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00:00:03:08 हां इस विषय पर बात करनी चाहिए। नहीं आपका कहना है आप प्रत्यारोप करते हुए ग्रो कर गए। हम कहेंगे कि सत्य बोलते बोलते ग्रो कर गए। वो आपकी इच्छा है। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मैं तो मेरे को जो सही लगेगा मैं तो वही बोलूंगा। आपको जो सही लगा वो बोलो। आप अगले संडे को आइए। आप अपना एक फोटो जो है हमें WhatsApp कर दीजिए। बिल्कुल बिल्कुल कोई दिक्कत नहीं है। और आपको अगले संडे को आकर के चर्चा कर उसमें आर्य समाझी आर्य समाज आर्य समाज जी पुकारो। पारिश पुकारो निर्भय आर्य जी जी जी अगर आपको ध्यान हो तो एक बार मैंने टेलीग्राम के ऊपर खंडन में आपके सरस्वती ईश्वर वाले संबंध में मैंने पोस्ट भी बनाए थे पैशनल आर है जी जी जी जी बिल्कुल बिल्कुल बताइए जी कैसे हैं भ्राता जी आप कृपा है राम की जी तो भ्राता जी मेरे को थोड़ी सी अगर आपके पास 10 मिनट का समय होता है तो मुझे आपसे बात करना था आपने जोकर इत्यादि जैसे शब्दों का प्रयोग किया था नहीं तो आपसे चर्चा आपकी बात ठीक है। आपकी बात ठीक है। तो देखिए पहली बात तो इसके अंदर ये हो जाती है कि देखिए अगर मान लिया मैं अपनी साइड से अभी अगर मैंने कुछ गलत शब्द प्रयोग किए। ठीक है? और उसको मैं स्वीकार करके चलता हूं कि मैंने किया है। तो उसमें एक चीज ये होता है कि अगर जो सामने वाले व्यक्ति हैं उन्होंने रिप्लाई में कुछ उल्टा ना बोला हो तब तो वो इसलिए मैंने रिप्लाई में आपके लिए जोकर

00:01:18:12 के रिप्लाई में मैंने आपके लिए क्या उल्टा बोला बताइए? नहीं नहीं मैं एक बार पूरी बात रख देता हूं। हम जी अब जैसे हुआ यह कि जिस दिन ध्यान होगा जैसे जिस दिन मैं सबसे पहले बात जो जिसमें मैंने अपने घर का नाम जो है रितिक या गौरव इत्यादि जो मैंने रखे हुए थे ठीक है हम उसमें आपसे मैंने आपसे भैया करके बात किया था तरीके से बात किया था ठीक है हम उसमें भी कोई हमारी कोई दिक्कत नहीं थी क्योंकि उसमें ये होता है कि जब तक व्यवहार ठीक है तो थोड़ा बहुत विचार और मंत्र हो तो भी कोई बहुत फर्क नहीं पड़ता व्यक्ति ठीक से ही बात करता है हम्म उसके बाद फिर हुआ ये कि जिस दिन जिस दिन हुआ है कि जिस दिन वो मैं आया था फिर एक बार वो चैलेंज वाला प्रकरण हुआ था फिर उसमें आपको मेरे बातचीत करने का तरीका ठीक नहीं लगा तो फिर आपने हटा दिया था। ऐसा है उस दिन आप यह गर्व के साथ कह रहे थे कि हम आपके चैनल पर आ चुके हैं। आपको मूर्ख बना के जा चुके हैं। नहीं नहीं ये बात मैंने नहीं कही कि मूर्ख बना के जा चुके हैं। आप भी मतलब जब मैंने कहा था कि आप उस दिन अपनी पहचान छिपाई थी तो आपने कहा था कि हां कि हां भाई हनुमान जी भी तो गए थे। नहीं वो तो मैंने अपनी लाइफ में कहा था ना। वो तो मैंने अपनी लाइफ में कहा था ना। यह मैंने आपको थोड़ी कहा था। वहां पर भी वही भाव प्रकट किया था आपने जिससे कि मैंने कहा था अच्छा। ऐसे मैंने वहां पर हुआ था। नहीं नहीं पहले मैं उससे बात कर रहा हूं। मतलब मेरा कहने का मैं मैं देखिए शिवांगी जी शिवा जी देखिए मैं हाईलाइट ये करना चाहता हूं कि जिस समय आपने मुझे निकाला था उस समय आपने एक लड़का और एक कोई व्यक्ति थे पंकज

00:02:33:15 नाम से उन दोनों को आपने बिठाया और आपने मेरे को निकालने जो लाइव हुई थी ना हां जिस तो उसके बाद आप जैसे जिस शैली से मेरे को जैसे निकालने के बाद आप मेरे को तू तू तू तू ऐसे करके आप बात कर रहे थे हम्म तो शैली तो आपकी तरफ से भी गड़बड़ हुई थी उस कारण के आप दो चीजों को आपने सहज स्वीकार किया कि हमारे यहां तो खा मुंह मुंह चढ़ाते चढ़ाते खाना खाते हैं और ठीक है। यदि अनुसंधान किया जाएगा तो आपके यहां ये मर्यादा निकल आएगी कि खाते समय मुंह नहीं चलाना है। आपके यहां भोजन को दिया गया होगा। ठीक है, सही बात। दूसरी बात हम आप वहां पर आकर के उस मंच का भी अपमान कर रहे हो। ये कुछ चबाते हुए खा रहे हो। आप मैं उसको अपनी गलती स्वीकार करता हूं। देखो मैं उसको डिफाइन नहीं करूंगा। तो मेरी गलती है। उसको तुम स्वीकार करूंगा। वहां पर जो आप कह रहे हो ना तू तड़ाक। वो तू तड़ाक उस यही दो-तीन कारण से थी। एक तो मंच का अपमान कर रहे हो। हां। फिर वहां पर हमने कभी भी आर्य समाज को मानने वालों के लिए कोई गलत शब्द नहीं बोला है। जी गलत शब्द हमने नहीं बोला है। हां कटाक्ष होते हैं जो तर्काज्म वो सब हुआ है। गलत शब्द कभी नहीं बोला है। मगर हां तो मैं भी उसी सेंस में कह रहा हूं। जैसे मैं भी यही कह रहा हूं। जैसे आप जैसे मैं मेरी तरफ से अभद्र व्यवहार हुआ। ठीक है। मैं इसको एक बार तो एक बार मेरी पूरी जान लीजिए।

00:03:48:21 फिर आप वहां पर जब आए थे तो आप बहुत अच्छे से बता रहे हो। यह बता रहे हो कि भाई जो है मैं आप पहले भी आ चुका हूं। झूठ बोल के जा चुका हूं। अब आपका झूठ बोलना वहां पर सिद्ध हो रहा है। आपका वहां पर क्या कहते हैं? मंच का अपमान करना सिद्ध हो रहा है। फिर आपका आपका वहां पर जो है ये जो अपना उसके उसके उसके समर्थन में उसके समर्थन में वहां ये तर्क देना भी सिद्ध हो रहा है कि भैया हमारे यहां तो ऐसे ही होता है। आर्य समाज में ऐसे नहीं होता है। मुझे नहीं लगता। आर्य समाज में नहीं होता है। मैंने आर्य समाज का नाम नहीं लेकिन आर्य समाज में ऐसा होता है और ना मैंने यह बोला कि मैं आर्य समाज से हूं। नहीं आर्य समाज से समाज से नहीं है मगर कम से कम आर्य समाज के सिद्धांतों से समर्थन तो करते हैं। नहीं तो आर्य समाज के सिद्धांत में ये नहीं है पहली बात तो आप मेरे को व्यक्तिगत व्यवहार से जोड़ सकते हैं उसमें। हां ये मेरे व्यक्तिगत व्यवहार में दोष होता है। आप ऐसा बोल सकते हैं। हां, तो ठीक मैं आर्य समाज को नहीं जोड़ रहा हूं ना उससे। मैंने तो समझा ना। मुझे मालूम है ना आर्य समाज से हमारा किस स्तर पर जाकर के मतभेद है। कौन से स्तर पर नहीं है ये भी तो हमें पता है। बिल्कुल बिल्कुल तो तो मेरा इसमें यही प्रकरण था कि जैसे मेरी तरफ से गलती हुई तो आपने भी वहां पर जो हमारी शैली में बदलाव आया था वो इसी कारण से आया था कि आप जो है ये जो गुप्तचर्य आपने प्रकट की और उसको बड़े गर्व के साथ बिना किसी निर्विवाद

00:05:03:22 रूप से आप स्वीकार कर रहे हो जैसे बहुत अच्छा हुआ। अच्छा बाद में आपने उस समय तो हमने वह भाषा यूज कर ली बाद में आपने आगे वो तर्क भी दे दिया कि हनुमान जी गए थे हनुमान जी गए थे वो वैचारिक युद्ध में नहीं गए थे वो क्षत्रियोचित कर्म नहीं था वो वो वो गए थे व्यवहारिक युद्ध में हनुमान जी दूसरी बात झूठ तो उन्होंने कतई नहीं बोला फिर भी ऐसा तो नहीं बोला उन्होंने कि मैं कोई और हूं जब रावण के दरबार में गए तो पहली बात तो वो क्षत्रियोचित युद्ध वैचारिक युद्ध ब्राह्मणों में होता है। वाले युद्ध में झूठ की कोई जगह ही नहीं है। वो तो रणनीति होती है जब क्षत्रयोचित युद्ध होता है। नहीं ऐसा इतिहास में वर्णन मिलता है ना कि बौद्धों के यहां जाकर के बौद्धों के यहां ट्रेनिंग लेकर के बाद में उनका खंडन कर दिया। मिलते हैं ना ऐसे उदाहरण तो। हां बिल्कुल मिलता है। मगर उतने अंश में हम अगर उसमें ये चीज है शिव एक मिनट एक मिनट। कुमार भक्त को जब ये पता लगा कि उन्होंने अपने गुरु जिनको उसने कभी ना कभी किसी अंश में गुरु माना है। उसका खंडन किया तो उन्होंने अपने आग लगा ठीक है। तो यानी कि उसको दोष युक्त माना ही गया। कम से कम उन्होंने ना ये गलत कह रहे हैं। हम गलत कह रहे हैं। उन्होंने इस इस भावना में कि मैं मेरी वजह से मेरे गुरु का अपमान हो गया। इस इस भावना के से उन्होंने ग्रसित हो के अपना दाह

00:06:18:26 किया था। ये नहीं कि मैंने जो गुप्तचर की वो गलत किया। इस भावना नहीं किया। ये नहीं लिखा हुआ अपनी तरफ से। उसमें उसमें दोष इसलिए आ रहा है कि आप अगर गुप्तचरी के माध्यम से मुझे आपने गुरु बनाया। नहीं गुरु नहीं बनाया मैंने। हां आपने पूछताछ की ना आपने पूछताछ में और गुरु स्वीकार करने में दोनों में बहुत अंतर होता है। गुरु के तो लक्षण भी दे रखे हैं। गुरु गुरु उन्होंने स्वीकार कहां किया था? गुरु का मतलब तो होता है कि वो जो है क्या कहते हैं अंधकार को मिटाने वाला। बौद्ध दर्शन अंधकार को मिटाने वाला है ही नहीं। हां मगर कुछ अंशों में उनसे गुरु वो होता है जो ज्ञान देता है। गुरु ज्ञान देता है ना। गुरु के लक्षण में आता है कि नहीं आता ये? गुरु का आचार्य के लक्षण में भी आता है ये तो। आचार्य के लक्षण में तो आता ही है। गुरु का अर्थ होता है गुरु का हां तो ज्ञान देता है तो उस दिन मैंने आपको ज्ञान दिया ना ज्ञान आपने नहीं दिया देखिए दो प्रकार से वाद होता है ठीक है वाद होता है जल होता है वितंडा होता है शंका समाधान होता है ठीक है प्रश्नोत्तरी होती है तो ये जो था अब जैसे गुरु क्या करता है गुरु आपको शरण में देता है जो सारी बातें वो बताता है वो आप एज इट इज उसको मानते हो ठीक है उसमें आप संशय नहीं करते हो तो कुमारी भट्ट ने एज इट इज मानी की बातें मैंने तो यह किया मैंने तो वहां मैंने तो आपसे प्रश्नोत्तरी किया था प्रश्नोत्तरी किसी भी व्यक्ति से कर आप नहीं करते हो आप समाज के अगर आप समाज के लोगों के पास में जाते हो उनसे प्रश्नोत्तरी करते हो तो क्या आप उन्हें गुरु मान लेते हो नहीं मानते

00:07:34:07 नहीं नहीं मान लेते फिर फिर आप फिर मेरे पक्ष में क्यों कह रहे हो कुमारल भट्ट भी इसी रूप में गए थे ना वहां बौद्धों के फिर उनको आप गुरु गुरु के रूप में सिद्ध करके और जो कुमार भट्ट द्वारा वो लिया जाना आत्मदाह किया जाना उसको स्टूडेंट नहीं वो तो उन्होंने आत्मदाह करने के रूप में उन्होंने क्या बोला था उन्होंने बोला था कि मैं तो अपने गुरु का अपमान हो गया इस चक्कर में तो वहां तो उन्हें तो उन्होंने वहां पर उन्होंने वहां वहां पर प्रश्नोत्तरी या राज जानने वाले जिससे हमने राज्य जाने उसको वहां उन्होंने गुरु स्वीकार किया था ना इसको गुरु स्वीकार नहीं किया उन्होंने उन्होंने वस्तुत रूप से गुरु स्वीकार करके सारी शिक्षाएं ली नहीं वस्तुत रूप से कैसे हो जाएगा जब सनातन तो फिर तो फिर उन्होंने तो फिर उन्होंने आत्म अपने स्वयं को मारने से पूर्व ये बात उन्होंने क्यों कही कि गुरु इसलिए कही इसलिए कही कि चलो इतने भाव थे इसीलिए कहा ना उन्होंने हां तो उनके अंदर वो भाव थे ना पथ प्रदर्शक होने के नाते बाकी राज बताने वाले पथ प्रदशन प्रदर्शन पथ प्रदर्शक होने के नाते उनके अंदर वह भाव थे कि वह मेरे गुरु हैं। अब यदि उनसे कॉपी करना है तो आपको आपके अंदर भी पथ प्रदर्शक होने के नाते मेरे प्रति गुरु भाव आना चाहिए। नहीं तो कॉपी नहीं करना। ये नेसेसरी नहीं है। नेसेसरी क्यों नहीं है मैं आपको बताता हूं। क्यों नहीं है मैं आपको बताता हूं। देखिए इसलिए नहीं है क्योंकि मैंने जिस बात को उठाया है। मैंने ये उठाया है कि इस प्रकार से किसी की विद्या को जानना। ठीक है? इस प्रकार से किसी की

00:08:49:10 सामने वाले का पक्ष क्या है? उसको समझना ठीक प्रकार से समझना। इसके समझने के लिए अगर मैं व्यक्ति से सामान्य तरीके से वार्तालाप कर रहा हूं। ठीक है? मैं ये कह रहा हूं तो इसमें आपके लिए झूठा एक बार मैं पूरा बोल दूं। एक बार मैं पूरा बोल दूं। इसके लिए मुझे आवश्यकता नहीं है कि मैं मेरे सामने वाले को गुरु स्वीकार क्योंकि देखिए ऐसा तो है नहीं कि आपने मेरे प्रश्नों का तभी उत्तर दिया जब मैं आपको आपको गुरु स्वीकार करूं। आपने सामान्य हिंदू के रूप में भी आपने मेरे प्रश्न का उत्तर दिया ना? हां। है ना? तो बस वही चीज को मैं कह रहा हूं कि सामान्य हिंदू वक्ता बन करके अगर आप ही नहीं रहती मेरी बात तो समझिए। वहां पर आपने अपना परिचय छूटा दिया था। छोटा परिचय दिया था। पहली बात। दूसरी बात यह है कि अगर हम यह कह रहे हैं कि हर पथ प्रदर्शक को आवश्यक नहीं कि हम गुरु के रूप में स्वीकार करें। तो फिर हम वहां पर उनकी वो जो उन्होंने जो कुमारी भट्ट जी ने ऐसा किया था। उनकी चीज को हम अनुकरणीय सिद्धांत के रूप में नहीं मान सकते। क्योंकि उन्होंने उदाहरण दे रहा हूं इतिहास से। तो मैं वही तो कह रहा हूं। फिर वो अनुकरणीय उदाहरण नहीं है ना। क्योंकि उन्होंने पथ प्रदर्शक को गुरु के रूप में स्वीकार करके उसकी दोष दृष्टि से अपना आत्मदाह किया था। वास्तविकता में तो सनातन सिद्धांतों से प्रभावित थे। चलिए अब आप अपना उद्देश्य बताइए। सात सिद्धांत से प्रभावित होने के बावजूद भी उन्होंने किया। खैर हम मोक्ष विषय पे आते हैं। तो सुभाष जी मूल बात इसके अंदर यही थी कि जैसे अगर मेरी तरफ से

00:10:04:14 फिर भी मैं उस चीज को डिफेंड नहीं कर रहा। ठीक है। मैं अपने व्यवहार को लेकर के डिफेंड नहीं करूंगा कि जो गलत है वो गलत है। मेरा कहने का सिर्फ इतना तात्पर्य था। उस दिन जो मेरी भाषा शैली थोड़ी सी उकड़ी हुई हुई थी। उसका कारण था मुझे तीन चीज़ मैं आपको गलत नहीं कह रहा हूं। मैं आपको गलत नहीं कह रहा हूं। सीमा जी मैं आपको गलत नहीं कह रहा हूं। आपको उसमें डिफेंड देने में भी कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि मैं गलत कह ही नहीं रहा हूं आपको। बस मैं बस मैं ये चेता रहा हूं कि आपने भी बोला था मैंने भी बोला था। बस मैं ये इस चीज को चेता हूं। नहीं मैंने जोकर मैंने उपमा इत्यादि देकर के जोकर का कोई जवाब नहीं दिया। कभी नहीं दिया। आपने अलंकारी इत्यादि सब बोला था ना? अलंकारी शब्द में कौन सा दोष है बताइए? क्यों नहीं है? जब आपने अपने को अलंकारी रूप से चिन्हित किया। अलंकारी का मतलब क्या है? नहीं मैंने अपने को अलंकारिकारी रूप से चिन्हित किया। मैंने अपने आप को पौराणिक रूप से चिन्हित किया है। मैंने आपको कब पौराणिक बोला? हां भाई सारे वो देखिए अलंकारी आप हो उसके लिए मैं व्यक्तिगत रूप से आपको अलंकारी नहीं कहूंगा। आप यदि अलंकार आर्य समाज की तरफ से आओगे तो इसलिए मैं आपको अलंकारी कह रहा हूं क्योंकि आर्य समाज को मैंने अलंकार कहा है। क्योंकि आर्य समाज आर्य समाज ना कि मैं आर्य समाज से नहीं जुड़ा हूं। फिर भी आप बोल रहे तो आपकी गलती है। समाज का पक्ष तो ले रहे हो ना आप? नहीं नहीं मैं आर्य समाज का पक्ष नहीं ले रहा। मैं ऋषि दयानंद का पक्ष ले रहा हूं। हां तो दयानंद का ही तो आर्य समाज है। देखिए दोनों में अंतर है। हां बताइए। दोनों में अंतर यह है। दोनों में अंतर ये है कि जैसे महर्षि दयानंद

00:11:19:22 ने तो आर्य प्रतिनिधि सभा ही बनाई। हम आर्य समाज भी विस्थापित किया। हम ठीक है। और महर्षि दयानंद के ऐसे भी कई सारे शिष्य हैं जो इन दोनों संस्थाओं में से नहीं जुड़े। तो इसमें कर क्या सकते हैं? जो आर्य समाज की मूल विचारधाराएं हैं वो तो पोषित हो रही ना आर्य समाज में। अब आप उस व्यक्ति को बोलिए। अब उस व्यक्ति को अलंकारी अगर आपने उनके लिए अलग से नाम रखा हुआ है जैसे उन्होंने आपके लिए कुछ नाम रखा तो उन्होंने अगर आर्य समाज में परंपरा का सिद्धांत होता दयानंद जी ने सुनिए तो जीते मैं आऊंगा मैं डिबेट पे ही आना चाहता हूं मैं कह रहा हूं दयानंद जी ने अगर परंपरा का सिद्धांत अपनाया अपनाया होता तो उनके द्वारा उनके नाम से कोई भी बात कहते समय हम ये जांच कर सकते थे कि भैया ये उनकी परंपरा से है कि नहीं ठीक है जब उन्होंने ने खुद ही परंपरा के सिद्धांत को तोड़ा है तो तो कोई भी व्यक्ति जो आर्य समाज का नाम ले करके कुछ भी कहेगा तो हम ये कह सकते हैं हां भाई आर्य समाज ही कह रहा है। लेकिन मैं आयुष समाज का नाम ले नहीं कह रहा ना शिवास जी यही तो अंतर है मैं तो महर्षि ध्यान से नाम ले कह रहा हूं ना तो महर्षि दयानंद ने ही तो आर्य समाज बनाया है और के सिद्धांत का अभी आपने खुद अभी आपने खुद बोला कि आर्य समाज का नाम लेके अभी आपने खुद बोला ना इस बात को क्या आर्य समाज का नाम ले कि आर्य समाज का नाम लेके जो बोलेगा तो हम उसको आर्य समाज की दृष्टि से देखेंगे। मैं वो आर्य समाज का नाम लेके नहीं

00:12:35:27 मैं वो नहीं कह रहा हूं। मैं ये कह रहा हूं कि आर्य समाज आपने कहा ना कि कई शिष्य ऐसे हैं जो आर्य समाज से जुड़े हुए नहीं है। जी जी आर्य समाज से जुड़ा हुआ होना आप कब मानते हैं? किसी को सनातन से जुड़ा हुआ होना आप कब मानते हैं? किन स्थितियों में मानते हैं? नहीं दोनों में अंतर है। सनातन में और आर्य समाज में अंतर है क्या अंतर में मैं आपको एक बार स्पष्ट कर देता हूं। तो दो एक मिनट का समय दीजिएगा मुझे। देखिए ऐसा है कि जैसे आरएसएस एक संस्था है। बीजेपी एक संस्था है। वैसे सामाजिक संस्था है। हम् ठीक है? अब बात यह है कि वह जो संस्था वाले हैं उसके स्थापक रहे हैं महर्षि दयानंद। ठीक है? महर्षि दयानंद अपने आप में संस्था नहीं है। वो एक व्यक्ति थे। ठीक है? वो वेदों वो वेदों को मानते थे। अब ये विचारधारा तो है। अब हां अब बात ये है कि जो आर्य समाज से जो व्यक्ति संबंधित होगा। ठीक है? उसको संस्था के प्रोटोकॉल फॉलो करने पड़ेंगे। उसकी नियमा नियमावली जो है उसको फॉलो करना पड़ेगा। मैं वो नहीं कह रहा हूं। आर्य समाज अपने आप में एक संस्था भी है। आर्य समाज अपने आप में दयानंद जी की विचारधारा भी है। विचार दयानंद जी की एक वैचारिक एक वैचारिक दृष्टि में भी उसकी अपनी एक अस्तित्व है कि दयानंद जी की विचारधारा क्या है? आर्य समाज। अच्छा दूसरी बात ना, एक मिनट अब दूसरी बात यह है जैसे आप कह रहे हो कि आपने मुझे पौराणिक नहीं कहा और मैं कह रहा हूं कि आर्य समाज से जुड़े हुए कई प्रामाणिक लोगों ने मुझे

00:13:51:01 पौराणिक कहा। ठीक है। अब बात यह आ जाती है कि आपको दयानंद जी की ओर से प्रामाणिक क्यों मान लिया जाए? उनको क्यों ना माना जाए? आप यह कह रहे हो आपका कहना है कि दयानंद जी मेरे को दयानंद की तरफ से प्रमाणिक मानो। मैंने क्या बोला? तो जब दयानंद जी ने ही हमें पौराणिक वो पंडित इत्यादि कहा है तो हम रिटन में दयानंद जी को मानने वाले को भले ही वो आर्य समाज से जुड़ा हुआ ना हो। हम उसको रिटन में अलंकार तो कह सकते हैं ना। अलंकार ही कोई गाली तो है नहीं। भाई जब कोई हमें पौराणिक कहता है तो इसलिए कहता है क्योंकि हम पुराणों को मानने वाले हैं। अब आपने अपना हेतु बदलाया तो अब इसका उत्तर भी लीजिए। आपने अपना अब जो पहले जो आपने पौराणिक इत्यादि वाला आपने दूसरी बात बोली थी। अब आप ठीक है अब आप संस्था से हट करके अब आप महर्षि दया दानंद पर डायरेक्ट आ रहे तो इसका उत्तर लीजिए। बात यह है कि अगर महर्षि दयानंद ने किसी पर्टिकुलर विचारधारा धारा को मानने वाले लोगों को पौराणिक पंडा कहा है पोप कहा है कुछ कहा है हम ठीक है आप उस पर चोट कीजिए कि हां ये मान्यता गलत है अगर आप कोई व्यक्ति हमें ऐसा कहे मैं पूरा आप अगर मैं पूरा मैं पूरा बोल दूं मैं पूरा बोल दूं कि अगर कोई अगर कोई व्यक्ति इसी महसंत की इस बात को स्वीकार करके कोई व्यक्ति आपको ऐसा बोल रहा है तो आप उसके आपको जो ठीक लग रहा है आप उसके साथ व्यवहार करो ठीक है लेकिन कोई व्यक्ति अगर आपको ऐसा नहीं बोल रहा है ठीक ठीक है तो भी आप अगर उसको अहंकारी इत्याद कोई

00:15:07:08 आप एक बात बताओ कोई किसी को पहली बात पहली बात तो एक बात है कि पौराणिक शब्द आपने बोला है कि नहीं बोला है ये तो बात एक बात रही कि देखना पड़ेगा आपने बोला है कि नहीं बोला है ठीक है दूसरी बात ये रही कि पौराणिक शब्द अगर वो कह रहे हैं पौराणिक और आप उनके समर्थक हैं जी ठीक है तो आप पर भी वो चीज लागू होगी ना होता है पौराणिक आपके आप लोग जो जहां संगोष्ठी वगैरह लगाते हो ना जो बैनर पोस्टर होते हैं पूरी आपके यहां भी अलंकार लिखा होता है। आपके यहां भी लिखा होता है अलंकार। लिखा होता है आप दिखाओ। अलंकारिक समाज एज इट इज़ हम तो एज इट इज़ पौराणिक एज इट इज़ दिखा दूंगा। आप तो एज इट इज़ पूछ रहे हैं एज इट इट इट इट इट इट इट इट इट इट इज़ दिखा दूंगा। पौराणिक लिखा हुआ ये तय- आपके यहां पर अलंकार शब्द आ रहा है कि नहीं आ रहा है? यह बताइए। अलंकारी समाज कैसे सिद्ध होता है? तो पौराणिक से केवल पौराणिक कैसे सिद्ध होता है? वहां पे संसार तो हम तो वैदिक भी है ना। हम तो वैदिक भी है वो क्यों नहीं आपने पकड़ा? अगर हम अपने आप को सुनिए। अगर हम अपने आप को सनातन वैदिक सुनिए अगर हमने अपने आप को सनातन वैदिक आर्य हिंदू कहा है सनातन वैदिक आर्य पौराणिक हिंदू कहा है तो आप पूरे को पकड़ो आप केवल पौराणिक क्यों पकड़ रहे हो पूरा बोलो अगर अगर आप अगर आप इसका निषेध कैसे हुआ अगर पौराणिक पकड़ा तो इस सबका निषेध कैसे हुआ यह बताओ आप इसमें बुरा मानने वाली कौन सी तो ऐसे ही हमने

00:16:22:12 अगर आपका अगर हमने आपका अलंकार ही पकड़ लिया तो उसमें निषेध कैसे हुआ सर हमने अपने नाम नहीं अरे भैया आपके नामों में होता विद्या विष्ठा वो निष्ठा विद्या अलंकार लो कितने लोगों का अलंकार ही लगा होगा नाम में ही विद्या अलंकार में अंतर हो जाएगा अविद्या अलंकार बोल दो ना अविद्या अलंकार बोलो नहीं नहीं तो आप सनातन वैदिक आर्य हिंदू पौराणिक बोलो ना नहीं सुनो हां इसी का उत्तर लो अगर अगर मान लो आप पूरा नाम लिख रहे हो सनातन हिंदू आर्य वैदिक ठीक है ठीक है अगर किसी ने अगर किसी ने आपको डायरेक्टली बता मैं पूरा जो कहना चाह रहा हूं मैं आने की वजह से लेकिन आप अलंकारिक बोल रहे हम अपने आप को अलंकारिक रूप से ऐसे घोषित नहीं करते हम तो आर्य समाज तो हम भी अपने को केवल हम भी अपने सुनिए मैं बता रहा हूं चलिए मैं चलिए इसका उत्तर ले लीजिए ऐसा है कि जब आप लोगों के द्वारा पौराणिक शब्द का उपयोग किया जाता है पौराणिक तो वहां पर यह अप्रत्यक्ष रूप से छिपी हुई भावना होती है कि वेद के विरोधी वाले पौराणिक हैं। वेद को ना मानकर पुराण को जो है यह मान्यता ज्यादा देते हैं। वो तो बाद का विषय है। अपेक्षागत तो तो वहां पर वहां पर जो है इस तरह से प्रस्तुत करना पौराणिक तो वहां पर हमारे को वेद विरोधी रूप से सिद्ध करने का प्रयास वो दिखाई देता है। अब दूसरी बात यह है मूल विषय

00:17:37:13 ये आ जाता है कि अलंकार की अलंकार की जो बात है अलंकार शब्द कहीं छिपा हुआ नहीं है। अलंकार शब्द का उपयोग आपके यहां भी खूब किया गया है और अलंकार शब्द का उपयोग एक मिनट 1 मिनट अलंकार शब्द हम आपको क्यों दे रहे हैं? क्योंकि आपने कई जगह भगवान की जहां चमत्कारों की बात आती है वहां अलंकार कह दिया है। शणाचार्य जी ने वेदों में अलंकार के ऊपर पूरी पुस्तक लिखी हुई है। अरे मैं बोलिए नहीं मैं ये कह वो मुझे पता है कि अलंकार में पुस्तक लिखी है। मगर मैं यह कह रहा हूं कि आपकी वो जो चीज यानी आप स्वीकार कर रहे हैं ना। आप मेरा भाई अलंकार अलंकार का उपयोग करना आप दोष दृष्टि से नहीं देख रहे ना। तो जब दोष दृष्टि से नहीं देख रहे हैं तो अलंकारी समाज से दिक्कत क्या है? मैं उसका उत्तर दे रहा हूं। अब देखिए अभी आप बोल रहे थे मैं चुप था। अभी आप सुनिएगा। देखिए पॉइंट यह है। आप चुप नहीं थे। आपने बीच में दो बार बोला साचार साहणाचार। आप नहीं मैं अभी हां तो दो बार आप भी टोक लेना कोई दिक्कत नहीं। वस्तु तो मैं चुप ही था ना। मतलब जो आप जो पैरामीटर्स आप तय करोगे कितनी बार अगर टोकना है तो वो भी आप ही तय करोगे। चलो आप चार बार टोक लेना। आप चार बार टोक लेना। मैं अपनी बातें क्लियर कर दूं कि आप जब हमें पौराणिक देता हूं ना। नहीं वो वो मैं प्रश्न क्लियर कर दूं जिससे आप क्लियर उत्तर दूं। आप जो हमें पौराणिक कहते हो वह वेद की अपेक्षाकृत पुराण को मानने वाले के रूप

00:18:52:14 में हमें प्रस्तुत करते हो। दोष दृष्टि से देखते हो। जबकि पौराणिक होना हमने भी स्वीकार किया है। मगर दोष युक्त रूप में नहीं स्वीकार किया है। उसी तरीके से आपके यहां पर भी अलंकार को स्वीकार किया गया है। मगर दोष दोष युक्त तरीके से स्वीकार नहीं किया गया आपके यहां। मगर हम आपको उसी रूप में कटाक्ष प्रस्तुत करते हैं कि जिस तरीके से हमारे यहां पुराण शब्द होने के कारण आप हमें पौराणिक रूप से दोष युक्त बता रहे हो। उसी उसी तरीके से आपके अलंकार शब्द होने के कारण हम आपको अलंकारी होने के रूप में दोष युक्त बता रहे हैं। अब आप अपना उत्तर प्रदर्शन ठीक है देखिए अब बात ये है कि जब आप अपने आप की पहचान बनाते हैं बताते हैं इनकी पहचान बताते हैं। ठीक है? तो आप पोस्टर में ये लिखते हैं सनातन आर्य वैदिक पौराणिक हिंदू ऐसे करके आप लिखते हैं इस टाइप ऐसा नहीं है। नहीं है हर जगह ऐसा नहीं है। आपने अगर लिया होगा तो उसको मैं मना नहीं कर रहा हूं। देखिए खुद ही नियम बना के खुद ही भंग कर दे रहे हैं। ऐसे थोड़ी है। नहीं नहीं खुद ही नियम नहीं हर जगह ऐसा नहीं है कि सनातन वैदिक कार्य पौराणिक हिंदू आप अपनी बारी में उत्तर दे सकते हैं ना शिवश क्या है यह ऐसे थोड़ी होती है आप गलत तथ्य के ऊपर जब बात कर रहे हैं तो उस तथ्य को आपको ऐसे लेना होगा जैसे मैंने अभी शुरू अभी मैंने दो मिनट पहले एक बात कही थी जी जब मैं चुप हो जाऊंगा तो आप इसका उत्तर दे दीजिएगा ना क्या हल बढ़ा है इसमें इतनी अच्छा चलिए बोलिए हां अब बात ये है कि आप अपनी पहचान के रूप में सनातनी आर्य हिंदू

00:20:07:15 वैदिक पौराणिक ये शब्दों का प्रयोग करते अपनी पहचान के रूप में ठीक हम जो केवल ऋषि दयानंद के शिष्य हैं वो अपने आप को ठीक है वैदिक धर्मी बोल देते हैं या ऋषि दयानंद के शिष्य बोल देते हैं या जो आर्य समाज संस्था से जुड़े हुए लोग हैं ठीक है वो अपने आप की पहचान आर्य बोलते हैं ठीक है और सत्य सनातन वैदिक धर्मी बोलते हैं और आर्य समाज ही बोलते हैं अपने आप को ठीक है तो बात ये है कि एक पक्ष आपका है जो अपने आपको इस फलाना नाम से कह रहा है एक पक्ष दूसरा है जो फलाना नाम से अपने आप को कह रहा है ठीक है अब बात ये है कि आर्य समाजियों ने जो नाम आपने उठाया उसी नाम में से ही पकड़ करके आपको सम्मान संबोधित किया तो बात तो ये होनी चाहिए कि आप भी आर्य समाज जी या महस के शिष्य जो अपने नाम से अपने को संबोधित कर रहे उसी में से भी कोई पॉइंट पॉइंट उठा के करते तो वो संगति बैठती। ठीक है? अब आपने क्या किया? इन्होंने तो आपको आपके नाम से बोला जो आप पोस्टर में लिख रहे हो। आपने क्या किया? आपने उठाई किताबें। आपने देखा अच्छा किताबों के अंदर अलंकार मान रखा है। अलंकारी बोल दो। अलंकारी समाधि बोल दो। ठीक है? फिर यही काम अगर कल को ये करेंगे कि आपके आपके उसमें से उठा के पुराणों में से कुछ शब्द है इतना लीला इत्यादि वो सब उठा करके लीला समाधि ये कुछ भी तो वो ठीक नहीं बैठेगा ना आपने आप जो पोस्टर में नाम लिख के घूम रहे हो वही नाम से बोला गया है तो ये जो पोस्टर अब आपने बोल रहा है अब आपने बोल लिया जी जी बिल्कुल बिल्कुल बोलिए पोस्टर में पहली बात केवल पौराणिक कहां पर लिखा

00:21:22:19 हुआ है इस बात से मुझे कोई बहुत ज्यादा ही नहीं चाहिए केवल पौराणिक है नहीं तो सनातन वैदिक आर्य हिंदू लिखा होगा ना पोस्टर में केवल पौराणिक होगा अब देखिए अब आपके अंदर हड़बड़ाहट आ रही है अब मुझे पूरा बोलने दीजिए फिर आप अपनी बारी आने पे जवाब दीजिएगा ना जैसे अभी आपने मैं किसी तथ्य को सही करना चाह रहा था तो आपने मुझे रोक दिया अब आप जाइए हां हां बिल्कुल बिल्कुल बोलिए तो पोस्टर में पहली बात तो किसी ने अगर पौराणिक हिंदू लिखा है तो वो कोई ऐसा सिद्धांत नहीं जिसको सार्वभौम दृष्टि से स्वीकारा जा सके दूसरी बात आपका ये कहना है कि भैया किसी ने हमने अपने आप को अलंकारी घोषित नहीं किया इसलिए या फिर अपने नाम पहचान के रूप में अलंकार स्वीकार नहीं किया है। मगर ऐसा नहीं है। किया है निष्ठा विद्या अलंकार बहुत सारे अलंकार वाले लोग आपके यहां मिल जाएंगे जो अलंकार लगाते हैं। पहली बात। दूसरी बात यह है कि कुल मिलाकर के आपका कहना यह है अब अलंकार नाम वाले अगर मिल जाएंगे तो आप अगर कहोगे कि पूरा नाम लो तो फिर हम भी कहेंगे कि भैया पौराणिक सनातन वैदिक आर्य पौराणिक हिंदू लो पूरा। यह तो रही यह बात। चौथी बात यह है कुल मिलाकर आपने यह कहा है कि हमने अपनी पहचान के रूप में अह क्या कहते हैं? जो शब्द उपयोग

00:22:37:27 में नहीं लिया है वह शब्द आप हमसे ना जोड़िए। ठीक। तो फिर हमने अपनी पहचान के रूप में क्या पोप पांडे ये सब लिया है क्या? वो शब्द हमसे क्यों जोड़े गए हैं? हो गया। हां बोलिए। ठीक है। अब देखिए पहले आपने आपने इसके काउंटर में की जो आप पहचान के रूप में अगर पौराणिक लिखते हो। ठीक है? तो आपने बोला कि हम केवल पौराणिक लिखते दिखाओ। तो मेरा क्लेम नहीं केवल पौराणिक लिखते हैं। ठीक है? अगर आप आर्य समाजी में से केवल हमें समाजी समाज हमें नहीं मतलब जो समाजी होते हैं, आर्य समाजी होते हैं, केवल समाजी समाजी बोलते तो भी उसमें दोष नहीं आता। ठीक है? हां वस्तु तो वो अधूरा था। अस्तुत्व अधूरा है क्योंकि आप समाजी वर्ड भी बहुत बार यूज करते हो। उसमें बहुत कोई दिक्कत नहीं क्योंकि वो अधूरा है लेकिन उसे पता नहीं चल रहा कौन से समाज की बात हो रही है। ठीक है? लेकिन फिर भी वो गलत वे में नहीं है। अब उसके अंदर विषय है कि आपने काउंटर में बोला कि बहुत सारे जो लोग हैं वो क्या कहते हैं अलंकार अपने सरनेम इत्यादि इस टाइप के जो शब्द है विद्या अलंकारी इस टाइप के शब्द प्रयोग करते हैं। ठीक है? पहली बात सारे लोग नहीं करते। कोई विद्या वाचस्पति लिखता है। कोई तर्क रत्न लिखता है। ठीक है? कोई इस टाइप के नाम लिखता है तो जो इस टाइप के नाम पर्सनल बेसिस पर रख रहा है संस्थानुगत या ऋषि दयानंद अपने अनुयायियों को इस नाम से संबोधित नहीं कर रहे हैं या संस्थानुगत या कलेक्टिवली वो अपने नाम को इस तरह से घोषित नहीं कर रहे हैं। जैसे किसी एक व्यक्ति का नाम विद्या वाचस्पति मिश्र है इत्यादि है। ठीक है? तो सारे

00:23:53:06 सारे लोगों को कम्युनिटी बेस को विद्या वाचस्पति बोलना तर्कसंगत नहीं है। युक्ति संगत नहीं है। उसी प्रकार से अगर अगर कोई अलंकार संबंधी किसी ने नाम रखा तो उसको बोलना ठीक है क्योंकि उसकी कुछ विशेषता होगी। उसमें कुछ दक्षता होगी। इस कारण से उसका ये नाम है। ठीक है? तो कम्युनिटी बेसिस पे आप अपने आप को एज अ पौराणिक रिकॉग्नाइज कर रहे हो। तो कम्युनिटी बेसिस पे अगर ये अपने को आर्य समाज इत्यादि इत्यादि नामों से रिकॉग्नाइज कर रहे हैं तो युक्ति संगत तो यही है कि आप उनको उसी नाम से बोलो। बात तो नाम की ही है। बोलिए। हो गया। जी जी। अच्छा पहली बात तो यह है कि जैसे आपने कहा कि वो पर्टिकुलर कुछ लोगों ने अपना नाम लिखा होता है। ठीक है? तो मैं भी यही कहूंगा कि अगर कहीं पर केवल पौराणिक लिखा हुआ है तो पर्टिकुलर कुछ लोगों ने लिखा हुआ है। उसको आप पूरे समुदाय से नहीं देख सकते हो, जोड़ सकते हो। दूसरी बात यह है कि आपका यह कहना है कि क्या कहते हैं आपके ये दूसरी बात यह है कि आवश्यक नहीं होता है कि जो व्यक्ति अपने नाम से अपने आप को जनवाना चाहता है। उसी नाम से उसको दुनिया देखे। कई बार ऐसे होता है। यहां तक कि ये जो दयानंद जी हैं उन्होंने अपना जो आर्य समाज नाम लिखा है समाज है ना। यह समाज शब्द बहुत ज्यादा शास्त्रों में महत्वपूर्ण तरीके से तो नहीं आया है।

00:25:08:28 ठीक है? मगर फिर भी उन्होंने अपनी विचारधारा को एक पुष्टि देने के लिए वहां पर अपने अपने आप को जोड़ा है कि भैया आर्य समाजी हैं हम। ठीक है? हम्म उसी तरीके से अगर आपकी विचारधारा में अलंकार आया हुआ है और हमें लगता है हमारी दृष्टि से कि वो आपकी मूल एक और रीड की हड्डी अलंकार हमारी दृष्टि वो फिर शास्त्रार्थ का विषय हो जाएगा कि अलंकार सही है कि गलत है वो बाद की बात है। मगर यदि हम ऐसा मानते हैं कि आपकी विचारधारा में अलंकार एक बहुत महत्वपूर्ण वर्ड है तो उस नाम से भी आपकी पहचान हो सकती है। आवश्यक नहीं कि आपने जिस नाम को अपने लिए नियुक्त किया है वही आपकी पहचान हो। दुनिया आपको उस नाम से भी जान सकती है जो आपकी अदर चीजें दुनिया को दिखाई देती है कि भैया ये इससे संबंधित है तो इसका ये नाम है। अब दूसरी दूसरी बात यह है दूसरी बात यह है कि आपने कहा अह वो वाला उत्तर मैं दे ही चुका हूं कि भैया ये एक व्यक्ति के कर देने से या एक व्यक्ति द्वारा अपना नाम लिखे जाने की वजह से वहां पर आप उसको सब पर नहीं थोप सकते। तो किसी एक व्यक्ति ने अपने आप को केवल पौराणिक माने मुझे जानकारी नहीं है किसने लिखा होगा। मगर किसी ने अपने केवल पौराणिक हिंदू लिखा होगा तो वो पौराणिक हिंदू किसी एक व्यक्ति के द्वारा कहा गया है। हम तो अपने को सनातन वैदिक आर्य हिंदू लिखते हैं और हम लोग वैदिक

00:26:24:14 में ही वेदों के अर्थ में ही पुराण को लेते हैं तो हमें अलग से पौराणिक हिंदू कहने की आवश्यकता नहीं है। मगर क्योंकि हम पुराण को मान रहे हैं तो आप अगर हमें वैदिक पौराणिक आर्य हिंदू कहेंगे तो भी हमें कोई आपत्ति नहीं होगी। मगर आप पौराणिक कहते हुए वेद के विरोध में खड़ा करते हुए हमारी पहचान को प्रस्तुत करते हो तो हमें उस पर आपत्ति होती है और 100 की सीधी अंत में एक बात आ गई कि जब आपने यह कहा कि क्या हम अपने आप को उस रूप में प्रस्तुत करते हैं? तो हम अपने आप को वेद विरोधी पौराणिक के रूप में प्रस्तुत नहीं करते तो फिर आप अपनी बात का ही खंडन करते हुए हमें वेद विरोधी पौराणिक के रूप में क्यों प्रस्तुत करते हैं? और यदि करते हैं तो यदि करते हैं तो फिर हमारे अलंकार समाज को आपको लेना होगा। ठीक है मैं उत्तर देता हूं। अब देखिए पहली बात ये है कि आपने बोला कि कोई कोई व्यक्ति अपने आप को पौराणिक बोलता है इसीलिए हम आपको ये तो आपकी बात दुर्जन तोष न्याय से स्वीकार की है। मैंने तो कई पोस्ट में अभी तक उसी न्याय से उत्तर दे रहा हूं। उसी न्याय से उत्तर दे रहा हूं। ठीक है? सुनिए धैर्यपूर्वक। अब बात ये है कि अगर आप ये कहते कोई कोई व्यक्ति क्योंकि उसमें देखना पड़ेगा ना कि आप सही बोल रहे हो या गलत बोल रहे हो। ठीक है? आपको मैं पोस्टर की फोटो भेजूंगा। आपके WhatsApp पे इसी वाले नंबर पे WhatsApp भेजूंगा। पूरी शंकराचार्य जी की फोटो लगी हुई है। उसमें वो अपने उसमें वो सनातनी आर्य पौराणिक हिंदू ऐसे लिखते हैं। वो पूरा टाइटल उन्होंने लिखा हुआ है। तो पूरा लिखा है ना यही तो बात है। मैं पूरा बोल दूं

00:27:39:27 मैं चुप था। पूरा बोलिए। ठीक है। मैंने लंबा सुना था आपका। ठीक है। अब वो पूरा लिखते हैं। पूरे शंकराचार्य जी की फोटो लगी है। एक नहीं दो पोस्टर एक में फोटो लगी हुई है। दूसरे में नहीं लगी हुई है। लेकिन उनका नाम गाम वो सारा कुछ उधर वो दूसरे वाले पोस्टर में भी आ जाता है। ठीक है? शंकराचार्य इत्यादि इन सब मतलब जो है नाम आता है। ठीक है? तो यहां से आप ये बच के नहीं निकल सकती नहीं किसी एक व्यक्ति ने यूज़ कर लिया। किसी एक व्यक्ति ने यूज़ कर लिया तो तो वही वही तर्क आता है जो मैंने अपने लिए दिया था। ठीक है? तो लेकिन क्योंकि आपने अपने लिए जो मैंने बोला जो मैंने बोला था ना कि एक व्यक्ति अगर अपना नाम से वाचस्पति इत्यादि या कुछ तर्क रत्न इत्यादि लिख रहा है तो ये तो मेरे कम्युनिटी की बात कर रहे हैं ना अब ये तो फिर नहीं वो सिद्ध नहीं हो रहा ना। आप अपनी कम्युनिटी के लिए यूज़ कर रहे हैं इसीलिए सिद्ध नहीं हो रहा। अब मैं पूरा कर देता हूं अपनी बात ठीक है। क्योंकि आप कंप्लीट कम्युनिटी के लिए पौराणिक शब्द का प्रयोग कर रहे हैं। बहुत सारे शब्द प्रयोग कर रहे हैं। उनमें से जो एक है वो पौराणिक भी आपका शब्द आया हुआ है। ठीक है। एक एक इधर से यहां पर बात उठाई। आप ये गलत कह रहे हैं कि नहीं किसी एक व्यक्ति ने बोला नहीं हमारे पास में प्रमाण है कि आपका कंप्लीट कम्युनिटी के लिए बोल रहे हैं। एक बात ठीक है। दूसरी बात ये आती है। दूसरी बात ये आती है। की जो आप कह रहे थे कि आर्य समाज मतलब थोड़ा समय पॉइंट स्लिप भी हो गया मेरे दिमाग से क्योंकि दो-तीन बातें निकल करके आ गई थी साथ-साथ में आपके मन से। तो उसमें मतलब मुख्य विषय यही है और बाकी अगर हम अपने आप को हां हां आपने बोला था कि

00:28:55:06 कई बार क्या होता है कि व्यक्ति क्या करता है कि अपने आप से जिस नाम को जानता है जरूरी नहीं व्यक्ति उसी से बोले सामने वाला व्यक्ति अपने हिसाब से करता है। ठीक है यानी आप इस चीज को स्वीकार कर रहे हो आप इस चीज को स्वीकार कर रहे हो यहां पर आपने स्वीकार कर लिया क्लियर कट कि आप अपने आप को पौराणिक इत्यादि इत्यादि नामों से संबोधित करते हो आप जो आर्य समाजी लोग हैं वो अपने को आर्य समाजी नाम संबोधित करते हैं लेकिन आपने उन्हें जानबूझकर के उस नाम से ना बोल करके जिससे वो अपने को संबोधित करते हैं अपने मन से ये शब्द गढ़ा ठीक है विरोध इसी पे ही था जी विरोध इसी पे था कि आपने अपने मन से पूरा बोल दूं मैं पूरा बोल दूं आपने अपने मन से एक शब्द गढ़ा अपने मन से एक शब्द गढ़ा और शब्द गढ़ के आपने आक्षेपित किया कि नहीं तुम तो यह हो तुम तो यह हो आपने ये आक्षेपित किया इसी इसी हिसाब से हमने जो है वो इसीलिए मैंने बोला था कि अगर आप मुझे अलंकारी बार-बार बोलते हो आक्षेपित करके बोलते हो ठीक है तो मैं उसे ठीक मैं उसे उसी प्रकार ठीक नहीं मानता जिस प्रकार से मैंने आपको कुछ बोल दिया कुछ ठीक है या लिख दिया तो जिस तरह से आप उसे गलत मानते हो उसी प्रकार से मैं भी गलत मानता हूं क्योंकि मैं अपने को रिकॉग्नाइज नहीं कर रहा है इत्यादि में जोकर कहां से जुड़ा हुआ है प्रत्यक्ष रूप जोकर किसे बोलते प्रत्यक्ष रूप से कहां से जुड़ा हुआ है? शब्द है हमारे यहां जोकर आप बताइए हमारे ग्रंथों में शब्द है जोकर? नहीं आप बताइए जोकर किसे बोलते हैं? जो जोक

00:30:10:16 करता है उसे जोकर बोलते हैं। नहीं शब्द है कि नहीं जोकर? बात ये है ऐसे तो फिर जो गलत करता है। कब क्लेम किया कि शब्द है। ऐसे तो जो पाप करता है वो पापी होता है। तो मैं आपको फिर पापी नाम से स्वीकार बोलने लगूं। मैं तय करूंगा कि आपने गलत किया कि सही किया। आप मेरी चीजों को जो मेरी चीजों को आप जो करार देते हुए मुझे जोकर कहना उचित ठहरा करते हो 10 फिल्मों के नाम लेते हो मैं कह रहा हूं मैं मैं मेरे हिसाब से आप बात करते हैं मेरे हिसाब से आप बात करते हैं कौन से देखिए अब अब मैं अब मैं बोलना शुरू करूं हां आप बोल ही रहे हैं अब तो मैं मेरे पीछे कूद गया था आप बोलिए नहीं आपने पूरा पूरा बोल लिया था ना मैंने अपनी बात शुरू की थी जोकर कहां लिखा हुआ है अब आपका कहना अब आपका कहना है कि आप जो करते हो इसलिए आपको जोकर कहा पहली बात हमने अपने कहीं पर भी जोक इत्यादि का कोई नहीं लिया है। क्या कहते हैं संदर्भ दूसरी बात यह है कि अगर इस तरीके से आपको निर्णय करना है कि हम क्या करते हैं उसके आधार पे हमारा नाम तय करना है तो मैं यह तय करता हूं कि आपके यहां पर जो होने वाले विवाह इत्यादि हैं वो सब अवैध हैं या फिर आप आप जो है पाप करते हैं। कई कारणों से यदि हमारे अनुसार आप पाप करते हैं तो कोई नहीं पड़ता 1 मिनट 1 मिनट 1 मिनट 1 मिनट 1 मिनट तो

00:31:25:18 क्या आपके यहां की जो संताने होंगी उनके लिए मुझे अवैध संतान उपयोग में लेना या फिर आप जैसे आपके लिए पापी इत्यादि शब्द शब्दों को यूज़ में लेना क्या वो मान लिया जाए। दूसरी बात आपने एक कही थी कि वह पूरी कम्युनिटी के लिए नहीं किया है। ठीक है? आपने कहा था कि भाई वह किसी व्यक्ति ने अपने लिए यूज़ किया है। पहली बात कि आर्य समाजियों द्वारा अपने लिए अलंकार नाम में फिट कर लेना। क्या इस बात से आर्य समाज को आपत्ति हुई है? क्या आर्य समाज ने उसका विरोध किया है? अगर विरोध नहीं किया है तो उसका मौन समर्थन प्राप्त है। यानी कि आर्य समाजी लोग अपने आप को अलंकार कहते हैं। अपने नाम में अलंकार लगाते हैं। तो वो फिर कम्युनिटी से जुड़ गया। क्योंकि कम्युनिटी ने उस बात पर कोई आपत्ति नहीं जताई कि भाई तुम अपने आप को अलंकारी क्यों कह रहे हो? अलंकार क्यों लगा रहे हो? दूसरी बात यह है कि किसी एक व्यक्ति के द्वारा अगर यह कह दिया जाएगा कि हम यह लिख दिया जाएगा पौराणिक तो आपने मान लिया कि वो पूरी कम्युनिटी के लिए उसने किया उसको उस व्यक्ति की गलती नहीं माना जाएगा कि उसने वैदिक वैदिक पौराणिक क्यों नहीं लिखा। मगर उस क्योंकि उसने कहीं पूरी कम्युनिटी के लिए पौराणिक लिख दिया है तो इसलिए उसके द्वारा पूरी कम्युनिटी को यह मान लिया जाएगा कि भाई तुम्हारी कम्युनिटी वाले तुम तुम्हारी कम्युनिटी के लिए पौराणिक शब्द का उपयोग करते हैं

00:32:40:26 इसलिए हमने आपको पौराणिक कहा। दूसरी बात ये है कम से कम पॉइंट रखे उत्तर देने में समस्या होगी। नहीं तो भाई अब पॉइंट्स बढ़ते जाते हैं। उसमें कोई दिक्कत नहीं। तीन पॉइंट हो चुके है वैसे तो नहीं उसमें बात ये आ जाती है ना कि अगर किसी व्यक्ति ने केवल पौराणिक के रूप में प्रस्तुत कर भी दिया है तो केवल पौराणिक के रूप में प्रस्तुत करते हुए उस व्यक्ति उस व्यक्ति की गलती ना मानते हुए उसको प्रमाण के रूप में उपयोग में लेना ये तो उचित नहीं है उसको आप मानिए जब हम बता रहे हैं आपको हम सनातन वैदिक आर्य हिंदू लिखते हैं वैदिक के रूप में पौराणिक भी होता है पर्यवसान पुराणों का भी तो अगर उसको आप अलग से इंगित कर भी देंगे तो भी कोई आपत्ति नहीं है और नहीं भी करेंगे तो भी कोई आपत्ति नहीं है। अंत की अंत की 100 की सीधी एक बात है क्या जो व्यक्ति लिखता है जिसके आपने पोस्टर देखे हैं क्या वह अपने आप को वेद विरोधी पौराणिक के रूप में प्रस्तुत करते हुए लिखता है नहीं लिखता है मगर आप पौराणिक जो लिखते हो वह वेद विरोधी के रूप में लिखते हो तो यहां पर भी जिस पहचान से व्यक्ति अपने आप को जनवाना नहीं चाहता है आप वही पहचान उपयोग में लेते हुए उसके लिए संबोधन कर रहे हो ठीक है सुनिए देखिए पहली बात पहली बात आपने इसमें कई सारी बातें बोली आपने बोला कि अगर मैं देखता मैं मैं चाहूंगा मैं जरा पुलिस स्टेशन पहुंच रहा हूं। अब आप

00:33:56:04 एक लाइन सुन लीजिए ऐसा कर लीजिए आप मुख्य विषय मुझे बता दीजिए क्योंकि यह तो हमारा मुख्य विषय है हां बस मैं एक मिनट लेकर के फिर मैं मुख्य विषय पे आ जाऊंगा हम ठीक है आपने यहां पे बोला कि एक व्यक्ति ऐसा कुछ करता है ठीक है हमारे पास में प्रमाण है अगर वो एक व्यक्ति आप शंकराचार्य जी को मानते हैं तो कोई इशू नहीं क्योंकि शंकराचार्य की फोटो लगी थी अगली बात आपने बोला कि अगर मैं आपको पाप करता हुआ देखता हूं तो आपको मैं पापी मान सकता हूं। मैं ये कहता हूं कि उसी आधार पे आप अक्षय कुमार की फिल्मों के उदाहरण देते हैं। हर वीडियो के अंदर हंसी मजाक करते हैं। हंसी मजाक वाले उदाहरण देखो उस फिल्म में जैसा उसने ऐसा किया था ना इसीलिए ऐसा किया था। उसी आधार पे बोला फिर भी मैं उस चीज को सही नहीं मानते हुए उस चीज को सही नहीं मानते हुए मैं ये नहीं कहता कि मैंने सही कर दिया और आपने गलत कर दिया। इस बात को नहीं कहता। मैं यह कहता हूं कि जिस प्रकार आपने गलत किया उसी प्रकार मैंने गलत किया तो दोनों का दोष होने से मैं यह बात कहता हूं कि दोनों का दोष है। मैं यह नहीं कहता कि व्यवहारिक मर्यादा का उल्लंघन किया है। आपके पास समय आपके पास आपने बोला आपके पास समय कम है। मैं पूरा बोल देता हूं। श्रीमान जी आपने बोला समय कम है। मैं पूरा बोल देता हूं। बोलिए ठीक है। तो इसी इसी आधार पर मैं अपने आप को डिफेंड नहीं करता हूं। आपने बोला अगर आर्य समाज के अंदर आर्य समाज अगर आपको अपने आप को इसमें निषेध नहीं करते कि हम अलंकारिक नहीं है। पहली बात तो मैंने आपत्ति इस पे नहीं उठाई थी कि आप आर्य समाज को बोल तो मैंने आपत्ति उस पढ़े कि आप मेरे को बोल रहे हो। ठीक है? तो मैं तो आपत्ति उठा रहा हूं। मैं आपत्ति उठा रहा हूं। फिर आप कैसे बोल रहे हो? फिर भी मैं आपको कहता हूं कि चलो ठीक है मैंने आपको उल्टा बोला। आपने मेरे को उल्टा बोला। वहां पे दोनों की दोनों लोगों की बातें आ जाती है।

00:35:11:10 ठीक है? आप अपने पक्ष में सफाई दोगे। मैं अपने पक्ष में सफाई देता रहूंगा। वो चीजें चलती रहेंगी। लेकिन इसी श्रृंखला में आगे बढ़ते हुए मैं ये कहता हूं कि इसको एक पॉजिटिव डायरेक्शन में लेके जाना ही समझदारी होगी। ठीक है? आपकी अच्छी बात मैं आपको बताता हूं। शिवश जी, आपकी अच्छी बात मैं आपको बता देता हूं। बहुत लोग विरोध करते हो लेकिन मैं देखता हूं कि आप तर्क वितर्क करके चर्चा करने में विश्वास रखते हो जो कि मेरे को ये अच्छी बात समझ में आई। ठीक है और इसी चीज में तर्क वितर्क और मैं आपसे क्यों बात कर रहा हूं क्योंकि खंडन मंडन करने वाले बहुत लोग हैं लेकिन हम मैं हर किसी से बात नहीं करता। मेरे को बात करने में रुचि आपसे केवल इसीलिए हुई क्योंकि तर्क वितर्क करने में आप रुचि रखते हो और तर्क वितर्क करने में मुझे भी बहुत गहरी रुचि है। बस इसीलिए मैं आपसे बातचीत कर रहा हूं। ठीक है और इसमें मैं शिव जी आपको यह बात कहना चाहता हूं कि अगर मेरा पक्ष सही है मेरा यानी जो मैं ऋषि को मानता हूं ठीक है और मैं उनकी बातों को रख रहा हूं सामने तो अगर मेरा पक्ष सही है तो आप मेरे मत को स्वीकार करो अगर आपका पक्ष सही है तो मैं आपके मत को स्वीकार करूं सहर्ष से स्वीकार करूं बताइए हम देखिए पहली बात तो ये है कि ऐसा मुझे आभास हो रहा है कि हमारी बहुत जल्द जो दार्शनिक चीजें हमारे बीच में मतभेद हैं उनके निमित्त हमारे और आपके बीच में एक चर्चा सुनिश्चित हो सकती है। बिल्कुल। जिस ओर आप पॉजिटिव डायरेक्शन में ले जाना चाहते हो उस ओर तो मैं जा रहा हूं। अगर आपने यह कहा कि आपने

00:36:26:12 मेरे लिए शब्द गलत उपयोग में लिया। मैंने आपके लिए शब्द गलत उपयोग में लिया। मैं आपसे क्षमा मांगने के लिए तैयार हूं। शिवा जी मुझे कोई दिक्कत नहीं है। नहीं तो फिर कोई बात ही नहीं है। अगर आप अपनी गलती मानते हुए क्षमा मांग रहे हो। मगर पहले मैं एक बात लेकिन मैं साथ में यह भी कहता हूं कि मगर मैं एक बात बराबर नहीं है। मैं ये नहीं कहता हूं साथ में। बस ये बराबर वाली बात मैं बता रहा हूं। देखिए व्यवहारिक मर्यादा का उल्लंघन आपने किया था। प्रथम ठीक है। हमारी जो भी थी हमने जो आप कह रहे हैं कि तू तड़ाक में आपने बात की वह प्रतिक्रिया स्वरूप था। हमने था ना? हैं? लेकिन था तो? अरे तो था तो वो तो मर्यादा के अंदर आएगा ना। कोई आपको कोई आप पर हाथ उठा रहा होगा तो हाथ उठा रहा होगा तो हमें वहां पर अपनी रक्षा के स्वरूप में हाथ उठाना पड़ेगा ना। वो तो व्यवहारिक मर्यादा है। यहां पे ये बात आ गई ना कि किसी ने पहले गाली दी। रिटर्न आपने भी गाली दे दी। गाली तो शास्त्रीय है। गाली तो अशास्त्री है। गाली कोई मैं आपको बता रहा हूं। मंदोदरी रावण यदि मंदोदरी नहीं सुनिए तो गाली को मैं किसी रूप में स्वीकार नहीं करूंगा। मैंने उदाहरण दिया है। मैंने शिवश जी मैंने गाली की बात नहीं की एक्सक्ट्ली। मैंने उदाहरण देखी। जैसे अगर कोई व्यक्ति गाली देता है टर्नर में सामने वाला व्यक्ति भी गाली देता है। दोनों बराबर पे आ गए ना। नहीं नहीं नहीं सामने वाला व्यक्ति यदि विवेकी है तो उसके द्वारा गाली दिया जाना भी स्वीकार नहीं होगा। मगर यहां बात गाली की

00:37:41:15 नहीं हो रही है। यहां पर ऐसी बात हो रही है जो निषेध नहीं है पूर्ण रूप से। जैसे जैसे अब मुझे बोलने दीजिए मुझे एक एक बात बोलने दीजिए। जैसे रावण मंदोदरी का हरण करेगा। तो श्री रामचंद्र मंदोद वो रावण सीता माता का हरण करेगा। तो श्री रामचंद्र मंदोदरी का हरण नहीं करेंगे बदले में। अगर करते हैं तो गलत है ना? गलत करते हैं तो गलत है। क्योंकि वो शास्त्री है। मैं कह रहा हूं। वही तो मेरा पक्ष है। नहीं नहीं यह पक्ष नहीं है। मगर रावण रावण यदि मैंने उल्टा बोला अरे भाई सुनो तो मैं जो कहना चाह रहा हूं वो तो सुनो क्योंकि गाली उस मर्यादा से बाहर निकल जाती है। आप मुझे अगर गाली दोगे तो मैं गाली नहीं दूंगा आपको। मगर यदि आप मेरी गाली दी सुनो तो अरे सुनो तो भाई मैं जो कह रहा हूं वो तो सुनो। मगर यदि आप मुझ पर कटाक्ष करोगे तो मैं आप पर कटाक्ष करूंगा। मरदित शब्दों में ठीक है तो आपने कटाक्ष शुरू किया ना उस दिन आपने व्यक्तिगत रूप से भाई मैं तो कर दिया ना रिटर्न में शिव जी मैं वही तो कह रहा हूं तो आपने बाद बाद में जाकर के जो प्रारंभ आपने किया था और अपने उसके समर्थन में शाम को उसने उसमें आपने ये भी कहा था कि क्या कहते हैं ये हनुमान जी बन के गए समर्थन में कहा और आगे आपने मुझे जोकर अलग से कहा देना आपको उल्टा बोलना थोड़ी हुआ नहीं नहीं आपने शाम जो पोस्ट

00:38:56:21 डाली थी ना पोस्ट डाली थी जैसे जैसे आपने मर्यादा का उल्लंघन किया व्यवहारिक मर्यादा का मैंने वहां पर आपको रिटर्न दे दिया ठीक है हो गया बराबर आपने शाम को जब पोस्ट डाली तो उसमें जोकर लिखा वहां मामला कैंसिल हुआ और मैं सच बता रहा हूं मैं आपके लिए तैयार था कि आपसे बात होगी होगी होगी मगर आपने जोकर कह कर के काम खराब किया जोकर अलंकारी इत्यादि शब्दों का प्रयोग किया ना तो आपने भी तो किया भाई साहब अलंकारी और जोकर में अंतर है अलंकार शब्द ऐसे हैं जो आपको आपके ग्रंथों में मिल जाएंगे जोकर शब्द हमारे ग्रंथों में आपको नहीं मिलेगा हंसी मजाक करके जो आपकी बात मिल जाएगा शिवश जी हमारे विशेषण रूप में प्रयोग हुए ना देखिए विशेषण रूप में प्रयोग हुए कि नहीं हुए आप ये बताइए विशेषण के रूप रूप में बोल रहे थे मतलब आपने जोकर की उपमा दी है हमने विशेषण रूप में बोला है जी आपने किस प्रकार विशेषण विशेषण आपने व्यक्तिगत रूप से मुझे जोकर कहते हुए आपने व्यक्तिगत रूप से मुझे जोकर कहते हुए आपने मुझे उपमा दी है जोकर की और अगर वो विशेषण है तो हां विशेषण के रूप में मैं अभी भी कहता हूं। अच्छा अच्छा सोच के देखिए अगर आप ये कहेंगे कि मैं आपको अभी से अस्वीकार कर रहे हैं तो मैं भी तो अपने आपको अलंकारिक कहना अस्वीकार कर रहा हूं। तो मैं भी तो अपने आप को पौराणिक अस्वीकार कर रहा हूं। वेद विरोधी पौराणिक क्या करोगे? पौराणिक मैं

00:40:12:02 भी तो अपने आप को वेद विरोधी पौराणिक स्वीकार अस्वीकार कर रहा हूं। मैंने कब बोला आपको वेद विरोधी पौराणिक? अरे भैया जिन्होंने बोला उनके समर्थन में खड़े हो ना आप। आप उनसे ही बोलिए ना शिवाजी आप उनको आतलंकारी बोलिए। मुझे क्यों बोलेंगे? भाई आप उनका इस मामले में समर्थन करते हो कि नहीं? मैंने किसी का समर्थन नहीं किया। मैं अपने लिए जिंदा हूं। मैंने मैं कह रहा हूं दयानंद जी का दयानंद जी ने पौराणिक अगर कहा पौराणिक पोप पांडे कहा तो आप उसका समर्थन करते हो इस मामले में कि गलत बात समर्थन अगर मैं उस उस चीज में होता तो मैं अभी उनकी उनका पक्ष लेकर के बोलता ना कि हां आप हो पौराणिक पोप आप हो पंडित मैंने तो मैं आपसे मैं आपसे पूछ रहा हूं इतने अंश में इतने अंश में आप उनको दयानंद जी को गलत मानते हो। नहीं गलत तो मैं नहीं मानता लेकिन बात है आपको बोलने की। नहीं आपको यह क्लियर जवाब देना पड़ेगा ना जब आप बात यह है आप बचने की कोशिश कर रहे हो इसलिए क्लियर जवाब आपको देना पड़ेगा क्योंकि आप उनके समर्थक हो आप उनके समर्थक हो आप आपकी पहचान उनके समर्थक के रूप में अब आप एक जगह आकर के कहते हो कि यह तो उन्होंने बोला है यह मैंने नहीं बोला है तो इसलिए अब मुझे जानना पड़ेगा कि आप यह वाली बात उनकी गलत समझते हो हूं कि मैं भी एक्सेप्ट करता हूं कि कालूराम शास्त्री अखिलानंद ने महर्षि को मां की गाली दी है। मैं भी बोल सकता हूं उनकी गलत है। गलत है कालूराम शास्त्री अगर मां की गाली दी है तो लोग ठीक है उनकी माता जी को साथ में उल्टा उल्टा बोल मैंने क्या कहा आपको मैंने क्या कहा मां की गाली दी है तो इतने अंत में कालूराम

00:41:27:20 शास्त्री जी कालूराम शास्त्री जी का मैं समर्थन नहीं करता अगर उन्होंने मां की गाली दी है शिवा जी आपने वीडियो के अंदर पुस्तक बोल बोल करके भाई साहब मैंने क्या कहा इतने अंश में जितने अंश में उन्होंने मां की गाली दी मैं उनका समर्थन नहीं करता आप ही कह दो इतने अंश में मैं दयानंद जी का समर्थन नहीं करता बात खत्म हो जाएगी जिन जिन वेद विरोधी लोगों को उन्होंने पंडा कहा है तो अगर वेद विरोधी लो जी उत्तर तो सुनिए उत्तर तो सुनिए मैं कह रहा हूं अगर आपकी दृष्टि में कोई व्यक्ति वेद विरोधी है हां ठीक है जैसे आप अपनी वेद की व्याख्या मान रहे हैं हम अपनी वेद की व्याख्या मान रहे हैं ठीक है आपकी दृष्टि में अगर कोई वेद विरोधी है ठीक है उसे वेद विरोधी सम्मत टाइटल से बोलने में आप क्या उसे दोष मानते हैं? तो बस उसी तरीके से मेरी दृष्टि में यदि कोई व्यक्ति अलंकारी है तो उसको फिर दोष युक्त नहीं मानना चाहिए। हां अब आप ये कह सकते हैं कि मेरी भी दृष्टि में आप जोकर हैं। आप ये कह सकते हैं मेरी भी दृष्टि में आप जोकर हैं तो बस फिर चर्चा नहीं हो पाएगी। सीमा जी देखिए ऐसा है देखिए ऐसा है। आपने मैंने आपको जोकर बोला ठीक है। अब मेरी दृष्टि में आप जोकर थे तो मैंने आपको बोल दिया। तो आपकी दृष्टि कैसे होगी? अलंकारी था। आपकी दृष्टि में अलंकारी था। आपने मेरे को अलंकारी बोल दिया। लेकिन मैं अपने आप को सही जस्टिफाई नहीं कर रहा हूं। जैसे आप अभी तुरंत सोच कर रहे हैं ना देखिए जो अलंकारी नाम दिया गया है हर उस व्यक्ति के लिए जो दयानंद जी का समर्थन करता है और वो नाम कहां से आया है

00:42:42:21 कि अलंकार शब्द उन्होंने अलंकार शब्द से जितनी ऐसी चीजें हैं जो हमारी अवतारवाद जिन बातों को लेकर के वैचारिक मतभेद है मुख्य उन सबके लिए उन्होंने अलंकार का उपयोग कर दिया है कि वहां अलंकार कर रहे हैं भगवान जो है ये अलंकारिक रूप से विराट पुरुष की व्याख्या है जो है ठीक है तो उस बात को लेते हुए हमने जैसे आपने हमें वेद विरोधी पौराणिक के रूप में जो हम नहीं चाहते वो यूज़ किया वैसे ही हमने आपकी कम्युनिटी को देखा था क्या वेद विरोधी इत्यादि एक मिनटता होती है पौराणिक बोलने में अंतर होता है ठीक है तो अलंकार भी कोई ऐसा गलत शब्द नहीं अर्थ ये होता है जो पुराणों को मानता है तो अलंकार भी अलंकार का अर्थ ये होता है जो अलंकार को मानता है हां तो और जो जो फिर आपको बुरा क्यों मन लग रहा है क्योंकि जब आपको बुरा क्यों लगा था मैं बता तो रहा हूं आपके उसमें जैसे आपको नहीं जैसे आपके उसमें अलंकार के उसमें वह छुपा हुआ है कि भैया आपको बुरा लगने वाली कोई बात छुपी हुई है। ऐसे ही आपके द्वारा पौराणिक कहे जाने में भी ऐसी कोई बात छुपी हुई है जो हमें बुरी लग रही है। इसीलिए हमने आपको अलंकारिक कहा अब आपने कहा मैंने नहीं कहा। अगर आपकी बातों में जोक इत्यादि हो तो आपको कोई इस विशेषण से नवाजे तो आपको बुरा नहीं लगना चाहिए क्योंकि आप इसका समर्थन कर रहे हो। नहीं समर्थन नहीं कर रहा हूं। मैं आपको मैं आपको याद दिलाने के लिए कह रहा हूं। मैं आपको याद दिलाने के लिए कह रहा हूं कि जैसे आप जिस तरीके

00:43:57:22 से आप हमें पौराणिक जिस जिन आधार जिन चीजों को आधार बना कर कह सकते हैं उसी उन्हीं चीजों को आधार बना करके हम आपको अलंकारिक कह सकते हैं। बात को अगर आपने प्रक्षेप कर दिया तो आप समर्थन में लेकर कर रहे हो। सीधी बात नहीं समर्थन में नहीं हम आपको याद दिला रहे हैं। हम उसको अगर आप समर्थन में नहीं रहोगे तो हक्षेप कैसे बनेगा उसका? हम उसके आपको दोष बताने के लिए ऐसा कर रहे हैं जिससे आप पूछो कि भैया हम हमको जो है आपने अलंकार क्यों कहा? दोष बताने के लिए आपको याद दिला रहे हैं। प्रयोग नहीं करते। अगर आप शब्द का प्रयोग कर रहे हो यानी आप उसको उसको किसी ना किसी से स्वीकार कर रहे हो। नहीं हम अस्वीकार कर रहे हैं। मगर हम आपकी गलती याद दिलाने के लिए आपको बता रहे हैं कि हम भी ऐसा कर सकते हैं। हम भी आपको यह कह सकते हैं। आपने शिवा जी आपने किया ना ऐसा तो किया ना इसलिए किया कि हम आपको याद दिलाएं। वही तो मैं कह रहा हूं कि जैसे मेरी तरफ से गलती हुई वैसे आपने भी किया। तो आप आपकी तरफ से गलती हुई वैसे मैंने भी किया तो वो तो हमने पौराणिक के उसमें अलंकारिक का मगर मेरे अलंकारिक कहने में आप एक प्लस कर रहे हो ना की जोकर कह रहे हो। आप एक एक्स्ट्रा कर रहे हो ना तो फिर उसका निदान होना। अब जोकर कह रहे अब जोकर के लिए मैंने जोकर तो नहीं कहा मैं चुप हो गया तो फिर वो खाली रह गया ना वो जोकर वाला पौराणिक के देखिए हमारी बात इस पे ठनी थी हमारी बात पौराणिक कहने पे आपने शिवा जी एक बार मैं बोल दूं हमारी पौराणिक कहने पे नहीं ठनी थी हमारी बात ये थी कि मैंने ऐसा

00:45:12:26 जोकर लिखा इस फिर इसके आक्षेप में मैंने आपसे बोला था कि आपने भी तो अलंकारी बोला मैंने ये नहीं बोला कि आप मैंने आपको पौराणिक लिखा तब आप कह रहे हो तब आप कहने आक्षेप में अलंकारी लिखा मैंने इस पे आपने भी मुझे अलंकारी मैंने पौराणिक बोला आपने यह कहा था कि मुझे मुझे भी आपने अलंकारी कहा है तो इसलिए मैं जोकर इत्यादि कह रहा हूं। ठीक है? जिसको मैं बहुत ठीक नहीं मानता। पहली बात तो यह है स्वीकार कर रहा हूं। मैं इसको स्वीकार कर रहा हूं कि मैं इसे ठीक नहीं मान रहा। पहली बात तो ये है कि अलंकारी जो मैंने आपको कहा था व्यक्तिगत रूप से नहीं कहा था। आपकी पूरी कम्युनिटी से जुड़ा हुआ नाम है वो और उसमें आप तो आप कैसे बोल दे रहे हो? आप दयानंद से जुड़े हुए हो ना? दयानंद जी से जुड़े हुए उनको मानते हो आप। उनके समर्थक हो आप और उनकी इस बात से आपको कोई ऐतराज नहीं है कि उन्होंने हमको जो है पौराणिक कोप पांडे इत्यादि कहा है। आप चुप हो। आप कह रहे हो मैंने नहीं कहा। मगर आपको ऐतराज भी नहीं है। आप उसे दोष युक्त भी नहीं मानते हो। तो इसलिए फिर आप उनसे जुड़े हुए मेरी दृष्टि में हो और जुड़े होने की दृष्टि में उनको बोला हुआ है। ठीक बोले जो मेरे विरुद्ध उनको तो बोलना ही चाहिए ना। जुड़े हुए होने की दृष्टि में मेरे लिए भी आप उनसे जुड़े हुए हो। तो उस दृष्टि में मेरे लिए आप अलंकारी हो। दूसरी बात कि मैंने जो अक्षय कुमार की एक्टिंग की या कुछ किया वो सब जोकर के रूप में नहीं किया। मैंने एक मस्कुरा बनने हैं। विशेषण रूप में प्रयोग किया। जैसे आपने जो बोला आपने अलंकारी बोली थी तो उसकी व्याख्या कर रहे हो मेरी एक बात मेरी एक बात है एक छोटी सी बात

00:46:28:04 की अलंकारिक व्याख्या खुद कर रहे हो जैसे कि मैंने जोकर बोला उसकी व्याख्या मैं खुद करूंगा ना तो मैं मैं वही तो कह रहा हूं जो आपने व्याख्या की है मैं उसी व्याख्या में कह रहा हूं जैसे कि दयानंद जी को मानने के दयानंद जी को मानने के बावजूद भी दयानंद जी को मानने के बावजूद भी अमुक अमुक चीजों से अपने आप को अलग कर रहे हो बात अलग है कि आप उनका उन पर ऐतराज आप नहीं प्रकट कर रहे हो ठीक है मगर उनकी करता हूं हां जानू जो पुस्तक में एक-एक चीज़ लिखी है। उसे सदस्य स्वीकार करता हूं मैं। तो मतलब आपको ऐतराज नहीं है। दूसरी बात ऐसी स्थिति होते हुए भी आप अपने आप को उस पहचान से अलग कर रहे हो कि भाई मैंने आपको पौराणिक नहीं कहा। आप मुझे अलंकारी मत कहिए। ठीक है? अब दूसरी बात क्या आ जाती है कि मैं भी वहां पर जोक करने वाले होने के रूप में भी अपने आप को उस जोकर से अलग कर रहा हूं। कि भैया मैंने हंसी मज़ाक कर दिया तो मैं जोकर नहीं हूं। वहां से अपने आप को अलग कर रहा हूं। क्योंकि मैंने वो इसी मजाक ये इस रूप में नहीं किया है कि मैं लोगों को हंसाने आया हूं। इस रूप में किया है। फिर इसी आधार पे तो मैं कह रहा हूं कि बराबरी है। सुनिए तो सुनिए तो जैसे आप तो फिर जब मैंने जब मैंने अलग कर जब आपने अलग किया जब आपने अपने आप को अलग किया फिर भी मैंने आपको अलंकारी कहा और जबकि मेरा उसमें वो है कि भैया आप पौराणिक आप उसके समर्थन में खड़े हो तो मैंने तब आपको अलंकारी कहां जोकर वाले का ले लीजिए आप जोकर वाले का ले लीजिए उत्तर। इसमें पॉइंट

00:47:43:06 ये है कि जैसे आपने आपने अलंकारी कहने की अपनी पर्सनल व्याख्या की। ठीक है? मेरी दृष्टि से अब मैं जरा थाने पहुंच गया हूं। मैं मुझे मुझे सुनिए सुनिए मैं आपसे फिर बात करूंगा। आप जो है वो चर्चा सुनिश्चित कर लीजिए। अवतारवाद पे करनी है ना आपको? मुझे सर्वशक्तिमान पे पहले करनी है। हां तो वही सर्वशक्तिमान पे करनी है। आ जाइए। अच्छा दो मिनट का समय और दीजिए कि चर्चा से संबंधित मैं पुलिस स्टेशन में पहुंच गया हूं। बताइए। अच्छा मैं ये कह रहा था शिवा जी कि जैसे आपके मुख्य-मुख्य विषय एक बार मुझे नाम ना बता। नहीं तो सर्वशक्तिमान ईश्वर हो गया। तो पहले सर्वशक्तिमान से ही कर लेते हैं। सर्वशक्तिमान से सर्वशक्तिमान से अवतारवाद है। और क्या-क्या है? सर्वशक्तिमान में ही तो अवतारवाद निहित है। ठीक है। और इसके अलावा और क्या-क्या विषय है? सर्वशक्तिमान हो गया। हम वर्णाश्रम हो गया। ठीक है। परंपरा हो गई। परंपरा हो गई। हां। और एक मोक्ष का विषय हो गया। मोक्ष हो गया। ठीक है। तो हम इन विषयों पे करेंगे। तो, सबसे पहले मैं चाहता हूं क्योंकि अभी मैंने क्या है कि बाकी जो वर्णाश्रम वाले और जो मोक्ष वाले वह मैंने आपके वीडियो नहीं देखे हैं। हम् ठीक है? शक्तिमान पे कर लीजिए ना। बहुत सारी चीजें वो हो जाएंगी। अलग से नहीं करना पड़ेगा। हां सही है। तो जो सर्वशक्तिमान वाला विषय क्योंकि वह आधार है। आपकी बातों का वो आधार है। एक बार वो वाला हो जाता है। उसके बाद से फिर बाकी चीजों का खुद ही समाधान हो जाता है। हम्म हम्म। है

00:48:58:09 ना? तो फिर मैं एक काम करता हूं। मैं थोड़ा अपना आपकी जो वीडियोस वगैरह मैं इन दिनों देख ही रहा था। मैंने कल से देखना चालू किया था। मैं वो देख लेता हूं। मैं नोट डाउन कर लेता हूं। उसका खंडन वंडन मैं अपनी तरफ से तैयार कर लेता हूं। फिर हम डेट सिक्स कर लेते हैं। फिर अब लाइव चर्चा कर लेते हैं। ठीक है। ठीक। ठीक है। ठीक है। बाकी बाकी जी मैं आपको अपनी तरफ से अभी भी बोल दे रहा हूं। अगर मेरी कोई बात बुरी लगी हो। ठीक है? नहीं आपने क्षमा मांग तो लिया उसी के लिए वही है। बाकी मेरी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी आपसे है नहीं। है ना? वो हमारी भी नहीं है। वो क्या होता है मान लीजिए अगर मेरी गलती से कोई व्यवहारिक दोष ऐसा है मैं बताऊं आपको। मैं बताऊं आपको कि मैं जब पहली बार आर्य समाज मंदिर में गया था और परंपरा पर बात की थी। ठीक है जी जी जी उस समय मेरा कोई ऐसा भाव नहीं था कि मुझे यह पता ही नहीं था कि ये छीटाकसी भी होती है YouTube पर ठीक है मैंने वहां एक सामान्य भाषा में मर्यादा में रह के एक सामने वाले का बातचीत वार्ता की और उसको मैंने अपलोड किया उसके बाद आपके अब वो आप उनसे सहमत नहीं होंगे मुझे पता है मगर आपके लोगों ने के मूत निकल जाएगा ये हो जाएगा वो हो जाएगा ये सब करना चालू किया उसके परिपेक्ष में कि मैंने उसका शॉट बना के भी डाला कि भाई वो जवाब नहीं दे पा रहे हैं। मैंने उसमें कहीं अभद्रता नहीं की थी। मगर गंदी गंदी बातें अश्लीलता इस तरीके का फिर वो वो आपका वो आ गया

00:50:13:10 रिसीव हुआ आज ठीक है। वो आ के जो है ये हुआ कि चर्चा होनी है। चर्चा होनी है तो उसके हिसाब से होनी है। वो तय करेगा कि क्या है क्या नहीं है। अभी आपसे भी बात अलग है। उनकी बात हम नहीं करते। बाकी हम नहीं नहीं मैं बात नहीं कर रहा। उसने ये सब चालू किया कि मैं तेरी हम तेरी परंपरा के छितड़े उड़ाएंगे। ये करेंगे वो करेंगे। ये सब उसने चालू कर दिया। यहां से जो कटाक्ष थे जी जी वो मुझे पता चला वो प्रारंभ हो गए प्रारंभ हो गई वो मुझे पता चला कि भैया केवल हम किताबों में ही हम एक दूसरे पर कटाक्ष नहीं कर रहे हैं हमको व्यवहारिक रूप से भी एक दूसरे पर कटाक्ष करना पड़ेगा बिल्कुल अभी क्योंकि किताबों में तो कटाक्ष है वो मुझे पता है मगर व्यवहारिक रूप से हम लोग कर रहे हैं कि नहीं वो मुझे नहीं पता था वो वहां से चालू हुआ जी जी जी ठीक है बाकी बाकी जी मैं आपको बताता हूं बाकी तो अपना क्या है कि अगर आपका मत सही है तो मैं बिल्कुल बिलकुल स्वीकार करने की तैयार हूं और मैं भी चाहूंगा कि अगर मेरा मत सही सिद्ध होता है तो आप भी इसे स्वीकार करिए। हां, ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक। बाकी बाकी मैं आपको WhatsApp पे मैसेज कर दूंगा। ठीक है। और कब तक फ्री हो जाएंगे आप? मैं अभी देखिए आधे घंटे में फ्री होऊंगा। ठीक ठीक ठीक। तो फिर अगर मुझे आवश्यकता पड़ती है तो फिर मैं हम दोबारा कॉल पे बात कर लेंगे। नहीं तो लगभग लगभग तो हमारी बातचीत हो ही चुकी है। ठीक। जय श्री राम। ठीक है श्रीमान जी नमस्ते। जय श्री राम।

00:51:36:00 [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 51:41 · 18 Oct 2025

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