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00:00:02:28 तो सभी को जय श्री राम। सर्वप्रथम थोड़ा अपने बारे में अपना परिचय दे दीजिए। रामपाल जी से किस प्रकार से जुड़े हैं और कब से जुड़े हैं और थोड़ा जो भी आप बताना चाहे

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00:00:16:26 जी सभी को नमस्कार। सत साहेब मेरा नाम गणेश दास है और मैं झारखंड से हूं। गोडा जिला पड़ता है। मैंने संत रामपाल जी महाराज से 2014 में नाम दीक्षा लिया है। तो 2014 मतलब उनके वो क्या था? बरवाला कांड था। बरवाला कांड से ठीक करें। ये बरवाला कांड से पहले लिया है। जी जी। अच्छा ठीक है तो हम लोग ना विस्तार से बात करेंगे और हो सकता है ये हमारी चर्चा कई एपिसोड्स में हो क्योंकि बहुत सारी चीजें हम लोग डिस्कस करेंगे आराम आराम से तो सर्वप्रथम एक ये बात आती है कि रामपाल जी महाराज की कहानी जो समाज में शुरू होती है वो यहां से होती है कि उन्होंने सभी धर्मों के पवित्र सद ग्रंथों से खोल खोल कर दिखाकर सिद्ध कर दिया है कि वास्तविक ज्ञान क्या है? वास्तविक ईश्वर कौन है? वास्तविक तत्वदर्शी कौन है? है ना? जी तो

00:01:31:27 इसमें तीन विशेषण आए हैं। धर्म और उसके बाद पवित्र और उसके बाद अ सदग्रंथ। तो रामपाल जी महाराज के द्वारा किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म के रूप में स्वीकार करने का आधार क्या है? जी एक बार फिर से प्रश्न को दोहराइएगा। मैं समझा नहीं कि आप कहना क्या चाह रहे हैं। रामपाल जी महाराज के द्वारा और उनके अनुयायियों के द्वारा आपके जो रामपाल जी महाराज हैं उनके द्वारा और आप लोगों के द्वारा एक क्लेम सबसे पहला जो क्लेम है जिस पर पूरी इमारत खड़ी हुई है। है ना? उस पर यह है कि उन्होंने सभी धर्मों के पवित्र सद ग्रंथों से यह सिद्ध कर दिया है कि परमेश्वर कबीर है। वो तत्वदर्शी है और गीता का ज्ञान काल ने बोला है। ये सब चीजें उन्होंने बोली है। तो जी अब जब वो आप लोग जब

00:02:46:28 ये क्लेम कर रहे हो कि सभी धर्मों के यानी कि जिन जिन बुक्स को उन्होंने यूज़ किया है उन बुक्स वो बुक्स जिन आईडियोलॉजी से जुड़ी जैसे इस्लाम से क्रिश्चियनिटी से किसी भी आईडियोलॉजी से जुड़ी हुई चीजें हैं तो उनको भी उन्होंने धर्म माना है। क्रिश्चियनिटी को भी धर्म माना है। इस्लाम को भी धर्म माना है। सबको उन्होंने धर्म माना है। ठीक है? जी जी तो दूसरी बात उनके जो ग्रंथ है स्क्रिप्चर्स है उनको उन्होंने पवित्र और सद ग्रंथ भी बोला है। ठीक है? तो सबसे पहला सवाल यह है कि

00:03:28:06 अ किसी भी विचारधारा को धर्म के रूप में किसी भी ज्ञान को धार्मिक ज्ञान के रूप में स्वीकार करने का रामपाल दास जी का आधार क्या है? किसी भी बात को स्वीकार करने का आधार उनके शास्त्र है। जैसे हम हिंदू धर्म की बात कर रहे थे। हिंदू धर्म में जो भी शास्त्र है जैसे वेद हो गया। मेरी बात आप समझ नहीं रहे। जैसे जैसे कि मैं आपको उदाहरण दे दूं। जैसे कि मान लीजिए कि मेरे पास एक बुक है। जी।

00:04:02:16 एक मिनट दिखाता हूं। मान लीजिए ये है। ठीक है? इसमें मैंने कुछ बातें लिखी है जो मुझे ठीक लगी। ओके। जी। भगवान के बारे में भी लिखा है। और भी कुछ बातें लिखी है। इस इस किताब को कुछ 10 20 लोग मानते भी हैं। जी। और धर्म भी कहते हैं। तो क्या इस किताब को भी आप धर्म मान लेंगे, धार्मिक किताब मान लेंगे या कोई कारण होगा जिस कारण से आप इसको किसी भी किताब को धार्मिक किताब मानेंगे। वो क्या कारण है?

00:04:51:03 वो कारण यही है कि जो किताब को हम लोग धर्म के रूप में मानते हैं वो वास्तव में ईश्वर प्रदत है। इसीलिए उनको ग्रंथ माना गया है। सद ग्रंथ माना गया है। जिसको कि आप बोल रहे हैं किसी व्यक्ति के द्वारा लिखा गया ऐसा नहीं है। जैसे वेद ईश्वर कृत है। गीता भी गया। मैं आपकी बात समझ गया कि जो ग्रंथ ऐसा होगा जो ईश्वर प्रदत्त होगा उसको आप पवित्र सद ग्रंथ और धार्मिक मानते हैं। जी जी जी अच्छा तो मैं भी कह रहा हूं कि ये ईश्वर प्रदत्त है मुझे। फिर इसको धार्मिक मानेंगे आप? नहीं आपके कहने से केवल नहीं हो जाएगा। उसको प्रमाणित करना होगा कि वास्तव में ईश्वर प्रदत है। तो आपने आपने यह जो क्रिश्चियन वाला है वह कैसे प्रमाणित किया है कि वो ईश्वर प्रदत्त

00:05:54:03 है हम कर देंगे पर जैसा कि आपने शुरुआत में कहा था कि संत रामपाल जी महाराज ने सर्व धर्म ग्रंथों से ये प्रमाणित किया कि कबीर साहब भगवान है पूर्ण परमात्मा है। मैं वो नहीं पूछ रहा हूं। नहीं सबसे शुरू में आपने हम पहले इस पर भी आएंगे। आपके हर प्रश्न का उत्तर देंगे लेकिन शुरुआत में जैसा कि आपने कहा कि संत रामपाल जी महाराज सभी धर्म ग्रंथों को लेकर के खुद को खोल के दिखाते हैं और कहते हैं कि कबीर साहब परमात्मा है। तो इस विषय को आगे बढ़ाते हुए सबसे पहले हम आपसे जानना चाहते हैं कि आपका ईश्वर के विषय में क्या विचार है? ईश्वर ये विषयंतर हो रहा है। देखिए ऐसा है ये विषयांतर हो रहा है। अभी एक विषय चल रहा है कि अगर रामपाल जी अगर रामपाल जी ने किसी आईडियोलॉजी को किसी विचारधारा को धर्म कहा है तो किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म के रूप में स्वीकार करने का आधार आपने बताया कि वो ईश्वर प्रवत्त होना चाहिए। इसमें हमें आपकी ओर से आप नहीं दे रहे हैं। मगर आपकी ओर से एक हम तर्क खुद ले लेते हैं कि भाई आपको विश्वास है कि मोहम्मद साहब ने सही कहा था। आपको विश्वास है ईसा मसीह ने सही कहा था। ठीक है? रामपाल जी को विश्वास है।

00:07:09:18 अब मुझे पहले तो एक बात बताइए क्या गीता जी काल के द्वारा प्रदत्त है या ईश्वर के द्वारा प्रदत्त है? ये फिर विषय अंतर होने लगा। जैसा कि हमने आप जो प्रारंभ में जो बात शुरू किया था हम उस पर हम आना चाहेंगे। इसके बाद भाई साहब मेरी बात मैं आपको कनेक्ट बता देता हूं। वो कनेक्शन क्या है? आपकी जो यह जो लाइन है ना यह गलत लाइन है इसको मैं सिद्ध करूंगा। इसी को सिद्ध कर रहा हूं। आपने जो यह कहा है कि ईश्वर द्वारा प्रदत्त जो धर्म जो शास्त्र होगा वो हमारे लिए धार्मिक ग्रंथ है। तो जो ये जो गीता का ज्ञान है क्या वो ईश्वर के द्वारा प्रदत्त है? बिल्कुल।

00:08:04:04 ये तो काल के द्वारा दिया गया है और ईश्वर शब्द जो है ये हर व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है। आम भाषा में ईश्वर भगवान को भी कहा जाता है। ब्रह्मा विष्णु महेश को भी कुछ लोग ईश्वर कहते हैं। ईश्वर शब्द केवल एक व्यक्ति के लिए नहीं होता है। भाई साहब मैं आपसे यह कह रहा हूं कि आपकी किसी भी शास्त्र को धर्म के रूप में स्वीकार किसी भी आईडियोलॉजी को धर्म के रूप में स्वीकार करने का आधार जो आपका पूर्ण ब्रह्म है उसके द्वारा प्रदत्त ज्ञान है। किसी किसी को भी जिसको ईश्वर कहा जाएगा उसके द्वारा जो है आप मान लेंगे कि ईश्वर द्वारा प्रदत्त

00:08:44:27 है। देखिए पूर्ण ब्रह्म के द्वारा जो ज्ञान प्रदत है उनहीं से मिलता जुलता ज्ञान अगर अन्य शास्त्रों में है तो हमारे लिए मान्य है। चाहे वो कुरान शरीफ में हो चाहे बाइबल में हो चाहे वेदों में हो कहीं भी हो तो हमारे लिए मान्य है। शास्त्र में पूर्ण ब्रह्म की बातों के अनुसार बात लिखी होगी कहीं भी थोड़ी बहुत भी वो आपके लिए धर्म धार्मिक ग्रंथ हो जाएगा। जी तो ये मैंने लिखा है पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करो दिख रहा है आपको जी तो क्या अब ये धार्मिक ग्रंथ हो गया आपके लिए नहीं केवल एक शब्द लिख देने से तो फिर तो फिर मुझे बताइए कितने शब्द कितने शब्द लिखने पर हो जाएगा बताइए ग्रंथ के कुछ नियम होते हैं वो क्या है सिद्धांत होते हैं वो हम वो अलग विषय है अलग विषय नहीं है। आप अलग विषय नहीं है। मैं कनेक्ट बता रहा हूं। आपकी बात कट रही है। आपने अभी एक बात कही कि जिस ग्रंथ में थोड़ी बहुत बात भी भगवान से जुड़ी हुई होगी। भगवान वो वाले भगवान नहीं जिनको आप वाइस कैप्टन के रूप में देखते हैं। मेन भगवान ठीक है? पूर्ण ब्रह्म। पूर्ण ब्रह्म के अनुसार जिस भी ग्रंथ

00:09:59:27 में कहीं भी लिखा होगा वो हमारे लिए धार्मिक ग्रंथ है। वो धर्म है। तो ये आपका धार्मिक ग्रंथ माना जाएगा क्या? अब आप कह रहे हैं अब आप कह रहे हैं कि नहीं और भी कुछ होता है वो और भी कुछ क्या है देखिए उसके विषय में हम आ रहे हैं उस ऊपर भी आएंगे कि ग्रंथ क्या होता है मह काव्य क्या होता है मैंने ग्रंथ नहीं कहा है मैंने कहा है धर्म धर्म आप किसी को भी किसी किसी भी बात को समाज में कोई भी संस्था है कोई भी मत है कोई भी पंथ है उस पंथ मत के द्वारा दी जाने वाली शिक्षा ज्ञान को आप धर्म जब कब कहते हैं? किस कारण से कहते हैं? यह पूछ रहा हूं मैं। आपने कहा कि ईश्वर द्वारा प्रदत्त ज्ञान से मिलता जुलता होगा उसको हम धर्म कहेंगे। तो ये मिलता जुलता है। पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करो। हां। तो इसको भी जिसमें भी ऐसा कुरान शरीफ है चाहे इसको आपने एक बात कही अभी इसको भी ये धार्मिक ग्रंथ है आपका। ये ग्रंथ का क्या नाम है बताइए?

00:11:09:10 शिवांस्कृत उसको हम पढ़ेंगे तभी तो हम कुछ कह सकेंगे बिना पढ़े हम आपने कहा था मिलती जुलती कहीं पे भी बात होती है वो धार्मिक ग्रंथ होता है तो ये मिलती जुलती बात दिखा दी ना पूर्ण ब्रह्म की भक्ति करो हमको हम तो नहीं पढ़े हैं आपके दिखा हां हमको दिख रहा आपको दिख नहीं रहा है क्या दिख नहीं रहा है जूम कर दिख रहा है कि नहीं वो हमको दे दीजिए पूरा हम पढ़ लेंगे इसके बाद हम निर्णय करेंगे कि ये है कि नहीं है तो वो तो यानी कि मिलती जुलती बात होने के बावजूद भी कुछ कारण ऐसे होते हैं जिन कारणों से आप डिसाइड करेंगे वो धार्मिक ग्रंथ है कि नहीं वो कारण क्या

00:11:58:01 है यानी मेरी बात समझिए देखिए मैं मैं आपसे शायद आप मेरा प्रश्न समझ नहीं पा रहे हैं इसलिए ऐसा हो रहा है। यानी कि सिर्फ मिलती जुलती बात होने का होने से आप किसी को धर्म ग्रंथ नहीं मानेंगे। आप उसमें और भी जांच करेंगे। वो जांच का आधार क्या होगा? ये पूछ रहा हूं। जांच का आधार होगा कि वो उनका जो लेखक है वो कौन है? वो कोई प्रमाणित व्यक्ति है अथवा नहीं इसके कौन लेखक होगा क्या प्रमाणित व्यक्ति किसके द्वारा प्रमाणित होगा किसी संत महात्मा के द्वारा लिखा होना चाहिए या जिसके बारे में हम जानते हैं कि वो भगवान का भेजा हुआ है उनके द्वारा होना चाहिए किसी आम व्यक्ति के लिख देने से कोई ग्रंथ नहीं हो जाता जैसे हम कोई शिवश आपके बारे में कुछ उल्टा सीधा या कोई भगवान के बारे में लिख दे तो वह ग्रंथ नहीं माना जाएगा तो यानी कि अब आपने कहा कि किसी संत कोई संत होना चाहिए। है ना? जी। तो तो इसका मतलब यह है कि संत के द्वारा जो लिखा गया होगा वो आपका धार्मिक ग्रंथ है। जी।

00:13:13:18 और संत की परिभाषा क्या है? आपके अनुसार संत कौन है? शांति को जो प्राप्त कर ले वह संत कहलाते हैं। शांति को जो प्राप्त कर ले वह संत कहलाते हैं। तो आज के टाइम में कोई आपके सामने ये रामपाल जी को छोड़कर के संत है क्या? नहीं। अच्छा शांति से मतलब है वो युद्ध वगैरह ना करे। नहीं। शांति का मतलब होता है जैसे श्रीमद् भगवत गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में कहा गया है कि भारत तू सब प्रकार प्रकाश उस परमेश्वर की शरण में जा उनहीं की कृपा से तू परम शांति को यहां परम शांति जिस परम शांति की बात हो रही है उनको जो प्राप्त कर ले वो संत होता है वो संत होता है उसके द्वारा लिखा हुआ कोई भी ग्रंथ आप धार्मिक मानेंगे जी तो कुरान को किसने लिखा और क्या वो शांति को प्राप्त थे

00:14:26:00 कुरान शरीफ मोहम्मद साहब के द्वारा लिखा हुआ है और वो भगवान से मैं पूछ रहा हूं क्या वो शांति को प्राप्त थे बिल्कुल आपने कहा जो संत जो संत महात्माओं के द्वारा लिखा गया ग्रंथ होगा वो धार्मिक ग्रंथ है अब उसके बाद आपने बताया कि संत वो है जो शांति को प्राप्त हो चुका हो यानी कि जो परम शांति होती है मोक्ष है ना? मोक्ष अलग विषय है। मोक्ष नहीं तत्व से तत्व से जान लेना। तत्व से जान लेना। इतना ही बहुत है। हां। तो क्या मोहम्मद साहब आपकी उस संत की कसौटी पे खरे उतरते हैं? [संगीत]

00:15:18:14 जी भाई। नहीं तो फिर वो आपका धार्मिक ग्रंथ कैसे हुआ? इसलिए हुआ क्योंकि उसमें जो भी ज्ञान दिया गया है यानी देखिए भाई साहब अब थोड़ा सा मैं अब कहूंगा आपकी बातें बदल रही है। आपने कहा था कि संत के द्वारा जो भी लिखा गया होगा वो धार्मिक ग्रंथ माना जाएगा। ऐसे किसी के भी लिख देने से नहीं माना जाएगा। फिर मैंने संत की परिभाषा पूछ ली। संत के कसौटी पर वो जो है मोहम्मद साहब वो खरे नहीं उतर रहे। मैं जानता हूं। कोई नहीं उतरता सिवाय आप आप जिनको मानते उनके अलावा तो जब वो खरे नहीं उतर रहे हैं संत के द्वारा जो लिखे हुए जो ये हैं वो संत है ही नहीं वो शांति को प्राप्त है ही नहीं तो फिर आप उनके ग्रंथों को धार्मिक ग्रंथ कैसे बोल रहे हैं क्यों बोल रहे

00:16:06:01 [संगीत] हैं देखिए शांति को वो प्राप्त है कि नहीं इस विषय पर विचार करने से पूर्व हम अचानक ऐसा नहीं कह सकते हैं कि उन्होंने शांति को प्राप्त कर लिया कि नहीं किया। ऐसे फिलहाल हम अभी कहा है आपने मैं आपको क्लियर कर दूं। पहली बात तो आपने भी कहा है कि वो संत नहीं थे क्योंकि वो शांति को प्राप्त नहीं थे। दूसरी बात मैं आपके द्वारा बता दूं। आपने एक किताब लिखी है मुसलमान नहीं समझे कुरान का ज्ञान जी। यानी वो तत्व से नहीं जान पाए। मुसलमान तो उसमें मोहम्मद भी आते हैं। बिल्कुल आते हैं तो फिर कहां से वो शांति को प्राप्त होने वाले हो जाएंगे। उसमें मतलब कि जो आप वो कह रहे हैं ना कि ऐसा हम लोग क्लियर नहीं कह सकते वो शांति को प्राप्त है कि नहीं है। ये कह रहे हैं आप। पर आपकी ओर से क्लियर है कि वो शांति को प्राप्त नहीं है। क्योंकि वो जान नहीं पाए कुरान का ज्ञान। ये ये केवल मोहम्मद साहब के लिए नहीं है। यह आम जो मुसलमान है वर्तमान के समय उनके लिए वो किताब लिखा केवल नहीं केवल नहीं जो जो आज के जो मुसलमान है वो मोहम्मद साहब को जो आयतें उतरती थी मोहम्मद साहब अपने लोगों को बताते थे कि इस आयत का ये मतलब है उस

00:17:21:06 आयत का वो मतलब है। वो आगे चला। तो मोहम्मद साहब आपके अनुसार संत नहीं है। मोहम्मद साहब आपके अनुसार जो है वह शांति को प्राप्त नहीं है। मोहम्मद साहब कुरान के ज्ञान को समझने वाले भी नहीं है। तो जब वो नहीं है तो फिर उनके द्वारा दिया गया जो ग्रंथ है वो आपके लिए धार्मिक कैसे हुआ? असल में बात यह है मैं बताऊं। बात यह है कि इसका जो यह प्रश्न चल रहा है इस प्रश्न में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रश्न में बात करने से पहले हमें यह पता होना चाहिए कि धर्म क्या है? जब हम यह पता कर लेंगे कि धर्म क्या है तो हमारे लिए स्पष्ट हो जाएगा कौन सा धार्मिक है कौन सा नहीं है। धर्म क्या है? जीव की चाह का जो वास्तविक विषय है मैं बोल लूं धर्म ये है क्योंकि वो वो प्रश्न छेड़ दूंगा उसमें भी आपको घंटा भर लग जाएगा। जीव की चाह का जो वास्तविक विषय है सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त को परिभाषित कर सकने वाले शास्त्रों द्वारा सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर को प्राप्त करने के निमित्त बताई गई विधि विधान मर्यादा का नाम धर्म है। तो यानी कि जो शास्त्र सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर की बात करेंगे

00:18:36:28 और उसको प्राप्त कराने की बात करेंगे सर्वशक्तिमान ईश्वर की बात करेंगे वो हमारे लिए और उनके उसको प्राप्त करने के लिए प्रमाण और युक्ति के साथ तर्क के साथ जो परंपरा प्राप्त रूप से हमें प्राप्त हुआ होगा तो उन शास्त्रों को हम हम धार्मिक कहते हैं। हमारी परिभाषा है। अब आपकी परिभाषा ये है किसी ने संत ने लिखा हो तो आपके ही अनुसार कोई संत है ही नहीं। यहां तक कि व्यास इत्यादि भी संत नहीं थे। महर्षि वेदव्यास जी जिनके द्वारा आपको वेद मिल रहे हैं, जिनके द्वारा आपको पुराण मिल रहे हैं वो भी संत नहीं थे क्योंकि उनको भी तत्व ज्ञान नहीं हुआ था। तो फिर ये धार्मिक ग्रंथ कहने का दिखावा क्यों? आप सीधे कहिए कि हम कबीर सागर को धार्मिक ग्रंथ मानते हैं और उसके अनुसार जो होता है उसको हम कह देते हैं यह धार्मिक ग्रंथ है मगर वास्तविकता में वो तत्व ज्ञान को ना जानने वालों ने लिखे हुए ग्रंथ है इसलिए हम नहीं मानते वास्तव में ये है मगर हम कह देते हैं आपको ये मानना पड़ेगा इस चीज

00:19:39:04 को देखिए आप बोले जा रहे हैं बोले जा रहे हैं हमने ऐसा कहां कहा कि व्यास जी संत नहीं या फिर गीता जी क्या कहता है वेद आदि ये ग्रंथ नहीं है क्योंकि संत के द्वारा लिखा हुआ नहीं ऐसा हमने कहा नहीं आप पहले पूर्व में क्या जाने रामपाल दास जी ने लिखा है व्यास इत्यादि को भी तत्व ज्ञान नहीं था ये तो शास्त्रों में भी लिखा अन्य ग्रंथों में भी लिखा हुआ है ठीक है वो ठीक है हम आपकी बात वो बाद में देखेंगे वो लिखा है उसका मतलब क्या है मगर फिलहाल वो संत नहीं थे उनके द्वारा दिया गया जो ग्रंथ है वो धर्म ग्रंथ क्यों उसको जब आपको संत रामपाल जी महाराज ने ऐसा कह दिया कि व्यास आदि को तत्व ज्ञान नहीं थे। यही बात अगर पुराणों में लिखा हुआ है अन्य शास्त्रों में लिखा हुआ है। ये दूसरी बात है। आपका यह मानना है कि व्यास को तत्व ज्ञान नहीं था। ये आपका मानना है। वो कारण उसका कुछ भी हो शास्त्र हो या कुछ भी हो। सुन सुन लीजिए सुन लीजिए। सुन लीजिए। देखिए व्यास जी व्यास जी को तत्व ज्ञान नहीं था। कारण इसका कुछ भी हो मगर आप तो यह स्वीकार अंतत गतत्वा कर रहे हैं कि व्यास जी को तत्व ज्ञान नहीं था। तो जब आप यह स्वीकार कर रहे हैं

00:20:54:07 तो उनके द्वारा प्राप्त होने वाले जो धर्म ग्रंथ है लिखे गए जो धर्म ग्रंथ है मोहम्मद को भी मोहम्मद जी को भी तत्व ज्ञान नहीं था आपके अनुसार तो फिर उनके द्वारा मिलने वाला ईसा को ईसा को भी तत्व ज्ञान नहीं था आपके अनुसार तो फिर उनके द्वारा ये सब मिलने वाले जो धर्म ग्रंथ है इनको आप धर्म ग्रंथ क्यों कह रहे हो आप देखिए या तो आप अपनी परिभाषा को चेंज करिए वो सही परिभाषा बताइए जिससे कि हम इन सबको धर्म ग्रंथ मान सके आपने जो परिभाषा बताई है उसके अनुसार ये धर्म ग्रंथ सिद्धि नहीं हो रहे तो फिर आप क्या ढोंग करते हो बोलने का कि धर्म धर्म ग्रंथ है सभी धर्मों के ग्रंथों से हमने प्रमाणित कर दिया वो परिभाषा सही नहीं बताई आपने इसका मतलब आपने कहा कि जो संत के द्वारा दिया गया होगा ऐसे किसी के भी द्वारा लिख देने पर नहीं माना जाएगा किसी संत प्रमाणिक भाई आपके आपके अनुसार ना व्यास प्रमाणिक संत है आपके अनुसार ना मोहम्मद प्रामाणिक संत है आपके अनुसार ना ईसा ईशु प्रमाणिक संत इतना जवाब बोल रहे हैं जो मैंने कुछ कहा आपको? अरे भाई आप अच्छा तो मैंने अभी आपसे पूछा अभी चलिए ठीक है। आपने कहा नहीं कि मोहम्मद संत नहीं थे। कहा नहीं व्यास जी का नाम ले रहे हैं और सबका नाम ले व्यास जी के लिए भी लिखा है।

00:22:09:08 ब्रह्मा जी के भी लिए भी लिखा है कि इनको तत्व ज्ञान नहीं था। सबके लिए लिखा है। इनको तत्व ज्ञान नहीं था। ये कोई संत सिद्ध नहीं हुआ। आपकी परिभाषा मैं मैं आपकी बात पर बात कर रहा हूं। अच्छा आपको तत्व ज्ञान हुआ। फिर विषयंतर मैं अभी एक चीज क्लियर कर रहा हूं। देखिए मैं ये क्यों पूछ रहा हूं जिससे जब हम आगे बात करें तो हमें पता हो कि किस शास्त्र से प्रमाण लेना है। समझ रहे हो? इसलिए यह जानना आवश्यक है कि आप जिनको जिन जिन व्यक्तियों को मानते ही नहीं है कि वो तत्व ज्ञान वाले थे वो जो है वो संत थे और आपकी परिभाषा है कि जो संत के द्वारा लिख दिए गए शास्त्र होंगे वो हम मानेंगे कि धार्मिक है ये आपने कहा तो इसलिए अब हम चेक करेंगे कि भाई ये धार्मिक तो सिद्ध ही नहीं हो रहे क्योंकि आप ही कह रहे हो कि मोहम्मद वशिष्ठ और जो ईसा है ईशु है ये सब जो है प्रामाणिक संत नहीं थे। हमारे लिए भी नहीं है। हमारे लिए व्यास प्रमाणिक संत है। आपके लिए व्यास भी नहीं है। और अगर अगर केवल भगवान की बात लिख देने से ही वो संत होने की आवश्यकता नहीं है। प्रामाणिक होने की आवश्यकता नहीं है। केवल भगवान की बात होनी चाहिए। तो तो फिर ये भी मान लो इसको

00:23:24:19 भी ग्रंथ कह दो धार्मिक ग्रंथ।

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00:23:31:27 चलिए अब हम इसमें एक स्टेप इसी का और क्लियर हो जाएगा। मैं यह पूछ रहा था कि जैसे कोई मातृशक्ति है स्त्री तो उसको पवित्र चरित्र वाली कब तक कहा जाएगा जब तक उसका एक भी बार उसके उसके द्वारा कोई ऐसा व्यभचार सुनिए पहले आगे बढ़ने से पहले हम आपसे जानना चाह रहे हैं कि आप जो लाइव डिबेट करते हैं बहुत पहले लोगों के साथ हो गया। आज हमारे साथ हो रहा है। तो आप जो लाइव डिबेट कर रहे हैं इसका उद्देश्य क्या है? इसका उद्देश्य है कि सच्चाई बाहर आए। रामपाल का ज्ञान ज्ञान है या अज्ञान है? जी हम ठीक है। हम तो सबसे पहले हम आपसे एक आपने एक प्रश्न किया। एक मिनट। आपने एक प्रश्न किया। मैंने बिना घुमाए फिराए बातों को बदले बिना बिल्कुल सटांग से उत्तर दिया। ठीक है? आपको एक मैं प्रश्न करता हूं। उसके बाद आपको काफी देर लगती है। उसमें आप अपनी बातें कई बार बदलते। एक मिनट एक मिनट एक मिनट। अब मैं पूछ रहा हूं आपका ये प्रश्न करने का उद्देश्य

00:24:46:28 क्या था? क्या आप जो प्रश्न कर रहे हैं? अभी जो आपने एक प्रश्न किया कि आपका उद्देश्य क्या है लाइव डिबेट करने का? तो इस प्रश्न का आपका उद्देश्य क्या था? यही उद्देश्य था कि जो उद्देश्य है उस उद्देश्य को लेकर के और कुछ उद्देश्य का पूर्ति हो। इसीलिए मैंने आपको प्रश्न किया। ये जानना चाहते थे आप कि मेरा उद्देश्य क्या है जिससे कि क्या मैं सही उद्देश्य पे चल रहा हूं। अगर सही उद्देश्य पर चलूंगा तो तो आप बात करेंगे। अगर नहीं चलूंगा तो आप बात नहीं करेंगे। हां बिल्कुल क्योंकि तो आपको मेरा अब आपको मेरा उद्देश्य पता चल गया। जी अब मैं आपसे प्रश्न पूछना चाहता हूं। एक मिनट तो अब आपको मेरा उद्देश्य ठीक लगा कि नहीं लगा? चलिए वो ठीक है। आप अगर जांच कर रहे हैं तो अच्छी बात है। जांचना चाहिए। हम जांचना। मैंने शुरू में मैंने शुरू में जो विषय पूछा था इसलिए पूछा था जिससे कि देखिए हमारी चर्चा केवल आप ये मत सोचिए कि आज ही हो जाएगी। इसके कई सारे एपिसोड रहेंगे। आप एक सभ्य व्यक्ति हैं और हमारी आपस में ठीक से बात हो सकती है तो हम कई हिस्सों में बातें कर लेंगे। अभी पहला जो चैप्टर हमने चल रहा है इस समय

00:26:02:04 वो है सभी धर्मों के पवित्र सद ग्रंथ। ठीक है? अब हमने काफी देर तक धर्म पर बात कर ली है कि रामपाल जी के द्वारा किसी भी आईडियोलॉजी को या विचारधारा को, मत पंथ को, संप्रदाय को धर्म कहने का आधार क्या है? उसमें आपने जो वो दिए हैं और मैंने जो दिए हैं वो जनता ने देखा है। वो जो भी देखेगा वो अपना डिसाइड करेगा। अब मैं इसमें जो आगे दो शब्द है उनकी बात कर रहा हूं। इसी इसी चैप्टर का जो अगला भाग है वो भाग यह है कि कोई भी महिला पवित्र अगर वो उससे देखा जाए चरित्र से चरित्र के दृष्टिकोण से देखा जाए तो वो महिला पवित्र कब तक कहलाएगी? जब तक वो एक बार भी उसने व्यभचार ना किया हो या अपवित्र कहलाने के लिए उसको कई बार व्यभचार करना पड़ेगा तब वह अपवित्र कहलाएगी। जैसे कि थाली होती है थाली वो थाली खाने की थाली है और हम उसमें वो थाली अपवित्र कब कहलाएगी? जब उसमें पूरी थाली झूठी हो या फिर उसमें केवल एक कोरा केवल एक कोर रख दो तो वो थाली झूठी हो जाएगी। इनमें से कौन सी चीज को आप मानते हैं?

00:27:19:03 ये तो एक कोर रख देने मात्र से भी वो झूठी ही समझी जाती है। पूरा करने का कोई आवश्यकता नहीं है। और स्त्री कई बार उसको विचार करना होगा अपवित्र कहलाने के लिए या केवल एक बार व्यभचार कर देगी तब कहलाएगी या पुरुष पुरुष की भी बात कर ले। कई बार उसको व्यभचार करना होगा या फिर एक ही बार व्यभचार कर लिया तो उसकी पवित्रता भंग हो जाएगी। बताइए एक ही बार करने से पवित्रता भंग हो सकता है। अच्छा केवल एक बार एकमात्र चिंदी मात्र जो उलट व्यवहार है उसके कारण वो अपवित्र हो जाएगा। है ना? जी अच्छा तो आपके हिसाब से कोई भी शास्त्र पवित्र क्यों

00:28:02:10 है? कोई भी शास्त्र का पवित्रता का आधार क्या है? पवित्रता का आधार है कि वो वो शास्त हमें ईश्वर का मार्ग प्रदान करते हैं। इसीलिए वह हमारे लिए पवित्र है। आदरणीय आदर है। अच्छा उसमें एक भी बात अगर ईश्वर के मार्ग से विरुद्ध जाने वाली होगी तो वो अपवित्र हो जाएंगे कि नहीं? नहीं। नहीं। नहीं। है ना? हम नहीं। तो ये तो आपकी दोहरी बातें हो गई। थाली को अपवित्र करने के लिए पूरी थाली अपवित्र होने की आवश्यकता नहीं है। और स्त्री और पुरुष को अपवित्र कहने के लिए स्त्री पुरुष का सदैव का वैभचारी होना आवश्यक नहीं है। मगर जब बात आप ग्रंथ की कर रहे हैं जिसको आपने पवित्र कहा है उसमें एक भी बात जो भगवान के विरुद्ध हो रही है उसको हो जाने के बाद भी आप उसको पवित्र कह रहे हैं। तो फिर नियम क्या है? तो किसी को पवित्र कहने का नियम क्या हुआ फिर आपका?

00:29:07:08 थाली में पुरुष में विचार करने की बात और शास्त्रों में दो तरह की बातें करना ये तो शास्त्रों में भड़ा पड़ा है इससे वो दो तरह की बातें नहीं कह रहा हूं विरुद्ध ऐसी बात भगवान को प्राप्त ना कराए वो है तो भरा पड़ा है वो भरा पड़ा है वो ठीक है फिर उसको आप पवित्र क्यों कह रहे हो जब आपकी पवित्रता की परिभाषा ये है जिसमें चिंदी मात्र भी अपवित्रता नहीं होगी। वो पवित्र है। वो पवित्र वेदाग कौन होता है? एक मिनट वेदाग कौन होता है? जिसमें दाग ना हो वो दाग सुनिए सुनिए वेदाग किसे कहते हैं? एक मिनट तो फिर तो फिर वो मुझे सिद्धांत बताइए कि शास्त्र का सिद्धांत क्या है? पवित्र कहने

00:29:59:09 का फिर से बोलिए। आपने कहा कि कोई महिला अथवा पुरुष जरा सा भीचार करेगा उसकी पवित्रता भंग हो जाएगी अपवित्र कहलाएगा। आपने कहा कि कोई थाली जो होगी उसमें एक चिंदी भी झूठी रख दो तो वो थाली झूठी कहलाएगी। वो पवित्र थाली नहीं कहलाएगी। मगर आपने कहा कि ग्रंथ में भले ही भगवान के विरुद्ध बात हो रही हो पूर्ण ब्रह्म के विरुद्ध। फिर भी वो पवित्र कहलाएंगे। क्यों? तो पवित्रता का आधार क्या है फिर आपकी? थाली में अपवित्र थाली पर मत जाइए आप ग्रंथों को पवित्र कहने का आधार बताइए क्या है मैंने तो आपको कह ही दिया कि जो शास्त्र पवित्र इसीलिए है क्योंकि वो हमारे ईश्वर को प्राप्त कराने का मार्ग प्रदान करते हैं इसलिए वो हमारे लिए पवित्र है आदर है आदरणीय है यानी कि कोई भी ऐसा शास्त्र जिसमें कि ईश्वर को प्राप्त कराने की बात होगी उसको आप पवित्र कहेंगे भले ही उसमें दूसरे हिस्से गलतसलत बातें भी लिखी हो।

00:31:05:06 जी। ठीक है। तो अब ये पवित्र है कि नहीं? पूर्ण ब्रह की भक्ति करो। मैंने लिख दिया। ये पवित्र ये पवित्र है कि नहीं? भले ही इसमें मैंने पीछे लिखा हो कि रामपाल चोर है या जेल कट्टू है। कुछ भी लिखा हो उससे मतलब नहीं है। मैंने तो यहां पर रामपाल जी की जय भी लिख दूंगा। पूर्ण ब्रह की भक्ति भी तो यह पवित्र कहलाएगा कि नहीं कहलाएगा? बिल्कुल नहीं कहलाएगा वो। तो इसका मतलब इसका मतलब कि अपोजिट बात होने की स्थिति में उसकी पवित्रता भंग हो रही है। जब तक केवल सही सही बातें ही नहीं लिखी होंगी किसी शास्त्र में तब तक ही उसे पवित्र माना जा सकता है। अगर एक भी बात उलट लिख दी तो उसको पवित्र नहीं माना जा सकता। अन्यथा बोल दीजिए शिवशत जो रचना है ये पवित्र शास्त्र है।

00:32:04:00 आप संत है। फिर वही बात संत वाली बात तो हम पीछे छोड़ा है ना। आपने कहा मोहम्मद संत नहीं है। फिर भी उसके ग्रंथों को आपने माना। आपको दिया के द्वारा लिखा होना चाहिए था। बात तो पवित्रता की एक मिनट तो पवित्र एक मिनट सही कर लेते हैं आपने पवित्रता की परिभाषा बताई थी कि जो भी भगवान की बात करेंगे वो पवित्र है। आपने उसमें ये नहीं बोला था जो संतों के द्वारा प्रदान किया गया और भगवान की बात करेंगे तो वो पवित्र है तो अब आप अपनी परिभाषा एक बार सही करके दोबारा बता दीजिए क्या है? पवित्र मानने की वो वो धर्म धार्मिक ग्रंथ मानने की बात थी। अभी मैं पवित्र पे बात कर रहा हूं। पवित्र मानने की बात का क्या आधार है? अभी आपने जो परिभाषा बताई थी। अभी आपने जो परिभाषा बताई थी अभी आपने जो परिभाषा बताई थी अभी आपने जो परिभाषा बताई थी उसके अनुसार यह भी पवित्र सद ग्रंथ सिद्ध हो रहा है जो कि आप मना कर रहे हैं तो अब आप अपनी बदली हुई परिभाषा बताइए मैंने परिभाषा नहीं बदला है जहां पर आपने कहा झूठा थाली झूठा होने की बात वहां पर विषय अलग था ग्रंथ को भाई साहब मैंने कहा आपने जो परिभाषा बताई है ग्रंथ को पवित्र मानने की भाई साहब ग्रंथ को पवित्र मानने की जो आपने परिभाषा बताई है वह

00:33:19:03 परिभाषा आपने यह कही है कि जो भी ग्रंथ भगवान के ओर ले जाने की बात करेंगे वो हमारे लिए पवित्र है। भले ही उसमें ठीक उलट बातें भी लिखी हो और यही अंतर है थाली में स्त्री पुरुष में और सद ग्रंथ में ग्रंथ में ठीक उलट बातें भी लिखी होंगी तो भी हम उसे पवित्र कहेंगे और थाली में भले ही ठीक उलट थाली में अगर ठीक उलट झूठा हुआ तो हम उसे पवित्र नहीं कहेंगे स्त्री पुरुष में ठीक उलट अगर त्रयाचरित हुआ तो हम उसे पवित्र स्त्री पुरुष नहीं कहेंगे मगर ग्रंथ में अगर ठीक उलट भी लिखा हुआ है फिर भी हम उसे पवित्र ग्रंथ कहेंगे फिर मैंने कहा कि ठीक है तो मैंने अब ये लिख दिया है। तो अब इसके ठीक उलट बातें भी इसमें लिखी हुई है। क्या यह आपके लिए पवित्र कहलाएगा? तो आपने कहा कि नहीं कहलाएगा। तो फिर अब आप आपको बदलनी पड़ेगी ना परिभाषा वो बदल के बता दीजिए हमें क्या है? तो आप तो ग्रंथ दिखा नहीं रहे हैं। आप तो अपना कुछ डायरी दिखा रहे हैं। वो तो ग्रंथ है ही नहीं। पहले ग्रंथ है क्या? आपको इतना लंबा चौड़ा करने से पहले हम आपको बता दे सीधा सीधी बात। अगर आपने पहले भी कहा कि हम आगे चर्चा जो करेंगे उसमें कुछ प्रमाणित लिया जाएगा शास्त्रों से तो कौन सा शास्त्र प्रमाणित है कौन सा पवित्र है ये कहना चाहता सीधा साफसाफ शब्दों में आप जान लीजिए कि चारों जितने भी

00:34:34:04 धर्म है जैसे हिंदू है हिंदू का जो वेद है गीता है पुराण है वो शास्त्र है वो धार्मिक ग्रंथ है मुसलमान अरे भाई आप वो सिद्ध नहीं कर पाए पहली बात तो ये है कि आप वो सिद्ध ही नहीं कर पाए कि वो धार्मिक ग्रंथ है आपकी परिभाषा के अनुसार और अभी अभी आपने एक बात कही है कि जिस ग्रंथ में जिस पुस्तक में आप मुझे दोबारा परिभाषा बता दीजिए। किसी भी पुस्तक को पवित्र पुस्तक मानने का आधार क्या है? दोबारा बता दीजिए आप। इसीलिए मैं कह रहा हूं बदल के बता

00:35:09:24 दूं। देखिए फिर से वही बात होगी। जो परिभाषा हम बदलना नहीं है जो कि जो बात मैंने बता दिया जब आप सुनिए आपने जो परिभाषा बताई थी भाई साहब वो ये थी जो जिस पुस्तक में जरा भी भगवान की ओर जाने की बात होगी भले ही उस पुस्तक में उल्टी बातें भी हो वो हमारे लिए पवित्र है ठीक है तो जब मैंने ये दिखा दी भगवान की ओर जाने की बात तो आपने कहा ये नहीं है तो इसका मतलब कुछ और भी चीज है जो आपने बोला है उससे उलट कुछ और भी चीजें हैं जो ऐड करनी है वो ऐड करके मुझे बताइए क्या है वो

00:35:48:12 इसीलिए नहीं है क्योंकि आप जिसको दिखा रहे हैं वो तो संत कृत है नहीं पहले भी बता दिया कि वो ग्रंथ संतों के द्वारा रचित होना चाहिए यानी कि आपकी परिभाषा यही है पवित्र मानने की कि वो संत कृत होना चाहिए और वो जो है क्या कहते हैं भगवान की ओर ले जाने की बात करने वाला होना चाहिए फिर भले ही उस संत कृत में उसमें कुछ उलट बातें भी लिखी हो भगवान से दूर ले जाने वाली ठीक है। बिल्कुल। हां। तो अब बात फिर से वही आ जाती है कि आपके लिए संत कौन है? हां ये अलग विषय है। लेकिन अरे भाई अलग विषय क्यों है? आप जिनको धर्म और ग्रंथ कह रहे हो, पवित्र कह रहे हो, धर्म कह रहे हो, पवित्र कह रहे हो वो आपके ही अनुसार धर्म और पवित्र सिद्धि नहीं हो रहा है वो। आपकी परिभाषा के अनुसार क्योंकि आप नहीं मानते कि मोहम्मद संत है और फिर आप कुरान को धार्मिक ग्रंथ कह रहे हो पवित्र ग्रंथ कह रहे हो तो ये नाटक हुआ ना फिर तो ये ढोंग हुआ या तो आपकी परिभाषा और कुछ है वो

00:36:57:28 बताओ चलो इसमें एक जो आखरी पॉइंट है वो दर्शकों ने देख लिया बात होगी इसमें आखरी पॉइंट सद ग्रंथ इसका अर्थ क्या होता है सद ग्रंथ का सद ग्रंथ सत्य बोलने वाले ग्रंथ सच्चा ग्रंथ सच्चा ग्रंथ अच्छा तो किसी भी ग्रंथ को आप सच्चा ग्रंथ मानने का आधार क्या है आपका वो ईश्वर प्रदत है भले ही वो झूठ हो जी ईश्वर प्रदत्त होना चाहिए भले ही झूठ हो जी अब उसमें झूठ है कि नहीं है कह रहे हैं। अच्छा ठीक है। ये बताइए ये बताइए जो जो गीता है वो आपके अनुसार धर्म पवित्र ग्रंथ है कि नहीं? बिल्कुल है। उसमें झूठ है कि नहीं? नहीं उसमें झूठ तो नहीं है। उसमें झूठ नहीं है। कहीं-कहीं पर झूठ नहीं है। ऐसा मेरा मत है। 5% काल ने झूठ नहीं बोला है। ये किसने कहा कि 5% काल झूठ बोला है। रामपाल ने

00:38:12:28 बोल दूं? दिखा दूं। दिखा दीजिए। आपको यह नहीं पता है कि रामपाल ने ये कहा है कि गीता में 5% काल का अपना ज्ञान है वो सही नहीं है। ये नहीं पता है आपको। आप दिखाइए ना कहां लिखा है? आपको पता है तो बता दीजिए। मैं पूछ रहा हूं। आपको पता है कि नहीं पता है? खामखा टाइम वेस्ट करा रहे हैं। पता है कि नहीं पता है? मैं दिखा दूंगा। मैं दिखा दूंगा। अन्यथा मैं रामपाल की भक्ति करना शुरू कर दूंगा। आपको पता है कि नहीं पता है? मैं दिखा दूंगा। दिखा दीजिए। आपको पता है कि नहीं पता है? मुझे पता है पर आप जो कह रहे ऐसा नहीं कहे उनका कहने का भाव कुछ और था पर आप कुछ और बता रहे हैं। क्या भाव था उनका वो बता दीजिए। दिखा दीजिए। आप नहीं नहीं दिखा दीजिए क्योंकि आप बोले जा रहे क्या दिखाने वाले उसको देख ही लेते हैं। कहां क्या लिखा है। दिखा दिखा देते दिखा देते।

00:39:44:00 यह देखिए यह क्या लिखा है? अंडरलाइन कर देता हूं। गीता अध्याय छ 10 से 15व श्लोक में इसके विपरीत यानी ऊपर जो बात चल रही है उसके विपरीत अपना मत यानी कौन सी चीज है काल के जाल में फंसे रहने वाली बात बताई है

00:40:22:14 और यह कई जगह लिखा है। यह तो एक जगह कई जगह लिखा है। अब आप बताइए इसमें क्या दिखाना चाह रहे थे? आप क्या बोले? यानी कि इसमें कुछ ऐसी बातें भी लिखी है जो भगवान के पास नहीं बल्कि भगवान से दूर ले जा रही है। काल के जाल में फसा रही है गीता में। तो फिर वो सद ग्रंथ कैसे? अगर सद ग्रंथ वो है जो भगवान के पास ले जाने की बात करे। इस जगह संत रामपाल जी महाराज यह बताया है कि गीता में जो पांच की बात आप बता रहे हैं। इसके विषय में बताया है कि गीता ज्ञान दाता भगवान अपने अपने मन से कुछ श्लोक बताए हैं उसके विषय में उन्होंने खुद कहा है कि यह मेरा मत है। अगर उस मत वो जो उनके द्वारा जो बताया गया ज्ञान है अगर वो वेदों से मिलता है तो उसका पालन करने योग्य है। अगर वो नहीं मिलता है तो फिर वो पालन करने योग्य नहीं है। इसी विषय यानी कि यानी कि उन्होंने यह भी माना ना कि ऐसा कुछ है गीता में जो पालन करने योग्य नहीं है। जी तो सद ग्रंथ तो वो है ना जो पालन करने योग्य हो। फिर उसमें तो कुछ चीजें ऐसी है जो पालन करने योग्य नहीं

00:41:37:20 है। फिर वो सद ग्रंथ कैसे? फिर भी वो सद ग्रंथ है। इसका तो निर्णय हो ही गया कि उसमें दोनों ही बातें हैं। यानी कि यानी कि जिस ग्रंथ में ईश्वर के ओर ले जाने वाली बात होगी वो और ईश्वर से दूर ले जाने वाली बातें होंगी। दोनों ही सद ग्रंथ आप मान लोगे। और दोनों ही बातें उसमें होता है। हम और झूठा ग्रंथ कैसे मानोगे? झूठा ग्रंथ होता ही नहीं है। जिसे आप कोई झूठा ग्रंथ कोई झूठी बुक नहीं होती। कोई झूठी किताब नहीं होती। कोई झूठा शास्त्र नहीं होता। कुछ नहीं झूठा होता। लग गया तो वो तो ग्रंथ ही होता है। उसमें तो दोनों ही बातें मैं आपसे पूछ रहा हूं। झूठी किताब आप किसे मानोगे?

00:42:27:03 झूठी किताब तो वो होगा जिस ईश्वर के बारे में कुछ लिखा हुआ ही नहीं है। वह झूठी होगी। कुछ भी नहीं लिखा है। अगर कुछ भी लिखा है तो वह अगर जरा सा भी ईश्वर के बारे में लिखा है तो वो सच्ची हो जाएगी। नहीं जरा सी क्यों होगा? हम क्या कितना होना चाहिए? इसका कोई पॉइंट नहीं है कि इतना ही होना चाहिए। ऐसा कुछ नहीं है। गीता की बात मन मर्जी की बात है फिर। मनमर्जी की बात है। फिर कितना होना चाहिए? मनमर्जी तो आप लोग कर रहे हैं कि आप कुरान शरीफ को मान बेकार की बात जब मैंने आपसे पूछा कि किसी शास्त्र में कितना ज्ञान होने पे आप उसको कितना परसेंटेज ज्ञान होने पर आप उसको मान लोगे कि ये सद ग्रंथ है। अब आप मैंने कहा कि जरा सा भी अगर लिखा होगा तो क्या वो सद ग्रंथ होगा? सच्चा ग्रंथ होगा। तो आपने कहा नहीं जरा सा भी पे नहीं होगा। तो मैंने पूछा कितना पे होगा? इसका कुछ नहीं है। इसका मतलब कि हम लोग आपके पीछे पीछे चलते रहे। आंखों पर पट्टी बांध के आप कह दो ये सद ग्रंथ है तो हम उसे सद ग्रंथ मान ले। आप कह दो ये सद ग्रंथ नहीं है। झूठा है तो हम उसे ना माने क्योंकि आधार तो आप बता नहीं रहे हो। नियम तो आप बता नहीं रहे हो।

00:43:48:00 चलिए आप बता दीजिए कि ग्रंथ किसे कहा जाता है? ग्रंथ ग्रंथ बता दीजिए आप। आप बता दीजिए। इसके बाद चर्चा शुरू होगी और यह बेफालतू का इतना लंबा चौड़ा 40 45 मिनट विवाद हो गया। इसके लिए कोई फायदा नहीं हुआ। आप बता दो बातें करेंगे तो हमें यही चर्चा समाप्त करनी होगी। नहीं नहीं आप आपके हिसाब से जो बेफालतू है आपके हिसाब से जो बेफालतू है वो मेरे हिसाब से नहीं है। मेरे हिसाब से जो कचरा है वो आपके हिसाब से कचरा नहीं है। मैं तो नहीं बोल रहा कि रामपाल कचरा है। मैं तो नहीं बोल रहा वो संडास है। मैंने बोला क्या?

00:44:28:21 आप बोल दीजिए कि मैं आपका मान रख रहा हूं। मैं आपका मान रख रहा हूं कि नहीं रख रहा हूं? तो आप यह क्यों कर रहे हैं? बेफालतू में आपने खर्च कर दिए। आपको लगता है ये बेफालतू में खर्च हुए। क्योंकि आपके पास उत्तर ही नहीं है इन तीनों चीजों में से किसी का। भाई धर्म सुनो धर्म पवित्र सद ये विशेषण आपने जो लगाए हैं किसी भी शास्त्र को मानने के उसी विशेषण का जो आपका आधार है उसी विशेषण का जो आधार है आपका और जो आपने बताया वो खुद कट जाता है। आपने कहा कि जो संत के द्वारा होगा वो होगा मगर कुरान वाला लिखने वाला संत नहीं है। आपने कहा कि जो क्या कहते है जिसमें भगवान की ओर जाने की बात लिखी होगी जरा सी भी भले ही उसमें उल्टी लिखी हो तो वो जो है वो सद ग्रंथ कहलाएगा फिर मैंने कहा ये सद ग्रंथ है आपने कहा नहीं आप अपनी मनमर्जी चला रहे है जिसको जहां मानना है मान ले रहे हैं नहीं मानना नहीं मानना उसका कोई सिद्धांत नहीं है मैंने आपसे ये तक पूछा कि कितना परसेंट होने पे आप उसको सद ग्रंथ कह दोगे तो आपने कहा इसका कोई वो नहीं है हिसाब तो यही हुआ कि जिस पर हम उंगली रख देंगे ये बच्चों ये है सद ग्रंथ मान लेंगे और जो बच्चों ये सद ग्रंथ नहीं है नहीं मानेंगे भाई बात खत्म

00:45:39:25 यही है ना शास्त्र सम्मत भक्ति चलिए अब मैं आपसे इस चैप्टर को क्लोज ही कर रहे है क्लोजिंग की ओर है मैं अब आपसे ये पूछ रहा हूं कि आप इसको क्लियर कर लीजिए कि सद ग्रंथ क्या है जो आप बताना मैं वही क्लियर कर रहा हूं मैं वही क्लियर कर रहा हूं आगे बढ़े मैं वही क्लियर कर रहा हूं कि आपके हिसाब से फिर झूठी किताब कौन सी होगी? अगर जिसमें सच और झूठ दोनों है वह भी सद ग्रंथ है तो असद ग्रंथ कौन सा होगा?

00:46:17:22 अब ये बताइए आप अरे हमने तो कहा जिसका एक एक शब्द बिल्कुल अक्षरस सत्य है। हमारे लिए वो सद ग्रंथ है। आपके लिए वो भी सद ग्रंथ है जिसमें झूठ भी है। ये अंतर है हमें। हम ढोंग नहीं करते। हमारे लिए कुरान सद्ग नहीं है। पवित्र नहीं है। संत के द्वारा दिया नहीं है। हम ढोंग नहीं करते। अब आप देखिए देखिए मैंने आपको अपनी परिभाषा कितनी देर लगी मुझे बताने में? ना तो मैंने चेंज किया ना उसको बदला। फटाक से बताया। अब आप मुझे बता दीजिए कि अगर जिसमें झूठ और सच दोनों है वो भी सद ग्रंथ है तो असद ग्रंथ किसे कहेंगे? मन स्मृति को आप सद मानते हैं। ये विषयंतर मत मैंने अभी आपको आपसे आपकी परिभाषा पूछी। आपने मुझसे पूछी मैंने बता दी। आपने आपकी परिभाषा पूछ रहा हूं। आपका उत्तर हम दे रहे हैं। आप यह बताइए कि मनो को आप उत्तर दीजिए। देखिए जब ट्रेन में कोई व्यक्ति बिना टिकट पकड़ा जाएगा तो वह यह नहीं कहेगा कि भैया वो भी तो बिना टिकट है। आप अपना टिकट बताइए। आपकी परिभाषा क्या है वह बताइए। आपका टिकट ही पकड़ रहे हैं हम। आप बताइए क्यों आप मेरा टिकट क्यों पकड़ रहे हैं? अभी आपसे आपका टिकट मांगा जा रहा है। आप आपके पास

00:47:32:24 टिकट है मेरे को सुनिए सुनिए सुनिए सुनिए ऐसा है। ये क्यों हो रहा है? ये क्यों हो रहा है? इसको मैं बता दूं। जब हम मनुस्मृति की विवेचना पे जाएंगे तो क्या होगा कि वो एक अलग ही चैप्टर खुल जाएगा। फिर हम उसमें उसकी विवेचना करते रहेंगे। फिर हम उसमें जब हम बात एक मिनट जब हम उसमें बात कर रहे होंगे तो फिर उसमें कोई तीसरा अरे भाई सुन लो उसमें फिर कोई तो ऐसे निर्णय नहीं होगा क्योंकि हम जब भी किसी किसी भी विषय को खत्म नहीं कर लेंगे तब तक हम दूसरा विषय खोलते चले जाएंगे निर्णय कहां से आएगा तो आप मुझे ये बताइए फिलहाल मैंने आपसे आपकी परिभाषा पूछी आपने मेरे से पूछी मैंने आपको बता दिया हमारे लिए सद ग्रंथ पवित्र ग्रंथ धर्म ग्रंथ वो है जिसका एक भी जो वो है शब्द वो गलत ना हो वो झूठ ना हो वो हमारे लिए सद ग्रंथ है पवित्र ग्रंथ है धर्म ग्रंथ है और वह परमेश्वर की प्राप्ति कराता हो परंपरा प्राप्त आचार्यों द्वारा प्राप्त हुआ हो एक मिनट थोड़ा लाइन पर रहिएगा एक कोई है बार-बार कह रहे हैं कि आप रामपाल के शिष्यों को टारगेट करते हैं भाई साइंस जर्नी और ह्यूमन विद साइंस को हमारा नंबर दे दीजिए वो अगर मनुष्य के मोक्ष की बात करते हैं तो हम उनको अपना सिद्ध कर देंगे जाके दे दीजिए एक आया था साइंस

00:48:47:25 जर्नी वाला कह रहा था कि मैं चोरों की तरह कायरता पूर्वक ही बात कर पाऊंगा। हमने कहा नहीं अगर माता जी का निष्ठा पूर्वक दूध पिया है तो आप चेहरे के साथ आकर के बात करिए। हमसे फोन मिलाइए हमारे लिए। हम बात करेंगे आपसे। तो ये संदेश आप उन्हें दे दीजिए कि शिवश जी से आप बात करिए। जब समय मिलेगा तो उनका प्रतिकार भी किया जाएगा। हम बोलिए गणेश दास जी। हम आपसे जो प्रश्न किए उसका थोड़ा सा बता दीजिए फिर चर्चा आगे बढ़ेगा। हमने प्रश्न किया कि जो मनुस्मृति है उसको आप सब ग्रंथ मानते हैं क्या उनका लिखा हुआ सत्य है? बिल्कुल तो मनुस्मृति के अध्याय पांच का श्लोक 35 में क्या कहता है?

00:49:43:27 क्या कहता है बताइए? पढ़िए। विधि नियुक्त होने पर जो मनुष्य मांस नहीं खाता वह मरने के 21 जन्म तक पशु होता है। क्या ये सही लिखा है? अरे भाई मेरी बात को समझिए। देखिए पहली बात तो ये मैं सिद्ध कर दूंगा कि ये सही लिखा है। मेरी बात समझिए। मेरी बात समझिए भाई साहब। मेरी बात समझिए। मैं इसको सही मानता हूं, गलत मानता हूं। यह एक अलग चीज है और मुझे इसको सही सिद्ध करना पड़ेगा। एक अलग चीज है। मैं इसको सद ग्रंथ तब कह रहा हूं जब इसके एक एक शब्द को मैं सही मानता हूं। आप सद ग्रंथ उसको कह रहे हैं जिसमें झूठ भी है, गलत भी है। उसको भी आप सद ग्रंथ कह रहे हैं। मैं इसके लिए लडूंगा। आप लड़िए ना उन चीजों सुनिए। मैं इसके लिए लडूंगा। हारू या जीतू वो एक अलग बात है। मैं इसके लिए लडूंगा कि इसमें ये जो बात है सही लिखी है। मैं लडूंगा। आप लड़िए उन चीजों के लिए जो चीजें आपको झूठ बोलनी पड़ रही गलत कहनी पड़ रही उन चीजों के लिए लड़िए। यह हमारा हमारा सुनिए हमारा मानना ये मैंने मैंने आपको ये नहीं कहा कि मैं मैंने आपको यह नहीं कहा अभी कि मैं सही हूं या आप सही है क्योंकि उसी बारे में तो हम यहां आए हैं। कौन सही है? सुन लीजिए। सुन लीजिए सुन लीजिए भाई साहब। सुन लीजिए।

00:50:59:13 हम खुद यहां इसीलिए आए हैं कि कौन सही है और कौन गलत है। ठीक है? हम लोग यहां पर इसीलिए आए हैं। तो यह बातें जिनको मैं जिन ग्रंथों को मैं सही मानता हूं उसमें मेरा कहना है एक एक शब्द हम सही मानते हैं। वो भाई मेरा मानना है कि इसमें जो लिखा है वो सब सही है। आपका मानना है कि आप उन ग्रंथों को भी सद ग्रंथ कहते हैं जिसमें कि झूठ मिला हो। बात इस पर हो रही है कि हमारा सिद्धांत क्या है? किसी ग्रंथ को सही अथवा गलत मानने का। अब हम आपको प्रमाणित कर रहे हैं जो मैंने कहा था कि ग्रंथ में झूठ भी हो सकता सही भी हो सकता है। जैसे कि इस मनो स्मृति में अध्याय पांच श्लोक अरे भाई तो आप ये बोलो आप ये बोलो ना कि हां मैं उसको भी मानता हूं जिसमें झूठ भी होगा उसको भी मैं सद ग्रंथ मानता हूं। ये बोलो ना यार। पता नहीं क्यों इधर उधर भाग रहे हो। बोल दो ना कि मैं उसको भी सद ग्रंथ मानता हूं जिसमें सच और झूठ दोनों लिखा हो। सुनिए आपके हमारी बात को पहले सुन लीजिए। के बीच में आप नहीं बोलिएगा थोड़ा सा बोलने दीजिए बोलिए आपने कहा कि सद ग्रंथ वो होता है जिसका अक्षर सु अक्षर सत्य होता है मनोस्मृति अध्याय पांच श्लोक 35 में कहा गया है कि जो मांस

00:52:14:19 नहीं खाता है वो 21 जन्म तक नरक में जाता है तो आप अरे मेरे भाई मनुस्मृति में कहां पे गलत है कहां सही है और वो आपके और मेरे बीच में वो डिबेट का विषय है। अभी मैं बात यह कर रहा हूं कि आपका क्या आधार यही है जिसमें झूठ और सच दोनों होगा। उनको भी आप सद ग्रंथ कहेंगे। मैंने आपसे यह पूछा है। मैंने आपसे पूछा है मेरे मैंने आपसे पूछा है भाई साहब कि क्या आपकी परिभाषा किसी को सद ग्रंथ कहने की यह है कि उसमें झूठ और सच दोनों लिखा होगा वो सद ग्रंथ है क्या आपकी ये परिभाषा है भाई साहब ये एक अलग विषय है कि मनुस्मृति के एक एक शब्द को मैं सही सिद्ध करूंगा कि नहीं करूंगा वो एक अलग विषय है। मांस खाना सही है कि नहीं है? मेरा बात सुन लीजिए। हां मैंने कहा कि ग्रंथ में झूठ और सही दोनों ही बातें लिखी होती है। जैसा कि मनो स्मृति अध्याय पांच श्लोक 35 में गलत पद लिखा हुआ है फिर भी वो सद ग्रंथ आपको सुनिए ये आपको गलत लग रही है। मुझे गलत नहीं लग रही। पूरे दुनिया को तो गलत लग रहा है। मुझे गलत लगवाइए। मुझे गलत लगवाइए। एक ही जन्म तक नरक कैसे जाएगा? सुनो सुनो सुनो सुनो सुनो सुनो सुनो। मुझे

00:53:29:25 गलत नहीं लग रही है। उसके पीछे कारण है। आपने कभी कोई दवाई खाई है क्या? क्या बोले? आपने कभी कोई दवाई खाई है क्या? हां खाया है। कभी कोई ऐसा कैप्सूल खाया। आपको मालूम है कैप्सूल वगैरह बनते टाइम पशुओं की चर्बी यूज़ होती है। उसमें नहीं हो रहा है। उसमें साफसाफ दिखाई आप मेरी बात का जवाब दीजिए। आप मेरी बात का जवाब दीजिए। उसमें आप मेरी बात का जवाब दीजिए। हमको जवाब दे रहे हैं। लेकिन आप जवाब नहीं कैप्सूल चला क्या कमी अरे भाई साहब अच्छा केवल वो श्लोक पढ़ोगे वो श्लोक पढ़ोगे कि आगे पीछे के सारे श्लोक पढ़ोगे आगे पीछे का भी पढ़ा दीजिए उसमें देखिए कहां लिखा है कि कैप्सूल कैप्सूल में मिलाकर के जो उसी श्लोक में लिखा हुआ है कि जो मनुष्य विधि युक्त मांस नहीं खाता है विधि युक्त मांस यानी कि विधि के अनुसार अब विधि क्या है यानी कि धर्म विधि क्या है यानी कि धर्म यानी जो धर्म के अनुसार मांस नहीं खाता है वो व्यक्ति नरक में जाता है। यानी कि यानी कि यहां पर यह बताया जा रहा है कि जब आपको मांस खाने की आवश्यकता भी पड़ी तो आपने अगर धर्म युक्त नहीं खाया। अगर आपने धर्म युक्त नहीं खाया तो आप 21 जन्मों

00:54:45:03 तक ऐसा ऐसा होगा। ये मैं सही मानता हूं। आप नहीं मानते वो आपका आउटलुक है। आप नहीं मानते वो आपका आउटलुक है। अब भाई साहब मेरी बात मेरी बात समझिए। इससे विषयंतर होगा। मैं इस चैप्टर को रखूंगा। लिख लीजिए। इस चैप्टर को मैं आपके सामने सही सिद्ध करूंगा। मुझे आप अपनी ये जो परिभाषा है क्या यही है जिसमें झूठ भी होता है उसको भी आप सद ग्रंथ मानते हैं। आप अपनी परिभाषा बता दीजिए। भाई साहब आप अपनी परिभाषा बता दीजिए। आपकी परिभाषा यह है। मैं इसको गलत नहीं मैं इसको मैं इसको गलत नहीं मानता हूं। भाई साहब आप विषय करेंगे बात आगे नहीं बढ़ पाएगी। हम में बहुत अच्छी-अच्छी बातें हो सकती है। हम में बहुत अच्छी बातें हो सकती है। आप विषयांतर मत करिए। हम इस चैप्टर को लेंगे अभी नहीं क्योंकि अभी चैप्टर यह चल रहा है। क्या आपकी परिभाषा यह है? आप अपनी परिभाषा यह बताइए कि क्या आपकी परिभाषा यह है जिसमें सच और झूठ दोनों होगा। क्या आप उसको मानते हैं कि वो सर ग्रंथ है? मैं क्लियर कर रहा हूं भाई साहब। ये हमारे पास बहुत सारे टॉपिक है। सारे टॉपिक्स को अभी ले आएंगे। कोई टॉपिक क्लियर नहीं होगा। इसलिए मैं आपसे एक-एक करके चल रहा हूं। एक-एक करके एक बात पूरी हो फिर हम आगे चल। क्या आपके अनुसार सद ग्रंथ वो है जिसमें झूठ और

00:56:00:04 सच दोनों ये तो हजार बार बोल दिया कि हां ऐसा भी होता है तो मैंने वहां पर ये प्रश्न किया कि तो फिर आपके हिसाब से झूठी पुस्तक कौन सी होगी? झूठी पुस्तक वही होगी जो आप दिखा रहे थे। अरे उसकी उसका फीचर्स तो बताओ कि उसमें क्या होगा क्या नहीं होगा जिसके कारण हम उसे झूठी कहेंगे। भाई एक एक जो झूठी गवाही देने वाला चोर है सुन लीजिए सुन लीजिए उदाहरण बता दूं एक जो झूठी गवाही देने वाला चोर है वो भी दिन भर में कभी ना कभी कोई ना कोई सच्ची बात कहेगा तो क्या उसके कारण हम उसको सच्चा सच्चा व्यक्ति माने एक जो व्यभचार करने वाली जो स्त्री है वो भी कभी ना कभी कुछ ऐसे कार्य करेगी जो व्यभचार ना हो तो क्या हम उसके कारण उसको पवित्र कहे एक जो व्यभचार करने वाला पुरुष है वो भी कभी ना कभी ऐसे कार्य करेगा जो कि व्यभचार ना हो तो क्या इसके कारण हम उसे पवित्र पुरुष कहे एक जो झूठी थाली है जिसमें एक और झूठा डला हुआ है उसमें भी कहीं ना कहीं साफ सुथरा खाना रखा होगा तो क्या उस कारण से हम उसको पवित्र थाली कहे तो मेरा प्रश्न यही

00:57:15:08 है कि अगर सच और झूठ दोनों बातें करने वाला आपके अनुसार असद ग्रंथ है तो फिर असद ग्रंथ का परिभाषा क्या है आपकी असद ग्रंथ क्या है देखिए हम जब बोलेंगे तो हमको बोलने का समय दीजिएगा। बीच में आप बोलने लगते हैं तो हम बोल नहीं पाते हैं। बोलिए पहले बता दिया ग्रंथ में दोनों ही बातें होती है। धर्म के विरुद्ध भी लिखा होता है। कुछ धर्म के युक्त तो होता ही है क्योंकि ग्रंथ वही होता है जो धर्म के अनुसार लिखा हो। इसी बात को पुष्टि करने के लिए हमने एक श्लोक लिया मनुस्मृति अध्याय पांच श्लोक 35 का भाई साहब देखिए बात ये है कि आप आप जब जब मनुस्मृति बोलते हैं तो उसमें मुझे इंटरप्ट इसलिए करना पड़ता है कि वो चैप्टर ही अलग हो रहा है मैंने आपसे आपकी परिभाषा पूछी है परिभाषा आप अपनी परिभाषा बताओ अपनी आप क्या मानते हो मैं आपसे पूछ रहा हूं आपकी परिभाषा क्या है बस वो बता दो उसमें इतनी उसमें इतनी दिक्कत क्यों हो रही है आप क्या मानते हो असद ग्रंथ किसे कहोगे? बस पहले सद ग्रंथ किसे कहते हैं? इसका तो बोलने ही नहीं दे रहा है। आपने बोल तो

00:58:30:12 दिया सद ग्रंथ आपने बोल तो दिया सद ग्रंथ उसे कहते हैं जिसमें सच्ची झूठी दोनों बात हो मगर वो भगवान की बात कर रहे हो। आप मनुस्मृति का जो व्याख्या करने लगे ये जो बोलने दिए उसमें क्या भाई साहब देखिए विषयांतर हो जाएगा। मैं आपसे पूछ रहा हूं आपकी असद ग्रंथ की परिभाषा क्या है? विषयंतर आप कर दीजिए प्रश्न की परिभाषा क्या है भाई साहब भाई साहब असद ग्रंथ की परिभाषा क्या है असद ग्रंथ की परिभाषा क्या है भाई साहब चलिए मैं इसको मैं इसको थोड़ा मैं इसको थोड़ा क्लियर कर दूं आप एक बात बताइए कि भगवत गीता आपके लिए सद ग्रंथ है कुरान भी सद ग्रंथ बाइबल भी सद ग्रंथ है। जी। और ये ये भी सद ग्रंथ है। गुड। बहुत बढ़िया। अब इसमें कोई बात झूठी लिखी है क्या?

00:59:34:24 नहीं। हां। यानी कि जिसमें केवल सच्ची बातें लिखी है वो भी सद ग्रंथ है। जिसमें झूठ और सच दोनों लिखा है वो भी सद ग्रंथ है। और असद ग्रंथ की परिभाषा हम बताएंगे नहीं। इसमें सारी बातें अगर ये सद ग्रंथ है जिसमें सिर्फ आपके हिसाब से सच लिखा है। तो फिर ये भगवत गीता सद ग्रंथ कैसे है जिसमें झूठ भी लिखा है। वही तो मैं पूछ रहा हूं। इसमें केवल सच लिखा है तो फिर इसका नाम कुछ और होना चाहिए ना। यह सद ग्रंथ हो गया। वो ग्रंथ हो गया। यही तो भगवत गीता क्या हुआ? भगवत गीता क्या हुआ? जिसमें कुछ कुछ बातें झूठी है। भगवत गीता ग्रंथ हुआ। ये जो दिखा सद ग्रंथ हुआ और बताओ। हां तो भगवत गीता है। कुरान वगैरह सद ग्रंथ नहीं है ना।

01:00:26:00 एक ही बात तो एक बार 100 बार बोलने से कोई फायदा भगवत गीता ग्रंथ है और यह सद ग्रंथ है यानी कि भगवत गीता सद ग्रंथ नहीं है। चलिए अच्छा आपको जो बता रहे थे उस पर क्या हुआ? हां बोलिए अनी एक एक मिनट हां अनी जी बोलिए ये कभी कभी दोहरी बात भी कर ले रहे हैं ना इसलिए दिक्कत हो जा रही है भाई इसमें बात है क्लियर बोलिए भाई अनीश जी आप देखो ये व्यक्ति क्या कह रहे हैं कि ये इसमें हर बात सच है ये भी सद ग्रंथ है जिसमें मिक्स है वो भी सद ग्रंथ है अगर ये सद ग्रंथ है अगर गीता अगर गीता सद ग्रंथ है तो इसका नाम कुछ और होगा ना फिर जिसमें एक एक बात सत्य है। ये इनकी ये इनका क्रिया चरित्र है जो मैं जनता के सामने लाना चाहता हूं। गीता कुरान वेद बाइबल को ये सद ग्रंथ नहीं मानते हैं। ये ढूंढ करते हैं। दिखावा एक मिनट भाई साहब ये दिखावा करते हैं कि हम उनको भी सद ग्रंथ मान रहे हैं। जिसको सद ग्रंथ मानते हैं। फिर उसके एक भी शब्द

01:01:41:08 पर अविश्वास नहीं होता है। [संगीत]

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A: AHVAAN - Call Of Dharma Video 1:01:56 · 03 Jun 2025

बिन पेंदी का लोटा -यह कहावत रामपाल के चेलों पर सही बैठती है #Rampalexpose

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B · Live रामपाल का ज्ञान है या अज्ञान #santrampaljimaharaj #तत्त्वदर्शीसन्त
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