No part of this video is used anywhere yet.
SRT: ⬇ SRT ⬇ Original file

.srt or .vtt (Hindi). The old file is backed up. After that the match for this video is rebuilt (may take a few minutes, keep the page open).

⬜ Not used yet · 00:00:01:15 – 00:39:05:00 (39:03)

00:00:01:15 तो सभी को जय श्री राम। कभी बचपन में मैंने पढ़ा था कहीं पर कि मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण वो साहित्य करता है जिस साहित्य को वो पढ़ता है और धीरे-धीरे जैसे-जैसे मैं बड़ा होता गया तो मैंने ये चीज देखी कि हम जिस प्रकार के साहित्य से घिरे होते हैं हमारा समाज भी वैसा ही निर्मित होता है। हमारा पर्टिकुलर हमारा जो व्यक्तित्व है वो उसी से ओतप्रोत होता है। सौभाग्यवश मुझे बचपन से वो साहित्य मिला जिसके कारण मैं राम को जान पाया, कृष्ण को जान पाया, हनुमान जी को जान पाया। तो जिसके पास जैसा साहित्य उपलब्ध हो जाता है उस व्यक्ति का निर्माण वैसा ही होने लगता है। और आप माने या ना माने आज का जो सबसे प्रासंगिक साहित्य है वो है टीवी, टेलीविजन, फिल्में, सीरियल्स और शायद इस व्यक्तित्व निर्माण के कारण ही सनातन धर्म में ईश्वर के इतने विभिन्न प्रकार के चरित्रों का चित्रण किया

00:01:16:19 है, लीलाएं दिखाई है। कथाएं हैं हमारे पास जिनसे कि उन कथाओं को पढ़ करके उन्हीं से ओतप्रोत हमारे व्यक्तित्व का निर्माण हो और हम लगातार यदि हमारे मन में चिंतन भी चले तो बजाय फिल्मी टीवी सीरियलों की बजाय हमारे मन में चिंतन चले हमारे ईश्वर का हमारे ईस्ट का तो ये दोनों बातें आपस में कनेक्टेड करती है कि आप एक तरफ यह कहा जा रहा है कि जिस साहित्य का हम अध्ययन करते हैं वैसा हमारा व्यक्तित्व निर्माण होता है। और दूसरी तरफ हमारे धर्म शास्त्रों द्वारा बताया जा रहा है कि अध्ययन करिए। अपने शास्त्रों का अध्ययन करिए। शास्त्रों का अध्ययन करने से भगवान की कथाएं भगवान की लीलाएं पढ़ने से उन्हीं का चिंतन मन में होगा। और जितना परम तत्व का चिंतन आपके मन में होगा उतना ही परम तत्व में आपकी निष्ठा होगा उतना ही आप संसार रूपी प्रपंच में फैली हुई माया से बच पाएंगे। तो जैसा कि हमने एक बात जानी कि आज का जो सबसे प्रासंगिक साहित्य है वो है फिल्में टीवी सीरियल्स सबसे ज्यादा समाज को प्रभावित करने वाली जो सामग्री है वो आज के समय

00:02:31:20 में फिल्में ही हैं। अभी फिलहाल यह बात करने का मेरा अभिप्राय प्रयोजन यही है कि वर्तमान में एक कांतारा नाम की फिल्म आई है। जिस पर कि जो फिल्म रिव्यूज करने वाले लोग थे उन्होंने अपनीप अपनेप रिव्यूज दिए हैं और वहां पर यह देखा जा रहा है कि कुछ लोग कुछ सही रिव्यूज को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। मतलब उसमें दो पक्ष हो गए कांतारा मूवी को लेकर के। एक पक्ष ने अपने हिसाब से बिल्कुल अह निष्ठा पूर्वक और बिना किसी पक्षपात के रिवु दिया है। भले ही वह रिव्यु सकारात्मक हो अथवा नकारात्मक मगर दूसरा व्यक्ति यदि उसने नकारात्मक दिया है तो वह सकारात्मकता के नाम पर उसका दमन करने का प्रयास कर रहा है जिसने कि निष्ठा पूर्वक सही बात बोली है और यदि उसने नकारात्मक यदि उसने सकारात्मक किया तो नकारात्मक क्या नकारात्मकता के आधार पर उसका दमन करने का प्रयास कर रहा है जिसने सही बात बोली तो यह बात अब सामान्य हो गई है और बहुत स्पष्ट रूप से दिख रही है समाज में कि जिन

00:03:46:24 लोगों को कहीं कहीं ना कहीं जो परंपरा प्राप्त और जिन तथाकथित या भटके हुए हिंदू या भटका हुआ समाज जिन्हें रूढ़िवादी कहता है। है ना? या फिर वह उस दृष्टिकोण से नहीं देखता कि समाज के उत्थान में काम आने वाले वही परंपरा प्राप्त आचार्य हैं जिनको कि आज का जो सामान्य जन है वो रूढ़िवादी इत्यादि के नजरिए से देख रहा है। नेगेटिव तरीके से देख रहा है। नकारात्मकता के साथ देख रहा है। तो वो जो समाज है उस समाज के अनुसार जो लोग रूढ़िवादी नहीं है। उस समाज के अनुसार जो लोग आज के समसामयिक वातावरण को लेकर चलने वाले हैं और वह उतने अह प्रबल कट्टर रूप से वर्णाश्रम के पक्षधर भी नहीं है। तो उस समाज के नजरिए से जो ऐसे लोग हैं जो उनके लिए सही हैं आज उनकी भी आवाज को दबाने का आज उनका भी दमन कर देने का प्रयास स्पष्ट रूप से सामने दिखने लगा है। जहां एक और अभी अजीत भारती ने किसी बात को लेकर के अमुक अमुक दल का विरोध किया तो उसकी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया। वहीं पे कांतारा

00:05:01:27 मूवी को लेकर के किसी ने निष्पक्षता के साथ अपनी बात को रखा तो वहां अजीत भारती जैसे लोगों द्वारा ही उसकी आवाज को दबाने का प्रयास किया गया। तो यहां पर क्या चल रहा है? हर बड़ी मछली छोटी मछली को खाने पर तुली हुई है। ऐसा ही तो दिखाई दे रहा है। खैर कांतारा मूवी में प्रतीक बोराणी ने निष्पक्षता पूर्वक एक रिव्यु दिया कि उस मूवी में जो भारतीय इतिहास है उसको गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है और उसमें यह दिखाने का प्रयास किया जा रहा है कि भाई हमारे यहां तो जो पिछड़ा वर्ग था या जो आदिवासी वर्ग था या जिसको आज हम दलित कहते हैं उनका शोषण होता था हमारे यहां। हम और जो राजसत्ता होती थी वो शोषण कराती थी। अब प्रतीक बुरा ने तो अपना रिव्यु जो देना था दे दिया। उसने सिरे से फिल्म को नकार दिया। फिल्म भले ही कितनी भी अच्छी बनी हो फिल्म भले ही बहुत लागत से बनी हो या बहुत हिट हो रही हो या फिर उसको देखने बहुत सारे लोग जा रहे हो या फिर उसको बहुत सारे लोग हिंदुत्ववादी कह रहे हो। डजंट मैटर। उस व्यक्ति ने अपना निष्पक्षता पूर्ण पक्ष रख दिया जो बिल्कुल सही था क्योंकि

00:06:19:03 यह रिवु देने से पहले मैंने खुद पहले वो मूवी जाकर के देखी मैंने समझा कि मामला है क्या उस मूवी में परोसा क्या गया है जो प्रतीक बोराडे जैसे आज की दुनिया में आज का जो जन सामान्य है जिसके अनुसार प्रतीक बोराडे एक वही सही व्यक्ति है जो बहुत कट्टर कट्टरता से वर्णाश्रम इत्यादि का पक्षधार नहीं है तो उस व्यक्ति के द्वारा दिया गया। रिव्यू भी आज स्वयं को बहुत बड़ा धर्म रक्षक तथाकथित या फिर राष्ट्र रक्षक बताने वाले लोग उस व्यक्ति का रिव्यु क्यों ठुकरा रहे हैं? आज ये कैसे दिखाई दे रहा है? जैसे कि कोई कई लोगों को यह चमत्कार दिखा होगा कि अजीत भारती ने सदैव बीजेपी का पक्ष लिया। आज बीजेपी की सरकार में ही अजीत भारती को कैसे पुलिस के द्वारा जो है बुलवाया जा रहा है। सबसे पहली बात तो यह है कि लन लल्लन टॉक जैसे जो चैनल है उनके द्वारा यह बताया जा रहा है कि भाई

00:07:16:24 जो गवाही है उनके ऊपर जूता फेंका गया जो कि बहुत ही बड़ा गलत जो तो बहुत जो कि बहुत बड़ा अपराध है बिल्कुल अपराध है। बिल्कुल सही बात है। परंतु जिस प्रकार एक बिटिया के साथ अर्ध रात्रि में घर से बाहर रहने पर कोई कुकर्म हो जाता है, दुष्कर्म हो जाता है तो सामने वाले को सजा दी जाती है। ठीक है। बिल्कुल ठीक है। कि सामने वाला जो कुकर्म करने वाला है, दुष्कर्म करने वाला है, मौके का फायदा उठाते हुए, अवसर का फायदा उठाते हुए जो दुष्कर्म करने वाला व्यक्ति है, उसको सजा देनी चाहिए। बिल्कुल ठीक बात है। पर अपनी बिटिया को भी बाद में समझाया जाता है कि बिटिया तुमको रात को बाहर नहीं बाहर जाना चाहिए था। तुमको अर्ध रात्रि में घर के बाहर नहीं जाना चाहिए था। जाना चाहिए था। कोई इमरजेंसी थी तो अपने भाई को भेजना चाहिए था। अपने पिता को भेजना चाहिए था। किसी संगी साथी को साथ में लेना चाहिए था। उसी प्रकार से अजीत भारती की भी भाषा इत्यादि ऐसी नहीं है जो ग्राह हो। परंतु गवाही को कौन समझाने वाला है कि तुमने हिंदू धर्म का अपमान किया है? क्या लल्लन टॉप ने गवाही को समझाया?

00:08:34:02 सुप्रीम कोर्ट को कौन समझाने वाला है कि भाई इस पक्ष पर भी तो ध्यान दो कि हिंदू धर्म की जो आस्था है, सनातनियों की जो आस्था है और मानव मात्र का एकमात्र कल्याण कर सकने वाले सिद्धांतों को तुम नष्ट कर देना चाहते हो। जीवन बचेगा कैसे? यह बात ध्यान रखना कि संसार में जब भी कोई व्यक्ति अपनी माता को माता की दृष्टि से देख रहा है। माता को माता मान रहा है। इसका मतलब समझ जाना कि वो सनातन धर्म के कारण है। जिस दिन सनातन धर्म को आप हटा लोगे ना इस तरीके से नष्ट करते चले जाओगे। उस दिन ये जो मानवता दिखाई दे रही ना जिसके नाम पर हल्ला मचा रहे हो ढिंढोरा पीट रहे हो। वो मानवता

00:09:22:12 छिन्न भिन्न हो जाएगी पता नहीं लगेगा जो टुकड़ों में कर कर के कर कर के हत्या कर रहे हो मानवता की मानवता के मूल में अगर जाओगे तो सनातन धर्म मिलेगा और कुछ मिल ही नहीं सकता। सनातन का विरोध करने वाला मिल ही नहीं सकता वहां पे। तो इस प्रकार धीरे धीरे धीरे करके सनातन की छाती को छलनी कर कर के कर कर के किस ओर ले जा रहे हो आप मानवता के नाम पे मानवता से दूर ले जा रहे हो तो इस ओर ध्यान कौन देगा इस ओर ध्यान दिया गया नहीं दिया गया और जब इस ओर ध्यान नहीं दिया जाएगा बार-बार नहीं दिया जाएगा बार-बार नहीं दिया जाएगा तो ठीक है फिर ऐसे लोग क्रांतिकारी जैसे लोग खड़े होंगे फिर ऐसी सिचुएशन ऐसी परिस्थिति स्थितियां आप ही जैसे लोग तो क्रिएट कर रहे हो। जो मूल है उस समस्या पे ध्यान ना दे के बार-बार जो पत्ते निकल आते हैं उनको आप काटने का प्रयास कर लो। करते रहो। मूल पे ध्यान नहीं दोगे। खैर बैक टू द पॉइंट। अब कांतारा मूवी में प्रतीक बोराडे का जो कहना था जिससे मैं बिल्कुल सहमत हूं कि उसमें पूरी तरीके से एक पक्ष दिखाया गया कि हमारे यहां पर ऐसा होता था कि जो राजसत्ता

00:10:37:22 होती थी वो पिछड़ों का दलितों का आदिवासियों का शोषण करती थी। जब मैंने वो फिल्म देखी तो मैंने बीच में यह देखा अच्छा इसमें प्रतीक बोराणी ने यह बात भी कही कि ऐसा नहीं है कि पर्टिकुलर किसी एक राजा को दिखाया गया हो कि वह ऐसा कर रहा है। नहीं पूरा का पूरा उस राजस सत्ता से जुड़ा हुआ जो समाज है यहां तक कि वहां की प्रजा भी वहां के ब्राह्मण पुरोहित सब लोग उस समर्थन में है। उसके समर्थन में है जो आदिवासियों पर अत्याचार कर रहा है। जहां पर दास प्रथाएं चल रही हैं। जहां पे यहां लोगों को बेचा जा रहा है। दास के रूप में जो कार्य मिशनरीज का था, जो कार्य विदेशी शक्तियों का था, वो कार्य हमारे भारतीय इतिहास से जोड़ करके दिखाया जा रहा है। बिल्कुल ठीक बात थी। अब बात ये है कि जब मैंने वो फिल्म देखी तो उसमें थोड़ी देर तक ऐसा लगा कि नहीं नहीं प्रतीक बोराडे की यह वाली जो बात है ना कि भाई केवल एक राजा ऐसा नहीं था निरंकुश निर्दई बल्कि पूरा का पूरा समाज ही ऐसा था। तो जब मैंने वहां पर देखा तो मुझे बीच में ऐसा लगा फिल्म में कि भाई यह वाली बात तो गलत है। पर्टिकुलर

00:11:52:26 कोई एक राजा है जो निर्दय है जो बुरा है क्योंकि उसमें दिखाया गया है कि जो राजा इस समय शासक है जो अपने बेटे को नियुक्त करता है राज करने के लिए वो बेटा शुरू में दिखाया गया है कि वो है अत्याचारी और राजा जो था जिसने नियुक्त किया था उसको बड़ा सौम्य सा दिखाया गया है। सामंजस्य स्थापित करने वाला दिखाया गया है। और उसकी एक बिटिया भी दिखाई गई है जिसको कि जो उसकी बहन है जिसको जिसका राजतिलक हुआ है। तो जो उसकी बहन है उसको भी सामंजस्य वाली दिखाया गया है। सहिष्णुता वाली दिखाया गया है कि वो भी सामंजस्यता चाहती है। वो भी निर्दयी नहीं है। अत्याचारी नहीं है। और वो जो लड़का है जिसको नियुक्त किया गया है। राज्याभिषेक किया गया है गद्दी पर। वो मदिरापान करते रहना और गरीबों का शोषण करना, व्यभचार में लिप्त रहना यह सब उसको दिखाया गया है। तो लगभग 70% तो मूवी में यही लगता है कि नहीं नहीं पूरा समाज वैसा नहीं है। पर्टिकुलर ये राजा और यह जो राजा है ये जिसको नियुक्त किया गया है और इसका जो दादा था यानी इसके इसका वो पिता जिसने इसको नियुक्त किया उसका जो पिता था वो निरंकुश था। यह दो लोग दादा और पोता यह दो लोग तो विलेन है मगर पूरे समाज को इसलिए नहीं घसीटा जा सकता क्योंकि

00:13:08:04 देखो वहीं पे इसका जो पिता है वो गलत नहीं है और वहीं पे इसकी जो बहन है वो गलत नहीं है। वो शासन नहीं करना चाहती अत्याचार नहीं करना चाहती। यहां तक कि यह तक दिखाया गया है फिल्म में बीच में कि कुछ ये जो नियुक्त होने वाला जिसका राज्या अभिषेक हुआ है इसको कुछ विधि विधान करने के लिए जब वहां के पुरोहित आते हैं राजसत्ता के तो पुरोहित जब टीका वगैरह लगाने आते हैं तो वो उनका भी अपमान कर देता है तिरस्कार कर देता है उनका ब्राह्मणों का जो ब्राह्मण आते हैं त्रिपुणधारी ब्राह्मण थे वो तो यह दिखाया गया है 70% फिल्म में आपको ऐसा ही लगता रहेगा कि भाई पूरा समाज नहीं उसी मानसिकता का है जो आदिवासियों का शोषण करने वाली मानसिकता का पूरा समाज नहीं है बल्कि पर्टिकुलर यह जो ये जो यंग एक विलेन जैसा एक निर्दयी व्यक्ति है जिसको गद्दी पर बिठा दिया गया यह अत्याचारी है। यह आपको पूरी फिल्म में लगता रहेगा। मगर जब फिल्म खत्म होती है, खत्म होते होते होते असली रूप दिखाया जाता है कि वो जो राजा आपको सामंजस्य वाला लग रहा था वो जो बेटी आपको सामंजस्य वाली लग रही थी वो सब तो वो सबसे बड़े षड्यंत्रकारी थे। और

00:14:23:13 इस प्रकार से दिखा करके सबसे बड़े षड्यंत्रकारी और उन षड्यंत्रकारियों का पोषण करने वाले उन षड्यंत्रकारियों को समर्थन देने वाले वहां के पुरोहित इत्यादि भी हो गए। जो षड्यंत्र में शामिल है। कुल मिलाकर के जो राजसत्ता समाज है और उससे जुड़ा हुआ वर्ग है पूरा का पूरा वो पूरा का पूरा वर्ग आदिवासियों जो आदिवासी जो जंगल में रहने वाले लोग हैं जो पिछड़ी जनजाति इत्यादि वाले लोग हैं उनका शोषण कर रहे हैं। उनकी जमीन हथियाना चाहते हैं। उनकी जमीन में उगने वाली चीजों को अपने व्यापार इत्यादि में उपयोग में लेना चाहते हैं। वहां की स्त्रियों के साथ दुर्व्यवहार दिखाया गया है। बहुत अत्याचार दिखाया गया है इस राज सत्ता के द्वारा। यह सब अंत तक आते-आते क्लियर हो जाता है। तो यानी कि कुल मिलाकर के प्रोपेगेंडा जो वो जो प्रतीक बोराण ने जो बताया वो बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है कि हां भाई पूरी फिल्म में वही दिखाया जा रहा है। जो जय भीम मूवी में दिखाया गया था। जय भीम मूवी अगर किसी ने देखी हो साउथ की जो प्रोपेगेंडा जय भीम में दिखाया गया था। सेम वही प्रोपेगेंडा यहां पर दिखाया गया है। बस यहां पर पृष्ठभूमि चेंज कर दी गई है। इतना और ऐड कर दिया गया है कि जिसके साथ अत्याचार हो रहा है वो भी कहीं ना कहीं हिंदू धर्म से जुड़ा हुआ है। जो अत्याचार कर रहा है वो

00:15:38:19 भी हिंदू धर्म से जुड़ा हुआ है। और ईश्वर में विश्वास रखने वाले दोनों हैं। हम ईश्वर जो वैदिक जो वैदिक ईश्वर है। अब आदिवासियों को तो वेदों का कितना ज्ञान होगा ये कल्पना नहीं की जा सकती। मगर कम से कम जो ये राज सत्ता है इसको वैदिक ईश्वर में विश्वास रखने वाला दिखाया गया। कुल मिलाकर के सनातनी विचारधारा का दिखाया गया है। और आदिवासी जो है वो भी सनातनी विचारधारा के क्यों सिद्ध होते हैं? क्योंकि वो शिवलिंग देवता पुनर्जन्म देवताओं का आना जाना मूर्ति पूजा शिव भगवान इन सब में विश्वास करते हैं। पार्वती माता इन सब में विश्वास करते हैं। तो वो भी वहां से सनातनी सिद्ध होते हैं। कुल मिलाकर के प्रोपेगेंडा क्या दिखाया गया है कि भाई ये हमारा हिंदू धर्म कैसा है जिसमें कि इतना भेदभाव है कि जो राज सत्ता है या फिर कह लीजिए क्षत्रिय जाति के हैं। ब्राह्मण लोग हैं। वो इस तरीके के जो शूद्र वर्ग वर्ण के हैं वही पिछड़े वर्ण वर्ग के हैं। दलित आज की भाषा में कहें तो दलित हैं, हरिजन हैं, आदिवासी हैं। उन सबका शोषण करना चाहते हैं। एट एनी कॉस्ट। उनकी चीजों को हथियाना चाहते हैं। उनको कुचल देना चाहते हैं। उसमें कई सारे डायलॉग भी हैं। वह स्पष्टता अस्पष्टता वाले जिनको बनाने का प्रयास वामपंथी विदेशी ताकतें सदैव से करती आई

00:16:53:25 हैं। हमारे यहां जो स्पष्टता अस्पष्टता की निषिद्धता है। अमुक अमुक संदर्भों में ऐसी बातों का दुरुपयोग जिन बातों का दो जिन बातों के दो अर्थ निकल सकते हैं। उन बातों का दुरुपयोग करके वामपंथी विचारधाराओं वाले और जो सनातन को नष्ट करने आने वाले लोग हैं। वह सनातन को नष्ट करने के लिए इन बातों का प्रयोग करते चले आ रहे हैं और उनहीं भावनाओं को इस फिल्म में पुष्ट किया गया है और यही रिवु दिया था प्रतीक बोराडे ने अपने रिव्यु अब होता क्या है कि प्रतीक बोराडे ने ये कहा कि भाई जो क्रिश्चियन मिशनरीज फैलाना चाह रही हैं जो भावनाएं डालना चाह रही हैं हमारे समाज के मन में कि हमारे यहां तो ऐसा होता था मंदिर ऐसे बनते थे हमारे यहां मार मार के चाबुक से अत्याचार चार के द्वारा बनते थे हमारे यहां के मंदिर है ना यह दिखाने का प्रयास किया गया है जो कि उस फिल्म से प्रकट हो रहा है स्पष्ट तो ऐसे में अ

00:17:53:27 जो दूसरे अब तक जो संघी साथी थे जैसे इन्होंने इस पर जो है कटाक्ष करना चालू किया इन्होंने प्रतीक बोराडे की भावनाओं का दमन करना चालू किया जो उसने निष्पक्षता के साथ अपना वो रिव्यु दिया था कांतारा को लेकर के उसका दमन करना इन लोगों ने चालू कर दिया क्यों कर दिया क्योंकि क्योंकि इनके मन में इनको लगता है कि धर्म रक्षा जो जिस तरीके से ये करना चाहते हैं अशास्त्रीय तरीके से धर्म क्या है? कहीं ना कहीं धर्म के मूल में शास्त्र है ना वेद है ना? तो जितना वेदों के बाहर जाकर के अपने द्वारा मन कल्पित सिद्धांतों के आधार पर यह लोग स्वयं को धर्म रक्षक धर्म रक्षक सिद्ध करने का प्रयास करने में लगे हुए हैं। अब इन्होंने देखा कि भैया उस फिल्म में तो शिवजी की इतनी वो दिखाई गई है। भारतीय हम लोग जिनकी पूजा करते हैं। खैर अंकुर आर्य को कैसे इसमें बिलीव हो रहा है वो तो मैं नहीं समझ पा रहा हूं। क्योंकि अंकुर आर्य तो आर्य समाज ही है सत्यार्थ प्रकाश भेजता है और उसके अनुसार मूर्ति पूजा करना पाप है। अधर्म है। तो वहां पर अंकुर आर्य के अनुसार किस तरीके से धर्म का प्रोत्साहन हो गया वो समझ में नहीं आ रहा है। मगर फिर भी ये मान लेते हैं दुर्योधन्या से कि अंकुर आर्य ये भावना लेकर के चलता है कि वो हमारी बात बाद में देखेंगे कि सत्यार्थ प्रकाश क्या कहती है।

00:19:08:28 मगर मूर्ति पूजा कम से कम भारतीय पहचान है। सनातन की पहचान है। वो बात अलग है कि दयानंद जी ने ना मानी हो। उन्होंने उसको गालियां दी हो मूर्ति पूजा को। भरसक विरोध किया हो। मगर फिर भी चलो मान लेते हैं कि भैया वह कम से कम एक स्ट्रेटजी के साथ चल रहा है कि हम अपनी मान्यताओं को बाद में देख लेंगे। मगर हम अभी मूर्ति पूजा का अगर उत्थान हो रहा है तो हम उसका समर्थन करेंगे। ठीक है? अब बात यह आती है कि अगर भक्ति के नाम पर भक्ति दिखा दी गई कि भाई हां बहुत बहुत नो डाउट उसमें जो है भगवान की पावर दिखाई गई है कि भगवान की क्षमता कैसी होती है जब वो अपने गण भेज देते हैं वो चीजें दिखाई गई है। ठीक है? मगर वो दिखाने के चक्कर में आपने वो एक चीज दिखा दी जो लोगों को अच्छी लगे। हिंदुत्ववादी लोगों को अच्छी लगे। मगर उस दिखाने के साथ-साथ आपने इतना अत्याचार दिखा दिया शिवजी को मानने वाले वो भी हैं जो अत्याचार कर रहे हैं और शिवजी को मानने वाले वो भी हैं जो अत्या जिन पर अत्याचार हो रहा है तो फिर ये समाज पूरा शिवजी का ही हुआ ना जहां पर ये भेदभाव है जहां ये शोषण है श्रेष्ठ का निम्न के निम्न के साथ अगड़े का पिछड़े के साथ ऊंचे का नीचे के साथ

00:20:24:02 यही तो दिखा रहे हो अब बात आती है कि हम समर्थन क्यों क्यों ना करें। नल की पत्नी जो थी दमयंती उसको अजगर खा जाने वाला था। पढ़ लेना जाकर। हां। एक व्याध ने अजगर को मारकर दमयंती के प्राणों की रक्षा की। और उसके बाद व्याध की कुद दृष्टि हो गई दमयंती पर। तो क्योंकि व्याध ने दमयंती के प्राणों की रक्षा की है तो क्या इस आधार पर उसको यह अधिकार प्राप्त हो जाता है कि अब वह जो है दमयंती का चीर हरण करे। उसकी गरिमा को भंग कर दे और इसमें अजीत भारती

00:21:04:12 प्रतीक बोराडे का विरोध करते हुए क्या टिप्पणी दे रहे हैं? कुछ लोग बोल रहे थे कि यार उसमें एससी एसटी को एक क्षत्रिय जो सता रहा है इसको सेलिब्रेट किया गया। नहीं पहली बात नवीं शताब्दी में एससी एसटी नहीं होता था। जो भी आपको ये चूर्ण बांट रहा है उससे पूछेगा कि नाइंथ सेंचुरी में ये कहां से होता था या फिर क्रिश्चियन मिशनरी का? कह रहे हैं कि भैया उस समय क्रिश्चियन मिशनरीज कहां से आ जाएंगी? क्रिश्चियन तब होती नहीं थी। मतलब प्रदीप बोराडे ने यह कहा कि जो वामपंथी इतिहासकार वामपंथी इतिहासकार कैसे हैं? वामपंथी इतिहासकारों ने निषाद राज को लेकर के यह कहा है कि भैया निषाद राज जो था ना वो जातीय संघर्ष का प्रतीक था रामायण काल का। जबकि निषाद राज तो जातीय सामंजस्यता का प्रतीक था। कितना झूठ लिखा है इन वामपंथी विचारधारा वाले इतिहासकारों ने। प्रतीक बोराडे ने यह कहा कि जो वामपंथी विचारधाराएं जो क्रिश्चियन मिशनरीज वाले लोग और जो सनातन विरोधी तत्व जो भी हैं जो हमारी सभ्यताओं सभ्यता को नष्ट करना चाहते हैं सनातन संस्कृति को मिटा देना चाहते हैं जो भी हैं जो भावना समाज में यह लोग डालने

00:22:19:13 का प्रयास करते चले आ रहे हैं जिसका हमने हमें हमने दबन करने का प्रण लिया हुआ है कि इन भावनाओं को हम नहीं फैलने देंगे कि भैया हमारे यहां तो अत्याचार होता था। तो उन भावनाओं को ही इस फिल्म में पुष्ट किया गया है। यह प्रतीक बुराडे का कहना था। प्रतीक बोराडे ने यह बात भी कही है कि भाई आप को अगर संघर्ष दिखाना था एक विलेन और एक एक समाज विलेन एक ग्रुप दिखाना था जो विलेन है और जो ये आदिवासी हैं जिनके पास उनके देवता हैं और देवताओं की शक्ति है तो इनके बीच में आपको संघर्ष दिखाना है तो इस ग्रुप को आप कोई विदेशी सत्ता के रूप में भी दिखा सकते थे। विदेशी आक्रमणकारी के रूप में दिखा सकते थे। इसी क्रम में प्रतीक बुराडे ने ये भी बात कही कि इस ग्रुप को आप जो है क्रिश्चियन मशीनरीज या इसके जैसा और कोई भी दिखा सकते थे। फिल्म में और भी विदेशी लोग दिखाए गए उनसे जोड़कर दिखा सकते थे। आप भारतीय सनातन धर्म को मानने वाले मूल के भारतीय मूल के शासक को ही विलियन क्यों बना रहे हो? यदि कल्पना कर रहे हो तो ऐसी कल्पना करो ना जिसमें कि जो वाकई में विलिलेन है वो विलेन दिखे बजाय उसके कि जो विलेन नहीं है और उनको विलेन बनाने का ठेका लिया हुआ है वामपंथियों ने

00:23:35:03 ये प्रतीक बोराडे का कहना था तो इस पर कुतर्क करते हुए ये टिप्पणी आई अजीत भारती की कि भैया उस समय अह ईसाई ईसाई क्रिश्चियन मिशनरी अस्तित्व में ही नहीं थी तो एक ऐसे कर देंगे तो इस बात के दो मतलब निकलते हैं एक या तो अजीत भारतीय मानता है कि हमारे यहां पर यह शोषण हो रहा था तो फिर ये वामपंथियों का पक्षधर सिद्ध होता है वामपंथी विचारधारा फैलाने वालों का और अगर ये ये कह रहा है कि भैया वो कल्पना कैसे कर सकते थे जब उस उस सेंचुरी में वो हो ही नहीं सकती थी। भाई जब आप कल्पना करके यह दिखा रहे हो कि जिस शासक ने जो नहीं किया अत्याचार वो अत्याचार उससे जोड़ कर दिखा रहे हो तो कल्पना करके किसी और से जोड़ कर दिखा दो जो वाकई में विलेन है। एक नई आप जब कल्पना ही करनी है तो एक नई ब्रीड तैयार कर दो भाई। नहीं करेंगे। मैं कुछ फिल्मों के बारे में और बता देता हूं आपको। एक है लक्ष्मी। इस मूवी में इस मूवी को देखने के बाद कोई भी प्रबुद्ध व्यक्ति होगा तो वह यह समझ पाएगा कि यह मूवी अर्निंग के लिए नहीं बनाई गई है। फायदा या कमाई करने के लिए नहीं बनाई गई है। यह मूवी इसलिए बनाई गई थी कि जनसामान्य में ये धारणा व्याप्त हो कि हिंदू कितने गए गुजरे हैं

00:24:50:04 और मुसलमान कितना अच्छा है। इस मूवी में पूरी मूवी में हिंदू को या तो विलेन दिखाया गया है, दिखाया गया है, कॉमेडियन दिखाया गया है, अत्याचारी दिखाया गया है और या फिर एक ही पूरी मूवी में केवल एक हिंदू ऐसा है जो आपको थोड़ा प्रबुद्ध दिखाई देगा। और वो हिंदू कौन है? फिल्म की अभिनेत्री जो एक मुस्लिम से विवाह करती है अपने घर वालों की इच्छा के विरुद्ध जाकर। केवल वह ऐसी हिंदू है पूरी फिल्म में जो थोड़ी सी आपको प्रबुद्ध दिखाई देगी। कैसे? इस मूवी ये मूवी उसका रिमेक है कंचना का। आप देखो सबसे पहला सीन है जो जहां पर एक बाबा होता है जो किसी मातृशक्ति पर अत्याचार कर रहा है। और यह कहते हुए कि ये चुड़ैल है। और उस बाबा का ढोंग कौन खोलता है? एक मुसलमान जो इसका हीरो है फिल्म का। ठीक है? इसके बाद फिल्म में दूसरा जो हिंदू है वो उस हीरोइन के घर के लोग हैं जो कॉमेडियन टाइप के सारे सारे के सारे जोकर जैसे हैं। ठीक है?

00:26:05:06 तो सबसे पहले हिंदू क्या दिखा? बाबा के रूप में ढोंगी। दूसरे हिंदू वो अभिनेत्री के घर वाले नायिका के घर वाले जो जोकर हैं। कॉमेडियन है। मतलब बेवकूफ। ठीक। फिर तीसरा हिंदू कौन दिखता है? जो एक किन्नर जन्म लेता है कहीं पर तो उसको उसका पिता घर से भगा देता है किन्नर को। तो यह एक यह तो किन्नर हो गया। ठीक है? और किन्नर को भगा कौन रहा है? घर से उसका हिंदू पिता। इसके बाद उसने अपनी जिस संतान को भगा दिया था उसको शरण कहां मिलती है? मुस्लिम के घर। देखते जाइए आप किस तरह से प्रोपेगेंडा सेट किया गया फिल्म में। इसके बाद वो संतान जो है बड़ी होती है और उसका अपना कुछ वो अपना किसी तरीके से मेहनत करके कुछ बना लेते हैं तो उसकी जमीन उसकी प्रॉपर्टी पर कब्जा करके उसकी हत्या करके उसकी प्रॉपर्टी पर कब्जा कौन करता है एक हिंदू परिवार और इसके बाद जब इसकी हत्या हो गई और ये अपनी अपना बदला लेने के लिए पिशाच के रूप में भूत के रूप में घूमने लगा ये व्यक्ति जिसकी हत्या हुई है तो अब जो हिंदू पुजारी आते हैं वो यह पता तो लगा लेते

00:27:20:07 हैं कि यहां पर भूत बाधा है यहां प्रेत है, पिशाच है, आत्मा है। ये पता लगा लेते हैं मगर वो खुद कह देते हैं कि हम इस इसका निराकरण हम नहीं कर पाएंगे। सोचिए अरे भैया ये सीन दिखाने की क्या आवश्यकता है कि जो पुजारी आया है हिंदू वो ये तो पता लगा पा रहा है कि आत्मा यहां पर है मगर वो एक ये भी कह रहा है कि हम इसका इंतजाम नहीं कर पाएंगे और इंतजाम कौन करेगा मुस्लिम बाबा तो मुस्लिम कौन है जिसने किसी उपेक्षित संतान को अपने घर में शरण दी मुस्लिम कौन है जो इतना दयावान है जो कि उस अह पिशाच के रूप में घूमने वाले की मदद कर रहा है। उसका उसका प्रतिकार उसका बदला दिलवा रहा है। उसको प्रतिशोध उसको दिलवा रहा है। और वो इतना दयावान और मुस्लिम कौन है? जो भूत का सही निराकरण जानते हैं। भूत को भगाने का सही तरीका सही तरीका जानते हैं। यह सब लोग मुस्लिम है। और हिंदू या तो कॉमेडियन है या ढूंढगी है, पाखंडी या विलेन है या निर्दयी है और या फिर वो है जो अपने घर वालों की इच्छा के विरुद्ध जाकर के किसी मुस्लिम से विवाह कर लेती है।

00:28:35:18 वो प्रबुद्ध हिंदू है। तो ऐसे ही बहुत सारे अह नैरेटिव्स हैं जो फिल्मों के माध्यम से हमारे समाज में इंजेक्ट किए जाते हैं। इसी प्रकार से एक मुंजिया मूवी है जिसमें महाराष्ट्र की लोक कथा दिखाई गई है। वहां पर भी एक पादरी को दिखाया गया है कि वो जो है इंतजाम करता है भूत का। तो यह एक नैरेटिव लगातार सेट किया जा रहा है कि भैया जो व्यक्ति सामर्थ्यशाली है, जो व्यक्ति अच्छा है, दयावान है, वह सब मुसलमान है या फिर क्रिश्चियन है और हमारे हिंदू वो कुछ नहीं है। इस तरह का मानसिक वातावरण बनाने का प्रयास चल रहा है। ऐसे ही प्रयास पर प्रकाश डालने का कार्य किया प्रतीक बोराडे ने। परंतु अब प्रतीक बोराडे अपने अन्य रिव्यूज कैसे देते हैं, कैसे नहीं देते हैं, वह मुझे नहीं पता। मगर अपने इसी रिव्यू में प्रतीक बोराडे ने ट्रिपल आर मूवी का भरपूर समर्थन किया है। ठीक है? अब भरपूर समर्थन क्यों किया है? क्योंकि भाई वो देशभक्ति सिखाती है और उसमें कहीं ना कहीं जो सनातन संस्कृति की रक्षा की बात की गई। ठीक है। अच्छी बात है। मगर यदि प्रतीक बोराडे अजीत भारती जैसे लोगों से सहमत नहीं है।

00:29:50:19 अंकुर आर्य जैसे लोगों से सहमत नहीं है। मैं प्रतीक बुराडे के इस रिव्यु से बिल्कुल सहमत हूं जो उसने ये वाला किया है कांतारा। मगर यदि प्रतीक बुराडे इस बात को मान के चलता है कि यदि किसी व्यक्ति ने कोई हिंदुत्व को प्रोत्साहित करने वाली चीजें अपनी फिल्म में दिखा दी तो इसका मतलब यह नहीं है कि फिर वो अब अपनी फिल्म में कुछ भी दिखाता रहे और हम कुछ ना बोले। अगर इस भावना को ले चलने वाले इंसान मनुष्य प्रतीक बुराडे हैं तो प्रतीक बुराडे को ट्रिपल आर मूवी में यह क्यों नहीं दिखाई दिया कि वहां पर जनेऊ धारण करने वाले यज्ञ पवीत को धारण करने वाले वो जो रामचरण है उसको एक सीन में दिखाया जाता है कि वो मुस्लिम के साथ एक ही थाली में मांस खा रहा है। ये सीन की क्या आवश्यकता थी उस फिल्म में? बताइए।

00:30:47:20 हमारे बच्चे उस फिल्म को देख के क्या सीखेंगे कि मुस्लिम के साथ मांस खाओ। वो भी कौन से भले ही उनका जनेऊ हुआ हो। तो क्या आपने इस अपने रिव्यू में इस बात का विरोध किया? अगर नहीं किया तो आपको करना चाहिए था। यदि आप इस प्रकार से निष्पक्ष बोलने वाले व्यक्ति हैं। सबसे पहली बात तो अवधि पूर्वक मास ही ग्राह नहीं है सनातन धर्म में तो आप मांस का इस तरीके से प्रचार कैसे कर रहे हो? ऊपर से जिसको खाते हुए आप दिखा रहे हो उसने जनेऊ धारण कर रखा है। ऊपर से उसको म्लेच के साथ एक ही थाली में खाते हुए दिखा रहे हो और फिर प्रतीक बुराडे जो निष्पक्षता से अपना रिव्यु करता है वो वहां पर ट्रिपल आर का विरोध नहीं कर रहा है इस बात को लेकर के। भाई हमारे यहां कई बातों को लेकर के स्पर्श और अस्पश्यता का विधि निषेध है। ये ठीक वैसे ही है। जैसे ऑपरेशन थिएटर में जाने जाने से जिस जिस पेशेंट का इलाज चल रहा है उसको उसके घर वालों को भी रोक दिया जाता है। वो नीच होते हैं क्या? व्यवस्था मूलक है। हमारे यहां का विधि निषेध इत्यादि व्यवस्था मूलक है। घृणा मूलक नहीं है। यदि

00:32:02:24 कोई उसका उपयोग घृणा मूलक कर रहा है तो वो व्यक्ति दोषी है। वो व्यवस्था दोषी नहीं है। मगर वहां तो ट्रिपल आर में तो जो है एक म्लेच्छ के साथ संसर्ग दिखा दे रहे हैं। एक ही थाली में खिलाकर वो भी मांस वो भी खाने वाला एक भी पीत धारी। मान लिया कि चलिए साउथ की सभ्यता है कि वहां मास इत्यादि है। यद्यपि धर्म शास्त्रों के अनुसार तो नहीं है। धर्म शास्त्रों के अनुसार तो अविधि पूर्वक मास सदाग्रह है। अमुक अमुक अंशों में अमुक अमुक विधियों के निमित्त जो है मास का कहीं-कहीं पर जो है निर्देश दे भी दिया गया। परंतु अवधि पूर्वक कहीं भी ग्राह नहीं है। मनुस्मृति में तो यह लिखा है कि जो व्यक्ति कसाई की दुकान से कटा हुआ मांस खाता है वो व्यक्ति नरक में जाता है। और रामायण में कहा गया है भरत जी कहते हैं कि जिस जिस किसी की वजह से मेरे भाई प्रभु श्री राम को वनवास भेजा गया है उसको वही सजा मिले। जो सजा मांस बेचकर अपना घर चलाने वाले व्यक्ति को मिलती है। यानी कि मांस बेचना और बेचने वाले से खरीद कर खाना दोनों ही चीजें अपराध की श्रेणी में सनातन धर्म के अनुसार ली गई है। तो फिर आप कैसे अवधि पूर्वक मांस खाता हुआ दिखा रहे हो उसको जिसको आप आदर्श

00:33:18:04 बना रहे हो समाज का और फिर निष्पक्षता से रिव्यू करने वाले प्रदीप बुराड़े उसका समर्थन कर रहे हैं। चलो ठीक है। आप यह कहते हुए चलिए अज्ञानता वश की भैया सब लोग धर्म शास्त्रों के मर्मज्ञ नहीं है। अज्ञानता वश दिखा दिया तो इस चीज का उन्हें ध्यान रखना चाहिए। इतना तो बोलो तो आप अब आपने बोला है कि नहीं बोला है यह मैं नहीं जानता मगर आपने इसमें तो पुरजोर समर्थन किया है। दूसरी बात अभी नरसिम्हा मूवी आई थी। मैं नहीं जानता आपने क्या रिव्यू किया है। मगर यदि आपने उसका विरोध नहीं किया है नरसिम्हा मूवी में तो वहां भी तो विदेशी मानसिकता को यहां पर ठूसने का प्रयास किया जा रहा है। जो वहां पर एक देव वाद है कि भगवान के कई रूप नहीं हो सकते। उसी पर तथाकथित जो स्कॉन नामक संस्था है खड़ी हुई है। राम कृष्ण में भी भेद करती है। विष्णु कृष्ण में भी भेद करती है। हमारे यहां पर वैष्णव संप्रदाय हैं। मगर जिस प्रकार से यह संस्था अपना कार्य कर रही है। बहु देववाद में जहर घोल रही है। अन्य देवी देवताओं के लिए अपमानजनक बातें कर रही है। डेली गॉड कह रही है और यह सारी बातें उसमें प्रोत्साहित की गई है सारी सामग्री इन सभी बातों को नरसिम्हा मूवी

00:34:33:06 में प्रोत्साहन मिला है अच्छा अब जरा उसकी पृष्ठभूमि पे बात कर लेता हूं बात चल रही है तो नरसिम्हा मूवी में क्या दिखाया है ऋषि की जो पत्नी है वो जब संतान प्राप्ति के लिए ऋषि के पास जाती है तो वो ये कहते हैं कि इस समय ये संध्या काल है और इस समय जो राक्षसों के देवता है वो विचरण कर रहे होते हैं और और इस समय जो है इसी क्रम में वो आगे कहते हैं कि इस समय जो है कोई अनिष्टकारी शक्ति आपकी वो गर्भ से जन्म ले सकती है। और इस प्रकार जो है आगे इसी क्रम में हिरण्यकश्यप का जन्म दिखाया है। ठीक है? हिरण्यकश्यप और जो हिरण्याक्षता इन दोनों का जन्म इसी क्रम में दिखाया है। तो यहां पे क्या प्रस्तुत किया गया? शिवजी के लिए कि शिवजी तो एकमात्र राक्षसों के देवता शिवजी हैं। ठीक? और दूसरी बात उनके कारण हिरण्याक्ष और ये हिरण्यकश्यप का जन्म हुआ। अब भागवत के अनुसार देखा जाए तो वहां पर शिवजी के बारे में कहा तो था ऋषि ने मगर क्यों कहा था? इसलिए कहा था कि शिवजी संबंधों से उनके साडू भाई लग रहे थे। मतलब जो यह भी दक्ष की पुत्री थी। ऋषि की जो पत्नी दिखाई है और पार्वती माता भी दक्ष की पुत्री है तो

00:35:48:19 दोनों बहन है आपस में और एक के पति ऋषि हैं और पार्वती माता के प्रति शिव जी हैं। तो इस समय वो विचरण पे होते हैं। उनके उनका वो सब जगह देख रहे होते हैं। तो इस समय संतान प्राप्ति की जो लिए जो रमण आवश्यक है वो ना किया जाए। ये बात वो कह रहे थे। ये नहीं कह रहे थे कि उनके कारण जो है वो अनिष्टकारी शक्ति जन्म लेगी। मगर इस बात को नरसिम्हा भूमि में किस तरह प्रस्तुत किया गया जिससे कि हमें समाज में ये व्याप्त हो जाए कि शिवजी जो है राक्षसों के देवता है राक्षसों का जन्म जो है शिवजी के कारण होता है। अब उसमें बहुत सारी अलग अलग विवेचनाएं गहराई में जाओगे तो जिनका जन्म हुआ है अनिष्टिकारी राक्षसों के रूप में वो तो उनके और वो थे द्वारपाल जय विजय विष्णु भगवान के किसके तो कौन देवता सिद्ध हुए उनके जिनका जन्म हुआ मगर इसमें क्या दिखाया कि अनिष्टकारी शक्तियों का जो है जन्म हुआ किन के कारण शिवजी के कारण और एक जगह पर शब्द आ रहा है अंधकार तो उस समय शिवजी को दिखाया जा रहा है अंधकार के लिए मतलब शिव जी को कुल मिलाकर के राक्षस से बुराई से हर चीज से जोड़ दिया गया है फिल्म में और राक्षसों का या अधर्मियों का एकमात्र कोई शत्रु है तो वो विष्णु है अरे भाई विष्णु

00:37:03:22 ही शिव है शिव ही विष्णु है ये बात भी तो बोल दो फिर साथ में और समय-समय पर वहां डेमी गॉड हमारे भगवान को जो विदेशी संस्करण है उस संस्करण में दिखाना और फिर और भी बहुत सारी आपत्तिजिनक चीजें हैं जो नरसिम्हा में की गई है। तो ठीक है अगर नरसिम्हा आपके हिसाब से प्रचार कर रही है हमारे हिसाब से तो वो जो एक देववाद है ना कि अल्लाह के सिवा और कोई नहीं यहोवा के सिवा और कोई नहीं उस धारणा को यहां पर जो सींचा जा रहा है कृष्ण के नाम पर बस इतना ही है। यहां तक कि इस तो यह भी बात करता है कि कृष्ण एंड क्राइस्ट आर सेम। ईश्वर अल्लाह एक है। कृष्ण और अल्लाह एक है। तो जिस बात के लिए गांधी की आलोचना करते हैं उसी बात के लिए हम जो है इस की इस धारणा को पोषित कर रहे हैं। और ऐसा नहीं है कि ये जो भावनाएं छुपी हुई रह गई हो फिल्म में। फिल्म स्टार्ट होते समय ही इस को थैंक्स बोला गया है। तो क्या नरसिम्हा मूवी को लेकर के इस सच्चाई के साथ प्रतीक बुराडे ने समीक्षा की? यह भी ध्यातव्य बिंदु है। तो कुल मिलाकर के कांतारा मूवी के विषय में प्रतीक बुराडे के साथ हम सहमत हैं और उन्होंने निष्पक्षता के साथ कांतारा का

00:38:18:24 रिव्यु किया है और हम अपेक्षा करते हैं कि वो प्रत्येक फिल्म को लेकर के अपनी शार्प दृष्टि के द्वारा पैनी नजरों के द्वारा रिव्यू करें। यदि वो निष्पक्षता के साथ कर रहे हैं। हमें पसंद क्या आ रहा है? इस आधार पर कि हमें यह पसंद आ रहा है क्योंकि हम हम मनोरंजित हो गए या कोई हमारे मन में पहले से चुनी हुई बात क्योंकि इसमें कह दी गई है इसलिए हम जो है इसका केवल समर्थन करेंगे विरोध नहीं करेंगे तो आप भी वही बन जाएंगे जो बनने के लिए आप किसी और को दोष दे रहे हैं। ठीक है ना? आशा करता हूं सकारात्मक दृष्टिकोण से इस वीडियो को लेंगे। जय श्री राम।

00:39:03:00 [संगीत]

Plans for this video (0)

No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.

🤖 Ask AI for suggestions

AI reads the remaining (unused) parts of this video and gives ideas for new videos: from where to where, hook, and what to remove from the middle. Suggestions follow the RULES and appear here as "AI Suggestion". You can review, edit or approve them.

  • ⬜
    Hindi SRT Required

    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).

A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 39:08 · 11 Oct 2025

कांतारा चैप्टर 1: धर्म की रक्षा या वामपंथी एजेंडा? | Kantara Deep Analysis

0%
☁️ Drive Not in Drive yet

Notes

Description

(empty)

History

No changes yet.

✂️ Clip Cutter

⌨️ Keyboard shortcuts

Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop

▶

Start

End

🔍 zoom
Already used Plan clips
⚠️ () of this clip is already used in another video (green part). Fine if on purpose, otherwise change the times.
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)

Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".

Clips () · Total

Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.

Hook, full note for editor, status