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00:00:00:14 सभी को जय श्री राम। कल भागवतानंद ने एक वीडियो निर्गत करके यह बताया कि पूज्य राघवाचार्य जी महाराज को रामभद्राचार्य जी की ओर से एक लीगल नोटिस भेजा गया है या भिजवाया गया है क्योंकि रामभद्राचार्य जी की जो मुख्य अधिवक्ता हैं जो उनके सभी विधि विषयक कार्यों को देखती हैं जो हमारी माननीय रंजना अग्निहोत्री जी हैं जो रामपाल वाले केस को लड़ रही हैं हमारी ओर से क्योंकि हम सीधे तौर पर उनसे जुड़े हुए इसलिए जब हमें यह सूचना प्राप्त हुई तो सबसे पहले हमने इस बात की पुष्टि करने के लिए उन्हें फोन किया। तो रंजना अग्निहोत्री जी ने रामभद्राचार्य जी के यहां पर फोन करके इस बात को कंफर्म करके हमें यह बताया कि रामभद्राचार्य जी के संज्ञान में अथवा उनके समर्थन से किसी भी व्यक्ति के द्वारा पूज्य राघवाचार्य जी महाराज को किसी प्रकार का लीगल नोटिस नहीं भेजा गया है। हमने यही सूचना यथावत रूप से रंजना अग्निहोत्री जी की सहमति से उनकी कॉल रिकॉर्डिंग के साथ अपने YouTube चैनल पर निर्गत कर दी जिससे कि लोगों में एक भ्रम उत्पन्न ना हो कि रामभद्राचार्य जी की ओर से राघवाचार्य जी के विरुद्ध कोई

00:01:15:15 लीगल कारवाही की जा रही है और ऐसी सिचुएशन में जो अधिकारी है अथवा अनाधिकारी भी है वो टीका टिप्पणी ना करने लग जाए जिससे कि दोनों ही विभूतियों के जो अनुयाई हैं उनके मध्य किसी प्रकार की वैमनसता उत्पन्न हो। हां यह बात अवश्य है कि रामभद्राचार्य जी ने पूर्व के कुछ दिनों में ऐसी टिप्पणी की थी जो कि हमें भी ठीक नहीं लगी हमें भी अनुचित लगी थी और उस टिप्पणी का प्रतिकार जो हमारे मान्य आचार्य गण हैं उन्होंने अपनेप शास्त्रोक्त अध्ययन के आधार पर किया भी था और जिससे हम सहमत भी थे। परंतु उस छींटाकसी का फायदा उठाते हुए कुछ असामाजिक तत्वों ने उसी बीच एक वीडियो बनाया। उस वीडियो में कई वर्ष पूर्व जिस किताब पर शासन के द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया था जिसमें कि निराधार रूप से कुछ आरोप लगाए गए थे रामभद्राचार्य जी के विरोध में तो तथ्यहीन आरोपों के कारण उस किताब को बैन कर दिया था हाईकोर्ट ने और अभी उसी किताब के आधार पर एवं उसमें कुछ और सामग्री

00:02:31:01 को जोड़ते हुए कुछ अखबार की कटिंग को जोड़ते हुए एडिट करके मैंने मैनपुलेट करते हुए एक वीडियो निर्गत किया गया जिसमें कि बहुत ही अश्लील आरोप पुनः रामभद्राचार्य जी पर लगाए गए और इस गिरोह का विरोध किया रामभद्राचार्य जी ने। उन्होंने अपनी जो मुख्य अधिवक्ता हैं उनके द्वारा उच्च न्यायालय में क्या कहते हैं? प्रकरण दर्ज करवाया और उच्च न्यायालय ने इस पर आदेश भी कर दिया है। इसमें कठोर आदेश निर्गत किया है जो अभी आपको आगे वीडियो में देखने को मिलेगा। तो कुल मिलाकर के निचोड़ क्या है कि रामभद्राचार्य जी ने राघवाचार्य जी के विरुद्ध किसी प्रकार की कोई कानूनी कारवाई नहीं की है। जिसके विरोध में कारवाई हुई उस पर कोर्ट ने आदेश भी कर दिया है। उसका जो कंटेंट है उस पर बैन भी लगाने का आदेश हुआ है। उसके विरुद्ध जो है कानूनी कारवाई भी हो रही है। यह सब चीजें हो रही है। यहां तक कि वही व्यक्ति वीडियो बना करके अपने चैनल से विरोध प्रकट कर रहा है। अन्यों का समर्थन लेने के लिए भाग रहा है। ऐसी संभावना भी रंजना अग्निहोत्री जी ने व्यक्त की कि हो सकता है इसी गिरोह का कोई सदस्य अन्य मान्य जो आचार्य गण हैं उनका

00:03:46:07 समर्थन प्राप्त करने के लिए उसने यह षड्यंत्र पूर्वक एक पत्र के रूप में नोटिस के रूप में पत्र भेजा राघवाचार्य जी महाराज को जिससे कि किसी प्रकार का वक्तव्य निर्गत हो या फिर कुछ ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो जिससे कि उसको समर्थन प्राप्त हो जाए तो यह संभावना भी हमारी जो मान्य अग्रजा है रंजना अग्निहोत्री जी उन्होंने निर्गत की। परंतु अब इसमें भागवतानंद का एक पक्ष यह है कि उसको जब यह मालूम पड़ा कि राघवाचार्य जी महाराज को कोई नोटिस आया है तो उस नोटिस की यथोचित जात पड़ताल ना करते हुए वो जो सीधे वो उसका जो पुराना कार्य है कि यदि कोई बात कही जा रही है तो उसकी पुष्टि किए बिना ही असिद्ध आरोपों को भी वो सिद्ध के रूप में प्रचारित करने लगता है। वही उसने कल भी किया कि इस तरह से उसने एक वीडियो प्रस्तुत किया है कि रामभद्राचार्य जी ने राघवाचार्य जी के विरुद्ध कारवाई की है। अब जब हमने इस बात की पुष्टि कर दी है कि रामभद्राचार्य जी ने राघवाचार्य जी को कोई भी लीगल नोटिस वगैरह नहीं भिजवाया और अगर किसी ने भेजा है तो उसमें उनका समर्थन नहीं है। वो कोई ऐसा व्यक्ति है जो स्वतंत्र रूप से यह कर रहा है। तो भागवतानंद हमारा यह कहते हुए विरोध करने लगा कि राघवाचार्य

00:05:01:08 जी के पास नोटिस आया है। उन्होंने मुझे कॉपी भी भेजी है नोटिस की और यह शिवश नारायण द्विवेदी जो है असत्य भाषण कर रहा है। अरे भाई हम हम यद्यपि हमें भगवती का वरदान प्राप्त नहीं है। परंतु हम जो वक्तव्य निर्गत करते हैं बहुत सोच समझ के निर्गत करते हैं। हमारा यह कहना नहीं है कि राघवाचार्य जी को कोई पत्र प्राप्त ही नहीं हुआ। नोटिस के रूप में हमारा यह कहना है कि रामभद्राचार्य जी ने वह नोटिस उनको ना भेजा है ना भिजवाया है। अतः जो सामान्य जन है वो इस विषय पर किसी प्रकार की छींटाकसी, समीक्षा, टीका टिप्पणी, वाद-विवाद इत्यादि से स्वयं को दूर रखें। और रही बात भागवतानंद की तो हमारे और उसके बीच में जो मूल विवाद का कारण है वो तो यही है कि यदि कोई किसी पर आरोप लगाने वाली कोई सामग्री प्राप्त हो रही है तो उसकी जांच किए बिना असिद्ध सामग्री को भी असिद्ध सामग्री के आधार पर वो सिद्ध रूप में आरोप लगाते हुए चैनल पर वक्तव्य निर्गत करता है क्योंकि उसको मसाला मसालेदार चीजें देनी होती है अपने चैनल पर चटपटी खबरें सनसनीखेज चैन से सोना है तो जाग जाइए ऐसी मनोहर कहानियों से स्वयं को बचा बचाएं। ऐसी चटपटी और मैनपुलेटेड खबरों से स्वयं को बचाएं, दूर रखें। जय श्री राम। तो सभी को जय श्री राम।

00:06:16:14 और आज एक बहुत ही विशेष वीडियो हम आपके समक्ष ले आए हैं। अ हम इस समय साथ हैं अपनी अग्रजा के माननीय रंजना अग्निहोक्ति जी के। इनको आप हमारे चैनल पर पहले भी देख चुके हैं। रामपाल वाले विषय में यही हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं। यही उसमें अगवाई कर रही हैं। तो आज का जो विषय है यह सुनकर आप सभी को बहुत हर्ष होगा और आप लोग चौंक भी जाएंगे। सरप्राइजिंग भी है ये आप सबके लिए। यद्यपि अभी कुछ दिनों पूर्व एक मामला सामने आया था। इसमें रामभद्राचार्य जी ने आचार्यों के लिए कोई बात कही थी। जिसमें कि आचार्यों ने भी अपनी ओर से जो बातें थी वह कही गई कि जब कौरव और पांडवों के अंदर की बात है तो वह 100 और हम पांच हो सकते हैं। मगर कोई बाहर कहा जाए तो हम 105 इस तरह की शिक्षा ही हमें जगुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर जी से भी प्राप्त होती है। जिसके इर्दगिर्द आज का ये वीडियो आपके समक्ष प्रस्तुत हो रहा है। तो बात कुछ ऐसी है कि अभी कुछ दिनों पूर्व जो बातें उठी मीडिया में बहुत सारी हलचल हुई उन बातों को लेकर के वे कुछ लोग हैं। ऐसे लोगों ने रामभद्राचार्य जी के विरुद्ध मामले को बनाने का प्रयास

00:07:31:22 किया और उन्होंने एक बहुत ही आपत्तिजनक वीडियो बनाया जिसमें बहुत ढेर सारे उल्टे सीधे प्रमाण इत्यादि प्रस्तुत करते हुए उन्होंने अपने चैनल पर निर्गत कर दिया। यह सोचते हुए कि इस समय तो रामभद्राचार्य जी के विरोध में उनके अपने ही समुदाय के लोग हैं। तो हम क्यों ना इस मौके का फायदा उठा लें। परंतु ऐसा हुआ नहीं। सनातनी जानता है कि उसको किसके साथ किस समय कहां खड़े होना है और वह अपने आचार्यों को जानता है और किस अंश में किसका विरोध किसका पक्ष लेना है। वह अच्छे तरीके से जानता है और ऐसा ही हुआ। रामभद्राचार्य जी महाराज की ओर से हमारी मान्य अगरजा ने लखनऊ हाई कोर्ट में पिटीशन फाइल की और वो जो जो व्यक्ति है जिसने कि अनर्गल प्रलाप किए थे आधी अधूरी बातें बताकर झूठी इंफॉर्मेशन देकर ऐसी खबरों को लेकर जो बैन करा दी गई थी ऐसी खबरों के आधार पर उसने जो है जिस पर अभी प्रकाश डालेंग हमारी अग्रजा जी उसने अ अपने चैनल पर ढेर सारा प्रलाप किया था। तो ऐसे में हमारी अग्रजा ने वह पिटीशन फाइल की उसके विरुद्ध और उसमें आप सबको सुनकर यह बहुत हर्ष होगा कि उसमें

00:08:46:24 हाई कोर्ट ने हमारी बात सुनी माननीय अग्रजा जी की और उन्होंने हाई कोर्ट ने ऑर्डर दिया है कि उस वीडियो को हटाया जाए और उस पर उचित कारवाई की जाए और उन्होंने हाई कोर्ट ने यही नहीं शासन से भी कहा है कि इस तरीके से अनर्गल प्रलाप करने वाले चैनलों पर आप नियंत्रण लगाने वाले कानून बनाएं और साथ ही साथ जो इस तरह के सोशल मीडिया प्लेटफार्म है उनको भी कड़ाई करें। उन पर भी कड़ाई करें कि वह इस तरीके से नियंत्रण रखना प्रारंभ करें अन्यथा उनके विरुद्ध भी उचित कारवाई होगी। तो अब थोड़ा सा इस विषय पर मैं हमारी अग्रजा से कहूंगा कि वो प्रकाश डालें। देखो

00:09:29:27 बात सिर्फ स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज की नहीं है। जी पिछले कई वर्षों से सोशल मीडिया पर जो गंदगी फैलाई जा रही है, जो अश्लीलता फैलाई जा रही है, हमारे सर्वमान्य आचार्यों के प्रति जो नफरत का बीज बोया जा रहा है, जिससे कि सनातन धर्मावलंबी अपने मार्ग से या सनातन धर्म पर चलने से जी डर जाएं, हट जाएं। सोचे कि इनके सर्वमान्य आचार्यों को कुछ भी कहते रहो। ये तो सहते रहेंगे। जी बात आज की नहीं है बात चार पांच साल चार पांच वर्ष पूर्व की है हमारे पूज्य गुरुदेव द्व पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य जी के ऊपर भी ऐसी ही टिप्पणियां की गई थी चलता रहा चलता रहा लेकिन जब पानी नाक तक आ जाता है तो कहीं ना कहीं आपको एक निर्णय लेना पड़ता है। निर्णय वो कितना भी कठोर हो लेना ही चाहिए और जो यह मुकदमा दायर किया गया माननीय उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष वो किसी व्यक्ति को लेकर नहीं यह मुद्दे को लेकर दायर किया गया है कि बहुत आसान हो गया है सनातन धर्म को सनातन धर्म के सर्वमान आचार्यों को टारगेट करना और भाषा तो देखिए स्तर क्या है कि जिन शब्दों

00:10:45:10 का प्रयोग करने से मुंह में दुर्गंध आ जाए उन शब्दों का प्रयोग किया जाता है। चाहे वह पुरी के शंकराचार्य जी हो, चाहे वह अन्य कोई धर्मावलंबी हो, चाहे कोई अन्य संप्रदाय का आचार्य हो, चाहे रामभद्राचार्य जी हो या कोई साधारण व्यक्ति जो भी धर्म की बात करता है या सनातन के प्रचार प्रसार की बात करता है, उसको तो इन विधर्मियों का निशाना बनना ही बनना है। जी वो तो निशाना लगाते ही है। अभी शिवश को भी मैंने देखा है कि कई विधर्मियों ने शिवांश को भी तरह-तरह के आक्षेप लगाने प्रारंभ किए और गालियां तो ऐसी की पूछो मत। जी तो मौन रहने वाले का भी इतिहास लिखा जाता है। आप आखिर कब तक मौन रहोगे? आपने देखा एक के ऊपर उठा, दो के ऊपर उठा तो उनका तो मनोबल बढ़ता गया। कि सनातन धर्मावलंबी तो ऐसे ही है। वो तो सोते रहेंगे। इनके आचार्यों को कहते रहो। इनके ग्रंथों को गौ गंगा गीता गायत्री को कहते रहो गंगा स्नान को कहते रहो एक रामपाल है वहां से भी आता है लिख करके कि भगवान कृष्ण के लिए माता दुर्गा के लिए अनर्गल आरोप आते रहते हैं लिखते तो ये बढ़ता चला जा रहा है बढ़ता चला कहीं ना कहीं तो आपको बिल्ली के

00:12:00:14 गले में घंटी बांधनी ही होगी बिल्कुल है ना कहीं ना कहीं तो आपको आगे बढ़ना ही होगा जब पानी सर से अधिक हो गया ठीक है महाराज प्रेमानंद जी महाराज या स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज या शंकराचार्यों के बीच आपसी वार्तालाप क्या होती है उसमें हमारा कोई हस्तक्षेप करने का मेरा अधिकार नहीं है अगर उन दोनों उन लोगों की बातों में मैं हस्तक्षेप करूं कोई अनाधिकार चेष्टा होगी वो हमें नहीं करनी हमें चेष्टा क्या करनी है हमारे सनातन धर्म पर कोई कटाक्ष ना कर पाए और सनातन धर्म हम जानेंगे कैसे हम अपने सर्वमान आचार्यों से ही तो सीखेंगे। जी भगवान श्री राम कौन है? माता जगदंबा कौन है? ये कौन बताएगा? इनके विषय में कौन बताएगा? या तो हमारे शंकराचार्य बताएंगे या रामानंदाचार्य बताएंगे या हमारे जो गुरुजन है जो आचार्य वही बताएंगे। लेकिन जब हमारे आचार्यों के ही ऊपर मतलब गंदे गंदे शब्दों का प्रयोग गालियां ये सब लिखी जाएंगी। जी तो कोई हमारे सनातन धर्म को मानेगा ही क्यों? जी लोग संकोच करेंगे कि इसमें से तो मुझे

00:13:15:15 लगता है जो इस्लाम के फॉलोअर्स हैं वो अच्छे हैं। उनका कहना है गुस्ताखे रसूल की यही सजा सर तन से जुदा सर तन से जुदा। हम सर तन से जुदा की बात नहीं कहते। हमें मालूम है हमारी कलम में बहुत बहुत ताकत है। हम उस कुर्सी पे बैठे बैठते हैं। जो न्याय करती नहीं है वह न्याय दिलाती है। तो न्याय दिलाने वाली कुर्सी पर हम बैठकर के हम देखते हैं। हम सोचते हैं हम विचार करते हैं। हम मंथन करते हैं। कहां किस समय सनातन धर्म में मुझे बोलने की आवश्यकता है। तो सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से इस अश्लीलता को मैंने देखा। जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ। जी तो हमारे हिंदू फ्रेंड फॉर जस्टिस के कई जो थे मेंबर्स कई सदस्य आए खड़े हुए उसमें श्रीवास्तव जी हैं शेष नारायण मिश्रा जी हैं विशेष नारायण मिश्रा जी हैं आनंद साहू हैं और धीरेंद्र मिश्रा जी हैं ये सब लोग आए और इनके माध्यम से याचिका कोर्ट में प्रेषित हुई इस समय हमारे पास इस केस में जो वादी हैं वो भी यहां पर उपलब्ध हैं। पंडित धीरेंद्र जी इन्होंने बहुत ही साहस दिखाया जो इन्होंने इस याचिका में यह वादी बने हैं। तो

00:14:30:19 ये थोड़ा सा आप थोड़ा सा इस मामले पर प्रकाश डाल दीजिए कि कैसे क्या आपका दृष्टिकोण था इस बात इस मामले को लेकर के जो एक आचार्यों के स्तर की बात का फायदा उठाने का प्रयास किया। एक सज्जन थे अस्थाना जी उनका आस्था बड़ी प्रखर थी दीदी तो प्रखर आस्था जी प्रखर विचार इन सब नाम से उन्होंने अपने ग्रंथ निकाले थे जी उसमें उन्होंने भारत के संतों को गाली तक दे दिया था जी तो उस पर हम लोगों ने केस किया विजय प्राप्त करके उनकी किताबें बंद करवाई अच्छा अब उनका विचार पुनः प्रखर हो रहा है तो भाषा बदल करके टॉपिक वही रखे हुए हैं। पुनः इस तरह से कर रहे हैं। जितने प्रखर आप हैं आपके 1 लाख गुना प्रखर हम हैं। हो सकता है कि आप बिज़नेस पॉइंट ऑफ़ व्यू से यह कर रहे हो, तो आपको उत्तर इतना अच्छा दिया जाएगा कि आपकी सारी प्रखरता नष्ट हो करके आपको समझ आ जाएगा। वर्तमान समय में सनातन धर्म पे आक्रमण करने के लिए हमारे पूज्य संतों को टारगेट किया जा रहा है। जी। पूज्य संत अपने ज्ञान और विवेक का प्रयोग करते हुए कुछ बोलते हैं तो उसमें आज कहीं ना कहीं सनातन के संतों का प्रयोग करके जी दुष्ट जन जो सनातन को नहीं मानते विश्वास करते वह भी इसका प्रयोग करके हमारे ऊपर आक्रमण कर रहे हैं जो अब सहा नहीं जाएगा।

00:15:46:00 सोशल मीडिया प्लेटफार्म ग्लोबल होता है जिसका दुरुपयोग करके वो भारत के समस्त संतों को और इनके आधार पे इनके कंधे पर धनुष बाण रख करके सनातन धर्मावलंबियों को गाली दे रहे हैं। उन्हें नीच कह रहे हैं और क्या-क्या शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं तो इसका प्रयोग मैं यहां नहीं कर सकता। तो ये अब चलेगा नहीं। जी। यदि आप सोशल मीडिया प्लेटफार्म का प्रयोग करके आप हमें गाली दोगे तो हम सब पढ़े लिखे लोग हैं। वी आर पर्सन हमें सब पता है। हम भी उसमें एक्सपर्ट हैं। तो अपना उत्तर उसी उत्तर से दिया जाएगा। जो जिस भाषा समझेगा उसको उसी भाषा का उत्तर दिया जाएगा। अब यह असय हो रहा है। यह पीड़ा अब सहा नहीं जा रहा है और संभव हुआ अगर समक्ष मिल गए तो प्रतिकार भी होगा। जी जी और अगर नहीं माने तो दंड व्यवस्था के साथ आपको दंडित करने का प्रयास किया जाएगा। ये भारत के एक एक सनातन से विनती है कि आप प्रतिकार कीजिए। अपने वाणी का प्रयोग कीजिए। अपने ज्ञान का प्रयोग कीजिए। कुछ नहीं कर सकते। तो ऐसे भैया लोग जो साथ दे रहे हैं उनका सपोर्ट तो कर सकते हैं। तो कुल मिलाकर के एक मुख्य मैसेज आपको अभी यह भी प्राप्त हो रहा है कि यदि हमारे पिता और उनके छोटे भाई आपस में हमको लड़ते हुए दिख भी रहे हैं तो हमारा कोई अधिकार नहीं है। हमारी कोई गति नहीं है कि उनके बीच में जाकर के समीक्षा करें। पिता और चाचा हां। आपस में जब युद्ध करें तो संतान का धर्म है

00:17:01:06 बीच में ना कूदे। वो अनुभवी लोग हैं। पता नहीं क्या लीला कर रहे हैं। जी जी। और इसमें एक बात मैं यह भी रखना चाहूंगा। यदि कोई ऐसा व्यक्ति है जिसकी खुजली नहीं मिट रही है बिना बोले है ना तो मर्यादा का पालन करें कम से कम वो मर्यादा में रह के अपनी वाणी निर्गत मर्यादा का पालन करे अन्यथा दंड व्यवस्था के साथ उसकी सारी खुशी शांत कर दी जाएगी और मैंने कई ऐसे वक्तव्य भी निर्गत हुए हैं जिसमें अमुक अमुक संतों ने अमुक अमुक आचार्यों ने मर्यादा में रह के अपनी बात रखी भी है हां रखी है और उससे हमारी उससे किसी को कोई आपत्ति भी नहीं हुई आपत्ति नहीं होगी अच्छा मगर अब बात आती है मुख्य जो ये बाहरी लोग जो ऐसी सिचुएशंस का फायदा उठा करके कि इस समय तो यह आपस में ही एक दूसरे पर छीटाकसी कर रहे हैं। तो चलो हम भी नकली किताबों के आधार पर बैंड किताबों के आधार पे उससे कुछ अखबार की कटिंग को जोड़ करके एक नया तथ्य प्रस्तुत करके इस कम से कम एक संत को तो मार गिराए एक एक बहुत अच्छा संदेश आपको देखने को मिल रहा होगा। अभी रामभद्राचार्य जी के शिष्य और शंकराचार्य जी के शिष्य साथ में ही हैं। और हमारे बीच में एक जो मूलधारा है वो भी आपको जाननी चाहिए। वेदों में प्रमाण्य बुद्धि श्रुति स्मृति शास्त्रों में प्रमाण्य बुद्धि वर्णाश्रम में प्रमाण्य बुद्धि परंपरा में प्रमाण्य बुद्धि और मूर्ति पूजा में प्रमाण्य बुद्धि यदि ये सारी चीजें हमारे बीच में है तो हम

00:18:16:07 सभी लोग हिंदू कहलाते हुए एक दूसरे के भाई हैं कोर्ट पे डेढ़ घंटे तक बहस हुई मैंने डेढ़ घंटे तक बहस हुई घंटे तक मैंने साक्ष प्रमाण प्रस्तुत किए एक-एक चीज बताई कोर्ट ने उसको समझा और कोर्ट ने यह पाया कि वास्तव में जो बातें कही जा रही हैं वो किसी भी सभ्य समाज में सभ्य समाज की बात कर रहे हैं। भारत समझा जाता है भारत सभ्य समाज से ही हम भारत में सभ्य समाज के लोग रहते हैं। किसी सभ्य समाज से ये अपेक्षा नहीं की जा सकती है कि किसी भी व्यक्ति की शारीरिक अक्षमता हो तो उसमें अपशब्दों का प्रयोग किया जाए। जी सभ्य हम सभ्य समाज में रहते हैं। जी तो इस कारण कोर्ट ने इस बात को समझा। कोर्ट ने आदेश दिया और अभी सुनवाई बाकी है वो 8 अक्टूबर को लगा हुआ है। अच्छा तो अभी प्रायोरिटी में जो उसने कुछ पुरानी अखबार की कटिंग वगैरह दिखा के झूठी बातें कही थी। हुआ यूं था जी। एक पत्रिका चलती थी प्रखर विचार और प्रखर आस्था। जी और इसने इस प्रखर विचार और प्रखर आस्था पत्रिका के जो दो संपादक और सह संपादक थे या है एक विमलेश शुक्ला और एक शिवाशिया अस्थाना इन लोगों का यह

00:19:31:13 काम ही था कि बड़े संतों से जा करके ब्लैकमेलिंग करना और अगर ब्लैकमेलिंग में वो पैसा नहीं देते हैं तो उनके किताब छाप देना ये इन्हो उनके विरोध में छाप देते थे विरोध में छाप देते थे अच्छा और वो कुंभ के मेले में बंटवाते थे महर्षि के खिलाफ भी इन्होने छापा यही जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ भी इन्होंने छापा सब अनर्गल बातें सब गंदी बातें मतलब निराधार थी पूरी तथ्य पर कोई भी नहीं दी निराधार थी तभी तो कोर्ट ने इनकी की किताब को बैन किया तथ्य परक कोर्ट अच्छा कोर्ट ने बैन कर दिया था। अब आप किसी को अंधरा कहेंगे, किसी को अंधराचार्य कहेंगे, भाई, किसी की शारीरिक अक्षमता, जबकि जो विकलांग कल्याण बोर्ड है, या विकलांगों के लिए जो एक्ट बना है, उसमें आप किसी को गाली गलौज नहीं दे सकते। अगर हम पूर्व में बिना चले वर्तमान के कानून के हिसाब से चलें, तो प्रत्येक व्यक्ति को, जीने का, जी। आदर्श से जीने का अधिकार है। बिलकुल, बिलकुल। शारीरिक अक्षमता को लेके आप अनदर प्रलाप नहीं कर सकते। तो इनकी किताबें थी। इस पर एक एफआईआर हुई। एफआईआर के बाद चार्जशीट लगी। इन्होंने बेल कराई। बेल कराने के बाद अब उसका स्टेटस क्या है? वो तो मुझे नहीं मालूम। इस किताब को लेकर के प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में लोग गए। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया में इनकी किताब पर बैन लग गया। बैन लग गया।

00:20:46:21 बैन लग गया। बैन लगा हुआ है और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने यह आदेश किया कि उत्तर प्रदेश सरकार इसमें अग्रिम कार्यवाही करें। जी ठीक है। बैन लग गया। अब बैन जब इनको लग गया तो इन्होंने एक मुकदमा माननीय उच्च न्यायालय में किया शिवाशिया अस्थाना वगैरह ने उच्च न्यायालय में किया कि यह मेरी किताब बैन कर दी है और रामभद्राचार्य जी को गिरफ्तार किया जाए। यह किया जाए, वह किया जाए। इनकी याचिका बिल्कुल तथन थी। कोर्ट ने उस समय इनके ऊपर ₹00 जुर्माना लगाया। अच्छा हम वो शायद जजमेंट में लिखा हुआ है कि जो अभी आया है जजमेंट उसमें लिखा ₹00 एक जुर्माना लगा उसके बाद भी इनकी आत्मा नहीं फिर ये लोग ब्लैकमेलर्स हैं। जी और ये जो छोटे छोटे-छोटे यूर्स या टोटपुंजा टाइप के जो पत्रकार हैं इनका एक काम है कि किसी बड़े आदमी को पकड़ लो। हम ब्लैकमेलिंग करो। बता दो तुम्हारी सीडी मेरे पास है। तुम्हारी ये हैंडराइटिंग मेरे पास है। तुम्हारा WhatsApp मेरे पास है। सारे झूठे और इसने क्या किया? सुपरइंफोज करके फोटो लगा दी। इसने ये यूबर ने यूबर ने लगाई। मैं मैं थोड़ा सा क्लियर कर दूं। एक पत्रिका निर निराधार तथ्यों के साथ छापी गई थी पूर्व में जो कि कोर्ट के द्वारा बैन कर प्रेस काउंसिल

00:22:02:00 ऑफ इंडिया के द्वारा बैन कर दी गई थी। और जिसको जिसको अनबैंड कराने के लिए जो वो संबंधित व्यक्ति था उस पत्रिका को बनाने वाला छापने वाला वो हाई कोर्ट में भी गया था। अनबैन कराने के लिए नहीं गया था। वो गया तो उसका मंशा यही थी लेकिन उसने साफ-साफ नहीं लिखा क्योंकि वो अनबैन हो ही नहीं सकती थी। उसकी मंशा यही थी। अच्छा वो उन पर कोई आरोप लगा रहा होगा। रामभद्र राम भद्राचार्य जी पर एक जैसे नहीं वो उसको कहते हैं पेशबंदी टाइप से। पेशबंदी तो उस टाइप से उसने करने की कोशिश किया कि रामभद्राचार्य जी पर दबाव बनाया जाए। परंतु हाई कोर्ट ने वो सिरे से उसको भी खारिज कर दिया था। उसकी उस ₹00 और ₹00 जुर्माना अलग से लगाया था। गलत गलत तथ्यों को प्रस्तुत करने पर। ऐसी जो बैन जिस पत्रिका पर प्रतिबंध लगा हुआ था उस पत्रिका में दिए गए उन निराधार तथ्यों के आधार पर इस इतना ही नहीं। उस पत्रिका में जो दिए गए हैं तथ्य उन पर उस पत्रिका के साथ किसी दूसरे अखबार की किसी दूसरी घटना को हां। को दूसरी घटना तरीके से तरीके से वो नीचे छोटाोटा जब उसको ज़ूम करके देखा तो उसमें लिखा था चित्रकूट में भगदड़ और भगदड़ में आदमी एक दूसरे के ऊपर गिरे पड़े हुए थे। इसका ये कहना था कि ये गड़बड़ ये चित्र गड़बड़ है कि मतलब मैं

00:23:17:06 क्या ही बोलूं भगदड़ को किसी और तरीके से दिखाने का इसका मंशा था। ओ हो हो समझ गए ना? जी जी जी मैं समझ रहा हूं। और उसमें लिखा है नीचे दो ओरिजिनल है उसमें लिखा है चित्रकूट में भगदड़ और नीचे लिख रहा है कि कुछ और हम उस चैनल पे बताने की बात नहीं बोल ही नहीं सकते हम बोल ही नहीं सकते हैं तो ये जब कोर्ट ने उसको ज़ूम करके देखा तो कोर्ट ने कहा वास्तव में ये तो सुपरइंपोज किया हुआ है जी भगदड़ को कुछ और बना दे रहा है जी मतलब पहली बात तो जो किताब बैन है उसका उसकी सामग्री लेना फिर किसी अन्य सामग्री को उसके साथ इस प्रकार से मिलाना कि एक नया तथ्य जो प्रचार एक निर्मित हो जाए। यही निर्मित किया। जी जी यही निर्मित किया। तो ये बात ठीक नहीं है। अपने हम लोगों का मतलब अपने भारतवासियों का कितना दुर्भाग्य है कितना दुर्भाग्य है कि जब से सोशल मीडिया आया तब से लोगों ने अपनी मेहनत करना छोड़ दिया, पढ़ना छोड़ दिया। सिर्फ यह सोचा कि सोशल मीडिया के माध्यम से अर्निंग अच्छी हो जाएगी, बिजनेस अच्छा हो जाएगा। क्योंकि फॉलोअ बढ़ेंगे। तो जो फॉलोअ बढ़ाने का तरीका था गंदे कंटेंट्स, अश्लील कंटेंट्स। हम लड़कियां भी आ गई फटे कपड़ों में अश्लील वस्त्रों में रील बनाने लग

00:24:32:07 गई। और यही पुरुषों ने किया, यही महिलाओं ने किया। यही छोटे-छोटे बच्चों को सिखा रहे हैं। आजकल देखिए छोटे-छोटे बच्चे लाइक कमेंट बढ़ाने के लिए, रील बनाने के लिए क्या-क्या शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। तो ये अपना कितना दुर्भाग्य है तो मुझे बहुत दुख होता है। देश का युवा किस ओर जा रहा है। जी। आदि शंकराचार्य भगवान श्री राम की धरती है। जहां विद्वानों का सम्मान होता था। आचार्य चाणक्य की धरती है और आचार्य चाणक्य की धरती में क्या हो रहा है? सोशल मीडिया के माध्यम से सिर्फ व्यू व्यूअर्स बढ़ाने के लिए पैसे की पैसे बढ़ाने के लिए यह सब किया जाता है। जी अच्छा दीदी एक चीज मैंने देख मतलब मैं ये कहूंगा कि अगर हमारे आचार्य गण हैं जो वो अगर कोई टिप्पणी करते भी हैं तो पहली बात तो उनकी टिप्पणी बहुत मरदित होती है। शब्दों में उनके बहुत मर्यादा होती है। और अगर किसी पर व्यक्तिगत हुई भी है तो वो पूरा अधिकार होता है जो जिन पर जिन आचार्यों के संबंध में किसी अमुक आचार्य ने बोला तो उनको पूरा स्वतंत्रता होती है कि वो भैया अपना शास्त्रोक्त ढंग से मर्यादा में रह के अपना जवाब प्रस्तुत कर सकते हैं और करते भी हैं किया भी है परंतु इसमें इस तरीके से किसी मनचले व्यक्ति का भांजी मारना एक तरीके से कहेंगे कि मैं जो है इस मौके का फायदा उठा लूं अवसरवादिता भाई

00:25:47:10 देखिए रामभद्राचार्य जी की भगवान भगवान श्री राम के प्रति निष्ठा सनातन धर्म के प्रति निष्ठा इससे इससे कोई भी किसी प्रकार से इसको नहीं नकार नहीं सकता इन बातों को तो ऐसी स्थिति में वर्णाश्रम प्रेमी परंपरा प्रेमी रामायण प्रेमी रामचरितमानस कुछ अंशों में लेकर के मतभेद हो भी सकता है मगर उनके इस प्रकार की निष्ठा को इस प्रकार की अनन्य अह अनन्य समर्पण को भी हम अनदेखा नहीं कर सकते और उस वो भी उस स्थिति में हम उन्हें अकेला छोड़ दें जब कोई ऐसा मनचला व्यक्ति बाहरी व्यक्ति और इस तरीके से प्रहार कर रहा है वह कि आज जो है रामभद्राचार्य जी पर किया है कल को ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी पर करेगा फिर आगे पूरी के शंकराचार्य जी पर करेगा फिर आगे विद्या भास्कर जी महाराज पर करेगा तो ऐसी स्थिति में हम हिंदुत्वों को अकेला नहीं छोड़ सकते अभी अभी कुछ लोग हैं कुछ लोग ऐसे हैं जो पाखंड का चोला पहने हुए हैं शंकराचार्य चाहे सर्मान शंकराचार्य हो चाहे वो राघवाचार्य हो चाहे रामभद्राचार्य जी हो चाहे भारत की स्त्रियां हो जिनके खिलाफ उनको गंदे अश्लील शब्दों को प्रयोग करने में जरा भी संकोच नहीं हो। जी जी अभी है कुछ लोग ऐसे जी तो मतलब इस पर एक कड़ाई करने का आपकी कच कर दिया है आपने कि ऐसे लोग जो

00:27:02:12 हमारे गुरु गोविंदो ग्रंथ पर प्रहार कर रहे हैं। उस पर जो है दीदी अब आक्रामक रुख में आ चुकी हैं आगे और अब कोई बचने वाला नहीं है। संदेश एक प्राप्त होता है हमें। दूसरी एक बात मैं आज एक घोषणा और करूंगा। आप सबको आप लोग हमारा नंबर सार्वजनिक है आपके पास यदि आपको इस तरह का कोई राष्ट्रीय स्तर का कोई समष्टि के स्तर का कोई विवाद दिखाई देता है जहां पर हमारे गुरु गोविंद अथवा ग्रंथ पर कोई आपत्तिजनक व्यवहार उनके साथ किया गया हो सार्वजनिक रूप से या फिर किसी भी प्रकार से आपको लगता है कि इसका विरोध हमें करना चाहिए तो इस संबंध में आप हमसे संपर्क करें। हम उस पर पूरा प्रयास करेंगे यथासामर्थ्य कि हम उस पर कारवाई करें। आप लोग इस संबंध में हमसे निर्भीक होकर के संपर्क कर सकते हैं। पर WhatsApp करिएगा फोन ना करें। WhatsApp करें जैसी आवश्यकता अनुसार हम आपसे स्वयं संपर्क करेंगे। दीदी इसमें थोड़ा सा आप कोर्ट ने आदेश क्या दिया है वो थोड़ा सा क्लियर कर दीजिए क्योंकि मुझे आदेश क्लियर नहीं है। देखो कोर्ट ने जो प्राइवेट रेस्पोंडेंट्स थे जी जैसे कि Google है, Instagram है, YouTube है जी और ये जो प्राइवेट यूबर है बेधड़क खबर वाले इनको सबको नोटिस इशू

00:28:17:22 किया है। कहा है दो तरीके से इनको नोटिस दीजिए। एक कोर्ट से जाएगा। एक आप ईमेल या दस्ती संबंध जैसे भी करना हो दो तरीके से इनको नोटिस दीजिए। जी और जो विकलांग कल्याण कमिश्नर विकलांग कल्याण बोर्ड है उनसे ये कहा है कि रेस्पोंडेंट नंबर 10 जो बेधड़क खबर है इनके खिलाफ आप कार्यवाही करके हमें बताइए। मुकदमा दर्ज करिए एक तरीके से। कहा ये कह सकते हैं उचित उचित कार्यवाही करके हमें बताइए। उचित कार्यवाही अगर अदालत कहती है उचित कार्यवाही तो उसका मतलब होता है उचित कार्यवाही। जी हां उसका मतलब यह नहीं होता है कि उसको हल्के में लिया जाए अदालत कहती है उचित कार्यवाही तो उचित कार्यवाही उसका और भारत सरकार ने भी आश्वासन दिया है कि हम सोशल मीडिया में जो ये अनर्गल प्रार चल रहे हैं इनको रोकने की और कोर्ट ने एक बहुत अपना भी अपनी भी एक दुख व्यक्त किया उसको कहते हैं कोर्ट ने भी एक अपनी पीड़ा व्यक्त की कोर्ट ने कहा कि हम देखते हैं नित्य प्रति सोशल मीडिया को अगर खोल दिया जाए चाहे Facebook हो चाहे Instagram हो चाहे YouTube हो चाहे एक्स हो देख देखा जाए तो ना जाने कितनी अश्लीलता चल रही है। जी पहले जमाने में अगर वो पिक्चर एक आई थी सत्यम शिवम सुंदरम कोई अश्लीलता नहीं थी लेकिन मेरे पिताजी ने मेरे माताजी ने उसको

00:29:32:26 देखने नहीं दिया कहा कि बच्चों को देखने लायक नहीं है। लेकिन आजकल तो बच्चों के ही माध्यम से क्या-क्या अश्लीलता चल रही है। ये परिवारों को समझना होगा और जो नहीं समझेंगे उनको हम समझाएंगे। जी उनको हम ऐसा नहीं है कि उनको मार के तलवार के जोर पर समझाएंगे। हम उनको अपने कलम के माध्यम से समझाएंगे क्योंकि कलम की जो चोट होती है वो तलवार की चोट से बड़ी और वो परमानेंट होती है। तरफ अगर हम न्यायपालिका से जुड़े हुए कुछ लोगों की वजह से न्यायपालिका के विरुद्ध एक ऐसी बात सोचते हैं कि भाई हमें जो है हमारे साथ गलत हो रहा है। अमुक अमुक क्षेत्र में ऐसा हो रहा है। मगर वहीं पर हमारी अग्रजा जैसे अग्रजा जैसी विभूतियों के कारण उसी न्यायपालिका से हमको न्याय भी प्राप्त हो रहा है। तो एक पूरी के शंकराचार्य जी एक सिद्धांत बताते हैं कि जो धरती पर गिरा हुआ व्यक्ति होता है वह धरती से ही सहारा लेकर उठ खड़ा होता है। जो जिस हवाई जहाज को आकाश में उड़ना है वह हवाई जहाज धरती का ही सहारा लेकर पहले अपने आप को इस योग्य बनाता है कि वो आकाश में उड़ सके। तो यदि हमें कुछ बदलना है तो जिस सिस्टम को हमें बदलना है उसी सिस्टम का सहारा लेके हम उसको बदल भी सकते हैं। तो हमारी माननीय अग्रजा जी ने एक और उसमें हमें विजय प्राप्त कराई है।

00:30:47:27 इसके लिए आपका अभिनंदन और सभी का जो भी इस अपील से क्या कहेंगे याचिका से जुड़े हुए जितने भी वादी हैं आपकी ओर से जिन्होंने आगे आए जो इस बात के लिए उन सभी का अभिनंदन और यह एक चेतावनी है। उन यूर्स उन सोशल मीडिया पर काम करने वालों के लिए भी जो अब सोशल मीडिया की स्वतंत्रता का फायदा उठा के कुछ भी मनमाना वक्तव्य निर्गत कर रहे हैं और भूल गए कि भारत धरती है संस्कृति और समृद्धि की धरती है। जी ये ये जो है ये वो धरती नहीं है जहां से मनचाही बातें कही जाए जहां से मनचाहे सिस्टम चले। ये धरती ऐसी है जो हम वेदों शास्त्रों के हिसाब से अपने गुरुओं की आज्ञा के हिसाब से अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करते हुए धर्म की मर्यादाओं का पालन करते हुए हम आगे बढ़ते हैं। जी तो इसी चेतावनी के साथ और इस बात के साथ कि अगर आपको सनातन धर्म पर होने वाला प्रहार कहीं भी किसी भी रूप में दिखाई देता है तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। हम यथासामर्थ प्रयास करेंगे कि उस अह उसे कानूनी कारवाही का या फिर किसी भी प्रकार से उसका प्रतिकार करने का जो भी यथोचित रास्ता हो सकता है

00:32:03:06 उसका एक स्वरूप तैयार किया जाए। [संगीत] हम्म [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 32:11 · 27 Sep 2025

रामभद्राचार्य जी द्वारा कानूनी कार्यवाही। कौन है आरोपी

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