⬜ Not used yet · 00:00:05:13 – 00:03:59:01 (3:54)
00:00:05:13 कुतर्क और दोगलेपन की खदान गुप्ताचार्य महान। अभी-अभी इस धूर्त का एक वीडियो आया है सामने जिसमें कि यह प्रलाप कर रहा है कि हाई कोर्ट के द्वारा एक आदेश निकला है जिसमें कि इसके चैनल को बंद करवाने के निर्देश दिए गए हैं। उसमें जांच चल रही है। तो संभवत तुझे सूचना जो मिली है वह आधी अधूरी मिली है। सूचना यह है। मैं तुझे क्लियर कर देता हूं। सूचना यह मिली है भागवत आनंद कि हाई कोर्ट में एक अधिवक्ता के द्वारा एक याचिका लगाई गई है जिसमें कि यह मांग की गई है कि न्यायालय के जो न्यायाधीश हैं उनके लिए बहुत सारी अवमानना की गई है। न्यायपालिका के प्रति अवमानना की गई है। तो इस व्यक्ति पर तुरंत रोक लगाई जाए। यह इस तरीके से जो विष्ठा फैलाने का कार्य है वह अपने शब्दों में यहां मैं तेरे ही शब्दों को तुझे वापस कर रहा हूं। इस तरीके से विष्ठा फैलाने का जो इसका कार्य है यह निरंतर करता जा रहा है हमारे आचार्यों के लिए आचार आचार्यों के मठ मंदिरों में आने वाले वहां के आगंतुकों के लिए आचार्यों के जो शिष्य गण हैं उनके लिए तो यह सब बैक सपोर्ट है और
00:01:20:16 मुख्य बात है कि इसने कोर्ट की अवमानना की है और इस बारे में एक याचिका लगाई गई है। ठीक है? अब क्या हुआ है कि याचिकाकर्ता के लिए कोर्ट ने यह निर्देश दिया है, डायरेक्शन दिए हैं। इसमें डिसीजन दिया गया है कि यह मामला जो एजी हैं यानी कि एडवोकेट जनरल वो इसको देखेंगे। वो अपने मतलब तेरे खिलाफ जो मुकदमा लगेगा ना तो वो एडवोकेट जनरल लगाएंगे। कौन? उत्तर प्रदेश के एडवोकेट जनरल। उत्तर प्रदेश इलाहाबाद हाई कोर्ट के जो एडवोकेट जनरल हैं यानी कि शासन की तरफ से जो मुख्य लॉयर होता है इसमें निर्देश है कि वो इसको संज्ञान में लें है ना वो इसको देखेंगे तो इसमें जैसा कि तूने अब यहां से जो तूने बोला है ना वो ठीक है कि इसमें जांच चल रही है इसमें जो होगा वो निर्णय आएगा वो अपनी निर्णय उसका आने वाला है विचाराधीन बात है वो बात ऐसी है कि इसने अब इसके आगे क्या कुतर्क किए हैं कि इसने ने फिर से विजयश्री जी के लिए बहुत सारी उनकी जो जो उनका पुराना जीवन था उसको लेकर के बहुत सारी उनकी फोटो निकाल ली पुरानी और ये वो है ना और उसको दिखा के ये बोल रहा है कि देखो हमने इस स्त्री के लिए अगर ऐसा कहा वहां पर मंत्र चल रहे हैं ये हो रहा है वो हो रहा है
00:02:36:07 तो हम हमारे धर्म का नाश हो रहा है और मैं प्रतिबद्ध हूं पूरी शंकराचार्य जी ने भी ऐसा कहा है मगर मैं उनकी वाणी के लिए प्रतिबद्ध हूं हमारे धर्म ने ऐसा कहा है धर्म की धर्म का जहां पे उल्लंघन हो रहा है उसके के लिए मैं प्रतिबद्ध हूं। तो सबसे पहली बात है कि इसमें जो इसने चित्र दिखाए हैं, वीडियोस दिखाए हैं, यह विजयश्री के पुराने जीवन के वीडियोस हैं। जब वह अपना नाम रिदमम कपूर लिखती थी और अपने हर वीडियो के अंत में प्रणव शक्ति प्रणव लिखती थी। ठीक है? तो पहली बात तो इसका कुतर्क यहीं पर क्लियर हो जाता है। पहला कुतर्क वो पहला कुतर्क क्या क्लियर हो जाता है? कि यह विजय श्री जी के पुराने जीवन को आज के जीवन से जोड़ करके दिखाते हुए पूरी पीठ में आने जाने वालों का खंडन करते हुए पूरी पीठ के प्रति अनास्थावान वहां के परिकरों के प्रति अनास्थावान बनाने का इसने वो षड्यंत्र रचा था जो शुरुआत में चालू हुआ था। ठीक है? अब बात ऐसी आती है कि जब यह अपने बाप के लिए बोलता है कि इसका जो बाप है वो जब व्यास गद्दी पर किसी स्त्री के बैठने का समर्थन करता है तो यह वहां पर लथखोर शब्द का उपयोग नहीं करता है। वहां पर उसको इस तरह की राय नहीं देता है अपने बाप को कि अपनी मां को, अपनी बहन को, अपनी स्त्री को यहां सुला
00:03:51:10 दो, कुत्ते के साथ सुला दो, अपना भाई पैदा करवा लो। जबकि धर्म का उल्लंघन वहां भी हो रहा है। मगर वहां ये विष्ठा नहीं करता है मुख से।
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→ Used in: A · Video धर्मरक्षक या अवसरवादी | @Swami Nigrahacharya (Shri Bhagavatananda Guru) की गुर... at 3:46 ↗
00:03:59:01 मेरे पिताजी ने भी महिला कथा वाचिका का समर्थन किया। और उन्होंने गलत किया। तो मैं तो ना पिता के विरोध में जा सकता हूं, ना शास्त्र के विरोध में जा सकता हूं। तो मैं थोड़ा फंस जाता हूं और मौन हो जाता हूं। तो मैंने तो कुछ नहीं कहा पिताजी को। मुझे अपनी प्रतिष्ठा की अपेक्षा उनकी प्रतिष्ठा अधिक प्रिय है। है
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00:04:20:12 ना? इसके बाद क्या है? यह जो इसके शरण में आते हैं जो लोग वह भले ही विदेशगामी हो वह भले ही आदि शंकराचार्य का अपमान करने वाले हो परंतु यदि वो अपनी वकालत नहीं कर रहे हैं पीछे वाले कर्मों की तो यह कोई आपत्ति नहीं है। उनको जो है जो प्रायश्चित इत्यादि है बता करके अपनी शरण में ले लेता है। उनको क्रिटिसाइज नहीं करता है। यह उनको हिदायत नहीं देता है कि वो अपने घर की स्त्रियों को अमुक के साथ सुला दें और इस प्रकार का ऐसा भाई पैदा करवा लें। उनको हिदायत नहीं देता है।
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→ Used in: A · Video धर्मयुद्ध अहंकार या व्यापार | क्या है पूरा विवाद | at 11:27 ↗
00:04:51:25 हां कोई व्यक्ति अगर भूतकाल में गलती से विदेश गमन कर लिया हो जिसको विदेश के गमन का दोष ज्ञात ना हो और अब वह विदेश गमन की वकालत नहीं करता है कि हां बहुत अच्छा बहुत अच्छा गर्व में अनुभव नहीं करता ग्लानी अनुभव करता है वो संस उसका बहिष्कार नहीं करते मगर
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00:05:03:22 जो लोग इससे दूर है या इसकी शरण में नहीं है या उनकी शरण में है जहां पर ये जो कहीं जिनके प्रति कहीं ना कहीं ये द्वेष रखता है तो ये अपने मुख से विष्ान उगलता है। उनके पुराने जीवन को लेकर के उनके वर्तमान को खंडन करने का प्रयास करता है। यह तो रही यह बात। इसकी जो चोरी है। इसने आज के उनके वीडियो क्यों नहीं दिखाए? जो वर्तमान में उनके वीडियोस आ रहे हैं, क्यों नहीं दिखाए? महामृत्युंजय मंत्र शुड नॉट बी चंटेड विदाउट दीक्षा। गायत्री मंत्र कैन नॉट बी चांटेड बाय द फीमेल। [संगीत]
00:06:03:22 और यदि पुराने जीवन के आधार पर वर्तमान में व्यक्ति की व्यक्ति की अवमानना करनी है, व्यक्ति का अपमान करना है तो भाई अभी तो तेरा एक वीडियो आया है जिसमें बृजेश पांडे ने यह सब किया जो कि वर्तमान समय वो कर रहा है। भगवत पाद आदि शंकराचार्य का अपमान किया। श्री रामचंद्र जी का अपमान किया। उसने क्या नहीं किया है मगर उसका तू समर्थन करेगा यह है दोगलेपन की पराकाष्ठा परंपरा प्राप्त दोगलापन है ना परंपरा प्राप्त दोगलापन है ये तेरा अच्छा और अपने पिताजी के लिए अपने बाप के लिए वो जब कोई उल्लंघन करेगा कि अमुक अमुक को ऐसा नहीं होना चाहिए वो जब कोई उल्लंघन करेगा तो वो लथखोर नहीं है। उनका जो वो है ना क्या कहते हैं उनकी प्रतिष्ठा हमें अपनी प्रतिष्ठा से ज्यादा प्रिय है। मुझे अपनी प्रतिष्ठा के कक्षा उनकी प्रतिष्ठा अधिक प्रिय है। यह है दोगलेपन की पराकाष्ठा परंपरा प्राप्त दोगलापन हां अब इसके बाद इसने और क्या अविष्ठा की है मुख से इसने बताया है अच्छा इसके साथ ही साथ एक बात और है कि जिन पीठों का इसको समर्थन प्राप्त है या फिर जिन पीठों में इसको प्रश्रय मिला हुआ है। बहुत सी पीठे हैं बहुत से मठ हैं जहां पर इसकी उन चीजों पर ध्यान नहीं दिया गया जिन चीजों पर यहां पर ध्यान दिया जा रहा है। कई विषय ऐसे होते हैं जिसमें सभी
00:07:18:26 लोग एक ही तरीके से एक ही कार्य विधि को नहीं अपनाते। ठीक है? मगर जिन पीठों से इसके संबंध मधुर हैं। उन पीठों में भी आने वाले कई लोग ऐसे होते हैं जिनका पुराना जीवन ऐसा हो सकता है जैसा जीवन ये विजयश्री का दिखाते हुए विजयश्री के प्रति अवमान ना कर रहा है। ठीक है? मगर ये उन पीठों के बारे में भी कुछ नहीं करेगा। यह है दोगलापन। अपने प्रोपेगेंडा को पुष्ट करने के लिए यह व्यक्ति क्या करता है? योग की बातें करता है। वहां पर योग हो रहा है। इस तरह की वेशभूषा क्यों है? और जब चित्र दिखाता है तो सबसे पहले फर्स्ट इंप्रेशन इज लास्ट इंप्रेशन। आपके मन पे अपनी बात का प्रभाव छोड़ने के लिए कौन से चित्र दिखाता है? जहां पर योग नहीं हो रहा है। वो किसी अन्यत्र किसी और उद्देश्य के लिए खिंचाई गई फोटो थी। उसको योग से जोड़ करके आपके सामान्य जन के मन को प्रभावित करने का प्रयास करता है। यह व्यक्ति परंपरा प्राप्त दोगलापन। कौन सी परंपरा? लुप्त परंपरा। लुप्त संप्रदाय के गुप्ताचार्य की परंपरा और उससे मिली है उनको यह दोगलापन। यह विष्ठा करने की विधि उससे उनको प्राप्त हुई है। न्यायाधीश हां न्यायाधीशों के लिए बड़ा सम्मान पूर्वक बोल रहा है कि भाई पुलिस वालों के पास जाएगा तो वो थोड़े बहुत तो बुद्धिमान होंगे। वो न्यायाधीश होंगे। वो तो बुद्धिमान होंगे। ये है वो है। बड़ा सम्मान
00:08:34:04 है। अरे क्यों भाई? अरे दोगले। अरे दोगले थोड़े दिन पहले के तेरे वचन है। हैं क्या कह रहा था तू? न्यायालयों में बैठने वाले न्यायाधीश जुारी शराबी कबाबी व्यभचारी और कोठों के दलाल और वहां के वहां पर न्यायालयों में केवल यह निर्णय किया जाता है कि क्राइम कैसे किया जाए और करके कैसे छुपाया जाए यह सब तेरे वक्तव्य थे न्यायालय के लिए मगर दोगले आज कैसे उसकी शरण प्राप्त करने के लिए कैसे तूने अपने भाव बदल दिए अब जब इधर-उधर से चीजें हो रही है तो तुझे लग रहा है अरे तेरे द्वारा फैलाई गई विष्ठा है ये वह तो तुझे उठाकर सर पर ले जानी पड़ेगी ना कहीं ना कहीं तूने ही फैलाई है ना यही कहा था ना तूने कि पूरी के परों की विष्ठा साफ करते हैं पूरी शंकराचार्य जी के जो शिष्य हैं वहां के जो चेले हैं यही कहा था ना अच्छा तो जब विष्ठा करेगा तो विष्ठा साफ भी करनी पड़ेगी अब दूसरी एक बात आती है इसने कुतर्क किया कि भैया महिला के अंतर वस्त्रों की बात होगी तो यही नाम तो लेने पड़ेंगे तो किसी भी प्रसंग वश तेरे घर की स्त्रियों के बारे में बात होने पर तू इसी प्रकार से उनके भी अंतर वस्त्रों का एक एक नाम लेकर के बताएगा ना। भले ही परोक्ष रूप से उनके उनके ऊपर
00:09:49:06 के वस्त्रों का नाम लेने से ही काम चल जाए या नाम लिए बिना ही काम चल जाए परंतु तू बिल्कुल अपोक्ष रूप से एक-एक क्रिस्टल क्लियर बात करते हुए चलेगा ना। मान ले कि दीक्षा ही ली गई तेरी पत्नी के द्वारा या तेरी मां के द्वारा तो तू ऐसे ही बताएगा ना। पूछा जाएगा कि उस समय पारंपरिक वस्त्रों में थी ना। ऐसा तो नहीं आज के आधुनिक कपड़ों में थी उस समय तुम्हारी मां या बहन या पत्नी तो तू ऐसे ही बताएगा ना हां मेरी माता जी ने साड़ी भी पहन रखी थी और नीचे का यह फलाना वाला अंतरवस्त्र भी पहन रखा था ऊपर का फलाना वाला अंतरवस्त्र भी पहन रखा था या मेरी पत्नी ने भी अंदर यह अंतरवस्त्र पहन रखा था ऊपर यह अंतरवस्त्र पहन रखा था इसी तरीके से विष्ठा निकालेगा ना अपनी माता पत्नी और बहन के लिए
00:10:35:01 शर्म नहीं आ रही तुझे कुतर्क करते हुए अब तू यहां पर एक कुतर्क करेगा कि मेरे घर की स्त्री ऐसे फोटो नहीं खिंचवाती है। मेरे घर की स्त्री ऐसे वीडियो नहीं बनवाती है। तो तू अपना यही कारण बताना उन शब्दों का यूज़ करने का। जब शब्दों का यूज़ करने का कारण पूछा जा रहा है तो बड़ा भोला बन करके बोल रहा है कि भाई आजकल अंतर वस्त्रों को इन्हीं नामों से पुकारा जाता है। तो मैंने बोला अरे तू कारण यह बता ना क्योंकि वो इस तरह से उसने फोटो खिंचाई इसलिए मैंने उसके बारे में ऐसा बोला। जबकि मैं कह सकता था कि उसने अंतर वस्त्रों में फोटो खिंचवाई है। फिर भी मैंने नाम लेकर के बोला मेरे अंदर तो अभी भी अपने गुरु से प्राप्त राम श्री राम जी से प्राप्त इतनी मर्यादा है कि मेरे को अभी भी दिक्कत हो रही है। तेरा रिप्लाई करते टाइम तेरे घर की महिलाओं के बारे में ये बातें बोलने में। जबकि तू इतनी विष्ठा कर चुका है मेरे लिए। है ना? यह है अंतर। यह है परंपरा प्राप्त मर्यादा। और तेरा क्या है? परंपरा प्राप्त विष्ठा। परंपरा प्राप्त दोगलापन परंपरा प्राप्त कुतर्क अब एक बात बता क्या तेरे चैनल पर तेरी Facebook आईडी पर कभी किसी ने तुझको और अनर्गल उल्टी सीधी बातें नहीं कही
00:11:51:06 तो तूने लेना एक ना देना दो मुझे ही मानहानि का 100 करोड़ का दावा क्यों भेजा भाई क्यों भेजा उनको 100 करोड़ का दावा क्यों भेजा जो मेरे चैनल पे जिनका इंटरव्यू पड़ा था चिकित्सक जी का आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं तूने ले दे के एक आदित्य वैभव सिंह के नाम से जोड़ते हुए मेरे खिलाफ ही एफआईआर क्यों कराने का प्रयास किया? क्यों? बहुत से कमेंट तेरे चैनल पे दिख जाएंगे। तूने खुद अपने पोस्ट इत्यादि में अब कई ऐसे कमेंट हैं जो तूने निर्गत किए हैं वहां पर दिखाए हैं कि देखो मुझे कितना बुरा भरा बोल रहे हैं। उल्टा सीधा बोल रहे हैं। तो उनके खिलाफ तूने एक्शन क्यों नहीं लिया है? क्या हम हमारे विरोध में इस तरह का कार्य करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के ऊपर एक्शन ले क्या जहां जो हमें सही लगेगा कि इसके ऊपर एक्शन लेने से एक हमारे जो प्रयास है वो सफल होगा और ज्यादा उस जो प्रयास है जो श्रम है उसका हमें वो अपेक्षाकृत वो अच्छा फल मिलेगा हम उस प्रकार करेंगे और दूसरी बात इस समय हम लोग रामपाल ने जो अभद्र चीजें की है हमारे धर्म को लेकर के हमारी दुर्गा माता के लिए उल्टी सीधी बातें बोली हैं। हम इस समय अ उनका प्रतिकार कर रहे हैं। चल रहा है। तो
00:13:06:07 इस समय अब रामपाल वाले कहे कि अरे भैया अमुक अमुक तंत्र भी तो है जो गीता में शिव जी का अपमान कर रहा है। मगर उसका केस नहीं किया। हमारा केस किया है। तो ये कहां तक की तर्कपूर्ण बातें हैं भाई? रामपाल पर केस इसलिए ना करें कि जिस दिन हम दुनिया में जितने भी सनातन विरोधी सनातन के नाम से चलने वाले तंत्र हैं या सनातन विरोधी तंत्र जिस दिन हम उन सब पे एक साथ केस करेंगे उसी दिन हम रामपाल पे केस करेंगे अन्यथा नहीं करेंगे। यही है ना तेरी तर्कशीलता। अब अपने शब्दों का वेग क्यों बदल रहा है? अब अपने शब्दों को सॉफ्ट करके क्यों बोल रहा है? वैसे ही बोल। कुत्ते के साथ चुम्मा बोलना। क्या दिक्कत हो रही है क्या कुत्ते के साथ चुम्मा बोलने में? बोल वैश्या बोला था ना सिद्ध करा के वैश्या कोर्ट में दया भी आती है तेरे ऊपर ये जो तू अपनी अखेलियों में आगे बढ़ता चला जा रहा है ना दया भी आती है तेरी जो दुर्बुद्धि है जो तुझे प्रेशर देने वाले जो तेरे चापलूस हैं जो तुझे फुकों पर चढ़ाए रहते हो तू चढ़ा रहता है चढ़ चढ़ झूठे की हद तक और चोर के घर तक तूने अपमान मान किया है ना परंपराओं का उन आचार्यों के कारण
00:14:21:15 तेरा नाश होगा तूने महिलाओं का अपमान किया है ना वैश्या का है ना निराधार रूप से उन महिलाओं के कारण तेरा नाश होगा तूने सामर्थ्यवान गुरु परंपरा प्राप्त आचार्यों के शिष्यों का अपमान किया है ना उनके कारण तेरा नाश होगा देखता जा जय श्री राम [संगीत]
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भागवतानंद के कुतर्क और पक्षपात की समीक्षा
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