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00:00:01:15 केवल ब्रह्म द्वैत कल्पना का निरसन मुक्ति के लक्षण साधन का निश्चय श्रवण महिमा श्रवण का निरूपण देहांत निरूपण तो ये सारी चीजें जो हमारी चल रही हैं ये अलंकार समाजी जो बात किया करते हैं हमने बहुत सारे क्रांतिकारी खड़े किए हैं। अरे भैया संसार में ईश्वर का अस्तित्व हमने सिद्ध किया है। तो संसार में जितनी भी मानवता है उसके मूल में अगर जाओगे तो शंकर का सिद्धांत मिलेगा। उस सिद्धांत के बिना उस मानवता को माता को माता मानने वाले नियमों को आप स्थापित ही नहीं कर पाओगे संसार में। और यदि सतही स्तर की बात कर ले मूर्ति पूजक होने के नाते पुराण को मानने वाले होने के नाते की बात कर ले तो हमने ऐसे लोगों को खड़ा किया है और कहीं ज्यादा वृहद संख्या में जिनको आप भी प्रणम्य मानते हैं शिवाजी छत्रपति शिवाजी को कौन नहीं मानता प्रणम क्या ये लोग नहीं मानते आज एक हर्ष

00:01:16:16 मैंने थोड़ा सा विनोद की बात मैंने देखी आर्य समाज का जो सम्मेलन चल रहा है दिल्ली में उसमें कोई आए हुए थे ऐसे जो नाम चिन्ह व्यक्ति थे वो आए हुए थे उनसे कोई इंटरव्यू हो रहा था तो उनसे जब पूछा गया माइक लेकर के कि भाई अ आप क्या कहना चाहते हैं कार्यक्रम के बारे में तो वहां पर जो ऐसे लोग थे जो मुख्य अतिथि के रूप में वक्ता के रूप में आए थे। जिनका डायरेक्ट मतलब कोई कनेक्शन नहीं पर वो वहां एक अतिथि के रूप में आए। तो उनका सारा जो वक्तव्य था आर्य समाज को लेकर के वह इस बारे में था कि आर्य समाज बहुत बढ़िया क्रांतिकारी है। इस बारे में नहीं था कि आर्य समाज के जो दर्शन इत्यादि के सिद्धांत है वो बहुत बढ़िया है या उन्होंने जो दर्शन का सिद्धांत दिया है वो या अन्य जो उन्होंने धर्म और ब्रह्म की परिभाषाएं दी है उस संबंध में गढ़ता या तात्विक विवेचना बहुत महान है। यह सब कोई नहीं बात करता है। वहां पर क्या बात होती है कि वो भैया देश के लिए लड़ने मरने वाले हैं। बहुत अच्छे हैं और इस तरीके की उनके संबंध में बातें

00:02:32:04 तो अच्छी बात है हमारा उन हमारे और उनके बीच इन बातों को लेकर के कोई मतभेद थोड़ी ना है। मतभेद है कि जब आप गढ़ में जब आप मूल में ही व्यक्ति को खोखला कर दोगे तो ऊपर से उसको कितना भी ड्रेस अप कर दो। मगर क्योंकि वह अंदर से खोखला है। वह ड्रेसअप करने के बाद भी व्यक्ति वह आपके काम नहीं आ पाएगा। अंततवा तो मूल में भी काम करने की आवश्यकता है ना ड्रेसअप के साथसाथ। आपने तो कह दिया कि मूर्ति पूजा व्यर्थ है। तो जब व्यक्ति की मूर्ति पूजा के प्रति निष्ठा ही तुम भंग कर दोगे तो कितना भी उसको ड्रेस अप करके बना दो कि हमने देखो योद्धा खड़ा किया है। सनातन धर्म को बचाने के लिए हिंदू धर्म को बचाने के लिए। उस योद्धा के अंदर आत्मा से निकलने वाली आवाज नहीं होगी कि मुझे मूर्ति की रक्षा करनी है। ठीक है? यूं ही कर दे अंतरात्मा से उसके नहीं आएगा कि मुझे मूर्ति की रक्षा करनी है। और वो भावना उसके अंदर आपने भरी है। तो उन पर भी बात होगी ना। अब रामपाल वाले आजकल कह रहे हैं कि हमने पाइप दिए हैं। पाइप दिए हैं। पाइप दिए हैं। अनाकोंडा के बराबर लंबे पाइप यही तो कह रहे हैं फराने हजार फुट यह फट यह फुट तो अनाकोंडा के बराबर लंबाई में पाइप दिए होंगे चार पांच अनाकोंडा

00:03:47:20 को मिलाकर के तो अनाकोंडा के बराबर पाइप दिए तो उस बात को लेकर के कोई थोड़ी ना विवाद है। विवाद इस बात को लेकर है कि तुमने हमारे भगवान के बारे में उल्टा सीधा क्यों बोला? विवाद इस बात को लेकर है कि तुम जो परंपरा से प्राप्त ज्ञान है वह अपने उनका उनका अपने मन मुताबिक अर्थ क्यों करते हो? इन बातों को लेकर विवाद है। अब किसी व्यक्ति ने मंदिर में चंदा दे दिया। भूखों को खाना खिला दिया या और कोई कार्य अच्छा कर दिया और बाहर जाकर के किसी छोटी बच्ची के साथ कोई दुष्कर्म कर दिया। तो इसलिए क्योंकि उसने मंदिर में चंदा दिया है या उसने भूखों को भोजन कराया है। इसलिए उसके उस अमानवीय व्यवहार के लिए उसको सजा ना दी जाए। ये कहां का न्याय है? और ये अगर न्याय है तो तुम्हारा न्याय होगा। यह हमारा सनातन सिद्धांत नहीं है। ठीक है? कई अंशों में रावण भी अच्छा था। कई अंशों में दुर्योधन भी अच्छा था। हां। नहीं था क्या अच्छा? कई अंशों में अच्छा था। परंतु उस अच्छे होने के कारण क्या उसने जो पाप किया उसको भूल जाए? ये कौन सी बात है भाई? तो तुमने अगर क्रांतिकारी खड़े

00:05:02:24 भी किए हैं। यद्यपि बात क्या हो रही है? क्रांतिकारी हमने तुमसे कहीं ज्यादा और बहुत बड़ी वृहत संख्या में खड़े किए हैं। और उसके बावजूद एक जो मूल तात्विक विषय है यदि कोई व्यक्ति आज मानवता को मानवता को मान रहा है माता को माता की दृष्टि से देख रहा है तो उसके मूल में सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष है और वो मिलता है अद्वैत से शंकर सिद्धांत से उसको नकार के आप अपनी बिल्डिंग नहीं खड़ी कर पाओगे। उसको पहले नीचे बिल्डिंग जमा लो। उसके बाद उसके अंदर हमने एक कमरा बनाया है। इस कमरे के अंदर हमारे कोई नहीं आ सकता। ये आप कर सकते हो। परंतु आप ये कहो कि हम जो है उस बड़ी बिल्डिंग के बाहर हमने फ्लैट ले लिया है। तो बाहर जैसे ही जाओगे तो तुम्हारा वो जो कमरा है सब नष्ट भ्रष्ट हो जाएगा। आपको उस अपार्टमेंट के अंदर अपना एक फ्लैट लेना है तो ले लो। ठीक है? खूब रस रसगद भक्ति कर लो। खूब भेद कर लो कि हम तो केवल कृष्ण को मानेंगे। राम को भी नहीं मानेंगे। उसके अंदर रहते हुए खूब कर लो ये सब बात कि हमारे कमरे के अंदर तो केवल कृष्ण मगर फिर आप जो है विरोध करने मत आओ। लोहा मत लो फिर

00:06:18:26 है ना पूरे पूरे अपार्टमेंट्स हम तो यह बात है कि हमने हरिहर बुक्का शिवाजी और ऐसे सभी क्रांतिकारी देशभक्त हमने खड़े किए हैं जो आर्य समाजी नहीं थे और हिंदू थे संख्या लगा लो कितनी है वो सब हमने खड़े किए परंपरा प्राप्त आचार्यों ने खड़े किए मूर्ति पूजक थे जो आर्य समाज नहीं था। मूर्ति पूजक था। वर्ण व्यवस्था को मानने वाला था। मंगल पांडे नहीं थे क्या? वर्ण व्यवस्था को मानने वाले क्रांति की शुरुआत किसने की? किसने की क्रांति की शुरुआत? मंगल पांडे ने की। नहीं थे क्या मूर्ति को मानने वाले? वर्ण व्यवस्था को मानने वाले थे। ठीक है। ये सब

00:07:08:24 मुझे फिर वही कहा जाता है कि फिल्मों का उदाहरण देता है। एक मैंने फिल्म देखी थी। कॉमेडी मूवी थी। उसमें क्या होता है कि कुछ करतूत कर रहे हैं। नवयुवक हैं वो मिलकर के कुछ करतूत कर रहे हैं। ऐसे में जो घर के अभिभावक हैं मामा इत्यादि वो आने लगते हैं। तो नवयुवक जो करतूत कर रहे थे वो अक्षय कुमार था उसमें। तो यह लोग जो मिलकर के करतूत कर रहे थे तो मामा आने लगते तो डर जाते हैं मामा आ रहे हैं मामा आ रहे हैं तो मामा जब आते हैं तो मामा को मामा बनाने के लिए अरे मामा आ गए अरे मामा आ गए अरे मामा आ गए इतना चिल्लाने लगते हैं मामा आ गए मामा आ गए मामा परेशान होकर पूछता है क्या हो गया भाई इतना क्यों चिल्ला रहे हो अरे मामा आ गए इतना चिल्लाओ पहले से कि जो मूल विषयों पर ध्यान देना व्यक्ति भूल ही जाए

00:08:09:15 है ना? तो इतना जो है चिल्लाने लगते हैं कि मामा आ गए, मामा आ गए। मूल विषयों पर व्यक्ति ध्यान देना भूल ही जाए। वाह मामा आ गए साहब। मामा आ गए। [हंसी] तो इसी तरीके से हट क्रांतिकारी हट क्रांतिकारी। अरे भैया है क्रांतिकारी तो ईश्वर सर्वशक्तिमान हो गया क्या? मोक्ष तुम्हारा परम स्वतंत्र हो गया क्या? और मैं वहां नाटक क्या देख रहा हूं? वहां पर आर्य समाज की ओर से आर्य समाज के पक्षधर के रूप में खड़ा होकर के कौन बात कर रहा है? जो ये आचार्य प्रशांत जी हैं ये वाले मुरैना रहते हैं जो शायद एमपी में जिन्होंने खुद ये कहा है कि मोक्ष को लेकर के मैं दयानंद सरस्वती जी से संतुष्ट नहीं हूं। लो हो गया सिद्धांत ये सिद्धांत है जो खुद को प्रामाणिक आर्य समाजी कह रहा है गुरुकुल चला रहा है वो कह रहा है कि मैं अपने मोक्ष से संतुष्ट नहीं हूं और धर्म का परवसान किस में है महाभारत में लिखा है धर्म का पर्यावसान है मोक्ष में जहां मोक्ष नहीं है वहां धर्म कैसे सिद्ध कर दे रहे हो तुम काहे

00:09:24:21 का धर्म जब तुम मोक्ष के लिए किसी और के पास जा रहे हो तो तुम्हारा धर्म कहां बचा भाई? और फिर जब तुम मोक्ष से तुम संतुष्ट नहीं हो, तुम्हारा धर्म सिद्ध नहीं हो रहा तो तुम वहां क्या पक्ष लेने के लिए खड़े हुए हो आर्य समाज का? क्या ये नाटक चल रहा है? और बस मूल विषयों पर ध्यान ना दें। और कोई आया तो वाह क्रांतिकारी मामा आ गए। मामा आ गए। मामा आ गए। मामा आ गए। ये चिल्लाते रहो। मूल विषयों पे बात ही नहीं करनी। मामा आ गए सब। मामा आ गए वो करतूत पे या वो जो जो गुड उसमें छुपी हुई चीजें हैं उस पे मामा का ध्यान ना जाए तो पहले इतना चलो मामा आ गए [हंसी] खैर चलिए विनोद हो गया मूल विषय पे वापस आते हैं

00:10:24:26 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 10:26 · 22 Nov 2025

मोक्ष के बिना कौन से धर्म का पालन करता है आर्य समाज?

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B · Video क्या ज्ञान और भक्ति एक दूसरे के शत्रु हैं? Dasbodh Lecture #2
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