा पहले बताइए। ओके मैं मेरी माताजी इनसे जुड़ी थी। मतलब मेरी मदर और मेरी मदर इससे जुड़ी थी कि वो शिव भक्त थी तो उनको तो जो शिव भक्त होते हैं अगर शिव मिल जाए तो वो कहीं भी जाने को तैयार हो जाते हैं। तो मेरे फादर काफी मैं वैसे बिलोंग यूपी से करती हूं। यूपी के गाजियाबाद से एंड रहती मुंबई में हूं। तो यूपी में कावड़ यात्रा चलती है शिव भगवान के लिए। तो आप तो ज्ञानी है। आपको तो मालूम होगा ये चीज। तो सभी प्रांतों में अलग-अलग शिवरात्रि अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है। तो हमारे यहां यूपी में कावड़ पद यात्रा का बहुत महत्व है। सनातन परादी के अनुसार तो मेरे फादर ने 16 खड़ी कावड़ चढ़ाई थी। मेरे यहां पहली पुत्री हो। तो मैं हुई मैं बड़ी बच्ची हूं अपने घर की।
00:02:33:08 उसके बाद मेरी मदर को जाना था किसी भी शिवधाम को। उसके पहले ही किसी पड़ोसी मतलब मेरे नेबर थे हमारे वहीं से कोई माता जाती थी इनकी ब्रह्मा कुमारी से याद में तो ब्रह्मा कुमारी का उन्होंने सुनाया कि तुम दर-दर पे क्यों ढूंढती हो शिव को आपको इतनी तपस्या करते हो आप लोग शिव चालीसा रखते हो पता नहीं क्या क्या करते हो चलो हम तुमको शिव से मिलाए तो वो लेके गई थी मेरी मदर अच्छा तो मैं उनसे प्रभावित हो के मेरी मदर पीछे पीछे सुनने तो मतलब आपने किस आयु में प्रभाव देखा जिसके कारण आप अट्रैक्ट हुई ब्रह्मा कुमारी वालों से एक सेकंड सर हां मेरी आवाज आ रही है फिर से आपको जी जी मतलब लगभग क्या आयु रही होगी जब आपने मतलब जब आपने उधर की ओर मेरी आयु मेरी आयु या आपने आंख आंख खोलने के साथ ही आपने वो वैसा वातावरण पाया था सुना था तो मैंने बताया बताया ना कि मैं बड़ी बच्ची हुई तो यही था कि शिव भगवान की वजह से तभी मेरी मदर का मैं ब्रह्मा कुमारी में आना जाना देखती थी बचपन में बालपन से तो सेवंथ ए स्टैंडर्ड
00:03:48:09 में तो मैं माउंट आबू चली गई थी और फिर नाइंथ के एग्जाम दे रही थी तो मैं पढ़ाई छोड़ने का विचार करके वहां रह गई मतलब मदर को भी बोल दिया कि मैं नहीं जाऊंगी और मैं काफी प्रभावित हुई उनसे और मैं वही करूंगी जैसा कि पूरे पूर्ण फॉलोअ करके ऐसा नहीं केवल हम सुनते रहेंगे। अगर यहां कुमारियां सेफ है, लड़कियां बहुत अच्छे से रह रही हैं तो पोरिटी अच्छी चीज है तो मैं वर्ल्पत होना चाहती हूं। तो मैं वहां रह गई माउंट आबू में। इवन मेरी मदर जो ज्ञान सुनती थी बहुत अच्छे से। उन्होंने ये मंजूर नहीं किया। मतलब ज्ञान उन्हें अच्छा लगा। सब चीज उन्हें अच्छी लगी। लेकिन उनको जब उनकी बेटी जाने लगी तो बुरा लगा। तो वो मुझे काफी जिद करने लगी। पहली बार मदर के दिमाग में शक तब आया जब मेरा मुंह हो जाएगा उन्हें कि बच्चा दूर हो जाए तो उन्होंने कहा मैंने सुनने के लिए बोला था मेरे साथ आने के लिए बोला था लेकिन मैंने समर्पित होने के लिए तुम्हें नहीं बोला था इसलिए तुम चलो और मैं भी नहीं सुनूंगी तुम भी मत सुनो चलो वापस तो मेरी मदर ने तो छोड़ दिया वो किसी वजह से नहीं छोड़ा था कि उनको बुरा लगा वो तो आज भी उन्हें अच्छा ही मानती है भोलेपन जैसी मेरी माँ है बहुत भोली है वो जो एक छाप छूट जाती है किसी के
00:05:03:10 मस्तिष्क पे कोई तो फिर वो हां वो छाप छूट गई कि लड़की मेरी लड़की छीन ली उनको ये हो गया कि इन्होंने मेरी लड़की छीन ली तो मदर तो जाना आना बंद हो गई बट मैं रह गई वहां पे मामला हो गया तो आपने बताया कि आप किस पद पर कार्यरत थी तब जब आप वहां से हटी हैं तो आप एक बड़े पद पर कार्यरत थी तो
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00:05:26:28 आप आपकी आवाज नहीं आ रही मेरे फोन पर फोन आ रहा था तो मैंने वो म्यूट करके उनको मना दिया। सॉरी आप क्या पूछ रहे थे सर? जी आपने बताया
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00:05:44:14 था कि आप वहां पर एक शीर्ष पद पर कार्यरत थी तब आप वहां से हटी हैं। तो ये तो 1996 की बात है। जी बस मैं ये पूछना चाह रहा हूं। जैसे आपकी वहां की यात्रा कैसी रहेगी? मतलब जब आप ब्रह्मा कुमारी में जब आप पहुंची तो आप एक सामान्य अनुयाय के रूप में रही होंगी और उसके बाद आप सामान्य अनुयाई से और वहां के एक किस शीर्ष पद पर पहुंची थी और कैसे पहुंची थी ये दोनों चीजें मैं सामान्य अनुयाई तो नहीं बनी जो सामान्य अनुयाई थे वो तो चेंज हो सकते थे बदल सकते थे उनके शायद कम फॉलोवर हो सकते थे उनका मन बदल सकता था मैं तो डायरेक्ट हेड ऑफिस में चली गई ना दादी दादी मनोहर इंदिरा जो दादा लेखराज के घर के सामने जिनका घर था पाकिस्तान में जहां सिंध हैदराबाद में उन्होंने ज्ञान दिया था सीधा वो दादी ने मुझे अपने साथ सेवाधारी रखी मतलब पहली बार जब आप घर पहली बार जब आप घर छोड़ के जब गई है वहां तो सीधे वो जो शीर्षस्थ जो दादी थी उनके सानिध्य में पहुंची रख लिया सानिध्य में रख लिया वो प्रेम प्यार से रखा था उनकी भावना कुछ गलत नहीं थी और दादियां बड़ी अच्छी थी मुझे आज भी याद आती है तो उन्होंने इसलिए इसलिए रखा था कि छोटा बच्चा है और
00:06:59:15 यह कहीं और नहीं रखी जा सकती और यह मेरे साथ रहेगी तो मेरे साथ रहेगी में मैं भी बड़ी मां की तरह मुझे भी मां की ममता छटी थी तो मुझे भी वो मां की तरह मोह हो गया और मैं उनके साथ बड़े प्रेम से रही और मुझे जब तक कोई ज्ञान नहीं था बस मैं रह रही थी और उन्होंने नाइंथ में ही मुझे जो मेरा नाइंथ का स्टैंडर्ड था मेरे ख्याल से उस समय मैं रही होंगी 10 से 12 साल की तो दादी ने ही मुझे मुझे कोर्स कराया दादी मनोहर इंद्र जो ब्रह्मा कुमार आज ये कहते हैं नीलिमा बहन को पूरा ज्ञान नहीं है इसलिए नीलिमा बहन एंटी है नहीं मुझे पूरे से पूरा है अत्यधिक ज्ञान है उतना ज्ञान है ब्रह्मा कुमार इसका जितना मुझे नहीं होना चाहिए था शायद ज्यादा जानकारी भी मुझे हानि पहुंचाई तो वो मुझे पूरा उन्होंने ही कोर्स कराया उन्होंने ही चलाया और उनके रूप में ही मैं कोर्स करती थी सारी ट्रेनिंग भी दादियों ने कराई जैसा ब्रह्मा कुमारी टीचर्स ट्रेनिंग हुई तो पहले मुझे चांस दिया मैं वहां की लाडली बच्ची थी। ज्ञान सरोवर के कोटेज में रहती थी एंड सबकी प्यारी थी मैं। ज्ञान सरोवर क्या है? ज्ञान सरोवर में एक कोटेज है दादी कोटेज। वहां मैं रहा करती थी। माउंट ज्ञान सरोवर इनका कोई अच्छा कोई सेंटर होगा। कैंपस
00:08:14:24 कैंपस है माउंट आबू के अंदर तीन कैंपस है शांतिवंत नीचे और ज्ञान सरोवर मतलब यहां सारे फॉरेनर सारे विदेशी सारे आपके आईएएस ऑफिसर जितने भी सेमिनार होते हैं वो ज्ञान सरोवर में होते हैं और पांडव भवन इनका छोटा सा घर है जो शुरू शुरू में नखा ने शुरू किया था स्टार्टिंग में पांडव भवन ने शुरू किया था तो इनका सबसे हाईएस्ट कॉम्प्लेक्स वीआईपी कॉम्प्लेक्स जो है वो गरो वहां पर आपको जगह
00:08:48:24 अच्छा तो फिर उसमें जो आप जो मैनेजमेंट में और कार्यकारिणी में पहुंची ना तो वो कैसे आपका चुनाव किया इन लोगों ने किस तरह से मैं कार्यकारिणी में इस तरह पहुंची सर उसके लिए बहुत वफादार बनना होता है और उन दिनों मुझे इनकी कुछ गलत गतिविधियां दादियों के आसपास पता नहीं चली क्योंकि मैं उस समय सिर्फ दादियों के पास थी मैं 14 15 16 17 18 साल तक दादी के ही संरक्षण में चली तो वहां मुझे कुछ पता नहीं चला। लेकिन 18 साल के बाद इनके यहां एक प्रक्रिया है समर्पित का फॉर्म भरने की जहां ये बच्चों को समर्पित करते हैं। अभी तक मैं समर्पित नहीं थी दादियों के पास। लेकिन अब ज्ञान इतना हो चुका था। ट्रेनिंग हो चुकी थी। सब कुछ हो चुका था। मैंने नडियाद गुजरात से ट्रेनिंग की थी। इंदौर हॉस्टल भी इनका ट्रेनिंग का सेंटर है। बट मुझे इंदौर नहीं नडियाद भेजा गया। और मैंने जब ट्रेनिंग कर ली तो मुझे कहा गया कि हम मतलब यह पता था मुझे कि शायद 18 साल बाद ये सबको सेंटर देते हैं। मुझे भी एक सेंटर देंगे क्योंकि मुझे भी सेंटर इंचार्ज बनना था। मुझे कोई माउंट आबू में रहना नहीं था कि मैं भी एक सेंटर चलाऊंगी। सेंटर इंचार्ज बनूंगी और कुछ लोग होंगे बस उनके साथ में रहूंगी टीचर बनके। तो इसीलिए मेरी
00:10:04:02 ट्रेनिंग भी हुई थी। तो जिस समय ट्रेनिंग होती है इंदौर हॉस्टल और मेरियाद हॉस्टल दो ट्रेनिंग की जगह है इनकी। तो वहां पर ट्रेनिंग में ना मेरे साथ 300 कुमारियां थी। 300 ब्रह्मा कुमारियां छोटे बच्चे भी थे। सब 17 18 साल के थे हम लोग और जब ट्रेनिंग पूरी हुई छ महीना मौन रहना था। गंभीर रहना था शांत रहना था। व्यवहार सीखना था। वो चीजें अच्छी थी। बुरी नहीं थी। वो व्यवहारिक ज्ञान था। वो बहुत सुंदर ज्ञान था। पर मुझे ये बाद में पता चला कि वो एक बंधक बनाने का ज्ञान था। बट वो एक सिस्टम था उनका जैसे गुरुकुल में सिखाते हैं ऐसे सिखाया गया लेकिन वो बाद में पता चला कि यह सब क्यों सिखाया जाता है किसी से नहीं बोलना है बात नहीं करना है शांत रहना है किसी से कनेक्शन नहीं रखना है यहां की बात कुछ कहनी नहीं है ट्रेनिंग में बोलना ना करना माना नास्तिक हां करना नास्तिक मतलब उनकी तरह हम हांजी हांजी करके उनके जैसे बन गए और फिर वहां से पूरी तरह तैयार ब्रह्माकुमारी सेंटर पर भेजी जाती है जिसमें कोई त्रुटि नहीं होती जिसको तो आप कभी भी कुछ भी सुनाएंगे ज्ञान सुनाएंगे आप कोई थॉट देंगे आप कोई प्रूफ देंगे आप कोई चीज देंगे उनको कुछ समझना नहीं है वो ऑलरेडी ट्रेंड होके आई है तो वो आपका ज्ञान नहीं सुनेंग आपको कितना भी
00:11:19:06 ज्ञान हो तो वो ट्रेनिंग मुझे दी गई और जब मैं वहां जब वहां से 300 कुमारियों को सब उनके घर वाले लेने आ रहे थे माउंट आबू से भी लोग लेने आ रहे थे कि भाई अब ट्रेनिंग पूरी हो गई चलो चलो सब घर जाएंगे तो मैं रास्ता देखती रही और मुझे कोई लेने नहीं आया क्योंकि घर वालों की मर्जी के बिना तो नहीं रह ही रही थी। अब इनको मेरी घर वालों की मर्जी चाहिए थी फोन पे साइन करने के लिए समर्पित करने के लिए बट मेरे घर से तो कोई तैयार नहीं था। मेरी मदर जो गैंग में चलती थी वो खुद तैयार नहीं थी समर्पित करने के लिए। और मैं घर वालों से कनेक्शन टूट चुका था मेरा। फोन का कनेक्शन उन दिनों नहीं था। लेडलाइन थे सब और मोबाइल रखना अलाउ नहीं था। मेरी मदर की हाय हेलो भी बंद हो गई थी मेरी। एंड मुझे याद है अच्छे से कि मुझे लेने कोई नहीं आया। ट्रेनिंग में तो मैंने शाम होते थे उनसे पूछना शुरू किया जिनके पास मैं ट्रेनिंग कर रही थी कि सबको लेने आ गए लोग मुझे लेने नहीं आया कोई मैं कहां रहने वाली हूं या मेरी पोस्टिंग क्या होने वाली है तो उन्होंने बोला कि हम आपको वापस माउंट आबू भेजिए। जैसा कि आपने कहा ना पद कैसे मिला? तो मैंने कहा वापस माउंट आबू क्यों? सब तो माउंट आबू से यहां आए और सबको सेंटर मिला। मुझे सेंटर क्यों नहीं? उन्होंने कहा आपको
00:12:34:14 मैनेजमेंट कमेटी में सिलेलेक्ट कर लिया गया है कि आपको माउंट आबू में मैनेजमेंट में रहना है। मतलब मैनेजमेंट कमेटी का राइट हैंड बन के रहना है। आप हमारी सबसे विश्वास पात्र लड़की हो और हम आपको अब इंटरनेशनल हेड ऑफिस के बारे में समझाएंगे और वहीं पर आपको समर्पित करेंगे। तो मैं वहां आई मुझे लेने माउंट आबू से काफी वरिष्ठ भाई भेजे गए। तो सब बैग लगा के गुजरात से मैं वापस आ गई और आने के बाद यहां जब मैं आई माउंट आबू में जब मैं आई तो मेरे लिए बहुत बड़ी कमेटी बैठी जिसमें दादी रतन मोहिनी थी निर्भयर भाई थे करुणा भाई थे मैसूर की लक्ष्मी बहन थी बहुत सारे बड़े-बड़े लोग थे बुन्नी बहन थी मोहिनी बहन थी कि नीलिमा बहन हम आपको यहां पे एक रूम दे रहे हैं डायमंड हाउस कहते हैं जो सबसे इनके यहां वीआईपी जगह है डायमंड हाउस उस में 26 नंबर कमरा और वहां उस रूम के बिल्कुल बाजू में एक विजिटिंग रूम देंगे हम आपको जो भी कोई समस्याएं होंगी हम आपके साथ एक कमेटी बनाएंगे छोटी बहनों की कि कोई समस्याएं होंगी तो आप सुने और आप उसको करें और जहां कहीं जरूरत होगी तो हमारे ही भी निर्णयों में आपका हस्तक्षेप रहेगा। तो इन्होंने
00:13:49:18 मुझे एक गाड़ी दी वहीं पर जो इनकी सेवाधारी गाड़ी होती है। एक ड्राइवर दिया सुखवीर भाई करके थे वो ड्राइवर थे मेरे एंड रूम दिया सारी फैसिलिटी दी जो एक वीआईपी पदाधिकारी को दी जाती एंड सेंटरों से कोई शिकायत आती थी कुछ बाहर का लफड़ा होता था कोई चीज होती थी वो सब बातें सुननी शुरू हो गई आखिरकार वो खुलनी शुरू हो गई मेरे सामने तो के साथ जो बाकी बाकी जो बहनें थी जो वो अलग-अलग उनको सेंटर्स दे दिए जाते हैं कि आप आप लखनऊ का सेंटर संभालो या आप फलाना सेंटर संभालो इस तरह से। हां जी। तो वो एक ट्रेनिंग करके सेंटर इंचार्ज बना दी जाती है। अच्छा तो ये जो सेंटर्स है ब्रह्मा कुमारी बना के देता है या फिर कोई लोकल बंदा अपनी ओर से उसको लग बनाता है। वही पॉलिसी है सर कि हम लोगों को जो वहां से दिया जाता है वो कोई पैसा नहीं दिया जाता। वहां पर एक पराधी है उनकी मतलब पराधी मतलब एक क्या बोले हिंदी में इंग्लिश में बोलते हैं एक पर्टिकुलर उनका सिस्टम है पर्टिकुलर सिस्टम को बोलेंगे कि आप यहां से ट्रेनिंग करेंगे ट्रेनिंग करके किराए पर मकान लेंगे किसी भी शहर में किराए पर
00:15:04:19 मकान लेंगे जैसा कि ये लोग पाकिस्तान से जब आए थे ना वही वाला सिस्टम इन्होंने यहां दोहराया तो क्योंकि इंडियन कम्युनिटी क्या है कि भगवान के लिए भावनात्मक बहुत सनातनी भावनात्मक बहुत होता है। तो भावदा से खेलने वाला गेम है कि आप ट्रेनिंग करके आएंगे। आपको वहां पर पांच कपड़े दिए जाएंगे। पांच छह कपड़े एक जोड़ी कपड़े दिए जाएंगे पूरे दो जोड़ी तो दो जोड़ी एक साबुन ब्रश एक छोटा सा ब्रश केस लगा के दे देंगे और बोलेंगे कि आपको इस शहर में जाना है। पर शहर में जाने के लिए क्या करना है? उस लड़की को वो तो ऑलरेडी तैयार हो चुकी। अब जाके मुझे लगता है
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00:15:44:16 मुझे सर मैं आपको सर कहती हूं वो ठीक नहीं लगता। व्हाट इज योर गुड नेम? मेरा नाम शिवश आप शिवश कैसे? शिवांश जी शिवश जी अब मुझे ऐसा लगता है जब मैं बॉलीवुड में आई हूं। मैं इंडस्ट्री में हूं। धुरंधर जैसी फिल्में हम लोग उनके पार्ट बनते हैं फिल्मों के। तो मैं तो खैर अजीत जी की अजीत डोबाल जी की बहुत तहे दिल से फैन हूं। उनकी फॉलोअ भी हूं। उन्होंने कई बार कहा है कि जरूरत नहीं है कि हमें कोई जाने। बहुत जरूरत नहीं है हमें कोई जाने। बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने देश के लिए कुर्बानी की और उन्हें कोई नहीं जानता। देश के लिए सुरक्षा बने और उन्हें कोई नहीं जानता। तो मुझे कुछ ऐसी लत नहीं थी कि मुझे कोई स्टेज चाहिए, मुझे कोई नाम चाहिए, मुझे कोई जाने।
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→ Used in: A · Video ब्रह्माकुमारीज़ के बंद दरवाज़ों के पीछे क्या होता है? 20 साल का अनुभव और इनसाइड... at 14:04 ↗
00:16:30:21 तो वो शुरू से ही मेरे फादर की पालना से ही मुझे पता था कि जानने के लिए नहीं बल्कि करने के लिए धर्म अपनाया जाता है। वहां पर क्या था वहां पर लड़कियों को इसलिए तैयार किया जाता है कि था कि ब्रह्मा कुमारीज को कोई जाने तुम्हें प्रचार करना है। जगह-जगह ब्रह्मा कुमारी का प्रचार करना है। ट्रेनिंग में प्रचार करने का मटेरियल सब दे दिया गया है। आपके पास एक रजिस्टर है। उसमें वन टू वन पॉइंट लिखे हुए हैं। रोज दिन रात उसको रट्टा मारना है। सीखना है। ब्रह्मा के बारे में क्या कहना है? लेखराज को उससे कैसे जोड़ना है? कराची के बारे में स्टोरी क्या है? उससे हमको कैसे जोड़ना है? सनातन के हर एक चीज को कैसे मैनपुलेट करके बदलना है? कैसे हर धर्म के व्यक्ति को यह किसी एक पर्टिकुलर धर्म के भी नहीं है। हर एक धर्म के व्यक्ति को कन्वर्ट करके अपने तक लाना है। कुल मिला के उसको मुरली ज्ञान ब्रह्मा कुमार बताना है। यह सारा ट्रेनिंग लेकर के उनको कह दिया जाता है किराए पर मकान लो। रेंट पे घर लो किसी सोसाइटी में और उस घर पे बोल दो कि भाई हम ब्रह्मा कुमारीज का ज्ञान सुनाएंगे और ऐसेसे हमें यहां चाहिए। तो घर कैसे मिल जाते हैं? डीलर्स के थ्रू घर मिल जाता है। मतलब किसी प्रॉपर्टी डीलर के पास जाओ। वहां कहो हम तो साध्वी है। जी। हम
00:17:46:02 यहां गीता का ज्ञान सुनाएंगे। वो इसीलिए गीता ज्ञान कहते हैं इसको। सनातन धर्म का ज्ञान सुनाएंगे और आपका घर चाहिए। अच्छा वो घर जो होता है वो मोटी रकम का होता है। मान लीजिए 5000 रुपए में कोई घर मिल रहा है। यूपी में ₹10,000 में घर मिल रहा है। मैं यूपी का उदाहरण दे रही हूं। तो वो 5 10,000 में कोई और लेगा तो 500 में ही लेगा लेकिन अगर ब्रह्मा कुंवारी लेगी तो उसे 25,000 में लेगी और आप सोचिए उसके पास कोई सोर्स नहीं है ₹2,000 महीना देने का लेकिन वो फिर भी उसे 25,000 में लेती है क्योंकि स्टार्टिंग का एक साल का खर्चा माउंट आबू उसको पहुंचाता है कि ये खर्चा हम पहुंचाएंगे तुम सेटल हो जाओ। तो वो रेंट देते हैं और वो सब्जी भाजी जो भी उसका खर्च होता है अगर वो सब्जी भी लेती है ठेले पे से सब्जी लेगी ना पड़ोस मोहल्ले में कोई सब्जी बेचने वाला आएगा तो आलू टमाटर का सब कच्चा बिल रखेगी वो वो बिल इसलिए नहीं रखा जाता कि ब्रह्मा कुमार यहां ब्रह्मा कुमारी संस्था बहुत पारदर्शी है नहीं वो बिल इसलिए रखा जाता है कि अगर वो बिल नहीं देगी तो उसे खर्चा नहीं दिया जाएगा स्टार्टिंग का एक साल दिया जाता है उसको एक साल करके दिखाओ तुम्हारा मरने जीने का टाइम है ये मतलब तुमको
00:19:01:10 और वो क्या करती है जो आती है लड़कियां वो एक दौड़ होती है मैं तुमसे आगे तुम मुझसे आगे मैं तुमसे आगे मैं देखती हूं क्या तो उस चक्कर में वो लोग सोसाइटी के अमीर लोग जो होते हैं रिच लोग जो होते हैं उन सबको चाहती है कि इनको किसी तरह से करो पैसा लो और वो पैसा किसी तरह से हम माउंट आबू पहुंचाए और वो बड़े जो शीर्ष नेतृत्व पर बैठे हैं वो हमसे खुश हो और हमें कुछ भी मतलब कॉम्प्लीमेंट्री दे या कोई पोजीशन दे जी तो ये किस तरह से ये ये जो पैसा है जो जैसे वहां जा रहा है अमाउंट अब तो वो किस रूप में आता है वहां जाता है कैश मतलब जो जो देते हैं डोनेट करते हैं तो वो किस किस तरह से जो डोनेट करते हैं वो सेंटर्स पे कई सारे बॉक्सेस रखते हैं वो लोग यह भी एक बहुत बड़ा खेल है मतलब हॉल में एक भंडारी होती है जिसमें ज्ञान सुनते हैं लोग जहां प्रवचन होता है सुबह का 7:30 बजे की मुरली होती है 7:00 बजे शुरू होती है वो 6:30 बजे योग होता है 4 बजे उठ जाते हैं हम लोग अमृतवेला उठो सुबह सुबह उठकर के 6:00 बजे हम हॉल में होते हैं 6:30 से 7:30
00:20:16:16 तक वो प्रोग्राम चलता है ज्ञान सुनाने का वहां एक बहुत बड़े-बड़े बॉक्सेस होते हैं उनमें लिखा होता है भोलेनाथ की भंडारी तो उसमें सब पैसा डाल डालते हैं और वो अनगिनत लोग होते हैं जितने आपकी जनसंख्या होगी 1000 लोग अगर आपके क्लास में रोज आ रहे हैं वो क्लास होती है मेडिटेशन क्लास तो उस मेडिटेशन क्लास में अगर रोज 1000 लोग आ रहे हैं तो रोज अगर कोई ₹1 भी डाल रहा है तो उस हिसाब से समझ लो और ₹1 कोई नहीं डालता [हंसी] आज के टाइम में तो 500 से कम नहीं मेरे समय भी कोई 500 से कम नहीं डालता था एक वो भंडारी होती है एक भोग की भंडारी होती है बाबा का भोग लगेगा एक माउंट आबू के अंदर सर हेड ऑफिस में खाना चलाने की भंडारी होती है। उसमें पैसा डालो। एक माउंट आ भी सभी सेंटर्स पे सोर्स ऑफ इनकम सेंटर्स है। सोर्स ऑफ इनकम माउंट आबू नहीं है। माउंट आबू तो कटोरा ले बैठा हुआ है। भिखारी है। देने वाली ये बहने हैं। कन्याएं हैं। अबलाएं कह दो आप इनको। तो ठीक है। वो भावना में समझ नहीं रही है। लेकिन वही कर रही है। तो पांच छ सात भंडारी इस तरह की रखी हुई है। हॉस्पिटल की भंडारी नर्सिंग ट्रेनिंग की भंडारी,
00:21:32:02 ट्रेनिंग की भंडारी, बहनों की भंडारी, कई तरह की भंडारियां है। तो ये अगर डोनेशन आती है तो उन बॉक्सेस में जाती है और बॉक्सेस को एज इट इज खाली करती है और वहां पर जो है पहुंचा दिया। हां। हां जी। उस कैश को कलेक्ट करती है वो बहन। और उस कैश को कलेक्ट करके एक नाम के लिए एक अकाउंट भी खोलते हैं लोग। जैसे मेरा कोई पर्सनल खाता नहीं हो सकता अगर मैं समर्पित बहन हूं। लेकिन मेरे शहर के पास के बैंक में मेरा खाता होगा गवर्नमेंट्स को ध्यान भटकाने के लिए लेकिन वो खाता होगा माउंट आबू ट्रस्ट का जहां जिसका पासवर्ड माउंट आबू ट्रस्ट के पास होगा मेरे पास नहीं वो जब तक मैं खोल सकती हूं जब तक मेरा उनसे कनेक्शन सही है और जिस दिन मेरा कनेक्शन उनसे खराब हो गया वो उसी दिन वो वहां से बंद कर देंगे अच्छा तो अगर कोई बैंक में डोनेट करता है तो वो डायरेक्टली माउंट आबू पहुंच जाता है उसमें तो और अगर कोई बॉक्सेस में कैश डोनेट करता है तो वो फिर वो कलेक्ट करके और समर्पित शिष्य भेज देती है। तो इसमें कुछ ऐसा भी आता है कि ये जो बहने होती है इनके मतलब इनमें ऐसे भी केसेस आ सकते हैं कि वो जो माउंट आबू है उसके साथ चीटिंग कर रही हो बहनें। बिल्कुल करती
00:22:47:10 है। जैसे आपने अभी बताया ना कि जैसे वो बिल बना रही हैं जैसे आपने कहा ना 10,000 का किराए वाला घर वो 25,000 में लेती हैं। तो वो उन्होंने बताया कि 25,000 है किराया और वो किराया उनको माउंट आबू से मिल रहा है। नहीं नहीं सॉरी यहीं पे मैं आपको करेक्ट कर रही हूं। 25,000 में इसलिए लेती है कि सोसाइटी दे दी। सोसाइटी दे दे उसको। मतलब वो सोसाइटी का मेंबर जो है जो दे रहा है सामाजिक जो व्यक्ति है गस्ती वाला व्यक्ति वो जो उसे दे रहा है वो 25000 में इसलिए दे रहा है कोई आम आदमी मुझसे 10 या 15 में लेगा ये ब्रह्मा कुमारी 25 में ले रही है तो होता वो 25000 ही है उसमें कुछ नहीं कर सकती वो उसको तो एक साल वो रेंट उन्हें दिखाना है ना एक साल बाद तो कोई भी अमीर आदमी फसेगा और घर बनवा देगा एक साल निकालना है कैसे भी ये तो हो गया मगर वो हां चीटिंग कैसे चीटिंग कहां करती है वो मैं आपको बताती हूं एक टाइम ऐसा आता है जब मल्टी रिचेस्ट लोग जुड़ जाते हैं सेंटर से और वो ऐसे जुड़ जाते हैं जो बहनों से जुड़ जाते हैं वो माउंट आबू से कोई खास नहीं जुड़ते पर बहनों से उनकी भावना जुड़ जाती है बेचियां सफेद साड़ी वालियां बेचारी घर छोड़ के
00:24:02:12 आई हुई है ऐसी चलिए बहन जी मैं सेंटर बनवाता हूं लीजिए बहन जी मैं देता हूं अमाउंट मत बताना 10 लाख आप रखिए दो लाख वहां दीजिए दो लाख की पर्ची मुझे दे दीजिए आप ज्यादा वहां मत दीजिए तो अगर कुछ क्लश हुआ और उसने कुछ बताया या सेंटर पर थर्ड पर्सन ने किसी दूसरी बहन ने देख लिया वो बात भाग गई तो उसके मुद्दे बनते हैं अच्छा तो ऐसे केसेस आपके सामने आए क्योंकि आपने बताया मैं भूल गलती हां जी वो मेरे सामने हल एक दो उदाहरण कहीं का एक दो उदाहरण अगर मैं दूं कहीं का काफी सारे मैं हुबली का उदाहरण दूंगी क्योंकि हुबली से इनका काफी कुछ हुआ है। हुबली की एक दर्दनाक घटना है। दो बहने समर्पित थी और वहां पे ये बड़े ईमानदारी से सेवाएं कर रही थी। बहुत ईमानदार बहने और वो पाई पाई घी का डब्बा भी अगर किसी ने नाम दिया तो वो वहां पर लाकर देती थी। यह हुबली का उदाहरण भी मैं इसलिए दे रही हूं क्योंकि हुबली के नाम पर ये लोग खुद कोई क्लेम भी नहीं करते। कभी कुछ बोल भी नहीं पाएंगे। उनको आज भी उन्होंने दुख दे रखा है। तो वो छोटे छोटे घी के डब्बे भी ले आती थी। उनकी भावना थी। वो कुछ नहीं रखती थी और वो
00:25:17:15 बहुत ऐशो आराम वाली बहनें भी नहीं है। उनके जो घर है वो कड़ियों के हैं। वो टपकते हुए घरों में रह रही है। ऐसी बहने हैं और फिर भी फिर भी वो करोड़ों लोगों करोड़पति लोगों का पैसा इधर लाकर दे रही है। इतनी ईमानदार सच्ची बहने तो क्या हुआ अचानक से मैं माउंट आबू में थी तो मेरे से मिलने के लिए कुछ बहनें बाहर आफत मचा रही थी बुरी तरह से मेरा अब तक न्याय सिस्टम ऐसा फैल चुका था कि अगर उसे बात पता चल जाएगी तो न्याय होगा मतलब अभी तक ये शोर मच चुका था जितना काम मैं कर चुकी थी तो मुझे पता चला कि बाहर कुछ जिसको कहते हैं ना कि लोगों ने आंदोलन जैसा कर रखा है और बाहर के मेन गेट पे माउंट आबू के मेन गेट पर वो बैठे हुए हैं। वो क्या चाहते हैं? सबसे पूछा क्योंकि मैं तो दिल्ली में थी। मैं ऑलरेडी सेंटर चला दी थी। मैं आ चुकी थी माउंट आबू से। तो उन्होंने कहा कि ये नीलिमा बहन से मिलना चाहते हैं। तो मुझे फोन आया निर्वेयर भाई का निर्वेयर सेक्रेटरी जनरल थे यहां पे। तो वो सब कुछ थे सर्वे सर्वा ब्रह्मा कुमारीज तो उन्होंने कहा मतलब वो बोलते हैं ऐसा था नीलू बहन ओम
00:26:32:16 शांति। हां जीशा आप जल्दी से अभी की एक घंटे की फ्लाइट ले इधर पहुंचो तो फ्लाइट का पैसा भी यही लोग देते थे सही बात है मैंने कभी कोई खर्च नहीं किया मैं पढ़ी लिखी लड़की थी मुझे पता था मुझे क्यों खर्च करना है मुझे खर्च नहीं करना है तुम्हें मेरी जरूरत है तुम बुलाओगे तो वो टिकट करा के देते थे मुझे बुलाते थे अब मैं वहां जाके देख रही हूं कि वह बहने तो बहुत पुरानी है उनके सामने तो शायद मेरी उम्र भी बहुत छोटी तो मैंने उनसे पूछा कि मेरे को क्यों बुलाया गया? कहा कि बाहर बहुत सारे लोग गेट पर पड़े हुए हैं। लेटे हुए हैं तीन चार दिन से और वो जिद कर रहे हैं कि नीलमा बहन से हमें मिलना है। सिर्फ नीलमा बहन से मिलना है। अब आपका क्या है ऐसा कि आपसे मिलना है तो एक बार बात सुन लो। मैं यही सब देख के माउंट आबू से आई थी और मैंने इन्हें कह दिया था मुझे कहीं सेंटर दे दो प्लीज। यहां हाथ जोड़ती हूं। मैं एक छोटा सा सेंटर चलाऊंगी। आपके यहां आऊंगी जाऊंगी। दूसरों की तरह मैं यहां नहीं रहूंगी। तो अब सेंटर से बुलाना शुरू हो गया था मुझे। यह 2011 की बात है। 2011 में इन्होंने मुझे सेंटर से बुलाना शुरू कर दिया और ये मेरी या तो कहेंगे आप सूझ समझ या फिर वो बेवकूफी मानूंगी आज तो मैं कि भाई मैंने बेवकूफी
00:27:47:18 की इनके बीच में घुस के। तो मैंने उन्हें सुना। सुनने के बाद एक बात बताइए आप। आप जब कोई घटना सुनते हैं और आप पढ़े लिखे हैं तो आपको यह तो अंदाजा होता है कि गलत सही का कम से कम पता तो लगा लूं कि गलत सही है क्या? एक तरफ सुनकर के तो मैंने मंथरा पढ़ी है। मैंने कैकई का हाल देखा है रामायण में। मैं सनातन धर्म से हूं। जो गीता पढ़ता है उसे क्या नहीं आता? आप मुझे बताइए। क्या नहीं वो सीख सकता है? जो रामायण का अध्ययन कर रहा है उसे सारे घर की गस्ती का पता है। लेकिन अगर अध्ययन कर रहा है बशर्त उसने अध्ययन किया है। एक अच्छी गस्ती क्या होती है और एक अच्छी गृहस्ती को टूटने के आधार क्या होते हैं? तो मैंने मंथ को सुना। मैंने कैकई की चीजें देखी कि कैकई ने कैसे खो दिया सब कुछ? वो कैकई जिसने राजा दशरथ की जान बचाते हुए ये कह दिया था मेरे पास तो सब कुछ है। मैं कैकई अकेला नहीं हूं। क्या दोगे तुम मुझे जान बचाने के उसमें? तुम तो एक छोटे से राजा हो। तुम मुझे क्या दोगे? इतनी परिपूर्ण कैकई मंथरा के दो शब्दों से इतनी खाली हो गई कि उसे अपने बेटे के लिए राज्य मांगना पड़ा राजा से। इतनी खाली इतनी भिखारी बना दिया उस मंथरा ने। तो मुझे पता था कि कान भरने वाला जो होता है वो तो मंथरा होता
00:29:02:21 है। पर जो सुनता है वो खुद राजा से भिखारी हो सकता है। तो मैं सुनती नहीं थी गलत बात। तो मैंने उन बहनों को कहा कि आप वेट करो। मैं कुछ करती हूं। तो मैंने बड़ों से कहा इनकी बात ऐसे ऐसे है लेकिन यह जो बात ये कह रहे हैं उनकी उनका झगड़ा बेसिकली यह था कि वो बहनें बहुत सेवा कर रही थी लेकिन जॉन इंचार्ज जो था वो माउंट आबू वालों से मिला हुआ था ये लोग एक जॉन इंचार्ज रखते हैं। आप समझिए के मान लीजिए बहुत जलेबी जैसा है। आप समझ लीजिए इस चीज को। मान लीजिए एक स्टेट में 30 सेंटर है तो वह 30 सेंटर की बहनों को भी यह सच नहीं मानते। उस 30 सेंटर की बहनों के ऊपर एक जोन इंचार्ज फिट करते हैं लोग। जैसे दिल्ली में आशा और वृजमोहन है। जैसे बेंगलुरु में कोई लक्ष्मी है। मैसूर में रहती है। कुलदीप है। और जैसे यहां पर माउंट आबू में दादी रतन मोहिनी है। अजमुनी है। अलग-अलग राज्यों में एक हेड है इनका। पहले वो हेड सुनेगा। बाद में ये सेंटर की बहनें उनसे डायरेक्ट मिलेंग। तो वो जो जॉन इंचार्ज था उस व्यक्ति ने उनके साथ बड़ा गड़बड़ किया। वो माउंट आबू कहने लगा इनका सेंटर बंद कर दो क्योंकि
00:30:18:00 वो उसको हिस्सा नहीं देती थी वो डायरेक्ट माउंट आबू दे थी वो कट नहीं देती थी उसका बीच में जैसा नहीं जैसा नहीं एक कट होता है जॉन इंचार्ज को पहले खुश करो फिर उधर भेजो वो उसको कट नहीं पहुंचाती थी जैसा कि दवाइयों में होता है बेसिकली अब तो मैंने देखा कि अगर आप दवाइयां दो दवाइयों में मतलब कनेक्टेड हो अगर हॉस्पिटल से मेडिकल है तो वहां टेस्ट ज्यादा समर्पित समर्पित व्यक्ति को भी घूस देनी पड़ेगी किसी को। हां जी। तो वो डायरेक्ट जुड़ गई थी। तो यह उनका झगड़ा था। तो मैंने उनको सारी बात बताई। मैंने कहा देखिए गलती उसकी है। वो व्यक्ति ऐसा इन प्रश्न कर रहा है। इनकी कोई गलती नहीं है। ये सब बनी बनाई कहानी है। आप कैसे कह सकती हो? तो मैंने कहा एक सर्वे करा लीजिए। अपने यहां से एक सर्वे टीम भेजिए। और उसमें मेरे भी दो व्यक्ति होंगे क्योंकि मेरा मुझे मेरी नेचर जानते हैं लोग। जो मेरे साथ जुड़ेंगे वो मेरे से सच बोलेंगे। वो दो लोग मेरे भी होंगे और वहां जाएंगे और पूछेंगे बात करेंगे। क्या बात है? तो गए और सच ये निकला कि वो बहने सही थी। ठीक थी। बाद में उस भाई ने उनके पिताजी ने उनको कुछ कह दिया था। उस भाई ने उनके पिताजी की हत्या तक की। ओ बहुत
00:31:33:10 केसेस आप सोचो। मतलब बहुत समझ रहा हूं। तो अब थोड़ा सा वापस आ जाते हैं वहां पे जहां पर जो बहनें थी वो चली गई सेंटर्स पे। हमने सेंटर्स के बारे में भी थोड़ा बहुत जान लिया और आप आई हैं वापस माउंट माउंट आबू में और सीधे मैनेजमेंट कमेटी में है ना तो फिर यहां से आपकी यात्रा क्या रही? क्योंकि आपने अभी बताया ना कि आप बीच में सेंटर भी चलाया आपने। तो यहां से आपकी यात्रा क्या थी? वो ट्रेनिंग ट्रेनिंग लेकर के आप वापस जब आई हैं माउंट आबू मैनेजमेंट वाले में तब आपको गाड़ी मिल गई। एक रूम मिल गया और अच्छे से आपका सब हो गया। फिर मैं चीजें सुनने लगी। मुझे बुरा लगने लगा। मैंने इनके पास एक बार बैठ के रिक्वेस्ट की कि मुझे सेंटर दे दो प्लीज। इन्होंने मुझे सेंटर देने में बहुत दिन लगाए। मेरा तो मैनेजमेंट मैनेजमेंट कमेट में आपका रोल यही था कि जो बाहर से चीजें आ रही है उनको शॉर्ट आउट करना। बाहर से ही खुद मैं खुद राजस्थान जोन के अंदर बाहर के ऑफिसरों को जैसे फॉरेस्ट ऑफिसर जैसे पुलिस वाले जैसे बहुत लोगों में इनका प्वा है वहां उन लोगों को डील करना बेसिकली मेरा ये काम था एस अ पीआरओ तो मैंने मना कर दिया था कि मैं पीआर नहीं कर सकती आपका पीआर का मतलब होता है कि सिर्फ
00:32:48:16 आपकी प्रशंसा तो मैं वो सिर्फ प्रशंसा नहीं कर सकती अगर सच बताना है तो मैं सच बताऊंगी ना एक्चुअली हो वो कह रहा है टीवी था तो फिर आपको सेंटर सेंटर लेने का मन इसीलिए हुआ कि पीआर से आप नहीं संतुष्ट नहीं हां परेशान थी मैं कि मैं पीआर नहीं कर सकती तो फिर कैसे आप बता रही है उसमें भी आईडी नहीं बना रहे थे आप कि ऐसा कुछ था फिर वो सेंटर लेने की बात है तो भाई इन्होंने तो 2012 10 से किस्सा शुरू हुआ कि मेरा आईडी तो बना लिए सेंटर पे जाना तो तो उन्होंने बनाएंगे इसको ये देना है इसको वो देना है तो दिया मैंने जो भी देना था मेरी मदर को फोन किया एक दिन और हां आईडी लेना है तो यहां से कुछ देना होगा अरे घस देनी है वहां पर भी घस चलती थी हां तो मेरे पास कुछ था नहीं देने के लिए मैं तो अभी तक तो आप ही के पास रह रही हूं तो मेरे पास पर्सनली तो कुछ था नहीं देने के लिए मैंने तो जो दिया था शुरू में मेरी नानी ने मुझे कुछ गोल्ड दिया था तो वो गोल्ड निकाल के दे दिया। इन्होंने कहा कानों में नहीं पहनना यहां नहीं पहनना। ब्रेसलेट पहनती थी वो नहीं पहनना। तो वो एक दिन सब निकलवा लिया था। तो वही था मेरे पास एज अ कन्या एज अ कुमारी
00:34:03:22 कन्या क्या पहनती है? वो हमारे यहां बचपन में ही कान छेदने के लड़कों का भी और लड़कियों का भी होता है ना सनातन में तो वो डायमंड के थे वो दे दिए थे। नाक में मेरे एक उस समय सानिया मिर्जा टेनिस स्टार आई थी। तो वो एक नथ पहनने का स्टाइल उन्होंने चलाया था। वो मेरे फादर ने मुझे दी थी। वो मैंने दे दिया था। गले में एक छोटा सा चैन था वो दे दिया था। तो मेरे पास जो था मैंने दिया था। एक टाइटन की घड़ी थी मेरे पास। इन्होंने बोला ये गोल्ड प्लेनेट है और गोल्ड प्लेनेट घड़ी नहीं पहन सकती। एक समर्पित बहन तो वो भी मैंने दे दिया था। मेरे हाथ में एक रिंग थी छोटी सी मेरी मदर ने डाली थी। वो भी मैंने दे दी थी। तो मेरे पास कुछ ऐसा खास नहीं था। है क्या दूसरे के लिए तो मैंने मेरी मदर को कॉल किया और एक मिनट यहां पे एक थोड़ी सी जिज्ञासा हो रही है आप बहुत रोचक तरीके से आप बता भी रही हैं जब आप जब आप उनसे कह रही हैं कि मुझे आप सेंटर दे दीजिए तो सेंटर देना पहली बात तो ये है क्या ऐसा है कि सेंटर मिल जाना कंपैरेटिवली टू एक मैनेजमेंट में अच्छा पद मिलना इससे थोड़ा सा श्रेष्ठ है सेंटर मिल जाना एक ये तो एक बात दूसरी
00:35:19:01 बात यदि दूसरी बात यदि वहां पर आपको क्या कहते हैं घूस देनी पड़ रही है किसी को है ना तो किसको दे रही हैं घूस क्योंकि आप तो स्वयं ही अपना जीवन समर्पित करने के लिए वहां पर आई तो यहां पे एक ये बनता है ना लॉजिक आप मांग किससे रहे हो और किस लिए मांग रहे हो मैं तो ये दो ये ये दो चीजें एक तो वो अगर ऊंचा है तो क्यों ऊंचा है सेंटर मिलना और एक ये जो यहां पे यहां पे आपको एक तार्किक सोच आई होगी आपके मन में कि मैं किसको दे रही हूं अगर आपने आपने दिया भी होगा तब भी जी बिल्कुल आई थी तो शुरू में मैंने जब ये गोल्ड दिया जिसका जिक्र मैंने किया तो उसमें तो उनका तर्क ये था कि जब भगवान शिव पर समर्पित हुई थी गिरिराज की बेटी पार्वती उमा तब उन्होंने फूलों के गहने पहने थे ये सब नहीं चाहिए तुम हमारे यहां ये सब क्या करोगी तुम गोल्ड का तो हम भी सुनते थे हमारे यहां लोकगीत होते हैं कि भाई गौरा घूम रही पर्वत पर शिव को पति बनाने के लिए और नहीं चाहिए मुझे कानों के उनके कान सजाने के लिए नहीं चाहिए मुझे गले की माला गला सजाने के लिए मुझे तो दे दो हर की माला जाप कराने के
00:36:34:07 लिए ये गीत मैंने सुने भी थे तो छाप थी इधर कि ठीक है छोड़ दूंगी तो क्या हो जाएगा वो मैंने छोड़ दिया था पहली बात दूसरी बात मैं अब क्वेश्चन कर रही हूं हां मैं किसे दे रही हूं जबकि मैं तो समर्पित हूं इतनी तो सेवाएं दे चुकी हूं तो मेरे पास कुछ नहीं है। तो इन्होंने बोला कि घर वाले जब तक समर्पित नहीं करते तब तक आप समर्पित नहीं होते हो। तो ये फॉर्म जो है इस पर साइन करा के लाइए अपने मम्मी पापा का और जो वो दे सकते हैं वो देंगे आपको। तो मुझे दो-ती महीने के लिए घर भेज दिया गया। खुद ही भेज दिया इन्होंने सब। खुद ही घर भेज दिया कि घर जाओ अभी आप। अब आप यहां नहीं आप घर जाओ। तो मैं घर आई। तो इस समय कोई इस समय कोई झगड़े का कोई झगड़ा नहीं था। नहीं 2010 की बात है ये। इस समय कोई झगड़ा नहीं था। मैं घर आई। उम्र मेरी छोटी थी। घर में बहुत हल्ला मच गया कि घर वापस आ गई है और शादीवादी करो ये वो करो। तो मेरे पे प्रेशर बहुत था घर से कि अगर मैं कुछ ज्यादा दिन रही तो ये मेरी शादी कर देंगे। तो मेरे फादर को मैंने बताई बात। मेरे फादर मुझसे बहुत ओपन थे। बहुत मतलब वो फ्रेंड की तरह थे। बहुत अच्छे शिक्षक भी थे मेरे लिए। तो उन्होंने
00:37:49:08 बड़े भाई ने बड़ा भाई पूछने लगा कि कुछ है तो बताओ कैसे क्या करना है? तुम्हारी इच्छा से करेंगे। क्योंकि मैंने उन्हें ये कह दिया था अगर तुमने शादी की तो मैं सुसाइड कर लूंगी। तो वो थोड़ा घबरा गए थे घर वाले। है ना। घबराने के बाद उन्होंने कहा तुम क्या चाहती हो? वो बताओ। तो मैंने कहा मैं समर्पित होना चाहती हूं। और जो मैं चाहती हूं वो वहां पे दे दीजिए आप। कुछ दे देंगे तो वो मुझे जल्दी समर्पित कर तो कुछ क्या घर वालों ने पूछा कुछ क्या लोग आपस में भी मीटिंग करते थे मुझे नहीं बताते थे बट मेरी मदर दुखी थी बहुत तो उनको बहुत प्रेशर था मेरे फादर मेरे ताऊजी मेरा फैमिली आज भी बहुत जॉइ है ताऊजी चाचा जी सब इकट्ठे रहते हैं उनके बच्चे हम ताऊ जी के बच्चों से भी डरते हैं हमारे ऊपर मेरे मैं अपने घर में बड़ी हूं लेकिन ताऊ जी के बच्चे मेरे ऊपर बड़े हैं तो मेरे मेरा बड़ा भाई फिर मेरे चाचा के बच्चे मेरे मामा के भी बच्चे आते जाते सब इकट्ठे हैं हम लोग तो अभी मुझे इस फैमिली को समझाना बहुत मुश्किल हो रहा था कि देगा कौन प्रश्न ये था कि वहां पे अगर समर्पित होना है तो मेरे लिए कौन क्या देगा तो मेरी नानी आई नानी कभी-कभी कुछ देती है ना तो नानी आई तो नानी मुझे बोली एक
00:39:04:12 दिन ऐसे ही वाइफ साड़ी में आपने क्वेश्चन रोचक किए मैं रोचक तरीके से बता नहीं रही हूं आपके क्वेश्चन रोचक तो मेरी नानी आई और मुझे वाइट साड़ी में देख के रोने लगी। जोर-जोर से रोई वो तो वो रो रही है। मैं कह रही नानी रो क्यों रही हो आप? तो बोली ऐसे जैसे गांव की औरतें होती है ना तो वो वैसे वो रोगी कह रही हाय किसी का लड़का मार दिया। तूने तो ये कर दिया। मैंने कहा मैंने कहा मैंने किसका लड़का मार दिया? अरे तुमने क्या कर दिया? तुमने पूरा परिवार बर्बाद कर दिया। कोई तो मैंने कहा कौन सा पूरा? तुमको पता है सनातन धर्म में चार विधियां होती है ऐसे होती है वैसे होती है उसके बाद भी आश्रम में जा सकती हो आश्रम तो खुद भी अपना सकते हो मैंने कहा आप रो क्यों रही हो बोली मैं इसलिए रो रही हूं कि वो मामा भात देते हैं ना भात माने मायरा आपको पता होगा तो मायरा के मायरा के लिए ना मामा नानी कुछ ना कुछ रखते हैं हमारे लिए मतलब मैं अभी अपने आप को भाग्यवान मानती हूं कि उस दिन नानी आ गई तो वो बोलने लगी मैं तो तेरे मायरे के लिए कुछ लेके आई मतलब उसने सबको कुछ ना कुछ दिया था। अभी मैं बाकी थी। मतलब इस फैमिली में स्टार्टिंग का बच्चा अभी ताऊजी के बच्चों की शादी हो चुकी है। मेरी होने वाली है। उसको ऐसा लगा तो वो चुपके से कुछ लाके
00:40:19:13 मम्मी को देना चाहती थी। मम्मी ने बोला वापस ले जाओ। कोई जरूरत नहीं है। देखो इसने क्या हाल कर रखा है। इसको क्या देना है। जा के मंदिर में चढ़ा दो। तो मैंने कहा नानी मुझे दे दो। वो जो लाइट फोड़ रही है मैंने वो खींच ली। मैंने कहा नानी मुझे दे दो मुझे चाहिए। तो नानी बोली क्यों चाहिए तुमको? तुमको तो शादी नहीं करनी है। मैंने कहा नानी आप ये सोच के तो आपने मेरा मायरा दे दिया। तो बाहर दे दिया। तो बोली उसमें दो सोने के कंगन थे बड़े और पायल थी जो छोटी-छोटी लड़कियों के लिए लाते हैं। तो ज्यादा खास नहीं था। उस समय ₹1 लाख थे। तो बोली अच्छा ठीक है तू रख ले। लेकिन तू शादी करा ले। मैंने उसको पूरा पक्का करा कि हां मैं शादी कराऊंगी। तो चार पांच दिन वो सब साड़ी भी नहीं पहनी। तो उसको मैंने बोला मैं शादी कराऊंगी। जब नानी चली गई
00:41:09:25 सॉरी तो मैंने बहुत जिद करी कि मुझे माउंट आबू जाना है। इन्होंने मुझे जाने नहीं दिया घर वालों ने। मैंने चुपके से उस समय कुल ₹700 ₹800 में एक टिकट होती थी। माउंट आबू की तो वो ₹700 ₹800 में किसी से मैंने टिकट कराई। क्योंकि मैं ब्रह्मा कुमारी थी। मैं सब कुछ सीख के आ चुकी थी। कैसे जाना है, कैसे नहीं जाना है, मेरे को आज सब पता था। तो मैंने वो टिकट कराई और मैं माउंट आबू आ गई। मेरी नानी की वो पोटरी लगी। उसमें कुल मिला के वो उस समय मतलब होगा 101 लाख का कंगन होगा उसमें। तो वो सब मैंने जाके निरि भाई को बोला कि भाई जी मैं समर्पित होना चाहती हूं। अब मेरी आप आईडी बनवा दो। बोले मुन्नी बहन से बात करो। अब ये मुन्नी बहन क्या कह रही है? मुन्नी बहन को देना होता है। वो उसको लक्ष्मी कहते हैं ये ब्रह्मा कुमारीज वाले कि उसको यह देना है आपको जो लाई हो आप। उसने देखा भी नहीं। बस उसने कहा मुन्नी बहन को ये देना है। तो उनसे मेरी मीटिंग फिक्स कराई गई। मुझे वहां भेजा गया। मैंने वो सब जो भी हैंकी था रुमाल था वो सब खोल के दिखाया। पैसा दिखाया। दिखाया तो इन्होंने मुझे मतलब जो आईडी बनाने में इन्होंने सात से आठ साल लगा दिए और या आज भी सबका नहीं बनाते।
00:42:25:22 इन्होंने वो आईडी रातों रात बना दी। अगले दिन वो फटाफट बैठ के फोटो फोटो खींच के मेरा आईडी बना दिया। समर्पण भी करा दिया और वो पैसा वैसा लेके वो सब शिवलिंग को फेरे दिलाना ये करना वो करना वो मेरा नहीं हुआ। तो मैंने कहा अब तुमने जब आईडी बना दी तो मुझे क्या जरूरत है? वो शिवलिंग को फेरे ये सब मैं नहीं लूंगी। तो आईडी लिया मैंने और मैंने कहा मुझे सेंटर का सर्टिफिकेट दीजिए आप। सेंटर का सर्टिफिकेट दीजिए। मैं शांति से आऊंगी जाऊंगी। कुछ लोगों को ज्ञान सुनाऊंगी। मैंने यह सोचा था सनातन का जो ज्ञान मेरे पास है उसको मिक्स करके मैं कुछ लोगों को ज्ञान सुनाऊंगी और वहां मेरे हिसाब से और जरूरी नहीं है कि मैं माउंट आबू आऊं। ऐसा सोच के मैं आ गई थी। तो इन लोगों ने मुझे मतलब मुजफ्फरनगर का एक सेंटर कहीं का जहां को मैं जानती भी नहीं थी। और बिल्कुल जंगल बिल्कुल वहां की बहने कहने लगी यहां नहीं आएगी। यहां हम क्योंकि मेरे से ऑलरेडी बहने चिड़ी हुई थी। सभी बहनें बहुत खार खाई हुई थी। वो क्यों वो आप भी समझते होंगे क्योंकि मैं जब वहां थी तो उनहीं के फैसले किया करती थी ना। तो वो बहुत मतलब मेरे से आज भी बहनों की बनती नहीं है। उनहीं के खिलाफ तो आंदोलन था मेरा कि तुम लोग गलत। [गला साफ़ करने की आवाज़] यहां से आगे बढ़ने से पहले एक क्वेश्चन
00:43:40:24 आ रहा है कि जैसे आप सेंटर आपको लेना है तो आपको एक तरीके से घुस देंगे। जी और और वहां पर भगवान का ऐसा कोई चरित्र है नहीं जो ऐसा हो जिसके प्रति हमारे मन में आकर्षण हो है ना भगवान के वहां पर जो मुख्य भगवान का रूप बताया गया है वो निराकार है और जो लेखराज है वो ऐसे हैं जैसे बस उन्होंने उनके शरीर में आकर के कहा है ना इस तरह से लेख तो फिर आपका जो वो था ना एक आत्मिक संबंध एक होता है ना कि हम इसके लिए कर रहे हैं ब्रह्मा कुमारी हां वो भावना किसके लिए थी? जैसे कि जैसे कि आर्य समाज वालों से हम बात करें तो आर्य समाज वाले कहेंगे हमारी जो उनकी मुख्य भावना है वो दयानंद जी के लिए है क्योंकि उनके यहां परमात्मा निराकार है तो निराकार के लिए उतनी भावना नहीं है मगर दयानंद के लिए उनकी वो है भावना है अगर अगर इस्लाम वालों से बात करेंगे तो उनकी भावना मोहम्मद के लिए है है क्योंकि उनके यहां भी ईश्वर का कोई स्वरूप है नहीं तो डायरेक्ट ईश्वर के लिए कोई भावना नहीं है तो जो उनका प्रतिनिधि बन के यहां पर है उससे ही सारा अटैचमेंट होता है।
00:44:55:27 तो ऐसे में आपकी भावना जो है वहां पर क्योंकि अब जो मैं जो यहां दिख रहे हैं वो भी घूस ले रहे हैं आप आप उनको घूस देकर तो फिर आप वहां पर जुड़ी किससे हो कहने का मतलब ये है और परमात्मा निराकार है। जी मैं आपको बताती हूं। यही एक ऐसी चीज है जो आपके चैनल पर होनी चाहिए। आप लोग बहुत अच्छा काम कर रहे हैं कि कम से कम इस चीज को दूसरों तक पहुंचाने का काम करेंगे। जिस उम्मीद में मैं आपके यहां इंटरव्यू देने आई। अभी आपने जो क्वेश्चन किया है ये मेन पॉइंट है धमाकोलाइज का जो सच में पूछना चाहिए था। बहुत रिलेवेंट क्वेश्चन किया आपने। इन्होंने एक थरी बनाई है कि अपने आप ही मनगढ़ थरी है वो बाद में पता चली मुझे कि गुलजार दादी के तन के अंदर शिव प्रवेश करते हैं और शिव प्रवेश करके शिव की वाणी बोलते हैं वो तब गुलजार दादी को अपना होश नहीं रहता उसके अंदर अवतरण होता है ये एक अंधविश्वास है और ये ये देखते देखते देखते देखते जैसे ओशो रजनीस को मानने वाले लोग जाते मिस्टर विनोद खन्ना जैसे लोग भी वहां जुड़े। ठीक है? और कहीं-क लोग आज भी जुड़े हैं। जिनकी जहां आस्था है वो वहां जुड़ता है।
00:46:11:01 मेरी आस्था सिर्फ शिव में थी और कहीं ना कहीं मैं ये मानती थी कि मैं इनके लिए नहीं उनप तो मेरे को हमेशा डाउट रहा कि ये शिव ऐसे नहीं आ सकते। शिव का अवतरण ऐसे नहीं हो सकता क्योंकि मैंने हलाल के बारे में भी पढ़ा था। मुझे हलाल के बारे में भी पढ़ना मतलब मैंने आप सोचो कि काल नेमी हलाहल यह सब तो हमने पढ़ा था। हमें हमारे नाना जी ने सब बताया था कि कलयुग में काल नेमी होगा और कैसे कैसे शिव ने वो हलाहल पिया था। जिस शिव को कोई धारण करने की बात भी नहीं कर सकता वो शिव आ कैसे सकता है। तो मुझे भरोसा नहीं होता था। पर फिर भी मैंने एक चीज समझ ली कि मैं बहुत बचपन में आई। मेरा एक वीक पॉइंट ये हो गया था कि जिस समय मैं बचपन में आई उस समय उस बात को सच माना था। मैडम क्योंकि मेरे को इतना ज्ञान नहीं था। मैं बच्ची थी तो बच्चे को जो बता देंगे आप सोचो उसको बताओ आप ये चाकू है। यह लॉलीपॉप है, ये ब्रेड है, ये दूध है। तो बच्चा वही मानता है। मैं ए बी सीखने की उम्र में आई थी मैं। उन दिनों मानते मानते जो भावना बनी और जहां मैं फंस गई ट्रैप में। अब मैं ये मानने लगी जब मुझे होश आ गया जो भावना मेरी बनी रही कि चलिए यहां नहीं है शिव जी। है
00:47:26:04 ना? मान लीजिए यहां ढोंग होगा। लेकिन मैं तो शिव के नाम पर आई। मैंने तो भगवान शिव को अपना जीवन दे दिया। मैंने तो यह सोच के भगवान शिव को अपने को समर्पित कर दिया कि मैं अच्छा काम करूंगी। जरूरी नहीं है मेरा माउंट आबू जाना। तो मैंने माउंट आबू से इसीलिए विमुखता दिखाई। बहुत जल्दी माउंट आबू से आगे कि मैं यहां अपना सनातन वैदिक ज्ञान चुनाऊंगी और सेंटर पर रहूंगी और ज्यादा कनेक्शन माउंट आबू से नहीं रखूंगी। अच्छा। तो एक तरीके से मतलब आईडियोलॉजिकली आप ब्रह्मा कुमारी से टूट चुकी थी पहले ही टूट चुकी थी पहले आईडियोलॉजिकली आपको ब्रह्मा कुमारी समझ में नहीं आया था जी बिल्कुल मैम हां ये बहुत ये मतलब एक बहुत जरूरी बात है क्योंकि आइडियोलॉजिकली आप पहले ही वो फिर आपका मोटिव पहले तो फिर आपका मोटिव मोटिव ये रह गया कि आप अपना एक सेंटर चलाएंगे जहां पे आपको सारी सुविधाएं मिल जाए आपके जीवन के लिए पर्याप्त और उसमें आप जो सनातन धर्म धर्म का प्रचार प्रसार करें। ईश्वर की बात करें और उसमें ऐसा भी कुछ खास नहीं था कि आपको ब्रह्मा कुमारी का ही एज इट इज ज्ञान देना था उस सेंटर से। नहीं ऐसा एक्चुअली ब्रह्मा कुमारी का बोर्ड लगाने के बाद तो आपको बंधना पड़ता था कि आपको
00:48:41:06 वही सुनाना है। मैं तो यह चाहती थी कि मैं भगवा पहनूं। सबको वैदिक ज्ञान की बात बताऊं। बताऊं इनको कि अग्नि अग्नि पूजा क्यों जरूरी है? किस लिए हम अग्नि कौन मानते हैं? किस लिए हम यह वस्त्र पहनते हैं? और मेरा फेवरेट कलर था सैफरन कलर। ठीक है? और मैं यह कर नहीं पाई। प्रॉब्लम ये थी कि अगर ब्रह्मा कुमारी का बोर्ड बाहर लगाना है तो ब्रह्मा कुमारी की साड़ी पहननी है। और ब्रह्मा कुमारी की साड़ी पहननी है तो जितने जो लोग ज्ञान सुनने आ रहे हैं। एक्चुअली वो भी ब्रह्मा कुमारियों को जानते हैं तब आ रहे हैं। अगर मैं स्टेज पर बैठ के कुछ सनातनी सुनाऊं तो मुझे कथावाचक बोल दिया गया। मुझसे बहने फ्रंट हो गई। मुझसे बहने टूट गई। बहनों ने मुझे ये कहा कि तुम तो कथा सुनाती हो। तुम तो सनातन की रटी रटी बातें बताती हो। तुम तो अंधविश्वास फैलाती हो। तुम ये चार पांच दिए क्यों जलाती हो? मैं रोज एक मैं घर में अभी भी मेरे मुंबई में बहुत जगह नहीं होती मुंबई में। फिर भी हम बालकनी पे क्या मैं पौधे रखती हूं। मैं आपको पौधे बता दूं। वृक्षों की पूजा हमारे यहां होती तो मैं करती थी। मैं सूर्य को जल देती हूं सुबह तो मैं तब भी देती थी। वो तो मैंने मेरे घर में सीखा था। ब्राह्मण हूं मैं तो सूर्य को जल देना इनको पसंद नहीं था। मेरे
00:49:56:09 से मेरे मैं सेंटेंस चार थी तो मेरे साथ रहने वाली छोटी बहने मुझे उल्टा बोलती थी। दीदी आप मुझे हमें क्या सिखा रही है? सूर्य को जल देने का क्या मतलब है? मैं आंगन में तुलसी लगा रही हूं। बड़ा घर लेती थी। मैं कुछ ऐसा कर लेती थी जो रेंट पर लिया गया जो थोड़ा बड़ा हो और फैसिलिटी ज्यादा ना हो। तो किसी का टूटा फूटा मैंने एक बंगलो लिया था गाजियाबाद में कि मैं इसको ठीक कर लूंगी। तो मैंने दो तीन चार टोली मिट्टी गिराई उस पे और काफी अच्छा गार्डन बनाया। गार्डन के बीचोंबीच मैंने तुलसी लगाई। देखिए आप तो वो तुलसी का पूरा एक घर बनाते हैं ना हम लोग वो बनाया। तो उस पर परिक्रमा देना बहने कहने लगी ये क्या है? मैंने कहा तुम लोग एक्सरसाइज भी करो गार्डन बन जाएगा। एक हॉल एक कमरा तो बहनों को यह पसंद नहीं था। ये क्या लिया आपने? एक हॉल एक कमरा। आपको अलग कमरा नहीं चाहिए। तो तब मुझे पता चला पहली बार कि सेंटर इंचार्ज का कमरा अलग होता है। तो मैंने कहा एक दो हॉल थे वहां पे। दो हॉल थे एक गार्डन था। तो मुझे कुछ ज्यादा नींद नहीं थी। तो मैंने कहा हॉल है। तीन बहने हैं हम दो कन्याएं थी मेरे साथ जो उनकी भेजी हुई थी। तो हम तीनों सो सकते हैं ना। एक हॉल में तीनों सो सकते हैं। उसमें क्या प्रॉब्लम है? और मैं तो हॉस्टल की तरह समझती थी। जैसे
00:51:11:10 हॉस्टल में पढ़ते हैं या जैसे कन्याकुमार रहते हैं घर में तो मैंने तीन बेड लगवाए के तीनों यहां सोएंगे। नहीं दीदी आपका तो अलग कमरा होना चाहिए। आपका तो अलग ट्रीटमेंट होना चाहिए। मतलब वीआईपी होनी चाहिए। बहनों के कमरे में कोई जाता नहीं है। मेरी ना कोई आज तक अलमारी की चाबी ना पहले थी ना आज है। मैंने कोई अलमारियां नहीं जुटाई है। मेरे पास कोई ऐसा पर्सनल सामान नहीं है जिसे कोई देख नहीं सकता। मेरे फोन में आज भी बॉलीवुड से होते हुए भी इंडस्ट्री से होते हुए भी आज भी मेरे घर में कोई भी या मेरे फोन में कोई पासवर्ड नहीं है। जरूरत नहीं है मुझे। मतलब मेरा कुछ ऐसा है नहीं। तो बहनें कहती थी कि ये अजीब दुनिया है आपकी। और फिर बेल पत्री का पौधा एक है। मैं शिव जी के लिए दिया वहां जलाऊंगी। शिवलिंग रखे हैं। वहां बाहर उनको मैं अभिषेक करूंगी। अलग-अलग अभिषेक कहने का मतलब यही था कि आप आप जो सेंटर में जाने वाली थी घस देकर के वो आप अपने तरीके से उस सेंटर को चलाने वाली थी। चलाने वाली थी तो नहीं चला पाई मैं। इन्होंने क्या किया? फिर इन्होंने आपको जब सेंटर दिया तो इनको तब तक आपकी आईडियोलॉजी नहीं पता थी कि थोड़ा थोड़ा हमारी ना दो बहने मेरे साथ
00:52:26:12 छोड़ी थी ना उन्होंने उनसे पता चल गई। अच्छा तो वो बहनों को लेकर के आपको फिर भी इन्होंने मतलब एक तरीके से ना चाहते हुए भी आपको घूस के कारण इन्होंने वो सेंटर दे दिया मुजफ्फर नगर वाला मुजफ्फरनगर वाला फिर फिर फिर क्या हुआ वहां से आगे बताइए मुजफ्फरनगर वाला नहीं मतलब मैंने ही बनाया मैंने ही एक एक मकान ढूंढा मैंने वो दोनों बहने रखी फिर क्या होता है वो दोनों बहनों को ये बुला लेते हैं वो दोनों बहने मेरी बुराइयां करती है कि ये तो पूजा पाठी है ये तो वो ज्ञान नहीं सुनाती तो ये लोग एक बात पकड़े हुए इनके यहां से ना एक संस्था टूटी हुई है। आपको पता होगा कौन वो ड्रेस आध्यात्मिक विश्वविद्यालय आध्यात्मिक विश्वविद्यालय क्या नाम था उसका? वी से कुछ नाम है। हां वीरेंद्र देव दीक्षित वीरेंद्र दीक्षित जी तो वीरेंद्र देव दीक्षित को ये लोग शंकर पार्टी बोलते हैं। शंकर पार्टी शंकर पार्टी तो ये लोग क्या मुझे तब पहली बार पता चला तो जो पूजा पाठी लोग हैं ये उनको भी शंकर पार्टी भक्ति वालों को बोल देते हैं। तो अचानक से मुझे फोन आता है माउंट आबू से निर् भाई का वही जिन्होंने सेंटर दिलाया था। वो कहते हैं नीलिमा बहन आप जल्दी से यहां आ जाओ। आपके लिए मीटिंग रखें जरूरी है बात करना आपसे तो मैं गई तो मेरे
00:53:41:20 लिए बहुत सारे लोग बैठे थे जैसे मुझे टबल बैठती है मुझे सजा दे देंगे उन्होंने कहा कि ये बहनें बता रही है आप पूजा पाठी हो ये हो वो हो आप तुलसी पे दिया जलाती हो बेल पथरी पर दिया जलाती हो ये क्या करती हो भर के बाहर दिया जलाती हो ये सब नहीं चलता है ये 2012 की बात है सेंटर का सर्टिफिकेट इन्होंने मुझे 2012 में दिया तो मैंने कहा दिया जलाना ये सब करना कोई गलत बात नहीं कहा आपने अगर बहुत जल्दी से बंद नहीं किया तो सेंटर बंद कर दीजिए। तो मैंने कहा नहीं सेंटर बंद नहीं करूंगी मैं। आप सोचो जिसके लिए मैंने जद्दोजहद की मेरा परिवार भी मैंने छोड़ दिया। तो इन्होंने एक बार भी नहीं सोचा कि मेरा क्या होगा? मैं कहां जाऊंगी, मैं क्या करूंगी? उन्होंने कहा सेंटर बंद कर दीजिए और सेंटर पर ताला लगा दीजिए और आप अपने घर जाइए। तो मैंने इनसे प्रॉमिस नहीं किया। मैं भी अभी तक थोड़ी हिम्मत वाली हो चुकी थी। मैं अकेली वहां से आ गई। मेरे साथ बहनें नहीं आई। कोई भी बहनें मेरे साथ आने के लिए रेडी नहीं थी। तो मैं अकेली वहां पे आई तो इन्होंने एक एक मतलब सेमिनार रखा था वहीं पे। मेरे को आना था जिस दिन उस दिन एक कुमारी को दादी ने भेजा जिसका नाम नीलम बहन था आगरा से। तो वो लड़की
00:54:57:08 किसी को कह रही होगी कि मुझे कोई ऐसी बहन चाहिए जो केयर करे। तो वो बहन थोड़ी सी सीधी साधी सी थी जिसको रखने के लिए शायद कोई तैयार नहीं था। तो दादी रतन मोहिनी ने मुझे बुलाया। दादियों से दादियों को मेरे से प्यार बहुत था। वो क्यों था वो तो अभी तक आपको पता चल चुका होगा। तो मेरी सारी बातें फैली जैसी तो दादी रतन मोहिनी को स्नेह बहुत था मेरे से क्योंकि मैं बचपन में उन लोगों के साथ रही तो बेटी जैसा देखते थे। तो उन्होंने कहा दादी ने बुलाया आपको एक बहन आपको देंगे। तो मैं गई तो दादी ने कहा इस कन्या का आपको ध्यान रखना है। मां की तरह से पालना देनी है। शुक्र कीजिए आप कि वो एक सबूत है मेरे पास जो आज मैं बोल रही हूं आपको वो उसकी पूर्णतः गवाह है। वो आज तक जुड़ी हुई है मुझसे। तो वो दादी ने मेरे साथ भेजा और मैं रो रही थी। मैं बहुत परेशान थी। व्हेन कोई भी आपको इग्नोर करता है, रिजेक्ट करता है तो फॉर द टाइम आपको क्या लगता है कि मेरे में बहुत कमियां होंगी। शायद मैं बहुत खराब होऊंगा। शायद मैंने कुछ ज्यादा गलत कर दिया। तो मैं खुद से रिग्रेट हो रही थी कि मैंने क्या किया ऐसा? तो वो लड़की
00:56:12:09 ने बोला दीदी मैं रहूंगी आपके साथ। वो बस उसकी टिकट करा के दादी ने मुझे भेजा और मैं यहां आ गई गाजियाबाद। तो जो दादी है जो दादी है रतन मोहिनी जी तो वो अब नहीं है मतलब वो इनके वो जो बीके के काले कारनामे होते हैं जैसे लोगों को बहलाना फुसलाना वो उन सब में इन्वॉल्व नहीं थी क्या मतलब वो भी तो वही ले उनको इन थी पता सब था अच्छा वो चुप थी बस पता सब था चुप थी वो उनकी मजबूत थी वो दर्शक थी ठीक है फिर वो तो एक तरीके एक तरीके एक तरीके से कहना चाहिए कि जो आपके जो मेन जो वो हुआ है विरोध बीके वालों से उससे काफी पहले से थोड़ा सा एक मानसिक वैचारिक विरोध चालू हो गया था आपके हिंदुत्व की वजह से सनातन सनातन की वजह से सिर्फ हिंदू नहीं कहूंगी मैं मैं कट्टर सनातनी ब्राह्मण कहूंगी उसकी वजह से तो फिर फिर वो सेंटर फिर चला नहीं चला फिर वापस कैसे आ गई आप दोबारा से अब तो अगर कोई सर नहीं है सोचे सोच के देखिए कि मैं हिंदुत्व का प्रचार करूंगा मैं तो आपको बहुत सलाम करती हूं प्रणाम करती हूं आपके
00:57:27:13 पैर पकड़ती हूं सलाम भी इसलिए बोल रही हूं कि कहीं आपके दूसरे लोग नाराज ना हो जाए [हंसी] समझ रहे हैं मेरी इंडस्ट्री में वही लोग हैं कोई नाराज नहीं होना चाहिए सनातनी से बेसिकली हम सब सनातनी थे ठीक है बेसिक में मैं मानती हूं ऐसा कि बेसिकली जब बच्चा पैदा होता है नहीं वो रियलिटी है वो रियलिटी किसी भी धर्म में तो उसको धर्म धारण करना पड़ता है। चाहे आप सिख में सिखिज्म में जाओ तो तलवार धारण करना, पग धारण करना, कड़ा धारण करना पड़ता है ना। अगर आप ईसाइयत में जाओ तो वहां भी कुछ ना कुछ धारण करना पड़ता है। अगर आप इस्लाम में जाओ तो धारण करना पड़ता है। लेकिन जब एक हिंदू बच्चा पैदा होता है तो कुछ धारण नहीं करता है। क्योंकि वो ऑलरेडी जिसमें है वो ऑलरेडी आदमी सनातन वो है कि जो जो सबको जन्म देता है तो मैं तो वो हूं तो मैं क्यों किसी की विरोधी हूं ना मैं इस्लाम विरोधी हूं ना मैं ईसाइयत की विरोधी हूं ना मैं क्योंकि मुझे पता है हम सब बेसिकली सुना तो नहीं है वो सब हमारे भाई हम सब के पक्षधारी हां जी तो मुझे प्रॉब्लम ये हुआ कि मुझे अकेला कर दिया गया मुझे सब
00:58:42:21 मतलब मतलब पूरी दुनिया भर के ब्रह्मा कुमार कुमारी एक हो गए और मुझे ऐसे कर दिया गया जैसे कोई विभीषण लंका में विभीक्षण का जो हाल हुआ होगा वो मेरा हुआ है तो फिर ये बहन मेरे साथ आ तो गई अब इन्होंने दूसरा अपना कुछ आजमाया कि इसको निकालने का क्या रास्ता निकाले क्योंकि इसको आईडी दे दी हमने इनको प्रॉब्लम क्या हुआ कि इसको निकाला कैसे जाए क्योंकि एक आईडी का पर्टिकुलर टाइम होता है कि वो वो लाइफ टाइम के लिए होती है और जो सर्टिफिकेट होता है वो एक साल में रिन्यू होता है। तो अभी तो साल भर हुआ नहीं था। तीन महीने हुए थे कुल तो वो सर्टिफिकेट तो रिन्यू करने से रोक सकते थे पर वो आईडी नहीं बदल सकते थे मेरी। हम तो अचानक पता नहीं अंदर अंदर कुछ चल रहा था मेरे लिए। कुछ तो भी अंदर चल रहा था कि भाई सबकी एक सलाह हो गई थी। इस लड़की को निकालो। तो अचानक से इनको मेरी फिर जरूरत पड़ती है। भगवान की लीला देखिए आप तो ये लोग मुझे फोन करते हैं कि यह अब की बार जेन्युइन जरूरत पड़ रही है और इन्हें पता है कि मैं सेंटर चला रही हूं और अब इन्होंने मेरे स्टूडेंट्स जो आते थे उन लोगों को तोड़ना शुरू किया। उनके घरों में बहने भेजना शुरू की। एक एक शहर
00:59:57:27 में तीन सेंटर होते हैं। एक मेरा एक दो और सेंटर जो उनके अंडर थे। उन सभी बहनों ने मेरे सभी अनुयायों को तोड़ना शुरू कर दिया। सभी के घरों में जाकर सभी से गलत फोन पर बात करके यह हमारे यहां की नहीं है। हम लोग इसे निकाल रहे हैं। यह हमारे आंटी है। यह संदिग्ध गतिविधि करती है। इसलिए हम पता नहीं क्या-क्या वर्ड उस समय मुझे संदिग्ध शब्द का मतलब पूछना पड़ा था किसी से। ये संदिग्ध क्या होता है? किसी ने मुझे कहा था दीदी देखो आपके लिए क्या लिखा है। मैंने कहा क्या ये संदिग्ध बहुत बुरा होता है। मैंने कहा क्या होता है? तो फिर उन्होंने बताया कि मतलब जो कुछ गलत काम करती हूं तो वो सब वो सब मैंने बहुत सुना लेकिन कोई टूटा नहीं सब आते रहे क्लास चलती रही अचानक से इन्हें मेरी जरूरत पड़ी क्यों पता है आपको ये माइनिंग कर रहे थे ये पहाड़ तोड़ रहे थे ये इललीगल जमीनें जब्त कर रहे थे तो अचानक से एक कलेक्टर साहब आए और उन कलेक्टर साहब ने बोला कि मैं सब कुछ तोडूंगा जो भी आपने इललीगल लिया है अभी मेरे मेरे घर का थोड़ा पॉलिटिकल थोड़ा सा था जान पहचान और मैं ऑफिसर्स के यहां सेवा करने इनके यहां से राखी बांधने जाती थी। कुछ पहचान में लोग समझते हैं कि बहन हमें जानती है कोई
01:01:12:28 बात नहीं। तो इन्होंने मुझे कहा नीलिमा बहन आप आओ यहां पे ऑफिसर से बात करो और ये तोड़ना नहीं चाहिए। फिर मैं आई मैंने सेवाएं करी लेकिन मैं क्या करूं मैं मजबूर। मैं वही सनातनी मुझे तो भीष्म पिता बनने से बड़ा डर लगता था। मुझे आपको आपने आपने बताया था ना कि आपको उस टीम में डाल दिया गया था जो लॉयर वाली टीम होती है उसका हेड तो वो यही सब वो यही टाइम यही से शुरू हुआ इन्होंने बोला लॉयर्स से मिल लीजिए लॉयर्स आपकी बात सुनेंगे आप लॉयर्स के साथ जाइए आप करना तो मुझे ये चाहिए था अगर मैं बहुत स्वार्थी थी कि यार इनको मेरी जरूरत है अब मैं इन्हें इंप्रेस कर सकती हूं लेकिन वही मेरी गंदी आदत सच को सच और बुरे को बुरा कहने का पड़ गया था कि नहीं अगर मैं मुखदर्शक हुई तो मुझे भुगतना होगा। ऐसा मुझे धर्म का ज्ञान था। वो धर्म कुछ करने नहीं देता था कि धर्म रक्षित रक्षित है। ये जो पढ़ा था ना ये बुद्धि में चलता था कि धर्म की रक्षा तुम करोगे तो धर्म तुम्हारी स्वतः रक्षा करेगा। माता नाना जी बताते थे कि माता कौशल्या ने राम को कुछ नहीं शिक्षा दी थी। वन जाते हुए यही कहा था। राम तुम धर्म की रक्षा करना। धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा। तो मैं गई कलेक्टर ने बहुत बुरा
01:02:28:04 बात बताया नीलिमा जी ऐसा है वैसा है नहीं वो वो क्या सीन था वो क्या सीन था जब आपके साथ दो लोग आए थे तो उनको बाहर भेज दिया था किसी को वो जो मैंने आपको बताया था जी जी जी पहले ऐसा कुछ हुआ था एक बार ऐसा कुछ था हां जी जी वो ये हुआ था मैं डिटेल में इसलिए नहीं बताना चाहती मैंने कहा कहीं कोई बहुत लंबा कन्वर्सेशन ना हो जाए ये नहीं नहीं आप केवल उतना बता दीजिए कि आपके साथ जो लोग भेजेंगे गए थे उनको लेकर के पहले से वो जो कलेक्टर था वो संदिग्ध था मतलब उसकी नजर में वो लोग थे जो आप संदिग्ध थे एक कलेक्टर आए थे मिस्टर श्रीराम मीणा मैं नाम भी ले सकती हूं क्योंकि उन्होंने कारवाई की थी तो यहां पे भरत नाम का एक भाई है जो बहुत गलत काम करता है और वो मैं किस लिए बोल रही हूं क्योंकि उसके बहुत सारे रिकॉर्ड्स हैं जो मैं दिखा उस पर आरोप उस पर आरोप है कई आरोप नहीं सिद्ध सिद्ध हो चुका है। अच्छा मतलब वीडियोस आई आरोप लगे लेकिन वो निकाला जा चुका। उसके बाद उसके ऊपर आक्षेप लगे। गलत चीजें हुई। बहुत कुछ आरोप भी है सिद्ध भी है। दोनों चीजें हैं उस कुछ आरोप डिसीजंस भी आ चुके हैं। तो वो भरत
01:03:43:13 भाई एक लता बहन इनको मेरे साथ भेजा गया कि आप श्री राम मीणा से जाके मिलिए और कलेक्टर को बोलिए वो हमारे यहां कोई तोड़ाफोड़ी ना करें। तो लता बहन इनकी वकील है। नोटरी की एक वकील रखते हैं ये। लेकिन वो क्या करती है? उनकी कितनी रिससिबिलिटी है वो मैं नहीं जानना चाहती उसमें। वो मेरे साथ भेजी गई कि क्या करती है नीलिमा कितनी वफादार है जाके देखो। तो कलेक्टर ने भरत और लता बहन को बाहर निकाल दिया। उन्होंने बोला आप बाहर जाइए। उन्होंने वकील का पाड़ दिया। उन्होंने कहा बाहर जाइए आप। आपसे बात करने मैं नहीं बैठा हूं। वो तो क्योंकि किसी जान पहचान से मैं गई थी तो उन्होंने कहा नीलिमा बहन मैं आपको कुछ सच्चाई बताना चाहता हूं और मैं इनके सामने बात नहीं करूंगा लेकिन क्योंकि मैं छोटी थी मेरी एज कम थी मेरा हद कम था मैं कोई इतनी बड़ी नहीं थी जितना बड़ा कलेक्टर समझ रहे थे मुझे तो मैंने कहा कलेक्टर साहब आप इनहीं के सामने बात करिए प्लीज मेरी रिक्वेस्ट है क्योंकि ये बड़ी बहन है तो वो बैठी और उसको बाहर निकाल दिया गया क्योंकि भरत उसके नजरों में आरोपी था तो भरत को बाहर निकाला गया और हमें में बताया गया कि आपने बहुत सारी इललीगल आदिवासियों की जमीन को घेरा हुआ है जिस पर आपका त्रिलोक भवन बिल्डिंग खड़ी हुई है
01:04:58:21 जहां पर फॉरेस्ट की जमीन है हम आप उसे छोड़ दीजिए और फॉरेस्ट से भी हमारे पास शिकायत है कुछ रेवेन्यू की भी साथ झगड़ा है वो भी हमारे पास शिकायत है तो आप इसको खुद खाली कर देंगे तो हम कुछ भी नहीं कहेंगे हम आपको एक टाइम देंगे फॉरेस्ट ऑफिसर से मैं बात करा दूंगा उस टाइम पे अगर और खाली हुआ तो ठीक नहीं हुआ तो हम लोग एक एजेंसी बुलाएंगे और उस एजेंसी से आपकी पूरी बिल्डिंग को तोड़ेंगे क्योंकि हमको जमीन चाहिए। हमें आपकी बिल्डिंग से कोई लेना देना नहीं है। अगर आप बिल्डिंग में पहहिए लगा सकते हो तो पहिए लगाइए और हटा लीजिए अपनी बिल्डिंग। हमें जमीन दे दीजिए। मेरे पास ऑलरेडी एक शिकायत आई है। उन्होंने यह बोला था। तो मैं जाती हूं जाके यही रिपोर्ट निर्भयर भाई को देती हूं। आपको ये इंडिकेशन भी दी। उन्होंने दिया था कि आपके साथ जो व्यक्ति आए हैं ये वो अपराधी है वो फॉरेस्ट के हां उन्होंने साफ कहा था इंडिकेशन नहीं दिया साफ कहा था वो अपराधी है मैंने बोला उनसे क्यों नहीं मिल रहे हैं भरत भाई को बाहर क्यों बिठाया उन्होंने कहा वो अपराधी है मैं अपराधी से बात नहीं करूंगा तो अब उनकी नजरों में वो अपराधी था लेकिन निर्भयर भाई की नजरों में तो बहुत बड़े पद पे था वो तो वहां पे कंस्ट्रक्शन इंचार्ज था
01:06:14:09 हम कंस्ट्रक्शन के लिए वो पैसा पैसा लेता था और वो इललीगल फोर्स की जमीनें घेरता था। वो पहाड़ियां तोड़ता था, माइनिंग करता था और वह पैसा जमा करता था अपने लिए और एक तरीके से कहा जाए जैसे कोई हरिया जैसे भू माफिया मतलब जो गुंडा नहीं होता है गुंडा टाइप से गुंडा टाइप भू माफिया था वो इस तरह के कार्य करने वाला इस तरह के कार्य वो बाद में डिसीजन आया मैं डिसजन आपको भेज दूंगी हां जी फिर निर्भर निर्वर जी को क्या हुआ फिर [गला साफ़ करने की आवाज़] जी ने मुझे वहां उस मीटिंग से आपने ये फैसला कर लिया कि कौन सही है कौन कौन गलत है? कौन सही है, कौन गलत और ये तो बाहर बहुत कुछ कर रहे हैं। अभी क्या होगा? तो मैंने फिर भी अपना जीवन बचाने के लिए कि मैं सेंटर मेरे से मेरे को सेंटर से निकाल दिया जाएगा। तो मैं इतनी अग्रेसिव नहीं थी। तो मैं अपने आप को समझाते हुए आ रही थी। चुप थी, शांत थी, गंभीर झटका था अंदर मुझे कि शायद मैं बहुत गंभीर ट्रैप में हूं। मैं बहुत गलत जगह फंस गई हूं। मैंने फिर भी सोचा कि शायद एक प्रयास बताने का करूंगी अगर यह समझ गए तो मैंने निर्मल भाई को बोला कि भाई साहब मैं गई तो जरूर थी लेकिन भरत की स्थिति यह है भरत को अगर आज ही निकाल दें आप या भरत से अलग
01:07:29:10 हो जाए तो संस्था बच जाएगी संस्था की छवि बहुत खराब हो रही है वो तोड़ेंगे वो आएंगे उन्होंने ऐसा-सा बोला है और काम खराब हो जाएगा वो बहन भी कह रही थी कुछ नहीं होगा बोलने दो ऐसे से तो बहुत ऑफिसर बोलते हैं क्या फर्क पड़ता है? हम मिलने गए थे। उसने नहीं किया। बात खत्म करो। भूल जाओ। ऐसे वकील हैं। मैं चुपके से उठ के चलने लगी वहां से कि अगर आपको नहीं समझना है तो ठीक है मैं टिकट कराती हूं। मैं अपने घर वापस जाती हूं। मतलब घर बना सेंटर पे। अभी निर्भयर भाई मुझे रोकता है जोर से बोल के चलते हुए। नीलू बहन बोलता था मुझे तो बोलते हैं नीलू बहन थे तो वो मेरे बाप दादा जैसे उम्र के दादा जैसे उम्र के थे पर बहन भाई कहने का यहां एक रिवाज है तो बोले कि नीलू बहन इधर वापस मुड़ो आप तो मैं गई वापस मैंने तो बचपन से इन सबको देखा था तो डरती नहीं थी मैं इनसे लोग डरते थे मैं डरती नहीं थी तो वह सोचते थे मेरी आंखों में खौफ होना चाहिए उनके लिए तो मैंने कहा हां जी भाई साहब बताइए और उस समय डर निकल गया था। अब मेरा डर निकल गया था। जो कुछ अंदर था थोड़ा बहुत पैर था वो निकल गया था। इज्जत कहेंगे जिसको आप
01:08:44:19 सॉरी फिर नहीं इज्जत कहेंगे कि जो इज्जत थी वो खत्म हो गई थी। जो मान सम्मान था वो अब मेरे मन में खत्म हो गया था। तो उन्होंने कहा नीलू बहन इधर आइए। मैंने कहा हां जी उसको कहते हैं लिहाज। वो खत्म हो गया था। वो खत्म हो गया था। तो उन्होंने बोला कि आप क्या कह रही है आपको अंदाजा है? तो मैंने कहा हां मैं आपको बताया है बाहर क्या हो रहा है आप भरत भाई को निकाल दो यह कह रही हूं मैं बोले आपने अपनी औकात से ज्यादा बात की है बच्ची हो छोटे मुंह बड़ी बात बोल रही हो पता है क्या बोल रही हो कितना बड़ा भाई है वो वो क्या है वो जो चाहे वो कर सकता है आपके साथ और सुनो ध्यान से आपने अगर यह किया ना तो पूरे कैंपस में छोड़िए पूरे ज्ञान में सोसाइटी में दुनिया में कोई सफेद वस्त्रधारी आपको ओम शांति करना पसंद नहीं करेगा अगर हमने यहां से एक पत्र निकाल दिया आप कहां पे हैं? पता है कहां खड़ी हैं? हमारी दी जमीन पर खड़ी हैं आप। तो मैं उस दिन पता नहीं मुझे क्या हो गया कि भाई क्या अंदर जाग गया मेरे कि चाहे तो हिंदू सनातनी कुछ वो कहो या फिर क्या जगह है मुझे नहीं पता। मैं वापस जो मुड़ी थी मैं तो गई।
01:10:00:21 हां मतलब अपने को बचाने वाली बात खत्म हो गई थी। यह नहीं था अब मुझे कि मेरा क्या होगा? मुझे था जो होगा देखा जाएगा। हम तो मैंने बोला ऐसा झुक के मैंने कहा भाई साहब मेरी बात सुनिए ध्यान से कान लगाइए मेरी बात पे और ध्यान पूर्वक सुनिए कहीं पर भी एक वर्ड मिस मत कीजिएगा जो बात मैं बोल रही हूं शायद मेरी आपकी आखिरी मुलाकात है ये तो कहने लगे इतनी हिम्मत तुम्हारी मैंने कहा हां जी मेरी इतनी हिम्मत है हिम्मत अभी आपने मेरी देखी नहीं है ये हिम्मत आप ही ने दी है मुझे आप ही ने सिखाया है और आज जो आप सिखा रहे हैं वो बहुत बड़ी हिम्मत दे रहे हैं आप मुझे मैं अंदर से परेशान थी और वो परेशानी मेरी आज दूर हो गई। जो आपने कहा है ना मैं जो काम कर रही हूं मेरा नाम लेने वाला कोई ब्रह्मा कुमार कुमारी नहीं रहेगा। मैं आपको बताती हूं कि जो मैं काम कर रही हूं अगर मैं इसी पथ की पथगामी रही तो मेरा नाम आपके ब्रह्मा कुमारीज में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। और जो आप कर रहे हैं गलत लोगों का साथ दे रहे हैं। भीष्म पितामह की तरह धृतराष्ट्र की तरह शायद आपको यह नाम समझ में नहीं आएंगे क्योंकि आपको पता ही नहीं है मैं किनका नाम ले रही हूं। आपकी दुर्गति भीष्म पितामह से बुरी होगी। और जब आप शीर्ष सैया
01:11:16:02 पे होंगे, शीश सैया पर लेटे होंगे, बाणों की सैय्या पे लेटे होंगे। उस समय अगर पानी मांगेंगे ना, यही इसी कैंपस में, मैं तो कैंपस की बात नहीं करती है अपने लिए। आपको कहती हूं इसी कैंपस में रहेंगे ना आप अपनी जमीन पर इसी कैंपस के लोग आपको पानी देने के लिए भी नहीं आएंगे आपके आवाज लगाने पर भी नहीं आएंगे जिस दिन मेरी बताई सच्चाई इन सबके सामने आएगी क्योंकि ये जितने भी वाइट कपड़ों में आपको दिख रहे हैं ये सब शिव की भावना से जुड़े हैं और जैसे आज मैं टूटी हूं जिस दिन इन्हें पता चलेगा नीलिमा ठीक है ये गलत है तो वो सब आपको पहले पानी देना छोड़ेंगे आपको खाना देना छोड़ेंगे आपके आवाज पर बोलेंगे नहीं और जा रही हूं मैं आज के बाद मुझे किसी बारे में बुलाने की जरूरत नहीं है। ऐसा करके मैं वहां से आ गई थी और आने के बाद इन्होंने जो मेरे पहचान में लोग थे जो मुझे जानते थे जो मेरा फेवर ले रहे थे बाद में जिनको बातें पता चली जो लोग इनसे जाकर लड़े उन लोगों को मारना पीटना शुरू किया। अच्छा ये हुआ तो फिर आपने फिर बाहर आकर के आप यहां ये मुजफ्फरपुर नहीं है सेंटर पे नहीं फिर मैं वहां नहीं आई मुजफ्फरनगर नहीं आई मैंने गाजियाबाद में एक सेंटर देखा
01:12:31:27 वही वही प्रक्रिया शुरू की एक सेंटर चालू किया वही सर्टिफिकेट लेकर गाजियाबाद आ गई दादी को फोन किया जिस दादी ने मुझे सपोर्ट किया था दादी मुजफ्फरनगर में तो इन्होंने बहुत गलत गलत फैला दिया है कुछ भी लोगों को बोल रहे तो मैं कहां जाऊं? मुझे कोई ऐसी जगह बताओ जहां आप मुझे सपोर्ट कर सको। तो आप क्योंकि क्योंकि मेरा कोई ठिकाना नहीं था ना। आप समझिए मैं कहां जाती? या तो मर जाओ कहीं पे जाके कुछ खा लो या घर लौट जाओ। घर लौट नहीं सकते। कैसे लौटेंगे? किस मुंह से घर लौटेंगे? तो या फिर ये जिंदगी जियो। तो आपने एक क्रांतिकारी की तरह इनके विरुद्ध इनकी इच्छा के विरुद्ध सेंटर इनके नाम से चलाना यह सोचा? नहीं इनके नाम से नहीं इनके नाम से इतना नहीं कर सकती थी मैं कि जिनके साथ मेरा कुछ नहीं बन रहा है मैं उनके नाम पे नहीं बैठूंगी। ऐसा सोचा था मैंने। तो मैंने दादी से बोला कि दादी आप मुझे डायरेक्ट कनेक्शन का एक सर्टिफिकेट दीजिए और आप मुझे इधर गाजियाबाद में रखिए। तो कम से कम मुझे यह था दादियां जिंदा है। दादियों को खुद जवाब देंगे। यह लगा था मुझे। ज्ञानी सुनाना था तो दादी ने बोला मैं तुझे बोल रही हूं ना मतलब क्योंकि वो मजबूर थी। लिख के कुछ नहीं दे सकती
01:13:47:06 थी। दादी तुझे बोल रही है ना वो थ्योरिटी से बात करती थी क्योंकि वो लेखराज के टाइम के लोग थे। वो यह समझते थे अभी भी कि शायद हमारी चलती है। लेकिन ब्रह्मा कुमारी की एक बहुत बुरी बात यह है कि चेहरा बहनों का है। वहां चलता भाइयों का गैंग है। बहनें संस्था नहीं चला रही है। ये बहनों की संस्था नहीं है। इसीलिए बहनों के संस्था के ऊपर जो शीर्ष नेतृत्व में है वो बलात्कारी भी है। जिनके ऊपर बलात्कार के केसेस हैं। अच्छा। उनको बहनों का संरक्षण दिया गया है। अच्छा। ऐसे लोग हैं वहां पर शीर्ष नेतृत्व में मृत्युंजय के ऊपर मृत्युंजय भाई के ऊपर बलात्कार के तीन केसेस आरोपी है वो उसमें बेल पर है प्रकाश करके एक है वो बेल पे है उसके ऊपर मृत्युंजय के ऊपर प्रकाश के ऊपर नीलू बहन गुलजार दादी की ब्राहणी उनके ऊपर बलात्कार का आरोप है आरोपी वहां पे शीर्ष नेतृत्व कर रहे हैं। उनको ये लोग बचा रहे हैं। हम खुद मैं उन सब केसेस में तो फिर तो फिर तो फिर आप जो दादी की परमिशन लेकर और फिर आपने जो है
01:15:02:07 गाजियाबाद आ गए क्योंकि एक और लड़की का जीवन मेरे साथ जुड़ गया था ना मेरी मजबूरी समझिए मेरे साथ एक और लड़की थी आपको ब्रह्मा कुमारी के नाम की जरूरत इसीलिए थी क्योंकि ब्रह्मा कुमारी को जानते हैं लोग उसी के कारण लोग आपसे कनेक्ट मेरा जो पहचान बना हुआ है वाइट साड़ी में ब्रह्मा कुमारी की अब या तो मैं समाज में ये कहूं कि मुझे निकाल दिया गया या मैं समाज में अब ये कहूं कि शायद मैंने उन्हें छोड़ दिया तो छोड़ी हुई लड़की जैसा ट्रीटमेंट करेगा समाज हम हमेशा एक नारी को आंसर देना पड़ता है समाज को तो मैंने तो दादी जी जी हां जी सॉरी फिर फिर वहां से क्या आपकी लाइफ स्टार्ट हुई फिर दादी को बताया तो सही मैंने लेकिन मैंने मुझे फिर मेरी मां याद आई दादी को बताया जरूर दिया। फिर मैंने मेरी मां को एक फोन किया तो मेरी मां फोन पे आई लेकिन रोक दिया गया उन्हें सब घर वाले जो जेंट्स थे घर के वो मुझसे बात करना नहीं चाहते थे और लेकिन मतलब वो जो आप टिकट वो जो आप टिकट कटा के आई थी घर वालों की मर्जी से। हां उससे नाराज थी। वहां से वहां से क्लैश हो गया था। आज तक कोई भी बिना पूछे घर से ऐसे लड़की गई नहीं थी जैसे मैं
01:16:17:15 तो मैं पहली लड़की हूं जो घर से ऐसे निकली थी। तो उन्होंने कसम खाया था ऐसे लड़की चली गई है वो वापस नहीं आएगी तो मम्मी ने मेरी फोन किया वापस मुझे और उन्होंने पूछा कि क्या बात है क्यों परेशान हो क्या हो गया तो मैंने बोला कर दिया है इन्होंने मतलब मेरे साथ ऐसा कर दिया ना कि मैं अब शायरा चला सकूं तो उन्होंने बोला कि तो मैं ब्रह्मा कुमारी की क्या जरूरत है सेंटर चलाने के लिए पढ़ाई का क्या होगा। तुम्हें वापस लौटना है। मैंने कहा हां वापस तो लौटना पड़ेगा। तो उन्होंने कहा तुम्हारे फादर की शर्त है पढ़ो पढ़ाई। पढ़ाई करके आओगी। अगर तुम पढ़ पढ़ोगी मतलब जो मां बेटी की बात होती है वो उन्होंने की कि अगर तुम एजुकेशन एक्सेप्ट कर लो तो मैं तुम्हारे फादर को मनाऊंगी। अभी क्या होता है सोचो आप। मैं अभी यहां आपके चैनल पे बहुत इमोशनल नहीं होना चाहती। 2010 11 12 तक यह सब चला। 12 में मैं आई सेंटर पे। मैंने एडमिशन लिया वापस 11 में। 11 में ले लिया था जब मेरा प्रॉब्लम था। 11 में ही मेरी मदर से बात हो गई थी। 12 में मैं पढ़ रही थी। मतलब बीएससी फर्स्ट ईयर में थी।
01:17:32:21 तो अब बहुत बड़ी त्रासदी हो जाती है मेरे साथ। और मेरा घर जाने का एक रास्ता भी खुल जाता है। और जो मेरे साथ बहन थी उसे भी घर भेजने का रास्ता खुल जाता है अचानक से। 2013 का केदारनाथ फ्लर्ट आता है। तो मेरे फादर बहुत बड़े शिवभक्त थे। मेरे उसमें काफी रिलेशन वाले लोग गए हुए थे। गाजियाबाद में वो चार घर थे जहां पर यह मौतें हुई थी जिसमें मेरा भी घर था। जो पत्थर आके रुक जाता है केदारनाथ के रास्ते में गेट पर वहां अंदर मेरे फादर थे हम तो वो हां तो वो हो गया मेरे फादर नहीं रहे
01:18:28:21 कोई बात नहीं हम इस विषय को छोड़ देते हैं स्किप करते हैं हम कुछ और बात कर लेते हैं कोई बात नहीं फिर वो मुझे बुला बुला लिया गया घर पे। मेरे घर वालों ने मुझे बुला लिया। मैंने उस लड़की को उसके घर भेज दिया। अब मैं घर आ रही थी जा रही थी। लेकिन इन्होंने अचानक से कुछ गलत कर दिया जो इनको नहीं करना था। इनको ये सोचना था कि अभी उसके फादर नहीं है तो शायद वो खुद ही छोड़ देगी। लेकिन मैं सेंटर बंद करने तक तो वाइंड अप करने तक तो आना जाना करती ना सेंटर पे। मुझे वाइंड अप करना था पर इनको मुझे समय देना था। इन्होंने समय नहीं दिया। इन्होंने मेरे नाम से एक बहुत गलत लेटर निकाला और जहां मैं दुख में थी, परेशानी में थी, उसी समय पे एक बहुत गलत लेटर सर्कुलेट कर दिया गया। Facebook पे सभी सेंटर्स में क्योंकि ये समझते थे कि श्री राम मीणा जो है फॉरेस्ट के जो डिपार्टमेंट के लोग हैं मैं उनसे अटैच्ड हूं। मैं इनके खिलाफ हूं। तो ये लोग मुझे वहां से रोकना चाहते थे दबाव बना के
01:19:44:21 तो ये हमारे से खुशामद करेगी और ये फॉरेस्ट वाले लोग जिनकी ये मदद कर रही है क्योंकि फॉरेस्ट वाले लोग इनके पीछे थे। अपनी जमीन लेना चाहते थे वो मेरे से पूछते थे ऑफिसर्स कि नीलिमा जी अगर कोई शिकायत कर दे जैसे सलमान खान साहब का एक केस हुआ था। मैं इसलिए बोल रही हूं क्योंकि वो मेरी इंडस्ट्री की लेजेंड एक्टर है। इसलिए सलमान खान बोल रही हूं। साहब कह के इसलिए नहीं बोल रही हूं। मेरा कोई दबाव है लेकिन मेरे से सीनियर है इसलिए बोल रही हूं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] उनका एक केस चल रहा है। तो विश्नोई समाज ने आवाज उठाई तब जाके वो एक केस चला और क्योंकि हिरन का मामला है। गंभीर मामला है। तो फॉरेस्ट वालों ने कहा इसी तरह से हमें कोई शिकायत करने वाला चाहिए। अगर कोई शिकायत करे तो हम ब्रह्मा कुमारी से काफी कड़ा मामला बना सकते हैं। तो क्या आप अचानक से ये भी सब अचानक हो रहा है। सब भगवान कर रहा है। मुझे नहीं पता ये सब क्या हो रहा है। अचानक से मेरा लेटर निकलता है। अचानक फॉरेस्ट वाले मुझसे बात करते हैं। उन्होंने कहा एक शिकायत अगर एक कंप्लेन आप कर देती हैं तो हम शायद कुछ कर लेंगे इनके लिए। एक एक शिकायतकर्ता चाहिए हमको। हम
01:21:00:00 सर मैंने फिर अपने बारे में कुछ नहीं सोचा क्योंकि ये लोग तो कर चुके थे जो करना था। ये तो पहले ही निकाल चुके थे मुझे। तो मैंने एक शिकायत की तो उन्होंने कहा हमें नहीं आप वो मेरी वो देखना चाहते थे कि मैं सच में ब्रह्मा कुमार के खिलाफ हूं या नाटक कर रही हूं। कई बार ऐसा होता है ना कि कोई विश्वास नहीं करते हैं ना ऑफिसर्स। तो उन्होंने बोला कि आप ये हमसे नहीं करिए शिकायत। आप लिखित में मुख्यमंत्री पोर्टल पर करिए। मुख्यमंत्री पोर्टल पर डालिए। वहीं पर हम आपको जवाब देंगे। वहीं पर हम कारवाई करेंगे। खुले में कारवाई होगी। उसमें ना आपको कुछ छिपना है ना हमें। तो मैंने कर दिया। मैंने एज अ ब्रह्मा कुमारी नहीं किया एस अ मतलब सिंपल पर्सन कि मैं यह चाहती हूं ये फला खस नंबर के बारे में जाना जाए और ब्रह्मा कुमारी में ये ये जमीनें गलत फॉरेस्ट के नंबर को दबाया गया है नंबर को और मैं चाहती हूं इसप एक सर्वे हो हम फिर मतलब आपने एक स्वतंत्र रूप से एक समष्टि का युद्ध अपने हाथ में ले लिया ले लिया मतलब ये पहली शिकायत थी शायद ब्रह्मा ब्रह्मा कुमारी के उसमें पहली शिकायत थी। हां जी तो वो
01:22:15:15 थी कि वो जो है जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। है ना? हां बस फिर तब से ले अभी तक इनका मेरा विवाह है। फिर इन्होंने वो चालू किया मतलब कारवाई हुई उस पर जो ऑफिसर्स थे जिन्होंने फिर इन्होंने पुलिस वाले मेरे घर भेजे मतलब सेंटर पर भेजे। इन्होंने कहा बोर्ड हटाइए ब्रह्मा कुमारीज का। मैंने कहा ब्रह्मा कुमारी के गाजियाबाद से लेकर दिल्ली तक 300 सेंटर हैं। पुलिस वालों से कहा ब्रह्मा कुमारीज के लोग आए ये बोर्ड हटाने के लिए। मैंने किसी आईपीएस पीसीएस का बोर्ड नहीं लगाया है। आप ये बोर्ड नहीं हटवा सकते क्योंकि मैं उनकी सब हर चीजें जानती थी ना। कानूनी प्रक्रिया भी जानती थी। तो मैंने कहा आप नहीं हटा सकते। ऑफिसर आप ब्रह्मा कुमारी के लोगों को बोलिए वह मेरे बोर्ड हटाए या हटाने का आदेश दें। तो आप नहीं हटा सकते क्योंकि आईएस पीसीएस का बोर्ड नहीं है। तो वो जो वो जो शिकायत वो जो शिकायत आपने शिकायत मैंने की थी उसके कंडेम में कर रहे थे। नहीं वो ठीक है। मगर वहां पे क्या कारवाई हुई जो आपने शिकायत की उसमें वहां पुलिस जा रही थी। फॉरेस्ट ऑफिसर जा रहे थे। वहां मतलब उन्होंने कारवाई उन्होंने शुरू कर दी थी। उनको नोटिससेस
01:23:30:26 गए। बाद में सर्वे हुआ। सर्वे में वो जमीन निकली। जमीन में वो ये बोलते थे लोगों को जो जो बीच में थे वो मुझे बताते थे कि क्या कर लेगी निकलवा देगी जमीन निकलवा दे 15000 लोगों पर गोली चलवा देंगे 15000 लोगों को इकट्ठा करेंगे 15000 लोग बोली चलाएंगे फॉरेस्ट ऑफिसर्स ने इन्हें चैलेंज दिया है कि आप 15,000 इकट्ठे करिए आपको पता नहीं है फॉरेस्ट क्या है इंडिया का आर्मी सेक्टर से ले सभी एजेंसीज आ जाएंगी हम गोली चलाने वालों के लिए गोली के आदेश देश ले आएंगे। उन्होंने अपने तरीके से कब्जा आया। उन्होंने एक पर्टिकुलर जगह कब्जा ली। 80 कमरे जब्त कर दिए। सीज कर दिए। तो बहुत अच्छी कारवाई फॉरेस्ट ऑफिसर हेमंत शेखावत जी ने की। और मैं उन्हें सैल्यूट करती हूं कि वो भी एक यंग ऑफिसर एक नए-नए पदाधिकारी थे। उस समय डीएफओ थे। उप वन संरक्षण अधिकारी थे वहां पर और उन्होंने अपनी जान का जोखिम लेते हुए यह काम किया और मुझे यह कह दिया गया कि सेंटर से चली जाइए नहीं तो आपको मार दिया जाएगा। कुछ ना कुछ दोद चारचार लोग मेरे यहां कुंडियां बजाते थे शाम को रात को सुबह ऐसे होता
01:24:46:02 था। रोज का कुछ ना कुछ चीजें हमारे डराने के लिए कर रहे थे वो तो वो मैं नहीं डरी। बाद में मैंने ये विचार किया कि मेरी पढ़ाई डिस्टर्ब हो रही है। एक्चुअली मुझे वहां से नोएडा जाना पड़ता था। मैंने नोएडा से फिल्म सिटी से मेरे फादर मेरे भाई ऑलरेडी फिल्म में थे। मुंबई रहते थे। तो उन्होंने कहा मुंबई नहीं आना चाहती। बीएससी आपने कर लिया तो बीएससी सिनेमा कंटिन्यू कर लो। तो फिर मैंने कहा कैसे? तो पहली बार कलर कपड़े पहने। कैब करना सीखा। कैब में बैठती थी। कॉलेज पर उतरती थी। कॉलेज से घर आती थी। तो जिन बच्चों के साथ पुनर्जन्म हुआ आपका तो वहां से वो सब बीएससी सिनेमा पूरा हुआ फिर मैं सोचती भी नहीं थी कि मेरे साथ वाले बच्चे मेरे से बहुत यंग है और शायद हो सकता है कि मैं उतना अचीव ना कर सकूं लेकिन सेलेक्ट हुआ मेरा प्रोजेक्ट और मुझे मुंबई भेजा गया मुझे बहुत अच्छे-अच्छे डायरेक्टर्स यहां लेके आए और यहां पे मैंने कुछ आध्यात्मिक और कुछ वैसी ऐसी फिल्मों में काम किया कि जो मैं लिख सकती थी अच्छे सब्जेक्ट्स पे जैसे कुछ कुरीतियां, कुछ सामाजिक मुद्दे और या फिर कुछ रामायण और महाभारत के पात्रों के
01:26:01:08 ऊपर बहुत चीजें की और धीरे-धीरे यहां रिकॉर्ड बनने लगा। अब मुझे वो लड़की को घर भेजना था जो मेरे साथ थी। वो कहां थी? सोचो जिस समय मेरे साथ इतना बड़ा प्रॉब्लम हो गया कि जिस लड़की ने सारी सच्चाई देखी वो मुझे छोड़ के क्यों जाएगी? उसने तो उनकी भी देख ली ना मेरे बहाने कि वो वहां भी नहीं जाना चाहती। अब वो घर भी नहीं जा सकती। दादी रतन मोहिनी शरीर छोड़ चुकी थी जो सपोर्ट कर रही थी। तो उसने कहा अब मुझे ऐसा लगता था धर्म में ये सिखाया जाता है के शरणागति को नहीं छोड़ सकते आप। जो आपकी शरणागति है कैसे छोड़ देंगे उसे आप? यहां तक की बातें यह करने लगे कि इस लड़की का तो इससे कुछ चक्कर है शायद। पता नहीं क्या बोलना शुरू कर दिया कि इसे नहीं छोड़ती। हां तो मैंने सोचा अभी तो नीलिमा इसे जोड़ना बहुत जरूरी है। ये होना बाकी था ये [हंसी] और वो चक्कर क्या होता है मुझे नहीं पता। मैंने उसको बताया। मैंने कहा नीलम उनका नाम नीलम था। मैंने कहा नीलम तुम्हें पता है क्या हो रहा है? बोले क्या? मैंने कहा यहां तक बोल रहे हैं वो लोग। तो बोलती है कि दीदी वो पागल है। इतनी सारी चीजें तो हो चुकी है तो उनको बोलने दो उससे क्या फर्क पड़ता है? मैंने कहा नहीं तुम्हें
01:27:16:19 घर जाना पड़ेगा। तुम्हारे घर वालों से मैं बात कर ली। अब मुझे कौन सा किस्सा याद आता है? मुझे धर्मराज का किस्सा याद आता है। युधिष्ठिर का। धर्मराज युधिष्ठिर जब मुक्ति के लिए जा रहे थे अपने शरणागति हुए एक स्ान को नहीं छोड़ पाए। तो आप सोचो कि मैं वह पढ़ रही हूं और धर्मराज कह रहे हैं आओ मुक्ति देता हूं। चलो इंद्र के सिंहासन पर तुम्हें स्वर्ग मिलेगा। उन्होंने कहा जो मेरा शरणागति है उसे कैसे छोड़ दूं? तो धर्मराज खुद आते उनके पिता थे। उन्होंने कहा मैं परीक्षा ले रहा था। लेकिन तुम कैसे हो? युधिष्ठिर तुम्हारे पांच भाई वो तुम्हारे चार भाई और तुम्हारी पत्नी पीछे छूट गई। उनसे भी प्यारा स्वान हो रहा है तुमको। तो उन्होंने कहा उनको तो उनकी मुक्ति ले गई। इनके प्राण चले गए तो मैंने छोड़ दिया। लेकिन ये तो जिंदा है। ये तो जिंदा है जो मेरे साथ जाना चाहता है। अगर स्वर्ग में ये नहीं जा सकता तो मुझे स्वर्ग नहीं चाहिए। तो मेरा अब ये हो गया था नीलम के प्रति कि भाई शरणागति को छोड़ना तो पाप है। तो अब वो सिचुएशन जो आज मैं आपको समझा रही हूं। इस बारे में तो मैंने कभी किसी से बात नहीं की। आप सोचिए मैं उसको कैसे भेजूं। वो लड़की जाने को तैयार नहीं। फिर क्या
01:28:31:25 रहा जिससे कि वो गई? उसके घर वालों ने मैंने उसके घर वालों को फोन किया। मैंने उन्हें सब बताया। मैंने कहा देखिए मेरी बहुत दुर्गति हुई है। मेरे साथ बहुत बुरा हुआ है। मैं नहीं चाहती आपकी बच्ची के साथ कुछ गड़बड़ हो और मेरे लिए और इनके लिए कुछ गलत भी बोलने लगे हैं। लोग बहुत बुरा हो जाएगा। आप रखिए। जो कुछ मुझसे बन पाएगा मैं इनकी मदद करूंगी। आप इन्हें रखिए। अब यह उनके घर वालों को फोन करते हैं। सोचिए कि देखिए कितना बुरे टाइम पर छोड़ा है आपकी लड़की को। देखा कैसे फसाया हुआ था उसने और आपकी लड़की आपके यहां आ गई। तो मैंने भेजा उनको कुछ जिम्मेदार लोगों के साथ। वो घर पहुंच गई। उन्होंने मुझे फोन किया और वो आज भी आपके साथ कनेक्टेड है। कनेक्टेड थी अब से मतलब कुछ तीन महीने पहले तक मेरी वीडियो आई इंटरव्यू आया यह जो वीडियो इंटरव्यू आया उससे उनके घर वालों ने उसको बंदिश किया कि तुम बात नहीं करोगी उनसे अच्छा मतलब जैसे आज आप हमारे साथ जो वीडियो कर रहे हैं ऐसे वो देख लिया उन्होंने कि वो तो ब्रह्मा कुमारी है ही नहीं तुम कहां जा रही हो ये हम तो मतलब
01:29:46:26 मेरे ख्याल से वो जो आपका रंग दे बसंती वालों के साथ जो वीडियो हुआ था उससे आपने तो ऐसे क्वेश्चन किए हैं जो रंगदे बसंती में मैं बोलना चाहती चीजें मैं बोल नहीं पा रही थी बल्कि आज जो क्वेश्चन हुए हैं वो उस इंटरव्यू से काफी बेहतर लग रहा है मुझे ये मेरे मतलब जो चीजें मैं बताना चाह रही थी वो मैं आज बता पाई हूं हां रंग दे बसंती से पहले भी मैंने वीडियोस बनाई थी अपनी इंडिविजुअल वीडियोस बनानी शुरू की थी वो सब उनके घर वालों ने देख ली थी हम तो पहले वो इधर उधर से फोन कर लेती थी वो मन बंद हो गया इस पे थोड़ा सा बताइए आप जो वो ये जो सिस्टम है अच्छा सबसे पहले पहले तो एक चीज मैं जान रहा हूं कि आप इतने समय तक ब्रह्मा कुमारीज में रही और यह बात सामने आ रही है कि जो क्या कहते हैं दैहिक रूप से भी शोषण वहां पर आरोप लग रहे हैं लोगों पर तो क्या आपके साथ इस तरह का कोई प्रयास कभी कुछ किसी ने आपके साथ ये आपके साथ प्रयास भी नहीं हुआ किसी की ओर से ये तो मैं वैसे भी दुनियादारी में भी बोलती हूं जैसे लड़कियां कई बार किसी पर आरोप लगाती है तो मैं बोलती हूं ऐसा कैसे हो सकता है हम क्या सुंदर कम थे या हम क्या ऐसे थे हमारे साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ तो मेरी मदर बताती है कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ ऐसी
01:31:02:00 चीजें होती है जहां ये होता है हां मेरे साथ प्रयास किया गया था ये अच्छा ये मैं आपको क्लियर कट बताती हूं प्रयास किया गया था मतलब वो वाला नहीं जो मैं कह दूं कि भाई ये बहुत बुरा प्रयास जिस दिन मैं निर् भाई को जवाब देके आई ये बहुत मतलब मैम आप ऐसे क्वेश्चन कर रहे हो कि छान छान के निकाल के वो मेरे मुंह से निकल ही रही है सब चीजें। तो जिस दिन मैं नील भाई को जवाब देकर आई थी मैंने आपको बीच में बोला था इन्होंने लोग पीटने शुरू किए थे हम कि जो भी नीलिमा का फेवर ले है ना बोला था ना उनको पीटो मारो उनको पिटाई करो उनकी तो एक बाबू करके सिक्योरिटी इंचार्ज था अब जब से मैं वहां से आई थी और मैंने सब बताया था तो वहां के कुछ लोगों ने ग्रुप बना लिया था वहां दो ग्रुप बन गए थे माउंट आबू में जी ये आपके क्वेश्चन का जवाब है इसमें मैं वही देने जा रही हूं। तो एक अच्छे लोग जो बुरे का विरोध कर रहे थे एक वो लोग जो मैनेजमेंट कमेटी के लोगों का साथ दे रहे थे गुंडे लोगों का। तो जो अच्छे लोग थे जो अच्छे लोगों का ग्रुप था उन्हीं में से सिक्योरिटी इंचार्ज ने दादी गुलजार की ब्राहणी को
01:32:17:20 यह बोला गाड़ी जाते हुए सिक्योरिटी इंचार्ज है। वो बोलेगा अगर कुछ गलत होगा। वो लोग सब मेरे संरक्षण में थे लोग। तो वो मुझसे सीखते थे कि बुरे के लिए बोलो। मैं हमेशा कहती थी कभी भी बुराई बुरा करने वाले से नहीं बढ़ती है। जब भी बुराई बढ़ती है अच्छे लोगों के चुप रहने से बढ़ती है। अच्छे लोग जब चुप रहना शुरू कर देते हैं तो वो बुराई बढ़ना शुरू हो जाता तो वो बोलने लगे थे। तो उन्होंने एक इतनी बड़ी अथॉरिटी को चैलेंज कर दिया। वो यह समझ के ले गए उसे तो उसने उनकी गाड़ी रोकी और उन्होंने कहा नील नीलू बहन है उसका भी नाम कि नीलू बहन आप के कमरे में ऐसेसे सागर इत्यादि दो चार भाई हैं वो ऐसेसे गलत चीजें लाते हैं गलत खाते पीते हैं वो कुछ गलत बता रहा था ये गलत और ये जो कुछ भी हो रहा है ये सही नहीं है इसको आप रोकिए ये आप ही रोक सकती है
01:33:14:02 क्या कुआं पे बड़े-बड़े लोगों को जाकर बताया कि बाबू सिक्योरिटी इंचार्ज होता कौन है? मुझे गाड़ी में रोकने वाला और ये नीलिमा चली गई यहां से। नीलिमा के चेले चपेटे हैं। हमें ज्ञान दे रहे हैं कि हमें चलना कैसे है? आप सोचिए जो आध्यात्मिक है वो जिम जा रहे हैं। जो गुंडे वहां पल रहे हैं ना उनके लिए स्पेशल जिम है। वो प्रोटीन पाउडर्स लेते हैं। कुछ एक ग्रुप है जिनकी बॉडी बिल्डिंग है बहुत अच्छी। बहुत अच्छे वो पल बढ़ रहे हैं। बाइकों पर चलते हैं। ऐसे लोग उनमें से एक सागर है। तो सागर और ये मुन्नी के मोहिनी के कुछ लोग थे जिन्होंने ये सब किया हुआ था। तो बाबू ने कहा ये सब मत करो। वो दादी गुलजार की जगह है। दादी गुलजार शरीर छोड़ चुकी थी तब। हम तो वो कमरा जो है वो रूम जो है वो गलत गतिविधियों के लिए यूज़ कर रहे थे। कुछ ऐसा बता रहा था वो बाबू। तो उन्होंने क्या किया कि उनको बोला बड़ों को कि वो जितने भी वो गुंडे थे जिनके बारे में वह बता रहा था उनको बोला देखो तुम्हारी वजह से मैंने गाड़ी रोकी मेरे साथ गड़बड़ हुआ है मेरी बेइज्जती हुई है जाके उसको ठीक करो तो वो मैं पर्टिकुलर हां जी वो मैं पर्टिकुलर वीडियो दूंगी आपको वो वीडियो है जो कोर्ट तक गई है जिसका मुद्दा मैंने उठाया है
01:34:29:08 जो बहुत बड़ा मुद्दा बना तो उसमें लोहे की रोड लाते हैं वो लोग उसे बुलाते हैं वो कैमरे में आ जाता है। ऊपर गेट पे कैमरा लगा है और उसके लोहे की रोड से पिटाई करते हैं। उसकी इंफॉर्मेशन देने के कारण हां जी इंफॉर्मेशन देने के कारण वो नीलू को बुरा लग गया इसलिए शिकायत शिकायत के कारण बुरा बुरा और नीलू जो है उनको प्रॉब्लम नहीं थी कि उस कैंपस में ऐसा हो। उनको ये प्रॉब्लम नहीं वो इन्वॉल्व थी मुझे वो इन्वॉल्व थी ना उसमें अच्छा वो इनवॉल्व थी अब क्या होता है कि अचानक से ये लोग इस आरोप को लेकर के आपका एविडेंस जो है वहां तक गया कोर्ट तक हां तो मैंने फर्स्ट केस वो किया था लेकिन जब मैं गई यहां से मैं गई उसने बोला यहां की पुलिस सुन नहीं रही है तो मैंने यहां गुड़गांव में शिकायत की मेरे जॉइनिंग चार्ज की केस किस चीज को लेकर किया था। हां मैं बताती हूं। मेरे जॉइन इंचार्ज को मैं सुना नहीं गई। मैंने बताया ना एक जॉइन इंचार्ज रखते हैं। तो यहां जो जॉन इंचार्ज थे गाजियाबाद में वो थे बृजमोहन और आशा बहन। ओआरसी ओम शांति रिट्रीट सेंटर चलाते हैं वो गुड़गांव में। आपने कई बार सिस्टर
01:35:44:16 शिवानी के इंटरव्यू देखे होंगे। वो वहीं से प्रकाशित होते हैं। मतलब अभी तक आपको यही लगता था कि अगर ब्रह्मा कुमारी में कोई चीज गड़बड़ होगी तो ब्रह्मा कुमारी का सिस्टम ही उसको ठीक कर लेगा। ठीक कर लेगा। तो मैं वहां गई कि देखो वहां ऐसा हो रहा है अनजान होके जैसे एक फिल्म में नहीं हीरो घूमता रहता है और उसे पता ही नहीं होता कितने विलेन है मेरे साथ ये हो रहा है पर मैं जिसके पास जा रही हूं वो विलन ही निकल रहा है तो बृजमोहन और आशा बहन जिनको मैं कांटेक्ट करती थी ये सब बताने के लिए क्योंकि इनका एक नियम है कि अगर कोई समस्या है तो जोन इंचार्ज को पहले बताओ वो नियम मैं मानती थी तो सबसे पहले मैं बृजमोहन और आशा बहन को बताती थी क्योंकि वो हमारे जॉन इंचार्ज थे गुलजार दादी से पहले भी और बाद में भी वैसे वैसे गुलजार दादी थी लेकिन उनके शरीर छोड़ने के बाद ये दोनों ही संभालते थे तो ये लोग भी मेरे एंटी काम कर रहे थे मुझे पता ही नहीं था कि भाई एंटी तो होंगे ही ना जब फॉरेस्ट के लिए मैं कर रही हूं तो कौन मेरे साथ होगा मैं बेवकूफ थी मैं सोचती थी सब में से कोई ना कोई में तो कुछ ना कुछ मानवता बची होगी
01:36:47:18 हेलो जी आपकी आवाज आ रही है आ रही है आपकी आवाज आ रही है। अच्छा जी। तो मैंने इनको बताया कि आप ऐसेसे बाबू भाई को पीटा गया है और उसको रोकिए चीजों को गड़बड़ हो रही है। गलत हो रहा है काम। तो इन्होंने मुझे साफ बोल दिया उस दिन कि नीलिमा बहन हम कुछ नहीं कर सकते और जो ब्रह्मा कुमारी इसके खिलाफ जाएगा चाहे उसमें आप ही हो पिटोगे। सीधा ये बोलो। अच्छा ब्रह्म का ऐसा कैसे होता है? पिटोगे यह थोड़ी होता है। तो बोले नहीं यही होगा। तो पहले ओआरसी में तीन चार बहने मेरे आसपास खड़ी कर दी गई और उन्होंने मुझे दो चार थप्पड़ मारे। अच्छा हां जी आपने कहा ना आपके साथ भी हुआ है तो उससे मुझे निकल के आया। तो उन्होंने बोला करोगी ऐसा तो मैं वहां से मना करके हां करके कैसे भी करके निकल आई। कुछ बहनों ने इशारा किया कि निकल जाओ यह कह के कि नहीं करूंगी। मैं उनके पैर छुए मैंने कहा आज के बाद मैं कभी कुछ नहीं करूंगी। मुझे प्लीज जाने दो। तो मैं वहां से निकल के आई। हां जी मेरे साथ ही हुआ था। मैं वहां से निकल के आई। तो मैं भोरा कला करके एक वहां पे पुलिस
01:38:02:19 स्टेशन था। तो मैं वहां गई। मतलब ज्यादा कुछ नहीं हुआ था। सिर्फ मारपिटाई उन्होंने की थी। काफी थप्पड़ मारे थे मुझे। तो मैं वहां गई। मतलब थप्पड़ बहुत थप्पड़ मारे थे काफी क्या? फिर मैं गई वहां और मैंने बोला कि ऐसेसे मेरे साथ हुआ है तो क्योंकि वो रिट्रीट सेंटर था और वहीं वो थाना था और जो बृजमोहन और आशा बहन है वो प्रधानमंत्री और जो राष्ट्रपति जी जो जितने भी लोग वीआईपी जुड़े हैं सब आशा बहन बृजमोहन भाई से जुड़े हैं। उन्हीं की वजह से वो लोग वहां जाते हैं। वीआईपी मूवमेंट जो है वो दिल्ली की वजह से होता है। हम तो मैंने उनकी शिकायत की थी एक तरह से। तो थाना अध्यक्ष बोलते हैं वो बहन भी मेरे साथ थी जिसकी मैं बात करती हूं। यह लोग उस बहन को इसलिए भी भेजना चाहते थे कि एक गवाह है इसके पास। उस गवाह को तोड़ो किसी तरह। तो वो लड़की मेरे साथ थी। हम दोनों ही गए थे। तो दोनों के साथ ही बहुत मतलब बहुत कुछ हुआ था। तो बहुत कुछ से मतलब मार पिटाई झगड़ा। तो वो एसएचओ याद है मेरे अच्छी तरह से। उस एसएओ को मैं कभी भूल नहीं पाऊंगी। उसकी वजह से बहुत कुछ हुआ। नाम तो मैं मुझे अच्छे से याद नहीं है अभी।
01:39:18:02 तो उसने बोला अगर आप प्रधानमंत्री के खिलाफ शिकायत करेंगी लिखवाएंगी तो क्या मैं आपके खिलाफ आपसे प्रधानमंत्री के खिलाफ शिकायत सुनकर प्रधानमंत्री के खिलाफ शिकायत लिख दूंगा। ऐसा बोला था। तो मैंने क्या कहा क्या ब्रह्माकुमारी वाले प्रधानमंत्री जैसे हैं? बोले बहस मत कीजिए हम शिकायत नहीं लिखेंगे। तो मेरी जान पहचान जहां थी यहां तो मैं घर वालों से जुड़ चुकी थी अभी तक मेरी मदर को बता चुकी थी तो मैंने मम्मी ये सब चीजें आपने कोर्ट में भी कही है ना एज इट इज हां सारी कोर्ट में कही है मैंने उसके सब प्रूफ है मैंने मम्मी से बताया मैंने कहा मम्मी ऐसेसे बात है और ऐसे मारपिटाई मेरे साथ हुआ है तो यह सब तब हो रहा है जब आप आप वो गाजियाबाद वाले सेंटर में आ चुकी है या उससे पहले का है गाजियाबाद वाले सेंटर में अच्छा 2013 के बाद 2014 में हो रहा है ये। मतलब वो जो आपके जो आपके खिलाफ वो फैलाया गया है जो की शिकायत हो चुकी है। अच्छा मुझे निकालने का लेटर निकाल दिया गया है। बाबू के साथ वहां मारपिटाई हो गई है इंचार्ज के साथ। मैं सेंटर अभी भी अभी भी चला रही हूं। और मैं अब इन्हें बोलने गई हूं कि ऐसा नहीं
01:40:33:08 होना चाहिए। वहां लोगों को क्यों पीटा जा रहा है मेरी वजह से? तो आप एक बात बताइए कि जब आपके साथ इतनी दुश्मनी हो गई थी सीधे-सीधे तो फिर आपको वहां उनके माउंट आबू में जाने की जरूरत क्या थी जहां पर आपके साथ ये थप्पड़ थप्पड़ वगैरह हो गया कब गई सुनिए ना कैसे गई सुनिए जी जी कभी नहीं गई वो तो एक इसलिए गई थी वहां पे कि हो क्या रहा है ऐसा वो जिस समय मेरे को दुविधा थी ना मैं मेरा सेंटर बच जाए मेरी आईडी बच जाए तो इस लालच में गई थी कि हो सकता है कि शायद वो लोग मेरे से इंप्रेस होके मुझे सेंटर पे रहने दे। मेरे जीवन को बचाने के लालच में थी मैं। नहीं वो तो ठीक है। जो आप ये बाबू भाई बाबू जो है जिसको के लिए क्यों गई वही मैं बताने जा रही हूं। तब तक तो आपका वो तब तक तो आपका वो निर्वर जी से भी हो चुका था ना जो हो चुका था। हां लेकिन आप आपकी आर्या पार की लड़ाई चालू हो चुकी है। अब चालू थी। लेकिन एक बात बताइए जब मुझे ये बता रहे हैं वहां के भाई जो जुड़े हुए हैं नीलिमा बहन ये आपकी वजह से हो रहा है हमारे साथ क्यों हो रहा है कि कुछ लोग हैं जो ये कह रहे हैं नीलिमा बहन बिल्कुल सही थी नीलिमा बहन के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए था उसका जीवन खराब कर रहे हैं वो मात्र 25 साल की लड़की है क्या कर
01:41:48:12 रहे हैं ये लोग उसके साथ तो बहुत सारे भाइयों को निकालने का चल रहा है किसी को पीट रहे हैं तो कुछ करूं मैं ये था अंदर मेरे कि चलिए कुछ कुछ नहीं कुछ नहीं मैं इनकी कुशाम कर लूं। मैं आपने रिस्क लिया था। हां दूसरों को बचाने के लिए रिस्क लिया था। जबकि मेरा कोई लेना देना नहीं था। ये लोग तो मुझे निकाल चुके थे। मेरा काम खत्म हो चुका था। जब जबरन मैं इनसे जुड़ रही थी। आपको नहीं पता था आपके साथ इस हद तक जाएंगे कि थप्पड़ मारने लगेंगे। हां मुझे ये नहीं था। मुझे पूरा कॉन्फिडेंट था कि मेरे पे हाथ तो नहीं उठेगा। ये तो उस समय पिटाई पिटाई खेल रहे थे। मतलब मेरे को ही नहीं सभी को पीट रहे थे। यह सोच रहे थे कि पहले डंडे से चोट मारो इनको सबको। अगर पिट के मानेंगे पिट के ठीक है थी तो यह लोग एक बात बोलते हैं सबके लिए कि अगर कोई जुबान की भाषा नहीं समझता तो पिटो तो एक बार जो पिट जाता है वो बोलता नहीं है अच्छा हां तो मुझे लगा कि और सेंटर्स पे भी बड़ी बहनें छोटी बहनों को पीटती है हां तो थाने में रिपोर्ट लिखाने का प्रयास थाने में रिपोर्ट लिखाई एसएओ ने मना कर दिया मैं रिपोर्ट नहीं लिखूंगा अब यहां पर मैं नाम लेते हुए कई बार बोलती भी नहीं हूं कि ऐसा क्यों
01:43:03:25 मैंने बहुत जगह गुहार लगाई और मैंने कुछ वीआईपीस थे जो जानते थे मेरे परिवार को भी उन ऑफिसर्स को फोन किया बड़ी अथॉरिटीज को उनका नाम लेना मैं यहां सही नहीं समझती उस प्रेशर में एसएओ ने रिपोर्ट लिया ब्रजमोहन और आशा के खिलाफ भी रिपोर्ट लिया और मैंने वही वही वो हेड ऑफिस वाली बात कही जो बात के साथ मारपिटाई हो चुकी थी। मैंने वही बात गुड़गांव के थाने में लिखवाई। अच्छा तो वो एक पूरा पूरा का पूरा एक तहरीर मेरे पास थी जो मैंने कोर्ट में दाखिल की थी। एफआईआर तो कभी उस उन्होंने नहीं होने दी लेकिन एक तहरीर थी। फर्स्ट इंफॉर्मेशन थी। हम तो वो अभी इतने प्रेशर में थे थाने वाले कि उनको लगा कि हेड ऑफिस तक जाना जरूरी है। हम तो वो गए और जिस समय हम वहां थे उसी समय हमको उन्होंने बिठा लिया वहां प्रेशराइज कर रहे थे थाने वाले कि हम वापस ले लें। मैंने वापस नहीं लिया। मुझे 7:00 बज गए थे। 7:00 बजे रात को ही बोलते हैं वो लोग। तो चलो माउंट आबू चलते हैं तुम्हारे साथ ही। तो हम दोनों बहनें
01:44:19:03 थी। मैंने मदर को बताया कि ऐसा-सा बोल रहे हैं लोग। मदर मेरे साथ थी। उस समय मदर मेरे साथ थी। मुझे सपोर्ट था। तो उन्होंने कहा तुम जाओ तुम जाओ कुछ नहीं होगा। सब तुम्हारे फादर देख लेंगे। तुम चिंता मत करो। तो मतलब वो ब्लेस्ड हो तुम। पापा तो थे नहीं ना। तो मैं इमोशनल बहुत ज्यादा हूं। उन्होंने कहा वो सब तुम्हारे ऊपर आशीर्वाद है। तो मैं करूंगी। मैं कुछ करूंगी। मतलब मेरी मदर से काफी लोग जुड़े हुए हैं। तो मेरी मदर ने ही मुझे सांस दिया कि तुम जाओ जब तुमने एक सच्चाई के लिए आवाज उठाई है तुम रुक नहीं रही हो तो तुम जाओ। मैं रात को ही माउंट आबू गई। उनके गुड़गांव से माउंट आबू। गुड़गांव से माउंट आबू बाय कार गए हम। ओो अगला दिन अगले से अगला दिन तीसरे दिन जो प्लेन से जाती थी आती थी जो वीआईपी थी उनके लिए वो वहां पहुंचे हम जगह-जगह रुकते हुए सब जा रहे थे अच्छे लोग थे पुलिस वाले गलत लोग नहीं थे काफी अच्छे लोग थे उनमें लेडीज भी थी तीन चार लेडीस भी थी हमारे साथ तो हम पहुंचे और वो बच्चों की तरह ही हमें ट्रीट करके ले गए उन्होंने कुछ हमें गलत कहा भी नहीं बड़ा बड़ा प्रोटेक्टेबल
01:45:34:26 हमें खाना पिलाना खिला के भी ले जा रहे थे। हम बोलते भी थे हम प्याला लहसुन नहीं खाते हैं। हां कोई बात नहीं आप चलो गुड़िया गुड़िया करके बोल रहे थे। अच्छा यहां पे एक चीज आएगी आपके साथ जो घटना घटित हुई थी वो वहां पे हुई थी माउंट आबू में ना नहीं गुड़गांव में। थप्पड़ वाली अच्छा गुड़गांव में गुड़गांव में जॉन इंच चार्ज को बताया ना मैंने। हां तो सेंटर उसी में मैंने बाबू वाला केस बताया कि मेरे अलावा भी लोगों को पीट रहे हैं। ये जो पीटने का कारोबार है ये यहां से नहीं चल रहा है। ये हेड ऑफिस से है। हम हम तो वो हेड ऑफिस तक गए। हां हां तो उन्होंने कहा हेड ऑफिस में कौन सी घटना है वो बताओ आप। हम तो फिर हम गए और मेरा बकायदा भाइयों ने साथ दिया। अबकी बार भाइयों को मौका मिला कि पुलिस आ गई थी। आबू रोड थाने की पुलिस तो आज भी नहीं सुनती है। किसी की बात ब्रह्मा कुमारियों की ही सुनती है। आबू रोड थाना चाय भी वहीं से पीता है। खाना भी वहीं से खाता है। वो सुनता ही नहीं है। वो गाड़ी वहीं का यूज करता है। आबू रोड थाने में आप कुछ नहीं कर सकते। लेकिन यहां की पुलिस ने अबोड थाने को बोला हम आ रहे हैं तो वहां के कुछ लोग उनके साथ आए। लेकिन पुलिस वालों ने उनको
01:46:49:27 मैनपुलेट करने की कोशिश की पहले से ही। कुछ नहीं है जी बेकार है। बच्चियां हैं। झूठ बोल रही हैं। इनको यहां से कुछ पैसे वैसे चाहिए। दबाव में है। डालने के लिए करती है। बड़ी संस्था है। आप मत आइए इनके कहने। फिर भी वो लोग आए कि कोई बात नहीं हम देख लेते हैं। और मुन्नी बहन से मिले वो। सबका इंटरव्यू लिया उन्होंने। अब वो जो बाबू भाई पिटा था उसका पूरा वीडियो दिया गया मुझे कि यह वीडियो है। नीलिमा बहन यह सबूत है। यह सब दिए हमने। यह वहां के किसी व्यक्ति ने आपको प्रोवाइड कराया यह वीडियो। हां, वही के भाइयों ने। मतलब वहां से आपके कारण वहां पर और भी जो है क्रांतिकारी उत्पन्न हो चुके थे। लेकिन वहां ऐसा कुछ चेंज नहीं आया। सुनो क्या हुआ? जब वो इंटरव्यू ले रहे थे सबका पुलिस वाले। एक एक आदमी से पूछ रहे थे। तब इन्होंने नीलू बहन जो मेन एक्यूज थी उसको एडमिट करा दिया हॉस्पिटल में। अच्छा कि वो हॉस्पिटल में थी। वो कभी थी भी नहीं यहां पे। ठीक है? क्योंकि वो पकड़ी जाती तो सारी चीजें सामने आ जाती। और जो मारने वाले थे रोड रोड से मारा था जिन्होंने उनको विदेशों के टिकट
01:48:05:06 करा के विदेशों में भेज दिया गया था घूमने के लिए। जो गुंडे थे बदमाश थे। जो व्यक्ति पिटा था। ये जो आपकी ये जो आपकी ओर से आपका पक्ष जो प्रस्तुत किया गया है कोर्ट में। हां जी। कोर्ट में मेरी तरफ से प्रस्तुत किया गया है और किया क्यों गया? मेरा क्या केस है वो सुनिए आप और बाबू भाई को बुलाया पुलिस ने और मुझे तो यही दिखाई दे रहा था लेकिन मुझे नहीं पता था कि पुलिस मुन्नी बहन ब्रह्मा कुमारी वाले सब सेटिंग पहले से ही कर चुके हैं। पुलिस को रुके हुए सात आठ घंटे वहां हो गए थे और पुलिस से वो अलग मीटिंग कर रहे थे। अभी हरियाणा पुलिस को पूरी तरह ओतपोत पैसे में भर दिया गया था। यह सब बातें भी कोर्ट में यह सब बातें भी कोर्ट में सब मैंने कहा है सब मैंने कोर्ट में कहा है मतलब एक तरीके से ये आपका आरोप एक तरीके से आरोप है जो कि पुलिस वालों के साथ उन्होंने इस तरह से लेनदेन किया होगा सब सब मैंने आरोप लिखित में दिए हैं आरोपी है अभी तो जब तक फैसला नहीं आता है बिल्कुल बिल्कुल लेकिन कोर्ट में लंबित है जी जी तो मैं इसलिए भी वो कन्वसेशन कर सकती हूं क्योंकि मेरे पास प्रूफ है उसके जी जी जी जी वीडियो है बकायदा
01:49:20:16 हम तो तो मतलब आपके साथ जो पुलिस जो आपके साथ पुलिस गई थी वो उतना फेवर में नहीं रही आपके अकॉर्डिंगली और उनके साथ उनका वहां की पुलिस का कुछ ऐसा हो गया सेटिंग हो गया फैब्रिकेटेड हो गया केस अभी वो जो मेन विक्टिम था जो पीटा गया था उस व्यक्ति को पूरा कह दिया गया तुम्हें जीप देंगे तुम्हें रहने का स्थान देंगे सब देंगे नहीं तो नीलिमा की तरह परेशान हो जाओगे अगर निकाल दिया तो उसने अपना बयान पलट दिया सर। ओ उसने बोला मुझे तो पिटा ही नहीं गया। मैं तो नीलिमा बहन को जानता भी नहीं हूं। नीलिमा बहन को मैंने कभी कुछ कहा भी नहीं। लेकिन लेकिन वो बाद में आके मेरे सामने रोके गया बाहर। मतलब अंदर मीटिंग चल रही है। मैं बाहर खड़ी हूं। मुझे बाहर खड़ा कर रखा है। तो उसने बोला नीलिमा बहन ऐसा करके नीलिमा बहन सॉरी। मुझे ऐसा बोलना पड़ा। आप तो मेरी वो बहन है जो मेरे मां-बाप आज है नहीं। भाई भाभी के पास मैं जा नहीं सकता। आप मजबूत घर की लड़की है। आप कर सकती हैं और मुझे माफ कर देना। आप तो सगी बहन से ज्यादा मेरा साथ दिए। आपको मैं माफी चाहता हूं। मैंने ऐसा बोला है अंदर। वो बोल के गया मुझे। मैंने कहा कोई बात नहीं। तुमने तुम्हारा काम किया है। तुम्हारा यही काम था। और मैं मेरा काम करूंगी।
01:50:35:18 बाबू इतनी कमजोर नहीं है नीलिमा के कि अगर अब उसने खुले आम सामने आकर लड़ने का कोशिश किया है तो वह पीछे हटेगी। अभी कोर्ट जिंदा है। कोर्ट में तुम्हें एक बार और आना पड़ेगा बाबू। मैंने बोला देखो वीडियो तुम्हारी है। बोले हां मैंने कहा वीडियो मैं कोर्ट में साबित दूंगी। कोर्ट में आके तुम्हें यही बयान देना होगा जो तुमने पुलिस को दिया। कि मैं पिटा नहीं हूं। जो तुम्हें ठीक लगे वो बोलना। हम अब ये सब हो गया। पुलिस को उन्होंने भेज दिया। 9 बज गए। 10 बज गए। 10:30 बजे 9 से 10 बजे के करीब 11 बजने वाले हैं और ये लोग हम दोनों बहनों को अंदर खींचते हैं। जाने नहीं देते। हम ऐसे पलट के खड़े थे। मुझे और वो नीलम बहन को अंदर खींचते हैं। बहनें भाई नहीं बहनें। तीन बहने थी उसमें और क्योंकि मेरे बाल बहुत इस बार आप पुलिस के साथ वहां पे गई थी। पुलिस ही थी ना दो दिन से। पुलिस चली गई। पुलिस हमें छोड़ के चली गई। पुलिस ने कहा आप लोग तो इनहीं के हो। आ जाना। हम जा रहे हैं। पुलिस क्यों चली गई? मुझे पता नहीं था। पुलिस क्या समझा के चली गई मुझे पता नहीं था।
01:51:51:20 पुलिस चली। उन्होंने आपको अंदर खींचा। फिर फिर वो दो चार बहनें थी। डॉक्टर थी उसमें कुछ जिनको मैं जानती थी और वो लोग तो कभी मेरे सामने बोलते भी नहीं थे। वो बहुत शौक था। तो बाल बहुत लंबे थे। ऐसे ऐसे खींच के अंदर लेके गए। और मैं क्योंकि उल्टी साइड से थी तो मैंने पलट के ऐसे देखा तो वहां मतलब जो मेरा आरोप भी है कोर्ट में मृत्युंजय नीलू दादी रतन मोहिनी ये सब थे और इनसे जो कहा गया इनसे जो बोला गया इन्होंने किया है वो सब कोर्ट में लंबित है मामला बहुत कुछ हुआ हम किसी तरह छूट के भागे वहां से और शायद अगर हम नहीं भाग पाते गेट नहीं खोल पाता कोई बाहर से अंदर आने वाला था ही शांत हुए थे और हम गेट सेपाधपी नहीं करते थे तो वहां कुछ मेरे साथ उस दिन वो घटना घट जाती अच्छा तो अभी आपकी ओर से इनके विरुद्ध कौन कितने केस है फिर मैंने केस किया फिर मैं वहीं रुक गई मैं वापस नहीं आई और मैंने दिल्ली फोन किया घर पे बाहर सभी कॉलोनी वालों को सब भाइयों को मना कर दिया गया कि कोई भी इनको सहारा नहीं देगा होटल में
01:53:06:24 हम रुक नहीं सकते थे क्योंकि हमारा नियम नहीं था। हम होटल में नहीं रुकते थे। हम ब्रह्मा कुमारी थे और तो मैंने एक धर्मशाला ढूंढी क्योंकि मैं तो वैसे भी वैदिक हूं। मैं कहीं भी रह सकती हूं। तो मैंने एक जैन धर्मशाला ढूंढी। तो वहीं पर मानपुर में जैन धर्मशाला है। मैंने जैन धर्मशाला के ट्रस्टी थे जो मुझे जानते थे। मैं वाइट साड़ी में हम दो बहने थी। मैंने केस कर दिया था दर्ज। मैंने उनको बोला मैंने कहा मैं इस बार पुलिस ने आपका केस ले लिया माउंट आबू वाली पुलिस ने हां पुलिस ने केस ले लिया उसमें भी वही करना पड़ा जो एसएओ के लिए फोन करना पड़ा था अच्छा यहां मेरे कुछ लोगों ने साथ दिया ले लिया पुलिस ने केस उन्होंने कहा नहीं हम लेंगे केस आपका तो वो कुछ लोग फोन पे मैं कन्वसेशन कराया दिल्ली से एक तो वहां का केस हो गया जो वहां वाला केस है माउंट आबू वाला हां और एक गुड़गांव वाला हो गया और एक जो आपने वो शिकायत की है जमीन हथियार शिकायत की है तो मिज वसुंधरा राजे सिंधिया हमारे मुख्यमंत्री जी मैडम उन्होंने कॉल करके खुद इसमें इंटरफेयर किया था इसलिए केस लिया गया था मैं उनका तहे दिल से धन्यवाद
01:54:21:27 करती हूं एक वुमन होने नाते उन्होंने यह केस दर्ज करने के लिए बोला था और यह ऐसे नहीं बोला था कि मेरे प्रभाव में कर दो उन्होंने बोला जो सच है वह करो जो सही है वो करो। तो उन्होंने लिया था। तो फिर जैन धर्मशाला में मैं रही और वहां इनका कुछ चलता भी नहीं था। उन्होंने सब ने बोला कि बहन जी आज आप तो आज आई हो। हम तो इन्हें तब से जानते हैं जब लेखराज आया था यहां और बहुत बुरी हालत है इनकी। आप लोग कहां अब मैं सोचती थी कि जो दो धर्म के अलग-अलग लोग हैं ये आपस में बातें करते हैं। लेकिन मैं आज भी जो केस के लिए लड़ने जाती हूं वही वही जैन धर्मशाला में झुकती हूं। अच्छा और मुझे वहां बहुत अच्छा खाना मिलता है। लोग मेरी सेवा भी करते हैं, इज्जत भी करते हैं। तो कुल मिलाकर के तीन केसेस चल रहे हैं। मतलब अभी तक तीन का एक डिफेशन का अच्छा मानहान गुड़गांव में कोई केस नहीं हुआ। गुड़गांव में केस नहीं हुआ। वो तो शिकायत ले आ गए और चले गए। अच्छा जो केस है वो माउंट आबू में ही है। माउंट आबू में एक तो ये मारपीट
01:55:36:28 वाला हो गया। मारपीट वाला और बाबू अटेमप्ट टू रेप। अच्छा ये भी है। मतलब बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा कुछ करने वाले थे जो नहीं किया इन्होंने। तो वहां क्या वो जो दीदियां घसीट के ले गई थी तो उसमें कोई थी वहां भाई थे वहां से अगर हम छूट के नहीं भागते वहां हो सकता था हमारे साथ कुछ अच्छा ठीक है ठीक है उसके सब हमने सब मतलब सब सबूत दिए हैं वो बहन अभी दो दो महीने पहले वो घर से आके बयान देके गई है कोर्ट में अच्छा तो कोर्ट में जो मामला है एक एक तो अटेमप्ट टू रेप का है और एक वो आपके साथ मारपीट वाला है हां और एक मेरे अधिकारों का डिफेशन का है। अच्छा ये मुझे निकाल कैसे सकते हैं? मानहानि का केस है। अच्छा और वो जो शिकायत आपने की थी और वो जो आपने वो शिकायत मैंने की थी वो खत्म करके चली गई थी पुलिस वो रोल रोल करके चली गई थी। नहीं नहीं वो नहीं वो शिकायत जो जमीन हथियाने वाली शिकायत की थी ना कोर्ट। हां एक वो मामला फल हुए लेकिन वो फॉरेस्ट और इनका हो गया डायरेक्टली। हां उसमें शिकायत मैं मेरी भी दर्ज है। हां एक उसमें आप इन्वॉल्व है। अब एक बात आती है आप एक एक बात आती है कि कहीं पर
01:56:52:14 जो है आपने एक स्टेटमेंट दिया कि इनकी जो आईडियोलॉजी है उसमें इस्लाम ज्यादा है। इस्लाम को पिरोया हुआ है। तो उस पर इन्होंने आपके विरुद्ध कुछ किया है। हां तो मैंने जब मेरे से कुछ नहीं हुआ तो मैंने इंडिविजुअल वीडियो बनाना शुरू किया था कि क्योंकि मैं मीडिया से पढ़ चुकी थी और मीडिया के रूल भी जानती थी। ऐसा नहीं है कि मैं मीडिया के रूल नहीं जानती थी। और मैंने वही कहा जो मेरे अनुभव थे। अपने अनुभव तो कोई भी सुना सकता है। इसमें कोई बड़ी बात नहीं थी जो मैं बोल रही थी। तो मैंने लाइव कन्विकेशन करना शुरू किया। एक चैनल बनाया रेड कारपेट करके और लाइव आना शुरू किया उसमें और मैंने मेरे अनुभव बताने शुरू किए कि मैं एक ब्रह्मा कुमारी थी और कोई भी ऐसे रास्ते पर मत जाओ। वहां यह सब होता है, यह हो रहा है, वो हो रहा है। अपनी जो पीड़ाएं थी वो कहनी शुरू की। सामाजिक हित में सिर्फ समाज को बचाने [गला साफ़ करने की आवाज़] के लिए कि कोई और इससे पीड़ित ना हो। तो उन्होंने आपके ऊपर केस किया। मैंने वहां एक स्टेटमेंट दिया कि यह संस्था बेसिकली इस्लामिक गतिविधियों को लेके इनवॉल्व है। मतलब क्योंकि यहां पे कुछ ऐसे लोग हैं जिन जो फंड देते हैं जो जुड़े हुए हैं।
01:58:08:14 नज़र करके या क्या नाम है उसका नाम? मुझे नहीं पता। पूरा याद करके बताऊंगी मैं आपको। अगले इंटरव्यू में डिटेल के साथ बोलूंगी। कुछ वहां से जुड़े हुए इस्लामिक देशों से जुड़े हुए लोग हैं जो इन्हें फंड देते हैं। ऐसा मैंने उस वीडियो में बोला है। कुछ हिंदूइज़्म से जुड़े लोगों से ये नफरत करते हैं जो मैंने उसमें बोला है। मैंने इस्लामिक होने के बहुत सारे उदाहरण भी दिए हैं उसमें कि इस्लामिक कैसे हैं। तो इन्होंने क्या किया कि उस पर मेरे ऊपर केस किया है गुड़गांव में। अच्छा। जबकि वो वो केस ये लोग माउंट आबू कर सकते थे, मुंबई कर सकते थे। लेकिन क्योंकि इनको वो अटेमप्ट टू रेप एंड डिफेशन एंड फॉरेस्ट उन केसेस को वापस लेने के लिए मेरे पे केस करके दबाव बनाना है। इसलिए इन्होंने दबाव बनाने के लिए गुड़गांव में केस किया और गुड़गांव में भी उसने केस किया है। जिसका कोई लेना देना नहीं है मेरे से। कोई इनका अनुयाई है सेंटर पर रहने वाला है जो व्यक्ति मुझे जानता भी नहीं है और जिस पर खुद रेप के चार्जेस हैं अच्छा खुद उसके ऊपर रेप के चार्जेस है वो जाके मेरी एक शिकायत करता है कि ये लड़की हमारे को
01:59:23:15 बदनाम करने के लिए ऐसा कर रही है और हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है। हमारी बहनों को गलत बोल रही है। इसके ऊपर केस करिए। तो मतलब एक तरीके से अगर ब्रह्मा कुमारी से अगर सीधी सीधी फाइट है अगर मान लीजिए कि उनकी विचारधारा हमें समझ में नहीं आ रही या उनके कामकाज समझ में नहीं आ रहे तो अगर हम माउंट आबू पहुंचेंगे तो बाल पकड़ के मार सकते हैं शारीरिक रूप से मैं तो नहीं सोचती थी ऐसा कि मेरे साथ ऐसा हो सकता है अगर आपके बाल है मेरे जैसे आपके अकॉर्डिंग तो यही हो रहा है दूसरी बात अगर नाम है तो जरूर मारेंगे दूसरी बात दूसरी बात अगर हम दूर है तो यह सब कानूनी प्रक्रियाओं का दबाव बनाने का अच्छा ये जोरा से निकल चुकी हूं इसलिए थोड़ा हंसती हूं आपके सामने मैं उस ओरा से बहुत दिन पहले निकल चुकी हूं ये जो आपने बताया ना ये पेश इसको कहते हैं पेशबंदी कहते हैं शायद कानूनी भाषा में कि अगर ये जो इन्होंने पेशबंदी तो अगर ये अगर केस करने का प्रयास करते अगर ये प्रयास वहां माउंट आबू में करते तो इनका मामला हल्का पड़ क्यों? क्योंकि वहां का कानून प्रशासन के उसमें आपके साथ उनका पहले से कॉन्फ्लिक्ट चल रहा है।
02:00:38:16 तो इसलिए उन्होंने यहां पर करवाया जिससे कि स्वतंत्र दिखाई दे। उस केस को वो ये चाहते हैं कि मेरे ऊपर हर जगह से बहुत ज्यादा गहरी और जी जी जी अच्छा इसमें एक चीज और है एक चीज और है कि आप ये कुछ 16 मेंबर्स की कार्यप्रणाली क्या है ये बीके में 16 मेंबर्स है जो चला रहे हैं इसमें मैनेजमेंट कमेट के कुछ 16 मेंबर है जो चलाते है इसको और वो 16 मेंबर जो भी गलत काम करते हैं वो एक दूसरे को पता होता है और उन 16 मेंबर्स के साथ अपने 16 के अलग-अलग ग्रुप है अलग-अलग जोन है और वो अलग-अलग जोन में अपने अपने हुकुमबाजी करते हैं। बस ये इनका चलाने का सिस्टम है। और एक बात है एक बात मैं कहना भूल गई। मैं आपके चैनल पर कहना चाहती हूं वो बात जो वीआईपी लोग जुड़े हैं यहां ब्रह्मा कुमारीज से जो कहते हैं ब्रह्मा कुमारीज बहुत ही अच्छी संस्था है आजकल मंदिरों का मामला बहुत चल रहा है इसलिए मैं बोलना भी चाहती हूं कि बहुत अच्छी संस्था है ब्रह्मा कुमारीज ब्रह्मा कुमारीज ऐसी नहीं है मैं जानना चाहती हूं मैं
02:01:53:18 तो एक समर्पित बहन हूं थी नहीं क्योंकि अभी भी मेरा अधिकारों का मामला लंबित है मैंने ये चैलेंज किया है कि मैं कैसे ब्रह्मा कुमारी नहीं हूं वो बताओ। मैंने क्या किया है वो बताओ। तो ये लोग बेचारे 10 साल में ये साबित ही नहीं कर पाए कि मैं ब्रह्मा कुमारी नहीं हूं। क्योंकि मैं तो बकायदा समर्पित ब्रह्मा कुमारी हूं। इस पर मैं कुछ कहना चाहूंगा आपको। देखिए ऐसा होता है जैसे कि हम लोगों की जो लड़ाई है वह इस बात से मतलब जैसे सामने से लड़ाई तो है ही है। पूरी दुनिया सनातन को नष्ट करना चाहती है। तो अब क्या होता है कि एक व्यक्ति जिसकी पहचान आपको ज्ञात है कि सामने खड़ा हुआ व्यक्ति हमारा विरोधी है। उससे लड़ना आसान होता है। उससे सीधे-सीधे आर या पार का युद्ध है। मगर वो लोग जो कि सनातन के नाम से उसी व्यक्ति की चीजों को अंदर ले आए हैं। जो वह सामने खड़ा हुआ व्यक्ति है उसी व्यक्ति की चीजों को अंदर ले आए हैं और सनातन के नाम से ही परोस रहे हैं। तो हमारे लिए वो परेशानी के लिए परेशानी सब ज्यादा बढ़ी है। इसलिए क्योंकि जब हम उनसे लड़ रहे हैं तो यह हमें पीछे से कमजोर कर रहे हैं। राइट? तो तो इसमें ये बात आती है कि जैसे मान लीजिए मैं आध्यात्मिक विश्वविद्यालय वालों के साथ भी एक दो
02:03:08:24 वो कर चुका हूं। कन्वर्सेशंस और मैं ब्रह्मा कुमारियों के साथ भी बहुत सारी कन्वर्सेशंस हुई है। तो उसमें जब यह हर तरह हर तरह से तर्क वितर्क में और सैद्धांतिक रूप से जब इनका पक्ष कमजोर होने लगता है ये जो पीछे वाले लोग हैं तो इनके पास फिर एक चीज आती है कि भाई हम तुम्हें वो बता रहे हैं जो गीता ने कहा है। हम तुम्हें वो बता रहे हैं जो महाभारत ने कहा है या हम तुम्हें वो बता रहे हैं जो रामायण ने कहा, ऋषियों ने कहा। हम तुम्हें वह बता रहे हैं जो ऋषियों ने कहा है। अब वो क्या होता है कि इस बात के नीचे हमारी सारी तार्किक सैद्धांतिक और तात्विक विवेचनाओं को ठुकरा देना चाहते हैं कि भाई हम तुम्हें वो बता रहे हैं जो वेद में लिखा है। तो यहां पे हमारी इनसे हमारा जो क्वेश्चन इनसे शुरू होता है वो ये होता है कि भाई ऋषियों ने जो कहा है वो आप तक आया कैसे है? राइट है ना? ऋषियों ने जो कहा है वह आप तक आया है गुरु शिष्य परंपरा से और आप गुरु शिष्य परंपरा से के विरोध में जाकर के उन्हीं के द्वारा प्राप्त हुई चीजों का अर्थ अपने मन से बता रहे हो तो कहने का अर्थ यह है कि आप बिना किसी ऑथेंटिक अप्रूवल के किसी का बोर्ड यूज कर रहे हो ऑलरेडी और आज जब खुद के साथ वही
02:04:24:00 बात हो रही है तो आप कोर्ट भाग रहे हो ब्रह्माकुमारी आर्य समाज ले लीजिए या ब्रह्मा कुमारी ले लीजिए दोनों की बात करते हैं तो आर्य समाज के नाम से यदि कोई आर्य समाज विरोधी चीजें करेगा तो आर्य समाज कोर्ट जाएगा लड़ने के लिए कि भाई ये ऐसीसी चीजें कर रहे हैं हमारे नाम से ऐसा कर रहे हैं प्रयास करेगा हां और आप आप जो है वेदों का नाम लेकर के सनातन का नाम लेकर के आप अपना बोर्ड लगा के जो उन्हीं विचारधाराओं के विरुद्ध काम कर रहे हैं जो सनातनी नहीं है क्योंकि सनातनी विचारधारा क्या है ये इस संबंध में वह प्रमाण है जो उस सनातनी विचारधारा को लेकर आया है। तो आप उनका बोर्ड तो लगा रहे हो अपने यहां कि हम क्या बता रहे हैं? ऋषि बता रहे हैं। हम वो बता रहे हैं जो ऋषियों ने कहा है। हम वो बता रहे हैं जो कृष्ण ने कहा है। आप उनका बोर्ड लगा रहे हो। मगर जब कोई आपका बोर्ड ऐसे ही लगा रहा है तो आपको परेशानी हो रही है। है ना? ब्रह्मा कुमारीज क्या है? जब भी ब्रह्मा कुमारीज वालों से बात करेगा अगर एक हिंदू बात कर रहा है तो ब्रह्मा कुमारीज वाले कहेंगे कि हम तुम्हें वह बता रहे हैं जो कृष्ण ने कहा है। गीता में जो कृष्ण ने कहा है वो हम तुम्हें बता रहे हैं। तो यानी कि वो खुद किसी का बोर्ड लेकर के उसकी अनुमति के बिना घूम रहे हैं कि मैं सनातनी हूं। मैं कृष्ण वाला
02:05:39:06 हूं। जबकि कृष्ण वाला बोर्ड वही लगा सकता है जो कृष्ण वाली चीजों को लेकर आया है जो ऑथेंटिकली उससे जुड़ा हुआ है। तो आप खुद किसी का बोर्ड उसकी अनुमति के बिना लगा रहे हो अपने यहां जिससे कि विप्लव हो रहा है। और जब आपका बोर्ड लगा के कोई और टहल रहा है तब आप कोर्ट भाग रहे हो। है ना? राइट। ये वाली बात इस ध्यान तो मैं यही पूछना चाहूंगी उन वीआईपी से सर आपके चैनल के माध्यम से कि जो वीआईपी जा रहे हैं जैसे प्रधानमंत्री जी राष्ट्रपति जी जिसके दबाव में हम जैसे बच्चे वहां काम करते हैं इनके बंधवा मजदूर बनके और इनके दबाव में काम करते हैं कि ये लोग हमें धमकाते हैं कि अगर तुमने ऐसा किया तो तुम्हारे खिलाफ कानूनी कारवाई की जाएगी और ये लोग करते भी हैं और सिस्टम सुनता भी नहीं है क्योंकि वीआईपी मूवमेंट बहुत ज्यादा तो मैं यह जानना चाहती हूं कि कोई भी संस्था मतलब इस चैनल के माध्यम से अगर यह चीज जाए कहीं कोई भी धार्मिक संस्था कोई भी सामाजिक संस्था जो बच्चों का पालन कर रही है जो बच्चों को पाल रही है उनको जवान कर रही है और उनको वहीं पे वो शिक्षित करके अपने यहां पे कार्य में लगा रही है यह बोल के कि मैं सामाजिक हूं। तो मैं यह जानना चाहती
02:06:54:12 हूं बार-बार जानना चाहती हूं। वर्ड बोला है मैंने तीन बार कि वीआईपी मुझे कोई भी वीआईपी इसका जवाब दे कि ब्रह्मा कुमारी संस्था ऐसा क्या सामाजिक काम कर रही है जिससे कि वो सामाजिक संस्था है मैं एज अ ब्रह्मा कुमारी पूछ रही हूं मैं ब्रह्मा कुमारी नहीं हूं ऐसा कोई ना बोले इस वीडियो को देख के जो बहुत सारे ब्रह्मा कुमार कुमारी है इस वीडियो को देख के तुरंत बोलेंगे इसको तो निकाल दिया ये तो ब्रह्मा कुमारी नहीं है इसको तो ज्ञान नहीं है यह होती कौन है क्योंकि जाहिर सी बात है जिस समय मेरी लड़ाई हुई और आज की जनरेशन भी फर्क है। दादियां भी चली गई। वो बड़े भी चले गए। आज कोर्ट में मामले लंबित है। मेरे विषय में आज की जनरेशन जानती भी नहीं होगी जो ब्रह्मा कुमारी से बदल के नए-नए लोग आ गए। लेकिन मैं एक समर्पित ब्रह्मा कुमारी हूं। उनसे झगड़े के कारण अलग हूं। क्योंकि मेरा उनका मामला कोर्ट में लंबित है। और जब तक कोर्ट में मामला लंबित है तब तक मैं उनकी कट्टर विरोधी हूं। अगर कोर्ट से मेरी बात मान ली गई या समझ ली गई तो शायद मे भी उनके साथ बैठकर के कोर्ट के ही द्वारा कुछ बात हो कि आप यहां चेंजेस करो। अपने जो गलत गलत मत मतांतर है जो अभी सर ने बोले जिनका चैनल है उनको चेंज करो और सनातन धर्मी बनो। जिस सनातन
02:08:09:22 धर्म का बिगुल आप बजाते हो उसका गलत इंफॉर्मेशन मत दो। उसके गलत बोर्ड का प्रयोग मत करो। यही मेरा विरोध है जो सर ने बोला अभी कि गलत बोर्ड लगाकर गलत ज्ञान देकर गलत इंफॉर्मेशन देकर के आप लोगों को इस्लामिक नहीं बना सकते। हां मुझे प्रयास किया है आपने इस्लामिक बनाने का। बहुत लोगों को आप इस्लामिक बनाने का प्रयास कर रहे हैं। तो मैं यह जानना चाहती हूं जो वीआईपी लोग जाते हैं मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति जो भी जाते हैं या जो बड़े लोग जा रहे हैं उन सब लोगों को मैं एक ही बात जानना चाहती हूं कि देश के किस ऐसे विपत्ति काल में ब्रह्मा कुमारी ने साथ दिया जो ब्रह्मा कुमारीज को समाज सुधार की संस्था बोली जा रही है। देश के किस ऐसी चीजों के लिए हैंडीकप्स के लिए या कन्याओं के संरक्षण के लिए उनके विवाह के लिए वृद्धों की सेवा के लिए किसके लिए ब्रह्मा कुमारी ने काम किया बताती हूं ब्रह्मा कुमारी का क्या काम है? एस अ टीचर बताती हूं। सिर्फ झूठे पेड़ लगाना जिसकी इंफॉर्मेशन मैंने फॉरेस्ट वालों से ली कि यह कहते हैं हमने 90 हजार पेड़ लगाए इसलिए हम सेलिब्रेशन कर रहे हैं माउंट आबू के अंदर तो मैंने फॉरेस्ट वालों से पूछा
02:09:24:26 क्योंकि फॉरेस्ट वाले मेरे कनेक्शन में आए हैं इस शिकायत के बाद कि क्या 90 हजार पेड़ लगाए हैं ब्रह्माकुमारी ने तो वो लोग हंसते हैं और वो लोग कहते हैं कि मैडम ये तो रोज कोई ना कोई बोलता है हमने 80 हजार लगाए हमने 90 हजार लगाए इतनी तो लैंड भी नहीं है जो 90 हजार पेड़ उन्होंने लगा दिए हमको तो वो कभी डाटा दे नहीं पाए अपने 90 हजार पेड़ों का। ठीक है? पेड़ लगा के फोटो खिंचवाना वो ब्रह्मा कुमारी का काम है। लोगों को नशा मुक्ति की दवा बांटना उसमें पानी मिलाकर कुछ भी अपने आप से बना देना वो ब्रह्मा कुमारीज का काम है। सिर्फ फोटो खिंचवाने में ब्रह्मा कुमारीज बिजी है। सिर्फ सोशली अपने आप को फैलाने में ब्रह्मा कुमारीज बिजी है। मैं दावे के साथ कह सकती हूं देश के किसी ऐसे कार्य में ब्रह्मा कुमारीज इन्वॉल्व नहीं है जिससे वो एनजीओ कहला सके। वो ट्रस्ट कहला सके या सामाजिक जो काम उसने किया है वो आके वो डाटा बेस बताए। सरकारें क्यों जुड़ी है? यह पूछना चाहती हूं। सरकारों से बताएं कि आपसे जुड़ने का क्या ऐसा वो है जो ब्रह्मा कुमारी ने बहुत बड़ा काम किया है। नहीं किया है। ब्रह्मा कुमारीज एक ऐसा ग्रुप है जो एक बहुत बड़े किले में चलता है जो बाहर से लोगों को वहां इसलिए रखते हैं कि यह हमारे लिए तैयार होंगे और वो अपने
02:10:40:04 ही लोगों को खाना खिलाते हैं। अगर वो कहते हैं हम खाना खिलाते हैं तो खुद के ही लोगों को खाना खिलाते हैं। अगर वो कहते हैं हम यहां सोने की फ्री वो देते हैं तो वो जब हम जैसे लोग घर से दे देते हैं तब जाकर हमें सोने की रहने की व्यवस्था देते हैं। जब वो हमें समर्पित करते हैं तब हम घरों से पैसा देते हैं। मैं खुद अनुभवी हूं। मैं अपने अनुभव से कह रही हूं। तो ब्रह्मा कुमारी समाज के लिए कुछ नहीं कर रहा है। तो बड़े-बड़े वीआईपीस उसका डाटा तो मांगे ब्रह्मा कुमारी से। हम तो यह एक इनका प्रश्न है जो नीलमा जी है उनका कहना है कि जो यह दावे कर रहे हैं उसका कोई प्रूफ और डॉक्यूमेंटेशन में जो रजिस्टर्ड कुछ ऐसी चीजें जिससे एविडेंसेस जिससे उनकी समाज सेवा जो जिसका वो दावा करते हैं वो पुष्ट भी हो पाए वो सिद्ध भी हो सके और बाकी बहुत सारी हमें आज जानकारियां प्राप्त हुई है आपके माध्यम से और मतलब ये दो घंटे का दो घंटे 11 मिनट का सेशन है मगर मुझे पता नहीं चला। मुझे बिल्कुल भी समय का वो नहीं हुआ क्योंकि मुझे काफी कुछ जानने को मिला। मेरे मैंने जो 20 साल बिताए हैं तो बहुत कुछ है। हां
02:11:55:18 और मुझे लगता है कि अभी शायद कुछ और एपिसोड्स भी करने होंगे आपके जिससे कि और कुछ चीजें समझ में आए चीजें और कुछ प्रश्न है पर मैं चाहूंगा कि अब कुछ प्रश्न बाद के लिए छोड़ दिए जाए और मुझे एक चीज बहुत अच्छी लगी कि मैं आज एक वीर मातृशक्ति से मिला हूं जिसने अपने जीवन में बहुत सारा संघर्ष किया और बिल्कुल इसमें कोई दो राय नहीं है कि आपके जो पिता होंगे उनके अंदर कुछ रहा होगा जिससे कि आपको अपनी अनुवांशिकता से वो प्राप्त हुआना चाहते थे। बिल्कुल बिल्कुल तो वो कोई पुण्य आत्मा ही रहे हैं। आपके माता-पिता दोनों ही पुण्य आत्मा
⬜ Not used yet · 02:12:35:10 – 02:15:50:00 (3:15)
02:12:35:10 है। एक मिनट आपका वीडियो जी मेरी आवाज आ रही है? हां जी वीडियो नहीं आ रहा है। जी मैं बस मुझे एक मिनट दीजिए। वैसे भी पूरा ही करना है। मैं एक मिनट जी। ठीक है। तो आज की चर्चा हम यहीं समाप्त करते हैं क्योंकि मुझे कुछ टेक्निकल यहां एरर भी आ गया है और आप सभी लोग और इसमें बहुत सी ऐसी चीजें हैं जो कोर्ट में पेंडिंग है केस। तो उसमें जो भी आरोप नीलमा जी की ओर से रे क्वेश्चन रेज किए गए हैं ब्रह्मा कुमारीज के लिए तो वो सारे क्वेश्चंस यहां पर उन्होंने बताए हैं कि कौन-कौन से क्वेश्चंस हैं और कुछ चीजें ऐसी है जिसमें कि जैसे इन्होंने बताया कुछ लोग ऐसे हैं जिन पर जो है कोर्ट्स कई न्यायालय में उनके खिलाफ जो है ऑर्डर्स भी आ चुके हैं। तो उन चीजों के बारे में बताया गया है और लोग जागरूक हो और खुद की बुद्धि से समझें कि वह कहां जा रहे हैं, किस ओर जा रहे हैं। यही मेरा कहना है। कुछ आप अगर कहना चाहे तो कह सकती हैं नहीं तो हम विराम दें आज की चर्चा को। नहीं सर बहुत लंबा कम्युनिकेशन हुआ और मैं सिर्फ यही चाहती हूं कि मेरे इस वीडियो से इतना
02:13:50:21 सिर्फ समझे लोग कि शिव भगवान के नाम पे जिन पे आप विश्वास करके वहां जा रहे हैं। ऐसा कुछ वहां नहीं है। ये मैं मेरे अनुभव से कह रही हूं। और मैंने सेवन डेज कोर्स भी किया है। मैंने उनका ज्ञान भी लिया है। मैं समर्पित भी हुई हूं। सारी चीज मुझे है। तो जो आपके पास कमेंट्स आते हैं शायद इस वीडियो के बाद भी आएंगे। वो सारे कमेंट्स जो है ना उनमें आप पढ़ेंगे इस बहन को तो कभी कुछ ज्ञान ही नहीं हुआ। यह बहन कभी वो अनुभव नहीं कर पाई। यह तो खुद ही ज्ञानी नहीं है। ये तो खुद ही देखो कैसे बैठी है। कोई किसी चीज पे कमेंट करेगा। कोई किसी चीज पर करेगा। तो मैं उसमें नहीं जाना चाहती। मैं सिर्फ यह कहती हूं जो लोग यह कमेंट करेंगे पहले से ही नेगेटिव वो लोग जाके पहले कैंपस में कुछ पुराने लोगों को ढूंढे और उन लोगों से मेरे बारे में पूछें कि कौन थी नीलिमा बहन या कौन है नीलिमा बहन जिसके बारे में इतनी चर्चा है बाद में आप कमेंट करिएगा नमस्कार चलिए चलिए आपने समय दिया बहुत-बहुत आभार आपका और हम सभी आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं। प्रभु श्री राम से प्रार्थना करते हैं कि आपको जो है एक अच्छा भविष्य भगवान कृपा पूर्वक प्रदान
02:15:05:25 करें और आपकी वीरता को नमन है। आपने जिस तरीके से संघर्ष किया कहीं भी हार नहीं मानी साहस दिखाया और बहुत ही कठिन परिस्थितियों का आपने सामना किया है। तो आपकी वीरता को हम नमन करते हैं। जी चलिए जय श्री राम। सभी जय श्री राम जी। [संगीत]
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ब्रह्माकुमारी क्यों बनी क्रांतिकारी?
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