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00:00:03:01 ऐसा कोई सगा नहीं जिसको हमने ठगा नहीं। आज से लगभग एक डेढ़ साल पूर्व की घटना है। शायद मुझे याद है। मैं अपने कई वीडियोस में उसका जिक्र कर चुका हूं। भागवतानंद के पास एक लड़की ने फोन किया था। जो भागवतानंद के एक प्रश प्रशंसक के द्वारा वहां पर उसको भागवतानंद का संपर्क सूत्र उपलब्ध कराया गया था। वह किसी भूत बाधा इत्यादि से पीड़ित थी और उसने भागवतानंद के किसी समर्थक तक वह पहुंच गई थी मदद के लिए क्योंकि वह भागवतानंद का समर्थक ज्योतिष पीठ के महाराज जी से भी जुड़ा हुआ था तो वो वहां ज्योतिष पीठ पहुंचने के कारण भागवतानंद के उस प्रशंसक तक पहुंच गई थी और उस प्रशंसक ने उस भूत बाधा इत्यादि के निमित्त उस मातृशक्ति को भागवतानंद का संपर्क सूत्र सुझा दिया था। मातृशक्ति ने उसको लगभग क्योंकि वह ऐसी परेशानी में थी। उसने रात को ही जैसे ही उसको नंबर प्राप्त हुआ उसने रात में ही 11:00 बजे मदद मांगने के लिए भागवतानंद को कॉल मिला दिया। उस भागवतानंद ने उसकी मदद तो नहीं की पर जो उस मातृशक्ति ने उसको अपनी व्यथा सुनाई थी कि मेरी मदद मुझे मदद करिए। मेरी सहायता करिए। मेरे मेरे साथ इस प्रकार की घटनाएं घटित हो रही हैं या जो भी हैं। अगले दिन भागवत आनंद ने

00:01:18:02 उसको एक मसालेदार खबर बना करके कि देखो देखो मुझे फंसाने के लिए एक षड्यंत्र किया जा रहा है। इस प्रकार से किसी लड़की का मेरे पास फोन आ रहा है और आप लोग भी सतर्क हैं और मुझे इस तरह से तुम लोग फंसा नहीं पाओगे। और यह कहते हुए भागवत आनंद ने उस लड़की की जो ऑडियो क्लिप है वो वायरल वो सोशल मीडिया पर डाल दी। YouTube पर डाल दी। जब उस कन्या को मालूम पड़ा तो उसको यह लगा कि भाई मेरी मदद तो होना दूर की बात रही और जो है इस तरीके से तो मेरा मुझे जानने वाले होंगे जो उसी सर्किल के हैं जिस सर्किल की मैं हूं उसी सर्किल से सब लोग ज्योतिष पीठ से भी जुड़े हुए हैं। तो कहीं ना कहीं मेरी बदनामी होगी। तो उसने फिर पुनः निवेदन करने के लिए भी और दबाव बनाने के लिए भी भाई आप आप अगर मेरी मदद नहीं कर रहे हो तो मत करो ना मगर कम से कम इस तरह से मेरी अपकीर्ति क्यों कर रहे हो मेरे बारे में मुझे इस तरह से बदनाम क्यों कर रहे हो मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है भागवतानंद ने कैरी मिनाटी बनने के लिए मसाला उठाने के लिए यह क्लिप भी डाल दी इसके बाद उस मातृशक्ति की संभवत जो स्वास्थ्य है वो खराब होने लगा वो हॉस्पिटल तक पहुंची पहुंची आईसीयू तक पहुंची। उसके घरवाले केस भी नहीं कर पाए बदनामी के डर

00:02:33:03 से। मगर जिस प्रशंसक ने भागवतानंद पर विश्वास करते हुए उस मातृ शक्ति को भागवतानंद का नंबर दिया था। उस प्रशंसक ने भी भागवतानंद को कॉल करके समझाने का प्रयास किया कि भाई मैंने ही तुम्हारा नंबर दिया था। तुम उसकी जो ऑडियो क्लिप है उसको मत इस तरीके से डालो। एक उसने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है। भागवतानंद ने अपने उस प्रशंसक की भी ऑडियो क्लिप डाल दी। जहां तक मेरे संज्ञान में है। इसका अर्थ क्या है कि भागवतानंद को इससे मतलब नहीं होता है कि कौन मेरा प्रशंसक है, कौन मेरा समर्थक है, कौन नहीं है। उसको बस इससे मतलब होता है कि मुझे चटपटी खबरें वो मनोहर कहानियां वाली कैसे मिले जो कि मैं सुनाऊं या वो सनसनी खेज वाले चैन से सोना हो तो जाग जाओ वाले। इस तरह की बातें मैं किस प्रकार से अपने YouTube चैनल पर बोलूं और उसके लिए वो लोगों को मोहरा बनाता है। वो मोहरा कोई भी हो सकता है। उसका कोई अपना भी हो सकता है। उसका कोई विरोधी भी हो सकता है। या फिर कोई ऐसा व्यक्ति भी हो सकता है जिससे आज तक उसने बात ही ना की हो। विजय श्री भी उनमें से एक थी। उसको पूरी पीठ के बारे में दुष्प्रचार करना था। और पूरी पीठ से जुड़ी हुई कोई कोई महिला जिसकी सोशल मीडिया आईडी उसे मिल गई। उसको उसने अपनी तरीके से जिस तरीके से वो जिन आंखों से वो दिखाना चाहता था अपने फॉलोअर्स को उस तरीके से उसने प्रस्तुत

00:03:48:12 कर दिया। चटपटी मनोहर कहानियां बना दी और मनोहर कहानियां तो बनाता ही आ रहा है वो अपनी मलेश मलेशवा वाली सीरीज में। अब मैं अभी यह सब क्यों बता रहा हूं? क्योंकि एक व्यक्ति ने कल मुझे एक फोन किया कि वो यह चाहता है कि मेरे और भागवतानंद के बीच का युद्ध समाप्त हो जाए। यद्यपि अब यह युद्ध किसी ना किसी के परास्त होने पर ही समाप्त होना है। परंतु क्यों नहीं क्योंकि उसका धेय यह था कि इस प्रकार से धर्म को हानि हो रही है और उसको किसी आचार्य ने ये कहा था कि भाई इनके बीच में जो ये संघर्ष है ये नहीं होना चाहिए। तो तुम इन लोगों से संवाद स्थापित करके उसको सॉर्ट आउट कराने का प्रयास करो। उसके लिए उस व्यक्ति के दो प्रश्न थे कि ये पहला कि भाई इसकी मूल जड़ क्या है? क्या बात है? क्यों लड़ रहे हो आप लोग? तो जब उसने मेरे से यह प्रश्न किया तो मैंने उसको यथावत रूप से जो मेरे स्मरण शक्ति में आया मैंने 50 मिनट के लगभग उससे बातचीत की और उसको सत्य के साथ वो सारी चीजें यथोचित रूप से बता दी और उसको बहुत सहृदय सरलता का अनुभव भी हुआ मेरे से बात करते समय प्रथम बार जब उसने मुझे कॉल किया तो मेरी उससे क्या बातचीत हुई। उसने मेरा पक्ष समझ लिया कि मेरा क्या दृष्टिकोण है इस मामले

00:05:03:18 को लेकर के और मैं मतलब क्या है मेरी ओर से क्या मूल कारण है इस युद्ध का इसके बाद वो व्यक्ति जाता है वो वो मेरे और उसमें अपेक्षाकृत मेरी अपेक्षाकृत भागवतानंद के प्रति ज्यादा श्रद्धावानता ज्यादा निष्ठावान था वो जाता है अपने गुरु जी के पास है ना पर गुरु जी तो ठहरे धार्मिक क्षेत्र के कैरी मिनाटी वो जाता है ये पूछने के लिए कि गुरुजी क्या कारण है आपका क्या इसमें मतलब मतलब वो है मूल कारण क्या है? क्या कोई संभावना है इसको युद्ध को रोकने की? तो गुरु जी जैसे ही सुनते हैं कि भैया शिवांश का किसी ने मुझे फोन करके नाम लिया है तो आप ना देखा ताव वो चालू हो जाते हैं जो वो भरे बैठे हैं शिवश के लिए उन्हें जो जो बोलना है जो शिवश ने अपने प्रासंगिक वीडियोस में सवाल उठाए हैं वो उन सवालों का उत्तर देने लगते हैं। यह जाने ये सोचे समझे बिना कि वो व्यक्ति शिवांश की ओर से ये कहने नहीं आया कि शिवांश आपके बारे में ये कह रहा है। इनका क्या उत्तर है आपके पास? यह जाने सोचे समझे बिना गुरु जी सुन लो चालू हो जाते हैं परी साधना वाले काली यजन वाले चालू हो जाते है की शिवश यह कह रहा है तो उसका यह उत्तर है यह कह रहा है तो वो उत्तर है यद्यपि वो कुतर्क है उसके उत्तर भी बाद में हम कभी ना कभी दे देंगे और आगे जो ऑडियो रिकॉर्डिंग है आपको सुनाई देगी उसमें आपको सुनाई दे

00:06:18:21 जाएंगे मगर गुरु जी आप ना देखा था चालू हो जाते हैं और वो जो वस्तु विषय लेकर के आया था कि भाई इस युद्ध का कारण क्या है इस द्वंद का कारण क्या है? या यदि हम यह अपेक्षा कर सकते हैं कि यह युद्ध समाप्त हो सकता है तो किस प्रकार हम इस युद्ध की अपेक्षा कर सकते हैं समाप्त होने की। तो उसके जो ये दो प्रश्न थे वो तो गुरु जी ने सुनने ही नहीं पसंद मतलब सुनने पसंद किए। उन्होंने कहा कि बोलो बोलो बोलो। मगर वो बोलने से पहले वो इतना कुछ सुना चुके थे यह समझते हुए कि ये शिवांश की ओर से प्रश्न करने आया है या फिर शिवश की ओर से शिवश का नाम लेने वाला उनको एक श्रोता मात्र मिल गया था तो गुरुजी के अंदर जो भड़ास भरी पड़ी थी वो भड़ास उन्होंने उस व्यक्ति पर निकाल दी अब क्या होता है कि वो व्यक्ति इतना होचपौच हो जाता है क्योंकि निष्ठावान भी था उनके प्रति इतना होचपौच हो जाता है कि वो अपनी जो बात कहने गया था वह तो बिल्कुल वो ब्लैक आउट हो जाता है अब ब्लैक आउट होने के बाद वह अपनी बात जो यथावत रूप से दो बातें कह रही थी कि युद्ध क्यों है और किस तरह से समाप्त हो सकता है? क्या कोई इस पर चिंतन है? यद्यपि हम और वह जानते हैं कि इस युद्ध को समाप्त करने का एक ही तरीका है। दोनों में से कोई एक व्यक्ति पराजित हो जाए और वह होगा। मगर वो

00:07:34:24 बेचारा मासूम सा एक लड़का नवयुवक जो यह सोच करके वहां गया था कि मैं किसी प्रकार से इन दोनों उसकी नजरों में मैं भी धर्म रक्षक था। वो भी धर्म रक्षक था। और कहीं ना कहीं वह आचार्य भी था उसकी नजरों में। निष्ठावान था उसके प्रति। तो वो इस दृष्टि इस इस धेय के साथ गया था कि भाई दोनों में किसी प्रकार से सामंजस्य हो जाए। ना कंप्रोमाइज करके दोस्ती करें तो कम से कम शांत तो हो जाएं। यह उसका धेय मुझे समझ में आया। इस व्यक्ति ने क्या किया? उसकी बात तो सुनी नहीं। अपनी बातें सुना सुनू के वह बेचारा ब्लैक आउट हो गया। और उसमें उस व्यक्ति की ऐसी कोई बात नहीं है जो कि कोई राज की बात हो या उससे कोई गलती हुई हो, कुछ भी नहीं। मगर इस व्यक्ति ने उस वीडियो को भी डाल दिया। उस ऑडियो को भी डाल दिया क्योंकि ऐसा कोई सगा नहीं जिसको इसने ठगा नहीं। अब वो व्यक्ति के पास मेरा फोन जाता है। मैं उसे अपनी चीजें बताता हूं। मुझसे कहता है भैया मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। कि मैंने पहले तो यह निर्णय ले लिया कि आप दोनों के बीच की लड़ाई को शांत कराया जाए। उसके बाद मैंने दूसरा निर्णय ये ले लिया कि मैं जो है उनके पास चला गया। उन्होंने मेरी रिकॉर्डिंग ही डाल दी। यद्यपि उसने कॉल रिकॉर्डिंग के समय भी कहा था कि गुरुजी आपका जो मन करे आप कर सकते हैं। आप रिकॉर्डिंग डाल सकते हैं। वो उसका उसकी शरणागति थी। मगर एक सामान्य व्यक्ति जो नहीं चाहता

00:08:50:04 है कि भैया जो इस तरह से पब्लिक प्लेटफार्म में अपने आप को इंट्रोड्यूस नहीं करना चाहता है तो आप उससे पूछे बिना उसकी अनुमति लिए बिना उसकी कोई गलती ना होने पर भी उसका कोई दोष ना होने पर भी उसकी इस तरह से अपने उसको इस तरीके से एक मोहरे के रूप में अपनी ख्याति अपने चैनल अपनी सक्सेस मसालेदार खबरें सनसनीखेज मामले या फिर अपने ओपोनेंट अपने विरोधी को जवाब देने के लिए उसको एक मोहरे की तरह यूज़ करते हो। मोहरा है वो तुम्हारे लिए। तुम्हारा प्रशंसक, तुम्हारा फॉलोअ एक मोहरा मात्र है ना कि बस मुझे एक मिल गया पॉइंट। इसके आधार पे अब मैं जो है यह प्रचार कर दूंगा। इसने शिवश का नाम ले लिया। इस व्यक्ति ने आकर के बस अब इसके आधार पे मैं शिवांश को जो उत्तर देने हैं वो उत्तर दे दूंगा। इस वीडियो के रिकॉर्डिंग को डाल दूंगा। अलग से वीडियो बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मेहनत बच जाएगी। यही तो किया। उसके चक्कर में हुआ क्या? सबसे पहले तो वह खुद हृदय विधारित मतलब उसको कुछ उसको कष्ट पहुंचा कि भाई इस तरीके से मैं तो इतनी निष्ठा रखता हूं मगर उन्होंने भावना देखा था मेरी रिकॉर्डिंग क्यों डाली मैंने ऐसा क्या कर दिया था जो रिकॉर्डिंग डालना आवश्यक हो गई थी यही सवाल उस लड़की का भी था उसने ऐसा क्या कर दिया था जो उसकी रिकॉर्डिंग डालना आवश्यक हो गई थी मदद मांगने पहुंची

00:10:05:06 थी ना यह सुलह करवाने पहुंचा था ना ऐसा क्या कर दिया था इसने जो उसकी रिकॉर्डिंग डालना आवश्यक हो गई थी कोई जवाब नहीं है कुतर्क आएंगे सामने सामने से। खैर अब क्या होता है वो रात को मुझे मुझसे जब बातचीत होती है तो वह लड़का बताता है कि मैंने इस इन्होंने जब स्वामी जी ने रिकॉर्डिंग डाल दी है तो मैंने उनको रिक्वेस्ट की है कि भाई आप रिकॉर्डिंग प्लीज हटा दीजिए। मेरी नौकरी जा सकती है। बहुत दुखी था वो लड़का और सुबह उसकी खबर आती है मेरे पास कि उसकी नौकरी जा चुकी है। उसके ऑफिस में उसके जो जिन जिन अकाउंट्स के साथ वो सोशल मीडिया पे जाना जा रहा था। उसके ऑफिस में उसके कलीग्स थे। मुसलमान भी थे, दूसरे धर्मों के भी थे या सनातना आभासी भी थे। जानते थे कि यह व्यक्ति किस प्रकार की सोच रखता है। तो जैसे ही यह रिकॉर्डिंग आई और इस इसका इस तरीके से इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल होना पता चला इसके आगे बॉस को तो इसने ही मुझे अभी दूसरे दिन फोन करके बताया कि भाई इसको निकाल दिया गया है। इसका इसको टर्मिनेशन लेटर दे दिया गया है या टर्मिनेट कर दिया गया है। तो इसीलिए जो भागवतानंद के फॉलोअर्स हैं उनको भी इन इस मामले पर ध्यान देना चाहिए कि परी साधना और जिनोपासक से आप किस तरह की अपेक्षा कर सकते हैं। ऐसा कोई सगा नहीं जिसको हमने

00:11:20:07 ठगा नहीं। जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम भैया। आपकी रिकॉर्डिंग सुनी मैंने। जी जी भैया। भागवत से आपने बात की होगी। हां मेरी बात हुई थी उनसे फॉर्म में। तो यह बताइए कि आपका जो मूल विषय जो लेकर आप मेरे पास आए थे हां हां कि भाई हम लोगों के बीच में क्या झगड़ा है? किस बात का लेकर के में मुख्य विषय क्या है? जो जो मैंने आपको बताया भी था अपने सामर्थ्य के अनुसार। जी जी और इसके बाद फिर इसका आपका आपका उद्देश्य यह था यद्यपि मैं जानता हूं और वो जानता है कि अब इस ये ऐसा युद्ध है जो किसी एक के परास्त होने के बाद ही रुक सकेगा। पर आपका उद्देश्य ये अवश्य था कि अ युद्ध ना हो। हम जी जी बिल्कुल मेरा उद्देश्य कुछ ऐसा ही था। ऐसी भावना हो तो मैंने आपकी जो रिकॉर्डिंग सुनी है हम उसमें ज्यादातर में तो इस विषय में बात हुई नहीं है। उसमें तो जो हमारे जो प्रासंगिक जो मैंने जो आक्षेप उठाए हैं वह

00:12:36:04 उनका निराकरण प्रस्तुत कर रहा है आपको सुनाते समय और अंत में अब अपना ये जो मूल विषय आपने रखा नहीं फोन कट गया कुछ ऐसा मैंने समझा तो क्या औचित्य रहा आपका उसके साथ वार्ता करने का आपके अनुसार मेरे अनुसार तो कोई औचित्य था ही नहीं जी देखिए मेरा हां ये अवश्य है कि उसने आपको मोहरा बना करके और जो है यह अवश्य है कि आपको आपको मोहरा बना करके उसने जो है ये सब बातें जो उसको बोलनी थी मेरे विरोध में वो सब बोल दी हम और आप एक तरीके से उसका एक श्रोता मिल गया जो उसे बोलनी थी वो श्रोता के रूप में उसने आपको यूज़ कर लिया हां लगभग सुनने से तो यही ही प्रतीत होता है। संभवत मैंने भी जब स्वयं को सुना तो संभवत मुझे भी और तो लगा और आपके साथ उसकी पर्टिकुलर आपको लेकर के तो उसकी कोई ऐसी चर्चा हुई नहीं है जो कि आपकी रिकॉर्डिंग को डालना आवश्यक था। हां उसको मेरा उत्तर देना था। यद्यपि वह उत्तर से कुतर्क है जो

00:13:51:15 अब जैसे वो तो स्वामी जी ने जो भी विषय उठाए वह मेरा विषय नहीं थाचा का तो आप आप पर्टिकुलर आपकी रिकॉर्डिंग डालने का औचित्य तो मुझे समझ में आया नहीं कि उसने आपकी रिकॉर्डिंग डाली क्यों है भाई उसने मुझको उत्तर दिए हैं उस रिकॉर्डिंग में वो तो आपका विषय है नहीं आप तो उससे पूछने गए नहीं थे कि आपके ऊपर शिवश नारायण द्विवेदी ने अमुक अमुक आरोप लगाए तो वो टेप रिकॉर्डर की तरह चालू हो गया कि राम राम भद्राचार्य जी का खंडन नहीं करेगा। मेरा खंडन करेगा क्योंकि मेरे पास चार गुंडे नहीं है। इसका मतलब इसका मतलब उसके अनुसार और उसने उसमें यह भी कहा है कि ये और किसी संप्रदाय का खंडन नहीं करता। बस मेरा संप्रदाय मेरा खंडन करता है। तो इसका मतलब इसके अनुसार विद्या भास्कर जी महाराज, शंकराचार्य जी महाराज, राघवाचार्य जी महाराज सबके पास गुंडे हैं। रामभद्राचार्य जी के पास गुंडे हैं। यह सब गुंडे लेकर के चलते हैं। इसलिए मैं इनके खिलाफ इनके विरोध में नहीं बोलता हूं। और इस बेवकूफ को यह नहीं दिखाई देता कि इन सबसे बड़ा गुंडा रामपाल है जिसको पकड़ने के लिए ₹27 करोड़ खर्च हो गए थे सरकार के हम जी हैं। अवैध हथियार का आज तक उस पर मुकदमा चल रहा है देशद्रोह का। जी मुझे जान से मारने की वो लोग धमकी दे रहे हैं। अगर गुंडा गुंडे जिसके पास है मैं उसका खंडन नहीं

00:15:06:21 करूंगा या उसका विरोध नहीं करूंगा तो मैं रामपाल का विरोध क्यों करता? कहां का कुतर्क है यह? देखिए अभी तो मैं यह कहना चाहूंगा कि मैंने जैसे प्रथम वार्ता में ही आपसे यह स्पष्ट किया था कि आपके जो धरातल के कार्य हैं मैं उनकी सराहना करता हूं और प्रथम मैं अगर अपने अनुभव से बताऊं तो निग्राचार्य जी स्वामी जी से पहले मैंने आपके जो कार्य हैं धरातल पे जो आर्य समाज से संबंधित है इस संबंधित है और रामपालियों से संबंधित है एवं अन्य अन्य जो ऐसे संस्थाने धर्म के जो स्वरूप है उसको विकसित करके दिखाते हैं। उनके खंडन को लेकर के जो आप कार्य कर रहे थे तो मैंने प्रथम बार देखा था। मुझे बड़ा अच्छा लगा और उसके समय से ही मैं कहीं ना कहीं मैं आपके चैनल से जुड़ा और मैंने इसके हिसाब से जैसे समय मिलता था वीडियो वगैरह देखता था उसका और उसी समय नहीं नहीं उसने काफी सारे कुतर्क भी किए हैं इस रिकॉर्डिंग में। मैंने मैं उससे आऊंगा मैं उससे आऊंगा। तो जैसे स्वामी जी का स्वामी जी को भी सुना है और उसी के प्रति मतलब यह मेरी भावना रही कि आप भी धरातल में अच्छा कार्य कर रहे हैं और स्वामी जी भी लगभग अच्छा कार्य कर रहे हैं। मतलब मेरी जितनी देखिए बहुत बड़ा शास्त्र

00:16:21:25 का मर्म जो मैं भी नहीं हूं और सामान्य व्यक्ति को आचार्यों को सुनने में उपलब्ध श्रद्धा है। उनको उनके प्रति सम्मान की भावना है। इस भाव से मैंने जब प्रथम बार उनको सुना तो मेरे मन में भी उनके प्रति यही भावना आई कि आचार्य बिल्कुल अब बहुत सारी विषयों में जो जैसे आज काफी लोग चर्चा कर रहे हैं तो मुझे नहीं पता है क्योंकि संभव है कि मैं उतना उन विषयों में जुड़ा भी नहीं हूं। तो मेरी ये भावना हुई कि एक आचार्य हैं। मैं उनका नाम तो नहीं दोबारा लेना चाहूंगा क्योंकि उनसे जब वार्ता हुई तो उन्होंने स्वयं ही उनको शो होने लगा। तो मुझे लगा कि अब उनको क्योंकि मुझे तो घसीटा गया है उनको नहीं घसीटा जाना चाहिए। उनका नाम नहीं जाना चाहिए। तो उनके निर्देशानुसार यह था कि ये जो विवाद अनावश्यक विवाद जो है चल रहा है इसलिए वार्ता से भी समाप्त हो सकता है। इसकी आवश्यकता नहीं है और दोनों अच्छा कार्य कर रहे हैं। ऐसा उनका मानना था। तो मैंने कहा बिल्कुल मैं भी यही भावना रखता हूं और मुझे बात उनसे आचार्य जी से तो मैंने ये कह दिया पर जब यह हुआ कि अगर चर्चा कर सकते हो तो चर्चा करो तो मुझे भीतर से एक बार आया था कि पता नहीं मैं इस विषय के लिए उचित व्यक्ति हूं या नहीं मुझे मतलब ऐसा नहीं आप उचित व्यक्ति इसलिए नहीं थे क्योंकि वहां पर वो कुतर्क

00:17:37:06 करता जा रहा है और आपको एक श्रोता के रूप में केवल वो उपयोग में ले रहा है और आपने उस वीडियो में कहा क्या है तो ना तो तो आप धर्म के पक्ष को सही से रख पाए वहां पर क्योंकि मुझे नहीं लगता आप उपयुक्त व्यक्ति थे उस चर्चा के लिए क्योंकि आप इतने ज्यादा प्रभावित हैं या फिर वो जो एक भाव होता है ना कि हम बोल नहीं पाएंगे तो आपका वहां पे वो भूमिका थी जो भी बात वहां वो बोलते जा रहे थे बोल आप अपना पक्ष बोल ही नहीं रहे हो कि मैं इस विषय में आया हूं आप शिवश का यहां पर खंडन या उत्तर प्रति उत्तर क्यों दे रहे हैं मैं तो अपनी ये बातें लेकर के आया हूं उन्होंने या आधे पौने घंटे तो अपना वही बताया कि भैया वह निगनंद को मानता नहीं है। निग्रचार को निग्रह परंपरा को नहीं मानता है। बाद में जो है वह निग्रह परंपरा को निग्रह शब्द को उसमें शास्त्र में देख रहा है। अरे भैया शास्त्र में हमने एक और पॉइंट उठाया कि यदि तुम्हारा तुमको भगवती आकर के देके गई। यह मान भी लिया जाए। तब भी जिस शास्त्र के आधार पर तुम अपने निग्रह संप्रदाय को ख्यापित कर रहे हो उस शास्त्र में तो निग्रह और निग्रह संप्रदाय नहीं लिखा है। निग्रह आगम लिखा है और अगर उसको मान भी लिया जाए कि वो संप्रदाय ही है तो वो पाखंड संप्रदायों में माना जाएगा क्योंकि वहां घोषणा

00:18:52:12 हो रही है कि अब हम आठ संप्रदायों के नाम बता रहे हैं। पाखंड तंत्रों के नाम बता रहे हैं। अगर माना जाएगा तो ठीक है। तो एक तो ये वाली बात हो गई। तो अगर हमने यह क्वेश्चन उठा दिया कि जिस शास्त्र से तुम अपने निग्रह संप्रदाय को प्रमाणित कर रहे हो वहां से भी वो पाखंड तंत्र होता है स्थापित इसका मतलब ये थोड़ी ना है कि हमने ये मान लिया कि भगवती वहां आती है या हमने ये मान लिया कि तुम्हारे निग्रह का परंपरा काल्पनिक नहीं है। परंपरा काल्पनिक है। भगवती आती है। ये भी कल्पना है। मगर हम एक और पॉइंट उठा रहे हैं कि अगर उन दोनों को मान भी लिया जाए तो यहां ग्रंथ में आपका खंडन हो रहा है। और ऐसे ना जाने कितने जगह पर अलग-अलग पॉइंट पर आपका खंडन होता है। यदि आप निग्रह निग निगमानंद को मानते हो तो आपको शंकराचार्य को मानना पड़ जाएगा। आप अगर निगमानंद को मानते हो तो अगर निगमानंद के प्रामाणिक शिष्यों को नहीं मानते हो। आज उसने एक बात ये कही आपकी रिकॉर्डिंग में मैंने सुना कि भाई हमने किसी को भी अपना वक्ता या प्रतिनिधि नियुक्त नहीं किया है। इसका मतलब वो ये मानता है। हां। इसका मतलब वह यह मानता है कि जिसको जो नियुक्त करेगा अपने प्रतिनिधि के रूप में उसके संदर्भ से उसके प्रति

00:20:07:20 नियुक्त उसके द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि की बात ही प्रामाणिक मानी जाएगी। तो फिर निगमानंद के संबंध में जो उसके द्वारा नियुक्त जो लोग बोल रहे हैं कि निगमानंद ने बताया ईसा को भगवान कहा या वर्णाश्रम का इस तरह से विरोध किया और या फिर जो भी बातें जो उसकी किताबों में भी मिलती है उनकी व्याख्या जो निगमानंद के द्वारा नियुक्त लोग करते हैं वो मानी जाएगी कि कोई मन चला रहा गैरा नत्थू गहरा जो है हाथ में सांप का डंडा लेकर चलने वाला वो जो व्याख्या करेगा और वो कहेगा मैं निगमानंद को क्या कहते हैं निगमानंद की ओर से प्रामाणिक बात मैं मान म क्या कहते हैं मैं बताऊंगा उसको प्रमाणिक माना जाएगा। इसका मतलब दुनिया में कोई व्यक्ति अह इसका मतलब यह है कि जब तुम स्वयं के लिए तो यह चाहते हो कि तुम्हारी ओर से प्रमाणिक उसी को माना जाए जिसको तुमने नियुक्त किया हो। पर अन्यों के लिए तुम यह चाहते हो कि उनकी ओर से भी तुम्ही को प्रमाणिक माना जाए। जबकि तुमको उसने नियुक्त किया हो या ना किया हो इससे कोई मतलब नहीं है। यह तो सारे विषय शोध के हैं। मैं अपने अगर बात करूं तो इतना और इसको अब ये बताइए रामभद्राचार्य जी के पास ज्यादा बड़े गुंडे हैं या ज्यादा बड़े गुंडे रामपाल के पास

00:21:22:26 ज्यादा हैं? किसके पास ज्यादा है? ये कुतर्क नहीं है। समर्थक रामपाल के पास ही होने चाहिए। और और क्या कह रहा है कि उसकी अगर औकात हो तो ये कर दे चारों शंकराचार्य को एक कर दे। मैं तो ये कह रहा हूं कि उसकी अगर औकात हो फिर यही कहने लगो फिर सीधे-सीधे इसी पे आ जाओ। उसकी अगर औकात हो तो सबको मोक्ष दिला दे। बात ही खत्म। हम सब हो गया। देखिए विषय हम जो माता के दूध की बात जो हम करते हैं वो वहां पे करते हैं। हम जब कोई व्यक्ति धर्म का पक्षधर होकर के टीका टिप्पणी कर रहा है तो हम जाकर के उसको जो है उसमें तो कह नहीं सकते हैं। हर हर एक का जो समाधान है वो कमेंट में जाके तो दे नहीं सकते उसको कि एक-एक व्यक्ति का समाधान कमेंट में ये खुद अपने वीडियो में बोला है कि एक-एक व्यक्ति का समाधान हम कमेंट में नहीं कर सकते। तो हम जब हम ये नहीं कर सकते हैं और कोई व्यक्ति ससर्यादित शब्दों में टिप्पणी करता है तो हम उसको जाकर के कह देते कम टू लाइव कम से कम उसको अवसर तो दे रहे हैं कि भैया लाइव आ जाओ और आमने सामने बैठकर के चर्चा कर दो क्योंकि क्योंकि समाधान कर देने पर भी वो बात वहां चर्चा आगे बढ़ती चली जाएगी। पता नहीं कितने और कमेंट करने पड़ जाएंगे। तो हम सीधे कह देते लाइव आ जाओ जिससे कि तुम जब विषय

00:22:38:14 कर रहे होगे हम तुम्हें रोक लेंगे। तो हम कम से कम मौका तो दे रहे हैं। अवसर तो दे रहे हैं। हम तो केवल यह कह रहे हैं कि जो कार्य तुम यहां पर ऐसे कर रहे हो अपने नाम पहचान इत्यादि को छुपा करके तो जरा आओ सामना करो। सामने करके आओ। भाई हम जब अपनी पहचान इत्यादि को रिस्क पे रख के सामना करते हुए बात कर रहे हैं। धर्म का पक्ष रख रहे हैं। तो जो हमें हमारे को रोकने आया है उसको लगता है कि हम अधर्म कर रहे हैं। वह भी तो अपनी पहचान के साथ आए। उन उन चीजों का रिस्क ले। उन चीजों को दांत पे लगाए सत्य का पक्षधर है तो तो यह बात कहने के लिए हम वहां पर माता के दूत की बात कहते हैं और माता के दूत की बात जाने कितने आचार्यों ने और कितने लोगों ने अमुक अमुक समय पर कहते रहे उसमें ऐसी कोई अमर्यादा नहीं है। देखिए दोष वाला जो विषय है ना उससे मैं यही कहूंगा कि ठीक है लगभग आपने सभी को उत्तर दिया है तो हो सकता है संभव है आपने मुझे भी वो उत्तर दे दिया होगा तो सामान्य दृष्टि से क्योंकि मैं एक सामान्य व्यक्ति हूं तो मुझे थोड़ा सा मेरी भावनाओं को लगा था लेकिन ठीक है जब कहीं ना कहीं मैंने उसमें देखिए माता के माता के दूध की बात हम तभी किसी को कहते हैं जब वो कोई ज्यादा उपहास पूर्वक बोल रहा होता है। यदि

00:23:53:18 कोई केवल प्रश्न ही पूछता है तो हम उसको सीधे कहते हैं भैया प्रत्यक्ष वार्ता कर लो कम टू लाइव। ये बड़ा सरल सा हमारे पास होता है। कम से कम वो मेरा वो मेरा विषय ही नहीं था। वो मेरा विषय नहीं था। हालांकि उसमें चर्चा में वो विषय भी आया है। लेकिन मेरा मूल विषय स्वामी जी से ये नहीं था। मेरा विषय यह था कि क्योंकि मैंने आपसे प्रथम वार्ता की तो आपसे चर्चा में यही हुआ कि ठीक है त्यौहार पूर्व अगर चाहे तो हो सकती है एटलीस्ट पक्ष किसका क्या है ये पता चले तो आपसे वार्ता हुई उसके बाद मैंने स्वामी जी से वार्ता की तो स्वामी जी से मैं अपनी बात यहां तो मैंने सरलता से सह आपको बिल्कुल सच सच एक-एक बात बताई उसने वहां कहती अपनी बात तो अपनी पूरी कर उसने कहा कि उसको अपने गुरुओं की लड़ाई लड़ाई नहीं लड़ रहा है। सनातन धर्म की लड़ाई नहीं लड़ रहा है। वो विजय श्री की लड़ाई लड़ रहा है। भैया जब जब धर्म धर्म की लड़ाई हुई है ना धर्म और अधर्म की लड़ाई हुई है। उसमें जो धर्म और अधर्म की लड़ाई का आधार बनी वो एक स्त्री बनी है। हम हम हां बनी है कि नहीं बनी? बताइए रामायण और रामायण और महाभारत में एक स्त्री बनी कि नहीं बनी? धर्म और धर्म के युद्ध का कारण तो वो एक आधार था बस कि किस तरीके से मैं उस युद्ध में कूद जाऊं और मैं उनके लिए मैं उस व्यक्ति के

00:25:08:19 लिए नहीं बोलता था पहले पर वो दूर ही दूर से मैं देखता था कि अपना भाई है वर्णाश्रमी है ठीक है पर वो धीरे-धीरे मुझ तक आई और विजयश्री के बहाने मुझे उसमें जो कुछ जाना पड़ा आपको मैंने अपनी जो पहले वाली रिकॉर्डिंग है उसमें सुन लीजिएगा आपको भेज दूंगा ये सारी बातें बताई हम नहीं, वह तो मैं खुद ही सहमति कर रहा हूं। अब वह कह रहे हैं कि विजयश्री की लड़ाई है। विजयाश्री के कारण मैं उस जो जिस युद्ध से मैं दूर था, उसमें मुझे आना पड़ा। और जब आना पड़ा, तो पूरा युद्ध मेरा हो गया। विजयश्री केवल एक माध्यम बने उस युद्ध में आने का। वह जो जिस तरीके से कटाक्ष कर रहा था शंकराचार्यों पर और मैं तो इतना जानता भी नहीं था ना उसके बारे में कि वह क्या-क्या बोल रहा है। मोटे-मोटे तौर पर मुझे पता था और उसका कहना है कि जो है जो पहले से सार्वजनिक है वो बात जो है उसको सार्वजनिक चर्चा करने में क्या वो है? अरे भाई किसी स्त्री के ऊपर अगर लांछन लग गया है कोई दुष्कर्म हो गया है कोई घटना घटित हो गई वो सार्वजनिक हो गई है अगर तो उस पे अब जब भी कोई बयानबाजी होगी सब सार्वजनिक होगी। हम हां यह ध्यान ना रखते हुए कि यदि इसका जो दुराचार है वह सिद्ध हो या ना हो मगर जितनी बार इस तरह की चर्चा होगी सार्वजनिक रूप से उतनी बार इसका चीर हरण होगा वाचिक

00:26:24:02 रूप से हम हम मतलब तो ये क्या कुतर्क है हां तो ये कोई ये कुतर्क नहीं है क्या कि कोई कोई चर्चा अगर सार्वजनिक है तो उसे और सार्वजनिक करो ये कोई बात है क्या और वो कह रहा है कि पीएन मिश्र जी वाले मामले में पीए पीएन मिश्र जी हे पीएन मिश्र जी क्या कहते हैं प्रचारित हो जाएंगे प्रसिद्ध हो जाएंगे ये केवल एक बात है कई बातों में से एक बात है अन्य बहुत सारी बातें हैं पीएन मिश्र जी कई अभियानों से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। पीएन मिश्र जी क्या कहते हैं? पीएन मिश्र जी कितने प्रभावशाली व्यक्ति यह भी तो देखना आवश्यक है कि उनके लिए बोलना ही आवश्यक हो जाए। कितना कितने लोग कितना कल्ट चल रहा है उनके पीछे बताइए? जब हम अन्य ढेर सारे लोगों के लिए नहीं बोल पाए हैं। और हम तो कहते हैं भागवतानंद के बारे में नहीं बोल पाते। करपात्री जी का विरोध इसने जाने कब से कर दिया था। पूरी के शंकराचार्य जी का बुद्ध के विषय में विरोध जाने कब से कर दिया था। चारों शंकराचार्यों को आकर के वो एक करोड़ देकर के बुला लो। हम जाने कब से कर दिया था। अच्छा वो वो वो ये भी बता रहा था अपने वीडियो में आपसे जो ऑडियो में बात हुई है कि

00:27:39:08 भैया मैं शूद्रों के यहां जाता हूं। शंकराचार्यों का आना बहुत कठिन होता है। कितने कार्यक्रम होते हैं शूद्रों के यहां होते हैं जो मतलब ये जो कर रहा है उसके आधार पर ये शंकराचार्यों को गलत ठहरा देगा। मतलब आप अगर शूद्रों के यहां कार्यक्रम कर रहे हो तो इससे शंकराचार्यों का कार्यक्रम करना या उनकी जो शैली है उनकी जो विधि है वो गलत हो गई। आप महान हो गए। आप यहां पर कैसे बोल रहे हो यह बताओ कि एक करोड़ लेते हैं वो कैसे सिद्ध हो रहा है? और जब सिद्ध नहीं है तो वो आरोप क्यों लगा रहे हो? जो सिद्ध नहीं कर तो आप प्रासंगिक ही लगी। हालांकि अह मैं सम्मान करता हूं उनका आचार्य हैं वो और आचार्य कैसे हैं भाई? कैसे आचार्य हैं? के किस प्रकार से आचार्य हैं? उसका निग्रचार्यत्व तो सिद्ध हुआ नहीं। उसका आचार्य तो भी नहीं सिद्ध होता। वो अपने वीडियो में कहता है कि विजय श्री के पास मेरे ऊपर और नीचे बहुत सी चीजें ऐसी जो मेरे पास नहीं है। ये आचार्य के लक्षण हैं। लथखोर कहना आचार्यों को लतखोर कहना और राघवाचार्य जी के लिए अभी आपसे होने वाली बातचीत में बोला कि लीपापोती करके निकल जाएंगे। यह श्री संप्रदाय के आचार्यों का सम्मान है उसके मन में। मतलब वो

00:28:54:09 कौन है? विषय तो था ही नहीं मेरे चर्चा का या उनसे बात करने का बट आप आप यह देखो कि वो कहता है कि मैं निग्रहचार्य हूं। अरे भैया और मैं सब संप्रदायों को मैं यह निग्रह करूंगा कि वो अपनेप संप्रदाय के हिसाब से चल रहे हैं कि नहीं? अच्छा ये देखने के लिए आपको उनके यहां का परंपरा से प्रामाणिक शिष्य होना पड़ेगा कि नहीं? तो क्या आपने सबके यहां से परंपरा से प्रामाणिक ज्ञान प्राप्त कर लिया है? रामानुजाचार्य जी ने सिद्धांत क्या बताया है यह उनके प्रामाणिक शिष्य बताएंगे। अब उनके प्रामाणिक शिष्य प्रामाणिक सिद्धांत आगे प्रचारित कर रहे हैं कि नहीं कर रहे हैं और अगर कोई यह कह दे कि नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति में आकर के कोई अगर उनका निग्रह करने का प्रयास करे तो यह कहां तक तर्कसंगत होगा? रामानुजाचार्य के विषय से विषय में उनके प्रामाणिक शिष्य ही तो बताएंगे। और कोई कोई व्यक्ति आकर के कह सकता है तुम रामानुजाचार्य का सिद्धांत गलत बता रहे हो। तो इस तरीके से कोई भी कह देगा कि रामानुजाचार्य ने विशिष्टा द्वैत नहीं द्वैत बताया था। भाई कैसे निर्णय होगा? बातें जो है पता है ये सब बातें मेरे विषय चर्चा का विषय ये पूरी के शंकराचार्य जी

00:30:09:13 ने इसीलिए कहा था कि निग्रहचार्य केवल भगवान हो सकते हैं। बिल्कुल सही बात थी उनकी क्योंकि ये तर्कसंगत फिट ही नहीं होता है। क्योंकि आप निग्रह करने निकले सारे संप्रदायों का तो पहली बात तो ये कि आपके पास सारे संप्रदायों का उनके यहां का परंपरा से प्रामाणिक ज्ञान है। जो आप यह निर्णय करने जाएंगे ये अपने यहां का प्रामाणिक सिद्धांत सही बता रहे हैं कि गलत बता रहे हैं। दूसरी बात यह है कि आपका अपना सिद्धांत तो वेद का तात्पर्य है। आपका अद्वैत कैसा है? अद्वैत है। तो आपके अनुसार तो अद्वैत को ना मानने वाले सभी संप्रदाय अवैदिक हो जाएंगे। क्योंकि आप निग्रह करने निकल रहे हो ना। नहीं तो नहीं तो सम तत्व सहष्णुता का सत्य सहिष्णुता की क्रमिक अभिव्यक्ति में सबका सामंजस्य हो जाएगा। मगर आप तो निग्रह करने निकल रहे हो। हम तो और फिर उसका एक उसका यह प्रलाप कि मैं मैं जो है वो अनास्थावान बना रहा हूं। मैं कैसे बना रहा हूं? मैंने कितनों को दीक्षा दे दी है। मैंने कितने पूरी के शंकराचार्य के शिष्यों को सुनो। इस के लोगों से जब कहा जाता है ना कि तुम मुसलमान बना रहे हो? क्रिश्चियन बना रहे हो। तो इस के लोग यही कहते हैं बताओ कितनों का नाम बदल कितनों ने अपना नाम मुस्लिम कर लिया? कितनों ने अपना नाम क्रिश्चियन कर लिया। तो वहां पर बात

00:31:24:19 ये होती है कि कोई भले ही नाम और स्वरूप से क्रिश्चियन या अथवा इस्लाम मुसलमान बना हो या ना बना हो बात ये होती है विचारों से विचारों से उनके अंदर जो है इस्लाम और क्रिश्चियनिटी पनप चुकी है। इसी प्रकार से इसी प्रकार से आप जिस प्रकार से अनास्था उत्पन्न करा रहे हो आचार्यों के विरुद्ध तो वो व्यवहारिक रूप से वो आज नहीं तो कल जो है दूर जाते हुए देख सकते हैं। मगर वैचारिक रूप से वो आज की आज ही अनास्थावान हो रहे हैं। भाई सीधी सी बात है। कितनों को कराया कितनों को नहीं कराया वह हम जानते हैं कि कितने अनास्थावान हो रहे हैं। कितने नहीं हो रहे हैं और हम होने से रोक भी तो रहे हैं। भाई तुम अनास्था बना रहे हो तो हम बचा रहे हैं और मेरे पास ऐसे मैसेजेस आए हैं जिसमें मातृ शक्ति थी एक बोली मुझसे मैसेज करके बोली आपको मैं बता रहा हूं मेरे मेरे पास एक मातृशक्ति ऐसी आए मैं बोला था जिनको गुरुदेव से दीक्षा लेनी थी कि मैं गुरुदेव से दीक्षा लेने वाली थी तभी मुझे भागवतानंद के वीडियोस दिखाई दिए और भागवतानंद के वीडियोस देख के जो है मेरा मन विचलित हो गया मुझे फिर तब जाकर के आपका वीडियो दिखाई दिया और तब जाकर के

00:32:39:20 जब मैंने आपका वीडियो सुना हां तो उससे हृदय को संतोष मिला और उसके बाद उन्होंने दीक्षा ली गुरुदेव से ये सारी बातें जो है भैया ये मेरे विषय देखिए भाई सीधी सी बात है कोई कोई अगर सन्यासी है कोई सन्यासी है उस पे आप आरोप लगाओगे लालची है तो उसका सन्यास सब तो भंग हो रहा है ना हम तो आर्य समाज से इसी आधार पर लड़ते हैं ना कि हमारा जो आधा अर्थ है वह प्रामाणिक अर्थ है बिल्कुल हम हम अब वो कह रहा है कि सारे सारे संप्रदायों में एक वो करो क्या कहते हैं सारे संप्रदाय खंडन कर रहे हैं खंडन कर रहे होंगे मगर वैचारिक खंडन कर रहे हैं सैद्धांतिक खंडन कर रहे हैं और ब्रह्म ब्रह्म को लेकर के खंडन जो कोई धर्म को लेकर के खंडन नहीं है और तुम भी अगर शास्त्र की मर्यादा शास्त्र केवल शास्त्रीय खंडन करते तो बात अलग होती करते रहते हम कभी ना बोलते भाई 50ों लोग बोल रहे हैं तुम भी बोल देते उसमें में क्या हो जाता मगर तुमने क्या किया कि तुमने अ व्यक्तिगत रूप से अमर्यादित ढंग से असिद्ध आरोप लगाए ये किया तुमने

00:33:55:03 तुमने कोई शास्त्रीय विरोध थोड़ी ना किया उनका क्या शास्त्र में लिखा है कि कौन वैश्यागामी है या कौन व्यभिचारी है ये सब शास्त्र में लिखा है क्या या शास्त्र में लिखा है कि कौन स्त्री वैश्या है या कौन या ये शास्त्र में लिखा है कि कौन जो कहते हैं भाई बहन है उनका आपस में गलत संबंध है। ये सब शास्त्र में वर्णित है क्या? तो ये सब उसके कुतर्क हैं। जो उसने जो उसको जहर उगलना था मेरे विरुद्ध उसने जहर आप आपको मोहरा बना करके उगला और आपने आपने वो सब सुना। आपका अपना विषय आपने क्या बोला वो तो मुझे समझ में नहीं आया। क्या बोला? मेरा देखिए विषय ऐसा था कि मेरी आपसे चर्चा हुई तोकि सौहार्दपूर्ण सकारात्मक भाव से ही मुझे यह आशा थी कि स्वामी जी क्योंकि इतने शास्त्रीय विषयों में चर्चा करते हैं तो हालांकि मैं उनको सुझाव देने योग्य नहीं हूं। मैं यह पहले ही उनको मैंने बोला था चर्चा में कई बार ये मैंने बोला है आप सुनेंगे रिकॉर्डिंग को ना तो उसमें स्पष्ट मैंने कहा है कि सुझाव देना या मेरी ऐसी योग्यता में नहीं है मैं बहुत छोटा व्यक्ति हूं तो पर फिर भीकि हम सनातन धर्मी हम ये देखते हैं

00:35:10:07 कि कोई भी एक एक ही पक्ष के दो लोग आपस में अगर कोई विवाद है तो वो नहीं होना चाहिए इस भाव को रखते हुए मैंने चाहा था कि स्वामी जी से चर्चा करूं पर स्वामी जी ने विषय को शायद उनकी भावना में ये सब विषय रहे होंगे तो उसके चलते उन्होंने कहा और मैं क्योंकि उनका समर्थक रहा हूं कटक कट्टर समर्थक रहा हूं उनके विचारों का उनके शास्त्र के विषयों को तो मेरी मैंने दृष्टता नहीं की कि मैं उनसे प्रश्न करूं। हालांकि एक दो बार भी इशारा आया कि प्रश्न करो लेकिन मुझे लगा कि यह दोष लगेगा किसी भी आचार्य को इस तरह से रोकना और मैं सुनता गया उन सारे विषयों को और बाद में जब उन्होंने सार्वजनिक भी किया तो थोड़ा सा मुझे आपत्ति हुई थी इस विषय में कि शायद ये नहीं होना चाहिए था क्योंकि इतना कुछ महत्वपूर्ण मेरे चर्चा से तो कुछ निष्कर्ष निकला नहीं है कि मैंने कोई ऐसा विषय चर्चा में निष्कर्ष निकला है ना उसको जो जो उत्तर इधर-उधर करके देने थे वो सब उत्तर आपको मोहरा बना करके उसने मुझे दिए हैं वो वो कह रहा है वो क्या कह रहा है सुनिए सुनिए वो क्या कह रहा है कि मैंने उसको कभी व्यक्तिगत चर्चा के लिए कहा ही नहीं झूठ मैंने उसको उसी समय व्यक्तिगत चर्चा के लिए कहा था जिस समय मैंने उसको सार्वजनिक चर्चा के लिए मना किया

00:36:25:08 था मैंने कहा था इस इन विषयों में सार्वजनिक चर्चा नहीं व्यक्तिगत चर्चा ही अपेक्षित है वही उचित है और उसके लिए स्वीकृति भी दी थी हमने वीडियो भी डाला है और वो कह रहा है मुझे तो ध्यान नहीं जब तुम्हें ध्यान ही नहीं है जब तुम्हारा वाकलन ही हो जाता है। बार-बार तुम्हारा वही हो जाता है। तुमसे पौरुष का दोषी हो जाता है। बार-बार तुम यही कह देते हो कि मुझे ध्यान नहीं है। अरे ध्यान नहीं के चक्कर में महाभारत का युद्ध हो गया। मुझे ध्यान नहीं है। ये कोई बात है क्या? हमने तो शुरुआत में ही कहा कि भाई व्यक्तिगत चर्चा कर लो। अब तुम्हें ध्यान नहीं तो इसमें हम क्या करें? मार डंडा मार डंडा। तुम्हारी माता जी को तुम्हें कूटना चाहिए था। तब तुम ध्यान रखिए कोई चीज। मुझे पता है मुझको भी हो रहा है कि मैंने विषय उखाया क्यों? हालांकि वह भी एक निर्देश था। वह भी एक आपकी चीज यह थी कि आप जो है उचित व्यक्ति नहीं थे इस कार्य के लिए। दोनों जगह जो है अब मुझे अब मुझे वो एहसास आपका उनके उसके प्रति आपका इतना झुकाव है कि आपने वहां बात ही नहीं बोली अपनी। वही बोलता रहा। वो भी वो बातें जिनसे आपका कोई मतलब नहीं था। आप वहां गए थे कि भाई आप वहां आपने मुझे यह बताया था कि भाई यह विवाद क्यों है और यह विवाद खत्म कैसे होगा? यह बात तो मैंने पूरे वीडियो में देखी नहीं ठीक तरीके से

00:37:40:14 हम और वहां आधे वीडियो आधे से ज्यादा वीडियो में यह नजर आया कि मैंने किसी को भेजा है हमारा समझौता करा दो तो वहां पे वो मुझे जो है मेरे मेरे प्रतिनिधि को उत्तर दे रहा है। बाद में वो आपने उसको खुलासा किया कि भाई उसने मुझे ये नहीं कहा है बोलने के लिए। है ना? ये स्पष्टीकरण देना इसलिए आवश्यक हो गया क्योंकि स्वामी जी ने शुरू में ही जैसे जब मैंने कहा कि अह कोई भी सामान्य व्यक्ति जब किसी एक व्यक्ति से बात करेगा जहां पे इस तरह की संदिग्धता की बात होगी तो अपना पक्ष रखने के लिए वो अपने विश्वसनीयता की बात करेगा। तो मेरे कुछ शास्त्रीय विषय रहे हैं जिनका मार्गदर्शन के लिए मैंने स्वामी जी से पूर्व में अपने परिवार अपने संबंधियों के विषय में कई ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की है जो कि हम सामान्य तौर पे हम नहीं करते हैं तो उनसे मैंने कहा कि स्वामी जी आपको तो मैंने वंशावली संबंधित चीजें भी साझा की है तो आप मतलब विश्वास तो कर सकते हैं तो उन्होंने कहा कि आप सुनेंगे उसमें रिकॉर्डिंग वो स्वयं ही कह रहे हैं कि 50ों लोगों ने किया है 3600 समथिंग कोई तो होगा पता नहीं तो हम ऐसा उन्होंने उन मतलब उनका अह संदिग्ध जैसा भाव रहा संभवत इसलिए उन्होंने संभवत ऐसा कहा होगा नहीं तो आपको

00:38:55:22 अंतत गतवा आपको क्या निष्कर्ष मिला आप हमारे पास आए थे धर्म को बचाने के लिए हमने आपको किस तरीके से व्यवहार था हमारा आपके साथ और उस व्यक्ति ने क्या किया आप उसके पास गए कि भैया ही हुई निराशा ही निकली नहीं आप उसके पास गए आपकी रिकॉर्डिंग िंग पहले हमारे पास थी। हमने तो नहीं डाली। उसने आपकी रिकॉर्डिंग डाल दी। आपको चर्चाओं का विषय बना दिया। एक बात मैं आपको कहूंगा कि आप कहीं ना कहीं आपकी जो सत्य निष्ठा है वो अमुक जिसको आप स्वामी जी कह रहे हो उसके प्रभाव के चलते आपकी सत्य निष्ठा मैंने प्रभावित होते हुए देखी। उसने जो है कई ऐसी चीजें की जो तर्कसंगत नहीं थी। मेरे लिए औकात इत्यादि शब्दों का प्रयोग किया आपके समक्ष। कुतर्क किए रामदर् हां रामभद्राचार्य इत्यादि को लेकर के कुतर्क किए मतलब उसका यह कहना है रामभद्राचार्य ज्यादा बड़े गुंडे हैं। पहली बात तो गुंडे हैं और फिर ज्यादा बड़े गुंडे हैं किससे? रामपाल से। जिस पे देशद्रोह का कानून कानूनी मुकदमा चल रहा है। हम हम है ना? यहां मुझे चाकुओं से गोद डालने की धमकियां आ रही हैं। बच्ची और घर की स्त्रियों के साथ दुष्कर्म कर देने की धमकी आ

00:40:10:24 रही हैं। और जान को खतरा है। हम जो है उच्च न्यायालय से सुरक्षा मांग रहे हैं और उसके गुंडे कैसे थे और किस प्रकार के थे ये सर्वविदित बातें हैं और वो कह रहा है कि भैया वो इसलिए विरोध करता है मेरा क्योंकि जो है मेरे पास चार गुंडे नहीं है। तेरा विरोध इसलिए करते हैं यदि तूने धर्म की सीमा में रहते हुए मर्यादा में रहते हुए शास्त्रीय बातों पर विरोध किया होता तो हम कुछ ना बोलते। बहुत 50 लाख लोग रोज करते होंगे। 1 लाख लोग रोज करते होंगे शंकराचार्य का विरोध। तू भी उनमें से एक हो जाता। मगर तूने व्यक्तिगत आक्षेप किए और मर्यादा को लांगते हुए किए और असिद्ध आरोप लगाए। सिद्ध भी लगाता तब भी हम ये सोच लेते चलो भाई सिद्ध आरोप है। असिद्ध आरोप लगाए। इसलिए हम क्या कहते हैं? तुम तुमसे तुम्हारा प्रतिकार किया और जब करेंगे तो फिर तुम्हारी भी तो खाल उधेड़ेंगे ना। तुमसे भी तो पूछा जाएगा कि तुम्हारा निग्रचार्यत्व कहां से सिद्ध हो रहा है? तुम्हारा आचार्यत्व कहां से सिद्ध हो रहा है? जिसको तुम गुरु कह रहे हो वो जो है ईश्वर अल्लाह को एक कर रहा है। वर्णाश्रम का विरोध कर रहा है और उसके बारे में तुम कहां से हो जाओगे प्रमाणिक? तुम्हारे अनुसार जब तुम्हारे द्वारा नियुक्त व्यक्ति तुम्हारे संबंध संबंध में प्रमाणिक हो सकता है तो उसी प्रकार निगमानंद

00:41:26:12 के संदर्भ से उसके द्वारा जो नियुक्त व्यक्ति है वही प्रमाणिक होगा और वो था दुर्गाचरण महंत जिसने निगमानंद के यद्यपि निगमानंद की जो मौलिक किताबें हैं उनमें भी वो सब लिखा हुआ है और उन्हीं चीजों से मिलती जुलती चीजें दुर्गाचरण महंत ने भी अपनी किताबों में लिखी है जो सारस्वत मठ या असम बंगाल मठ इत्यादि से छप रही है जिसमें ये सब ईश्वर अल्लाह एक वर्णाश्रम विरोध विदेश यात्रा और मां माता को पत्नी के रूप में देखा ये ये तक लिखा है कि माता जी आती थी और उसको जो है संतुष्ट करके जाती थी पत्नी के रूप में ये सब चीजें उसमें लिखी हुई है निगमंद की किताब जो श्री श्री ठाकुर निगमानंद हालांकि मैंने पढ़ा तो नहीं है पर थोड़ा अभी अभी धीरे-धीरे हम सब लिए बाहर ले आएंगे उसकी बुक्स सब निकल रही है अभी सब बाहर आएंगे नहीं और फिर एट द एंड निग्रह क्यों नहीं कर रहा भाई तू भाई निग्रह तू जब ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी से ये बोल रहा है कि आप जो है मौन है तो इसका मतलब आपकी उसको स्वीकृति है तो तेरी स्वीकृति है क्या ये चल ठीक है तेरे अनुसार निगमानंद सही थे वो भाड़ में गया परंपरा वाला सिद्धांत

00:42:41:20 ये मान लिया कि निगमानंद सही थे और उनके आज के लोग गलत कर रहे हैं और तेरी फिलॉसफी को मान लिया कि नियुक्त व्यक्ति वाला जो नियम है वो वो केवल भागवतानंद के लिए है। अन्यों के लिए कौन प्रमाणिक होगा, कौन नहीं होगा यह भी भागवतानंद डिसाइड करेगा। हां, भागवतानंद के विषय में तो ये नियम लागू हो जाएगा। भागवतानंद जिसको नियुक्त करेगा वही प्रमाणिक होगा। मगर मगर निश्चल मान लिया कि निगमानंद सही थे। मगर आज के लोग निगमानंद के नाम से तो काफी कुछ ऐसा कर रहे हैं ना जो विरोध में सनातन के। कब निग्रह करेगा? कब वीडियो बनाएगा तू? ये सब चीज ये सब विषय तो स्वामी जी ही जाने क्योंकि वहां पर भी मैं स्पीच हो गया था क्योंकि जिन विषयों का कोई संबंध ही नहीं है वो विषय स्वामी जी ने रखे थे तो ठीक है वो विषय तो नहीं था मेरा चर्चा का ठीक है सुन लिया अब क्या ही कहें अब बस ये चीजें हैं कि कहीं ना कहीं वीडियो जो सार्वजनिक हुआ है उसमें चर्चा का विषय नहीं था मैं लेकिन चर्चा का विषय बन गया हूं और जो कि ऑडियो में तो जरूर मैंने कहा कि आप इस बात का चिंतन करें कि कहां से आपको धर्म नियंत्रित

00:43:56:28 व्यवहार प्राप्त हुआ। आपसे संबंधित उसमें ऐसी क्या बात आपने कर दी थी जिसको लोगों को बताना आवश्यक था। उसने जो जहर उगला है मेरे लिए जो जहर क्या उगला मतलब मैंने जो इस समय प्रासंगिक जो मेरे प्रश्न थे उसके संबंध में उसको निराकरण प्रस्तुत करना था। तो वो उसने किया। अच्छा एक बात और उसने बोली थी कि चर्चा में हम जो है बता के गए थे तो सब सारी दुनिया को पता है मगर उसको ही नहीं पता है। अरे भैया सारी दुनिया को पता होने से हमें ये थोड़ी ना ज्ञात है कि तू चर्चा करना चाहता है कि नहीं चाहता है। तेरा कहना है कि मैंने चर्चा के लिए बोल दिया था सार्वजनिक उसमें आ जाना। मगर तूने एट दी सेम टाइम विद्या भास्कर जी महाराज को मना भी तो किया है कि मैं चर्चा के लिए इच्छुक नहीं हूं। मेरा मन नहीं है। तूने कमेंट में मना भी तो किया तो हम इन दोनों में से कौन सी बात को तेरी मानेंगे? तो तू एक बार क्लियर कर दे कि यहां चर्चा में आ सकते हो यहां आना है तो। दूसरी बात हमारे मन में बैठने की कोई बात नहीं थी कि मैं कहां बैठूंगा और वो कहां बैठेगा। मैं तो खड़े होकर अपने प्रश्न कर लेता। मगर मेरे को चर्चा का स्वरूप तो पता हो कि मैं वहां जाऊंगा तो सभा में चर्चा होगी। जहां जहां तुम मंच पर बैठे होगे मैं नीचे मैं खड़े होकर के चर्चा। मुझे आपत्ति नहीं है पर मुझे पता तो हो। वहां चर्चा होगी या किसी अह एकांतिक

00:45:12:19 कमरे में बैठकर चर्चा होगी। हैं या किस जो भी उसका स्वरूप हो वह क्लियर हो और समय इत्यादि का क्लियर करो। मैं तुम्हारे प्रवचन सुनने तो आऊंगा नहीं। मैं तो भाई वहां चर्चा करने आ रहा हूं तो आप मुझे वो समय बता दोगे कौन से समय पे आने आना सही रहेगा। अगर तुम चाहते हो कि सभा में आ कर के आना सही रहेगा। तो ठीक है सभा में आ करके कर लूंगा। अब मैं पहुंच जाऊं सभा के टाइम पर और वहां पर मैं अपने प्रश्न करूं और मुझे सभा वाले रोके या तुम रोको कि अभी मत करो बाद में करना। तो ये तो इसके लिए तो मैं नहीं जाऊंगा वहां पर। इसलिए मैं चाहता था कि तुम अपना स्पष्टीकरण दे दो। जब तुमने प्रथम बार चर्चा का प्रस्ताव रखा था तो तुमने स्पष्टीकरण दिया था ना कि इतने समय से पहले तक आप चर्चा कर लो। तो ये समय क्यों नहीं दिया? समय क्यों नहीं दिया? आपने विधि, समय, स्वरूप सब समझाया था। हम यह सब विषय तो स्वामी जी जाने क्योंकि कुछ नहीं कुल मिलाकर के और वो वो कहता है कि भाई इसमें तो रामपालियों जैसी बात कर रहा है भैया तो तू सामने से आके कर देना केवल एक तेरे निग्रहचार परंपरा के विषय में निग्रह परंपरा के खंडन के विषय में केवल एक वही बात थोड़ी ना है। उस पर तो मैंने ऑलरेडी यही कहा है कि भैया इसमें आप अपना पक्ष प्रस्तुत करें।

00:46:27:27 तो हमने केवल अभी तक तो प्रश्न ही उठाया था कि जब यहां पर घोषणा हो रही है कि आगे में आठ पाखंड तंत्रों के नाम बताने जा रहे हैं। जिसमें से तीन तंत्र है और पांच उपतंत्र हैं। तो आगे वो आठ तंत्र आगे के आठ पाखंड तंत्रों के नाम तुम बता दो जो बुक में लिखे हो। वहां सब घुमा फिरा के इधर-उधर की बातें कर रहा है। मगर ये नहीं बता रहा है। वो आठ पाखंड तंत्र उसके बाद कहां लिखे हैं। हम ठीक है? और ये सारे विषय तो स्वामी जी ही जाने नहीं तो उसने आपसे बोले थे ना ये सारे विषय हां अब ये ये तो विषय हां हम ठीक है तो आप आनंद लीजिए अब चर्चा का विषय बनने का और क्या बताऊं क्या कहूं भैया स्थिति तो मेरी वैसे ही ये हो गई है मैं क्या कहूं मुझे दुख हो रहा है आपके लिए सच बता रहा हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि आपका उद्देश्य तो यही था कि हमारे बीच में जो ये जो धर्म क्योंकि इस लड़ाई से जो चोट पहुंचती है वो धर्म को ही पहुंचती है। भैया मैं ना ही मैं सच कहूं मैं खुद बहुत व्यस्त रहता हूं। सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं मैं तो मुझे इतना पर्याप्त समय नहीं मिल पाता कि स्वामी जी के कई वीडियो आए हैं। मैंने नहीं देखे ना

00:47:43:01 ही आपकी वीडियो देखे। जबकि मैं दोनों लोगों का देखना चाहिए। वीडियो देखते ही देखते ही देखता हूं। चाहिए श्रद्धा के चलते नहीं देख पाया कि अभी हाल फिलहाल में आपको देखना मुझे पर दया यह आ रही है कि आप जो है इसमें फंस गए खामा और कुछ ना होता अगर वो वीडियो ना डालता क्या मिल गया उसको वीडियो डाल के पता है उसको तो यह मिला ना कि उसने जो मेरा खंडन करना था खंडन उसके हिसाब से तो वो कर दिया उसने ये मैं तो देख रहा हूं ना कि आप एक अच्छे उद्देश्य से आए थे आपकी आपने भी जो कहा ना हां यह जरूर कहता हूं कि मैंने उनको यह उत्तर नहीं दिया शायद मेरी मर्यादा मेरी सीमा हां ये आप उनको उसको नहीं कह पाए सुनिए बात भी अभी भैया मेरी बात तो पूरी कर एक मिनट एक सेकंड एक सेकंड छोटी सी बात है कि जब वो मेरे उत्तर वहां पर आपको दे रहा था तो आप वहां ये नहीं कह पाए कि ये आप शिवश को कहिए मैं इस विषय में नहीं इन विषयों में नहीं आया हूं मैं तो यह देखने आया हूं क्या ये मैटर किसी तरीके से स्वामी जी सॉर्ट आउट हो सकता है क्या और जब आपके पास मौका आया चलो ठीक है बहुत लंबी-लंबी चर्चाएं उसने कर ली और जब लास्ट में मौके आए आए भी तो आप उसमें जो वो था कि भाई मैं कितना नगण्य हूं आपके समक्ष कितना नतमस्तक हूं कितना शरणागत हूं उसमें इतना टाइम लगाया कि वो फिर जो मुख्य बात

00:48:58:02 थी आपकी अंत तक आतेआते बहुत धूमिल हो गई अब आप बताइए क्या कह रहे हैं हां मैं ये कह रहा था भैया कि देखिए जैसे मैंने आपसे कहा ना तो जिन विषयों को मैं नहीं जानता हूं ठीक है मैंने आपको उत्तर दे दिया मैंने आपको भाई समझ के उत्तर दिया आपके लिए पता नहीं आप सही किया मैंने नहीं किया मुझे यह भी नहीं पता पर मैंने आपको भाई समझ के ही उत्तर दिया कि ठीक है आपको मैं कह सकता हूं। मैं अपने बड़े भाई से भी इस तरह की बातें कर लेता हूं। मैंने आपको शुरू में ही स्पष्ट किया है। जब हमारी पहली वार्ता हुई है ना मैंने शुरू में ही स्पष्ट किया है। जितने सम्माननीय एक गुरु के तौर पे वो हैं उतने ही सम्मान नहीं है। आप एक बड़े भाई के तौर पे हैं। है ना? आपके कार्यों को देखा है मैंने और आपको अगर याद हो ना हो नहीं याद होगा कि एक मेरे जैसे बहुत सारे ऐसे लोग होंगे। मैंने Instagram में एक आध बार आपको मैसेज भी किया है जो आपका अकाउंट बैन हो चुका है। अच्छा मैंने मैं कार्यालय में मैं था और उन दिन उस समय मैंने वीडियो मैं देखता रहता था अक्सर आपके जो आर्य समाज की यहां तक कि इंदौर भी आप आए थे एक बार आइसकॉन के किसी उसमें उससे चर्चा करने के लिए तो वह विषयों को देख के मेरे बीच में जो आइसकॉन वाले लोग थे तो उनको मैंने वीडियो भेजा और वो लोग मुझसे भागने लगे क्योंकि उनके पास उत्तर नहीं था उन विषयों का तो मुझे भी अच्छा लगा कि चलो सनातन

00:50:13:18 धर्म में कोई है जो इस तरह के विषय को उठा रहा है जो महत्वपूर्ण विषय है तो ऐसे विषय उठाना महत्वपूर्ण है धरातल पे उस दृष्टिकोण से आप भी सम्माननीय हैं रही बात निग्रह आचार्य स्वामी जी की तो धर्म की बहुत ऐसी गढ़ बातें हैं जो मुझे हो सकता है अन्य आचार्य भी सही होंगे मैं किसी को गलत नहीं कह रहा हूं मेरी योग्यता नहीं मैं आपको बता तो रहा हूं कि मेरी योग्यता नहीं है किसी को जज करने की पर जितना मैंने उनको सुना है तो मुझे उनका जो दृष्टिकोण है शास्त्र के पक्ष में मुझे उत्तम लगता है नहीं मगर आपको को एक बात बता दूं। चलिए वो बात तो एक अलग है मेरे भाई। मगर उनके और बीच में हमारी जो लड़ाई है ना उसमें उनका धर्म पक्ष उनका जो पक्ष है वो धर्म का नहीं है। जी जी ये बात प्रलय आने से पहले तक अगर मैं जीवित रहा तो मैं सिद्ध कर दूंगा। और मैं जब तक उनको नष्ट नहीं कर दूंगा। उनका जो यह दीमझाम है मैं रुकूंगा नहीं। जो भी कार्य मैंने आज तक हाथ में लिया है करिए आप भैया समझिए मेरी बात मैं आपको नहीं कह रहा हूं इसमें कहीं भी आप नहीं है मगर मेरा जो दृष्टिकोण है उसमें क्या है कि आप देखिए हमारा हमारी शैली क्या थी मैंने आपको बताया था हम लोग अकाट्य चीजों पर लड़ते

00:51:29:03 हैं हम हम अकाट्य चीजें कैसे जैसे मुसलमान का जो ईश्वर है वो सर्वशक्तिमान नहीं है बिल्कुल उस उनका धर्म शाश्वत नहीं है बिल्कुल हम परम स्वतंत्र मोक्ष नहीं है। बिल्कुल ये तीन चीजें वहां नहीं है। हम इन्हीं तीन चीजों के इर्दगिर्द दुनिया का कोई भी सनातन विरोधी आएगा उसको 5 मिनट के अंदर गिरा सकते हैं। तो अब क्या है कि जो ऐसे विषय हैं कि फलाने टाइम में कहीं पे बम ब्लास्ट हुआ था तो उसने कराया था कि नहीं कराया था। ये हुआ था नहीं कि नहीं हुआ था। ऐसा हुआ था कि नहीं हुआ था। देखो पहली बात तो ये है कि आप वो वाली रिकॉर्डिंग मैं भेजूंगा आपको ड्राइव में जो पहले हमारी और आपकी बात हुई है। हां हां पहली बात तो ये है कि यदि आपके घर की बात है यदि तो सबसे यदि मान लीजिए स्त्री पर लांछन लग गया कोई किसी ने आके कह दिया कि तुम्हारे यहां की अमुक स्त्री जो है व्यभचारणी है। मैंने वहां पर देखा था। तो आप पहले अनुसंधान करोगे ना। बिल्कुल अगर अनुसंधान होता हूं। हां अधिकृत होता हूं तो जो भी प्रक्रिया होगी तो तो आप अनुसंधान करोगे अच्छा क्या अनुसंधान इस प्रकार करोगे कि अखबार में छाप दो मेरी स्त्री पर ये आरोप लगे मैं अनुसंधान करना चाहता हूं नहीं

00:52:44:24 आप अपने तौर पर जितना हो सकता है समाज से छुपाते हुए व्यक्तिगत तौर पर अनुसंधान करोगे तो पहली पहली बात तो अविश्वास प्रकट होना अपने आप में बड़ी बात है। हो भी गया तो अनुसंधान अंदरूनी तौर पर करिए। हम हम और ये कहना कि जो चीजें पहले से ही समाज में हैं और फिर मैं फिर उस पर व्यक्तिगत चर्चा क्यों तो ये तो बहुत ही एक निराधार तर्क है। क्यों? क्योंकि किसी भी स्त्री के साथ मान लीजिए कोई दुर्घटना घटित हो गई। अ क्या कहते हैं उसका मतलब दुष्कर्म हो गया उसके साथ। कितना भी अखबारों में छप गया। फिर भी क्या उसकी गवाही उसके बयान उसके उसके साथ क्या-क्या कैसे-कैसे घटित हुआ क्या ये सब बातें हम सार्वजनिक करेंगे भीड़ लगा के करेंगे या उसके साथ एकांत में बातें करेंगे में तो नहीं आता बिल्कुल नहीं आता हां तो जितना ज्यादा हो सकता है एकांतिक वार्ता करेंगे ना उससे इन विषयों में तो कम से कम अगर किसी के इस तरीके से चारित्रिक खंडन की बात है जो अभी सिद्ध भी नहीं हुआ है कि भैया पूरी पीठ के परिकर ऐसा गलत कर रहे हैं ये कर रहे हैं जो अभी सिद्ध नहीं हुआ है। ऐसे चारित्रिक खंडन के निमित्त अगर आपको बात करनी है तो आप सार्वजनिक

00:54:00:02 मंच पे करोगे क्या? आज तक आपने देखा है कि हमारे सार्वजनिक मंच पर इस बारे में बात हुई हो कि इसका अवैध कहीं पर अफेयर था कि नहीं था? शास्त्रार्थ है क्या ये कोई? हम तो इस विषय में हमने कहा था कि भाई आप व्यक्तिगत बात कर लो। हम तो उस उनका कहना था कि नहीं सार्वजनिक ही करेंगे। तो इसका मतलब क्या हुआ? दृष्टि शोधन की नहीं है। दृष्टि फसाले की है। हम हम तो ये सारी चीजें हैं। अब उसकी अगर वो अगर बहुत अच्छा शास्त्रों का मर्मज्ञ है भी उसको विधि निषेध इत्यादि के बारे में अच्छी नॉलेज है भी तो इसका मतलब ये थोड़ी ना है कि वो किसी स्त्री के अंतर वस्त्रों की बातें करने लगेगा। वीडियो में और कुछ भी ना कहा जाए। भाई-बहन पे नैतिक संबंध का आरोप लगाने लगेगा। कोई कुछ भी ना कहा जाए। मेरे और विजय श्री को लेकर के मैं ही विजय श्री को लेकर के वहां गया। वो मेरी बहन के समान है। कितने-कितने भद्दे भद्दे इसने कमेंट किए। अगर ये शास्त्रों का मर्मज्ञ है तो इसको ये अधिकार मिल गया कि ये जो है भाई और बहन के रिश्ते को कलंकित करेगा। तो इसका हमने बहुत जांचने की कोशिश की। उसके बाद इस नतीजे पर पहुंचे कि भैया इसका उद्देश्य धर्म संस्थापना नहीं है। कुछ भी शोधन का कार्य नहीं है। इसका हम

00:55:15:13 इसका कार्य है कहां से मसाला बने, कहां से मैं कैरी मिनाटी बनूं, कहां से ये बनूं और जैसे कई बार ऐसा होता है कि भाई अमुक आचार्य को भी बोलना चाहिए, अमुक आचार्य को भी बोलना चाहिए। गवई का विरोध किस माध्यम से करना है और किस माध्यम से करने पर वो बात वाकई में फलदायक होगी यह तय कौन करेगा? भागवत आनंद करेगा। हो सकता है किसी और आचार्य ने कोई और स्ट्रेटजी अपनाई हो, कोई और मोर्चा खोलना हो। मैं मतलब वो मंच पे बोलेगा तो ही वो कार्य माना जाएगा कि उसने किया वीडियो बना के। मतलब वो उसने ये मान लिया है कि वीडियो बना के निग्रह करना है। यद्यपि आज तक उससे किसी का निग्रह हुआ नहीं है। उसने ये मान लिया कि वीडियो बना करके निग्रह करना है। तो हर आचार्य वैसे ही करे। ऐसे नहीं होता है। हर आचार्य का अपना-अपना तरीका है काम करने का। अब गुरुदेव से कई लोग कहते हैं कि ये होना चाहिए, वो होना चाहिए। गुरुदेव कहते हैं मूल पे वार करो, हिंदू राष्ट्र बनाओ। जी सनातन संविधान से हो। वोट देने का अधिकार केवल हिंदुओं को गाय कटनी नहीं चाहिए। बिल्कुल हिंदू राष्ट्र बनाओ। मूल पे वार करो। छोटी-छोटी लड़ाईयां कब तक लड़ते रहोगे? बिल्कुल। तो वो कर रहे हैं। अब अब ऐसे अरे इन्होंने कहा क्यों नहीं? अरे भैया यहां पे रामपाल की किताबें बेची

00:56:30:21 जा रही है। तुमने क्यों नहीं कुछ कहा? सीता माता का तो सीता माता का रूप धर के पार्वती माता राम जी के पास इसलिए जा रही है क्योंकि राम जी उन्हें संतुष्ट कर देंगे। ये सब बातें लिखी हुई है उन किताबों में। तुमने क्या करी? तुमने क्यों नहीं किया? ऐसे एक-एक बात एक-एक किताब पे चलोगे। ब्रह्मा कुमारीज की किताबों में भी है। जी। तो तो हर आचार्य का अपना-अपना वो है। अब जिसने नहीं कहा। अरे नहीं कहा उनका अपेक्षित है। तुम्हारे पास टाइम है। तुम्हारा काम ही यही है वीडियो बनाने का। तो तुम सोचते हो तुम वीडियो बना रहे हो तो सब वीडियो बनाए। तुम्हारी देखा देखी। जी। शाम में जानते हैं भैया मैं अपनी बात थोड़ा सा कह लूं हम स्वामी जी ने जैसे ही वीडियो डाला है मेरे कार्यालय में मूलत जो लोग हैं बौद्ध लोग हैं क्रिश्चियन लोग हैं और कुछ रामपाली भी हैं तो नाम लेके डाला है हां नाम ही नाम उसमें स्पष्ट समझ में आ रहा है मेरे बीच के लोग अच्छे से जानते हैं यहां तक कि बीच में एफआई वगैरह की स्थिति आप प्रचलित हो क्या आप वहां पे कि आपकी आईडी किस नाम से है ये सब हां मेरे संस्थान में सब जानते मेरे विचार को मेरे धर्म के तो आपको कहना चाहिए था कि महाराज जी मैंने कोई षड्यंत्र पूर्वक तो फोन नहीं किया है। आप क्यों डाल रहे हो? आपको फोन करें कि ना करें बताइए। बस मैंने नहीं कहा क्योंकि

00:57:45:22 वही लग रहा है कि कहना नहीं कहना। ये दिक्कत है। इसीलिए आपको फोन नहीं करना। अब मेरे संस्थान में शाम को ही डीन जो है मेरा वो एक क्रिश्चियन है तो अब वो उसकोकि मौका चाहिए होता है बहुत बार ऐसे मौके आते हैं जहां अपनी कोई गलती भी नहीं होती और वो ढूंढ करके गलती अपने को मतलब परेशान करने का प्रयास करता है एक दो हिंदू हैं वहां पे तो उनके साथ ऐसा ही व्यवहार है और अब कर नौकरी है दूसरा रोजीरोटी का सवाल है इंसान परिवार के लिए सब कुछ करता है कर रहे हैं हम भी पर ये धर्म के विषय में भी हम उनके मत को हम स्वीकार नहीं रहे हैं हम जितना जितना हमसे हो पाता है हम विरोध करते हैं। हम तो शाम को ही मेरे जो सहकर्मी हैं हम उनका फोन आया कि ये तुमने कुछ किया क्या? तुम्हारा नाम जैसा लग रहा है। आवाज तुम्हारी लग रही है गोस्वामी और उसमें मतलब स्पष्ट समझ में ही आ रहा है। हालांकि और मैंने तो अपना नाम बोला भी था। तो कि तुमने क्या कर दिया है? डीन को जहां तक बात चली गई है तो वो तुम्हें इस तरह के विषयों में बाहर कर देंगे। तो डीन का भी थोड़ी देर बाद फोन आया। तो मैं खुद शाम से बहुत घबराया हुआ हूं कि इन सब के चक्कर में मेरी जो रोजी रोटी है अभी क्या बोलते हैं स्वास्थ्य मेरा दो चार महीने से बहुत अच्छा नहीं रहा है तो मैं छुट्टी पे भी काफी रहा और इस स्थिति

00:59:01:01 में कहीं ना कहीं मानवीय तौर पे उन्होंने मुझे थोड़ी राहत दी थी पर इस तरह के विषय में जहां पे हालांकि मैंने किसी को कुछ गलत नहीं बोला है किसी के ऊपर ना ही गाली अपशब्द किसी को कुछ नहीं बोला है पर इस तरह के विषय में प्रचारित होना अनावश्यक तौर पे किसी संस्था के लिए अच्छा नहीं होता है मैं बता है क्या हम कल जहां तक है मुझे स्पष्टीकरण देना पड़ेगा मैं बाहर था तो मेरे पास मेरे सहकर्मी का फोन आया उन्होंने कहा कि भाई क्या हुआ तुम तो चर्चित हो गए ये सब क्या मैं घबरा गया मैंने क्या कुछ कर दिया तो उन्होंने लिंक भेजा तो देखा मैंने तो मेरा ऑडियो चल रहा था उन्होंने डाला है मालूम है मैंने मैसेज किया था स्वामी जी को तो वो बोले कि आपको यह पहले विचार करने करना चाहिए था तो मैंने कहा पहले विचार करना चाहिए था। स्वामी जी से मुझे लगा नहीं था कि इस तरह की छोटी बात को मतलब इतना दूर तक जाएगा। मतलब मेरी मेरी व्यक्तिगत भैया सही बता रहा हूं। ऐसी कोई भावना थी ही नहीं ना आपसे बात करके ना उनसे कि इस बात को इतना खींचा जाएगा। सही बता रहा हूं। मतलब मैं पोस्ट मैंने हटा दिया जो मैंने अभी हाल में ही एक पोस्ट डाला था। उनके उनके प्रति जो मेरी सद्भावनाएं थी कि

01:00:16:12 कल देखिए मैं किसी भी आचार्य का कितना भी सम्मान करता हूं भैया लेकिन मेरा जो घर है जो रोजीरोटी है वो मेरे परिश्रम से मिलेगी जहां पे मैं काम करता हूं वहां से मिलेगी है ना और कल को अगर मेरे हाथ से वो रोजी रोटी चली जाती है तो मैं भूखा रहूंगा वो स्वीकार है मुझे मेरा परिवार भूखा रहेगा मैं मुझे ऐड बता हूं। एक मिनट एक मिनट मैं ये बात पूरी कर लूं बस। जी जी तो भीष्म और कुंभकरण जी ये दोनों ही लोगों ने संबंध का निर्वाह करने के लिए सिद्धांत का त्याग किया। द्रोणाचार्य हम तो ये अधर्म के पक्षधर कहलाए। चलाया ना जी जी और प्रह्लाद और श्री राम जी इन्होंने सिद्धांत का निर्वाह किया संबंध का त्याग कर दिया जी अपने पिता की अब आज्ञा नहीं मानी ठीक है और ओम सिद्धांत नारायण का नाम जपेंगे तो जपेंगे तो ये हमारे आज आदर्श है तो आपसे गलती बस इतनी हुई है कि जब आप वहां गए हैं ना जी आप वाक पटु

01:01:31:15 भी हैं और मतलब आपके जो शब्दकोश है वह भी है आपके पास बोलने की क्षमता भी है परंतु आपने वहां संबंध का निर्वाह करने के लिए सिद्धांतों को गोली मार दी ये इससे ऐसा मत समझिए मैं आपको क्रिटिसाइज कर रहा हूं जी जी इस बात को अपने आत्मसात करिए चिंतन करिएगा आप वहां पे उसको रोक सकते थे उसने पता है वीडियो क्यों डाला उसने वीडियो इसलिए डाला है कि उसको जो उत्तर मुझे देने थे जो अलग से वो वीडियो बनाता उसने आपको आधार बना के वो उत्तर दे दिया। बिल्कुल हां वो मुझे भी ये महसूस हो रहा है कि मुझे महसूस हो रहा है चीज। हां और उसमें उसको कोई फायदा नहीं मिल रहा था आपकी आवाज डालने का। उसको ये होता है कि आप एक चीज और आपने नोटिस की क्या कि मैंने कितने सद्भावना से उनसे अपने भाव रखे। मतलब मैं कितने सद्भावना से उनसे भाव रख रहा हूं। लेकिन उसके बाद भी वो यह कह रहे हैं। यहां तक कि मैंने पता है जो मेरा एक विषय था जिसके चलते मैंने उनसे संपर्क किया था। वह जानने के लिए मैंने अपने वंशावली तक मैंने उनके साथ साझा की। ये मेरी वंशावली है। आप उसके बाद भी वो कह रहे हैं कि आपके

01:02:46:24 अतिरिक्त और लोगों ने 50-50 वीडियो की वंशावली की है। तो मैं ये कह रहा हूं मैं ये कह रहा हूं कि आपने उनसे ऐसी कौन सी बात कही है जिसके कारण आपकी वीडियो ऑडियो डालना आवश्यक था। बताइए मुझे वही नहीं समझ में आ रही ना भैया। कौन सी ऐसी बात कही? वो ऑडियो डालना आवश्यक इसलिए था। अब मैं आपको बता रहा हूं। उसको मुझे उत्तर आपको ही जवाब देना था। मुझे उत्तर देने थे। उत्तर देने के लिए उसको एक अलग से वीडियो बनाना पड़ता। अलग से मेहनत लगती। भूमिका बनानी पड़ती। यहां पे भूमिका बनी बनाई मैंने। हां। यहां क्या हुआ? वो प्रसंग छिड़ गया। आपसे बात करतेकरते उसने सब बोल डाला और वो उत्तर उसने डाल दिया। अब उसमें आप गेहूं की तरह पिस गए। मैंने 4:26 पे आज शाम को मैसेज किया। गुरुदेव सादर चरण स्पर्श शिवश नारायण के साथ चल रहे विवाद पर कुछ चर्चा करना है फोन पर। मैं किस समय आपको फोन कर सकता हूं? तो कोई उत्तर नहीं आया। हालांकि उनका उत्तर बहुत कम ही आता है। तो फिर मुझे लगा कि फोन लगाऊं। तो दो बार फोन लगाने के बाद तीसरी बार उन्होंने फोन उठाया। तो उसके बाद ही पूरी चर्चा हुई। चर्चा होने के बाद जब ये उन्होंने सार्वजनिक कर दिए तो मुझे पता भी नहीं था। मैं बाहर था तब मुझे पता लगा। तो मैंने उनको फिर से मैसेज किया गुरुदेव मेरी नौकरी चली जाएगी। मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था यह परिणाम

01:04:01:27 होगा मेरे विरोधियों के द्वारा। पूरे विभाग के लोग पहले से ही पीछे पड़े हैं। मेरा उद्देश्य आपसे वार्तालाप करने का था। आपके विरोध में अब ऐसी स्थिति बन गई है। मैं धर्म के पक्ष में श्रुदड़ हूं। लेकिन नौकरी के से हाथ धोने के के कारण मेरा परिवार रोड पर आ जाएगा। कृपा करिए गुरुदेव मेरी आपके प्रति कभी भी दुर्भावना नहीं रही है। ये सत्य है। मेरी कभी दुर्भावना उनके प्रति नहीं रही है। ना ही आपके प्रति रही है। तो उन्होंने कहा यह बात आपको पहले ही सोचनी चाहिए थी। उसी दुश्मन को फोन करने जा रहे हैं क्या? हां। यह बात आपको पहले से ही सोचनी थी और उसी अनुसार बताना था। मैंने कहा पिछले कई महीनों से स्वास्थ्य से परेशान हूं। मुझे पता नहीं था मेरे विरोधियों को यह मौका मिलेगा। गुरुदेव मेरी प्रार्थना है रिकॉर्डिंग को हटा दीजिए। मेरी दंडवत प्रार्थना है। मेरे ऊपर लोन चल रहा है। गुरुदेव नौकरी जाने पर आत्महत्या के अतिरिक्त कोई सहारा नहीं है। गुरुदेव क्योंकि मेरे परिवार में देखिए मैं ही आमदनी का स्रोत जो है मैं ही हूं। तो उन्होंने कहा यदि आपकी उन्होंने उत्तर दिया यदि आपकी पारिवारिक और आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय थी तो आपको यह सब में पड़ना ही नहीं था भाई। बताइए तो फिर मैंने कहा गुरुदेव आपके प्रति सद्भावना थी और कुछ नहीं गुरुदेव कभी मन क्रम वचन से मैंने अगर आपके प्रति दुर्भावना भी आया हो तो मेरे सभी पुण्यों का फल पाप में बदल जाए

01:05:17:10 और मैंने अपने प्रोफाइल का लिंक उनको दिया कि मैंने वो प्रोफाइल देख सकते थे कि मैंने कभी उनके विरोध में कभी ऐसा कुछ कहा ही नहीं है आज तक फिर उनका ऑडियो नोट आया और ऑडियो नोट नोट में उन्होंने कहा कि ये सब पहले सोचना चाहिए था। मैं आपको ऑडियो नोट सुना भी देता हूं। हम यही सब जो है ना बहुत समस्या हो जाती है। आप स्वयं से निर्णय ले लिए कि आपको शिवश से बात करनी है। आप स्वयं से निर्णय ले लिए कि आपको हमसे भी बात करनी है। आप स्वयं से निर्णय ले लिए कि आप सार्वजनिक कर दीजिए और आप आप ही अब निर्णय ले रहे हैं कि आप डिलीट की कर दीजिए। तो ऐसे कैसे चलेगा बताइए? समय निर्णय आप ही लीजिएगा। बताइए। फिर आप कहिएगा कि हम इसमें आंख से पलटेंगे नहीं। धोखा नहीं देंगे। एक घंटा भी नहीं हुआ और आपकी परिस्थिति के कारण आपकी यही स्थिति हो गई भविष्य में तो और भी स्थिति आपकी अगर कोई ब्लैकमेल करे और धमकी दे तो फिर आप जाइएगा वो बताइए अरे तो भैया सवाल ये है कि ऐसी क्या बात है इस रिकॉर्डिंग में जो आपको लोगों को बतानी है बताइए क्या आवश्यक बात है मुझे वही तो भैया ये चीज समझ में नहीं आई आप एक बात बताओ से चिंता में हूं आप एक बात बताओ

01:06:32:24 क्या इसको को आने वाले सभी फोन कॉल ये रिकॉर्ड करके डाल देता है। ये भी बिल्कुल सही कह रहे हैं। मतलब ऐसे कॉल्स आते होंगे ना जिनको ये रिकॉर्ड करके नहीं डालता होगा। हम तो इसका मतलब कोई ना कोई वजह होगी ना जो इसमें इसके कारण इसने डाला है और इसमें वजह एक ही है कि उसको जो मुझे उत्तर देने थे वो उत्तर उसने दे दिए। आपको देते हुए उसने रिकॉर्डिंग डाल और भी जानते हैं। उसके बाद भी मैं उनसे प्रार्थना ही कर रहा हूं। मैं आपको बता रहा हूं मैंने क्या मैसेज किया है। एक बात और कहूं गुरुदेव परिस्थिति कोई भी हो मैं आपके विपरीत नहीं जा सकता। मैंने उनको ये आश्वासन भी दिया। तो उन्होंने कहा कि समझने का प्रयास कीजिए। लिख करके बताया। मैंने कहा ठीक है गुरुदेव आपके शब्दों को उन सहमत हूं। मैं आपके साथ हूं। आप तो उन्होंने कहा आप ऐसे घबरा गए तो भविष्य में गृह युद्ध होने पर तो ऐसे ही बिनमारे बिनमारे मरेंगे आप अब एक बात बताइए गृह युद्ध तो ये भविष्य में होगा। वर्तमान की परिस्थिति जो आएगी मेरे ऊपर उसका सामना कौन करेगा? उसका सामना तो मैं ही ना करूंगा। हम और मैंने तो जो भावना रख के फोन किया था उसका उद्देश्य मेरा कोई निजी हित थोड़ी ना था भैया। ना आपसे बात करने का ना निग्रहचार्य जी से बात करने का। मेरा निजी हित हित या निजी कोई वो नहीं था।

01:07:47:25 मैं अपनी रोजी रोटी जो छोटी सी नौकरी है मेरी उससे संतुष्ट हूं मैं। सारा समय उसमें जाता है। थोड़ा बहुत समय मिलता है तो देश दुनिया देख लेता है इंसान। तो इससे मुझे अपनी भूमिका बनाने का ऐसा कोई उद्देश्य था ही नहीं। बस इतनी भावना थी कि ये जो विषय चल रहे हैं तो थोड़ा शांत होना चाहिए। इस उद्देश्य से मैंने इसीलिए आपका वो चेहरा मुझे याद आया कि आप एक अच्छे उद्देश्य से आए थे मगर आप फंस गए। भैया मैं एक चीज आपको कह रहा हूं कि बहुत अपार श्रद्धा मेरी लेकिन आज बहुत कष्ट हो रहा है। कष्ट इस बात से हो रहा है कि मेरा जब उद्देश्य गलत नहीं था तो उनको इस तरह सार्वजनिक नहीं करना चाहिए था। मतलब थोड़ा भाई क्या ऐसा करना चाहिए था? क्या ऐसा आपने कर दिया जिसको सार्वजनिक उसे करना ही था। हां जो डीन है हमारा तो उसने वह कल से फोन लगा रहा है। कल से तो फ़ उठाया नहीं मैंने। मेरे कलीग को उसने फोन लगा करके बोला तो मैं ऑफिस गया। मैं घर से ही काम कर रहा था। बहुत कष्ट हो रहा है भैया। बहुत कष्ट हो रहा है। सही बता रहा हूं। मुझे बहुत कष्ट हो रहा है। क्योंकि अब ऐसी स्थिति बन गई है ना कि मेरे पास लोन चल रहा है मेरा। मेरे परिवार की भी जिम्मेदारी मेरे ऊपर है। और इस परिस्थिति में मेरा स्वास्थ्य भी

01:09:02:28 कई महीनों से खराब चल रहा था। अब इस परिस्थिति में मैं कहां जाऊंगा? किसके पास जाऊंगा? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैं क्या करने आया था? क्या हो गया? आपने गलत व्यक्ति पर विश्वास किया और क्या बताऊं मैं आपको? [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 1:09:22 · 24 Sep 2025

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