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00:00:00:14 तो नीलिमा जी थोड़ा सा अपना एक परिचय दर्शकों को बताएं कि किस प्रकार से आपकी जर्नी रही जो आप ब्रह्मा कुमारी में पहुंची वो कनेक्टिंग जो एक परिचय हो वहां पर आप कैसे पहुंची और वहां पर आपका क्या कार्य था इस बारे में थोड़ा सा पहले बताइए। ओके ओके जी मैं मेरी माताजी इनसे जुड़ी थी मतलब मेरी मदर और मेरी मदर इसलिए जुड़ी थी कि वो शिव भक्त थी तो उनको तो जो शिव भक्त होते हैं अगर शिव मिल जाए तो वो कहीं भी जाने को तैयार हो जाते हैं। तो मेरे फादर काफी मैं वैसे बिलोंग यूपी से करती हूं। यूपी के गाजियाबाद से एंड रहती मुंबई में हूं। तो यूपी में कावड़ यात्रा चलती है शिव भगवान के लिए। तो आप तो ज्ञानी है। आपको तो मालूम होगा ये चीज। तो सभी प्रांतों में अलग-अलग शिवरात्रि अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है। तो हमारे यहां यूपी में कावड़ पद यात्रा का बहुत महत्व है। सनातन परादी के अनुसार तो मेरे फादर ने 16 खड़ी कावड़ चढ़ाई थी। मेरे यहां पहली पुत्री हो। तो मैं हुई मैं बड़ी बच्ची हूं अपने घर

00:01:15:20 की। उसके बाद मेरी मदर को जाना था किसी भी शिव धाम पे। उसके पहले ही किसी पड़ोसी मतलब नेबर थे हमारे वहीं से कोई माता जाती थी इनकी ब्रह्मा कुमारी से याद में तो ब्रह्मा कुमारी का उन्होंने सुनाया कि तुम दरदर पर क्यों ढूंढती हो शिव को आपको इतनी तपस्या करते हो आप लोग शिव चालीसा रखते हो पता नहीं क्या क्या करते हो चलो हम तुमको शिव से मिलाए तो वो ले गई थी मेरी मदर को अच्छा तो मैं उनसे प्रभावित हो के मेरी मदर पीछे पीछे सुनने तो मतलब आपने किस आयु में प्रभाव देखा जिसके कारण आप अट्रैक्ट हुई ब्रह्मा कुमारी वालों से मतलब लगभग क्या आयु रही होगी जब आपने मतलब जब आपने उधर की ओर मेरी आयु मेरी आयु या आपने आंख आंख खोलने के साथ ही आपने वो वैसा वातावरण पाया था सुना था तो मैंने बताया ना कि मैं बड़ी बच्ची हुई तो यही था कि शिव भगवान की वजह से तभी मेरी मदर का मैं ब्रह्मा कुमार में आना जाना देखती थी बचपन में बालपन से तो सेवंथ ए स्टैंडर्ड में तो मैं माउंट आबू चली गई थी और फिर नाइंथ के एग्जाम दे रही थी तो मैं

00:02:30:21 पढ़ाई छोड़ने का विचार करके वहां रह गई मतलब मदर को भी बोल दिया कि मैं नहीं जाऊंगी और मैं काफी प्रभावित हूं इनसे और मैं वही करूंगी जैसा कि पूरे पूर्ण फॉलोअ करके ऐसा नहीं केवल हम सुनते रहेंगे अगर यहां कुमारियां सेफ है लड़कियां बहुत अच्छे से रह रही तो पोरिटी अच्छी चीज है तो मैं वर्बित होना चाहती हूं। तो मैं वहां रह गई माउंट आबू में। इवन मेरी मदर जो ज्ञान सुनती थी बहुत अच्छे से उन्होंने ये मंजूर नहीं किया। मतलब ज्ञान उन्हें अच्छा लगा। सब चीज उन्हें अच्छी लगी। लेकिन उनको जब उनकी बेटी जाने लगी तो बुरा लगा। तो वो मुझे काफी जिद करने लगी। पहली बार मदर के दिमाग में शक तब आया जब मेरा मोह जागा उन्हें कि बच्चा दूर हो रहा है। तो उन्होंने कहा मैंने सुनने के लिए बोला था मेरे साथ आने के लिए बोला था लेकिन मैंने समर्पित होने के लिए तुम्हें नहीं बोला था। इसलिए तुम चलो और मैं भी नहीं सुनूंगी तुम भी मत सुनो चलो वापस। तो मेरी मदर ने तो छोड़ दिया। वो किसी वजह से नहीं छोड़ा था कि उनको बुरा लगा। वो तो आज भी उन्हें अच्छा ही मानती है। वो भोलेपन जैसी मेरी मां है। बहुत भोली है। वो जो एक छाप छूट जाती है किसी के मस्तिष्क पे कोई तो फिर हां वो छाप छूट गई कि लड़की मेरी लड़की छीन ली। उनको ये हो गया कि इन्होंने

00:03:45:27 मेरी लड़की छीन ली। तो मदर तो जाना आना बंद हो गई। बट मैं रह गई वहां पे। तो आपने बताया कि आप किस पद पर कार्यरत थी तब जब आप वहां से हटी हैं तो आप एक बड़े पद पर कार्यरत थी तो आपने बताया था कि आप वहां पर एक शीर्ष पद पर कार्यरत थी तब आप वहां से हटी हैं। तो 1996 की बात है। जी बस मैं ये पूछना चाह रहा हूं। जैसे आपकी वहां की यात्रा कैसी रहेगी? मतलब जब आप ब्रह्मा कुमारी में जब आप पहुंची तो आप एक सामान्य अनुयाय के रूप में रही होंगी और उसके बाद आप सामान्य अनुयाई से और वहां के एक किस शीर्ष पद पर पहुंची थी और कैसे पहुंची थी ये दोनों चीजें मैं सामान्य अनुयाई तो नहीं बनी जो सामान्य अनुयाई थे वो तो चेंज हो सकते थे बदल सकते थे उनके शायद कम फॉलोवर हो सकते थे उनका मन बदल सकता था मैं तो डायरेक्ट हेड ऑफिस में चली गई ना दादी दादी मनोहर इंदिरा जो दादा लेखराज के घर के सामने जिनका घर था पाकिस्तान में जहां सिंध हैदराबाद में उन्होंने ज्ञान दिया था सीधा वो दादी ने मुझे अपने साथ सेवाधारी रखी मतलब पहली बार जब आप घर पहली बार जब

00:05:00:28 आप घर छोड़ के जब गई है वहां तो सीधे वो जो शीर्षस्थ जो दादी थी उनके सानिध्य में पहुंची रख लिया सानिध्य में रख लिया वो प्रेम प्यार से रखा था उनकी भावना कुछ गलत नहीं थी वो दादियां बड़ी अच्छी थी मुझे आज भी याद आती है तो उन्होंने इसलिए इसलिए रखा था कि छोटा बच्चा है और यह कहीं और नहीं रखी जा सकती और यह मेरे साथ रहेगी तो मेरे साथ रहेगी में मैं भी बड़ी मां की तरह मुझे भी मां की ममता छीटी थी तो मुझे भी वो मां की तरह मोह हो गया और मैं उनके साथ बड़े प्रेम से रही और मुझे जब तक कोई ज्ञान नहीं था बस मैं रह रही थी और उन्होंने नाइंथ में ही मुझे जो मेरा नाइंथ का स्टैंडर्ड था मेरे ख्याल से उस समय मैं रही होंगी 10 से 12 साल की तो दादी ने ही मुझे जो कोर्स कराया दादी मनोहर इंद्र जो ब्रह्मा कुमार आज ये कहते हैं नीलिमा बहन को पूरा ज्ञान नहीं है इसलिए नीलिमा बहन एंटी है नहीं मुझे पूरे से पूरा है अत्यधिक ज्ञान है उतना ज्ञान है ब्रह्मा कुमार इसका जितना मुझे नहीं होना चाहिए था शायद ज्यादा जानकारी भी मुझे हानि पहुंचाई तो वो मुझे पूरा उन्होंने ही कोर्स कराया उन्होंने ही चलाया और उनके रूम में ही मैं कोर्स करती थी सारी ट्रेनिंग भी दादियों ने कराई जैसा ब्रह्मा कुमारी टीचर्स ट्रेनिंग हुई तो पहले मुझे चांस दिया

00:06:16:02 मैं वहां की लाडली बच्ची थी। ज्ञान सरोवर के कोटेज में रहती थी। एंड सबकी प्यारी थी मैं। ज्ञान सरोवर क्या है? ज्ञान सरोवर में एक कोटेज है दादी कोटेज। वहां मैं रहा करती थी। माउंट ज्ञान सरोवर इनका कोई अच्छा कोई सेंटर होगा। कैंपस कैंपस है माउंट आबू के अंदर तीन कैंपस है शांतिवंत नीचे और ज्ञान सरोवर मतलब यहां सारे फॉरेनर सारे विदेशी सारे आपके आईएएस ऑफिसर जितने भी सेमिनार होते हैं वो ज्ञान सरोवर में होते हैं और पांडव भवन इनका छोटा सा घर है जो शुरू शुरू में शुरू किया था स्टार्टिंग में पांडव भवन ने शुरू किया था तो इनका सबसे हाईएस्ट कॉम्प्लेक्स वीआईपी कॉम्प्लेक्स जो है वो गरो वहां पर आपको

00:07:08:00 अच्छा तो फिर उसमें जो आप जो मैनेजमेंट में और कार्यकारिणी में पहुंची ना तो वो कैसे आपका चुनाव किया इन लोगों ने किस तरह से पहुंची मैं कार्यकारिणी में इस तरह पहुंची सर उसके लिए बहुत वफादार बनना होता है और उन दिनों मुझे इनकी कुछ गलत गतिविधियां दादियों के आसपास पता नहीं चली क्योंकि मैं उस समय सिर्फ दादियों के पास थी मैं 14 15 16 17 18 साल तक दादी ियों के संरक्षण में चली तो वहां मुझे कुछ पता नहीं चला। लेकिन 18 साल के बाद इनके यहां एक प्रक्रिया है समर्पित का फॉर्म भरने की जहां ये बच्चों को समर्पित करते हैं। अभी तक मैं समर्पित नहीं थी दादियों के पास। लेकिन अब ज्ञान इतना हो चुका था। ट्रेनिंग हो चुकी थी। सब कुछ हो चुका था। मैंने नडियाद गुजरात से ट्रेनिंग की थी। इंदौर हॉस्टल भी इनका ट्रेनिंग का सेंटर है। बट मुझे इंदौर नहीं नडियाद भेजा गया। और मैंने जब ट्रेनिंग कर ली तो मुझे कहा गया कि हम मतलब यह पता था मुझे कि शायद 18 साल बाद ये सबको सेंटर देते हैं। मुझे भी एक सेंटर देंगे क्योंकि मुझे भी सेंटर इंचार्ज बनना था। मुझे कोई माउंट आबू में रहना नहीं था कि मैं भी एक सेंटर चलाऊंगी। सेंटर इंचार्ज बनूंगी और कुछ लोग होंगे बस उनके साथ में रहूंगी टीचर बनके। तो इसीलिए मेरी

00:08:23:08 ट्रेनिंग भी हुई थी। तो जिस समय ट्रेनिंग होती है इंदौर हॉस्टल और मेरियाद हॉस्टल दो ट्रेनिंग की जगह है इनकी। तो वहां पर ट्रेनिंग में ना मेरे साथ 300 कुमारियां थी। 300 ब्रह्मा कुमारियां छोटे बच्चे भी थे। सब 17 18 साल के थे हम लोग। और जब ट्रेनिंग पूरी हुई छ महीना मौन रहना था। गंभीर रहना था। शांत रहना था। व्यवहार सीखना था। वो चीजें अच्छी थी। बुरी नहीं थी। वो व्यवहारिक ज्ञान था। वो बहुत सुंदर ज्ञान। पर मुझे ये बाद में पता चला कि वो एक बंधक बनाने का ज्ञान था। बट वो एक सिस्टम था उनका जैसे गुरुकुल में सिखाते हैं ऐसे सिखाया गया लेकिन वो बाद में पता चला कि यह सब क्यों सिखाया जाता है किसी से नहीं बोलना है बात नहीं करना है शांत रहना है किसी से कनेक्शन नहीं रखना है यहां की बात कुछ कहनी नहीं है ट्रेनिंग में बोलना ना करना नास्तिक हां करना नास्तिक मतलब उनकी तरह हम हांजी हांजी करके उनके जैसे बन गए और फिर वहां से पूरी तरह तैयार ब्रह्माकुमारी सेंटर पर भेजी जाती है जिसमें कोई त्रुटि नहीं होती जिसको तो आप कभी भी कुछ भी सुनाएंगे ज्ञान सुनाएंगे आप कोई थॉट देंगे आप कोई प्रूफ देंगे आप कोई चीज देंगे उनको कुछ समझना नहीं है वो ऑलरेडी ट्रेंड होके आई है तो वो आपका ज्ञान नहीं सुनेंग आपको कितना भी

00:09:38:12 ज्ञान हो तो वो ट्रेनिंग मुझे दी गई और जब मैं वहां जब वहां से 300 कुमारियों को सब उनके घर वाले लेने आ रहे थे माउंट आबू से भी लोग लेने आ रहे थे कि भाई अब ट्रेनिंग पूरी हो गई चलो चलो सब घर जाएंगे तो मैं रास्ता देखती रही और मुझे कोई लेने नहीं आया क्योंकि घर वालों की मर्जी के बिना तो रह ही रही थी। अब इनको मेरी घर वालों की मर्जी चाहिए थी फोन पर साइन करने के लिए समर्पित करने के लिए। बट मेरे घर से तो कोई तैयार नहीं था। मेरी मदर जो गैंग में चलती थी वो खुद तैयार नहीं थी समर्पित करने के लिए। और मैं घर वालों से कनेक्शन टूट चुका था मेरा। फोन का कनेक्शन उन दिनों नहीं था। लेडलाइन थे सब और मोबाइल रखना अलाउ नहीं था। मेरी मदर की हाय हेलो भी बंद हो गई थी मेरी। एंड मुझे याद है अच्छे से कि मुझे लेने कोई नहीं आया। ट्रेनिंग में से तो मैंने शाम होते होते उनसे पूछना शुरू किया जिनके पास मैं ट्रेनिंग कर रही थी कि सबको लेने आ गए लोग मुझे लेने नहीं आया कोई मैं कहां रहने वाली हूं या मेरी पोस्टिंग क्या होने वाली है? तो उन्होंने बोला कि हम आपको वापस माउंट आबू भेजिए। जैसा कि आपने कहा ना पद कैसे मिला? तो मैंने कहा वापस माउंट आबू क्यों? सात तो माउंट आबू से यहां आए और सबको सेंटर मिला। मुझे सेंटर क्यों नहीं? उन्होंने कहा

00:10:53:13 आपको मैनेजमेंट कमेटी में सिलेलेक्ट कर लिया गया है कि आपको माउंट आबू में मैनेजमेंट में रहना है। मतलब मैनेजमेंट कमेटी का राइट हैंड बन के रहना है। आप हमारी सबसे विश्वास पात्र लड़की हो और हम आपको अब इंटरनेशनल हेड ऑफिस के बारे में समझाएंगे और वहीं पर आपको समर्पित करेंगे। तो मैं वहां आई मुझे लेने माउंट आबू से काफी वरिष्ठ भाई भेजे गए। तो सब बैग लगा के गुजरात से मैं वापस आ गई और आने के बाद यहां जब मैं आई माउंट आबू में जब मैं आई तो मेरे लिए बहुत बड़ी कमेटी बैठी जिसमें दादी रतन मोहिनी थी निर्भयर भाई थे करुणा भाई थे मैसूर की लक्ष्मी बहन थी बहुत सारे बड़े-बड़े लोग थे बुन्नी बहन थी मोहिनी बहन थी कि नीलिमा बहन हम आपको यहां पे एक रूम दे रहे हैं डायमंड हाउस कहते हैं जो सबसे इनके यहां वीआईपी जगह है डायमंड हाउस उस में 26 नंबर कमरा और वहां उस रूम के बिल्कुल बाजू में एक विजिटिंग रूम देंगे हम आपको जो भी कोई समस्याएं होंगी हम आपके साथ एक कमेटी बनाएंगे छोटी बहनों की कि कोई समस्याएं होंगी तो आप सुने और आप उसको करें और जहां कहीं जरूरत होगी तो हमारे ही भी निर्णयों में आपका हस्तक्षेप रहेगा। तो इन्होंने

00:12:08:26 मुझे एक गाड़ी दी वहीं पर जो इनकी सेवाधारी गाड़ी होती है। एक ड्राइवर दिया सुखवीर भाई करके थे वो ड्राइवर थे मेरे एंड रूम दिया सारी फैसिलिटी दी जो एक वीआईपी पदाधिकारी को दी जाती एंड सेंटरों से कोई शिकायत आती थी कुछ बाहर का लफड़ा होता था कोई चीज होती थी वो सब बातें सुननी शुरू हो गई आखिरकार वो खुलनी शुरू हो गई मेरे सामने तो आपके साथ जो बाकी बाकी जो बहने थी जो वो अलग-अलग उनको तो सेंटर्स दे दिए जाते हैं कि आप आप लखनऊ का सेंटर संभालो या आप फलाना सेंटर संभालो इस तरह से। हां जी। तो वो एक ट्रेनिंग करके सेंटर इंचार्ज बना दी जाती है। अच्छा तो ये जो सेंटर्स है ब्रह्मा कुमारी बना के देता है या फिर कोई लोकल बंदा अपनी ओर से उसको लग बनाता है। वही पॉलिसी है सर कि हम लोगों को जो वहां से दिया जाता है वो कोई पैसा नहीं दिया जाता। वहां पे एक पराधी है उनकी। मतलब अपराधी मतलब एक क्या बोले हिंदी में इंग्लिश में बोलते हैं एक पर्टिकुलर उनका सिस्टम है पर्टिकुलर सिस्टम को बोलेंगे कि आप यहां से ट्रेनिंग करेंगे ट्रेनिंग करके किराए पर मकान लेंगे किसी भी शहर में किराए पर

00:13:23:27 मकान लेंगे जैसा कि ये लोग पाकिस्तान से जब आए थे ना वही वाला सिस्टम इन्होंने यहां दोहराया तो क्योंकि इंडियन कम्युनिटी क्या है कि भगवान के लिए भावनात्मक बहुत सनातनी भावनात्मक बहुत होता है तो भावना से खेलने वाला गेम है कि आप ट्रेनिंग करके आएंगे आपको वहां पर पांच कपड़े दिए जाएंगे। पांच छ कपड़े एक जोड़ी कपड़े दिए जाएंगे पूरे दो जोड़ी तो दो जोड़ी एक साबुन ब्रश एक छोटा सा ब्रश केस लगा के दे देंगे और बोलेंगे कि आपको इस शहर में जाना है। पर शहर में जाने के लिए क्या करना है? उस लड़की को वो तो ऑलरेडी तैयार हो चुके। अब जाके मुझे लगता है शिवांग जी तो वो शुरू से ही मेरे फादर की पालना से मुझे पता था कि जानने के लिए नहीं बल्कि करने के लिए धर्म अपनाया जाता है। वहां पे क्या था वहां पे लड़कियों को इसलिए तैयार किया जाता है कि था कि ब्रह्मा कुमारीज को कोई जाने तुम्हें प्रचार करना है। जगह-जगह ब्रह्मा कुमारी का प्रचार करना है। ट्रेनिंग में प्रचार करने का मटेरियल सब दे दिया गया है। आपके पास एक रजिस्टर है। उसमें वन टू वन पॉइंट लिखे हुए हैं। रोज दिन रात उसको रट्टा मारना है सीखना ब्रह्मा के बारे में क्या कहना है लेखराज को उससे कैसे जोड़ना है कराची के बारे में स्टोरी क्या है उससे

00:14:38:28 हमको कैसे जोड़ना है सनातन के हर एक चीज को कैसे मैनपुलेट करके बदलना है कैसे हर धर्म के व्यक्ति को ये किसी एक पर्टिकुलर धर्म के भी नहीं है हर एक धर्म के व्यक्ति को कन्वर्ट करके अपने तक लाना है कुल मिला के उसको मुरली ज्ञान ब्रह्मा कुमार बताना है ये सारा ट्रेनिंग लेकर के उनको कह दिया जाता है। किराए पर मकान लो, रेंट पे घर लो किसी सोसाइटी में और उस घर पे बोल दो कि भाई हम ब्रह्मा कुमारी का ज्ञान सुनाएंगे और ऐसेसे हमें यहां चाहिए तो घर कैसे मिल जाता है? डीलर्स के थ्रू घर मिल जाता है। मतलब किसी प्रॉपर्टी डीलर के पास जाओ। वहां कहो हम तो साध्वी है। जी। हम यहां गीता का ज्ञान सुनाएंगे। इसीलिए गीता ज्ञान कहते हैं इसको। सनातन धर्म का ज्ञान सुनाएंगे और आपका घर चाहिए। अच्छा वो घर जो होता है वो मोटी रकम का होता है। मान लीजिए 5000 रुपए में कोई घर मिल रहा है यूपी में ₹100 में घर मिल रहा है। मैं यूपी का उदाहरण दे रही हूं तो वो 5 10 में घर कोई और लेगा तो 5 द00 में ही लेगा। लेकिन अगर ब्रह्मा कुमारी लेगी तो उसे 25000 में लेगी और आप सोचिए उसके पास कोई सोर्स नहीं है ₹000 महीना देने का। लेकिन वो फिर भी उसे 25,000 में लेती है

00:15:54:14 क्योंकि स्टार्टिंग का एक साल का खर्चा माउंट आबू उसको पहुंचाता है कि यह खर्चा हम पहुंचाएंगे तुम सेटल हो जाओ तो वो रेंट देते हैं और वो सब्जी भाजी जो भी उसका खर्च होता है अगर वो सब्जी भी लेती है ठेले पे से सब्जी लेगी ना पड़ोस मोहल्ले में कोई सब्जी बेचने वाला आएगा तो आलू टमाटर का सब कच्चा बिल रखेगी वो वो बिल इसलिए नहीं रखा जाता कि ब्रह्मा कुमारियां ब्रह्मा कुमारी संस्था बहुत पारदर्शी है नहीं वो बिल इसलिए रखा जाता है कि अगर वो बिल नहीं देगी तो उसे खर्चा नहीं दिया जाएगा स्टार्टिंग का एक साल दिया जाता है उसको एक साल करके दिखाओ तुम्हारा मरने जीने का टाइम है ये मतलब तुमको और वो क्या करती हैं जो आती है लड़कियां वो एक दौड़ होती है मैं तुमसे आगे तुम मुझसे आगे मैं तुमसे आगे मैं देखती हूं क्या तो उस चक्कर में वो लोग

00:16:44:12 सोसाइटी के अमीर लोग जो होते हैं रिच लोग जो होते हैं उन सबको चाहती है कि इनको किसी तरह से करो पैसा लो और वो पैसा किसी तरह से हम माउंट आबू

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00:16:56:00 पहुंचाए और वो बड़े जो शीर्ष नेतृत्व पर बैठे हैं वो हमसे खुश हो और हमें कुछ भी मतलब कॉम्प्लीमेंट्री दे या कोई पोजीशन दे जी तो ये किस तरह से ये जो पैसा है जो जैसे वहां जा रहा है अमाउंट अब तो वो किस रूप में आता है वहां जाता है कैश मतलब जो जो देते हैं डोनेट करते हैं तो वो किस किस तरह से जो करते हैं वो सेंटर्स पे कई सारे बॉक्सेस रखते हैं वो लोग ये भी एक बहुत बड़ा खेल है मतलब हॉल में एक भंडारी होती है जिसमें ज्ञान सुनते हैं लोग जहां प्रवचन होता है सुबह का 7:30 बजे की मुरली होती है 7 बजे शुरू होती है वो 6:30 बजे योग होता है 4 बजे उठ जाते हैं हम लोग अमृतवेला उठो सुबह सुबह उठकर के 6:00 बजे हम हॉल में होते हैं 6:30 से 7:30 तक वो प्रोग्राम चलता है ज्ञान सुनाने का। वहां एक बहुत बड़े-बड़े बॉक्सेस होते हैं। उनमें लिखा होता है भोलेनाथ की भंडारी। तो उसमें सब पैसा डालते हैं और वो अनगिनत लोग होते हैं। जितने आपकी जनसंख्या होगी 1000 लोग अगर आपके क्लास में रोज आ रहे हैं वो क्लास होती है मेडिटेशन क्लास। तो उस मेडिटेशन क्लास में अगर रोज 1000 लोग आ रहे हैं।

00:18:11:13 तो रोज अगर कोई ₹1 भी डाल रहा है तो उस हिसाब से समझ लो और ₹1 कोई नहीं डालता। [हंसी] आज के टाइम में तो 500 से कम नहीं मेरे समय भी कोई 500 से कम नहीं डालता था। एक वो भंडारी होती है। एक भोग की भंडारी होती है। बाबा का भोग लगेगा। एक माउंट आबू के अंदर हेड ऑफिस में खाना चलाने की भंडारी होती है। उसमें पैसा डालो। एक माउंट आबू वो भी सब सभी सेंटर्स पे सोर्स ऑफ इनकम सेंटर्स है। सोर्स ऑफ इनकम माउंट आबू नहीं है। माउंट आबू तो कटोरा ले बैठा हुआ है। भिखारी है। देने वाली ये बहने हैं। कन्याएं हैं। अब कह दो आप इनको तो ठीक है। वो भावना में समझ नहीं रही है। लेकिन वही कर रही है। तो पांच छह सात भंडारी इस तरह की रखी हुई है। हॉस्पिटल की भंडारी, नर्सिंग ट्रेनिंग की भंडारी, ट्रेनिंग की भंडारी, बहनों की भंडारी कई तरह की भंडारियां है। तो यह अगर डोनेशन आती है तो उन बॉक्सेस में जाती है और बॉक्सेस को एज इट इज खाली करती और वहां पर जो है पहुंचा दिया। हां हां जी। उस कैश को कलेक्ट करती है वो बहन और उस कैश को कलेक्ट करके एक नाम के लिए एक अकाउंट भी खोलते हैं ये लोग।

00:19:27:08 जैसे मेरा कोई पर्सनल खाता नहीं हो सकता अगर मैं समर्पित बहन हूं। लेकिन मेरे शहर के पास के बैंक में मेरा खाता होगा। गवर्नमेंट्स को ध्यान भटकाने के लिए। लेकिन वो खाता होगा माउंट आबू ट्रस्ट का। जहां जिसका पासवर्ड माउंट आबू ट्रस्ट के पास होगा मेरे पास नहीं। वो जब तक मैं खोल सकती हूं जब तक मेरा उनसे कनेक्शन सही है और जिस दिन मेरा कनेक्शन उनसे खराब हो गया वो उसी दिन वहां से बंद कर देंगे। अच्छा तो अगर कोई बैंक में डोनेट करता है तो वह डायरेक्टली माउंट आबू पहुंच जाता है। उसमें तो जी और अगर कोई बॉक्सेस में कैश डोनेट करता है तो वो फिर वो कलेक्ट करके और समर्पित शिष्य भेज देती है। तो इसमें कुछ ऐसा भी आता है कि ये जो बहने होती है इनके मतलब इनमें ऐसे भी केसेस आ सकते हैं कि वो जो माउंट आबू है उसके साथ चीटिंग कर रही हो बहनें। बिल्कुल करती है। जैसे आपने अभी बताया ना कि जैसे वो बिल बना रही हैं। जैसे आपने कहा ना 10,000 का किराए वाला घर वो 25,000 में लेती हैं। तो वो उन्होंने बताया कि 25,000 है किराया और वो किराया उनको माउंट आबू से मिल रहा है। नहीं नहीं सॉरी यहीं पे मैं आपको करेक्ट कर रही हूं। 25,000 में इसलिए लेती है कि सोसाइटी दे दी। सोसाइटी दे दे उसको। मतलब

00:20:42:19 वो सोसाइटी का मेंबर जो है जो दे रहा है सामाजिक जो व्यक्ति है गस्ती वाला व्यक्ति वो जो उसे दे रहा है वो 25000 में इसलिए दे रहा है कोई आम आदमी मुझसे 10 या 15 में लेगा ये ब्रह्मा कुमारी 25 में ले रही है तो होता वो 25000 ही है उसमें कुछ नहीं कर सकती उसको तो एक साल वो रेंट उन्हें दिखाना है ना एक साल बाद तो कोई भी अमीर आदमी फसेगा और घर बनवा देगा एक साल निकालना है कैसे भी ये तो हो गया मगर वो हां चीटिंग कैसे चीटिंग कहां करती है वो मैं आपको बताती हूं एक टाइम ऐसा आता है जब मल्टी रिचेस्ट लोग जुड़ जाते हैं सेंटर से और वो ऐसे जुड़ जाते हैं जो बहनों से जुड़ जाते हैं वो माउंट आबू से कोई खास नहीं जुड़ते पर बहनों से उनकी भावना जुड़ जाती है बेचियां सफेद साड़ी वालियां बेचारी

00:21:35:03 घर छोड़ के आई हुई है ऐसी चलिए बहन जी मैं सेंटर बनवाता हूं लीजिए बहन जी ये मैं देता हूं

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00:21:40:09 अमाउंट मत बताना 10 लाख आप रखिए दो लाख वहां दीजिए दो लाख की पर्ची मुझे दे दीजिए आप ज्यादा वहां मत दीजिए तो अगर कुछ क्लश हुआ और उसने कुछ बताया या सेंटर पर थर्ड पर्सन ने किसी दूसरी बहन ने देख लिया वो बात वहां गई तो उसके मुद्दे बनते हैं। अच्छा तो ऐसे केसेस आपके सामने आए क्योंकि आपने बताया मैं भूल गई। हां जी वो मेरे सामने हल एक दो उदाहरण कहीं का एक दो उदाहरण अगर मैं दूं कहीं का काफी सारे मैं हुबली का उदाहरण दूं क्योंकि हुबली से इनका काफी कुछ हुआ है हुबली की एक दर्दनाक घटना है दो बहने समर्पित थी और वहां पे ये बड़े ईमानदारी से सेवाएं कर रही थी बहुत ईमानदार बहने और वो पाई पाई घी का डब्बा भी अगर किसी ने नाम दिया तो वो वहां पर लाके देती थी। ये हुबली का उदाहरण भी मैं इसलिए दे रही हूं क्योंकि हुबली के नाम पे ये लोग कभी कोई क्लेम भी नहीं करते पाए। कभी कुछ बोल भी नहीं पाएंगे। उनको आज भी इन्होंने दुख दे रखा है। तो वो छोटे-छोटे घी के डब्बे भी ले आती थी। उनकी भावना थी। वो कुछ नहीं रखती थी और वो बहुत ऐशो आराम वाली बहनें भी नहीं है। उनके जो घर है वो कड़ियों

00:22:55:13 के हैं। वो टपकते हुए घरों में रह रही है। ऐसी बहनें हैं और फिर भी फिर भी वो करोड़ों लोगों करोड़पति लोगों का पैसा इधर लाके दे रही है। इतनी ईमानदार सच्ची बहने तो क्या हुआ अचानक से मैं माउंट आबू में थी तो मेरे से मिलने के लिए कुछ बहनें बाहर आफत मचा रही थी बुरी तरह से मेरा अब तक न्याय सिस्टम ऐसा फैल चुका था कि अगर उसे बात पता चल जाएगी तो न्याय होगा मतलब अभी तक ये शोर मच चुका था जितना काम मैं कर चुकी थी तो मुझे पता चला कि बाहर कुछ जिसको कहते हैं ना कि लोगों आंदोलन जैसा कर रखा है और बाहर के मेन गेट पे माउंट आबू के मेन गेट पर वो बैठे हुए हैं। वो क्या चाहते हैं? सबसे पूछा क्योंकि मैं तो दिल्ली में थी। मैं ऑलरेडी सेंटर चला दी थी। मैं आ चुकी थी माउंट आबू से। तो उन्होंने कहा कि ये नीलिमा बहन से मिलना चाहते हैं। तो मुझे फोन आया निर्वेयर भाई का निर्वेयर सेक्रेटरी जनरल थे यहां पे। तो वो सब कुछ थे सर्वे सर्वा ब्रह्मा कुमारी तो उन्होंने कहा मतलब वो बोलते हैं ऐसा था। नीलू बहन ओम शांति हां जी ओम शांति आप जल्दी से अभी की एक घंटे

00:24:10:14 की फ्लाइट लेके इधर पहुंचो तो फ्लाइट का पैसा भी यही लोग देते थे सही बात है मैंने कभी कोई खर्च नहीं किया मैं पढ़ी लिखी लड़की थी मुझे पता था मुझे क्यों खर्च करना है मुझे खर्च नहीं करना है तुम्हें मेरी जरूरत है तुम बुलाओगे तो वो टिकट करा के देते थे मुझे बुलाते थे अब मैं वहां जाके देख रही हूं कि वो बहने तो बहुत पुरानी है उनके सामने तो शायद मेरी उम्र भी बहुत छोटी है। तो मैंने उनसे पूछा कि मेरे को क्यों बुलाया गया? कहा कि बाहर बहुत सारे लोग गेट पर पड़े हुए हैं। लेटे हुए हैं तीन चार दिन से और वो जिद कर रहे हैं कि नीलमा बहन से हमें मिलना है। सिर्फ नीलमा बहन से मिलना है। आपका क्या है ऐसा कि आपसे मिलना है तो एक बार बात सुन लो। मैं यही सब देख के माउंट आबू से आई थी और मैंने इन्हें कह दिया था मुझे कहीं सेंटर दे दो प्लीज। मैं हाथ जोड़ती हूं। मैं एक छोटा सा सेंटर चलाऊंगी। आपके यहां आऊंगी जाऊंगी। दूसरों की तरह मैं यहां नहीं रहूंगी। तो अब सेंटर से बुलाना शुरू हो गया था मुझे। यह 2011 की बात है। 2011 में इन्होंने मुझे सेंटर से बुलाना शुरू कर दिया और ये मेरी या तो कहेंगे आप सूझ समझ या फिर वो बेवकूफी मानूंगी आज तो मैं कि भाई मैंने बेवकूफी की इनके बीच में घुस के। तो मैंने उन्हें सुना। सुनने के बाद एक बात बताइए

00:25:25:27 आप। आप जब कोई घटना सुनते हैं और आप पढ़े लिखे हैं तो आपको यह तो अंदाजा होता है कि गलत सही का कम से कम पता तो लगा लूं कि गलत सही है क्या? एक तरफ सुनकर के तो मैंने मंथरा पढ़ी है। मैंने कैकई का हाल देखा है रामायण में। मैं सनातन धर्म से हूं। जो गीता पढ़ता है उसे क्या नहीं आता? आप मुझे बताइए। क्या नहीं वो सीख सकता है? जो रामायण का अध्ययन कर रहा है उसे सारे घर की गस्ती का पता है। लेकिन अगर अध्ययन कर रहा है बशर्त उसने अध्ययन किया है। एक अच्छी गस्ती क्या होती है और एक अच्छी गृहस्ती को टूटने के आधार क्या होते हैं? तो मैंने मंथ को सुना। मैंने कैकई की चीजें देखी कि कैकई ने कैसे खो दिया सब कुछ? वो कैकई जिसने राजा दशरथ की जान बचाते हुए ये कह दिया था मेरे पास तो सब कुछ है। मैं कैकई अकेला नहीं हूं। क्या दोगे तुम मुझे जान बचाने के उसमें? तुम तो एक छोटे से राजा हो। तुम मुझे क्या दोगे? इतनी परिपूर्ण कैकई मंथरा के दो शब्दों से इतनी खाली हो गई कि उसे अपने बेटे के लिए राज्य मांगना पड़ा राजा से। इतनी खाली इतनी भिखारी बना दिया उस मंथरा ने। तो मुझे पता था कि कान भरने वाला जो होता है वो तो मंथरा होता है। पर जो सुनता है वो खुद राजा से भिखारी हो सकता है। तो मैं सुनती

00:26:41:03 नहीं थी गलत बात। तो मैंने उन बहनों को कहा कि आप वेट करो। मैं कुछ करती हूं। तो मैंने बड़ों से कहा इनकी बात ऐसे ऐसे है लेकिन यह जो बात ये कह रहे हैं उनकी उनका झगड़ा बेसिकली यह था कि वो बहनें बहुत सेवा कर रही थी लेकिन जॉन इंचार्ज जो था वो माउंट आबू वालों से मिला हुआ था ये लोग एक जॉन इंचार्ज रखते हैं। आप समझिए के मान लीजिए बहुत जलेबी जैसा है। आप समझ लीजिए इस चीज को। मान लीजिए एक स्टेट में 30 सेंटर है तो वह 30 सेंटर की बहनों को भी यह सच नहीं मानते। उस 30 सेंटर की बहनों के ऊपर एक जोन इंचार्ज फिट करते हैं लोग। जैसे दिल्ली में आशा और मोहन है। जैसे बेंगलुरु में कोई लक्ष्मी है। मैसूर में रहती है। कुलदीप है। और जैसे यहां पर माउंट आबू में दादी रतन मोहिनी है। अजमुनी है। अलग-अलग राज्यों में एक हेड है इनका। पहले वो हेड सुनेगा। बाद में ये सेंटर की बहने उनसे डायरेक्ट मिलेंग। तो वो जो जॉन इंचार्ज था उस व्यक्ति ने उनके साथ बड़ा गड़बड़ किया। वो माउंट आबू कहने लगा इनका सेंटर बंद कर दो क्योंकि वो उसको हिस्सा नहीं देती थी वो डायरेक्ट माउंट आबू दे थी वो कट नहीं देती थी उसका बीच

00:27:56:04 में जैसा नहीं जैसा नहीं एक कट होता है जॉन इंचार्ज को पहले खुश करो फिर उधर भेजो वो उसको कट नहीं पहुंचाती थी जैसा कि दवाइयों में होता है बेसिकली अब तो मैंने देखा कि अगर आप दवाइयां दो दवाइयों में मतलब कनेक्टेड हो अगर हॉस्पिटल से मेडिकल है तो वहां टेस्ट मतलब समर्पित समर्पित व्यक्ति को भी घूस देनी पड़ेगी किसी को। हां जी। तो वो डायरेक्ट जुड़ गई थी। तो यह उनका झगड़ा था। तो मैंने उनको सारी बात बताई। मैंने कहा देखिए गलती उसकी है। वो व्यक्ति ऐसा इन प्रश्न कर रहा है। इनकी कोई गलती नहीं है। ये सब बनी बनाई कहानी है। आप कैसे कह सकती हो? तो मैंने कहा एक सर्वे करा लीजिए। अपने यहां से एक सर्वे टीम भेजिए और उसमें मेरे भी दो व्यक्ति होंगे क्योंकि मेरा मुझे मेरी नेचर जानते हैं लोग। जो मेरे साथ जुड़ेंगे वो मेरे से सच बोलेंगे। वो दो लोग मेरे भी होंगे और वहां जाएंगे और पूछेंगे बात करेंगे। क्या बात है? तो गए और सच ये निकला कि वो बहने सही थी। ठीक थी। बाद में उस भाई ने उनके पिताजी ने

00:29:00:16 उनको कुछ कह दिया था। उस भाई ने उनके पिताजी की हत्या तक की।

⬜ Not used yet · 00:29:06:00 – 00:29:27:00 (0:21)

00:29:06:00 बहुत केसेस आप सोचो। बहुत समझ रहा हूं। [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 29:27 · 08 Aug 2026

ब्रह्माकुमारीज़ के बंद दरवाज़ों के पीछे क्या होता है? 20 साल का अनुभव और इनसाइड स्टोरी | Part 1

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B · Live ब्रह्माकुमारी क्यों बनी क्रांतिकारी?
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