⬜ Not used yet · 00:00:04:00 – 00:13:31:00 (13:27)
00:00:04:00 [संगीत] तुम [संगीत] अब आ जाती है सबसे अति महत्वपूर्ण और रोचक जानकारी। बहुत रोचक है ये जानकारी। बहुत बहुत रोचक। पहले तो इसके Facebook से हमें प्राप्त था कि इसने अपने चार गुरुओं के चित्र लगा रखे थे। जिनमें से एक गुरु का नाम था निगमंद। है ना? तो ये अब वो खंड आ जाता है। तो भैया यह इस व्यक्ति का कहना है कि इससे जो पूर्व का इसका गुरु है इसकी गुरु परंपरा में वो निगमंद है। तो इसके द्वारा प्रदर्शित की गई इसकी तथाकथित गुरु परंपरा में एक निगमंद नाम भी है। इस संबंध में हम बता दे कि निगमानंद ने अपनी शिक्षाओं के माध्यम से सनातन के उन सब उन प्रमाणिक सिद्धांतों पर भी कुठाराघात किया है जिनको भागवतानंद
00:01:19:10 भी स्वीकार करता है। जैसे वर्ण व्यवस्था बिंगो निगमानंद को रखते हो ना अपनी गुरु परंपरा में? निगमानंद तो वर्णाश्रम विरोधी है। अभी देते हैं प्रमाण। और थियोसोफिकल सोसाइटी का एजेंट है भाई। सदस्य रह चुका है। तुम तो बहुत बड़े शत्रु हो ना। मच्छराज की सीरीज बनाई थी ना तुमने। दयानंद इत्यादि पर लेकर के बातें कही थी ना। ये सब उसके एजेंट है। उसके एजेंट है। और तुम किसके शिष्य हो? जो स्वयं थियोसोफिकल सोसाइटी का एजेंट है। सदस्य रह चुका है। खैर तुम्हारी तो बात ही क्या? तुम्हारे तो एडमिशन ही वो आर्य समाज के स्कूल में कराया था ना तुम्हारे पिताजी ने। संबंध तो रहे होंगे जरूर। क्योंकि कोई व्यक्ति किसी भी अपने देश काल परिस्थिति में अगर कहीं भी चला गया तो वहां का हो गया। वहीं का है। विजय श्री के बारे में तो यही कहा था ना। अगर वह उस उस संस्थान जो विवादास्पद संस्थान है उससे जुड़े हुए किसी आदमी के द्वारा संचालित कोई संस्था में किसी एक क्षण के लिए वो दिखाई दे गई कि हां ये गई थी तो ये हो गई फ्री मिशंस की एजेंट और तुमने अपने चार-चार साल वहां पढ़ाई करी तुम्हारे पिताजी के द्वारा तुम्हारा वहां एडमिशन
00:02:34:14 कराया गया तो तुम उसके एजेंट साबित नहीं हुए यह है दोगलापन खैर बैक टू द पॉइंट निगमंद के बारे में जानकारी प्राप्त थियोसफिकल सोसाइटी के एजेंट रह चुके हैं ये और बहुत सारी इनकी शिक्षाएं ऐसी हैं जो अधर्मी है, अधार्मिक है। सनातन धर्म की दृष्टि से बिल्कुल पूर्णतया विरोधाभासी है। क्या-क्या है? निगमानंद ने धर्म उपदेश के नाम पर लगभग सभी क्षेत्रों में अभ्रामिक अभ्रामिक एवं सनातन विरोधी मानसिकता का ही पोषण किया है। तो यहां हम निगनंद द्वारा प्रचारित सनातन धर्म के मूल प्रामाणिक सिद्धांतों के विरोध में दी गई शिक्षाओं से जन सामान्य को अवगत कराते हुए यह प्रश्न करते हैं कि सनातन धर्म के ऐसे घोर विरोधी एवं थियोसोफिकल सोसाइटी के सदस्य का शिष्य स्वयं को निगम स्वयं को निगमंद के शिष्य होने के नाते किस आधार पर प्रमाणिक कह सकता है
00:03:33:13 या फिर स्वयं थियोसोफिकल सोसाइटी को सनातन विरोधी बताने वाला तथा स्वयं स्वयं वर्णाश्रम धर्म का पक्षधर कहने वाला स्वयं को वो निगमानंद जैसे वर्णाश्रम विरोधी का शिष्य किस प्रकार हो सकता है? तुमने क्या सोचा था? कहा था ना झूठे की हद तक और चोर के घर तक जाते हैं हम। अब लो निगमानंद की बातें। तो निगमानंद द्वारा प्रसारित सनातन विरोधी शिक्षाओं के कुछ उदाहरण हम आपको यहां दे दे रहे हैं संदर्भ के साथ। उदाहरण है ये क्या क्या है उड़िया में छपे हुए इनके ग्रंथ हमें प्राप्त है ग्रंथ क्या किताबें अल्लाह और यीशु ये सब भगवान के नाम है जिसकी जिस रूप में प्रीति हो जाती है जिस नाम में प्रीति हो जाती है उसको वो नाम बजना चाहिए कोई अंतर नहीं है अल्लाह भजो या राम समझ गए ये तुम्हारे निगमानंद बता रहे हैं क्या लिखा है अल्लाह एवं यीशु का भगवान नाम भगवान के नाम के साथ समानता क्रिश्चियन यीशु का नाम जपते हैं। मुसलमान अल्लाह का नाम जपते हैं। जो कोई भी भगवान के जैसे भी रूप का चिंतन करता है उसे वैसा
00:04:48:14 ही नाम जपना चाहिए। तो इन्होंने वहां यह नहीं बताया कि क्या अंतर है? बल्कि यह बता दिया वो भी भगवान है। ये भी भगवान है। समान है। अवतार की निंदा भगवान का अवतार पशु नहीं हो सकता। यह वरा मत्स ये सब भगवान के अवतार नहीं हो सकते। कहां लिखा है? इसलिए जो दशा अवतार हैं भगवान के पूर्ण अवतार नहीं है। यह निंदा भगवान के अवतार की कहां लिखा है? निगम तत्व पृष्ठ संख्या 131 और अल्लाह के साथ समानता सनातन ईश्वर की यह कहां लिखा है? निगम तत्व पृष्ठ संख्या 120 जो हमारी पूज्य जगत जननी जगत माता तारा तारापीठ वाली तारा देवी उनको पत्नी के रूप में देखना
00:05:42:21 उनको देखने के लिए तत्पर होना यह सब गंध मचाई हुई है तुम्हारे गुरु ने हम कहां लिखा है योगी गुरु पष्ठ संख्या 10 जगत माता तारा को अपनी पत्नी के रूप में देखने पर निगमानंद के तंत्र गुरु बामा खेपा द्वारा उन्हें जाने को कहना। उन्होंने कहा तुम कहीं और जाओ भाई हमारे यहां तुम्हारी साधना नहीं हो पाएगी। तारा देवी को अपनी पत्नी के रूप में देखने के कारण तथा जगत माता तारा के प्रति पत्नी का भाव जागृत हो जाने पर निगमानंद के मन में देवी देवी को पत्नी भाव से स्पर्श करने की इच्छा जागृत हुई। इसी का शिष्य है ना तू? तू भी ऐसे ही देखता होगा। तभी परी वो जो झूठा वरदान देकर गई उसको भगवती बता रहा है। हम अगर परी सिद्ध हो जाए तो पहले मेरे पास भेजना। यही कहा था ना जिनको परी साधना दी थी।
00:06:44:19 यह देख बाबा खेपा ने उन्हें किसी अन्य के अन्य गुरु के पास जाने को कहा। कहां लिखा है? संत चरितमाला पष्ठ संख्या 24 अद्वैत सिद्धांत की निंदा शंकराचार्य के जाने के बाद समाज में काल क्रम के साथ ज्ञान के नाम पर केवल सुख की बात रह गई एवं आत्मज्ञान आत्म संबंधी समाधि आत्म समाधि को तो को छोड़ समाज केवल ब्रह्म विध होने लगा तथा कालांतर में नास्तिक हो गया उसे हटाने चैतन्य महाप्रभु ने सोहम जपने वाले नास्तिक लोगों का खंडन कर ज्ञान मार्ग की निंदा की। यद्यपि वह स्वयं चैतन महाप्रभु शंकराचार्य परंपरा के दनामी संप्रदाय में दीक्षित थे। कहां लिखा है? निगम तत्व पृष्ठ संख्या 115 वेदांत में उपास्य एवं उपासक का भाव नहीं है। वेदांत में उपास्य एवं उपासना का भाव नहीं रहता। वहां एक ही तत्व को भगवान आत्मा एवं ब्रह्म के रूप में लक्षित किया गया है। यह निंदा चल रही है अद्वैत की। प्रणव एवं स्त्रियों द्वारा शूद्रों द्वारा वेद पाठ का अधिकार दिया जाना। ज्ञानी की वेद पाठ में कोई आवश्यकता
00:07:59:25 नहीं है। वेद ज्ञान है। अतः अज्ञानी को अज्ञान की आवश्यकता है। शूद्र एवं स्त्री अज्ञानी है। अतः वह वेद पाठ करें। जो ज्ञानी है वही ब्राह्मण है। ब्राह्मण को नहीं वेद पाठ करना चाहिए शूद्र और स्त्री को ब्राह्मण को नहीं। निगम तत्व पृष्ठ संख्या 22 से 23 प्रणव सद्गुरु का जाप क्या है? सभी प्रणव लगाकर जप करें। एवं प्रणव सद्गुरु का जाप भी करें। प्रणव के साथ सद्गुरु का जाप भी करें। कहां लिखा है? निगम तत्व पृष्ठ संख्या 24 गांजे का सेवन भी किया है इन्होंने किसी सन्यासी के साथ कहां लिखा है योगी गुरु पष्ठ संख्या 55 शास्त्रीय विधि विधान की निंदा भी की है एक जगह वैष्णवों की निंदा करते हुए कहा है क्या वस्त्र एवं कॉपी ना पहनने से गोविंद कृपा नहीं करेंगे मतलब यह जो विधि विधान है तिलक ना लगाने से गोविंद कृपा नहीं करेंगे शिका धारण करने से गोविंद कृपा नहीं करेंगे धोती बांधने से गोविंद कृपा नहीं करेंगे हम
00:09:10:07 तो ये सब कहा है कहां कहा है योगी गुरु पष्ठ संख्या 203 अब यहां तक क्या क्लियर हो गया अल्लाह के साथ एक बता रहा है भगवान के दश अवतारों की निंदा कर रहा है स्वीकार नहीं कर रहा है थियोसोफिकल सोसाइटी का एज सदस्य रह चुका है और क्या है स्त्री और शूद्रों को वेद पाठ में अधिकृत बता रहा है अद्वैत की निंदा कर रहा है। इस तरह से सनातन सिद्धांतों का पुरजोर विरोध करने वाला प्रामाणिक आचार्य है। और उसके उसका शिष्य अपने आप को बताने वाला प्रामाणिक आचार्य है। तो जो अंधे और जो बैल बुद्धि हो ना वो ही इस व्यक्ति को प्रामाणिक आचार्य के रूप में अपना स्वीकार करें। सनातन धर्म का यदि वह निगमंद का थियोसफिकल सोसाइटी के सदस्य का शिष्य है जिसकी निंदा इसी मूर्ख ने खूब की है तो उपरोक्त व्याख्यान को पढ़कर पाठक सरलता से निर्णय कर सकते हैं कि क्या मां तारा देवी के प्रति कुदृष्टि रखने वाला भगवान विष्णु के अवतारों का खंडन करने वाला कुरान की सीमा के ईश्वर को सनातन ईश्वर के समान बताने वाला वर्णाश्रम
00:10:25:15 विरोधी सनातन शास्त्रों द्वारा बताए गए विधि निषेध का विरोधी थियोसोफिकल सोसाइटी का सदस्य यहां तक कि स्वयं भागवतानंद द्वारा स्वीकार अद्वैत का खंडन करने वाला सनातन वैदिक आर्य हिंदुओं का प्रामाणिक आचार्य किस प्रकार हो सकता है? एवं ऐसे सनातन विरोधी व्यक्ति को गुरु कहने वाला किस प्रकार से कौन से शास्त्रीय विधान के अनुसार प्रामाणिक आचार्य हो सकता है? क्यों? क्यों कहा जाए तुम्हें प्रामाणिक? क्योंकि भागवतानंद ने कहा है। तो इस प्रकार सिद्ध होता है कि भागवतानंद को केवल उसी की वाणी को शब्द प्रमाण मानते हुए ही निग्रह संप्रदाय के प्रामाणिक आचार्य के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। निग्रह संप्रदाय के उस अस्तित्व को स्वीकार किया जा सकता है जिस स्वरूप में यह भागवतानंद प्रस्तुत करता है। ऐसे में यह प्रश्न विचारनीय होगा कि जिसके कथित व्यवहार में गाली गलौज, जिन उपासना, मां भगवती के वरदान और मलेच्छराज जैसी काल्पनिक फिल्मी गप्पे करना सम्मिलित हो। इसके साथ ही साथ किसी स्त्री के अंतर वस्त्रों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने वाला उस पर कुत्ते के साथ चुंबन का झूठा आरोप लगाने वाला मनु के संविधान का उल्लंघन करने वाला किसी स्त्री पर वैश्या होने का निराधार
00:11:40:21 आरोप लगाने वाला व्यक्ति सनातनियों के लिए शब्द प्रमाण कैसे हो सकता है? यह अत्यंत आपत्तिजनक है कि जिन आचार्यों के चरणों में बैठकर उसने ज्ञान प्राप्त किया जिन पर वह आज भी ज्ञान प्राप्ति हेतु निर्भर है। आज भी समझे उनहीं आचार्यों पर अभद्र टिप्पणियां करने वाला और तू तड़ाक जैसी अमर्यादित शैली में बात करने वाले व्यक्ति को प्रबुद्ध वर्ग द्वारा प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता है। [संगीत] तो इन सारी विवेचनाओं के बाद एट द एंड क्या निकला कि भागवतानंद को भागवतानंद के द्वारा स्थापित निग्रह संप्रदाय को उसके स्वरूप को उसके अस्तित्व को उसके साथ भागवतानंद के संबंध को भागवतानंद के निग्रचार के पद को भागवतानंद को मिले वरदान को उसके आचार्यत्व को उसके सदाचारी होने के विषय में [संगीत]
00:12:45:20 क्या प्रमाण है? क्यों माना जाए इन सब बातों को? क्योंकि भागवतानंद ने कहा है [संगीत] यह है 100 करोड़ की निग्रह निकासिका। निकल यहां से और जा सिद्ध कर अपने वरदान को सत्य। वहां किस्कलन हुआ है ना तेरी जीभ से। कर सिद्ध कि वह कर्मेंद्र्रियों से होने वाला अनुचित आचरण नहीं था। मिल गया ना जवाब? मिल गई ना निग्रह निकासिका। अब कर मेहनत। जय श्री राम।
00:13:29:27 [संगीत]
Plans for this video (0)
No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.
-
⬜Hindi SRT Required
YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)
-
⬜English SRT
YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.
-
⬜Title (per Rules)
Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.
-
⬜Description
YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.
-
⬜End Screen
YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.
-
⬜Cards
YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.
-
⬜Playlist Automatic
YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.
-
⬜Thumbnail
YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.
"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.
Playlists
Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).
कपोल कल्पित परंपरा एवं उसकी घृणित वास्तविकता @Dark Secrets By Swami Nigrahacharya गुरु परंपरा क्या है |
Description
(empty)
History
No changes yet.
✂️ Clip Cutter
⌨️ Keyboard shortcuts
Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop
Start
End
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)
Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".
Clips () · Total
Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.
-
⋮⋮