Used:
SRT: ⬇ SRT ⬇ Original file

.srt or .vtt (Hindi). The old file is backed up. After that the match for this video is rebuilt (may take a few minutes, keep the page open).

⬜ Not used yet · 00:00:00:02 – 00:00:18:04 (0:18)

00:00:00:02 प्रार्थना है वह ईश्वर ने सुन ली। हमारी याचिका आज अह माननीय उच्च न्यायालय में स्वीकार कर ली गई है। तो ऐसा ना आपसे क्षमा चाहते हैं। वो नहीं धार्मिक पक्ष को यथावत रख रही है। पुरजोर विरोध कर रही है। इस विधर्म का जो

00:00:18:04 व्यक्ति अपराध के उसमें दो मुकदमों में आजीवन कारावास हुई। वो उसके सीधे प्रवचन आते हैं लाइव। कोर्ट ने एक बार नहीं तीनती बार क्लीन चिट दे रखी है सुप्रीम कोर्ट ने एक बार नहीं तीनती बार क्लीन चिट

⬜ Not used yet · 00:00:29:08 – 00:00:50:12 (0:21)

00:00:29:08 दे रखी है कालनेमी और कालने का इलाज जो है हनुमान जी ने अच्छे से किया था फिर आगे की कारवाई फिर आदेश वगैरह क्या थोड़ा सा बता दीजिए संत रामपाल जी महाराज जी के इस ज्ञान गंगा पुस्तक पर जबलपुर से हाई कोर्ट से मिला हुआ है आप देख सकते हैं प्रमाण

00:00:50:12 पेश किया था और जो सोशल मीडिया की बात अगर बताएं तो कहीं ना कहीं हमने उनको भी पार्टी बनाया है। बिहार के मुजफ्फरपुर केंद्रीय जेल में भी किया गया। जेल के कैदियों, प्रशासनिक अधिकारियों व जेल अधीक्षक साहिब को कुल 5000 पुस्तकों का निशुल्क वितरण किया गया। जेल के 4600 पुरुष कैदी, 260 महिला कैदी और 140 पुलिस स्टाफ को पुस्तक भेंट की गई। सरकार अपना इसमें जवाब दे और इसमें जवाब यह दे सकती है और पूरे विश्व में फैलेगा। कोई रोक नहीं सकता। तो आज मैं तेरा आह्वान कर रहा हूं। आज मैं तेरा आह्वान कर रहा हूं।

⬜ Not used yet · 00:01:22:21 – 00:09:18:24 (7:56)

00:01:22:21 तो सभी को जय श्री राम और आप सबके लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। हमारी जो प्रार्थना है वो ईश्वर ने सुन ली। हमारी याचिका आज अह माननीय उच्च न्यायालय में स्वीकार कर ली गई है। और जो कुछ कानूनी टर्म्स हैं, क्या-क्या वहां पर हुआ और क्या आदेश हुआ है, वह सबके बारे में हमारे साथ जो रंजना दीदी को असिस्ट कर रहे हैं, अधिवक्ता हैं अभिषेक द्विवेदी जी वो आपको बताएंगे। पर इस सबसे पहले मैं एक आभार प्रकट कर देना चाहता हूं उन सभी माननीय अ विभूतियों का जिन्होंने हमको यहां तक पहुंचाया और इसमें सबसे पहले जो हमारी रंजना दीदी है जिन्होंने आज हमारी बात को वहां पर रखा उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के समक्ष उनको बहुत-ब बहुत ढेर सारा आभार उनका और ढेर सारा उनको साधुवाद और वो हमारी अग्रजा भी हैं। तो उनसे हम आशीर्वाद की कामना भी करते हैं। आज गुरु पूर्णिमा का दिन है। और हरिशंकर जैन जी उनसे हम हमने आपको बताया था बवाना में उनसे भेंट हुई थी। तो हरिशंकर जैन जी के

00:02:37:27 माध्यम से हम रजनादिते तक पहुंचे हैं और इस केस में वह भी अपना एक अवलोकन बनाए रखे हैं। तो इसके लिए इस पूरी मुहिम में इस तरह से सक्रियता के साथ अपना अपनी भूमिका प्रस्तुत करने के लिए उनका भी ढेर सारा साधुवाद उनको भी और पूरी टीम जो रंजना दीदी के साथ इस केस में बढ़-चढ़कर के भाग ले रही है और हिंदू हमारे जो पक्ष है हम हिंदुओं का हमारे धार्मिक पक्ष को यथावत रख रही है। पुरजोर विरोध कर रही है इस विधर्म का जो रामपाल के नाम से सतलोक आश्रम गैंग द्वारा संचालित है। थोड़ा सा मैं अभिषेक जी आपको कहूंगा सबसे पहले तो आपको आभार कि आपने इस मुहिम में भागीदारी ली और धर्म की रक्षा के लिए खड़े हो गए। उत्कर्ष प्रताप सिंह भी इसमें असिस्ट कर रहे हैं रंजना दीदी को। तो किसी दिन उन उनका भी वक्तव्य आपको प्राप्त होगा। अभी वह नहीं है हमारे साथ तो अभिषेक द्विवेदी हैं। तो अभिषेक द्विवेदी जी भी असिस्ट कर रहे हैं। तो अभिषेक जी थोड़ा सा बताएं कि आज किस तरह से हमारा जो था प्रस्तुत हुआ उच्च न्यायालय में और क्या वहां से आदेश हुआ है और हमारे अगले कदम क्या हो सकते हैं। जी सर्वप्रथम आपको हम आभार

00:03:53:18 व्यक्त करना चाहेंगे। दूसरी चीज जैसा कि हमारा जो केस है वो एक ऐसे गैंग के विरुद्ध है जो ऐसी किताब छापते हैं ऐसी किताबों का वितरण समाज में करते हैं और उन किताबों में जो अशब्द लिखे हुए हमारे सनातनी हिंदू देवी देवताओं के विरुद्ध जी तो हमारा जो संविधान है जो हमारे देश का कानून है वो ऐसी चीजों को एक गंभीर अपराधों की श्रेणी में ले आज का जो नियम है बीएएस 2003 23 में उसमें पहले 295 ए की तरफ या एक ऑफेंस माना जाता था। अब डीएनएस 98 196 197 302 सो यह एक रेलेवेंट सेक्शन है जो ऐसे अपराधों के लिए अप्लाई होता है। अप्लाई होता है। जी तो इन सभी चीजों को लेकर प्रशासन को भी हम लोगों ने रिप्रेजेंटेशन वगैरह दी है और उस रिप्रेजेंटेशन के बाद हम माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ खंडपीठ में हमने एक याचिका हमने डाली है और ये बहुत गर्व की बात है। बहुत ऑनर की बात हम सभी के लिए है। इसके लिए मैं विशेषतर हमारी जो संरक्षिका हैं हमारी दीदी मातृ स्वरूपा जो श्री निरंजना अग्नित्री

00:05:08:19 दीदी उनका हम सभी को आभार व्यक्त करना चाहिए कि जिनके तत्वाधान में ये याचिका माननीय उच्च न्यायालय में गई और गर्व और प्रसन्नता वाली बात यह है कि खंडपीठ है। माननीय तो न्याय मूर्तियों की बेंच है। इसको स्वीकार किया गया। जी जी। प्रथम दृष्ट्या में जैसे ही यह बेंच के सामने जैसे हमारा पिटीशन गया जी तो जो माननीय न्यायाधीश मैं मैं इसमें थोड़ा सा बताना चाहूंगा क्योंकि मैं एक वहां पे ना मैं लॉयर हूं ना न्यायाधीश हूं। मैं एक सामान्य नागरिक बनके वहां बैठा था। मैं देख रहा था कि हमसे पहले करीब 13 मामलों की सुनवाई थी। हमारा आज 14वा क्रमांक था सीक्वेंस में। तो मैं यह देख रहा था कि जितने भी मामले आ रहे थे वहां पर न्यायाधीशों के समक्ष तो बहुत ज्यादा टाइम ऐसा नहीं लग रहा था और बहुत जल्दी कुछ एक मामले ही होंगे जो जिनको समय दिया गया न्यायालय की तरफ से। वो उनकी अपनी एक वो कि कौन किस प्रकरण में कितनी क्रेडिबिलिटी है। उसका आधार कितना मजबूत है। उसके आधार पे तो किसी भी मैंने नहीं देखा था कि बहुत अच्छे से किसी में मतलब अ किसी को समय मिल पाया हो। तो मगर जब हमने अपना क्रमांक देखा

00:06:23:20 जब हमारा हमारी बारी-बारी हमारा अफसर आया तो विशेष रूप से न्यायाधीशों ने उस पूरी बात को सुना समझा और कहीं-कहीं पर खेद भी प्रकट किया और जो करने वालों की कार्यस्थानी है उस पर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया भी उन्होंने प्रस्तुत की। तो यह हमारे लिए एक सौभाग्य की बात है कि हमें प्रॉपर तरीके से रजना दीदी ने हमारे पक्ष को इतना मजबूती के साथ वहां पर प्रस्तुत किया। इतनी विद्वता के साथ वहां पर पक्ष को रखा साथ में जो सहयोगी के रूप में अभिषेक जी भी वहां पर थे और उत्कर्ष जी भी वहां पर थे तो पूरा हमारा जो पक्ष था इतनी मजबूती से रखा गया कि न्यायाधीशों ने ना सिर्फ समय दिया हमारी बात को सुनने के लिए बल्कि जो उसके मुख्य मुख्य्य बिंदु थे उस पर अच्छे से अवलोकन किया जहां पर जिस प्रकार की प्रतिक्रिया की अपेक्षा की जा कर सकते हैं हम लोग उस प्रकार की प्रतिक्रिया भी हमें देखने को मिली वहां पर कोर्ट के के द्वारा न्यायाधीशों न्यायपालिका के द्वारा तो ये मैं बता रहा था तो फिर आगे की कारवाई फिर आदेश वगैरह क्या थोड़ा सा बता दिया माननीय न्यायालय ने हमारी जो याचिका है प्रथम दृष्ट्या में इसको उन्होंने गंभीरता से लिया और इसको स्वीकारा भी इस पे एक बेहतरीन अच्छा लोकस स्टैंड आई

00:07:38:24 है और ऐसे ऑफेंस जो है समाज के लिए बहुत घातक हो सकते हैं तो इस याचिका को माननीय न्यायालय ने स्वीकार किया विपक्षियों को जो जो हमने पार्टी बनाई उनमें से इशॉक नोटिस का आदेश हुआ है। हमारी जो प्रेयर है इसमें कि पहले तो ऐसी पुस्तकें जिसमें ऐसे शब्द लिखे हैं अभद्र अपमानजनक तो पहले ऐसी पुस्तकों पे रोक लगाने के लिए सरकार को माननीय न्यायालय आदेश करें कि उनकी जो संस्थाएं हैं या जहां ये किताबें छपती हैं पहले तो उसको सीज करें। जी। दूसरी चीज पूर्णतया ऐसे लोगों पर लगाम लगाए कि ऐसी पुस्तकें समाज में वितरण ना हो। यदि कोई ऐसा वितरण सामग्री कोई दे रहा है कहीं पे या कोई ऐसा कार्य कर रहा है तो सरकार उसके लिए जरूरी कदम उठाए। उन पर मुकदमा पंजीकृत करें। हमारी जो प्रेयर इसमें थी एसआईटी के लिए थी कि एक ऐसी टीम का गठन हो और वो टीम इसमें इन्वेस्टिगेशन करें। जो हमारे वरिष्ठ अधिवक्ता हैं परम आदरणीय रंजना दीदी ने उन्होंने इस प्रेयर पे बहुत बल दिया है। अच्छा इसमें एक बात मैं ये कह रहा था कि जैसे मान लीजिए कि जो बुक्स वगैरह हैं उनप तो बैन लग ही जाएगा।

00:08:54:09 मगर जैसे इनका जो ब्रॉडकास्ट है सोशल मीडिया पर होना या इसका प्रचार होना रामपाल का। क्योंकि रामपाल ने वक्तव्य तो दिए हैं। जो वक्तव्य लिखे हैं तो क्या पूरी तरीके से कोर्ट इस पर ध्यान देगी कि पूरी तरीके से बैन किया जाए। देखिए सारे ऑपरेशंस बैन हमने क्या कहा देखिए प्राइमा फेसी ने कोर्ट ने इन सब चीजों पर ही ध्यान दिया था परम आदरणीय हमारी दीदी जी ने इन सभी मुद्दों पर बल बल अपना वक्तव्य माननीय न्यायालय के समक्ष

00:09:18:24 पेश किया था और जो सोशल मीडिया की बात अगर बताएं तो कहीं ना कहीं हमने उनको भी पार्टी बनाया

⬜ Not used yet · 00:09:23:15 – 00:18:54:00 (9:30)

00:09:23:15 है और एसआईटी टीम की जो हमने प्रेयर की है वो इसीलिए की है जी कि ऐसा कौन सा सरगना है ऐसा कौन सा व्यक्ति है जो ये सारी चीजों को बोल रहा है ऑपरेट कर रहा है करवा देखिए वो बोला हुआ तो उसका रामपाल का ही है और कहीं ना कहीं हमने देखिए आईटी एक्ट के तहत भी इसमें कुछ रेलेवेंट सेक्शंस को हमने डिकोड किया है और जैसे Facebook हुए Twitter हुए YouTube हुए तो कहीं ना कहीं हमने इनके लिए भी वहां पे एक या अपना एक मांग रखी है प्रार्थना रखी है कि इनको भी निर्देशित किया जाए कि ये ऐसी सामग्रियों के अपने चैनल पर या अपने सोशल मीडिया पर क्योंकि ये समाज के लिए बहुत आगे चलकर घातक हो सकता है। अच्छा इसमें एक चीज मैं बताना चाहूंगा दर्शकों को कि यह लोग एक बात चिल्लाते हैं कि भाई हमारे पास जो है हमारी बुक्स की क्लीन चिट है। क्लीन चिट है। तो आप एक बात बताइए यदि कोई कानूनी प्रक्रिया के तहत इस गैंग को कोई क्लीन चिट प्राप्त होती तो क्या आज हमारी जो याचिका है उसको इतनी गंभीरता से लिया जाता? क्या उसको इस तरह से स्वीकारा जाता? यह एक इन पागलों से यह जो पागल है ना जो पागल करके घुमाए जा रहे हैं ब्रेन

00:10:38:21 वाश करके कि हमारे पास क्लीन चिट है क्लीन चिट है। अरे भाई किसी व्यक्ति ने आज से 10 20 साल पहले कोई एफआईआर अगर करा भी दी और अपनी एफआईआर में बयान देने तक के लिए खड़ा नहीं हुआ। चार-चार बार छह-छह साल तक कोर्ट उसको तलब कर रही है। पूछ रही है कि आ जाओ बयान दे दो। तो उसके ना आने की स्थिति में कोई कारण देते हुए कोर्ट के द्वारा अगर एफआईआर क्वेश कर दी गई तो एक क्लीन चिट है। क्या उसमें कहीं यह आधार बनाया क्वेश करने का कि भैया इनकी जो किताबें बिल्कुल यथावत सही है इसलिए इनको क्लीन चिट दी जाती है। तो यह सब गुमराह करने की प्रक्रिया है। यदि ऐसी कोई क्लीन चिट कहीं पर भी क्या कहते हैं? निर्गत की गई होती तो आज माननीय उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश के द्वारा हमारी याचिका स्वीकार ना की गई होती। यह एक विचारणीय प्रश्न है और क्लीन चिट के नाम से एक बात और याद आई। इनका एक पैरोकार है जो इस प्रकरण से बचने के लिए सतलोक आश्रम गैंग को बचाने के लिए इस केस को कोर्ट से बाहर लड़ रहा है। कैसे लड़ रहा है? जैसे मैंने बताया कि इस इसमें जो पिटिशनर्स हैं वो मेरे अलावा और 17 पिटिशनर्स हैं। तो वो उन सबकी डिटेल्स निकलवाने का प्रयास कर रहा है कि इन

00:11:53:22 17 लोगों का कांटेक्ट नंबर मिल जाए मुझे तो किसी तरीके से मैं बरगला लूं, डरा दूं, धमका दूं। उसको नहीं पता है कि वो सब के सब चट्टान है। उसको नहीं पता है। मगर वह यह प्रयास कर रहा है कि मुझे इन सब के संपर्क सूत्र मिल जाए। घर बार का पता लग जाए तो डराऊ, धमकाऊं या लालच दे दूं। और इसका एक उदाहरण है। हमारे 17 पिटिशनर्स में से एक पिटिशनर जो हैं वह रामानंद नाम से हैं। इसने क्या किया? रामानंद नाम से Facebook पर सर्च किया। इसको लगा होगा कि यही रामानंद है तो कोई और रामानंद नाम से कोई और Facebook पर सज्जन इनको मिल गए। उसका उनका कांटेक्ट नंबर इसको मिल गया। इसने उनको कॉल कर दिया कि तुम्हारे नाम से मुकदमा लगाया गया। क्यों लगा रहे हो? यह जब उन्होंने यह कहा भाई मैंने तो कोई मुकदमा नहीं लगाया। तो यह भाई साहब उसको कहते तो आप जो है कल एफिडेविट दीजिए कोर्ट में आकर के मुकदमा मैंने नहीं लगाया है। अब सोचिए व्यक्ति जिस जो यह कहता है कि हमारे बाबा जी ने बहुत सही ज्ञान दिया है। वेद प्रमाणित ज्ञान दिया है। क्लीन चिट वाला ज्ञान दिया है। वो व्यक्ति कोर्ट में आने की तैयारी नहीं कर रहा है। वो व्यक्ति कोर्ट से बाहर पिटिशनर्स को कह रहा है कि आप जो है अपना केस वापस ले लो। उस केस को कमजोर कर दो अपना अपना नाम हटवा करके। तो यह क्या है? इससे पता लगता है कि इनका पक्ष कितना मजबूत है। अब भी आंखें खोल लो जो अंधे हो गए हैं।

00:13:09:01 उन लोगों को मैं कह रहा हूं जो ब्रेन वाश हो गए हैं। अब भी समय आंखें खोल लो। वरना ये तबाही का मंजर देखते जाओ। कैसे आपके सामने सब कुछ होता है नष्ट। ठीक है? और इसमें जो मुख्य आर्डर के संबंध में थोड़ा सा बता दीजिए। बताइए। ऑर्डर इसमें माननीय न्यायालय ने इशू ऑफ नोटिस किया है। नोटिस इशू किया है स्टेट गवर्नमेंट। इशू ऑफ नोटिस किया है। उनसे काउंटर मंगाया गया। अच्छा अब उनके काउंटर के बाद जो है हमें पुनः सुना जाएगा। इसमें इसमें जो अन्य इंडिविजुअल प्राइवेट अच्छा क्या लगता है सरकार की जो स्टेट गवर्नमेंट है उसका क्या रिप्लाई आ सकता है? देखिए मतलब वो ये कहेगी आकर के कि हम डिफेंड करने आए हैं? सरकार अपना इसमें जवाब देगी और इसमें जवाब यह दे सकती है कि जो रिप्रेजेंटेशन हमने दिया गया दिया था पहले कि ऐसे लोगों के विरुद्ध कारवाई हुई। तो सरकार इसमें वह जवाब देगी कि उस प्रशासन ने क्या इसमें कारवाइयां की? जी। दूसरी चीज सरकार यह भी जवाब देगी कि अभी तक उसने ऐसे चीजों पर गौर क्यों नहीं किया या किन नियमों के तहत अभी तक ऐसे लोग बचे रहे तो ज्यादातर ऐसे जो केसेस होते हैं उसमें जो सरकार की तरफ से वक्तव्य आता है वो यही कहती है कि इसके विषय में हमें ज्यादा जानकारी नहीं मिली और कोई विशेष पैरवी करने वाला व्यक्ति

00:14:24:09 हमको नहीं मिला। इसीलिए हम इसको रोक नहीं पाए। लेकिन इस मुकदमे में जैसा हम समझ रहे हैं कि काफी बल दिया गया, काफी पैरवी की गई। आपको ये भी हम बताना चाहेंगे कि बिगिनिंग स्टेज पे इसमें रिप्रेजेंटेशन इत्यादि वगैरह दिए गए हैं। आईजीआरएस जैसी कारवाई की गई है। बहुत फेवरल कारवाई हुई और उस कारवाई के बाद ही हम माननीय न्यायालय में आए। तो अब सरकार जो जवाब देगी उसको जवाब को हम अध्ययन करके अपना एक रिजवाइंडर वहां पे लगाएंगे। और जब प्राइमर फेसरी ने कोर्ट ने इसको बहुत सही बताया हो। लोकस को भी बहुत जेन्युइन लोकस इसको पाया है। जो हमारी दूसरी सुनवाई होगी वो बहुत एक बहुत महत्वपूर्ण सुनवाई होगी और उस सुनवाई में एक बहुत रीज़नेबल माननीय न्यायालय दे हमें शक्ति है। सरकार को इंस्ट्रक्शन आर्डर दे सकती है। परिणाम हमें प्राप्त हो जाएंगे। तथ्य प्राइडमस के रूप में आर्डर भी हमको प्राप्त हो सकते हैं कि ऐसे लोगों पर बैन किया जाए जो ऐसी किताबों को वितरण कर रहे हैं। ये माननीय न्यायालय प्रशासन को देगी, स्टेट गवर्नमेंट को देगी। पीजीपी उत्तर प्रदेश को भी दे सकती है कि ऐसी संस्थाओं का वो पता लगाए और जहां-जहां ऐसी कारवाई चल रही है उसको उनको ट्रेस करें और बैन करें। ऐसी किताबों

00:15:39:13 को सीज करें और जो भी इसमें दोषी हैं उनके विरुद्ध कारवाई करें। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया अभिषेक जी एक बात मेरे को याद आ गई अभिषेक जी से बात करतेकरते एक व्यक्ति जो इनका पैरोकार बना फिरता है उसने इन दिनों इस बीच मेरे विरुद्ध बहुत सारे व्यक्तिगत अटेमपट्ट किए बहुत सारे व्यक्तिगत प्रहार किए मुझे मेरे विरुद्ध झूठी एफआईआर लिखाने के प्रयास किए गए मेरे चेहरे को व्यंग बना के प्रचारित किया गया मेरे जो पूज्य गुरुदेव है चारों शंकराचार्य उनकी हंसी उड़ाई गई शंकर परंपरा की हंसी उड़ाई गई। तरह-तरह से मुझे जो है दबाने का प्रयास किया गया। सर्वप्रथम लालच दिया गया। जब लालच से मैं नहीं माना तो इस तरह से तोड़ा गया एफआईआर जान से मारने की धमकी। घर की स्त्रियों के साथ अनापशनाप बहुत कुछ। और ये जो पैरोकार है यह मुझे फोन कर करके हैरेस करना, धमकियां देना विभिन्न प्रकार की। तो एक दिन की बात है जब यह मुझे मेरे माता-पिता से जोड़ते हुए एक धमकी देने का प्रयास कर रहा था कि मुझे पता है तुम्हारे माता-पिता कहां रहते हैं। मतलब यह बताने का प्रयास कर रहा था कि मैं उन्हें जो है क्षति पहुंचा सकता हूं। तो मैं जो है उसके कारण थोड़ा सा अपनी जो एक वो होती है ना माता-पिता का नाम सुनकर के एक आवेश में आना। तो उसमें मैं उससे

00:16:54:14 बात कर रहा था कि क्या कहते हैं कि क्या दिखाना चाह रहे हो तुम ये माता-पिता कहां रहते हैं? तुम्हें कैसे पता है? अरे तो मैं ये सब उससे पूछ रहा था। उसी समय मैंने किसी बात पर उससे कहा था कि चलो चलो चलो चलो इसलिए कहा था कि भाई सब बातें एक तरफ करो तुम बताओ वेद में कहां लिखा है जो चीजें तुम क्लेम कर रहे हो है ना तो मैंने चलो चलो जब कहा तो बड़े ही उपहास पूर्वक उसने मुझसे कहा था कि चलो चलो कहां चलें कहां चलें चलो चलो कहां चले गया क्या साफसाफ बोलो आहान दो आह्वान मतलब मजाक बनाया था मेरे मुख से निकले हुए और शब्दों का और फिर कहा था आह्वान करो आहान है ना तो आज मैं तेरा आहान कर रहा हूं। आज मैं तेरा आहान कर रहा हूं। मेरी जो पूज्य दीदी है ना रंजना अग्निहोत्री जी उनके सानिध्य से तेरा आहान कर रहा हूं। मेरे जो साथ में खड़े हुए हैं ना अधिवक्ता गण अभिषेक द्विवेदी उत्कर्ष प्रताप सिंह इन सबके साथ खड़ा होकर के मैं तेरा आहान कर रहा हूं। अब आ हा हाई कोर्ट में कर दिया मैंने आहान। तो बहुत-बहुत आभार आपका यहां पर समय देने के लिए और एक बार सबको साधुवाद। हरिशंकर जैन जी को साधुवाद। हमारी माननीय पूज्य रंजना दीदी को

00:18:10:02 ढेर सारा साधुवाद और अभिषेक द्विवेदी जी को साधुवाद। उत्कर्ष प्रताप सिंह जी को साधुवाद। और इस पूरे अभियान में जो जो भी कहीं-कहीं पर भी निमित्त हैं हमारे जो बजरंग दल के भी सहयोगी इसमें साथ में हैं उनको भी ढेर सारा साधुवाद और मुझे ऐसा विश्वास है कि यह हमारा जो अभियान है निश्चित रूप से एक अपने परिणाम को प्राप्त करेगा। जैसा कि हमारी माननीय अग्रजा रंजना अग्निहोत्री जी ने कहा था। जल्द ही हमको शुभ समाचार प्राप्त होंगे और इसमें यथावत जितने भी विधर्मी हो उनके विरुद्ध कारवाई होगी। सभी को जय श्री राम।

00:18:52:27 [संगीत]

Plans for this video (0)

No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.

🤖 Ask AI for suggestions

AI reads the remaining (unused) parts of this video and gives ideas for new videos: from where to where, hook, and what to remove from the middle. Suggestions follow the RULES and appear here as "AI Suggestion". You can review, edit or approve them.

  • ⬜
    Hindi SRT Required

    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).

A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 18:58 · 11 Jul 2025

High Court has approved the petition against Rampal @Satlok Ashram @Sant Rampal Ji Maharaj

0%
☁️ Drive Not in Drive yet

🔗 This video is made from parts of these videos

A · Video सतलोक गैंग का अंत निकट : Ad Ranjana Agnihotri Ji #rampalexpose
Open at 00:00:02:09 Open at 00:25:45:22

Notes

Description

(empty)

History

No changes yet.

✂️ Clip Cutter

⌨️ Keyboard shortcuts

Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop

▶

Start

End

🔍 zoom
Already used Plan clips
⚠️ () of this clip is already used in another video (green part). Fine if on purpose, otherwise change the times.
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)

Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".

Clips () · Total

Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.

Hook, full note for editor, status