⬜ Not used yet · 00:00:01:27 – 00:27:14:00 (27:12)
00:00:01:27 सभी को जय श्री राम। एक वक्तव्य हमें प्राप्त हुआ है हमारे ज्यष्ठ भ्राता का पुंडरिक जी का। उन्होंने कुछ कटाक्ष पूर्वक कुछ बातें कही हैं जगुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर जी के लिए। यद्यपि एक पिता और बड़े भाई के बीच में छोटे भाई को बोलने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। पर यदि वहां पर मर्यादा का उल्लंघन करते हुए कुछ हो रहा होगा तो उसमें अवश्य ही मौन ना रहने के लिए कहा गया है धर्म शास्त्रों के द्वारा। शिव पुराण में भी लिखा हुआ है कि गुरुदेव की आज्ञा हो या ना हो गुरु के हित का कार्य सदैव करते रहना चाहिए। और मेरी जानकारी में लोग ऐसा कह सकते हैं कि मैंने जो भी कार्य किया है वह कहीं-कहीं पर लोगों को ऐसा दिख सकता है कि मैं अपने गुरु के लिए करता हूं। परंतु मेरी जानकारी में मेरे द्वारा किया गया प्रत्येक कार्य गुरुदेव के लिए नहीं होता है। वो धर्म संस्थापना के लिए होता है। और उसमें क्योंकि गुरुदेव की बहुत मुख्य भूमिका है।
00:01:17:13 श्रीमद जगद्गुरु शंकराचार्य की बहुत मुख्य भूमिका है। इसलिए उन कार्यों को करते समय लोग देखने वाले लोगों को ऐसा लग सकता है कि वह पर्टिकुलरली ये अपने गुरु के लिए कोई कार्य कर रहा है। खैर पुंडरीिक जी यद्यपि पुंडरिक जी ने जो भी बातें कही है उसमें जो सैद्धांतिक विषय को लेकर के उन्होंने जो आपत्ति प्रकट की है उसकी वास्तविकता भी कुछ और है। संभवत पुंडरिक जी को ठीक से मालूम नहीं होगा कि पूरी के शंकराचार्य जी की मान्यता क्या है चैतन्य महाप्रभु को लेकर के पर यदि केवल सैद्धांतिक आपत्ति की ही बात होती तो भी मैं यह वीडियो ना बनाता वीडियो मुझे तब बनाना पड़ रहा है जब उपहास पूर्वक नकल पूर्वक मर्यादा का उल्लंघन करते हुए एक 83 वर्ष की आयु वाले वृद्ध सन्यासी शंकराचार्य की पीठ पर बैठने वाले का बैठने वाले पर आपने कटाक्ष किया तब मुझे वहां पर बोलना पड़ रहा है। तो सबसे पहली बात करते हैं क्योंकि बात जहां से शुरू आपने की है वहीं से मैं बात शुरू करता हूं। आपको आपत्ति है कि
00:02:33:15 जगदगुरु शंकराचार्य चैतन्य महाप्रभु का नाम क्यों भूल गए? इस बात से आपको आपत्ति है। जगुरु शंकराचार्य पूरी पीठाधीश्वर क्या नाम है उनका? जी जगतगुरु श्री पूज्यपाद निशानंद सरस्वती जी महाराज कुछ महाप्रभु जी के नाम में भी उनको पूछना पड़ा था। इसलिए मैं भी थोड़ा सा पूछना पड़ा। मुझे क्षमा कीजिएगा। आपको यह संज्ञान में नहीं था कि चैतन्य महाप्रभु का जो वर्षगांठ उनकी जो आती है जयंती की प्रत्येक वर्ष जगुरु शंकराचार्य मनाते हैं। बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं और चैतन महाप्रभु जी की महिमा का गान करते हैं। तब आपने उन कार्यक्रमों के में नहीं देखा कि वो उनका नाम नहीं भूलते हैं। अच्छा दूसरी बात आपने अपने ही वक्तव्य को अपने ही द्वारा काट दिया। एक तरफ आपको आपत्ति है कि उन्होंने वह उनका वह नाम क्यों भूल गए जो कि अप्रासंगिक नाम है। चैतन्य महाप्रभु का जो प्रासंगिक नाम है वह चैतन्य महाप्रभु है। श्री कृष्ण चैतन्य भारती उनके सन्यास धारण पूर्वक जो उनको नाम प्राप्त हुआ है वो नाम है। उसको भूल जाने पर आपने आपत्ति प्रकट की और अपने ही
00:03:48:16 वक्तव्य में अगले ही कुछ मिनटों के बाद अपने ही वक्तव्य में आपने इस बात पर आपत्ति प्रकट की कि उनको जो है शंकराचार्य परंपरा का सन्यासी क्यों माना जाए। उन्होंने निश्चित रूप से भारतीय परंपरा में सन्यास लिया। भगवान श्री राम ने भी रामेश्वरम की पूजा की है। इससे वो शव नहीं हो जाते। है ना? आपने उदाहरण भी दिया कि रामेश्वरम में शिव भगवान की पूजा कर देने से वो शैव नहीं हो जाते। श्री कृष्ण श्री कृष्ण द्वारा अगर शिव भगवान की पूजा हो जाएगी तो वो शैव नहीं हो जाते। वह बात अलग है कि श्री कृष्ण और श्री राम को शास्त्रों में परम शैव बताया गया हो। वह बात अलग है। मगर फिर भी आपने आपत्ति प्रकट की कि भाई चैतन्य महाप्रभु ने अगर सन्यास वहां से लिया है तो वह उस संप्रदाय के सन्यासी नहीं हो गए। या जो भी आपने आपत्ति प्रकट की आपने उस संबंध को प्रकट किए जाने पर आपत्ति प्रकट की कि उनका जो है सन्यास परंपरा अथवा शंकराचार्य परंपरा के अनुसार चैतन्य महाप्रभु के का सैद्धांतिक संबंध शंकराचार्य परंपरा से है। इस पर आपने आपत्ति प्रकट की और इसी संबंध के परिणाम स्वरूप जो उनका नाम है श्री कृष्ण चैतन्य भारती
00:05:03:27 उसको ना प्रकट किए जाने पर भी आप आपत्ति प्रकट कर रहे हैं। तो पहले आप तय तो कर लो कि आपको आपत्ति किससे है। उनको शंकराचार्य परंपरा से संबंधित रूप में प्रस्तुत किए जाने से आपको आपत्ति है या शंकराचार्य परंपरा से संबंधित प्रकट ना किए जाने से आपको आपत्ति है। पहली बात। दूसरी बात यह आती है कि आपने उनकी नकल उतारी। यद्यपि आपको सोचना चाहिए था कि 83 वर्ष की आयु है। वह इतने प्रत्येक वर्ष जो है मनाते चले आ रहे हैं चैतन महाप्रभु की जयंती और आगे भी मनाएंगे और उसमें वो उनका नाम नहीं भूलते हैं। वो एक क्षणिक उनके विस्मृति का आयु आयुजन्य परिणाम था कि वो भूल गए और उन्होंने वो नाम पूछ लिया। फिर आपने उनकी नकल उतारी। नकल उतारते समय आपने उनका वही नाम भूल जाने का दिखावा किया जो प्रासंगिक नाम है। अगर आपको उनकी नकल उतार करके प्रकट करना था और उनकी नकल उतार करके उन पर कटाक्ष करना था तो आपको उनके उस नाम को लेना चाहिए था वहां पर नकल उतारते समय जो नाम अप्रासंगिक है। उनका वर्तमान का जो सन्यास धारण पूर्वक जो प्रासंगिक नाम है वर्तमान के वातावरण में
00:06:19:22 वो वो है जो आपने लिया। जबकि उनका पूर्वाश्रम का नाम तो दूसरा है जो प्रासंगिक नहीं है। जबकि जो जगतगुरु शंकराचार्य लेना भूल गए थे जो उन्हें याद करना पड़ा था। किसी से पूछना पड़ा था। वह नाम वर्तमान का प्रासंगिक नाम नहीं है। चैतन्य महाप्रभु का। वह नाम चैतन्य महाप्रभु का ऐसा नाम है जो हमें साहित्यिक तौर पर प्राप्त होता है। ग्रंथों से प्राप्त होता है। परंतु जो लोगों के मुख पर वरबली रहता है वह चैतन्य महाप्रभु है और वह नाम उनको बखूबी याद था। तो पहली बात तो आपको अप्रासंगिक नाम के भूले जाने पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी। फिर एक 83 वर्ष की आयु वाले वृद्ध के द्वारा भूले जाने पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए थी। और यदि आपत्ति थी अप्रसंगिक नाम को भूले जाने पर और कटाक्ष पूर्वक आपको नकल करनी थी। यह दिखाना था कि हमारे चैतन्य महाप्रभु का सिर्फ आपके ही है ना। आपने पेटेंट करा रखा है उन पर। तो यदि आपको आपत्ति थी ऐसा करने पर तो आपको जब नकल करनी थी तो उनका अप्रासंगिक नाम बताते कि यह मैं भूल गया था तब तो बात थी जो उनके पूर्वाश्रम के नाम है।
00:07:34:26 कोई भी नाम आप ले लेते। खैर तो यह तो मैंने प्रयास किया यह स्पष्ट करने का कि आपका वह अप्रोच है जो कटाक्ष करना वो कितना तर्क तार्किक है। अब आगे आपने जो बात की है चैतन महाप्रभु को भगवान माने जाने की कि नहीं माने जाने की पूरी के शंकराचार्य जी के द्वारा। तो सबसे पहले तो इसमें आपको जानकारी का अभाव है और जानकारी के अभाव के चलते ही आपने जो है क्रोध में आकर के अपना वीडियो बनाया जबकि पूरी के शंकराचार्य जी सहर्ष चैतन्य महाप्रभु को भगवान के अवतार के रूप में ही स्वीकार करते हैं। वह वीडियो आपने देख लिया होगा ना राधा कृष्ण में जो प्रेम है उसको तुलसीदास जी के शब्दों में हम कह सकते हैं तत्व प्रेम भगवान रामभद्र और सीता में जो प्रेम है उसको तत्व प्रेम तत्व प्रेम कर मम और तोरा जानत प्रिया एक मन मोरा सो मन सदा रहत पाही जान प्रीत रस यत माही यहां भी समझना चाहिए कि श्री राधा कृष्ण का जो एक ही तत्व के दोनों अवतार तो एक दूसरे के प्रति जो प्रेम है उस प्रेम को हम तत्व प्रेम कह
00:08:50:02 सकते हैं। उस तत्व प्रेम के ही अवतार श्री चैतन महाप्रभु को माना गया है। दूसरी बात यह है कि यदि दुर्जन तोष न्याय से मान भी लिया जाए कि आप चलिए मान लीजिए थोड़ी देर के लिए यद्यपि वो उनको भगवान के रूप में ही स्वीकार करते हैं। परंतु यदि मान भी लिया जाए कि वह उनको भगवान नहीं मानते हैं तो क्या उनके प्रति उनकी जो श्रद्धा है, उनका जो अनुकरण अनुसरण की उनकी भावना है वो क्या नकार दी जाए? वो क्या उनका अपमान करते हैं?
00:09:23:13 और श्री राम कृष्ण शिव की पूजा करने से वह शैव नहीं हो जाते। इस प्रकार की बातों के लिए तो आपने कह ही दिया है कि शास्त्रार्थ इत्यादि के उसमें नहीं जाना है और मैं जाना भी नहीं चाहता। मुझे आपत्ति मर्यादा का उल्लंघन करते हुए अपनी बात रखने से है मात्र। बस उसी पर मुझे बात करनी है। अब यह सब तो यह रही। अब आपने आगे एक कटाक्ष और कर दिया कि पूरी में जहां पर गोवर्धन मठ है वहां पर जो है मांस बहुत खाया जाता है या मांसाहार हो रहा है। उसको आप नहीं नियंत्रित कर पा रहे हैं और यह हो रहा है वो हो रहा है। मुझे इस बात को लेकर बहुत हंसी आती है। कई लोग आए दिन मुझे पूछते हैं कि शंकराचार्यों ने किया क्या है? शंकराचार्यों ने किया क्या है? आए दिन पूछा करते हैं शंकराचार्यों ने किया क्या है? शंकराचार्यों ने क्या किया है यह आपको तब पता नहीं लगता है जब करपात्री जी महाराज के द्वारा राधा सुधा नामक ग्रंथ लिखा जाता है वो भी तब जब रास लीला को बैन कराने की बातें की जा रही होती है। शंकराचार्यों ने किया क्या है? यह तब आपको पता नहीं लगता है कि लोग आस्तिक बनते हैं और आप जो कथा वक्ता होते हैं, कथा
00:10:38:24 व्यास होते हैं, उनकी कथाएं आकर के सुनते हैं। अरे भैया जो लोग आपकी कथाएं सुन रहे हैं, उन लोगों के अंदर कथा सुनने की भावना, ईश्वर के प्रति आस्तिकता की भावना किसने डाली है? जब कोई व्यक्ति नास्तिक नहीं है तभी तो वो आकर के कथा सुनेगा ना। अगर मैं बात करूं पूज्य गुरुदेव भगवान ने या अन्य शंकराचार्यों ने तो अपने अपने जीवन काल में ना जाने क्या-क्या करके रख दिया उसकी तो बात छोड़िए कि राम सेतु राम सेतु की लड़ाईयां कैसे लड़ी या राम मंदिर अयोध्या की लड़ाईयां कैसे लड़ी या नास्तिकों का खंडन आज भी कैसे कर रहे हैं पूरे भारतवर्ष में 83 83 वर्ष की आयु में घूम घूम कर कैसे चल रहे हैं इन सब बातों को छोड़ भी दिया जाए शासन तंत्र से कैसे टकरा रहे सीधे तौर पर इन सब बातों को यदि छोड़ भी दिया जाए तो रामपाल को तो जानते ही होंगे ना आप उनके ही द्वारा शिक्षित उनके ही द्वारा दीक्षित उनके ही किसी शिष्य ने भगवत कृपा से मैं बता रहा हूं बस आपको लखनऊ के अंदर रामपाल की किताबें हैं जिसमें भगवान श्री कृष्ण से लेकर भगवान के हर विग्रह को कोसा गया
00:11:54:02 है अश्लील टिप्पणियों से भरी पड़ी किताबें उसको रोक दिया हमने बिकने से मथुरा में बिक रही है आज भी मथुरा में तो आप जैसे सामर्थ्यवान और आपके साथ वाले और अन्य सामर्थवान कई लोग सक्रिय है ना तो क्यों बिक रही है मथुरा में तो उसका सेंटर अभी भी खुल रहा है तो इसका मतलब यह मान लिया जाए कि आप धर्म परायण नहीं है आप और आपके साथ जितने भी लोग मिलकर करके खड़े हुए हैं और रामपाल का अड्डा क्योंकि वहां खुला हुआ है अभी भी तो यह मान लिया जाए कि आप लोग सामर्थ्यवान नहीं है।
00:12:34:00 यह माना जाए ना और उस इन बातों को लेकर आप पर आपत्ति जताई जाए। पूरी में मांसाहार ज्यादा है। मगर रील्स कहां पर बनती है ज्यादा? भक्ति के नाम पर। कहां पर ज्यादा कम कपड़े पहन के लोग दिखाई देते हैं मंदिरों के आसपास? धर्म का धर्म के नाम पर व्यापार कहां पर हो रहा है ज्यादा? आप बताइए के नहाने पर झाड़ू लगाती है, पोछा लगाती है, खाना बनाती है, गरम गरम। खुद नॉनवेज नहीं खाती लेकिन मेरे चिकन बनाती है। भूत जैसे हम दोनों भाई बहनों को जल्दी आना प्रभु भाई गणेशा तू रहना साथ हमेशा। बिहारी जी की सभी भक्तों को आप देख अभिनव अरोड़ा। यहां बिहारी जी आकर के ऐसे ही लोग देखिए यह सेवा भाव में लगे हुए हैं। जहां गंदगी है वहां गंदगी सफाई नहीं हो रही है। यह टच्च सेवा ये देखिए YouTube बनाने के लिए वीडियो के लिए वायरल होने के लिए देखो ये देखो यूबरों को वृंदावन में यूबर वृंदावन में आकर के आप देखिए हमारे में क्या होता है। जहां गंदगी है देखिए ये सफाई नहीं है। ये मेरा काम है। मैं आप अपना करो। ये देखिए हमारे वृंदावन
00:13:49:10 में यूबरों का आ के आतंक एक सेकंड जो यहां सफाई कर रहे हैं ये भैया है प्रतिदिन यहां सफाई करते ये कोई बातें हैं कि अगर दुनिया में कहीं पर कुछ गलत हो रहा है तो भगवान को ही कोसने लगो भगवान है सनातन धर्म है तो दुनिया में पाप क्यों हो रहा है भगवान है तो वही वाली बात आर्य समाजियों की भाषा होती है ये तो ये तो आर्य समाजियों की भाषा है ना कि भगवान अगर आके बचाने वाले होते हैं धर्म वाले होते तो फिर क्यों नहीं आ रहा है भगवान निर्भय हत्या कांड में क्यों नहीं आए भगवान लो शंकराचार्य से ही क्यों पूछ रहे हो भगवान से पूछ लो फिर तो
00:14:30:16 और रामपाल का अड्डा कब बंद करवा रहे हो अपने यहां बताइए आप चिंता ना करें जेष्ठ भ्राता रामपाल का अड्डा भगवान ने चाहा और आपका आशीर्वाद रहा जल्दी ही मथुरा वाला भी बंद हो जाएगा मगर मैं आपका ध्यान इस ओर आकर्षित कर रहा हूं कि शंकराचार्य के ऐसे ना जाने कितने इतने शिष्य हैं जो अपने प्राणों को भी न्योछावर करते हुए धर्म के लिए मर मिटने मर मिटने तक को तैयार हैं। इन शिष्यों को खड़ा करने वाले आप नहीं है। शंकराचार्य हैं। तो फिर आइए आप आज लखनऊ में ढूंढ के बताइए। अगर कोई पकड़ मिल गया ना रामपाल की किताबें बेचने वाला तो धरा जाएगा तुरंत। ये किया शंकराचार्य ने। और प्रत्यक्ष रूप से शंकराचार्य ने अगर कुछ किया हो या ना भी किया हो वो बात और है वह प्रत्यक्ष रूप से करने वाली जाने कितनी बातें हैं। प्रत्यक्ष रूप से शंकराचार्य ने कभी कुछ किया हो या ना किया हो। मगर अगर दुनिया में कहीं भी कोई व्यक्ति बल्ब जलाकर रोशनी प्राप्त कर रहा है ना तो उसको मानना पड़ेगा कि वह रोशनी उसके घर में थॉमस अलवा एडिसन के द्वारा आ रही है। अगर दुनिया में कोई कहीं भी आस्तिक बनके कहीं पर कथा का श्रवण सुन रहा है ना तो उसको मानना पड़ेगा कि आज भी वो नास्तिकता का खंडन कर सकने वाले
00:15:45:18 सिद्धांत शंकराचार्य के द्वारा अपने रक्त से सींचे जा रहे हैं। तब जाकर के कोई व्यक्ति आस्तिक होता हुआ किसी की कथा सुनता है। इसी प्रकार से नास्तिक भी कुतर्क करता है कि भैया विदेशों में तो समझो सनातन शास्त्र नहीं पढ़ रहा है। वह भी अपनी बहन को बहन मान रहा है। वह कैसे मान रहा है? तो हम उसको यही कहते हैं कि जितने अंश में जो व्यक्ति धार्मिक है धर्म का कहीं पर भी कोई अनुसरण अनुकरण हो रहा है। उसके पीछे सनातन है। उतने अंश में वहां सनातन का सिद्धांत व्याप्त है। सीधे तौर पर नहीं तो अप्रत्यक्ष तौर पर। उसी प्रकार जिस प्रकार से यदि आपके घर में बल्ब जल रहा है तो उसका कारण प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से थॉमस अलवा एडिसन ही है। हम ये नहीं कह सकते कि हमने अगर बल्ब परचून की दुकान से खरीदा है इलेक्ट्रिक की दुकान से खरीदा है तो वो बल्ब हम तक थॉमस अलवा एडिसन ने नहीं पहुंचाया। उसी प्रकार यदि दुनिया में आज भी कोई आस्तिक है आज भी सामने खड़ी हुई तीन स्त्रियों में अंतर कर पा रहा है कि किसको किस दृष्टि से देखना है माता बहन और पत्नी में उसका कारण उसकी आस्तिकता का कारण शंकराचार्य है। इन बातों पर आपको ध्यान देना चाहिए।
00:17:00:00 सैद्धांतिक कोई मतभेद था ही नहीं। सैद्धांतिक आपने टिप्पणी की की होती तो मेरा कोई उसमें अधिकार नहीं था। मेरा कोई अधिकार नहीं था आपके और उनके बीच में बोलने का। यदि आपने मर्यादा ना लांगी होती। यदि आपने नाट्य रूपांतरण ना किया होता और वर्णाश्रम की धज्जियां उड़ाई जाती हैं। आपकी नाक के नीचे और आप उनका प्रतिकार कैसे करते हैं? थोड़ी सी जो जो वर्णाश्रम धर्म का पालन वेदों के बीच में किया गया कुछ एक मूल कारण ये वर्णाश्रम धर्म की वजह से मैंने कुछ लोगों से बातचीत करी है तो सबने एक जो महत्वपूर्ण कॉमन बिंदु बताया वो ये बताया कि जो वेद का वर्णाश्रम धर्म है हम देखो राधा रमण जी के उपासक है यहां भी हम सब लोग अह चार आश्रम सब वर्ण आदि का पालन करके भगवत सेवा करते हैं तो जो वर्णाश्रम धर्म धर्म का परष्कृतकरण है। उसको थोड़ा सा हमें और पुष्ट करने की आवश्यकता है। एक चीज इस कौन को जो है करनी चाहिए वर्णाश्रम पर ध्यान देना चाहिए। वर्णाश्रम का कितना महत्व बताया गया धर्म ग्रंथों में
00:18:15:10 और वर्णाश्रम को लेकर के आप कितने चिंतित हैं वो तो दिखाई देता है। किस प्रकार के लोगों को आपने प्रश्रय दिया हुआ है। जिस दिन आप चाह ले उस दिन उनका सब नामोनिशान मिट जाए। मगर मजाल है कि आप चाह ले। आपकी लड़ाईयां भी हम जैसों को लड़नी पड़ रही है। और हमने आपका कभी नाम नहीं लिया। ठीक है? आपकी अपनी कोई प्रणाली होगी धर्म धर्म संस्थापना के लिए। ठीक है भाई। ठीक है। हमने आप पर कभी उंगली नहीं उठाई। आपसे सवाल नहीं किया कि भैया शिव और कृष्ण में तुम भेद का प्रचार कर रहे हो। कृष्ण को कभी भी शिव के समान ना समझना। शिव का अपमान करो। शिव का उपहास उड़ाओ। दुर्गा का उपहास उड़ाओ। दूसरे संतों का उपहास उड़ाओ। मगर कृष्ण और अल्लाह को एक बता दो। और ऐसे लोगों को आप प्रश्रय देते हो। दूसरे संतों का, मरती हुई मां का, अपमान करने वाले को आप प्रशय देते हो। तो शिव जी के उन्होंने साथ मीटिंग की। उन्होंने कहा शिव जी एक बड़ा इंपॉर्टेंट डिस्कशन करना है मेरे को। भाई तिलक का स्टाइल बदलो आप।
00:19:24:28 ये राक्षस लोग हैं ना ये लोग भी उधु पुंडर ही लगाते हैं। इनका त्रिपुण कर दो आप। ठीक है जी। कर देंगे। तो उससे पहले शिवजी भी उध पुंडरक लगाया करते थे। कहते लेकिन क्योंकि एचओडी इनका मैं ही हूं तामसिक लोगों का तो इसीलिए मेरे को फिर वही करना पड़ेगा। लेकिन ठीक है आपकी अब सेवा के लिए अब सारे डिफिकल्ट सेवाएं तो इन्हीं को मिलनी है। तो फिर इन्होंने फिर सारे राक्षसों को बुलाया। कहते हैं देखो ये जो उर्ध पुंडरक है इससे हमारी शक्ति कम होती है बल्कि। अगर राक्षसों को अपनी शक्ति डबल करनी है तो उसके लिए एक बहुत ही विशेष तिलक है जो कि मैं सिद्ध करके वो तिलक मैंने डिजाइन किया है और वो है त्रिपुंड ये वाला अच्छा भाई शिवजी ने भाई नया तिलक का डिजाइन निकाला है फिर सब ने जो है अपना लिया और फिर शंकराचार्य की आदि शंकराचार्य जी की मरती हुई मां की एक्टिंग की अमोग लीला ने तब आपको दिखाई नहीं दिया अपमान हो रहा है ये आदि शंकराचार्य को की मरती हुई मां का इसने इनफॉर्म किया भाई आदि शंकराचार्य आपकी माता श्री बहुत बीमार है तो आप जाके आप अपनी माता से मिल लीजिए तो अपने शिष्यों के साथ ही पहुंच गए माता के पास कहते मां तुम बहुत बीमार हो हां बस प्राण निकलने ही वाले हैं तू मुझे उनके बारे में बता दे जिनका तू हृदय
00:20:40:02 में भजन करता है शंकर कहते ठीक है मां ये निराकार ब्रह्म जो सर्वव्यापी है सर्वसाक्षी है निर्विकार है कहता है अरे शंकर कर। क्या कर रहा है तू? मैं कभी भी मर सकती हूं। कभी भी मेरे प्राण निकाल सकते। तू क्या कर रहा है? तू मुझे उनके बारे में क्यों नहीं बताता जिनका तू हृदय में भजन करता है। कहता है ठीक है मां। तो तू परमात्मा के बारे में सुन। क्योंकि उपदिष्टा है। अनुमता है। कहता है अरे शंकर मेरे कभी भी प्राण निकल सकते। तू क्या कर रहा है? तू मुझे उनके बारे में क्यों नहीं बताता जिनका तू हृदय में भजन करता है। कहता है ओह हो मां। तो सुनो शिष्यों आप लोग थोड़ा बाहर जाओ। आप लोग बाहर ध्यान लगाओ। निराकार ब्रह पे मैं अभी आ रहा हूं। इनको बाहर भेजा चुटकनी बंद की। कहता है मां अब तू राधा श्याम सुंदर के बारे में सुन। जितने परंपरा प्राप्त आचार्य हैं सबको इस बात पर आपत्ति है इस कौन की कि वर्णाश्रम का ध्यान क्यों नहीं रख रहा है? और आप क्या करते हो? उनको प्रश्रय देते हो। आपकी नाक के नीचे मथुरा से आवाज उठाई गई है आर्य समाझी के द्वारा किसी के मैं चुनौती देता हूं। मैं चैलेंज करता हूं। कोई भी भगवान का अवतार सिद्ध करके दिखा दे। साकार भगवान को सिद्ध करके दिखा दे।
00:21:55:18 क्या किया आपने? क्यों नहीं उसका चैलेंज स्वीकार किया? चिंता ना करें भ्राता। आप कथा करें। आप लोगों को भक्ति कराएं। उनको आस्तिक हम बनाएंगे। भगवान के अवतार को हम सिद्ध करेंगे। भगवत कृपा से। अपने से कुछ नहीं। भगवत कृपा से। तो मैं ससम्मान आपको यह याद दिलाना चाह रहा हूं कि यदि हमने जापान नहीं देखा है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि इस दुनिया में जापान है नहीं। यदि आपने नहीं देखा है कि पूरी के शंकराचार्य चैतन्य महाप्रभु को भगवान मानते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह उनको भगवान नहीं मानते हैं। तो पहले अपनी जानकारी पूरी बटोरिए। उसके बाद आप जो है कोई टीका टिप्पणी करें वह भी मर्यादा में रहकर
00:22:50:19 मैंने देखा था आपने जब वीडियो बनाया था तो आपके अंदर कितना रोष था अधूरी जानकारी के चलते संभवत जिनको प्रश्ते हो उन्हीं ने आपको आगे करने के लिए वीडियो के लिए आपको जो है किसी प्रकार से जो है आधी अधूरी खबरें दे दी हो सकता है बिल्कुल ऐसा हो सकता है परंतु क्रोध में आकर के आपको निर्णय लेना नहीं चाहिए था वीडियो बनाने का क्योंकि जगतगुरु शंकराचार्य सिद्धांत बताते हैं भगवत गीता में भी आपने तो आप तो मुझसे कहीं ज्यादा ज्ञाता हैं शास्त्रों के भगवत गीता में भगवान ने कहा है ना कि क्रोध जो होता है मनुष्य की सोचने समझने की शक्ति को जला देता है। जहां से क्रोध अग्नि की तरह होता है। जहां से उत्पन्न होता है सबसे पहले उसी को जलाता है। तो क्रोध ने आपने जब वह क्लिप देखी गुरुदेव की तो उसके आगे यह देखना भूल गए कि गुरुदेव क्या कहना चाह रहे हैं कि चैतन्य महाप्रभु के नाम पर किस तरह से पाखंड फैलाया जा रहा है। वर्णाश्रम की धज्जियां उड़ाई जा रही है। भगवान के अन्य स्वरूपों का अपमान किया जा रहा है। अन्य संतों का अपमान किया जा रहा है। मगर भगवान श्री कृष्ण को अल्लाह के समान बता के प्रचारित किया जा रहा है। और ना जाने क्या-क्या किया जा रहा है। गौडिया वैष्णव सिद्ध का नाम ले लेकर के गौडिया
00:24:05:20 वैष्णव सिद्धांतों का ही अपमान किया जा रहा है। जो विश्वनाथ पाद जी हैं उन्होंने स्पष्ट रूप से भगवत गीता चार 13 में लिखा है कि जन्म से वर्ण व्यवस्था होती है व्यवहार के लिए और कर्म से उसका परमार्थ सुनिश्चित होता है। चार 13 का क्या भाष्य गौडिया वैष्णव संप्रदाय का? और ये इस वाले क्या भाष्य करते हैं? क्या दिखाते हैं बात चैतन्य महाप्रभु की अगर कर ले तो चैतन्य महाप्रभु के जो सिद्धांत है उनकी उनका जो आदेश है उनकी अवेलना करके प्रचार करता है इस कौन यह अपमान नहीं है चैतन्य महाप्रभु का उनको तो आप प्रशय देते हैं उनकी तो आपने आज तक नकल नहीं उतारी जो खिलवाड़ करके रख रहे हैं धर्म के साथ चैतन महाप्रभु के सिद्धांतों के साथ गड़िया वैष्णव संप्रदाय के सिद्धांतों के साथ वर्णाश्रम के साथ अन्य भगवत स्वरूप स्वरूपों के साथ अपमान करके रख रहे हैं संतों का। बाबे हैं, वैश्या है। यह सब बातें जो बोल रहे हैं उनका तो प्रतिकार आपसे नहीं हुआ। मगर एक 83 साल का वृद्ध प्रत्येक वर्ष चैतन्य महाप्रभु की जयंती बनाते बनाते एक इंटरव्यू के दौरान
00:25:21:03 उनका चैतन महाप्रभु का ऐसा नाम भूल गया जो कि अप्रासंगिक है और आपके हिसाब से वह नाम तो बताया ही नहीं जाना चाहिए क्योंकि आपको आपत्ति है चैतन महाप्रभु का संबंध शंकर संप्रदाय से बताने पर ऐसा नाम लेना वह स्वयं भूल गए तो उसका बड़ा आपने अपमान पूर्वक वीडियो बना दिया कटाक्ष में तो मेरा निवेदन है आपका अनुज हूं। कोई बात अगर कठोर मेरी लग गई हो तो उसको गौण रूप से देखते हुए मेरे प्रति अनुज भाव रखते हुए मेरे इस वक्तव्य को देखें। मर्यादा और सिद्धांतों के लिए जो समर्पण की भावना से आपको अवगत कराने का प्रयास है उसको प्राथमिकता से देखें। इतना मेरा निवेदन है आदर पूर्वक है। आपके आदर में कहीं कोई वो नहीं है और ऐसा भी नहीं है कि अब यह वक्तव्य हो गया है तो आपके भविष्य में आपके प्रति किसी का कोई भाव बदलने वाला है पर जिन बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है उस पर ध्यान अवश्य दें और जहां पर आप रह रहे हैं वहां पर आपके अधिकार
00:26:36:04 की सीमा में जो आ सकता है उस पर कार्य करने का प्रयास करेंगे तो भी अच्छा होगा या नहीं करेंगे तो मैं समझूंगा कि आपका धर्म संस्थापना के निमित्त और ना कोई ना कोई ऐसा प्रकल्प होगा जिसकी रक्षा के कारण आप ऐसा कर कर पाने में अभी सक्षम नहीं है या फिर आपका मंतव्य अभी ऐसा नहीं है। ज्वाला प्रसाद मिश्र जो ज्वाला प्रसाद शास्त्री करके जो व्यक्ति है जिसने मथुरा की धरती से अवतारवाद का खंडन करने का प्रयास किया है उसको हम देख लेंगे। जय श्री राम।
00:27:12:29 [संगीत]
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
-
⬜Hindi SRT Required
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
श्रीमन्महाप्रभु के प्रति पूज्यपाद श्रीमद् जगद्गुरु महाभाग का भाव क्या है
🔗 This video is made from parts of these videos
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮