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00:00:02:00 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे और भगवान का भजन अवश्य कर रहे होंगे। आज की जो लाइव है हमारी उसका शीर्षक तो आपने देख ही लिया है। जेल कट्टू बाबा किस प्रकार से चर्चा से फरार हैं और उन्होंने अपने चेलों के बारे में क्या कहा है जो इंटरनेट पर विष्ठा अपने मुख से निकाल रहे हैं प्रकार भांति भांति की विष्ठा सबसे पहले तो यह समझ ले कि जेल कट्टू बाबा क्यों कह रहा हूं मैं आप देखिए यह मेरे पास एक बुक है भाई ऑपरेटर जी से कहूंगा कि आप जो है गरिमा गीता की अवश्य निकाल लें उसी से एक दो पेजेस मुझे दिखाने हैं तो वो जरूर निकाल ये ये बाबा है जेल कट्टू देखिए आपको शायद दिख रहा हो बुक में है ना इसने ड्रेस भी जेल वाली पहनी हुई है। इससे स्पष्ट हो रहा है जेलकट्टू बाबा है। वहीं से जो है इसकी प्रवचन वाली जो फोटो है वो दिखाई दे रही है। तो इसलिए जेल कट्टू कहना इसके लिए कोई वो अतिशयोक्ति नहीं होगा और

00:01:17:08 हमने हाई कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका लगाई हुई है और उसमें जो प्रारंभिक स्तर पर जो चीजें प्राप्त हुई है कोर्ट की ओर से तो उसमें हमारे पक्ष में ही चीजें गई हैं। लखनऊ में इसका सेंटर बंद है। भाग गए यहां से। हां, यहां से 100 200 किलोमीटर दूर यह लोग एक्टिव होंगे। पर लखनऊ में यह लोग निष्क्रिय हो चुके हैं। तो जो प्रारंभिक स्तर पर हमारी विजय हो चुकी है। अब धीरे-धीरे कोर्ट का प्रोसेस होता है। बहुत सारे मुकदमे होते हैं और लड़ने वाला जो हमारा पक्ष है उसके बारे में बात करूंगा मैं। मैं लिख लेता हूं इस बात को। इस बारे में भी बात करनी है। [गला साफ़ करने की आवाज़]

00:02:03:25 तो कई सारी चीजें जिनके कारण कोर्ट की प्रोसेसिंग होती है वो लंबी होती है। पर प्रारंभिक जो रुझान है वो हमारे पक्ष में आए हैं। अब रामपाल फरार कैसे है? रामपाल फरार इस प्रकार से है कि हमने जो याचिका लगाई है हाई कोर्ट में उसमें सीधे-सीधे रामपाल की जितनी भी तथाकथित ये जो किताबें हैं उसकी जितनी भी सामग्री है उन सबको चैलेंज किया गया है और रजिस्टर्ड केस मतलब लिखित रूप से ऐसे नहीं केवल मुंह की बातों से चैलेंज किया गया है। तो भाई जो व्यक्ति सच्चा होता है उसकी चीजों को कोर्ट में कोई ले जा रहा है उच्च न्यायालय में ले जा रहा है और वो सच्चा व्यक्ति है जाहिर सी बात है कि उस पर व्यर्थ ही आरोप लग रहे हैं ये उसकी उसके अनुसार तो जो व्यक्ति सच्चा होता है वह अपीयर होता है और आकर के कहता है भाई ये आप गलत कर रहे हो मैं तो खरा सोना हूं बताइए क्या करना है ना तो ना तो वो कोर्ट में अभी तक अपीयर हुआ है उसकी ओर से कोई या कोई उसकी ओर से काउंटर ही आ गया हो। उस जब रामपाल जेल में था तो उसके जेलर

00:03:18:28 तक को बुलवा लिया गया था। जेलर की ओर से काउंटर नहीं आया है। यह आया कि भाई मेरा पक्ष ये है। मतलब मुझे इसलिए मेरा इसमें कोई दोष नहीं है। इस प्रकार से जेलर की ओर से वहां पर पक्षप्र ऐसा नहीं है कि जेलर ने कह दिया हो कि ये सब चीजें जो रामपाल ने लिखी है वो बिल्कुल सही है। या जेलर ने कोई पक्ष ले लिया। यानी कि रामपाल गैंग की ओर से उस केस में अभी तक एक फूटी चिरैया आकर के नहीं बैठी कि भैया किसी ने उसका पक्ष ले लिया हो कि उन तथाकथित बातों का जिन बातों के ऊपर जिन बातों का प्रचार प्रसार बड़े ही जोर जोर शोर से किया जाता है। अच्छा लड़ाई मुख्य क्या है? लड़ाई है भगवान का अपमान। लड़ाई मुख्य नहीं है कि कबीर भगवान क्यों कह रहे हो? कबीर को भगवान आप कहो। कोई दिक्कत नहीं है। आप अपने कबीर सागर के आधार पर कहो। यह झूठ मत फैलाओ कि वेदों के आधार पर कबीर भगवान है जो आज तक तुम दिखा नहीं पाए। वैदिक वांगमय के अनुसार जो कबीर है वह भगवान नहीं है। वो आज तक तुम दिखा नहीं पाए। तुम आज तक वो कबीर कबीर कबीर को ही कबीर करते रहे। वहां कबीर कबीर जो शब्द आया है वो आया है। सर्वज्ञता का दतक है वो। तो ये सब बातें तुम कर नहीं पाए। तो लड़ाई मुख्य ये है। ऐसी नहीं है कि आप कबीर की पूजा नहीं कर सकते। कबीर

00:04:34:07 की पूजा जिसको करनी है करो। किसी को मुर्दे की पूजा करनी है वह करे जाकर के। किसी को स्वान की पूजा करनी है वह कर सकता है। शान की पूजा किसी को किसी की भी पूजा करनी है। उसमें कोई रोक-टोक नहीं है। वेद का नाम लेकर के आप अपनी चीजों को पुष्ट करने की कोशिश कर रहे हो। एक तो यह लड़ाई साथ ही साथ जो हमारी मान्यताएं हैं उनको आप गाली दे रहे हो। उनके बारे में अभद्रता बोल रहे हो। माता दुर्गा के बारे में अभद्र बातें बोल रहे हो। अब माता दुर्गा की बात है तो माता दुर्गा के बारे में वहां लिखा हुआ है कि उनके साथ जो है काल नामक जो इन्होंने जो एंटिटी बनाई है एक तथाकथित कपोल कल्पित जो कि राक्षस के रूप में इन्होंने प्रस्तुत करते हैं। समय-समय पर उसको भगवान भी कहते हैं। वो सब बातें हमने कई बार बता चुके हैं कि काल किस तरह से होता है। तो अब आपने क्या किया कि दुर्गा माता से जोड़ते हुए काल जो संज्ञा है वह दी एक नेगेटिव कैरेक्टर को फिर उस नेगेटिव कैरेक्टर से जोड़ा दुर्गा माता को और वो भी वहां पर दुराचार दुष्कर्म दिखाया दुर्गा माता के साथ इतनी बद्दी बात लिख दी कि भैया वहां पर जो है इंग्लिश में वो टाइटल अभी मैं बताऊंगा वो टाइटल आपकी किताबों में भी कहा है रुक जाइए

00:05:49:18 तो [गला साफ़ करने की आवाज़] यह जो मुख्य लड़ाई है एक अपमान और एक वेद की आड़ वेद की आड़ लेकर के करोगे तो वैचारिक एक वो चलेगा। वेद की आड़ लेकर के तुम अपनी चीजों को पुष्ट करना चाहोगे और उसमें कहीं पर भी अभद्रता नहीं होगी तो फिर एक वैचारिक युद्ध चलेगा। शोधन की दृष्टि से भाई क्या वेद के आधार पर कैसे बोल रहे हो? जो हमारे धर्म ग्रंथ है उनके आधार पर कैसे बोल रहे हो? पर जब वहां पर यह अपमान आ गया और वह भी इस तरीके से चैनल चैनल्स बना चैनल्स पर बोल रहे हो उल्टा सीधा कुछ मालूम है नहीं अकल दो कौड़ी की है वो दो कौड़ी की है यह भी लिखित रूप से सिद्ध करूंगा है ना अकल तुम लोगों की है दो कौड़ी की फिर आप अपमान कर रहे हो तो लड़ाई मुख्य यह है अब मैंने पूछा मैंने जब पूछा अनकेत जी मैं लेता हूं आपको थोड़ी देर में मैंने जब पूछा कि भाई जो तुमने क्लेम किए हैं कि दुर्गा माता के साथ ऐसा ऐसासा हुआ है। आप वो क्लेम हमारे शास्त्रों से दे दो। मजाल है इतने दिन हो गए केस किए हुए। आज तक इनके यहां का कोई माई का लाल ऐसा जना नहीं। किसी माता ने अपने गर्भ से ऐसा पूत नहीं पूत को जन्म नहीं दिया। जो आकर

00:07:04:19 के यह बता दे कि दुर्गा माता के लिए जो तुमने कहानी गढ़ी है वह हमारे शास्त्रों में कहां लिखी है। अच्छा अब तुमने क्या किया कि हां यह भी तो लिखा है वो भी तो लिखा है पर जो लाइन तुमने लिखी वो नहीं लिखी ना। उससे मिलती जुलती लाइनें दूसरी दूसरी कहानियां या तुम अपने हिसाब से जो भी जिस बात का भी अर्थ निकालना चाहो वो सब लिखा है। तो ये लड़ाई समझ लो। लड़ाई किस बात की है? यदि तुम केवल वेद की आड़ लेकर के अपना प्रपंच कर रहे होते तो यह जो व्यवहारिक युद्ध दिखाई दे रहा है तुम्हारे और मेरे बीच वो युद्ध ना दिखता वो फिर वैचारिक युद्ध तक सीमित रहता है ना पर व्यवहारिक युद्ध कब बना जब तुमने साथ में डंके की चोट पर ऑनलाइन इंटरनेट की दुनिया में अपमान करना शुरू किया तो वह व्यवहारिक युद्ध का कारण और वह होता रहेगा अपमान जब तक बंद नहीं होगा तब तक कोई ना कोई तुम लोगों को ऐसे ही खदेड़ता रहेगा। ऐसे ही भगाए जाओगे। स्वान की भांति कुत्तों की भांति जगह-जगह से खदेड़े जाओगे। जहांजहां पर अपने धर्म को मानने वाला अपने धर्म से प्यार करने वाला जहांजहां पर कोई एक पुरुष जन्म ले लेगा। है ना? वहां वहां से ऐसे ही कुत्तों की भांति भगाए जाओ। जैसे लखनऊ

00:08:20:00 से भगाए गए। जैसे लखनऊ से ताला लगा के गायब होना ना कि यहां कुछ नहीं चलता है। यहां सतलोक आश्रम का कोई सेंटर नहीं है। है ना? तो वैसे ही भगाया जाओ। देखा था ना क्या हुआ था? यहां हम नहीं जानते किसने बोर्ड लगाया। हम बोर्ड वाले को भी नहीं जानते। यह तक कहने की नौबत आ गई थी तुमको। तो जिस तरीके से यहां से खदेड़े गए हो। अभी तो एक शिवश नारायण द्विवेदी है। ऐसे ही जगह-जगह पर जब और लोग खड़े हो जाएंगे तो तुम्हारा क्या होगा? और हो रहा है। जगह-जगह पर ऐसे खदेड़े जा रहे हो। बुक बेच रहे हो। बुक बुक बेचते बेचते भगा दिया गया तुम्हें। यह क्या है? अच्छा तुम कहते हो हमसे तुम बराबरी करते हो। हमसे बराबरी भी करते हो कि भाई तुम्हारी बुक्स में भी तो यह लिखा है। तो तुम करो ना कहीं पर ऐसे प्रतिकार जैसे हमने किया है। एफआईआर कराओ। कोई सेंटर मठ मंदिर बंद करवा दो ताला लगवा दो। यह औकात है। इस औकात का अंतर समझो। तुम केवल इंटरनेट की दुनिया पे हो। और वही तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत है क्योंकि हम सब लोग धरातल पर हैं। इंटरनेट को उतना भाव नहीं देते। तो तुम वहां पर अपना ड्रामा करके यह अपने आप को बताने में बताने का प्रयास करते रहते हो कि

00:09:35:01 हम कितने सक्सेस हैं। अरे भाई तुम्हारा एक चलता हुआ केंद्र छाती ठोक कर डंके की चोट पर बंद करा दिया। तुम करा दो जाकर के। एक मंदिर बंद करा दो जाओ। जहां ब्रह्मा विष्णु महेश की पूजा हो रही हो। यही तो है। ब्रह्मा विष्णु विष्णु महेश की पूजा तुम्हारे हिसाब से गलत है। उनको भगवान मानना गलत है। पूर्ण भगवान मानना गलत है। चलो इसमें भी तुम निकालते जाओगे। नहीं नहीं पूजा तो हम भी करते दिखाने के लिए। तो एक मंदिर जाकर के बंद करा दो। उसका वीडियो बनाओ। ये देखो हमने मंदिर मंदिर बंद करा दिया। और उसमें यह बात होनी चाहिए। इसी आधार पर बंद कराया। तुम्हारा देखो वहां हलवानी में सेंटर बंद करवा दिया था। खुल गया थोड़े दिन बाद। ठीक है? बंद कराया ना। तुम कराओ ना बंद जाकर के कराया तुमने बंद कहां तुम मतलब कहां राजा भोज कहां गंगू तेली फिर करते हो बराबरी जाओ कोर्ट केस कर दो श्री संप्रदाय पे शंकराचार्य संप्रदाय पे या जितने तुम्हारे हिसाब से सब जो गलत ज्ञान दे रहे हैं वेदों का सही अर्थ नहीं बता रहे कोर्ट केस कर दो ना रजिस्टर्ड लड़ाई लड़ो ना भाई क्यों नहीं लड़ते हो पता है? क्योंकि तुम्हें मालूम

00:10:50:07 है कि तुम्हारे पास विष्ठा के अलावा उगलने के लिए और कुछ है नहीं। कोर्ट में क्या क्या उग सच्चाई तो है नहीं। विष्ठा है। केवल एकतरफा गेम खेल सकते हो। कार्बो टारगेट कैमरा ऑन किया और चालू हो जाओ। इतनी तथा तो है नहीं कि अपनी चीजों को कोर्ट में जाकर के कहीं पर खुले मैदान में स्वतंत्र रूप से स्थापित कर पाओ। तो अब जानते हो शंकराचार्य जैसे वरिष्ठ आचार्य गण तुम लोगों के कहने पर कहां आएंगे भैया तुम लोग तोता चोर स्मैक चोर एक वो बंदी छोड़ छूट करके आया है इस तरीके की क्वालिटी वाले निम्न स्तर के लोग हो बबिता कांड ये कांड ये पकड़ा गया वो स्विमिंग पूल ऐसे लोगों से बात करने के लिए शंकराचार्य आएंगे तुम लोग ये जानते हो तो अपना धीमे-धीमे बोल देते हो भैया शंकराचार्य आ जाए यह आ जाए वो आ भाई किसी गली के कुत्ते से कोई किसी गली के कुत्ते से भी कोई अगर उसने ललकार दे दी तो वह भिड़ने चला जाएगा क्या? तो स्तर भी तो देखना पड़ता है कि कौन है ललकार करने वाला? अब तुम लोग तो ना उसको संस्कृत आती है जो ये बोल रहा है। ना उस व्यक्ति को का ख ग अंगा आता है ना दर्शन का ज्ञान है ना किसी

00:12:05:10 चीज का ज्ञान है। और लगा शंकराचार्य के लिए ताल ठोकने। अच्छा यही हो कि हिंदी में अच्छे से तत्व का विश्लेषण आता हो कुछ मर्म आता हो तत्व का वह भी नहीं आता है। तो तुमने जो है यह सोच लिया कि ऐसी बात करो जिससे कि वो जो खुले मैदान की चर्चा है वो हो ही ना पाए और हम जो अपनी जनता को एक तरफा गेम खेल के बेवकूफ बना रहे हैं। बनाते रहेंगे। उस बेवकूफी में बेवकूफ बनता कौन है? कोई पढ़ा लिखा इंटेलेक्चुअल प्रबुद्ध जो वर्ग है। उसका व्यक्ति बहुत कम फंसता है। ज्यादातर पिछड़े परेशान दीन दुखी है ना इस तरह के लोग तुम्हारी बातों में फंसते रहेंगे और तुम अपना नेटवर्क होंगे 10 दिखाओगे एक करोड़ वीडियोग्राफी करके सिनेमेट तुम क्या सोचते हो जो तुम ड्रामा करते हो ये किताब का स्टॉल लगा करके क्या हम लोग नहीं कर सकते समय नहीं ना भाई केवल इंटरनेट पर ही काम नहीं कर रहे ना धरातल पर भी काम कर रहे हैं जाकर के छाती ठोक के तुम्हारा केंद्र बंद करवाया था पुलिस के साथ तुम करा दो ना जाकर के जाओ तुम्हारा वो होता था हर महीने प्रथम रविवार को यहां

00:13:20:12 कार्यक्रम होता था हिंद लखनऊ में बंद हो गया शटर डाउन करवा दो तुम हमारा कार्यक्रम बंद कौन सा कार्यक्रम बंद करवाओगे बताओ एक अदनासा लड़का ना तो वो कोई बहुत बड़ा आचार्य है ना कोई बहुत बड़ा धर्म गुरु है ना उसकी कोई तुम्हारे जैसी फौज फौज है जिसके पास जो है AK-47 जैसे हथियार बरामद हो रहे हो कुछ नहीं है उसने बंद करवा दिया तुम्हारा और तुम तब भी जो है विठा किया करते हो वीडियो बना करके मतलब कहना चाहिए कि तुम लोग उन लोगों में से हो कि तुम्हारे अगर क्या कहते हैं बवासीर भी हो जाएगा ना तब भी तुम कहोगे वाह वाह वाह वाह फूल निकल आया फूल निकल आया बवासीर को तुम फूल कहोगे हो गए मिरेकल मिरेकल है ना वो वाले लोग वाह चमत्कार हो गया कबीर भगवान ने मिरेकल कर दिया फूल निकल आया ठीक है तो उन लोगों में से तो रामपाल फरार कैसे हुआ कि भाई उसको कोर्ट में चुनौती तो दी गई है रजिस्टर्ड के आप अपनी बातों को आकर के

00:14:35:20 आज नहीं तो कल आना तो पड़ेगा ही उसको कोर्ट की मार की बात ही है निराली गूंगा भी गाय कब वाली आना तो पड़ेगा ही है ना तो [गला साफ़ करने की आवाज़] यह तो एक अलग बात रही अब क्या हुआ कि भैया रामपाल ने ये कहा कि फलाने हैं शंकराचार्य हैं ये हैं वो हैं तो रामपाल ने कहा कि कोई भी धर्म गुरु तो रामपाल से पहली बात तो चुनौती मैं दे ही चुका था कि रामपाल इन इन चीजों पर मुझसे जो है चर्चा कर ले दिल्ली में ठीक है तो ना तो वह इस चर्चा में उपस्थित हो रहा है जेल कट्टू बाबा क्या कहेंगे वो ड्रेस पहने हुए जेल की दुकान उसको क्या कहेंगे जमानत पे है ना बाहर कैसे आया जमानत पे जमानत के लिए गिड़गिड़ाया रोया अपनी गलतियों की माफी मांगी तब आया वो बाहर और अभी कोई वो नहीं है कि वो बाहर आ गया तो आए गया कुछ भरोसा नहीं है। हो सकता है दोबारा जेल भी जाना पड़ जाए। तारीख पर तो जा ही रहा होगा। है ना? तो पहली बात तो यह हो गई [गला साफ़ करने की आवाज़]

00:15:51:06 कि रामपाल फरार कैसे है? ना तो वो जो एक न्यायिक हमारी भिड़ंत हो रही है। ना तो वो उसमें उपस्थित हो रहा है और ना ही वह सीधे तौर पर ज्ञान चर्चा के लिए उपस्थित हो पा रहा है। उसको पता हम सब तरीके से पहुंच ही गया। हमने लेटर तक निकाल दिया, निर्गत कर दिया तब भी वह उपस्थित नहीं हो पा रहा है। उसकी हर बात की धज्जियां उड़ाई है हमने। जो भी हमारा चैनल देख लेता है उसको पता लग जाता है कि रामपाल का स्तर क्या है? धार्मिक विषयों हर बात की जितने क्लेम्स उसने किए हैं धर्म को लेकर के उसमें हर बात की उसकी धज्जियां उड़ा दी गई है। तब भी वह सामना नहीं कर रहा है। अब क्या है कि इसके जो फूहड़ चेले हैं वो हमारे लिए वीडियो बनाकर यहां वहां तू गधा है, गधे का चेला है। ये सब विष्ठा कर रहे हैं। विष्ठा का अर्थ भी इनको डिक्शनरी खोलनी पड़ेगी तब समझ में आएगा कि विष्ठा कहते किसे हैं। तो देख लेना खोल करके जो विष्ठा तुम लोग कर रहे हो जगह-जगह यह अंधा गधा है यह है वह है यह सब चीजें बोल रहे हो ना तो यह इसके फुअर चेले अब फुअर चेलों के कुतर्क क्या-क्या है उस पर पहले बात करेंगे अच्छा उससे पहले मैं एक बात बता दूं मध्य प्रदेश में

00:17:06:26 एक जंगल है बांधवगढ़ नेशनल पार्क वो इस मामले में जाना जाता है प्रसिद्ध है कि उसका जो एरिया है ना क्षेत्रफल वह बहुत कम है और कंपैरेटिवली टू एरिया वहां पर जो बाघ की संख्या है वह ज्यादा है। इसलिए बांधवगढ़ नेशनल पार्क में अगर आप बाघ को जंगल में स्वतंत्र रूप से घूमते विचरता हुआ देखना चाहते हैं तो वहां पर ज्यादा संभावना होती है कि आपको बाघ दिख जाएगा। जिस प्रकार से आप बड़े जंगलों में जाएंगे जैसे जिम कॉर्बेट हो गया और या फिर ये नेशनल ये गिर फॉरेस्ट हो गया। आप इनमें जाएंगे तो वहां पर संभावना कम होती है क्योंकि एरिया बहुत बड़ा है और उस अनुपात उस रेशियो के हिसाब से बाघों की संख्या बहुत कम है मगर बांधवगढ़ में उल्टा है। एरिया के हिसाब से रेशियो कंपैरेटिवली जो दूसरे जंगल हैं देश में उनके हिसाब से वहां की जो रेश्यो है ज्यादा है। तो वहां पर बाघ दिखना आसान होता है। तो एक बार मैं वहां पर गया था भ्रमण के लिए। तो जब मैं वहां गया था तो वहां पर जो गाइड होता है ना जो आपको जीप में बिठाकर के ले जाता है तो एक गाइड होता है एक ड्राइवर होता है बाकी आप पर्यटक

00:18:22:09 होते हैं तो वहां पर जो गाइड होता है वो मुझे बोला था कि बाघ का सबसे जो आसान शिकार होता है वो होता है सांभर डियर है ना सांभर डियर बाघ का सबसे आसान शिकार होता है क्यों क्योंकि वह पाकिस्तानी क्रिकेटर जो होता है निमामुल हक की तरह रन लेते लेते पीछे देखता उसका रिकॉर्ड है। वो जो पाकिस्तानी क्रिकेटर था उसका रिकॉर्ड है कि वह सबसे ज्यादा बार रन आउट हुआ है। इसी प्रकार से जो सांभर डियर होता है वो भागते भागते पीछे देखता है। मूर्खता करता है। कहने का मतलब मूर्खता अव्वल दर्जे का मूर्ख होता है बाघ के हिसाब से। इसी प्रकार से वैसे तो यूं तो बहुत सारे मोर्चे खुले हुए हैं आहान के द्वारा और सभी मोर्चों पर विजय प्राप्त है। पर रामपाल एंड सनंस या रामपाल गैंग को लेकर के जो मामला है वो वही सांभर डियर और बाघ वाला है। बाघ का सबसे सरल शिकार कौन सा है? सांभर डियर। तो यहां पर जो रामपाल एंड गैंग है रामपाल और उसके फड़ चेले कैमरे के पीछे बैठकर के कुछ भी बात कर ले वस्त विष्ठा कर ले सामने आने पर हवा पतली

00:19:37:20 हो जाएगी जितना ये ततप फतप बोला करते हैं ये लोग ततप ज्ञान है ना ये सब निकल जाएगा दो चार मिनट की बात तो सांभर डियर हो तुम लोग मेरे लिए समझ रहे हो बाघ मैं हूं तो तुम लोग सांभर डियर हो बाघ का सबसे सरलतम शिकार वो बांधवगढ़ जंगल के जो गाइड थे उनके अनुसार वो लोग हैं तुम लोग तुम्हारे ऊपर मुझे वीडियो बनाना चलते फिरते बात करना तुम्हारे बारे में हालांकि चलते फिरते हम सब जगह हर तरह के व्यक्ति से प्रतिकार करने के लिए तैयार रहते हैं पर तुम्हारे को लेकर के एक अलग ही मजा आता है और तुमसे प्राप्त होती है कॉमेडी भी जब वीडियो बनता है तो उसमें कॉमेडी भी खूब होती है तुम लोगों के द्वारा तुम लोग इतने बड़े घोंंचू हो इतने बड़े घंचू कि तुम लोग अपने ही द्वारा अपनी हंसी उड़वाते हो। अपने को हंसी का पात्र बनाते हो। तुम लोगों को खुद नहीं पता होता कि मैंने कहां-कहां घोंंचूपना अपना दिखाया। ठीक है? तो ये एक अंतर है तुम में और मुझ में बाघ का सबसे सरलतम शिकार। सांभर डियर रामपाल एंड गैंग शिवश का सबसे सरलतम प्रतिकार करने का विषय। ठीक है। अच्छा।

00:20:53:20 [गला साफ़ करने की आवाज़] बढ़ते हैं। तो अब रामपाल तो हुआ फरार। पता चल गया भाई कि शिवश नारायण द्विवेदी तो ततप फतप सारा ज्ञान निकाल देगा। तो वो तो हो गया फरार। वो तो क्या ही बोलेगा इस पर। अब आया इनके फुअर चेलों का गैंग और उन्होंने निष्ठा करना चालू किया। तरह तरह के वीडियोस बना के मेरे वीडियो को कट लगा करके दिखा करके और यहां ये बना एक मेरी हिम्मत नहीं है जो मुझे फोन करे कि भाई इस बीच की जगह पर आकर के मैं तेरे साथ बैठूंगा चर्चा एक में एक की औकात नहीं है और इतनी निष्ठा गधे के चेले ये चेले वो चेले

00:21:41:13 इतना साहस नहीं है 7408301869 अरे मां का दूध पिया तो फोन करो ना भाई और उसमें भी देखो उसमें भी देखो ताल क्या ठोकते हैं मेरे यहां आ जाओ मैं तुझे चैलेंज करता हूं यहां आ जाओ मालूम है शिवास नारायण द्विवेदी तुम जैसों के यहां नहीं आएगा बबीता कांड हुआ रखा है छह आदमी मारे गए क्यों आऊं भाई तुम्हारे यहां मैं ये भी नहीं कह रहा तू मेरे यहां हालांकि यहां तो बेराग है मामला मैं तो नहीं कह रहा तू मेरे यहां बीच में आ पर उतनी हिम्मत कहां है चल बीच में मत आ ऑनलाइन भिड़ ले उतनी हिम्मत कहां है? केवल बातों का झुनझुना बचाना है। केवल बातों का मैं तुझे चैलेंज दे रहा हूं। यह कर ले, वो कर ले। अपराधी हो। देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है। तुम्हारे यहां आ जाए। क्यों आ जाए भाई?

00:22:36:21 अच्छा। तो फुअर चेले कैसे हैं? अब इनका सबसे पहला कुतर्क सुनिए। सबसे पहला इनका कुतर्क था कि भैया गुरु से फिर जब मैंने जब मैंने जब तक नहीं बोला था उसके पहले ही बहुत से लोग बोल रहे थे बहुत से इनके एंटी पार्टी है लगभग लगभग इन जैसी विचारधारा वाले और भी कई लोग हैं और कुछ ऐसे भी हैं जो गुरु हैं और अब उनके कई सारे शिष्य हैं तो मुझसे पहले कई गुरु गुरु रूप में ख्यापित लोग जो थे रामपाल की ही भांति जो गुरु बने बैठे वो रामपाल को बुला रहे थे। तब इन तोतों का क्या बोलना था? गुरु से पहले चेलों से भिड़ ले। गुरु से पहले चेलों से तो भ ले। ये तोता बोलना था। कितने बड़े कुतर्की हो यार। तुम अपनी शक्ल तो देखा करो शीशे में। बोलने से पहले

00:23:35:10 गुरु से पहले चेले से भले। सबको एक तरफ से नकार दिया। रामपाल वहां भी नहीं गया। भगोड़ा भाई वो लोग तो गुरु हैं। पता नहीं कितनों ने कहा कि रामपाल आ जाए भाई मैं करूंगा ज्ञान चर्चा एक व्यक्ति नहीं आया और रामपाल के लोग भी क्या गुरु से पहले चेले से भिड़ ले चेले से भड़ ले तब तुम्हारा ये कुतर्क था अच्छा उसके बाद क्या हुआ कि मेरे संज्ञान में आया रामपाल बाहर आ चुका मैंने भी समय निकाल करके भाई बनाया वीडियो भाई ये चीजें इन पर बैठकर हो जाएगी। कोई रिस्पांस नहीं आया। उसके बाद रामपाल का फिर आया कि भैया मैं बैठना चाहता हूं। फिर मैंने दिया भैया कि चलो भाई दिल्ली में बैठ लो चल के। उसने मेरा नाम लेकर के नहीं कहा था। मगर मैं एक ओपोनेंट उसका रजिस्टर्ड भी हूं। ठीक है? और जो तुम कह रहे हो कि गुरु से पहले चेले से भ ले। तो यह बात मैं नहीं कह सकता कि भाई तू शंकराचार्य का नाम ले रहा है। गुरु से पहले चेले से भ ले। तुम लोग किस क्या मिट्टी खाते हो क्या खाते हो विष्ठा खाते हो क्या करते हो करते क्या हो खुद ही तो जो बोलोगे उसका ही अगले ही मिनट खंडन स्वयं ही कर दोगे

00:24:50:14 विरोध स्वयं ही कर दोगे रात में एक बार सोने से पहले अच्छे से मुंह धोया करो और मुंह धो के शीशे में देखा करो अपने आप को कैसा जीवन जी रहे हो क्या कर रहे हो? अपनी आत्मा से बात करने का प्रयास किया करो। ऐसे ही चला जाएगा यह मनुष्य जीवन इसी फोकस बाजी में कि इंटरनेट पर हम किसी तरीके किस तरीके से ट्रेंड चलाएं किसी के लिए कैसे हैरेस करें किसी को और सुनो यहां हरेसमेंट का कुछ नहीं फर्क पड़ता है तुम लोग तत तत किया करते हो ना इस समय जो पराकाष्ठा हो सकती है ना जो तुम नीचे तत तत किया करते हो तत के जो श्रेष्ठतम उच्चतम स्तर होता है वहां पर जो बैठा हुआ उसके सानिध्य में बैठे तथा तता ठीक है फताक जो खुद कह रहे हो अगले ही मिनट खुद ही उसका खंडन कर रहे हो ये क्या दोगलापन है ये धर्म है कभी तो सवाल कर लो अपने आप अपने आप से मुझको गधा कह रहे हो नीच व्यक्ति

00:26:04:16 मूर्ख कहेंगे पहले कह रहे हैं गुरु से पहले चेले से जब तुम तुम किसी का गुरु कहो और ऐसा गुरु तुम्हारी क्या जो तुम बोल रहे हो शंकराचार्य हो वो हो अब जेल कट्टू हो तुम्हारी क्या औकात है उसके उनके सामने उसको तुम ललकार रहे हो तो वहां ये बात लागू नहीं होगी गुरु से पहले चेले से बिल्ड तुम जाओ कराओ केस जो गुरु तुमको जो गुरु तुम्हारे गुरु को चैलेंज दे रहे हो तुम कह रहे हो गुरु से पहले चेले से ले तुम कराओ उसके ऊपर केस मैंने तो केस करा ना तुम पर आज नहीं तो कल आमना सामना होना ही है स्वतंत्र रूप से नहीं होगा न्यायालय में होगा

00:26:51:01 तुम्हारा अंत प्रारंभ हो चुका है बस दिन गिनो अपने समझे अब आगे ये तो हो गई मुंहजोरी सांभर डियर ये हो गई मुंहजोरी अब सुनो क्या है परसों एक दो दिन पहले मेरे पास जो है फोन आया रात में क्या दिक्कत है भाई आप चैलेंज दे रहे हो यह है वो है पता नहीं क्या बात थी के गुरु से होगी चर्चा आपसे आपको थोड़ी ना फोन मिला मैंने कहा गुरु का अर्थ क्या होता है ये जितने मुंह बना रहे हैं ना इसी इसी एक शब्द को जो तुमने पकड़ा है कि गुरु से होगी चेलों से नहीं होगी अर्थ भी नहीं मालूम होगा गुरु का गुरु कहते किसे हैं उसी में पन्ने पलटते रहते जाओगे अभी यहां सामने अगर होते तो उसी में बस हो गया खत्म टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चेन ये है तुम लोगों की हालत

00:27:49:01 गुरु से पहले चेलों से कर लो पहले ये कह रहे हो फिर कह रहे हो कि नहीं नहीं गुरु से गुरु की गुरु से बात होगी अबे भैया गुरु का अर्थ क्या है अपने तत्व वाले से पूछ के तो आओ तत्व तत ज्ञानी से पूछ के तो आओ गुरु का अर्थ क्या है गुरु वही जो शिष्य का संशय दूर दूर कर दे अज्ञानता रूपी अंधकार दूर कर दे तुम्हारा तत्व वाला दूर करेगा तुम्हारा जो अभी तक मैंने तुम्हारे लोगों की ओर से जो सर्वश्रेष्ठ वक्ता देखा है तुम्हारे रामपाल से भी दो कदम आगे सर्वश्रेष्ठ वक्ता वो देखा है मैंने पवन दास जिस दिन उससे मेरी बात हो रही थी मैंने एक सवाल कर लिया था हो गया तत सब एक तरफ फिर वो आ गया भैया मैं छलांग लगाऊंगा मैं तो आग में मेरे पास नहीं तत ज्ञान ये तुम लोगों की हालत है। एक राघव दास पता नहीं फलाने दास कितने सारे रामपाल की खीर पीने वाले दास बैठे हुए रामपाल की नहाई हुई खीर खाते हैं और फिर वही खीर जो है कन्वर्ट हो के विष्ठा के रूप में मुख से निकालते हैं।

00:29:02:26 तो क्या है कि गुरु का अर्थ होता है जो अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर कर दे वो करेगा रामपाल एक सवाल का जवाब नहीं है तत तत करवा लो तत ज्ञान तत ज्ञान अच्छा अब गुरु की बात गुरु से होगी तो भाई कम से कम 100 लोग ऐसे मैं आपके सामने खड़ा कर दूंगा दूंगा खड़े कर दूंगा जो मुझे गुरु कह रहे हैं। कहते हैं कई लोग गुरु मैं स्वयं मना कर देता हूं। ले हो गया जो तुमने अपनी मनमुखी एलिजिबिलिटी तय की है वो भी आ गई। अब बता कब आ रहा है रामपाल? कब आ रहा है तुम्हारा जेल कट्टटू बाबा? मैं नाम लिख के फोन नंबर्स के साथ एक लिस्ट जारी कर दूंगा। जो लोग मुझे गुरु कहते हैं। अभी यहां पर आएंगे एक दो लोग वो गुरु कह देंगे मुझे। ठीक? गुरु होना चाहिए हूं ना मैं किसी ना किसी का एक दो लोग अभी बोल देंगे आ जाओ भैया एक दो लोग बता दो मैं गुरु हूं हो गया अब बुला लो रामपाल को कब आएगा जेल कट्टटू हैं कोई सिर ना पैर

00:30:18:00 धज्जियां उड़ जाएंगी जिस दिन सामने आए जब तक कैमरे के पीछे बैठे हो बैठे रहो सुरक्षित हो और वो तुम्हारा रामपाल भी तभी तक सुरक्षित है पांच मिनट के अंदर खत्म अच्छा फिर तुम लोग क्या करते हो अंत में निमंत्रण देते हो मैं तुझे चैलेंज कर रहा हूं मुंड का आश्रम आ जाना भैया वही सारे आश्रम तो तुम्हारे कटघरे में खड़े हुए हैं भाई जो सबसे मेन व्यक्ति है जिसका जिसके नाम से सारे आश्रम है वो सारे आश्रम तो कटघरे में खड़े हुए हैं सील था तुम्हारा कौन सा आश्रम है वो जो मेन वो सील था तुम्हारा 10 सालों से और तुम कह रहे हो वहां आ जाओ क्यों आ जाए भाई तुम्हारी कोई औकात है ऐसी कि कोई सभ्य व्यक्ति कोई ठीक समाज से आने वाला व्यक्ति तुम्हारे यहां आए हां मुंडका आश्रम आ जाओ यहां आ जाओ वहां आ जाओ ताल ठोको और अपने वो चिलांटू है उनको मूर्ख बनाते रहो देखो देखो हमने बुलाया वो आया नहीं क्यों भाई तू ही क्यों बुलाएगा दूसरा क्यों नहीं बुलाएगा? बीच की जगह पर क्यों नहीं आएगा?

00:31:33:10 डर लगता है ना? यह डर अच्छा है। सांभर डियर ये डर अच्छा है। बाघ का डर सा डियर में तो रहता ही है। तभी तो पीछे मुड़मु के देखता है भागते टाइम। भाई तुम लोग कर रहे हो। भागो कितना भागोगे? खैर व्यभचार के आरोप से याद आया कि मैंने अपने एक वीडियो में कह दिया था कि भाई तुम्हारे जो अड्डे हैं वहां पर व्यभचार होता है। ऐसे बोला तो अब व्यभचार के लिए मेरे पास कोर्ट दो अभी मेरे ख्याल से तीन अटेमप्ट हो चुके हैं। कोर्ट केस में फसाने के इन्होंने हमारी अड्डे को विचार बोला। अरे मूर्खों

00:32:19:03 तुमको व्यभचार का अर्थ पता है? पहली बात तो यह है कि गीता में तुम ही यह अर्थ करके बैठे हुए हो। ये व्यभचार का अर्थ होता है जिसकी भक्ति करनी चाहिए उसकी भक्ति ना करके दूसरी भक्ति करना। लो तो इसमें कौन सा व्यभचार का केवल एक ही अर्थ होता है क्या? तो मैंने व्यभचार शब्द का उपयोग किस अर्थ में किया? यह तक मूर्खों को नहीं पता है। ये तक वो सिद्ध नहीं कर पा रहे। व्यभचार के आधार पर मुझे कोर्ट केस भेज रहे। एक कश्मीर से आया था। एक बोर से आया था। एक एक दो महीने पहले मुझे वो साइबर सेल में आया था कि भैया आपके खिलाफ जो है इस तरह की शिकायत आई है। मैंने जो है वो हाई कोर्ट के केस के कागज भेजे व की व निरस्त हो गई चीजें। व्यभचार का अर्थ केवल यही होता है क्या? शारीरिक संबंध। हां। व्यभचार का मुख्य अर्थ जो है वो है ऐसा आचरण जिसमें असत हो। झूठा आचरण।

00:33:17:22 जो ठीक ना हो, उचित ना हो वो सब विचार है। तो तुम्हारे यहां अड्डे से तुम्हारा जब व्यक्ति पकड़ा जा रहा है। वहां से देशद्रोह उस पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है। हत्याएं हो रही हैं। हथियार पकड़े जा रहे हैं। इसको व्यभचार नहीं कहेंगे क्या? तुम लोगों ने इतनी विष्ठा लिख रखी है धर्म ग्रंथों के नाम पर अपने यहां की सामग्री में। उसको व्यभचार नहीं कहेंगे क्या? अच्छा और सुनो तुमने अच्छा शारीरिक व्यभचार की बात भी आ जाए वो भी कैसे उसको भी सिद्ध कर देंगे। शारीरिक

00:33:57:25 तुम लोगों ने दुर्गा माता के ऊपर जो आरोप लगाया है हम वास्तविकता में वो आरोप तो कहीं किसी धर्म ग्रंथ में लिखा नहीं है जो तुमने आरोप लगाया है दुष्कर्म हो रहा था होते हुए उनके अंदर भी भावना जाग गई नीच लोगों यही लिखा है ना तुमने दुर्गा माता के बारे में तुम्हारा अंत निश्चित देखते जाओ। तुमने जो ताना वाना खड़ा किया ना दुर्गा का अपमान करके तो दुर्गा मैया ही तुम्हारा कर रही है धीरे-धीरे मामला सेट। तो नीचों यह जो दुर्गा मैया के बारे में तुमने लिखा है उनके ऊपर व्यभचार का आरोप तुमने लगाया है नीच लोगों ये हमारे किसी धर्म ग्रंथ में नहीं लिखा है हम फिर ये जो व्यभचार है ये किसके मन में है कहां लिखा है तुम्हारे अड्डो में लिखा है तुम्हारे अड्डो में रखी हुई किताबों में लिखा है वही वाला चार जिसका तुम आरोप लगा रहे हो तो तुम्हारे यहां जो किताबें रखी हुई है उसमें वह व्यभचार है

00:35:13:08 और वह व्यभचार के लिए और कोई जिम्मेदार नहीं है। तुम और वो अड्डा चलाने वाले उन किताबों को अपने अड्डे में रखने वाले वो लोग जिम्मेदार हैं। तो जिस व्यभचार का तुम आरोप लगा रहे हो वो व्यभचार भी तुम्हारे अड्डों में सिद्ध हो गया। क्योंकि तुमने निराधार रूप से उन किताबों में क्या लिखा? दुर्गा मैया पर दुराचार का आरोप लगाया हुआ है। किसके मन में वह विचार पल रहा है? तुम्हारे मन में ना तुम्हारे अड्डो अड्डों में रहने वालों के मन में ना अपने आप स्वतंत्र रूप से तो यह भी सिद्ध हो गया। हर प्रकार का व्यभचार सिद्ध हो रहा है तुम्हारे अड्डों में और फिर तुम हमको केस भेज रहे हो। किसी तरीके से शिवश नारायण द्विवेदी किसी एक केस की चप चपेट में आ जाए तो हाई कोर्ट का मुकदमा रुक जाए नहीं तो हमारी जो विष्ठा है वहां दिखाई दे जाएगी लोगों को जो हमने लिख रखी है। यही तो प्रयास है तुम लोगों का नीच कहीं के बात करने की तमीज नहीं है। पढ़े लिखे हो नहीं अनपढ़ कहीं के गवार

00:36:18:21 केवल ये जो वीडियो जो लोग ये देख रहे हैं ना इसमें बहुत ज्यादा आपको इन इंफॉर्मेशन नहीं मिलने वाली है। इंफॉर्मेशन तो मैं पहले ही दे चुका हूं तमाम सारे वीडियोस के माध्यम से। यहां तो केवल मुंह जोरी की बात है। मुंह जोरी कौन कितना बढ़िया कटाक्ष कर लेगा। तो भाई मेरे पास तो एक सीमा है। एक हद तक मैं मर्यादा को टच कर पाऊंगा। उसके बाहर तो मैं जा नहीं पाऊंगा तुम लोगों की तरह। तुम लोग ठहरे नीच। निचले स्तर के लोग अनपढ़ गवार। तुम लोग किसी भी हद तक जा सकते हो। जाओ। जाओ कभी मत झांकना अपनी अंतरात्मा में कि क्या कर रहे हो। खैर तुम्हारा जो इंतजाम है वो मैया कर रही है अच्छे से। ठीक है? भागना पड़ा ना लखनऊ से। ऐसे ही भागोगे जगह-जगह से। जहां जहां कोई माता का भक्त जन्म ले लेगा खड़ा हो जाएगा। वहीं वहीं से तुम बोरिया बिस्तर बांध बांध के भागो। जगह जगह से

00:37:26:24 अच्छा यह हो गया विचार के अड्डे अच्छा कह रहे थे घुड़सवार से घुड़सवार भेगा तो घुड़सवार से घुड़सवार भेड़ेगा तो भाई संस्कृतज्ञ से संस्कृतज्ञ नहीं भिड़ेगा दर्शन विज्ञान व्यवहार तमाम सारी नॉलेज रखने वाले उनसे दर्शन विज्ञान व्यवहार की नॉलेज रखने वाला नहीं भेगा अपने अपने आप ही कुतर्क कर निकालते हो मन मुखी और खुद ही उसका खंडन कर लेते हो। यही होता है अधर्म की पहचान। जो अधर्म होता है वो बदलता है। तुम जो बात बोलोगे उसको तुम्हें खुद ही छोड़ना पड़ेगा। जब तक तुम शाश्वत धर्म को नहीं अपनाओगे तब तक।

00:38:16:16 अब यह सारी बातें हो गई। रामपाल ने स्वयं इन नीच लोगों को फूहड़ यानी कि अनपढ़ गवार घोषित कर रखा है। स्वयं रामपाल ने स्वयं इन लोगों को घोषित कर रखा है कि अनपढ़ गवार है। तो पहले उससे लिखवाओ जाकर के कि भाई हम अनपढ़ गवार नहीं है। तुमने गलती कर दी है। तुमको तत्व ज्ञान नहीं है। तत्व ज्ञान तुमने गीता लिखते समय गलती कर दी है। उसमें हमको तुमने अनपढ़ कह दिया। सब के सब अनपढ़ हो। और तुम पढ़ के दिखाते हो ग्रंथ। अनपढ़ हो तुम बेवकूफ कहीं के दिखा रहा हूं कहां लिखा है इनकी गरिमा गीता की का पेज नंबर वो खोलिए जरा 49

00:39:06:04 देखो तुम्हारे बाबा ने तुम्ही को अनपढ़ कहा है। कहां पर कहा है वह दिखाता हूं। तब तक [गला साफ़ करने की आवाज़] हां 49 दिखाओ जरा ये देखो तुम्हारे ततज्ञ ज्ञानी ने क्या बताया तुम्हारे बारे में नोट कर लो और जो इनमें से निष्ठा निकाले ना मुख से उसी को बताओ भाई तू अनपढ़ है पहले जाके बता बता पहले जाके लिखवा के ला कि मैं अनपढ़ नहीं हूं तब तो बोल तू किताब पढ़ता है अनपढ़ कहीं का देख क्या लिखा है तेरे बाबा ने तेरे बारे में जेल कट्टू बाबा ने और तू यह सब जो मैं करता हूं ना डंके की चोट पे तू ये सब कर ही नहीं पाएगा क्यों नहीं कर पाएगा तेरे पास सत्य की ताकत नहीं है तुम लोगों के पास सत्य की ताकत नहीं है तुम लोग घुमा फिरा करके अप्रत्यक्ष रूप से चोरी छुपे ड्रामा करके ऐसी बात बोलोगे जो हमारी बात भी हो जाए और जो है कहीं मैं फंस ना जाऊं। मैं तो डंके की चोट पे

00:40:21:08 बोल रहा हूं। जेल कट्टू है तेरा बाबा। ले ये फोटो लगी है भाई। यह फोटो देख तेरी किताब में लगी हुई है। जेल कट्टू जेल की ड्रेस पे बैठा हुआ है। जेब में नहीं है टल्ला टिल्ला। मांग रहा है लाल किला। पेज नंबर 49 अच्छा एक बात और है जब मैंने वह वीडियो निकाला है उसके बाद अगर किसी को चर्चा करनी थी तो चर्चा ही कर लेते बस वीडियो बनाएंगे कोई चर्चा नहीं करना है कर उनको मालूम है

00:41:14:00 पांच 10 मिनट में चीखें निकलंगी चीखें और आ जाना जिसने भी मां का दूध पिया हो सिद्ध कर देना रामपाल के ज्ञान को कि वह सही ज्ञान बेवकूफ कहीं के लीचड़ फूहड़ लोग अनपढ़ लोग ये मैं नहीं कह रहा हूं तुम्हारा व्यक्ति कह रहा है दिखाओ इनको जितने लोग विष्ठा कर रहे हैं उन सबको बताना तू तो अनपढ़ है तेरा पढ़ा हुआ कहां से मान ले भाई

00:41:47:25 हां 49 में सबसे नीचे पीडीएफ के अनुसार नहीं किताब के अनुसार बोला है। इसी आधार पर वो वही था ना वो पेज पहले आया था जो इसी आधार पर लिखा था सबसे लास्ट पैराग्राफ जो पहले आपने खोला था सही था वो वो खोलिए

00:42:24:28 आज तक इतनी बार मेरे पास केस भेज रहे हैं ये कर रहे हैं भाई कोई भेज दो ना चर्चा कर ले बीच में आकर के वो नहीं होगा सिर्फ कर दो। तुम जो बोल रहे हो सही है। हां देखो क्या लिखा है? इसी आधार से लास्ट पैराग्राफ पढ़िए। इसी आधार से गीता अध्याय यह तक के ज्ञान को जानना है। श्लोक 25 में कहा है कि शास्त्र अनुकूल साधना रूपी कर्तव्य कर्म में आसक्त अविद्वान अर्थात अशिक्षित जिस प्रकार भक्ति कर्तव्य कर्म करते हैं। विद्वान शिक्षित भी लोक संग्रह अर्थात अधिक अनुयाई इकट्ठा करने चाहता हुआ उसी प्रकार करें। जैसे अविद्वान अर्थात भोलेभाले अशिक्षित शास्त्रानुकूल साधना तत्वदर्शी संत से प्राप्त करते हैं। कौन होते हैं? अविद्वान भोलेभाले अशिक्षित। ये तुम्हारा बाबा लिख रहा है। किससे प्राप्त करते हैं? तत्वदर्शी से। और यह कह रहा है कि विद्वान

00:43:40:14 शिक्षित लोगों को उनकी कॉपी करना करनी चाहिए। तुम लोग कौन हो? फुअ हो। अशिक्षित लोग हो तुम। ये मैं नहीं कह रहा। तुम्हारा बाबा कह रहा है क्योंकि तुम्हारे हिसाब से जो तत्वदर्शी संत है तुम उसके अनुयाई हो। तुमने उससे साधना प्राप्त की है। तो रामपाल से साधना प्राप्त करने वाले लोग रजिस्टर्ड अनपढ़ हैं। ये जान लो जाकर के तुम्हारी किताब के अनुसार बेवकूफ। पता नहीं कौन से नशे में होगा जिसने किताबें लिखी है। रामपाल ने भी नहीं लिखी है किताबें। समझे? रामपाल का तो नाम है। उसने तो अपना वो दे रखा है। सानिध्य फोटो दे रखी है। उसका तो इतना भी बस नहीं चलेगा कि वह यह सब लिख दे। मगर जिसने भी लिखी बहुत बड़ा नशेड़ी रहा होगा। हर पन्ने पर उसने कम से कम पांच बेवकूफियां कर रखी है हर पष्ठ पर।

00:44:41:15 तो रामपाल के अकॉर्डिंग यह जितना गिरोह है उसका जो बोल रहा है वो सारा का सारा गिरोह अनपढ़ है जो इंटरनेट पर बोला करता है। अच्छा तो भैया रामपाल का फरार होना सिद्ध हो गया। रामपाल के फूहड़ चेलों का अनपढ़ होना सिद्ध हो गया। उनके द्वारा दिए गए जो गुरु से गुरु की भिड़ंत होगी कुतर्क और गुरु से पहले पहले चेलों से भले कुतर्क और गुरु का अर्थ ना जानने के विषय में अज्ञानता और शंकराचार्य को चैलेंज देने का इन सभी बातों का समाधान मैंने प्रस्तुत कर दिया। ठीक है? और एक समाधान और प्रस्तुत किया कि ये जो व्यभचार का मैंने यह कह दिया कि भैया इनके अड्डों में व्यभचार होता है उसका आरोप लगा रहे हैं मेरे ऊपर। पर जगह-जगह से केस भेज रहे हैं। तो मैंने इनका वो भी इनकी इनको जो है शिक्षा दे दी कि व्यभचार का अर्थ क्या-क्या होता है। पढ़ लो थोड़ा सा निशुल्क क्लासेस चलती है। एक वो आपके चहेते वो हैं योगेश भारद्वाज जी वो भी मेरी क्लासेस में आना चाहते हैं। उनको भी बुलाया है। आपके बहुत बड़े चहेते हैं वो। खैर अच्छा

00:45:57:06 अब मैं कुछ की पॉइंट्स दे रहा हूं और एक घोषणा और कर रहा हूं कि गरिमा गीता की जो वो एक सीरीज चल रही थी ना जो साप्ताहिक रूप से उसकी गीता का एक एक श्लोक के साथ हम आगे बढ़ रहे थे और उसमें हमने करीब छह सात एपिसोड कर रखे उसको अब हम कंटिन्यू करेंगे ठीक है यह घोषणा कर रहा हूं मगर अभी मैं अपने धर्म से प्यार करने वाले हर व्यक्ति के लिए कुछ की पॉइंट्स बता दे रहा हूं। की पॉइंट्स पहली बात तो यह है पहले सबसे बड़ा की पॉइंट क्या है कि यह दावा करता है कि कबीर भगवान है और वेद आदि शास्त्रों में जितने भगवान के स्वरूप दिखाए गए उनके नाम रूप इत्यादि वो सब भगवान नहीं है। उनहीं शास्त्रों के हिसाब से वह सब गलत है। तो पहली बात तो यह शास्त्रों पर दोहरी बातें करने वाला होने का आरोप लगाता है। शास्त्र जो है दोहरी बात कर रहे हैं। और उन दोहरी बातों में से केवल जहां जहां पर ऐसे निंदा परक वचन जो अपने हिसाब से अर्थ करके निकाल सकता है उनका आधार लेकर के यह कहता है कि जिनको तुम भगवान समझ रहे हो भगवान नहीं है। क्यों? क्योंकि तुम्हारे शास्त्रों में लिखा है। अगर यह बात थोड़ी देर के लिए मान भी ली जाए तो उससे कबीर का भगवान होना तो सिद्ध नहीं हुआ।

00:47:12:12 उस विषय में तुझे जाना पड़ेगा अपनी वाणी पे। उस विषय में तुझे जाना पड़ेगा अपनी किताबों पर जिस पर हिंदुओं की आस्था नहीं है। तो कबीर भगवान कहां से सिद्ध हुआ? उसमें फिर तुम जलेबियां बनाओगे। कबीर से कबीर बना, ये हुआ, वो हुआ। उसमें तुम्हारे पास जलेबियां है। अग्न्या को अगन्या कर दो। अग्न्या को अगन्या कर दो और फिर कह दो बिन बाई गाय। ये तो तुम्हारी तुम्हारा स्तर है संस्कृत का। और फिर तुम दावे करोगे बड़े-बड़े कि हमने अर्थ किया है वेदों का। अच्छा तो यह पहला की पॉइंट है कि यह दावे करता है ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं मगर भगवान ब्रह्मा विष्णु महेश के भगवान ना होने से अगर मान भी लिया जाए वहां से कबीर का भगवान होना सिद्ध नहीं होता। पहला सबसे बड़ा कहीं नहीं लिखा है कि कबीर भगवान है। और तो और अगर मान लो कि कबीर नाम आया ही है तो वो कबीर वही कबीर है जिसको ये कबीर बता रहे हैं। इस विषय के लिए हमें एक शब्द प्रमाण चाहिए होगा। वो शब्द प्रमाण रामपाल तो है नहीं। रामपाल जैसे जेल कट्टू पर कौन भरोसा करेगा? जो कहता है जिसके लिए लिखा हुआ है कि वह जब आएगा कबीर का अवतार होगा तो उसकी परछाई होगी। यह सब बातें करता है।

00:48:27:20 परछाई नहीं होगी और फिर इसकी परछाई दिख रही है। ऐसा कई लोग बताते हैं। खैर यह बहुत बड़ा महत्वपूर्ण विषय नहीं है। महत्वपूर्ण विषय यह है कि ब्रह्मा विष्णु महेश के भगवान ना होने से कबीर का भगवान होना सिद्ध नहीं होता। ठीक स्पष्ट रूप से कहीं भी कबीर को भगवान कहा नहीं गया। पहला की पॉइंट। हालांकि इससे ज्यादा जो ऊपर लेवल की बातें हैं वो सब इनके लिए है नहीं। मगर मैं हिंदुओं को बता दूं की पॉइंट्स जरूरी की पॉइंट्स। नहीं तो आप इसी में खेलते रहोगे कि हां इन्होंने यह आरोप लगा दिया। अच्छा अब यह दूसरा आरोप एक लगाते हैं भगवान पर जो है दुराचरण करने का दुराचारी होने का आरोप लगाते हैं। तो जो भी आरोप ये लगाते हैं भगवान के जिस स्वरूप पर लगा रहे हैं वो आप चेक करिए। क्या भगवान का कोई स्वरूप ऐसा है जो मैथुनी सृष्टि से उत्पन्न हुआ है। यानी कि मनुष्य के ऊपर जो लॉ लागू हो रहे हैं उसके बायोलॉजिकली उत्पन्न होने के मैथुरी सृष्टि के कारण उत्पन्न होने से उसका जो शरीर है और उस शरीर के द्वारा होने वाली जो क्रियाएं जिनके कारण वह पापी कहा जाएगा। क्या उसी तरह से भगवान उत्पन्न हुए हैं? भगवान तो स्वयंभू है। भगवान जन्म नहीं लेते हैं। केवल प्रकट और अप्रकट

00:49:42:24 होते हैं। आविभाव तिरो भाव होता है। जिसको ये लोग जन्म और मरण से दिखाते हैं। मगर फिर भी कह दिया जाए कि भैया कहां पर वो क्रिया हो रही है जिससे कि इनका बायोलॉजिकली मनुष्यों की तरह जन्म लेना सिद्ध हो। हम सृष्टि से उत्पन्न है। उनका शरीर तो दिव्य है। तो उनके द्वारा होने वाली जो जो लीलाएं हैं जिनके कुछ अर्थ है उनके आधार पर तुम उनके ऊपर दुष्कर्म का दुराचरण का आरोप कैसे लगाओगे? दूसरी बात अभी आर्य समाज के साथ जो चर्चा हुई उसके आधार पर आपको एक बात क्या जानने को मिली कि भगवान दिखाई मतलब समस्त कर्मों से दिखाई देने के रूप में जुड़ा ना होते हुए भी अप्रत्यक्ष रूप से सभी कर्मों से जुड़ा हुआ है। अगर कबीर को भगवान मानोगे तो कबीर नहीं जुड़ा है क्या हर अच्छे बुरे कर्म से सारे भगवान वही हो सकता है जो पूर्ण हो आप भगवान को ये सीमित नहीं कर सकते नहीं तो भगवान की उसकी सिद्धि नहीं होगी कबीर की सत्ता सब जगह है कबीर सब कुछ जानता है कबीर भी को भी यह मानना पड़ेगा कि वह भी सबको देख रहा है तो वो उन चीजों को भी देख रहा है जिनको देखना हमारे लिए पाप

00:50:58:00 है। अगर कबीर भगवान है तो तो वो भी पापी हो गया। इसका अर्थ यह है कि जिन बातों से मनुष्य पर पाप लगता है उन्हीं बातों से ईश्वर पर पाप नहीं लगता है। क्यों नहीं लगता है? कि ईश्वर समस्त कर्मों को करते हुए भी अकरता है। क्यों अकता है? क्योंकि जिन कर्मों को करते हुए वह दिखाई दे रहा है, जिन कर्मों से लिप्त वह दिखाई दे रहा है, उन कर्मों से मिलने वाले भोग में उसकी आसक्ति नहीं है, आसक्ति रहित है। इसको दूसरे तरीके से समझ लो। ईश्वर को छोड़ दो। मुक्त व्यक्ति को समझो। जो मुक्त हो गया, सतलोक पहुंच गया। जो व्यक्ति सतलोक पहुंच गया। अभी थोड़ी देर पहले जब वो बंधन में था, उसकी माता थी, बहन थी, पत्नी थी, पिता थे। जब वह मुक्त हो गया तो क्या उसको यहां पर जब उसके परिवार के साथ कुछ अनहोनी अप्रिय घटनाएं घटेंग तो क्या जो मुक्त व्यक्ति है उसको बुरा लगेगा वो प्रभावित होगा अगर होगा तो मुक्त नहीं बंधन में है और अगर नहीं होगा तो क्यों नहीं होगा क्योंकि उसको समझ में आ गया कि ये मिथ्यात्व है। यह सभी चीजों को जो मैं देख रहा हूं यह सभी चीजें वैसी

00:52:13:08 नहीं है जिनके कारण मैं पहले इसको जो है समझ रहा था कि अरे यह तो प्रभावित होने वाली चीज उसके लिए वो एक प्रपंच मात्र होगा तभी वो मुक्त हो सकता है और अगर वो उससे प्रभावित हुआ यदि वो सारी चीजें सत्य समझेगा तो प्रभावित होगा प्रभावित होगा तो मुक्त नहीं कहलाएगा तो जिस प्रकार जब एक मुक्त आत्मा प्रभावित नहीं हो रही यहां होने वाली घटनाओं से तो ईश्वर को क्यों प्रभावित मान रहे हो ईश्वर कैसे हो जाएगा उसको को भी तो मालूम है ये संसार माया मात्र प्रपंच मात्र है और नहीं मालूम है तो जिस रूप में भी उसको मानोगे आपको यह तो मानना पड़ेगा ना कि इससे प्रभाव नहीं पड़ रहा है मुक्त आत्मा को तो जब मुक्त आत्मा को प्रभाव नहीं पड़ रहा तो ईश्वर को प्रभाव कैसे पड़ जाएगा यह दूसरा की पॉइंट्स दुष्कर्मों से जोड़ने का जो प्रयास करते हैं ईश्वर को ठीक है समस्त कर्मों से ईश्वर वैसे ही लिप्त है इनके अनुसार काल ने झूठ बोला काल ने कई बातें मनगढ़ंत बता दी। काल ने कुछ बातें गलत बता दी। 5% ज्ञान जो गीता का दिया है वो गलत है। ठीक है? तो इसका अर्थ क्या हुआ? वो काल ने बिना कबीर कबीर की सत्ता के बाहर जाकर के कर दिया क्या वो कार्य? उसमें कबीर लिप्त नहीं है। तो काल के माध्यम

00:53:28:16 से जितने दुष्कर्म हो रहे हैं सब में कबीर बैठा है ना। नहीं तो वह सर्वज्ञ नहीं है। सर्वज्ञाता नहीं है। सर्वशक्तिमान नहीं है। खैर सर्वशक्तिमान तो नहीं है। आगे भी चलो। दो की पॉइंट्स हो गए। तीसरा की पॉइंट ले लो। कबीर सर्वशक्तिमान नहीं है। पहली बात बूढ़ा दिखता है। जो अजर कहा गया है ना अजर वो लॉ लागू नहीं होता है उसके ऊपर भगवान का। सर्वशक्तिमान नहीं है। माता के गर्भ से जन्म नहीं ले सकता। कहता है मैं नहीं ले सकता। बाधित है और भी ना जाने क्या-क्या कार्य है जो वो नहीं कर सकता है। ठीक है? तो बाधित है। बाधित है तो वो सर्वशक्तिमान नहीं है। सर्वशक्तिमान अनंत सामर्थ्यवान का अर्थ होता है अनंत। अगर किसी भी कारण से आप कह रहे हो कि वो जो है यहां पर यह कार्य नहीं कर सकता तो हो सकता है कि वो लॉजिकली आपका ठीक बैठ जाए। दुर्जन हालांकि बैठेगा नहीं। दुर्जन तोष न्याय से मान लिया जाए। लॉजिकली आपका ठीक भी बैठ जाए। मगर उसको अनंत मत कहो ना। फिर आप ये मान लो कि दुनिया का कोई तत्व ऐसा हो ही नहीं सकता जो अनंत सामर्थवान हो। ये संज्ञा घटा लो। पहले ये कहना चालू है कि नहीं दुनिया में कोई भी तत्व नहीं हो सकता जो सर्वशक्तिमान जो अनंत सामर्थवान तो ईश्वर इनका बाधित है।

00:54:43:20 अच्छा परम स्वतंत्र मोक्ष नहीं है। जीव की चाह का वास्तविक विषय है क्या? सच्चिदानंद स्वरूप होकर शेष रहना। इनका मोक्ष क्या है? सतलोक जाएंगे, बादाम खाएंगे, यह होंगे, यह करेंगे, वह करेंगे। और सुनो इनका मोक्ष है। दो6 में लिखा हुआ है आत्मा नित्य नहीं है। और दो 16 में ही लिखा हुआ है गीता में भी लिखा है इन्होंने भी माना है कि जिसका असत का कभी भाव नहीं होता और सत का कभी अभाव नहीं होता। ठीक है? तो जो आत्मा है जो कभी ना कभी उत्पन्न हुई है जिसका कभी अभाव था। तो वह कभी भी सत नहीं हो सकती। नित्य नहीं हो सकती क्योंकि उसका कभी अभाव था। इनकी ही किताब में लिखा है दो 16 आत्मा का कभी किसी समय पर अभाव था तो वो कभी भी सत नहीं हो सकती। मतलब वो सत स्वरूप नहीं हो सकती कि अब मैं हमेशा रहूंगी। जो अभाव अभाव था जिस चीज का वह नष्ट होनी है सत नहीं है यानी कि मुक्ति नहीं है ना तो ईश्वर है घटिया टाइप का ईश्वर की व्याख्या है घटिया टाइप की मोक्ष की व्याख्या है आगे शाश्वत धर्म नहीं है अब ये लोग बात

00:55:58:21 करते हैं कि मैं जो है बता रहा हूं तुम्हारे शास्त्रों के अर्थ को मैं बता रहा हूं ठीक है वो शास्त्र इनके हाथ में आए कहां से किसी दुकान से खरीद रहे हैं अरे भैया गुरु गुरु शिष्य परंपरा से उसका ज्ञान प्राप्त किया है कि नहीं तुमने? हम दुकान से भले ही खरीदे मगर हमारे पास अपनी गुरु शिष्य परंपरा है जिससे हम जाकर के सत्यापित कर सकते हैं। अगर उस ग्रंथ में कोई भी मिलावट होगी तो तुम्हें कैसे पता कबीर ने जो ग्रंथ दिए थे वो यही है? कबीर ने वेद भाष्य किया था क्या? जो तुम वेदों का अर्थ बता रहे हो। कैसे पता? और जिस जिसने वेद भाष्य किया, जिसने ब्रह्म सूत्र पर भाष्य किया, जिसने दर्शन पर भाष्य किया, उसको तुम गुरु मान नहीं रहे हो। उसको तो लीला मान रहे हो। तो तुम्हारे पास शाश्वत धर्म भी नहीं है। मतलब जो परंपरा प्राप्त वेदा आद शास्त्र है। इनका ज्ञान विज्ञान तुम्हारे पास प्रामाणिक रीति से उपलब्ध नहीं है। धज्जियां उड़ जाएंगी। इनहीं तीन चार पॉइंट्स में। आगे चलते हैं। ये तो हो गए दार्शनिक विषय। तीन दार्शनिक। पहले मैंने शब्द वस्तु जो शाब्दिक खेल है इनका वह बताया कबीर कबीर में अंतर ठीक है और ब्रह्मा विष्णु महेश भगवान नहीं है उससे कबीर का भगवान होना सिद्ध नहीं होता ये तो शब्द का खेल आ गया

00:57:13:27 है ना जो ये शब्द पर खेलते हैं इसके बाद अब मैंने बताया दार्शनिक दार्शनिक इनकी इनके यहां जो अभाव है बहुत बड़ा ये की पॉइंट्स है ना ही कबीर सर्वशक्तिमान है इन्हीं के अनुसार और ना ही इनके यहां पर सत स्वरूप होने वाला मोक्ष मोक्ष है नित्य मुक्ति नहीं है इनके यहां ठीक है क्योंकि इन्होंने खुद कह दिया कि जो आत्मा है उसका एक समय पर अभाव था कहां पर कहा है इनकी जो गरमा गीता की है उसमें दो 16 की कमेंट्री देखना और यह जो वीडियो है इसमें मैं जितनी बातें बोल रहा हूं जैसे मैंने कहा कि गुरु का मतलब है गु का मतलब अंधकार रू का मतलब निकालने वाला अद्वतार का उपनिषद स्कंद पुराणोक्त गुरु गीता उसमें लिखा हुआ है अज्ञानता रूपी अंधकार से निकालने वाला गुरु कहलाता है एक तत्व ज्ञान है नहीं तुम लोगों के पास तुम्हारे जेल कट्टू बाबा के पास तो क्या है इसका अर्थ? यह जितनी चीजें मैं बोल रहा हूं अलग से यह वीडियो यह साक्ष्य प्रमाण लगा के मेन चैनल पर भी डाल दिया जाएगा। जिससे कि अभी आपको वो डिस्प्ले नहीं हो रहा है। अभी मैं धारा प्रवाह बोल रहा हूं। बाद में वहां पर लिख लिख करके कौन सा प्रमाण कहां पर है वो भी डाल दिया जाएगा। ठीक है? तो ये हो गया इनका इनकी दार्शनिक अभाव। ठीक है? अच्छा एक चीज और ऐसी से याद आया कि इनके

00:58:29:08 यहां पर यह जो कह रहे हैं कि गीता का ज्ञान किसने दिया? काल ने दिया। इनकी गरिमा गीता की दिखाओ। गरिमा गीता की पृष्ठ संख्या 23 उसमें ये खुद कह रहे हैं कि गीता का ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिया था। तुम्हारे डंडे से ही तुम्हारी पिटाई करूंगा मैं। ठीक है? तो जो पहला वाला पॉइंट है ना कबीर कबीर में अंतर ब्रह्मा विष्णु महेश के भगवान ना होने से कबीर का भगवान होना सिद्ध नहीं होता और तुम खुद लिख रहे हो कि गीता का ज्ञान भगवान कृष्ण ने ही दिया है। तुम खुद लिख रहे हो अर्जुन पृष्ठ संख्या 23 पहला पैराग्राफ

00:59:13:15 देखिए पहले पैराग्राफ की आखरी लाइन पढ़िए। लिखी है ना किसी नशेड़ी ने यही ज्ञान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिया था और यही बात इनकी ज्ञान गंगा में भी लिखी हुई है जहां पर 30 या 32 नंबर का प्रश्न है वहां पर जो है कबीर स्वयं कह रहे हैं रामपाल के अनुसार कबीर कह रहे हैं कि विष्णु भगवान श्री कृष्ण के रूप में प्रकट होते उन्होंने ही गीता का ज्ञान दिया अभी होगी अगर आसपास ज्ञान गंगा तो दिखा दूंगा चलो नहीं है ठीक है तो यह हो गया दार्शनिक अभाव बता ही दिया। अब आगे जो है इनकी प्रामाणिकता के विषय में भी बता देते हैं। जो तत्वदर्शी है यह अपने आप को तत्वदर्शी कहता है। भागवत में तत्व का अर्थ बताया गया है। तत्व का अर्थ यह नहीं है कि इसका नाम यह है। इसका नाम वो है। वेदों में जो उसकी ओर इशारा गया तत्व नहीं है। ये तो उसके नाम रूप का वर्णन चल रहा है। तत्व से जो फाइनल स्टेट तत्व का ज्ञान है उसके बारे में भागवत में बताया गया है। तत्व भी कहेंगे किसे?

01:00:23:03 उस उस तत्व को जाना जानना उस स्टेज पर पहुंच जाना जहां ज्ञाता और गे पदार्थ का अंतर शेष नहीं रह जाता पढ़ लेना भागवत में लिखा है ये भी प्रमाण के साथ डाल देंगे आप ठीक है तो ये जो ज्ञान है ना ये तुम्हारा कि उसका नाम ये है भगवान ब्रह्मा विष्णु महेश ने ऐसा किया वैसा किया उन्होंने इसकी ओर इशारा किया इशारा इशारा इशारा इशारा करके वो जो है उधर वो कबीर सागर से निकल आए भगवान मेरा फ्रेम थोड़ा सा बदल गया है।

01:01:01:10 खैर यह तत्व ज्ञान नहीं है। तत्व ज्ञान है जिसे जान लेने के बाद और कोई ज्ञान और कुछ जानना शेष ना रह जाए। कुछ शंका ना रह जाए। असतो माग तस माग मृत्य तत्व ज्ञान वो नहीं है जो तुम कह रहे हो उसका नाम जान लेना उसका ये जान लेना ये तत्व ज्ञान नहीं है तत्व से उसको जान लेना तत्व से ठीक है तो ये भागवत में तुम्हारा खंडन है बहुत बड़ा दूसरी बात दूसरी बात जब तुम ये कहते हो कि तत्वदर्शी हूं मैं इसलिए मैं बताऊंगा तो तत्वदर्शी तुम सिद्ध कहां से होते हो गीता से गीता से सिद्ध कैसे हो जाओगे जब गीता अभी खुद इस बात पर निर्भर है कि उसमें कहां पर उसने झूठ बोला है और कहां पर सच बोला है तय करना है तुम्हारे हिसाब से काल ने कहीं पर झूठ बोला है तो कहां पर झूठ बोला है कहां पे झूठ नहीं बोला तय करना है तो फिर गीता के वचन के आधार पर तुम तत्वदर्शी सिद्ध नहीं होगे पहली बात दूसरी बात गीता में ही लिखा हुआ है कि ज्ञान यज्ञ के ज्ञान को लेने के लिए तत्वदर्शी के पास जाओ मगर रामपाल का यह कहना है कि ज्ञान यज्ञ से भी मुक्ति नहीं होगी

01:02:12:16 है ना? जबकि वहां पर तत्वदर्शी के पास जाने के लिए कहा जा रहा है। और तत्वदर्शी कौन होगा जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देगा। तो या तो ये मान लो कि ज्ञान यज्ञ से भी मुक्ति होगी और या ये मान लो कि तुम वो गीता वाले तत्वदर्शी नहीं हो। ऐसे भी तुम सिद्ध नहीं हुए। अच्छा तीसरी बात और है तत्वदर्शी पे ही। तुम तत्वदर्शी को सिद्ध करने के लिए जाते हो। 15 अध्याय में कि जो उल्टे वृक्ष का ज्ञान ठीक ठीक दे देगा। पहली बात तो इसमें भी शटर घोट है। इसमें भी शटर गोट है। भाई कोई भी व्यक्ति उल्टा वृक्ष बना करके उसके बारे में चार बातें बोल दे। जो उल्टे वृक्ष का ज्ञान ठीक ठीक दे देगा। ये हम पता कैसे करेंगे इसने ठीक दिया है कि नहीं दिया। इसका मतलब तत्वदर्शी से पहले मुझे उस पेड़ का ज्ञान ठीक ठीक मालूम होना चाहिए। तो यानी कि इस वाक्य से सिद्धि नहीं होती कि जो उल्टे पेड़ के बारे में बात करेगा वो तत्वदर्शी होगा। दूसरी बात अगर ऐसी ही बात है तो जय दयाल गोविंदका जी और ना जाने कितने हमारे आचार्य गण है जिन्होंने उल्टे पेड़ की बात की है तो वो सब तत्वदर्शी हो गए। अगर बात है ठीक ठीक व्याख्या की तो ठीक ठीक व्याख्या कौन जानता है क्या होनी चाहिए इसका मतलब कि उस वाक्य से यह बताया जा रहा है कि वो उल्टे वृक्ष का ज्ञान आपको देगा मगर उससे तत्वदर्शी

01:03:28:04 की पहचान नहीं होनी है वो तो आपको बता रहा है कि तत्वदर्शी ऐसा ऐसा कार्य करेगा आपकी मदद करेगा सहायता करेगा वो उसके लिए प्रमाण रूप में वो पंक्ति नहीं है तीसरी बात वहां पर उसको जो उल्टे की वृक्ष की व्याख्या करने वाले को तत्वदर्शी नहीं कहा गया है। वेदों को जानने वाला कहा गया है। अब आ जाओ देवी भागवत में। वेदों को जानने वाला देवी मां को ध्यान में रखते हुए गायत्री मंत्र का जाप करने वाला होता है। तो यहां भी तुम्हारा तत्वदर्शी का तत्व निकल गया। निकल गया तत्व। ये की पॉइंट्स है। ये सब आप याद रख लोगे। जीवन में कोई रामपाली आपके सामने टिक नहीं सकता। भाई वो अगर आपके शास्त्रों का अर्थ कर रहा है, ईश्वर के दुराचार की बात कर रहा है तो उससे पूछो क्या तुम्हारा ईश्वर नहीं देख रहा है क्या स्त्रियों को स्नान करते हुए सब कुछ जानने वाला नहीं है क्या सब कुछ देखने वाला नहीं है क्या जहां हत्या हो रही है वहां उसकी सत्ता नहीं है क्या तो यह हत्या होना यह सब कुछ प्रपंच रूपी संसार में हमें प्रभावित करता है क्योंकि हमें हमारे लिए सत्य है ईश्वर के लिए नहीं ईश्वर और मुक्त आत्मा की दृष्टि से यह प्रपंच मात्र है। इसीलिए तो मुक्त है।

01:04:44:02 अगर उनको भी प्रभावित होने लग जाए, वो भी प्रभावित होने लगेंगे तो फिर उनमें उनमें फर्क क्या रह गया? कैसी मुक्ति? ठीक है? तो ये कुछ की पॉइंट्स आप पकड़ के रखो। दूसरी बात कि इनके पास जिन ग्रंथों का ये अर्थ कर रहे हैं वो आए कहां से? जिससे आए हैं गुरु शिष्य परंपरा से शंकराचार्य रामानुजाचार्य मधवाचार्य गुरु शिष्य परंपरा से ग्रंथ आए हैं उनप तो इनको भरोसा नहीं है तो उनके ग्रंथों पे इनको भरोसा कैसे है कि इसमें जो लिखा है वो कबीर का ही बताया हुआ है इनके हिसाब से ये प्रश्न पूछो उनसे अगर वो ज्ञान दे स्कंद पुराण में गुरु स्कंद पुराण गुरु गीता में लिखा हुआ है कि प्रामाणिक आचार्य से ही शास्त्रों का अध्ययन करोगे तभी उनका मर्म समझ में आएगा नहीं तो आपको आप भटक जाओगे शास्त्रों का अध्ययन करने तो इनकी प्रमाणिकता क्या है जिससे शास्त्र ले रहे उस पर इन्हें विश्वास नहीं है मुंडकोपनिषद में परंपरा बता रहे हैं ऋषि महर्षि अपनी भगवत गीता में भगवान कह रहे हैं ज्ञान परंपरा से प्राप्त हुआ है और और क्या प्रामाणिकता है

01:05:59:22 अथर्ववेद 11 सात 16

01:06:02:09 ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है। मनुस्मति 12वा अध्याय 112 से 114 धर्म में संशय

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01:06:08:04 होने पर ब्रह्मचारी के पास जाओ। अब ये लोग कहते हैं फलाने जो ऋषि थे वो तो ब्रह्मचारी थे नहीं। भाई ब्रह्मचर्य का अर्थ पढ़ लो पहले जाकर के क्या होता है? जो द्वापर तक के युग युग थे वहां पर गृहस्थ होते हुए भी व्यक्ति ब्रह्मचर्य अगर धारण करता था तो उसका ब्रह्मचर्य सिद्ध होता था क्योंकि दय युग था। कलयुग में कैसे सिद्ध करोगे? कोई ग्रस्त होते हुए ब्रह्मचारी है। वहां तो देवलोक से नारद जी का आवागमन हो जाता था सीधे सीधे उन युगों में। तो वर्तमान में गस्थ रहते हुए यदि कोई ब्रह्मचारी है तो उसका ब्रह्मचर्य उसके अपने लिए स्वता सुखाय के लिए ठीक है। गस्थ होते हुए भी यदि कोई ब्रह्मचर्य का पालन कर रहा है। उसके नियम होते हैं। अमुक अमुक अवधि में ही अमुक अमुक ऋतु काल में ही और अमुक प्रयोजन से ही गस्थ धर्म का पालन करना है। अन्यथा ब्रह्मचर्य का पालन करो। यह होता है गस्थ रहते हुए ब्रह्मचर्य का धारण। और एक आरोप लगाते हैं कि भगवान जो शंकराचार्य थे उन्होंने पर आया प्रवेश किया था। अरे मूर्ख ब्रह्मचर्य इत्यादि मानव देह के लिए बताया गया धर्म है कि जीव आत्मा के लिए और उन्होंने अपने शरीर

01:07:23:10 शरीर को साथ ले परकाया प्रवेश किया था या आत्मा होते हुए परकाया प्रवेश किया था। मूर्ख कहीं के घचू सा डियर कहीं के जिस दिन पकड़ में आ जाओ जलन मछली की तरह फड़फड़ाओगे तो ब्रह्मचारी ही आचार्य बनता है आचार परंपरा से होना चाहिए अगर कोई व्यक्ति अपनी परंपरा नहीं बता पा रहा है आप पूछो उससे शास्त्र कैसे है बस ग होने लगेगा पूछते ही नहीं हो आप लोग तो की पॉइंट्स नोट करो दर्शन वाला बता दिया अब प्रमाणिकता वाला बता रहा हूं दूसरी बात अब बात आ जाती है कि इनके कबीर ने जो भी बताया है सोच समझ के बताया है क्योंकि अंतिम जो सत्य है इनका वो है इनका सूक्ष्म वेद सूक्ष्म वेद नहीं सूक्ष्म वेद वो इनका अंतिम सत्य है तो सूक्ष्म वेद जो है वो कबीर ने सोच समझ के बोला और हमारे लिए वेद इसलिए मान्य होते हैं क्योंकि वो अपाय ग्रंथ है स्वास रूप में थे अकर्ता है उनका उनका भगवान ने भी उनको जो है सोच समझ के नहीं बोला है स्वास रूप में स्वास भूत थे वेद स्वास रूप में कब से

01:08:38:16 थे वेद को नित्य क्यों कहा जाता है वेद जब से तब से ईश्वर है सो ऐसे नहीं है कि प्रयास पूर्वक वेद दिए भगवान ने क्योंकि प्रयास पूर्वक देंगे तो जैसे ये बोलते हैं रामपाल जो है अगर उसको शब्द प्रमाण मान लिया जाए या कबीर जो है उसको शब्द प्रमाण मान लिया जाए अंतिम तो वो तो लीला भी कर रहा है। इनहीं के अनुसार जैसे कबीर ने रामानंदाचार्य जी को गुरु बनाया। अब ये लोग कहते हैं वो तो लीला की यानी झूठ बोला ना। दिखाने के लिए बनाया। वास्तविकता में गुरु नहीं बनाया था। यानी झूठ बोला। तो जो व्यक्ति लीला में भी लिप्त हो रहा है। ठीक है? वो दय हो सकता है। दय शक्तियों वाला उसका शब्द अंतिम प्रमाण नहीं हो सकता। अगर वो आपको प्रयास पूर्वक कुछ कह रहा है। क्यों नहीं हो सकता? क्योंकि वह तो लीला भी कर रहा है। जो एक जगह लीला कर सकता है। हो सकता है आपको भी कुछ कह रहा हो। यही पर आती है अपुरुषयता वेद की। बहारण उपनिषद के अनुसार वेद अपुरुषय है। भगवान ने उनको प्रयास पूर्वक नहीं दिया है। प्रयास पूर्वक मतलब हम दो तरह के कार्य करते हैं। एक चाहकर और एक बिना चाह के स्वाभाविक कार्य। तो जब हम चाहकर करते हैं तो उसमें बुद्धि का बुद्धि उसमें उपयोग में आती

01:09:53:20 है। मेरे सामने दो चीजें हैं। मैं मोबाइल उठाऊं या फिर अपना कोई जो है गैजेट उठाऊं। मेरी मर्जी क्योंकि बुद्धि का उपयोग है, प्रयास है। मगर कुछ कार्य ऐसे हैं जो हम बिना किसी बुद्धि के ही करते हैं। जो हमारे स्वाभाविक कार्य होते हैं। जैसे कि सांस लेना सांस ले रहे। माता बच्चा की एक बच्चा माता के गर्भ से जन्म ले रहा है। सांस ले रहा है। ये है स्वाभाविकता। इसी रूप में भगवान से वेद प्रकट होते हैं। ऋषियों को प्राप्त होते हैं। इसलिए वेद अंतिम प्रमाण। तुम्हारे कचरा पट्टी जेल कट्टू बाबा ने कुछ कह दिया लिख दिया वह प्रमाण नहीं है और फिर तुम कहोगे गीता क्यों प्रमाण है गीता इसलिए प्रमाण है कि वेदों को जानने वाले जो हमारे आचार्य परंपरा के आचार्य हैं उन्होंने कहा कि गीता में भगवान ने तत्व का ज्ञान दिया है इसलिए भगवान की गीता में कही हुई बातें प्रमाण है नहीं तो कर तो वो भी लीला देते इसी प्रकार से राम भगवान के रूप में उन्होंने रामो विग्रह धर्मा राम सत्य प्रतिज्ञा इसलिए राम जी की बोली हुई एक एक बात हमारे हमारे लिए सत्य है। समझ में आ रहा है घचुओं इस स्तर तक कभी सोच ही नहीं पाओगे। खैर जो हिंदू हैं उनको मैं ये बता रहा हूं। ठीक है?

01:11:08:24 की पॉइंट्स तो तत्वदर्शी है नहीं। अपशय ग्रंथ है नहीं और लीला करने वाला जो इनका व्यक्ति उसकी वाणी अंतिम प्रमाण नहीं हो सकती। क्योंकि वह आपको प्रयास पूर्वक कुछ बता रहा है। वो तो फिर वह भी लीला कह सकते हो। बोल दिया ऐसे ही। समझ गए? आगे चलते हैं। अब इनकी कुछ वस्तुनिष्ठ चोरियां है जो मैंने बता ही दिया है। वही वाला के जैसे ये लोग कहते हैं ना कि उसके पास जाने को कहा है। उसके पास जाने को कहा है। इन्होंने भी इनकी ही किताबों में इस इस व्यक्ति ने ही और सुनो तत्वदर्शी की बात से याद आया। वशिष्ठ जी को रामपाल ने ही कबीर के माध्यम से तत्वदर्शी भी कहा है। तत्ववेता भी कहा है। लो तत्व से जानने वाला और भागवत में तत्व से जानने वाला इन लोगों को हमारे जो आचार्य गण उनको कहा गया है। हमारे ग्रंथों में धर्म ग्रंथों में रामपाल को तत्वदर्शी कबीर को तत्वदर्शी कहीं नहीं कहा गया। समझ गए? शास्त्रार्थ में कबीर को हरा दिया था। रैदास ने और रैदास को शास्त्रार्थ में हराया था अपने समय के शंकराचार्य ने नोट कर लो भविष्य पुराण में लिखा हुआ है इसीलिए कहता हूं जितने भी लोग धर्म रक्षक बनना

01:12:24:00 चाहते हैं उनके लिए परंपरा का जो सिद्धांत है वो आवश्यक है। मगर वो लोग ये सोचते हैं कि इसमें तो हमारी काट है भाई। धर्म की रक्षा करने के लिए परंपरा का सिद्धांत पकड़ना पड़ेगा। तब इन जैसे जो राक्षस है ना उनका तुम वध कर पाओगे। यह बात मैं आर्य समाजियों को भी कह रहा हूं। नहीं तो ऐसे ही कुकुर मुत्तों की तरह पैदा होते रहेंगे यह लोग। करते रहो अनंत काल तक लड़ाई। सीधी बात पूछो ना ग्रंथ कहां से आया? मगर नहीं पूछोगे क्योंकि खुद का ताना-बाना भी उसी पर खड़ा हुआ है। हम पूछेंगे जाकिर नायक से पूछेंगे। रामपाल से पूछेंगे। जो व्यक्ति हमारे शास्त्र का गलत अर्थ करने जाएगा उससे पूछेंगे।

01:13:14:07 तो इसने रामपाल ने भी जगह जगह कहा है कि मैं कुत्ता हूं। है ना? मैं तो कुत्ता हूं। और कहीं और जाने की बात कही है। कबीर ने स्वयं किसी और के पास। कबीर ने रामपाल ने स्वयं लिखा है भगवान कृष्ण थे। तो जिस तरीके से यह अर्थ निकालता है गीता का अपने पक्ष में ऐसे इसके ग्रंथों से इसकी बातों के विरुद्ध हमारे पक्ष में अर्थ निकल आते हैं क्योंकि घचू है ना एक नंबर का अब एक बात आती है कि जो लोग इनकी बातों से प्रभावित होते हैं उनके लिए कड़ा संदेश मुझे आए दिन फोन किया करते हैं रामपाल का क्या हो रहा है भाई मैं बहुत सुखी हूं मैंने अपने घर के आसपास माता का अपमान रोक भैया तुम में दम हो तो तुम भी रोको ना अपने यहां। जगह-जगह जाकर के मैं ही रिपोर्ट लिखवाऊं थानों में।

01:14:08:14 मैं तो चैन की नींद सोता हूं। तुम लोगों ने अपनी मां का दूध नहीं पिया क्या? जो मुझे फोन किया करते हो। रुकवा दो, रुकवा दो। अरे जाओ जाकर के सारी सामग्री दे रहा हूं। अपने घर के बगल वाले सेंटर पर रिपोर्ट लिखवाओ थाने में। 10 चक्कर काटो वहां मूर्ख कह के मुझे फोन किया करते हो। एक ढेले भर की कोई सहायता नहीं है तुम लोगों से। फोन क्यों करते हो मुझे? मेरी मां का अपमान मेरे सामने कोई नहीं कर सकता। तुम्हारी मां का अपमान तुम्हारे सामने करेगा। तुम सोते रहो ऐसे ही। नपुंसकों की तरह। तुम्हारे घर के आसपास रामपाल रहता है। रामपाल की बातें मोटे मोटे अक्षरों में लिख के पोस्टर बनवाओ। लगवाओ बीच चौराहे पर। और जो व्यक्ति वहां पर उसका पोषण कर रहा है, उसका प्रचार कर रहा है, उसका नाम लिखवाओ नीचे सौजन्य से दुर्गा माता के साथ ऐसा ऐसा हुआ। रामपाल ने लिखा है किताब में और नीचे लिखवाओ सौजन्य से उस आदमी का नाम जो उसका प्रचार कर रहा है। देखो कैसे भागेगा वहां से वो। दुबर हो जाएगा उसका जीना।

01:15:21:06 इन लोगों का अपने अस्तित्व में रहना हम लोगों का प्रमाद है। फोन किया करते हैं। जितने लोग फोन करते हो तुम लोगों की तुम लोगों को बड़ी तकलीफ है। दुर्गा माता का अपमान हो रहा है। अपमान हो रहा है। हमारे भगवान का अपमान हो रहा है। मुझे WhatsApp किया करोगे। एक व्यक्ति सवा घंटे की भक्ति नहीं करता होगा। एक व्यक्ति पूरे दिन में सवा घंटे कौन-कौन है जो जाप कर रहा है मुझे जो मैसेज किया करते हो यह हो गया वो हो गया हाय हाय ये हो गया अरे होगा ही

01:16:01:18 केवल दिखावा है तुम लोगों के अंदर जमीर मर चुका है आत्मा सो चुकी है किसी प्रकार की कोई सहायता भेजनी नहीं है कुछ करना नहीं है यहां तक कि भगवान की भक्ति तक नहीं करनी है। कोई दूसरा आकर के तुम्हारी लड़ाईया लड़ेगा सारा। हमारा ये अपमान हो गया। हमारी मां का ये अपमान हो गया। अरे जाओ रिपोर्ट लिखा दो ना अपने थाने में जाकर के। वो नहीं सुनेगा तो एसीपी सुनेगा। एसीपी नहीं सुनेगा तो एसपी सुनेगा। घर से बाहर तो निकलो।

01:16:43:15 यह भी नहीं हो रहा है तो कम से कम सवा घंटे का तप तो करो। मुझे वही व्यक्ति फोन करना आज के बाद ये हो गया वो हो गया। बस रामपाल के चेलों ने फड़ों ने कुछ बना दिया। अनपढ़ों ने कुछ लिख कर दिया और मुझे लगे भेजने। वही व्यक्ति मुझे मैसेज करे। वही व्यक्ति मुझसे फोन पर बात करे इन चीजों के विषय में जो सवा घंटे की भक्ति पहले कर ले। स्वयं जब अपनी चीजों का सम्मान नहीं करोगे दूसरा क्यों करेगा?

01:17:17:10 बड़ी चिंता है इनको धर्म की। बड़ी चिंता है माता के अपमान की। अरे पहले खुद को जलाओ तप की अग्नि में। तब रक्षा कर पाओगे। जैसे ही जिस दिन से चालू किया ना तब तुम्हारे आसपास ऐसी विकर्ण फैलने लगेंग। उनहीं से इनका सत्यानाश हो जाएगा। चैन से सोता हूं। गुरुदेव का दिया हुआ मंत्र पढ़ता हूं। गायत्री मंत्र पढ़ता हूं। चैन की नींद सोता हूं। मेरे आसपास कोई इतनी सी भी मुझे चिंता नहीं होती कि ये हो रहा है वो हो रहा है।

01:17:58:12 क्यों नहीं होती? क्योंकि वह मंत्र के मंत्र का बल है। तप का बल है। नाम जप का बल है। किस भाषा में समझाऊं तुम लोगों को? किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं करनी है। कुछ नहीं करना है। केस लड़ रहा है। व्यक्ति लड़ता रहे। ये हो कि तबका ही बल एकत्रित करे तो उसमें भी पीछे हो। पांच 10 मिनट आसन पर बिठा दिया जाए कि करो भैया। नाम जप करो तुरंत कपकपी आने लगेगी। नहीं नहीं नहीं यह नहीं हो पाएगा। हमसे क्या हो पाएगा? रामपाल के फुअर चेले जेल कट्टू के फुअर चेले जब कोई अंटसंट वीडियो बना देंगे तो उसको हमसे हम ये कर पाएंगे उसको जो है शिवश भैया को भेज दे। शिवश नारायण द्विवेदी को भेज दो। मुझे जरूरत नहीं है तुम जैसे लोगों की। बिल्कुल नहीं जरूरत है। जो खुद कुछ नहीं करना चाहते हैं। जिनकी आत्मा मर चुकी है, कायर हो चुके हैं। अकेले लडूंगा मैं अपनी मां के लिए। सोते रहो तुम लोग और मुझे मैसेज मत करना।

01:19:17:03 अगर कुछ करना है तो प्रण लो सबसे पहले सवा घंटे की भक्ति करो कुछ नहीं फिर देखो कितना बल आएगा तुम्हारे अंदर हर शहर में एक शिवश नारायण द्विवेदी जन्म ले लेगा अपने आप आसपास क्षेत्र तुम्हारा सुधर जाएगा लिंक दे दीजिए किसी को आना हो तो आ सकता है वैचारिक मतभेद के निमित्त आना है तो फॉर्म भर के आए। अनिकेत जी और आए थे उनको भी उनको भी कह दीजिए जुड़।

01:20:34:18 [गला साफ़ करने की आवाज़] कलयुग में केवल दो तरह के बल तुम्हें काम आएंगे। बस ये जितनी राक्षसी शक्तियां है ना वो बढ़ इसीलिए रही है क्योंकि दैवीय शक्तियों को तुमने दबा रखा है। बात करोगे दुर्गा मैया शिव जी, ब्रह्मा जी, हनुमान जी उनका जाप नहीं कर पाओगे। क्यों नहीं कर पाओगे? क्योंकि वास्तविकता यह है कि तुम्हें विश्वास ही नहीं है कि जाप करने से भी कुछ होगा। मंत्र में भी कोई शक्ति है। तुम्हें खुद विश्वास नहीं है। इसीलिए यह लोग इतना बढ़ चढ़ रहे हैं तुम्हारे आसपास। मेरे आसपास नहीं बढ़ चढ़ रहे। खत्म कर दिया यहां पे इनका ताना-बाना और कुछ दिनों में पूरे देश से मिटाऊंगा। लिख लो आज ही।

01:21:35:13 लो भाई ऐड क्यों स्टेज पर? पहाड़ी जी आप ऐड टू स्टेज हो गए मगर मुझे दिख नहीं रहे हैं आप लोग हां दिख चलिए ठीक है जी जय श्री राम पहाड़ी जी जय श्री राम शिवशु भाई कैसे हो बस कृपा है राम की ओके ठीक है जो आज आपने जो यह लाइव रखी ना बहुत बढ़िया रखी। इससे अभी देखो बिल से बाहर निकलेंगे फिर और ये लोग अभी आपने एक लास्ट में जो एक बात कही कि मैं ही अकेला क्यों लडू तुम लोग मतलब कहां सोए हो? देखो रामपाल के जोज है रामपाल के जो चेले हैं वह अधर्म का काम भी बड़ी निष्ठा से कर रहे हैं। आपने देखा होगा कि अगर वो एक मैसेज भेजते हैं उनके ग्रुप में अगर उनको 10 लोग चाहिए इस जगह तो वहां 20 लोग पहुंचते हैं उनके। क्यों पहुंचते हैं? बड़े ईमानदारी से काम कर रहे हैं वो। अधर्म का काम भी बड़े ईमानदारी से। और हम जब धर्म का काम करते हैं, अगर हम 10 लोगों को बुलाते हैं,

01:22:50:16 तो दो लोग निकल के आते हैं। क्यों? सोए हुए हैं ना? कोई मतलब नहीं। हां, उधर शिवश जी लड़ रहे हैं। उधर टीआर पहाड़ी लड़ रहे हैं। उधर कोई और लड़ रहा है। हमें क्या? बस पीठ पीछे वो बस तालियां बजाने से मतलब है। तो आपने जो इस लास्ट में जो एक बात कही बहुत सही बात कही है कि रामपाल का अस्तित्व तब तक है जब तक हम सोए हुए हैं। और इसीलिए अभी तक टिका है वो कितना आसान है मेरे मैंने वह तक दे रखा है सारा एक ड्राइव बना दिया उसप रामपाल के सारे काले कारनामे हैं पर्याप्त है भाई तुम पूरी दुनिया में बंद मत करवाओ ना अपने घर के पास वाला सेंटर बंद करवाओ अपने यहां जाओ रिपोर्ट लिखाओ पर नहीं करेंगे चलो ठीक है मत करो तुम्हारा भैया गृहस्थ व्यक्ति हो कोई एक अकेला ही सैनिक बने तुम मत बनो अरे भाई तो सवा घंटे का तप तो करो जिससे तुम्हारे तप के बल से उसको भी सहायता मिले। वो भी नहीं करोगे। तुमको खेल लगता है नाम जप में खेल है तो जब तुम खुद खेल मानते हो अपने देवी देवताओं को अपने भगवान को उनके मंत्र को उनके जाप को तो फिर कोई दूसरा उनका मजाक क्यों नहीं उड़ाएगा?

01:24:06:24 जिस दिन तुम लोगों को वैल्यू हो जाएगी ना मंत्र की मंत्र की शक्ति में बिलीव हो जाएगा। आस्था हो जाएगी जिस दिन उस दिन से इन लोगों का सही तरीके से पतन जिस जिसके जिसके हृदय में मंत्र शक्ति भगवान के प्रति आस्था अटूट विश्वास ये सब वास्तविकता में हृदय में बैठ जाएगा ना जिस दिन केवल अपनी अपने वर्चस्व के लिए तुम लड़ना बंद कर दोगे वास्तविकता में तुम्हारे अंदर अपने भगवान के प्रति निष्ठा होगी तुम्हारे आसपास इस जैसे राक्षसों का अंत होना तुरंत शुरू हो जाएगा तुरंत तुम्हें कुछ भी नहीं करना पड़ेगा केवल अपने धर्म और राष्ट्र के हित के लिए तप करना शुरू करो। जी पाड़ी

01:24:48:14 सही कहा कि आवाज उठानी ही पड़ेगी क्योंकि एक के एक के बोलने से नहीं होगा। जैसे वो लोग एक जो शक्ति प्रदर्शन प्रदर्शन बोलते हैं जिसको कि वो कहीं भी अगर कुछ ऐसा कार्य होता है तो वो लोग तुरंत पहुंचते हैं उस जगह। और हमारे व्यक्ति हमारे लोग क्या हैं कि उनके सामने यह चीजें बट रही होगी। यही चीजें वितरित की जा रही है पुस्तकें पर उनको एक वीडियो बनाकर वहां पर जाके उनका विरोध करने की हिम्मत नहीं है।

01:25:27:10 अरे जाओ सामने सवाल पूछो उनसे पुलिस स्टेशन में जाओ। अरे रिपोर्ट लिखाओ ये चीजें नहीं होगी। रामपाल के बोलने की हिम्मत आई कहां से इतनी हम ही लोगों ने तो दी उसको वो जानते हैं ना सब नपुंसक हो गए हैं दुर्गा माता के जो अपने आप को पुत्र कहते हैं नपुंसक हो गए हैं वो सब वो जानते हैं चीज इसीलिए ऐसा करते हैं ज्ञान चर्चा की चुनौती दे रहे हैं ज्ञान चर्चा की चुनौती जब ज्ञान चर्चा के लिए बोला जाए तो मुंह छुपा के भाग जाते हैं यह है भगोड़े ये करेंगे ज्ञान चर्चा गाली देने के अलावा दूसरी चीज इनको आती नहीं है।

01:26:14:09 बस खुद को बस कैसे भी बड़ा सिद्ध करना है इन लोगों ने। साबर डियर है ये लोग। जिस दिन सामने आएंगे तो जल बिन मछली की तरह फड़फड़ाएंगे। हां हां नीचे मैं देख रहा हूं रामपाल के चेले। आज [नाक से की जाने वाली आवाज़] उनको रात में नींद नहीं आएगी और कल देखना है रामपाल के जो ये व्यक्ति देखो क्या पूछ रहा है दुर्गा माता का पति कौन है तुम्हारा बाप कौन है [हंसी] तुम्हारा पिता कौन है अच्छा जो हम चर्चा अच्छा और सुनो सुनो सुनो सुनो जिस जिस जज ने रामपाल को जमानत दी है वो कौन है उसका क्या नाम है किससे रहम की भीख मांगी है रामपाल अच्छा अच्छा जो ये पूछ रहा है जो हमारे हमारे बीच जो चर्चा चल रही है उस इस सवाल का इस चर्चा से संबंध क्या है अच्छा ये इससे अच्छी एक बात याद आ गई बहुत बढ़िया इन्होंने अच्छा किया ये बहुत अच्छा हुआ कुछ रह गया था वही मैं कहूं कि क्या रह गया था इन जैसे लोगों का भी इंतजाम था मेरे पास वो बता [नाक से की जाने वाली आवाज़] दूं बिल्कुल बिल्कुल तो भाई

01:27:29:26 [गला साफ़ करने की आवाज़] दो पहले ये बात मैं पहले बता चुका हूं। दोबारा से बता रहा हूं। इन्होंने रामपाल ने कहा है कि काल जो है सबसे वही है एंटिटी जो फंसा रही है। और काल जो है इसमें लिखा हुआ है गरिमा गीता की पृष्ठ संख्या 143 पेज दिखाने की जरूरत नहीं देख लेंगे ये लोग। उसमें इन्होंने लिखा है कि मैं सब प्राणियों में व्यवस्थित काम हूं। सेक्स हूं। इंग्लिश में लिखा हुआ है। दिखा दो। दिखा थोड़ा इनको तसल्ली हो जाएगी। इसमें जो इनका काल है वह सब प्राणियों में व्यवस्थित एस इ एक्स सेक्स है। यह वो कह रहा है और वही मन भी है। यही इसमें इसमें ये भी लिखा है वो मन है। तो अब प्रश्न ये उठता है कि जो जो रामपाल की इस फिलॉसफी को मानते हैं उन उनके जन्म के क्योंकि मन तो सब में है। है ना? तो यहां पर कहा कि मन भी है। काल जो है वह मन है। काल जो है वह सेक्स है। और यह पेज नंबर है 143। तो जितने रामपाल के चेले हैं जो विष्ठा उगल रहे हैं वो ये राघव दास रोहित इत्याद जितने भी है जो

01:28:45:01 विष्ठा उगल रहे हैं। प्रश्न इन सब से है और जितने भी यहां पर विठा उगल रहे हैं। तो जितने भी यह लोग हैं इनसे सवाल यह है कि जब तुम्हारा तुम्हारे जन्म का बीज धारण कर रही थी माताएं जब माता ने जहां जहां पर इन लोगों की माताओं ने बीज धारण किया था गर्भ धारण किया था तो वो इनके पिता से किया था या काल से किया था किससे किया था ये एक सवाल बनता है ये लोग पूछ रहे हैं ना दुर्गा माता का पति कौन है तो इनके जन्म की जो प्रक्रियाएं प्रक्रिया है जहां पर संतान के लिए गर्भधारण होता है तो वहां पर काल था काल नामक वो राक्षस काल नामक राक्षस से वह धारण हुआ है या फिर जिनको ये अपने पिता के रूप में ख्यापित करते हैं उनसे गर्भधारण हुआ है ये जरा ये लोग बताएं जो लोग पूछते हैं कि दुर्गा माता का पति कौन है जय श्री राम जी हां ये दिखा दो इनको दिखा दो पेज खोला है ना ये देखिए सेकंड पैराग्राफ जो दिख रहा है उसमें देखिए यह लिखा हुआ है सेकंड पैराग्राफ में हां

01:30:01:20 व्यवस्थित काम हूं और ब्रैकेट में सेक्स लिखा है ऐसा नहीं है तो देखो जहां पर तुम्हारा जो ये गर्भधारण का विषय है वहां पर सेक्स भी है और दोनों ही लोगों का मन भी है तो वो जो शब्द यूज़ हो रहा है बार-बार मुझे बोलने में असहजता हो रही इसने पता नहीं कैसे लिखा है खैर कुछ नहीं तो जो जो जहां जहांजहां पर भी गर्भ धारण हो रहा है वहां पर ये भी है सेक्स भी है और ऊपर देखो मन मन भी और इस ग्रंथ में अन्य कई जगह लिखा हुआ है मन भी काल है ये भी लिखा हुआ है इनके ग्रंथ में जब वीडियो कट करके लगाएंगे तो अन्य जगह से रेफरेंस दे देंगे काल मन भी है तो वहां पर काल भी था ये इनकी किताबों से सिद्ध हो रहा है इनके पिता भी थे और काल भी था ठीक है तो गर्भ धारण कैसे हुआ है वो उसमें थोड़ा स्पष्ट करना चाहिए जो ये पूछ रहे दुर्गा माता के पति कौन [नाक से की जाने वाली आवाज़] है ना

01:31:03:13 अच्छा इस किताब को ये लोग बोलते हैं कि आज के बाद जब भी कोई रामपाल वाला आज के बाद जब भी कोई रामपाल ही आपसे पूछे दुर्गा माता का पति कौन है तुम उसको यह वाला प्रश्न दिखाओ और पूछो कि तुम काल से जन्मे हो या उस अपने उस पिता से जिसको तुम अपने पिता के रूप में बताते हो। तुम्हारा बाप कौन है? तुम्हारे पिता कौन है? ठीक है जब भी कोई रामपाली पूछे अरे यह बहुत बड़े दोगले हैं ये कुछ भी कह सकते हैं नीच है नीच नीच है ततक ज्ञान वाले हैं जी अनिकेत जी जय श्री राम

01:31:43:06 जी जय श्री राम भैया जय श्री राम प्रणाम भैया जय हो हां वो मैं कह रहा था गुरु वाली बात थी ना एक गुरु वाली बात थी ना आप दोनों ही लोगों मुझे कभी ना कभी गुरु कहा है यहां बता दीजिए थोड़ा सा वो इनको आसानी हो जाएगी मेरे साथ साथ जी जी जी हम नाम नहीं लेते हैं हम केवल भैया कहते हैं शिवश भैया फिर भी आप लोग के लिए नाम लेकर के कह रहे हैं जो आपके सामने बैठे हैं शिवश नारायण द्विवेदी जी वो हमारे गुरु है स्पष्ट रूप से कह रहे हैं और जब पूछेंगे तब हम कहेंगे ठीक है भाई रामपाल गुरु की बात गुरु से होगी ना अगले गुरु और और लोगों से मिलवा दूंगा अगर तू कहेगा भैया 50 लोगों से मिलवाओ 100 लोगों से मिलवाओ ऐसे ही किसी दिन लाइव सेशन में बता दूंगा ऐसे ही सिद्ध होगा ना कौन किसका गुरु जी पाणी जी हां कुछ कह रहे थे आप अंकित जी जय श्री राम जी जी वही कह रहा था कि एक बहुत ही जबरदस्त चीज आपने लास्ट में कही कि कुछ नहीं कर सकते हो तो कम से कम सवा घंटे का नाम जप तो करो। यह मैं सबको बताना चाहता हूं कि जब मैं जुड़ा था तो भैया ने सबसे पहला मेरे को उपदेश यही दिया था कि तुम जप करो अपने आप तुमको

01:32:58:07 तुम्हारा गुस्सा भी कंट्रोल हो जाएगा। तुमको जवाब देने की शक्ति भी मिलेगी। तो यह मैं एक समझ लो कि मैं अपना अनुभव शेयर कर रहा हूं। तो सबको यही रिक्वेस्ट करूंगा जो भैया ने लास्ट में बोला है कि आप सहयोग कर सकते हो तो करो। नहीं कुछ कर सकते हो तो सवा घंटा का नाम जप करो। भैया का तो नाम जप करो। चलता ही है सेशन पांच वक्त तो सब ये बहुत अच्छी चीज बोली आपने भैया कि मैसेज बहुत लोग करते हैं मेरे को भी बहुत लोग मैसेज करते हैं कि शिवश भैया से बोलिए ऐसे शिवश भैया से बोलिए वैसे मैं भी सबको वही बोलता हूं कि पहले नाम जप कीजिए क्लास के लिए कितने लोग मुझसे पूछते हैं तो मैं बोलता हूं जुड़ जाइए तो बोलते हैं अभी नहीं बाद में जुड़ेंगे मतलब ये केवल मजा लेने के लिए आते हैं ये एंटरटेनमेंट चल रहा है क्या दो जन का केवल ये क्या कोई पॉलिटिकल डिबेट नहीं चल रही है धर्म धर्म और अधर्म की लड़ाई चल रही है और तुम धर्म के तरफ हो या अधर्म की तरफ हो तुमको खुद को नहीं पता है। केवल आनंद ले रहे हो। अरे अधर्म ने क्या बोला? ऐसा बोला। अरे धर्म ने क्या बोला? ऐसा बोला। बहुत जबरदस्त बात बोली भैया आपने। जी भैया। ठीक है। आज की चर्चा हो गई पूरी। पहाड़ी जी चले गए हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़]

01:34:11:06 जी भैया। मनप्रीत जी को ले लेते हैं। हां मनप्रीत जी जय श्री राम जय श्री राम सत श्री अकाल जी बहुत अच्छी चर्चा सुनी आपकी पूरी चर्चा सुनी बहुत मजा आया और कुछ सीखने को मिलता है इस चर्चा में भले ही कुछ हम जुड़े रहे और इसी चर्चा में बहुत कुछ सीखने को मिल मिल जाता है हम लोगों को भी तो देखने अगर आप सिर्फ देखते भी हैं इस चर्चा को पूरी तरह देखेंगे भी और साथ में जाप करेंगे जैसे जैसे आपने बताया तो तो जो सोने पर सुहागा हो जाता है जैसे वो चीज हो जाएगी पूरी तरह वीडियो अगर हम देखते भी है

01:34:56:14 ठीक है तो किसी को भी जिसकी भी मां ने निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया है और वो हमारे विरोध में रामपाल की किसी बात को सही कर सकता है सिद्ध तो वो हमसे संपर्क कर सकता है किसी भी प्रकार के वैचारिक मतभेद के निमित्त यदि रामपाल के पूरे गैंग में किसी की भी माता ने किसी भी मां की कोख ने ऐसा कोई लाल जन्मा हो और उसको निष्ठा पूर्वक दूध पिलाया हो जो रामपाल की हमारे विरोध में कही गई कोई बात उसके द्वारा धर्म के विषय में ब्रह्म के विषय में वो सही सिद्ध कर सकने का क्षमता रखता हो तो वो जो है हमारा नंबर है 7408301869

01:35:42:24 और यह सब ढकोसलेबाजी करना तुम लोग बंद करो कि मुंड मुंडका आश्रम आ जाओ यहां आ जाओ वहां आ जाओ ठीक है चर्चा अगर ऑफलाइन होनी है तो किसी बीच के स्थान पर होगी ऑनलाइन होनी है तो यह देखा जाएगा कि तुम्हारी औकात क्या है अगर औकात गई बीती है तो चर्चा हमारे चैनल पर होगी नहीं तो किसी मध्यस्थ चैनल पर होगी तुम्हारे पर नहीं हमने बुलाया हमने बुलाया ये नहीं आया कौन होते हो तुम बुलाने वाले भाई बीच की जगह पर चर्चा करना क्यों क्यों बुला रहा है मुंड को मुंडका आश्रम आ जाओ यहां आ जाओ चैलेंज कर रहा हूं तुझे दो कौड़ी की औकात है तुम्हारी और तुम लोग मुझे बुला रहे हो और मैं तुम्हें अपने यहां नहीं बुला रहा हूं। मुझे अपना अपने आसपास का जो वातावरण दूषित नहीं करना है तुम लोगों की विष्ठा रूपी शरीर से। ठीक है? तुम्हें अपने यहां नहीं बुला रहा हूं मैं। बीच की जगह पर आओ ना भाई बीच में मिलो ना तुम्हारा ना हमारा है साहस पिया है मां का दूध तो बता देना बनाना वीडियो इस पे

01:36:55:24 [गला साफ़ करने की आवाज़] हां जी मनप्रीत जी जी जी सही है भैया आपने सब कवर कर ही लिया है बहुत बढ़िया ठीक है फिर समय देने के लिए आभार और सभी धर्मनिष्ठ लोगों से मैं कहना चाहूंगा कि केवल समीक्षा ना करें। केवल मूक दर्शक बनके ना बैठे। आज अगर आप यह सोच रहे हैं कि फलानी जगह आग लगी हुई है कोई दिक्कत नहीं। मेरे घर पर तो लगी नहीं हुई है। तो आप जो है उस आग का आग की प्रतीक्षा कर रहे हैं। तो मूकदर्शक होकर मत देखें। अगर कुछ कर सकते तो अवश्य करें और कुछ नहीं कर सकते हैं तो तप का बल एकत्र करिए। यही आपको बचाएगा। नीचे संग का बल और ऊपर ईश्वर का बल। उस ईश्वर पर विश्वास लाइए। जिस ईश्वर के लिए आप लड़ना चाहते हैं। जिस ईश्वर के अपमान के लिए आपको दुख होता है। उस पर विश्वास लाइए, श्रद्धा लाइए, निष्ठा लाइए। उसके मंत्र पर विश्वास लाइए। उसके नाम जप पर विश्वास लाइए। वो नहीं है तभी नहीं कर रहे हैं। यदि होता विश्वास तो सुबह उठकर के सबसे पहले उसी के पीछे ना पड़ते। इसमें

01:38:11:06 बहुत शक्ति बहुत शक्ति है और उसके बाद उससे क्या होता है कि आपके आसपास का वातावरण जो आपके पहले प्रतिकूल था वो अनुकूल होना शुरू होता है। वहां के परमाणु सुधरना शुरू हो जाते हैं। बहुत सी चीजें होती है। प्रकृति आपके साथ हो जाती है। जहां जाओगे वही कार्य पूरा होगा। जिस काम में हाथ डालोगे उसी काम को वही कार्य आपके पक्ष में होने लगेगा। यह सब चीजें हैं। विश्वास करिए भगवान पर दो मिनट एक मिनट जी जी बोलिए ऐसे ही जो हमारे सिख धर्म में भी इन लोगों को मैं वहां जाता रहा था मैं एक्स था थोड़ा मेरा भाई जाता था वहां पर तो इस वजह से मुझे जानकारी भी है वहां की तो थोड़ा सा इन लोगों ने सिख धर्म को भी अपना चंगुल में फंसा रखा है तो आपके माध्यम से थोड़ा सा ये बताएंगे कि ऐसा सिख धर्म वाले भी वहां जाते हैं और इन लोगों ने एक दो चीज एक दो भक्तों को एक दो सिख धर्मों की जैसे वहां पर पगड़ियां उतरवाने को भी बोला हुआ है। एक बहुत बड़ी बात है जो आपके चैनल पे ही कह सकते हैं। कहीं छोटी मोटी जगह पर कह भी नहीं सकते ताकि सब लोगों को मैसेज जाए कि आप

01:39:26:14 आपकी ही बात सुन लें। सिख धर्म के जो हमारे जो साथी हमारे भाई हैं और उनके चंगुल से निकल जाए और जो है अपनी मान मर्यादा में रहे और कम से कम इनकी एकद घंटे की वीडियो शिवान जी की कि भी देख लेंगे तभी उनको पता चल जाएगा कि कैसे फसाया जाता है और दुनिया में क्या-क्या चल रहा है और हम लोगों को कैसे बचना है और एक ही जगह पे तीनों चीजें हमें मिल जाती है। बचना कैसे है और अवेयरनेस और उनकी जानकारी सारी जानकारी भी तो इन इस चैनल को भी शिवा जी के देखिए ज्यादा से ज्यादा मेरे भाई सिख धर्म के भी क्योंकि उन लोगों ने इस तरफ से भी काफी ज्यादा ज्यादा लोगों को अपनी ओर खींच रखा है। जी चलिए ठीक है। [गला साफ़ करने की आवाज़] तो समय देने के लिए सबका आभार और मू द मू दर्शक बनकर ना बैठे बीड़ा उठाएं आपके सामने जो चीजें हो रही है उसे बदलने का और सबसे पहले जो ईश्वर के तप का बल है नाम जप का बल है सवा घंटे की मिनिमम भक्ति करना स्टार्ट करें जिससे कि आपके आसपास का वातावरण

01:40:42:07 आपके जो युद्ध है संघर्ष है उसके प्रतिकूल उसके प्रतिकूल ना रहे अनुकूल जय श्री राम जय श्री राम। [संगीत]

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 1:41:23 · 02 Jul 2026

रामपाल चर्चा से पीठ दिखाकर भागा इंटरनेट पर चिल्लाने वाले चेलों को बताया अनपढ़

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B · Video सतलोक आश्रम में 2023 की ज्ञान चर्चा
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B · Live मूर्खों की चौपाल : केवल रामपालीयों की कमी रह गई
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A · Live गीता के नाम पर रामपाल के बोलबचन अध्याय 3 Ep- 5(a) #satlokashram
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