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00:00:04:02 शेखर आर्य बोल रहा हूं जी भिवानी से भिवानी से कौन शेखर आर्य शेखर आर्य बताइए हां जी आपको निमंत्रण पत्र देना था 30 31 एक दो तारीख को दिल्ली रोहिणी सेक्टर 10 में कार्यक्रम है आज अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन तो उसमें आप अपने विचार रखना चाहे या डिबेट करना चाहे जिस भी विद्वान भगवान से आप कर सकते हैं और शायद आपको प्राप्त हो गया हो आपका निमंत्रण पत्र या ये भेज देगा आपके पास निमंत्रण पत्र मुझे प्राप्त हुआ है पर उनको लेकर के उसको लेकर के कुछ सवाल हैं जो अपेक्षित क्या सवाल है क्या सवाल है जी सबसे पहली बात तो यह है कि उसमें आयोजक के नाम में लिखा हुआ है कृतेश पटेल का नाम। अच्छा जी। कृतेश पटेल ने हमारे साथ गाली गलौज इत्यादि के रूप में बहुत सारी ऐसी चीजें की हैं जिसके कारण हमने उसको ब्लैक लिस्ट कर रखा है व्यक्ति को। उसने हमें बहुत कहा कि भाई चर्चा में आ जाओ। तो हमने उससे कहा कि आप क्षमा मांग लो। आपने जो तुम्हारा यह कर देंगे,
00:01:19:10 परंपरा के चितचड़े उड़ा देंगे। उससे उस व्यक्ति से डायरेक्टली टेलीग्राम पर किसी समय हमारी बात हो रही थी। चर्चा में आने के संबंध में जब चर्चा में आने के संबंध में बात हो रही थी तो उसने अपने मन मुताबिक कुछ नियम बताए कि ये ऐसे ऐसे नियम रहेगा। हमें वो नियम पसंद नहीं आए कि नहीं उसने कहा कि एक व्यक्ति को इतना मिनट मिलेगा बात करने का। तो हमें लगा नहीं भाई बात करने का ये मिनट इतना तय मत करिए। वो उचित नहीं लगा। हमने कहा कि नहीं अधिक टाइम रखिए एक व्यक्ति के बोलने का। तो इस बात को लेकर के असहमति हुई। असहमति होते ही वह ऐसे बोलने लगा कि चीथड़े उड़ा देंगे। यह है वह है। यह सब चीजें वह करने लगा। तो फिर हमने फिर हटे वहां से दूर और हटे तो फिर उसने दूसरे दिन और ज्यादा अभद्र शैली में बहुत सी बातें। फिर उसके बारे में हमें पता लगा कि उसने जो है गालियां तक दी हुई है आदि शंकराचार्य जी को ट्वीट ट्वीट के माध्यम से और हम लोगों को बहुत मतलब द्वेष भावना से और बहुत गाली पूर्वक बातें करता है। तो कुल मिलाकर के मैंने एक वीडियो जारी करके कह दिया कि भाई देखो अ मर्यादा का उल्लंघन करने वाले के साथ चर्चा नहीं होती
00:02:34:16 है। युद्ध होता है। हम्म हम्म आप इतनी सीमा तो आपको हम कितने भी विरोधी हों मगर यदि हमें वाद संवाद का स्थान रखना है अपने बीच में तो कुछ तो मर्यादा का पालन करना पड़ेगा एक दूसरे के प्रति हां है ना कि मैं तू तड़ाक करूं अभी जैसे वाद संवाद करना है और मैं वहां भी आज भी जाऊं वहां पर दयानंद जी के लिए जो है तू तड़ाक की शैली में बात करने लगूं तो वो क्या आप लोगों को स्वीकार होगा एक मर्यादा का पालन तो आपको भी करना पड़ेगा और हमें भी करना पड़ेगा तो उसने उस मर्यादा को लांगा तो उस व्यक्ति को हमने ब्लैक लिस्ट कर दिया कि भैया इसके साथ हम चर्चा करेंगे। इसके साथ मंच साझा नहीं करेंगे। अब वह व्यक्ति इस आयोजन का इस कार्यक्रम का आयोजक है मुख्य। ठीक है? पहली बात। दूसरी बात यह है कि इस कार्यक्रम का एक आयोजक जो है मोहित गॉड भी है। यद्यपि मोहित गॉड ने प्रत्यक्ष रूप से हम पर कोई वो नहीं किया था आघात। परंतु उसको शायद यह लगा कि मैं उसे जानता हूं जबकि मैं उसे जानता नहीं था और मैं उसे जानता हूं के चक्कर में ही उसको यह लगा कि मैं उससे बात नहीं करना चाहता। कुल खैर कुल मिलाकर के वो एक ऐसी चर्चा से जुड़ा था जाकर के उसने मंच साझा किया था
00:03:49:18 जहां पर मेरे ऊपर व्यक्तिगत प्रहार ही नहीं किए गए। सिद्धांतिक प्रहार नहीं थे। व्यक्तिगत कि भैया यह ऐसे रहता था। पहले यह जींस पहनता था। यह टपोरी था यह छपरी था। यह था यह वह था। ठीक है और उसमें समर्थन पूर्वक सहमति पूर्वक ये मोहित गड और यह जो कृतेश पटेल ये दोनों लोग शामिल थे उस चर्चा में यहां तक कि मेरे ख्याल से इसमें आर्यवीरा भी एक वो है वक्ता वो आर्यवीरा के ही चैनल पर हुआ था हम्म और मुझे तो मुझे मेरे छोटे भाई छोटे भाई के साथ अगर कोई लड़की खड़ी है तो वो और मेरी पत्नी हर बात का वहां पर मजाक उड़ाया गया सार्वजनिक रूप से और वो वो लोग डायरेक्टली यहां पर जुड़े हुए हैं। चलिए मोहित गड ने मैंने पूरी चर्चा आज तक सुनी नहीं है। वह समर्थन पूर्वक गया था और जो है उसने मोहित गॉड ने डायरेक्टली मुझे कुछ नहीं कहा। तो मैं यह सोच सकता हूं कि मोहित गॉड से आगे चलकर के भविष्य में कहीं ना कहीं साथ में बैठकर के चर्चा हो सकती है। क्योंकि मोहित गॉड की तरफ से यह भी आया था कि वह जब चर्चा होगी तब माफ़ी मांग लेगा। तो मोहित गड को तो इस इसका वो दिया जा सकता है। क्या कहते हैं इसको छूट दी
00:05:04:19 सार सकती है कि भाई उसने डायरेक्ट कुछ किया नहीं है। वो बंदा यह भी कह रहा है कि हम जब चर्चा होगी तो हम क्षमा भी मांग लेंगे और वो उस वहां से दूर हो गया। अब मगर मोहित गॉड एक बात यह कहता है कि मैं आर्य समाज नहीं हूं। कृतेश पटेल के लिए भी जब हमने जो हमें पूर्व में जो लेटर इत्यादि आए थे पत्राचार हुआ था आर्य समाज के साथ तो आर्य समाज ने कृतेश पटेल की ओर से ही लेटर वगैरह आए थे तो पहले मुझसे एक व्यक्ति ने ऑन कॉल ये कह दिया था कि कृतेश पटेल हमारी संस्था के कोई पदाधिकारी हैं जो वो रिसीव हुआ चैनल चलाते हैं। ठीक है। परंतु जब मैंने लिखित रूप में उनको कहा कि आप कृतेश पटेल आपकी संस्था का पदाधिकारी है जो ऋषिवाच नामक ऋषिवाच मैंने कहा था ऋषिवाच जो चैनल चलाता है और उसने इतनी सब अभद्र चीजें कही हैं तो आप पहले क्षमा मांगिए फिर आपके साथ जो है वो होगा जब आपकी संस्था का व्यक्ति है तो तो आपको क्षमा मांगनी चाहिए उसकी ओर से तो आपकी संस्था ही यह लिख देती है कि हम किसी ऋषिवाज नाम के चैनल को जानते ही नहीं है यानी कि फोन पर आप कह रहे हो कि जानते हैं मगर लिखित रूप से आप उसको अस्वीकार कर रहे हो। फोन
00:06:19:20 पर आप कह रहे हो कि हम जो है क्या कहते हैं हम वह चैनल हमारा ही है। हम ही लोग संचालित करते हैं और लिखित रूप से आपने मना कर दिया तो इसको धोखाधड़ी कहते हैं। अब धोखाधड़ी जब एक बार हो चुकी है। फिर आज जब आपने मना कर चुके हो पूर्व में कि हम उसे जानते नहीं है। वह चैनल हम नहीं चला रहे हैं। आज वह आपके यहां पर ऑफिशियली जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। तो यह एक ऑफेंसिव चीज नजर आ रही है। अपराधिक दिख रही है। जो व्यक्ति कह रहा है मैं आर्य समाज नहीं हूं। वही आयोजक बन करके उसमें लिखा हुआ है कि आर्य समाज जी तो इसमें आप एक षड्यंत्र का जैसा भी दिखाई दे रहा है कि आप अपनी बातों को बार-बार बदल रहे हैं। और दूसरी बात सुभाष जी मैं पूरी कर लूं मैं बात पूरी कर लूं। और षड्यंत्र भी दिख रहा है कि आप बार-बार जो है अपनी बातों को बदल रहे हैं। दूसरी बात मेरे द्वारा ब्लैक लिस्टेड व्यक्ति वहां पर मौजूद है जो उसका ऐसा नहीं है कोई साइड का रोल निभाने वाला व्यक्ति वो आयोजक है। तीसरी बात जो व्यक्ति स्वयं ही अपने वक्तव्य दे चुका है कि मैं आर्य समाजी नहीं हूं। अब वह साहब कोई जलसा हो रहा है तो उसमें वह आहार समाधि संयोजक के रूप में वहां पर गिना जा रहा है। तो इस प्रकार से किस कैसे हम विश्वास धारण पूर्वक जो है ऐसा सोचे कि हम वहां पर जो है
00:07:34:24 सहजता के साथ आएंगे और जाएंगे। अब इसके साथ ही साथ कार्यक्रम को लेकर के भी कुछ सवाल है। जैसे कि उन्होंने कहा कि आपकी आर्य समाज के विद्वानों के साथ चर्चा होगी। तो उसका जो प्रारूप है वह मुझे स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है कि क्या प्रारूप होगा। मैं वहां जाकर के पूरे दिन बैठूंगा या किस समय से किस समय के बीच में जिस चीज के लिए मैं जा रहा हूं वो चीज मुझे प्राप्त होगी। यह सब प्रारूप बिल्कुल भी नहीं प्राप्त है। दूसरी बात आर्य समाज के विद्वान के साथ होगी तो क्या वो आर्य समाज का विद्वान यही है, मोहित गॉड है या ऋषि उवाच्य ही है? या कोई और है? किसके साथ होगी? देखो। नहीं नहीं। आप बोल बता देना। मैं मैं अपनी बात जब खत्म करूंगा ना, तो आपके लिए स्पेस छोडूंगा उसमें कि आप इन पर तो मोहित गॉड है तो फिर बात उसमें आती क्या मोहित गॉड ने ऑफिशियली यह एडमिट कर लिया है कि मैं आर्य समाजी हूं। है ना? जब आर्य समाजी विद्वान के रूप में वहां वो मिलने वाले हैं वह लोग तो उसने तो पहले कहा मैं आर्य समाजी नहीं हूं। तो यह चीज क्लियर हो या ऋषिवाज के साथ होगी तो उसने क्या मान लिया है? तो क्या तब संस्था ने झूठ बोला था? यह सारी बातें इस इन सब बात इन सब विषयों में तो स्पष्टीकरण चाहिए।
00:08:49:25 दूसरी बात यह है कि चलो इन सब का एक संतुष्टिजनक स्पष्टीकरण यदि प्राप्त हो जाता है। उसके बाद में यह बात आती है कि यदि ऋषिवाच तो ब्लैक लिस्टेड है। वो जब तक माफी नहीं मांग लेगा उसके साथ तो मैं मन साझा नहीं कर सकता। मगर यदि मोहित गॉड के रूप में ये जो स्पष्टीकरण है ये प्राप्त हो जाते तो मोहित गड से मुझे चर्चा करने में कोई आपत्ति नहीं है या ऐसा कोई व्यक्ति जिसको मैंने ब्लैक लिस्ट नहीं किया है उसके साथ चर्चा करने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है परंतु यदि मैं आर्य समाज का विरोधी हूं आर्य समाज का समर्थक नहीं हूं आर्य समाज की विचारधारा का मैं समर्थक नहीं हूं बल्कि विरोधी हूं तो मैं उस अह कार्यक्रम में कार्यक्रम को प्रोत्साहन क्यों क्यों दूं जो कार्यक्रम आर्य समाज की प्रसिद्धि के लिए आयोजित हो रहा है। भाई आप न्यूट्रल रूप से एक चर्चा रखते कि भैया उस चर्चा उस कार्य उस कार्यक्रम का उद्देश्य ही है दो विपरीत विचारधाराओं के बीच में संवाद हो। वो तो ठीक है। मगर आपका तो वो जलसा है। 150 वर्षगांठ है। हमारे हिसाब से तो वो होना ही नहीं चाहिए था। उसका मूल आधार ही गलत है। तो हम वहां जा करके उसकी 150 वर्षगांठ में अपना योगदान दें। वहां समर्थन करें। फिर वह प्रारूप भी नहीं है कि हम वहां कितने अंश में जाएंगे, कितने
00:10:04:28 में नहीं जाएंगे। यद्यपि तो जाना ही नहीं चाहिए। मगर आपकी ओर से तो वह स्पष्टीकरण है ही नहीं। मगर यदि मैं जाऊंगा अभी तो किसी न्यूट्रल कार्यक्रम में जाऊंगा ना कि उसके महिमा आर्य समाज की महिमा मंडल में जो कार्यक्रम आयोजित हो रहा होगा उसमें जाऊंगा। भाई एक सिंपल सिंपल एक डिबेट या जो भी है चर्चा है या आप उसको शास्त्रार्थ कहते हो। तो आप उस रूप में उस कार्यक्रम को जब रखेंगे तो मैं वहां पहुंचूंगा ना। जब जब मैं आर्य समाज को मानता नहीं हूं कि वह उचित है उसका होना तो उसके महिमा मंडन में निमित्त बनने के लिए मैं वहां क्यों पहुंचूंगा? तो यह जब सारा स्पष्टीकरण हो जाएगा तब ऋषिवाद जैसे ब्लैक लिस्टेड लोगों को छोड़ के मेरा यह कहना होगा कि आप न्यूट्रल कार्यक्रम आयोजित करें। जिसका उद्देश्य जिसका जिसका जिसका उद्देश्य केवल चर्चा होगा उसमें मैं आपके विद्वानों के साथ चर्चा कर सकूंगा। मैं महिमा मंडन सुनने और करने तो नहीं आऊंगा ना वहां पर। आर्य समाज का अब बताइए। अब मेरी बात सुनो देखो जी आप ये कह रहे हैं कि एक बात मैं बता दूं। मैं यह जो चर्चा है ना तो अपने जवाब के रूप में सार्वजनिक कर दूंगा जो आपसे कर रहा हूं। तो मुझे अलग से मेहनत नहीं करनी पड़ेगी लिखने की या वो करने की। ठीक है ना? अच्छा
00:11:20:02 जी हां तो मैं ये कह रहा हूं कि जब आप ये कह रहे हैं कि महिमा मंडन के लिए मैं क्यों जाऊं यहां पे कार्यक्रम में क्यों आऊं तो आप बिना बुलाए या बिना किसी को बताए आर्य समाज में चले जाते हैं वहां पर डिबेट करने लग जाते हैं। तो मैं किसी कार्यक्रम का हिस्सा बनने थोड़ी ना जा रहा हूं। सुनो तो एक बात तो ये दूसरी बात जब आप आर्य समाज के पुरोहित से जो आप चर्चा करते हैं, किसी विशिष्ट विद्वान से या आधिकारिक विद्वान से आप उसी विषय में चर्चा कर सकते हैं इसी कार्यक्रम में तो कोई परेशानी तो नहीं होनी चाहिए आपको? मैंने अपनी परेशानी बता दी ना? मैं जब किसी आर्य समाज के मंदिर में जाता हूं एक मिनट। मैं जब आर्य समाज के किसी मंदिर में जाता हूं, किसी पुरोहित के साथ चर्चा करता हूं तो मेरा उसके साथ चर्चा करना कार्यक्रम का अंग नहीं होता है। अगर वहां कार्यक्रम है भी तब भी वो कार्यक्रम का अंग नहीं होता है। वह अलग से ही होता है। मगर यहां पर मेरी चर्चा मेरा वहां पर मेरी उपस्थिति कार्यक्रम का एक अंग होगी। यानी कि मैं वहां पर एन केन प्रकारेन वहां खड़ा ही हुआ। उस उसमें निमित्त बना जो जिसका मैं विरोधी हूं जिस विचारधारा का तो मैं ऐसे निमित्त तो नहीं बनूंगा। महिमा मंडन में आर्य समाज के भाई जब मैं उसके अस्तित्व को ही नकार रहा हूं। पूरे उसकी जड़
00:12:35:03 से उसको जो है उसकी जड़े ही बिल्कुल विपरीत अर्थक है। मैं उसका महिमा मंडन सुनने क्यों जाऊं या कहने क्यों जाऊं या जहां पर कहा जा रहा है उसका भागीदार क्यों बनूं? ये बात है ना। आप समझ के देखिए। देखो आपको कृतेश पटेल से आपको कोई परेशानी हो सकती है। वह भी भविष्य में जाके क्या पता क्षमा मांग ले और बातें सब ठीक हो जाए। नहीं तो वो भविष्य में वो भविष्य में मांगेगा तो उस तब तक में उसके आपकी मां को किसी ने गाली दी है और फिर उसी पक्ष से आपको लेटर आ जाए कि आप आ करके यहां पर अमुक अमुक चीजों पर चर्चा करो। वहां पर वो आयोजक के रूप में सम्मानित हो रहा हो। उसी मंच पर वो सम्मानित हो रहा हो और आपकी मां को उसने गाली दी हो तो आप जाओगे उसके साथ क्या मंच साझा करने के लिए? देखो ना तो वहां पर कृतेश पटेल होगा। आप अग्निवर्त जी से या मु सत्यजीत जी से या जो भी आप विद्वान से आप कृतेश पटेल अगर कृतेश पटेल के द्वारा किए गए कृत्यों के लिए क्षमा पूर्वक स्पष्टीकरण अगर देता है तब मैं विचार कर कर सकता हूं कि महिमा मंडन हो रहा है जिस कार्यक्रम में उस कार्यक्रम में भी मैं जा सकता हूं कि नहीं वह भी तब जब रूपरेखा बिल्कुल फिक्स हो जहां पर मुझे बैठकर के महिमागान ना सुनना पड़े मैं जाऊं मुझे तुरंत समय
00:13:50:04 मिले उसके बाद में वहां से हट जाऊं तब मैं इस चीज पर विचार कर सकता हूं। अभी तो विचार करने योग्य भी स्थितियां नहीं है। क्योंकि जिनका आप नाम लिख रहे हो आर्य समाज ही नहीं है। वह कहते घूमते मैं आर्य समाज नहीं हूं। फिर आप कह रहे हो मैं आर्य समाजी हूं। तो ये तो धोखाधड़ी है ना समाज के साथ। आप देखो मैं मोहित गौर का वीडियो आपको भेज दूंगा। वो कह रहा है मैं आर्य समाज ही नहीं हूं। अरे वो अंकुर आर्य कह चुका है मैं आर्य समाज नहीं हूं। मतलब ये कौन सी बात है कि आप समय आने पर कह देते हो मैं आर्य समाजी नहीं हूं। जिससे कि आर्य समाज के उन सिद्धांतों की सीमा में रहकर आपको जवाब ना देना पड़ जाए, जो सिद्धांत कहीं ना कहीं प्रश्न चिन्हवाचक हैं। इसीलिए आदमी कह देता है मैं आर्य समाजी नहीं हूं। हम कहते हैं कि दयानंद जी तो यह कह गए हैं। अरे मैं आर्य समाजी हूं क्या? मुझसे क्यों पूछ रहे हो? लो और फिर वक्त आने पर आर्य समाजी बन गए। मतलब जीते तो कौन जीते? आर्य समाज। हारे तो कौन हारे? वो व्यक्ति। यह बात है। अंत में तो यही निष्कर्ष निकाला जा सकता है शिवा जी कि आप विरोध भी करेंगे और आप मतलब वो स्थिति स्पष्ट नहीं करना चाहते। मैंने स्थिति स्पष्ट कर दी है। मैंने अभी मैंने अभी परिव्राजक जी को फोन लगाया था। सुनिए गुजरात के परिव्राजक जी हैं जो स्वामी जी। विवेकानंद जी
00:15:05:06 हां हां हां उनको फोन लगाया था कुछ दिनों पूर्व। उनसे मैंने कहा था कि ऑनलाइन चर्चा कर लीजिए। आप बहुत बढ़िया तरीके से पक्ष रखते हैं। आर्य समाज का दार्शनिक पक्ष बहुत अच्छा अच्छे से रखते हैं। तो आप जो है मेरे प्रश्नों का उत्तर देते हुए चर्चा कर लेते हैं। तो उनकी ओर से जवाब आया कि आप जब गुजरात आइएगा तो मिल लीजिएगा तो मैं फिर उसमें हूं उद्देश्य में कि मैं किसी समय गुजरात जाऊंगा तो उनसे मिल लूंगा। उनके साथ वह चर्चा कर लूंगा। या फिर मैंने जो है योगेश भारद्वाज जी को भी फोन लगाया है। मैंने वहां पर भी संपर्क किया। मुजफ्फरनगर है कि पुर मुझे नीम ज्ञात है। अगर मेरा मतलब ऐसा होता कि भैया मुझे किसी से सामना करना ही नहीं है आपके यहां के किसी विद्वान से तो मैं इनको क्यों फोन लगाता? मैं आप पता करके देखिए मेरी ओर से दोनों जगह फोन गया है। और मैंने सच्चिदानंद स्वामी को भी फोन लगा चुका हूं। सच्चिदानंद जी को भी फोन लगाया था और मैंने पूछा था तो उन्होंने कहा हमें आपसे चर्चा करनी ही नहीं है। उन्होंने यह कह दिया। तो ऐसा नहीं है कि चर्चा नहीं करनी है। मगर अगर मैं आज अपने सिद्धांतों के साथ समझौता कर लूंगा तो मैं दोगला कहलाऊंगा। अब सामने वाले को दोगला कहलाने पर आपत्ति नहीं है। तो उससे मुझे कोई सरोकार नहीं है। परंतु मैं अपने सिद्धांत की तो रक्षा करूंगा। जब मैंने कह दिया कि कृतेश पटेल जब तक माफी नहीं
00:16:20:12 मांगेगा, उसके साथ में मंच साझा नहीं करूंगा, तो मैं आज कैसे मंच साझा करने चला जाऊं। तो लोग यह नहीं कहेंगे कहने वाले कि भैया यह एक एक बात का नहीं है। रामो दुरना भाषते को नहीं मानता। यह यह राम जी का अनुसरण नहीं करता। राम जी का अनुकरण नहीं करता। मुझे तो इस बात की चिंता है ना सत्य प्रतिज्ञ होने की। और आज लोग यह कहेंगे कि बड़ा कार्यक्रम था तो चला गया। इसने अपनी बात को पलट दिया। अपनी बात से पलट गया। ये बड़े बड़ा कार्यक्रम है तो इसलिए तो ऐसा नहीं है मेरी मर्यादा है। मैंने जब उसको ब्लैक लिस्ट किया है तो जिस मंच पे वो होगा उसको सम्मान दिया जा रहा होगा। मैं वहां नहीं जाऊंगा। आर्य समाज को चाहिए कि उसके द्वारा दी गई जो अश्लील गालियां है उसके लिए उसके तरफ से क्षमा पूर्वक वक्तव्य निर्गत करें। जिससे वह सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। कम से कम उस कमेटी से तो करें और क्या कहते हैं? उसको कुछ दिनों का कम से कम अपने यहां से विराम दें। इसको प्रतिबंध किया प्रतिबंधित किया जाता है आर्य समाज की ओर से उसके कितने अश्लील अश्लील वक्तव्य है आदि शंकराचार्य जी को लेकर के ट्वीट है गंदे गंदे बहुत भीषण उसने तब वो किया है और तो और मेरे सामने प्रत्यक्ष रूप से
00:17:35:15 बात करते समय उसने चीथड़े उड़ा देंगे यह निकल जाएगा वो निकल जाएगा ये सब बातें की देखो शिवश जी अब विवेकानंद परिवराजक योगेश भारद्वाज सच्चिदानंद जी और अग्निवर्त जी और सारे विद्वान एक ही स्टेज पर हैं और मैं प्रयास करूंगा कि वहां पर कृतेश पटेल न हो ना वह संयोजक करेगा उस वो एक मतलब अलग-अलग पार्टीशन है होल बना रखे हैं। उस एक होल में वो कृतेश पटेल है जो वो संयोजक है। बाकी अन्य जो हॉल है उसमें और संयोजक हो सकते हैं और मैं खुद अपने से आप जो है मैंने जो चीजें आपको कही है मुझे लगता है कि आपने धैर्य पूर्वक और संतोष पूर्वक समझा है मेरी चीजों को आप ये जो आप मुझे बता रहे हैं यही चीजें आप जैसे आपने पहले लेटर भेजा है। आप ऐसे ही लेटर भिजवाइए। मोहित गौर की स्थिति सही स्थिति जो है वो करिए। कार्यक्रम की जो आप जैसे अभी वस्तु स्थिति बता रहे हैं कार्यक्रम ऐसे हो सकता है कि हॉल अलग-अलग होंगे तो वो चीजें स्पष्ट करिए। मोहित गौड की स्थिति स्पष्ट करिए। मेरी चर्चा किससे होगी स्पष्ट करिए और जो क्या कहते हैं कृतेश पटेल से अलगाव होना मेरे लिए जो अपेक्षित है वो अलगाव भी स्पष्ट करिए उस लेटर
00:18:50:16 में। और फिर उस लेटर को आप भेजिए। उसमें तो जो मेरे को जो लेटर मिला है उस लेटर में ही आयोजक में मुख्य आयोजक लिखा है वह कृतेश पटेल और स आयोजक लिखा है वो मोहित गड और उसमें जो वो हैं क्या कहते हैं अतिथि उसमें से एक नाम है आर्यवीरा तो तो ये जो आर्यवीरा और कृतेश पटेल है इनको तो आप अलग करिए इन इनके साथ अलगाव को स्पष्ट करिए और जो मोहित गॉड है उसकी स्प स्थिति स्पष्ट करिए फिर कार्यक्रम की स्थिति स्थिति को स्पष्ट करिए कि उसमें क्या कहते हैं? किस तरह से वो होगी वस्तु स्थिति वगैरह और उसमें वह जो महिमागान है, वर्षगांठ है इत्यादि उसके लिए मैं नहीं आ रहा हूं। मैं चर्चा के लिए आ रहा हूं। तो उस इन सब चीजों को लेकर के एक स्पष्टीकरण देते हुए पूर्व में जो लेटर भेज दिया है, जिसमें आयोजक लिखा हुआ है कृदेश पटेल उस संबंध में भी अपनी बात रखिए। कि भैया हमने यह भेजा था आपको तो आप दूसरा भेज रहे हैं और वो ऐसे ऐसे कुछ भी हो अपना अपना उसमें स्पष्टीकरण के साथ रखिए। मैं ऐसे कैसे करूं भाई किसी ने मुझे गाली दी है मैं जाऊं वहां पर उसने निमंत्रण भेज दिया मैं पहुंच जाऊं हम आ गए भैया आपने क्योंकि हमारे आने जाने की और रहने खाने की व्यवस्था कर दी और प्रधानमंत्री उसमें वो हैं स्पेशल गेस्ट
00:20:07:01 हां जी तो आप आपने ये जो कंडीशंस बताई हैं कि अगर ऐसा ऐसा होगा तो मैं विचार करूंगा तो मैं प्रयास करूंगा इसको फुलफिल करने की और आपसे अनुरोध है कि आप अवश्य आए। देखो अरे मैं खुद मैं खुद भी आना चाहता हूं क्योंकि मुझे जो है परिव्राजक जी और योगेश भारद्वाज जी ऐसे लोग लगते हैं जिनसे कि बैठकर के प्रबुद्ध जनों की तरह बात की जा सकती है। वो ठीक है वैचारिक मतभेद हैं और विरोधी हैं एक दूसरे के। मगर ठीक है। उनसे वो बातें हो सकती हैं और मुझे लगता है कि वो बातों को घुमाने की बजाय जवाब देंगे टू द पॉइंट। जी हम होंगे हो सकता है कुछ ऐसे पक्ष हो जो मुझे ना ज्ञात हो भाई जी पूरा जाएगा तो आप ये स्पष्टीकरण पूर्वक लेटर भिजवाइए तो मैं उस पे वो करूं अगर ये कंडीशंस फुल फुलफिल हो गई तो आप आ जाओगे ना सारी कंडीशंस फुलफिल हो जाने के बाद मेरी जो ये वाली बात थी कि कम से कम आपको ऐसा आयोजन करना चाहिए था अगर मुझे अब बुलाना चाहते हैं हम मुझ जैसे किसी को भी बुलाना चाहते हैं तो आपको उसको एक न्यूट्रल कार्यक्रम के रूप में रखना चाहिए था। तो जब आप
00:21:22:04 अपनी ओर से इतना कदम बढ़ाएंगे कि आप अपना उसका उस यह मुझे संतुष्ट करेंगे जो प्रतेश पटेल जो कि आपके यहां का आयोजक है उस उसको लेकर के आपका क्षमा पूर्वक कोई वक्तव्य होगा या उससे अलगाव किया जाएगा आपका उसको हटाया जाएगा आप अपने से अलग तो फिर मैं फिर इस इस चीज को मैं फिर थोड़ी प्राथमिकता दूंगा कि चलो ठीक है महिमागान तो मैं नहीं सुनूंगा ये तो पक्की बात है मगर उस कार्यक्रम के दौरान किसी एक अंश में किसी एक कक्ष में किसी एक हॉल में मैं जो है वहां पहुंच करके और वो जो हमारी चर्चा है केवल उसको मैं कर लूं जाकर के। फिर मैं एक कदम मैं भी बढ़ाऊंगा भाई जब आप इतना करेंगे तो। जी ठीक है। हां जी।
00:22:07:08 ठीक है। जय श्री राम। ठीक है। नमस्ते। नमस्कार। [संगीत]
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