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00:00:06:28 हां भाई बाबू बहुत बढ़िया आ गए करत करत अभ्यास ते जड़मती होत सुरान रड़ी आवत जात ते सिल पर निशान डडी डडीिकेशन तो मानना पड़ेगा बाबू तुम्हारा मुझे मालूम था बाबू जी जो है फस गया बेचारा उस में हां बाबू बताइए रामपाल जी का ज्ञान आपको क्यों वो लगता है प्रामाणिक
00:00:39:13 जी बंदी छोड़ सतगुरु रामपाल जी भगवान की जय हो बंदी छोड़ कबीर भगवान की जय हो सत साहेब राम राम आप सभी दर्शकों को सत साहिब ये आपने अभी-अभी जो कबीर को भगवान और रामपाल को भगवान कहा है और बंदी छुड़वाने वाला कहा है ये कैसे आधार पे कहा है जी बताइए जिस आधार से छुड़ाया जाता है उसी आधार से जिस आधार से छुड़ाया जाता यानी कि यानी कि कबीर जो है वो ईश्वर है
00:01:18:09 जी जी सर्वशक्तिमान है तो देखिए हम आपसे बहुत कठिन से जुड़े हैं तो आपसे हम सर्वप्रथम हम एक दिक्कत है आप सिर्फ यहां पे अभी भगवान मत कहिए मेरे चैनल पे अपने शब्द वापस ले लीजिए या फिर भगवान सिद्ध करिए पहले हमने हमने हमने जो बोला है तो हमने अपने गुरु को अपने भगवान को प्रणाम किया हमने तो आपको कुछ नहीं बोला भगवान किसी का अलग नहीं हो सकता है सबका भगवान एक ही हो सकता है किसी का अलग नहीं हो सकता है आप आप जिसको यहां भगवान कह रहे हैं भगवान के रूप में प्रचारित कर रहे हैं आप उसको भगवान फिर सिद्ध करिए या तो अपने शब्द वापस लीजिए हमने अपने गुरु को अपने भगवान को प्रणाम। भाई मैं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं भगवान श्री राम की जय। और अगर तुम पूछोगे मैं श्री राम को भगवान सिद्ध कर दूंगा। सर्वशक्तिमान सिद्ध कर दूंगा। अब तुम यदि सर्वशक्तिमान सिद्ध कर पा रहे हो कबीर को तो तुम कहो वरना अपना वापस ले लो। दूसरी बातें करो। और अपने घर पे खूब लो राम। अपने घर पे जाके आप खूब नाम लीजिए उनका। अच्छा अच्छा कोई बात नहीं तो आपने श्री राम सिद्ध करेंगे ना सक्षम फिलहाल
00:02:34:02 आपने ये कहा है ना फिलहाल आपने ये माना है ना हम करेंगे सिद्ध फिलहाल आपने शुरुआत की है तो आपको सिद्ध करना है करेंगे ठीक नहीं हम हम उसको हम सिद्ध करेंगे लेकिन हम ये कह रहे हैं कि आपने बोला है कि हम सर्वशक्तिमान सिद्ध करेंगे श्री राम को ठीक है तो आप करिए लेकिन इस इस पर हम आपसे चर्चा करने से पहले हम कुछ बातें रखेंगे अपनी। इसके बाद हम आपसे चर्चा करेंगे। नहीं नहीं वो बातें आप तब रखिए जब अपने शब्द वापस लीजिए पहले। हां हम वापस ले लीजिए। देखिए हम संत रामपाल जी महाराज को अपना गुरु मानते हैं। कबीर साहब को परमात्मा मानते हैं। हम अपने लिए मानते हैं। हम अपनी बात को अपने पास रख रहे हैं। अपना वापस लेते हैं। आपसे हमारा उसमें कोई नहीं है। आपके लिए भी परमात्मा सिद्ध करिए ना। हम हमें यदि आप बता रहे हैं। आप मन में मानिए। आप यदि हमें बता रहे हैं हमारे सामने कोई असत्य बात करेंगे यदि आप तो हम टोकेंगे ना आपको आपके लिए भी वो परमात्मा नहीं है उसको हम हम सिद्ध करेंगे कि कभी परमात्मा अभी अभी अगर आपने पहले वो पॉइंट नहीं उठाया होता तो हम कुछ ना कहते वो पॉइंट आपने उठाया हां ठीक है हमने मैंने आ के कोई क्लेम किया क्या मैंने आ के
00:03:49:06 कोई क्लेम किया क्या हम सिद्ध करने के लिए तैयार है बात आपको समझ कर दीजिए ना कर दीजिए बहुत देर थोड़ी ना लगेगी कर दीजिए फिर आगे बढ़िए चलिए ठीक है ठीक है करेंगे करेंगे थोड़ी रुक जाइए रुक जाइए शांत धैर्य बना करके देखिए नहीं तो आप आप वो शब्द वापस ले लीजिए आगे चलते हैं आप कह दीजिए अभी फिलहाल के लिए मैं इस बात को रख रहा हूं कि मैं उन्हें भगवान नहीं मानता फिर आगे चलिए नहीं तो अगर भगवान कहा है तो आप सिद्ध करो पहले मैंने कबीर भगवान 100% मानता हूं हां तो सिद्ध करो 100 में 99 भी नहीं है। 100% है कि मैं कबीर परमात्मा को मानता हूं। ठीक है? तो क्या वो सर्वशक्तिमान है? जी हम माता के गर्भ से जन्म ले सकता है? नहीं लेता है। तो वो तो सर्वशक्तिमान नहीं रहा। फिर
00:04:43:18 कैसे? अरे सर्वशक्तिमान का अर्थ क्या है? सर्वशक्तिमान का अर्थ है कि जो सब कुछ कर सकता है हम तो वो वो गर्भ से जन्म क्यों नहीं ले पा रहा है फिर वो गर्भ से जन्म उसको लेने की जरूरत क्या है वो तो अपने अपने नीचे से अरे भैया फिर वही बात हो गई जरूरत ना होना वो थोड़ी ना है मैं कह रहा हूं ले सकता है कि नहीं कैपेबिलिटी है कि नहीं वो ले सकता है लेकिन लेता नहीं है क्योंकि उसने उत्पत्ति किया है उसने अपने समक्ष उत्पत्ति किया है वो लेता नहीं है इस बात इस मर्यादा को तोड़ सकता है कि नहीं? मर्यादा नहीं तोड़ता वो। वो सर्वशक्तिमान है इसलिए मर्यादा नहीं तोड़ता। अच्छा ये कहां पर लिखी है परिभाषा? कबीर सागर में लिखा है। वो सर्वशक्तिमान है। हां। सर्वशक्तिमान ठीक है। सर्वशक्तिमान भी मर्यादा किसके लिए होती है? मर्यादा का अर्थ क्या है? मर्यादा का अर्थ है कि वो इतने इतने के अंतर्गत वो कार्य को करेगा। मर्यादा मर्यादा की आवश्यकता क्या है? मर्यादा की आवश्यकता इसलिए है कि जो भी मतलब कार्य होगा एक नियम के आधार से होगा। अरे क्यों? क्यों
00:05:58:21 होगा नियम के हिसाब से बताइए? नियम के हिसाब से इसलिए होगा कि अगर नियम को अगर उल्लंघन करके अगर कोई अगर चल रहा है तो उसमें कुछ भी हानि हो सकती है। लेकिन अगर यानी कि यानी कि भगवान को भी हानि होगी। भगवान को भी भय है। भाई किसी भी चीज की नियम होती है। अगर नियम तोड़ेगा तो उसका हानि होगी। बाबू मैंने आपसे क्या पूछा है? भगवान को भी हानि होने का भय है। बिल्कुल 100% भाई अगर अगर नियम तोड़ेगा तो हानि तो होगा ही। उसमें कौन सी सत्य बात है? तो क्या हानि होगी उसकी? जैसे जैसे हमने नियम तोड़ा तो हमें तो मोक्ष नहीं मिलेगा। नरक मिलेगा। उसने नियम तोड़ा तो उसको क्या मिलेगा? क्या हानि है? उसको उसको जो जिस कार्य को करेगा अगर वो नियम तोड़ के करेगा तो उसमें उसका हानि होगी। अरे हानि होगी तो उसको कष्ट होगा। जैसे हमारी हानि यही है कि हमें कष्ट होगा एट द एंड उसको कष्ट होगा।
00:07:00:28 उसको कष्ट नहीं होगा क्योंकि उन्होंने सब चीजों को अपने शब्द से उत्पन्न किया है। मैंने क्या पूछ हानि सिद्ध करो ना भगवान की हानि कैसे होगी? सिद्ध करो फिर कैसे होगी? हानि ऐसे जैसे मान लीजिए कि भगवान ने अपने शब्द से उत्पन्न कर लिया। ठीक है? शब्द से शब्द से उत्पन्न करने के बाद अगर वो अपना रखा है अगर उसको अगर शब्द को अगर वापस ले लेता है उसने उसका विचार था कि सृष्टि रचे और सृष्टि ना रच करके अगर शब्द को पूरा वो तोड़ देता है तो उसका सृष्टि नहीं रची जाएगी। तो इसलिए इसका मतलब सृष्टि इसका मतलब सृष्टि रचना उसका लाभ है। सृष्टि रचना से उसे खुशी मिल रही है। बिल्कुल जब सारे ब्रह्मांडों को उसने उत्पन्न किया है तो किसी रचना से उसे खुशी मिल रही है। बिल्कुल अच्छा और सृष्टि रचना नहीं होगी तो उसे दुख होगा।
00:07:57:06 कौन सी आप कौन सी सृष्टि रचना कह रहे हैं? ये जो हम कोई भी कोई भी सृष्टि रचना अगर सृष्टि रचना नहीं की उसने नियमों के विरुद्ध जाने के कारण तो उसे दुख होना मान रहे हो आप। नहीं ये जो हम लोग यहां पर जो काल भगवान के 21 ब्रह्मांड के अंतर्गत जो सृष्टि रची जा रही है भाई मैंने कहा कि उसकी उसको कष्ट कैसे होगा ये बता दो कष्ट होता है कि नहीं होता है पहले ये बता दो कबीर को कष्ट होता है ना जैसे जैसे कष्ट ऐसे होता है यानी कि भगवान को भी दुख है भगवान को भी दुख हो सकता है भगवान को दुख ऐसे होता है कि जैसे हम लोग यहां पर दुखी होते हैं नरक में जाते हैं 84 में जाते हैं तो हम हम परमा हमने भगवान के अंश है तो हम लोग जब यहां पर नरक में जाते हैं। अगर चिल रोते हैं, चिल्लाते हैं तो उसको वहां दुख पहुंचता है कि हमारा यह पुत्र हमारा बच्चा यहां पर नर्क में आज भटक रहा है। हम हमने जब सही मार्ग बताया इसने नहीं माना था। तो इस बात यानी कि भगवान में भी अभाव है, दुख है, कमी है, पूर्ण नहीं है फिर वो वो पूर्ण है। लेकिन उसकी संतान जब यहां पर दुखी है तो मेरे भाई जो दुखी है वो मुक्त कहां से हो गया? जो किसी भी कारण से दुखी हो सकता है वो मुक्त कैसे हो गया? अच्छा आप एक बात आप एक बात बताओ ऐसे
00:09:12:12 समझ लो जैसे मान लो कि हम यहां से मुक्त होकर चले गए तो कहां जाएंगे? भगवान के लोक में जाएंगे ना भगवान के लोक में जाएंगे ना। हां जी। कबीर के लोक में जाएंगे ना? तो वहां जाकर के उसके बाद क्या हमें किसी भी प्रकार का दुख हो सकता है? नहीं वहां नहीं होता। अच्छा मतलब वहां पर भगवान को दुख हो सकता है। हमें नहीं हो सकता। वहां पर सतलोक में कोई दुख नहीं होता। वहां पर भगवान को दुख जब आप भगवान का दुख होना स्वीकार कर रहे हो तो फिर हम तो जीव है ना। ये बताइए कि अगर किसी बाप का अगर बाप के सामने किसी बेटे को कोई मार रहा है तो क्या बाप को दुख नहीं होगा? बाप को दुख बाप सर्वशक्तिमान नहीं होता ना जो बाप जिस बाप से आप तुलना कर रहे हो वो सर्वशक्तिमान नहीं है ना आप सर्वशक्तिमान की तुलना एक हाड़ मास के पंच भौतिक शरीर से तुलना कर रहे हो आप भगवान की इसीलिए कहते हैं मत चक्कर में नहीं एक मिनट आप आपका ये कहना है कि अगर कोई अगर बाप को अगर बेटे के दुख
00:10:27:18 से अगर दुखी है तो वो सर्वशक्तिमान नहीं है। अब यह कहना चाहते हैं। अरे भैया इसका मतलब जो बाप है वह सर्वशक्तिमान मान रहे हो उसे अगर बेटे के दुख से वो दुखी हो रहा है फिर भी भाई अब जो हमारा भगवान को सच्चिदानंद कहा गया है कि नहीं? भगवान को सच्चिदानंद कहा गया है कि नहीं? सच्चिदानंद और सच्चिदानंद घन ब्रह्म में अंतर है। अब कौन से भगवान की बात घन मैं कह रहा हूं सच्चिदानंद घन ब्रह्म कहा गया है कि नहीं? चलो हां कहा गया
00:11:04:07 क्या अर्थ है इसका उसका नाम है ये नाम का अर्थ नहीं होता सत कुछ नहीं पता है नाम का अर्थ नहीं होता चले आए नाम का अर्थ नहीं होता अर्थ है इसका सुनो सत मतलब स्वरूप से सत कभी ना चेंज होने वाला चित मतलब अखंड ज्ञानी सतचित आनंद मतलब अनंत अनंत आनंद जिस आनंद में ब्रेक नहीं लग सकती वो है भगवान अगर उसके भी आनंद में ब्रेक लग सकती है तो वो सच्चिदानंद कहां से सिद्ध हुआ सच्चिदानंद घन ब्रह्म कहां से सिद्ध हुआ शिवश का शिवांश का अर्थ करिए आप शिवंश का अर्थ क्या होता है शिवकांश
00:11:51:06 हो गया अच्छा अच्छा अच्छा हां चलिए अब सुन लीजिए अब सुन लीजिए इसके बाद चर्चा करेंगे। अब अब आपका हो गया। अब अब मेरी बात समझ लीजिए। अभी हम आपसे बोलना चाह रहे थे। आपने बोलने नहीं दे रहे थे। अभी हमारी बात पूरा नहीं हुई थी कि हमने जब आपके चैनल पर अभी ज्वाइन होना चाह रहा था। बहुत कोशिश किया तो पता नहीं क्यों हट जा रहे थे। आपके इस पर क्या लिखता है कि दिस दिस होस्ट हैज इनेबल लोकल रिकॉर्डिंग। मतलब इस पर लोकल रिकॉर्डिंग बोल रहा था कि आप ये लोकल रिकॉर्डिंग है। तो मैंने काफी कोशिश किया इस पर ज्वाइन नहीं हो पा रहे थे। अब दूसरी बात यह है कि यह बकवास बातें हमें ना बताइए। हम आपको बार-बार ऊपर ले रहे थे तब आपने जो है अपना कैमरा ऑन नहीं कर पा रहे थे। ठीक है? कोई बात अब आप दोबारा उस पे आइए विषय पे। अब आप विषय पे आ जाइए। आपने कहा हमारा ईश्वर आपने कहा हमारा ईश्वर दुखी होता है तो दुखी होता है तो इसका मतलब उसका जो आनंद है वो अनंत आनंद नहीं है उसमें ब्रेक लग सकती है एक मिनट एक मिनट भाई साहब जब ब्रेक लग सकती है ब्रेक लग सकती है तो ऐसे आनंद की किसको जरूरत है शांति बना लीजिए आपके सारे प्रश्न का उत्तर देंगे हम ऐसे नहीं जाएंगे उत्तर देके जाएंगे थोड़ी
00:13:06:07 शांति बना लीजिए जी हमारा आपसे कहना है हमारा हमारा सर्वप्रथम हमारा यह कहना है कि आप हमें डिबेट से अपने से आप हटाओगे नहीं अगर मैं हट भी गया तो आपको जॉइ लेना होगा। नहीं हमारे पास हमारे पास व्यर्थ का समय नहीं है। अगर आप यहां पे आकर के जेलधाम निवासी की जो लीलाएं हैं वो वाली जिनके कारण वो जेल में पड़ा हुआ है वो बातें आप यहां बताने लगोगे तो हमें हटाना पड़ेगा आपको। जी हम उसको नहीं बताएंगे आपको। हमारा प्रश्न कोई और ये मैंने केवल उदाहरण दिया आपको। अगर आप व्यर्थ की चीजें करेंगे तो हटाना पड़ेगा हमें। हम यह आपके साथ वो नहीं और आप अपने मन से कई बार भागे भी हैं। आप अपना जवाब बाबू बाबू देखो मेरे पास बहुत ज्यादा समय नहीं है। आप मेरे लिए एक नगण्य व्यक्ति हैं। कोई इंपॉर्टेंट नहीं रखते आप। मैं मैं आपको तुरंत हटाऊंगा। फालतू की बातें अगर करोगे तो। सीधे जवाब दो। आपका आपका जिसको आपने अभी भगवान कहा है उसको दुख होता है। माना आपने। इसका मतलब वो सच्चिदानंद नहीं है। और आपने अभी एक बेवकूफी और की है कि सच्चिदानंद का कोई अर्थ नहीं है। यह भी बेवकूफी कर दी आपने। आप आप वो चीज दिखाइए कि भगवान को दुख नहीं होता। वो दिखाइए आप कहां पर लिखा
00:14:21:13 है? अरे सच्चिदानंद अपने आप में ही ये बात है ना। अच्छा ये बताओ भगवान को भी दुख भगवान को भी दुख होता है तो हमारे और भगवान में अंतर क्या रह गया बताओ? चलो नहीं मनगढ़ नहीं चलेगा। प्रमाण दीजिए कहां पर कि दुख नहीं होता है। दिखाइए प्रमाण। अरे यही प्रमाण है उसको उसको सच्चिदानंद कहना ही प्रमाण है। मनग देखिए मनगण हम नहीं मानते। प्रमाण चलता है। संत रामपाल जी ठीक है। ठीक है। नहीं मानते। ठीक है। ठीक है। ठीक है। ठीक है। नहीं मानते तो हमको ये बताओ। मैं मैं उत्तर मैं उत्तर दे रहा हूं। मैं उत्तर दे रहा हूं। मैं उत्तर दे रहा हूं। मेरा प्रश्न आप कह रहे हैं प्रमाण दिखाओ। आप कह रहे हैं प्रमाण दिखाओ। यही कह रहे हो ना? प्रमाण दिखाओ। कह रहे हो ना? क्लेम किसका है? किसी चीज के होने का प्रमाण चाहिए होता है ना होने का नहीं आप दिखाओ दुख दुख है भगवान को यह प्रमाण आपको दिखाना है दिखाओ नहीं आप कह रहे हैं कि दुख नहीं होता तो चीज दिखाइए ना कि कहां पर लिखा अरे भैया किसी चीज के ना होने का प्रमाण थोड़ी ना चाहिए होता है होने का चाहिए होता है कोई ये क्लेम कर रहा है ये चीज है उसका प्रमाण चाहिए जैसे मैंने कहा जैसे सुनो जैसे मैंने कहा कि यहां पे बाबू है तो मुझे प्रमाण देना है अगर बाबू नहीं तो तुम अगर
00:15:36:16 यहां पे नहीं हो ये अपने आप में एक प्रमाण है। इसके लिए मुझे कुछ ला के दिखाने की जरूरत नहीं है। वो वो हमारे पास प्रमाण है कि परमात्मा को दुख होता है। हमारे पास कबीर साहब का प्रमाण है। वो वो दिखाओ वो दिखाओ। दुख होता है। परमात्मा को दुख होता है वो दिखाओ। फिर हम उसको काटेंगे। वो चीज हमारे पास प्रमाण है। आप वो चीज दिखाइए कि परमात्मा को दुख नहीं होता है। आप कहां से प्रमाण मानोगे ये बताओ। किसको प्रमाण मानते हो ये बताओ। चलो। कबीर सा में लिखा है ना कबीर सागर को मैं दिखाऊं आपको कबीर सागर को दिखाऊं तो ये चिल्लाया करो जाके कबीर सागर में प्रमाण है और कबीर भगवान है वेद का नाम क्यों लेते हो
00:16:18:28 दुख नहीं होता दिखाइए कहां पर लिखा है अरे भैया जब तुम खुद कह रहे हो कि यहां से जो जीव मुक्त होता है उसको दुख नहीं होता तो तुम ये मान रहे हो कि मतलब जीव को दुख नहीं होगा परमात्मा को दुख होगा यहां पर जीव नरक में जाता है 84 में जाता है तो परमात्मा करके भगवान के धाम चला जाएगा जहां भगवान बैठा है वहां पे जीव को वो दुख होगा कि नहीं होगा वहां पर दुख नहीं होता वहां पर परम शक्ति इसका मतलब तुम ये कह रहे हो कि जहां भगवान है वहां भगवान को तो दुख होगा मगर जो मुक्त जीव है वो उसको दुख नहीं होगा अरे यार हम का कह रहे हैं कि यार नरक में 84 में जब हम लोग घूमते हैं तब परमात्मा को दुख होता हम ये कह रहे हैं। अरे मैं मैं कह रहा हूं जब मैं कह रहा हूं जो जीव मुक्ति धाम चला गया जहां पर भगवान अच्छा जब परमात्मा को जब दुख होता है और जब मनुष्य जो है जीव जो है 84 लाख योनियों में होता है तो भगवान कहां पर होते हैं उस समय जहां उनको दुख होता है कहां होते हैं भगवान भगवान सनातन परमधाम रहते हैं अरे भैया उस लोक के उस लोक में जिस लोक में आप जाओगे मुक्त होने के बाद वहां
00:17:34:04 या उससे भी और अच्छे लोक में रहते हैं ना तो वहां पर वहां पर किसी की कोई दुख नहीं होती परमात्मा कभी वहां दुख नहीं होता लेकिन परमात्मा का कोई भी जीव सुनिए मैंने क्या है मैंने क्या इस अच्छा ये बताओ इस समय कुछ लोग मुक्त होंगे कि नहीं वहां पे जीव कि परमात्मा अकेला है वहां बहुत मुक्त है बहुत लोग हैं वहां पर मुक्त है तो क्या उनको दुख हो सकता है इस समय जो इस समय मुक्त है वहां पर वहां पर नहीं होता नहीं होता तो वहीं पे जीव जो है वो मुक्त है उसको दुख नहीं हो रहा है भगवान को दुख होता है वहां पर भगवान को भी दुख नहीं होता जो यहां पर आत्माएं दुखी होती है उसके विपरीत में परमात्मा वहां दुखी होता है अरे किसी भी कारण से हो दुखी तो होता है ना बिल्कुल बिल्कुल दुख है ना तुम्हारे सतलोक में
00:18:29:13 अपने बाप बाप अपने पुत्र के लिए दुखी नहीं होगा फिर किसके लिए दुखी होगा क्योंकि वो बाप बाप यह जानता है कि यह जो लड़का है मेरा बेकार में दुखी हो रहा है क्योंकि वो बाप जो है वो यह जानता है कि मैं सर्वशक्तिमान हूं। वो बाप साधारण बाप नहीं है। पंच भौतिक बाप नहीं है वो बाप। आपका ये कहना है कि मतलब परमात्मा दुखी नहीं होता। तो आप उस वो चीज हम परमा अरे भैया जब आप परमात्मा को ही दुखी करा दोगे। जब आप जब आप परमात्मा को ही दुखी करा दोगे तो हमको मुक्ति कौन देगा? कौन देगा मुक्ति अरे तो परमा किसी भी कारण से सुनो बाबू सुन लो किसी भी कारण से यदि परमात्मा दुखी हो रहा है तो हमारे को मुक्ति वो देगा वो भी अनंत वाली अनंत दुख वाली ये हम कैसे मानेंगे भाई जो खुद दुखी है किसी भी कारण से देखिए ये हाई लेवल का ज्ञान है इस ज्ञान को आप ऐसे नहीं समझ सकते पहले आप बातें करोगे मैं तुम्हें सच से निकाल दूंगा। बहुत हो गया। हाई लेवल, लो लेवल हमें ना बताना। देख रहा हूं तुम्हारा हाई लेवल कितना है। आप बात नहीं है तो हम क्या करें? आप प्रमाण कौन बोल रहा है? प्रमाण नहीं
00:19:44:14 है भाई मैं प्रमाण तब दिखाऊं ना जब प्रमाण प्रमाण हो। अभी आपसे मैंने पूछा प्रमाण किसे मानते हो? आप मानते हो उसको कबीर सागर को तो मैं क्या दिखाऊं तुम्हें प्रमाण? जाओ जाकर के कबीर सागर के नाम पे खूब ढिंढोरा पीटो के कबीर सागर में प्रमाण है और रामपाल भगवान है और मैं भगवान हूं और मेरे पिताजी भगवान है सब ढिंढोरा पीटो हमें क्या मतलब वेद से वेद को प्रमाण मानो वेद को प्रमाण मानना जब सिद्ध करोगे की हां मेरे लिए वेद प्रमाण है गीता प्रमाण है तब मैं तुम्हें वो दूंगा तुम्हारे साथ क्या लाइव चर्चाएं की नहीं है क्या
00:20:17:27 खूब लाइव चर्चा कर चुके हैं तो हम मुझसे आगे की बात करेंगे ना जो हो चुकी है वही बात रिपीट करते रहे ठीक है। ठीक है। हम उस पर चर्चा करते हैं। आप बताइए कि परमात्मा पहले है कौन? तो उसको तो जान ले पहले। अब परमात्मा किसको मान कर बैठे हैं? विषयंतर मत करो। तुमने जो आकर के बोला है उसको वापस लो कि अभी फिलहाल मैं ये मान रहा हूं कि जो कबीर है और रामपाल है भगवान नहीं है। ये बोलो फिर आगे बढ़े। हम 100% मानते हैं कि कबीर परमात्मा भगवान सारे सृष्टिने वाले अच्छा चलो ठीक है तुम्हारा भगवान दुखी होता है ठीक है दुखी होता है मान लिया मान लिया ना ठीक है अब तुम्हारा परमात्मा दुखी होता है तो दुखी होने वाला परमात्मा एक्सिस्ट करता है सिद्ध करो
00:21:11:10 सिद्ध करो चलो हम गीता अध्याय 15 श्लोक नंबर अच्छा गीता को गीता क्या है बताओ जरा गीता तुम्हारे पास कैसे आई गीता आई हम आपके परंपरा के आधार से अच्छा तो गीता का अर्थ कौन बताएगा आप ही लोग तो अनुवाद किए गीता पर जो भी लिखा आपके परंपरा वाले अनुवाद किए हैं उसको उन्होंने उन्होंने माना है कबीर भगवान है उन्होंने गीता मेरी परंपरा मेरी परंपरा वालों ने क्या माना है क्या कबीर भगवान है आपके परंपरा वाले गीता में बताई परम अचर ब्रह्म है परमात्मा अरे भाई मैंने क्या कहा कबीर को भगवान माना है क्या वो जो जिसने दोहे लिखे हैं बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर इनको प्रमाण माना है क्या जिस जो जिसे तुम्हारा रामपाल भगवान कहता है उसको हमारे आचार्यों ने भगवान माना है क्या अच्छा अगर तुम्हें उन पर विश्वास नहीं है उन आचार्यों पर तो उनके द्वारा दी जाने वाली किताब पर विश्वास कैसे? इसका मतलब तुम कबीर को उन किताबों के आधार पर परमेश्वर सिद्ध नहीं कर सकते
00:22:26:16 जो किताबें तुम्हें उन आचार्यों से मिली है जिन पर तुम्हें विश्वास नहीं है। ठीक है? तो कुल मिलाकर के तुम्हें स्वतंत्र रूप से सिद्धांत के द्वारा सिद्ध करना है। सिद्धांत के द्वारा हम हम उसको सिद्धांत के द्वारा सिद्ध कर रहे हैं। हम आपको ये भी सिद्ध करके दिखाएंगे कि आप अपने परंपरा वालों की बात को नहीं मानते। हमारे वो बात है। फिलहाल फिलहाल आप जो है कबीर को परमात्मा है। यह सिद्ध करो। गीता गीता का प्रमाण मत दो। गीता का प्रमाण दो तो गीता देने वाले पर विश्वास करो। हमें विश्वास या तो कह दो या तो यह कह दो कि वो झूठे हैं अज्ञानी है तो फिर गीता को मत मानो उनके द्वारा मिलने वाली फिर तुम सिद्ध कर दो। हम उसको बांध रहे हैं ना कि आपके जो परंपरा वाले हैं जो गीता का ज्ञान लिखे हैं वेदव्यास जी उनको जितना जानकारी मिली उतना लिख दिए। अब आगे की अरे भैया इतना जानकारी उतना नहीं वो सच बोलते हैं वो सही बात बताते हैं या वो झूठ बोलते हैं वो गलत बात भी बताते हैं क्या
00:23:37:20 वो जो गीता जो गीता का ज्ञान देने वाले भगवान ने बोला वेदव्यास ने दिव्य दृष्टि दिए थे संजय अली मैंने क्या कहा भाई साहब आपको आपको ये जो किताब है वेदव्यास जी ने नहीं दी है। आपको ये किताब पिछले 100 साल में 50 साल पहले जो हमारे पूर्वाचार्य हुए हैं उन्होंने दी है। ठीक है? जी। तो आप वो जो पूर्वाचार्य हैं उन्होंने कबीर को भगवान माना है। अगर नहीं माना है और फिर भी आप कबीर को भगवान मान रहे हैं उनकी किताब के आधार पे तो इसका मतलब है कि आपको उनकी गुणवत्ता पर यकीन नहीं है। कि वो सच ही बोलेंगे। हम उसी चीज को तो जानना चाहते हैं पहले आपसे आप हर भाई अभी बात अभी बात ये चल रही है कि कबीर परमा कबीर अभी बात ये चल रही है कि जिसमें दुख है जिसमें दुख है उस भगवान का अस्तित्व कैसे सिद्ध होता है वो बताओ उसका तो आपके पास प्रमाण ही नहीं है लेकिन अब हम प्रश्न कर रहे हैं आपसे आप उत्तर फालतू की बात करोगे हम तुम्हें हटा देंगे हमारे पास सच्चिदानंद अपने आप में प्रमाण है उसमें प्रमाण देने की आवश्यकता ही नहीं है। और हम तुम्हें प्रमाण दे क्यों?
00:24:53:03 अरे मैं जो कह रहा हूं जब तुम प्रमाण उसको मानते ही नहीं हो जब तुम जब तुम जैसे मैंने तुम्हें अगर ये बुक दी मान लो ये बुक मैं तुम्हें दे रहा हूं। अब इस बुक को तुम प्रमाण तब मानोगे जब तुम मुझे सच्चा मानोगे। अगर तुम मुझे झूठा मानते हो तो मैं झूठी किताब भी तुम्हें दे सकता हूं। तुम्हें कैसे पता है वेदव्यास जी वाली किताब है? ठीक। अब बता रहा हूं आपको हां कि आपके परंपरा से जो परंपरा से चलते आ रहा है जो वेद गीता संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान तो आज चालू हुआ है 1997 से बातें मत करो पहले तुम ये बताओ दुखी होने वाला ईश्वर कैसे है ये सिद्ध करो पहले आप आप अभी तक हमें वो प्रमाण नहीं दिए प्रमाण दीजिए किस बात जो ईश्वर भागवत उतार फीता लगा दुखी नहीं होता वो प्रमाण ठीक है दे रहा हूं हालांकि देना नहीं चाहिए अपमान है वो प्रमाण का फिर भी दे रहा हूं वो जनता आप प्रमाण दीजिए वाले के लिए कल ही खोला था ये प्रमाण तुम भी देख लो इस वाले के लिए खोला था ये प्रमाण भागवत का आप प्रमाण दीजिए कि जनता दे रहा हूं
00:26:08:14 परमेश्वर ये देखो भागवत में लिखा हुआ है स्कंद सात अध्याय नौ लिखो ये देख लो। अच्छा क्या लिखा है? क्या लिखा है? पढ़ो। ये कौन सा ग्रंथ है? भागवत पुराण। भाग भागवत। अच्छा क्या लिखा है? क्या लिखा है? भागवत लिखा है। ये किस इसका इसका? ये कवर दिखाइए। कवर कवर में क्या लिखा है?
00:26:42:00 कवर दिखाइए इसका। पहले तुम पढ़ लो फिर दिखाऊंगा। ये कहां? ऊपर से नीचे साइड ऊपर से बीते के तुरंत बाद। अच्छा अच्छा यहां लिखा है कि हल्का नीचे करिए। हल्का सा हल्का नीचे करिए। हां। परम परमेश्वर अर्थात पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान सदैव आत्म तष्टिक रहने वाले हैं। अत जब उन्हें कोई भेंट अर्पित की जाती है हो गया हो गया हो गया क्या लिखा है और निकालो और भागवत और निकालो हां तो अभी क्या लिखा था अभी अभी आपने वो परमेश्वर तो बता नहीं पा रहे हैं परमेश्वर है कौन वो तो बताइए फालतू अब देखो तुमने की फालतू बात इसीलिए निकालता हूं बात चल रही है कि परमेश्वर में दुख होता है ये आपको सिद्ध करना है आपने पूछा आप कह दो दुख नहीं होता तो मैंने दिखा दिया परमेश्वर सदैव आत्म संतुष्ट रहता आत्म संतुष्ट उसको किसी चीज की जरूरत नहीं है। सदैव हमेशा नित्य स्थाई सनातन वो वो वो ज्ञान बोला किसने वो चीज दिखाइए। ऐसे कैसे हम मान लेंगे? वो ज्ञान बोला किसने? उसको अरे भाई किसी ने भी बोला हो परमेश्वर के लिए तो बोला गया।
00:27:57:25 अरे तो उसके पास तत्व ज्ञान है अरे तुमसे बेकार है। अब तुम ये बता दो तुम्हारे पास किताबें आई कहां से? जिन किताबों का तुम वो कर रहे हो। वो किताब आपके परंपरा वाला से आई है। सुनो सुनो तुम किताबों के आधार पर परमेश्वर सिद्ध कर रहे हो। सिद्धांत के द्वारा नहीं है तुम्हारे पास। परमेश्वरत्व कबीर के पास उसी चीज को उसी चीज को जानना चाहता हूं। सिद्धांत क्या है मेरे भाई? सिद्धांत क्या है? मैं तुमसे पूछ रहा हूं। सिद्धांत क्या है? सिद्धांत क्या है? सिद्धांत सिद्धांत हमारा यह है कि जो आपके परंपरा वाले जो ये लिखे हैं परमेश्वर में दुख होता है कि नहीं ये बताओ ये सिद्धांत है तुम्हारा ईश्वर को दुख होता है कबीर सागर में प्रमाण है मेरे पास कबीर सागर हम नहीं मानते कबीर सागर आप वेद में वेद में गीता में ईश्वर को दुख ईश्वर को ईश्वर को दुख स्वरूप मानते हो
00:28:56:24 आप वेद और गीता को सही सही कैसे मानते हैं? किस आधार से? वेद और गीता को हम सही मानते हैं क्योंकि हमारे पास वो परंपरा से आया है। और सीधी बात है अगर सीधी बात है कि अगर आप यह मान रहे हो किसी भी किताब का अर्थ कि हमारा जो ईश्वर है उसको दुख होता है क्योंकि वो कुरान में लिखा है वो बाइबल में लिखा है वो कबीर सागर में लिखा है तो सीधी बात है कि उस ईश्वर की सिद्धि कर दो कि ऐसा कोई ईश्वर एक्सिस्ट करता है स्वतंत्र होकर। किताब के आधार पर नहीं क्योंकि किताब को अब हम चैलेंज कर रहे हैं। किताब को अब हम चैलेंज कर रहे हैं कि ऐसे ईश्वर को ईश्वर सिद्ध कर दो। एक मिनट आपके ऐसे ईश्वर को ऐसे ईश्वर को
00:29:48:26 आपके जो परंपरा वाले हैं कि ग्रंथ में जो चीज लिखे हैं तो आप कैसे मान लीजिए वो सही लिखे हैं? क्योंकि वो परंपरा मैं बता रहा हूं। मैं बता रहा हूं क्योंकि वह परंपरा से है। पहली बात दूसरी बात देने वाला सन्यासी है। एक मिनट तीसरी बात वो समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों में सामंजस्य की शिक्षा देते हैं। चौथी बात कि वो मेरा संचय दूर करते हैं। जो मेरा प्रश्न होता है ईश्वर तत्व के विषय में जो तुम जैसे भोंदू लोग तुम्हारे जैसे जो भोंद गुरु के भों चेले नहीं समझ पाते हैं वो तात्विक ज्ञान वो मुझे देते हैं। यानी कि परंपरा एक मिनट एक मिनट परम सुनो परंपरा से प्रामाणिकता लक्षण से सन्यासत्व और समस्त श्रुति स्मृति शास्त्रों का आलंबन और फल स्वरूप प्राप्त होने वाला तत्व ज्ञान वो देते हैं वो ज्ञान जिसको प्राप्त करने के बाद किसी और ज्ञान को पाने की आवश्यकता नहीं रह जाती। मेरी प्यास है कि भाई जब ईश्वर अगर सशरीर है तो वो खड़ा है वो दुनिया किसने बनाई? अब तुम कह देते हो भैया हमें नहीं पता। अरे रुक जाइए। ऐसे जटिल जटिल सवालों का जवाब वो देते हैं। अरे रुक तो जाइए। देखिए आप
00:31:04:00 रुक लीजिए। आपका भाषण सुनने हम नहीं आए हैं। आप जो गाली दे रहे हैं बहुत दूर से आप जा सकते हैं। आप जा सकते हैं। चलिए निकलिए निकलिए।
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"परमात्मा को भी हानि होने का भय है!" - रामपाल के चेले का अनोखा ज्ञान और लाइव सरेंडर
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