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00:00:02:04 जय श्री राम जय

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→ Used in: B · Live भागतानंद के भागते चेलों का प्रलाप at 10:16 ↗

00:00:04:00 श्री राम हां प्रश्न भैया वही था कि पीएन मिश्रा जी का कुछ तो अनावश्यक लगा हमें जो उन्होंने कहा है वर्ण व्यवस्था को लेकर के शंकराचार्य जी को और करपात्री जी को लेकर के आदि ये सब जो है अभी कुछ दिनों पहले एक ब्राह्मण विरोधी फिल्म बनाई थी अनुराग कश्यप ने अच्छा उसने बहुत पूरे वर्णाश्रम जो धर्म होता है उसकी धज्जियां उड़ाई थी। उसमें कोई किसी कोई विचारक थे। उनकी पुस्तक का आधार लेकर के फिल्म बनाई थी। काफी चर्चा हुई थी। उसका विरोध भी किया था। ब्राह्मण विरोधी फिल्म या वर्णाश्रम विरोधी फिल्म इस तरह से तो हम उसका भी तो विरोध नहीं कर पाए हैं।

00:00:56:24 हाइपरस्ट हाइपरक्वेस्ट के चैनल पर धर्म सम्राट नाम से अपने आप को ख्यापित करता है जो कहता है वो ऋषि वाच गया। वहां पर उसने खूब उल्टी की जहर उगला हम लोग उसे भी समय नहीं दे पाए। विज्ञान दर्शन भी हाइपर क्वेस्ट पर जाकर के उल्टियां कर चुका है। करपात्री जी को अगर सिंगल पॉइंट तरीके से देखा जाए तो कलयुगी योगी नाम का एक व्यक्ति जो हमारे चैनल पर कई बार आ चुका है। दो एक बार आ चुका है। उसने जो है बहुत गिरे हुए स्तर से जो है कृपात्री जी के बारे में बात करते हुए रील बनाई वक्तव्य दिए। हम वहां भी कुछ नहीं कर पाए। और इसके साथ ही साथ एक फेमस चेहरा है नित्यानंद मिश्रा जिसने कृपा जी के ऊपर उंगली उठाई थी वो पृथ्वी गोल है वाले मामले पर पृथ्वी घूमती है वाले मामले पर और अलोपनिषद पर भी उठाई थी यद्यपि अलोपनिषद वाले मामले को हमने बहुत उसको ही केंद्रित करते हुए नहीं मगर एक जवाब दे दिया था जिसमें उसका संदर्भ भी था मगर यह नहीं बताया था लोगों को कि भाई हम इस इस वीडियो में उसको जवाब दे रहे हैं तो इतने सारे लोग हैं और भी ना जाने कितने

00:02:12:07 लोग हैं जो कि पीएन मिश्र जी से बहुत ज्यादा आगे ख्याति प्राप्त है और वो बोलते हैं और जैसे यह बताया जा रहा है कि इनकी ही जानकारी के अनुसार कि शंकर परंपरा के विरोध में बोलते हैं क्योंकि हमने ज्यादा उनके चीजों को सुना नहीं है। मगर उससे भी ज्यादा घृणात्मक तरीके से निम्न दृष्टि से ख्यापित करते हुए बहुत लोग बोले हैं। तो हमने उनके लिए भी तो कुछ नहीं किया है। तो ऐसे में यही प्रश्न क्योंकि पीएन मिश्र जी के विरोध में आपने क्यों नहीं बोला? अभी प्रमुख मुद्दा तो वही बना हुआ है ना? यह प्रमुख मुद्दा तय कौन कर रहा है? यह प्रमुख है।

00:02:57:18 आप आप देखिए प्रमुख मुद्दा तय कौन करेगा? यह प्रमुख है। अभी इसी पर अधिक विवाद छिड़ा हुआ था ना इसलिए इसे प्रमुख किस पर अधिक विवाद छिड़ा था पीएन मिश्र जी निग्रहाचार्य जी और संदीप देव जी के बीच तो इससे भयंकर विवाद छिड़ा अनुराग कश्यप की मूवी पे नरसिम्हा में जो नरसिम्हा में जो देखिए आप तो व्यष्टि की बात कर रहे हैं। मैं समष्टि की बात कर रहा हूं। पूरे वर्णाश्रम धर्म की ही धज्जियां उड़ा दी गई। यहां तो पीएन मिश्र पर्टिकुलर किसी एक गुरु परंपरा के विरोध में बोल रहे हैं ना। वहां तो पूरे धर्म पर ही उंगली उठा दी गई है और नरसिम्हा भूमि में पूरे शिव जी का अपमान किया गया है कि वो वो राक्षसों के देवता है। हम उसको भी नहीं समय दे पाए। मेरा कहने का अर्थ यह है कि जब हम किसी का विरोध करते हैं तो हमें यह देखना होता है। किसी का प्रतिकार करते हैं तो हमें यह देखना होता है कि प्रतिकार करने से कितना लाभ मिलेगा और प्रतिकार ना करने से उसी समय किसी दूसरे का प्रतिकार करने से कितनी हानि बच पाएगी। हानि होगी या लाभ होगा। दूसरे से लाभ होगा या हानि होगी। सिर्फ यह नहीं कि क्योंकि किसी ने हमारा नाम लेकर के बोल

00:04:12:24 दिया तो हम उसका तुरंत वीडियो बना दें। यह कार्य तो हमारा नहीं है। हम तो ऐसे किसी तंत्र व्यक्तित्व इत्यादि को पकड़ते हैं जिसका जो एक कल्ट के रूप में ख्यापित हो रहा हो जिससे कि एक बड़ा जन समूह जुड़ चुका हो और उसकी विचारधारा जो है फैल रही हो। पीएन मिश्र जी का व्यक्तित्व क्या है धार्मिक क्षेत्र में? उस प्रकार से तो नहीं है कुछ ख्याति उनकी। तो हमें क्या करना? कोई एक व्यक्ति अगर कुछ बोल भी रहा है डेली इतने वीडियोस बनते हैं शंकराचार्य की विचारधारा के विरोध में जबकि उनका अपना एक उनका अपना एक कल्ट भी है तो हम पीएन मिश्र जी पर अपनी एनर्जी और समय क्यों नष्ट करें सबसे पहली बात दूसरी बात यह है कि दूसरी बात यह है कि जो व्यक्ति ख्यापित नहीं है उसको हम अपने चैनल से ख्यापित क्यों करवा दें भाई पीएन मिश्र जी का सामाजिक पर्सनालिटी के रूप में धार्मिक पर्सनालिटी के रूप में क्या व्यक्तित्व है अगर उनको संदीप देव जी अपने चैनल पर ना बोलने को बुलाएं। उनका अपना क्या स्टेटस है जो हम उनका खंडन करें। कितने उनके दीक्षा प्राप्त शिष्य हैं या कितने उनके फॉलोअर्स हैं जिससे कि वो कुछ बात बोल देंगे तो उनको दिक्कत हो जाएगी। दिक्कत यह है कि पीएन मिश्र जी ने दिक्कत यह है कि पीएन

00:05:28:04 मिश्र जी इस समय भागवत आनंद के विरोध में खड़े हुए हैं। तो इसलिए सवाल उठ रहा है कि भाई भागवतानंद के विरोध में जो खड़ा हुआ व्यक्ति है वो जो ऐसी बात बोल रहा है जो आपके भी एक मिनट वो जो आपकी आवाज कट रही थी। अब आ रही है। हां हां आ रही है। हां तो बात मुद्दे की ये है विषय ये है लोग हमसे सवाल क्यों पूछ रहे हैं कि पीएन मिश्र जी का विरोध क्यों नहीं किया है? इसलिए नहीं पूछ रहे हैं कि शंकर के सिद्धांत का खंडन हो रहा है। धर्म का खंडन हो रहा है। क्योंकि धर्म का खंडन होने वाली बात होती तो हमको नित्यानंद मिश्र में भी परेशान करते, हाइपरकस्ट में भी परेशान करते, विज्ञान दर्शन में भी परेशान करते। तो जो लोग ये सवाल पूछ रहे हैं कि पीएन मिश्र पे क्यों नहीं बोला है वो इससे उनको मतलब है कि कौन सा ऐसा व्यक्ति है जिसने भागवतानंद का भी विरोध किया है और जिसने शंकर परंपरा का भी विरोध किया उसके खिलाफ शिवांशु नारायण द्विवेदी क्यों नहीं बोल रहे? तो हमारे काम करने की एक स्ट्रेटजी होती है। सबसे पहली बात यह है हम हर हर किसी के वक्तव्य का उत्तर देने नहीं जुट जाते कि भैया बस किसी राह चलते व्यक्ति ने भी अगर कुछ बोल दिया तो उसने शंकर परंपरा के खिलाफ बोला है तो हम उसका उत्तर देने लग जाए। अपनी एनर्जी उसमें लगाने लग जाए। हमें यह देखना होता है। एक मिनट एक मिनट हमें यह देखना होता है

00:06:43:10 कि उस व्यक्ति की क्रेडिबिलिटी कितनी है। उस व्यक्ति का को फॉलो करने वाले लोग कितने हैं। आज तक ज्यादातर हमने कल्ट्स को पकड़ा है। जो अपने आप को एक संस्था एक तंत्र के रूप में उद्भाषित कर रहे हैं। हम उन उनको पकड़ते हैं। जिनकी अपनी एक विचारधारा छप चुकी है। किताबें छप चुकी हैं। उसी के उसी के समर्थन में जो वो गलत बातें फैला रहा है। ऐसी कोई धार्मिक छवि तो इनकी नहीं है कि कहीं के वक्ता हो, कहीं प्रवचन करता हो, इनके बहुत सारे शिष्य हो और यह फिर सनातन धर्म के विरोध में बातें कर रहे हो। दूसरी बात यह भी देखना पड़ता है कि यह तो यह तो यह बात रही कि भाई इनकी कोई धार्मिक छवि नहीं। दूसरी बात यह भी है कि जो व्यक्ति फेमस नहीं है, जिस व्यक्ति को लोग नहीं जानते हैं। उस व्यक्ति पर वीडियो बना करके हम उसको उत्तर दे के नाम दे के फेमस क्यों करें?

00:07:35:06 भाई अभी तक तो उसको लिमिटेड लोग जानते हैं ना जो जो इस संदर्भों से जुड़े हुए हैं। फिर वो भी जानेंगे, स्कॉन वाले भी जानेंगे। देखो पीएन मिश्र, पीएन मिश्र जो है स्कॉन वाले भी जानेंगे, आर्य समाझी भी जानेंगे कि पीए, पीएन मिश्र खुद करना, वर्ण व्यवस्था का वो कर रहे हैं समर्थन। हं? फिर वो हमसे आकर के तर्क करेंगे। हम क्यों जनए उन्हें? हालांकि जनजान जाएंगे तो उसका उत्तर देना भी होगा। उसका उत्तर भी है हमारे पास। मगर हम अपनी एनर्जी क्यों वेस्ट करें ऐसी चीज में? जब हमारे पास रामपाल है, स्पॉन है, आर्य समाज है, ब्रह्मा कुमारी है तो हम क्यों ऐसी निरर्थक अपनी एनर्जी वेस्ट करें? क्योंकि भागवतानंद का उसने विरोध किया है। इसलिए लोग ये कहेंगे कि तुमने इसका विरोध क्यों नहीं किया? अच्छा दूसरी बात यह है कि अब जैसे ये अमुक आचार्य जी की ही बात है। रामभद्राचार्य जी ने इतनी सारी बातें कही। तो बात आ रही शिवश नारायण द्विवेदी क्यों नहीं बोल रहा है? तो क्या हर व्यक्ति के विरोध में हमारा ही बोलना जरूरी है? यह कैसे तय हो रहा है? और क्या भागवतानंद ने हर सनातन विरोधी आज तक जो भी वक्तव्य आया उसने सबके बारे में बोल लिया है।

00:08:50:07 इसका मतलब कहीं ना कहीं सामर्थ्य की सीमा होगी ना बोलने की। और फिर जब रामभद्राचार्य जी के विरोध में इतने सारे लोग ऑलरेडी बोल रहे हैं। वक्तव्य आ रहे हैं वो भी प्रामाणिक आचार्यों के आ रहे हैं। आ रहे हैं कि नहीं? ज्योतिष पीठ वाले महाराज का आया और सभी एक तरफ से जब बोल रहे हैं और हमने बिना नाम लिए हुए भी कई ऐसी बातें दिखा दी अपने पेज से जिसमें कि उनका वो जो उन्होंने जो भी वक्तव्य दिया है उसका प्रतिकार हो गया। मगर यह जो इसको जो विषय बनाया जा रहा है कि तुमने उनका नाम लेके क्यों नहीं बोला? तुमने पीएम मिश्र जी का क्यों नहीं बोला? भाई हमको हम लोग धरातल पे लड़ने वाले लोग हैं। आप लोग लड़ नहीं रहे हो धरातल पे। आप केवल क्वेश्चन कर रहे हो। जिसको धरातल पर लड़ाई लड़नी होती है, उसको यह तय करना होता है कि कितना बोलना है, किससे बोलना है, कब बोलना है, अभी बोलना है, बाद में बोलना है। बहुत सारी चीजें बोलनी होती है। अब हमारा मान लीजिए रामपाल से केस चल रहा है। हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। हमको कुछ लेख लिखना है। उसी समय हाइपर क्वेस्ट चैनल पर धर्म सम्राट नाम से जो अपने आप को कह रहा है, पहले ऋषिवाज कहता था वो गया और उसने जो है बहुत एक डेढ़ घंटे उन लोगों ने जो है जहर उगल लिया। अब हम जो है वो हाई कोर्ट के लिए जो लिखना है वो छोड़ के उसका खंडन बनाने लग जाए। नहीं तो तुम

00:10:05:08 क्यों नहीं बोल रहे? हालांकि यह पूछा नहीं गया है। पूछना चाहिए था ना। हमारा मन था अनुराग कश्यप का विरोध करने का नहीं कर पाए। हमारा मन था नरसिम्हा का विरोध करने का नहीं कर पाए। क्योंकि दो गलत रास्तों में से कम गलत और दो सही रास्तों में से ज्यादा सही चुनना पड़ता है। पीएन मिश्र जी का विरोध करने से पीएन मिश्र जी की और प्रसिद्धि होगी। उन्होंने क्या कहा है? ने क्या नहीं कहा है? यदि वह गलत है तो उनकी और प्रसिद्धि होगी। जवाला वाले जवाला में कर्मणा वर्ण व्यवस्था इत्यादि सभी मामलों में हम अपना बहुत सीधा साफ सुथरा पक्ष प्रस्तुत कर ही चुके हैं। उसमें नाम लेके ही खंडन करने की आवश्यकता क्यों है?

00:10:47:01 ख्यापित करने के लिए प्रसिद्ध करने के लिए और दूसरी बात कि जब हम अपनी ओर से और ज्यादा मान लीजिए वो पहले से ही सार्वजनिक है वो बातें। मगर हम उसको और ज्यादा सार्वजनिक क्यों करें यह सारी बातें मैंने अपने वीडियो में कही है ना भाई कोई चीज कितनी भी खराब हो गई हो उसको और खराब करेंगे क्या करपात्री जी ने एक बात कही थी कि गर्मी पड़ रही है बहुत भयंकर तो हम क्या गर्मी और पड़ने देंगे हम तो उपाय करेंगे गर्मी ना लगे हमें कि नियत होकर बैठ जाएंगे नहीं साहब गर्मी पड़ रही है अब हम ना पंखा चलाएंगे ना कूलर चलाएंगे लेकिन एक बात तो यह भी है ना कि संदीप देव जी का जो चैनल है वह तो स्थापित है ना और उसमें भी तो व्यूज जा ही रहे हैं। तो मैंने मैंने क्या कहा? हम उसको और क्यों इनक्रीस करें? हम उसको और क्यों इनक्रीस करें? तो बहुत हो ही चुका है। उससे क्या मतलब है? चाहे जितना हो चुका हो। हम ये देखेंगे ना कि उनका पर्टिकुलर उनका व्यक्तित्व क्या है? पीएन मिश्र जी का? उनका व्यक्तित्व क्या है? उनकी सामाजिक छवि क्या है? उनके फॉलोअर्स धर्म के धर्म के क्षेत्र में क्या वो एक क्या वो उनको ऐसे देखा जाता है कि वो एक निर्णायक व्यक्ति हैं? क्या उन्हें किसी आचार्य के रूप में देखा जाता है? धार्मिक गुरु के रूप में देखा जाता है? एक व्यक्ति है

00:12:02:02 वह अधिवक्ता है वरिष्ठ उस रूप में उनको देखा जाता है। कोई नहीं उनसे दीक्षा लेने जा रहा है। हर कोई उनकी बात को सुनने के बाद यदि वो वर्णाश्रमी होगा तो अपने गुरुओं से बोलेगा कि ये बात सही कह रहे हैं और अगर वो वो होगा आर्य समाज जी इसको नहीं तो वो उनसे लेगा निर्देश। दूसरी बात यह है कि हम इस लड़ाई को अपने मंच से भी दिखा के और ज्यादा लोगों को क्यों बताएं कि भैया देखो शंकर परंपरा का ही अनुयाई ये कह रहा है कि कर्म वर्ण व्यवस्था है। क्यों बताएं अगर उनको अपने से पता चल जाए तो बात ठीक है। हम क्यों बताएं? ठीक है। वो आके हमसे प्रश्न करेंगे। हम उनको उत्तर देंगे। मगर हमने अपना काम बढ़ाया ना खुद ही। हम क्यों बढ़ाएं उसे और दूसरी बात ये है कि पीर मिश्र है कौन? हैं। मान लीजिए कि वो राम मंदिर अयोध्या केस में साथ दे रहे हैं। रामपाल वाले केस में साथ दे रहे हैं और अन्य केसों में साथ दे रहे हैं। हम खामखा उनका नाम लेकर के विरोध करके और इन सब बड़े अभियानों को रोक दें क्योंकि भागतानंद का जिसने विरोध किया उसका नाम लेकर के विरोध करना आवश्यक है। अनुराग कश्यप का विरोध आवश्यक नहीं है। शिवजी का अपमान करने वाला लोगों करने वाले लोगों का विरोध आवश्यक नहीं है। या यह क्या कहते हैं? ये हाइपर क्वेस्ट इत्यादि बड़े-बड़े चैनल्स हैं। ये भी तो ख्यापित है। अभी तक कुल मिलाकर

00:13:17:10 के संदीप देव जी के चैनल पर जितने व्यूज आए होंगे टोटल सारे वीडियोस को मिला के उससे ज्यादा व्यूज हैं जिसमें वो हाइपर क्वेस्ट के चैनल पर वो गया है। धर्म सम्राट वाला। आपकी आपकी आवाज जा रही है बार-बार। मैं कह रहा हूं कि कुल मिलाकर अभी जितने वीडियोस बनाए गए हैं संदीप देव जी के चैनल पर पीएन मिश्र वाले विषय में जब से ये विरोध हुआ है। ठीक है? जब से वो हुआ है तब से इतने वीडियोस बनाए गए हैं। जितने उसमें टोटल व्यूज आए हैं उससे ज्यादा व्यूज मिलेंगे आपको हाइपर क्वेस्ट में जाकर के। अगर आपका यह कहना है कि वो पहले से ख्यापित है तो मैं पहले हाइपर क्वास्ट वाले का विरोध करूं तब काम छोड़छाड़ के। पर हम वहां पर इसलिए ही चुप है कि पहली बात तो हाइपर क्वेस्ट की कोई धार्मिक छवि नहीं है जो हर बात का उसका उत्तर दे। वो अपने आप में ही मिक्स। दूसरी बात यह है कि जिस जो वो वहां पर जो बोल के आया उसके उसका अपना उसके अपने व्यक्तिगत तौर पर हम खूब खंडन उसका कर चुके हैं। आगे हमें जैसे ही समय मिलेगा हम फिर करेंगे। हमने इसलिए नहीं किया भाई। उसको तवज्जो नहीं दी। तो यह निर्णय होता है कि जो व्यक्ति धरातल पर खड़ा होता है तो उसको एक स्ट्रेटजी के तहत कार्य

00:14:32:14 करना होता है कि किसका विरोध नाम लेकर के करना है, किसका नहीं करना है, किसका बाद में करना है, किसका अभी करना है। आप जब कोई काम करने निकलोगे घर से बाहर पुलिस थाना कोर्ट कचहरी जाओगे तब आपको यह पता लगेगा कि भाई पुलिस वाले से क्या बोलना है, वकील से क्या बोलना है, किसको साथ में ले चलना है, किसकी कुछ बातों को सहन करना है। इस बात को उन्होंने भी बोला है। ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी ने उनके कल के वक्तव्य में है यह बात कल परसों के वक्तव्य में हेलो हां उनके उनके कल परसों के वक्तव्य में है ज्योतिष पीठ वाले महाराज जी की वो कह रहे हैं कि कि लोग आरोप लगाते रहते हैं हम लोग हम लोगों को कई बार सहना पड़ जाता है जिससे कि विधर्मियों को या विरोधियों को वो ना मिल जाए तो कई कारण होते हैं हां तो कई कई कारण हो सकते हैं किसी का विरोध ना करने के भी और अगर बात यही है कि इसका विरोध क्यों नहीं किया तो मैं आपको पीएन मिश्र जी से ज्यादा खतरनाक चीजें आपको मैं बता रहा हूं सारी आपका प्रश्न होना चाहिए आपने इनका विरोध क्यों नहीं किया जो है ना बहुत ज्यादा आपकी आवाज बहुत ज्यादा कट गई है आप यदि प्रेम में होंगे तो हां तो यह सवाल गलत है कि आपने

00:15:47:15 पीएन मिश्र जी का विरोध क्यों नहीं किया नाम लेकर विरोध करना आवश्यक नहीं है ना कोई वो आवश्यक नहीं है

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00:15:53:01 कि वो [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 16:35 · 31 Aug 2025

पीएन मिश्र जी के विषय में भागतानंद के चेले को दिया सटीक उत्तर

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