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00:00:01:25 तो सभी को जय श्री राम। आशा करते हैं आप सभी कुशल पूर्वक हो और कल हमने एक चर्चा आयोजित की थी जो हो नहीं पाई थी। नेटवर्क की प्रॉब्लम थी जो रमेश जी हैं उनकी तरफ। तो आज जो है वो ऐसी जगह पर हैं जहां पर नेटवर्क की बाधा नहीं आएगी। तो आज हम इस चर्चा को करेंगे। तो सबसे पहले हम ले लेते हैं रमेश जी को साथ में। जी रमेश जी जय श्री राम। जय श्री राम जी। ओम शांति। जी। तो थोड़ा सा आप हमें अपना परिचय दे दीजिए एक संक्षिप्त कि आप ब्रह्मा कुमारी से के कहां से जुड़े हुए हैं? कब से जुड़े हुए हैं?

00:00:51:01 मुझे लगभग हो गया 12 13 साल हो गया है लगभग और मैं ये नोएडा सेक्टर 26 से जुड़ा हुआ हूं हम अच्छा हां तो तो वहां पर जो मैं गृहस्थ में रहते हुए मैं गृहस्थ में रहते हुए ही अपना और परिवार में सिर्फ अकेले मैं ही चलता हूं बाकी और उतना इसको नहीं मानते। अच्छा तो वहां ये नोएडा से कौन सा बताया आपने नोएडा सेक्टर?

00:01:30:02 26 महाशील दीदी और सुदेश दीदी है उनके सानिध्य में और राधा दीदी है उन लोगों के सानिध्य में है काम चल रहा है [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो ठीक है फिर सीधे हम लोग ठीक है हम लोग सीधे मुख्य विषय पर आते हैं

00:01:54:04 क्या ब्रह्मा कुमारीज के द्वारा पूजित होने वाला ईश्वर परिभाषित होने वाला ईश्वर सर्वशक्तिमान है या नहीं? है या नहीं तो जो भी है वो पूरी चर्चा में समझ में आ जाएगा। मगर आप क्या मानते हैं? मानते हैं कि है। मैं मानता हूं कि ठीक है। तो क्या वो अवतार ले सकता है?

00:02:28:07 अवतार का मतलब क्या आप कहने का है कि अवतार का मतलब शरीर में जन्म ले सके। जन्म लेने से एक ऐसा रूप धारण करके हमें हमारे समक्ष आता है जो हमारे व्यवहार का विषय बन सके। आंखों का विषय बन सके। अच्छा तो ऐसा वो स्वयं को नहीं लेता है लेकिन वो एक्चुअल में क्यों नहीं लेता है ये आगे समझेंगे तो इस बात को समझ पाएंगे कि ले लेगा कि नहीं लेगा। एक एक करके चलेंगे। सबसे पहली बात यह है कि वह अनंत सामर्थ्यवान है या नहीं।

00:03:16:00 अनंत सामर्थ्यवान देखिए अनंत को पहले आप अपने शब्दों में समझाएंगे क्या एक दो तीन चार करते हुए हम अनंत तक पहुंच जाएंगे अनंत अनंत का मतलब है कि ऐसा कोई कार्य ना हो जो वो ना कर सके अनंत सामर्थ्यवान सभी कार्यों को करने की जिसमें क्षमता हो ऐसा कुछ ऐसी दुनिया में ऐसी संसार में कोई क्रिया घटित नहीं हो रही हो जो वो ना कर सके। ऐसी किसी क्रिया का अस्तित्व ना हो संसार में जो वो ना कर सके। हां वो वो देखिए वो समझ में हमें तो आया है ऐसी कोई भी नहीं लेकिन ये सबको समझ में आएगा भाई जी ना तो सब तो फिर देखिए समझ में आपको क्या आया वो यहां का विषय नहीं है कि आपको समझ में क्या आया क्या नहीं आया। विषय यह है कि ब्रह्मा कुमारी जिसको ईश्वर बना के पुजवा रही हैं और वह कह रही है कि सर्वशक्तिमान है, अनंत सामर्थ्यवान है तो क्या वो उसको आगे निभाती हैं अपने इस क्लेम को जो उन्होंने क्लेम किया है, दावा किया है, वो इस क्लेम के अनुरूप ईश्वर की व्याख्या करती हैं या वो व्याख्या बदल जाती है आगे जाकर के। कैसे? जब हमने कहा कि वह अनंत सामर्थ्यवान है।

00:04:31:06 तो वह अवतार नहीं ले सक रहा है। वो कई क्रियाएं ऐसी हैं दुनिया में जो बाधित हो रहा है। तो जब वो उसकी शक्तियां बाधित हो रही है कि जब उसकी शक्तियां बाधित हो रही हैं तो फिर यह क्लेम छोड़ना चाहिए कि ईश्वर अनंत सामर्थ्यवान है। ये क्लेम छोड़ना चाहिए ईश्वर सर्वशक्तिमान है। दूसरे क्लेम करो दूसरे क्लेम करो। आप ये कहो कि एक भाई साहब एक मिनट मुझे पूरा करने दीजिए। बात यह है कि जब हम यह कह रहे हैं कि उसमें अवतार लेने की क्षमता नहीं है। उसमें झूठ बोलने की क्षमता भी नहीं है। यह भी आप मानते हो। दुनिया में जो बुराई का अस्तित्व है वो अपने आप हो गया है। वो उसने नहीं बनाई है। जबकि हम यह मानते हैं कि उसके लिए सब बनाया है। सब उसी ने बनाया है। एक एक मिनट भाई साहब एक मिनट भाई साहब। एक मिनट एक मिनट हमारा यह मानना है कि ईश्वर के दृष्टिकोण से कुछ भी अच्छा या बुरा है ही नहीं। जो भी अच्छाई है बुराई है हमारे दृष्टिकोण से है। ईश्वर के लिए सब बराबर है। है ना? हम लोग क्योंकि बंधन में है तो हमारे लिए कुछ अच्छा और बुरा है। तब ईश्वर ने बताया कि ये जो बुरी चीज है इसके साथ ऐसा व्यवहार करो तो मुक्ति मिलेगी। ये जो अच्छी चीज है इसके साथ ऐसा व्यवहार करोगे तो मुक्ति मिलेगी। ईश्वर के लिए कुछ भी नहीं है। ईश्वर ने तो सब कुछ बनाया। हमारी नजरों में जो अच्छा

00:05:46:12 बुरा है वो सब कुछ उसका जो मूल कारण है वो ईश्वर ही है। ठीक है? तो हमारी दृष्टि में तो यह है। आपकी दृष्टि में आपके लोग यह कहते हैं कि ईश्वर ने जो है झूठ बोलने वालों को नहीं बनाया। झूठ बोलने वालों को ईश्वर ने नहीं बनाया। बुराई को ईश्वर ने नहीं बनाया। एक तो यह बात हो गई। यहां बाधित है। फिर दूसरी जगह वो अवतार नहीं ले सकता। वहां बाधित है। और तमाम सारी जगह अवतार ले सकता है नहीं से ले सकता। इसको भी हम थोड़ा एक्सप्लेन कर दूंगा बाद में। आप एक्सप्लेन करिएगा। मैं अपनी चीजें बता दूं। आप एक्सप्लेन करिएगा। तो अब यहां बात आती है कि वो अवतार अवतार इसलिए नहीं लेता है। इसलिए नहीं लेता है कि जो हमारी पहली वाली बात है ना सर्वशक्तिमान वो किसी भी कारण से ना लेता हो। अगर यदि वह नहीं ले सकता है तो हमें यह क्लेम नहीं करना चाहिए कि वह सर्वशक्तिमान है। क्योंकि लोग सर्व ईश्वर को सर्वशक्तिमान समझ के ढूंढ रहे हैं, पूज रहे हैं। तो ऐसे में जब हमें जो वास्तव में सर्वशक्तिमान ईश्वर की जहां पर पूजा हो रही है उसके विरोध में अपनी पूजा को खड़ा करना है तो हमने वहां से शब्द तो ले लिया कि हम भी वैदिक है। हम भी सर्वशक्तिमान को पूज रहे हैं। हम भी जो है अनंत

00:07:01:15 सामर्थ्यवान को पूज रहे हैं। वहां से शब्द तो ले लिया पर उस अमुक शब्द की व्याख्या अपनी दे दी तो ये धोखा है या तो आप उस शब्द को वो करिए सर्वशक्तिमान को आप अगर यह कहेंगे कि उसका कारण है वो नहीं लेता वो एक अलग चीज हो गई कारण किसी वजह से वो बाधित है एक मिनट भाई साहब किसी वजह से वो बाधित है किसी वजह से वो बाधित है। किसी वजह से वो अनंत नहीं है। किसी वजह से वो सर्वशक्तिमान नहीं है। वो वजह आपकी जायज है कि नहीं है वो हम बाद में देखेंगे। पहले आपको एक क्लेम छोड़ देना चाहिए कि वह अनंत सामर्थ्यवान है। वह सर्वशक्तिमान है। ठीक है? अब आप बताइए। जी

00:07:42:00 देखिए सर्व को समझने के लिए सर्व समझे तो अनंत। अनंत समझे तो एक दो तीन चार पांच करते हुए एक करोड़ दो करोड़ करते हुए अनंत तक तो पहुंच नहीं पाएंगे। तो आप जो कुछ भी बोल रहे हैं वो सर्व में आ जाएगा। और सर्व में मेरा सर्व तो मैं जो बोल रहा हूं मेरा मन जहां तक जा रहा है आप समझिए जैसे कि मेरा मन अगर अमेरिका के बारे में कुछ जानकारी है जा रहा है वहां तक तो मेरा संसार मेरा सर्व तो वहीं तक है समझ गए ना और अगर मैं वहां गया हूं तो उसके बारे में और भी ज्यादा जाएगा। तो इस ब्रह्मांड में मेरा मन जहां तक जा रहा है मेरा स्वयं का सर्व जो है वही है। अब वो आपका सर्व कुछ हो सकता है लेकिन मेरा सर्व और मेरा शक्तिमान वो शिव बाबा है। ब्रह्मा कुमारी में सब इस चीज को कितना समझते हैं और कौन मानते हैं और कितना मानते हैं वो अलग भी हो सकता है। लेकिन मैं अपना बता समझ भी पाया वो बता रहा हूं आपको। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। इसका मतलब आपने मैं अब आपकी बात समझ गया। आपकी सोच जहां तक

00:08:57:01 जा रही है वहां तक के सारे काम वो कर सकता है। हां वो कर सकता है मेरे स्वयं से। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। सबसे पहली बात ये हो गई कि ये आपकी सोच के अनुसार ईश्वर सर्वशक्तिमान है। पहली बात तो ये हो गई। हां। हो गई। ठीक। अब इसमें बात ये आती है। सर्वशक्तिमान है। हां। अब इसमें बात ये आती है कि आपकी सोच अभी तक अमेरिका तक नहीं जैसे अमेर अमेरिका तक जा रही है उसके बाद आगे आप गए नहीं तो आपका भाई साहब मैं आपके आपके बीच में इंटरप्ट नहीं कर रहा था अब आप इंटरप्ट ना करें मुझे बोलने दे आपने बोला ना पूरा ठीक है तो आप आपने कहा कि सर्व के अनुसार आप अमेरिका तक गए हैं तो इसलिए क्योंकि आपका ईश्वर अमेरिका अमेरिका तक जा रहा है तो इसलिए आपके लिए आपका ईश्वर सर्वशक्तिमान है पहली बात ठीक ठीक। तो क्या कहते हैं इसमें? सबसे पहली बात तो ये आ गई कि अगर आप अमेरिका तक जा सकते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप अमेरिका के आगे जा नहीं सकते। दिक्कत यहां है। जा नहीं सकते पे दिक्कत है। आप यह कहो कि हां अगर यह कहा जाएगा तो यह भी कर सकता है। ये कहा जाएगा तो ये भी कर सकता। यानी कि अमेरिका तक आपका जो मन जा रहा है

00:10:12:09 उसके आगे यह नहीं आपने मान लिया कि अमेरिका के आगे मेरा मन जा ही नहीं सकता। ये मान लिया क्या ये मान लिया आपने? नहीं नहीं अनंत में तो है नहीं बाहर होगी। एक मिनट अनंत से बाहर कुछ कैसे हो सकता है? अनंत की जब कोई सीमा ही नहीं है। बाहर तो वो कहलाएगा ना जो सीमा हो कहीं बात है। एक मिनट भाई साहब एक मिनट। अब आपने एक तो अपने मन का उदाहरण दिया कि मेरा मन अमेर तक अमेरिका तक जा सकता है। मगर आपने अपने मन पर यह लगाम नहीं लगाई है कि मेरा मन अमेरिका के आगे तक नहीं जा सकता है। आपने यह कहा है कि अभी तक मेरा मन अमेरिका तक गया है। मगर यह लगाम नहीं लगाई कि अमेरिका के आगे नहीं जा सकता है। पहली बात। दूसरी बात ये आती है कि आपके ही मन के अनुसार वो अमेरिका तक नहीं गया था। ठीक है? मगर जब हम आए जब हम आए और हमने क्वेश्चन उठाया और जैसे ही वह क्वेश्चन आपने सुना आपका मन उसी समय अमेरिका से आगे जा चुका है। जैसे ही हमने वो क्वेश्चन आपने कभी उस क्वेश्चन पे ध्यान नहीं दिया कि ईश्वर अवतार ले सकता है कि नहीं ले सकता है। ठीक है? ईश्वर शरीर धारण कर सकता है कि नहीं कर सकता है। मगर जैसे ही हमने इस क्वेश्चन को आप उठाया और आपने

00:11:27:13 सुन लिया समझ लिया हमारा क्वेश्चन। वैसे ही आपने अमेरिका को पार कर लिया। अब आपके मन में भी वह विचार है कि क्या मेरा ईश्वर फलाना काम कर सकता है कि नहीं जिस काम के बारे में हमें सुनने से पहले तक आपने नहीं सोचा था। समझ में आ रहा है? दो बातें। तीसरी बात तीसरी बात जब आपका ईश्वर आपके अनुसार ईश्वर है आपके अनुसार सर्वशक्तिमान है और आपको नहीं पता कि दूसरा अमेरिका तक गया है कि दूसरा इंग्लैंड तक गया है कि दूसरा चंद्रमा तक गया है। आपको पता ही नहीं है। तो आप दूसरे से क्यों कह रहे हो कि ईश्वर है इसकी पूजा कर चल के मेरे साथ। क्यों कह रहे हो? भाई पहले उससे पूछो कि तुम अमेरिका तक गए हो कि नहीं गए हो? अमेरिका से आगे तो नहीं गए हो। उससे पहले पूछो फिर उसको कहो कि हां अगर तुम अमेरिका तक वाले व्यक्ति हो तो ईश्वर है और चलो मेरे साथ पूजा करो। इसको कहते हैं जो आपने कहा जो ईश्वर है ना वो सच्चिदानंद उसकी परिभाषा है देश कृत देशकृत कालकृत परिस्थिति कृत किसी भी प्रकार की बाधा से बाधित ना हो उसको कहते हैं ईश्वर। आपने यहां पे परिस्थिति डाल दी। आपने यहां पर परिस्थिति डाल दी कि भाई मेरे अनुसार वो ईश्वर है तो आपके अनुसार वो ईश्वर है। आप रखो अपने ईश्वर को पूजो।

00:12:43:03 फिर उसको सबका ईश्वर बना के क्यों चिपका रहे हो दुनिया को? और अगर चिपकाना भी है तो आप पहले जाकर के व्यक्ति से पूछिए कि तुम कहां तक गए हो? तुम अमेरिका से आगे तो नहीं चले गए। कहीं उस स्थिति से आगे तो नहीं चले गए जो स्थिति हमारी है। और यदि ऐसा है तो हमारा जो ईश्वर है वो तुम्हारा ईश्वर नहीं है। यह क्या हुआ? परिस्थितिक कृतृत बाधा से बाधित देश कृत बाधा से एक मिनट देश कृत बाधा से बाधित जी बोले एक्चुअल में भाई जी आप जो कह रहे हैं ना अ सब कुछ जान लेने के बाद देखो पहले तो सब कुछ शुरू में तो पता नहीं था थोड़ा तो थोड़ा पता चला उसी को हमने मान लिया कि अरे मैंने सब जान लिया फिर उसके आगे पता चल देखिए सुनिए सुनिए सुनिए आगे सुनिए मेरी भी मूल विषय है उसको मत हटाइए मैं मैं अभी सीधा मूल विषय आपको बता देता हूं आपको उत्तर किस बात पे देना है ये बताइए अब आपको मालूम चल गया ना कि ईश्वर अवतार लेने के विषय में भी क्वेश्चन हो सकता है ले सकता है कि नहीं ले सकता पहले आपने नहीं सोचा था समाधान में बताऊंगा ना हां तो अब अब बताइए कि अब आप अमेरिका से आगे सोच रहे हैं तो आपका ईश्वर अमेरिका से आगे है या नहीं है अब बताइए अनंत है हमारा

00:13:58:09 ईश्वर सर्वशक्तिमान है भाई तो सांस ले सकता है कि नहीं अवतार ले सकता है कि नहीं? अवतार क्या वो अजन्मा है? हमें भी अजन्मा बना दिया है। अब हमें भी अजन्मा बना दिया। आपको भी अजन्मा बना दिया। ये बताओ ये बताओ अजन्मा कौन नहीं है? आप अजन्मे नहीं हो। आप भी अजन्मे हैं। आप अजन्मे हैं। अजन्मे है तो फिर यहां पर रूप धारण किया ना हमने? अजन्मा होते हुए भी तो रूप रूप तो सब उसी के रूप है। सब उसी के रूप है। उसी सब उसी के रूप है। अद्वैत हो गया। अब कुछ भी बोल हो गया। गलत बात है। तो कहते ही है। कौन कहता है? कौन कहता है? बाबा खुद ही कहते हैं कि हम अद्वैत अद्वैत में ले जाने आए हैं। सबको अद्वैत दो नहीं एक बनाने आए हैं। और अच्छा ये भाव मैं ब्राह्मण परिवार से मैं खुद ही था। नहीं वो वो सब बातें मत बताइए। आप किस तरह से भटके हैं वो वो मत बताइए। ब्राह्मण आप अपने व्यक्तिगत चीजों को वो मत दीजिए। आप ये बताइए कि एक ही ईश्वर सभी समस्त रूपों में प्रकट हुआ है। यह मानते हैं आप?

00:15:15:25 एक ही है जहां एक अद्वैत हो गया ना फिर बोल हां तो अद्वैत जब द्वैत में आएंगे तो कुछ भी तीन 13 करेंगे मतलब एक ही सत्ता एक ही एक ही सत्ता है जो समस्त रूपों में परिलक्षित हो रही है देखो ये उस स्थिति में चल के कहेंगे तो हां अगर उससे नीचे द्वैत में रह के देखना है हम दोनों ही द्वैत में है तब तो ना तब तो बाबा जो कह रहे हैं उसी को मानते चले क्योंकि मैं भी उसी को मानता हुआ चला मेरे को ये समझ बाबा ने अद्वैत की बात कहां कही है ये बताइए पूरी मुरली को जब सुनेंगे पूरे ज्ञान को सुनेंगे तो अद्वैत ही हो जाएगा फिर हमें जो अनुभव हुआ कोई एक कोई कोई एक वीडियो दिखाइए अद्वैत वाला वो अच्छा आप बाबा के सेंटर पे जाते आते हैं किसी और पे वहां पूछिएगा वो जो अरे तो मैं पूछ चुका हूं ना एक मिनट एक मिनट भाई साहब मैं पूछ चुका हूं वो यहां से आगे नहीं जाते हैं कि एक ही परम तत्व ये वाली बात आज आप पहली बार

00:16:30:28 आप बोल रहे हो दूसरी बात ये है अगर आप अद्वैत को मानते हो तो सिद्धांत की तो दिक्कत है नहीं अब दिक्कत क्या आ गई कि सबसे बड़ी बात है आपने जो ये कहा कि वो वो रूप धारण नहीं कर सकता तो आपको मानना पड़ेगा वो रूप धारण कर सकता है। अरे एक ही है तो फिर रूप क्या सारे रूप ही एक है तो ये कहना गलत फिर सत्य असत्य भी नहीं बचा ना एक एक बचेगा ना आप भाई साहब आप भाई साहब अद्वती हो गए अच्छी बात है अब मैं ये पूछ रहा हूं जब वो रूप धारण कर सकता है तो यह प्रश्न क्यों किया जाता है कि वह परया प्रवेश ही करेगा यह प्रश्न क्यों किया जाता है? रूप धारण कर सकता है ना वो?

00:17:17:15 रूप धारण क्या जब बात एक हो गया तो फिर तो सारे रूप वही उसी के हैं। भाई साहब क्या पूछ रहा हूं मैं? दो करते हैं तो फिर आपकी आपकी दीदियां क्या कहती है? पहले पता तो कर लो भैया। आपकी दीदी कहती है वो रूप धारण नहीं कर सकता। वो परकाया प्रवेश ही करता है तो वो समझाने के लिए हमें भी हम भी कहते हैं मैं भी यही तो आप आप मुझे प्रमाण दो ना कि कौन सी चीज को माना जाए कौन सी को नहीं माना जाए प्रमाण दो फिर उसके लिए आपकी चीजों का तो यहां पे सुने का कोर्स करें प्रमाण के लिए सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए कि एक बात निश्चित हो गई कि ईश्वर अवतार ले सकता है और आप अद्वैत को भी मान गए। ठीक है? मान गए। हो गया। अंतिम अंतिम सत्य है। अंतिम अंतिम सत्य अंतिम सत्य अद्वैत है। ये आपने मान लिया। हां बस उसके बाद एक एक मिनट भाई साहब है। कुछ भी सत्य नहीं है। अवतार अवतार ले सकता है वो।

00:18:29:10 अवतार ले सकता है वो। लेता ही है। समयसमय पर सब अवतार ही लेते हैं। उसी के रूप सब अवतार लेते हैं। बदल बदल बदल बदल परकाया प्रवेश जरूरी नहीं है वो परकाया प्रवेश ही करे। परकाया प्रवेश भी करते हैं और अवतार भी ले लेते हैं। मतलब जरूरी नहीं है ना कि परकाया प्रवेश करके ही ज्ञान दे। यह कह रहा हूं। डायरेक्ट खुद से भी दे सकते हैं।

00:19:03:20 हमें तो ऐसे ही मिल रहा है। आप ही लोगों से मिल रहा है। मैं आपको क्या मैं ये कह रहा हूं कि आप जब ईश्वर रूप धारण कर सकता है तो वो जो है उसका मन कि वो परकाया प्रवेश करे या फिर वो खुद से ज्ञान दे। ठीक? ठीक है। ठीक। तो अब जो भगवान अब जो भगवान श्री कृष्ण ने भगवत गीता का ज्ञान दिया है वहां पर उन्होंने कहा है कि यदा यदा धर्मस भवती भारत अभत्तान धर्मस तद्मान सजामहम उन्होंने कहा मैं अपने रूप का सृजन करता हूं उन्होंने ये नहीं कहा परकाया प्रवेश ठीक है तो आप यहां क्या मानते हैं ईश्वर ने खुद खुद श्री कृष्ण के रूप में अवतरित होकर के ज्ञान दिया है या फिर उनके अंदर घुस के श्री कृष्ण अलग है वो देवी देवता हैं और उनके अंदर घुस के ईश्वर ने वो दिया ज्ञान। क्या मानते हैं? मैं जब शुरू में तो यही मानता था कि पर काया प्रवेश करके ज्ञान है। ब्रह्मा कुमारी क्या कहती है वो बताइए। हां ब्रह्मा कुमारी के ज्ञान में वो बताइए। शुरू के ज्ञान में तो मुझे ऐसे ही होता था। बाद में तो मुझे अपना जो पर्सनल अनुभव हुआ वो

00:20:18:24 भी बहुत लंबा नहीं थोड़े ही समय अनुभव की यहां पर कोई बात नहीं भाई साहब आप पूरी तरीके से ब्रह्मा कुमारी की सारी आईडियोलॉजी के विरुद्ध जा रहे हैं और यहां पर यही होता है अक्सर जब व्यक्ति परेशान होने लगता है जिसका खंभा उसने पकड़ रखा है तो वो उसके नाम पर वही आने लगता है जहां पे हम खड़े हुए हैं। चाहे वह आर्य समाजी हो, चाहे वो स्कनी हो, चाहे वह ब्रह्मपाली हो, चाहे वह ब्रह्मा कुमारी हो। आप वही कर रहे हैं। अपने सिद्धांतों को छोड़कर चले आ रहे हो। सिद्धांत देखिए आपसे मैंने पूछा है। भाई साहब मैंने आपसे ये पूछा है कि श्री कृष्ण ने श्री कृष्ण स्वयं भगवान थे या उनके अंदर भगवान ने घुस के ज्ञान दिया था? यह बताइए।

00:21:06:04 उनके अंदर भगवान ने प्रवेश करके ज्ञान दिया था। लेकिन लोगों को बाद में ऐसा नहीं एक एक मिनट भाई साहब एक मिनट मुझे बहुत ज्यादा एक्स्ट्रा बोलने की जरूरत ही नहीं। आपने कहा उनके अंदर भगवान ने घुस के ज्ञान दिया था। ये सवाल का जवाब हो गया। अब आप जब मैं उस पर कुछ एक्सप्लेनेशन मांगू तब आप एक्सप्लेनेशन दीजिए। जिस दिशा में मांगू उस दिशा में दीजिए। ठीक है? तो है क्या कि अब आपका जब ये मानना है कि भगवान अवतरित हो सकते हैं स्वयं से तो फिर आपका यहां पर यह क्यों मानना है कि नहीं वहां पर भगवान श्री कृष्ण नहीं थे बल्कि उनके अंदर भगवान ने घुस के वो दिया था ज्ञान। यह क्या आधार है इसका?

00:21:54:21 देखिए बीच में जब हम लोग चलते रहे तो श्री कृष्ण को ही भगवान मान लिया। लेकिन उसके पीछे की जो भाई साहब मैंने क्या कहा है? मैंने क्या कहा है भाई साहब? जब ईश्वर खुद अवतरित हो सकता है किसी रूप में तो आपका यह बात मानने का आधार क्या है कि वहां पर श्री कृष्ण ने ज्ञान नहीं दिया बल्कि वहां पर जो है उनके अंदर घुस के और जो है ईश्वर ने अलग से ईश्वर अलग है श्री कृष्ण अलग है इसका आधार क्या है अच्छा ये बताइए ये बताइए कि जैसे हम मैं बोल रहा हूं या मेरे अंदर की वो चेतना वो बोल रहा है क्या देखेंगे जो देखेंगे उस हिसाब से उसको अपना अलग कर लीजिए जो मानना है वह मान लीजिए। शुरुआत समय इस समय इस समय मैं बोल रहा हूं या मेरी चेतना बोल रही है? कौन बोल रहा है? जैसे आप आप लोगों के हिसाब से ये बात आती है ना। मैं आपसे पूछ रहा हूं। भाई साहब मेरे पास मेरे पास व्यर्थ का समय नहीं है। आप प्लीज आप जो है विषय पर रहिए। मैं बोल रहा हूं या मेरी चेतना बोल रही है। यह बताइए आप। चेतना नहीं जैसे आप श्री कृष्ण के लिए कह रहे हो। तो वहां मैंने अभी अभी आपने पूछा ना कि

00:23:09:25 आपने पूछा ना सबके अंदर से परमात्मा ही बोल रहा है अद्वैत के अनुसार मगर श्री कृष्ण के अंदर से विशेष रूप से परमात्मा बोल रहा है। अन्यों के अन्यों के रूप में वो जो है सामान्य जीव भाव से परमात्मा बोल रहा है। जीव दृष्टि से आत्मा दृष्टि से परमात्मा बोल रहा है। और यहां पर सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की दृष्टि से परमात्मा बोल रहा है। श्री कृष्ण के अंदर से तो ये आप किस आधार पर मानते हैं? यह बताइए मतलब कि सबके अंदर परमात्मा ही है बोलने वाला। ठीक है? मगर यहां मेरे अंदर से वो जीव भाव से बोल रहा है। जीव भाव और आपका कहना है कि जब श्री कृष्ण के अंदर से परमात्मा ने बोला तो वो जीव भाव से नहीं बोला। ईश्वरीय भाव से बोला। तो यानी कि वहां पर वो जो आपका यह मानना है कि वो भी एक जीव जैसे ही थे। श्री कृष्ण भगवान और उसके अंदर जब परमात्मा ने बोला तो वह जो है जीव भाव से

00:24:06:09 ईश्वर भाव से बोला इसका आधार क्या है ये समझाने के लिए समझने के लिए दो तीन चार कर दिया जाता है फिर बाद में जब आदमी चलता है मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं मैं पूछ रहा हूं द्वैत में आ गए द्वैत में आ गए द्वैत में आ गए अब ईश्वर अलग है और हम लोग अलग आ गए हो गए। अब जो ईश्वर अलग है आपका कहना है कि वो श्री कृष्ण भगवान के अंदर घुसा ईश्वर और बोला श्री कृष्ण के अंदर घुस के अच्छा

00:24:41:15 आपकी पिक्चर भाई साहब चिपक रही है। मैंने कहा कि ईश्वर ईश्वर अलग है और जीव अलग है। द्वैत में आ गए हम लोग। जीव अलग है ईश्वर अलग है। ठीक है? अब श्री कृष्ण भगवान के श्री कृष्ण जो आपके अनुसार देवता है उनके अंदर भगवान ईश्वर जो है वो घुसे द्वैत में ही कह रहा हूं द्वैत की बात कर रहा हूं अभी उनके अंदर भगवान घुसे और उन्होंने बोला बल्कि ऐसा नहीं था कि स्वयं ईश्वर ने ही श्री कृष्ण का अवतार रूप लिया हो ऐसा नहीं था ठीक है ले सकता है पर ऐसा किया नहीं उसने वो ईश्वर अलग था और ईश्वर उनके अंदर घुसा और उसने उसने जो है बोला तो इसका आधार क्या है आपके पास? क्यों मानते हैं ऐसा? कि श्री कृष्ण भगवान स्वयं भगवान नहीं थे। भगवान ने अपना एक रूप नहीं बनाया था बल्कि भगवान ने श्री कृष्ण भगवान के अंदर घुस के बोला था। ये क्यों मानते हैं? अब द्वैत द्वैत के अनुसार बात कर रहा हूं।

00:25:46:21 क्यों मानते हैं? क्योंकि देखिए कहानी रिपीट होती है। हर ड्रामा रिपीट होता है। तो रिपीट यानी कि यानी कि यानी कि शब्द प्रमाण जो आपको शब्द मिल रहा है वो प्रमाण है। शब्द प्रमाण हो रहा है ना ये वही चीज चल रही है। ये आपका शब्द है। भाई साहब मैं समझ गया आपकी बात। पता नहीं क्यों आप लोगों को एक वो रहता है कि मैं एक लेक्चर दे दूं साथ में। मैं समझ गया हूं भाई साहब आपकी बात मैं समझ गया हूं आपको एक लेक्चर लेके साथ में चलने की क्या आवश्यकता है हां मैं जहां पे मैं आपकी बात को नहीं समझ पा रहा होगा तार्किक नहीं लग रही होगी फिर मैं आपको पूछूंगा कि ये कैसे फिर आप बोलिए

00:26:41:01 हां मैं ये कह रहा हूं मैं यह कह रहा हूं कि आपका कहना है क्योंकि हमें शब्द प्रमाण ने बताया कि श्री कृष्ण के रूप के शरीर में परमात्मा ने प्रवेश किया था। इसलिए हम मानते हैं कि परमात्मा ने परमात्मा ने प्रवेश किया था। ठीक है? हां। एक मिनट। तो इसमें आपकी मुरलियां ही प्रमाण है। जी कि गीता भी प्रमाण है।

00:27:22:26 नहीं मुरली ही बाबा की मुरली ही प्रमाण है। गीता प्रमाण नहीं है। नहीं अच्छा ठीक है। तो इसका मतलब ये हुआ कि हां हां बताइए बताइए। हां इसका मतलब ये हुआ कि आपका लेते रहते हैं। नहीं उदाहरण लेना प्रमाण मानना नहीं होता है। उदाहरण तो आप जो है आई एस आई एस का ले सकते हो। निठारी का ले सकते हो उदाहरण तो प्रमाण वो होता है जिसके जिसके एक अक्षर को भी हम मना ना करें वो प्रमाण है हमारे लिए। समझ गए? और यदि हम किसी और के आधार पर उसके अक्षरों में हम वो कर रहे हैं वो काउंटर दोष देख रहे हैं तो इसका मतलब वो हमारे लिए प्रमाण नहीं है। प्रमाण हमारा वो है पीछे वाला। ठीक है? जी। तो इसका मतलब भगवत गीता वेद आदि शास्त्र ब्रह्मा कुमारी के लिए प्रमाण नहीं है।

00:28:26:19 मतलब अपमान या अस्वीकार जैसी कोई बात नहीं। चीजें तो वहां भी दिखती है वो चीजें। भैया मैं कह रहा हूं आप मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं एक मनुष्य और कुत्ते में भी समानता होती है। जी जी मगर इसका मतलब ये नहीं है कि हम कुत्ते को अपना प्रमाण मानते हैं। तो प्रमाण मान आप देखिए देखिए सनातनी कौन है? इसको समझ लीजिए। सनातनी कौन है? जो सनातन धर्म शास्त्रों में निष्ठा रखता है। सनातन धर्म शास्त्र सनातन वैदिक आर्य हिंदू वैदिक तो आपके लिए वेद प्रमाण नहीं है। आपके लिए गीता प्रमाण नहीं है। सनातन धर्म शास्त्र आपके लिए प्रमाण नहीं है। मैं ये पूछ रहा हूं अभी आपसे है क्या? नहीं प्रमाण नहीं है। अभी तो अभी तो मेरे लिए पर्सनली ब्रह्मा कुमारी भाई साहब आप मुझे ब्रह्मा ब्रह्मा ब्रह्मा कुमारी की बात करिए। आप पर्सनली वाली बात मत बोलिए। ब्रह्मा कुमारी का क्या है मानना अपना अनुभव अपना अनुभव अपना अनुभव से जब मैं आपसे जब मैं आपसे जब मैं जब मैं आपसे पूछूं कि आपका अनुभव बताइए पर्सनल तब बताइए अभी हम ब्रह्मा कुमारी का पक्ष जानना चाह रहे हैं ब्रह्मा कुमारी का पक्ष क्या है और ब्रह्मा कुमारी को साथ में

00:29:41:22 लेकर के यदि आपका अनुभव है तो वो बताइए अलग से नहीं ब्रह्मा कुमारी ब्रह्मा कुमारी का बताइए आप हां तो वो वो प्रमाण क्या मैं तो उतना आपको कहीं पढ़ा जाना समझा ही नहीं था। मैं तो श्रीमद् भगवत गीता को एक दो बार पढ़ा था। आपने पढ़ाई मैंने प्रश्न मैंने प्रश्न ये पूछा है वेद धर्म सनातन धर्म के अन्य शास्त्र स्मृति ग्रंथ इत्यादि और गीता रामायण ये सब ब्रह्मा कुमारी वालों के लिए प्रमाण है या नहीं?

00:30:16:26 आखिर तक जातेते नहीं। अगर शुरू में कोई मान भी रहा होगा तो आखरी तक जाते जाते नहीं और बाबा तो भाई साहब शुरू में मानी जा सकती है कोई भी चीज शुरू में मानी जा सकती है कुत्ते के भी कुछ आचरण है जो माने जा सकते हैं कि हां ये हमारे जैसे ही है मगर आखरी तक जातेजाते हम उससे पृथक हो जाते हैं तो वो जो आखरी वाली बात है उसके जो आखरी वाली बात है उसके आधार पर तय होता है कि हम उससे अलग है या नहीं है हम उसको मानते हैं कि नहीं मानते हैं तो वो कंक्लूजन बताइए गीता वेद रामायण सनातन धर्म शास्त्र स्मृति ग्रंथ इत्यादि ब्रह्मा कुमारी वालों के लिए प्रमाण है या नहीं नहीं है नहीं है हां नहीं अच्छा ठीक है ठीक है अब एक बात हो गई आप अद्वैत को मानते हैं दूसरी बात हो गई कि ईश्वर अवतरित हो सकता है परंतु श्री कृष्ण के रूप में जो है ईश्वर ने घुस करके बोला था उनके शरीर में और तीसरी चौथी बात आ गई कि जो ब्रह्मा कुमारी है उसके लिए यह सारे हिंदू कान खोल करके सुन ले जो कहते हैं ना हिंदू हिंदू हिंदू हिंदू सनातन वैदिक कार्य हिंदू है ये ब्रह्मा कुमारी वाले क्लेम करते हैं ना तो वेद को मानते हैं ना गीता को मानते हैं ना रामायण को मानते हैं ना

00:31:32:00 अन्य स्मृति ग्रंथों को मानते हैं ये मैं हिंदुओं से कह रहा हूं चलिए ठीक

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00:31:36:24 है अब इसमें आते हैं ये मैं आखरी बात कर रहा हूं आखरी में जाकर शुरुआत में चाहे जो चलता हो आखरी में जाके कोई कुछ नहीं की बात होती है। आखरी की बात होती है। आखरी की अभी शुरुआत में तो आप मुझे भी मान लोगे शुरुआत आखरी में तो हम ब्रह्मा कुमारी भी नहीं मानते हैं। आखरी में ब्रह्मा कुमारी भी नहीं मानते हैं। क्या मानते हो? क्या मानते हो बताओ? आखरी में तो हमें ब्रह्मा कुमारी से भी कोई अर्थ नहीं है। अर्थ नहीं अर्थ की बात नहीं है। ब्रह्मा कुमारी की बातें क्या झूठी मानते हो? ब्रह्मा कुमारी की बातें कभी झूठी होते सब झूठी हो जाती है भाई व्यवहार जगत की बात कर रहा हूं शब्दों का खेल यहां नहीं चल पाएगा हां व्यवहार जगत मिथ्या हो जाता है मिथ्या मिथ्या मैं कह रहा हूं व्यवहार जगत में रहते हुए मानते हो क्या मैं क्या कह रहा हूं खेलने आए हो ना यहां पे खेलने आए हो ना शब्दों का खेल मैं कह रहा हूं व्यवहार जगत में रहते हुए क्या मिथ्या हो जाएगा ब्रह्मा कुमारी का ज्ञान संसार में रहते हुए संसार में रहते हुए गीता

00:32:51:27 वेद पुराण आपके लिए प्रमाण है या नहीं मेरा लक्ष्य यही है संसार में रहते हुए की बात है भाई साहब मैंने सवाल क्या पूछा है सवाल क्या पूछा है संसार में रहते हुए क्या ब्रह्मा कुमारी का ज्ञान आपके ये अप्रमाण है। अगर ऐसा हो जाए तो मेरा अहोभाग्य होगा। मैं तुरंत अभी इसी वक्त लेकिन इसी प्रयास में हूं। आप जा सकते हैं। भाई साहब मैं इसी प्रयास में हूं आपको जवाब देने का प्रमाण क्या पूछ रहा हूं? मैं क्या पूछ रहा हूं भाई साहब? मैं क्या पूछ रहा हूं? संसार में एक मिनट संसार में रहते हुए मुक्ति को प्राप्त करने के लिए मुक्ति को प्राप्त करने के लिए यानी कि मुक्ति से पहले ठीक मुक्ति को प्राप्त करने के लिए ब्रह्मा कुमारी का ज्ञान आपके लिए प्रमाण है या नहीं

00:33:55:10 हां शुरुआत का अरे शुरुआत में ये तो मैं बता ही दिया शुरुआत ही तो सुनना ही नहीं चाहते वाला सुन लोगे मेरी आप शुरुआत ही सुनिए ना आप जा सकते हैं मैं समझ रहा हूं आप क्यों आए हैं यहां पर चटने आए हैं आप और कुछ नहीं कुछ नहीं इतना मेरे पास मैंने इतना घी नहीं पिया है आदमी अद्वैती बन के बात करने लगे आप भाई साहब इधर-उधर की बातें ना करें तो तो हम लोग चर्चा आगे बढ़ा पाए। ठीक है? जी। ठीक है ना? तो टॉपिक कहां तक और था? मैं बता रहा हूं। हमारा टॉपिक लगभग खत्म नहीं था। मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं भाई साहब। मैं बता रहा हूं। आपको टॉपिक मैं बता रहा हूं। ब्रह्मा कुमारी का ज्ञान मुक्ति के लिए आपके लिए प्रमाण है। और सनातन वैदिक आर्य हिंदू धर्म के जो धर्म शास्त्र है, वेद है, गीता है, रामायण है, ये मुक्ति के लिए आपके लिए प्रमाण नहीं है। यह मुक्ति के हेतु नहीं है। प्रमाण रूप में है। ब्रह्मा कुमारी का ज्ञान मुरली के रूप में जो प्राप्त होता है वो मुक्ति का हेतु है। प्रमाण रूप में आपके

00:35:10:21 लिए ब्रह्मा कुमारी वालों के वहां से यहां शिफ्ट हुआ हूं। भाई जी मैं ब्राह्मण परिवार से था। वहां से यहां शिफ्ट हो भाई साहब आप जा सकते हैं करने आना ये दिखाना है कि भाई मैं ब्राह्मण था और ब्राह्मण हो के और जो है मैं यहां आ गया। ठीक है? तो ब्रह्मा कुमारी में जाने वाले लोग अपना देख लें। अगर यह थोड़ा सा ये फंसने वाली चीजें ना करते यदि होता क्या है कि व्यक्ति जब आता है तो अपनी कुछ कुछ नैरेटिव्स लेकर के आता है और वो चाहता है कि वो यहां मैं बोल दूं अपने नैरेटिव्स को और बोलने के बाद फिर वो हमारे लिए एक नई समस्या है कि वो नैरेटिव को हम ब्रेक करें। वह जो चर्चा चल रही है उसको छोड़े क्या करें यह होता है। कोई सोच के आया कि मुझे गाली बकनी है तो मैं गाली बक दूं। वह वाली बात है। लिंक दे दीजिए। किसी को अगर चर्चा में आना हो तो आ सकता है।

00:36:27:02 [गला साफ़ करने की आवाज़] चेहरा चेहरे के बिना नहीं आना है। ध्यान रखिएगा। ठीक है। हम्म

00:37:32:09 आप भाई साहब हो गई आपसे बातें। ठीक है आप कुछ धर्म पे और सुन लीजिए धर्म पे धर्म पे हां तो हमने बता हमने जो पूछ रहे हैं उसप तो बात करनी नहीं है आप जा सकते हैं भाई साहब नहीं उस अरे हमने आपसे पूछा हमने आपसे हमने आपसे पूछा क्या है भाई साहब क्या पूछा है आपसे ये आपके लिए ब्रह्मा सत्य है तो मैं कह रहा हूं कि मतलब जाइए आप जाइए आपको बातें इस तरह तरह से करनी है घुमा फिराया आपको जवाब तो देना नहीं है।

00:38:30:04 हम धन्यवाद भाई आर्यवीर मुझे समझने के लिए गाली क्या होती है अभी आपको पता ही नहीं वो नकली दुनिया में हो ना आप इसलिए गाली क्या होती है पता नहीं आपको। अब देखो जो व्यक्ति आया है वह

00:39:05:06 ब्रह्मा कुमारी के विरोध में सारी बातें बोल रहा है फिर उससे पूछा जा रहा है कि भैया तुम्हारे लिए सनातन धर्म शास्त्र प्रमाण है कि नहीं वो बोल रहा नहीं है और फिर अद्वैत का सहारा लेकर के कह रहा है कि वो भी मेरे लिए मिथ्या है। भाई जिस समय वो मिथ्या है ना जिस समय वो आप मिथ्या बोल रहे हो ना उस समय आपको किसी ग्रंथ की आवश्यकता ही नहीं है। जिस समय आप ब्रह्मा कुमारी को जिस समय आप क्लेम कर रहे हो मेरे लिए तो वो भी मिथ्या है। बात यह है कि जिस समय आपको किसी कर्म की आवश्यकता है, क्रिया की आवश्यकता है तो उस क्रिया को करने में कौन सी चीज आपके लिए प्रमाण है? कौन सी चीज आपके लिए मार्गदर्शन है, मार्गदर्शक है? तो उस संबंध में आपने कहा कि सनातन वैदिक आर्य जो हिंदू धर्म के ग्रंथ है वह आपके लिए प्रमाण नहीं है और जब आपने ब्रह्मा कुमारी इसको नकारा तो मोक्ष प्राप्त करके नकारा है। ठीक है? तो कोई चेहरा लेकर के बातचीत करने आना चाहता है तो वो आ सकता है। मैंने देखा है कि रामपालियों के यहां भी जाकर के ये जो अलंकारी हैं वो पिट के आ रहे हैं। और सबसे बड़ी बात है भाई तुम अलंकारियों के जा और रामपालियों के यहां जा सकते हो तो मेरे पास क्यों नहीं आ रहे हो?

00:40:21:10 हां बताओ रामपालियों से पिट के चले आ रहे हो। रामपालियों के चैनल पर गए अलंकारी यही ये ऋषि मंतव्य वालों की जो छुटकैया पहलवान है वहां के तो वो गए वहां गाली गलौज भी कर दी माफी भी मांगा माफी भी मांगी। यह जो ऋषि मंतव्य वाले लोग हैं उसमें एक लड़का है ना जो अभी कुछ दिन पहले श्रुति मार्ग चैनल पर भी गया था तो वहां पे वो लड़का जो सनातन शंकर जी के चैनल पर भी आता है कई बार आ चुका है वो लड़का और शायद सूरज आर्य करके ये दोनों गए और दोनों जाकर के वहां पर उन्होंने नियोग पे और स्त्री में कई जगह इन्होंने दयानंद जी ने भी भेद दृष्टि दिखाई है ना धार्मिक दृष्टिकोण से तो उन विषयों पर इन्होंने प्रश्न पूछे इनसे तो ये बेचारे इधर उधर इधर उधर कर कर के कर कर के वहां भाई पंचाव प्रतिज क्या है तुम्हारी ये सब कर रहे थे वहां तुम्हारी प्रतिज क्या है वहां बहुत इनको शर्मनाक पराजय का चेहरा देखना पड़ा और फिर एक आध इनका इनके साथ गया था तो उसने गाली गलौज भी कर दी

00:41:36:28 गाली गाली दे दी तो गाली के लिए लोग वहां माफी मांगे। ये तो इनकी स्थिति है। वही टीम है जिसका एक खिलाड़ी अपने आप को निर्भय कहने वाला और इस बात का उत्तर नहीं देता है कि ईश्वर ने सृष्टि की रचना की। कैसे बिना अवतार लिए? हां मैंने वह जो महेंद्र पाल करके हैं जो मलेच्छ से घर वापसी हुई है जिसकी मैंने नहीं देखा कि उसने कभी भी कोई ऐसी कोई तात्मिक बात की खैर एक भाई साहब अभी आए थे विजय करके

00:42:44:00 ठीक है कोई है नहीं चर्चा के लिए फिलहाल इसको स्थगित करते हैं जो ब्रह्मा कुमारी की ओर से आए थे इनकी दीदियों ने अद्वैत को कहां पर माना है कहां नहीं माना अभी इनसे बहुत सारी चीजें हो सकती थी कि मुक्ति के बाद वापस आना पड़ता है कि नहीं आना पड़ता है ये सब चीजें हो सकती थी। पर यह बात को इस ओर ले जाना चाहते हैं कि किसी तरीके से जो हमारे सार्वभौम सिद्धांत है उन्हीं को ब्रह्मा कुमारी के नाम पर यहां प्रस्तुत कर दें। और वाह हमने बहुत बड़ा तीर मार लिया।

00:43:17:22 [नाक से की जाने वाली आवाज़] [गला साफ़ करने की आवाज़] वो वीडियो मैंने पूरा देखा नहीं है। परंपरा के मामले में मैंने देखा। मुझे ज्ञात हुआ कि परंपरा के मामले में जो विपक्षी था वह मौन रहा और शिव जी वाले शिव और विष्णु में भेद वाले मामले में मौन रहा। फिर चर्चा को वो दार्शनिकता की ओर मोड़ कर ले गया जो उस चर्चा का विषय था नहीं। लव भारत जी ने कोई ऐसी तैयारी नहीं की थी मुझे ऐसा लगता है। और उसमें जो है काफी देर तक बातें उतरी। वहां पर और संतुष्टिजनक जवाब हो सकते थे। वो नहीं मिल पाए। तो यदि देखेंगे किस विषय पर चर्चा थी। उस विषय में तो भारत जी की ही विजय हुई। परंपरा के विषय में भी चारों खाने चित होना पड़ा सामने वाले को। खैर

00:44:06:07 मैंने उस चर्चा को पूरी तरीके से देखा भी नहीं है। तो बहुत ज्यादा कुछ समीक्षा कर भी नहीं सकता। ठीक है। जय श्री राम सभी को।

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B: SARVASHAKTIMAAN DHARMA Live 44:48 · 05 Apr 2026

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