No part of this video is used anywhere yet.
SRT: ⬇ SRT ⬇ Original file

.srt or .vtt (Hindi). The old file is backed up. After that the match for this video is rebuilt (may take a few minutes, keep the page open).

⬜ Not used yet · 00:00:00:04 – 00:27:54:00 (27:54)

00:00:00:04 लिए यादव संरक्षण यादव संगठन आ गया यादवों के संरक्षण के लिए हाथ तो तुम्हारे उसमें हो रहे हैं ना सामूहिक हत्याकांड सामूहिक बलात्कार लूट हत्या डकैती जाने क्या-क्या हो रहा है ये स्थिति देखेंगे कि ब्राह्मण ना होने के बावजूद यदि वो पूजा कर रहे हैं यहां तक कि ये भी नहीं है कि आपकी जात आबू का अमुक है तो इस कारण 200 सालों में जो व्यवस्था समाज को दी है यादव और ब्राह्मण आपस में भिड़े तो भिड़ते रहे मरे तो मरते रहें हमें सभी को जय श्री राम तो आज हम बात करेंगे इटावा से जो एक विवाद उठा है। अह ब्राह्मण बनाम यादव इस विषय को भुनाते हुए अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का प्रयास किया जा रहा है। तो यद्यपि जो ज्योतिर्मठ वाले महाराज जी हैं पूज्य अभिुक्तेश्वर जी उन्होंने इस मामले पर बहुत ही सारगर्भित और सटीक विवेचना दी है। आप लोग उस वीडियो को देख सकते हैं। किसी YouTube चैनल वालों ने उनका इंटरव्यू लिया था। उसमें उन्होंने दिया है। पर इसमें कुछ और भी तथ्य हैं जो एक अलग तरीके से हम आपके समक्ष प्रस्तुत करना चाहते हैं। जो मुझे लगता है कि आवश्यक है उन तथ्यों को जानना भी आपके लिए। सबसे पहली बात तो यह है कि जो

00:01:15:10 यह बाल उतारे गए, बाल मुंडवाए गए और क्या कहते हैं जो भी वहां पर दुष्कृत किए गए, कुकृत किए गए यादव के साथ जो व्यक्ति है वह यादव जो कथावाचक था उसके साथ जो कुकृत किए गए वह घोर निंदनीय है। वो बिल्कुल भी उचित नहीं है। और उसका विरोध होना ही चाहिए। ऐसा अगर कोई कृत है तो यह बात सही है कि शास्त्रों में दिया गया है कि कथा करते समय व्यास गद्दी पर कौन बैठेगा। यदि केवल भगवत चर्चा हो रही है, यदि भगवान की बातें हो रही हैं या भगवान की कहानी किस्से सुनाए जा रहे हैं, भगवान की कथाएं सुनाई जा रही हैं तो उसमें सभी का अधिकार है। परंतु ऑफिशियली जैसा कि पूज्य मुक्तेश्वर जी ने भी अपने इंटरव्यू में कहा कि जब किसी विधि पूर्ण फल को प्राप्त करने के निमित्त कोई आयोजन किया जाएगा। ऑफिशियली जब चीजें होती हैं तो उसमें जो चीजें की जा रही हैं वो जहां से उत्पन्न है वो विधियां उन्हीं के निर्देशानुसार उन्हीं शास्त्रों के आदेशानुसार उसमें विधि का पालन होना चाहिए। यह बात सही है। परंतु यह बिल्कुल नहीं है

00:02:30:16 कि यदि कोई व्यक्ति उस विधि का पालन नहीं करता है या फिर उसने जो है अपना नाम नहीं बताया है तो उसके साथ ऐसा व्यवहार किया जाए। अपना नाम छिपाकर अपनी आइडेंटिटी बदलकर कोई कार्य करना जिस कार्य के लिए आप वहां पर योग्य नहीं है। गलत है। परंतु वह ऐसा अपराध भी नहीं था जिसके लिए वहां पर इस तरह का व्यवहार दिखाया गया। किया गया है कि नहीं किया गया वह एक बात अलग है मगर प्रदर्शित अवश्य किया गया है परायोजित तरीके से जो दिखाई दे रहा है। अब दूसरी बात इसमें एक ये बात आती है कि इसमें कई लोग अपनी राजनीतिक रोटियां जो घृणामूलक जातिवाद है। है ना? घृणामूलक जातिवाद के आधार पर कई लोग अपनी राजनीतिक रोटियां इसमें सेकने लग गए। कोई आकर के उनको अपना नाम बदल करके अपनी आइडेंटिटी छुपा करके धोखा देते हुए शास्त्र की मर्यादा का उल्लंघन करते हुए और किसी व्यक्ति के विश्वास का दुरुपयोग करने वाले व्यक्ति को सम्मान दे रहा है। तो दूसरी ओर जात ये जो घृणामूलक जातिवाद है इसके कारण धर्म को शास्त्रों को वर्ण व्यवस्था को आचार्यों

00:03:46:04 को कोसने में लग रहे हैं। अपनी अपना दामन बचाने के लिए है ना तो यह सब कुछ एक प्रायोजित तरीके से हो रहा है। अपने-अपने लोग अपनी-अपनी रोटियां फिर सेकने लग गए। किसी व्यक्ति ने चालू किया तो हम उसके जवाब में सेकने लगे रोटियां। अब इसमें एक बात आती है कि कथा कौन सुना सकता है? तो यदि हम किसी निश्चित फल की प्राप्ति के लिए कथा कर रहे हैं। जैसा कि पूज्य ज्योतिर्मठ वाले महाराज जी ने बताया। अगर हम किसी निश्चित फल की प्राप्ति के लिए कोई विधि पूर्वक कथा कर विधि पूर्वक मन बनाकर के कथा कर रहे हैं तो उसमें विधि का ही पालन किया जाएगा। उस विधि का ही पालन किया जाएगा जो उस शास्त्र में दी गई है जिस शास्त्र की हम कथा कर रहे हैं। हम भागवत कथा कर रहे हैं और भागवत में ही लिखा है कि कथा करते समय व्यास गद्दी पर कौन बैठेगा? ऑफिशियली तरीके से कथा कौन करेगा? कथा करने का अधिकार सबको है। मगर विधि पूर्ण तरीके से किसी विधि विधि पूर्ण फल की प्राप्ति के लिए की जाने वाली जो कथा है उसको कहने का अधिकार किसको है? यद्यपि कोई ब्राह्मण घर में जन्मा ही हो जन्मा ही क्यों ना हो परंतु फिर भी यदि वह श्रोत निष्ठ ब्राह्मण नहीं है। उसका

00:05:01:13 समय पर यज्ञोपवीत नहीं हुआ है। वो संध्या नहीं करता है। संध्या वंदन नहीं करता है। तब भी वह योग्य नहीं माना जाएगा। केवल नाम का जन्म से ब्राह्मण हो जाने पर भी उसको अधिकार नहीं मिलेगा कि वह व्यास गद्दी पर बैठकर के कथा करे। तो क्या आप कहते हैं कि यह जो यादव जी हैं जो कथा व्यास की गद्दी पर बैठे थे अपनी आइडेंटिटी छुपा करके क्या यह त्रिकाल संध्या वंदन करते हैं? क्या इनका जनेऊ हुआ है? यह सब आप यह सब किसी ने चेक किया। अब आ जाते हैं दूसरे पहलू पर। कुकृत करने वाली जो दूसरी पार्टी है क्या दिखाया जा रहा है कि बाल मुंडवा दिए गए। भाई अगर तुम शास्त्रों की मर्यादा की रक्षा के लिए सजा देने निकले हो किसी को तो उसमें शास्त्रों की ही बात मानते हुए सजा दोगे ना कि अपने मन से दोगे सजा। अगर तुम धर्म की रक्षा के लिए दे रहे हो, बाल मुंडवा रहे हो या यह कर रहे हो, धर्म की रक्षा के लिए किसी को पनिश कर रहे हो, तो उसमें यह जो पनिशमेंट क्या होना चाहिए, क्या नहीं होना चाहिए? यह आज्ञा भी तो तुम्हें धर्म से ही लेनी होगी। तेरे लिए कर्तव्य और अकर्तव्य के विषय में शास्त्र प्रमाण है। क्या यह कहा गया है कि नाम बदल करके ऐसा करने वाले के साथ

00:06:16:16 ऐसा किया जाए? तो आपने बहुत ही घृणित और नीच कर्म किया है। यदि यह प्रायोजित नहीं है तो। ठीक है। अब दूसरी बात आती है कि इसको जातिवाद का बहाना देकर के अमुक पार्टी जो है वो ब्राह्मण बनाम यादव यह सब करने लग जाती है। अब ऐसे में कुछ लोग उठ खड़े होते हैं जो इस बात से स्वयं को दूर रखने के लिए अपनी जो परंपरा प्राप्त वर्ण व्यवस्था है उसको ही गाली देने लग जाते हैं। मैं थूकता हूं ऐसी वर्ण व्यवस्था पर ऐसे जहां ऐसी व्यवस्था पर जहां पर जो है भेदभाव किया जाता है। हम लोग अपने वीडियो में कई बार बता चुके हैं और यदि किसी के पास समय हो तो वह समय निकाले और समझ ले पहले कि वर्ण व्यवस्था क्या है? जाति व्यवस्था क्या है? एक जाति व्यवस्था है घृणा मूलक। जिसमें कि किसी के साथ तिरस्कार किया जाता है, भेद किया जाता है, भेद के अनुसार उसके उससे घृणा की जाती है। और एक जाति व्यवस्था है व्यवस्था मूलक। तो हमारे शास्त्रों ने जो व्यवस्था की हुई है वो उसको क्रियान्वित

00:07:31:27 करने के लिए सही ढंग से संचालित करने के लिए वो वर्ण व्यवस्था है और वह है व्यवस्था मूलक जातिवाद। मगर यह जातिवाद का गलत रूप प्रस्तुत करके और घृणा मूलक जातिवाद दिखाते हुए जो सनातन की जो परंपरा प्राप्त वर्ण व्यवस्था है उसको भी नाश करने का नाश करने का प्रयास किया जा रहा है। अब इसमें एक चीज यह बताइए आप सबसे पहले मैंने इसको इसको प्रायोजित क्यों कह रहा हूं? जिस तरह से इसमें राजनीतिज्ञों द्वारा रोटियां सेकी जा रही हैं। पहला नंबर फिर उसके बाद आप देखिए यह जो सीन है क्या यह सीन आपको फिल्मी नहीं लगता है? यह फिल्मी सीन नहीं दिख रहा है आपको कि कहीं पर कथा हो रही है और वहां जाकर के वह यादव था और इसलिए उसके बाल मुंडवा दिए गए। जिस जहां पर ये कथा हो रही है वहीं के जो महंत हैं ये कुछ समय पूर्व ही इसी व्यक्ति से कथा करा चुके हैं। यह व्यक्ति 16 साल से कथा कर रहा है। व्यास गद्दी पर बैठकर के व्यास बन रहा है। तब से आज तक इसके बाल क्यों नहीं मुंडवाए गए? तो यह सारी बातें इस ओर इशारा करती हैं कि इसमें किस तरह से जो सच्चाइयां हैं उनको दबाया जा रहा

00:08:46:28 है और मामले को दूसरा रूप प्रस्तुत करके और यादवों को और ब्राह्मणों को भिड़ाने की तैयारी की जा रही है अपने वोट कमाने के लिए। यह भूलते हुए कि इससे समाज में समाज को राष्ट्र को धर्म को क्या हानि पहुंचेगी। यादव और ब्राह्मण आपस में भिड़े तो भिड़ते रहे, मरे तो मरते रहे। हमें बस अपने वोट चाहिए। हमें बस सत्ता चाहिए। जब उसके पास दो नकली आईडी हैं। मान लिया उसके पास दो नकली आईडी है। मगर 16 वर्ष क्यों लग गए भाई तुम्हें जानने में? कथावाचक को बुलाने में। अगर शास्त्र की धर्म की इतनी चिंता है तो शास्त्र और धर्म यह भी तो कह रहे हैं कि किसको बुलाओ और कैसे कैसे उसको चेक करो। क्यों नहीं चेक करते? जो यह नौबत आई

00:09:32:19 तो यह प्रायोजित क्यों लग रहा है कि हम एक पॉइंट पर आकर के बस धर्म शास्त्रों के लिए कर रहे हैं। भाई यही तो दिखा रहे हैं कि हम हम तुम्हारा जो है सर मुंडन करा देंगे। ये कर देंगे वो कर देंगे। क्यों कर देंगे? क्योंकि शास्त्र तुमने हमारे धर्म की मर्यादा को भंग किया है। तो भैया धर्म की मर्यादा ये कहती है कि अगर आप अपने यहां किसी को भागवत के लिए बुलाने जाएं तो पहले उसका अमुक अमुक अमुक अमुक ये सब चीजें चेक करें तब बुलाएं। तब वहां पर तुमने जब धर्म का पालन नहीं किया तो क्या बाल जिन्होंने बाल मुंडवाए हैं उनके भी बाल मुंडवा दिए जाए उनका भी सरगंजा कर दिया जाए क्योंकि शास्त्र की अवेलना तो वो भी कर रहे हैं क्योंकि वो जो सजा दे रहे हैं वो शास्त्र को देख के नहीं दे रहे हैं क्योंकि वो किसी को बुला रहे हैं कथाव्यास के रूप में तो बिना किसी प्रयत्न के बिना किसी श्रम के बुला रहे हैं हां इतनी साधारण सी चीज है ये जो आधार कार्ड है ये आपको पहले ही देख लेना चाहिए था और सबको मालूम है कि वो यादव है। इसमें तो कोई कठिनाई नहीं थी पूछने में। मगर आपको 16 वर्ष लग गए और बिल्कुल कथा कहते समय ही आपको याद आया कि ये जो है ब्राह्मण नहीं है यादव है। और उसके बाद ये फिजूल के आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि वो मेरे से छेड़ छेड़छाड़ कर

00:10:47:20 रहा था। ये है वो है। तुरंत आरोप आ गए। अरे भैया कोई छेड़छाड़ कर रहा था तो आप पुलिस बुलाते ना। पुलिस बुला के छेड़छाड़ का आरोप लगाते। बाल बाल मुंडवाने वाली बात कहां से हो गई? जब आप आयोजक हैं, भागवत का आयोजन कर रहे हैं, तो इससे यह तो स्पष्ट हो गया ना कि आप धर्मनिष्ठ हैं। तो यह 16 साल से कथा करने के बाद भी आयोजकों को पता ना होना कि यादव यह ब्राह्मण नहीं यादव हैं। एक कुछ समय पूर्व ही वहीं पर उसी स्थान पर उसी स्थान के महंत द्वारा इसी कथावाचक के द्वारा कथा करवाए जाने पर भी यह मामला ना उठना। राजनीतिज्ञों का इस पर रोटी सेकना और पूरा नाट्य नाट्य प्रस्तुति जैसा दिखाई देना इन सब चीजें यह सब चीजें इस ओर इशारा करती हैं। यह सारा मामला प्रायोजित है और यह जो घृणामूलक जातिवाद के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटियां से की जा रही है एक तरफ तो वहीं पर अपनी गद्दी बचाने के लिए घृणामूलक जातिवाद का विरोध करने के चक्कर में जो परंपरा प्राप्त हमारी वर्ण व्यवस्था है जिसके कारण आज भी हमारा अस्तित्व है

00:12:03:03 उसको ही नष्ट कर देने की बात की जा रही है। दो आईडी जो उस व्यक्ति के पास निकली है उसमें से एक आईडी में उसका नाम याद वो लिखा है मणि रत्न त्रिपाठी या अग्निहोत्री जो भी है और दूसरी आईडी में भी यादव नहीं लिखा है। सिंह लिखा है। यह भी भ्रम मूलक है। उसमें भी यादव नहीं लिखा है। सिंह लिखा है। एक दल क्या बात कर रहा है कि भैया अभी ये ब्राह्मणों के यहां हो जाता तो बुलडोजर चल जाता। तो इस वो दल वो पार्टी जो है किस सत्ताधारी पार्टी को इशारा कर रही है? किसकी निंदा कर रही है? सबको समझ में आ रहा है। बुलडोजर बुलडोजर कौन चलवाता है? ठीक है। अब एक बात बताइए और इसमें जो है ब्राह्मण ब्राह्मण संगठन उठ गया ब्राह्मणों के संरक्षण के लिए यादव संरक्षण यादव संगठन आ गया यादवों के संरक्षण के लिए तो आप मुझे एक बात बताइए

00:12:52:07 यदि यह जो जाति व्यवस्था है सबसे पहले तो आप एक बात देखिए कि क्या आज जिस तरह की यह वर्ण व्यवस्था है जिसको जिसका खंडन किया जा रहा है अपने अपने अनुसार कोई संविधान के नाम से खंडन कर रहा है। कोई तर्क के नाम पर खंडन कर रहा है। कोई भावनाओं को आधार बना करके खंडन करने का प्रयास कर रहा है। क्या यह जो जाति व्यवस्था है, यह आज समाज में लागू है? क्या जो परंपरा प्राप्त वर्ण व्यवस्था है, वह समाज में लागू है? नहीं लागू है। हम आपको दिखाएंगे मंदिर जिसमें कि कोई अब्राह्मण पुजारी बना हुआ है। लोग इस समय दक्षिण मुखी हनुमान जी के मंदिर के बाहर खड़े हैं। लखनऊ में स्थित है। हम लखनऊ के एक और मंदिर के बाहर खड़े हुए हैं। और यहां के जो पुजारी हैं वह भी ब्राह्मण नहीं हैं। और यहां के भी जो पुजारी जी हैं वो ब्राह्मण नहीं है बल्कि विश्वकर्मा समाज से आते हैं। तो हम यहां पर जाकर के देखेंगे। अभी हम यहां पर अंदर जाएंगे। उनके साथ बातचीत करेंगे और यह स्थिति देखेंगे कि ब्राह्मण ना होने के बावजूद यदि वह पूजा कर रहे हैं तो सामान्य जन का जनता का उनके साथ व्यवहार कैसा है। साथ हैं दक्षिण मुखी हनुमान जी मंदिर के जो पुजारी

00:14:07:13 हैं जो भगवान की सेवा में रत हैं। पुजारी जी जय श्री राम। जय श्री राम। पुजारी जी थोड़ा सा दर्शकों को आप अपना परिचय बता दीजिए। मेरा नाम विजय सिंह है। अच्छा ब्राह्मण ना होने के बाद भी आप यहां पर पूजा अर्चना कर रहे हैं। भगवान की सेवा कर रहे हैं। इस बात को लेकर के क्या आपके साथ कोई अपमानजनक व्यवहार, कोई विवाद इस तरह की स्थिति देखने को मिली आपको? ऐसी स्थिति कोई नहीं देखने को मिली है। हमको 30 साल लगभग हो गए। चार-चार ठंड में से जागरण हो रहा है। लगातार हो रहा है। धरातल पर थोड़ा सा कार्य करते हुए हम लोग आए हैं। एक पानी पूरी की यहां पर ठेल लगी हुई है। बालाजी पानी पूरी सेंटर। भाई साहब जय श्री राम। जय श्री राम। जय श्री राम। भाई साहब आपका परिचय थोड़ा सा बताएंगे। जी नरेश कुमार डिस्ट्रिक्ट जालौर और तो किस जाति से आते हैं आप? केवट। केवट निषाद समाज से आते हैं। जी जी जी। अच्छा यहां पर जैसे आप वैश्य नहीं है, ब्राह्मण नहीं है। आपके हाथ का लोग खा रहे हैं। तो क्या इस इन स्थितियों को जानने के बाद क्या किसी ने आपके साथ कोई दुर्व्यवहार किया है या आपत्ति जताई हो या तिरस्कार किया हो? ऐसा कुछ भी नहीं है। कोई जाति के नाम पर कोई घृणा जाति के नाम पर कोई दुर्व्यवहार इस तरह की कोई चीजें नहीं है। नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है।

00:15:22:14 है ना? यहां तक कि ये भी नहीं है कि आपकी जात अमुक अमुक है तो इस कारण से हम आपके हाथ का नहीं खाएंगे। ऐसा कुछ ऐसा कुछ भी है। ऐसा कुछ भी है। सभी वर्णों के से सभी समाज से पूरे समाज के लोग आपके हाथ का सब खाते पीते हैं। जी जी जी अभी तक तो ऐसा किसी ने पूछा नहीं। आप किस जात से बिलोंग करते हो। जी तो एक और पानी पूरी की ठेल है। यहां पर भी हम इनसे बातचीत करेंगे और यह देखेंगे कि यहां की क्या स्थिति है। [संगीत] जय श्री राम भाई साहब। जय श्री राम। आपका थोड़ा सा परिचय बता दीजिए। मेरा संतोष कुमार है नाम। किस जाति से बिलोंग करते हैं आप? हम निषाद केवट। अच्छा ठीक तो जैसे आप ब्राह्मण नहीं है, वैश्य नहीं है या क्षत्रिय नहीं है, निषाद वर्ग से आते हैं, चतुर्थ वर्ण से आते हैं। तो इस कारण से क्या आपके साथ कोई भेदभाव या अपमानजनक स्थिति यहां पे कोई करता है? नहीं नहीं सर। ऐसा कुछ नहीं है। आप जो है चतुर्थ वर्ण से आते हैं। इस कारण से कोई ऐसा करता है कि हम आपके हाथ का नहीं खाएंगे। ये नहीं करेंगे, वो नहीं करेंगे। ऐसा तो अभी मेरे साथ में नहीं हुआ है। सभी सभी सब समाज के लोग आते हैं। आप भी सब सब सारी सब पूरी समाज के आते हैं। सब लोग आते हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद। इसका अर्थ क्या हुआ? यह आवश्यक नहीं है कि आज मंदिरों

00:16:37:15 में पूजा सेवा करने वाला व्यक्ति ब्राह्मण ही हो। इसका अर्थ? व्यवस्था कौन सी लागू है? व्यवस्था वह लागू है जो परंपरा प्राप्त वर्ण व्यवस्था के विरोध में बनाई गई है। घृणा मूलक जातिवाद तो दूर की बात है। आज समाज में जो परंपरा प्राप्त सनातन शास्त्र सम्मत वर्ण व्यवस्था है जिसमें विधि निषेध है क्या करना चाहिए कैसे करना चाहिए किसके द्वारा होना चाहिए किसके द्वारा नहीं होना चाहिए वो तक व्याप्त नहीं है। तो इसका अर्थ क्या हुआ? कि जिन लोगों द्वारा ढिंढोरा पीटा जाता है कि वर्ण व्यवस्था के कारण धर्म परिवर्तन हो रहा है। समाज को क्षति पहुंच रही है। राष्ट्र को क्षति पहुंच रही है। वास्तविकता में धर्म परिवर्तन उन्हीं के कारण हो रहा है। वास्तविकता में धर्म को क्षति उन्हीं के कारण पहुंच रही है। वास्तविकता में राष्ट्र को क्षति उन्हीं के कारण पहुंच रही है। उसी व्यवस्था के कारण पहुंच रही है जो इन छद्म हिंदुत्ववादियों ने जो तथाकथित सनातन रक्षकों ने पिछले 100-10 साल 200 सालों में जो व्यवस्था समाज को दी है उसी व्यवस्था के कारण आज धर्म को क्षति पहुंच रही है। और दोष किसको देते हैं? घृणा मूलक जातिवाद के नाम पर राजनीतिक पार्टियां भी और यह व्यक्ति अथवा यह संगठन

00:17:52:16 भी अपनी रोटियां सेकते हैं। घृणा मूलक जातिवाद के नाम पर जो सनातन शास्त्र सम्मत व्यवस्था मूलक शास्त्र सम्मत जातिवाद है वर्ण व्यवस्था है उसको दोष देते हैं। क्या रोड पर गोलगप्पे खाते हुए पूरी सब्जी खाते हुए कचौड़ी खाते हुए 90% व्यक्ति बनाने वाले का नाम पूछता है कि तुम जात से कौन हो? नहीं पूछता है। जब वह दुकान पर कोई सामान खरीदने जाता है तो पूछता है क्या कि तुम वैश्य के कौन हो? तो क्या आज हमारे समाज में वो व्यवस्था लागू है? कहां रह गई है? ले दे के जो परंपरा प्राप्त जो प्रामाणिक आचार्य गण है उनके जो मठ मंदिर है उनके नियंत्रण में जो मठ है केवल वहां पर यह वर्ण व्यवस्था आपको देखने को मिलेगी और जो भी उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है जो कि 95% है समाज का उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर 95 भी नहीं 99% जो समाज का हिस्सा है राष्ट्र का हिस्सा है वह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है और उसमें वह वर्ण व्यवस्था लागू नहीं है मगर फिर भी बार-बार अपनी राजनीतिक रोटियां सेकते हुए कभी अपना संगठन बढ़ाने के लिए आर्य समाज

00:19:07:20 जैसा इस जैसा इस जैसी संस्थाएं आर्य समाज जैसी संस्थाएं अपना अपने अपने अपना संख्या बल बढ़ाने के लिए वर्ण व्यवस्था को गाली देते हैं। कभी अपना YouTube चैनल चलाने के लिए अजीत भारती जैसे वर्ण व्यवस्था को गाली देते हैं। और कभी यह जो पार्टियां हैं यादव बनाम ब्राह्मण करवा करके वोट बैंक की राजनीति करते हैं। लल्लन टॉप न्यूज़ चैनल वाले भी भैया हमारे संविधान द्वारा जो है कहीं भी किसी के भी साथ भेदभाव नहीं किया गया है। भाई तो संविधान की कथा पढ़ो ना। अगर आप जो घृणा मूलक जातिवाद है उसके नाम पर व्यवस्था मूलक जातिवाद जो सनातन शास्त्रों के द्वारा दिया गया है वर्ण व्यवस्था जो दी गई है उसका खंडन करने निकलोगे तो आपसे पूछा जाएगा ना कि संविधान की सीमा में संविधान के शास्त्र पढ़ो ना फिर वहां भागवत क्यों पढ़ रहे हो अगर भागवत पढ़ रहे हो तो भागवत में जो लिखा हुआ है उसको मानोगे ना मत पढ़ो भागवत तो सबसे पहली बात तो है कि 99% जो समाज का जो इस अंश है वह यह जो वर्ण व्यवस्था है जो जो

00:20:22:26 व्यवस्था मूलक वर्ण व्यवस्था है, शास्त्र मूलक वर्ण व्यवस्था है उससे रहित है। ठीक है? तो अब समाज में व्यवस्था कौन सी लागू है? जो उसके विरोध में है। किसके विरोध में? जो शास्त्रों से मिलती है, जो प्रामाणिक आचार्यों से मिलती है, वह व्यवस्था आज के टाइम में लागू है। जैसा कि हमने आपको बताया कि मंदिर का पुजारी भी आप ब्राह्मण है। आपको जो व्यापार कर रहा है वो व्यापारी भी, क्षत्रिय भी है, ब्राह्मण भी है, शूद्र भी है, सब है। खाना पीना खाते टाइम कोई नहीं पूछ रहा है कि बनाने वाला कौन है। यह व्यवस्था लागू है। अब यह बताइए कि इतने बड़े-बड़े जो अपराध हो रहे हैं समाज में क्या वह यादव संगठन को ब्राह्मण संगठन को दिखाई नहीं दे रहे? बलात्कार हो रहे हैं, सामूहिक बलात्कार हो रहे हैं, हत्याकांड हो रहे हैं। तो यदि आप कहीं पे एक छोटी सी घटना हो जाने का कारण ये बताने लगते हो कि वर्ण व्यवस्था इसका कारण मैं थूकता हूं ऐसी जातिवाद पर। मैं थूकता हूं ऐसी वर्ण व्यवस्था पर, मैं थूकता हूं, ये करता हूं, वो करता हूं। अवेलना करने लग जाते हो। तो जो व्यवस्था तुमने स्वीकारी गई की है उसके अंतर्गत अगर कोई अपराध हो रहा है तो तुम अपने आप पर भी तो थूको अपराध तो तुम्हारे उसमें हो रहे हैं ना सामूहिक हत्याकांड

00:21:37:27 सामूहिक बलात्कार लूट हत्या डकैती जाने क्या-क्या हो रहा है और तब कोई संगठन नहीं आ रहा है ना ब्राह्मण संगठन आ रहा है ना यादव संगठन आ रहा है रामपाल वाला उनहीं भगवान श्री कृष्ण को जिनकी ये भागवत हो रही है रामपाल की किताबों में इतनी निंदनीय अश्लील बातें लिखी हुई है तब तुम यादव संगठन नहीं उठ पा रहे थे तब तुम ब्राह्मण संगठन नहीं उठ पा रहे थे तब यादव रेजमेंट कहां चली गई है आज राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए ही आती है ना जाओ जाके रामपाल से लड़ो ना बंद करवाओ उसका तब क्षत्रियों की करणी सेना क्यों नहीं आ जाती है तुम्हारी मां को गाली नहीं दी गई दुर्गा माता के साथ बलात्कार बोल के रामपाल की किताबों में

00:22:26:09 मगर तुमको वहीं पर आना है जहां पर राजनीतिक रोटियां सेकींगी। जहां पर मीडिया कवरेज करेगी। वहां तुम्हारी अखबारों में फोटो आएगी। यादवों के लिए लड़ने ये आए और ब्राह्मणों के लिए लड़ने ये आए फलाने आए। वहीं पर तुम खड़े होगे। तुम्हें धर्म से मतलब नहीं है। तुम्हें यादवों से भी मतलब नहीं है। ब्राह्मणों से भी मतलब नहीं है। क्षत्रियों की आराध्य है ना? मां भगवती कितनी गाली दी गई है तब क्यों नहीं करणी सेना आती है मां भगवती से हमें मतलब नहीं है केवल नाम यूज़ करते हैं हम उनका अभी कुछ दिन पहले दलितों और यादवों का झगड़ा हुआ था तब क्यों नहीं आई थी राजनीतिक पार्टियां तब क्यों नहीं हुई थी मीडिया कवरेज आज ये फूट डाल के भाइयों में ब्राह्मणों में यादवों में लड़ाई करवा करके अपने वोट कमा रहे हो इससे तुम्हें कोई चिंता नहीं है कि धर्म को के राष्ट्र को क्या हानि होगी? तो मैंने पहले ही कहा था यह वीडियो ना ब्राह्मणों के पक्ष में है। पहली बात तो मामला ही प्रायोजित है। और प्रायोजित होते हुए भी जो मैसेजेस वहां से निकले कि बाल मंडवाएगा ये तिरस्कार किया गया। यह भी निंदनीय है। अपना नाम छुपा के कथा करना यह भी निंदनीय

00:23:41:25 है। शास्त्र की मर्यादा के बाहर जाना यह भी निंदनीय है। और शास्त्र की मर्यादा की रक्षा के नाम पर ऐसा कुकृत करना यह भी निंदनीय है। परंतु यह सब निंदनीय होने के साथ-साथ यह सब प्रायोजित है। और जब राजनीतिक रोटियां कोई सेक रहा है तो वही वाली बात कि मंत्री जी बाढ़ का पानी जो है खतरे के निशान तक आ गया तो क्या करें? खतरे का निशान 2 इंच और ऊपर बढ़ा दो। हो गई व्यवस्था। तो इसी तरीके से जब धर्म शास्त्रों की बातें समझ में ना आए। उसको समझ पाने में असमर्थ हो सामने वाला तो उन बातों को नकार दो। क्योंकि हमारे पास सामर्थ तो है नहीं। समर्थ गुरुओं के पास हमें जाना नहीं है। दो मिनट जाकर के चले जाएंगे तो ऐसा ना हो हमारी बनी बनाई जो ताश के पत्तों का महल है वह उड़ जाए हवा में। तो इसलिए हम क्या करेंगे? उन चीजों को गाली देने लगेंगे। कल को लोग खड़े हो जाएंगे। भाई बहन के रिश्ते से उन्हें प्रॉब्लम होगी। नहीं भाई बहन में विवाह करा दो। तुम थूकने लगता हूं उस पर भी। कहने लगना मैं रूप थूकता हूं। भाई बहन के रिश्ते पर उनमें विवाह होना चाहिए। मनुष्य तो जो मनुष्य का जन्म ही है। वह हुआ ही है मार्स मध्य मैथुन

00:24:57:08 के लिए प्रवृत्ति है उसमें डाली गई है लिखा है उसी भागवत में जिस भागवत की वहां कथा हो रही है उसी भागवत में लिखा है प्रवृत्ति है ये इस प्रवृत्ति के साथ ही जन्मे हो मतलब आप जन्मे ही हो नियंत्रण हीन होकर के चलने के लिए आपकी मूल प्रवृत्ति में है आप हर जगह सारी मर्यादाएं तोड़ना चाहते हो तो कल को ये भी तोड़ेंगे आज लिविंग रिलेशनशिप में गए हैं आज जो समलैंगिकता में गए हैं। थोड़े दिनों बाद कहेंगे मुझे अपनी माता से शादी करनी है। वहां देखो संविधान में कोई भेदभाव नहीं है। किसी के लिए भी माता से शादी हो सकती है। बहन से शादी हो सकती है। कहने लगेंगे लोग तो तुम खड़े हो जाना। मैं थूकता हूं बहन भाई के रिश्ते पर। मैं थूकता हूं। मां बेटे के रिश्ते पर कराना विवाह उनका। ये आईटी सेल वालों की बात कर रहा हूं मैं। यह आईटी सेल वाले हमारे प्रामाणिक आचार्य गण जो शास्त्रों की बातों को तर्क के साथ यथावत रखते हैं। उनकी किसी एक बात को लाइमलाइट कर रहे हैं और जो दूसरी बातें हैं जिसको सुनकर के कोई व्यक्ति वास्तविकता को समझ पाए उसको छुपा रहे हैं। यह बोल दिया गया व्यास गद्दी पर बैठने

00:26:12:09 का अधिकार अमुक अमुक को है। उसने यह धारण किया वह उसको है। ऐसा है वैसा है। यह तो बता रहे हैं पर यह नहीं बता रहे कि चोटी काटना और इस तरह का दुर्व्यवहार करना इसको उन्होंने अपराध कहा है। यह नहीं दिखा रहे तो करना क्या चाहते हो इस तरह से इस तरह से तुम सोच रहे हो कि मैं हिंदू धर्म की रक्षा कर रहा हूं मगर तुम हिंदू धर्म को नष्ट कर रहे हो और किसी दिन आना मैं जो ये आईटी सेल वाले हैं जो इस तरह के कार्य कर रहे हैं ना अपनी परंपरा प्राप्त जो शास्त्र है, गुरु गोविंद ग्रंथ हैं। इनकी अवेलना जो कर रहे हैं। मैं इनको सबको सबका आह्वान करता हूं। आपकी सारी ये जो गलतफहमियां है ना कि आप हिंदू धर्म की रक्षा कर रहे हैं। ये सब दूर हो जाएंगी। पर आप आएंगे नहीं। क्योंकि आपको पता है कि दूर हो जाएंगी। और फिर मैंने जो अपनी यूनिकनेस दिखाई है धर्म रक्षा के नाम पे वो नष्ट हो जाएगी। फिर तो मुझे वही करना पड़ेगा जो ये कर रहे हैं। फिर मुझे पूछेगा कौन? तो जो सत्य और धर्म के पक्षधर हो वह इस प्रायोजित मामला जो बनाया जा रहा है जो भाइयों भाइयों में फूट डाली जा रही है आदत ब्राह्मणों में उससे उस पर टीका टिप्पणी कर करते हुए

00:27:27:22 उसमें फंसने से अपने आप को बचाएं टीका टिप्पणी तर्क वितर्क इधर से बोलना उधर से बोलना है इस विवाद में फंसने से स्वयं को बचाएं क्योंकि यह राजनीतिक प्रायोजित मुद्दा है जो बनाया गया है वास्तविकता क्या है वह मैंने आपको समझाने का प्रयास किया और और जो प्रबुद्ध जन होंगे वो समझेंगे भी। ठीक है? सभी को जय श्री राम। [संगीत]

Plans for this video (0)

No Plans yet. Press "✂️ Open Clip Cutter" to make one.

🤖 Ask AI for suggestions

AI reads the remaining (unused) parts of this video and gives ideas for new videos: from where to where, hook, and what to remove from the middle. Suggestions follow the RULES and appear here as "AI Suggestion". You can review, edit or approve them.

  • ⬜
    Hindi SRT Required

    YouTube Studio → Subtitles → Hindi → upload the SRT file. (Checked automatically once OAuth is connected.)

  • ⬜
    English SRT

    YouTube Studio → Subtitles → Add language → English → upload the SRT file.

  • ⬜
    Title (per Rules)

    Check the title against the RULES on honorifics, names and terms.

  • ⬜
    Description

    YouTube Studio → Details → Description. Write it as per the RULES.

  • ⬜
    End Screen

    YouTube Studio → Editor → End screen. The API does not report this, so press Done after adding it.

  • ⬜
    Cards

    YouTube Studio → Editor → Cards. The API does not report this, so press Done after adding them.

  • ⬜
    Playlist Automatic

    YouTube Studio → Details → add to Playlists. It gets ticked ✓ automatically at the next sync.

  • ⬜
    Thumbnail

    YouTube Studio → Details → Thumbnail → upload a custom thumbnail.

"Done" is your confirmation. The YouTube API does not report things like End Screen and Cards.

Playlists

Not in any public playlist (or YouTube sync has not run yet).

A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 27:57 · 30 Jun 2025

क्या कथा कहने का अधिकार सिर्फ ब्राह्मण को? #कथावाचक #इटावा

0%
☁️ Drive Not in Drive yet

🔗 This video is made from parts of these videos

A · Video वर्ण व्यवस्था पर एक स्वस्थ चर्चा । #aryasamaj #iskcon #cast
Open at 01:02:14:12
B · Live वर्ण व्यवस्था पर चर्चा #verna #jatim
Open at 01:20:35:18

Notes

Description

(empty)

History

No changes yet.

✂️ Clip Cutter

⌨️ Keyboard shortcuts

Space Play/Pause · I Set start · O Set end · ←→ 1 second (Shift: 5) · ,. 1 frame · P Preview · Enter Add clip · Esc Stop

▶

Start

End

🔍 zoom
Already used Plan clips
⚠️ () of this clip is already used in another video (green part). Fine if on purpose, otherwise change the times.
✂ Remove (middle part: bad audio, bad section)

Move the video to that spot (click the SRT or the bar), then press "Start"/"End".

Clips () · Total

Add clips above. They will appear here; drag (⋮⋮) to reorder.

Hook, full note for editor, status