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00:00:01:01 तो सभी को जय श्री राम। आशा करता हूं आप सभी कुशल पूर्वक होंगे। अ जैसा कि आप सभी को पता ही है और आप लोगों को आभास हो गया होगा कि आज इस लाइव में क्या होने वाला है। हमें काफी दिन से व्यस्त थे। अन्य कई सारे प्रकल्प हैं और बहुत सारे मोर्चे भी खोल रखे हैं। तो इस विषय के लिए हमें समय विशेष रूप से नहीं मिल पा रहा था। पर आज हमने कहा कि भाई रविवार का दिन है तो हम सार्वजनिक रूप से घोषणा कर देते हैं कि रामपाल जो जेल से बाहर आ गया है और से बाहर आने में क्या है कि हमारे लिए बड़ी सुविधा हो गई क्योंकि जब तक वह जेल में था तब तक उससे प्रश्न करना और ज्ञान चर्चा करना वो तथाकथित जो ये लोग किया करते हैं वो काफी मुश्किल मुश्किल था। वहां अंदर जाकर के उसके साथ ज्ञान चर्चा करना और उनके तथाकथित वह जो अड्डे हैं जहां पर यह दावा करते हैं कि
00:01:16:09 अ हमारे साथ चलिए हम डायरेक्ट आपकी बात करा दें तो वहां पर आपके साथ क्या-क्या हो सकता है वो आप लोग समझ सकते हैं। वहां पर वहीं पर कुछ ऐसा हुआ था जिसके कारण मुकदमा चल रहा था और अभी भी चल ही रहा है और अ तो उन अड्डों में जाकर के और इनकी तथाकथित काल्पनिक वो प्रत्यक्ष वार्ता करना तो मुश्किल था। हमारे लिए तो संभव नहीं था। पर अब जब रामपाल बाहर आ गया है और जैसा कि उसने पूर्व में बड़ा डंका पीटा था कि भैया हमने जो है शंकराचार्यों को चैलेंज दिया है और कोई भी आया नहीं एक भी शंकराचार्य नहीं आया तो हम भी आज उसी प्रकार से एक चुनौती सार्वजनिक रूप से दे रहे हैं रामपाल को यद्यपि कोर्ट में कारवाई तो चल ही रही है अगर ऐसे नहीं तो वहां तो आना ही है तुमको जवाब देने के लिए आज नहीं तो कल बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी वो कहते हैं ना रामपाल का हाल अब वो है आसमान से गिरा और खजूर पर अटका वाला क्योंकि वो जमानत पर बाहर आया है। जमानत पर वही आर्य समाज ब्रह्मा कुमारी और रामपाल का जो मोक्ष है जहां से वापस आते हैं तो जमानत पर
00:02:31:10 वो आया है और अब क्या है कि बहुत से लोग और ऐसे भी लोग जो पूरी तरीके से प्रामाणिक नहीं है मतलब परंपरा प्राप्त आचार्यों की शरण में नहीं परंतु वो रामपाल के कंपैरेटिवली अधिक बुद्धिमान है अधिक तार्किक हैं और अधिक शास्त्रों का अध्ययन किए हुए हैं अधिक संस्कृतज्ञ हैं। तो ऐसे जितने भी लोग हैं वह सब रामपाल पर भारी पड़ने वाले हैं। रामपाल किसका किसकी चुनौती स्वीकार करेगा? हम तो खैर ऑथेंटिक रूप से भी उसको चुनौती दिए हुए हैं। वो नोटिस तो गया ही था ना जेलर के पास। तो वो तो अगर वो हमारी चुनौती को स्वीकार नहीं भी करता है तो जेल वहां क्या कहते हैं? हाई कोर्ट में तो उसको उत्तर प्रस्तुत करने आना ही पड़ेगा। आज नहीं तो कल। वह तो एक अलग बात है। मगर अभी मैं देख रहा हूं कि बहुत सारे लोग हैं जो उसको चुनौती दे रहे हैं और अब देखना यह है यह चुनौती को स्वीकार कर रहा है कि नहीं कर रहा है। है ना? अच्छा हमारी चुनौती की विशेषता क्या है वो आपको पता ही है। तो चुनौती में जो विषय हैं वो मैं अभी आपको बता देता हूं। पर इससे पहले एक चीज क्लियर कर दूं कि एक दिन ऐसा था जब ये लोग बड़ा डंका पीटते थे कि भैया हमने
00:03:46:12 शंकराचार्यों को चुनौती दी थी। ज्ञान चर्चा की पर कोई आया नहीं कि भैया रामपाल जैसा कोई गवार बुद्धि ठोस बुद्धि व्यक्ति तत्वज्ञ जो मनीषी हैं शंकराचार्य और तत्वज्ञ कौन होता है ये इस पर आज हम बात करेंगे। आप ऐसा ना समझे कि केवल एक कोरी चुनौती का ही है। बहुत इनेटिव लाइव डिस्कशन होने वाला है यह। तो आप लोग ऐसा ना समझे कि केवल वह चुनौती ही है। इसमें एक प्रॉपर आप एक कुछ लेकर ही जाने वाले हैं। यहां से तो
00:04:22:00 मतलब अंत तक बने रहे। कहने का अर्थ यह है। तो जब इसने यह सब डंका पीटा था तो सोचने वाली बात यह है कि शंकराचार्य जैसे तत्वज्ञ मनीषी इसके कहने पर तुरंत इससे संपर्क करें। हां हां भैया रामपाल जी आप कहां पे हो और हम आपके साथ जो है चर्चा करने को तैयार हैं। हम तो बैठे ही इसीलिए हैं आपके साथ ज्ञान चर्चा करने के लिए। जिसको अग्न्या का अर्थ नहीं पता है। अग्न्याया को बताता है वह अगन्या अगन्या कौन? वो हरियाणा में कहते हैं वो कुंवारी गाय हम बिन बाई जो बाई नहीं गई है। खैर तो ये इस तरह से इसको प्रस्तुत करते थे ये लोग कि भाई देखो जो है शंकराचार्य आए नहीं ज्ञान चर्चा के लिए इत्यादि इत्यादि। तो आज जो है इसको मैं कर रहा हूं। मैं चुनौती दे रहा हूं इसको ज्ञान चर्चा के लिए कि रामपाल भाई तू आ और तूने जितनी चीजें की है ना मैं अभी बिंदुगत तरीके से बता दूंगा बहुत शॉर्ट है मेरी लिस्ट बहुत ज्यादा ऐसी चीजें नहीं है कि पता नहीं कहां-कहां से कौन-कौन सा प्रहार आएगा बता के करूंगा तुझे बता दूंगा यह कर आकर के है ना सिद्ध तो भाई रामपाल
00:05:37:10 तूने जो ये सब चीजें की हैं या फिर तेरी अनुपस्थिति में तेरे लोगों ने जो चीजें प्रस्तुत की हैं। उनको मैंने एक सूत्र में बांधा है। ऑपरेटर जी से मेरा अनुरोध है कि वह जरा जो आमंत्रण पत्र है प्रस्ताव पत्र वह यहां प्रदर्शित कर दें स्क्रीन पर तो मैं बता दूं। एक भाई साहब कह रहे हैं तू एक ऊंचे संत का ऊंचा शिष्य है शायद। भाई साहब पहले आप अपनी हिंदी थोड़ी ठीक करें। उषा शिष्य लिखा है आपने। अच्छा दूसरी बात यह है कि महाभारत में कहा गया है कि जो व्यक्ति जिस तरह की भाषा जानता हो उसको उसी तरह की भाषा में समझाना चाहिए। हां यह बात अवश्य है कि हम अपनी एक मर्यादा होती है शास्त्रों की सीमा उसके बाहर नहीं जाते। ऐसा नहीं है कि हम किसी को गाली दे रहे हैं। परंतु ऐसा भी नहीं है कि कोई हमारे देवी देवताओं को तू तड़ाक बोलेगा तो हम उसको तू तड़ाक ना बोले। ठीक है? और इस बात को भी हम शास्त्रों से सिद्ध कर सकते हैं। खैर तो अभी सबसे पहले हम चुनौती की बात कर लें कि हमारा जो चुनौती पत्र है रामपाल के लिए वह क्या है? तो चुनौती पत्र
00:06:52:14 में क्या लिखा है? हम पढ़ देते हैं। यह तथ्य सर्वविदित है कि सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल को कारागार से प्रतिभ यानी प्रतिभ का अर्थ होता है बेल। तो प्रतिभ बेल पर मुक्त कर दिया गया है। उनकी इस मुक्ति के अंतर्नित कारण एवं उसकी सार्थकता के विषय में तो अलग से बात हो सकती है। उस कारण को पृथक करते हुए हम सर्वप्रथम रामपाल को ज्ञान मीमांसा ज्ञान चर्चा हेतु आमंत्रित करते हैं। वे इस विमर्श में उपस्थित होकर निम्नलिखित विषयों पर अपनी मान्यताओं को प्रमाण व युक्ति सहित सिद्ध करें। बहुत शॉर्ट में और सीधी बात करते हैं जब भी कुछ भी घुमा फिरा के बात नहीं करते हैं। ठीक है? अब क्या-क्या बातें हैं जो सिद्ध करनी है? सीधी बात स्प्राइट नहीं पीता पर करता सीधी बात। ठीक है? क्या है? तो पहला है भाई नीचे करो जरा। नीचे करिए इसको।
00:08:05:18 हम पहला है क्या रामपाल के द्वारा पूजित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है? सीधी बात सर्वशक्तिमान। ठीक है? क्या रामपाल द्वारा प्रतिपादित जीव का प्राप्तव्य जो उसको बताया गया कि तुमको सतलोक मिलेगा। सतलोक की सतलोक का अनंत जीवन मिलेगा। इत्यादि इत्यादि वह जो मोक्ष है वह प्रामाणिक है। वह युक्ति युक्त है। क्या वह मोक्ष ही है? क्या वह मोक्ष सिद्ध होता है? क्या वह वास्तविक प्राप्तव्य सिद्ध होता है? अच्छा इसमें एक बिंदु नीचे चला गया पर वो अगला बिंदु ही था। वह क्या है? अब यह दोनों चीजों में यदि रामपाल का वही है जो शास्त्रोक्त है, युक्ति युक्त प्रामाणिक है तो तो ठीक है। परंतु जहां तक हमको मालूम पड़ा है और हमने अभी तक जो मीमांसा की है उसके आधार पर ना तो रामपाल का ईश्वर वास्तविकता में सर्वशक्तिमान सिद्ध होता है और ना ही रामपाल द्वारा प्रतिपादित जो प्रतिपाद्य बताया गया है जीव के लिए मतलब तुमको यह प्राप्त होगा प्राप्तव्य वो मोक्ष सिद्ध होता है। तो अगर इसको भी वह मोक्ष कहते हैं। मान लो कि जैसे मैंने कहा
00:09:21:08 कि भाई जो कबीर है वह माता के गर्भ से जन्म नहीं ले सकता है या अमुक अमुक कार्य नहीं कर सकता है। फिर उसका सर्वशक्तिमान होना सिद्ध नहीं होता। ठीक है? तो अब उसका सर्वशक्तिमान होना सिद्ध नहीं होता। तो अब ऐसे में रामपाल वाले कह नहीं इस कार्य को किए बिना भी हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है। जैसे आर्य समाझी कहते हैं। ठीक है? तो हमारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है। तो पहले तो सर्वशक्तिमान पर ही बात होगी। मोक्ष पर ही बात होगी। और फिर यदि उन्होंने इन दोनों पॉइंट्स में मतलब अपनी चीजों को सिद्ध नहीं कर पाए तो अब हम आगे चलेंगे। इस बारे में बात करेंगे कि जो उन्होंने माना है ईश्वर जो उन्होंने माना है मोक्ष। जो रामपाल ने जिसज रूप में ईश्वर को मान लिया। जैसे उन्होंने कहा कि हमारा ईश्वर अमुक अमुक कार्य नहीं कर सकता। परंतु है वह सर्वशक्तिमान है वह हमारा ईश्वर और हम उसकी पूजा करेंगे। या फिर रामपाल ने कहा कि हमारा जो प्राप्तव्य है वह मोक्ष सिद्ध नहीं होता है। मगर फिर भी हम उसी मोक्ष के लिए ईश्वर की पूजा करेंगे। तो मतलब परिभाषित करने पर ना मोक्ष सिद्ध हो ना ईश्वर सिद्ध हो। परंतु फिर भी जिस पदार्थ का सेवन वह कर रहे हैं, उस पदार्थ को सर्वशक्तिमान और मोक्ष नाम देते हुए वह अपनी चीजों को जारी
00:10:36:14 रखना स्वीकार करता है। अब करेगा ही जाहिर सी बात है। तो फिर हमारा अगला प्रश्न आएगा यहां पर क्या रामपाल द्वारा प्रतिपादित कर जो ईश्वर है और जो धर्म है क्या उसका ईश्वर उसके ईश्वर और धर्म का अस्तित्व सिद्ध होता है? समझिए बात को। जब वह मोक्ष को वैसा मोक्ष सिद्ध नहीं कर पाएगा जो युक्ति और प्रमाण सहित हो। युक्ति भी है, तर्क भी है उसमें। और जब वह ईश्वर को युक्ति युक्त और प्रमाण युक्त सिद्ध नहीं कर पाएगा और मोक्ष को युक्ति युक्त और प्रमाण युक्त सिद्ध नहीं कर पाएगा यदि तब भी वह अपने उसी ईश्वर को ईश्वर मानने के विषय में अड़ा रहता है। यदि तब भी वह अपने उसी मोक्ष को मोक्ष मानने के विषय में अड़ा रहता है तो अगला जो स्टेप आएगा वो आएगा कि अब तुम अपने इस ईश्वर को सिद्ध कर दो कि वो है। समझ रहे हैं वह वाला असुतो मास सदगमयात सीधी सी अपनी हमारी जो रूपरेखा है वह बिल्कुल सीधी रहती है उसमें कोई यह नहीं होता है कि हम सामने वाले के साथ छल करने वाले हैं कोई कि कोई ऐसा प्रश्न लाने वाले हैं जिसकी वो तैयारी ना करें ना
00:11:50:04 झूठे की हद तक और चोर के घर तक ऐसा नहीं करते ना हम तो अगर तुम्हारा ईश्वर युक्ति युक्त तुम वहां पर मौन हो गए निरुत्तर हो गए मगर फिर भी उस ईश्वर के पक्ष में खड़े हो तो अगला आएगा कि अब तुम अपने रहे सहे ईश्वर को ईश्वर रहे सहे मोक्ष को मोक्ष और रहे सहे धर्म को धर्म सिद्ध कर दो नहीं कर पाओगे उस ईश्वर का अस्तित्व ही सिद्ध नहीं होगा जो जो प्रामाणिक आचार्यों के द्वारा प्रतिपाद्य ईश्वर है उसके विरुद्ध खड़ा होगा ध्यान रखिए ये बात मैं ये बात पूछता क्यों हूं आपने कभी सोचा है मैं क्यों पूछता हूं यह बात किसी सामने वाले से जब वो वो हमारे ईश्वर को मान नहीं रहा होता है। वो अपना एक तथाकथित कपोल कल्पित मनमुखी ईश्वर को लादना चाहता है स्वयं को स्थापित करने के लिए। तो मैं मैं यह बात इसलिए पूछता हूं कि हमारे विरोध में जिस सनातनी ईश्वर के विरोध में जिस ईश्वर को वो स्थापित कर रहा है उसका वो अस्तित्व ही सिद्ध नहीं हो पाएगा। क्योंकि वो जीव की चाह का वास्तविक विषय नहीं होगा। वो इस सवाल का जवाब नहीं होगा। किस सवाल का जवाब? जिस सवाल के जवाब से ईश्वर की सिद्धि होती है। क्या है सवाल?
00:13:05:08 असुतो मा सदगमया तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्युमा गम इस सवाल के जवाब से ही ईश्वर की सिद्धि होती है। अब क्योंकि इस सवाल का जवाब क्या है? सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म। यह इस सवाल का जवाब है। और वह पूर्ण वाला जो हमारा मंत्र है यह इस सवाल का जवाब है। परंतु जब सत्यम ज्ञानम अनंतम ब्रह्म करेंगे और पूर्ण वाला करेंगे तो यह चीजें आर्य समाज के ईश्वर पर, रामपाल के ईश्वर पर, ब्रह्मा कुमारी के ईश्वर पर फिट नहीं होगी। जो भी इस सर्वशक्तिमान ईश्वर का पारिभाषिक रूप से शब्द को तो ले लिया पर परिभाषा अपनी दे दी। जो भी रामपाल के ईश्वर का जो भी सनातन ईश्वर का इस तरह से विरोध करेगा कि शब्द ले लिया। सनातन से जुड़े हुए शब्दों को ले लिया। मगर उसके अर्थ में घोल-मोल करके और जो है एक मनः कल्पित ईश्वर बना दिया। तो क्या होगा कि वह मनः कल्पित ईश्वर कभी भी यह सत्यम ज्ञानम अंतम ब्रह्म सिद्ध नहीं होगा। वह कभी भी असतो मा सद्गमया तमसो मा ज्योतिर्गमया मृत्यु मृतम गमया इस प्रश्न का जवाब उत्तर सिद्ध नहीं होगा। इसलिए तीसरे स्टेप पर यह प्रश्न आएगा कि क्या रामपाल द्वारा प्रतिपादित ईश्वर मोक्ष और धर्म का अस्तित्व
00:14:20:14 सिद्ध होता है। ठीक है? ये थोड़ा सा करेक्शन होगा। कल ये डिस्पैच हो जाएगा लेटर आश्रम के लिए। अच्छा जी शास्त्रवाद जी बोले जी भैया जय श्री राम जय श्री राम जी भैया ये तो ऐसा देखेंगे अब ये लेटर जब जाएगा तो क्या परिणाम आता है कुछ नहीं वो आएगा नहीं मुझे पता है वो आएगा नहीं वो जब उसको घसीट के कोर्ट इत्यादि के द्वारा जब लाया जाएगा तभी वह आएगा ऐसे नहीं आएगा उसको मालूम है उसका यहां सब खत्म हो जाएगा। आएगा तो बाकी आ गया तो अच्छी बात है। आप लोगों को एक मनोरंजन मिलेगा। आनंद मिलेगा। आ गया तो है ना? बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल हां बाकी आप हां जी जी जी बोलिए
00:15:14:26 बोल रहे हैं। आप ही बोलिए आप ही बोलिए। हां हां तो अब बात आती है कि हिंदुओं को यह सीखना चाहिए, समझना चाहिए कि किस दिशा में किसी धर्म विरोधी के समक्ष धर्म का पक्ष रखें। जो भी धर्म विरोधी है उसके पास तीन चीजें नहीं होंगी। जो भी धर्म विरोधी है उसके पास कभी भी तीन चीजें नहीं होंगी। क्या-क्या नहीं होगा? सर्वशक्तिमान ईश्वर, परम स्वतंत्र मोक्ष और शाश्वत धर्म। तो शुरुआत कैसे करेंगे अपने धर्म का पक्ष रखने की? क्या तुम्हारा ईश्वर सर्वशक्तिमान है? क्या तुम्हारे द्वारा मिलने वाला जो मोक्ष है मोक्ष है? शाश्वत मोक्ष है, शाश्वत मुक्ति है। हां। और तीसरा क्या जो इस इन दोनों चीजों को प्राप्त कराने के निमित्त जो तुम विधि दे रहे हो जिसमें शब्द प्रमाण की बहुत अत्यधिक आवश्यकता है। क्या वो शाश्वत विधि है? परंपरा प्राप्त विधि है। वो शाश्वतता के अंदर सब आ जाता है। परंपरा प्राप्त इत्यादि और उदाहरणार्थ वर्णाश्रम इत्यादि। तो यह आपका स्ट्रक्चरल वे होना चाहिए एक किसी भी विरोधी से बात करने का। तो हमारा वही है। पहले सर्वशक्तिमान ईश्वर
00:16:29:27 परम स्वतंत्र मोक्ष और फिर आ गया शाश्वत धर्म सिद्ध करो। ठीक है? अब यह तो हो गए मुख्य बिंदु यहां पे इनका जो कोई भी धर्म विरोधी होगा उसकी चटनी बनने वाली है। यहां तक बन चुकी होगी। अब इसके बाद हम आगे अगला प्रश्न कह ये कहते हैं क्या रामपाल प्रामाणिक आचार्य है? ध्यान रखना हमने अभी यह नहीं पूछा है कि रामपाल तत्वदर्शी है कि नहीं? तत्वदर्शी की कहानी अलग है। अभी हमने चौथा प्रश्न डाला है। क्या रामपाल प्रामाणिक आचार्य है? तो प्रामाणिक आचार्य का मतलब है कि शास्त्रों के द्वारा बताए गए जो चिन्ह हैं प्रामाणिक आचार्य के लिए वही उसमें घटित होने चाहिए। तो क्या रामपाल प्रामाणिक आचार्य है? यह चौथा प्रश्न बनेगा। अब यह एक सेगमेंट हो गया। चार प्रश्न क्या कहते हैं? पांच प्रश्न एक साथ हो गए। हां, एक और है इसमें। क्या रामपाल द्वारा प्रतिपादित कर्तव्य और अकर्तव्य का निर्णय ही धर्म है? हालांकि यह जो प्रश्न है उसमें आ गया जो मैंने बोला अभी क्या रामपाल द्वारा प्रतिपादित ईश्वर मोक्ष और धर्म का अस्तित्व सिद्ध होता है। तो इसमें वो तीनों चीजें आ गई। वो अलग-अलग कर लेंगे तो मोक्ष मोक्ष
00:17:44:28 तो ऊपर कह ही दिया है। धर्म का अस्तित्व सिद्ध वाला प्रश्न अलग से हो जाएगा। तो ये उसमें उसी में आ गया। अब जो अगला जो गुच्छा है वह कुछ इसकी जो तथाकथित फेंटसीज हैं इस पूरे ग्रुप के द्वारा बनाई गई। रामपाल के द्वारा उसका उसकी फुलझड़ी छोड़ी गई और फिर उसके द्वारा बहुत सारा इधरउधर वो किया गया कि भाई अरे ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता कौन है? यह है वो है। हम ये सब बातें अब तो दूसरा वाला इसमें आ जाएगा। दूसरे वाले गुच्छे में ये सब चीजें आ जाएंगी। तो पहला प्रश्न क्या है दूसरे गुच्छे का? क्या रामपाल द्वारा प्रतिपादित नीति और अनीति ही सनातन धर्म है? ध्यान रखिए पहले हमने धर्म की सिद्धि की है। ठीक है? अब जो दूसरा सेगमेंट है उसमें यह कह रहे हैं क्या? अब इसमें शब्द प्रमाण की प्राथमिकता है। जो पहला वाला पार्ट है उसमें युक्ति की प्राथमिकता है और जो दूसरा वाला पार्ट चालू हुआ है इसमें शब्द प्रमाण की प्राथमिकता होगी। ठीक है? तो शब्द प्रमाण क्या है? कि भाई जो तुम बातें कह रहे हो कि ऐसा करो वैसा करो। चलो युक्ति से तो धर्म सिद्ध नहीं हो रहा है।
00:19:00:02 मोक्ष को प्राप्त कराने वाला सिद्ध नहीं हो रहा है। सर्वशक्तिमान ईश्वर सिद्ध नहीं हो रहा है। और शाश्वत धर्म भी सिद्ध नहीं हो रहा है। फिर भी क्या जो तुम बोल रहे हो वह शास्त्रों से मैच करता है? तो ऐसे में पहला प्रश्न आएगा क्या तुम्हारे द्वारा बताई गई जो नीति और अनीति का विवेचना है क्या वो सनातन धर्म है क्या सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार कबीर ही भगवान और रामपाल उनका अवतार है ठीक है यह शब्द प्रमाण की प्राथमिकता चल रही है अब तीसरा क्या है क्या सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार रामपाल तत्वदर्शी अब देखो उसमें युक्ति थी आचार्य वाली कि लक्षण घटित होने चाहिए। आचार्य के जो लक्षण होने चाहिए वो लक्षण घटित होने चाहिए। अब यहां पर यह जो पर्टिकुलरली जो शब्द है तत्वदर्शी बहुत बड़ा और इस पर आज एक विस्तृत विवेचना मैं आपको बताने वाला हूं। बहुत बढ़िया अच्छा लगेगा। तो तत्वदर्शी है कि नहीं? तो तत्वदर्शी इस पर बात होगी। तीसरा प्रश्न दूसरे गुच्छे का तीसरा प्रश्न। चौथा प्रश्न है। अब यह जो दो मोटी चीजें मैंने देखी हैं। क्या सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार होने दिवाली
00:20:15:27 भैया दूज रक्षाबंधन करवा चौथ महाशिवरात्रि श्राद्ध विवाह संस्कार इत्यादि धार्मिक अनुष्ठान पर्व त्यहार यह सब अशास्त्रीय हैं। इसमें भी प्राथमिकता आ गई कि हमारे पास शास्त्र है कि नहीं इनके संबंध में तो क्या यह सब अशास्त्रीय है इसको वह सिद्ध करे आ करके अशास्त्रीयता इनकी और इसी क्रम में आगे क्या सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती और गणेश एवं इसी क्रम में आगे उनके अवतारों पर लगाए जाने वाले रामपाल द्वारा लगाए जाने वाले जो आक्षेप हैं क्या वह प्रामाणिक हैं भाई नीचे कर दो स्लाइड नीचे कर दो लोगों को दिखे अगला अगला गुच्छा क्या वह प्रामाणिक हैं? तो और इसी में वह भी आ जाएगा कि जो आक्षेप है कि वो भगवान नहीं है वो भी इसमें आ जाएगा। तो यह कुल मोटे-मोटे 10 प्रश्न हैं। कोई ज्यादा नहीं है। मुझे लगता है कि भाई वह इतने ज्ञानी और सिद्ध महापुरुष हैं जो इनका जवाब जो है 5 से 10 मिनट में दे देंगे। मुझ जैसे अज्ञानी को जैसा कि लोग समझते हैं उनको जानने वाले तो भाई मैं तैयार हूं। है लिए
00:21:31:03 हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर खून से खेलेंगे होली कल कर धर्म मुश्किल में है सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है ठीक है हाथ जिनमें हो जुनू कटते नहीं तलवार से सर जो उठ जाते हैं वह झुकते नहीं ललकार से जिंदगी तो अपनी महिमा मौत की महफिल में है सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पर कफन। जहां हथेली पर लिए लो बढ़ चले हैं एक कदम। दूर रह पाए जो हमसे दम कहां मंजिल में है। सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। तो भैया हम तो तैयार हैं। सीना लिए अपना इधर। है ना? अब आपकी बारी है। आप दिखाओ कितना है वह। हमारे पीछे राम की सेना है। अब तुम देख लो तुम्हारे पीछे क्या है। कबीर दास जी की सेना है कि नहीं है? तुम्हारे वाले। हमारे वाले तो भगत थे। अब इसमें आगे हम कह रहे हैं कि यदि रामपाल को अपनी आध्यात्मिक मान्यताओं पर पूर्ण विश्वास है और वे हमारी इस चुनौती को स्वीकार करते हैं तो वह
00:22:46:04 सार्वजनिक रूप से अपनी सहमति और स्थिति स्पष्ट करें। उनकी सहमति के आधार पर ही लक्ष्मण पुरी की पावन यानी लखनऊ की पावन धरा पर इस भव्य चर्चा का आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा। जय श्री राम। वैसे इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी पर मुझे लोग कह रहे थे कि भैया आप भी चुनौती दो। अब तो ठीक है दे दी। तो भैया जितने भी रामपाल को मानने वाले हैं अब वह अपने रामपाल से पूछे जाकर के कि गुरु जी शिवश ने तो आपको चुनौती दे दी है अब आप उससे ज्ञान चर्चा करके झंडे गाड़ दो अपने ज्ञान के तो अगर रामपाल वाकई में एक बुद्धिमान व्यक्ति होगा जो कि है भाई अपना इतना बड़ा तंत्र खड़ा करने में बुद्धिमता तो चाहिए तो यदि रामपाल वाकई में बुद्धि बुद्धिमान व्यक्ति होगा तो शिवश नारायण द्विवेदी से स्वयं को कम से कम 100 किलोमीटर दूर तो रखेगा। ठीक है? सच्ची बात है। यदि दोबारा से नोट कर लो जितने भी रामपाल वाले हैं। रामपाल में यदि वाकई में बुद्धि है। यदि रामपाल
00:24:01:06 वाकई में बुद्धिमान है। और यह जो उसने जो जो हमारे देवी देवताओं के लिए अनर्गल प्रलाप किया है। यह सब उसने बुद्धि पूर्वक किया है। अबोध बालक वश नहीं किया है। वो जो बचपना होता है वह सब नहीं है। मूमति नहीं है और उद्देश्य पूर्वक किया है और यदि वह बुद्धिमान व्यक्ति है तो वह शिवश नारायण द्विवेदी से 100 किलोमीटर की दूरी बना करके रखेगा कम से कम और बाकी तो इससे ज्यादा ही रखेगा तो अगर थोड़ी बहुत भी बेकली हुई तो हो सकता है कि वह इस चीज को स्वीकार कर ले कि भैया मैं आ रहा हूं हम आएगा तो अभी हिंदुओं के हित में है। अच्छा है जितने भी सनातनी हैं और नहीं आएगा यदि नहीं आएगा तो वो तो वह भी हमारे हित में है। आएगा तो सामने से उसका पर्दाफाश होते हुए दिखाई देगा और नहीं आएगा तो थोड़ा सा थोड़ा कम आनंद आएगा परंतु परंतु उनको दिखेगा कि उनके बाबा जी में ज्ञान का कितना बल है। जी शास्त्रवाद जी
00:25:15:01 सही कहा आपने अब देखते हैं कि यह चैलेंज एक्सेप्ट होता है या नहीं होता है इनकी तरफ से और यहां आते हैं कि नहीं सोचते कि यह कहीं सुनिश्चित होता है या नहीं। वैसे ये लोग नहीं आने वाले हैं। ये लोगों ने जो अभी खिचड़ी पका दिया है अब अब वो लोग खिचड़ी खाने में व्यस्त है। अच्छा ये जो स्ट्रक्चरल मैंने वो किया है ना क्योंकि इन्होंने बात क्या है कि बहुत सारे विवाद उखाड़ लाएंगे। यहां से ये निकालना है। इतनी सारी बातों पर कब तक बात करते रहेंगे? सीधे मूल की बात कर लो। सर्वशक्तिमान ईश्वर परम स्वतंत्र मोक्ष शाश्वत धर्म। तो वो स्ट्रक्चरल मैंने उसको तैयार किया है। बहुत ज्यादा इधर उधर की बातें नहीं।
00:26:01:18 बिल्कुल टू द पॉइंट आपका क्वेश्चन है और देखते हैं कि आखिर इसका उत्तर वो देने के लिए आते भी है कि नहीं। तो जितने भी रामपाल के चित्र देख रहे हैं वो जाकर के अपने गुरु जी को यह संदेश पहुंचा दे। हम कि भाई अब आपके दिन पूरे हो गए हैं। या तो मौन रह के अपनी पराजय स्वीकार कर लो और या फिर जाकर के शंकराचार्य के उस अल्पज्ञ शिष्य से अपनी चटनी बनवा लो। द चॉइस इज योर।
00:26:37:03 ठीक है? तो भाई आओ भाई तत्वदर्शी जिसके गुर्दा है उसी को यह कहने का हक है। तो अगर तत्वदर्शी हो तो आओ करो सामना। ठीक है? अब जरा मैं तत्वदर्शी पे आपको कुछ चीजें बता दूं। वैसे तो प्रामाणिक आचार्य कौन होता है? यह हमने अपने अनेक वीडियो में बताया हुआ है। शास्त्रों के अनुसार। अब जरा तत्वदर्शी की विवेचना कर दूं। एक स्ट्रक्चरल वे में आप लोग आए हैं तो देखिए रामपाल का कहना है कि वह तत्वदर्शी है। रामपाल के लोग यह दावा करते हैं कि वो तत्वदर्शी है। अब तत्वदर्शी कैसे है? कि भगवत गीता के 434 में तत्वदर्शी से ज्ञान यज्ञ का ज्ञान लेने की बात की गई है। और इसी क्रम में आगे रामपाल यह दावा करता है कि गीता के अध्याय 15 श्लोक चार में तत्वदर्शी की पहचान बताई गई है। और यह बताया गया है वहां पर कि जो उल्टे वृक्ष की ठीक-ठीक व्याख्या कर देगा। संसार रूपी उल्टे वृक्ष की ठीक-ठीक व्याख्या कर देगा। वही वेदों को जानने वाला है। वहां पर तत्वदर्शी शब्द नहीं आया है। 434 पर तत्वदर्शी शब्द आया
00:27:52:07 है और यहां पर वेदों को जानने वाला शब्द आया है। अब यदि यह इन दोनों श्लोकों में आपस में रिलेट करते हैं तो इससे सिद्ध होता है तत्वदर्शी कौन है? वेदों को जानने वाला। ठीक है? अब हम इससे आगे चलते हैं कि रामपाल के अनुसार ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं होगी। ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं होगी। तो 434 के अनुसार तत्वदर्शी कौन है? जो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देगा। यानी कि यदि रामपाल अपने आप को मोक्ष देने वाला मानता है तो फिर यहां वो तत्वदर्शी नहीं हो सकता। क्योंकि तत्वदर्शी तो ऐसा ज्ञान दे रहा है जिससे मोक्ष नहीं होगा। क्योंकि ज्ञान यज्ञ से मोक्ष नहीं होता। भगवत गीता के अनुसार प्रामाणिक आचार्यों के अनुसार ज्ञान यज्ञ से मुक्ति होती है। मगर रामपाल ने अपनी गीता 13 ज्ञान अमृत में कई जगह पर लिखा है कि ज्ञान यज्ञ से पांचों यज्ञ जो हैं पांच प्रकार के जो यज्ञ हैं उनमें से किसी से भी मुक्ति नहीं होगी। ज्ञान यज्ञ से भी मुक्ति नहीं होगी। और उसने ज्ञान यज्ञ से नाम दान इत्यादि को अलग करके रखा है कि जब तक तुम नाम नहीं लोगे तत्वदर्शी से तब तक तुम्हारी मुक्ति नहीं होगी। तो उसने अलग करके रखा है। अब बात यह आती है जब उसने अलग करके रखा है तो यानी ज्ञान यज्ञ से नाम
00:29:07:13 लेना इत्यादि ये सब भक्ति करना यह सब अलग है। तो जब अलग है तो ज्ञान यज्ञ का ज्ञान देने वाला तत्वदर्शी और तत्वदर्शी से मुक्ति नहीं होगी क्योंकि ज्ञान यज्ञ से मुक्ति नहीं होगी। तो या तो सबसे पहले रामपाल अपने आप को यह मान ले कि वह जो है मोक्ष का ज्ञान देने वाला नहीं है और या फिर वह यह मान ले कि 434 के अनुसार वो तत्वदर्शी नहीं है। ठीक है? अब आगे चलते हैं। 15.4 में संसार रूपी उल्टे वृक्ष की ठीक-ठीक व्याख्या करने वाले को वेदों को जानने वाला कहा गया है। ठीक है? जबकि देवी भागवत में देवी भागवत में छठव स्कंध में 11व अध्याय में 36 से लेकर के 40 वे श्लोक के बीच वेदों को जानने वाला कौन है जो गायत्री मंत्र का जाप करता है देवी दर्शन के लिए अभिलाषा मन में रखकर देवी दर्शन की लालसा से युक्त होकर जो गायत्री मंत्र का जाप करता है इनके दिए हुए वो जो यह सब चोरी छुपे जो नाम इत्यादि जो कुछ देते हैं वह जो गायत्री मंत्र का जाप करता है वह वेदों को
00:30:22:14 जानने वाला कहा गया है देवी भागवत में कहां पर छ 11 36 से 40 ठीक है तो अगर तत्वदर्शी वेदों को जानने वाला है 15.4 के अनुसार तो वेदों को जानने वाला कौन है जो गायत्री मंत्र का जाप कर रहा है मां भगवती के दर्शन की अभिलाषा मन में लेकर के और इस प्रकार से वेदों को जानने वाले के रूप में भगवान के अन्य स्वरूपों को भी भक्त बताया गया है। ठीक है? तो इसका मतलब ब्रह्मा, विष्णु, महेश, भगवती और गणेश इनको भगवान मानने वाला, इनके मंत्र का जाप करने वाला ही वेदों को जानने वाला है और वेदों को जानने वाला ही तत्वदर्शी है। ठीक है? और सुनिए और क्या है? अब ये सब क्या है ना ये बचपने बचपना लगता है ये सब बातें करने में। रामपाल के विषय में बहुत हल्के लेवल की इसकी बातें हैं निचले स्तर की पर क्या करें गटर को साफ करने के लिए गटर में उतरना जैसा होता है ना कि भाई गटर को साफ करना है तो गटर में उतरना पड़ेगा तो उसी तरीके से रामपाल के द्वारा फैलाई गई जो अज्ञानता है जो उसने मिथ्या फैलाई है जो हमारे देवी देवताओं के लिए अश्लील बातें कही है अपमान पूर्वक चीजें की है तो इन चीजों को साफ करने के लिए उसकी दुनिया में नीचे
00:31:37:18 उतरना ही पड़ेगा हां अब इसमें और आगे चलते चलते हैं। भगवत गीता दो 16 के अनुसार सत और असत के भेद को बताने वाले सत और असत का भेद बताया गया ना कि सत का कभी भाव नहीं सत्य का कभी अभाव नहीं होता और असत का कभी भाव नहीं होता। यह जो व्याख्या की है इस व्याख्या को करने वाले को तत्वदर्शी कहा गया है। ठीक है? तो इस प्रकार से भगवत गीता का वक्ता जो हमारे अनुसार भगवान श्री कृष्ण है और रामपाल के अनुसार वो काल नाम का कोई राक्षस है तो वो जो वक्ता है वो इस भेद को जान रहा है और वो व्याख्या कर रहा है इसलिए वह तत्वदर्शी हो गया दो 16 के अनुसार जो गीता का वक्ता है वो भी तत्वदर्शी सिद्ध होता है सुन ले भाई रामपाल इसको काम आएगी आने से पहले तैयारी करने में काम आएगी हालांकि पहली बॉल पर क्लीन बोल्ड हो तुम पहली बॉल पर क्लीन बोल्ड अभी बता दे रहा हूं। ठीक है? बाकी आना हो तो आ जाना। यदि मैच का मजा देना हो अपने दर्शकों को और विशेष रूप से जो सनातनी लोग हैं ना जो अभी भी अपने धर्म में आस्था रखते हैं। अगर उनको आनंद देने का मन हो
00:32:52:26 तो आ जाना। बाकी अभी तुमने जो तुम्हारे लोग हैं वह फॉलो करते हैं हमारा चैनल देख रहे होंगे कैसे अधर्मियों की वाट लगती है पहले ही प्रश्न में वो मेरे ऊपर है कि मैं चर्चा को लंबा चलाना चाहता हूं या नहीं समझ रहे हैं शास्त्रवाद जी मैं चर्चा को लंबा चलाना चाहता हूं हां या नहीं ये हमारे ऊपर है ये हमारे ऊपर है समझ रहे हो ना कौन है हम अब आगे हां बड़ा वाला तो शास्त्रों में व्यास जी सहित अन्य कई ऋषि मुनियों को तत्वदर्शी कहा गया है रामपाल के ही ग्रंथों में जो कबीर वाणी के ऐसे कई अंश हैं रामपाल की छपी पुस्तकों में जहां पर वशिष्ठ जी इत्यादि को तत्वदर्शी तत्ववेता तत्वज्ञ इत्यादि कहा गया है। ले भाई यह है तेरा खंडन। ठीक है? और बता दूं आपको रामायण में बालकांड में प्रथम सर्ग में राम जी को तत्वदर्शी तत्ववेता तत्वज्ञ कहा गया है। ठीक है? हो गया टू स्टॉप द ट्रेन पुल द चैन।
00:34:08:24 और आजकल आजकल क्या हो गया ना आप वो आर्काइव पे जाओ और जो भी ग्रंथ है उसमें जो है तत्वदर्शी तत्वता तत्वज्ञ इत्यादि शब्द डाल के ढूंढो। आपको द अनेकानेक प्रमाण मिल जाएंगे। जहां पर प्रामाणिक लोगों को रामपाल से भिन्न लक्षण वालों को तत्वदर्शी कहा जा रहा होगा जो हमारे अपने हैं। ठीक है? आप लोग ढूंढ सकते हो। यद्यपि ये तो स्वा अध्ययन के से जो बहुत पहले का लिखा हुआ वो है ये जो मैं आपको बता रहा हूं। अच्छा
00:34:42:02 इसके बाद यदि वेदों को इसके बाद क्या है? श्रीमद् भागवत चार 18 तीन से पांच द्वारा प्राचीन ऋषियों को तत्वदर्शी कहा गया। जिनको यह कहता है कि अरे वो जानते नहीं थे। और यह कहा गया कि उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर श्रद्धा पूर्वक भलीभांति आचरण करने वाला ही कल्याण प्राप्त कर पाता है। और उनसे विमुख होकर मनमाने आचरण करने वाला जो होता है उसके सभी प्रयास निष्फल होते हैं। यह कह दिया भागवत में। ठीक है? अच्छा यह तत्वदर्शी की व्याख्या है। केवल तत्वदर्शी क्यों नहीं है रामपाल? अब आगे आ जाते हैं। श्रीमद् भागवत एक दो अब यह बहुत बहुत ज्यादा इनेटिव चीज है। आप लोग इसको नोट कर लीजिएगा। श्रीमद् भागवत एक दो 10 से 11 के अनुसार। ठीक है? यहां पर बताया गया है कि तत्व क्या है? हमारे ग्रंथों में यह भी बताया गया अपने मन से नहीं तत्व किसे कहते हैं वह भी समझ लो तो और यहां पर भी यह
00:35:57:03 बताने वालों को कि तत्व किसे कहते हैं? यह बताने वाले को यहां पर भी तत्वदर्शी कहा गया है। ठीक है? तो यहां पर धर्म का फल बताया गया है मोक्ष। धर्म वही है जो मोक्ष दे। अगर मोक्ष नहीं है तो धर्म नहीं है। ठीक है? पहली बात तो यह है। अभी मैं तत्व नहीं बता रहा और जो जीवन का जो वास्तविक फल है वह क्या है? तत्व को जानना। तत्व की जिज्ञासा ही जीवन का एकमात्र फल है। यानी ज्ञान। ठीक है? अपने स्वरूप का बोध। अब आ जाते हैं कि क्या बताया है? तत्व किसे कहा गया है? ज्ञाता और गेय यानी कि ज्ञान के द्वारा प्राप्त किए जाने जाना जाने वाला जो पदार्थ है ज्ञाता यानी कि जो ज्ञान प्राप्त करने वाला है और ज्ञान के रूप में जिसको प्राप्त किया जाना है। ज्ञान प्राप्त करने वाला और ज्ञान के रूप में जिसको प्राप्त किया जाने वाला है। इन दोनों के भेद से रहित इन दोनों के भेद से रहित जो अखंड अद्वय सच्चिदानंद स्वरूप ज्ञान है।
00:37:13:13 जब ज्ञाता और गेय के बीच में भेद नहीं है। तब जो आपको जो भेद रहित जो ज्ञान है सच जिसको सत कहते हैं सच्चिदानंद स्वरूप कहते हैं वो ज्ञान ही उस ज्ञान को ही तत्व कहते हैं। ज्ञाता और गेय जाना जाने वाला पदार्थ जानने वाला पदार्थ और जाना जाने वाला पदार्थ इन दोनों में अभेद का जब जो ज्ञान है अभेद का ज्ञान उसी को तत्व कहा गया है भागवत ठीक है कहां पर है एक दो 10 से 11 और अभी एक बंपर नाम और है यहां पर है ना एक और नाम लेते जाइए तो अब जो तत्वदर्शी वह कौन है जो ज्ञाता और गेय के बीच में अभेद वाला ज्ञान दे वही तो हो गया क्योंकि अभेद होना चाहिए। अभेद अद्वय भेद से रहित अखंड अद्वय सच्चिदानंद स्वरूप ज्ञान को ही तत्व कहते हैं। तो रामपाल से वो अखंड ज्ञान क्या है? कि कबीर यहां खड़ा है तो यहां क्या है? उसके बगल में क्या है? कबीर की शक्ति है तो फिर वह शक्ति और शक्तिमान अलग-अलग कैसे वह सब उसमें
00:38:28:24 आ जाएगा कि उसको ज्ञान है कि नहीं वह सब अखंड ज्ञान है कि नहीं और बाकी भेद से रहित जो ज्ञान है वही तत्व है भेद से रहित ज्ञान है वही तत्व है और वो जो ज्ञान स्वरूप तत्व है उसी को अलग-अलग स्तरों पर यह बहुत बड़ी बात कहने जा रहा हूं उसी को बहुत अलग-अलग स्तरों पर ब्रह्म, परमात्मा और भगवान कहा जाता है। यह भी भागवत में लिखा है। यानी कि अलग से और ब्रह्म से ऊपर की कोई एंटिटी है ही नहीं। तत्व से किसे जानना है? ब्रह्म को। किसके माध्यम से जानना है? परमात्मा के माध्यम से। परमात्मा तक कैसे पहुंचेंगे? भगवान से। ठीक है? जानने योग्य क्या है? ब्रह्म। किसके द्वारा जानोगे? भगवान के द्वारा। परमात्मा के द्वारा। तो दो चीजें यहां क्लियर हो गई। तत्व क्या है और ब्रह्म परमात्मा और भगवान क्या है? ये लोग जो अंतर करते हैं ना ब्रह्म पर परमात्मा और भगवान में तत्व को ही अलग-अलग स्तरों पर ब्रह्म परमात्मा और भगवान कहते हैं। सगुण साकार में भगवान हो गए। सगुण निराकार में परमात्मा हो गए और निर्गुण निराकार
00:39:44:02 में ब्रह्म हो गए। ठीक है? तो ये तो खैर एक जो अद्वैत की वो आ गई यहां पर। फिर भी तो ज्ञाता और ज्ञान के भेद से रहित जो अद्वय ज्ञान है उसी को तत्व कहते हैं। तो तत्वदर्शी कौन है? जो भेद से रहित ज्ञान को धारण करता है और उसका वक्ता होता है। तो आओ भैया बताओ भेद से रहित ज्ञान। भैया मैं इसे स्क्रीन पर दिखा दो क्या? हां दिखा सकते हो? दिखा दिखा दो। मैं यहां पे स्क्रीन शेयर कर रहा हूं। हां हां कर दो कर दो
00:40:40:00 इसको मैं पूरा कर लूं क्या? मैं पूरा कर लेता हूं। आ गया। अच्छा ठीक है। दिखाइए। हम नहीं है 10 और 11 हम बड़ा करिए इसको देखिए यहां क्या लिखा है ये लोग जो कहते हैं ना कि अरे वहां ये मिलेगा बादाम मिलेगा भोग विलास का फल इंद्रियों को तृप्त करना नहीं है उसका प्रयोजन है केवल जीवन निर्वाह ठीक है अब तत्ववेता लोक ज्ञाता और गे भेद से रहित अखंड अद्वितीय सच्चिदानंद स्वरूप ज्ञान को ही तत्व कहते हैं। तो तत्व की परिभाषा समझ लो भाई। ब्रह्म को ही जानने वाला तत्वदर्शी है। यदि तुम्हारे पास ब्रह्म से अलग कोई अलग चीज है तो उसको पहले तुम तत्व सिद्ध करो। उसी को कोई ब्रह्म, कोई परमात्मा और कोई भगवान कहता है। तो अगर तुम्हारे पास ब्रह्म से कोई अलग चीज है। हुआ क्या है कि जब भगवान ब्रह्म होते हुए कई रूपों में वहां पर है तो जिस रूप को प्रधान करना है उसको
00:41:55:08 परम ब्रह्म कह दिया। अपेक्षाकृत वहां पर जो उनका जिस जिसकी वहां प्रधानता नहीं है गौ है जिसकी उपस्थिति उसको वहां पर जो है कह दिया मगर हमारे यहां पर परम ब्रह्म सूत्र तो नहीं लिखा गया व्यास जी के द्वारा ब्रह्म सूत्र लिखा गया और वही परम ब्रह्म ब्रह्म और प्राप्तव्य हमारा मोक्ष स्वरूप भगवान ईश्वर परमात्मा वही अलग-अलग स्तरों पे है। निरुक्त में भी ब्रह्म को बताया गया है। ब्रह्म और परम ब्रह्म में कोई अंतर नहीं है। अक्षर पुरुष में भी परम अक्षर पुरुष में भी कोई अंतर नहीं। अलग-अलग स्तर है उनके। ठीक है? एक ही तत्व को अलग-अलग स्तरों पर परम अक्षर, अक्षर इत्यादि कहा गया। एक ही तत्व को अलग-अलग स्तरों पर ब्रह्म, परम ब्रह्म इत्यादि कहा गया है। मगर वास्तविकता में जब देखेंगे तात्विक रूप से तो तत्व क्या है? ज्ञाता और गे से गे भेद से रहित सच्चिदानंद स्वरूप ज्ञान ही तत्व है। उसी तत्व को किसी स्तर पर ब्रह्म किसी स्तर पर परमात्मा और किसी स्तर पर भगवान कहा जाता है। ठीक है? तो ब्रह्म को जानने वाला ही तत्वदर्शी है। परम ब्रह्म अगर तुम्हारा ब्रह्म अलग है क्योंकि परम ब्रह्म और ब्रह्म एक ही है। ठीक है? परम ब्रह्म और ब्रह्म
00:43:10:12 एक है। इस बात को नोट कर लो घंचों और अगर अलग है तो उसको तत्व सिद्ध करो। इससे अलग सिद्ध करो। तत्व सिद्ध करो। हमने तो तत्व की प्रामाणिक परिभाषा दे दी। तो ब्रह्म को जानने वाला, परमात्मा को जानने वाला, भगवान को जानने वाला ही तत्वदर्शी है। और क्योंकि तुम इनसे इतर किसी और की बात करते हो तो अगर उसको जानने वाले होने के रूप में तुम अपने आप को तत्वदर्शी कह रहे हो तो पहले जिसको तुम जानने का दावा कर रहे हो इनसे इतको तुम तत्व सिद्ध करके दिखाओ। ठीक है? इसको कहते हैं झूठे की हद तक चोर की तक। जी हटा दीजिए।
00:43:54:28 अब इसमें इसको मिनिमाइज कर दें। हां। अब इसमें यदि अब इसमें कुछ एक तर्क और लेते जाइए। यदि हमें संसार रूपी उल्टे वृक्ष की ठीक-ठीक व्याख्या के आधार पर ही यह तय करना है कि तत्वदर्शी कौन है? तो इसके लिए सर्वप्रथम हमें स्वयं संसार रूपी उल्टे वृक्ष की ठीक ठीक व्याख्या ज्ञात होनी चाहिए। वही बात आ गई। जो ब्रह्म को जाने वो ब्राह्मण है। भाई मुझे कैसे पता चलेगा ये ब्राह्मण है कि नहीं? मैं भी ब्रह्म को जान लूं। अगर मैं भी स्वतंत्र रूप से ब्रह्म को जानने ही लगा फिर ब्राह्मण की उपयोगिता क्या रह गई? क्या जरूरत है फिर? जो ब्रह्म को जाने वो ब्राह्मण है। वही वाली बात कि जो संसार रूपी उल्टे वृक्ष की ठीक ठीक व्याख्या कर दे वही तत्वदर्शी है। हां तो यानी कि मुझे यह जानने के लिए कि यह तत्वदर्शी है कि नहीं? तो मुझे यह मालूम होना चाहिए ना कि इसकी ठीक ठीक व्याख्या है क्या? पहली बात। इसका मतलब इस बात के आधार पर उल्टे वृक्ष की विवेचना के आधार पर तत्वदर्शी तय नहीं किया जा सकता। कौन है? ठीक
00:45:10:00 है। दूसरी बात कि इसके साथ ही साथ गीता प्रेस एवं अन्य कई ऐसे भाष्यकार हुए हैं भगवत गीता के जिन्होंने भगवत गीता पर भाष्य लिखते समय संसार रूपी उल्टे वृक्ष की व्याख्या की है। जैसे जय दयाल गोविंदका जी का जो भाष्य है उसमें भी उल्टे वृक्ष का चित्र देकर के उन्होंने बताया है। तो क्या उनको भी ये तत्वदर्शी मानते हैं? नहीं मानते। ऐसे में क्या रामपाल के अनुसार वह लोग तत्वदर्शी हैं? नहीं है। अच्छा अब अंत में एक और बात लेते जाओ। बाबा जी। रामपाल के अनुसार भगवत गीता में 4% ज्ञान काल का अपना मनमुखी ज्ञान है। चार नहीं पांच। भूल गया था मैं काफी दिन हो गए ना पहले एक दौर था वो हमारे वो क्या कहते हैं उसको होता है ना एक टॉप रेटेड चला करता है कि आजकल कौन चल रहा है अब कौन चल रहा है अचानक से वो बदलते रहते हैं है ना कि टॉप
00:46:25:06 रेटेड किसी समय कोई चला किसी समय कोई चला आजकल इन दिनों आर्य समाजी सबसे ऊपर बने हुए हैं अलंकारी भाई जो हैं हां रामपाल के अनुसार भगवत गीता में 5% ज्ञान काल का अपना मनमुखी ज्ञान है। अर्थात वह प्रामाणिक नहीं है। ऐसे में भगवत गीता प्रदान करने वाले के प्रति अश्रद्धा उत्पन्न हो जाने की स्थिति में अश्रद्धा कि जो बोलने वाला है वो झूठ बोल सकता है। अब क्या होगा उत्पन्न अब पहली इसमें एक कैच और है कि आज तक यह नहीं बताया गया कौन-कौन से मंत्र है वह अगर 700 श्लोक हैं भगवत गीता में 700 श्लोक हैं तो पांच% होते हैं 35 श्लोक वो कौन-कौन से 35 श्लोक हैं ये आज तक अब ये बता भी नहीं पाएंगे इन्होंने इतनी खिचड़ी कर दी है ना ये बता भी नहीं पाएंगे खैर तो जब उन उसके प्रति भगवत गीता को कहने वाले के प्रति अश्रद्धा उत्पन्न हो गई तो भगवत गीता के ही किसी श्लोक के आधार पर आप किसी को तत्वदर्शी या परम संत इत्यादि नहीं कह सकते क्योंकि अभी तो भगवत गीता ही रडार पे है कि उसमें से कौन सी बात सही हो सकती है कौन सी नहीं जो
00:47:40:09 झूठ बोल सकता है वो तो कहीं भी झूठ बोल सकता है ऐसे में भगवत गीता के प्रति प्रमाण्य बुद्धि सिद्ध नहीं होती अर्थात भगवत गीता के आधार पर किसी को अगर रामपाल के अनुसार चले तो रामपाल भगवत गीता के अनुसार तत्वदर्शी सिद्ध नहीं होंगे। दूसरी बात अगर यह कहा जाए कि क्योंकि रामपाल तत्वदर्शी है। जैसे एक व्यक्ति बोला कि भाई जोहरी होता है वह परख लेता है कि कौन सी चीज सही है कौन सी नहीं। तो रामपाल यदि यह कहा जाए क्योंकि रामपाल तत्वदर्शी है इसलिए उसे पता है कि भगवत गीता में कौन से मंत्र जो है कौन से श्लोक जो है वो सच्चे हैं और कौन से श्लोक जो है वो झूठे हैं उसको पता है वो क्योंकि तत्वदर्शी है तो भगवत गीता का तो अभी निस्तारण नहीं हुआ है कि उसमें कौन से श्लोक सच्चे हैं और कौन से झूठे हैं। उससे पहले रामपाल को तत्वदर्शी मानना पड़ेगा। वो किस आधार पर मानोगे? अगर रामपाल की चयनात्मक प्रक्रिया को अपनाना है भगवत गीता की प्रामाणिकता अथवा अप्रामाणिकता के विषय में तो भगवत गीता के बिना स्वतंत्र रूप से रामपाल को तत्वदर्शी मानना पड़ेगा वहां
00:48:55:15 कौन सा शास्त्र होगा क्योंकि शास्त्र तो स्वयं अभी रडार पर है तो तो क्या है? तो यहां ध्यातव्य है कि रामपाल द्वारा गीता के श्लोकों की छटनी करने के संबंध में रामपाल के प्रति प्रमाण्य बुद्धि होना प्रमाणिक रूप से प्रमाणिक प्रमाण्य बुद्धि होने हेतु रामपाल का प्रमाणिक रूप से तत्वदर्शी होना आवश्यक है। ठीक है? तो वह तत्वदर्शी कैसे सिद्ध करोगे कि उसके आधार पर हम यह समझ पाए कि गीता में कौन से श्लोक जो कह रहा है सही है कौन से श्लोक गलत है वो तत्वदर्शी कहां से सिद्ध होगा तो यह पूरी आज हमने तत्वदर्शी की विवेचना सुन ली जी हर्ष जी अब आप बताएं और फिर से अंत में कहूंगा रामपाल यदि तुम में दम है यदि तुम में सामर्थ है तुमने यदि तुम्हें यह लगता है कि तुमने जो कुछ बकवास की है अपनी किताबों में अपने चैनल पर अपने वक्तव्यों में हमारे आराध्य जो देवी देवता हैं भगवान भगवत स्वरूप हैं उनके विषय में जो तुमने बकवास की है यदि तुम्हें लगता है कि उसमें जरा भी कुछ तंत्र
00:50:10:26 पानी है उसमें कुछ तत्व है और तुम्हें लगता है कि तुम तत्वदर्शी हो तुम्हें लगता है कि कबीर भगवान है तुम्हें लगता है कि तुम्हारे द्वारा बताया जाने वाला धर्म धर्म है तुम्हें लगता है कि तुम ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध कर सकते हो अपनी व्याख्या के अनुसार तो आओ करो सामना शिवश नारायण द्विवेदी का तुम्हें चुनौती दी जाती है करो सामना ठीक है तो यह दो पक्ष हो गए तत्वदर्शी की हमने एक स्ट्रक्चरल वे में जान लिया और रामपाल को हमने चुनौती दे दी जी बताएं जी भैया बहुत बढ़िया तरीके से आपने चुनौती भी दे दिया है और उन लोगों तक ये बात पहुंच भी जाएगी बहुत जल्दी उनके शिष्य लोग ये ये कर ही देंगे उन तक पहुंचा करके सारा संदेश और वही जैसे बोलिए बोलिए बोलिए अभी कुछ दिन पहले शायद ही लाइव था शायद जब पहाड़ी जी के चैनल पर एक रामपाल वैसे आया था मैंने उससे तत्व के विषय में पूछा कि भाई तत्व क्या है तो वो बता नहीं सका था पर आज आपने जो है तत्व के विषय में बताया अब देख लो भाई सारे
00:51:25:27 लोग तत्व किसे कहते सतर्द चिल्लाने से नहीं होता सत्य के विषय में पहले समझो तत्व क्या है वो बहुत सही है अभी पता चल गया लोगों को और बाकी आपका लाइफ तो बहुत बढ़िया से आपने समझा भी दिया तत्वदर्शी की पहचान बता दी तत्वदर्शी कौन है ये सब और मुख्य रूप से आपने उसे चैलेंज भी दे दिया है अब देखना है कि वो आता है कि नहीं वो नहीं आएगा भाई उसको तत्व ज्ञान नहीं है मगर उसको सामाजिक जो उसका जो आपराधिक उसका बैकग्राउंड उससे जुड़ा हुआ है केस चल रहे हैं तो उसको मालूम है ना कि उसको क्या करने से लाभ होगा क्या करने से नहीं होगा व्यवहारिक लाभ अंतत गतवा तो उसको लाभ भी नहीं है मगर उसको उस लाभ से कोई मतलब नहीं है उसको तो दैहिक वाली चीजों का ही पोषण करना है
00:52:22:14 आप आप जो है ज्ञान वो हमने जो लेटर लेटर लिखा है। एक लोग कह रहे हैं तुम्हें बोलने का ढंग नहीं है। तो भाई जैसे तुम्हारा बाबा बोलता है वैसे ही उसको बोला बोला गया है। बाकी जो लेटर लिखा है उसमें उसके लिए तूतड़ा की भाषा का उपयोग नहीं किया गया है। उसमें उसके लिए उन उन उसका की जगह उन की बात की गई है। जैसे उसके की बजाय उनके तो जिस रूप में वो आएगा सामने उस रूप में ही उसका स्वागत किया जाएगा। बाकी उसने तू तड़ाक हमारे ब्रह्मा विष्णु महेश भगवती गणेश सबके लिए किया है तो हम क्यों ना करें तमीज तो तुमको नहीं है तुम अगर अभी सामने आ जाओगे ना तो तुम मैं क्या बताऊं तुम्हारा क्या हाल होगा तुम अभी सामने आ जाओ आप जो है अपना ना धर्म सिद्ध कर पाओगे ना मानवता ठीक है तो इसलिए मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में हां जी लिंक दे दीजिए किसी को चेहरा दिखा के अगर चर्चा करनी है रामपाल के विषय में तो आ सकता है। चेहरा दिखाकर लिंक दे दीजिए। जी बोलिए शास्त्रवाद जी
00:53:29:20 जी बिल्कुल आप लिंक दे दीजिए। आएंगे ये लोग चर्चा करने। कल तो आ रहे थे जी के चैनल पे तो आ रहे थे अपना नाम बदल बदल के अपने आइडेंटिटी को छुपा करके। अब अब ये लोग कह रहे हैं शंकराचार्य को बिठाओ। नहीं तो मुझसे दिन भर कमेंट किया करेंगे कि तुम वहां क्यों नहीं जा रहे हो धनाना धाम अब अब मामला फस गया है अब तो वह भी आ सकता है ना अब मुझसे कह रहे हैं कि अब शंकराचार्य को बिठाओ तो मैं फिर वही वाली बात जो एक बार आर्य समाजियों ने क्या किया था कि उन्होंने जो है पत्र भेजा मुझे कि भैया चर्चा कर लो तो चर्चा तय हुई चर्चा में कुछ चीजें उसने उन्होंने ऐसी कह दी कि भैया जो है रिकॉर्डिंग केवल हम करेंगे हमारा स्थान होगा वरना नहीं होगा। तो मैंने कहा स्थान भी तुम्हारा है, रिकॉर्डिंग भी केवल तुम्हारी तो यह तो गलत बात है। तो नहीं माने। अच्छा विषय भी अपने मन से कुछ का कुछ निकाल लिया। भाई हमारे सीधे सरल विषय हैं। ईश्वर को सर्वशक्तिमान सिद्ध करो। इस पर चर्चा करो आके। नहीं नहीं ये तो आप बात कर चुके। बात कर चुके तो आंसर कहां मिला? आंसर थोड़ी ना मिला है। सबको सबकी सबकी बोलती बंद हुई है उसमें। तो फिर उन्होंने क्या किया? ऐसी शर्तें रखी विपरीत वाली कि भाई हम जा ही ना पाए, कर ही ना पाए। तो फिर हमने भी शर्त रखी। फिर हमने क्या शर्त
00:54:44:26 रखी मालूम है आपको? क्या शर्त रखी हमने? हमने कहा कि ठीक है मैं आपकी शर्त मंजूर है और हम जो है आपसे चर्चा करने को तैयार हैं। आपकी समस्त चर्च शर्तों को स्वीकार करते हुए। आप जो है आप हमारी यह शर्त है कि जो हमसे चर्चा करने आएगा वो डायरेक्ट हेलीकॉप्टर से चर्चा स्थल पर उतरेगा। ठीक है? पहली शर्त। दूसरी शर्त उसने केवल लाल कलर का लंगोट पहना होगा और वो वो कौन सा था? जलेबी भाई या बदनाम वो फलानी की जवानी इन सब जो यह जो वो है ना एक तरीके से निचले स्तर के शब्दों वाले जो गीत हैं समाज में आजकल बड़े फेमस है इन पर वो नृत्य करेगा अगर ये वो करता है तो हम उसकी शर्तों को मानते हुए उसके साथ चर्चा करेंगे तब वो भाग गए फिर दोबारा नहीं आए सामने मतलब आप ही विपरीत शर्तें रखना जानते हो क्या है है ना? ये वाली बात है। अ ये भाई साहब अपना चेहरा दिखा रहे हैं। इनको लेते हैं। जी
00:56:00:12 जी हरिवंश जी जी जी हरिवंश जी मैं मैं सर आपको बस इतना बताने आया था कि जैसे मैं जो गोविंद गुरुकुल जी है ना तो उनके साथ हम ज्ञान चर्चा करते हैं तो ये नॉर्मली जितने भी रामपाल वाले ये नॉर्मली मेरे को जानते हैं तो अब ये सब प्लानिंग कर रहे हैं कि आपकी मतलब जो आईडीज वगैरह उन पे स्ट्रीक वगैरह मार के और आपकी इसको ये बैन करवाना चाहते हैं। तो मैं सिर्फ इतना मतलब जरा बताने आते कि आप अपनी तरफ से थोड़ा प्रिपेयर रहे कि आप डिफेंस कर सके। नहीं एक तो हमारा बंद हुआ है सब के बहुत टाइम से जी बोलिए बोलिए जी जी अब तो अब तो ये भी चाह रहे हैं कि क्योंकि मेरे पास भी कई कमेंट्स आते हैं कि मतलब कई बार मैं आपका डायलॉग मारता हूं कि क्यों पड़े हो चक्कर में कोई नहीं है टक्कर में तो उससे ये ज्यादा चिढ़ जाते हैं। तो अब ये बोल रहे हैं कि जी तो अब ये बोल रहे है कि अब देखियो मतलब उनकी आईडी अगर बचा सको तो बचा लियो तो मैं आपको जरा आपको बताने आया था चलिए धन्यवाद आपने इतना वो प्रकट
00:57:15:13 किया चिंता प्रकट की वैसे हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता हमें और जो मैं आपको एक बात बताऊं कि Twitter Twitter मैं इसको कटिंग करके शॉट निकाल के डालना आप लोग हां जो अब मैं बोलने वाला हूं जो रामपाल है ना रामपाल और उसका जो तंत्र है उसका स्वरूपभूत लक्षण है क्या उसका प्रचार तंत्र Twitter Instagram YouTube Facebook ये जितने भी ऑनलाइन वो हैं मंच वो उसका प्रचार तंत्र है और यह प्रचार तंत्र उसका स्वरूप भूत लक्षण है। स्वरूप भूत लक्षण उसे कहते हैं जिसके बिना उस तत्व का उस पदार्थ का अस्तित्व ही सिद्ध ना हो। ठीक है। मगर हमारा स्वरूप भूत लक्षण ये सब नहीं है। हमारा स्वरूप भूत लक्षण है शंकराचार्य। हमारा स्वरूप भूत लक्षण है राम। ये सब हमसे अलग भी हो जाएगा। हमसे अलग भी हो जाएगा। तब भी तूफानी फैसला करेगा रोशनी का और दिया वो चलेगा जिसमें दम हो। ठीक है। जी जी। तो ये सब बातें नोट कर लें। वो मैं उदाहरण दे दूं एक बार फिर से मुझसे रहा नहीं जा रहा है कि इस तरह की बातें करने वाले
00:58:30:19 जो लोग होते हैं तो उनको मैं इस समय बात कर रहा हूं जो इस तरह की भड़काऊ बातें करते हैं अनगढ़ प्रलाप करते हैं अश्लील बातें करते हैं हमारे देवी देवताओं के बारे में वो जो बड़ा वाला जानवर होता है ना वो बड़ा वाला एक जानवर होता है वो क्या कहते हैं उसको क्या कहते हैं शास्त्रवाद जी वो बड़े वाले को क्या कहते हैं हाथी हाथी हाथी हां अच्छा हाथी वो जी हाथी वो हम है और वो वो होता है ना वो कौन होता है कौन होता है वो वो कौन होता है हां वो तुम हो ठीक है कुत्ते जी तो इसीलिए कहता हूं मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में जी जी इनको इनको पता नहीं हमारे पास क्या हमारे पास ये है शक्ति के रूप में ऊंचे गुरु गुरु गोविंद और ग्रंथ है हमारे पास मैं मैं भी ये कई बार ये आते है ना मेरे पास डिबेट के लिए मैं इनको यही बोलता हूं कि सिर्फ पांच मिनट अगर पांच मिनट में आपको निरुत्तर नहीं कर दिया वो भी कि मैं स्टार्टिंग
00:59:45:20 से आपकी और गोविंद जी की मैं वीडियो दोनों की देखता हूं तो उससे मेरे को इतना हो गया कि मैं इनको डायरेक्ट अब टक्कर देता हूं कि बस 5 मिनट अच्छी बात है अच्छी बात है एक आम बोएंगे तो लाखों आम पाएंगे है ना? जी जी जी बिल्कुल बिल्कुल बिलकुल और शायद आपने मेरे को जी शायद आपने मेरे को पहचाना नहीं कि मैं वही हूं जिसने आपके पास डीएम किया था कि गो समान आना विनय के लिए जो हम वो चला रहे हैं। अच्छा अच्छा जी जी जी हां भाई 27 अप्रैल को 27 अप्रैल को सभी लोग अपनेप जिले में ये आह्वान क्रियान्वित है। सक्रिय है। गौ सम्मान आहान अभियान 27 अप्रैल को सभी लोगों को अपने निकटतम इस अभियान के जो प्रबंधक हैं उन उनके साथ जुड़कर के वहां जाना है तहसील में और वहां हस्ताक्षर अपने करके देने हैं और वहां पर पूरे देश में करोड़ों लोग एकत्रित होने वाले हैं 27 अप्रैल के दिन तो जिनकी भी जो भी गौ भक्त हैं जो भी गाय के प्रति गाय माता के प्रति श्रद्धा रखते हैं वो इस अभियान से अवश्य जुड़े और 27 अप्रैल के दिन अवश्य आवश्यक रूप से वह जो है अपने अपने जिले में तहसील कार्यालय पर जाए
01:01:00:24 और अपना हस्ताक्षर करते हुए अपना जो अंश है वो प्रदान करें इस अभियान को। ठीक है? एक मांग की जा रही है कि गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित किया जाए। उसके संबंध में है। पूज्यपाद करपात्री जी महाराज कहते थे और जगुरु शंकराचार्य भगवान भी कहते हैं वर्तमान पूरी पीठाधीश्वर कि ठीक है आमूलचूल परिवर्तन जब तक नहीं होगा नहीं होगा कोई बात नहीं जैसे मूल में पानी डालने की बात करते हैं कि भाई जब तक मूल में पानी नहीं डालेंगे तब तक जो है चीजें सुधरेंग नहीं सही से ये कहते हैं। मगर फिर भी वो ये कहते हैं अगर किसी भी जगह खड़े होने से एक गाय की भी प्राण की रक्षा हो रही ना एक तो अवश्य होना एक गाय के भी प्राणों की रक्षा हो जाए तो अवश्य होना तो इतना बड़ा अभियान है तो जरूर उससे कुछ ना कुछ कहीं ना कहीं गौवंश की रक्षा होगी तो आप लोग अवश्य जुड़े उसमें यह ना सोें कि भाई इससे मैं दूर हूं या यह मेरा तंत्र नहीं है या यह अलग है ऐसा ऐसी भावना हटा के गाय माता के लिए एकजुट हूं। जी और मैं यह भी बताना चाहता हूं कि यह अभियान सिर्फ यहीं तक रही नहीं रुकेगा। अगर हमारी
01:02:15:27 मांगे पूरी नहीं की जाती तो आगे चलकर शायद 26 जो आने वाली जनवरी होगी उसको हमारे 3000 गौ रक्षक आंदोलन पर बैठ जाएंगे। पूरे 30 दिन के लिए जिनका खाना पीना दिल्ली की 7000 घरों से आएगा। तो अगर हमारी नहीं होती मांगे पूरी तो हम वो भी करेंगे। अगले स्टेज हैं। अगर इस स्टेज पर नहीं मानेंगे तो अगला है दिल्ली में धरना प्रदर्शन और उसके बाद उसके बाद फिर आमरण अनशन के लिए भी कुछ संतगण तैयार हुए हैं। वो ठीक है। तो बहुत व्यापक रूप से अभियान है। आप लोग इससे अवश्य जुड़े। इसमें आपको कुछ नहीं कोई और कुछ नहीं करना है। केवल आपका एक हस्ताक्षर चाहिए कि आप ये चाहते हैं कि गाय को राष्ट्रमाता घोषित कर दिया जाए। ठीक है जी जी जी जी जी अनिकेत जी जय श्री राम जय श्री राम भैया प्रणाम जय हो बताइए इसमें एक दिक्कत आता है भैया अगर हम किसी से कहते भी है ना तो कोई ना कोई किसी ना किसी पार्टी वाला समझ लेता है कि तुम इस पॉलिटिकल पार्टी से हो उस पॉलिटिकल पार्टी से तो उनसे थोड़ा टैकल करना मुश्किल हो जाता है तो उनको क्या उत्तर दिया जाए आपके अनुसार
01:03:31:06 मैंने भी उत्तर दिया ना मैंने अभी दिया उत्तर वो चाहे कोई भी दल हो, कोई भी आरएसएस हो या आर्य समाज वाले ही क्यों ना हो, इस वाले ही क्यों ना हो, अगर कहीं पर भी खड़े होने के कारण एक गाय के प्राणों की भी रक्षा हो रही है तो हमें वहां पर खड़े होना ही चाहिए। ठीक है? यह ना देखते हुए कि भाई वह तंत्रों की विचारधारा अलग है। आइडियोलॉजिकली हम लोग अलग-अलग हैं। यह है वह है। यहां बात गाय माता की हो रही है। जो जो भी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से गाय माता का भक्त है, गाय माता में श्रद्धा रखता है, उसको वहां पर एकजुटता दिखानी चाहिए। कितना भी वैचारिक मतभेद हो उसको अलग हटाकर गाय माता के लिए एक मंच पर आना चाहिए।
01:04:21:08 मैं जरा इनको एक बार दिखाता हूं। ये जो है ये उनका ऑफिशियल है। तो इसमें हम सिग्नेचर वगैरह लेते हैं जो अपनीपनी सहमति देते हैं। तो अगर किसी को भी अगर ये चाहिए तो वो मेरे से कांटेक्ट कर सकता है। मैं जरा एक बार अपनी आईडी भी एक बार शो कर देता हूं कि जिसको चाहिए वह मेरे से कांटेक्ट कर सकता है। यह बेवकूफ क्या कह रहा है? जब जाकिर नायक यह कर रहा था, वह कर रहा था। यह बता तू कि जब बौद्ध ये मेरी आईडी है। उसप आप भेज सकते हो मेरे को अगर किसी को चाहिए तो हां बड़ी बड़ा कर दीजिए इनकी स्क्रीन। एक मिनट। क्या आप आप अपनी आईडी ना मुझे WhatsApp करिए। मैं यहां पे वो कर देता हूं। शो कर दूंगा। इजी पड़ेगा। ऐसे क्लियर दिख नहीं रहा। हां भैया आप कुछ बोल रहे थे कमेंट वाले को। मैं ये बोल रहा हूं। ये व्यक्ति बोल रहा है जाकिर नायक ने सारे शंकराचार्यों को चुनौती दी थी। फिर वही बात आ गई। पहली बात तो यह है कि कोई भी उठाई गिरा आकर के बोलने लगेगा तो वहां चले जाना चाहिए। तो अब तुम यह बहाना भी मत बनाना कि मैं शिवश के बुलाने
01:05:36:19 पे नहीं जाऊंगा। यह बहाना तुमने खत्म कर दिया है बोल के। भाई थोड़ा सा स्पेस था कि भाई मैं नहीं जाऊंगा शिवश के बुलाने पे। हालांकि वह कोर्ट बुला लेगी नहीं आओगे तो। दूसरी बात यह है कि तुमने खंडन किया किस आधार पर? किस आधार पर किया? किस आधार पर किया? बताओ। वेद के आधार पर किया। वेद कहां से मिले? हवा से आ गए। कहां से आ गए तुम्हारे पास वेद? और तुम कहां थे? जब बौद्धों बौद्धों ने जो है पूरा नरक मचा रखा था। नास्तिकवाद फैला रखा था। कहां गए थे तुम? तुम थे ही नहीं। अभी पिछले 50 साल का तुम्हारा इतिहास नहीं है। वही वाली बात। अरे हमने तुम्हें जब वेद दिए थे तब तुम्हारे सर पर तरपाल आई थी। बरसात से बचने की हैसियत नहीं तुम्हारी। गोलीबारी की बात करते हैं आप लोग।
01:06:24:16 सही बात है। कमेंट कमेंट कमेंट हटा दो भाई। सही बात। भैया एक बार अपना नंबर बोलेंगे प्लीज। यह देखो यह क्या कह रहा है देखो ये अपनी खुजली इस तरह से मिटाने की कोशिश करते हैं। इनके खाज हो चुकी है। इससे खून बढ़ता है हम लोगों का भाई। नंबर बोलेंगे 740 8301869 740830 18869
01:06:57:27 मैंने तीर मार तो लिया भाई। यह देख ना तीर मैं डंके की चोट पर तेरे चीजों को बंद कर रहा हूं और क्या चाहिए तेरे कार्यालयों में जाकर के वहां पर खड़ा होके बंद करवा रहा हूं उसको अपने सामने लोग कह रहे हैं हम नहीं जानते रामपाल के तंत्र को और क्या चाहिए भाई तू आजा करके दिखा दे मेरे किसी मंदिर को बंद मैंने तो तेरा बंद करवा दिया ना तू मेरे किसी मंदिर को बंद करवा के दिखा दे इसको तेरे हिसाब से प्रमाणिक जो सब्जी वाले के पुलिस वाला ले चले गए थे ना कैसे सर्जिकल स्ट्राइक किया था वो सब्जी वाला जो इन लोग के बुक बेच रहा था कहां लिखा है कि गांव की रक्षा करनी है अब वो ठीक है अलग से बताएंगे गाय की रक्षा करनी है एक दिन में सारा घी मत पियो अभी तत्वदर्शी का घी पिया है ना सारा घी अभी एक ही दिन में मत पियो तुम तुम्हें लूज मोशन हो जाएंगे बंद करो
01:07:56:21 तो बाबूलाल ये कह रहा है कि भाई तुमने क्या क्या तीर माल किया भाई तेरे गढ़ में खड़े होकर के तेरी चीजों को बंद करवाया है तू बंद करवाना है हमारी किसी चीज को हम दिखाएं वीडियो दिखाना है क्या हां किया आपने मैसेज वो चले गए क्या हां जी मैसेज किया आपने 740830186 69
01:08:32:19 अच्छा यहां पे ये लोग बेचारे अपनी वो मिटाया करते हैं जो उनको जो वो होती है ना तड़प क्या करूं मैं इसका सवाल का जवाब दे नहीं सकता हमारे बाबा जी ने वो तत्व ज्ञान दिया नहीं हमें पवन दास को याद है पवन दास एकदम जमीन के पैरों पैरों तले जमीन खिसक गई थी जब मैंने पूछा था कि कबीर जहां खड़े थे कंधा शुरू होता है यहां खत्म होता है उनके जो बगल की स्पेस थी वो किसने बनाई फिर वो इस पे आ गया मैं ये सब नहीं जानता मैं तो बस सीधे कहता हूं कि अगर मेरा भगवान असली भगवान है तो मैं आग में कूद जाऊंगा वो इस पर आ गया समझ रहे हो मतलब तर्क और प्रमाण सब खत्म अब जान की बाजी लगाओ 10 मंजिल से कूदो वो सिद्ध करेगा ज्ञान
01:09:29:15 इन लोगों को याद दिलाना आवश्यक था। यह लोग भूल गए थे। ये भैया ये एसएमएस से इनविटेशन मांगा था। मैंने वो सेंड किया है। एसएमएस से इनविटेशन जी जी जी आपने मुझे मैसेज किया है मैंने जो नंबर बोला है उस पे 7408301869 बेचारे रामपालियों में बड़ा दर्द है।
01:10:07:27 आप आ जाएंगे ऐसे बीच में तो फिर क्या होगा इनका सदमे लग जाते हैं इन लोगों को अच्छा इनको सबको मालूम है सबसे सबसे खतरनाक शत्रु इनका मैं ही हूं इनको सबको मालूम है ये बात अच्छा आपको पहचानते हैं भैया एक्चुअली जब वो बाहर आया ना रामपाल तो वो जो जितना भी वीडियो था ना उस मैंने वो लोग बहुत ये कर रहे थे जलने वाले जल रहे हैं ये वो सब मैंने बोला शिवाय नारायण द्विवेदी याद क्या तो सामने से उसने बोला कि शिवाय नारायण द्विवेदी केवल कुतर्क करता है मतलब वो जानता है आपको कुतर्क की कुतर्क की कुतर्क की शास्त्रीय परिभाषा क्या है वो भी बता दो फिर ये जब अपनी वीडियो ये जो अपनी वीडियोस वगैरह डालते हैं ना तो ये थंबनेल भी ऐसा लगाते हैं कि शिवांश नारायण द्विवेदी बीच डिबेट में भड़का शिवांश ने दी गाली ऐसी ऐसी तो ये वो लगाते हैं थंबनेल अरे आपने देखा नहीं भैया अभी तक आप देखोगे तो देखो ना लिखा है अगर तुम में हिम्मत है तो हरियाणा में चला जा वहां पे वहां से वापस नहीं आएगा इस टाइम संत रामपाल जी महाराज को सब किसान सम्मानित कर रहे हैं सही बात है वहां से वापस नहीं आएगा
01:11:23:06 जो जो जाएगा वापस नहीं आएगा वहां रामपाल रामपाल के वो वो हथियार वाले वो देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है ना AK-47 पता नहीं कौन-कौन से हथियार मिले थे वहां वापस अच्छा ये बता तेरे रामपाल में वो नहीं है क्या हिम्मत वो नहीं आ सकता क्या लखनऊ मेरे पास मेरे ऊपर तो देशद्रोह का मुकदमा भी नहीं है जी भेजा आपने मुझे रहने दो आप मैं आपको मैं आपको इंस्टा पे भेजता हूं वहां से दिखा देना एक बार भेजो भेजो भेजो जी
01:12:03:03 एक मिनट यही खाली बोलते रहेंगे ये सब लोग कह रहे हैं अपने किस नाम से आएगा
01:12:45:20 इतनी देर में तो बोल देते हम लोग अरे हमारे शंकराचार्य ने उपनिषद में भाष्य किए भैया हमारे शंकराचार्य ने पंचदशी लिखी है हमारे शंकराचार्य ने समर्थ रामदास को खड़ा किया जो छत्रपति शिवाजी खड़े हुए खड़े हुए हमारे शंकराचार्य ने रामसेतु का आंदोलन लड़ा है राम मंदिर का आंदोलन लड़ा है हमारे शंकराचार्य ने गणित पर इतने ग्रंथ लिख दिए। विदेशों से लोग पढ़ने आ रहे हैं। इसरो के साइंटिस्ट आ के वहां मार्गदर्शन ले रहे हैं। और क्या-क्या बताऊं तुम्हें? कुछ पता है? वो क्या था डायलॉग? लता तुझे कुछ नहीं पता। ऐसे करके था कुछ।
01:13:29:22 जी जी। इसरो वाले आए थे जब उन्होंने 90 मिनट, 90 मिनट, 90 मिनट और 30 मिनट के चार सेशन लिए थे। अच्छा ये देखो ये क्या कह रहा है? खूब लूटो खाओ। यह लूटो खाओ देखो तुम्हारे यहां दान पात्र क्यों लगे बे हैं उसमें क्या डाल के आते हो तुम उन दान पात्रों में क्या डालते हो मैंने देखा है तुम लोग जहां वो लंबलेट हो रहे होते हो वहां बगल में दान पेटी दान पेटी हर हर फोटो के साथ बगल में दान पेटी ऐसे
01:14:12:00 ठीक है हटा दीजिए इनका कमेंट जी आपने भेजा मुझे इंस्टा पे जी जी मैंने आपको इंस्टा पे भेज दिया है किस नाम से आएगा ये होगा सर श्री राधा नाम से है प्रेमानंद जी महाराज की डीपी है नागार्जुन के नाम से आया जी जी जी वही है वही है वही है तो दूसरा नाम क्यों बता रहे हो आप सर ये आईडी ये आईडी का नेम था ना जो मैंने बताया अच्छा अच्छा श्री राधा ऐसे करके हम कॉपी और यह भेजा मैंने अपने जो ऑपरेटर हैं उनके पास
01:14:58:28 ऑपरेटर जी इसको जरा आप शो कर दीजिए इनकी आईडी है जो मेरी भी भैया बहुत टाइम से इच्छा थी। मैं आपको देखता था तो मैं भी सोचता कि एक बार तो मैं शिवान जी से मिलूं और आज वो मेरे को वो हो ही गया कि आपसे भेंट हो ही गई। अच्छी बात है ये तो श्री
01:15:37:06 राधा राधे जीरो जीरो ये लो ये दिखा दो आप बस मैंने पेस्ट किया है यहां इसको उसको कमेंट को शो कर दो आप ऑपरेटर जी ये इनकी आईडी है वो वो दिखा दो अभी एक मैसेज और किया है मैंने वो दिखा दो
01:16:19:10 तो अभियान से जुड़ने के लिए आप लोग इनसे संपर्क करें श्री राधे नाम से इनकी आईडी ये ये इनकी आईडी यही है ना है ना जी जी जी जी बिल्कुल बिल्कुल जी जी बहुत बढ़िया ठीक है तो आशा करता हूं आज आज का ये जो सेशन है ये भी आप लोगों को अच्छा लगा और एक घोषणा और कर रहा हूं वो जो रामपाल के जो भगवत गीता का वो था ना पोस्टमार्टम पोस्टमार्टम वो दोबारा से वो जहां से छूटा है वहीं से कंटिन्यू करने वाले हैं। कौन से चैनल पे करेंगे इंफॉर्मेशन दे दी जाएगी और फिर से कह रहा हूं वैसे रामपाल बुद्धिमान है इस मामले में भाई अपराधिक बैकग्राउंड रहा ही है उसका देशद्रोह का मुकदमा चल ही रहा है तो बुद्धिमान इस मामले इन मामलों में है तो वो दूर रहेगा आएगा नहीं फिर भी आ गया तो हिंदुओं के लिए अच्छी बात है नहीं आया तो भी हिंदुओं के लिए अच्छी बात है और ये लोग देखेंगे कि उनका जो भगवान है ना तथाकथित उसमें कितना तत्व ज्ञान है ठीक है ठीक ठीक है शास्त्रवाद जी जी भैया जी और वैसे भी आपने जो लिंक दिया आज से कोई भी नहीं आया चैनल लेकर मेरे
01:17:34:16 चैनल पे नहीं आते हैं ये लोग इधर उधर जाएंगे जहां इनको थोड़ा लगेगा दूसरे चैनल पर जाकर के जहां इनको लगेगा कि थोड़ा बहुत हम लोग थोड़ी बहुत देर तक फूंक-फूक कर खा लेंगे है ना तो मेरे चैनल पे मैं देखता हूं मैं यही चीज नोटिस मैं ये चीज नोटिस करता हूं मैं देखूंगा पहाड़ी जी के यहां चले जाएंगे सबके यहां चले जाएंगे और सबने इनके इनके रामपाल को बहुत बड़ा भला बुरा कहा होगा फिर भी चले जाएंगे मगर यहां कोई नहीं झांकने आता है यहां कोई नहीं आता है यहां पे बच निकल ले निकल ले निकल ले सब पिट रहे हैं बच के निकल ले वो वाले भाव रहते हैं क्राइम मास्टर गोगो
01:18:26:09 इनको शास्त्रों का खंडन इतना भारी नहीं लगता होगा जितना आपके ये सब जो तर्क और बातें है ना जितनी मिर्ची लगती होगी क्योंकि निकल के बराबर वही आता है इनकी अवस्था वर्तमान अवस्था ठीक है फिर भी मैं कहूंगा रामपाल ठीक है अगर तुम्हारे अंदर ये सामर्थ्य है इन विषयों में अपना पक्ष तुम स्पष्ट कर सकते हो तो आ जाओ और बाकी व्यक्तिगत गत परामर्श यही है जो मैं सबको देता हूं कि मत पड़ो चक्कर में कोई है नहीं टक्कर में जय श्री राम कोई नहीं है टक्कर में जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम
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क्या रामपाल को चुनौती स्वीकार है? तत्वदर्शी भगवान या अपराधी
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