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00:00:03:06 सभी को जय श्री राम। जिस प्रकार दूध से दही बन सकता है पर दही से दूध नहीं। उसी प्रकार भगवान विष्णु तो शिव बन सकते हैं। भगवान कृष्ण तो शिव बन सकते हैं। परंतु शिव जी कृष्ण नहीं बन सकते। इस के द्वारा प्रचारित की जाने वाली इस बात के आधार पर कई बार मेरे समक्ष इसन के समर्थकों को सांप सूख गया। जब मैंने इससे रिलेट करते हुए यह पूछा कि भाई ईश्वर यदि सर्वशक्तिमान है, पूर्ण है तो जब वह शिव बन रहे हैं तो क्या वह बाधित हो जा रहे हैं? जिसके कारण वह शिव से पुनः कृष्ण नहीं बन पा रहे हैं। दूध तो बाधित होता है। दही बनने के बाद भी बाधित होता है। जिस कारण से वह दही बनने के बाद पुनः अपने मूल स्वरूप में नहीं आ सकता है। तो आप दूध दही का एग्जांपल देकर के सिद्ध क्या करना चाहते हैं कि इस के द्वारा प्रतिपादित होने वाला जो ईश्वर है वह बाधित है। सर्वशक्तिमान नहीं है। सनातन नहीं है। शाश्वत नहीं है। और इस बात के आधार पर ही हमारे चैनल पर कई प्रकार की चर्चाएं पड़ी हुई
00:01:18:07 हैं जो आप देख सकते हैं कि किस तरीके से उनकी बोलती बंद हो जाती है जब यह वाला सवाल उनके सामने आता है। अब इस प्रकरण का आज के इस वीडियो से क्या संबंध है? मेरे बारे में एक मिथ्या फैलाई जा रही है कि मैं मां भगवती के अस्तित्व को नहीं मानता। उसे काल्पनिक कहता हूं। और सहानुभूति बटोरने के लिए यह अफवाह यह मिथ्या फैलाई जा रही है तथाकथित स्वषित आचार्य भागवतानंद के द्वारा तो भागवतानंद ने मिथ्या फैलाई कि भाई शिवश नारायण द्विवेदी हमारी देवी को काल्पनिक कह रहा है और उसने बहुत सारे प्रमाण दे दिए इस संबंध में कि भाई देखिए जो निग्रह देवी है उसका का वर्णन कहां-कहां पर है? शास्त्रों में वर्णित भगवती के किसी भी स्वरूप का मैंने कभी कोई खंडन किया ही नहीं। इस संबंध में मेरे पास एक फोन भी आया जो कि अभी रिकॉर्डिंग में आगे आप लोगों को सुनाने वाला हूं। क्या चर्चा हुई? पर क्या अगर मैं यह कहूंगा
00:02:33:10 कि इस का ईश्वर बाधित है या इस का ईश्वर तथाकथित है तो क्या उसमें भगवान श्री कृष्ण का खंडन माना जाएगा इसन के द्वारा पूजित होने वाला जो कृष्ण भगवान जो ईश्वर है जिसे वह कृष्ण का नाम दे रहे हैं तो क्या अगर मैं यह कहूंगा कि इस के द्वारा पूजित होने वाला जो ईश्वर है वह बाधित है तो इससे यह मान लिया दिया जाएगा कि मैं कृष्ण भगवान का खंडन कर रहा हूं। मोहम्मद के पास यदि कोई जिब्राइल नाम का संदेशवाहक आया और हमने मोहम्मद के अनुसार बताई गई जो कथा है उसके अनुसार उस संदेश वाहक का अस्तित्व नहीं स्वीकार किया और हमने कहा कि मोहम्मद के पास आने वाला जो संदेश वाहक है वह तथाकथित संदेश वाहक है और तथाकथित ईश्वर के द्वारा भेजा गया है। तो इसका अर्थ यह हो गया कि हम ईश्वर को मानते ही नहीं है या ईश्वर के संदेश वाहक को मानते ही नहीं है। रामपाल के पास जब हम लोग उसका विरोध करने गए थे तो जिस स्ट्रेटजी से स्कॉन अपने आप को सुरक्षित करने का प्रयास करता है। हमारा जब उसके पास उत्तर नहीं होता है तो हमें कहता है
00:03:48:14 कि तुम कृष्ण द्रोही हो। कृष्ण द्रोही क्योंकि हमने इस के द्वारा पूजित होने वाले ईश्वर में दोष बताए कि वह सनातन ईश्वर नहीं है। वह सर्वशक्तिमान ईश्वर नहीं है। तो इसलिए वो हमको कृष्ण कृष्ण द्रोही कहेगा। उसी प्रकार से जब हम सनातन से मिलताजुलता या सनातन का नाम लेकर अपना मनगढ़ंत ताना बाना बुने बुनने वाले रामपाल का विरोध करने गए और हमने यह कहा कि तुम हमारी मां का अपमान कर रहे हो भगवती का अपमान कर रहे हो तो वो वहां क्या बोल रहे हैं कि हमारी मां नहीं है क्या वो ये बोल रहे हैं तो इसका अर्थ क्या हुआ कि ये लोग सनातन से मिलते जुलते नाम इत्यादि लेकर के अपनी कहानियां गढ़ते हैं। उन कहानियों का जब खंडन होता है तो यह सहानुभूति बटोरने के लिए अपना ग्रुपिज्म बढ़ाने के लिए अपने समूह संख्या अपनी संख्या को बढ़ाने के लिए अपना संख्या बल बढ़ाने के लिए किन चीज किन बातों का सहारा लेते हैं? देखो देखो उसने तो हमारे हमारे जो है वेद शास्त्रों का खंडन कर दिया। क्यों? क्योंकि हमने उसकी तथाकथित गंदी और अश्लील किताबों को गलत कहा। ये तुम्हारे धर्म ग्रंथ नहीं है। ये तो अश्लील किताबें
00:05:03:25 इनको फाड़ के फेंक देना चाहिए। तो देखो देखो भगवान का अपमान कर दिया। क्या उसमें कृष्ण की बातें नहीं लिखी है? क्या उसमें भगवान की बातें नहीं लिखी है? लिखी हैं। मगर उसके साथ-साथ ऐसा जहर तुमने लिखा है अपना मनगढ़न जिसके कारण वो जहर उस पर ऐसा हावी हो रहा है उसमें भगवान कृष्ण के नाम के साथ कि वो जहर बनके बाहर समाज को दूषित कर रहा है। विषाक्त बना रहा है वहां पर वो। और यही कार्य इस वाले करते हैं। अगर हम इस का विरोध कर रहे हैं तो भगवान के द्रोही हो गए। कृष्ण के द्रोही हो गए। और यही कार्य यही इस की स्ट्रेटजी यही रामपाल की स्ट्रेटजी अब आपके जो तथाकथित प्रामाणिक लक्षण संपन्न जो आचार्य जी हैं बाबा जी सांप वाले उन्होंने अब इसको अपना लिया। उन्होंने क्या अपना लिया कि भैया जो है देखो देखो शिवश नारायण द्विवेदी हमारी देवी को काल्पनिक कह रहा है तथाकथित कह रहा है। क्या मैंने वहां पर कभी भी उस देवी का नाम लेते हुए यह कहा कि अमुक अमुक शास्त्रों में वर्णित देवी काल्पनिक है? नहीं। मैंने उस देवी को काल्पनिक कहा जिसके द्वारा झूठा वरदान दिए जाने की कथा सुनाकर
00:06:19:15 यह लोगों का समर्थन बटोरता है। झूठा वरदान कैसे? इसके अनुसार देवी ने इसको वरदान दिया है कि इसकी कर्मेंद्रियों से गलती नहीं होगी। होने वाली होगी तो इसका बुद्धि और विवेक उसका निग्रह कर लेगा। उसके बाद भी इसके जीवा से वाकस्लन होता है। उसके बाद भी यह गलती से टिप्पणियां कर देता है। पोस्ट डाल देता है। उसके बाद उसको हटा लेता है। हम और उसमें अपना पौरुष का दोष भी इसने स्वीकार किया। अरे भैया जब तुमको वरदान प्राप्त है कि तुमसे पौरुष्य का दोष नहीं होगा तुम्हारी कर्मेंद्रियों से गलती नहीं होगी तो गलत असत्य भाषण क्यों निकल रहा है तो इसका अर्थ है भगवती का वरदान झूठा है इस इसको आधार बनाते हुए और भी कई सारे मामले हैं जो हमने यह जो निग्रह निकासिका लिखी है इसमें हमने वह सारी बातें सारे प्रश्न उठाए इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए हम यह कहते हैं कि भागवतानंद के पास आने वाली तथाकथित देवी काल्पनिक देवी तो इसका अर्थ यह नहीं है कि हम जो है वो जिस जिस नाम से यह बता रहा है लोगों में कि मैं इसकी पूजा करता हूं वो काल्पनिक है।
00:07:35:03 पूजा करता है कि नहीं करता है यह भी डाउटफुल है ना भाई वो तो वो बता रहा है कि मैं करता हूं। वो कितनी करता है कितनी नहीं करता है वो भी विचार का विषय है क्योंकि वो तो कालिया जिनकी पूजा भी करता है। परी साधना भी करता है करवाता है। उसने बोला है कि मुझे आवश्यकता थी तो मैं गया था। मैंने बात की थी। उसने बोला है कि मेरे पास समय नहीं था इसलिए मैं नहीं कर पाया। अब भले ही वह इस बात का डंका पीटता रहे कि मैंने कभी नहीं की कालिया जिनोपरी साधना की पूजा। तो भाई वो तो आंतरिक विषय है कि यह करता है कि नहीं करता। इसलिए कम से कम इस बात को तो कहना पड़ेगा कि कम से कम बताता तो है कि मैं अमुक अमुक देवी की पूजा करता हूं। जिसको शिवांश जो है नकार रहा है। काल्पनिक कह रहा है। नहीं। जिस प्रकार मैं इस के ईश्वर को काल्पनिक कह रहा हूं, बाधित कह रहा हूं या वह जो संदेश वाहक है वो जो शांतिप्रिय मजहब वाला उसके संदेशवाहक को यदि मैं काल्पनिक कह रहा हूं, तथाकथित कह रहा हूं या फिर मैं रामपाल के ग्रंथों को तथाकथित और काल्पनिक कह रहा हूं तो इसका मतलब यह नहीं है कि मैं कृष्ण का खंडन कर रहा हूं या मैं ईश्वर का खंडन कर रहा हूं या मैं शास्त्रों का खंडन कर रहा हूं। शास्त्रों के नाम पर तथाकथित गढ़े गए झूठे झूठी किताबों का खंडन कर रहा हूं।
00:08:50:19 ईश्वर के नाम पर गढ़े गए तथाकथित संदेश वाक का खंडन कर रहा हूं। और इसी प्रकार से सनातन कृष्ण के नाम पर गढ़े गए तथाकथित बाधित ईश्वर का खंडन कर रहा हूं। और उसी प्रकार से मां भगवती के नाम पर मां भगवती के नाम पर गढ़ी गई तथाकथित झूठा वरदान देने वाली एक देवी की कहानी और उसमें देवी के रूप में उपस्थित पात्र का खंडन कर रहा हूं और तब मैं उस पर कटाक्ष करते हुए कहता हूं कि वह तथाकथित है। तो
00:09:27:22 यह स्ट्रेटजी है ही है कि पूरा कॉपीकैट है। बस अपने आप को वर्णाश्रमी इसने कह दिया है। परंपरा को मानने का दावा तो है मगर परंपरा से संबंधित जो तार्किक प्रश्न है उस पर स्वयं ही उसका उसको जो है ध्वस्त करता है कि हम जो है जिस आचार्य से हमें ज्ञान मिला है उसका भी निग्रह कर देंगे। जिस आचार्य से हमें जिस आचार्य से हमें ग्रंथ प्राप्त हुए हैं हम उनका भी निग्रह कर देंगे। तो अभी पहले स्कॉन इत्यादि के रूप में हमारे जो सनातन है उसकी उसको क्षति पहुंचाने का कार्य किया गया। अब जो है जब सनात इनसे काम नहीं चला है इस आर्य समाज ब्रह्माकुमारी से तो अब एक नए रूप में आएगा भाई सनातनावास किस रूप में आएगा कि हम भैया हम तो वर्णाश्रमी भी हैं लो अब हम परंपराओं को नष्ट करेंगे इसके अन्य ऐसे और भी विरोधी हैं जो कॉल परंपरा से हैं और जो उनमें से कई इसके पहले समर्थक भी रह चुके हैं। क्या वह भगवती की उपासना नहीं करते? उसी भगवती की उपासना नहीं करते जिसकी यह करते हैं। परंतु जब वह इसको उत्तर देते हैं तो यह वहां भी सहानुभूति बटोरने लगता है कि भैया देखो देखो देवी को काल्पनिक कह दिया तथाकथित कह दिया। तो इस बात को आप ध्यान रखें। प्रबुद्ध जनों से बात कर रहा हूं। अंधे
00:10:43:03 लोगों से बात नहीं कर रहा हूं। एक अंधा आया था बृजेश करके नाम था उसका। वो देख लो। वो कह रहा था कि भैया मैं मानूंगा ही नहीं कोई भी बात। उसने गाली दी है कि दी नहीं दी है यह भी नहीं मानूंगा। उसने किसी को कालियन की पूजा बताई है कि नहीं बताई है ये भी नहीं मानूंगा। परंतु उसके द्वारा उठाए गए सभी केवल कथन मान्य है कि अमुक ने व्यभचार किया, अमुक ने वैश्या गमन किया, अमुक ने जो है वो वैश्या है वो सब मान लेंगे। केवल उसकी कथनी के कारण यही है उसकी शास्त्र सम्मत कथनी। तो ऐसा एक आया था। तो मैं प्रबुद्ध जनों से कर कह रहा हूं कि आप थोड़ा बुद्धि और विवेक से निर्णय लें। अपने उसके द्वारा प्रायोजित जो कार्यक्रम चल रहे हैं यह यह वाले सब जिसमें वह सहानुभूति बटोरने के लिए हमारे बारे में मिथ्या प्रचार कर रहा है। उनसे प्रभावित होने से पहले अपने बुद्धि और विवेक के द्वारा निर्णय लें। जय श्री राम।
00:11:40:14 क्या भागवतानंद को समर्थन कर रहे हैं? नहीं मैं समर्थन वो नहीं कर रहा। आपने वहां पे टिप्पणियां दी है ना लंबी-लंबी। जी जी हां तो बताइए समर्थन कर रहे हैं तो आप चर्चा कर लीजिए आ के सामने तो समर्थन कहने का मतलब कि मैं ये कह रहा हूं हम कि उन्होंने जो भी मतलब अभी तक जितना मैंने देखा है ठीक है हम उन्होंने जो भी उपदेश किए हैं या किसी उपदेश तो उपदेश तो अमुक अमुक अंशों में इस वाले भी करते हैं जो सही होते हैं। नहीं वो सही नहीं बोल रहे हैं। कहीं हमारा उनको सुनिए आप देखिए बात को या तो समझे नहीं है या समझकर भी अनजान बन रहे हैं। क्या हमारा उनसे रामचरितमानस के पाठ करने पर विवाद है? नहीं है। तो फिर आप यह बात बता क्यों रहे हैं हमें कि आप उनके उपदेशों को समर्थन करते हैं। दुनिया में कौन है जो वेद संवत वाणी बोलेगा और हम उसका हम उसका समर्थन नहीं कर रहे हैं। वो विरोध जैसे इस का आपका जो विरोध विरोध है। तो इस जितने अंश में वेद संवत बात कर रहा है उतने उतने अंश में हमने उसका विरोध किया है क्या? मैं मैं क्या कह रहा हूं कि इस कौन जिन बातों को कहता है मतलब जो विरोधी बातें कहते हैं उसका आप विरोध करते हैं। ठीक है तो विरोधी
00:12:55:18 बातें क्या करता है? जैसे वर्णाश्रम धर्म पे उसका विरोध है। विरोधी बात यह करता है कि वह परंपरा से प्राप्त जो सिद्धांत हैं आचार्यों द्वारा दिए गए उन पर विरोध कर रहा है आचार्यों का। धर्म अधर्म के विषय में आचार्यों के ऊपर जाकर के अपनी व्याख्या लगाते हुए आचार्यों को गलत साबित कर रहा है। जी बिल्कुल ठीक है। तो ये ये चीज तो क्या कहते हैं कि जैसे कि बुद्ध के विषय में शबरी के विषय में उसने परंपरा प्राप्त आचार्यों का खंडन किस आधार पर किया? किसको इस किसने? किसकी पूछ रहे हैं कि वो क्या वर्णाश्रम का विरोध कर रहा है? आप किसके बारे में पूछ रहे हैं? जी क्या कौन तो विरोध करता है श्री भगवतानंद गुरु जो है ठीक है वो तो इन सब विषयों में क्या कहते हैं कि नहीं तो इन मैंने उन सब विषयों में थोड़ी ना हमारा विवाद है उनसे आपको विवाद मालूम होना चाहिए जब आप वहां टिप्पणी कर रहे हैं नहीं मैं वहां पे जो मतलब प्रकरण देख रहा हूं आप प्रकरण को पूरा समझिए भागवतानंद स्वयं को निग्रहचार्य बोलता है तो सबसे पहला प्रकरण यह हो गया कि उसकी गुरु परंपरा क्या है जी तो आपने जो प्रश्न किया है ठीक है गुरु परंपरा के देखिए मैं अगर इस संबंध में अगर आप सुनिए देखिए
00:14:11:10 पहला आपने कहा कि मैं उनका समर्थन इसलिए करता हूं कि उनके उपदेश जो होते हैं वह शास्त्रीय होते हैं। तो मैंने आपकी गलतफहमी को दूर किया कि हम उपदेश के निमित्त यदि जो उसके उपदेश जो शास्त्रीय होते हैं तो उसके निमित्त मेरे उसमें विवाद नहीं है। ना उसको मुझसे कोई आपत्ति है ना हमको उससे कोई आपत्ति है। विवाद किन बातों पर है कि तुम स्वयं को परंपरा प्राप्त आचार्य कह रहे हो एक अलग से हम संप्रदाय बताते हुए निग्रहाचार्य तो यह संप्रदाय काल्पनिक है यह हमारा क्लेम है उसका क्लेम है काल्पनिक नहीं है इसको लेकर विवाद है सुनिए अब यह भी ना होता यह भी ना होता यदि वह परंपरा प्राप्त आचार्यों के ऊपर शासन करने ना लगता शासन करने का प्रयास ना कर रहा होता भाई जब आप परंपरा प्राप्त आचार्यों पर धर्म और अधर्म के विषय में व्याख्या उनकी की हुई व्याख्या पर उंगली उठाओगे तो फिर आपकी प्रामाणिकता पूछी जाएगी ना कि जिन शास्त्रों को का संदर्भ लेते हुए आप खंडन करने का प्रयास कर रहे हो वो शास्त्र आपको कैसे मिले किस परंपरा के आचार्यों द्वारा आप तक पहुंचे वह शास्त्र
00:15:26:28 यह प्रश्न उठेगा तो तो यह जो दो विषय दो विषय हो गए कि आपने जब यह कमर कसी है कि हम कंट्रोलिंग बोर्ड हैं सभी संप्रदायों के तो फिर आपको अपने संप्रदाय की प्रामाणिकता सिद्ध करनी होगी। नहीं तो यदि आप यदि आप अपने वर्णाश्रम धर्म की रक्षा कर रहे हैं। आप जो है धर्म धर्म धर्म और ब्रह्म में परंपरागत जो प्रामाणिक आचार्य हैं उनके विरुद्ध नहीं है तो आप आराम से करिए। हम नहीं बोलने जाएंगे। मगर जब आप निग्रह करने निकलेंगे कंट्रोलिंग बोर्ड बनने निकलेंगे तो आपकी प्रमाणिकता हम पूछ लेंगे आपसे पहली बात दूसरी दूसरा हमारा जो विवाद है वह है असिद्ध आरोप लगाना किसी स्त्री को बिना किसी प्रत्यक्ष प्रमाण के ठोस प्रमाण के वैश्या कहना किसी पुरुष को वैश्यागामी कहना भाई-बहन क्या जहां पर पवित्र संबंध है वहां पर अनैतिक संबंध होने का आरोप लगाना इसको इन सब विषयों में आपको कह रहा हूं इन सब सुनिए इन सब विषयों में इन दो विषयों में हमारा उससे विवाद है। तो आपने जो कहा ना अब मैं मैं आपको मैं आपको मैं आपको मैं आपको मूल विषय पे लाके ही छोडूंगा।
00:16:42:16 इन दो विषय बता रहा हूं कि मैं मैं आपको ला रहा हूं। तो मेरा इन दो विषयों पर उससे विवाद है। अब यदि इन दो विषयों में आपकी गति है उसके पक्ष में तो आप आ जाइए। हम लोग लाइव चर्चा कर लेंगे और इधर-उधर की बातें करने से कोई मतलब नहीं है। अब आप बताइए तो देखिए ये जो दो बातें बोले ना ठीक है एक जो उन्होंने मतलब जो दूसरा आरोप आपने लगाया कि किसी के ऊपर व्यक्तिगत टिप्पणी करने का ठीक है असिद्ध आरोप व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं है आप टिप्पणी भी करिए वो बाद की बात है मगर असिद्ध ना करिए ना आप किसी को अगर वैश्या कह रहे हैं तो आप उसका दिखाइए प्रमाण कहां उसने वैश्या गमन किया और कहां उसने वैश्या वाले आचरण किए तो तो जो असिद्ध आरोप आप बोले ना उसके ऊपर तो मैंने कुछ बोला नहीं है नहीं तो भाई आप क्यों बोल रहे हैं आप आप मेरी बात समझिए मेरी बात वहां पे क्या चल रहा था आप देखिए मेरी बात आप समझिए आप जब सुनिए मैं आप विवाद को जब जान नहीं रहे हैं तो फिर आप वो मत बोलिए फिर नहीं नहीं मैं जो कह रहा हूं सुनिए आपने बोला कि देवी काल्पनिक है मैंने कहां पे बोला है देवी काल्पनिक है एक वीडियो दिखाओ देवी काल्पनिक है आपके वीडियो में तो है ना कि देवीन कहां पे मैंने बोला देवी काल्पनिक है उसको
00:17:57:22 जो वरदान देने आ रही है शक्ति यदि वह कोई है वो काल्पनिक है वो वो जिन देवी का नाम दे रहे हैं वो तो नाम मैंने नाम लेकर कहा है क्या ये निग्रह देवी काल्पनिक है नहीं नहीं आपने नहीं कहा है लेकिन वो जो कह रहे हैं कि तो आप पहले मेरे पक्ष को जानिए आपने कैसे कह दिया मैंने देवी काल्पनिक है आपने बोला ना कि वो जो जिस देवी को कह रही है वो देवी काल्पनिक है मैंने यह कहा है कि वो अगर कोई शक्ति उसको आकर दे रही है मंत्र अगर अगर कोई शक्ति उसको आकर के वरदान दे रही है तो वह काल्पनिक है क्योंकि हमारी जो देवी है जो वास्तविकता में जो देवी हैं जिनका शास्त्रों में वर्णन है वो झूठा वरदान थोड़ी ना देंगी उसका वरदान तो झूठा सिद्ध हो रहा है। उसकी परंपरा झूठी सिद्ध हो रही है। तो देवी ऐसे गालीबाज व्यक्ति को असिद्ध आरोप लगाने वाले अशास्त्रीय व्यक्ति को ऐसा वरद झूठ वरदान नहीं देगी और वरदान देगी तो कम से कम झूठा नहीं देगी। अगर वह है कोई शक्ति तो फिर वह देवी नहीं है। तो हम कह रहे हैं कि यह कपोल कल्पना है। जैसे कि मोहम्मद कहना मोहम्मद का कहना है कि उसके पास ईश्वर का भेजा गया संदेश-वाहक आया। मैसेज देने के लिए।
00:19:13:03 सुन लीजिए। सुन लीजिए उदाहरण दे रहा हूं। मोहम्मद के पास ईश्वर का भेजा गया कोई मैसेंजर आया। अब भैया मोहम्मद ने हमको बताया तो हम उस मैसेंजर को काल तथाकथित कपोल कल्पित कहेंगे या क्या कहेंगे? अब अगर हमने अगर हमने कह दिया कि वह कपोल कल्पित है तो इसका मतलब हम यह मानते हैं कि ईश्वर का कोई मैसेंजर होता ही नहीं है। ईश्वर का कोई दूत होता ही नहीं है या ईश्वरी एक मिनट या ईश्वर होता ही नहीं है। हमने कहा कि वो जो कहानी कर रहा है उस कहानी के अनुसार जो मैसेंजर है, उस कहानी के अनुसार जो ईश्वर है वो काल्पनिक है। हमने ईश्वर को या उसके मैसेंजर को काल्पनिक नहीं कहा है। तो आपके कमेंट सेक्शन में जो चल रहा था जैसे वो देवी पर ही कमेंट चल रहा था। आपने देखिए पहला कमेंट तो आपने स्वतंत्र किया है। जी पहला तो फिर आप यह मत कहिए कि आपके कमेंट सेक्शन में क्या चल रहा था? वीडियो में इस वीडियो में किया है ना वीडियो में क्या तो उस वीडियो में हमने कौन से वक्तव्य में कहा है कि देवी काल्पनिक है बताइए। उसकी बातों में आकर के आप जैसे लोग प्रबुद्ध जन भी गुमराह होते हैं। हमने कभी नहीं कहा कि जो ये निग्रह जो जिनका शास्त्रों में वर्णन है वह भगवती हमारी काल्पनिक है। नहीं हमने कहा वो जो कहानी गढ़ता
00:20:28:04 है कि हमको देवी ने आकर के दिया वो कोई देवी नहीं होगी। वो परी होगी। ये कटाक्ष है उसके ऊपर क्योंकि उसका वरदान झूठा सिद्ध होता है। वो कहता है कि मुझे वरदान मिला है कि मेरा जो है मेरे मेरी कर्मेंद्रिय कर्मेंद्रियों से अगर कोई गलती होने वाली होगी तो मेरा बुद्धि विवेक उसका उसको कंट्रोल कर लेगा। नहीं होने देगा गलती। ठीक? उसके बाद उसने हमारे बारे में अह विजयश्री के बारे में अन्य-अ लोगों के बारे में कई बार एक बातें बोली हैं जो उसने बाद में कहा कि वह गलत हो गया था। मुंह से निकल गया था। वाहक स््स्खलन हो गया था। तो वाक्य स्कलन कैसे हो गया जब देवी देवी ने वरदान दिया है तो। जीवा एक कर्मेंद्रिय है ना। जी बिल्कुल मैं आपकी बात को समझ गया। आप देखिए मैं मैं आपको मतलब यही बता रहा हूं। तो ये गलत गलतफहमियों को दूर करिए। हम कोई सुनिए गलतफहमियों को गलतफहमियों को सुनिए सुनिए उन्होंने जब कहा कि देवी उनको क्या कहते हैं वरदान दी या फिर दर्शन दी ठीक है तो इसको तो मैं पुष्ट नहीं कर सकता हूं वो तो या तो देवी पुष्ट कर सकती है या वो पुष्ट कर सकते हैं मैं ये नहीं कह रहा हूं आप लेकिन मेरी बात सुनिए मेरी बात सुनिए मैं ये नहीं कह रहा हूं आप अपनी गलतफहमियों को सही करने नहीं मैं आपको बता रहा हूं वो सुनिए
00:21:43:22 कि वो जिस देवी के बारे में बता रहे हैं उस देवी के और भी उपासक हैं। उस देवी को हमने काल्पनिक नहीं कहा है भाई। क्यों खींच रहे हो उस बात को? अरे मेरी बात को पूरे पूरी सुनिएगा। पूरा करने दीजिएगा। उस देवी के और भी जो उपासक हैं उनका जो अनुभव रहा है और ये जो अपना अनुभव बताते हैं एकदम समान है। इस वजह से मैं कह रहा हूं। एकदम समान होने की वजह से हम लोग ये मान ले कि देवी ने उनको वरदान दिया। भले ही वरदान झूठा सिद्ध हो रहा है। वरदान झूठा सिद्ध हो रहा है। ये तो आप कह रहे हैं ना। आप बता दीजिए मुझे उसकी जीवा से गलत निकला है कि नहीं निकला है बताइए निकला है कि नहीं निकला उसने खुद स्वीकार किया वहां स्ख्खलन हो गया था वाह का स्कलन तो वो क्या कहते हैं कि इस अनुभव में तो कभी हम देखे नहीं है आप देखिए पहले नहीं अब एक मिनट रुको भाई इतना समय नहीं है मेरे पास एक-एक व्यक्ति के साथ मगजमारी करने के लिए अगर आपको वाहक स्कलन वाला संदर्भ नहीं पता है तो पहले जाके देख लो शॉट पड़ा हुआ है आपको मैं अभी WhatsApp आपको मैं अभी WhatsApp कर रहा हूं। भाई बोल रहे हैं। मैं अभी आपको WhatsApp कर रहा हूं। उसने स्वीकार किया मेरे वसे वाक स्कलन हो गया होगा। वाक स्कलन हो गया था और एक बार नहीं छह-छह बार 10-10 बार
00:22:58:26 वाक्यस्कलन हुआ है। यह कैसा वरदान है देवी का? जो उसकी कर्मेंद्र का निग्रह नहीं हो रहा है। जबकि उसने बताया कि मुझे वरदान मिला है देवी से कि भैया मेरी मेरी कर्मेंद्रियों से अगर कोई गलती होने वाली होगी तो मेरे बुद्धि विवेक उसको निग्रह कर लेगा। कंट्रोल कर लेगा उसे रोक लेगा। यानी उससे गलती नहीं होनी है। यह उसको वरदान मिला है। तो वाकलन का जहां तक वो जब भी बोले हैं ना तो वो इस संदर्भ में नहीं बोले हैं। अरे किस संदर्भ में बोले हैं? ठीक है आप वीडियो भेजिए और जिस तो इसीलिए मैं कह रहा हूं इसीलिए कह रहा हूं कि आप सुनिए आप पहले पूरी जानकारी कर लीजिए उसके बाद आप किसी के पक्ष और किसी के विपक्ष में खड़े होइए। आपको ना तो यह पता है कि हम उसके द्वारा जो जिस देवी का नाम लिया जा रहा है उसको काल्पनिक कह रहे हैं। अब कोई व्यक्ति कह रहा है कि भाई मेरे पास ईश्वर ईश्वर आए थे। तो हम ईश्वर का ही खंडन थोड़ी ना कर रहे हैं। हम तो यह कह रहे हैं कि वह जो कल्पना के जो कहानी कर रहा है वह ईश्वर काल्पनिक है। हम ईश्वर का ही खंडन थोड़ी ना कर दे रहे हैं। नहीं तो आप तो आप यह बोलिए ना कि वो झूठ बोल रहे हैं। वो मतलब हम यही बोल रहे हैं और फिर कटाक्ष के रूप में कह रहे हैं। वो तथाकथित
00:24:14:04 देवी है। तथाकथित देवी मतलब जो देवी जो देवी उसको वरदान दे रही है वो तथाकथित है। क्योंकि वो वरदान झूठा सिद्ध हो रहा है। नहीं आप यह बोलिए हमने नाम लेकर के कहीं पर भी नहीं कहा कि अमुक अमुक नाम की जो देवी है वो काल्पनिक है। आपको आपको एक काम करना चाहिए कि जब भी आप इस चीज का मतलब संदर्भ दें तो आप ऐसा है मैं कुछ भी कर लूंगा मगर मगर मैं कुछ भी करिए सुन लीजिए। आप आप मुझे यह राय दे रहे हैं। आपको एक काम करना चाहिए। मैं कुछ भी कर लूंगा फिर भी जब तक मेरे पक्ष को पूरी तरह से व्यक्ति ने देखा नहीं होगा तो वह इसी तरह से गलतफहमी का शिकार होगा। तो आप पहले पूरा पक्ष देखिए जाकर के हमारा क्या पक्ष है। जब वह उसको वरदान मिला है अगर देवी ने आकर के वरदान दिया तो हमारी हमारी सुन अरे भैया जितनी बार मैं बोलता हूं उतनी बार आप कुछ ना कुछ ना कुछ कर देते हैं। नहीं नहीं तो आप बोलिए उनको कि मतलब मैं बोलूंगा अभी अभी मैंने आपकी बात सुन ली मैं आपकी बात का उत्तर दे रहा हूं। हां जो आप यह बोलिए ना आपने मुझे हिदायत दे दी है वो हिदायत मैंने सुन ली है भाई साहब आपका परामर्श मैं सुन लिया है अब आपको मैं प्रतिक्रिया दे रहा हूं जी जो देवी की बात वो कर रहा है
00:25:29:08 वो काल्पनिक इसलिए है कि हमारी देवी झूठा वरदान नहीं देगी हमारी देवी एक गालीबाज अ अरे भैया मेरी बात पूरी हो जाने दिया करो जो देवी जो हमारी देवी है। वह एक गालीबाज असिद्ध आरोप लगाने वाले को और स्वगोषित आचार्य को वरदान नहीं देगी। यह मेरा पक्ष है। तो मैं यह कहता हूं कि उसके द्वारा वर्णित कथा के अनुसार जो शक्ति है वह काल्पनिक है। जिसको वो देवी कहता है। देखिए और अगर आपको मेरा पक्ष पूरा नहीं पता है तो पहले जाके पक्ष पूरा देखिए। अभी आप शुरू में क्या कह रहे थे कि आपने तो देवी को काल्पनिक कहा। एक जगह बता दो जहां मैंने काल्पनिक कहा हो। आप वही कह रहे हैं ना कोई आदमी बोले कि हमको हनुमान जी वरदान दिए तो हम यही कहेंगे ना कि नहीं वो हनुमान जी नहीं है तुम झूठ बोल रहे हो तो हनुमान जी नहीं है तो ऐसे ही बोला है मैंने यही बोला सीधा यही सीधा यही यही सीधा यही बोला है क्या चेक करो मेरा वीडियो जो देवी के बारे में मैंने क्या कहा सीधा यही बोला है सीधा यही बोला है नहीं आपने बोला है वो देवी काल्पनिक है आपने बोला बोला है बताओ मुझे कौन सा वीडियो बोला है देवी काल्पनिक है अभी तो बोल रहे हैं अभी तो बोल रहे हैं अभी मैं बोल रहा हूं कि जो जिस कथा के अनुसार वो बात कर
00:26:44:09 रहा है उस कथा में भागवतारण के अनुसार जो उसको वरदान देने वाली जो शक्ति है वो काल्पनिक है अगर वो उसको देवी कह रहा है तो वो देवी काल्पनिक है झूठी है वो वो देवी नहीं है हमारी आपको कुछ अता ना पता चले आए हम पक्ष में खड़े होंगे हम यहां खड़े होंगे हम वहां खड़े होंगे पहले पता करिए जाके देखिए नहीं पता का बात नहीं आप जो है ना वो मतलब इतना आप द्वेष से भरे हुए हैं कि बात ही नहीं सुन आप आप सुनिए मैं द्वेष से इसलिए भरा हुआ हूं क्योंकि पहली बात तो यह है कि आपको जब पता नहीं था शुरू में आपके क्लेम कुछ और थे फिर आपने कहा हमने देखा नहीं वीडियो
00:27:25:15 जितनी बार मैं तर्कसंगत बात करने चलूंगा उतनी बार से बीच में बोलेंगे नहीं नहीं आप आप बोल रहे हैं देवी काल्पनिक आप बोलिए कि आप जिसको देने वाली जो के रूप में आने वाली देवी है वो काल्पनिक है। वो झूठी है। आप यह बोलिए नहीं आप यह बोलिए तो बोलिए हमने सब बोला है। आप जा के देखिए महाराज हमने सब बोला है। हमने यह भी बोला है। आप जाकर के देखिए। आप जाकर के देखिए। हमने सब बोला है। आप केवल भागवतंद की बातों को सुनकर यहां आए हैं। आपने अभी कहा थोड़ी देर पहले मैं वाक्य स्कलन वाला मामला नहीं देखा है। पहले देखिए जाकर। मैंने देखा है। वाकलन वाला मामला पूरी तरह से देखा है। क्यों मुझे वीडियो नहीं आपने क्यों कहा मुझे वीडियो भेजिए मैंने आपसे इसलिए कहा कि आप भेजिए ना आपका भी आपने अपने से कहा मैंने वाला वीडियो नहीं देखा है मैंने देखा है वाला वीडियो आपने क्यों कहा नहीं देखा है मैं इस रिकॉर्डिंग को मैं इस रिकॉर्डिंग को डालूंगा उसको रिपीट कर करके आप देख लीजिएगा आप डालिए आप आप देख लीजिएगा आपने कहा है कि नहीं ठीक है जब पूरा मामला मालूम ना हो तो मत बोला करो मैंने ये नहीं कहा है नहीं आपको नहीं मालूम है मैंने कभी कभी भी सुनो
00:28:40:19 सुन लो आखरी बात मैं दोबारा बता दूं आपकी गलतफहमी को मैं दूर कर दूं मैंने कभी भी जो हमारे शास्त्रों में वर्णन है जिनकी आप बात कर रहे हैं कि अन्य उपासक भी है उस देवी को काल्पनिक नहीं कहा है भागवतानंद की कथा को काल्पनिक कहा है उसे वरदान देने अरे यार कितनी बार बोलने जाता हूं बीच में बोलते हो अरे तो आप सुनिए ना भागवतानंद के भागवतानंद की कथा को काल्पनिक कहा है भागवत ान ंद की कथा में आने वाली जो शक्ति है जो देवी जिसे वो कह रहा है उसको काल्पनिक कहा है और आगे भी कहूंगा आप आप ये कह रहे हैं कि नाम ले रहे हैं वो देवी काल्पनिक आप यही कह रहे हैं भागवतंद को वरदान देने वाली जो शक्ति है और जिसे वो देवी कह रहा है अमुक अमुक वो शक्ति काल्पनिक है हम ये कह रहे हैं तो तो जिसका वो नाम ले रहे हैं वो देवी है या नहीं है पहले ये बताइए वो देवी है बिल्कुल शास्त्रों में है मगर उसका वर्णन तो क्यों नहीं मानेंगे भाई तो आप आप ये बोलिए ना कि वो झूठ बोल रहे हैं। आप हमें मत बताइए। आप जाइए यहां से आपको समझना नहीं है कुछ भी। चलिए देखिए कुछ गलतफहमी हो रही है। आप संभवत इसलिए वहां खड़े हो रहे हैं सामने क्योंकि आपको ऐसा लग रहा है कि हम उन देवी का खंडन करते हैं जिनका शास्त्रों में
00:29:55:22 वर्णन है। हम उन देवी का खंडन मैं आपकी गलतफहमी दूर कर दे रहा हूं। हम उन देवी का खंडन नहीं करते हैं। यदि आपको मेरे किसी शब्द से ऐसा लगा है तो वह उसके लिए आप मेरा और वीडियोस को देख लीजिए। हमने भाई देखा हर बार मेरी बात मैं मैं आपकी बात सुन लूंगा। एक मिनट नहीं पांच मिनट मैं आपको कहने के लिए कुछ फोन लगाया है। पूरी बात सुन लीजिए मैं क्या कह रहा हूं। उसके बाद आप असंतुष्ट हो तो आप अपनी बात रख लीजिएगा। ठीक बोलिए। जिनके अन्य उपासक हैं और जिस देवी का नाम हमारे शास्त्रों में वर्णित है मैं उनका कभी नहीं मैंने नाम लेकर ऐसे कहा कि वह देवी काल्पनिक है। हां मगर जो देवी इसको वरदान देने आती है इसको ज्ञान देने आती है इसकी कथा के अनुसार कटाक्ष के रूप में यह कहा मैंने कि वो देवी काल्पनिक है। नाम लेकर कभी किसी वीडियो में नहीं कहा कि अगर वो नाम जो है हमारे शास्त्रों में वर्णित है और जिनकी आप बात कर रहे हैं कि अन्य उपासक भी हैं तो नाम लेकर मैंने कभी यह नहीं कहा कि यह देवी काल्पनिक देवी है। इनका हमारे शास्त्रों में वर्णन नहीं है, ऐसा कभी नहीं कहा मैंने। मैंने कहा कि जो देवी, जो देवी वहां आ रही है, उसको वरदान देने और जो इसके परिसाधना वाले मंत्रों से जो खुश हो रही है जो देवी, है ना, अशा शास्त्रीय मंत्रों से, वो देवी काल्पनिक है। उसपे मैंने कटाक्ष
00:31:11:06 किया है। तो अब मेरी बात सुन लीजिए। हम्म। जैसे जब आपने नाम लेकर ये नहीं बोला तो आपके जितने मतलब वीडियो देखने वाले व्यूअर्स हैं। ठीक है? उन्होंने उनका भी वीडियो देखा। उनका क्लेम सुना। अब वो डायरेक्ट उस देवी का नाम लेकर ही उपहास कर रहे हैं। यह मेरा ये था कि ये तो तो ये ये जो उपहास कर रहे हैं उनकी गलती है। और दूसरी बात ये गलती भागवतानंद की भी है। वो क्या है? सुन लीजिए। भागवतानंद क्या करता है? जब हम कहते हैं कि तुझको सपना देने वाली, तुझको वरदान देने वाली देनी देवी काल्पनिक है तो वो क्या करता है? सिंपैथी बटोरने के लिए आप जैसे लोगों की आप जैसे लोगों का समर्थन बटोरने के लिए अपनी जो शास्त्रोक्त व्याख्या है देवी की जिनका शास्त्रों में वर्णन है वो वर्णन देखो देखो ये मेरी देवी को काल्पनिक कह रहा है तो क्या होता है कि यहां के विवर उससे नहीं भटकते भटकते किससे है जब मैंने उसको वरदान देने वाली देवी को काल्पनिक कहा और उसके उत्तर में उसने शास्त्र व्याख्या दे दी कि देखो देखो यहां यहां पर वर्णन है देवी का और यह व्यक्ति वो दे रहा है उससे भटक रहे हैं लोग वो क्यों कर रहा है ऐसी दूर ता उसको समझ में जब आ रहा है कि जब मैं उसको वरदान देने वाली देवी को काल्पनिक कह रहा हूं। आपको उसे फोन करना चाहिए कि जब वो आपके जब वो इस शास्त्रोक्त देवी का
00:32:26:07 नाम लेकर नहीं बोल रहे कि काल्पनिक है तो आप क्यों शास्त्री जवाब दे रहे हो भैया उसका जब उसका वर्णन आपको वरदान देने के रूप में अगर देवी का वर्णन हो वहां पे कि वो आपको वरदान देकर गई है तो आप शास्त्रों की व्याख्या पेश करो या फिर उन्होंने नाम लिया हो शिवश नारायण द्विवेदी ने कहां पे नाम लिया है कि ये देवी जो है काल्पनिक है अमुक नाम से अरे तो आप वही ना आप बोलिए मतलब अरे तो मैं तो मैं तो जब मेरे पास वो सामने चीज आएगी मैं तो अपने वक्तव्यों में अपने वीडियो में कई बार कह चुका हूं। अभी मेरी कल की पोस्ट पढ़ लीजिए। कल की पोस्ट पढ़ लीजिए। उसी में मैंने ये बात एक क्लेरिफिकेशन दिया है। आप मुझे कहेंगे कि मैं उसके द्वारा फैलाई जाने वाली मिथ्या को जाकर के क्लियर करूं। मगर आप उसको यह नहीं कहेंगे कि भैया तुम ऐसी मिथ्या मत फैलाओ। ये कहां का न्याय है? देखिए ऐसी बात नहीं है। मैं यही कह रहा हूं कि जब आप आप जब भी मतलब कभी भी इस संदर्भ में बोल रहे हैं जब आप यह बोलेंगे कि हमने अपने हिसाब से बिल्कुल एक्यूरेट बोला है। हमने कोई गलत नहीं बोला है। उसने हमारे जवाब में शास्त्रोक्त व्याख्या प्रस्तुत करके यह मिथ्या फैलाई है कि हम जो है शास्त्रोक्त देवी का खंडन कर रहे हैं। समझ में आ रहा है आपको? तो आप सही व्यक्ति के पास जाइए कि आप ऐसा ना करें।
00:33:41:08 देखिए आप आप क्या कह रहे हैं वो क्या कह रहे हैं वो तो अलग बात है लेकिन इस कारण जो बाकी लोग अरे भैया मैं ठीक है मैं समझ गया आपकी बात ठीक है बस हो गया वो वो नहीं समझ जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम [संगीत]
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क्या हम मां भगवती को काल्पनिक कहते हैं?
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